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ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णा यते नमः महाराज जय राम कृष्ण जय म हा आज के तो होलिया यहां पर उत्सव होगा सब भजन नृत्य वगैरह होगा मंदिर के चारों ओर परिक्रमा होगी बहुत कुछ होगा फिर से हम स्वामी जी का कंप्लीट वर्क स्टार्ट करते हैं कंप्लीट वर्क्स में हम जो दो प्रवचन स्वामी जी का ज्ञान योग सीरीज के जो लेक्चर है उसके दो प्रवचन थे कॉस्मो मैक्रो कजम एंड कॉस्मो माइक्रो कजम इन दोनों प्रवचनों का जो बेसिक आईडिया हमको पता है के स्वामी जी हिमालय में भ्रमण कर रहे थे तो एक जगह पर अचानक उनको एक दिव्य दर्शन हुआ अल्मोड़ा जाते हुए काकड़ी घाट बोलकर के एक जगह है वहां पर और उस दिव्य दर्शन के परिणाम स्वरूप उन्होंने जो नोट्स बनाई थी अपनी डायरी में उसके बेस के ऊपर में यह दो प्रवचन उन्होंने पश्चिम में अमेरिका में दिए थे तो अभी यह दोनों प्रवचनों का जो फाउंडेशन है प्रथम जो प्रवचन है मैक्रो कजम उसमें स्वामी जी मॉडर्न साइंस का आधार लेकर के ईश्वर का अस्तित्व प्रतिपादित करते हैं और दूसरा प्रवचन है माइक्रो कजम उसमें भी स्वामी जी अगेन सेम मॉडर्न साइंस का सहारा लेकर के आत्मन का अस्तित्व प्रतिपादित करते हैं तो ईश्वर और आत्मन ब्रह्मण और आत्मन और आखिर में दोनों का कनेक्शन कि आत्मन ही ब्रह्मण है या तो आत्मन ही ईश्वर है अच्छा अभी यह जो पूरा स्वामी जी का बेसिक आइडिया है कि हां आप साइंस की मदद से ईश्वर या आत्मन को प्रूव कर सकते हैं तो हमको प्रश्न होता है कि क्या यह जो एक प्रपोजिशन है वह वैलिड है कि नहीं क्योंकि आत्मन तो हो गया साइंस ऑफ सुपरकॉन्शसनेस अथवा तो साइंस दैट गोज बियोंड द सेंसेस और या तो फिर अपनी इंद्रियों के विषय है उसके परे का विज्ञान है यह आत्मन और ईश्वर और यह जो नेचुरल साइंस है वह है इंद्रिय गम्य जगत का विज्ञान अर्थात कि जो कुछ भी हम देख सकते हैं सुन सकते हैं स्पर्श कर सकते हैं वो जितनी भी चीजें हैं यह पृथ्वी है जैसे कि बायोलॉजी है केमिस्ट्री है मैथमेटिक्स है फिजिक्स है कॉस्मो कॉस्मोलॉजी है एस्ट्रोनॉमी है यह प्रकृति के जो विज्ञान है यह सब प्रकृति की पर भाषा में आते हैं विज्ञान की मदद से इन सब चीजों को जान पाएंगे किंतु जो नॉलेज ट गोज बियोंड इवन द अंडरस्टैंडिंग ऑफ द माइंड अपना मन जो है वह इंद्रियों के विषय को तो ग्राह्य कर सकता है मैं अपनी आंखों से देख सकता हूं कि हां चांद जो है उसकी कलाएं हैं अभी चांद की कलाएं और जो पृथ्वी पर समुंदर में भरती ओट आती है यह मैंने देखा और इसके बारे में मैंने सुना इसके बारे में मैंने पढ़ा दूसरे विद्वानों का क्या मत है यह जाना और इसके ऊपर में मैंने अपना मन लगा कर के एक टाइड मैंने एक ग्रेविटेशनल एक थिरी मैंने खोज निकाली ठीक है यह सब कुछ मैंने इंद्रियों के इंद्रियों से सोचकर समझकर और मन से जान कर के और सोच करके किया किंतु जो चीज इंद्रियों के विषय के परे है जो कि मन की जानकारी के परे है इसके बारे में मैं किस तरह से इस सब कुछ जान पाऊंगा विज्ञान का सहारा लेकर के हम जो सुपर कॉन्शियस सुपर नेचरल साइंस है उसको कैसे जान पाएंगे हालांकि सुपर नेचरल वर्ड दूसरे अर्थ में प्रयोग होता है आजकल किंतु जस्ट मने शब्दों की लिमिटेशन है यहां पे जो मन के परे हैं उसको डिस्क्राइब करने के लिए हमेशा शब्द खुट जाते हैं इसलिए हम इस तरह से लिमिटेड जो मीनिंग होता है ऐसे शब्दों को यूज करना पड़ता है तो जो भी है अभी क्या है कि आज इन साइंस के बारे में खास करके वेदांत के बारे में कहा जाता है कि आप एक्सपेरिमेंट करके जैसे देखिए एक चीज दोनों में सेम है कि जिस तरह से साइंस को आप बिना एक्सपेरिमेंट किए हुए स्वीकार नहीं करेंगे वैसे ही वेदांत को बिना वेदांत और योग इन दोनों को बिना एक्सपेरिमेंट किए स्वीकार नहीं करना