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Swami Vivekananda My Plan Of Campaign ·

मेरी क्रान्तिकारी योजना : स्वामी विवेकानन्द : भारतीय व्याख्यान || 2 Jan 2025

Invocation

ओम स्थापक यज धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपिणी अवतार षय राम कृष्णाय ते नमः स्वामी विवेकानंद का लेक्चर फ्रॉम कोलंबो टू अल्मोड़ा इसका एक चैप्टर माय प्लान ऑफ कैंपेन इसका हम पाठ करेंगे और इसके ऊपर में थोड़ा सा चर्चा करेंगे कल हमने देखा कि किस तरह से पहले तो हमने कल एक बैकग्राउंड बनाया एक पूर्व भूमिका बनाई कि स्वामी जी का यह जो माय प्लान ऑफ कैंपेन लेक्चर है या तो फिर स्वामी जी भारत में आकर के भारतवासियों को स्वामी जी ने जो मैसेज दिया है इसके पीछे की पूर्व भूमिका क्या है हम देख जयदिश का कंप्लीट वर्क से इसको थोड़ा सा एनालिसिस करके हम देखें तो हमको एक पैटर्न नजर में आता है हमको दिखता है कि विदेश में यानी कि न्यूयॉर्क में और लंडन में स्वामी जी ने जो प्रवचन माला दी उसको चार योगों में हमने प्रकाशित किया है चार योगों में विभक्त कर सकते हैं हालांकि कोई भी योग अपने से इंडिपेंडेंट नहीं है किंतु फिर भी प्रत्येक योग के भीतर में दूसरे योगों का समन्वय तो है ही है किंतु प्रत्येक योग में प्रधान प्रधाना तः उस योग की बात की गई है जैसे कि कर्म योग ज्ञान योग भक्ति योग और राज योग यह चार अपने ट्रेडिशनल भारतीय साधन प्रणालियां है उसको स्वामी जी ने अमेरिका में और यूरोप में डिस्कस किया था लोगों को इसका उपदेश भी दिया था और फिर हमने यह भी देखा कि किस तरह से स्वामी जी ने थाउज आइलैंड पार्क में अपने कुछ चुनिंदा शिष्यों को इकट्ठा करके उसमें से किसी किसी को ब्रह्मचर्य दीक्षा दी थी और दो अमेरिकन को उन्होंने सन्यास दीक्षा दी थी तो यह स्वामी जी का जो अमेरिका में कंट्रीब्यूशन था वो एक हमको दिखता है कंपेयर धश टू स्वामी जी ने भारत में क्या किया शरदचंद्र चक्रवर्ती जिसने कि स्वामी शिष्य संवाद लिखा है उसने स्वामी जी को पूछा था कि आपने अमेरिका में जिस तरह से वक्त होता और यह प्रवचनों की धूम मचाई थी ऐसा आप भारत में क्यों नहीं कर रहे हैं ये उस समय की बात है जबकि स्वामी जी ने जो जब स्वामी जी भारत में प्रथम बार आए तो यह जनुअरी 18864 ये जो यंग लड़के थे यह जो कॉलेज एजुकेटेड मिडिल क्लास फैमिली के की डेमोग्राफी माने जब भी आपको मार्केटिंग करना होता है तो आपको पूछा जाता है कि आप किस डेमोग्राफी को आप टारगेट कर रहे हैं डेमोग्राफी अर्थात की एज एंड इकोनॉमिकल प्रोफाइल और यह एक साइकोलॉजिकल प्रोफाइल भी बनता है तो स्वामी जी जिस की डेमोग्राफी को टारगेट कर रहे थे मिडल क्लास एजुकेटेड लड़के जिन्होंने थोड़ा बहुत एक विदेशी शिक्षा प्राप्त की है और भारतीय संस्कृति पर गर्व भी है और भीतर से एक पुकार उठती है कि ये विदेश के ये जो अमेरिका या ब्रिटेन इतने एडवांस है तो हम भारतीय लोग भी उनकी तरह पॉलिटिकली और इकोनॉमिकली एडवांस क्यों नहीं हो सकते ये तो दैट इज वन थ्रेड ऑफ थिंकिंग दूसरा है कि एक अंतरात्मा की आह्वान होती है प्रत्येक भारतीय जो कि भारतीय भूमि पर जन्म ग्रहण करता है उनको आप देखिए कि हमेशा यह हिमालय की पुकार यह गंगा की पुकार उनके हृदय में गूंजती ही रहेगी हो सकता है कि वह आजकल का यह जो मोरल करप्शन है उसमें उसके चक्कर में पड़ कर के क्षणिक भर के लिए शायद इस सब आह्वान को भूल जाए यह जो ऋषि मुनियों की यह जो गीता गान था उनका उपनिषदों का गान था वह शायद हो सकता है कि क्षण भर के लिए ूल जाए किंतु जब भी जीवन में बड़े से टर्निंग पॉइंट आएंगे जीवन में एक बड़ा सा बदलाव आएगा उस समय प्रत्येक भारतीय वही ऋषि वही हिमालय वही गंगा का गान उनको स्मरण होगा उनके कानों में हृदय में गूंजना शुरू हो जाएगा तो यह एक की डेमोग्राफी को टारगेट करके स्वामी जी ने संघ की स्थापना की वहां पर साधुओं को तैयार करके गांव-गांव शहर शहर वेदांत उपनिषद का प्रचार करने के लिए भेजना था तो यह जो सब काम चल रहा था उस समय शरद चंद्र ने स्वामी जी को पूछा था कि आप क्यों नहीं विदेश की तरह यहां पे भी वक्त देते हैं तब स्वामी जी ने कहा था कि देखो भारत में इतना तमस है भारत देश की परिस्थिति ऐसी है कि अभी आध्यात्मिक साधना के बारे में जनसाधारण को यदि सिखाने को जाएंगे तो वो उसको ठीक से ग्रहण नहीं कर पाएंगे यदि हम प्रचार भी करेंगे तो फिर क्या हो जाएगा ये कर्ता बजा वगैरह कुछ-कुछ संप्रदाय उस समय अ पॉपुलर हो गए थे उसके जैसा एक विकृत स्वरूप होकर के रह जाएगा तो इसके लिए सर्वप्रथम चाहिए कि तमस में से रजस में आए फिर हम रजस में से सत्व में जाने की बात करेंगे और स्वामी जी का था कि विदेशी यह जो राजसिक कल्चर है स्पेसिफिकली यह राजसिक टेंडेंसी है उसको थोड़ा सा भारत में इंपोर्ट किया जाए और अपने पास में ये जो सात्विक कल्चर है सात्त्विक धरोहर है अपने पुरखों की ऋषि मुनियों की उसको विदेश में एक्सपोर्ट किया जाए यह स्वामी जी का इंपोर्ट एक्सपोर्ट का प्लान था तो और ये शरद च चंद्र को कहते भी है स्वामी जी उसने इंपोर्ट एक्सपोर्ट के ही संदर्भ में कि देखो तुम एक काम करो यह सब नौकरी पोकरी ये टीचर फीचर का काम छोड़ कर के तुम एक एक्सपोर्ट इंपोर्ट का काम चालू करो माने यह बिजनेस प्योर बिजनेस स्वामी जी कहते हैं मैं तुमको सिखाऊंगा कैसे से करना है तो स्वामी जी का यह जो सेंस ऑफ रियलिटी था बड़ा ही स्ट्रांग था बहुत बार ऐसा होता है कोई कोई लोग आध्यात्मिक रास्ते पर जाना शुरू करते हैं तो वो लोग अपना है ना एक सेंस ऑफ रियलिटी है या सेंस एक कॉमन सेंस है वो खो बैठते हैं फिर पता नहीं किस तरह के मामलों में वे लोग उलझ जाते हैं तो स्वामी जी का किंतु ऐसा नहीं था तो ऐसा था स्वामी जी का क्लियर थिंकिंग था कि भारत को स्पिरिचुअलिटी एक्सपोर्ट करनी है और वहां से यह जो एक वंडर है य सिर्फ राजसिक

Swamiji in Madras (Chennai)

