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ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः कंप्लीट वर्क्स ऑफ स्वामी विवेकानंद स्वामी जी के जो अत्यंत ही इंपॉर्टेंट लेक्चर जो है ज्ञान योग सीरीज ऑफ लेक्चर उसमें से एक बड़ा ही एक वैल्युएबल बड़ा ही इंपोर्टेंट लेक्चर है कॉस्मो द मैक्रो कॉस्म इस लेक्चर के बारे में हमने ऑलरेडी कुछ क्लास किए हैं थोड़ा सा रिवीजन कर देता हूं स्वामी जी कहते हैं कि मनुष्य जाति मतलब खास करके हम भारतीयों ने भारतीय ऋषि मुनियों ने यह प्रकृति की भव्यता देखी देखा कि कितना विराट आकाश है कितने सुंदर बादल यह पेड़ पंखी यह नेचुरल सीनरी है तो यह प्रकृति की भव्यता देख कर के उनके मन में यह विचार आया उनके मन में यह प्रश्न उठा कि यह सुंदर प्रकृति है यह सुंदर पृथ्वी है यह समुंदर है सागर है पहाड़ है पेड़-पौधे हैं वह कहां से आए हैं और वह कहां जाने वाले हैं क्या यह मनुष्य जीवन जो है उसके उसका तो हमने देखा कि जन्म मृत्यु जरा व्याधि की ये साइकल है तो यह क्या मृत्यु के बाद में भी कोई जीव है कि नहीं मृत्यु के परे क्या है यह सब प्रश्न हमारे भारतीयों के मन में आज से हजारों साल पहले प्रकट हुए और जिस तरह से वह हमारी ऋग्वेद की जो रचाए है उसमें पूछा गया कि न सत आसीन न असत आसीन नासदीय सुक्तम जो है उसका उल्लेख स्वामी जी ने किया है कहते हैं स्वामी जी कि वी फाइंड द सेम क्वेश्चन आस्ड हमने यह सेम क्वेश्च पूछा हुआ देखा है वनस इज दिस वन देयर वाज नादर ओट नोर नॉट क्या है यह विश्व ब्रह्मांड ऐसा जब कुछ भी नहीं था और जब जब सत भी नहीं था जब असत भी नहीं था एंड डार्कनेस वाज हिडन इन डार्कनेस अंधकार अंधेरे से ढका हुआ था हु प्रोजेक्टेड दिस यूनिवर्स एंड हाउ इस विश्व ब्रह्मांड की सृष्टि किसने की प्रोजेक्टेड का अर्थ वे यहां पे रीजन नहीं है प्रोजेक्टेड का अर्थ है कि उसका एक परछाई माने जैसे एक सिनेमा में जब हम एक प्रोजेक्टर देखते हैं तो प्रोजेक्टर के भीतर में सिनेमा का रील होता है और वह स्क्रीन के ऊपर में वह रील के द्वारा वह परछाई जो गिरती है तो उसको देख कर के हमको लगता है अरे यह स्क्रीन के पीछे मतलब स्क्रीन के ऊपर में हमको गाड़ी भी दिखती है बंगला भी दिखता है वो विमान भी दिखता है पशु पक्षी भी दिखते हैं मुझे याद है मैं जब बहुत छोटा था मुश्किल से चार पाच साल का होऊंगा तो थिएटर में मेरे पिता जी मुझे ले गए थे तो मैंने देखा अरे यह इतना बड़ा स्क्रीन पे यह गाड़ी जो आ रही है तो गाड़ी इतनी सुंदर कार थी मैंने कार देखी थी उसके ऊपर में तो मुझे लगा कि यह बड़ी सुंदर कार मुझे देखनी है कि ये स्क्रीन के ऊपर में इतनी अच्छी दिखती है तो रियल लाइफ में कैसे दिखेगी तो मैं वो स्क्रीन के पीछे वाला जो कमरा है वहां पर गया मैंने पूछा कि कहां वो गाड़ी कहां है जो अभी आप स्क्रीन के ऊपर दिखा रहे थे तो वे लोग हंसने लगे कि व छोटा बच्चा होता है उसको पता नहीं होता है कि ये मैंने ऐसा सोच लिया था कि ये गाड़ी सही में पीछे में होगी और वे लोग उसके ऊपर में लाइट डाल के