चाहिए विज्ञान जो है यह दोनों की डेफिनेशन सेम है इस तरह से हम कह सकते हैं कि इसका विज्ञान के साथ में कोई संबंध है यदि आप यह कहेंगे इस तरह के कोई रिलीजन है जो कि फेथ बेस्ड रिलीजन है विश्वास के ऊपर में आधारित रिलीजन है कि हां यह मसीहा है या तो फिर यह अवतार है या तो फिर यह ईश्वर के पुत्र हैं और उनको आप प्रार्थना कीजिए उनकी भक्ति कीजिए तो आपको सब मिल जाएगा तोय एक विश्वास के बेस पर बने हुए रिलीजन है वेदांत जो है वो नॉलेज के बेस पे बना हुआ रिलीजन है रिलीजन शब्द भी वेदांत के लिए यूज करना ठीक नहीं इट्स अ नॉलेज बेस्ड प्रैक्टिस एंड नॉलेज बेस्ड साइंस जिस तरह से ग्रेविटी है जिस तरह से यह थर्मोडायनेमिक्स है जिस तरह से यह ऑर्गेनिक इनऑफ गनि कंपाउंड्स है जिसको हम लेबोरेटरी में एक्सपेरिमेंट करके या तो मैथमेटिक्स की मदद से कैलकुलेट करके हम प्रूव कर सकते हैं तो वैसे ही यह वेदांत को भी आप प्रैक्टिस करके प्रूव कर कर सकते हैं अर्थात कि मैं यदि वेदांत और योग में दर्शित साधन प्रणाली का अनुष्ठान करूं तो वेदांत और योग शास्त्र में जो सिद्धियां बताई गई है वो मुझे एक के बाद एक प्राप्त होना शुरू हो जाएगी तो एक्चुअली मॉडर्न साइंस के साथ में योग और वेदांत का सिर्फ एक ही रिलेशन है कि दोनों नॉलेज और एक्सपेरिमेंट बेस है किंतु यह कहना कि आज के मॉडर्न मैथमेटिक्स है या तो एस्ट्रोनॉमी है या तो कॉस्मोलॉजी है उसका यूज करके मैं वेदांत या योग प्रूव कर दूंगा तो यह तो बेसिकली गलत हो जाएगा क्योंकि इन दोनों का इस तर ये तो ऐसा हो गया ना कि मैं बायोलॉजी को लेकर के मैथमेटिक्स प्रूव करूंगा या तो बायोलॉजी की मदद से मैं फिजिक्स प्रूव करूंगा एक्चुअली ये दोनों का वर्ल्ड ही डिफरेंट है फिजिक्स डीएल करता है कि पार्टिकल्स और मैटर्स और एनर्जी स्पेस टाइम वगैरह के साथ में और बायोलॉजी बायोलॉजी का सब्जेक्ट मैटर क्या है ये लिविंग टिशूज लिविंग और ऑर्गेनिस्ट म तो यह बायोलॉजी और फिजिक्स का तो पूरा फील्ड ही डिफरेंट है आप ऐसा कैसे कहेंगे कि हां ऑफकोर्स मैंने देरर मैंने बायोलॉजी और फिजिक्स का एक जहां प संगम भी होता है वो वो एक दूसरा टॉपिक हो गया बहुत ज्यादा डिटेल में नहीं जा करर के मैं सिर्फ एक ऊपर ऊपर से उपमा के रूप में इसको बता रहा हूं कि बायोलॉजी का फील्ड डिफरेंट है फिजिक्स का डिफरेंट है तो मैं बायोलॉजी की उपमा देक के फिजिक्स को कैसे प्रूव करूं फिजिक्स को तो अपने ही खुद के ही एक्सपेरिमेंट करके प्रूव करना होना होगा और बायोलॉजी का अपना ही मेथड जो है उसके अनुसार बायोलॉजी को प्रूव करना होगा तो वैसे ही योग और वेदांत की जो मेथड है उसके बेसिस पे योग और वेदांत को प्रूव करना होगा किंतु यहां पे स्वामी जी एक अटेंप्ट करते हैं आज के इंटेलेक्चुअल लोगों को मन में थोड़ा सा बैठे कि हां यह यह भी जिस तरह से आप लॉजिक लगाते हैं यहां पर फिजिक्स में या एस्ट्रोनॉमी में या तो फिर ये इवोल्यूशन की जो थिरी है इसी तर तरह से लॉजिक लगा कर के आप ऊपर ऊपर से यह सब प्रूव कर सकते हैं ऑफकोर्स लॉजिक लगा के प्रूव करने का तो कोई फायदा नहीं है कि हां आत्मन है या ईश्वर है ऐसा किसी को विश्वास आएगा नहीं यह तो जब तक आप खुद यह योग की साधनाएं करते जाइए साधना करने के बाद सिद्धि प्राप्त होगी और तभी आपको विश्वास आएगा आर्गुमेंट से किसी को विश्वास नहीं आता किंतु फिर भी बिकॉज कि स्वामी जी इस मॉडर्न युग में जी रहे हैं तो मॉडर्न युग के अनुसार उन्होंने कुछ आर्गुमेंट कर भी दी है तो यहां पे बिकॉज़ कि हमको यह प्रवचन आखिर में जब हमने इसके ऊपर में क्लास किए थे इसको बड़ा लंबा समय हो गया है यह जो मैक्रो कजम जो है उसका एक आउटलाइन दे देता हूं उसके बाद में माइक्रो कजम अभी तक हमने जो स्टडी किया है उसका एक आउटलाइन दे दूंगा उसके बाद में हम फिर से जहां से हमने छोड़ा था मैंने