यानी कि ऐसा नहीं कि आप युद्ध वगैरह इंपोर्ट करें वहां से क्योंकि वहां पर वेस्ट में डिस्ट्रक्टिव टेंडेंसीज भी बहुत सारी है किंतु हमको वहां पर कौन सी टेंडेंसीज या तो उनका कौन सा एक माइंड सेट है जो कि भारत में इंपोर्ट करने की जरूरत है तो यह देखिए कि देर इज अ गोल्डन थ्रेड ऑफ फिलोसोफर एंड साइंटिस्ट इन दी फॉरेन वेस्टर्न कल्चर एक पूरा एक सूत्र पकड़ कर के आप आप देखिए कि ग्रेटेस्ट फिलोसोफर ग्रेटेस्ट साइंटिस्ट ग्रेटेस्ट इंजीनियर्स ग्रेटेस्ट टेक्नोक्रेट्स वहां पर एक के बाद एक उनका आविर्भाव हुआ है और उन्होंने वेस्टर्न सिविलाइजेशन को कितना एनरिच किया है यह जो प्लेटो एरिस्टोटल अच्छा अभी आप कहेंगे कि प्लेटो ज एरिस्टोटल था तो अपने भी तो भास्कर थे वराह मिहिर थे और अपने भी तो वो थे तो चलो उस समय की बात यदि छोड़ दे और यहां से रिसेंट हिस्ट को यदि देखें पिछले रेनेसा जिसको वेस्ट में कहा जाता है रीबर्थ ऑफ लर्निंग तो यह रेनेसा से प्रारंभ हुई हिस्ट्री को देखिए देखिए जब तक रेनेसा हुआ तब तक विश्व का यह जो वर्ल्ड का प्रोफाइल कैसा था भारत था या तो चीन था यह दोनों सर्वश्रेष्ठ सिविलाइजेशन कही जाती थी और यह जो वेस्टर्न यूरोप था उसको हालांकि वे लोग बुरे नहीं थे किंतु यह ईस्ट के सामने खास करके चीन भारत जापान कोरिया यह जो एंसटिटाइट हुआ वेस्टर्न यूरोप में रीबर्थ ऑफ लर्निंग उसने पूरे वर्ल्ड का प्रोफाइल ही चेंज कर दिया पता नहीं यह हमारी ईस्टर्न सिविलाइजेशन यह जापान कोरिया ये इंडोनेशिया फिर मलेशिया भारत चीन ये जो कि एंट सिविलाइजेशंस थी ग्लोरियस सिविलाइजेशंस थी एक समय में हम लोगों का पेर पता नहीं किस तरह के कुंडा में जाकर के गिर गया वो गुजरात में ऐसा होता है आप रास्ते प जाएंगे ना वो तांत्रिक लोग बीच में एक सर्कल बनाते हैं वोह राइस वगैरह और फिर मिर्च है लेमन है वो सब करके एक सर्कल बनाते हैं माने इसमें जिसका पैर गिर गया उसका बड़ा ही अकल्याणेंकीलम गिर जाना तो हमारा भी यह जो ईस्टर्न सिविलाइजेशन थी पता नहीं किस तरह के कर्म का विपाक क हो ना कि क्या हम लोग अंधेरे में हम लोगों ने जंप लगाया हम लोग अंधेरे की ओर बढ़ना शुरू हुए हमारा पतन प्रारंभ हुआ और वेस्टर्न सिविलाइजेशन का उत्थान प्रारंभ हुआ यहां ईस्ट में जैसे कि सनसेट हुआ वेस्ट में जैसे कि सनराइज हुआ रिवर्स हो गया सनसेट सनराइज का जनरली सनराइज होता है ईस्ट में ये ईस्टर्न सिविलाइजेशंस के ऊपर में और सनसेट होता है सूर्यास्त होता है वेस्ट में किंतु ऐसा नहीं होकर के सूर्यास्त होना शुरू हुआ हमारी पूर्वी सभ्यता पे और सूर्योदय होना शुरू हुआ यह वेस्टर्न यूरोप पे और फिर जब नॉर्दर्न अमेरिका आज का यूनाइटेड स्टेट उसका जब यह उत्थान प्रारंभ हुआ तो उसका जो प्रभाव जो था इतना जबरदस्त था कि स्वामी जी जैसे स्वामी जी को वहां पे अमेरिका में जाना पड़ा यह सोच कर के कि शायद यह लोग हमारी मदद कर सके ऑफकोर्स इसके पीछे में और भी बहुत सारे ये है फैक्टर्स बात सिर्फ यह नहीं है कि स्वामी जी उनसे मदद लेना चाहते थे देखिए स्वामी जी के मन में एक दूसरा भी भाव था यह ठाकुर ने उनको बताया था ठाकुर ने उनको ऐसा नहीं कहा कि हां पैसों की मदद लेने के लिए जो विवेकानंद रॉक के ऊपर में ठाकुर ने आकर के स्वामी जी को दर्शन दिया तो वहां पर सि यह फैक्टर नहीं था कि स्वामी जी वहां से पैसे लेकर के आएंगे चैरिटी लेकर के आएंगे भिक्षा लेकर के आएंगे और फिर हमको खिलाएंगे सिर्फ ऐसा वन साइडेड कभी होता नहीं है उनको स्पिरिचुअलिटी की आवश्यकता थी अभी भी है और हमको यह मॉडर्न थिंकिंग मॉडर्न लर्निंग मॉडर्न वे ऑफ लिविंग की आवश्यकता थी जो कि हम वहां से लेंगे ये एक्सचेंज होना चाहिए यह ठाकुर ने जब स्वामी जी को इशारा कर के जब बताया पश्चिम की ओर तो वहीं से यह सीड फॉर्म में आईडिया स्टार्ट हो गए थे तो यह स्वामी जी का आईडिया था अभी देखिए कि स्वामी जी का मैंने कभी-कभी मैं सोचता हूं आजकल की जो सिचुएशन है प्रेजेंट अपना आज का स्वामी जी की मा समाधि 1902 में हुई तो अभी यह 1900 2024 चल रहा है ऑलमोस्ट 120 इयर्स पास हो गए हैं 122 इयर्स पास हो गए हैं स्वामी जी की महासमाधि को ये 122 इयर्स में देखिए कि क्या परिवर्तन आ गया है आज ऐसी परिस्थिति है कि हम लोग यह सुंदर पिचाई और यह सत्य नडेला जैसे यह टेक्नोक्रेट्स को वहां पे एक्सपोर्ट करते हैं और फिर वहां पर यह योगा का बड़ा चलता है तो यह य जो क्रेज है क्रेज फॉर योगा वो हम लोग वहां से इंपोर्ट करते हैं देखिए किस तरह से यह ला फ्लिप हो गया है इक्वेशन जो हमको यहां से एक्सपोर्ट करना था योगा वो भी वहां से इंपोर्ट कर रहे हैं तो बहुत सारे लोग बोलते हैं मैं जब यह कहता हूं मेरा य एक मुझे एक बहुत अच्छा लगता है जब यह वेस्ट में योगा का प्रचार हो रहा है मैं कभी-कभी इसको डिस्कस भी करता हूं तो फिर कोई कोई कहता है अरे उसमें क्या है वे लोग तो स्पिरिचुअल एस्पेक्ट तो लेते नहीं है वे तो सिर्फ हेल्थ के पीछे में ही पागल है तो मैं कहता हूं अरे भैया ऐसे ही करके तो आप इसमें प्रवेश करेंगे ना आप जैसे कि अभी अपने ऑर्डर में देखिए डिपेड स्पिरिचुअल पर्सन

Swamiji in Madras (Chennai)

कौन है तो वो ठाकुर भी नहीं वो तो मां है किंतु आप पहले ही मां को पढ़ना शुरू कर देंगे तो हो सकता है कि आपको मां के ऊपर में इतना निष्ठा और भक्ति ना आए आपको स्वामी जी से शुरू करना होगा स्वामी जी को पढ़ कर के उनका ये कर्मयोग करके हृदय और चित्त को निर्मल करके ठाकुर के पास आएंगे ठाकुर से शिक्षा प्राप्त करेंगे ठाकुर थोड़ा सा अपना ये घडतर करेंगे तब तो कहीं जाकर के आप मां के पास जाएंगे ऐसे ही तो जाया जाता है ना ये द स्टेप्स आर देयर तो ये हेल्थ के लिए भी तो योगा को तो ले हेल्थ के लिए भी तो नमस्ते बोले हेल्थ के लिए भी तो ओम बोले फिर तो जो होना है नमस्ते ओम भीतर में काम करना शुरू हो जाएगा अपने ऋषि मुनि थोड़ी मूर्ख थोड़ी ना थे कि ऐसे ही यह सिस्टम बनाया है तो यह अभी देखिए कि इक्वेशन ऑलमोस्ट फ्लिप हो चुका है किंतु खैर फिर भी अभी देखिए कि भारत की जो परिस्थिति है 150 करोड़ की पॉपुलेशन है और इस पॉपुलेशन में देखिए कि वेल्थ डिस्ट्रीब्यूशन जो है जिसको जीनी को एफिशिएंट कहते हैं यह जिनी जो इंडेक्स है वो वेल्थ डिस्ट्रीब्यूशन को दिखाता है इसका अर्थ है कि धनी लोगों के पास में कितना परसेंटेज ऑफ वेल्थ है टोटल जीडीपी का और यह फिर यह मिडल लेयर के पास कितना है और लोअर लेयर ऑफ इनकम वालों के पास में कितना है तो भारत में जो वेल्थ डिस्ट्रीब्यूशन है व बड़ा ही डेंजरस इन द फेवर ऑफ वेल्थी पीपल जनरली सभी सोसाइटी में ऐसा होता ही है फाइव पर 10 पर 30 पर जो वेल्थ होती है सोसाइटी की वो 1 पर के पास में होती है तो ये तो ठीक है किंतु भारत में यह जो वेल्थ डिस्ट्रीब्यूशन जो है अभी लेटेस्ट फिगर मुझे याद नहीं है किंतु यह बड़ा ही डेंजरस है कि जो लोअर लेवल पे जो लोग रहते हैं उनकी अवस्था बहुत ही खराब है अ एक इकोनॉमिस्ट को मैं सुन रहा था वो बोलता है कि देयर आर एक्चुअली नॉट वन इंडिया देयर आर थ्री इंडियाज एक भारत नहीं है तीन भारत है तो कैसे तो एक भारत है जो कि वेस्टर्न यूरोपियन लेवल के लग्जरी और उसमें रहता है और सेकंड इंडिया जो है दूसरा भारत जो है यह इंडोनेशिया मलेशिया टर्की इस तरह की यह जो मिडल लेवल इनकम के जो नेशन है उसके लेवल पे रहता है और यह थर्ड इंडिया जो है जो कि विश्व का सबसे गरीब और पछत प्रदेश कहा जाएगा सब सहारण अफ्रीका अर्थात कि सहारा के नीचे में यह जितने भी देश है यह कोंगो है यह वगैरा तो यह जो थर्ड इंडिया है वह सब सहारण लेवल पर रहता है तो देर आर एक्चुअली थ्री इंडियास एक यूरोपियन इंडिया है एक आप कहेंगे साउथ ईस्ट एशियन इंडिया है और तीसरा है सब सहारन इंडिया तो हम लोगों को और बहुत बार मैं ऐसा सुनता हूं कि अभी रामकृष्ण मिशन को सेवा करने की क्या जरूरत है अभी तो चारों ओर नी सारी स्कीम चल रही है गवर्नमेंट की ओर से दूसरे भी नॉन गवर्नमेंटल ऑर्गेनाइजेशंस है कि अभी हमको सेवा करने की ज्यादा जरूरत नहीं है अभी हमको सिर्फ कल्चरल एक्टिविटी करनी है तो मेरा कहना है कि देखिए पहली बात तो है कि सेवा कार्य का प्रारंभ स्वामी जी करके गए थे और स्वामी जी ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जब तक यह 1500 साल तक यह मिशन चलेगा हां अभी एक बात है जो कि डेस्प्रिंग थी वो अभी धीरे-धीरे करके कम होती गई है किंतु और इसलिए अन्नदान की इतनी चिंता करने की जरूरत नहीं है किंतु फिर स्वामी जी ने तो सेवा के चार लेयर बताए हैं सर्वप्रथम है अन्नदान दूसरा है स्वास्थ्य दन या तो फिर जीवनदान तीसरा है विद्यादान और सबसे हाईएस्ट है ज्ञान दन तो यदि हम यह कहेंगे कि हम सिर्फ ज्ञान दान ही करते रहेंगे स्पिरिचुअल या तो कल्चरल एक्टिविटीज ही करते रहेंगे और बाकी के जो तीन है विद्यादान जीवनदान और अन्नदान इसमें से चलो अन्नदान को फिलहाल छोड़ देते हैं तो यह विद्यादान और जीवन दन यह दोनों अभी ना करें या तो फिर इसके ऊपर में हम कम एमफे साइज करें यह समय अभी नहीं आया है यह हेल्थ और एजुकेशन इन दोनों की य जो रूरल इंडिया है इसको डेसपरेट नीड है और इसके ऊपर में बहुत सारा कार्य होना चाहिए तो खैर यह तो एक पूर्व भूमिका के रूप में हमने देखा स्वामी जी का मैसेज का ऐसा है ना कि हम जब पूर्व भूमिका के बारे में बात करना जाएंगे तो उसी के ऊपर में पूरी सीरीज बन जाएगी फिर वो जो इतना डेप्थ है सभी चीजों के पीछे में तो इसको थोड़ा सा कट शॉर्ट करके पूर्व भूमिका को एक्चुअल लेक्चर में हम प्रवेश करते हैं माय प्लान ऑफ कैंपिंग अच्छा अभी देखिए यह जो पूरा

