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Swami Vivekananda Great Summer ·

भव्य ग्रीष्म: रिजली मैनर में स्वामी विवेकानन्द 6 Sep 2024

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ओ स्थापक च धर्मस्य सवम स्वरूप अवतार नायते स्वामी विवेकानंद सेकंड टाइम जब विदेश में जाते हैं तो रिचली मैनर में रुकते हैं वह कुछ महत्त्वपूर्ण मधुर नों की स्मृतियां मेरी लुईस ने स्वामी विवेकानंद इन द वेस्ट न्यू डिस्कवरीज जो पुस्तक माला है उसके फिफ्थ वॉल्यूम में उसको पूरा लिपिबद्ध किया है जिसका कि हम थोड़ा सा पाठ कर रहे थे हमने देखा कि किस तरह से स्वामी जी की दिनचर्या चलती है सुबह को लिटल कोटेज बोलक के रिजली मैनर तो एक बड़ा सा कैंपस था उसमें लिटिल कॉटेज बोलकर के एक घर था एक ब था जहां पर स्वामी जी को रुकने के लिए दिया गया था स्वामी जी और रयान जी दोनों वहां पर रहते थे तो सुबह को स्वामी जी प्रातः भ्रमण के लिए मॉर्निंग वॉक के लिए लिटल कॉटेज से निकलेंगे फिर कैसिनो बोल कर के अन्य एक बिल्डिंग था वहां से पसार होकर के कैंपस जो है वो पूरा हरियाली थी पूरे कैंपस में पूरा रिजली मेनर जो कैंपस था वहां पे तो उसमें टहल करके फिर गांव का जो रास्ता है उससे गुजरते हुए रास्ते के आखिर में एक पेड़ था ओक का एक पेड़ था उसके नीचे में बैठ कर के ध्यान करेंगे और फिर और इतना नियमित रूप से उस पेड़ के नीचे बैठ के ध्यान करते थे स्वामी जी कि उस पेड़ का नाम दे दिया गया था स्वामी जी पेड स्वामी जी का ओक तो इस तरह से वो वहां से ध्यान करके फिर वो एक होटल था छोटा सा रेसिडेंशियल वहां पर जाते थे वहां पर कुछ बच्चे उनके परिचित 2 साल से लेकर के 6 साल की उम्र तक उनके साथ में स्वामी जी खेलते थे फिर वापस आते थे रिजली कैंपस में वहां पर हो सकता है कि टेनिस खेले या तो फिर गोल्फ खेले या तो फिर क्रॉकेट बोल कर के एक दूसरा एक खेल है वह सब खेल खेलेंगे दो कभी-कभी रामे में बैठ कर के सभी उनके मित्रों के साथ में गप लगाएंगे तो गप लगाने की जो वो कहानियां उनकी चलती ही जाएगी चलती ही जाएगी कभी-कभी वहां पर सोफा था उस बैठक कक्ष में उस बैठक कक्ष के सोफा के ऊपर में जैसे कि एक छोटे बच्चे की तरह जैसे कि एक इनोसेंट छोटा बच्चा होता है पूरे आराम से सो जाते थे स्वामी जी के जीवन में वैसे ही नींद ज्यादा नहीं थी तो यहां पर घनिष्ठ मित्रों से घिर कर के एटलीस्ट उनको अच्छे से नींद आती थी तो ये एक वहां पर विश्राम करते थे फिर आखिर में दोपहर के भोजन के बाद बारे में हमने देखा कि वैसे तो धनी लोगों के घर पर ब्रिटेन हो अमेरिका हो यूरोप हो जब भोजन जब होता है तो एक फॉर्मल एक होता है इवेंट उस तरह के कपड़े पहने जाते हैं वस्त्र पहने जाते हैं डिनर जैकेट डिनर गाउन वगैरह और फिर सब लोग एक साथ में मिलकर के खाना खाएंगे वो जो नौकर भी होते हैं परोसने वाले वो लोग भी उस तरह के ड्रेस में सज्जित रहते हैं किंतु यहां पर रिजली मैनर में सब कुछ इनफॉर्मल था क्योंकि स्वामी जी वहां पर थे स्वामी जी को ज्यादा फॉर्मेलिटीज पसंद नहीं थी उसके बाद में किंतु यह डिनर के बारे में एक सुंदर एक कहानी है जो कि अभी हम देखेंगे पहले तो स्वामी जी कहां बैठे थे वहां पर जो गृहिणी थी मने घर की मालकिन उसका जो सबसे प्रोमिन सबसे प्रेस्टीजियस प्लेस उसका होता था तो यहां पर वो थी बेटी लगेट जो कि स्वामी जी की डिवोटा थी स्वामी जी की फ्रेंड थी उसके राइट हैंड साइड पर जो कि जो गेस्ट ऑफ ओनर बैठने चाहिए तो गेस्ट ऑफ ओनर की सीट पर बैठते थे स्वामी विवेकानंद और स्वामी जी को परफेक्ट फ्रीडम था कि जब भी चाहे खड़े होकर के चले जा सकते हैं किंतु बेटी लगेट उसके पास में एक ट्रिक थी कि किस तरह से स्वामी जी को डिनर टेबल पर बिठा करके रखे क्योंकि सभी लोग जाते थे इस घर में जितने भी गेस्ट थे सभी तो स्वामी जी के परिचित थे और स्वामी जी इनके साथ में विश्राम कर पाए उनके साथ में रह कर के इसलिए तो सबको इकट्ठा किया गया था तो सबकी इच्छा थी कि स्वामी जी का स्वामी जी के साथ में और थोड़ा सा समय बिताए स्वामी जी और थोड़ा सा उनके साथ में रहे तो बेटी लगेट के पास में एक ट्रिक थी कि स्वामी जी डिनर टेबल के ऊपर में से खड़े होकर चले ना जाए इसके लिए तो वो क्या थी वो हम देखते हैं स्वामी जी सिटिंग ऑलवेज ऑन मिसेस लगेट राइट व वाज ट वास परफेक्टली एट लिबर्टी टू एक्सक्यूज हिमसेल्फ फॉर ए स्मोक फॉर ए वोक स्वामी जी बेटी लगेट के राइट हैंड साइड पर प्रथम सीट थी उसके ऊपर में बैठते थे और उनको पूरा फ्रीडम था जब भी चाहे वह स्मोकिंग करने के लिए या तो फिर वॉकिंग करने के लिए खड़े होकर के जा सकते हैं स्वामी जी स्मोक करते थे यह बात ज्यादातर लोगों को पता ही होगी कभी-कभी कोई यह सब सुनता है तो उनको बड़ा आश्चर्य होता है कि अरे स्वामी जी यह सब क्या कर थे स्मोकिंग इज इजरियल टू हेल्थ किंतु यह सब अवेयरनेस जो है वो आजकल नए जमाने की है दूसरा क्या है पता है आजकल स्मोकिंग इतना इजरियल क्यों है क्योंकि वो टोबेको जो होता है वो प्रोसेस टोबेको होता है यदि आप उसके प्योर फॉर्म में टोबेको जद खाते हैं तो इतना वो डेंजरस नहीं रहता जैसे कि आजकल सभी जगह प ये प्रोसेस फूड है यह प्रोसेस ड्रग्स है ये जैसे कि वो एक्स्टेक्स्ट निकाल कर के वो बनाते हैं ना जैसे कि तमाकू का पेड़ है अ उसके जो पत्ते हैं पत्तों को जद आप चिबा जाएंगे तो इसका एक मेडिसिनल प्रॉपर्टी रहता है किंतु आप उसको केमिकल प्रोसेस करके उसका वो जो एसेंस है टोबेको का वो निकाल