दिखा रहे इसलिए इतना अच्छा वो स्क्रीन पर देखता है वो एक्चुअली गाड़ी वगैरह कुछ नहीं है जो कुछ भी है वो सब वो रिल के ऊपर में वो पेंट किया हुआ है और फिर वहां से प्रकाश प्रोजेक्टर के थ्रू वो स्क्रीन के ऊपर दिखाई देता है तो इसको हम लोग कभी भी यह नहीं कहते कि यह सृष्टि ब्रह्मांड का क्रिएशन हुआ है और डिस्ट्रक्शन हुआ है हम लोग हमेशा यही कहते हैं ब्रह्मांड ईश्वर में से या तो ब्रह्मण में से प्रोजेक्ट हुआ है और वह फिर ईश्वर में या तो ब्रह्मण के भीतर में समाहित हो जाएगा विश्व का अपना कोई अस्तित्व नहीं है ब्रह्मण के ऊपर में ही वोह एक ब्रह्मण की ही एक छाया मात्र है तो यह हुआ अपना अद्वैत वेदांत तो इसीलिए स्वामी जी कहते हैं कि जब हम सृष्टि की भव्यता देखते हैं तो ऐसे विचार हमारे मन में आते हैं फिर स्वामी जी कहते हैं कि जब हम ऑब्जर्वेशन करना शुरू करते हैं और एक बहुत ही सुंदर सेंटेंस उन्होंने कहा था जो कि हमने पढ़ा था वो सेंटेंस मैं फिर से पढ़ता हूं वी फाइंड दैट इन दिस ओल्डेस्ट ऑफ क्वेश्चंस अ फ्यू पॉइंट्स हैड बीन ऑलरेडी सोल्ड यह जो पूरा पुराना जो प्रश्न था कि जब सत्य भी नहीं था जब असत्य भी नहीं था जब अंधेरे अंधकार अंधेरे से ढका हुआ था तब क्या था तो इस प्रश्न का ऑलरेडी एक उत्तर हम अपने श्रुति शास्त्र में ही पाते हैं ऐसा स्वामी जी कहते हैं और स्वामी जी आगे क्या कहते हैं द फर्स्ट इज दैट देयर वाज अ टाइम व्हेन देयर वाज नादर ऑट नोर नॉट सबसे पहला उत्तर यह है कि एक ऐसा समय था जब सत्य भी नहीं था असत्य भी नहीं था सृष्टि थी भी नहीं थी भी थी नहीं किस तरह से कि जिस तरह से हम अपने शरीर को देखते हैं यह टेबल को देखते हैं यह कंप्यूटर को देखते हैं यह किताब को देखते हैं इस तरह से कुछ नहीं था किंतु वह नाम रूप से ब्रह्मण के भीतर में निहित था जैसे कि गाय शब्द गाय शब्द है फिर गाय शब्द में से प्रोजेक्ट होकर के एक्चुअल गाय बनती है तो वो नाम और रूप ब्रह्मण के भीतर में एक निहित था जो कि फिर मेनिफेस्ट हुआ सृष्टि की शुरुआत के में समय में तो सृष्टि नहीं भी थी ऐसा नहीं है थी भी नहीं ऐसा नहीं है सत भी नहीं असत भी नहीं व्हेन दिस वर्ल्ड डिड नॉट एजिस्ट जब इस संसार अस्तित्व में नहीं था अवर मदर अर्थ विद द सीज एंड ओशनस हमारी यह मातृ भूमि यह पृथ्वी है उसके समुंदर और नदियों के साथ सिटीज एंड विलेजेस ह्यूमन रेसेस एनिमल्स प्लांट्स बर्ड्स एंड प्लेनेट एंड लुमिनरीज ऑल दिस इनफाइनों एक्जिस्टेंस इस पृथ्वी और पृथ्वी के ऊपर के समुंदर और नदियां पहाड़ शहर ग्राम यह मनुष्य सभ्यता पशु पक्षी यह पेड़ पौधे यह ब्रह्मांड के भीतर में यह ग्रह सितारे यह जो इस सृष्टि का विराट वैविध्य है इंफाइटिंग प्रश्न करते हैं आर वी श्यर ऑफ ट जो हम ऐसा कहते हैं इसके बारे में क्या सही है इसके बाद में स्वामी जी पूरा हमको उपमा के बाद उपमा देकर के एग्जांपल के बाद एग्जांपल देकर के समझाते हैं कि एक बीज में से एक विराट वट की रचना होती है और वही वटवृक्ष दूसरे बीजों को प्रोड्यूस करता है दूसरे बीजों का सर्जन करता है