Skip to transcript
ClassesSaradakosh

Sri Ramakrishna's Stories ·

स्वामी ब्रह्मानन्द कथित : श्रीरामकृष्णदेव : जैसा हमने उन्हें देखा 15 Nov 2022

Transcript

ओम sthapa का धर्म स्वरूप वे अरे रीडिंग स्वामी ब्रह्मानंद जी राम कृष्ण देव ठाकुर के मानस पुत्र स्वामी ब्रह्मानंद जी ने ठाकुर के बारे में क्या कहा हम पढ़ रहे हैं राजा महाराज कहते हैं पहले पहले पहल स्वामी विवेकानंद जो की उसे समय नरेन के नाम से पहचाने जाते द सन्यास के पहले की बात है ठाकुर के साथ कई तरह उसे समय उनका विश्वास था की ईश्वर केवल निराकार है विदाउट अन्य फॉर्म उन्होंने ठाकुर से भी का दिया था महाशय आपके यह सब दर्शन आदि मस्तिष्क के ब्रह्मा टोल्ड ठाकुर है इससे कुछ भक्त स्वामी से नाराज भी हो गए द किंतु ठाकुर कभी भी इस पर क्रोधित नहीं हुए द नेचरली सैम ऑफ डी devoteeswar एंग्री विद स्वामी जी व्हेन ही यूज्ड तू मेक फैन ऑफ डेम बट ठाकुर हिमसेल्फ नेवर एंग्री विद स्वामी जी ऑन दिस पॉइंट ठाकुर ने तब कहा था आज कल नरेंद्र के समान आत्मा मिलना कठिन है दे टाइम ठाकुर हिट्स से डेट इट इस डिफिकल्ट तू फाइंड सैम वैन इस ग्रेट पर्सन इस नरेंद्र परवर्ती कल में जब ठाकुर ने नरेंद्र को देवी-देवताओं के रूपों का दर्शन कर दिया था तो स्वामी जी उनमें विश्वास करने लगे तब से स्वामी जी कहते यदि ईश्वर के प्रति अटल निष्ठा हो तो सरकार मेरा कर दोनों पाठों से सिद्धि मिलती है आफ्टर रिसीविंग ऑल दिस विज़न स्वामी जी स्टार्टेड बिलीव इन एवरीथिंग और इसके दूसरी भी एक बात है की हमको पता है की काशीपुर उद्यान भवन में स्वामी जी को nirvikal पर समाधि प्राप्त हुई थी तो यह समाधि निर्विकल्प समाधि आध्यात्मिक जीवन के जो सर्वोच्च सत्य है वह हमारे सामने उजागर कर देती है तो उसे स्थिति पर पहुंचने के बाद में रूप और रूप सरकार और निराकार दोनों ही अपनी अपनी जगह पर सापेक्ष सत्य है वह अनुभूति हो जाती है तो दो तरह से नरेंद्र ईश्वर के सभी गुण और रूप और रूप को स्वीकारना शुरू किया ठाकुर ने खुद ने उनको ईश्वर के दर्शन करवाए द और उतनी खुद की निर्विकल्प समाधि के आधार से अनुभव से उन्होंने जाना की ईश्वर जितने भी हम स्वरूप गिनते हैं वो सब अपनी जगह पे सही है लेटर इन लाइफ ठाकुर एंड सन स्वामीजी विजंस ऑफ में गुड्स इन गोडेसेस एंड अलसो स्वामी जी बेस्ट ऑन हिज ऑन एक्सपीरियंस ऑफ निर्विकल्प समाधि डेट ही हेड इन काशीपुर गार्डन बेस्ट ऑन डेड ही कम तू बी लाइव डेट ऑल डी एस्पेक्ट्स ऑफ गोद ओर आत्मन आर रियल ट्यूब प्लान ये जो उसको आधिकारिक बात कहते हैं यदि मैंने आज आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत की है तो यदि मुझे अपना एकाग्रता है आध्यात्मिक जीवन का सबसे इंपॉर्टेंट साधना हमारी तो यदि मुझे मैन को एकाग्र करना है तो क्या मैं निराकार ईश्वर पर सबसे पहले मैन को एक कर पाऊंगा नहीं कर पाऊंगा मुझे सरकार ईश्वर के ऊपर में ही मैन को एकाग्र करना होगा जिससे की मुझे आसानी रहे राम है कृष्ण है हनुमान है इन सब के ऊपर में मैं अपने मैन को अदरक करूंगा अपने में उसको अपनी चित्त शुद्धि करूंगा और उसके बाद में जो है ये धीरे-धीरे करके सरकार की ओर से निर निराकार की ओर से ये जो nirvikal पर समाधि जो सर्वोच्च आध्यात्मिक उपलब्धि है वहां की ओर में जाऊंगा और कृष्ण हनुमान महाकाली मैन दुर्गा श्री राम कृष्ण हम पिछले कुछ दिनों से डिस्कस कर रहे हैं इसमें हमने यह बात कही थी की यह