देंगे और उसको कंसंट्रेटेड मात्रा में यदि आप खाएंगे तो दैट इज वेरी डेंजरस फॉर हेल्थ जैसे कि शुगर है जैसे ये शुगर केन में से शुगर बनती है या शुगर केन है ये तो सब चीजों में से यदि आप शुगर केन यानी कि शरणी का रस पिएंगे तो इतना हानिकारक नहीं है किंतु उसको प्रोसेस करके जो चीनी बनाते हैं ट इज डेंजरस गुड इसीलिए कहते हैं डॉक्टर कभी-कभी कि चीनी से ज्यादा अच्छा है गुड़ खाना तो कोई भी चीज को आप नेचुरल चीज को जनरली आप नेचुरल अवस्था में जिसको आप देखते हैं उसके मेडिसिनल गुण होते ही होते हैं तो किसी भी तरह का औषधि हो पेड़ पौधा हो जनरली उसका इवोल्यूशन ही हुआ है एक दूसरे को सहाय करने के लिए अनटिल एंड अनलेस इट इ पोइजन अस जैसे कि तुरे के बीज वगैरह जो है तुरे के फूल वगैरह जो है जो कि पोइजन है उन सबको छोड़ कर के ज्यादातर पेड़ पौधे उसके पत्ते खाना फूल खाना कोई बुरा नहीं होता तो प्रोसेस करके आप यदि खाएंगे तो ट इज वेरी डेंजरस और उस समय में ज्यादातर थोड़ा सा नेचुरल टोबेको वगैरह ज्यादा चलता था आजकल प्रोसेस टोबेको यह प्रोसेस मेरवाना यह प्रोसेस ड्रग यह सब है प्रोसेस भांग इसलिए वह सब खाने से पीने से ज्यादा वह उसका नशा चढ़ता है और हेल्थ के लिए ज्यादा डेंजरस होता है तो स्वामी जी उस समय रूट वगैरह पीते थे उसमें ज्यादा कोई हानि नहीं थी और स्वामी जी जो कुछ भी करेंगे सब कुछ मॉडरेशन में करेंगे एक दूसरी चीज याद रखनी है कि प्रोसेस ना हो और यदि मॉडरेशन में लिया जाए तो कोई ऐसा हानि नहीं तो स्वामी जी को किंतु पूरा फ्रीडम था कि जब भी चाहे खड़ हो कर के वो बाहर में जाकर के स्मोकिंग रूम रहता था जहां पर लोग सब बैठ कर के पुरुष लोग स्मोकिंग कर सकते हैं तो वहां पर जाकर स्मोकिंग करे ना कि वो चलने के लिए टहलने के लिए चले जाए देर वास हाउ एवर अ वे टू होल्ड हिम किंतु एक तरीका था कि जिससे कि स्वामी जी को पकड़ करके बिठा दे सके स्वामी जी को अट्रैक्ट करके वहां पर बिठाया जा सके बिठाए रखा जा सके डिनर टेबल के ऊपर में अ वेरी क्विक वर्ड फ्रॉम लेडी बेटी ट शी बिलीव्ड देयर वास टू बी आइसक्रीम वुड ट हिम वुड टर्न हिम बैक इंस्टेंट एंड ही वुड सिंक इनटू हिस प्लेस विथ स्माइल ऑफ एक्सपेक्टेंसी एंड प्योर डिलाइट सेल्डम सीन ऑन द फेस ऑफ एनीबडी ओवर 16 जैसे ही स्वामी जी खड़े होंगे वैसे ही यह लेडी बेटी अब वो बड़े घर की स्त्रियों के के सामने लेडी या वो पुरुषों के सामने लॉर्ड ये सब शब्द लगते हैं तो जो भी है तो ये बेटी लेगे जैसे ही स्वामी जी खड़े होंगे बेटी लगेट कहेगी कि खाने के बाद में भोजन के बाद में सबको आइसक्रीम पोसा जाएगा आइसक्रीम है सबके लिए तो जैसे ही ये बेटी लगेट ऐसा कहेगी इमीडिएट स्वामी जी फिर से अपनी चेयर पर बैठ जाएंगे और एक नादान बच्चे के चेहरे पर जो हास्य दिखाई देता है वो हस्य स्वामी जी के चेहरे पर प्रस्फुटित हो जाएगा यहां पर लिखा है इस तरह का हस्य जो कि 16 साल के बड़े उम्र के लोगों के चेहरे पर कभी नहीं देखा जाता क्यों ऐसा क्यों कहा है क्योंकि ये जब उम्र कम होती है जब यह संसार के झमेले में हम पड़ अभी पढ़ना बाकी है संसार की जवाबदारी संसार के धोखे संसार का यह कष्ट यह सब जब तक चेहरे पर अपने सर पे नहीं आता तब तक हमारा मन एक नादान मन रहता है एक इनोसेंट मन रहता है और यह इनोसेंट चेहरे की हासी अब ये 16 साल कहे हैं उस समय के 16 साल आजकल हमको कहना पड़ेगा 10 या 11 साल क्योंकि जैसे जैसे यह आजकल का समय भी ऐसा है ना आज ये जो सोशल मीडिया है यह टेलीकम्युनिकेशन के साधन है सब लोग आज अपने मोबाइल में बैठ कर के देखते हैं कि कहां पे वर हो रहा है कहां पे ये हो रहा है और सब तरह का फुटेज जो कि बच्चों को नहीं देखना चाहिए वो सब ये लोग बैठ कर के देखते हैं तो छोटी उम्र में इनोसेंस चला जाता है तो आजकल की भाषा में यदि कहेंगे तो 12 साल या 10 साल से बड़े किसी लड़के के चेहरे पर इस तरह की हासी नहीं दिखाई देगी इस तरह की शुद्ध मधुर इनोसेंट हास्य स्वामी जी के चेहरे पर प्रसारित हो जाता था जैसे कि एक छोटा बच्चा है व छोटा बच्चा बैठ कर के अपनी मां को बड़ा परेशान कर रहा है तो मां ने उसके हाथ में एक चॉकलेट या एक कैंडी थमा दी तो देख कर के वह कैसा उसका प्रस्फुटित हस्य मधुर उसका चेहरा हो जाएगा एकदम क्योंकि उसके बच्चे का आनंद यही सब छोटी-छोटी चीजों में उसको पता नहीं है कि यह कैंडी वगैरह छोटी-मोटी चीजें हैं यदि बड़े होंगे तो यह इससे कहीं और ज्यादा कुछ प्राप्त करना है जीवन में उसका इसी में आनंद है एक छोटी सी चीज मिली तो वह संतुष्ट हो ग तो वैसे ही स्वामी जी का है जैसे ठाकुर ने कहा था ना अभी यह सब पढ़ कर के हमको लगेगा कि स्वामी तो स्वामी जी तो सर्व त्यागी है तो ये आइसक्रीम को देख कर के इतने प्रलोभन कहां हो जाते हैं क्यों हो जाते हैं तो ठाकुर का वो जो बात है ना ठाकुर की बात की उन्होंने एक बार सोचा कि वह जरी वाले कपड़े पहनेंगे और उसके बाद में वह जो सिल्वर जिसका नल होगा इस तरह के खके में वो धुम्रपान करेंगे तो मथुर बाबू ने सब कुछ उनके लिए जुगाड़ कर दिया दिया वो जरी वाले पोशाक भी ले आए वो जो सिल्वर नल वाला जो हुक्का था वो भी उनके लिए ले आए और गद्दी तक ये सब की व्यवस्था कर दी उसके ऊपर में ठाकुर ने वो कपड़े पहन के वो धुम्रपान भी कर लिया और फिर जैसे ही ऐसा एक फूंक मारा वो हुक्के का इमीडिएट वो जो वासना उनके मन में जागृत हुई थी ये शेठ लोग जो देखते हैं ना सब राजा लोग शेठ लोग कैसे तकि और गद्दे प पैर के ऊपर में पेर चढ़ा