Structure of this lecture = 3 themes

लेक्चर है इसको आप एनालाइज करेंगे तो आप तीन स्टेजेस में इसको बा बाट सकते हैं तीन मेजर थीम में इसको बांट सकते हैं

theme 1 outline = Swami Vivekananda's reply to attacks on him

सर्वप्रथम तो थीम है एक सरप्राइजिंग कि और कहीं पर स्वामी जी का यह थीम देखने को नहीं मिलता जो कि इस लेक्चर की एक स्पेशलिटी है बाकी जितनी भी थीम है बाकी और दूसरे लेक्चर में प्रवचनों में लेटर्स में आपको मिल जाएगा उसका सिमिलर एक्सप्रेशन किंतु यह जो सर्वप्रथम थीम है इट इज यूनिक टू माय प्लान ऑफ कैंपेन वो थीम क्या है कि स्वामी स्मी जी के ऊपर में किसी किसी लोगों ने आक्षेप लगाना शुरू किया था जब स्वामी जी अमेरिका में थे उनसे यह देखा नहीं गया कि एक भारतीय एक गुलाम प्रजा का एक रिप्रेजेंटेटिव काला आदमी यह अमेरिका में तो रेसिजम बड़ा स्ट्रांग था तो एक काला आदमी अमेरिकन की दृष्टि से काला आदमी और यहां भारत में उनको शुद्र बोलना शुरू कर दिया था किसी किसी ने तो ये रेसिजम और यह कास्टि जम ये दोनों की बजह इन दोनों का सहारा लेकर के स्वामी जी और फिर यह गुलाम भारत तो था ही था एस सच हम लोग इंडियन वैसे ही हम लोग हसी और फिर ये तुच्छ के पात्र थे विदेश में तो यहां से एक व्यक्ति एक ऐसा संत महापुरुष जो कि वहां जाकर के लोगों को यह धर्म का उपदेश दे बहुत सारे लोगों से यह सहा नहीं गया और उन्होंने स्वामी जी पर आक्रमण किया बहुत सारे आक्रमण किए जिसके बारे में स्वामी जी कहते हैं कि मैंने विदेश में जब तक था तब तक तो मैंने कुछ नहीं कहा था किंतु अब मैं भारत में जब आया हूं तो मुझे मेरे पर हुए आक्रमणों का कुछ तो उत्तर देना पड़ेगा अभी ये देखने की बात है कि स्वामी जी ने ऐसा क्यों किया अब विदेश में थे तो कुछ नहीं बोले थे और जब भारत में भी आए और जब उन्होंने अपना एक इंटेंशन प्रकट किया था लेक्चर से पहले कि आज मैं बहुत सारे बम फेंकने वाला हूं तो उनके किसी-किसी मित्रों ने उनको डिटर करने का प्रयास किया था उनको यह मना करने का प्रयास किया था कि आप ऐसा मत कीजिए यह जो बड़े-बड़े लोग के सामने आप कुछ बोलेंगे आज तो फिर उनके साथ में अपना रिलेशन बिगड़ जाएगा तो उसके बावजूद भी स्वामी जी ने अपने पर हुए आक्रमणों का उत्तर दिया था प्रति आक्रमण किया था स्वामी जी का तो सिर्फ उत्तर देने वाली बात नहीं है अटैक इज द बेस्ट डिफेंस ये स्वामी जी का पॉलिसी है तो प्रति आक्रमण किया था तो इसके पीछे का क्या एक रिजल है हम लोग जब सरफेस के ऊपर से पढ़ेंगे इसको तो हमको एक हिस्टोरिकल कांटेक्ट दिखाई देगा और यह जब मैं शुरू शुरू में यह लेक्चर में क्लास करूंगा इसके ऊपर में मैंने जब सोचा एक बार मैंने सोच भी लिया था कि यह जो स्वामी जी का जो प्रति आक्रमण है इसको स्किप कर दिया जाए क्योंकि यह तो कांटेक्ट रिलेटेड है अभी वह कॉन्टेक्स्ट चला गया अभी तो स्वामी जी का इंपोर्ट एक्सपोर्ट का आईडिया पूरा फ्लिप हो गया अभी तो अभी इसको डिस्कस करने से क्या लाभ है किंतु मैंने देखा कि नहीं इसके भीतर में भी बहुत कुछ हमको आज भी सीखने के लिए है तो जो सरफेस के ऊपर में हमको एक हिस्टोरिकल कॉन्टेक्स्ट दिखता है बिनीत द डीपर अ बनीथारो सा डिस्कस करेंगे सो दिस इज द फर्स्ट फेज ऑफ माय प्लान ऑफ कैंपेन सेकंड स्टेज में

Theme 2 outline = Decline and Rise of India

स्वामी जी एक बड़ा ही इंपोर्टेंट टॉपिक डिस्कस करते हैं द राइ एंड फॉल ऑफ सिविलाइजेशन या तो फिर कहेंगे फॉल एंड राइज ऑफ इंडियन सिविलाइजेशन किस तरह से पहले तो स्वामी जी ये एसेस करते हैं कि भारत का पतन हुआ क्यों उसके बाद में स्वामी जी हमको यह प्लान दिखाते हैं कि भारत का पतन हुआ तो भी उसका उत्थान कैसे होगा देखिए यह आखिरी 1000 साल की हिस्ट्री पूरा स्वामी जी एस करके जैसे कि नट शेल में एसेंशियल फॉर्म में हमारे सामने रख देते हैं सो दिस इज द सेकंड फेज और थर्ड

Theme 3 Outline = Swamiji's Patriotism

फेज है स्वामी जी का पैट्रियोटिज्म आजकल हम लोग पेट्रियोटिक सम नेशनलिज्म इसकी बहुत बड़ी-बड़ी बातें करते हैं किंतु स्वामी जी हिमसेल्फ वो इसकी डेफिनेशन कैसे करते हैं वो हमको कैसे समझाते हैं दैट वी विल सी इन द थर्ड फेज तो ये तीन फेजस है आज हम सर्वप्रथम स्टार्ट करते हैं फेज वन से और उसमें भी आपने आप देखिए कि मैंने आपके साथ में जो डॉक्यूमेंट शेयर किया है मैंने उसमें पॉइंट्स बना दिए हैं और पॉइंट्स इस तरह से बनाए हैं कि हम प्रतिदिन एक एक पॉइंट या एक दो पॉइंट लेंगे तो जो पॉइंट हम स्टार्ट करेंगे उसको उसी दिन समाप्त करने का प्रयास करेंगे जिससे कि क्या होगा कि हमारा एक ओवरऑल अंडरस्टैंडिंग बनता जाए अभी ऐसा नॉट नेसेसरी टू थिंक कि मैंने जो पॉइंट बनाए हैं वही एक प्रॉपर असेसमेंट है यह मेरी दृष्टि से मैंने पॉइंट बनाया है और कोई जद इसमें पॉइंट बनाने को जाएगा ही मे डू इट अदर वाइज आल्सो इन अनदर वे आल्सो तो जो भी

Theme 1.1 = Expression of Gratitude

है जो आज का जो फर्स्ट पॉइंट है वह तो बड़ा ही सिंपल है एक्सप्रेशन ऑफ ग्रेटव्यू स्वामी जी को जब यह सन्मान अच्छा सर्वप्रथम तो माय प्लान ऑफ कैंपेन प्रवचन दैट इज दिस इज द फर्स्ट ऑफ फोर पब्लिक लेक्चर इन मद्रास मद्रास में स्वामी जी ने चार पब्लिक लेक्चर दिए थे उसमें से सर्वप्रथम यह है डिलीवर्ड एट द विक्टोरिया हॉल विक्टोरिया हॉल में दिए गए थे एट 5:30 पीएम ऑन ट्यूसडे 9 फेब्रुअरी गया जिसके उत्तर में स्वामी जी क्या कहते हैं कि एज द अदर डे वी कुड नॉट प्रोसीड ओइंग टू द क्राउड आई शल टेक दिस अपॉर्चुनिटी ऑफ थैंकिंग द पीपल ऑफ मद्रास फॉर द यूनिफॉर्म काइंड दैट आई हैव रिसीवड एट देयर हैंड्स पहले दिन भी एक प्र हुआ था कार्यक्रम जहां पर स्वामी जी को स्वागत जो सन्मान पत्र दिया गया था उनके सन्मान में प्रवचन दिए गए थे स्वामी जी उसका उत्तर नहीं दे पाए क्योंकि बहुत भीड़ थी तो स्वामी जी कहते हैं कि आज मैं इस अपॉर्चुनिटी का फायदा उठा कर के आप सबको मेरा ग्रेटव्यू मेरी यह जो सद्भावना आपके प्रति मैं एक्सप्रेस करता हूं आई डू नॉट नो हाउ बेटर टू एक्सप्रेस माय ग्रेट ूडल वर्ड्स दैट हैव बीन एक्सप्रेस्ड इन द एड्रेसस देन बाय प्रेइंग टू द लॉर्ड टू मेक मी वर्दी ऑफ द काइंड एंड जनरस एक्सप्रेशंस एंड बाय वर्किंग ऑल माय लाइफ फॉर द कॉज ऑफ अवर रिलीजन एंड टू सर्व अवर मदरलैंड एंड मे द लॉर्ड मेक मी ऑफ देम और यह जो ग्रेट ूडल करना चाहता हूं मैं किस तरह से प्रदर्शित करूं इतना सम्मान मिला तो सन्मान का उत्तर देने का फिर एक तो मेरे पास में शब्द भी नहीं है तो मैं क्या करूंगा ईश्वर के सामने ईश्वर के पास में आप सबके कल्याण के लिए मैं प्रार्थना करूंगा और जो मैं जिस जिस परपस के लिए जिस परपस के लिए जिस उद्देश्य के लिए मैंने घर त्याग किया है विदेश में गया था जिस धर्म का प्रचार करने के लिए मैंने अपना जो पूरा जीवन दे दिया है तो उस उद्देश्य की पूर्ति के लिए ईश्वर मुझे सक्षम बनाए मे द लॉर्ड मेक मी वर्दी ऑफ देम यह जो आपका यह जो शब्द है आपके यह जो ग्रेट ूडल के लिए मैंने अपने जीवन को न्योछावर किया है इन दोनों के लिए ईश्वर जैसे कि मुझे वर्धी बनाए मुझे सक्षम बनाए अच्छा इतना तो हो गया अभी स्वामी जी स्टार्ट करते हैं गोला बारुद फायरिंग स्वामी जी कहते हैं विथ ऑल माय