देखा कि लास्ट क्लास हमारा हुआ था इस टॉपिक के ऊपर में नाथ फेब्रुअरी को तो 9 फेब्रुअरी को जहां पर छोड़ा था वहां से हम बाद में प्रारंभ करेंगे तो सबसे पहले मैक्रो कजम का आउटलाइन क्या है स्वामी जी कहते हैं जो लॉजिक हमारे सामने स्वामी जी रखते हैं कि जैसे कि मान लीजिए कि एक एक बीज है सीड है एक बीज को आप जमीन में डालेंगे तो उसमें से वृक्ष उत्पन्न होगा तो अभी आपको प्रश्न होगा कि इतना बड़ा वृक्ष इतने छोटे बीज में से कैसे आया तो इसका लॉजिक आंसर यह है कि पहले ऑलरेडी एक वृक्ष था फिर यह वृक्ष इवॉल्व होकर के उसका डीएनए एक मने पैकेज होकर के इस सीड के भीतर में बीच के भीतर में गया है और इस बीच के भीतर में पूरे वृक्ष का डीएनए कहो कि ब्लूप्रिंट कहो मौजूद है उपस्थित है फिर इसी को जिस तरह से यह फर्टाइल जमीन यह हवा पानी खोराक फर्टिलाइजर वगैरह मिलता है तो वो फिर वो प्रस्फुटित होकर के फिर से में परिणत होता है तो यह जो वृक्ष बीज में से इवोल्व हुआ इसके पीछे में इवोल्यूशन की प्रक्रिया थी वृक्ष में से बीच बना था तब कहीं जाकर के बीच में से वृक्ष हुआ तो इसी तरह से यह बिग बैंग कहो कि किसी भी तरह से ब्रह्मांड की शुरुआत कहो उसका इवोल्यूशन होते होते आज तो हमारे साइंटिस्ट ने पूरा ये इवोल्यूशनरी जो जर्नी है ऑलमोस्ट हमारे सामने वो खोज करके रख दिया है डिटेल भरने की बाकी है किंतु आउटलाइन तो अपने पास में है ही है कि बिग बैंग हुआ उसके बाद में यह मैटर और एनर्जी स्पेस एंड टाइम प्रारंभ हुए सर्वप्रथम यह एनर्जी कोलिस होकर के माने यह एनर्जी सॉलिडिफाईज हुए उसके बाद में एटॉमिक पार्टिकल्स पार्टिकल्स मॉलिक्यूल में परिणत हुए उसके बाद में तारे हैं ग्रह है गैलेक्सी है यह सब बनना शुरू हुआ फिर ये एक छोटी सी गैलेक्सी एंड्रो ये अपनी मिल्की वे गैलेक्सी मिल्की वे गैलेक्सी का एक छोटा सा तारा जिसका नाम है सूर्य और इस सूर्य के आसपास में पड़ती हुई एक छोटी सी प्लेनेट है पृथ्वी उसके ऊपर में यह एक के बाद एक ये जब ये मॉलिक्यूल कॉम्प्लेक्टेड मॉलिक्यूल में से ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल बने अर्थात कि एक ट्रांजिशन फेज उसमें आया कॉम्प्लेक्शन का और यही ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल धीरे-धीरे इवॉल्व होकर के वो एक लाइव फॉर्म एक जीवंत ऑर्गेनिस्ट म बने और फिर यही ऑर्गेनिस्ट म इवॉल्व होकर के ओवर ए 4 बिलियन ईयर माने पृथ्वी का फॉर्मेशन हुआ है आज से 4 बिलियन साल पहले 400 करोड़ साल पहले और यह लिविंग ऑर्गेनिस्ट मम आई थिंक आफ्टर 1 बिलियन और 2 बिलियन इयर्स ये लिविंग ऑर्गेनिस्ट म अस्तित्व में आ गए हैं और आज देखते हैं कि हम लोग यह लिविंग ऑर्गेनिस्ट सम धीरे-धीरे प्रकट होकर के आज मनुष्य के रूप में और फिर मनुष्य भी एडवांस होते-होते हमारे सामने आज श्री राम कृष्ण श्री राम श्री कृष्ण चैतन्य महाप्रभु यह जीसस क्राइस्ट उनके जैसे गॉड मैन अर्थवा अर्थवा तो कहेंगे ईश्वरीय महापुरुष उत्पन्न हुए तो अभी प्रश्न होगा कि क्या बिग बैंग में तो कुछ नहीं था उससे पहले जदिया यहां तक तो ले आई कि बिग बैंग से लेकर के जीसस या तो क्राइस्ट या तो चैतन्य महाप्रभु यहां तक तो हमको ले आई प्रश्न यह होगा कि ये इवोल्यूशन का जो यह साइंस है तो शून्य में से क्या एक भगवान रामकृष्ण प्रकट हुए हैं बिग बैंग के पहले कुछ नहीं था और आज राम कृष्ण श्री राम कृष्ण आ गए तो क्या शून्य में से सर्जन हुआ नहीं स्वामी जी कहते हैं कि जिस तरह से आपने ये इवोल्यूशन का थिरी डेवलप किया है वैसे ही आप इवोल्यूशन को भी स्वीकार कीजिए एक दिव्य सत्ता होगी जिसका डीएनए या तो फिर जिसका ब्लूप्रिंट एक बीज रूप में इवॉल्व हुआ होगा और इस बीज का फिर से विस्फोट होकर के फिर यह धीरे-धीरे करके यह मानव सभ्यता रूपी वटवृक्ष ये क्रिएशन रूपी वटवृक्ष बना है जिसका