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Swami Vivekananda Raja Yoga ·

राजयोग : Ch.3 प्राण : स्‍वामी विवेकानन्द : 31 May 2024

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ओम स्थापक य च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः पहले स्टोरी बता देता हूं शंकराचार्य और मंडन मिश्र की डिबेट जग जाहिर है उसके रिलेटेड बहुत सारे पॉइंट है शंकराचार्य ने मंडन मिश्र को चैलेंज किया कि वह अपने ट्रेडिशनल कर्मकांड को फॉलो करते थे मंडन मिश्रा और शंकराचार्य अपना वेदांत तो इन दोनों में से कौन सा थिरी बेटर है मंडन मिश्रा और शंकराचार्य दोनों डिबेट करने को बैठे अभी जज कौन करेगा डिसाइड कौन करेगा कि जीता और कौन हारा तो अभी ठीक हुआ कि मंडन मिश्र की जो धर्मपत्नी है उभय भारती वह ठीक करेगी कि कौन जीतेगा और कौन कौन जीता और कौन हारा इस डिबेट में अभी जब यह डिसीजन जब लिया गया मैं पहली बार पढ़ रहा था इस कहानी को तो मुझे आश्चर्य यह हुआ कि अरे आज के जमाने में तो हम इस तरह के किसी अंपायर को या तो फिर इस तरह के किसी जज को एक्सेप्ट नहीं करेंगे जिसका खुद का एक वेस्टेड इंटरेस्ट है क्योंकि यदि उभय भारती यह ठीक करेगी निर्णय लेगी कि शंकराचार्य जीत गए तो उसका रिजल्ट क्या होगा पता है ऐसा डिसीजन हुआ था कि यदि मंडन मिश्रा हार जाएंगे शंकराचार्य से तो उनको सन्यास लेना होगा क्योंकि शंकराचार्य तो सन्यास ट्रेडीशन को फॉलो करते थे और यदि मंडन मिश्र जीत जाएंगे तो वो गृहस्थ परंपरा को फॉलो करते थे तो शंकराचार्य को गृहस्थाश्रम एक्सेप्ट कर लेना है तो यदि उभय भारती यह ठीक करती है यह निर्णय लेती है कि शंकराचार्य जीत गए तो इसका परिणाम क्या आएगा कि मंडन मिश्र को सन्यास लेना होगा और यदि वह सन्यासी हुए तो पहले अपना श्राद्ध करना होगा और जिसका श्राद्ध हुआ वह तो विधिवत उसका मृत्यु हो गया है अर्थात कि उभय भारती विधवा हो जाएगी यानी कि क्या वो ऐसा कोई निर्णय लगी जिससे उसको पर्सनली इतना बड़ा लस होने वाला है यह तो कैसी आश्चर्यजनक बात हो गई किंतु फिर भी ये अपनी जो भारतीय परंपरा है भारतीय ट्रेडिशनल की रक्षा करने के लिए सत्य की रक्षा करने के लिए यदि हमको अपना खुद का कितना भी बलिदान देना पड़े वह देने के लिए हम तैयार है वह जो भगवान राम का है ना प्राण जाए पर वचन ना जाए रघुकुल नीति सदा चली आई ये ह हरिश्चंद्र की बात राजा हरिश्चंद्र की बात ठाकुर बार-बार एक बार बताते हैं कि किस तरह से उन्होंने धर्म की रक्षा करने के लिए सत्य की रक्षा करने के लिए वो जब वो स्मशान में बैठे थे और मुर्दे जलाने के लिए उनकी खुद की पत्नी आई उनका खुद का बच्चे का शब लेकर के मृत देह लेकर के उसको जलाने के लिए तो फिर धर्मराज ह राजा हरिश्चंद्र ने उनकी खुद की पत्नी से मांग आई है कि आपको यदि शब जलाना है तो इतना रुपया देना पड़ेगा इसके बिना मैं किसी का शब किसी की भी चीता नहीं जला सकता तो देखिए कि धर्म की रक्षा करने के लिए ये लोग किस हद तक जाते हैं तो ये अपनी ट्रेडिशनल ही सर्वो परर है बाकी अपनी खुद की इच्छा अपनी खुद की आकांक्षाएं वासना एं कहो ना कि अपने खुद के कंफर्ट कहो ये सब कुछ सेकेंडरी है तो यहां पे भी एक एगजैक्टली वही हुआ कि उभय भार ने जैसे ही डिबेट स्टार्ट हुआ शंकराचार्य का और मंडन मिश्र का उभय भारती ने दोनों के गले में एक फूल माला पहना दी और कहा कि और जो डिबेट करते करते क्रोधित हो जाएगा तो उस क्योंकि क्रोध काब प्रकट होता है जब आप हारने लगते हैं तो आपके मन में क्रोध प्रकट होगा तो क्रोध या तो फिर निराशा या तो हताशा उसके ताप से यह फूल दग्ध हो जाएंगे और जो प्रसन्न रूप से प्रसन्न भाव में सतत डिबेट करता जाएगा इसका क्या अर्थ है कि ही इज कॉन्फिडेंट कि वह जीत रहा है इसलिए वह प्रसन्न रहेगा वह खुश रहेगा वह आनंदमय रहेगा वह गुस्सा भी नहीं करेगा ना ही वो और कुछ करेगा तो यह कुछ दिनों के बाद देखा कि यह मंडन मिश्र की फूलों की माला है वह धीरे-धीरे करके मुरझाना शुरू हो गई है तो इसके बेस पर उभय भारती ने निर्णय लिया कि मंडन मिश्र की हार हुई है और शंकराचार्य की जीत हुई है इसके बाद में उभय भारती ने अपना एक प्रश्न ऐड कर दिया बीइंग की धर्म पत्नी है तो उनको कहते है ना कि वो पति के डिबेट में उनका भी एक हिस्सा हो सकता है तो जो भी है यहां पर किंतु उसने निर्णय तो पक्का ले लिया कि शंकराचार्य की जीत हुई है देखिए कि सेम टू सेम स्टोरी अपने ठाकुर और मां के जीवन में ऐसी ही स्टोरी देखने को मिलती है एक बार ठाकुर ने मां को एक एक ब्राह्मण आता था कालीबाड़ी में तो अभी ठाकुर तो बालक स्वभाव है ना तो ब्राह्मण के साथ में डिबेट एकदम आर्गुमेंट में लग गए कि किनके शरीर का वर्ण त्वचा का रंग ज्यादा गोरा है ज्यादा सफेद है तो अभी यह दोनों आर्गुमेंट कर रहे हैं और ठाकुर कहते हैं नाही मेरे मेरी स्किन कलर जो है वह ज्यादा वाइट है और वोह जो ब्राह्मण है वो कहता है नहीं मेरा स्किन कलर ज्यादा गोरा है तो अभी डिबेट चलने लगी तो अभी किसी अभी यह दोनों तो आपस में तो अपना ही पक्ष लेंगे ना वो ऐसा थोड़ी ना कंसीड करेंगे कि नहीं नहीं यह तुम्हारा ज्यादा त्वचा का रंग सफेद है मेरे से तो अभी यह दोनों कंफ्यूजन में आ गए कि किसी के तो अंपायर बनाना पड़ेगा किसी को तो जज बनाना पड़ेगा जो कि ठीक करे कि कौन ज्यादा गोरा है तो ठीक है ठाकुर ने ठीक किया कि मां को जज बनाएंगे मां को पूछेंगे कि कौन ज्यादा गोरा है ठीक है तो फिर मां को मैसे पहुंचा गया अभी मां