कर के अच्छे से कपड़े पहन कर के वो भुका पीते हैं तो वो एक वासना जो जागृत हो गई थी तो एक फुके का फूंक मारा उसी में वो समाप्त हो गई वो जरी वाले कपड़े उठा करके जमीन पर फेंके उसके ऊपर में कूदना चालू किया उका फेंक दिया वो तकिया भी फेंक दिया और अपने मन को कहा देखो मन ये है जरी वाले कपड़े पहन के गद्दी तकिए प बैठ कर के उ का पीना ये इसका भी तुमने भोग कर लिया इसके लिए कहीं वापस ना आना पड़े इसके लिए जही कहीं मन के भीतर में बंधन ना रह जाए ठाकुर कहते है कि बड़े भोग जो होते हैं जीवन के जैसे कि काम कांचन के उसको संपूर्ण रूप से हमेशा के लिए जड़ मुड़ से त्याग करो और जो छोटे मोटे जो भोग होते हैं उसको भोग करके उसको छोड़ दो जैसे मराठी संत की कहानी है ये कहानी मैंने काफी बार पहले भी बताई है उनका मैं नाम भूल गया तो एक गांव में गए थे तो जैसे कि वह कीर्तन करते करते संत सब एक से दूसरे गांव जाते हैं तो भक्त लोग कैसे उनके लिए आहार भोजन की व्यवस्था करने के लिए बड़े ही तत्पर रहते हैं तो एक बड़े ही अच्छे भक्त के गृह से वहां की गृहिणी ने एक डिवटी ने उनके लिए खीर बना कर के भेजा तो जैसे ये संत ने खीर खाया उनको बड़ा ही अच्छा लगा कि अरे वाह इतनी अच्छी खीर है वाह बड़ा सुंदर इसका टेस्ट है किंतु जैसे ही उनको टेस्ट अच्छा लगा वैसे ही ये तो पाजी मन है तो मन के भीतर में यह लालसा भी जागृत हो गई कि हां यह खीर तो मैं बार-बार खाना चाहता हूं तो जैसा ही ऐसा हुआ तो उन्होंने कहा कि अरे इस प्रलोभन से तो मुक्ति पानी चाहिए कैसे मुक्ति पाएंगे दूसरे दिन वो डिवटी को बुलाया कहा कि मेरे लिए पूरा सा एक बड़ा सा ये बर्तन बना कर के पूरा हांडी भर कर के मेरे लिए खीर बनाओ तो वो भी बेचारी बड़ी खुश हो गई कि इन्होंने मुझे बना इतना मेरा सौभाग्य कि इनके लिए खीर बनाना अच्छा ठीक है वो पूरा ी भर के खीर लेकर आई और इस संत ने खीर खाना शुरू किया खाते ही गए खाते ही गए अब एक तो ह्यूमन लिमिट होती है कि आप खीर कितना खाएंगे उसके जैसे ही पेट भर के खाया वैसे ही वोमिटिंग की जीभ पे लग गया था वो भी उसके साथ में चला गया तो देखिए कि ये छोटी मोटी जो चीजें होती है अपने जीवन में उसको करके छोड़ देना है और जो बड़े-बड़े भोग होते हैं इसको संपूर्ण रूप से त्याग करना है तो यहां पे स्वामी जी का भी ऐसा है देखिए कि ये ट स्टर्डी के साथ में स्वामी जी का झगड़ा क्यों स्टार्ट हुआ था इट स्टडी देखता है कि स्वामी जी की लाइफ स्टाइल बड़ी ही लग्जरियस है बड़े अच्छे कपड़े पहनना उनको पसंद है बड़ी महंगी चिरू पीते हैं स्मोक करते हैं उसके बाद में खाने पीने में भी उनका बड़ा ही यह सब है कि यह खाना है वो खाना है अच्छा-अच्छा खाना और स्वामी जी के पत्र पढ़ेंगे तो देखेंगे कि स्वामी जी बार-बार बार-बार तो नहीं कुछ कुछ पत्रों में उन्होंने लिखा है भारत से अपने गुरु भाइयों को कि ये मूंग की दाल उड़द की दाल य मसाला यह सब वहां पर भेजो जिससे कि स्वामी जी वह अपने देश का खाना खा पाए स्वामी जी बड़े अच्छे खाना बनाते थे हमको पता है तो सब भारत से ये सब मसाला सब ये द्रव्य वगैरह सब जाएंगे तो स्वामी जी आहार बनाएंगे पकाए और सिर्फ अपने से खाएंगे ऐसा नहीं सबको खिलाएंगे भी सही वो जो वहां पर हमने देखा कि अभी देखेंगे कि कैलिफोर्निया में किस तरह से स्वामी जी टर्क स्ट्रीट स्लेट उनका कमरा था फिर दूसरे कैलिफोर्निया सैन फ्रांसिस्को वगैरह में तो जैसे ही क्लास पूरा समाप्त होता है वैसे ही दौड़ कर के खाना किचन में चले आते हैं वही अपने कपड़े पहन कर के वो स्वामी जी को पता है ना जब वैसे ही घर में रहेंगे भक्तों के घर में या इस तरह से फड़ा कर के घर पे तो वो जो जनरली एक ड्रेस पहना जाता है घर के भीतर में उस तरह का एक ड्रेस पहनते थे किंतु जब वो प्रवचन देने के लिए या क्लास देने के लिए जाते थे थे तो वो फॉर्मल कपड़े पहनते थे जिस तरह के कपड़े में स्वामी जी का फोटोग्राफ हम देखते हैं सर के ऊपर में पगड़ी है गेरवा कलर का या तो फिर येलो रेड कलर का कोट है क्रिम्सन कलर का फिर यह कमरबंद एक बांधा हुआ है तो यह सब बड़े ही फॉर्मल कपड़ों में स्वामी जी यह प्रवचन देते थे और यह कपड़े महंगे भी थे तो स्वामी जी करते क्या थे जैसे ही क्लास समाप्त हुआ वैसे ही किचन में दौड़े दौड़े आएंगे और कहेंगे नाउ वी विल कुक अभी हम खाना बनाएंगे ऐसा उस करके सीधा खाना बनाने में लग जाते थे और जोसेफाइन मैक्लाउड बड़ी अलर्ट रहती थी वो इमीडिएट स्वामी जी के पीछे पीछे आएंगी और स्वामी जी को डांट के कहेगी कि स्वामी जी पहले अपने कपड़े तो चेंज कीजिए इतने महंगे सिल्क के कपड़े हैं उसके ऊपर में वो जो स्वामी जी तो वगार करते हैं ना वो सब गिरेगा तो कपड़ा सिल्क का कपड़ा है नष्ट हो जाएगा इतने महंगे कपड़े हैं फिर ये धोना तो इन्हीं लोगों को है लेडीज लोगों को ही है स्वामी जी को कहा इतनी टेंशन है तो वो डांट के कहेगी फर्स्ट चेंज योर क्लोथ तो स्वामी जी कभी उनकी बात सुनेंगे कभी नहीं सुनेंगे तो यह सब पढ़ कर के व हमको लगेगा कि यह खाने के प्रति स्वामी जी का मोह कैसा है क्यों है किंतु यह सब देखिए कि इट स्टडी का भी जहां पर यह हो रहा था मिस अंडरस्टैंडिंग स्वामी जी का मन इस तरह से ब्रह्म भाव में निमग्न था ब्रह्म भाव में डुबा हुआ था ये छोटी छोटी वासना जद ना रखते तो उनका मन जमी पर रहता ही नहीं ठाकुर का जैसे था कि समाधि के बाद में समाधि भंग करने के लिए बीच-बीच में कहते थे मैं तंबाकू खाऊंगा मैं शौ शौच करने के लिए जाऊंगा मैं पानी