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Sri Ramakrishna & Swami Vivekananda ·

Sri Ramakrishna & Swami Vivekananda English & Hindi 1 April 2023

Swami Vivekananda

जय राम कृष्णा जय राम कृष्णा सो हर आई एम शेयरिंग डी स्क्रीन अबाउट स्वामी विवेकानंद टीचिंग्स सो लेटेस्ट स्टेटमेंट स्वामी जी से सपोज वे रिनाउंस एवरीथिंग और देन वे ट्राई तू स्टार्ट नथिंग आई हते थॉट डिसीजन आइडियल प्लेस तू बी वरंगर मठ मस्त हैव बिन हेवन बाय बिकॉज़ ठाकुर हिमसेल्फ हेड जिवन समाधि और सम स्पिरिचुअल एक्सपिरिएंसेस तू दिस यंग बॉयज और नो व्हेन दे हिट गैदर और व्हेन वे रीड डी डिस्क्रिप्शन ऑफ फरहानगर मठ थ्रू डी पेंस ऑफ थ्रू डी आइस ऑफ मास्टर महाशय स्वामी विवेकांनदास यंगर भाई महेंद्र नाथ गुप्ता डेट ईटीसी दें आईटी पेंट्स एन पिक्चर विच इस सो परफेक्ट सो एजोटेरिक सो ब्यूटीफुल डेट डायरेक्ट डिसीप्लस धी यंग बॉयज विद डी जेल ऑफ होली ने और डी हेड डी स्पिरिट ऑफ रिनाउंसिएशन ऑफ ओवर ऋषाइज टॉक अबाउट वेदांत होल देवर बिल बी डिबेट बिटवीन नरेन और काली काली आवेदन जी विवेक आनंद ऑफ जो डी डायरेक्ट डिसीप्लस सो वे कैन इमेजिन डेट वरंगर मठ मस्त हैव बिन हेवन ऑफ मॉनेस्टिसिजम एन परफेक्ट मॉनेस्ट्री तू बी इन इंडिया आते डी से टाइम वे नो डेट आफ्टर सम डेज आफ्टर एन फू इयर्स एन स्वामीजी डिसाइड डेट लेटेस्ट ब्रेकअप दिस असेंबली और लेटेस्ट को ऑन डी लेटेस्ट स्प्रेड ओ इन जो डी डायरेक्शंस ऑफ डी वर्ल्ड लेटेस्ट स्टार ट्रेक लिविंग एन लाइफ ऑफ हरीराजार इटिनेरार्ड सन्यासी और सन्यासी हूं ट्रेवल्स ऑन फुट गोस फ्रॉम विलेज तू विलेज फॉरेस्ट तू फॉरेस्ट सिटीज तू सिटीज और बक्स पर हज फूड और डिपेंड्स पर इसे लाइवलीहुड अपन डी चैरिटी ऑफ डी हाउसहोल्डर वही दिस वारंगल भगवान अगर मठ आफ्टर पासिंग तेरे वास ए फाइनेंशियल ट्रबल नोट इनफ मनी तू सस्टेन डी मॉडल और वे नो डेट ड्यूरिंग डी टाइम इत्सेल्फ शशि महाराज विकम एन टीचर इन एन लोकल स्कूल इमेज इन शशि महाराज वायरिंग गेरुआ एन बीइंग ही स्टार्टड वर्किंग इसे एन टीचर ही उसे तू टीच मैथमेटिक्स तू यंगर स्टूडेंट आई थिंक मोस्ट प्रोबेबली आईटी मस्त हैव बिन प्राइमरी स्कूल सो शशि महाराज वर्किंग इसे एन प्राइमरी स्कूल टीचर इन ऑर्डर तू ऑन इनफ मनी सो डेट ही कैन कंटिन्यू ठाकुर सेवा विदाउट अन्य इंसिडेंट विदाउट अन्य ट्रबल विदाउट अन्य शॉर्टेफॉल्स सो दिस वैसे डी कंडीशन ऑफ डी मार्ट बट तेरे इस अनदर रीजन अलसो दिस रीजन इसे नोट एक्चुअली रिटर्न डॉ बट आई फाइंड आईटी धी रीजन मस्त हैव बिन ट्रू आई फाइंड दिस फ्रॉम मी रीडिंग ऑफ ओवर लिटरेचर फास्ट ओसियन ऑफ रिमिनेशन से स्टोरी इंसिडेंट इन टीचिंग्स और लेक्चरर्स और क्लास नोट्स सो में थिंग्स आर डर और व्हेन वे रीड दिस एंटीरे लिटरेचर वेरी केयरफुल वे फाइंड डेट सम अंदर प्रॉब्लम वैसे डर अलसो इन दी वाराणसीत मस्त हैव बिन बिकॉज़ दिस यंग बॉयज देवर वेयर आईटी डी पिक ऑफ डियर फिजिकल स्टैमिना फिजिकल एनर्जी और फिजिकल फिटनेस नो डर वेयर अलसो आते डी पिक ऑफ डी मेंटल फिटनेस नो देवर सो स्ट्रांग और एग्रेसिव इन सम वेस्ट पर दिस 11 12 यंग बॉयज तू लीव टुगेदर विदाउट अन्य क आईटी मस्त हैव बिन वेरी डिफिकल्ट टास्क तू मैनेज स्पेशली व्हेन आईटी कॉम तू ओवर सोशल रिलेशनशिप से फोर एग्जांपल वे हैव तू यू नो एवरी वन हेस स्ट्रांग विशेष इन समथिंग डेट दिस इस हो यू शुड डू ठाकुर पूजा और दिस इसे व्हाट यू शुड कुक इन डी मॉर्निंग और दिस इस वोट वे शुड डू हो थिस इस हो वे शुड डू मंगल आरती और शास्त्र देवर बिल बी सो मैच डिबेट डेट वन पॉइंट डिबेट बीकमस रिग्रेसिव डिबेट बीकमस एन क्लेश ऑफ एगो धी स्पेशली हैपन बिटवीन कलीमराज और नरेश काली महाराज रिटर्न आईटी इस रैम्यूनरेशन इस डेट आई वांटेड तू डिफीट सम हो इन सम ऑफ दिस अरगुमेंट्स सो आई बिल प्रिपेयर पर सो लॉन्ग और दें आई बिल फाइंड एन वेरी इंट्रीकेट पॉइंट फ्रॉम अवर शास्त्र और दें आई वुड डिबेट विद आर्ग की नरेन नरेन आईएफ यू वुड बी कॉर्नर आईएफ आईटी जो आईएफ ही इसे कॉर्नर ही वुड से ओके लेटेस्ट टॉप हर टुडे टुमारो आई बिल फाइंड एन काउंटर पॉइंट तू यू और विदाउट एरर विदाउट अन्य मिसिंग स्टेप नारायण वुड रियली फाउंड नरेंद्र सो दिस इस हो और वे अलसो सो ही वुड से डेट वे डिस्कस दिस एन फु डेज एगो डेट ही सैड डेट आईएफ नरेन दास जपम ही देश मेडिटेशन ही मेडिटेट्स से पर एग्जांपल तू अवर्स आई बिल मेडिट्रेड टुडे पर 2 हॉर्स बट दें नेक्स्ट है इस सो डेट ही इस मेडिटेटिव एवं मोर ओवर पर एवर एन लंगर पीरियड ऑफ टाइम और नोट ओनली डेट डी क्वालिटी ऑफ हज मेडिटेशन बिल इंप्रूव इंक्रीज फॉर मोर दें ला तू राजेश कंपटीशन सोमेटाइम्स