Theme 1.2 = Persecution of Swamiji by Theosophical Society

फॉल्ट्स आई थिंक आई हैव अ लिटल बिट ऑफ बोल्डनेस मेरे जितने भी ये शॉर्टकमिंग्स होंगे मेरे जितने भी फॉल्ट्स होंगे उस सबके बावजूद मेरे पास में एक ऐसी चीज है एक ऐसी स्ट्रेंथ है एक ऐसी एसेट है जो कि इन सबके परे हैं वो है बोल्डनेस एक साहस एक उत्साह एक करेज जो मेरे में है आई हैड

I had a message from India to the West, and boldly I gave it to the American and the English peoples.

अ मैसेज फ्रॉम इंडिया टू द वेस्ट एंड बोल्डली आई गेव इट टू द अमेरिका मेरे पास में भारत से अमेरिका को देने के लिए एक संदेश था और बोल्डली साहस पूर्वक मैंने उत्साह पूर्ण होकर के मैंने इस मैसेज को अमेरिका को दिया है एंड द इंग्लिश पीपल अमेरिका को और ब्रिटिश लोगों को मैंने यह मैसेज दिया है आई वांट बिफोर गोइंग इन टू

I want, before going into the subject of the day, to speak a few bold words to you all.

द सब्जेक्ट ऑफ द डे टू स्पीक अ फ्यू बोल्ड वर्ड्स टू यू ऑल और यह जो बोल्डनेस मेरे में है यह बोल्डनेस यह साहस यह उत्साह यह करेज जो कि मुझे यह सात समुंदर पार करके विदेश में ले गया भारतीय ऋषि मुनियों की हिमालय की गंगा की यह जो शास्त्र वाणी मैंने उनको सुनाई यह सुनाने का साहस जो मेरे में था उसी साहस के आधार पर आज मैं आपको और भी कुछ चीजें कहना चाहता हूं र

There have been certain circumstances growing around me, tending to thwart me, oppose my progress, and crush me out of existence if they could.

हैव इन सर्टेन सरकमस्टेंसस ग्रोइंग अराउंड मी टेंडिंग टू थर्ट मी अपोज माय प्रोग्रेस एंड क्रश मी आउट ऑफ एक्जिस्टेंस इफ दे कुड मेरे आसपास में कुछ ऐसी परिस्थितियां जन्म ली थी ऐसी परिस्थितियां इकट्ठी हुई थी जो कि मेरा जो उद्देश्य है उस उद्देश्य से मुझे पथ करना चाहती थी उद्देश्य से मुझे भटका देना चाहती थी मेरी यह जो प्रगति थी उसमें बाधा विपत्ति उभी खड़ी करना चाहती थी और क्रश मी आउट ऑफ एक्जिस्टेंस चाहे यदि चाहे उनके पास में क्षमता हो तो जैसे कि मेरे प्राण भी हर लेना चाहती थी ऐसी कुछ परिस्थितियां मेरे चारों ओर मेरे इर्दगिर्द उपस्थित हुई थी जब मैंने यह ऋषि मुनियों की सनातन वाणी आज की आधुनिक सभ्यता को सुनाने का प्रयास किया था थैंक गॉड दे हैव फेल्ड ईश्वर की

Thank God they have failed, as such attempts will always fail.

कृपा है कि ऐसी शक्तियां ये आसुरी शक्तियां अपने कार्य में अपने विकट कार्य में निष्फल हुई एज सच अटेम्प्ट्स विल ऑलवेज फेल क्योंकि धर्म के रास्ते में सत के रास्ते में बाधा देने वाली आसुरी दानवी शक्तियों का हमेशा पराजय ही होगा बट देयर हैज बीन

But there has been for the last three years a certain amount of misunderstanding.

फॉर द लास्ट थ्री इयर्स अ सर्टेन अमाउंट ऑफ मिसअंडरस्टैंडिंग अभी यह शक्तियों ने मुझे ज्यादा नुकसान तो नहीं पहुंचाया किंतु भारतवासियों के मन में इस इन शक्तियों ने किसी तरह का एक मिसअंडरस्टैंडिंग खड़ा करने में सक्षम हुई है क्योंकि वैसे ही भारत गुलाम था और देखिए स्वामी जी का जो अमेरिका जाने का जो उद्देश्य था ना वो इट सॉर्ट ऑफ ए ड्यूल एजेडब्ल्यू की यह संपत्ति की ओर शायद आकर्षित हो तो ये किंतु यह जो विदेश से चकाच होकर के उनका अनुकरण करने का जो पॉजिटिव एक एस्पेक्ट स्वामी जी ने लेना चाहा उसका नेगेटिव एस्पेक्ट भी तो है वही स्वामी जी की निंदा जब विदेश में शुरू हुई बाद में स्वामी जी कहेंगे कि ऐसा एक भी भयावह असत्य नहीं जो कि उन्होंने मेरे बारे में खोज निकाला ना हो तो स्वामी जी के चरित्र के बारे में स्वामी जी की खानपान रहने पीने खाने सोने यह सब कार्यकलाप जो है इन सबके बारे में भयावह झूठ उन्होंने फैलाना शुरू किया था तो भारत की ये जो वैसे ही गुलाम मानस है वैसे ही स्वामी जी खुद चाहते थे कि उनकी सराहना मिलने से पश्चिम की सराहना मिलने से भारत में जद योग वेदांत और आज की आधुनिक सभ्यता के पॉजिटिव एटीट्यूड पॉजिटिव एस्पेक्ट है वो यदि अपने देश में देश बांधव में संक्रमित किए जाए तो उसका जो नेगेटिव एस्पेक्ट जो है फ्लिप साइड जो है इसके कि स्वामी जी को ही जद वहां पर निंदा और जो है ये झूठ का सामना करना पड़े झूठ फैलाया जाए आज की लैंग्वेज में जिसको कहते हैं मिस इंफॉर्मेशन एंड फेक न्यूज वो यदि वहां से फैलना शुरू हो तो उसका थाउज टाइम्स उसका असर भारतीय लोगों के ऊपर में पड़ेगा और स्वामी जी का जो कार्य है वो शुरू के स्टार्टिंग से ही जैसे कि एक तरह से पंगु हो जाएगा तो यह मिसअंडरस्टैंडिंग फेक न्यूज और इसको हटाने की बड़ी आवश्यकता थी तभी रामकृष्ण मिशन अपने फाउंडेशन को सक्षम मजबूत करके भविष्य में वो पनप सकेगा अदर वाइज उसके फाउंडेशन में ही एक तरह का एक डाउट है संदेह है वो रह जाएगा तो भविष्य में यह संघ ज्यादा प्रोग्रेस नहीं कर पाएगा तो स्वामी जी ने कहा कि इसके लिए मुझे कुछ बोलने की आवश्यकता है

So long as I was in foreign lands, I held my peace and did not even speak one word; but now, standing upon the soil of my motherland, I want to give a few words of explanation.

सो लंग एज आई वाज इन फॉरेन लैंड्स आई हेल्ड माय पीस एंड डिड नॉट इवन स्पीक वन वर्ड जब तक मैं विदेश में था तब तक तो मैंने शांति बनाए रखी और इस भयावह मिस इंफॉर्मेशन कैंपेन जो मेरे अगेंस्ट में चल रहा था इसके बारे में मैंने किसी तरह का विरोध नहीं जताया बट नाउ अंडरस्टैंडिंग अपॉन द सोइल ऑफ माय मदरलैंड आई वांट टू गिव अ फ्यू वर्ड्स ऑफ एक्सप्लेनेशन किंतु आज अपनी पवित्र भारत भूमि पर जब मैं खड़ा हूं तब यह मिस इंफॉर्मेशन कैंपेन यह काला झूठ मेरे बारे में फैलाया जा रहा था इसका मुझे किसी ना किसी तरह का सामना करना होगा इसके बारे में मुझे कुछ ना कुछ कहना पड़ेगा नॉट दैट आई केयर व्हाट द रिजल्ट

Not that I care what the result will be of these words, not that I care what feeling I shall evoke from you by these words.