और वो खुद जब उसका विनाश होता है तब उसी के भीतर में से जन्म लिए हुए इस बीजों में से नए वटवृक्ष बनना शुरू हो जाते हैं तो यह जो सृष्टि स्थिति प्रलय की यह जो साइकल है कि किसी एक छोटे से चीज में से एक छोटी सी अवस्था में से एक छोटे से कोई वस्तु में से एक विराट किसी का निर्माण हुआ और वह विराट व्यवस्था जो थी वह फिर छोटे से बीच के भीतर में अंतर निहित हो गई तो इसके लिए स्वामी जी पहले तो पेड़ का उदाहरण देते हैं फिर पंखी का उदाहरण देते हैं किस तरह से अंडे में से पंखी आता है पंखी फिर अपना एक अंडे को जन्म देता है और फिर जब उसका मृत्यु होता है तो उस अंडे में से दूसरा पंखी निकलता है पहाड़ों की उन्होंने पहाड़ों का उदाहरण दिया कि पानी पहाड़ों के ऊपर में टकरा टकरा करके चट्टान के ऊपर में टकरा टकरा करके इसको मिट्टी बना देता है अब यही मिट्टी पानी के भीतर में समुंदर या नदी के भीतर में उसकी सतह पर जमा होती है और उसके एक के बाद एक लेयर बनते जाते हैं और फिर से वह चट्टान की तरह मजबूत होती जाती है और एक समय आएगा कि यही नदी या समुंदर में से वह चट्टान फिर से प्रकट होगी फिर से उठेगी फिर उन्होंने उदाहरण दिया है रेन ड्रॉप यानी कि बारिश के बिंदु का किस तरह से सूरज की गर्मी से समुंदर में से यह बारिश के बिंदु जो है पानी हवा में उठते हैं उनके बादल बनते हैं बादल में से बारिश होता है बारिश में से वही पानी समुंदर के भीतर में चला जाता है तो यह पूरा इसका लाइफ साइकल है तो एक के बाद एक उदाहरण देकर के स्वामी जी ने समझाया कि जब हम यह कहते हैं कि जब सत भी नहीं था जब असत भी नहीं था जब यह विराट विश्व और उसका इंफाइटिंग हुई थी बीज के रूप में सृष्टि अवश्य रही होगी अदर वाइज से सृष्टि का जन्म कहां से होता तो एक ब्रह्म रहेगा और फिर यह नाम रूप के रूप में ब्रह्मा के साथ में एक माया का एक अस्तित्व रहेगा जिसमें से यह सृष्टि प्रोजेक्ट होती है और फिर समाहित हो जाती है उसके बाद में स्वामी जी दूसरा पॉइंट रखते हैं कहते हैं कि यदि हम रेत के एक दाने को जान ले तो यह रेत के बने हुए जितने भी यह समुंदर की सतह है जिसको हम बीज बीच बीच कहते हैं वह सब हम जान लेंगे यदि मिट्टी के एक कण को जान ले उसके बारे में संपूर्ण रूप से सब कुछ समझ ले तो मिट्टी के इस कण से बने हुए जितने भी पहाड़ है सब चीजों के सबके बारे में हम जान लेंगे तो वो कहते हैं स्वामी जी यहां पे नोइंग वन लंप ऑफ क्ले वी नो द नेचर ऑफ ऑल द क्ले दैट इज इन द यूनिवर्स मिट्टी के एक छोटे से कण को जान लेने से इस विश्व ब्रह्मांड के मिट्टी के बने हुए मिट्टी का बना हुआ जो कुछ भी है सब कुछ हम जान लेंगे टेक अप अ लिटल प्लांट एंड स्टडी इट्स लाइफ एक छोटे से पौधे को लीजिए और इसका जीवन चक्र का अभ्यास कीजिए एंड वी नो द यूनिवर्स एज इट इज इस पौधे के जीवन चक्र के अभ्यास से विश्व ब्रह्मांड क्या है वह हम जान लेंगे स्वामी जी का लॉजिक है हम कुछ कह भी नहीं सकते हालांकि मुझे नहीं लगता कि मैं इस तरह से कोई पौधा अपने हाथ में उठाऊंगा और उसका स्टडी करूंगा तो