जो निर्विकल्प समाधि है वहीं पर हमारे जो क्लेश है यह जो अयोध्या अस्मिता राग द्वेष अभिनव हो जाता है माने आध्यात्मिक साधना की शुरुआत के बाद में हमको वो समाधि स्थिति तो प्राप्त करने ही होगी जहां से हमारे ये जो बी हमारे जो नेगेटिव इमोशन है वह संपूर्ण रूप से चली जाएगी adervise क्या होगा की यदि हम आधे रास्ते पे खड़े हैं तो पुनर्जन्म जब हमारा ये जो antkaran है जब वह पुनः दहाड़ धारण करेगा तो उसमें से फिर से यह जो नेगेटिव इमोशन तो प्रकट होगी ही होगी यानी की हमको हाईएस्ट निर्विकल्प समाधि या तो फिर बोल लीजिए की ईश्वर की संपूर्ण कृपा या तो बोल लीजिए की अपने अहंकार का ईश्वर के श्री चरणों में संपूर्ण रूप से सैक्रिफिस जो है संपूर्ण रूप से ऑफर कर देना वह तो हमको करना ही पड़ेगा किंतु शुरुआत जो है वह हम इस तरह से सगुन साधना से सरकार ईश्वर की उपासना से कर सकते हैं नेगेटिव इमोशंस देयर विल बी बोर्ड डी सीड्स विल बी बर्न एंड नो मोर नेगेटिव इमोशंस विल कम केशव इन योग शास्त्र abidhya अस्मिता राग द्वेष एंड abhineves बट दिस जर्नी दिस लॉन्ग जर्नी तू निर्विकल्प समाधि और इफ सी आर भट्ट सी कैन से डेट टोटल सरेंडर ऑफ अवर एक तू डी होली फीट ऑफ गोद डेट बिगिंस बाय वरशिपिंग बोर्ड इन डी टेंपल इन डी फॉर्म ऑफ एन इमेज और फोकसिंग अपॉन एंड अवतार लाइव श्री रामकृष्ण सी हैव तू बेगिन इजी स्कूल में जैसा होता है की मैथमेटिक्स की शुरुआत होती है तो वह एडिशन एंड सब्सट्रैक्शन से होती है बाद में जैसे हम जैसे आगे-आगे जाते जाएंगे ये जो कैलकुलस है ट्रिगोनोमेट्री सीखेंगे तो इजी से शुरुआत करके डिफिकल्ट की ओर जाना है सब स्टडी इन स्कूल सी बेगिन विथ एडिशन एंड सब्सट्रैक्शन इन लेटर ऑन विराजित तू एयर trigonometricals हंस सी बेगिन विथ समथिंग विच इसे तू डू एंड दें सी स्लोली ग्रेजुएट तू अन डिफिकल्ट फॉर्म्स ऑफ प्रैक्टिसेज अभी ठाकुर का यह जो कथामृत वगैरा हम पढ़ते हैं मैंने जब पहले पहले पढ़ने की शुरुआत की थी तो मैंने एक चीज यह देखी थी की यह जैसे ईश्वर सरकार है ना की ईश्वर निराकार है या शक है या वैष्णव है मैन काली सही है की भगवान कृष्ण सही है ये सब ये जो सब वो डिबेट अरगुमेंट सब झगड़ा वगैरा होते द तो ये सुनकर के मुझे थोड़ा सा आश्चर्य भी लगा था थोड़ा हंसी भी ए रही थी की अरे ये लोग ऐसी सब चीजों को लेकर के क्यों डिबेट करते हैं मैंने आपको जैसे आजकल देखिए हमारे किसी के मैन में इस तरह का डाउट नहीं होता है की भगवान राम ही सही है ना की मैन काली ही सही है शास्त्र लोग ही सही है ना की वैष्णव लोग ही सही है या तो फिर अद्वैत साधना ठीक है ध्वज है या तो ज्ञान मार्ग गलत है भक्ति मार्ग की सही है यह सब साधनाएं तो एक आप अपनी इच्छा के अनुसार अपनी अनुकूलता के अनुसार किसी को भी कर सकते हैं उसमें डिबेट करने क्या जरूरत है जो पहले के लोग द वह कैसे मूर्ख द ऐसा एक मेरे मैन में था आपके भी मैन में शायद आया होगा मुझे पता नहीं किंतु जिसे मैंने और ज्यादा स्टडी किया और आजकल के लोगों को और ज्यादा अच्छे से समझा मैंने खुद के अपने को समझा तब पता चला की हम डिबेट किस चीज को लेकर करते हैं जिसमें की हम बहुत ही सिंसियर है जिसमें की हम लोग बहुत ही दीपाली इंवॉल्व है ऐसे सब चीजों को लेकर के हमारे बहुत ही स्ट्रांग एक पोजीशन होती है और इस चीजों को लेकर के हम बहुत ज्यादा अरगुमेंट भी किया करते हैं आजकल आप देखेंगे ये कांग्रेस या बीजेपी या ये जो