विल बी ऑफ दिस वर्ल्ड क्योंकि अब अब जो भी मैं कहूंगा उसके बारे में उसका जो असर होगा इस असर को इसका ये जो रिपल इफेक्ट होगा या तो फिर इसका जो रिएक्शन आएगा तो क्या आएगा इसकी मुझे परवाह नहीं है नॉट दैट आई केयर व्ट फीलिंग आई शल इवोक फ्रॉम यू बाय दिस वर्ड्स और मैं यह भी चिंता नहीं करता कि मेरा ऐसा कहने से आपके मन में किस तरह की भावना का उदय होगा देखिए यह स्वामी जी क्यों कह रहे हैं पहला जो सेंटेंस है वह तो हमको समझ में आता है कि स्वामी जी का विरोध करने वाले लोग अभी स्वामी जी यदि उनका प्रतिकार करते हैं तो वो किस तरह से रिएक्ट करेंगे और और भी ज्यादा बढ़ चढ़ करके विरोध करेंगे और भी ज्यादा जहर फैलाए ऐसा सब करेंगे तो स्वामी जी के जो गुरु भाई थे कुछ कुछ या तो उनके मद्रास के कुछ डिसाइल थे वे लोग डर गए थे वैसे ही आपके बारे में जहर फैला रहे हैं और आप कुछ बोलेंगे तो और 10 गुना करके करेंगे तो स्वामी जी कहते हैं मुझे इस बात की परवाह नहीं है किंतु ये जो सेकंड सेंटेंस जो है दैट इज वेरी इंटरेस्टिंग नॉट ट आई केयर व्हाट फीलिंग आई शल इवोक फ्रॉम यू बाय दिस वर्ड यानी कि ये जो ऑडियंस उनके सामने बैठा हुआ है उनके मन में मेरे शब्दों से क्या प्रतिक्रिया होगी इसकी चिंता भी मैं नहीं करता क्यों नहीं करते स्वामी जी और क्या प्रतिक्रिया हो सकती है थोड़ा सा समझने की आवश्यकता है मैं जब गुजरात में मेरा पहला पोस्टिंग हुआ था लीमड़ी में और वहां पे दो-तीन लड़के मेरे पास में आते थे और वे लोग दादा भगवान के फॉलोअर्स थे अभी दादा भगवान वहां के एक जैन साधु थे और अहिंसा वगैरह में उनका बड़ा आस्था विश्वास था तो अभी ये जो लड़कों के साथ में मेरा जो डिबेट होता था उन लोगों का एक पॉइंट था कि स्वामी जी इज वेरी वायलेंट य स्वामी जी पहले तो ये करेज की बातें करते हैं साहस की बातें करते हैं फिर यह झगड़ा करके भिड़ जाते हैं वो जो स्टेशन मास्टर जिसने कि स्वामी जी के पास में ये टिकट मांगी थी कहा था कि यह तो काला फकीर फर्स्ट क्लास में कैसे बैठ सकते हो वगैरह वगैरह ऐसा करके तो स्वामी जी लोगों से भिड़ जाते थे ये तो हिंसा हो गई और अहिंसा तो अपने धर्म का फाउंडेशन है नहीं तो फिर यह स्वामी जी इतने हिंसक क्यों है व्हाई स्वामी जी सो वायलेंट वई स्वामी जी सो अग्रेसिव व्हाई स्वामी जी सो बोल्ड और यदि और एक चीज ऐड कर दी जाए अमेरिका में स्वामी जी के ऊपर में एक आक्षेप लगा था वई स्वामी जी जो सो जॉय फुल अभी ये जो प्रीचर होता है ना उनका एक टेंडेंसी मतलब एक लोगों के मन में रहती है अपेक्षा कि धार्मिक प्रचारक कैसा होगा चेहरा बिल्कुल गंभीर होगा टेंपर उसका बड़ा हाई होगा छोटी म दुर्वासा मुनि जैसा एक मोर और लेस एक प्रोफाइल उसका रहेगा कि बीच-बीच में गुस्सा हो जाएगा गाली भी देगा शराब भी देगा और पता नहीं किस तरह का व उसमें और भी सब ट्विस्टेड उसका यह सब बिहेवियर होगा तो ये और एक और यह है और दूसरी ही ओर ये लोग अपेक्षा भी रखते हैं कि अहिंसक होना है चुपचाप सब अन्याय सहन कर लेना है तमस में जैसे कि तमस में रहना है ये सब ट्रेड्स आप इकट्ठी करके देखेंगे ना तो आपके सामने एक ही चीज सामने आएगी वह है तमस अभी आप नेचुरली कह सकते हैं कि भगवान बुद्ध भगवान महावीर इन दोनों का क्या तो देखिए अहिंसा जो है अहिंसा अभी इवन महात्मा गांधी आप देखिए कि अहिंसा के बारे में बहुत सारी मिसअंडरस्टैंडिंग कुछ कुछ आखिरी गांधी जी के समय से ही कुछ कुछ मिसअंडरस्टैंडिंग लोगों के मन में स्टार्ट हो गई थी अहिंसा का अर्थ यह नहीं है कि हम कमजोर है अपना बचाव नहीं कर सकते बोलकर के हमको अहिंसा का पालन करना है जब यह भारत का यह हुआ यह विघटन हुआ यह जो अपना तो उस समय कुछ-कुछ लोग वहां से व पश्चिम से आकर के गांधी जी के पास में आए और पार्टीशन के बाद में आकर के गांधी जी को कहते हैं कि वह गुंडे आकर के हमारी मां बहन बेटियों को ले गए किंतु हम लोग अहिंसा का पालन कर रहे थे इसलिए हमने सामना नहीं किया तो गांधी जी बिल्कुल नाराज हो कर के बोल दिए मां और बेटियों का बचाव करने की तो तुम्हारा धर्म है तुम धर्म का पालन नहीं करोगे झूठ मूठ का अपनी कायरता अहिंसा के नाम चला दोगे ऐसा थोड़ी ना होता है तो देखिए कि एक तो है धर्म दूसरा है कि धर्म क्या कहता है देखिए धर्म क्या कहता है कि जब तक आपके पास में सबसे पहली बात तो है कि स्ट्रेंथ स्वामी जी का क्या डेफिनेशन है व्हाट मेक्स यू स्ट्रांग इज धर्मा व्हाट मेक्स यू वीक इज अधर्मा जो हमको मजबूत बनाता शक्तिशाली बल बलशाली बनाता है वह है धर्म जो हमको बलहीनता है वह है अधर्मा तो इस डेफिनेशन को देख कर के लेकर के देखिए कि गांधी जी और इवन महावीर और इवन बुद्ध इनके जीवन में कितना करेज था कितना सहज था यह जो भयावह शक्तियां है आसुरी शक्तियां उनके सामने खड़े रहने का उनका जो साहस वो अद्भुत था गांधी जी का जीवन देखिए जब यह लाठी चार हो रहा है सर के ऊपर में लाठी पड़ रही है उसके समय में बिना किसी प्रतिकार के खड़े रहना जेल वास स्वीकार करना और भारत में तो फिर भी ठीक था यह जो साउथ अफ्रीका में यह ब्रिटिश गवर्नमेंट ये काले और अपने यह भारतीय इन दोनों प्रजा हों के साथ में बिल्कुल पशुवुलु है कि अहिंसा डज नॉट कम आउट ऑफ वीकनेस अहिंसा या तो फिर नॉन वायलेंस या तो फिर गांधी जी का जो बेटर वर्ड है सत्याग्रह ये सत्याग्रह कम्स आउट ऑफ स्ट्रेंथ यदि स्ट्रेंथ जिसमें नहीं है उसमें सत्याग्रह का पालन करने का क्वालिफिकेशन नहीं है इसीलिए जब यह सत्याग्रह का यह जो मूवमेंट चल रहा था गांधी जी ने कहा था कि कुछ चुनंबू को इकट्ठा किया जाए जो कि इस मूवमेंट में पार्टिसिपेट करेंगे उसमें यह करे होगा कि जब लाठी चार्ज हो रहा है तो एकदम सामने जाकर के खड़े रहे बिना किसी प्रतिकार के यह करेज जिसमें होगा सिंह वत शक्ति वही लोग सत्याग्रह का पालन कर सकते हैं तो यह एक चीज समझने की जरूरत है सेकंड है कि भारत के दो ग्रेटेस्ट एपिक सबसे महत्त्वपूर्ण फंडामेंटल धार्मिक किताबें पुराण वो है रामायण और महाभारत और यह दोनों किताब में क्या है अल्टीमेट मैसेज क्या है कि अधर्म के ऊपर में धर्म की विजय यह भगवत गीता का संदेश हो कि कृष्ण ने अर्जुन को कहा कि युद्ध करना तुम्हारा धर्म है या तो फिर यह दशहरा का त्यौहार हो कि रावण की पराजय राम के हाथों हुई सत्य का धर्म का असत्य और अधर्म पर विजय हुआ तो हमेशा एक याद रखना है कि स्वामी जी या तो फिर इवन गांधी जी बुद्ध महावीर कृष्ण राम अपने उपनिषद अपने धर्मशास्त्र सभी लोग कहते कि स्ट्रेंथ इज द फाउंडेशन ऑफ रिलीजन और धर्म ये धर्म का पालन करने का साहस हम में होना चाहिए यदि वह साहस नहीं है तो फिर विकृति भी आएगी और झूठ मुठ का धर्म का सहारा लेकर के आप अपने तमस को छुपाए सत्व और तमस दोनों बाहर से एक ही जैसे दिखते हैं दोनों निष्क्रिय दिखते हैं किंतु सत्व क्या है पता है जैसे कि वो एक स्प्रिंग होती है ना स्पिंग स्प्रिंग को आप ऐसे एकदम सप्रे कर दीजिए तो उसमें कितना टेंशन होता है स्प्रिंग सप्रे हुई है किंतु जैसे ही आप उसके ऊपर में से वो हटा देंगे प्रेशर फट करके वो एकदम उछल के खड़ी होगी तो ये है ये सत्व का लक्षण और ये जो तमस का लक्षण क्या है कि एकदम ढीला एक रस्सी है वो रस्सी को आप जैसे भी करके रखिए आपको उसको क्रश करके रखिए कि जैसे भी रखिए ऊपर का प्रेशर हट भी जाएगा तो रस्सी वैसी ही वैसी लिम ही रहेगी वही वो दुर्बल और वैसी ही रहेगी य ठाकुर बड़ा सुंदर उदाहरण देते हैं ठाकुर के ये जो गांव के उदाहरण जो होते हैं ना बड़े ही डेंजरस होते हैं तो ठाकुर कहते हैं ये जो किसान यदि किसी गाय को खरीदने के लिए जाता है गाय नहीं बेल बेल को खरीदने के लिए जाता है तो बेल को तो अभी हल जोतना है तो ये हल जोतने के लिए बेल सक्षम है कि नहीं वो कैसे परीक्षा करेगा तो उसके पीछे से उसका जो अंडकोष है उसको वो थोड़ा सा दबाता है जो बेल लेट जाएगा उ से तो लगेगा कि व किसी काम का नहीं है तामसिक है और जो बेल है फड़ा करके उछल पड़ेगा अपने की रक्षा करने के लिए वो तैयार हो जाएगा तो उस बेल में तेज है और उसको वह किसान ले जाएगा तो यहां पर भी आत्मरक्षा करना यह हमारा धर्म है हम किस परिस्थिति में है उसके अनुसार अपना धर्म होता है यदि तमस में है और रजस में है तो आत्मरक्षा करनी आवश्यक है और सत्व में है तो आत्म रक्षा नहीं करेंगे तो भी चलेगा यह जो ठाकुर का बड़ा ही सुंदर उपदेश हमेशा के लिए सोल इस बात के इस प्रॉब्लम का सोल्यूशन ठाकुर ने दे दिया है वो जो साप और वो साधु की कहानी साप सबको दस रहा था साधु ने आकर के कहा कि ये मंत्र लो दूसरों को दसना बंद करो स सा आपने दसना तो बंद कर दिया किंतु फिर देखा कि वो जो वहां के जो गांव वाले थे उनको मौका मिल गया और उन्होंने इतने लोगों को जो दशा था साप ने उसका बदला लेकर के उसको मारा और पीटा फिर यह जब साधु वापस आया देखा तो घायल सांप पड़ा हुआ है तो साधु ने क्या कहा कि मैंने तुमको दने से मना किया था फोस करने से तो मना नहीं किया था डर तो दिखाना है अपनी रक्षा के लिए तो ये कहने के बाद में ठाकुर इमीडिएट कहते हैं कि साधु को किंतु फोस करने की भी जरूरत नहीं है साधु का वो धर्म भी नहीं है कि वो अपनी आत्मरक्षा करें यानी कि आप किस लेवल पे है उस लेवल के अनुसार आपका धर्म होता है गांधी जी ने सत्याग्रह की मूवमेंट जो की उसके बारे में बहुत सारे लोगों का विरोध अभिप्राय भी है कि भारत तो तमस में डूबा हुआ था तो यह पूर्ण सात्विक मूवमेंट भारत में क्यों चलाई गई तो अभी देखिए कि यह भी एक इंटरेस्टिंग थिरी है कि ठाकुर और स्वामी जी के आने से यह जो सत्व का प्रवाह भारत में जो अंडर करंट बह रहा है वो शायद अभी हमको नजर से नहीं दिख रहा है जो कि महापुरुषों को दिखता है तो गांधी जी को दिखा होगा तो जो भी है दैट इज अनदर थ्रेड ऑफ डिस्कशन अभी यहां पे जो स्वामी जी यह कहते हैं कि नॉट दैट व्हाट फीलिंग्लेस वर्ड आप लोगों के मन में मेरे यह जो प्रतिकार से क्या आपके मन में भावना खड़ी होगी इसकी भी मैं चिंता नहीं करता हूं वह स्वामी जी ने इस परिप्रेक्ष्य में कहा था कि बहुत सारे लोग उस समय भी सोचते थे कि स्वामी जी का धर्म गुरु जैसा आचरण नहीं है ही इज वेरी वायलेंट ही इज़ वेरी अग्रेसिव ही इज वेरी बोल्ड ही इज वेरी जॉय फुल ये जॉय फुल वाली बात से वो जो विदेश में किसी ने कहा स्वामी जी को कि व्हाई यू आर सो जॉय फुल व्हाई यू आर सो लाफिंग ऑलवेज व धार्मिक व्यक्ति तो बड़ा ही मुंह चढ़ा करके बैठा रहना चाहिए तो स्वामी जी ने कहा मेरे पेट में दर्द हो रहा है कि मैं मुंह चढ़ा कर के बैठूं अमृतस्य पुत्रा वयम हम लोग तो अमृत के संतान है ये आनंद जो है वो तो हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है तो ये ऐसे लोग जो कि भी बहुत ज्यादा धर्म के नाम पर तमस में चले गए हैं किसी भी चीज का प्रतिकार करना उसके सामने उनका कोई न कोई विरोध होता है ऐसे लोगों के बारे में स्वामी जी ने यह बात कही है आई केयर वेरी