खुद तो वो पर पुरुष है वह जो दूसरा ब्राह्मण है उसके सामने तो आकर के गुमटा खोल कर के वो देखेगी नहीं कि वो कौन सा किसका शरीर ज्यादा गोरा है तो क्या ठीक हुआ कि यह ब्राह्मण और यह ठाकुर ये दोनों जाएंगे और वहां पर वोह गंगा के किनारे ना कि हांस पुकुर के किनारे कहीं पे हास पुकुर मोस्ट प्रोबेबली वहां पर जाकर के खड़े रहेंगे और मां नबत में से चुपके चुपके देखेगी दोनों को और फिर अपना निर्णय देगी कि कौन जदा गोरा है तो ठीक है यह ब्राह्मण और यह ठाकुर दोनों गए वहां पर जाकर के पूर्व निश्चित स्थान पर जाकर के खड़े रह गए और मां ने देखा फिर देखा तो मां का निर्णय ऐसा हुआ जो वो जो ब्राह्मण है वो ज्यादा गोरा है ठाकुर से तो मां ने अपना निर्णय सुना दिया कि वो ब्राह्मण ठाकुर से ज्यादा गोरा है तो देखिए कि वैसे ठाकुर और मां का जो रिलेशन कि इतना गहरा इतना प्रेम दोनों के बीच में इतना गहन प्रेम जो कि हमको उसकी डेप्थ जो है उसकी गहनता है हमारे मन में हम कभी उसको समझ ही नहीं पाएंगे अपनी बुद्धि से किंतु फिर भी जब निर्णय लेना हुआ ठाकुर और एक दूसरे ब्राह्मण के बीच में तो मां ने बिल्कुल धर्म को फॉलो किया नहीं कि व अपने पत्नी का जो धर्म है उसको फॉलो करना यह जो आदर्श सनातन धर्म है कि सत्य क्या है सत्य को फॉलो करना है तो मैं एगजैक्टली वो जो थी मंडन मिश्र और उभय भारती की एटली ऐसा इस तरह का एक इंसिडेंट हमको ठाकुर म स्वामी जी की कहानी में मिलता है तो फिर मैं इसके साथ में राजयोग से प्रारंभ करते हैं कल हमने देखा कि किस तरह से यह नासदीय सुक्तम का स्वामी जी हमको रेफरेंस देते हैं कहते हैं वेन देर वाज नादर और नोर नॉट वेन डार्कनेस वास कवरिंग डार्कनेस व्ट एसिस्टेड देन ज जिस समय कुछ भी नहीं था जब अंधेरा अंधेरे से ढका हुआ था तब किस चीज का अस्तित्व था ट आकाश एसिस्टेड विदाउट मोशन वही आकाश बिना किसी कार्य के उसी की एकमात्र सत्ता थी द फिजिकल मोशन ऑफ द प्राण वाज टॉप बट इट एसिस्टेड ऑल द सेम आकाश स्थिर रहता है और प्राण उसको गति प्रदान करता है या तो फिर प्राण इसमें मोशन देता है तब कहीं जाकर के आकाश विभिन्न घटकों में परिवर्तित होता है एट द एंड ऑफ अ साइकल द एनर्जी नाउ डिस्प्ले इन द यूनिवर्स क्वाइट डाउन एंड बिकम पोटेंशियल यह जो सृष्टि स्थिति प्रलय की जो साइकिल है उसके अंत में यह जब ब्रह्मांड अभी का जो ब्रह्मांड हमको दिख रहा है यह सूरज में से इतनी गर्मी प्रकट हो रही है फिर यह पृथ्वी सूरज की चारों ओर घूम रही है यह पूरा मिल्की वे गैलेक्सी रोटेट कर रहा है पूरा ब्रह्मांड गतिशील है तो यह जितनी भी गति है जितने भी कार्य है जितने भी पदार्थ है वह सब शांत होकर के अपने मूल स्वरूप में लय हो जाएंगे समाहित हो जाएंगे पोटेंशियल अपना जो ओरिजिनल पोटेंशियल है उसमें फिर से वापस चले जाएंगे एट द बिगिनिंग ऑफ द नेक्स्ट साइकल दे स्टार्ट अप स्ट्राइक अपॉन द आकाश एंड आउट ऑफ द आकाश इवोल्व दिस वेरियस फाल्स जब नई सृष्टि की नई साइकिल जब स्टार्ट होती है उस समय यह कार्यक्षमता प्राण जो है आकाश के ऊपर में आघात करता है और फिर आकाश यह विभिन्न स्वरूपों में इवॉल्व होता है एंड इस आकाशा चेंस दिस प्राण चेंस आल्सो इनटू ऑल दिस मेनिफेस्टेशंस ऑफ एनर्जी और जैसे जैसे आकाश विभिन्न पदार्थों में परिणत होता है वैसे ही प्राण यह पोटेंशियल फॉर्म में से विभिन्न तरह की फोर्सेस में परिणत होता है कल हमने देखा था कि एनर्जी शब्द प्राण के साथ में युक्त करना शायद उचित नहीं रहेगा प्रॉपर वर्ड होगा फोर्स और चार फोर्स जो है और पांचवी सस्पेक्टेड फोर्स है तो प्राण विभिन्न चार फोर्स में इवॉल्व होगा और आकाश पदार्थ में जितने भी पदार्थ है जितनी भी एनर्जी से उसमें इवोल्व होगा द नॉलेज एंड कंट्रोल ऑफ दिस प्राण इज रियली व्हाट इज मीट बाय प्राणायाम यह प्राण इसके बारे में समझना और इसको कंट्रोल करना इसी को कहते हैं प्राणायाम अभी यहां पर हमको एक चीज समझनी आवश्यक है कि ऐसा यदि ओरिजिनल प्राण जो है प्राण को कहेंगे कि यह प्राण इसके लिए कारण भूत है कि जिसने पूरे ब्रह्मांड को जन्म देने में या तो ब्रह्मांड में जितने भी पदार्थ है जितने भी ग्रह है जितने भी तारे हैं जितने भी पेड़-पौधे हैं पशु पक्षी है मनुष्य है आकाश में से इस सब पदार्थ को उत्पन्न करने में यदि प्राण की भूमिका है तो हम प्राणायाम से उस प्राण को कैसे कंट्रोल कर पाएंगे यह तो बड़ा ही हमको विचित्र लगता है कि इन दोनों के बीच में कनेक्शन क्या है वह हो गया कॉस्मिक प्राण कहां पर वह है पूरे यूनिवर्सल लेवल पर और हमारा यह शुद्र शरीर हम जद नाक बंद करके प्राणायाम करते हैं जैसे कि योगा क्लास में हमको सिखाया जाता है कि इतनी मात्रा में पूरक करना इतनी मात्रा में रेचक करना और इतनी मात्रा में कुंभक करना तो यह जो हम सीखते हैं उससे ना कि पूरे विश्व ब्रह्मांड में पित जो प्राण है वह कैसे कंट्रोल होगा इन दोनों के बीच में क्या कनेक्शन है तो वह कनेक्शन ही है राजयोग का आर्ट कि प्राण दो लेवल पे अस्तित्व में है एक तो कॉस्मिक लेवल पे दूसरे इंडिविजुअल लेवल पे और यह कॉस्मिक प्राण जो है उसका रिमोट कंट्रोल जद कहे यह शब्द मॉडर्न शब्द जद यूज करें तो रिमोट कंट्रोल कहो ना कि इन दोनों के बीच में एक कनेक्शन कहो वो वो है और यदि हम अपने शरीर के भीतर में जो पंचप्राण है उस पंचप्राण का यदि नियमन करें तो यह जो कॉस्मिक प्राण है उसको हम नियंत्रण कर सकते हैं उसके ऊपर में हम नियंत्रण ला सकते हैं यह है राजयोग का एक बहुत बड़ा सीक्रेट