दिस कंपटीशन इस गुड सम टाइम्स डिबेट इन डी प्वाइंट्स ऑफ शास्त्र इसे वेरी वेल बट आईटी वन पॉइंट वन यंग मां हैव नो क तू डू आईटी बीकमस डिस्ट्रक्टिव कंपटीशन जिला इन जो डी डायरेक्शन ऑफ डी वर्ल्ड हमें इवेंट को अमेरिका महापुरुष महाराज वेंटो हिमालय काली महाराज और हरि महाराज वेट तो वृंदावन राजा महाराज वेट तो वृंदावन महापुरुष महाराज एवरीवन ऑफ डेम एक्सेप्ट था आई बिल टेक डी मार्क और आई बिल डू ठाकुर पूजा सो एक्सेप्ट शशि महाराज मोस्ट ऑफ दिस डायरेक्ट डिसीप्लस ऑलमोस्ट जो ऑफ डी डायरेक्ट डिसीफर्स स्केटर्ड इन जो डी डायरेक्शन व्हेन डी नेक्स्ट वैसे रिफॉम्ड अंदर स्वामी जी इस बेलूर मठ बेलूर मठ वेरी इंपॉर्टेंट टास्क तू डू कर्म योग दिस सेवा ऑफ लोक कल्याण अठमांडू मोक्षार्थम और जगत वर्किंग दे एवरीवन हेड टास्क आलोक तू थे शरद महाराज वास्तु मेड डी सेक्रेटरी ऑफ दी रामकृष्ण मिशन शशि महाराज गोस सेंट तू चेन्नई तू स्टार्ट प्रोपेगेशन ठाकुर्स नाम और ठाकुर स्टिचिंग महापुरुष महाराज और राजा महाराजा इन डी मठ लुकिंग आफ्टर एवरीथिंग राजा महाराज डी प्रेसिडेंट बाबूराव वास डी मैनेजर ऑफ डी वर्ल्ड एवं काली महाराज और हरिमाराज त्रिगुणा तीतानंद जी देवेश सेंट तू अमेरिका पर वेदांत प्रचार त्रिगुणा तीतानंद जी वज जिवन डी टास्क ऑफ स्टार्टिंग उद्बोधन डी फर्स्ट बंगाली मंथली ऑफ ओवर ऑर्डर ऑफ फर्स्ट और ओनली ऑफ परसों विद डी हेल्प ऑफ दिस कर्म इस एन वेरी एसेंशियल पार्ट ऑफ ह्यूमन साइकोलॉजी हर स्वामी जी मोस्ट ऑफ डी हाउसहोल्डर और मोस्ट ऑफ डी मोंक इन ओवर ऑर्डर बिल नोट फेस पोजीशन दिस कंडीशन डेट आई हैव लेफ्ट मी होम और आई हैव डिसाइड डेट आई बिल स्पेंड मी लाइफ डूइंग एन मेडिटेशन डूइंग डी प्रेयिंग तू ठाकुर और प्रेम तू अन्य ईस्ट देवता तू होम आई हर आई एम देवोटेड आई बिल रिनाउंस एवरीथिंग बट दिस रिनोसिएशन ऑफ एवरीथिंग इसे एन वेरी डेंजरस तब हर स्वामी जी से आईटी बिल फाइंड नथिंग बट डिस्पर्स वही आईटी बिल हैपन वही वे बिल फाइंड डिस्पर बिकॉज़ एन ह्यूमन मन कनॉट लाइव विदाउट कर्म वे मस्त डू कर्म इन ऑर्डर तू सस्टेन ओवरसीज आईएफ वे हैव गो 24 ओवर ड्यूरिंग डी दे आईएफ वे टेक आवे 8 तू 10 ओवर फोर ओवर पर्सनल मेंटेनेंस स्लीप और से ईटिंग फूड्स और क्लीनिंग ओवर रूम तू देवत मी एंटीरे लाइफ तू मेडिटेशन और प्रेयर और इसे सड़क आर डूइंग वेरियस फॉर्म्स ऑफ साधना आईएफ आईटी दस डेट तू 10 ओवर आईएफ आईटी टैक्स आवे एवं दें ही इस गुड 16 ओवर ऑफ डी दे व्हाट बिल ही डू विद 16 ओवर ही ही हज तू फोर्स ऑफ 6 तू 8 ओवर सी हज तू तू सम सॉर्ट ऑफ कर्म सो दिस कर्म कैन बी इदर तीर्थ यात्रा और डी वरशिप ऑफ गॉड यू नो डेट शंकराचार्य मठ देवर वरशिप फॉर्म्स एन वेरी इंपॉर्टेंट पार्ट ऑफ दिस मेंस नो वे कैन ठोस हो अंडरस्टैंड वेदांत ठोस हूं अंडरस्टैंड ओवर इंडियन स्पिरिचुअल ट्रेडीशंस डेट वही शंकराचार्य क इन ऑर्डर तू सस्टेन इन ऑर्डर तू मेंटेन सम शॉर्ट ऑफ सैनिटी और संसार ऑफ बैलेंस इमोशनल बैलेंस डेट इस वही वे हैव तू डू क और डेट इस वही वे स्वामी जी से डेट व्हेन वे राइंस और को ऑन दें वे फाइंड नथिंग बट डिस्पर्स बट हॉल ऑन हॉल ऑन डी वर्ल्ड इसे एन डेमों आईटी इस एन किंगडम ऑफ विच एगो इस किंग पट आईटी आवे और स्टैंड फॉर्म सी आईटी वन पॉइंट वे स्टार्ट डूइंग दिस लोक कल्याण कर्म ऑफ लोक कल्याण कर्म पर जगत ऑफ ओवर लाइफ इस जगत हिताय चक्रम बट ए टाइम बिल कम डेट वे बिल हैव तू स्लोली और ग्रैजुअली रिड्यूस दिस कर्म तो यहां पर जो स्वामी जी जो एडवोकेट कर रहे हैं स्वामी जी जो हमको बता रहे हैं यदि हम सडनली संसार त्याग करते हैं संसार त्याग का अर्थ है सिर्फ वासना त्याग नहीं संसार त्याग का ये भी एक अर्थ है की कर्म त्याग और वासना त्याग करना शायद इजी होगा किंतु कर्मठ त्याग करना बहुत ही डिफिकल्ट है क्योंकि मनुष्य का जो मां है जितना वो इंद्रिय सुख के प्रति जो उसे आकर्षित है उससे कहानी ज्यादा वो कर्म के ऊपर में डिपेंडेंट है यदि कर्मठ त्याग कर दिया तो इमीडियाटली डिप्रेशन ए जाएगा तो अपने यदि यह कहते हैं की हमने संसार पिया किया तो संसार त्याग का आइडियल स्पीकिंग जो हमारी हिंदू परंपरा में हिंदू सन्यास परंपरा में युवान की बौद्धिक सन्यास परंपरा यह अर्थ होता है वासना का त्याग साथ-साथ में ही कर्म का त्याग किंतु यहां पर जो स्वामी जी कहते हैं और गीता में भी जो कहा गया है की वासना त्याग करो किंतु कर्म त्याग मत करो कर्म को स्टेज बा स्टेज ग्रैजुअली त्याग करना है फैट करके यदि हमने कर्मों को त्याग कर दिया तो क्या है अपनी जो साइकोलॉजी है अपना जो मन है जो कर्म के ऊपर में इतना पहले से डिपेंडेंट है एकाग्रता मां जो है उसको उसके