I care very little, for I am the same sannyāsin that entered your city about four years ago with his staff and kamandalu [kamaṇḍalu].

लिटिल फॉर आई एम द सेम सन्यासी दैट एंटर्ड योर सिटी अबाउट फोर इयर्स अगो विथ हि स्टाफ एंड कमंडल इन सब के पीछे इन सबके बारे में मेरा कोई भी चिंता नहीं है कोई भी परवाह मैं नहीं करता दो तरह के लोग जिन्होंने मेरा प्रतिकार किया जिन्होंने मेरे पर आक्रमण किया उनके बारे में भी परवाह नहीं करता हूं कि मेरे प्रति आक्रमण से वे लोग क्या करेंगे ना ही मैं वह तामसिक लोगों की परवाह करता हूं जो कि धर्म का वाघा पहन कर के अपने तमस को छुपा रहे हैं और अपने तमस को जस्टिफाई करने के लिए मेरे पर बोल्डनेस का अग्रेसिव स का वायलेंस का आक्षेप लगा रहे हैं इन दोनों के बारे में मैं किसी भी तरह की पर परवा नहीं करता और क्यों नहीं करता क्योंकि मैं वही सन्यासी हूं जो कि आज से कुछ साल पहले आपके शहर में यह दंडक मंडल लेकर के प्रवेश किया था आज भी मैं वही दंड कमंडल लेकर के उसी खुले आसमान के नीचे जंगल जंगल गांव गांव नदी नदी पर पार करता हुआ भिक्षा मांग करके जी सकता हूं यह लगजरी जो है इसकी नीड जो है यह मॉडर्न एमेनिटीज जो है उसकी जो नीड मेरे मन में इतनी नहीं प्रवेश कर गई कि अभी यह जो मुझे मेंटेन करके रखना है मेरा कंफर्ट जोन तो उसके लिए मैं अपने प्रिंसिपल्स के साथ में भी कंप्रोमाइज करने को तैयार हूं मेरे डोनर्स यदि मुझे कहते हैं कि आप आप बाबा जी ऐसा कर दीजिए वैसा कर दीजिए और मैं कर दूं ऐसा कभी नहीं होने वाला है वही ठाकुर की बात कि कोई कोई आ कर के कहते थे किसी ने आ कर के कहा ठाकुर को कि आप परमहंस से अच्छा है थोड़ा सा स्वस्ती यन कर देना पड़ेगा शांति स्वस्थ याने एक विधि होती है कामना पूर्ति करने की तो ठाकुर ने इमीडिएट कह दिया वो मैं नहीं वो एक दूसरा उसके पास में जाओ तो किसी विधि करके लोगों से पैसा पड़ा करके अपना एक कंफर्ट जोन खड़ा करके एक ऐसी आश्रम चालू करके वहां शांति से आनंद से रहना वो ठाकुर का भी उद्देश्य नहीं था स्वामी जी का भी नहीं था द सेम

The same broad world is before me.

ब्रॉड वर्ल्ड इज बिफोर मी वही विशाल जगत अभी भी मेरे सामने है वही खुला आसमान वही खुला समुंदर जिसके ऊपर में मैं यही दंडक मंडल लेकर के टहला करता था जाया करता था वैद्यो नारायण हरि ही औषध जानवी तोयं ये औषध बीमार हो गए तो औषध क्या है दवाई क्या है तो वही गंगा नदी का पानी और वैद्य कौन है अपने डॉक्टर कौन है तो नारायण हरि यही नारायण हरि अपने वैद्य और यही गंगा का पानी मेरा औषध यह विशाल जगत अभी भी मेरे लिए खुला पड़ा है मैं यदि आज प्रति आक्रमण करूंगा तो लोग क्या सोचेंगे इसके बारे में मुझे तनि भर परवाह नहीं विदाउट फर्द

Without further preface let me begin.

प्रीफेस लेट मी बिगिन और बिना किसी वाक्य व्यय के हम प्रारंभ करते हैं फर्स्ट ऑफ ऑल

First of all, I have to say a few words about the Theosophical Society.

आई हैव टू से अ फ्यू वर्ड्स अबाउट द थियोसोफिकल सोसाइटी सबसे पहले तो ये थ थियोसोफिकल सोसाइटी की पिटाई चालू होगी इट

It goes without saying that a certain amount of good work has been done to India by the Society.

गोज विदाउट सेइंग दैट अ सर्टेन अमाउंट ऑफ गुड वर्क हैज बीन डन टू इंडिया बाय द सोसाइटी ऐसा अ हम कह ही सकते हैं कि कुछ कुछ तो अच्छा कार्य थियोसोफिकल सोसाइटी के माध्यम से भारत में हुआ है एस सच एवरी

As such every Hindu is grateful to it, and especially to Mrs. Besant; for though I know very little of her, yet what little I know has impressed me with the idea that she is a sincere well-wisher of this motherland of ours, and that she is doing the best in her power to raise our country.

हिंदू इज ग्रेटफुल टू इट एंड स्पेशली टू मिसेस बेसेंट और इस अच्छे कार्य के लिए हम प्रत्येक हिंदू थियोसोफिकल सोसाइटी और मिसेस एनी बेसेंट के प्रति आभार व्यक्त करता है कृतज्ञ है कहना थोड़ा सा ज्यादा हो जाएगा आभार व्यक्त करता है एज सच एवरी हिंदू इज ग्रेटफुल टू इट हां फॉर धो आई नो वेरी लिटिल ऑफ हर यट वट आई व्ट लिटल आई नो हैज इंप्रेस्ड मी विथ द आइडिया दैट शी इज अ सिंसियर वेल विशर ऑफ दिस मदरलैंड ऑफ अवर्स एंड दैट शी इज डूइंग द बेस्ट इन हर पावर टू रेज अवर कंट्री मैं एनी बेसेंट के बारे में व्यक्तिगत तो मुझे ज्यादा कुछ नहीं पता है किंतु जो ऊपर ऊपर से मुझे सुनने में आया है उससे मुझे ऐसा लग रहा है कि वह भारत की सच्ची हिताशी है और भारत का उत्थान हो भारत का राइज हो उसका उनके पीछे में उनकी मनोवांछित

For that, the eternal gratitude of every true-born Indian is hers, and all blessings be on her and hers forever.