पॉलिटिकल डिबेट्स लोग किस तरह से पेशेंटली डिबेट करते हैं कोई भी पॉलिटिकल शो हो गया कोई भी रिलिजियस इश्यू हो गया रिलिजियस माने की ये जो रिलीज है नोट की यह आध्यात्मिकता मंदिर कहां बन्ना है बगैर वगैरा तो यह सब जो आज के जो पॉइंट है हम कितने पैसे के बारे में डिबेट करते हैं अरगुमेंट करते हैं तो उसका रीजन ये है की हम लोग यह है ना आध्यात्मिकता को जैसे हम छोड़ी भी है की अरे इससे कुछ मिलने वाला नहीं है थोड़ा बहुत दिखावा करके वो करना पड़ता है चलो थोड़ा कर देते हैं adervise किसने देखा है किसको ईश्वर प्राप्ति हुई है हमने तो सिर्फ किताबों में पड़ा है या तो फिर किसी के मुंह से देखा है सुना है अपनी नजरों से देखा नहीं है ऐसे किसी को ना ही मुझे लगता है की मैं इतनी कोई साधना करूंगा तो मुझे कुछ मिलने वाला है यानी एक और श्रद्धा ए गई है यह साधन प्रणालियों के ऊपर में ऐश्वर्या तो आत्मा के अस्तित्व के बारे में यह कर्म ज्ञान भक्ति राजयोग ध्यान यह सो जो पुरी जो अपनी जो विज्ञान है योग शास्त्र इस सब चीजों के ऊपर में हमारी इसलिए हम लोग कहते अच्छा ठीक है चलो सब कुछ सही है क्या फर्क पड़ता है सब कुछ जल्दी गलत है तो सब कुछ सही भी हो सकता है क्या फर्क पड़ता है किंतु जिस तरह से हम पॉलिटिकल डिबेट्स या तो क्रिकेट को लेकर के जो हम पेशेंटली डिबेट करते हैं या तो हम इश्यू को अपना खुद का मानते हैं ऐसा यहां पे नहीं करते यह जो जमाना जो पूरा चेंज हुआ है ये जो पूरा युग परिवर्तन हुआ है ठाकुर के समय में यह जो सब साधनाएं थी ये जो योग शास्त्र था यह वेदांत शास्त्र था यह जो लोग ये जो दे टुडे जीवन में लोग इस सब चीजों को कितना महत्व देते द स्वामी जी ने कहा है ना की पश्चिम में जाएंगे तो वहां पर आपको कोई भी पॉलिटिकल पॉइंट पे एकदम पेशेंटली डिबेट करने वाले लोग मिल जाएंगे एवं छोटे से छोटा मतलब किसान भी है वह भिखारी भी है तो उसका कोई ना कोई पॉलिटिकल पीओएस होगा मैं इस पार्टी में विश्वास करता हूं मैं इस इशू में विश्वास करता हूं मैं इस पोस्ट पर बिलीव करता हूं उन्होंने पश्चिम में देखा था और उन्हें भारत में गरीब से गरीब किसान की झोपड़ी में भी वो गए तो स्वामी जी कहते हैं की वो उसको पूछेंगे करें तुमने ये सर पे तिलक क्यों लगाया है तो उसको पूरा जस्टिफाई करेगा साइंटिफिकली आपको एक्सप्लैनेशन देगा क्योंकि वहां पर पॉलिटिक्स और यह जो सब करंट इशू है पश्चिम में अमेरिका ब्रिटेन वगैरा में लोग उसमें बहुत ही ज्यादा बिलीव करते हैं और अपने यहां पर भारत में यह जो धार्मिक आध्यात्मिक यह जो इशू है उसमें लोग बहुत ज्यादा बिलीव करते हैं तो दिस इसे डिफरेंस बिटवीन ईस्ट एंड वेस्ट ऐसा स्वामी जी कहा करते द किंतु आज देखिए की मतलब किस तरह से यह जगत चेंज हो गया है की हमने यह जो पॉलिटिकल और उसमें वे लोग इतना डिवेलप कर रहे हैं तो यह मतलब यह स्वामी जी कहते हैं ना पूर्व पश्चिम का मिलन होना चाहिए उसमें से ग्रेड सिविलाइजेशन होगा तो उसमें ये नहीं है की हमको पश्चिम के सब नेगेटिव चीज लेनी है पश्चिम की पॉजिटिव चीज लेने हैं उनके साइंस टेक्नोलॉजी क्यूरियोसिटी डेवलपमेंट यह जो सब फिलासफी यह सब चीज हम फोन की लेनी है नहीं की ये सब पॉलिटिकल पेशेंट्स जो की आजकल हमारे लाइफ को इस तरह से विटीएट कर दे रहे हैं की जैसे की हम लोग मतलब इतना मतलब स्ट्रांग लाइक एंड डिसलाइक्स हो गया है आपस में एक दूसरों के प्रति और जब मैं ये धार्मिक इशू करता