विश्व ब्रह्मांड के बारे में जान दूंगा एक्चुअली स्वामी जी यह सब उदाहरण देकर कहते हैं और इसलिए कहते हैं महावाक्य को प्रतिपादित करने के लिए मेरे भीतर में जो जीवात्मा है भले ही चाहे काम क्रोध मद लोभ मोह से घिरा हुआ है किंतु इसके भीतर में तो एक अनंत समय हीन समय के परे रही हुई चेतन सत्ता तो मौजूद है ही है तो यदि मैं अपने सही स्वरूप को जान लूंगा तो उस अनंत विराट चेतन सत्ता से प्रोजेक्ट हुए इस पूरे विश्व ब्रह्मांड को जान लूंगा तो इसीलिए स्वामी जी यह सब उपमा देते हैं यह प्रतिपादित करने के लिए कि मेरे भीतर में जो जीवात्मा है और विश्व ब्रह्मांड के भीतर में जो आत्मन है या तो ब्रह्मण है वह एक ही है अहम ब्रह्मास्मि तत्वम असी तत यानी कि वो त्वम यानी कि तुम असी एक ही हो वो और तुम एक ही हो ऐसा गुरु जब शिष्य को कहते हैं तब शिष्य को ब्रह्मज्ञान हो जाता है तो यह वाक्य को प्रतिपादित करने के लिए स्वामी जी ने एक के बाद एक एग्जांपल हमारे सामने रखे हैं तो हमने अभी तक यहां पर यहां तक देखा अभी हम आगे पढ़ते हैं वो देखिए स्वामी जी क्या कहते हैं इफ वी नो वन ग्रेन ऑफ सैंड वी अंडरस्टैंड द सीक्रेट ऑफ द होल यूनिवर्स यदि हम मिट्टी के एक कण को जान लेते हैं तो मिट्टी के बने इस पूरे विश्व ब्रह्मांड को जान लेंगे यहां पे अब देखिए कि मॉडर्न साइंस भी एक तरह से इस इस बात का प्रतिपादन प्रतिपादन इस तरह से करता है कि देखिए कि ये एटम्स और इसके भीतर में यह जो प्रोटॉन न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रॉन है और आजकल तो साइंस इतना एडवांस हो गया है कि यह प्रोटॉन न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रॉन जिसको कि सब एटॉमिक पार्टिकल कहते हैं उसका भी भीतर का स्ट्रक्चर खोजने का आरंभ कर दिया जिसको कहते हैं क्वार्क्स या तो स्ट्रिंग्स दो तरह की थिरी है एक क्वार्क थिरी है जो कि कहता है कि ब्यूटी चार्म अप डाउन इस तरह के स्ट्रेंज इस तरह के नामों वाले कुछ छे क्वार्क से ये इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन और न्यूट्रॉन बने हैं और स्ट्रिंग थिरी कहती है कि एक स्ट्रिंग यानी कि जैसे कि वायोन्यूज से इन तारों को बजा सकते हैं वाइब्रेशन अलग होगा तो तार में से सूर भी अलग तरह के निकलेंगे तो वैसे ही पूरा ये एटम सब एटॉमिक पार्टिकल के भीतर में छोटे-छोटे तार है स्ट्रिंग्स है और इसका वाइब्रेशन है उसके ऊपर में से वह या तो इलेक्ट्रॉन बनाता है या तो न्यूट्रॉन बनाता है या तो प्रोटॉन बनाता है या तो फिर यह एंटी प्रोटॉन एंटी न्यूट्रॉन जिसको कि एंटी मैटर कहते हैं पूरा सब एटॉमिक पार्टिकल जू है वहां पे इतने सारे सब एटॉमिक पार्टिकल खोज निकाले हैं एक्सपेरिमेंट करते-करते कि अभी वो शायद वही लोग कंफ्यूज हो गए हैं जो फिजिक्स का स्टैंडर्ड मॉडल है वो बहुत अच्छे से काम कर रहा है मैथमेटिक्स उसका बड़ा ही अच्छे से एस्टेब्लिश हो चुका है अभी स्टैंडर्ड मॉडल के भीतर में उसका सब स्ट्रक्चर क्या है वो खोजने की कंपटीशन चल रही है तो क्वार्क्स एक मॉडल है स्ट्रिंग्स