पिऊंगा कुछ नाश्ता करूंगा ऐसा कुछ ठाकुर कहते थे जिससे कि उनका मन खींच कर के जमीन के ऊपर में आए तो इसके लिए देखिए कि दो हमारे पास में इसकी यह है रीजन है उसके हमारे पास में उसके उत्तर है कि यदि प्रश्न है कि स्वामी जी को आहार में इतनी रुचि क्यों थी वह भी अच्छे आहार में तो दो बातें हैं पहले तो छोटे मोटे भोग जो होते हैं उसको समाप्त ही कर देना चाहिए खा कर के और किंतु देखिए कि स्वामी जी के भोग लालसा वगैरह सब तो मिट गई थी जब उनको काशीपुर में समाधि प्राप्त हुई थी मीर विकल्प समाधि ठाकुर ने जब अपनी पूरी शक्तियां स्वामी जी के भीतर में संचारित कर दी तो उस समय स्वामी जी के ये जो जन्मा जन्म वैसे तो था ही नहीं तो भगवान शिव के जद अवतार थे वीरेश्वर शिव के तो कहां वो कामना वासना रहने वाली है किंतु फिर भी जैसे ठाकुर ही कहते हैं पंच महाभूत भादे ब्रह्म पड़े कादे अर्थात की पंच महाभूत के इस फंदे में पड़ कर के ब्रह्म भी बेचारे रो लेते हैं ब्रह्मण को भी वो पंच महाभूत कादा वो उनके लिए कष्टदायक होता है तो जैसे कि मां सीता का अपहरण हो जाने से भगवान राम रोए थे हालांकि पता था कि यह सब पहले से ही प्लान किया हुआ है रावण का वध करना है इसके लिए जैसे कि वो वहां पर वो अयोध्या में भगवान राम बैठे थे तो वो नारद मुनि जाकर के कहते हैं कि भगवान राम आपका तो अवतार ग्रहण करने का प्रयोजन ही यही है कि कंस का वध करे रावण का वध करे तो रावण वहां पर लंका में बैठ कर के मजे कर रहा है आप यहां पर राज्य कर रहे हैं तो फिर राम भगवान राम ने क्या उत्तर दिया उसके पुण्य होने दो समय आने दो फिर कहीं जाकर के उसके वध का उदयोग किया जाएगा तो पहले से ही यह सब प्री ऑर्डन था प्री प्लान था फिर भी मां सीता के अपहरण से भगवान राम रोए थे जैसे कि ठाकुर ने कहा है तो यह सब पंच महाभूत के इस शरीर धारण करके पृथ्वी पर आते हैं तो थोड़ा बहुत कर्म की एक रेखा जैसा एक रहता है तो वो संपूर्ण रूप से मिट जाए इसके लिए तपस्या और तप करके जब सिद्धि प्राप्त कर दे तो फिर यह कार्य करने के लिए जमीन पर रहना है कैसे भी करके उसके लिए फिर यह छोटी मोटी वासनाओं का धारण अच्छा यह जो एक बात अभी हमने देखी कि किस तरह से ठाकुर ने स्वामी जी के भीतर में अपना शक्ति संचार किया तो उसके रिलेटेड एक बहुत ही सुंदर एक दूसरी भी कहानी है यह यही इसी के भीतर में रिजली मैनर में ही आएगी आगे में आएगी थोड़ा सा मैं इसके बारे में बता दूं अभी कि जब स्वामी जी रिजली में मैनर से जाने वाले थे यह ग्रेट समर समाप्त होने वाला था और स्वामी जी को कर्मक्षेत्र में फिर से पदार्पण करना था कैलिफोर्निया जाकर के यह जो नया मैसेज हमने कल परसों देखा कि किस तरह से स्वामी जी का नया मैसेज रेडी हो गया है कैरेक्टर इज एवरीथिंग और अवतार ने ईश्वर ने पृथ्वी पर जन्म ग्रहण करके हमारे लिए बुरा ही किया है हमको एक तरह से डिपेंडेंट बना दिया है हमको एक तरह से पंगु बना दिया है तो यह स्वामीजी का नया मैसेज था यह नया मैसेज देने के लिए उनको एक नया एक प्लेग्राउंड चाहिए था एक नया पूरा फलक चाहिए था वह उनको मिला कैलिफोर्निया में कैलिफोर्निया में जो फ्रीडम ऑफ माइंड था लोगों के भीतर में जो आत्मविश्वास था वो आत्मविश्वास इतना प्रचंड था कि यसे लोग ही इस तरह के पावरफुल मैसेज को ग्रहण कर पाते तो इसलिए स्वामी जी को कैलिफोर्निया जाना था किंतु उसके पहले जो आखिरी जो एक टना हुई थी रिजली मैनर में स्वामी जी ने मिसेस ओली बुड और निवेदिता इन दोनों को दीक्षा दी थी खास करके मिसेस ओली बुल को गिरवा वस्त्र प्रदान किए थे उस समय इन दोनों के सर पर हाथ रख के उन्होंने आशीर्वाद देते हुए कहा था व्ट वी हैव रिसीवड फ्रॉम ए वुमन वया आई एम गिविंग इट बैक टू यू विमन हमने जो एक स्त्री के पास से एक शक्ति के पास से जो प्राप्त किया है वो मैं आप दोनों स्त्रियों को वापस लौटता हूं इसके कहने का अर्थ क्या है इसके पीछे में ठाकुर को मां काली से आशीर्वाद मिले ठाकुर की जो साधना थी मां काली का दर्शन प्राप्त करने की मां काली का मां काली का साक्षात्कार करने की तो मां काली से ठाकुर को जो आशीर्वाद मिले वही आशीर्वाद ठाकुर ने स्वामी जी को दिए और वही आशीर्वाद स्वामी जी अभी मिसेस ओली बुल और यह निवेदिता को देते हैं और इसलिए स्वामी जी कहते हैं कि व्ट वी हैव वी अर्थात कि श्री रामा कृष्णा एंड स्वामी विवेकानंद व्हाट वी हैव रिसीवड फ्रॉम ए वुमन वी आई एम रिटर्निंग इट टू यू टू वुमेन अर्थात कि हम दोनों ने जो एक स्त्री के पास से प्राप्त किया वो मैं आप दोनों स्त्रियों को वापस लौटा दे रहा हूं तो ये देखिए कि कितना इंटरेस्टिंग ये घटना माला है कितनी इंटरेस्टिंग ये हानी है कि कहां पर वो ठाकुर को दक्षिणेश्वर में आशीर्वाद प्राप्त हुआ था और कहां यह दोनों विदेशी महिलाएं हैं जो कि स्वामी जी के पास से वही मां काली का आशीर्वाद पुनः ग्रहण करती है तो यह हो गई यह पूरी घटना चक्र वो कहते है ना कि वो कंप्लीशन ऑफ द सर्कल इस तरह से तो यहां पर आइसक्रीम के बारे में हमने देखा कि स्वामी जी जब भी खड़े होकर के जाना चाहते थे तो बेटी लगेट कहती थी कि आइसक्रीम है आप खाइए सबको आइसक्रीम मिलेगा ऐसा नहीं कि फिर वो भी वो बड़ी चालाक है ऐसा नहीं कि स्वामी जी को कहेगी स्वामी जी आप बैठ जाइए आइसक्रीम आ रहा है क्योंकि उनको पता है कि स्वामी जी का नेचर ऐसा रिबेलियस है कि यदि कोई उनको कुछ करने को कहेगा तो उल्टा ही करेंगे यदि उनको कहा जाएगा स्वामी जी आप आइसक्रीम खाने के लिए बैठिए तो फिर वो कहेंगे अरे मैं तो ब्रह्मण हूं आत्मन हूं मुझे आइसक्रीम का बंधन क्या है ऐसा कुछ उल्टा पुल्टा कुछ बोल देंगे तो इसलिए बेटर है कि बड़ी ही चालाकी के साथ में में स्वामी जी को बताया जाए कि अभी आइसक्रीम होने वाला है भोजन के बाद में और स्वामी जी अपने से ही जैसे वो बालकृष्ण को प्रलोभन करने के लिए मां यशोदा कैसे अपने हाथ में वो मक्खन का वो जो छोटी सी आंडी लेकर के घूमती थी वो यदि बालकृष्ण कोई नट तूफान करता है या उनकी बात नहीं सुनता है तो वो मक्खन भरी हांडी से उनको प्रलोभन करती थी तो यहां पे भी स्वामी जी को प्रलोभन करने का उपाय है उनको आइसक्रीम का प्रलोभन देना ही जस्ट लव्ड इट स्वामी जी को आइसक्रीम बहुत ही पसंद था एंड ही हैड ऑल ही वांटेड टू और उनको जितना चाहिए उतना उनको मिलता भी था बेटी लगेट उनको उतना देती भी थी ही पार्टिकुलरली लाइक चॉकलेट आइसक्रीम उनको चॉकलेट आइसक्रीम सबसे ज्यादा पसंद था मिस मैक्लाउड रिलेटेड इन हर मेम मिस मैक्लाउड ने अपने रेमसंस में लिखा है और क्यों स्वामी जी कहते थे बिकॉज आई टू एम चॉकलेट एंड आई लाइक इट क्योंकि मेरा कलर भी चॉकलेट जैसा है और इसीलिए मुझे चॉकलेट पसंद है यह गोरे लोगों का कलर गोरा होता है स्वामी जी भरत से गए थे तो ब्राउन कलर के थे ब्राउन कलर की जैसे चॉकलेट होती है तो स्वामी जी कहते हैं मेरा कलर भी चॉकलेट जैसा है इसलिए मुझे चॉकलेट पसंद है वुड से बट एटलीस्ट वंस अ वेरी लार्ज एंड लेबोरेटरी चली द फ्लावर्स एंड लाइट्स ऑन द टेबल वेर वंडरफुल एंड द लेडीज ऑल इन देयर लवलियस्ट गाउंस एंड ज्वेल्स किंतु एक दिन ऐसा हुआ था कि एक बड़ा ही इलब और फॉर्मल डिनर का आयोजन रिजली मैनर में हुआ था हो सकता है कि फ्रांसिस लगेट के कुछ मित्र उस दिन वहां पर आए होंगे तो बहुत सारे गेस्ट थे और अभी जैसे कि धनी लोगों के घर में अच्छा सा भोजन समारोह होना है तो वो लोग पैसा भी ऐसा ही खर्च करेंगे बड़ी ही सुंदर प्रकाश की बत्तियां लगाई हुई थी फ्लावर अरेंजमेंट थे जितनी भी स्त्रियां थी बड़े ही सुंदर वस्त्र पहने हुए थे पुरुषों ने भी ऐसे सुंदर वस्त्र पहने हैं वो सब खाने के जो कोर्स होते हैं फर्स्ट कोर्स सेकंड कोर्स थर्ड कोर्स वो भी बड़े ही लेबोरेटरी सब अरेंज किए गए थे तो जैसे कि कोई भी वहां पर आएगा जिसको कि यह सब चीजें देखने की हैबिट नहीं है या तो उन्होंने कभी यह सब देखा नहीं है वो बड़ा ही प्रभावित हो जाएगा यह सब चीजों से तो यह मोड स्टम है उसको य उसने इतना पैसा शायद जीवन में नहीं देखा होगा तो यह सब देख कर के वह बड़ी प्रभावित हो गई थी तो देखिए फिर उसके बाद में स्वामी जी क्या कहते हैं शी हैड बीन हाफ एंट्रेंस बाय ऑल दिस ब्रिलियंस एंड गेटी एंड शी रिमेंबर्ड ट स्वामी जी नोटिसिंग हर ब म्यूजमेंट ड शटर्ड इट विथ क्वाइट वर्ड थ्रू ऑल द नोइज एंड ल द नोइज ऑफ अदर टॉक डोंट लेट इट फुल यू बेबी ही हैड सेड वो बड़ा ही मोड स्टम बड़ी ही प्रभावित हो गई थी अंजित हो गई थी यह सब उन्हें जाह जलाली देख कर के चाक चिक्क देख कर के यह सब भव्यता देख कर के इतने सुंदर वस्त्र इतना सुंदर खाना इतना सुंदर अरेंजमेंट तो जैसे ही स्वामी जी ने देखा उसके चेहरे पर यह बड़ा ही ये इस तरह का भाव की जैसे कि वोह बड़ी ही चमत्कृत हो गई है स्वामी जी ने वो जोसे गुब्बारे में वो पीन मार कर के कैसे पंचर कर देते हैं वैसे ही स्वामी जी ने कहा इमीडिएट स्वामी जी ने हल्के से सुर से कहा उसको कि ये सब चीजों से कभी भी अंध मत होना यह सब चीजों से कभी भी मोहा मत होना इन सबके मोह में कभी मत फसना जैसे ही स्वामी जी ने ऐसा कहा वैसे ही उसका मोह बंग हो गया क्योंकि देखिए अभी हमको प्रश्न होता है कि स्वामी जी को तो ऐसा कुछ प्रोफाउंडली फिलोसॉफिकल कहना पड़ा होगा यदि किसी का मोह भंग करने के लिए उन्होंने तो एक बड़ा ही सिंपल सेंटेंस दिया क्या था यह सेंटेंस डोंट लेट इट फूल यू बेबी बच्ची तुम इन सब चीजों से मूर्ख ब मत बनना डोंट लेट इट फूल यू बेबी इतनी ही सरल बात कर दी किंतु इस सरल बात के पीछे में बात यह नहीं है कि स्वामी जी ने फिलोसॉफिकली कोई बड़ा ही प्रोफाउंड स्टेटमेंट दिया है यहां पर बात ऐसी है कि स्वामी जी के भीतर में ही फिलोसोफी जैसे कि जीवंत बन कर के रह रही थी यह दुनिया के प्रति विराग और ब्राह्मण के प्रति अनुराग उनके भीतर में सदेव सजीव बना रहता था वह स्वयं एक शार्प पीन की तरह थे जो कि यह मोह रूपी जो गुब्बारा हम बना कर के बैठे हैं उससे मोहा हो रहे हैं उस सब में वो पीन जैसे ही लगेगी वो गुब्बारा फट कर के कहां पर अदृश्य हो जाएगा तो जैसे ही मोड़ स्टम को देखा कि व ये सब चीजों से बड़ी प्रभावित हो गई है स्वामी जी ने सिर्फ एक सरल वाक्य कहा कि बच्चे इस सब ची को अपने इन सब चीजों से मूर्ख मत बनना जैसा ही ऐसा कहा वैसे ही मोर फिर से वो अपने व जगत में वापस आ गई एक्चुअली इसको बुलाया क्यों था क्योंकि वह स्वामी जी की व डिवटी थी इसके लिए एंड देन देर वुड बी लंग गेस लिट इवनिंग इन द वाइड सेंट्रल ल ट रेन थ्रू द हाउस फ्रॉम फ्रंट टू बैक मेकिंग अ चेयर फुल रूम विथ इट्स ब्रॉड स्टेयर केस वाइड कोनम बिग फायर प्लेस सोफास एंड अप होस्टर चेयर्स और यह सब डिनर का भी समाप्त हो जाना उसके बाद में क्या होता था वहां पर एक बड़ा ही होल था बड़ा ही सुंदर रूप से सजाया हुआ उसमें बड़े-बड़े स्टेयर केस थे फायर प्लेस थे मेंटल पीस थे बड़ी सुंदर सोफा और कुर्सियां थी वहां पर गैस लिट इवनिंग्स गैस लिट अर्थात कि उस समय अमेरिका में गैस आ चुका था