हूं तो मैं आई डिफरेंटशिएट में आध्यात्मिक जो इश्यूज है और धार्मिक इश्यूज है मैं डिफरेंशिएट करता हूं एक मतलब आचार्य है उसको धर्म कहते हैं आध्यात्मिकता यानी की हमारी साधना आप और ईश्वर के बीच का रिलेशनशिप यह निपटा है धर्म क्या है सोसाइटी किस तरह से यह रिलिजियस सिंबॉलिज्म है फेस्टिवल से ट्रेडीशन से उसको किस तरह से सोसाइटल लेवल पर प्रैक्टिस होता है उसको धर्म कहते हैं तो धर्म का इंपॉर्टेंस है किंतु इससे कहीं ज्यादा इंपॉर्टेंस है हमारे जीवन में आध्यात्मिकता का अब सोसाइटी किस तरह से आगे बढ़ेगी सोसाइटी का डेवलपमेंट किस तरह से होगा ये जानना जरूरी है इसमें पार्टिसिपेट करना भी जरूरी है हम डेमोक्रेसी है किंतु इससे भी कहीं गुना ज्यादा इंपॉर्टेंस है ईश्वर के साथ में हम एक संबंध बनाएं ईश्वर को हम प्रार्थना करें ईश्वर की हम आराधना करें और माने यदि हम भक्ति में विश्वास करते हैं ज्ञान मार्ग में विश्वास करते हैं तो यह जो त्याग रिक्शा तपस्या यह जो सब वैल्यूज है स्पिरिचुअल वैल्यूज वो हम अपने जीवन में कैसे उसको प्रैक्टिस करें इंप्लीमेंट करें वह हमारे लिए बहुत ही ज्यादा इंपॉर्टेंट हो जाता है आयुष तू बिलीव था व्हेन रीडिंग दिस कथामृत ईटीसी वही पीपल ओर argoing सो पेशेंटली अबाउट वेदर इट इस ज्ञान मार्ग डेट इस अटेनिंग बोर्ड फॉर्म लिस्ट कोड इट इसे मोर इंपॉर्टेंट और भक्ति मार्ग ऑफ डिवोशन अटेनिंग डी गोल्ड विथ फॉर्म इस मोर करेक्ट विच पथ इस करेक्ट भक्ति मार्ग और ज्ञान मार्ग विच गोद इसे राइट गोद विद फॉर्म और गोद विदाउट फॉर्म दे उसे सी दिस इन kathamrta एंड आदर बुक्स रिटर्न अबाउट ठाकुर्स लाइफ साइंटिस्ट्स एंड ठाकुर एंड सैम टाइम्स आई अलसो यूज्ड तू मेक फैन ऑफ इट इन माय ऑन माय एंड्रॉयड राम इस राइट एंड कृष्ण इसे रोंग डट काली इसे डी ओनली गोद एंड कृष्ण इसे नॉट ए गुड इसे जस्ट फिगमेंट ऑफ इमेजिनेशन नो वंस बिलिस लाइक दिस टुडे इन टुडेस आगे सी ऑल बिलीव डेट वेदर इस अन बुद्ध वेदर इस अन जी सर राम कृष्ण काली दुर्गा हुवे दिस इसे मतलब देयर आल पार्ट एस्पेक्ट्स ऑफ से डिग्निटी डिवाइन एक्जिस्टेंस एंड सी शुड फॉलो दैन अस पर ओवर इंक्लिनेशन सी ऑल जनरली बिलीव्स दिस बट रीजन बिहाइंड बिलीविंग इस दिस इस डेट तू मी इट्स सैम्स लाइक डेट सी हैव स्टॉप हेविंग फेथ इन स्पिरिचुअल पथ ऑफ लाइफ सी विल यू डेट सी सी सी थिंक डेट एवं इफ आई प्रैक्टिस सॉल्व दिस थिंग्स आई एम नॉट गोइंग तू गेट एनीथिंग इन माय लाइफ आई एम नॉट गोइंग तू बेनिफिटेड बाय एनीथिंग ऑफ दिस एंड दिस इस जस्ट अन पिगमेंट ऑफ इमेजिनेशन एंड आई शुड समथिंग ए लिटिल गाइडेड बाय प्रैक्टिस अन लिटिल ऑफ दिस एंड डेट ऑल ऑफ दिस इसे जस्ट फेक एंड श्री सुपरस्टार एंड आई डोंट नीड तू बिलीव इन अन्य ऑफ दिस ऑन दी आदर हैंड्स सी बिलीव पॉलिटिकल एंड रिलिजियस कोर्स सो dipliant पेशेंटली डेट सी आर बिलिंग तू आर्ग अबाउट इट ऑल दे लॉन्ग सो दिस इस डी डिफरेंस बिटवीन डेट आगे डी आगे ऑफ ठाकुर ठाकुर यू तू लाइव इन 1800 एंड टुडे एंड 21st सेंचुरी डी दे यूज्ड तू बिलीव इन दिस स्पिरिचुअल फिनोमिना आगे इट देयर डी ओनली रियलिटी एंड टुडे सी बिलीव इन दिस पॉलिटिक्स एंड रिलिजन रिलिजन इस एन एक्सटर्नल रिस्पेक्टिव स्पिरिचुअलिटी सो साइकिल एस्पेक्ट ऑफ स्पिरिचुअलिटी व्हाट सॉर्ट ऑफ फेस्टिवल्स सी शुड सेलिब्रेट व्हाट्स रोट ऑफ ट्रेडीशंस सी शुड प्रैक्टिस उन शॉर्ट ऑफ थिंग्स दिस आर एक्सटर्नल मेनिफेस्टेशन ऑफ स्पिरिचुअलिटी फ्रॉम दिस स्पिरिचुअलिटी स्पिरिचुअल बेसिकली इस अवर रिलेशनशिप विद ओवर सरेंडर तू गोद इफ आई बिलीव इन भक्ति पथ एंड अवर प्रैक्टिसिंग ऑफ वर्चूज एंड वैल्यूज लाइक tyagatiksha asectra इफ आई बिलीव इन ज्ञान मार्ग सो दिस तू आर डिफरेंट थिंग्स एंड टुडेस पीपल बिलीव फार मोर इन पॉलिटिक्स दें बिलीव इन रिलिजन अन स्पिरिचुअलिटी डेट इस वही डेट स्पिरिचुअल फेनोमेना फॉर ग्रांटेड एंड डेट आर यू पेशेंटली अबाउट रिलिजन सो दिस इस डी डिफरेंस टुडे राजा महाराज आगे कहते हैं ठाकुर की कैसी सत्य निष्ठा थी हो ट्रुथ ठाकुर हो दीप हिज बिलीव इन ट्रुथ यदि वे कभार देते की वे अधिक भोजन नहीं करेंगे तो वह अधिक भोजन नहीं कर सकते द भले ही वे भूखे ही क्यों ना हो इफ यू वुड से डेट आई वांट बाइबल आई वांट इट मच टुडे दें ही विल स्टॉप ईटिंग आफ्टर ए विले एवं दो ही इस हंगरी एंड ही नेक्स्ट मोर फूड एक बार उन्होंने कहा की वे यदु मलिक से मिलने जाएंगे वनडे ही सेड डेट ही इसे गोइंग तू मीत या तुम मलिक यदु मलिक का उद्यान भवन दक्षेश्वर उद्यान मंदिर के पास ही था यदु यदु मलिक गार्डन हाउस नियर बाई तू दक्ष काली मंदिर ठाकुर किंतु बाद में यह बात भूल गए भक्त लोग आते हैं बहुत सारी बातें होती है यह सब होता है तो ठाकुर भूल गए की यदु मलिक के वहां पे जाना है लेटर ऑन ठाकुर फ़ॉरगोट गोइंग तू मलिक मैंने भी उन्हें याद नहीं दिलाया राजा महाराज कहते राजा महाराजा जैसे उनके पिए का कम करते द वह सब ठाकुर को याद करवा देते द वह ठाकुर आपको यह कनेक्टर है की ठाकुर इतने आधार वर्ल्ड द की यदि आप उनको आप केयर नहीं करेंगे उनका तो वो अपने खुद को संभल नहीं पाएंगे तो वो राजा हमारा वगैरा उनके साथ मेरे पहले हृदय रहता था जो ठाकुर का भतीजा था किंतु फिर हृदय ने इतना दुश्मन किया मैन के साथ में की ठाकुर ने कहा की तुम यदि मेरे साथ में कितना ही दुर्व्यवहार करते हो तुम्हारे लिए क्षमा है किंतु मैन को यदि तुमने थोड़ा सा भी कष्ट दिया तो तीनों लोक में तुमको क्षमा नहीं है तीनों लोक में तुमको मैन के कोप से बचाने वाला नहीं है और यह ठाकुर ने स्वीकार किया इस शब्दों से की वह मंदिर में जिस मैन की आराधना कर रही है वही मैन हमारी श्री मैन दुर्गा के रूप में प्रकट हुई है जिसको की ठाकुर ने जगत में मात्रा भाव का प्रचार करने के लिए रखकर गए हैं सो इनिशियली ठाकुर्स ने फ्यू हृदय यूज्ड तू केयरफुल ठाकुर बट वैन दे ही बिहेव्ड वेरी बदली विथ होली मदर मैन शारदा देवी जो ठाकुर है टोल्ड हिम डेट इफ यू इंसल्ट मी इफ यू बी व बदली विथ मी यू में बी फॉर गिवन बट इफ यू बिहेव एवं अन लिटिल इफ यू डू एवं अन लिटिल मिस भी है विद होली मदर देयर इस नो फोर्जिवेनेस फॉर यू इन डी थ्री लॉक कार्स डी थ्री वर्ल्ड्स वही बिकॉज मदर ठाकुर इसे तू वरशिप मदर काली डेट डी से काली विच साइड्स इन डी टेंपल हज कम ऑन अर्थ इन डी फॉर्म ऑफ होली मदर शारदा देवी रात्रि भोजन के बाद उन्हें अचानक अपना निश्चय याद आया ठाकुर को रात में खाने के बाद में याद आया अरे मैंने तो कहा था शंभू मलिक के वहां जाना है मैं भूल गया आफ्टर नाइट डिनर ही सुद्दनली रिमेंबर ठाकुर डेट आई हिट आई एम गोइंग तू विजिट जम्मू मलिक रात काफी हो चली थी किंतु फिर भी वहां गए उन्होंने ठीक किया था की मैं तो वह तो सत्य वचन का पालन मतलब उनके मुंह से जो बात निकल गई वो तो उसको वह तो जो है ठाकुर को उसको उसके ऊपर में अमल करना ही है उसको सत्य रक्षा करनी