एक मॉडल है और भी कुछ-कुछ एग्जॉटिक मॉडल्स है मैथमेटिक्स वर्क आउट हो जाता है किंतु उसको प्रैक्टिकल एक्सपेरिमेंट करके प्रूव करना इट टेक्स नॉर्मसिंव जो है जो कि यूरोपियन वो सन जिसको कह कहते है ना वो सेंटर ऑफ यूरोपियन रिसर्च ना कि ऐसा कुछ नाम सब एटॉमिक रिसर्च ऐसा कुछ नाम है जो कि यूरोप में है तो वहां पर वो सब एटॉमिक पार्टिकल को कोलाइड करके एकदम हाई एनर्जी प एक दूसरे के सामने शूट करते हैं फिर वो जो धमाका होता है जब कोलिजन होता है उसमें से जो सब एटॉमिक पार्टिकल के ट्रैक्स प्रकट होते हैं उसमें से ये लोग मैथमेटिक्स यूज करके अनुमान करके कहते हैं कि ये कुछ तरह का पार्टिकल उसमें से प्रकट हुआ उसकी प्रॉपर्टीज क्या है वगैरह वगैरह तो स्वामी जी जो कहते हैं वह गलत नहीं है मॉडर्न फिजिक्स भी यही कहता है कि एक एटम एटम के बनते देखिए स्ट्रिंग्स या तो क्वार्स के बनते हैं सब एटॉमिक पार्टिकल्स सब एटॉमिक पार्टिकल्स के बनते हैं एटम्स और एटम्स के बनते हैं ये केमिकल कंपाउंड्स जैसे कि ऑक्सीजन है नाइट्रोजन है गोल्ड है सिल्वर है निकल है प्लैटिनम है यूरेनियम है समथिंग लाइक 93 94 यह जो पीरियोडिक टेबल के ऊपर में जितने भी एलिमेंट्स है वो बनते हैं और फिर उस एलिमेंट्स में से वो सेल्स ह्यूमन सेल्स बनते हैं बायोलॉजिकल सेल्स बनते हैं और जब ह्यूमन सेल्स के भीतर में से डेवलप होक के फिर ये लिवर किडनी ब्रेन हैंड्स एंड लेग्स ये मनुष्य या तो पेड़-पौधे या पशु पक्षी ये सब डेवलप होते हैं और इसी सब एटॉमिक पार्टिकल और कंपाउंड के यह तारे यह चांद यह ग्रह यह ब्रह्मांड यह सब बना हुआ ये और देखिए कि किंतु अभी फिजिक्स का मॉडर्न थिरी क्या कह रहा है पता है यह जिसको कि हम विजिबल यूनिवर्स कहते हैं यानी कि एटम का बना हुआ यह विश्व वो सिर्फ 4 पर है एक्चुअली पूरा जो ब्रह्मांड का जो मास है पूरा जो ब्रह्मांड है उसमें से सिर्फ 4 पर मैटर ही एटम का बना हुआ है या तो फिर जो कि विजिबल यूनिवर्स है इसमें से 25 पर ना कि डार्क मैटर है और 70 पर ना कि कुछ डार्क एनर्जी है अभी यह डार्क मैटर क्या है डार्क एनर्जी क्या है पता नहीं किंतु यह जो स्पेस टाइम ये मैटर और एनर्जी जो कि हम स्पेस एंड टाइम तो नहीं किंतु ये जो मैटर और एनर्जी जो हमको दिख रहे हैं वो सिर्फ 4 पर ना कि 5 पर ऑफ यूनिवर्स ही है तो इसके भीतर में यह 90 पर ना कि 95 पर यूनिवर्स किस चीज का बना है वो अभी तक साइंटिस्ट्स को पता नहीं यह लेटेस्ट डिस्कवरी है पिछले 10 15 20 साल की है कि जब यह डार्क मैटर का इन्वेंशन हुआ डिस्कवरी हुई यह मैथमेटिक्स में गड़बड़ भी हो सकती है और सही सही में ऐसी कुछ चीजें हो सकती है जो कि अब हमारे फिजिसिस्ट या तो साइंटिस्ट अभी तक नहीं जान पाए तो जो भी है स्वामी जी का जो बेसिक आइडिया है कि एक एटम को जान लेंगे तो एटम के बने हुए जितने भी कॉमिनेशन है वो वो कॉमिनेशन ये इलेक्ट इलेक्ट्रिसिटी ना कि ये ग्रेविटी ना कि ये स्ट्रांग न्यूक्लियर फोर्स वीक न्यूक्लियर फोर्स इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स