सर्वश्रेष्ठ फल है भगवान श्री राम कृष्ण भगवान राम भगवान कृष्ण वगैरह तो यह फल या तो इतना बड़ा वटवृक्ष शून्य में से नहीं हुआ ईश्वरीय दिव्य सत्ता थी इसमें से यह आया है तो यह स्वामी जी का लॉजिक है कि ईश्वर की सत्यता प्रूव करने के लिए और इसके बारे में स्वामी जी का एक सुंदर पैसेज एक पैसेज मैं पढ़ लेता हूं कॉस्मो माइक्रो कजम से की पैसेज जो है इस पूरी यह पूरा जो स्टेप बाय स्टेप स्वामी जी प्रूव करते हैं इसके बाद में जो उनका की पैसेज है वो मैं पढ़ लेता हूं एक बार स्वामी जी कहते हैं इट देयर फोर फॉलोज एब्सलूट दैट द परफेक्ट मैन द फ्री मैन द गड मैन हैज गोन बियोंड द लॉज ऑफ नेचर एंड ट्रांसजेंडर टू गो थ्रू दिस प्रोसेस ऑफ इवोल्यूशन थ्रू बर्थ एंड डेथ दैट मैन कॉल्ड क्राइस्ट मैन बाय द क्रिश्चियंस एंड द बुद्धा मैन बाय द बुद्धिस्ट एंड द फ्री बाय द योगी दैट परफेक्ट मैन हु इज एट द वन एंड ऑफ द चेन ऑफ इवोल्यूशन वाज इवॉल्वड इन द सेल ऑफ द प्रोटोप्लास्मिक सेंटेंस पूरे पैराग्राफ जैसा है स्वामी जी सही सही प्राणायाम करते होंगे उनकी लंग्स कैपेसिटी अच्छी होगी तभी कहीं जाकर के इतना लंबा सेंटेंस चिल्ला चिल्ला करके बोलना पड़ता था उस समय तो माइक्रोफोन वगैरह नहीं था यानी स्वामी जी क्या कहते हैं यह जो परफेक्ट मैन है यह फ्री मैन है यह गॉड मैन अर्थात कि ईश्वरीय महापुरुष है जो कि यह प्रकृति के नियम के परे चले गए हैं और यह जो कोई हम मनुष्य के मन की लिमिटेशंस समझते हैं मुझे पता है मेरे मन की की लिमिटेशन क्या है मेरी मेमोरी की लिमिटेशन क्या है मेरी इंद्रिय संयम की लिमिटेशन क्या है मेरी यह एकाग्रता कर एकाग्रता करने की लिमिटेशन क्या है यह सब मुझे पता है किंतु यह लोग जो कि यह मनुष्य की लिमिटेशंस मनुष्य की यह सीमाओं को पार करके ऊपर चले गए हैं जिन्होंने यह मनुष्य सभ्यता या तो फिर यह प्रकृति के नियमों को पार कर दिया है ऐसे महापुरुष जिनको कि यह इवोल्यूशन मने इवोल्यूशन के अंतिम छोर तक पहुंच गए हैं और इससे ज्यादा इवोल्व आगे हो ही नहीं सकते अंतिम स्टेप तक जो लोग पहुंच गए हैं जो कि जन्म मृत्यु जरा व्याधि के चक्र से पार चले गए हैं यह चक्र को इन्होंने तोड़ दिया है जिनको कि हम क्राइस्ट मैन कहते हैं क्रिश्चन लोग कहेंगे क्राइस्ट मैन बुद्धा लोग बुद्धिस्ट कहेंगे बुद्धा मैन और योगी कहेंगे मुक्त फ्री अर्थात कि मुक्त ऐसे जो परफेक्ट महापुरुष है वह एक इवोल्यूशन के एक चेन पर है एक अंत पे है और जो इवोल्यूशन के दूसरे अंत पे है वह है ईश्वर द प्रोटोप्लास्मिक अंत पे यह राम कृष्ण है दूसरे अंत पे है ईश्वर तो यह सुंदर पैसेज स्वामी जी का कॉस्मो माइक्रो कजम में से अच्छा तो यह तो हो गया इस प्रवचन का सारांश अभी माइक्रो कजम में आते हैं माइक्रो कोसम में स्वामी जी क्या प्रूव करते हैं अगेन वही मॉडर्न साइंस का सहारा लेकर के आत्मन का अस्तित्व प्रूव करने का प्रयास है मॉडर्न साइंस के अनुसार स्वामी जी क्या कहते हैं यह जो कुछ भी हम देखते हैं सुनते हैं स्पर्श करते हैं तो हमारी इंद्रिया है क्या इंद्रियों की मदद से हम देख पा रहे हैं सुन पा रहे हैं या तो फिर अनुभव कर पा रहे हैं नहीं इंद्रियों के परे एक मन है जब तक मन के भीतर में इंद्रियों के सिग्नल नहीं जाते जब तक मान लीजिए कि यह टेबल है मेरा उसको मैंने स्पर्श किया अभी मेरे हाथ जो है वो हाथ स्पर्श करते हैं उसकी वजह से मुझे यह नहीं पता चला कि मैंने स्पर्श किया है मेरे मन में यह सिग्नल गया कि हां यह हाथ टेबल को छू रहा है तब मुझे पता चला कि हां मैंने ये टेबल को स्पर्श किया है वरना देखिए कि मन कभी एब्सेंट होता है तो हमको यह स्पर्श की अनुभूति नहीं होती अभी मैं देख मान लीजिए कि मुझे यहां पर एडिटिंग करना है या ट्रांसलेशन करना है या लिखना है तो मैं पूरा कंसंट्रेशन देकर के लिख रहा हूं या तो फिर