ही है तो उन्होंने रात खाने के बाद में बहुत देरी हो गई थी फिर भी वो यदु मलिक के वहां पे गए मैं हाथ में लालटेन लेकर के उनके साथ गया राजा महाराज लैंटर्न लेकर के ठाकुर के साथ में गए इंस्पीते ऑफ लेट इट नाइट आफ्टर डिनर व्हेन ठाकुर रिमेंबर डेट आई हते सेड डेट आई एम गोइंग तू विजिट होम आई एम गोइंग तू विजिट ही वेट देयर एंड राजा महाराजा वहां पहुंचने पर घर बंद मिला और ऐसा लगता था की सभी लोग सो गए हैं व्हेन दे रिश्ते होम इस क्लोज एंड एवरीवन इस स्लीपिंग ठाकुर ने बैठक के दरवाजे को थोड़ा धक्का दिया और कमरे के अंदर पैर रखकर पुनः चले आए सत्य रक्षा उन्होंने की स्लाइड ओपन डोर स्लाइटली पुट है फूड इनसाइड दी होम एंड देन ही रिटर्न वाटेवर ही हिट्स से अच्छा यह yaduvan लिख के जो गार्डन हाउस है उसके रिलेटेड और भी एक इंटरेस्टिंग इंसीडेंट है हमको पता है की ठाकुर की गुरु थी भैरवी ब्राह्मण तो यह जो भैरवी ब्राह्मणी थी उनको आदेश मिला था की आपको तीन शिष्यों को आपको सीखना है तो भैरवी ब्राह्मणी ने दो शिष्य तो मिल गए वह शिष्य को तीन शिष्य जो की हाईली एलिजिबल द उनको जो आदेश मिला था जब वह साधना कर रही थी समाधि में ईश्वरीय आदेश की तीन शिष्यों को आपको आध्यात्मिक यह जो तंत्र साधना है या तो कहेंगे शक्ति साधना है वो आपको सीखनी है तो भैरवी ब्राह्मण ही ये तीन शिष्यों को खोजती घूम रही थी उनको दो शिष्य पहले ही मिल गए द ठाकुर के पास आने से चंद्र और गिरिजा फिर आखिर में उनको ठाकुर मिले ठाकुर को शक्तिशाली उन्होंने सिखाई फिर वो काशी चली गई वहां पर 64 ब्राह्मणी बोल करके एक जगह है वहां पर रहकर के आखिर में उन्होंने शरीर दिया तो यह चंद्र और गिरिजा है इन दोनों में से एक अभी मैं नाम भूल जा रहा हूं चंद्र या गिरिजा किंतु दोनों में से एक ठाकुर को कहीं से खोजते khushte ठाकुर के पास ठाकुर को मिलने को आया तो ठाकुर ने निश्चय अपने गुरु भाई है तो उनकी बड़े अच्छे से स्वागत किया उनके मेरा था उनके बहुत साथ उनका डिस्कशन किया एक दिन वे लोग यदु मलिक के गार्डन हाउस गए द वहां से वापस ए रहे हैं तो उसे समय इसी तरह से रात हो गई थी और उसे समय तो राजा महाराज नहीं द लेंटील लेकर के साथ में चलने वाले तो अंधेरे में ठाकुर तो वैसे ही तो मतलब उनका जो शरीर है वो मतलब वो थोड़ा सा नाजुक था और वो बहुत ही सॉफ्ट द क्योंकि साधना करते-करते शरीर ऐसा हो जाता है वर्ण रेबेल हो जाता है थोड़ा तो यह जो ठाकुर का गुरु भाई था उसने सोचा की ठाकुर पूजनीय पत्थर लगेगा गिर जाएंगे आघात होगा तो उनकी सहायता के लिए उसने क्या किया की जब आध्यात्मिक साधना करते हैं तो सिद्धि प्राप्त होती है तो उसने ऐसा वो वहां पर उल्टा घूमकर के खड़ा हो गया उसकी पीठ में से प्रकाश का एक किरण निकाला और जो की ठाकुर को रास्ता दिखा रहा है और फिर उसने कहा ठाकुर अब जो है इस जो प्रकाश किरण है मेरी पीठ में से निकल रहा है उसका आधार लेकर के आप दक्षिणेश्वर चाहिए तब ठाकुर ने कहा की देखो यह जो सब डिवाइन पावर से जो मैजिकल पावर से ये जो subsiddhi है ये जो साधना से मिलती है उसका फौरन त्याग कर दो ये सिद्धि तुम्हारे रास्ते में अड़चन स्वरूप है किसी भी तरह का जो मैजिकल पावर है इफ यू यह आपको आता है आध्यात्मिक रास्ते में साधना करते समय उसको फौरन उसका त्याग कर देना चाहिए और उसका सांसारिक या व्यावहारिक उपयोग कभी भी नहीं करना चाहिए क्योंकि उससे हमारी साधना में हनी ही होती है लाभ कभी