और रात को दिया जलाने के लिए ये लोग गैस का उपयोग करते थे ये जैसे कि ऑयल का दिया जलाना घी का दिया जलाना वो महंगा भी पड़ता है और उसमें प्रदूषण भी फैलता है कार्बन डाइऑक्साइड बहुत ज्यादा निकलता है किंतु गैस जलाने से वो कंपेरटिवली क्लीन लाइट होती है धुआ भी नहीं होता और प्रदूषण भी ज्यादा नहीं होता तो गैस माइन करके अब एक से दूसरे घर में वह पाइपलाइन के थ्रू पहुंचाना वह सब अमेरिका में प्रारंभ हो चुका था तो गैस की लाइट किसके घर में होंगी जो जिसका घर धनी है तो वे लोग कहेंगे कि अच्छा उसके घर गैस की लाइट है अर्थात कि उन्हें वो अच्छी जगह पे रह रहा है अच्छा पैसा कैसा है उसके पास में तो गेस लिट लॉन्ग गेस लिट इवनिंग्स ल मने वो एक संध्या का समय सुंदर सुनहरा समय धनी का कमरा है उसके भीतर में गैस के प्रकाश पुंज लगे हुए हैं उसमें सभी लोग जैसे कि मंत्र मुक्त होकर के स्वामी जी के चारों ओर बेटे हैं और स्वामी जी वेदांत और उपनिषद की कहानियां एक के बाद एक उनको सुनाते हैं हम लोग भी यदि उनके लोग भक्तों के साथ में होते तो कितना अच्छा होता स्वामी जी का क्योंकि बात सिर्फ यह नहीं है कि स्वामी जी क्या बात करते हैं स्वामी जी की बातें बड़ी प्रोफाउंड थी उसमें कोई प्र प्रश्न ही नहीं है किंतु यह सब प्रोफाउंड बातें तो आजकल किताबों में सभी लोग पढ़ सकते हैं स्वामी जी ने जो कहा ज्यादातर तो अभी किताबों में है तो किताब में भी पढ़ सकते हैं स्वामी जी के स्वयं के मुह से सुनने का प्रयोजन क्या था और उसका एक एक इंपॉर्टेंस क्या था कि स्वामी जी का खुद का व्यक्तित्व स्वामी जी का खुद का पर्सनालिटी जैसे कि ये मोड स्टुक को सिर्फ इतना ही कहा कि डोंट लेट इट फुल यू बेबी अपने को इस सब चीजों से मूर्ख मत बनने देना तो ऐसा कोई प्रोफाउंड फिलोसॉफिकल बात नहीं है आज कोई भी व्यक्ति किसी भी चीज के ऊपर में मोहित हो जाए और मैं यदि जाकर के कहूंगा अरे भाई ये सब चीजों का त्याग करो क्या रखा है ये सब चीजों में तो वो थोड़ी ना सुनने वाला है बात वही है जो कि स्वामी जी ने कही है तो म को मैं भी उसको बता रहा हूं डिफरेंस यह है स्वामी जी की पर्सनालिटी में और अन्य सब लोगों की पर्सनालिटी में स्वामी जी जो कुछ भी कहेंगे वो थाउज टाइम्स मल्टीप्लाई हो जाएगा अपने प्रभाव में उनकी पर्सनालिटी की मदद से और हम लोग जो कहते हैं वो शब्द के शब्द ही रहेंगे किंतु एटलीस्ट चलो हम लोगों को इतना तो सद् भाग्य है कि स्वामी जी के शब्दों को प्रिजर्व करके रखा गया है और उसको हम लोग पाठ कर सकते हैं श्रवण कर सकते हैं इट वाज अ रूम मोर लीव्ड इन देन द फॉर्मल सिटिंग रूम ट एड जॉइन इट इसी के बगल में एक फॉर्मल सिटिंग रूम था किंतु फॉर्मल बैठक खाने की वजह ये होल घर था उसमें ज्यादातर लोग इकट्ठा होते थे जनरली द फ्रंट एंड बैक रूम्स बैक डोर्स वुड बी ओपन एंड द पलसेटिंग साउंड्स ऑफ द समर नाइट वुड अ कंपनी स्वामी जी मेलो यट अथॉरिटेटिव टोनस एस ही टॉक ऑन सम टाइम्स फॉर आवर्स एट ए टाइम बड़ा ही सुंदर वर्णन है कि ये होल घर था ये होल कमरा था उसके आगे के और पीछे के दरवाजे खुले रहते थे और जैसे कि ग्राम्य विस्तार में आप जाएंगे बाहर का प्राकृतिक नजारा आप देखेंगे कि किस तरह से ये जो क्रिकेट होते हैं क्रिकेट यानी कि हिंदी शब्द होगा कि आपस में जद टकराएंगे हवा की वजह से पत्ते तो कितना सुंदर एक आवाज होता है तो प्राकृतिक आवाज जो होता है ये क्रिकेट की आवाज ना किय जैसे कि पंखियो का कलरव ना किय पत्तों की आवाज ये सब संध्या के रात्रि के रात्रि के यह सब सुंदर शब्द सुंदर आवाज कमरे में प्रवेश करते थे और स्वामी जी का ये जो जेंटल माधुर्य पूर्ण वार्ता वाणी प्रवाह है उसके साथ में मिलकर के एक अद्भुत असर खड़ी करते थे जैसे कि देखिए एक फॉर एक एग्जांपल यदि दिया जाए अपने मंदिरों में जनरली कोई भी मंदिर होता है तो संध्या के समय भजन कीर्तन वगैरह होता है तो आप देखिए कि जद आप कोई बहुत ही अच्छा गायक है वैसे ही गान करेगा और साथ में और कोई गायक है वैसे ही गान करेगा और कहीं पर ऐसा होगा कि साथ में यह हार्मोनियम है यह पियानो है यह पखावज है ना कि यह तबला है ना कि यह खंजनी है यह सब शहनाई है यह सब इंस्ट्रूमेंट गाने के साथ में बजेंगे तो जैसे गाने के साथ में इंस्ट्रूमेंट को मिलाया जाता है तो गाना कितना सुमधुर हो जाता है तो हमेशा देखिए कि यह जो बाहर से आपका एकदम सुंदर आवाज भले ही चाहे हो इंस्ट्रूमेंट उसके साथ में मिले हार्मोनियम की आवाज पियानो की आवाज तो आपके गाने का शब्द और भी सुमधुर हो जाएगा तो वैसे ही यहां पर वैसे तो स्वामी जी की वाणी ही सुमधुर है फिर यह नाइट इंस्ट्रूमेंट इंस्ट्रूमेंट्स ऑफ द नेचर य पंखी की आवाज य क्रिकेट की आवाज प्रकृति की आवाज वह सब इंस्ट्रूमेंट स्वामी जी के सर के साथ में मिलेंगे और उनकी आवाज को उनकी वाणी को और भी मधुर बना देंगे ऑ इवनिंग मिस मैक्लाउड राइट्स यह सब इवनिंग जो सब संध्या समय स्वामी जी के साथ में बीते थे उसके बारे में मे क्लाउड क्या लिखती है इन द इवनिंग ही वुड टॉक एंड वंस आफ्टर ही केम आउट विथ सम ऑफ हिज थॉट्स अ लेडी सेड स्वामी आई डोंट एग्री विद यू देर एक बार स्वामी जी बात कर रहे थे तो एक लेडी डिवोटा ने स्वामी जी को कहा कि स्वामी मैं आपके साथ में एग्री नहीं हो रही हूं मैं आपके साथ में सहमत नहीं हो पा रही हूं तो स्वामी जी ने क्या कहा नो देन इट इज नॉट फॉर यू यदि आप सत नहीं हो रही है तो मैंने जो बात बताई वह आपके लिए नहीं है समवन एल्स सेड और किसी