और यह नियंत्रण आने से हमारे पास में कैसी अद्भुत शक्तियां प्रकट होगी इसका विवरण स्वामी जी नेक्स्ट करते हैं कहते हैं दिस ओपनस टू अस द डोर टू अन ऑलमोस्ट अनलिमिटेड पावर अपने शरीर में जो प्राण है उसके द्वारा हम यह विश्व ब्रह्मांड में जो प्राण है उसका नियमन करेंगे तो हमारे सामने ईश्वरीय शक्तियां खुल जाती है उसका दरवाजा खुल जाता है हमारे भीतर में ऐसी शक्ति आ जाएगी कि हमको लोग ईश्वर कहना शुरू कर देंगे ऑलमोस्ट अनलिमिटेड पावर सपोज फॉर इंस्टेंस अ मैन अंडरस्टूड द प्राण परफेक्टली एंड कुड कंट्रोल इट व्हाट पावर ऑन अर्थ वुड नॉट बी हिज मान लीजिए कि एक व्यक्ति प्राण को समझ पाए और प्राण को नियमन कर पाए पृथ्वी के ऊपर में ऐसी कौन सी कौन सी शक्ति होगी जो कि उसके कंट्रोल में नहीं रहेगी ही वुड बी एबल टू मूव द सन एंड स्टार्स आउट ऑफ देयर प्लेसेस कितना बड़ा स्टेटमेंट दे दिया है ये सूरज और चंद्र की गति को हम अ बदल सकते हैं वह जिस रास्ते पे चल रहे हैं जिस ऑर्बिट में वह सर्कल करल रहा है उस ऑर्बिट में से हम इसको हटा सकते हैं टू कंट्रोल एवरीथिंग इन द यूनिवर्स इस विश्व ब्रह्मांड में जो कुछ भी दिख रहा है सब कुछ आप कंट्रोल कर सकते हैं फ्रॉम द एटम टू द बिगेस्ट सनस यह छोटे से छोटा जो एटम है सब एटॉमिक पार्टिकल अणु परमाणु वहां से लेकर के सूरज चंद्र तारे गैलेक्सी नेबुलास पृथ्वी सब कुछ आप कंट्रोल कर सकते हैं बिकॉज ही वुड कंट्रोल द प्राण क्योंकि वह प्राण को कंट्रोल कर सकता है नियमन कर सकता है नियंत्रण कर सकता है दिस इज द एंड एंड एम ऑफ प्राणायाम प्राणायाम का हेतु क्या है प्राणायाम का उद्देश्य क्या है इस प्राण को संयमित करना प्राण को नियमन करना यह पढ़ के सबसे पहला प्रश्न होता है कि हमने ऐसा किसको देखा कि जो यह कर सकता है क्या हमने ठाकुर को देखा सूर्य और चंद्र की गति बदलते हुए क्या हमने स्वामी जी को देखा क्या हमने मां को देखा या और किसी साधु को रामकृष्ण संघ में या बाहर में मुझे नहीं लगता कि किसी ने देखा है छोटी-मोटी करामत जो कहते हैं हाथ चालाकी वो सब तो स्वामी जी ने बहुत कुछ उसका विवरण दिया है जब वो चेन्नई में गए थे साउथ इंडिया में तो वहां पर एक व्यक्ति को मिले वो व्यक्ति क्या कहता है कि वो जो कोई भी चीज है वो लाकर के देगा तो अच्छा तो उसको टेस्ट करने के लिए फिर उसको कुछ बीमारी ना की ऐसा कुछ था तो उसने स्वामी जी को ऑफर किया आप मेरे सर पर हाथ रख दीजिए आप तो साधु महात्मा है मेरी यह बीमारी ना जो कुछ भी है उसको ठीक कर दीजिए तो आप जो भी कहेंगे वह चीज उस तरह का जादू मैं आपको दिखाऊंगा तो स्वामी जी एग्री हो गए उसको एक कमरे के कोने में उसको बिठा दिया उसको निव स्त्र करके सिर्फ एक कंबल उसके शरीर पे है या निव स्त्र कर दिया अर्थात कि वोह पॉकेट वगैरह में कुछ लेकर नहीं बैठा है और स्वामी जी ने अपना कंबल उसको शरीर ढकने के लिए दिया जिससे कि पता च पक्का रहे कि वह सही में कुछ नहीं छुपा के रखा है उसने उसके बाद में स्वामी जी ने एक के बाद एक डिमांड करना शुरू कर दिया वो फूलों गुलाब के फूल गुलाब के फूल प्रकट किए वो आम वगैरह वो असमय का आम यह सब फल फूल यह सब उसने वो कंबल में से निकाल करके देना शुरू कर दिया एक के बाद एक तो स्वामी जी भी आश्चर्य चकित हो गए कि भाई यह किस तरह की ये हाथ चला की है ना कि किस तरह की ये करामत है वो जो कश्मीर में गए थे तो किसी के सर के ऊपर मैं क्या भूत न कि ऐसा कुछ सवार हो गया था तो लोग स्वामी जी को बुलाने के लिए गए कि इसके ऊपर में ऐसा कुछ है आप कुछ उ ये हुआ है उसके ऊपर में आप आइए और देखिए तो स्वामी जी ने जाकर के देखा कि ये लोग गरम गरम कोयला उसके शरीर पे डाम दे रहे हैं तो स्वामी जी ने टेस्ट करने को लिए कोयले को स्पर्श किया तो स्पर्श जो किया उनका हाथ जल गया मतलब सही में इतना गर्म कोयला था किंतु जब उस कोयला उसको जब डाम दे रहे हैं तो उसको कुछ नहीं हो रहा है आखिर में सब लोग बोल रहे हैं अरे आप इसका कुछ कीजिए तो स्वामी जी बोले मैं क्या करूं मैंने उसके सर पर कुछ मंत्र जप करके चला आया फिर वो जो एक फेमस कहानी है कि स्वामी जी को एका एक दिन चेन्नई में थे अमेरिका जाने वाले थे एक दिन रात को एकाएक सपना आया कि उनकी मां का देहांत हो गया है तो अभी क्या करें वो तो अमेरिका जाने से पहले यदि इस तरह का अशुभ समाचार मिलता है तो बेचारे किस तरह से वह जाएंगे किस तो मतलब अभी वो असमंजस में पड़े हैं कुछ लोगों ने कलकाता वो मैसेज भेजा कंफर्म करने के लिए कि भाई स्वामी जी की मां की क्या परिस्थिति है थोड़ा सा समाचार दो किंतु मीन वाइल उ एक किसी का स्वामी जी का एक जो डिवोटा था उसने कहा कि यहां पे एक एक आदमी रहता है वो इस तरह की बातें समझ स जान सकता है दूर की बातें वो आपको बताएगा तो स्वामी जी ने कहा आउट ऑफ क्यूरियोसिटी चलो उसको जाकर के मिलते हैं तो वो आदमी स्मशान में रह रहा था बिल्कुल पिशाच की तरह स्वामी जी कहते हैं पहले तो उसने हमारे पर ध्यान ही नहीं दिया उसके बाद में हम लोग जब जा रहे हैं थे तो फिर उसने रोका और कहा अच्छा ठीक है ठहर जाइए फिर वो एक स्लेट लेकर के उसके ऊपर में लिखना शुरू कर दिया और उसने वो फिर आखिर में उसने बताया कि नहीं आपकी मां को कुछ नहीं हुआ है और आपके भविष्य में है कि आपको विदेश में जाकर के प्रचार करना है तो इस तरह की घटनाओं का विवरण तो स्वामी जी ने खुद किया है तो चलो कि हमको छोटे-मोटे जादू चमत्कार या भूत वगैरह की बातों से इतना आश्चर्य नहीं होता ठाकुर