ट्रांसलेट कर रहा हूं उस उस समय मेरे मन को यह अनुभूति स्पर्श की नहीं होगी कि मैं कुर्सी पर बैठा हूं यह कुर्सी पर बैठा हूं यह स्पर्श उस समय मेरे मन में होगा ही नहीं मेरा पूरा मन का कंसंट्रेशन वो किताब के ऊपर में है मेरी नोटबुक के ऊपर में है और मेरे जिस हाथ हाथ में जो पेन पकड़ी है उस पेन के ऊपर में मेरी पूरी अनुभूति केंद्रित हुई है क्यों क्योंकि मेरा मन अभी यह नोटबुक किताब और पेन के ऊपर में है इस कुर्सी पर जो मैं बैठा हूं उसके ऊपर मेरा मन नहीं है तो स्पर्श की अनुभूति नहीं होगी तो स्वामी जी ने सबसे पहले तो यह प्रूव किया कि जो हमारे इंद्रिय हैं वह अनुभूति नहीं करते मन अनुभूति करता है उसके बाद में स्वामी जी कहते हैं किंतु मन भी तो देखिए कि वो भी जड़ है इसके बियोंड मन आता है बुद्धि यह इंटेलेक्ट और यह इंटेलेक्ट है वो एक्चुअली डिसाइड करती है कि यह मेंटल रिसोर्सेस को कहां पे कैसे एलोकेट करना है अभी बुद्धि की मदद से ही तो मैंने सोचा कि आज मुझे ट्रांसलेशन करना है बुद्धि की मदद से ही तो मैंने इस किताब को हाथ में लिया बुद्धि की हेल्प लेकर के ही तो मैंने पेन को स्पर्श किया है तो बुद्धि यह डिसीजन मेकर है और यह मन और इंद्रियां उसके वर्कर से उसके अंडर में कार्य करते हैं अच्छा अभी प्रश्न होगा क्या बुद्धि ही अल्टीमेट है मनुष्य के शरीर में मनुष्य के जीवन में नहीं बुद्धि के परे भी एक आत्मन है यह आत्मन की मदद से ही यह बुद्धि कार्य करती है जैसे कि यह फैन अभी ऊपर में चल रहा है तो हमको लगेगा फैन की अपनी खुद की इच्छा शक्ति कहो कि उसका खुद का पावर है वह चल रहा है किंतु यहां पे अभी मैं स्विच ऑफ कर दूंगा तो पेन ऑफ हो जाएगी अ फेन ऑफ हो जाएगा क्यों क्योंकि इलेक्ट्रिसिटी या तो पावर तो ये यहां से वो वो जनरेटर में से आता है या तो फिर वो जहां प ये जीबी है अपनी वो तो इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड वो तो पावर देता है तब तो कहीं फैन चलता है तो ये अपने शरीर में ये इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड कहो ना कि ये जनरेटर कहो वो है आत्मन तो ये हुआ प्रूफ कि ये आत्मन की प्रकाश से आत्मन के प्रकाश से ये इंद्री बुद्धि सर्वप्रथम बुद्धि की बाद में मन और मन के बाद में इंद्रिया सब कुछ कार्य कर रहा है और इस आत्मन के बारे में स्वामी जी क्या कहते हैं उसका एक की पैसेज कॉस्मो माइक्रो कजम से हम पाठ कर लेते हैं स्वामी जी क्या कहते हैं अ ग्रेट मेनी क्वेश्चंस नाउ अराइज अबाउट द नेचर ऑफ दिस सोल इस आत्मन के अस्तित्व के या तो आत्मन के कार्य उसके गुण धर्म के बारे में बहुत सारे प्रश्न अभी खड़े होंगे इफ द एक्जिस्टेंस ऑफ द सोल इज ड्रॉन फ्रॉम द आर्गुमेंट दैट इट इ लुमिनस दैट नॉलेज एसिस्ट एक्जिस्टेंस ब्लेसेडनेस आर इट्स एसेंस इट नेचुरली फॉलोज दैट दिस सोल कैन नॉट हैव बीन क्रिएटेडटेड या तो जहां पे यह जो बड़े-बड़े ट्रांसफॉर्मर होते हैं वहीं पर इलेक्ट्रिसिटी प्रकट होता है वहीं पर बनता है तो फिर आप कहेंगे कि अरे नहीं भाई इलेक्ट्रिसिटी सही में देखा जाए तो यह हाइड्रो पावर अर्थात कि यह नदी के ऊपर में डैम बना कर के या तो फिर यह कोल पावर या तो कोयले को जला कर के या तो फिर न्यूक्लियर फिशन यह न्यूक्लियर मटेरियल को जला कर के प्रकट होती है यह जनरेटर जो है वोह तो वहीं से एनर्जी लेता है अभी इस तरह की जद हम आर्गुमेंट करते जाएंगे स्वामी जी कहते हैं ड इंफिनिटम हो जाएगा इसके बाद में यह है इसके बाद में यह है इसके बाद में यह है एक जगह पर हमको स्टॉप करना होगा यह तो जो पानी बह रहा है उसके पीछे में तो समुंदर का वाष्प भवन होकर के बारिश होता है उसकी वजह से यह बह रहा है फिर ये वाष्प भवन होता है इसलिए क्योंकि यहां पे सूरज है सूरज है इसलिए कि इसके भीतर में न्यूक्लियर फ्यूजन होता है न्यूक्लियर मने ये