ट द इटरनल ग्रेट ूडल एवरी ट्रू बोर्न इंडियन इज हर्स एंड ऑल ब्लेसिंग्स बी ऑन हर एंड हर्स फॉर एवर और इसीलिए सभी जो सच्चे भारतीय है उनकी हमेशा के लिए उनके प्रति आभार व्यक्त करते रहेंगे और एनी बेसेंट और उनके परिवार जनों पे ईश्वर की कृपा सदैव बरसती रहे ये हम लोग प्रार्थना करते रहेंगे अभी देखिए यहां पर भी एक देखने की बात है कि हम लोग जब स्कूल में पढ़ते थे तो ये जितने भी एंगली साइज्ड मूवमेंट्स थे ना रिफॉर्म मूवमेंट्स इसके बारे में हमने बहुत कुछ पढ़ा है अपनी इतिहास की पुस्तकों में कि हां एक थियोसोफिकल सोसाइटी थी हां एक ब्रह्म समाज था हां एक आर्य समाज था किंतु भारत की खुद की जो इंडिजिनियस रिफॉर्म मूवमेंट्स थी जैसे कि रामकृष्ण मिशन है या तो फिर बाद में स्वामी जी एक के बाद एक नाम देना शुरू करते हैं हु वाज कबीर हु वाज दादू हु वाज नानक हु वाज चैतन्य आप लोग कहते हैं कि आप लोग रिफॉर्म ला रहे हैं तो ये लोग कौन थे भारतीय संत तो ये अपना ये जो इवन अभी आजकल की टेक्स्ट बुक के बारे में पता नहीं किंतु मैं जब स्कूल में स्टडी कर रहा था यह सेक्युलरिज्म झूठ मुठ का और यह विदेशी वैल्यूज को ओवर ग्लोरिफाई करने की ओवर रिप्रेजेंट करने की ऐसी टेंडेंसी हम में आ गई है कि एक विदेशी महिला भारत आकर के भारत के बारे में दो अच्छे शब्द कहती है तो हम लोग पूरे वो उसके चरणों में गिर जाते हैं और यहां पे ही ये मीरा भाई है ये नानक है यह जो स्वामीनारायण है गुजरात के नकी फी ये गजानंद बापा है महाराष्ट्र के ऐसे कितने ही संत संत महापुरुष हो गए जिनके बारे में पढ़ने का हम लोगों को तस्दीक कभी नहीं लेते ना ही हमारी टेक्स्ट बुक में कोई कुछ लिखता है इसके बारे में स्वामी जी के बारे में मैंने इतना पढ़ा था कि वह वहां पर ब्रिटेन अमेरिका गए थे और ब्रदर सिस्टर्स एंड ब्रदर्स ऑफ अमेरिका करके संबोधन किया था किंतु रामकृष्ण मिशन की स्थापना की और रामकृष्ण मिशन कितना साइलेंटली कार्य कर रहा है जगत कल्याण के लिए उसके बारे में ना ही अपनी टेक्स्ट बुक में कुछ है ना ही यह देखिए एंगली साइज मीडिया हमको कुछ बताता है ये कोलकात्ता में सेवा कार्य करने वाला सबसे बड़ा सबसे बेस्ट टाइप का सेवा कार्य किसका है तो रामकृष्ण मिशन का है किंतु नोबेल प्राइस किसको मिलता है तो वो मदर टेरेसा को मिलता है अभी ऐसा नहीं कहना है कि मदर टेरेसा अच्छा कार्य नहीं कर रही थी शी वाज डूइंग गुड वर्क अब हमको उसके बारे में कुछ नहीं है बट रामकृष्ण मिशन इज द ओरिजनेटर ऑफ द सेवा कार्य इन कोलकाता जब प्लेग हुआ था तब से स्टार्ट कर करके किंतु रामकृष्ण मिशन के बारे में किसी भी एंगली साइज मीडिया में देखने को नहीं मिलेगा अ मैं कुछ सालों पहले की बात है वृंदावन की काशी उसका उसके बारे में एक विदेशी मैगजीन में एक रिपोर्ट एक आर्टिकल आया था कि किस तरह से यह भारतीय आध्यात्मिकता की यह भूमि है तो अभी ये आध्यात्मिकता के साथ में सर्विस एक्टिविटी भी बहुत सारे ऑर्गेनाइजेशन कर रहा है अभी काशी होना के वृंदावन में भूल गया दोनों जगह पे ये आर्टिकल किसके बारे में था किंतु दोनों जगह पर रामकृष्ण मिशन की बेस्ट हॉस्पिटल है और उस आर्टिकल में कि हां आध्यात्मिक जगहों पर भी आजकल सेवा कार्य चल रहा है रामकृष्ण मिशन का कोई नाम उल्लेख नहीं तो यह है कि अपना एक इंडिजन है तो जो एंगली साइज है विदेश से प्रभावित होकर के कार्य कर रहे हैं उसको हम एकदम बढ़ा चढ़ा करके उसको प्रेज करते हैं और अपनी जो धरती से जो उठी हुई यह मूवमेंट है उसके प्रति जैसे कि एक तुच्छ का भाव तो जो भी एक यहां पर स्वामी जी कहते हैं कि एनी बेसेंट के प्रति हमारा सद्भाव ही है उसके बारे में हमको कुछ नहीं कहना किंतु देयर इज अनदर पॉइंट बट दैट इज वन थिंग कि एनी

But that is one thing, and joining the Society of the Theosophists is another.

बेसेंट के प्रति सद्भाव रखना बट जॉइनिंग द सोसाइटी ऑफ द थियो सोफिस्ट इज अनदर थियो सोफिस्ट के साथ में जुड़ जाना वो बिल्कुल दूसरी बात है रिगार्ड एंड एस्टिमेशन एंड लव आर वन

Regard and estimation and love are one thing, and swallowing everything anyone has to say without reasoning, without criticizing, without analysing, is quite another.

थिंग एंड स्लोइंग एवरीथिंग एनी वन हैज टू से विदाउट रीजनिंग विदाउट क्रिटिसाइजिंग विदाउट एनालाइजिंग इज क्वाइट अनदर कि किसी के प्रति सद्भाव रखना एक बात है किंतु यही व्यक्ति जब हमको कुछ कहता है तो बिना सोचे समझे बिना बुद्धि चलाए बिना किसी तरह की एक रेशनल थिंकिंग का आश्रय लिए आंख बंद करके चुपचाप सब कुछ स्वीकार कर लेना वह दूसरी बात है देर इज अ रिपोर्ट गोइंग अराउंड ट द

There is a report going round that the Theosophists helped the little achievements of mine in America and England.

थियो सोफिस्ट हेल्प द लिटल अचीवमेंट्स ऑफ माइन इन अमेरिका एंड इंग्लैंड आजकल ऐसी एक बात च रही है फेक न्यूज़ चल रहा है कि मुझे अमेरिका और ब्रिटेन में जो सक्सेस मिली इसके पीछे थियोसोफिकल सोसाइटी का बड़ा हाथ है बड़ा उनका रिस्पांसिबिलिटी है

I have to tell you plainly that every word of it is wrong, every word of it is untrue.

आई हैव टू टेल यू प्लेनली दैट एवरी वर्ड ऑफ इट इज रंग एवरी वर्ड ऑफ इट इज अनट्रू मैं आपको एकदम स्पष्ट शब्दों में बता देना चाहता हूं इस रिपोर्ट के पीछे में जो कुछ भी है बिल्कुल ही असत्य है और यहां पे देखिए बड़ा ही इंपोर्टेंट पैसेज वी हियर

We hear so much tall talk in this world of liberal ideas and sympathy with differences of opinion.

सो मच टॉक इंग वर्ल्ड ऑफ लिबरल आइडियाज एंड सिंपैथी विद डिफरेंसेस ऑफ ओपिनियन ये जगत जो है उसमें ये जो लिबरल लोग जो है हमेशा आपको यह कहते रहेंगे कि आपका खुद का जो ओपिनियन है इससे विरुद्ध ओपिनियन यदि जिसका रहता है तो उसके प्रति बड़ा सद्भाव रखिए उसको आप क्रुसेड या तो धर्म युद्ध या तो फिर ये इनक्विजिशन ऐसा करके उनका मत खंडन करने के लिए उनका ही सर्वनाश करने को आगे मत बढ़ यदि दूसरा ओपिनियन किसी का है तो ओपिनियन का सन्मान होना चाहिए जिसको कि आजकल की लैंग्वेज में फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन कहा जाता है अच्छी बात है दैट

That is very good, but as a fact we find that one sympathizes with another only so long as the other believes in everything he has to say; but as soon as he dares to differ, that sympathy is gone, that love vanishes.

इज वेरी गुड बट एज अ फैक्ट वी फाइंड दैट वन सिंपता इजस विथ अनदर ओनली सो लंग एज द अदर बिलीव्स इन एवरीथिंग ही हैज टू से बट एज सून एज ही डिफर्स ही एज सून एज ही डर्स टू डिफर दैट सिंपैथी इज गॉन दैट लव वेनिश किंतु देखिए कि बड़ी-बड़ी बातों के पीछे में कड़वा सत क्या है कड़वा सत्य क्या है हम लोग लिबरल तब तक ही है कि जब तक लोगों का ओपिनियन हमारे ओपिनियन के साथ में मैच हो रहा है जैसे ही लोग हमारा विरोध प्रदर्शन हमारे सामने विरोध प्रदर्शित करेंगे या तो हम हमारे द्वारा पोषित ओपिनियन के सामने एक दूसरा मत प्रदर्शित करेंगे उसी क्षण जैसे कि उसके प्रति हमारा पूरा क्रोध जागृत हो जाएगा उसके प्रति सभी सहानुभूति अ दृश्य हो जाएगी और उसके प्रति जितना भी भ्रातृ प्रेम था भाव था वह सब अदृश्य हो जाएगा हवा में विलीन हो जाएगा अच्छा यह पॉइंट वैसे काफी बड़ा है और इसको पूरा डिस्कस करेंगे तो आज होगा नहीं तो यहां से यह पॉइंट से अभी आगे का डिस्कस हम कल करेंगे आज ओम शांति शांति शांति हरि ओ तसत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु स विदेशी है वो कोई हमारा हित चाहते हैं

Q: कुछ विदेशी संस्थान हमारा बुरा चाहते है. तो क्या किया जाए?