जो कुछ भी प्र प्रोड्यूस करता है वो सब कुछ हम मैटर की स्टडी से जान पाएंगे यदि आज स्वामी जी को रिफ्रेश करके कहना है तो हम कह सकते हैं कि यह एक तो मैटर यानी कि एटम भी है और यह चार फोर्सेस भी है ये एटम और फोर्सेस इतना जान लेने से ये थिरी ऑफ रिलेटिविटी और क्वांटम डायनेमिक्स दो चीजें हैं जो कि पूरे यूनिवर्स को पूरे कॉस्मो को डिस्क्राइब कर है तो स्वामी जी की थिरी का मॉडर्न रूपांतरण इस तरह से होगा कि ऑन द स्मॉलेट स्केल क्वांटम डायनेमिक्स है और लार्जेस्ट स्केल रिलेटिविटी है यह दो थिरी जान लेने से मोस्ट ऑफ द यूनिवर्स हम जान लेंगे और आज साइंटिस्ट के भीतर में कंपटीशन है कि लार्जेस्ट स्केल पर यूनिवर्स को जो डिस्क्राइब करने वाली थरी ऑफ रिलेटिविटी है और स्मॉलेट स्केल पर यूनिवर्स को डिस्क्राइब करने वाली क्वांटम डायनेमिक्स थिरी है इन दोनों का रिकंस ग्रांड यूनिफाइड थिरी कैसे हो दिस इज द ग्रेट कंपटीशन अमंग द साइंटिस्ट टुडे स्वामी जी आगे कहते हैं अप्लाइज कोर्स ऑफ रिजनिंग टू फिनोमिना यह हमने यह तर्क या तो फिर यह हमने लॉजिकल सीक्वेंस डेवलप की इसको यदि य वि विश्व में हो होते हुई घटना माला के ऊपर में अप्लाई करेंगे वी फाइंड इन द फर्स्ट प्लेस हम हमको पता चलेगा सबसे पहले हम पाएंगे कि एवरीथिंग इज ऑलमोस्ट सिमिलर एट द बिगिनिंग एंड एट द एंड यह जो हमारा लॉजिक है जिसको कि हमने डेवलप किया लॉजिक क्या है कि अंडे के भीतर में से पंखी आता है पंखी बड़ा होने से दूसरा अंडा देता है और उस वो जब पंखी मर जाता है उसका मृत्यु होता है तब उसके अंडे में से नया पंखी जन्म लेता है तो एक बीज बीज में से एक राट वटवृक्ष और वटवृक्ष का फिर से बीच में समाहित हो जाना यह लॉजिक यदि हम अप्लाई करते हैं तो हमको प एक हम जनरल नियम यह बना सकते हैं कि कोई भी चीज हो ब्रह्मांड में यह पंखी हो ना कि बीज हो ना कि पहाड़ हो ना कि ग्रह तारे सितारे हो ना कि मनुष्य हो ना कि यह पानी का यह बारिश के यह बिंदु हो उसकी शुरुआत की स्थिति वो बीज फॉर्म में निहित था और अंत की स्थिति वो दोनों समान है बीज में से प्रकट हुआ बीज में से समाहित हो गया तो शुरुआत और उसका अंत जन्म और मृत्यु यह दोनों एक समान है इस तरह का निष्कर्ष हम निकाल सकते हैं द माउंटेन कम्स फ्रॉम द सैंड एंड गोज बैक टू द सैंड रेत में से या तो मिट्टी में से पहाड़ बनता है चट्टान बनती है और यही चट्टान या पहाड़ इस मिट्टी में समाहित हो जाती है रिवर कम्स आउट ऑफ वेपर एंड गोज बैक टू वेपर नदी एक वराल या वेपर यानी कि गुजराती में इसको वराल कहते हैं मुझे पता नहीं हिंदी शब्द क्या है गैस कह सकते हैं शायद कि व वाटर वेपर है सूरज की धूप से समुंद्र में से वह पानी जो निकलता है बादल बनता है बादल में से बारिश होती है वो बारिश ये नदियों को बनाती है और नदी का पानी फिर से वो सूरज की गर्मी से वह बादल के भीतर में चला जाता है तो बादल में से नदी आती है नदी फिर बादल में चली जाती है सूरज की धूप की वजह से प्लांट लाइफ कम्स फ्रॉम द सीड एंड गोस बैक टू द सीड पौधे बीच में से