दो इडली स्टेट स्टेज है एक तो है एकाग्रता दूसरा है एक्टिविटी और कंसंट्रेशन और एक्टिविटी यह दो मोड पर यह जो अपना मोबाइल हम साइलेंट मोड में और फिर वो जो रिंग मोड में और फिर एरोप्लेन मोड में ऐसा लगता है ना तो वैसे ही अपना जो मन है उसके डिफरेंट डिफरेंट मोड्स है की मोड ऑफ कंसंट्रेशन अंदर इससे हिट कम क्रोध मैड लाभ मो थिस मोड ऑफ दिस शैडो रिपोर्ट दिस तमाशा और सत्व सो यूजुअली अवर मन सर आते डी लेवल ऑफ तमस अनकल्चरड उन ट्रेड मन इस इन डी लेवल ऑफ तमस सो आईएफ यू वांट तू को तू सत्व दें वे बिल हैव तू को थ्रू डी स्टेज ऑफर्स फ्रॉम संसार वेयर आई एम डूइंग क पर मी ऑन बेनिफिट पर डी बेनिफिट ऑफ मी फैमिली इन ऑर्डर तू ऑन मनी से पर एग्जांपल और इन ऑर्डर तू फाइंड सम प्रेस्टीज और उससे डेट रिकॉग्निशन इन डी सोसाइटी सो फ्रॉम दिस वे हैव तू ग्रेजुएट तू एन क विच इस मेड दान पर डी जगत पर डी बेनिफिट ऑफ जो फ्रॉम दिस ओनली वे कैन को टुवर्ड्स दी कर्मनाशा नदी ठाकुर

स्वामी विवेकानन्द

ऑफ जो करमास कर्मनाशा एक यदि हम उसमें यदि जंप लगा देते हैं यदि हम उसमें वह जो डुबकी लगा देते हैं तो हम बैक जाएंगे क्योंकि हमारे कर्म जो है वो सब शेष हो जाएंगे तो वो जो सत्व की जो पोजीशन है सत्व की जो ये स्थिति है सात्विक मोड जो है अपने मन का वहां पे जान के लिए किंतु सबसे पहले हमको स्वार्थी कर्म से निस्वार्थ कर्म की और जाना होगा अपने खुद के भोग के लिए किया हुए कर्म से हमको लोक कल्याण के लिए किया हुए कर्म की और जाना होगा बाद में जो है हम जो कर्मों का अंत जो है और ऑफ कर्म उसे पोजीशन पे हम पहुंचेंगे इसीलिए स्वामी जी यहां पर कहते हैं की ये जो ये जो जगत जो है यह जगत जो है यह एगो का बना हुआ है यहां पे जो अपना जो अहंकार है यह जो अहंकार से भी ज्यादा यहां पे अस्मिता अभी देखिए एगो और अरा गंज यह जो अस्मिता और अहंकार यह दोनों में बहुत बड़ा डिफरेंस है सुनकर क्या है की मुझे लोगों से लोगों से मुझे प्रशंसा चाहिए मुझे इस समाज में प्रतिष्ठा चाहिए और इस प्रतिष्ठा अपने के लिए मैं जो अपनी सक्सेस स्टोरी से सही हो या गलत हो बार-बार दोहराता रहूंगा और यदि कोई मेरी प्रशंसा नहीं करेगा या तो फिर कोई मुझे जो है मेरा जो स्टेटस जो मैं समझना हूं की ये स्टेटस से वो रिकॉग्नाइज्ड नहीं करेगा तो फिर जो है मैं उसके ऊपर में क्रोध बरसाऊंगा तो ये हो गया अरा गंस अहंकार किंतु अस्मिता क्या है की अस्मिता है की मैं अपने को इस शरीर के साथ में आईडेंटिफाई करता हूं कहां मैं मेरा जन्म नहीं है मृत्यु नहीं है मेरा अंत नहीं है मेरा आदि नहीं है जितना भी नॉलेज है इस जगत में वह सब मेरे भीतर में भारत हुआ है जितना आनंद है सब मेरे भीतर में भारत हुआ है सात चित आनंद जी तरह से आसमान के बड़े में अपने वेद में डिफाइन किया गया है अपने वेद में डेफिनेशन मिलती है तो मेरा सच चित आनंदमय स्वरूप है इसको छोड़ करके छोटा सा शरीर है उसके साथ में मैं अपने को आईडेंटिफाई कर देता हूं मैं सोचता हूं की ये जो अक्सर में जो देख सकता हूं वही जो है की मैं देख सकता हूं यह जो दो कान से सुन सकता हूं वही मेरा नॉलेज है दो हाथों से जो मैं कर सकता हूं यही मेरा कर्म किंतु ठाकुर कहते थे ना की ठाकुर जब जिनको कैंसर हुआ था तो वो का भी नहीं का रहे थे तो नरेंद्र उनको बोला की आप इटली से एक बार तो मां को बोलिए की आप का भी नहीं का रहे तो इतना एटलिस्ट इतना तो आपको वो आपका कैंसर जो है उतना राहत दे दे की आप का पे तो ठाकुर क्या कहते हैं की मैं इतने मुख से का रहा हूं देखो कैसा का दिया की ये जितने भी डायरेक्ट डिसीप्ल उनके ये जो सन्यासी जो गृहस्ट हो सामने बैठे थे ठाकुर कहते हैं मैं इतने मुंह से का रहा हूं अर्थात यदि हम अपने जो शरीर है यह तो इस शरीर के ये जो लिमिटेशंस है यदि उससे ऊपर चले जाए तो जितने भी शरीर है वह सब मेरे शरीर हो जाएंगे जितना भी नॉलेज है सब मेरा नॉलेज हो जाएगा और इतना ही नहीं मैं इस स्थिति में पहुंच जाऊंगा की शारीरिक या अवलंबन या तो यह जो बहुत ही अवलंबन या तो ये जो मानसिक अवलंबन मुझे चाहिए ही नहीं मैं एक एक इस तरह से एक यूनिवर्सल कॉस्मिक स्पिरिट के रूप में ए जाऊंगा जिसका आनंद कहो की नीरानंद कहो की उसको समय कहो की अवकाश कहो स्पेस टाइम ये सबसे वो पैर हो जाएगा तो ये मेरा सही स्वरूप है किंतु उसको मैं नहीं पहचान करके मैं इस शरीर में अपने को इस शरीर के साथ में आईडेंटिफाई करता हूं तो इसको कहते हैं एक इसको कहते हैं संस्कृत में अस्मिता योग शास्त्र में इसको कहते हैं अस्मिता तो मैं जब यह जो संसार है वो अस्मिता की वजह से बना हुआ है एगो की वजह से बना हुआ है यहां पर यह जो संसार है यह अस्मिता