नहीं होता है तो ठाकुर harnevos भैरवी ब्राह्मणी एंड श्री विष्णु डिवाइन आदेश डिवाइन कमांड तू टीच थ्री डिसीप्ल अराउंड इंडिया एंड सी हेड ऑलरेडी फाउंड तू डिसेबल्स बिफोर shimput आपको वंस नाम वाज चंद्र एंड डी अंदर वैसे गिरिजा भैरवी ब्राह्मणी तंत्र साधना और shaktishadna एंड इन डी एंड डी लास्ट ऑफ डी थर्ड डिसीप्ल मोस्ट ठाकुर एंड हिम अलसो तंत्र साधना एंड लेटर इन डी एरिया अन डी से डिसीप्लस ऑफ डी से गुरु डिसीप्लस ऑफ डी से गुरु इट इस कॉल्ड गुरु भाई ठाकुर केप्ट हिम इन दक्षिणी छोड़ विथ ग्रेट रिस्पेक्ट एंड ही वेलकम हिम वैन दे बोथ फिर गोइंग तू डी गार्डन हाउस ऑफ yadumali एंड व्हेन देयर रिटेन इन देयर वैसे नो राजा महाराजा वर्किंग अलांग विथ डेम विथ लेंटर सो व्हाट दिस डिसीप्ल डेट ठाकुरजी गुरु भाई ही हेड सैम मैजिकल पावर्स डेट ही हेड गण फ्रॉम दी प्रैक्टिसिंग ऑफ शक्तिशाली सो ही ओपेंड हिज बैक एंड फ्रॉम हिज बैक लाइट रे ऑफ लाइट इट सोन ऑन डी पथ सो डेट ठाकुर विल नॉट हैव अन्य डिफिकल्टी वर्किंग सो ठाकुर वांड हिम डेट ही ऑल दिस मैजिकल पावर्स आर नॉटेड ऑल हेल्प इन योर साधना देयर मोर ऑफ हिंद्रांस समुद्री ना उसे दिन कंपलीटली इफ यू वांट तू प्रोग्रेस स्पिरिचुअल जर्नी तो हमको कभी-कभी लगेगा की अरे ये मतलब मुझे यदि जब ध्यान करते-करते या मेडिटेशन करते करते सब कोई मैजिकल पावर ए जाता है तो मैं उससे क्या नहीं कर दूंगा अपने जीवन में किसी छोटे-छोटे चीज होती है जिसमें हम हताश हो जाते हैं निराश हो जाते हैं तो ये जो आध्यात्मिकता के ऊपर में हमारे जो विश्वास ए गया है जो की हमने पहले डिस्कस किया उसका ये भी एक रीजन है जब हम योग शास्त्र पढ़ते हैं तो उसमें बहुत सारे सीढ़ियां के बारे में लिखा गया है अणिमा गरिमा वगैरा वगैरा विश्वास ए गया शंकराचार्य की कहानी शायद पता होगी की शंकराचार्य और मंडन मिश्रा का वाद विवाद हुआ तो मुंडन मिश्रा जो है वो हारने लगा तो मंडल मिश्रा की जो धर्म पत्नी है भारती वो जज थी अभी देखिए की उसे समय इंटीग्रिटी कितना था मतलब सत्य निष्ठा कितनी थी शंकराचार्य के समय में शंकराचार्य के विरोधी है मंडन मिश्रा और मंडन मिश्रा की पत्नी जो है उन्होंने मिलकर के जज के रूप में नियुक्त किया है तो वो अपने पति का वह यह नहीं करेगी आउट ऑफ राइट आउट ऑफ वे जाकर के उसका समर्थन नहीं करेंगे जो शास्त्रार्थ हो रहे हैं उसके ऊपर में ही वो निर्णय देंगे किंतु फिर भी आखिर में तो थी वो मुंडन मिश्रा की पत्नी और ऐसा ठीक हुआ था की मुंडन मिश्रा जल्दी हर जाते हैं तो वो सन्यास ग्रहण कर लेंगे तो उसको तो लॉस था ही था तो जब शंकराचार्य जितने लगे तो भारतीय ने कहा की अच्छा आपने शास्त्र के बारे में तो इतना डिस्कस किया उनकी धर्मपत्नी होने के नाते मेरा एक प्रश्न है आपको की सांसारिक जीवन में पत्नी के साथ में किस तरह से आपको व्यवहार करना चाहिए तो अभी शंकराचार्य तो बाल ब्रह्मचारी द अभी यह प्रश्न का उत्तर कैसे देंगे तो उन्होंने कहा ठीक है मुझे थोड़ा सा समय दो मैं इस प्रश्न का उत्तर खोज के लिए आऊंगा फिर शंकराचार्य योग अपनी समाधि में वो प्रवेश किए योग शास्त्र अपनी योग शक्ति के बाल पे और उन्होंने पाया की पास में ही एक राजा है जो की वृद्ध हो चुका है और उसका शरीर त्याग होने वाला है और उसकी दो पटिया है तो उन्होंने योग शक्ति के माध्यम से यह जो राजा ये जो शारीरिक त्याग कर रहा था तो उसने शरीयत क्या और उसके शरीर में