दिस इज एन एड इंफिनिटम इसके पीछे कौन सी सोर्स है एनर्जी का ये है इसके पीछे कौन सा सोर्स है तो दूसरा है ये एक जगह पे हमको बोल देना होगा कि आत्मन ही एक अल्टीमेट सोर्स है जो कि सब कुछ प्रकाशित करता है तो यदि आत्मन के तक हम आर्गुमेंट करके पहुंच गए इसके बारे में बहुत सारा प्रश्न खड़ा होगा और हमको यह देखना होगा कि यदि हमने यह सोचा कि आत्मन इज अल्टीमेट तो यह मानना होगा कि आत्मन अपनी एनर्जी अपने से जनरेट करता है इट इज सेल्फ लुमिनस उसको और कोई प्रकाशित नहीं करता इट इज नॉलेज जो भी ज्ञान है वह आत्मन में से आता है इट इज एसिस्टेंसिया के जो तीन ये इसके गुणधर्म बताए गए हैं आत्मन ही अस्तित्व में है आत्मन ही जीवंत है आत्मन ही हमारे शरीर को जीवन दान प्रदान करता है या तो फिर यह मिट्टी के पंचमहाभूत के बने हुए देह में वह प्राण संचार करता है प्राण प्रतिष्ठा करता है तो आत्मन अपने से अपनी इलेक्ट्रिसिटी जनरेट करता है वो यानी कि वोह अपने से सेल्फ लुमिनस है आत्मन ही सभी नॉलेज सभी विज्ञान का अंतिम वो रिपोजिट है और आत्मन ही ये जड़ शरीर में शक्ति संचार करता है ब्लेसेडनेस और एक है ब्लेसेडनेस अर्थात कि यह आध्यात्मिक आनंद यह सब आत्मन के गुणधर्म है अभी यह सब आत्मन के गुणधर्म होंगे तो इट नेचुरली फॉलोज दैट सोल कैन नॉट बी क्रिएटेड्रॉअर्नेविगेटर होगा कि इलेक्ट्रिसिटी तो हमको पता है कि हाइड्रो पावर से वगैरह साती है मने एक जगह पर हमको स्टॉप करके बोल देना होगा कि यही यही मने ये सेल्फ माने यही अल्टीमेट पावर का सोर्स है इसलिए वरना तो फिर वो इनफाइनों चलती ही रहेगी इसीलिए स्वामी जी कहता है स्वामी जी कहते हैं कि यदि आत्मन सभी नॉलेज सभी ज्ञान सभी विज्ञान सभी आनंद सभी जीवन का सोर्स है तो आत्मन को कोई क्रिएट नहीं कर सकता वोह स्वयंभू है अ सेल्फ लुमिनस एक्जिस्टेंस इंडिपेंडेंट ऑफ एनी अदर एक्जिस्टेंस कुड नेवर हैव बीन द आउटकम ऑफ एनीथिंग जो कि स्वयं अपने पावर का सोर्स है जो कि और किसी चीज के ऊपर में डिपेंड नहीं है वो और किसी चीज पे वो और किसी चीज से जन्म नहीं ले सकती माने यदि पुत्र जन्म लेता है तो उसका डी मने उसका डीएनए पिताजी के पास में से आया है पिताजी ने जन्म लिया है तो उनका डीएनए उनके मने उनके पिताजी से आया है एक जगह पे स्टॉप कर देना होगा कि जो कि डीएनए जहां पे क्रिएट हुआ है तो वैसे ही यह आत्मन एक जगह प हमको जाकर के कह देना होगा सेल्फ लुमिनस है तो उसको और कोई क्रिएट नहीं कर सकता इट ऑलवेज एसिस्टेड वो हमेशा से अस्तित्व में था देयर वाज नेवर ए टाइम व इट डिड नॉट एक्सिस्ट बिकॉज इफ द सोल डिड नॉट एक्सिस्ट वेयर वास द टाइम एक समय था मने ऐसा कोई भी समय नहीं था कि जब आत्मन नहीं था क्योंकि यदि आप यह कहेंगे कि हां एक समय था तब आत्मन नहीं था तो प्रश्न होगा कि समय इट सेल्फ इज अ बाय प्रोडक्ट ऑफ द आत्मन राइट मने आत्मन के भीतर में ही तो यह समय है समय और अवकाश यह जो फोर डायमेंशन आज की मॉडल मैथमेटिक्स की लैंग्वेज में कहे स्पेस एंड टाइम स्पेस की तीन डायमेंशन है लेंथ विड्थ एंड ब्रेड और एक चौथी डायमेंशन ऐड हो गई समय की टाइम की तो ये चारों डायमेंशन ही तो आत्मन के भीतर में से वो मेनिफेस्ट हुई है और दूसरे दो एलिमेंट है स्पे मैटर एंड एनर्जी तो यह मैटर एनर्जी स्पेस एंड टाइम या तो फिर कहेंगे स्पेस टाइम एक ही शब्द है स्पेस टाइम मैटर एनर्जी मैटर एनर्जी भी एक ही शब्द है क्योंकि मैटर और एनर्जी एक दूसरे में कन्वर्टिबल है यह न्यूक्लियर फ्यूजन उसी का परिणाम है तो ये ऑन दो ही अल्टीमेट चीजें हैं इस जगत में यदि कहा जाए तो एक हो गई मैटर एनर्जी दूसरा हो गया स्पेस टाइम तो ये स्पेस टाइम और मैटर एनर्जी दोनों ही तो आत्मन में से मेनिफेस्ट हुआ है यानी ऐसा नहीं कह सकते कि आत्मन एक समय था कि आत्मन नहीं था माने ये पूरा देखिए इस चीज को हम