जन्म लेते हैं और बीच में समाहित हो जाते हैं ह्यूमन लाइफ कम्स आउट ऑफ ह्यूमन जम्स एंड गोज बैक टू ह्यूमन जम्स मनुष्य के बीच में से मनुष्य का जन्म होता है और उसव फिर उसके भीतर में समाहित हो जाता है यूनिवर्स विथ इट्स स्टार्स एंड प्लेनेट हैज कम आउट ऑफ अ नेबुलर स्टेट एंड मस्ट गो बैक टू इट यह ब्रह्मांड इसके तारे ग्रह के साथ में यह जो पूरा ब्रह्मांड है वो नेबुलर स्टेट स्वामी जी यह शब्द प्रयोग करते हैं आज का मॉडर्न साइंस का शब्द है बिग बैंग बिग बैंग में से ये तारे सितारे ब्रह्मांड आया है और इसी बिग क्रंच विश्व के अंत में होगा बिग क्रंच यानी कि एक बहुत बड़ धमाके के साथ में विश्व की शुरुआत हुई ब्रह्मांड की और यह जो जितना भी मैटर है वह फिर से वह ग्रेविटी की वजह से एक छोटे से कण के भीतर में चला जाएगा और फिर से धमाका होगा बिग क्रंच जिसके भीतर में यूनिवर्स चला जाएगा नेबुलर स्टेट यानी कि एक इस तरह का एक इस तरह की स्थिति जिसको कि हम डिफाइन नहीं कर सकते हैं या तो फिर गैस का क्लाउड कहो ना कि ये बादल को कहो ऐसा कुछ हम कह सकते हैं बादल या तो गैस क्लाउड या तो फिर इस तरह की स्थिति जिसको हम डिफाइन नहीं कर सकते उसमें से ब्रह्मांड आया तारे आए सितारे आए टाइम एंड स्पेस आया और इसी के भीतर में ये चला जाएगा आज रिलेटिविटी हम देखिए बिग बैंग के भीतर में से ब्रह्मांड उत्पन्न हुआ इसके बारे में अभी कोई ज्यादा कोई डाउट नहीं है किसी को इस जनरली एक्सेप्टेड थिरी किंतु विश्व का जो एंड होने वाला है उसके बारे में कुछ-कुछ स्पेक्युलेटिव कहता है कि ब्रह्मांड का जो एंड है व या तो फिर उसकी क्या फ्यूचर है वो आइर द यूनिवर्स इज ओपन एंडेड यानी कि ये जो बिग बैंग में से यूनिवर्स प्रकट हुआ और चारों ल फैलता ही जा रहा है फैलता ही जा रहा है तो फैलता ही जाएगा और फिर धीरे-धीरे करके पूरा वो टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा तो ये एक ओपन एंडेड थिरी है एक एक इक्वलिटी का थिरी है यानी कि यह ब्रह्मांड जो है वो फैलता तो जाएगा किंतु एक जगह पे आकर के स्टेबल हो जाएगा वो फैले का भी नहीं और कंट्रक्शन भी नहीं होगा और तीसरा है कि क्लोज यूनिवर्स अर्थात कि यह बिग बैंग में से आया तो धमाका होता है तो फैल रहा है अभी यह ग्रेविटी इतना स्ट्रांग हो जाएगा एक समय कि पूरा ब्रह्मांड सब तारे फिर से वो भीतर के उसके भीतर में आकर के वोह जहां से बिग बैंग हुआ वहां पर आकर के मिलेंगे और एक दूसरा धमाका होगा बिग क्रंच उसमें से शायद हो सकता है कि फिर से एक नए यूनिवर्स की रचना हो तो ये हमारा मॉडर्न साइंस कहता है देखिए मॉडर्न साइंस और ये वेदांत इसके भीतर में सिमिलरिटीज कितना है ऑन द अदर हैंड ये रेनेसा और रिफॉर्मेशन ये सब मूवमेंट रेनेसा रिफॉर्मेशन नहीं रिफॉर्मेशन तो चर्च में हुआ था ये जो साइंटिफिक रेनेसा जो यूरोप में आया 12थ सेंचुरी 13th सेंचुरी 14th सेंचुरी में वो इसलिए उनको लाना पड़ा कि ये कैथोलिक चर्च वो कहता है कि ब्रह्मांड या तो विश्व 4000 साल पहले प्रकट हुआ है और यह जो भी वैविध्य वरायटी