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Swami Vivekananda's Macrocosm & Microcosm ·

ज्ञान योग स्वामी विवेकानन्द Cosmos Microcosm 12 Jan 2024

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ओ स्थापक यज धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार षय राम कृष्णाय ते नम आज स्वामी जी की तिथि तिथि पूजा मने अकॉर्डिंग टू इंग्लिश कैलेंडर आज सुबह को यहां पर स्वामी जी का एक स्टेचू है सब साधु लोगों ने जाकर के माल्यार्पण किया और अभी 10 बजे यहां से प्रोसेशन स्टार्ट होने वाला है आज सुबह को मैं न्यू डिस्कवरीज पढ़ रहा था स्वामी जी की अमेरिका के दिनों के बारे में जो किताब है सुंदर एक इंसिडेंट है सेकंड टाइम जब स्वामी जी अमेरिका गए फर्स्ट टाइम तो गए थे तो अकेले गए थे किंतु सेकंड टाइम जब गए थे तो साथ में निवेदिता और रयान जी महाराज साथ में थे तो अभी जाने के बाद में पहले तो लंडन गए और उसके बाद में गए अमेरिका न्यूयॉर्क तो न्यूयॉर्क में जाकर के ऑलमोस्ट 10 सप्ताह 10 वीक्स वो रिजली मैनर नाम के एक बहुत ही सुंदर एक र् एक फार्म हाउस जैसा था वहां पे अभी भी है अभी तो रामकृष्ण मिशन को दे दिया गया है तो स्वामी जी के जो डिसाइल थे फ्रांसिस लगेट डिसाइल नहीं कहेंगे वे लोग तो अपने को डिसाइल नहीं कहते थे फ्रेंड्स फ्रेंड्स एंड एडमाइन को तो जब है उनके फ्रेंड का व एडमायब्रांड उन दिनों का जो वर्णन है न्यू डिस्कवरीज किताब में किया गया है जोसेफाइन मैक्लाउड स्वामी जी की अनदर एडमाइट्स का सीजन था समर और ऑटम का तो जोसेफाइन मैक्लाउड उन दिनों को ग्रेट समर बोलकर पुकारा करती थी और अपने लिटरेचर में भी आज कहेंगे कि द ग्रेट समर अर्थात कि एक भव्य ग्रीष्म तो भव्य ग्रीष्म क्या तो वो 10 सप्ताह जबकि स्वामी जी एक जगह पर रहे अपने डिवोर्स अपने एडमाइन दिनों जैसे थाउजेंड आइलैंड पार्क का जो एक वर्णन है फिर इस तरह से कुछ-कुछ वर्णन स्वामी जी के कुछ कुछ दिनों की यादें स्वामी जी के जीवन में इतनी सुंदर रूप से हमको मिलती है कि अपने वैसे तो स्वामी जी का जीवनी देखिए कि चारों ओर घूमना फिरना संघर्ष इसके साथ फाइट करना उसके साथ फाइट करना यहां पर ऑर्थोडॉक्स इंडियन है तो वहां पर वह ऑर्थोडॉक्स क्रिश्चियन है तो कहीं-कहीं पर स्वामी जी के चरित्र पर कोई कोई प्रहार करता है ऐसा सब तरह से वेदांत को जब युग इस युग में इस आधुनिक समय में प्रतिष्ठित करना तो किस तरह की बाधा विपत्ति आएगी वह तो हम समझ सकते हैं मां के वो बायोग्राफी में हम पढ़ रहे थे मां के जीवन की अवतरण का में कि किस तरह से आज के युग का असुर संहार हमारे हृदय में होता है नहीं कि बाहर के जगत में आज कोई एक 10 हाथ वाला 10 सिर वाला और आप मुंह में से आग निकालता ऐसा एक राक्षस आकर के हमारे सामने नहीं खड़ा हो जाएगा आज हमारे सामने हमारे ही भीतर के संशय हमारा ही घमंड हमारा ही अहंकार हमारी ही कामना वासना यह सब आकर के हमारे सामने खड़ी होती है और इसके साथ में जुझना है तो साथ-साथ में स्वामी जी ने इस तरह से वेदांत की प्रतिष्ठा की पूरे विश्व में किंतु कुछ जैसे कि एक स्वामी जी के स्वामी जी ने एक लेटर लिखा है टी स्टडी को स्टडी यानी कि स्वामी जी का लंडन का डिसाइल तो वह स्वामी जी को ऊपर में आक्षेप करता है जैसे बहुत सारे लोगों ने स्वामी जी पर आक्षेप किए हैं विभिन्न तरह के तो स्टडी ने भी किया कि आप लोग साधु लोग तो सन्यास की बातें करते हैं मोनेट सि जम त्याग और तपस्या की बातें करते हैं वो बोलते हैं मैं तो हिमालय में जाकर देखा तो मुझे वहां पर कुछ अच्छे सन्यासी दिखाई दिए वहां पर तपस्या करते थे दिन में एक रोटी खाके जीते थे और जिस तरह से वो एक ट्रेडिशनल साधु को रहना चाहिए इस तरह से रहते थे किंतु मैं आपका जीवन देख रहा हूं दिन में आप इतनी सारी चिरू महंगी महंगी चिरू सिगार व स्मोक कर रहे हैं आपको वह सब महंगा महंगा खाना चाहिए यह सब और अच्छे से रहने के लिए घर चाहिए यह सब आपका जीवन जो है अच्छे कपड़े चाहिए पहनने के लिए यह आपका जीवन जो है संन्यास परंपरा के अनुसार है ही नहीं तो इसका स्वामी जी ने बड़ा ही कठ कठोर भाषा में उसका उत्तर दिया था पहले तो स्वामी जी लिखते हैं कि देखो तुम्हारे लिए मैंने अपने जीवन का प्राण पात करके मैंने अपना पूरा स्वास्थ्य गवा करके स्वामी जी लंडन में का प्रवचन देने के बाद में