खुद राजा महाराज को लेकर के वह जो गोपालेर मां गोपाल की मां अघोर मणि देवी के घर गए थे तो वहां पर जाकर के ही वह एक कमरे में बैठे कुछ भूत आकर के ठाकुर के सामने विनती करने लगे कि अरे आपका तेज हमारे से सहन नहीं हो रहा आप कृपया कृपा करके यहां से चले जाए तो ठाकुर ने कहा अच्छा ठीक है वो ठाकुर हंसते हंसते वापस आ गए और वापस आकर के काली मंदिर में आकर के राजा महाराज को बताया कि देखा मैंने वहां पर भूत देखा था तो राजा महाराज तो एकदम डर गए वो बोले कि अच्छा हुआ महाशय आपने मुझे वहां पर नहीं बताया वरना तो और कितना ज्यादा डर जा इस तरह की घटनाओं का विवरण से तो अपना साहित्य भरा पड़ा हुआ है तो ठीक है चलो कोई बहुत बड़ी बहुत बड़ी बात हमको नहीं लगती किंतु यहां पर जो स्वामी जी क्लेम करते हैं सूरज और तारों की गति को बदल देना एक कॉस्मिक लेवल पर अपनी एनर्जी को प्रोजेक्ट करना यह तो कितनी बड़ी बात हो गई यह रामायण महाभारत में जो सब घटनाएं हम देखते थे उस तरह की यह तो कुछ हो गई कि व जो भगवान कृष्ण ने यह ठीक किया कि एक्लिप्स ला देंगे एक्लिप्स अर्थात कि यह सूर्य ग्रहण तो सूर्य ग्रहण जैसे ही हो गया तो युद्ध रुक गया तो युद्ध रुक गया तो फिर वो द्रोणाचार्य ना कि कौन उन्होंने हथियार रख दिए तो अर्जुन ने जाकर के उनका वध कर दिया तो यह शक्ति हमने रामायण महाभारत काल में देखी है कि वोह सूरज और चंद्र की गति को परिवर्तित करके वो एक्लिप्स ला सकते हैं सूर्य ग्रहण ला सकते हैं किंतु आधुनिक युग में इस तरह की सिद्धि हमने किसी में नहीं देखी इंक्लूडिंग ठाकुर और स्वामी जी तो हम इस बात पर कैसे विश्वास कर ले कि जो स्वामी जी कहते हैं वह सही भी है कि नहीं क्योंकि यदि स्वामी जी इतना बड़ा क्लेम जो करते हैं इसके पीछे में प्रूफ कुछ नहीं देते थिरी हमको दे देते हैं कि हां ये ये थिरी है ये कॉस्मिक प्राण है जो कि पूरे विश्व को नियमन करता है नियंत्रण करता है कैसे क्योंकि आकाश रूपी जो पदार्थ है उसको नियंत्रण करके अच्छा यह एक थिरी हो गया दूसरा थिरी बता दिया कि हमारे शरीर के भीतर में भी वही प्राण का एक किरण है और यदि हम अपने शरीर में प्राण को नियमन कर पाएंगे तो बाय डिफॉल्ट उस कॉस्मिक प्राण के साथ में इसका कनेक्शन बैठ जाएगा और हम कॉस्मिक प्राण को नियमन कर पाएंगे कॉस्मिक प्राण को कंट्रोल कर पाएंगे किंतु यह थिरी देने के बाद में स्वामी जी ने किसी भी तरह का प्रूफ एज सच नहीं दिया है कि हां मैंने ऐसा होता हुआ देखा है या या तो मैं ऐसा कर सकता हूं स्वामी जी ने ऐसा कभी नहीं कहा तो हम किस बात से किस आधार पर इस बात को मान ले तो सही बताऊं तो मैं भी जब इसको पढ़ रहा था मेरा मेरे मन में उस समय भी थोड़ा डाउट था आज भी थोड़ा डाउट है कि सही सही में इस तरह की सिद्धि हमको मिल सकती है कि नहीं कहां वो कॉस्मिक लेवल पर आप मैटर और एनर्जी को कंट्रोल करेंगे ये पता है ना एटम बम से जो एनर्जी प्रकट होती है उसने हिरोशिमा नागासाकी की क्या दुरावस्था कर दी अभी इस तरह के एटम बम प्रत्येक सेकंड में सूरज के ऊपर में लाखों लाखों एटम बम का विस्फोट हो रहा है इतनी एनर्जी सूरज सिर्फ अकेला एकमात्र तारा है जो कि वह प्रकट करता है ऐसे तो करोड़ों करोड़ों तारे हैं ब्रह्मांड में और फिर यह गैलेक्सी के सेंटर में ब्लैक होल है एक-एक ब्लैक होल की साइज देखिए अरबों अरबों तारों की साइज का यह ब्लैक होल है तो उसके लेवल की एनर्जी उसको हम क्या कंट्रोल कर पाएंगे यह तो बड़ा ही आश्चर्य चकित लगता है वेदांत एक हमको समझ में आता है कि जो शारीरिक जो भी जगत है यह पदार्थ रूपी जो जगत है जो भौतिक जगत है उसके परे एक आध्यात्मिक सत्ता है और यदि मैं अपने इंद्रिय जनित जगत से पंच कर्मेंद्रिय पंच ज्ञानेंद्रिय ये सूक्ष्म शरीर मन बुद्धि चित्त अहंकार का इससे परे यदि मैं अपने सही स्वरूप में स्थित हो जाऊं तो मेरे भीतर में जो सही स्वरूप है मेरा आत्मन और जो कॉस्मिक लेवल पर जो ब्रह्मण है इन दोनों के बीच में ऐक्य स्थापित हो सकता है यह तो फिर भी इंटेलेक्चुअली कुछ समझ में आने वाली बात है जीव ब्रह्म ऐक्य तत्वम असी यह जो उपनिषद का जो महावाक्य है वो तो फिर भी इंटेलेक्चुअली समझ सकते हैं क्योंकि स्पिरिचुअल पावर को हो या तो स्पिरिचुअल एक्जिस्टेंस कहो वह तो सब जगह पर समान ही होगा यदि उसको कॉस्मिक लेवल पर देखें ना कि आप उसको इंडिविजुअल लेवल पर देखें तो दैट इज फिर भी एक इंटेलेक्चुअली अंडरस्टैंडेबल बात है और इस बात से उपनिषद एकदम क्लियर है कि जीव ब्रह्म ऐक्य है अहम ब्रह्मास्मि यह सनातन सत्य है तो इसको हमने स्वीकार कर लिया भले ही चाहे हम इसको अपने खुद के जीवन में अनुभूत कर सके कि नहीं वह दूसरी बात है एक्चुअली समझ में आता है और ठाकुर और स्वामी जी दोनों के जीवन में इस बात की सत्यता भी हमने परक की है प्रमाण यही है कि उन्होंने अपने मुंह से स्वीकार किया है ठाकुर ने खुद ने कहा है कि वह निर्विकल्प समाधि में स्थित हुए थे स्वामी जी ने खुद ने यह अपने मुंह से कहा है स्वीकार किया है कि मैं निर्विकल्प समाधि में गया था काशीपुर की बात है और जीवन में दो-तीन घटनाएं है जबकि वो निर्विकल्प समाधि के ऑलमोस्ट बाउंड्री पर चले गए थे किंतु क्योंकि ठाकुर ने कहा है कि अभी ये वो दरवाजा को ताला मार दिया है चाबी मेरे पास में रहेगी जब तक तुम्हारा कार्य समाप्त नहीं होता तो ऑलमोस्ट ली बॉर्डर लाइन पर जाकर के स्वामी जी वापस आए हैं तो निर्विकल्प समाधि क्या है जीव ब्रह्म ऐक्य क्या है आत्मन और ब्रह्मण