देख रहे हो वह भगवान ने एक साथ में बना दिए हैं इवोल्यूशन नहीं हुआ डेवलपमेंट नहीं हुआ वह एक ही साथ में भगवान ने चमत्कार करके सब कुछ ले आए हैं और उसके सामने अपना वेदांत देखिए ये आजकल इवोल्यूशन या तो फिर यह डेवलपमेंट ऑफ यूनिवर्स की जितनी भी थरी है सब कुछ वेदांत के साथ में मिल जाती है करोड़ों साल पहले यह ब्रह्मा का दिन ब्रह्मा का रात जो हम कहते हैं एक-एक दिन यानी कि कोटि कोटि वर्ष तो यह करोड़ों करोड़ों साल पहले जब बिग बैंग हुआ और उसमें से ये पूरा विश्व निकला और डेवलप होते-होते एटम्स में से मॉलिक्यूल बने मॉलिक्यूल में से कंपाउंड बने ना कि उसमें से ये फिर तारे बने ये नेबुलास बनी ये प्लेनेट बने ये गैलेक्सी बनी ये सब कुछ उसमें से निकला है तो ये थिरी ऑफ डेवलपमेंट है ये साइंस भी एक्सेप्ट करता है वेदांत भी एक्सेप्ट करता है इसीलिए भारत में जो हमको हिंदुओं को कभी भी धर्म को रिजेक्ट करके साइंस को नहीं अपनाना पड़ा जैसा कि यूरोप में करना पड़ा है हमने धर्म और साइंस दोनों एक साथ में पकड़ के रखे हैं इसलिए रों के साइंटिस्ट को देखिए कि वो रॉकेट का मॉडल लेकर के वह मंदिर में जाकर के ऑफर करते हैं यह नासा के साइंटिस्ट है ना कि यूरोप के हैं वो सब ना कि ये चाइना वाले हैं वो सब हसेंगे कि ये हिंदू लोगों का किस तरह की ये अंधश्रद्धा है रॉकेट को जाकर के मंदिर में ऑफर करते हैं किंतु ये यहां पर गणेशोत्सव होता है गुजरात में बड़ा ही धूमधाम से होता है तो पेंडल जब लगते हैं तो वहां पे वो सब कुछ-कुछ मॉडल्स लगाते लगाते हैं डेकोरेशन के लिए तो वो इसरो चंद्रयान के रॉकेट्स कितनी जगह पे मैंने देखे एक छोटा सा वीडियो देखा वहां पे वो रॉकेट बना है रॉकेट ऊपर उठता है पूरा वो मतलब इतना वो अच्छा सा बनाया था मैकेनिकल वो कि रॉकेट पूरा हवा में जाता है बादल में से चांद के ऊपर जाता है फिर चांद में वो रॉकेट खुल कर के एक छोटा सा रोवर आकर के चांद के ऊपर गिरता है पूरा वो गणपति का पैडो है यहां पे चंद्रयान का मॉडल लगाया है दिस इज इंडिया दिस इज हिंदुइज्म ये हमारा हिंदुइज्म है कि यहां पे विज्ञान और धर्म आध्यात्मिकता और वेदांत दोनों हाथ हाथ साथ-साथ चलते हैं हाथ मिला कर के चलते हैं यूरोप की तरह बाइबल को रिजेक्ट कर दो वरना तो बाइबल में पढ़ कर के हमको ये नहीं इवोल्यूशन समझ में आएगा नहीं कि यह बिग बैंग बिग क्रंच और ये लशन ऑफ यूनिवर्स यह सब कुछ समझ में आएगा पहले बाइबल को रिजेक्ट करना पड़ता है फिर आप साइंस और कॉस्मोलॉजी एस्ट्रोनॉमी ये मॉडर्न फिजिक्स ये सेमीकंडक्टर्स यह सब आप ले सकते हैं भारत में वेदांत को पकड़ के ही आप ये सॉलिड स्टेट फिजिक्स है ना कि रिलेटिविटी है ना कि क्वांटम डायनेमिक्स है ना कि ये कॉस्मोलॉजी और एस्ट्रोनॉमी है ना कि ये मॉडर्न मैथमेटिक्स है सब कुछ आप वेदांत को स्टडी करते करते साथ-साथ में कर सकते हैं दिस इज द ग्रेटनेस ऑफ अवर हिंदुइज्म दिस इज द ग्रेटनेस ऑफ अवर वेदांत ठीक है तो आज यहीं तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तस्स श्री राम कृष्णर्पण मस्तु