जब भारत में आए थे उनको डायबिटीज वगैरह हो गया था उनके पहले तो उनका हेल्थ बहुत ही अच्छा था तो यह डायबिटीज वगैरह हुआ लंडन वर्क की वजह से लंडन में जो उन्होंने सतत एक के बाद एक प्रवचन देते रहे इसकी वजह से तो स्वामी जी कहते हैं कि मैं इतना काम कर रहा हूं इतना प्रवचन एक के बाद एक दे रहा हूं क्लासेस आफ्टर क्लासेस कर रहा हूं इसके लिए मेरे शरीर को जो पिक आहार चाहिए शरीर को टिकाने के लिए वो तो तुम तो कहां दे रहे थे आधा तो खर्चा मैं अपने से करता था मेरे लिए जो मैं जो कपड़े पहनता था आप हिमालय में या तो भारत में आप हमारा जो खुद का जमीन है वहां पर तपस्या करेंगे तो आप सीधे साधे कपड़े पहन के रह सकते हैं किंतु लंडन की ठंडी में यदि आप प्रवचन दे रहे हैं और साथ में यदि आपको गर्म कपड़े पहनने को नहीं मिलेंगे तो आपका जीवन निर्वाह कैसे होगा तो पहनने के लिए गर्म कपड़े अच्छा ये अच्छा घर यानी क्या क्ला क्स लेना है तो आपको अच्छी जगह चाहिए ही चाहिए वरना तो स्टूडेंट्स आक के बैठेंगे कैसे तो यह सब तो आधा तुमने दिया है आधा तो मेरे बाकी सब अमेरिका के जो शिष्य है फॉलोअर्स है उन्होंने दिया है तो तुम ऐसा दावा करने वाले कौन होते हो कि मैं तुम्हारे पैसों से लग्जरी में रहता हूं और फिर मैं लग्जरी में रहूं ना रहूं उसका डेफिनेशन तो मैं ठीक करूंगा मैं सन्यासी हूं तुम यह बोलने वाले कौन होते हो जैसे स्टडी का क्या था कि वो थियोसोफिकल सोसाइटी के वहां पर वो जाता था उस समय बहुत सारे लोग थियोसोफिकल सोसाइटी एनी बेसेंट वगैरह से प्रभावित हो गए थे कर्नल ओल कोर्ट वगैरह के उ उन लोगों से उनलोगों का था कि तिबेट से कुछ महात्माओं को बुलाते थे और यह महात्मा आकर के सबको उपदेश देंगे अभी वो महात्मा सुक्ष्म स्वरूप में रहेंगे सबको तो दिखाई नहीं देंगे तो यह वहां के जो पदाधिकारी थे वो लोग इंटरप्रेट करेंगे हां अभी महात्मा आ गए हैं सूक्ष्म स्वरूप में वो आपको यह कह रहे हैं बोलकर के लोगों को उल्लू बनाते थे मूर्ख बनाते थे तो ये सब वि भांडा फोड़ जिसको कहते हैं वो हो गया था उस समय तो मतलब लोगों को मूर्ख बनाते हैं पैसे अपनी जेब में रख लेते हैं ऐसा सब लोगों को पता चल गया था तो ये स्टडी वाज वेरी डिसपे कि थियोसोफिकल सोसाइटी में ऐसा ही होता है तो वहां पर जाने की हमको जरूरत नहीं है तो बोलकर के वह स्वामी जी से अट्रैक्ट हुआ था किंतु उसका मन के भीतर में जो विष था वो विष की वजह से सतत स्वामी जी के ऊपर में कुछ ना कुछ वो दोषारोपण करता रहता था तो आखिर में स्वामी जी ने उसको बड़ा ही कठोर और भाषा में पत्र लिखा उस पत्र में स्वामी जी लिखते हैं इतना सुंदर एक लाइन लिखते हैं कहते हैं कि मेरा जीवन एक मरुभूमि की तरह है य रण प्रदेश की तरह है चारों ओर एक प्रचंड अग्नि की तरह ऊपर से यह बारिश हो रही है अग्नि की और मेरे जीवन में कुछ भी नहीं है मैं अकेला इस मरुभूमि में इस रण प्रदेश में मैं अपनी यात्रा कर रहा हूं कभी-कभी मुझे इस तरह के कुछ मित्र मिलते हैं कि जिससे कि मुझे लगता है कि कि मैं किसी एक सुंदर ओआसिस में आ गया हूं ओआसिस पता है ना आपको मरुभूमि में जो डेजर्ट होता है वहां पर सडन आपको एक पानी का कुआ या पानी का छोटा तालाब मिल जाएगा जिसके चारों ओर कुछ पेड़ लगे होंगे तो जो जो यात्री इस तरह से डेजर्ट में यात्रा कर रहा है सडन उसको इस तरह से ओएसिस देखने को मिलेगा तो वो कितना खुश हो जाएगा तो स्वामी जी कहते हैं इस मरुभूमि की तरह इस डेजर्ट की तरह मेरा जीवन है मैं अकेले यह चलते चलते थकान भरी अवस्था में मैं चल रहा हूं क कभी-कभी मुझे कुछ मित्र मिल जाते हैं तो मुझे लगता है कि मैं इस तरह से एक सुंदर ओएसएससी लगा था तुमको मिलकर के कि हां मुझे मेरी केयर करने वाले मुझे अप्रिशिएट करने वाले कोई लोग तो है इस जगत में किंतु आखिर में तुमने भी धोखा दे दिया और मैं वही डेजर्ट में जो अकेले यात्रा कर रहा हूं सो कर ही रहा हूं इतना उने पोइन जिसको कहते हैं ना कि इतना मतलब भाव से भरा हुआ पत्र इस तरह से स्वामी जी ने वो स्टडी को लिखा था तो वो जैसे एक ओएस जैसा स्वामी जी के जीवन में वो एक लंडन के कुछ पहली विजिट के दिन थे सेकंड विजिट में स्टर्डी ने उनको उनके साथ में इस तरह से बिट्रेड किया उनको धोखा दिया किंतु फर्स्ट विजिट लंडन की स्वामी जी की बहुत ही पॉजिटिव थी उसी समय ये मिस्टर एंड मिसेस सेवियर और