एक ही सत्ता के दो पहलू है कॉस्मिक लेवल पे और इंडिविजुअल लेवल पे यह सब तो हमको इंटेलेक्चुअली समझ में आता है वी हैव एनी नंबर ऑफ प्रूफ किंतु ये जो फिजिकल लेवल पे जो एनर्जी का ऐक्य है मेरे भीतर में जो फिजिकल लेवल प जो प्राण है और कॉस्मिक प्राण है इन दोनों के बीच में ऐक्य है और यदि मैं अपने प्राण को नियमन कर सकता हूं प्राण को कंट्रोल कर सकता हूं तो मैं कॉस्मिक लेवल पर प्राण को कंट्रोल कर सकता हूं ये किस तरह से हम इसको स्वीकार करेंगे क्योंकि ना ही ठाकुर ने यह बात स्वीकार की है कि मैं मेरे पास में ऐसी कोई शक्ति है कि मैं सूरज और चंद्र की गति को परिवर्तित कर सकता हूं ना कि स्वामी जी ने ऐसा कुछ कहा है तो इस बात को हम कैसे स्वीकार करें तो अभी इसका मेरे पास में तो सही में कोई उत्तर नहीं है हमको यह बात यदि सही होगी तो हमको बहुत आनंद आएगा चलो यह मनुष्य में ये पोटेंशियल है कि पूरे विश्व ब्रह्मांड का अधिपति हो सकता है मैंने दैट इज माय पोटेंशियल फ्यूचर मुझे सुनक के बड़ा आनंद आएगा भले ही चाहे मैं उसको अचीव कर पाऊंगी नहीं कि नहीं वो ट इज अनदर मैटर बट ये ह्यूमन रेस का ह्यूमन लोग जो हमारे बारे में डिसाइड करते हैं वैसा ही हमारे साथ में होता है यह भारत देश में हम रहते हैं तो कौन सी चीज पे ऊपर में अपना कंट्रोल है ना ही इकोनॉमी के ऊपर में ना ही पॉलिटिक्स के ऊपर में मेरी जो खुद की अवस्था है वो कैसी है मैं मेरा इतना पोटेंशियल है फिर भी मैं इस पोटेंशियल को मेनिफेस्ट नहीं कर पाता हूं और फिर भी इंडिया में तो शांति है बाकी सब जगह प जहां पे युद्ध हो रहा है जहां पे क्या कुछ नहीं हो रहा वहां भी परिस्थिति देखिए तो मनुष्य का जीवन एक कीड़े की तरह है वो कीड़े की तरह जन्म लेता है कीड़े की तरह जीता है और कीड़े की तरह मरता है तो यह जब हम देखते हैं तब यह सब बातें सुनकर के राज योग की कि प्राणायाम का उद्देश्य ही वही है कि हम प्राण के माध्यम से पूरे विश्व ब्रह्मांड को कॉस्मो को कंट्रोल कर सकते हैं ट इ अ ग्रेट होप फॉर अस यह तो होप है ही है कि अल्टीमेटली कि इस जदी फिजिकल यूनिवर्स के मैं परे चला जाता हूं यह कॉन्शियस इवन कॉन्शियस यूनिवर्स के परे चला जाता हूं देयर इज अ सुपरकॉन्शियस एसिस्टेंसिया तो इतना फोर्स मेनिफेस्ट कर पाऊंगा जिससे कि मैं पूरे यूनिवर्स को कंट्रोल कर पाऊं छोटी-मोटी चीजें तो छोड़ ही दीजिए यह पेन है ना कि ये किताब है ना कि यह सब जो है उसको तो छोड़ ी दीजिए मैंने सूरज और तारों की गति को परिवर्तित कर पाऊं इस तरह की पोटेंशियल एनर्जी मेरे में है दैट इज अ मैटर ऑफ ग्रेट होप फॉर अस कि हां कि यदि मैं चाहूं तो मैं उसको अचीव कर सकता हूं मनुष्य एक कीट मात्र नहीं है वी कैन बिकम व्हाट एवर वी वांट टू बी पूरे विश्व के हम आधिपत्य हमारे अंडर में आ सकता है पूरे विश्व के नियंत्रण हम कर सकते हैं पूरे विश्व के ईश्वर बन सकते हैं दैट पोटेंशियल इज देयर विदन अस तो ये एक बहुत बड़ी आशा स्वामी जी हमको इस स्टेटमेंट से देते हैं वन द योगी बिकम परफेक्ट देयर विल बी नथिंग इन नेचर नॉट अंडर हिज कंट्रोल जब यह योगी परफेक्ट हो जाएगा संपूर्ण हो जाएगा तो इस विश्व ब्रह्मांड में ऐसा कुछ भी नहीं है जो कि उसके कंट्रोल में ना हो इफ ही ऑर्डर्स द गॉड्स और द सोल्स ऑफ द डिपार्टेड टू कम दे विल कम एट हिज बिडिंग यदि वह आदेश करता है ईश्वर को भी देवताओं को भी या तो फिर यह पितृ जिसको कहते हैं ना कि मृत देहो की मृता आत्माओं को वह जद आदेश करेगा उनको हजर होने के लिए तो वह उनके सामने उपस्थित हो जाएंगे उसके आदेश का पालन करेंगे दे विल कम एट हिज बिडिंग ऑल द फोर्सेस ऑफ नेचर विल ओबे हिम एज स्लेव्स ये विश्व ब्रह्मांड की जितनी भी फोर्सेस है एनर्जीस है गुलाम की तरह उसके सामने आकर के खड़ी रहेगी उसके लिए कार्य करेगी व्हेन द इग्नोर सी दिस पावर्स ऑफ द योगी दे कॉल देम द मिरेकल्स जब अज्ञानी लोग योगियों की यह शक्तियां देखते हैं तो उनको कहेंगे मिरेकल या तो जादू चमत्कार वन पिकु ऑफ द हिंदू माइंड इज ट इट ऑलवेज इंक्वायर फॉर द लास्ट पॉसिबल जनरलाइजेशन अच्छा यहां से पूरा दूसरा टॉपिक स्टार्ट होता है तो इसको तो हम कल लेंगे किंतु यह जो स्वामी जी का जो आखिरी वाला स्टेटमेंट है कि पूरे विश्व ब्रह्मांड को योगी अपनी शक्ति से अपनी ताकत से पावर विद पावर ऑफ कंसंट्रेशन वह कंट्रोल कर सकता है वह कितना बड़ा स्टेटमेंट है हम लोग जब योगशास्त्र पढ़ते हैं तो विभिन्न सिधायो की बात वहां पर हम पढ़ते हैं तो हमको लगता है कि अच्छा ठीक है चलो इस तरह की जो सिद्धि है या इस तरह के जो मिरेकल अस पावर है सो कॉल्ड मिरेकल अस वो उस एक पौराणिक युग में हुआ करते थे भगवान कृष्ण के पास में है ना कि भगवान राम के पास में इन लोगों के पास में ऐसी शक्तियां थी किंतु आज के युग में ऐसा खड़े रह कर के अमेरिका में लैंड ऑफ द स्केप्टिक्स वहां पर खड़े रह कर के इस तरह का मंच ऊपर से दावा करना कि हमारे भीतर में भी वही प्राण है कंट्रोल करके विश्व ब्रह्मांड को नियमन कर सकते हैं वो कितना बड़ा एक साहस लगेगा व और कोई यदि इस तरह का दावा करेगा तो वहां के लोग उसके ऊपर में खुद पड़ेंगे उसको मैंने उसके सामने आर्गुमेंट करने के लिए तो फिर भी स्वामी जी बड़े ही कॉन्फिडेंटली यह सब क्लेम करते हैं सामने कोई प्रूफ नहीं देते हालांकि ऐसा कभी नहीं कहते कि मेरे पास में यह शक्ति है या तो फिर कहा है कि ठाकुर के पास में थी हालांकि देखिए कि ये लोग कहते तो है ठाकुर ने स्वामी जी को कहा