शब्दों में जैसे ही जितना बोलेंगे उतना ही हम कंफ्यूज होंगे क्योंकि हमारी जो वाणी है हमारा विचार है हमारा मन है यह स्पेस टाइम और मैटर एनर्जी के ये यूनिवर्स के भीतर में रहने को बात करने को सोचने के लिए हैबिटेड है इसके परे जो है उसके बारे में सोच भी सोचना भी मतलब मुश्किल है उसके बारे में शब्द खोजना भी मुश्किल है उसके बारे में बात करना भी बड़ा मुश्किल है तो इसीलिए कन्फ्यूजिंग लगता है यह आर्गुमेंट किंतु फिर भी मैंने आर्गुमेंट हमेशा आत्मन के बारे में ईश्वर के बारे में जो भी आर्गुमेंट होगी वह सर्कल में ही घूमती रहेगी गोल गोल घूमती ही रहेगी और सर्कल को ब्रेक करने का एक ही उपाय है कि अल्टीमेटली इसको कि एक्सपीरियंस किया जाए तो एनीवे फिलहाल तो एक्सपीरियंस की बात दूर है हमारे लिए वाणी से ही हम सब कुछ करते हैं तो वाणी से ही जितना भी कन्फ्यूजिंग लगे हम इसको सोचेंगे बात करेंगे इट ऑलवेज एसिस्टेड वो हमेशा थी आत्मन देयर नेवर वाज अ टाइम व्हेन इट डिड नॉट एजिस्ट ऐसा कोई समय नहीं था आत्मन नहीं था बिकॉज यदि आत्मन नहीं था तो समय कहां था टाइम इज इन द सोल समय आत्मन के भीतर में है इट इज व्हेन द सोल रिफ्लेक्ट्स इट्स पावर ऑन द माइंड एंड द माइंड थिंग्स दैट टाइम कम्स कितना बड़ा स्टेटमेंट स्वामी जी ने दे दिया है जब आत्मन अपना शक्ति अपनी एनर्जी अपना पावर मन के ऊपर में फेंकता है और मन जब कार्यरत होता है तब कहीं जाकर के यह समय उद्भव होता है यह किसके जैसा है यह इलेक्ट्रिसिटी जनरेटिंग जहां पे होता है मान लीजिए जनरेटर में इलेक्ट्रिसिटी जनरेट हुआ है तो जब तक ये फैन नहीं चलेगा तब तक हमको पता नहीं चलेगा कि इलेक्ट्रिसिटी है जैसे ही मैंने स्विच ऑन किया ये पोटेंशियल एनर्जी काइनेटिक एनर्जी में कन्वर्ट हुई तो वैसे ही जब तक आत्मन मन के संपर्क में नहीं आता तब तक जब तक मन का कार्यरत नहीं होगा तब तक ये स्पेस एंड टाइम होंगे ही नहीं जब तक फैन नहीं चलेगा तब तक हवा नहीं आएगी पता ही नहीं चलेगा कि हवा है तो फैन चलेगा तो पता चलेगा वैसे ही मन जब सोचना शुरू करेगा तब पता चलेगा कि हां भाई ये समय है क्योंकि सोचता हूं तो सोचने का प्रारंभ है अंत है मैंने इतने समय में इतना कार्य किया ये जो भी कार्य होता है उसी के साथ में सब कुछ रिलेटेड है तो जब तक आत्मन मन के संपर्क में नहीं आता कुछ कार्य नहीं होता तब तक स्पेस टाइम और मैटर एनर्जी अस्तित्व में नहीं आते व्हेन देयर वाज नो सोल सर्टेनली देयर वाज नो थॉट यदि आत्मन नहीं होगा तो विचार भी नहीं होगा एंड विदाउट थॉट देयर वाज नो टाइम और बिना विचार के यह समय भी नहीं होगा अच्छा यहां पे स्वामी जी कहते हैं व्हेन देयर वाज नो सोल अर्थात ऐसा नहीं है कि आत्मन नहीं था आत्मन का मन के साथ संपर्क नहीं था जब तक आत्मन का मन के साथ में संपर्क नहीं था मन ने कार्य करना प्रारंभ नहीं किया और जब तक मन ने प्रारंभ किया कार्य करना प्रारंभ नहीं किया तब तक मैटर एनर्जी स्पेस टाइम नहीं था हाउ कैन द सोल देयर फोर बी सेड टू बी एक्जिस्टिंग इन टाइम व्हेन टाइम इट सेल्फ एजिस्ट इन द सोल तो ऐसा कैसे कह सकते हैं कि हां यह समय के भीतर में आत्मन थी जबकि आत्मन के भीतर में समय है बड़ा ही कन्फ्यूजिंग लॉजिक है सोचते-सोचते हम सर्कल में ही घूमते रहेंगे यह तो ऐसा हो गया जब हम फैन ऑन करते हैं तब पता चलता है कि जनरेटर काम कर रहा है यदि फैन ऑफ होगा तो हमको पता ही नहीं चलेगा जनरेटर काम कर रहा है कि नहीं कर रहा है क्योंकि हमारे पास जानने का और कोई उपाय नहीं है तो यह प्रश्न होगा कि या फैन की वजह से जनरेटर का अस्तित्व है ना कि जनरेटर की वजह से फैन का अस्तित्व है यह प्रश्न हो सकता है फर्स्ट चिकन ना फर्स्ट एग य इस सर्कल को तोड़ कर के सही सही उत्तर जानने का एक ही माध्यम है वह है दिव्य दर्शन किंतु तोर वो एक दूसरा टॉपिक है तो यहां पर स्वामी जी कहते हैं कि ऐसा नहीं कह सकते कि ऐसा कोई समय था कि जब आत्मन नहीं थी क्यों क्योंकि समय खुद आत्मन के भीतर में है तो यह हो गया कि यह कॉस्मो मैक्रो कजम और माइक्रो कजम यह दोनों की आउटलाइन माइक्रो कजम की आउटलाइन हमने वहां तक ही स्टडी की है कि जहां तक हमने अभी तक पाठ किया है तो यह स्वामी जी का बेसिक आइडिया है जिसके ऊपर में उन्होने यह दो प्रवचन उन्होंने लोगों के सामने रखे और इसका पाठ हम अभी कल से आगे बढ़ाएंगे तो आज यही तक ओम शांति शांति शा हरि ओम श्री राम