निवेदिता उनको मिले थे तो ऐसे ही एक दूसरा ओएससी स्वामी जी के जीवन में यह 10 सप्ताह रिजली मैनर में तो रिजली मैनर बहुत ही सुंदर एक गांव एक रिजली बोलकर के एक गांव है टाउन जैसा छोटा सा वहां पे एक बहुत बड़ा फार्म हाउस आई थिंक 4050 एकर का यह फ्रांसिस लगेट ने परचेस किया वहां पे सुंदर मकान बनाए और स्वामी जी को निमंत्रण दिया कि आप अमेरिका आ रहे हैं सबसे पहला यहां पे आकर के थोड़ा सा विश्राम कीजिए बाद में आपको जो करना है जहां पे जाना है प्रवचन देने के लिए जाइए तो स्वामी जी वहां पर रिजली मैनर में 10 सप्ताह रुके थे उस समय यह बेटी लगेट फिर फ्रांसिस लगेट मिस मैक्लाउड फिर रयान जी सब उनके साथ में थे तो उन दिनों की जो घटनाएं है इतनी सुंदर सुंदर सब रेमसंस है घटनाएं उसमें से एक जो मुझे बहुत अच्छा लगा बेटी लगेट अर्थात की फ्रांसिस लगेट की वाइफ और वहां की जो जिनका ओनर जिनको कहेंगे वो एक बार बेटी लगेट स्वामी जी को जिस स्वामी जीस कोटेज इसको अभी कहते हैं जिस मकान में ठहरने के लिए स्वामी जी को दिया गया था उसके पहले का नाम था लिटल कोटेज किंतु फिर स्वामी जी वहां पर रहे तो हमेशा के लिए उसका नाम हो गया स्वामी जी कॉटेज तो वोह स्वामी जी कॉटेज में वो बेटी लगेट देखने के लिए गई कि ये दोनों सन्यासी आए हैं तो उनको रहने की व्यवस्था सब ठीक-ठाक है कि नहीं वो देखने के लिए गई तो देखा कि वहां पर दो बेडरूम थे एक बेड बेडरूम में स्वामी जी रुके थे दूसरे बेडरूम में तुर्या अंद जी को दिया था तो तुर्या अंद जी के बेडरूम में जाकर देखा कि उन्होंने अपना मैट्रेस जो है जिसके ऊपर में सोया जाता है वो मैट्रेस बेड में से निकाल कर के जमीन पर बिछा दिया था और जमीन पर सो रहे थे तो बेटल गट ने कहा अरे स्वामी जी इज देयर एनी प्रॉब्लम विद दिस बेड इस ये जो बेड है जो खाट है इसके साथ में क्या कोई प्रॉब्लम है आपने अपना मैट्रेस जमीन पर क्यों बिछाया है तो तुर्या नंदजी ने कहा देखिए मैं स्वामी जी जिस लेवल पर सो रहे हैं उस लेवल पर मैं सोना नहीं चाहता मैं सो नहीं पाऊंगा इसीलिए मैंने अपना लेवल अपना मैट्रेस मैंने जमीन पर रख दिया जिससे कि मैं जिस लेवल पर सोऊ वो स्वामी जी से नीचे हो तो देखिए कि इन सब लोगों में गुरु भाइयों में जो आपस में प्रेम कितना दृढ़ कितना मजबूत था और स्वामी जी के गुरु भाई होने के बावजूद स्वामी जी के ऊपर में इन लोगों की कितनी श्रद्धा थी तो यह जब पढ़ते हैं ऑन वन हैंड स्वामी जी के जीवन में प्रचंड संघर्ष प्रचंड उनको कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है लोगों से फाइट करनी पड़ती है ऑन द अदर हैंड कितने लोगों ने स्वामी जी को धोखा दिया ऑन द अदर हैंड देखिए कि स्वामी जी ऐसे लोगों को इंस्पायर कर सकते थे अपने प्रति श्रद्धा और निष्ठा अपने प्रति इंस्पायर कर सकते थे यह बोलक के ही तो स्वामी जी का यह जो संघ इतने सालों साल तक चला और ने वाला है क्योंकि यहां पर आकर के हमको स् मैं जब बिल्कुल पहले दिन यहां पर आया था रामकृष्ण मिशन में बेलूर मठ में बेलर मठ में बिल्कुल पहले दिन गया था एक बड़े ही सीनियर साधु से जो हमारे इंचार्ज थे नए आए हुए ब्रह्मचार्य के तो उनको में जाकर के उनको तो प्रणाम करना पड़ता है और उनके साथ में बात करनी पड़ती है वोह डिसाइड करेंगे कि हम लोग यहां पर रहने के लिए एलिजिबल है कि नहीं सो सबसे पहला इंटरव्यू में रा ई जॉब इंटरव्यू तो कभी दिया नहीं किंतु रामकृष्ण मिशन में एक इंटरव्यू दिया है जो पहला इंटरव्यू जो महाराज को तो मैं जाकर के उनकी केबिन में जाकर के व मैं उनको प्रणाम किया बेलून मठ में और फिर महाराज ने बोला बैठो तो बैठा उनके सामने तो महाराज ने स्टार्ट किया कि वी आर द ब्लाइंड फॉलोअर्स ऑफ स्वामी विवेकानंद ऐसा ही स्टार्ट किया कि हम लोग स्वामी विवेकानंद के अंध भक्त है ब्लाइंड फॉलोअर्स तो जैसे ही मैंने यह सुना मैं थोड़ा सा मेरे मन में थोड़ा सा अनइजनेस जैसा हुआ क्यों क्योंकि हम लोग जब हिस्ट्री पढ़ते हैं तो यह हिटलर यह जो बहुत बड़े-बड़े राक्षस हो गए अपने इतिहास में यह लोग इतने बड़े पैमाने पे खूना मर की इतने बड़े पैमाने पे वॉर एंड रेवोल्यूशन ला सकते हैं किस कारण से कि क्योंकि उनके ब्लाइंड फॉलोअर्स है वे लोग बोलेंगे कि जाकर के इसको मार दो तो उसके ब्लाइंड फॉलोअर जाकर के उसको मार देंगे यह कर दो तो यह कर देंगे इसको जला दो