तो था कि भाई मेरे पास में जो शक्ति है मैं सब तुमको दे देना चाहता हूं तो फिर स्वामी जी ने नेचुरली सामने प्रति प्रश्न किया कि क्या मुझे ईश्वर प्राप्ति में यह सब सहाय होगी तो ठाकुर ने कहा नहीं किंतु तुमको यह जो जगत में वेदांत का प्रचार करना है उसमें शायद तुमको सहाय हो सकती है तो स्वामी जी ने कहा नहीं ईश्वर प्राप्ति के लिए जो सहाय भूत नहीं है ऐसी किसी भी तरह की शक्ति मुझे नहीं चाहिए तो मान लीजिए कि शायद स्वामी जी ने उस शक्ति को उस समय स्वीकार कर लिया होता तो वहां पे डेमोंस्ट्रेट देते ये जोसे बात करने के समय स्वामी जी एक्चुअल डेमोंस्ट्रेट शायद दे सकते थे कि देखिए कि मैं इस मेरे सामने यह जो किताब पढ़ी है मैं उसको अपने माइंड से कंट्रोल कर पाता हूं इसको मैं लेविट कर पाऊंगा यह जो सब हम लोग ये आजकल मूवीज में देखते हैं ना यह जो स्टोरीज में पढ़ते हैं वो रियली मतलब कि वो मैजिकल पावर होता है ना कि कोई फोर्स ऐसा कुछ होता है जिससे कि आप ऑब्जेक्ट्स को कंट्रोल कर पाए स्वामी जी हो सकता है ऐसा कोई डेमोंस्ट्रेट रियल लाइफ डेमो वो दे पाते हैं जद उन्होंने ठाकुर से शक्तियों को स्वीकार कर लिया होता किंतु खैर हमारी जानकारी में नहीं है कि स्वामी जी ने इस तरह का कोई भी पावर का डेमोंस्ट्रेट किया हो उन्होंने बात करके छोड़ दी है और बात करके छोड़ दी है वैसे हम इसके पीछे में जा भी सकते हैं किंतु रामकृष्ण साहित्य राम कृष्ण विवेकानंद साहित्य बड़े ही स्पष्ट शब्दों में कहता है कि इस तरह की जितने भी मिरेकल अस पावर्स है या तो फिर फिजिकल पावर्स है उसके पीछे में जदी हम दौड़ेंगे के पीछे में यदि हम लगेंगे तो मनुष्य जीवन का जो महत् उद्देश्य है सर्वोच्च धय है ईश्वर प्राप्ति उस पथ से हम शायद विचलित हो जाए उस पथ से हम शायद और कहीं दूसरे रास्ते पर चले जाए तो यह सब सिद्धियों के बारे में जान लिया सुन लिया और उसको वहीं पर छोड़ दिया हालांकि वो एक बार स्वामी जी ने कहा है कहा था कि जिसने भूत देखा है वो भी वो भी एक ठीक है माने क्यों अच्छी बात है क्योंकि वो सोचेगा यदि भूत सही है तो ईश्वर भी तो सही हो सकते हैं माने वो भूत देखने से ईश्वर पर उसको थोड़ा बहुत विश्वास आएगा हो सकता है कि उसकी नास्तिकता है स्केप्टिसिजम है थोड़ा कम होगा तो मैं भी कहता हूं भैया थोड़ी बहुत पावर ले लो इस तरह के तो फिर हमको यह भी पता चले जद यह जो प्राण का ऐक्य है इंडिविजुअल और कॉस्मिक लेवल पे तो हमको ये प्रूव हो जाएगा कि फिर इंडिविजुअल कॉस्मिक लेवल पे ये जो आत्मन का भी ऐक्य है तो थोड़ा सा का भी वो थोड़ा सा वो डेमो हो जाएगा इस जो भी है वो इसके लिए जो सालों साल बैठ कर के एकाग्रता पूर्वक प्राणायाम वगैरह करना वो कैपेसिटी अभी तो होनी चाहिए इ नॉट इजी टू कम बाय और जिसमें ये कैपेसिटी आती है जिसमें यह विवेक बुद्धि आती है जिसमें एक क्षमता आती है उसमें यह भी बड़ा क्लियर होगा कि इतना मेहनत करके यदि मैंने इसको अर्जन किया है तो फिर ये छोटी-मोटी चीजों में इसको मैं क्यों व्यय कर दूं जो ठाकुर की वो जो बिल्कुल सिंपल कहानी है कि दो भाई एक साधु बना एक गृहस्थ हुआ 1015 साल के बाद में दोनों इकट्ठा हुए तो गृहस्थ ने साधु को पूछा भाई तुमने इतने साल तपस्या की घर छोड़ करके अपना धर्म त्याग करके माता-पिता की सेवा का त्याग करके तुमने क्या प्राप्त किया तो वो साधु ने कहा देखो मैं इस तालाब के ऊपर में पैदल चल के जाके आ सकता हूं तो वो गृहस्थ ने कहा आता तो मैं तो 10 पैसे की नौका लेकर के जाके आ सकता हूं तुमने ऐसा कौन सा बड़ा तोप मार दिया है तो वैसे ही यदि आप अपने माइंड से यदि सब कुछ कंट्रोल कर सकते हैं तो ये ग ये जो साइंटिस्ट लोग कहेंगे कि हम रोबोट से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से स्पेसशिप से सब कुछ कंट्रोल कर सकते हैं उसके लिए तुमको इतना सब मेहनत करने की क्या जरूरत थी तो वो भी एक है कि साइंस और टेक्नोलॉजी आज इतने डेवलप हो गए हैं कि जो चीज कल हमको मिरेकल अस दिखती थी जो हमको कल जादू चमत्कार पूर्ण दिखती थी वो सब आज साइंस और टेक्नोलॉजी की मदद से आप कर सकते हैं तो बेटर है कि यदि आपने एक ऐसा रास्ता चुना है जो कि त्याग और तपस्या की ओर ले जाता है तो उस रास्ते पे चलके ईश्वर प्राप्ति करें नहीं कि वो सब चीजों में जाए जो कि आप गृहस्थ आश्रम में बुद्धि को चला करके भी प्राप्त कर सकते हैं हालांकि ये सब इंडिविजुअल चॉइस है ये वो वो पता है ना कि ऐसा बोलने वाले कौन होते हैं तो वो जो अंगूर खट्टे हैं वो एक कहानी है पंचतंत्र की कि एक शियाल है वो फॉक्स उसने बड़े जंप लगाए अंगूर को पाने के लिए अंगूर है वो कहीं डाल के ऊपर में वो टंगा हुआ है तो वो बड़े जंप लगा रहा है जंप लगा रहा है अंगूर हाथ में नहीं आ रहा फिर वो क्या कहके चला जाता है अपने मन को सदरा तो देना पड़ेगा ना बोला है कि अंगूर खट्टे इसलिए मैं मुझे नहीं चाहिए मैं जा रहा हूं यहां से हमको भी इस तरह से मन को सदरा देना है कि हमको ईश्वर प्राप्ति करनी है यह सब सिद्धि चमत्कार नहीं चाहिए इसके लिए मैं उसके पीछे नहीं जाता यदि जाएंगे तो मिलने वाला कुछ नहीं है क्योंकि उस तरह का डेडिकेशन डिसिप्लिन तपस्या हमसे कहां होने वाला है तो हमारे लिए सब बेसिकली थियोरेटिकल ओम शांति शांति शांति हरि

Questions & Answers