Question Answer
कपण स्वामी जी लॉजिक तो सेम यूज करते हैं जो ईश्वर थे तो ईश्वर इ होकर के बीज रूप में आए जिसको हम शायद हिरणीय गर्भ कह सकते हैं और इसमें से विस्फोट होकर के या जो भी बोलो बिग बैंग बोलो जो भी अपना बिलीफ है उसके बाद में ये श्री राम कृष्ण आए तो प्रकृत माने ये पूरी जो सर्कल है एक एंड में ईश्वर है तो दूसरे एंड प श्री राम कृष्ण है तो स्वामी जी कहना चाहते हैं राम कृष्ण कोई हवा में से नहीं आए ईश्वर थे तो श्री राम कृष्ण आए तो हम भी हमारे भीतर में भी तो सेम डीएनए है वही ईश्वरीय डीएनए है तो हम चाहे तो श्री राम कृष्ण को अपने जीवन में मेनिफेस्ट कर ही सकते हैं भक्ति के माध्यम से हो योग के माध्यम से हो व्हिच एवर इज माने अपना हमको सूटेबल है मेथड तो ऑफकोर्स लॉजिक सेम है कि वही ईश्वरीय डीएनए हमारे भीतर में है मने वो क्रिश्चन थियोलॉजी है राइट कि मैंने मने और नॉलेज का एक फ्रूट हमने खाया एक पैराडाइज में हम लोग रह रहे थे बड़े आनंद से थे नॉलेज फ्रूट खाया तो हमारा पतन हुआ तो फिर ये पतन होकर के हमारा उने साल्वेशन क्या है तो ग्रेस तो ग्रेस इज द ओनली साल्वेशन तो ये ठाकुर ने खुद ने कहा है ना कि वो क्रिश्चन बलो मैंने क्रिश्चन लोगों की व पढ़ के देखा अर्थात बाइबल जो भी कोई किताब होगी हम अनुमान करके कहते बाइबल तो भीतर सु पाप और पाप मने ठाकुर कहते इसके भीतर में सिर्फ पाप और पाप लिखा हुआ है जे सालारा बोले आमी पापी सेलारा पापी होए जाए जो साला बोलता रहता है मैं पापी हूं पापी हूं वह साला पापी हो जाए यहां पर न्यूनेस कहो की नोवेल्टी कहो स्पेस टाइम मैटर एनर्जी के जो मॉडर्न कांसेप्ट है उसको स्वामी जी ने आत्मन के साथ में जोड़ा है तो ये एक इंटरेस्टिंग पैराडॉक्स खड़ा होता है ना साधना की दृष्टि से नहीं बोल रहा हूं ये इंटेलेक्चुअल जो लोग होते हैं ना अभी हम लोगों का ये जो बैड हैबिट हो गया है इंटेलेक्चुअल होने का तो ये इंटेलेक्चुअल लोगों को ये सब पैराडॉक्स बड़े अच्छे लगते हैं कि ये समय आत्मन के भीतर में है कि आत्मन समय के भीतर में है तो ये मॉडर्न फिजिक्स ये मॉडर्न कांसेप्ट और यह अपना ट्रेडिशनल वेदांत तो दोनों को कंबाइन करके कैसा लगेगा ये इन करना हमको अच्छा लगता है और ऐसा ऐसा करके ही स्वामी हनी ट्रैप स्वामी जी का ऐसा करके ही पकड़ लेते हैं शिकंजे में किंतु य ये देखिए ये हम जो सोचते हैं मैंने यह भी तो ठाकुर ने कहा था दो तीन महिलाएं लेडी डिवटी ठाकुर के पास आई तो मैंने साधना कैसे करनी है अभी ये लोग तो संसार में पड़े बेचारे कैसे साधना करेंगे ठाकुर ने कहा शिव पूजा करनी है शिव पूजा करेंगे तो सब आपके जो सब आपके घर की जो औरत ते हैं सब साथ में बैठ कर के कोई चंदन घिसे कोई फूल की माला बनाएगा कोई भगवान को सजाए तो ऐसा करते-करते उन्हीं की बातें करनी है जैसे कि धीरे-धीरे करके अपने संस्कार बने और फिर शुद्ध संस्कार हो गए तो धीरे-धीरे करके साधना में हम आगे जाएंगे तो ये स्मरण मनन निधि धसन यह सब चिंतन करते हैं तो हमको अल्टीमेटली तो फिर धीरे-धीरे करके ठाकुर म स्वामी जी का ही चिंतन होता है तो दिस आर द माने ये क्या है ना ये सब हमको खींचने का ये वैक्यूम क्लीनर की तरह है वो हमको खींचता है ऐसा करके फिर अल्टीमेटली वो वेस्ट बकेट में डाल देता है