ने कहा ओ बट ट इज वेयर आई फाइंड यू ट्रू किंतु जो जिस बात से यह डिस एग्री कर रही है वही बात मुझे सबसे ज्यादा अच्छी लगी है अ देन इट वास फॉर यू ही सेड शोविंग ट अटर रिस्पेक्ट फॉर द अदर मैनस व्यू तो जैसे ही उसने कहा कि स्वामी जी वहीं पर मैं आपसे सा आपके साथ में सबसे ज्यादा एग्री हो रहा हूं स्वामी जी ने इमीडिएट कहा तब यह बात आपके लिए है किस तरह से स्वामी जी दूसरों के व्यू पॉइंट के रिस्पेक्ट करते हैं बात ऐसा नहीं है कभी-कभी जनरल जो प्रीचर होते है ना वो धर्म रक वे लोग अपना मत दूसरों के सर के ऊपर में बिठा देना चाहते हैं कि आप सबको ऐसा ही करना है मैं ऐसा कर रहा हूं यानी कि मैं सही हूं और बाकी जो सब लोग कर रहे हैं वो गलत है और यदि आप मेरे फॉलोवर है तो एगजैक्टली वही करना है जो कि मैं कह रहा हूं खाने में पीने में रहने में मैं जो कहता हूं वही सही बाकी सब गलत और सबको मुझे एगजैक्टली फॉलो करना है ऐसा किसी का बड़ा ही कठोर व्यवहार रहता है कोई कोई प्रीचर्स का कोई कोई टीचर का किंतु स्वामी जी का देखिए कि कितना उदार हृदय है कोई एक व्यक्ति ने कहा कि मैं आपकी इस बात से डिसएग्री हो रहा हूं असहमत हो रहा हूं इमीडिएट स्वामी जी ने कहा अच्छा ठीक है तो यह बात तुम्हारे लिए नहीं है किसी ने कहा कि मैं आपकी वही बात के साथ में सबसे ज्यादा सहमत हो रहा हूं स्वामी जी ने कहा इमीडिएट तो यह बात आपके लिए है क्योंकि देखिए आध्यात्मिक जगत में सबसे इंपॉर्टेंट है ब्रह्म सत्य जगत मिथ्या यह है फाउंडेशन ब्रह्म साक्षात्कार करने के लिए आपको एक के बाद एक त्याग करके आपको ईश्वर के रास्ते पर चलना है अभी यह त्याग आप कैसे करें यह ब्रह्म साक्षात्कार आप कैसे प्राप्त करें उसके बहुत सारे तरीके हैं प्रत्येक के लिए वो तरीका अलग-अलग हो सकता है कोई इस तरह का खाना खाएगा कोई उस तरह का खाना खाएगा कोई वेज खाएगा कोई नॉनवेज खाएगा कोई कर्म करेगा कोई कर्म नहीं करेगा कोई भक्ति करेगा कोई भक्ति नहीं करेगा कोई किसी की भक्ति करेगा यहां 33 कोटि तो देवी देवता है यदि मैं कहूंगा मैं काली का उपासक हूं तो काली की उपासना करके ही आपको मुक्ति प्राप्त होगी तो ऐसा तो नहीं चलेगा बाकी जो 33 कोटि देवी देवता है वे लोग क्यों फिर वो उनका आविर्भव हुआ है सबको अपने तरीके से अपने चुने हुए रास्ते पर ईश्वर के पास जाने का अधिकार है ये फ्रीडम ऑफ चॉइस यह फ्रीडम ऑफ ओपिनियन ये लिबरल एक विराट समुंदर के जैसा हार्ट हृदय स्वामी जी के पास में था वन इवनिंग ही वास सो इलोक अबाउट डजन पीपल लिसनिंग हिज वॉइस बिकमिंग सो सॉफ्ट एंड सीमिंगली फार अवे वन द इवनिंग वाज ओवर वी ऑल सेपरेटेड विदाउट इवन सेइंग गुड नाइट टू इच अदर एक दिन शाम के समय स्वामी जी इतनी प्रोफाउंड गहराई में इतनी ऊंचाई पर चले गए ब्रह्म भाव के बारे में बात करते करते उनका स्वर उनकी आवाज इतनी सुमधुर मृदु हो गई पूरा जगत जैसे कि स्तंभित होकर के स्वामी जी की वाणी को सुन रहा है और जो श्रोता थे वो इतने ने गहराई से प्रभावित हो गए इतना ज्यादा प्रभावित हो गए कि जब वह संध्या समाप्त हुई अपने कमरे में सोने के लिए जाने का शयन के लिए जाने का समय आया तो जनरली वह गुड नाइट वगैरह जो ग्रीटिंग करते हैं उस दिन कोई कुछ भी बोला नहीं बिना किसी शब्द के बिना किसी आवाज के सब लोग अपने अपने कमरे में चले गए क्योंकि सबका मन इत इतनी ऊंचाई पर चला गया था कि अभी सामान्य कोई भी बात करना उनके लिए गॉसिप करना या फिर कल क्या खाना बनेगा कल हम कहां पर जाने वाले हैं कल कौन गेस्ट आने वाला है यह सब बात करने का किसी का भी इच्छा नहीं रहा था किसी की भी इच्छा नहीं रही थी सब लोग चुपचाप शांति से अपने कमरे में चले गए कितना सुंदर वाक्य फिर से मैं पढ़ता हूं ही वास सो लोकेंट हिज वॉइस बिकमिंग सो सॉफ्ट एंड सीमिंगली फार अवे जैसे कि उनका आवाज इतना मृतु हो गया था और जैसे कहां दूर से आ रहा जैसे कि आप पृथ्वी पर बैठे हैं और ईश्वर आपके बादलों के ऊपर में बैठे हैं और बादलों के ऊपर में बैठ कर के ब्रह्म संगीत बड़े ही हल्के सुरों में आपको सुना रहे हैं और सुनते सुनते आप मंत्र मुक्त हो गए हैं इस तरह का आभास इन लोगों को हुआ था सच होली को प्रवे इस तरह का एक पवित्र वातावरण पूरे घर में छा गया माय सिस्टर मिसेस लगेट हैड ओजन टू गो टू वन ऑफ द रूम्स आफ्टर वर्ड्स अब यह बेटी लगेट जो है वह तो घर की मालकिन थी और उनकी रिस्पांसिबिलिटी थी कि कोई गेस्ट आया है तो उनके कमरे में जाकर के पूछे कि आपको कोई असुविधा तो नहीं है तो तो एक गेस्ट के कमरे में उसी दिन रात को गई र शी फ फाउंड वन ऑफ द गेस्ट एन एग्नोर पीपिंग उनके कमरे में जाकर के देखा वहां पर जो गेस्ट थे वो वैसे तो था नास्तिक किंतु वो रो रही थी व्ट डू यू मीन माय सिस्टर आस्ड मेरी बहन ने अर्थात बेटी लगेट ने पूछा अरे आप रो क्यों रही है आप तो नास्तिक है आपको स्वामी जी की बातों से इतना क्या ऐसा तो हो गया है तो उस लेडी ने कहा ट मैन हैज गिवन मी इटरनल लाइफ उस व्यक्ति ने मुझे अनंत जीवन प्रदान किया है देखिए कि स्वामी जी की वाणी के प्रभाव से ही किसी का जीवन परिवर्तित हो जाता है जनरली किसी को जीवन परिवर्तित करना है तो कितने ही धर्म ग्रंथ पढ़े कितने ही स्वाध्याय कितने ही सत्संग अटेंड करें कितनी ही तपस्या करें कितना ही जप ध्यान करें कितना संयम करें जन्म जन्मांतर की यह यात्रा है किंतु स्वामी जी ने एक ही शाम को इस तरह से ब्रह्म भाव के बारे में बात की कि यह लेडी कहती है ट मैन हैज गिवन मी इटरनल लाइफ उस