ओ जागतिक प्राण ऐसा नहीं इंडिविजुअल लेवल पर प्राण मेरे देह के भीतर में जो पंच प्राण है प्राण अपान व्यान उदान समान वो और कॉस्मिक लेवल पर जो प्राण है इस तरह के व्यष्टि समष्टि माइक्रो कजम और मैक्रो कजम दो लेवल पर प्राण है जागतिक और इस तरह का नहीं व्यष्टि और समष्टि इंडिविजुअल और कॉस्मिक समष्टि प्राण यानी कि कॉस्मिक लेवल पर प्राण जो कि स्वामी जी ने अभी बताया कि जितने भी जगत में फोर्सेस है इलेक्ट्रो मैग्नेटिज्म ग्रेविटी स्ट्रांग एंड वीक न्यूक्लियर फोर्स यह सबका मूल स्वरूप है वो कॉस्मिक प्राण सृष्टि का जब प्रारंभ होता है तो जितने भी पदार्थ है सूरज चंद्र तारे वगैरह वो जिस पदार्थ में से बनते हैं उसको आकाश कहते हैं और आकाश के ऊपर में जो कार्य करता है आकाश को ट्रांसफॉर्म करके सूरज तारे वगैरह जो बनाता है उसको प्राण कहते हैं उसको कॉस्मिक प्राण कहते हैं ये पूरा प्रवचन ही उसके ऊपर में है ये हमने जो आज का और कल का जो क्लास किया वो पूरा इसी के ऊपर में है वो कॉस्मिक प्राण को डिफाइन करने के लिए नहीं ईश्वर इसको नहीं कहेंगे ये ये सब नेचुरल फोर्सेस है नेचुरल फोर्सेस अर्थात ये ग्रेविटी के स नेचुरल फोर्स है या तो फिर यह इलेक्ट्रोम मैग्नेटिज्म कैसा नेचुरल फोर्स है तो यह जो प्राण भी एक नेचुरल फोर्स है व ईश्वर तो प्राण को कंट्रोल करेगा प्राण अपने से तो कुछ करेगा नहीं ईश्वर का डेफिनेशन क्या है उसका अपना एक एक क्या कहेंगे कि एक मोटिवेशन रहता है एनर्जी अभी जैसे कि मान लीजिए यह माउस है माउस का अपना तो कोई थिंकिंग नहीं है मैं जो इस माउस से करवाऊंगी वो यह माउस करेगा राइट तो ईश्वर है कि उसका खुद का एक थिंकिंग है प्राण का तो प्राण तो एक एक मटेरियल फोर्स है वह तो वही करेगा जो कि ईश्वर उसको कहेगा करने को ईश्वर के पास में कोई शक्ति भी तो होनी चाहिए ना कंट्रोल करने के लिए जैसे भगवान राम के पास में ये जो तीर धनुष है उन्होंने अपने हाथों से तो वध नहीं किया रावण का तीर धनुष से वध किया है भगवान कृष्ण के पास में सुदर्शन चक है एक हथियार है इनके पास में जिस हथियार से ये लोग वध करते हैं तो ईश्वर के पास में ऐसी तो कोई शक्ति होनी चाहिए जिसके माध्यम से यह सब नियंत्रण करें तो ये शक्ति है प्राण जैसे हमारे भीतर में भी प्राण रूपी शक्ति है हम भी उस प्राण रूपी शक्ति से विश्व ब्रह्मांड को नियमन कर सकते हैं यानी कि हम खुद ईश्वर बन सकते हैं यह पोटेंशियल है कह सकते हैं कि ये स्वप्न जागृत सुश पति और यह सृष्टि स्थिति प्रलय इन दोनों के बीच में इक्विवेलेंस मैंने इस तरह से पढ़ा तो नहीं है आप कर सकते हैं वही बात है कि स्वप्न जाग्रत सुषुप्ति इंडिविजुअल लेवल प है सृष्टि स्थिति प्रलय कॉस्मिक लेवल प है सो दैट इज वन बिग डिफरेंस अदर देन दैट आप कह सकते हैं किंतु क्या है कि हां चैतन्य तो दोनों के पीछे सभी अवस्थाओं में रहेगा यदि आप सुश उक्ति में भी हम लोग चले जाते हैं चैतन्य तो बरकरार है चैतन्य तो वैसे का वैसा ही है तो वो तुरीय अवस्था इसलिए उसको कहते हैं स्वप्न जागृत सुश पति और तुरीय तुरीय ट मींस बियोंड ऑल दिस तो यह सृष्टि स्थिति प्रलय की जो साइकल है उनके परे ब्रह्मण है तो एक तरह का इक्विवेलेंस आप बिठा सकते हैं एक्चुअल इक्विवेलेंस कितना है वो दैट इज अ मैटर ऑफ डिबेट किंतु आप एनालॉजी बिठा सकते हैं एटलीस्ट एनालॉजी बिठा सकते हैं मने ये जो ये हैरी पॉटर की कहानी सुनते हैं ना कि उसके पास में वो जादुई छड़ी है उससे वो जो वो कर सकता है तो देखिए वो मैंने वो हैरी पॉटर जैसा ना स्वामी जी ने भी इस तरह की कहानी हमको बता दी किसको पता सही गलत कितना हैस्ट पढ़ के तो आनंद आता है एक जो पॉइंट मैं बता रहा था कि मैक्रो कजम और माइक्रो कजम में स्वामी जी ने यह तो कहा कि अपने पास में वोह जो मैंने विश्व ब्रह्मांड और ये इंडिविजुअल ये दोनों के बीच में कनेक्शन है किंतु ये इंडिविजुअल विश्व ब्रह्मांड को कंट्रोल उसके लिए मैकेनिज्म क्या है ये प्राण रूपी जो मैकेनिज्म जो है ना ये एडेड यहां पर राजयुग में हुआ है वहां पर प्योर आत्मन के बारे में कहा है यहां पर बिनीत द आत्मन जैसे कि ये स्पिरिचुअल यूनिटी है ना वैसे ही ये मटेरियल यूनिटी यहां पे है एक्चुअली साइंस में एक थिरी जिसको कहते हैं होली ग्रेल ऑफ फिजिक्स इसको कहते हैं ग्रांड यूनिफाइड थिरी एक एक ऐसा इक्वेशन कि जिसके माध्यम से आप सभी फोर्सेस को आप डिस्क्राइब कर सकते हैं इसको आप उसको आप उसके इक्वेशन को सॉल्व कर सकते हैं तो ये देर इज अ होली ग्रेल ऑफ फिजिक्स कि एक ऐसा इक्वेशन हमको चाहिए जो कि पूरे विश्व ब्रह्मांड को डिस्क्राइब करे तो उस लेवल पे स्वामी जी यह जो प्राण है ना सॉर्ट ऑफ दिस ग्रांड यूनिफाइड थिरी ऑफ फिजिक्स कि सब कुछ प्राण से नियमन होता है इंक्लूडिंग विदन अस सो मने दिस इज एन एडेड लेयर ऑफ कॉम्प्लेक्शन म और माइक्रो कजम वाला लेक्चर और ये प्राण वाले तीन लेक्चर दोनों को आप साइड बाय साइड पढ़ेंगे ना आपको पता चलेगा कितने कंप्लीमेंट्री है एक दूसरे के वो होगी स्पिरिचुअल यूनिटी यह ई मटेरियल यूनिटी इवन मटेरियल लेवल पर सब कुछ यूनिफाइड है प्राण के रूप में जैसे स्पिरिचुअल लेवल प एवरीथिंग इ यूनाइटेड बाय आत्मा और ब्रह्मण ऑन द लेवल ऑफ मटेरियल यूनिवर्स एवरीथिंग इ यूनाइटेड बाय प्राण देखिए प्राण को ये जो कांसेप्ट ऑफ प्राण है इसका प्रैक्टिकल यूटिलिटी क्या होगा एक तो है कि हम अपने फिजिकल एनवायरमेंट को कंट्रोल कर पाएंगे यह जो 40 45 48 49 50 डिग्री टेंपरेचर इसमें यदि अपने पास में ऐसी कैपेसिटी हो कि बिना ऐसी के हम आसपास की सब कुछ ठंडा कर दे तो ट विल बी सच ए ग्रेट रिलीफ दूसरा है कि सबसे इंपोर्टेंट है बॉडी फिजिकल फिटनेस प्राणायाम