का राज है क्योंकि हम लोग जितने भी हैं हम सभी लोग अपने को अपने शरीर के साथ में आईडेंटिफाई करते हैं शरीर की जरूर है शरीर के जो इस शरीर के लगता है की यह जो दुश्मन है जो मेरा अहित करना चाहता है या तो इस शरीर को जो हेल्प करता है वो मेरे मित्र है तो इस तरह से मित्र है दुश्मन है परिवारजन है ये जो कलीग है कंपीटीटर्स से ये हम लोग इस शरीर को लेकर के मायाजाल रास्ते हैं किंतु यदि मैं ये सोचना शुरू कर डन की ये जो मेरा मित्र है जो मेरा दुश्मन है जो मेरा कलीग है इनकी कंपीटीटर्स है जो मेरा फैमिली है या तो फिर हम लोग कहेंगे की पाकिस्तान जैसे दुश्मन देश में रहने वाले लोग जो भी है सभी लोग जो है उनके भीतर में जो कॉन्शसनेस है वो कॉन्शसनेस का प्रकाश सही सही में जी आत्मा से होता है वह जो सोर्स जो कोड है सोर्स कोड आजकल की लैंग्वेज में तो मैं वही सोर्स कोड हूं मैं वही सूरज हूं जी सूरत से होगी यह पूरा जगत प्रकाशित होता है तो यदि मैं ऐसा मां लूं तो आई बिल ट्रांसजेंड मी एगो आई बिल यह जो अस्मिता से में पैर चला जाऊंगा और फिर जो है की मेरा मां जो है यह चित्र प्रसाद जिसके बड़े में हम लोग बात करते हैं मैत्री करुणा मुदिता और अपेक्षा से हमारा मां जो है भर जाएगा और साथ-साथ में ही जैसे स्वामी जी ने मां के पास मांगा था ज्ञान भक्ति वैराग्य ये जो सब आध्यात्मिक संपद है अभी-अभी सत्य अहिंसा असते अपरिग्रह तपश्चार्य तब सोच संतोष स्वाध्याय ईश्वर परीदा ये जो सब 10 महाव्रत कहा जाता है वह सब जो है हमारे भीतर में प्रकट होंगे तो किंतु उसके लिए यह शरीर के साथ में आईडेंटिफिकेशन हमको तोड़ना होगा अभी कल ठाकुर ने पंडित की एक बहुत ही अच्छी व्याख्या कर दी सबसे पहले तो हमने देखा की पहले तो वो विद्यासागर की प्रशंसा करते हैं और विद्यासागर किंतु देखिए की एक जो रीडिंग बिटवीन डी लाइन है किसी को हम कंप्लीमेंट देते हैं तो सामने हमको भी कोई हमको कंप्लीमेंट देता है कोई हमारे बड़े में कोई अच्छी चीज कहता है तो हमको भी उसके बड़े में यह अच्छी चीज कुछ कहानी चाहिए यदि कोई मुझे ये रहेगा की आप अच्छे से पढ़ाई लिखी कर लेते हैं या तो फिर आर्टिकल लिख देते हैं वगैरा तो फिर मुझे ये भी कहना चाहिए की महाराजा बहुत अच्छे से पूजा करते हैं आपकी पूजा देखकर के भक्तों को बहुत ही सुकून मिलता है या तो फिर कोई भजन अच्छे से जाता है तो बहुत सारे लोग आपके ऐसा कुछ मुझे वो कंप्लीमेंट मुझे सामने देना चाहिए ये इस जगत का शिष्टाचार है किंतु सामने में यहां पर देखिए की ठाकुर जी किंतु विद्यासागर में के बड़े में कोई अच्छी बात करते हैं उनको एक कंप्लीमेंट देते हैं विद्यासागर वह कंप्लीमेंट को रिटर्न नहीं करता है उसकी वजह वो एक फेक विनम्रता दिखता है जो हमारी प्रशंसा करेगा अरे नहीं हम लोग कहेंगे अरे ये मैं उसके लायक नहीं हूं ये तो सब ठाकुर का वो जो आशीर्वाद है वगैरा वगैरा हम इस तरह से वो एक विनम्रता दिखाने का एक पर्यटन करते हैं की तुम मां में मां में बड़े खुश हो जाते हैं अच्छा है मुंह में ये मेरे बड़े में इतनी अच्छी बात कहीं मुझे बड़ा अच्छा लगा किंतु वो एक तरीका है मतलब रिप्लाई करने का किंतु बेस्ट वे क्या है की आप जो है वो कंप्लीमेंट को रिटर्न करें यदि आप कंप्लीमेंट को रिटर्न नहीं करेंगे इसका अर्थ यह हुआ की आप सामने वाले के जो सदगुण है उसको रिकॉग्नाइज्ड नहीं करते हैं और यहां पे ये बात सही है की हमने जैसे मास्टर महाशय का जीवनी पढ़ करके ये पाया है की विद्यासागर जो है मास्टर मंशा के ऊपर में नाराज रहा करते थे की बार-बार वो दक्षिणेश्वर चले जाते हैं और उसके बाद ये सिर्फ ये नहीं है की वो चले जाते हैं साथ-साथ में ये जो नारायण पालतू वगैरा जो कुछ लड़के थे उनके मास्टर महाशय के उनका भी उन्होंने ब्रेनवाश करके ठाकुर के पास ले गए थे फिर उनके पेरेंट्स जाकर के विद्यासागर को कंप्लेंट किया की आपकी स्कूल के एक ऐसे टीचर है जो हमारे लड़कों को बिगाड़ दे रहा है पेरेंट्स को तो ऐसा ही लगेगा ना की अभी ये जो साधुओं की बात सुन जैसे चंद्रमणि देवी को लगा था जब वो गधा ही छोटा सा गड़ा ही ठाकुर का बचपन का नाम गद्दा डर था माउंट को गधा ही बोलती थी मां चंद्रमणि देवी तो गदाई क्या करता था वो साधुओं के पीछे पीछे घूमता राहत था तो मां चंद्रमणि देवी भी बेचारी बड़ी डर गई की साधु लोग उसको उठा के जाएंगे तो ये देखिए कॉस्मिक इरोनी मैन पूरा चक्र गोल घूमकर के ठाकुर के पास में फिर से ए गया अब ये छोटे-छोटे लड़के जिनको की मशरूम महाशय ठाकुर के पास ले आते थे अभी उनके पेरेंट्स पर बेचारे डर गए की ठाकुर जो है उनको भाग के ले जाएंगे उनको साधु बना देंगे तो फिर इसलिए विद्यासागर जो