उन्होंने प्रवेश किया शंकराचार्य का शरीर गुफा में पड़ा है और उनका जो antarkaran है वह इस राजा के शरीर में है अभी राजा के शरीर में रहकर के उन्होंने जाना की ये जो दांपत्य जीवन कैसा होता है फिर अभी यह जो मंत्री था राजा था उसको पता चल गया की ये राजा इस शरीर में नहीं है इस शरीर में दूसरी आत्मा है क्योंकि राजा तो bhogvadi था और शंकराचार्य तो मतलब आध्यात्मिक साधना में सर्वोच्च सिद्धि प्राप्त कर चुके द तो राज्य के जितने भी वो ये द उसमें वो अपने प्रजा के साथ में व्यवहार है या तो मैं इकोनॉमिक्स को कैसे चलाना है वो उतने तो बहुत ही श्रेष्ठ और माहिर द क्योंकि योगी के सामने कोई भी विद्या जो है वो छुपी हुई नहीं है तो उनको लगेगा की राज्य शासन कैसे करना है थोड़ा सा ध्यान किया राज्य शासन के बारे में सिख लिया इकोनॉमी कैसे चलानी है थोड़ा सा ध्यान किया इकोनॉमी के बारे में सिख लिया और बगल वाला राजा हम पे हमला कर रहा है तो युद्ध कैसे करना है तो थोड़ा सा ध्यान किया था युद्ध शास्त्र सिख लिया तो इतना जबरदस्त पावर है निश्चय ही राजा के शरीर में एक योगी की आत्मा praveshi है ऐसा मंत्री ने जान लिया और उसको यह भी समझ में ए गया की यदि ये योगी चला जाएगा तो यह राज्य का जो प्रगति हो रही है विकास हो रहा है वह अटक जाएगा तो उसको भी मंत्री को थोड़ा बहुत ही योग शास्त्र वगैरा पता था तो उन्होंने ठीक किया की यह योगी जो है उसका शरीर आसपास में कहीं पे तो होगा ही किसी गुफा में या कहीं तो उसे शरीर को यदि नष्ट कर देते हैं तो योगी को कंपलसरी राजा के शरीर में रहना पड़ेगा और योगी यदि राजा के शरीर में रहता है तो राज्य शासन जो है बहुत ही सुचारु रूप से चलेगा तो ऐसा सोच करके यह मंत्री ने कुछ सैनिकों को चारों ओर भेजा की देखो ये कोई गुफा या वगेरा ऐसी है अंत जगह है जहां पे योगी बैठा है तो उसके शरीर को जला दो जिससे की ये योगी राजा के शरीर में फर्स्ट है और राज्य का विकास हो राज्य को फायदा हो तो अभी देखिए ड्रामा भी कैसा है की यह सैनिक खुश द खुश द गुफा में गए गुफा में देखा एक योगी ध्यान में मरजाता है और चेहरा देखकर के पता चल जाता है की उसके जो अंग कांति है यह जो उसके शरीर में से प्रकट हो रहा है ये वही योगी है उसी योगी का है शरीर है अभी वो उसको नष्ट करने को जाते हैं की वो शंकराचार्य समझ भी गए की ऐसा हो रहा है जान भी गए की ये दांपत्य जीवन क्या है तो उन्होंने immediatli राजा का शरीर छोड़कर के अपने शरीर में वापस प्रवेश किया और उठ खड़े हुए अभी जिंदा योगी को तो सैनिक नहीं मार सकते पता है की उसके पास में योग शक्ति है वो तो सैनिकों को वैसा ही करके वो भाग देंगे तो इस तरह से शंकराचार्य फिर वापस आए भारतीय उसका नाम था उसको बताया की ये दांपत्य जीवन है वो वाद विवाद में जीत गए तो ऐसी सब कहानियां जो है हम पढ़ते हैं और देखते हैं की आजकल तो इस तरह के सिद्धि है या इस तरह का मैजिकल मैजिकल पर पावर किसी के पास नहीं है तो हम किस तरह से यह सब चीजों पे विश्वास कर दें तो यह भी विश्वास का एक कारण है तो ठीक है मतलब यह सब चीज हैं और ठाकुर ने तो जैसे कहा है की यह सब चीजों से दूर रहना ही आवश्यक है आज के जमाने में और शुद्ध भक्ति और या तो त्याग इसके ऊपर में ही हमारा आध्यात्मिक जीवन का आज जो है गठन होना चाहिए बाद में हम को एक पॉइंट को जो है खासकर के मैजिक वगैरा हम बाद में और भी डिस्कस करेंगे आज इतना है ओम शांति शांति