इवन जद इतना एजोटिक कांसेप्ट में भी आप ना जाए तो सभी योगा इंस्ट्रक्टर आपको कहेंगे कि प्राणायाम इज अ बेस्ट व्हीकल फॉर फि टू मेंटेन योर फिजिकल फिटनेस तो कहते है ना कि शरीर माध्यम धर्म ख खलु धर्म साधन ये शरीर तो है कि धर्म का साधन यदि शरीर ही बीमार हो गया शरीर ही टूट गया तो आप कैसे धर्म करेंगे तो एक तो फिजिकल फिटनेस एक मेंटल फिटनेस एक विल पावर एक कैपेसिटी फॉर कंसंट्रेशन यह सब कुछ आ जाता है अर्थात कि एक व्हीकल रेडी हो जाता है जिसके भीतर में आप प्योर स्पिरिचुअल साधना आप इस व्हीकल के माध्यम से इस इंस्ट्रूमेंट के माध्यम से आप कर पाएंगे दैट इज द ग्रेटेस्ट बेनिफिट और यदि दूसरा एक कहे कि जो बात वैसे ठाकुर ने स्वामी जी को कही थी इस बात को वैसे हम लोग एक्सेप्ट नहीं करते किंतु फिर भी एटलीस्ट ठाकुर ने कहा तो था कि यह पावर से आप दूसरों का कल्याण कर सकते हैं इफ दिस पावर्स कम टू यू तो ये दो पॉसिबिलिटीज है अभी दूसरों के कल्याण के लिए पावर्स को यूज करना इसको फिलहाल यदि छोड़ भी देते हैं तो एटलीस्ट पहले वाली जो पॉसिबिलिटी है कि हमारा फिजिकल एंड मेंटल फिटनेस और दूसरा कि यह जो विल पावर है यह विवेक वैराग्य है यह सब तो आ जाएगा यानी कि एक इंस्ट्रूमेंट रेडी हो जाएगा जिसके माध्यम से हम वी विल गो टुवर्ड्स पोरर एंड मोर डीपर स्पिरिचुअल साधना जैसे कि डिवोशन जैसे कि शरणागति जैसे कि यह ध्यान जैसे कि ये आत्म चिंतन ये जिसको कि प्योर फॉर्म ऑफ स्पिरिचुअलिटी कहते हैं एक इंस्ट्रूमेंट रेडी हो जा जाए जिससे कि हम यह सब कर पाए वह तो स्वामी जी ने एक बार प्रवचन दे रहे थे ना अमेरिका में सडन वह स्टेज के ऊपर में से उतर गए और चले गए तो लोगों ने पूछा कि अरे स्वामी जी आपने क्यों आधे से बीच में प्रवचन छोड़ दिया इतना जम गया था लोग मंत्र मुगत हो करके आपको सुन रहे थे तो स्वामी जी ने क्या कहा कि देखो यदि मैं और ज्यादा डिटेल में बात करता तो मेरे पास में वो शक्ति आ जाती कि मैं लोगों के मन को कंट्रोल कर पाता तो अभी लोगों के मन को कंट्रोल कर के मटेरियल ज्म से स्पिरिचुअलिटी की ओर ले जाना वैसे तो अच्छी लगता है अच्छा किंतु उस लेवल पर टिक नहीं पाएंगे जैसे ही मैं यहां से चला जाऊंगा वो स्पिरिचुअल हाई से पूरा भोगवा के गड्ढे में गिरेंगे इसलिए मैं वहां से चला आया यह काली महाराज की बड़ी फेमस कहानी है स्वामी जी ने कहा मेरे पैर को स्पर्श करो जैसे ही स्पर्श किया वैसे ही उन्होंने हाथ खींच लिया वापस जैसे कि बिजली का करंट लगा हो और साथ-साथ में ही उनकी मति गति पूरी परिवर्तित हो गई कहां वो शरणागति भक्ति के रास्ते से जा रहे हैं एकाएक एक ज्ञान और वेदांत के रास्ते पर चले गए जिसके शायद वो अधिकारी नहीं थे स्वामी जी को ठाकुर को डांटना पड़ा स्वामी जी को कि इकट्ठा करने से पहले तुमने व्यय करना शुरू कर दिया यानी कि यह सब लोगों के मन को परिवर्तित करने वाली सिद्धि तो हमने देखी है कि बहुत सारी इस तरह की बातें हैं जो कि हमको पढ़ने को आती है ठाकुर किसी को भी स्पर्श ये कल्पतरु उत्सव कल्पतरु दिवस सबसे बड़ा अपने ऑर्डर में जो आजकल माने लोगों को जो सबसे अच्छा लगता है यह कल्पतरु दिन है व ठाकुर म स्वामी जी की तिथि पूजा वगैरह तो ठीक है चलो वो तो हमने मान लिया वो बहुत सारी जगहो प वो वृंदावन में भी जाएंगे वह राम लल्ला की व अयोध्या में है यह वृंदावन में वो बालकृष्ण की यह सब तिथि पूजा बहुत होती है किंतु ये एक है कि भाई भगवान ने हमको स्पर्श करके एक साथ में सब विश ग्रांट कर दी कामधेनु की तरह तो ठाकुर ने जिसको जिसको स्पर्श किया उसको आध्यात्मिक अनुभूति होना शुरू हो गया सो यह तो हमने देखा है कि यह तो बड़ा प्रचलित है अपने ऑर्डर में लोगों के मन को कंट्रोल करके स्पिरिचुअलिटी की ओर ले जाना दिस इज वेरी फेमस वो घटना बड़ी सुंदर है बाबूराम महाराज वो पूजा करके वो मंदिर की सीढ़ी से नीचे उतर रहे थे पुराने मंदिर की यदि वेलर मट गए होंगे तो आपने पुराना मंदिर देखा होगा और स्वामी जी वहां पर उनका जो फेमस आम गाज के नीचे में आम आम के पेड़ के नीचे में बैठे हुए थे बेंच के ऊपर में और जैसे ही बाबूराम महाराज उतरे वो सीढ़ी से तो स्वामी जी ने कहा ये देखो पूरा जगत जो है वो कृष्ण का ऐश्वर्य है ऐसा कुछ एगजैक्टली वो क्या कहा मैं भूल गया तो ऐसा जैसे ही कुछ कहा वो इमीडिएट बाबूराम महाराज स्थिर हो गए और उनको सही सही में अनुभूति हुई कि यह जो पूरा जो जगत है वो भगवान का ऐश्वर्य है तो इस तरह की अनुभूति स्वामी जी ने उनको इमीडिएट कर म ये कैपेसिटी थी स्वामी जी में अभी यह प्राणायाम का ही प्रताप है कि नहीं ऐसा तो हम ऐसा कोई सोरली नहीं कह सकते क्योंकि प्राणायाम में स्वामी जी ने ऐसा तो नहीं कहा कि हम दूसरों को आध्यात्मिक अनुभूति करवा सकते हैं उन्होंने कहा कि मटेरियल जो कोई भी चीजें हैं इसको हम कंट्रोल कर पाते हैं तो स्वामी जी को देखिए कि यहां पे स्वामी जी डेफिनेशन में कंफ्यूजन नहीं करते हैं स्पिरिचुअलिटी स्पिरिचुअलिटी है मटेरियल वर्ल्ड मटेरियल वर्ल्ड है स्वामी जी इस तरह से व वो क्लियर है उनकी डेफिनेशन में या या हालांकि देखिए ये सब चीजें क्या है ना कि हम लोग बुद्धि से समझने का प्रयास करते हैं तो नेचरली ये हमेशा वो डिस्क्लेमर करके रखना पड़ेगा कि जब तक अनुभूति नहीं होगी तब तक हम फॉर श्यर कुछ भी नहीं कह पाएंगे मिरेकल अस पावर नहीं मने यह जो स्वामी जी अनुभूति बाबूराम नहीं मिरेकल पावर नहीं है कृपा कहेंगे कृपा कृपा करके आपको ईश्वरीय अनुभूति करवाइए क