तो उसको जला देंगे इसको तोड़ दो तो इसको तोड़ देंगे वे लोग फिर सोचे नहीं कि हमारे ये जो लीडर है वह बोल रहे हैं उसके पीछे एथिक्स क्या है मोरालिटी क्या है इसके पीछे धर्म क्या है हमारा क्या कर्तव्य है वे लोग कुछ नहीं सोचेंगे सही है गलत है गुड इविल सब चला जाएगा जब ब्लाइंड आप किसी को फॉलो करेंगे तो अभी मैंने और जब भी थर्ड रक जर्मनी का हिटलर का शासन जब समाप्त हो गया और हिटलर के जितने भी फॉलोअर्स थे उनके जनरल थे फिर वो पार्टी के ऑफिस बिरर उनके ऊपर में मुकद्दमा चलाया गया न्यूरेमबर्ग बोलकर के सिटी में तो उसको न्यूरेमबर्ग ल ट्रायल्स कहते हैं तो वहां का मैंने कुछ कोर्ट विवरण पढ़ा है वो कोर्ट में जज पूछते हैं उन लोगों को ये सब हिटलर के जनरल या तो नाजी पार्टी के जो ऑफिसर्स थे उनको कि अरे तुम लोगों को थोड़ा सा भी एक सेंस ऑफ शेम एंबेरेसमेंट गिल्टी फीलिंग ऐसा कुछ नहीं हुआ कि आप इतने सारे ू लोगों को डेथ चेंबर में कंसंट्रेशन कैंप में भेज देते थे तो यह लोग क्या कहते हैं पता है क्या उत्तर देते थे वी आर सिंपली फॉलोइंग ऑर्डर्स हम लोग तो सिर्फ ऑर्डर फॉलो कर रहे थे आदेश का पालन कर रहे थे हम लोग क्या सही है क्या गलत है मेरा क्या कर्तव्य है क्या अकर्वेंट बंद कर दिया था सिर्फ ऑर्डर्स फॉलो करते थे तो यह ब्लाइंड किसी को फॉलो करना वो आपको डिजास्टर में ले जाता है सही गलत की भावना मन में से चली जाती है फिर जो हमको बोला जाएगा हम करेंगे चाहे अच्छा कृत्य हो ना कि भयावह कृत्य हो आंख बंद करके हम कर लेंगे हमको वह राक्षस बना देगा और अदर वाइज सभी के हृदय में एक नीतिमत्ता का एक स्टैंडर्ड होता है कोई कितना ही गिर जाए सभी के भीतर में एथिक्स एंड मोरालिटी का एक छोटा सा प्रदीप जलता रहता है वो उसको बताता है कि मैं यह गलत कर रहा हूं मैं यह सही कर रहा हूं गलत कर रहा हूं और मेरे पास में यह चॉइस है यदि आप दुष्टता के भयावहता के रास्ते पे बहुत आगे बढ़ जाएंगे तब कहीं जाकर के यह सेंस खत्म हो जाएगा कि मैं क्या कर रहा हूं जो कर रहा हूं सही है या गलत है किंतु अदर वाइज जब हम स्टार्ट करते हैं इस जीवन में सभी के भीतर में यह मोरल कंपास जिसको कहते हैं वह सभी के हृदय में होता है कि क्या अच्छा कहे क्या बुरा है क्या करना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए किंतु जब एक राक्षसी वृत्ति हमारे मन पे हावी हो जाती है तब यह मोरल कंपास टूट जाता है तो यह कब होता है आधर के आप आपके कामना वासना से इतना मन भर जाए कि फिर हमारी बुद्धि भ्रष्ट हो जाए या तो फिर आप किसी को ब्लाइंड फॉलो करो तो ब्लाइंड फॉलो करने से वो जो कहेगा वो सही है वो उसको करना चाहिए फिर उसका सार असार नहीं देखना है तो मैं जब महाराज के साथ में बात करा किया बिल्कुल पहली बार मैंने किसी इतने सीनियर साधु के साथ में उससे पहले मैं बाकी सब सन्यासियों से मिला था जनरल एक पता है क्या है रामकृष्ण मिशन किंतु जो बेलूरमठ में जो रहते हैं उनका तो एक व्यक्तित्व ही अलग है उनका तो अथॉरिटी ही डिफरेंट टाइप का है तो इस लेवल के किसी के साथ में पहली बार में बात कर रहा हूं तो महाराज जी ने शुरुआत ही किया वी आर द ब्लाइंड फॉलोअर्स ऑफ स्वामी विवेकानंद तो मैंने सोचा मैं एकदम थोड़ा सा थोड़ा सा मैं भीतर से डर गया मैंने कहा मैं कहां प ये आ गया हूं कहीं कल जाकर के मेरे साथ में तो ऐसा नहीं हो जाएगा कि सार असार अच्छा बुरा भूल कर के मैं कुछ कार्य करने को लग जाऊं जो कि मेरे लिए ठीक नहीं है मेरे आध्यात्मिक जीवन के लिए उन मने विनाशक है ऐसा तो कहीं नहीं हो जाएगा किंतु फिर भी जो भी है मैंने यह सब थिरी और प्रैक्टिकल लाइफ में बहुत डिफरेंस होता है तो मैंने उस समय उसको ज्यादा किंतु वो मेरे माइंड में था कि ये यह जो बोले हैं यह लोग जो कर रहे हैं वह ठीक है कि नहीं देखिए कि उस बात को आज ऑलमोस्ट 20 साल हो गए हैं और आज मैंने मैंने इतना हिस्ट्री पढ़ा इतना सब कुछ पढ़ा इसके बावज मैं आज वही पोजीशन में हूं जो वह महाराज जी ने मुझे कहा था कि आई एम ए ब्लाइंड फॉलोअर ऑफ स्वामी विवेकानंद क्यों क्योंकि मैंने स्वामी जी का लाइफ बहुत ही डिटेल में पढ़ने का प्रयत्न किया है हमारा मनुष्य का बुद्धि तो सीमित होता है तो जैसे कि सीमित बुद्धि से कोई बहुत बड़ी चीज को जानना तो संभव नहीं होता किंतु जो जितना भी संभव है इतना मैंने जो प्रयत्न