व्यक्ति ने मुझे अनंत जीवन प्रदान किया है आई नेवर विश टू हियर हिम अगेन मुझे फिर से उनको कभी नहीं सुनना अभी ये सेकंड बात जो है वो थोड़ी आश्चर्य लगने वाली होती है कि एक पहले सेंटेंस में तो कहती है कि स्वामी जी ने मुझे अनंत जीवन बक्षिस में दिया है गिफ्ट में दिया है दूसरे ही सेंटेंस में कहती है कि मैं फिर से उनको कभी सुनना नहीं चाहती पता है लोग ऐसा कभी क्यों कहते हैं कभी-कभी ऐसा होता है ना जैसे कि वो योगानंद जी महाराज का था योगेन जब ठाकुर के पास में आते थे दक्षिणेश्वर में देखा कि ठाकुर बातें तो बड़ी अच्छी करते हैं कि तो एक दिन रात को आधी रात को खड़े जग गए किसी कारण वश देखा ठाकुर अपने बिस्तर में सोए हुए नहीं है तो उनको बड़ा ही भय लग गया कि क्या ठाकुर दिन में तो काम कांचन त्याग करने की बातें करते हैं किंतु रात को क्या मध्यरात्रि को क्या छुपके छुपके अपनी पत्नी के पास जाते हैं उस समय मां उस समय नबत में रह रही थी तो उन्होंने सोचा कि वो जैसे ही वो नबत में से बाहर आएंगे मैं उनको पकडू बोल कर के नबत के सामने खड़े रह गए देखा कि ठाकुर जाऊ तला से वापस आ रहे थे झावतला अर्थात कि जहां पर सोच के लिए जाया जाता है आधि रात को ठाकुर को सोच जाने की जरूरत पड़ गई होंगी तो वो वहां पर गए होंगे जैसे ही योगेंद्र महाराज को देखा वो ब समझ गए कि उनके मन में क्या चल रहा है तो ठाकुर ने क्या कहा बश बेश साधु के दिने देख भी साधु के रातें देखी तखन साधु ऊपर श्रद्धा भक्ति करमी अर्थात कि साधु को दिन में देखो साधु को रात में देखो और तब कहीं जाकर के साधु की बातों को स्वीकार करो अभी यह दिन में भी देखना और रात को भी देखना क्यों क्योंकि बहुत बार ऐसा होता है कोई कोई लोग बातें तो बड़ी-बड़ी करते हैं किंतु उस तरह का आचार और व्यवहार उनका नहीं रहता आचार और व्यवहार दूसरी ही तरह का उनका होता है तो अभी यह जो लेडी थी उसके मन में भी शायद ऐसा होगा कि स्वामी जी ने इतनी सुंदर बात कही है मुझे इतना एक अनंत जीवन प्रदान किया है इतनी बड़ी गिफ्ट मुझे दी है अभी जदी मैं स्वामी जी को और ज्यादा गहराई से और ज्यादा क्लोजल जानने का प्रयास करूंगी और उनके चरित्र में भी जद वही डिफेक्ट निकले तो मेरा तो पूरा यह जो गिफ्ट मुझे मिली है अनंत शांति मिली है वो तो नष्ट हो जाएगी खत्म हो जाएगी इसलिए बेटर है कि स्वामी जी के पास से मैंने यह गिफ्ट ली और बस अभी मैं फिर से स्वामी जी को कभी देखना नहीं चाहती कभी सुनना नहीं चाहती ऐसा उसके मन में शायद भाव या तो भय हो सकता है और बात भी सही है कि किसी को भी देखिए अभी दो बात है यहां पे कि एक तो हाईएस्ट स्टैंडर्ड होता है हम लोग किसी के भी बारे में एक हाई स्टैंडर्ड बना देते हैं फिर उस तरह का व्यवहार उनको करते नहीं देखते तो हमको छोटी-छोटी चीजों में आघात लग जाता है राजकोट में एक महाराज थे तो इनको क्या था कि प्रवचन देने के लिए वैल्यू एजुकेशन के कार्यक्रमों में जाने के लिए बार-बार वो स्कूल वगैरह में जाना होता था तो गाड़ी लेकर के निकलेंगे साथ में एक दो डिवटी रहेंगे वॉलंटूरिज्म रेस्ट ज्यादा लेना पड़ता है थोड़ा सा खाना थोड़ा पौष्टिक खाना पड़ता है बीमार हो गए तो प्रॉपर मेडिकल अटेंशन भी चाहिए वरना अभी आश्रम में ही आश्रम में रह रहे जैसे कि मैं पब्लिकेशन में रहता था बुखार हुआ तो एक दो दिन वो उपवास करके चला लिया गोली नहीं लेनी है मेडिसिन नहीं लेनी है क्यों अननेसेसरी मेडिसिन लेना एक दो दिन उपवास करेंगे बुखार अपने से चला जाएगा तो थोड़ा सा हम लोग हेल्थ को भी नेगलेक्ट करते हैं किंतु यदि आपको सतत ट्रेवलिंग करना है तो थोड़ा सा भी कुछ भी हुआ तो आपको प्रॉपर अटेंशन देना पड़ता है वरना यदि बड़ा हो गया कुछ तो आपका ट्रेवलिंग वगैरह सब कार्य आपका रुक जाएगा तो कुछ कुछ लोग यह सब देख कर के कहना शुरू कर दिए अरे यह महाराज तो थोड़े से ज्यादा ही मतलब क्या कहेंगे यह सब चीजों में अट्रैक्शन खाने में यह सब चीजों में ज्यादा है बहुत ज्यादा शरीर का संभाल रखते हैं अब साधु है तो शरीर की संभाल क्या रखना यह सब तो ये महाराज कहा करते थे कि भक्तों की दृष्टि से देखो तो हम साधुओं को कुछ भी करना नहीं है खाना भी नहीं है और शौच भी नहीं करनी है और पत्थर की तरह बैठे रहना है सबको आशीर्वाद देना है ये भक्तों की हमारे से अपेक्षा होती है अब इस तरह की अपेक्षा हम कैसे पूरी करेंगे तो ये तो एक होता है कि अन अनरीजनेबल एक्सपेक्टेशन आप रख कर के बैठ जाते हैं कि साधु तो एगजैक्टली ऐसा ही होना चाहिए और मेरी अपेक्षा से थोड़ा सा भी इधर-उधर हुआ तो मैं वो साधु के प्रति एकदम नाराज हो कर के उनको गाली देना शुरू कर दूंगा ऐसा एक किसी किसी का भाव रहता है तो ये भाव भी कभी फुलफिल नहीं होने वाला है स्वामी जी के खुद के जीवन में देखा ये मिस्टर स्टडी और मिस मुलर यह दोनों फिर ये कृपानंद लियोन लैंडसबर्ग ये अभयानंद मेरी बुई ये तीन चार लोग ऐसे थे स्वामी जी से प्रभावित होकर के स्वामी जी से स्वामी जी के डिसाइल पहले बने फिर स्वामी जी की कुछ कुछ बातों से बड़े ही नाराज होकर के जीवन भर के उनके दुश्मन भी हो गए तो एक दो चीज है एक तो है कि अनरीजनेबल एक्सपेक्टेशन भी नहीं रखनी है दूसरा कि इन जनरल जो प्रिंसिपल होते हैं सन्यास जीवन के उसका भंग होते हुए देखने से फिर उनको छोड़ भी देना है तो ये दोनों के बीच में यह जो एक पतला एक रास्ता है शरस धारा कवियो वदंती माने एक बड़ा ही एक नरो रास्ता है उस नरो रास्ते पर हमको चलना है विक शशाशा ही हस श्री विना