है ठाकुर को यह कंप्लीमेंट रिटर्न नहीं करते यह सब रीडिंग बिटवीन डी लाइन है और साथ में ही ठाकुर ने क्या कहा किंतु ठाकुर जो है देखिए की सब के जो मूड है वो ठीक ठीक उसको वो जो एक प्रशंसा करते हैं उसको एक अप्रिशिएसन अप्रिशिएसन उसको एक कंप्लीमेंट देते हैं कहते हैं की जो पंडित है दो तरह के होते हैं एक तो निकम्मी पंडित होते हैं जैसे गिद्ध की तरह बहुत ऊपर में आकाश में उड़ते तो है किंतु नजर जो है वो सब समय वो कूड़ेदान की और रहती है की कहां वो कुछ कूड़े में कुछ खाना मिल जाए तो मैं पकड़ के का लूंगा और दूसरे तरह के पंडित जो होते हैं तो जैसे ठाकुर ने वो उदा हरण दिया की आलू है जैसे आलू को बेल किया आलू को यदि आपने उबला तो आलू जो है नरम हो जाता है तो वैसे ही विद्यासागर जो है वो इस जगत संसार की तपस्या की ये जो फैक्ट्री है सभी को तो तपस्या करनी पड़ती है कोई कितना ही चाहे मिली और बिलेनियर क्यों ना हो कोई कितना ही चाहे पावरफुल क्यों हो जगत ना अभी देखिए रिसेंटली मैंने सत्य नडेला का इंटरव्यू देखा था वह सत्य नडेला कौन है वह माइक्रोसॉफ्ट का के एग्जीक्यूटिव लार्जेस्ट कंपनी इन डी वर्ल्ड माइक्रोसॉफ्ट बिलियन बिलियन ऑफ रुपीस उसका जो डॉलर उसका जो है ये मार्केट केपीटलाइजेशन है उसका सीईओ जो है वो को तो मतलब कितना पृष्ठीगैोस पोस्ट होगा भले आपको चाहे कमर तोड़ कम करना पड़े किंतु उसको अच्छा लगता होगा ना ये कम करना तभी तो उसे पोजीशन पे पहुंच है उसे पोजीशन पे आपको अपना आईएफ यू डू नोट लव योर क कोई कोई लोग जो है अपने कम के प्रेम में पद जाते हैं अभी सही गलत ये बात का बात है किंतु वो अपने कम को बहुत ही अच्छे से वो ये इंप्लीमेंट कर सकते हैं वो बहुत ही अच्छे से वो कम को अंजाम दे सकते हैं तो मैं उसे लेवल पे यदि माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ की पोस्ट पर यदि कोई पहचान है आदमी तो कितना वो क में एफिशिएंट होगा उसकी कम्युनिकेशन स्किल कितनी गजब की होगी तब कहानी जाकर के वो जगत के टॉप वन परसों डिसीजन मकर से की जिनके डिसीजन पूरे जगत को पुरी सिविलाइजेशन को इफेक्ट करते हैं उसे वन परसेंट क्लब में वो पहुंच होगा तो उसका इंटरव्यू में देख रहा था शायद बहुत कम लोगों को यह बात पता होगी उसका लड़का जो है उसको पैरालिसिस हो गया था अभी मैं एग्जैक्ट किया हुआ था मैं भूल गया सेरेब्रल सेरेब्रल सी पीना सेरेब्रल पाल्सी हां तो वो क की वजह से देखिए की इस तरह के बच्चे को घर में पालना वो जो एक स्पेशल नीड जिसकी होती है यहां पे राजकोट आश्रम में अपनी डिस्पेंसरी में क यूनिट है सेरेब्रल पाल्सी यूनिट तो पूरे सौराष्ट्र रीजन में जो है वो वन ऑफ डी बेस्ट क यूनिट है तो कभी-कभी हम लोग वहां पे जाते हैं देखते हैं की किस तरह से ये जो बच्चे जो हैं जिनको क हो गया है उनको वहां पे वो एक्सरसाइज वगैरा करवाते हैं कैसे ये जो नर्स वगैरा जो ट्रेड डॉक्टर है उनके साथ में इंटर एक करता है वो मैं लिंबड़ी में था पहले मैं जी सेंटर में था वहां पर एक लड़का प्रतिदिन वो शाम को उसके पिताजी वो लड़के को घूमने के लिए ले आते थे वो लड़के को क हो गया था तो वो मुझे देखा था तो बड़ा खुश हो जाता था और बेचारे को बोलना भी ठीक से नहीं आता हालांकि 7 साल का था किंतु मतलब वह डिजीज उसका धीरे-धीरे करके उसको मतलब चलने फर्न में भी तकलीफ बोलने में भी तकलीफ क्यों एक्सप्रेस नहीं कर का रहा है अपने को तो मुझे देखा था इतना खुश हो जाता था मैं भी जब भी उसको देखा हूं रोज शाम को घूमने के लिए आता है तो मैं भी कुछ भी कर रहा हूं टाइम निकाल के उसके साथ में 5-10 मिनट वेट था बात करता था तो इस स्पेशल नीड लड़के को अपने घर में यदि ऐसा होता है तो उसकी केयर करना आपको कितना डिफिकल्ट है वह मतलब पैसा वगैरा तो छोड़ी दीजिए अभी वो माइक्रोसॉफ्ट में हाय पोजीशन में था सीईओ तो बाद में बना पहले से ही हाइपोसिएशन में था सैलरी बहुत ही अच्छा होगा तो मनी है या तो ट्रीटमेंट है चलो ये सब चीजों का तो कोई यह नहीं है किंतु वो एक साइकोलॉजिकल ट्रेन होता है ना वो फादर और मदर के ऊपर में अपने बच्चे की यह स्थिति देखकर के तो उसके बड़े में वो बोल रहा था की वह सत्य नडेला और उसकी वाइफ उन्होंने किस तरह से वह बच्चे के ट्रीटमेंट के लिए यह सब निकाल में वो दिखने लायक इंटरव्यू है तो यह जगत जो है ना एक तपस्या की फैक्ट्री है किसी को नहीं छोड़ना कोई हम बाहर से लगे किसी को किया रे इस व्यक्ति जो है उसकी लाइफ कितनी आइडियल लाइफ है उसके पास में सब कुछ है वो पैसा भी है प्रेस्टीज है सोसाइटी में उसका बहुत ही अच्छा फ्रेंड्स सर्किल भी है सब कुछ है किंतु जैसे वो कहते हैं ना की जूता जो पहना है इस