किया है तो मुझे लगता है कि स्वामी जी जैसा मनुष्य जैसा प्रोफेट संत महापुरुष इस पृथ्वी पर कितनी बार चले होंगे से मुट्ठी भर आप गिन सकते हैं अवतार की बात छोड़ दीजिए राम कृष्णा राम कृष्ण उनकी तो बात ही अलग है किंतु उनके बाद में जद देखेंगे कि अर्जुन या तो फिर आनंद या तो फिर सेंट पॉल या तो फिर यह स्वामी जी यह जो इनके फॉलोअर्स जो अपने आप में इतने बड़े सिद्ध पुरुष थे कि धर्म की स्थापना इन्होंने अपने कंधों पे की अपने कंधों पर उन्होंने यह जो अवतार का उपदेश अवतार का जो संदेश अपने कंधों पर वहा और यह मरुभूमि पार की और नेक्स्ट उसके मरुभूमि पार करके जो ओएसिस मिला वहां पर इस आदेश का इस संदेश की उन्होंने स्थापना की तब कहीं जाकर के यह जो सुंदर एक एक अमृत का यह जो तालाब है उसके चा इर्दगिर्द चारों ओर जो पेड़ सुंदर लगे हुए हैं वहा बैठ के हम लोग इस पेड़ के फल खा रहे हैं तो यह स्वामी जी स्वामी जी के बारे में जितना पढ़ेंगे जितना सुनेंगे इट्स नॉट इनफ हमारा पूरा जीवन चला जाएगा उनको समझने के लिए कितने जीवन चले जाएंगे तो कॉस्मस माइक्रो कोसम आज स्टार्ट करते हैं देखिए कि कल स्वामी जी ने जो हमको कहा कि पहले तो स्वामी जी ने हमको एक इंटरनल ऑर्गेनाइजेशन बता दिया कि किस तरह से इंद्रिया एक हार्ड र की तरह कार्य करती है इसके पीछे एक न्यूरल नेटवर्क है एक सॉफ्टवेयर है जो कि इस सिग्नल को इंद्रियों के सिग्नल को इंटरप्रेट करता है यह सिग्नल्स मन के पास में जाते हैं मन से वह बुद्धि के पास में जाते हैं आखिर में बुद्धि से वह जो अपने हृदय में जो सिंहासन के ऊपर में राजा विराजमान है सम्राट जो विराजमान है उनके पास में जाता है वह है आत्मन अभी स्वामी जी कहते हैं कि यह पूरा शरीर माइक्रो कजम अर्थात की यह व्यष्टि शरीर यह व्यष्टि शरीर को हम बेसिकली तीन कैटेगरी में डिवाइड कर दे सकते हैं एक तो है ये स्थूल शरीर जिसके यह कर्मेंद्रिय और ज्ञानेंद्रिय स्थूल शरीर के पार्ट है इसके बाद में आता है सूक्ष्म शरीर इसके भीतर में मन है बुद्धि है चित्त है और अहंकार है और इन दोनों के परे है कारण शरीर अर्थात या तो फिर कहेंगे आत्मन या तो फिर ब्रह्मण ये आत्मन और ब्रह्मण ही ये स्थूल शरीर और सूक्ष्म शरीर को चालित करते हैं जिस तरह से ये अभी स्वामी जी एक के बाद एक बहुत सुंदर सुंदर उदाहरण देंगे कि किस तरह से प्रकाश की वजह से ही यह सब कुछ चीजें दृश्य मान है यदि सूर्य का प्रकाश चला जाए तो जगत में कुछ भी दिखाई नहीं देगा वैसे ही आत्मन का प्रकाश हमारे स्थूल और सूक्ष्म शरीर पर पड़ता है तो स्थूल और सूक्ष्म शरीर जीवंत होते हैं अदर वाइज इसके भीतर में मृत देह और जीवंत शरीर दोनों के भीतर में अदर वाइज कोई फर्क नहीं रहता यदि इसके भीतर में आत्मन ना होती तो बहुत ही सुंदर एग्जांपल्स के द्वारा यह जो नेक्स्ट पैसेज जो है वेरी इंपोर्टेंट पैसेज वेरी एसेंशियल पार्ट ऑफ दिस लेक्चर स्वामी जी कहते हैं जस्ट एज द बॉडी हैज इट्स प्रोग्रेस एंड डिकेडेंस सो आल्सो हेस द माइंड शरीर का जिस तरह से वृद्धि या तो फिर शरीर का जिस तरह से क्षय होता है तो वैसे ही मन की वृद्धि और मन का भी क्षय होता है एंड देयर फोर द माइंड इज नॉट द सोल बिकॉज द सोल कैन नादर डिके नोर डिजनरेट इस वजह से मन या तो फिर सूक्ष्म शरीर आत्मन नहीं है क्योंकि आत्मन की ना ही वृद्ध होती है ना ही उसका क्षय होता है हाउ कैन वी नो दैट अभी यह बात हमको कैसे पता चली ये प्रश्न हो सकता है हाउ कैन वी नो दैट देयर इज समथिंग बिहाइंड दिस माइंड ये सूक्ष्म शरीर के भीतर में एक कारण शरीर एक आत्मन है यह बात हमको पता कैसे चली बिकॉज नॉलेज व्हिच इज सेल्फ लुमिनेट एंड द बेसिस ऑफ इंटेलिजेंस कैन नॉट बिलोंग टू डल डेड मैटर जो प्रकाश या तो ज्ञान या तो फिर यह विजडम या तो फिर यह आध्यात्मिक उपलब्धि यह एक डल डेड मैटर स्वामी जी कहते हैं जो मृत पदार्थ है यह पदार्थ का भाग कभी नहीं हो सकते मैटर यानी कि यह स्थूल जगत यह स्थूल जगत के भीतर में कभी भी आपको एक आध्यात्मिक उपलब्धि अब जैसे देखिए अद्वैत वेदांत की दृष्टि से तो यदि कहेंगे कि पशु है वृक्ष है यह पहाड़ है यह नदी है यह समुंदर है या मनुष्य है सबके भीतर में चेतन का प्रकाश तो है ही है किंतु वह चेतन के प्रकाश का जो मेनिफेस्टेशन है व्हिच इज वेरी डिफरेंट मनुष्य के भीतर में फुल मेनिफेस्टेशन है जबकि यह जड़ पदार्थ है