बहुत ज्यादा बियोंड वन पॉइंट वह बात नहीं है बात य रोने की बात वही है कि हम भारतीय लोग सोए हुए हैं आज हमारे ही बंधु बांधव जद झोपड़ी में फुट पाट पर रह रहे हैं और अपने अच्छे मकान में हम रह रहे हैं और फिर जब विदेश से आकर के उनको कन्वर्ट करेंगे हम चिल्लाए तो वो तो फिर गलती तो अपनी है ना कि हम लोग बिना कुछ किए चुपचाप बैठे हैं हमको तो विदेश में देखिए कि वहां पर कोई भी आपको अभी कल विदेश में भी बहुत गड़बड़ हो गया है किंतु एक समय था कि गवर्नमेंट बड़ी अलर्ट थी कि यह सोशल सिक्योरिटी नेट उनकी बड़ी स्ट्रांग थी तो इस कोई गरीब है यह है वो है तो सोशल सिक्योरिटी उनको मिल जाती थी यह सेफ्टी नेट थी है ना भारत में तो वह नहीं है बोलकर के यह विदेशी लोगों को एक एंट्रेंस मिल जा रहा है आकर के गड़बड़ करने का मेरा

Q: पिछले सौ सालो में हमारे देश के साथ बहुत अन्याय हुआ

जो एनालिसिस है मलब इंडिपेंडेंस मूवमेंट का और पोस्ट इंडिपेंडेंस इंडिया का मेरा जो मैंने गांधी जी को बड़ा अच्छे से स्टडी किया है और गांधी जी का ग्रेटनेस सिर्फ यह नहीं था कि ब्रिटिश लोग उनको मानते थे या तो फिर जैसे कुछ कुछ लोग कहते थे वो ब्रिटिश के एजेंट थे ब्रिटिश लोगों ने भारत में एक भारत को कमजोर करने के लिए उनको बढ़ावा दिया है देर वेर अदर फ्रीडम फाइटर्स आल्सो तो ब्रिटिश लोगों ने उनको बढ़ावा दिया तो यह भी एक थिंकिंग है मेरा जो पर्सनल मानना है कि कोई भी विदेशी व्यक्ति आपके ऊपर में आकर के कुछ भी चला ले जब तक उसका भारत में भारतीय आम आदमी आम जनता उसको स्वीकार नहीं करेगा तब तक वह चीज टिकने वाली नहीं है खास कर के भारत की भूमि में दूसरे देशों में विदेशी भावधारानी भारत में ऐसा ज्यादा नहीं चलेगा और गांधी जी का जन समाज में जो आदर था उनको जो एक्सेप्टेंस मिला था वो इतना विराट रूप से था कि यदि हम लोग उस समय की हिस्ट्री को बड़े अच्छे से ना पढ़े और स्वामी गांधी जी के प्रति लोगों की यह जो एक यह था रिस्पेक्ट था एक रेवरेंस था बॉर्डरिंग ऑन द रेवरेंस वो यदि हम ना समझे तब तक हमको यह समझ में नहीं आएगा कि गांधी जी की ग्रेटनेस क्या है मैं यह नहीं कह रहा हूं कि गांधी जी ने जो किया वह सब सही किया ये ठाकुर मां छोड़कर के और कोई परफेक्ट नहीं हो सकता इस जगत में आपको विद इन स्पेस एंड टाइम एंड मिलू मतलब जिस परिस्थिति में आप काम करते हैं उस परिस्थिति के कुछ पहलुओं को आपको मेंटेन करके रखना है इन ऑर्डर टू बी सक्सेसफुल बट नो वन कैन बी परफेक्ट इन एवरी एस्पेक्ट वो चाहे फिर वो सुभाष चंद्र बोस भी हो ना कि फिर कोई भी हो देयर इज नो वन परफेक्ट पर्सन यह गिवन परिस्थिति है इस गिवन परिस्थिति में आपको यह पैरामीटर्स से उसको आपको मैनेज करके चलना है इफ यू कैन डू दैट देन यू आर सक्सेसफुल यू मे बी डिफिशिएंट इन अदर एस्पेक्ट्स बट यू आर सक्सेसफुल इन दिस पार्टिकुलर एस्पेक्ट तो वो एक सबसे बड़ी बात है कि भारत की आजादी के लिए सबसे बड़ा कार्य था कि भारत को यूनाइट करना और यह कास्ट वगैरह की जो सिस्टम है उससे देश को ऊपर लेके आना यह तो स्वामी जी का खुद का एनालिसिस था कि यह जो भारत की यह जो परिस्थिति है यह कुछ-कुछ जगह पर जाकर के कहते हैं ये तो पागल खाना है यह शुद्र आदमी है वो बेल लेकर के घंटी लेकर चलता है और रास्ते में घंटी बजाएगा और उच्च वर्ण के सवर्ण जो है उसके ऊपर में उसकी परछाई भी नहीं गिरनी चाहिए तो यह पागलपन जब तक रहेगा व फ्रीडम लेकर के क्या करेंगे वही जो आज ब्रिटिश राज कर रहे हैं तो कुछ ये जमींदार फमीना राज करेंगे और प्रजा को तो वैसे ही चक्की में पीसना ही होगा सो द मेन

Mahatma Gandhi’s Nation building after swamiji’s passing away

टारगेट था ये जो स्वामी जी की महासमाधि 1902 से लेकर के 1947 तक का ये जो 45 इयर्स का जो मोर और लेस पीरियड है मेन टारगेट है कि यह छुआ छूट प्रथा है भारत में जो डिवीजन है विभाजन है उसको ठीक करना बाकी सब तो बाद में होता रहेगा तो यह जो डिपलीट वाइडेड सोसाइटी थी उसको एक साथ में और धर्म के आधार पर पॉलिटिक्स के आधार पर नहीं जैसे स्वामी जी ने इसी लेक्चर में आगे कहेंगे कि एवरी नेशन है इट्स ओन थीम जैसे अमेरिका में मुझे धर्म सिखाना था तो मुझे ये कहना पड़ता था कि धर्म को वेदांत को सीखने से आपको ये इकोनॉमिकल और पॉलिटिकल बेनिफिट होंगे इंडिया में रिवर्स है इंडिया में यदि आपको मॉडर्न इकोनॉमिक्स मॉडर्न पॉलिटिक्स लाना है तो आपको धर्म के आधार पे लाना है सो एवरी नेशन हैज इट्स ओन थीम इट्स ओन की पॉइंट और ये की थीम भारत की रिलीजन तो इंडिया को यूनाइट करना है बेस्ड ऑन रिलीजन करना है और बहुत सारे लोग मानते थे कि धर्म ही है जिसकी वजह से उच्च नीच वर्ण का ये डिवीजन हुआ है धर्म को हटाओ धर्मों को रिफॉर्म करो तभी यह भारत का रिफॉर्मेशन होगा तो यह ब्रह्म समाज यह आर्य समाज इस तरह की मूवमेंट थी या तो फिर ये थियोसोफिकल सोसाइटी कि हिंदू धर्म को ही हटा कर के और कुछ एक नया बिठा दे तो यह भारत का कल्याण हो जाएगा इन दैट केस गांधी जी रियली फॉलो स्वामी जीस आइडिया अपना हिंदू धर्म के आधार पर ही उन्होंने हिंदू धर्म के भीतर जो छुआछूत प्रथा थी उसको मोर और लेस दूर करके इंडिया को एक यूनाइट किया और यही यूनाइटेड इंडिया का फल आज हमको दिख रहा है अब यह हिंदू मुस्लिम डिवीजन जो हुए हैं उसके पीछे का कारण बहुत दूर तक जाता है और गांधी जी के बस की बात नहीं थी उसके लिए तो ठाकुर या स्वामी जी को ही यह डिवीजन को मिटाना होगा क्योंकि आज देखिए कि बंगोल के जो डिवीजन हुए ठाकुर के आने के बावजूद हुए हैं दो अपने सर्वश्रेष्ठ उत उच्च कोटि के अवतार का बंगोल में आगमन हुआ है चैतन्य महाप्रभु और ठाकुर श्री राम कृष्ण देव इनके बावजूद बेंगोल का डिवीजन हुआ तो इवन उनके की भी यह बात नहीं थी कि यह जो विदेशी धर्म का जो प्रभाव बढ़ रहा है उसको रोकने की और अगेन जो प्रभाव बढ़ रहा था उसके पीछे अगेन सेम रीजन कि हमारा भारतीय समाज इस हद तक ये छुआछूत में डूब गया था आज हम इस बात का अनुमान भी नहीं कर सकते यह जो आजकल का मॉडर्न अमेरिका हमको उपदेश देता है ये लोग कुछ-कुछ मूवीज है कुछ-कुछ नोवेल्स है उसको आप पढ़ेंगे तो पता चलेगा कि काले लोगों प क्या अत्याचार होता था वही चीज आज भारत उस समय भारत में होती थी जिन लोग लोगों को नीची जाति का समझा जाता था तो जिस तरह से अमेरिका को इट हैड टू रिकॉन विथ इट्स पास्ट यदि अमेरिका को ग्रेट होना हुआ तो सिविल वॉर करके उनको यह स्लेवरी का ये जो लांछन था उनको निकालना पड़ा भारत में विदाउट एनी सिविल वॉर ये जो जितने भी कम्युनिस्ट कंट्री है चाइना है ना कि सोवियत यूनियन है चाइना को हम सक्सेसफुल गिनते हैं किंतु क्या ब्लड शेड हुआ है क्या सिविल वॉर हुआ है करोड़ों लोगों का करोड़ों लोगों की हत्या हुई है तब कहीं जा करके मॉडर्न चाइना बना है भारत में विदाउट ब्लड शेड और धर्म के आधार पे यह सब कुछ हुआ है तो दैट इज समथिंग रियली इसका क्रेडिट हमको गांधी जी को देना पड़ेगा और दूसरा चाइना के बारे में है कि जिसका बड़ा ही रैपिड राइज होता है ना उसका इतना रैपिड पतन भी होता है आजकल चाइना के जितने भी इंडिकेटर्स है देखिए 2000 से लेकर के 2020 तक ये चाइना का गोल्डन एज था कि 20 साल का कि उन्होंने रैपिड प्रोग्रेस किया 10 पर पर एनम जीडीपी ग्रोथ उनका हुआ है मोर देन 10 पर हुआ है बट आजकल डेमोग्राफी उनका देखिए कि बच्चों की संख्या कम हो रही है तो एंटायस सोसाइटी इज ग्रोइंग ओल्ड तो ये डेमोग्राफिक चेंज बड़ा ही डेंजरस है उनके लिए सेकंड कि उनका इकोनॉमी स्टोल हो रहा है गवर्नमेंट फिगर पे किसी को विश्वास नहीं है गवर्नमेंट चाइनीज गवर्नमेंट ये कहती है 5 पर हमारा प्रोग्रेस रेट है वो नो वन बिलीव्स दैट लो जो वेस्ट में कुछ-कुछ लोगों का आकलन है कि देर ग्रोथ रेट इज एसेंशियली जीरो तो अभी मिलिट्री प्रोग्रेस में लोग कर र है किंतु सोसाइटी में जो रिप्रेशन है वो इतना भयानक है और सेंसरशिप की वजह से हमको उनका बुलेट ट्रेन तो दिखता है किंतु ये सोसाइटी पर रिप्रेशन हो रहा है वो नहीं दिखता और भारत में डेमोक्रेसी है तो ये हमको हमारी बुलेट ट्रेन नहीं दिखती किंतु एक किसान पर कुछ लाठी चली तो हजार न्यूज़पेपर चिल्ला चिल्ला करके कहेंगे सो दैट इज मोर ऑफ ए इंफॉर्मेशन मिस इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सो दिस इज माय एनालिसिस