को पता चला है की जूता कहां पे चुभता है मैन चप्पल मैंने पहने हैं चप्पल मुझे वो ग रहे हैं पर में वो बाहर से चप्पल बहुत ही सुंदर है किंतु पर में वो भीतर में से मुझे चुभ रहा है तो सिर्फ मुझे ही पता है तो वैसे ही ये जगत जो है हमको कहां पर कष्ट दे रहा है शायद किसी को देखकर के एन लगे किंतु सबके जीवन में तपस्या तो है ही है तो यह विद्यासागर भी है यह तपस्या की फैक्ट्री से निकाल करके जैसे ठाकुर ने कहा की आलू को जैसे बेल करते हैं तो आलू सॉफ्ट हो जाता है तो वैसे ही विद्यासागर भी है उसे सदगुण से उनमें इतने सारे दया फिर वो जो है की जैसे इसी में हमने आगे पढ़ा की मास्टर महाशय कहते हैं की किसी लड़के ने जो फॉरेन अब ब्रिटेन में गया था पढ़ाई लिखी करने के लिए उसको मंथली टाइप और देते हैं कोई विधवा है जिसका हसबैंड नहीं है जिसके अनाथ बच्चे हैं तो उसके पालनपुर पोषण के लिए पैसे देते हैं किसी को किसी लड़के को फ्री में अपने स्कूल में एडमिशन दे दिया तो वह लड़का करके कहता है की अच्छा आपने मुझे फ्री में एडमिशन तो दिया किंतु यह जो सब किताब वगैरा है वो खरीदने के लिए भी मेरे पास पैसे नहीं है तो उसके लिए भी आपको हेल्प करना होगा तो यह जो दया के जो सागर थे साथ में ही यह जो सबके प्रति एक सद्भाव रखते थे तो इसीलिए ठाकुर कहते हैं की दया भक्ति वैराग्य यह सब विद्या के ऐश्वर्या है जिसकी कामिनी कंचन पर ए शक्ति होती है वो एक तरह के पंडित है और जिसमें दया भक्ति यह वैराग्य यह गन होता है वो दूसरे तरह के पंडित है तो ऐसा ठाकुर ने विद्यासागर को बताया था अभी हम आगे पढ़ने हैं विद्यासागर चुपचाप

श्रीरामकृष्ण कथामृत : कोलकाता में ईश्वरचंद्र विद्यासागर के साथ

सुन रहे हैं सभी टपटकी बंदे इस आनंदमय पुरुष को देख रहे हैं उनका वचन अमृत पान कर रहा है सभी अर्थात विद्यासागर के दूसरे भी परिजन है अप परिवार जान है मित्र है वह भी कुछ कुछ थे वहां पे वो लोग भी सभी इकट्ठा हो गए और ठाकुर तो वैसे अपनी वो परमहंस की आर्मी के साथ में ही ट्रैवल कर देते थे और इसमें है अमृत में वर्णन है की वो एक साथ में जब अपने भक्तों के साथ में जा रहे थे तो किसी ने बोला भक्तों में से की लोग अभी ऐसा कहा करते हैं की परमहंस की आर्मी ए रही है ठाकुर भी जो है वो जो वो जो हाजरा है भावना थे मास्टर महाशय है ऐसे तीन कर लोगों को साथ में लेकर निकलते थे तो सब इकट्ठा हुए हैं सब लोग एक दृष्टि से सुन रहे हैं देख रहे हैं की ठाकुर क्या खाने वाले हैं मास्टर मा से आगे लिखने हैं विद्यासागर बड़े विद्वान है जब संस्कृत कॉलेज में पढ़ने थे तब अपनी श्रेणी के सबसे अच्छे छात्र थे हर एक परीक्षा में प्रथम होते और स्वर्ण पदक आदि अथवा छात्रों होती है वे संस्कृत कॉलेज के प्रधान अध्यापक तक पहुंचे हुए थे संस्कृत व्याकरण तथा काव्या में उन्होंने विशेष ज्ञान प्राप्त किया था स्वयं के पर्यटन से अंग्रेजी सखी थी विद्यासागर किसी को धर्म शिक्षा नहीं देते थे वे दर्शनाधी ग्रंथ बाढ़ चुके थे मास्टर ने एक दिन उनसे पूछा आपको हिंदू दर्शन कैसे लगता है अर्थात हिंदू यह जो फिलासफी है वह कैसी लगती है हिंदू धर्म के बड़े में पूछते हैं है तो उन्होंने जवाब दिया की मुझे यही मालूम होता है की ऋषि मनी यह वगैरा जो है जो चीज समझने को गए उसे समझना शक है देखिए धर्म को लेकर के विद्यासागर के मां में किंतु दुविधा थी उन्होंने ऐसा का दिया की अपने ये जो पुराण है अपने जो वेदांत थे अपने जो तंत्र साहित्य है ये जो वैष्णव साहित्य है ये जो सख्त साहित्य है और शक्तशास्त्र है आगम निगम जो भी बोलो ये जो जैन शास्त्र वगैरा है बहुत दुष्ट शास्त्र वगैरा है या सिख शास्त्र वगैरा ये जैन बौद्ध और सिख यह तो हिंदू धर्म के ही एक एसोसिएटेड पार्ट से तो यह जो सब मिलकर के जो कुछ सीखने की समझने का पर्यटन कर रहे थे वो समझा ना सके उन्होंने क्यों ऐसा कहा क्योंकि अपने हिंदू धर्म में बाहर से देखें तो बहुत सर कांट्रडिक्शन दिखेगा मैंने कहानी पहले भी कहीं थी एक जैसे पहले पहले क्या होता था सभी गांव में और गांव के बाहर एक धर्मशाला हुआ करती थी जिसको बंगाल में छोटी कहते हैं अब ठाकुर की खुद की कहानी में आता है की कैसे वो गांव के बाहर कमर कुकर के बाहर में वो छोटी थी धर्मशाला थी वहां पे सब साधुओं से मिला करते थे तो वैसे ही एक गांव के बाहर इस तरह के धर्मशाला थी और एक दिन एक दो साधु एक दिन एक रात को इकट्ठा हो गया अभी एक साधु था वैष्णव और दूसरा साधु था अद्वैतिन या तो फिर निराकारवादी अभी क्या हुआ है की जो निराकारवादी साधु था यह जो अद्वैती साधु था इन लोगों का एक होता है जैसे हमने वरंगर मठ में देखा था की जैसे आप मेडिटेशन करते हैं