उसके भीतर में बहुत ही सूक्ष्म रूप से यह मेनिफेस्टेशन होता है तो इसीलिए स्वामी जी कहते हैं कि यह स्थूल शरीर या तो जड़ पदार्थ का यह जो हमारा शरीर बना है इसके भीतर में एक चेतन वंत एक जागरूक एक जीवंत आत्मन किस तरह से है हमको कैसे पता चला पता इसलिए चला कि हमारी यह मेधा शक्ति हमारी यह आध्यात्मिक मुमुक्षु तोव क्यूरियोसिटी ये क्रिएटिविटी ये आर्ट और लर्निंग के प्रति हमारी यह जो आस्था है या तो फिर हमारी जो स्किल्स है हमारी जो एक्सपर्टाइज्ड और पढ़े और किसी सीनियर कोई मिल जाए बड़ा साइज का पत्थर तो जाकर उसको पूछे कि अरे भैया यह किताब में जो लिखा है उसका क्या तात्पर्य है सही भी है कि गलत है क्या पता यह प्रश्न करने की वृत्ति पत्थर में नहीं होती हालांकि चेतन का प्रकाश है किंतु वो मक्ष तोव वो ज्ञान पिपासा उसके भीतर नहीं है क्योंकि वो चेतन का प्रकाश बड़ा ही सूक्ष्म रूप से होता है जबकि मनुष्य के भीतर में चेतन का संपूर्ण प्रकाश है इसीलिए हमारी ज्ञान पिपासा हमारा मुमुक्षु जो भी एवरीथिंग चच इज गुड इनसाइड अस इट इज अ पार्ट ऑफ दिस आत्मन तो इसीलिए हमको पता है कि इसके जड़ शरीर के भीतर में एक आत्मन तो होना ही चाहिए वरना तो इस पत्थर और यह किताब और मेरे बीच में कोई डिफरेंस नहीं रहता नेवर वास सीन एनी ग्रॉस मैटर व्हिच हैड इंटेलिजेंस एज इट्स ओन एसेंस कोई भी स्थूल पदार्थ अभी तक नहीं देखा गया जिसका हरद जिसका एसेंस इंटेलिजेंस है चेतना शक्ति जिसके भीतर है यह चेतना शक्ति या तो कॉन्शसनेस हमारे भीतर में है पत्थर में आपको कभी नहीं दिखेगा आजकल यह जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चल रहा है कि हां हम प चेट जीपीटी है या तो आजकल बहुत सारे इस तरह से वे एआई एजेंट निकले हैं के वो आपने जो लिखा है उसका ग्रामेटिकल करेक्शन कर देगा आजकल तो ऐसा है कि आप उसको पोएट्री लिखने को बोले बोल दीजिए कि मां शारदा के ऊपर में पोएट्री बना कर के कोई अच्छा सा स्तव स्तोत्र बना कर के दे दो तो वो भी वो बना देगा ऐसा वो हम किसी ने भेजा था एक साधु ने ही प्रयत्न किया था मां के ऊपर में बता दिया कि ये आपको इस तरह से पॉइंट्स उसमें आने चाहिए तो बढ़िया मजे से उसने एक स्त्र बना कर के दे दिया मां के ऊपर में तो आपको लगेगा कि अरे ये जो पेंटिंग मिड जर्नी बोल करर के सॉफ्टवेयर है इसको आप बोलेंगे कि मुझे एक सुंदर पेंटिंग बना दो एक मंदिर का ऊपर में सूर्य का प्रकाश आ रहा है यहां पर सुंदर चारों और वृक्ष है तो फटाक करके आपको पेंटिंग बना करके दे देगा जो पेंटर्स जो लिटरेरी राइटर्स ऑथर साइंटिस्ट इन लोगों को सालों साल जो विद्या अर्जन करने के लिए लगते हैं वही विद्या यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस येय आपको क्षण भर में बना कर के दे देगा यदि कोई आजकल तो मैं प्रायः पढ़ता हूं कि साइंस का यह इक्वेशन एआई ने सॉल्व कर दिया अभी यह क्या होता है कि मेडिसिन जब नई बनानी होती है कोई नया ड्रग डेवलप करना होता है तो उसका डीएनए सीक्वेंसिंग करना पड़ता है और बहुत सारा कॉम्प्लिकेटेड यह होता है कि कोई पार्टिकुलर रोग के लिए पार्टिकुलर औषध किस तरह से असरकारक होगा तो आजकल एआई नई-नई औषधियां डेवलप कर रहा है नई-नई ड्रग डेवलप कर रहा है उसके भीतर में सब पैरामीटर डाल दो वो फटाक करके आपको बोल देगा कि इस तरह की जो डिसीज है उसके लिए इस तरह का कंपाउंड जो है केमिकल कंपाउंड वो उसको ये ठीक कर सकता है बोलक के मैंने मेडिसिन ड्रग्स आज एआई डेवलप कर रहा है इसके अलावा और क्या-क्या नहीं करता आज हम कुछ स्पेक्युलेटिव ऑथर्स को पढ़ते हैं अ कोई कोई लोग बोलता है आजकल प्रवचन देने वाले लोगों की कमी नहीं वह बोलते हैं जाकर के कि एक दिन ऐसा आएगा कि गवर्नमेंट भी एआई चलाने लगेगा किसको कितना पेंशन मिलना है किसको किको प्रमोट करना है किसको डिमोट करना है किसको क्या पोजीशन देनी है किसके पास से किस तरह का कार्य निकालना है किसको किस तरह से ट्रेन करना है एक खान एकेडमी बोलकर के एक अमेरिका में है उसका फाउंडर सलमान खान मैंने उसको पढ़ा है सुना भी है उसको उसकी एक टेट टॉक है बड़ा ही सुंदर वो उसका एजुकेशन फील्ड में है उसका तो वोह कहता है कि हम लोगों ने एक एआई एजेंट डेवलप किया है तो स्टूडेंट जो है उनको जिस तरह से टीचर को प्रश्न करने में बहुत सारे लोग को दिक्कत होती है टीचर ठीक से उत्तर दे भी पाएगा कि नहीं किंतु यह जो खान अकेडमी का यह जो एआई ये है उनका वो आप स्टूडेंट उसको प्रश्न करेगा कि हां यह जब सूरज का प्रकाश एक प्रिज्म में से पार होता है तो सफेद कलर का प्रकाश सात कलर में विभाजित हो जाता है तो ऐसा क्यों होता है तो फट कर के ई उसका उत्तर दे देगा यानी हम मानव सभ्यता को जिस तरह के प्रश्नों के उत्तर खोजने में हजारों हजारों साल चले गए यदि आज किसी को स्टडी करना है बीएससी एमएससी या एमटेक बीटेक करना है एमबीबीएस करना है तो उसको तो मिनिमम पाच छ आ साल तक उसको स्टडी करना पड़ेगा ऑलरेडी उसने अप टू हाई स्कूल तक यानी 12 साल तो स्टडी किया ही है प्लस इतने साल 12 15 18 साल स्टडी करने के बाद में हम कुछ सीख सकते हैं और फिर लाइफ लोंग स्टडी तो चाहिए ही चाहिए जो कि लेटेस्ट डेवलपमेंट है उसके साथ में व माहित गार रहने के लिए किंतु एआई जो है क्षण घर में यह सब चीजें सीख करके आपको उत्तर दे सकता है तो हमको प्रश्न होगा कि यह मने सीरियस प्रश्न हो सकता है कि एआई जीवंत है कि मृत है कि उसकी क्या परिस्थिति है उसके भीतर में क्या है और यदि मेरे से भी बेटर है तो यह मनुष्य सभ्यता क्या एक दिन ऐसा आएगा कि एआई विल रिप्लेस ह्यूमंस मनुष्य को हटा कर के एआई बोलेगा कि अरे ये लोग जो छोटे-मोटे लोग हैं कीड़ी मकोड़ी की तरह पृथ्वी पर घूमते रहते हैं एनवायरमेंटल डिजास्टर करते हैं पोल्यूशन फैलाते हैं एक दूसरों के साथ में झगड़ते हैं युद्ध करते हैं रेवोल्यूशन लाते हैं अन्याय करते हैं अपने से कम शक्ति वाले कम धनी लोगों गरीब लोगों के साथ में तो इनको तो जगत चलाना आता ही नहीं है इनको भगा दो यहां से और हम ही लोग पृथ्वी को बहुत ही सुंदर तरीके से चलाएंगे एआई बोलेगा कि हमको इतना ही पोल्यूशन करना है इतना सुंदर तरीके से हमारे समुंदर है उसमें पोल्यूशन नहीं डालना है हमारी जो फैक्ट्रियां है वो एकदम अनपोल्यूटेड होनी चाहिए हवा में ये जो कार्बन डाइऑक्साइड है बिल्कुल जीरो हो जाना चाहिए एक एकदम स्वर्ग नंदन वन जैसा हम पृथ्वी को बना देंगे मनुष्य की जरूरत ही नहीं है यदि एआई ऐसा सोच कर के हमारे ऊपर में राज्य करने शुरुआत करते तो हम कहां जाएंगे दि अ रियल पॉसिबिलिटी हमने इतना रेपिडली ये टेक्नोलॉजी डेवलप हो रही है हमको पता भी नहीं चलता आज यहां पे है कल कहां पे है मैं अच्छे ये सब चीजों को थोड़ा ट्रैक करता हूं आज से एक साल पहले यह सब बातें हमको बड़ी फैंटास्टिक लगती थी ये जो साइंस फिक्शन पढ़ते हैं ना आज से 10 आज से 100 साल के बाद बाद में ऐसा होगा 200 साल के बाद में ऐसा होगा तो ऐसा लगता था कि एआई डेवलप होते होते अभी 100 साल 200 साल 300 साल चले जाएंगे किंतु विदन वन ईयर खास करके 2023 इज द ईयर ऑफ द एआई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने एक साल में जो डेवलपमेंट किया है वो अद्भुत है माने एक साल पहले की पोजीशन और आज की पोजीशन को आप कंपेयर करेंगे तो इट्स माइंड ब्लोइंग कि इतना रैपिड डेवलपमेंट हो सकता है हमको तो एक आश्चर्य होता है तो ऐसा कहीं ना हो जाए कल परसों आज से 10 15 20 साल या 100 साल के बाद में कि एआई बिकम सेल्फ कॉन्शियस और हमको फिर हमारे ऊपर में राज करना शुरू कर दे तो यह जब आता है हमारे सामने इस तरह के प्रश्न तब यह स्वामी जी हमको कहते हैं कि यह जड़ जगत जो है वह चाहे कितना ही हमको इंटेलिजेंट लगे किंतु व है तो जड़ ही क्योंकि इसके भीतर में आत्मन का प्रकाश नहीं है एआई चाहे हमने जितना पैरामीटर्स उसको दिया है जितना नॉलेज हम हमने उसको दिया है उस नॉलेज के बेस पर एआई डिसीजन मेकिंग कर सकता है किंतु कोई बिल्कुल ही नई परिस्थिति खड़ी हो गई तो उसका सामना एआई शायद नहीं कर पाएगा भविष्य में क्या होगा पता नहीं किंतु आज का एआई नहीं कर पाएगा आज जो कि जिसको आउट ऑफ बॉक्स इश्यूज आउट ऑफ बॉक्स डिजास्टर जदी खड़े होते हैं तो आउट ऑफ बॉक्स सॉल्यूशन मनुष्य के भीतर में से ही आएगा क्योंकि मनुष्य के भीतर में वह देवत्व है जि देवत्व से यह पूरा संसार प्रकाशित है उस देवत्व में से ही संसार में रहने का संसार को चालित करने का यह प्रकाश आएगा क्षण भर के लिए लगे कि मनुष्य सभ्यता शायद अधोगति की ओर जा रही है सिविलाइजेशन इज डिक्लाइंग ऐसा मोमेंट लग सकता है इतिहास में ऐसे बहुत सारे पैसेजेस हुए हैं ऐसे बहुत सारे फेजस में से अपना मानव सभ्यता पसार हुई है जबकि लगता है कोई एक बड़े जैसे तैमूर लंग तैमूर लंग के बारे में मैं अभी कुछ दिनों के पहले पढ़ रहा था तो वह भारत में उसने आक्रमण किया दिल्ली के ऊपर में दिल्ली सुलतानत के ऊपर में तो उस समय तैमूर लंग के जो जनरल है वे लोग लिखते हैं वे लोग तैमूर को जाकर के बोलते हैं कि अरे दिल्ली में भारत में जाएंगे बड़े बड़े हाथी है वो हाथियों का सामना हम घोड़े पर बैठ के कैसे कर पाएंगे आज तक कोई को जीत नहीं पाया है क्योंकि वहां पर सबके पास में बड़े-बड़े हाथी है तो ये सोचता है अभी देखिए पता नहीं एआई को देंगे तो क्या सोल्यूशन निकालेगा तैमूर लंग क्या सोचता है कि उसके पास में बहुत सारे ऊंट थे कैमल तो कैमल के ऊपर में उसने बहुत सारा पुवाल डाला यह जो धान को काटने के बाद में जो ये पुवाल जो होता है वो वो उसके ऊपर में डाला और उसको बहुत सारे माने 100 200 इतने वो केमल ऊंट एक एक लाइन में खड़ा कर दिए उनके ऊपर में ये पुवाल डाला हुआ है बंडल बना कर के और फिर पुवाल को जला दिया अभी आप सोचिए कि ऊंट के ऊपर में तो भयानक आग लगी है तो ऊंट तो पागल होकर दौड़ना शुरू कर देगा तो ये हाथियों की जो पूरी लाइन युद्ध के दिन में हाथियों की पूरी लाइन थी अप उसके पीछे में उनकी सेना सुरक्षित थी दिल्ली की दिल्ली सल्तनत की तो सामने पूरे ऊंट की लाइन बना दी और उनके ऊपर में पुवाल रख के जला दिया ये ऊंट पागल की तरह मने वो तो पागल ही हो जाएंगे म तो सीधा हाथियों की ओर दौड़े अभी हाथी भी ये अप पूरी आग की दीवाल उनके सामने आ रही है वो देख कर के हाथी भी पागल हो गए और पीछे मुड़ कर के अपनी ही सेना को पूरा अपने पैरों के नीचे कुछड़ी तो ऐसा करके तहमूर ने वो दिल्ली पर विजय प्राप्त किया तो इस तरह के और उसके बाद में जो हुआ बड़ा ही विभ भयानक वर्णन है कितने सारे लोगों को मार करके वो कटे हुए सरों की बड़े-बड़े पहाड़ बनाए वगैरह वगैरह किंतु दो तरह से एक तो है कि आउट ऑफ बॉक्स थिंकिंग आउट ऑफ बॉक्स सॉल्यूशन यह सब आत्मन का प्रकाश है उसी में से आते हैं भले ही चाहे उसका मिसयूज हो एक चीज दूसरा कि मानव सभ्यता में ऐसे बहुत सारे समय आया है जबकि लगता है कि इस तरह से युद्ध की आग में सभ्यता का विनाश हो गया किंतु हर बार जैसे फिनिक्स पंखी की तरह ये जली हुई आग में से फिर से सभ्यता का जन्म होता है कोई ना कोई संत महापुरुष आकर के ये प्राय मृत प्राय मनुष्यों को एक आशा की किरण देता है एक दिव्य संदेश सुनाता है मनुष्य के हृदय में फिर से स्नेह भक्ति और श्रद्धा का संचार करता है और सभ्यता फिर से खड़ी होती है तो यह जो बार-बार सभ्यता का गिरना और भयानक अग्नि में से दावा अग्नि में से सभ्यता का फिर से पुनर्जन्म होना यह तभी हो सकता है जबकि एक डिवाइन पावर हमारे पीछे में खड़ा है तो इसीलिए स्वामी जी कहते हैं कि यह जड़ शरीर है शरीर शर है इसके पीछे एक दिव्य आत्मन है यह बात हमको कैसे पता चली तो यह बात इसलिए हमको पता चली कि पूरे मनुष्य सभ्यता की हिस्ट्री पढ़ के देख लीजिए पूरे मनुष्य का जीवन पढ़ करके देख लीजिए जीवन एनालाइज करके देख लीजिए जो कुछ भी अच्छा है जो कुछ भी सुंदर है जो कोई भी विद्या है जो कोई भी विज्ञान है जो कोई साधना मुमुक्षु तोव है सब आत्मन में से आते हैं वो किसी जड़ पदार्थ में हो ही नहीं सकते अदर वाइज जो आत्मन नहीं होती तो हम यह जो जंगल में पशु की तरह शिकार करते हुए घूमते तो उसी लेवल पे रहते हैं बार-बार हमने सिविलाइजेशन को बनाया बार-बार यह सिविलाइजेशन युद्ध की आग में खत्म हो गई और इस युद्ध की आग में से सिविलाइजेशन का बार-बार पुनर्जन्म हुआ ठाकुर का आना उस समय भारत गुलाम था जो परिस्थिति थी एक के बाद एक फेमिन आते थे लाखों लाखों लोग मर जाते थे इतना मृत प्राय भारत में से ठाकुर और स्वामी जी और मां के आगमन से फिर से एक जीव जीवन दान मिला फिर से भारतीय सभ्यता खड़ी हुई तो यह मृत प्राय अवस्था में से फिर से चेतना प्राप्त होना फिर से जीवंत प्राप्त जीवंत होना फिर से जीवन प्राप्त होना यह कोई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यह कभी नहीं कर पाएगा इसके पीछे तो एक दिव्यता की शक्ति ईश्वर का आशीर्वाद होना ही चाहिए इसलिए हमको पता है कि जड़ शरीर के पीछे में एक डिवाइन आत्मन अवस्थित है तो आज यही तो कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शति शांति हरि ओम तसत श्री राम कृष्णर्पण