ध्यान करते हैं तो ध्यान का कोई एक बहुत ही एक सुंदर जो सूत्र है वो आप वहां दीवार पर लिख देंगे जिससे की क्या होगा आपको ध्यान करने में एक उद्दीपन मिली इंस्पिरेशन मेला है तो वर्णन अगर मठ में ये गुरु भाइयों ने यह जो भगवान बुद्ध का जो बहुत ही फेमस वो जो सेइंग है वो जो वाक्य है वो जो लिखा था कोटेशन यहां से तुम्हें श्रीराम प्रगति मौसम प्रांच्या तो अर्थात इस आसन पे में बैठूंगा वो जी रात को भगवान बुद्ध को निर्माण मिलने वाला था उसे रात को उन्होंने यह वाक्य कहा था की इस आसन पे में बैठूंगा और तब तक खड़ा नहीं होगा जब तक मुझे निर्वाण एन मिल जाए भले ही चाहे यह जो मेरे शरीर के जो मांस है ये जो अस्थि मजा है सब कुछ गर्ल क्यों एन जाए गाल के झलके रख क्यों ना हो जाए इस आसन से मैं तब तक नहीं उठेगा जब तक मुझे निर्वाण प्राप्त नहीं होता है तो यह सूत्र जो है गुरु भाइयों ने अपने मटकी दीवार पर लिखा था तो जैसे की वे लोग जब ध्यान करते हैं तो उसको पढ़ा करके प्रेरणा मिले तो ये जो निराकारवादी यह जो दक्षिण में संप्रदाय के साधु होते हैं उन लोगों का यह है की सोहर सॉरी तो हम ऐसा वह उनका एक सूत्र है शिवा हम है सोहन है तो वह इसका वह जाप करते रहते हैं इसका पाठ करते रहते हैं जैसे की उनको जो है वो ध्यान करने में एक सुविधा हो एक ध्यान करने में एक प्रेरणा मिले एक उदीप ना मिले तो ये जो मेरा करवा दी जो साधु था दर्शनामी संप्रदाय का शंकराचार्य पंख का उसने उमंग धर्मशाला की दीवार पे लिख दिया की सोहन यह देखकर के ये जो वैष्णव साधु था वो बड़ा नाराज हो गया बोला की सोहन तुम अपने को अर्थात क्या ये जो सर्व जगत का नियंत्रण है नियंत्रित यदि आप मातृशक्ति में विश्वास करते हैं तो सर्व पूरे संसार का जो ईश्वर है किंतु इस अहंकार के पैर जो मेरा असली स्वरूप है तो मेरा असली स्वरूप मेरे भीतर में जो है हम और वह वहां पर जो असली स्वरूप है ईश्वर का वो दोनों एक है ऐसा ये लोग कहते हैं सा हम सोहन तो ये जो ये निराकारवादी साधुओं का अदभुत्वादी साधुओं का कहना है ज्ञान मार्क ये साधना है की हम ब्राह्मणी टैटफॉर्मेसी अर्थात आ ये जो इसके भीतर में जो आत्मा है वही इस जगत में जो ब्राह्मण है दोनों एक ही है तो ये निराकार वीडियो की साधना है किंतु ये जो वैष्णव साधु है भक्ति मार्ग के साधु है वे लोग क्या कहते हैं की हम लोग जन्मतर से ईश्वर के दास से ईश्वर के शरणाग थे ईश्वर के भक्ति हैं और यदि हम उनकी उनको प्रार्थना करेंगे हम उनके उच्चारण गति हम मांगेंगे उनसे जिससे की जो है वह हमें यह जो सदगुण राशि है यह जो विद्या सॉरी ये जो सत्य अहिंसा असते अपरिग्रह ब्रह्मचर्य यह जो सब सदगुण राशि है वह हमारे में वह प्रवेश करें तो इससे वह भक्ति मार्ग के साधुओं की मान्यता है तो यह वैष्णव साधु देखा है की निराकारवादी साधु ने लिख दिया सोहन तो बड़ा गुस्से हो गया साला तुम कौन होते हो अपने को सोहन खाने वाले तुम्हारा दो छोटा सा शरीर है इतना दो आंखें दो पर है तुम अपने को क्या ईश्वर के साथ में कंपेयर करते हो गुस्से से उसने डा लिख दिया उसके सामने सोहन के सामने तो उसका अर्थ क्या हो गया डास हम अर्थात में ईश्वर का दास हूं तो यह देख करके वो निराकारवादी साधु और गुस्से हो गया तुमको पता नहीं है की तुम्हारे भीतर में जो अनंत आजम मैन जिसका जन्म नहीं है जिसका मृत्यु नहीं है इस तरह की एक अनंत अनुश्वर आत्मन जो है तुम्हारे भीतर में छुपी हुई है तो अपने को दास क्यों कहते हो तुम्हारे मां में इस तरह की हैं भावना क्यों है तुम कहो की मैं ईश्वर हूं तभी यह जो ईश्वर के जितने भी यह गुड है सच चीज आनंद वो सब तुम्हारे बिस्तर में प्रविष्टि होंगे ऐसा का के उसने क्या इंडिया अभी यह तो सब लिटरेचर वाले हैं तो डेक सामने एस लिख दिया तो क्या होता है सदा सोहन अर्थात में सदा सदा के लिए हमेशा हमेशा के लिए वही हूं जो की ईश्वर है तो यह देखकर के वो वैष्णव साधु और नाराज हो गया तो उसने एस के सामने दास लिख दिया तो क्या हो गया डास हम मैं सिर्फ ईश्वर का बहस नहीं हूं मैं ईश्वर के दास का दास हूं तो फिर इस तरह से कंपटीशन चलने लगी वो जो मेरा करवा दी साधु है उसने फिर से एस लिख दिया क्या हुआ सदा सदा सोहन अर्थात ने हमेशा के लिए वही हूं ईश्वर हूं तो फिर उसने उसके सामने दास के दास के दास का भी दास हूं ईश्वर के तो ये जो सकरवादी मेरा कार्यवादी ज्ञान और भक्ति कर्म और ज्ञान और या तो फिर कर्म और भक्ति ये सब कनफ्लिक्ट जो है यह जो सब कंपटीशन जो है ब्राह्मण और क्षत्रिय ब्राह्मण लोगों ने यह जो वेद जो की रिचा और वेद की जो सैक्रिफिस है होम है यज्ञ है उसका वो जो निर्माण किया उसके बड़े में लिखा उसको डेवलप किया और ये जो क्षत्रिय उन्होंने ये जो ज्ञान मार्ग जो है ये जो उपनिषद का मार्ग है उसका उन्होंने डेवलपमेंट किया तो क्षत्रिय ब्राह्मण के बीच में कनफ्लिक्ट ये ज्ञान मार्ग और भक्ति मार्ग बीच में कनफ्लिक्ट ये कर्म मार्ग और ज्ञान मार्ग के बीच में कनफ्लिक्ट ये जो वैष्णव और शक्ति के बीच में कनफ्लिक्ट वैष्णव और यह जो अद्वैतवादी ज्ञान मार्ग है उसके बीच में कनफ्लिक्ट ये जो कनफ्लिक्ट हो की कंपटीशन कहो ना की आर्गुमेंट कहो वाद विवाद कहो हिंदू धर्म में हमेशा से चले आए तो विद्यासागर ने जब यह सब पढ़ने की पर्यटन किया तो उसको लगा की यह जो कनफ्लिक्ट है आप विरोधाभासी वक्तव्य जो दे रहे हैं उसका यह अर्थ है की हमारे ऋषि मनी साधु महात्मा संत महापुरुष जो कहना चाहते हैं ठीक से का नहीं पे एडरवाइज जैसे क्रिश्चियनिटी होता है की एक सेंट्रल दोगमा होता है वेटिकन उसको अप्रूव करता है सभी लोग उसको एक्सेप्ट कर लेते हैं अर्थात उन लोगों की जो थियोलॉजी है कैथोलिक थियोलॉजी वो परफेक्ट है सभी लोग एक ही दोगमा को एक्सेप्ट करते हैं हिंदू धर्म में ऐसा नहीं सेंट्रल ओथोरिटी है ना ही ऐसा कोई सेंट्रल फिलासफी है जिसको जो चाहे अभी पति पत्नी भी एक घर में साथ में रहती है पत्नी जो है वो भगवान कृष्णा की उपासना करती है तो प्रतिदिन रात सोहन सोहन करके प्राणायाम करता राहत है ऐसा भी होता है किंतु एक चीज है वो विद्यासागर शायद ये ना समझ सके विद्यासागर की ये सेकंड गलती हमने निकाल पहले तो वो ठाकुर को कंप्लीमेंट रिटर्न नहीं करते हैं दूसरा है की वो हिंदू धर्म को ठीक से समझ नहीं पे हैं इन स्पाइट ऑफ के यहां पर ठाकुर उनकी इतनी प्रशंसा कर रहा है यह सेकंड गलती है की हिंदू धर्म में चाहे भी जैसे सदा सदा सोहन भले चाहे वो लिखकर के वो फाइट करते होंगे किंतु यह तलवार से हम लोग कभी फाइट नहीं करते तलवार से कभी भी अपना मत जो है दूसरों के ऊपर में नहीं लगाते जैसे की यह इस्लाम के साथ में हुआ जैसे क्रिश्चियनिटी के साथ में हुआ हमारे भीतर में डिफरेंस इस ऑफ ओपिनियन जैसे स्वामी जी कहते हैं एवरीवन मस्त हैव अवर ऑन वेदांत जैसे एक सूट बना दो एक बना दो तो एक एक वस्त्र यदि बना दो तो वो एक ही साइज का वस्त्र आप सभी को फिट करने का पर्यटन करो नहीं होगा किंतु सबका साइज लेकर के कस्टम टेलर के पास जाकर के उसके लिए अब उसके लिए अलग तरह से सूट सिलय जाए अलग-अलग मैप का सभी के लिए तो सबको फिट होगा तो वैसे ही स्वामी जी कहते हैं की सभी का अपना अपना वेदांत होना चाहिए जैसे की क्योंकि सभी का साइकोलॉजी डिफरेंट डिफरेंट है तो भारत में जितने भी सड़क है उसे सब लोगों ने अपने अपना एक मत जो है उसको वो उन्होंने उसका ये है वो प्रतिस्थापित किया है तो उन लोगों के भीतर में विरोध पास दिखेगा किंतु यह जो मार फुट जो है ये जो ब्लू शेड है मारपीट जो है वो कभी नहीं दिखेगी एक चीज दूसरा की कुछ बेसिक पॉइंट है जी पर सभी भारतीय परंपरा जो है एग्री होती है वो है त्याग त्याग जो है रिनाउंसिएशन जो है सत्य और अहिंसा सॉरी सत्य और त्याग अहिंसा नहीं सत्य और त्याग यह दोनों बेसिक पॉइंट के ऊपर में सभी परंपराएं जो है वो एकजुट होगी एक एक मत होगी कोई भी ऐसा नहीं रहेगा की सत्य का सहारा लेकर के आप जो है ईश्वर को प्राप्त कर सकते हैं या तो भोग के मार्ग से आप ईश्वर को प्राप्त कर सकते हैं यहां यहां तक की जिन्होंने भोगवाद का वर्णन किया है वे लोग भी कहते हैं की भोग इसलिए करते हैं जिससे की हम भोग से टीस्ट हो जाए भूख से अब जाए भूख से बर हो जाए और फिर त्याग के मार्ग पर चले भोग के लिए भोग किसी ने एडवोकेट नहीं किया किसी ने वो प्रदर्शित नहीं किया तो यह जो है सत्य और त्याग यह दोनों फाउंडेशन के ऊपर में सभी फिलोसॉफिस बनी हुई है तो यह जो सनातन सत्य जो है हिंदू धर्म का वह विद्यासागर समझ नहीं पे एक्सेप्ट नहीं कर पे इसलिए वो कहते हैं की हमारे ऋषि मनी शास्त्र पढ़े शास्त्र पढ़ने के बाद एक विचित्र तरह का एक वो कंक्लुजन लेकर आते हैं की ऋषि मनी जो खाने गए थे वो खाने समझा नहीं पाया तो जो भी है उनके भीतर में दया थी तो इसलिए सब देखिए सभी के भीतर में तो सब कुछ नहीं होता है सभी के भीतर में सब सदगुण नहीं होते हैं ये तो ठाकुर के पास से हम अपेक्षा रखेंगे मैं यदि ये कहता हूं की मुझे हिंदू धर्म समझ में आता है तो फिर विद्यासागर जैसी दया की जैसे की इतना अच्छा उन्होंने सोसाइटी में कम किया वो शायद मेरे सैना पाया तो सभी के भीतर में थोड़ी-थोड़ी कुछ ना कुछ सदगुण होते हैं और अपना ये जो जीवन है तो वो है की संपूर्ण की और पूर्णतया की और हम जो है यात्रा करें अच्छा तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं