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Swami Vivekananda's Macrocosm & Microcosm ·

ज्ञान योग स्वामी विवेकानन्द Cosmos Microcosm 29 Mar 2024

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ओ स्थापक य च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपिणी अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः आज सुबह को मैं स्वामी जी का जो प्रवचन है कोसमस माइक्रो को जम उसके ऊपर मैं थोड़ा सा चिंतन कर रहा था सोच रहा था कि बहुत बार ऐसा होता है ना जब हम पढ़ते हैं तब क्या होता है कि हम काफी कुछ एक के बाद एक लाइन बाय लाइन पढ़ते जाते हैं लाइन बाय लाइन एक्सप्लेनेशन खोजते जाते हैं किंतु ओवरऑल जो प्रवचन होता है उसकी एक्सप्लेनेशन उसकी अंडरस्टैंडिंग तो कब हमारे मन में जागृत होगी जबकि हमने लाइन बाय लाइन पढ़ लिया है तो यह तो जो प्रवचन है माइक्रो कजम एंड मैक्रो कजम इन दोनों के बारे में हम पढ़ तो रहे हैं पढ़ते पढ़ते बहुत सारे क्लासेस भी हो गए लाइन बाय लाइन एक्सप्लेनेशन भी देते गए किंतु ओवरऑल स्वामी जी का क्या मैसेज है ओवरऑल क्या अंडरस्टैंडिंग है वो थोड़ा सा हमको कब वो हम हमको पता चलेगा कि जब लाइन बाय लाइन पढ़ लिया उसके बाद में आखिर में ओवरऑल चिंतन करेंगे कि हां आखिर से पहले से आखिर तक वो जो पूरा आईडिया है इसके बारे में स्वामी जी क्या कहना चाहते थे तभी हमको यह पता चलेगा तो मैं सोच रहा था कि ऐसा तो क्या है कि स्वामी जी का बेसिक आईडिया है इसके पीछे में तो सोच रहा था सडन एक चीज मेरे माइंड में फ्लैश हुई पता है क्या है स्वामी विवेकानंदा प्रिडिक्टेड द बिग बैंग थिरी मने बिग बैंग थिरी बोलकर के कॉस्मोलॉजी की एक थिरी है जिसको कि स्वामी जी ने प्रिडिक्ट किया है अभी देखते हैं कि यह बिग बैंग थिरी क्या है और फिर यह देखते हैं कि स्वामी जी ने कैसे उसको प्रिडिक्ट किया है मुझे लगता है कि अ शायद मैं ही पहला हूं जिसने कि जिसके माइंड में यह आईडिया आया होगा कि स्वामी जी का यह प्रेडिक्शन है सबसे पहले देखते हैं कि बिग बैंग थिरी क्या है अभी एक एंट जो आइडिया है आज से 2000 साल पहले या 4000 साल पहले यह ग्रीक है या तो फिर अपने भारतीय ऋषि मुनि थे ग्रीक फिलोसोफर कहो ना कि भारतीय ऋषि मुनि कहो आज से 2000 4000 6000 साल पहले इन लोगों की एक बड़ी ही एडवांस एक बड़ी ही मने सोफिस्टिकेटेड अंडरस्टैंडिंग थी कि ये विश्व ब्रह्मांड क्या है किस तरह से कार्य कर रहा है किंतु व समय तो बीत चला गया इसके बाद में एक लंबा सा डार्क एजेस ब हमारी यह पृथ्वी के ऊपर में छा गया माने डार्क एजेस अर्थात कि एक इस तरह का पीरियड एक इस तरह का समय कि ये साइंस एंड लर्निंग ये रेशनल थिंकिंग एंड एक इंक्वायरिंग मा माइंड या तो फिर कहो कि मुमुक्षु यह मुमुक्षु सभ्यता में से ही जैसे कि लुप्त हो गया और इसकी वजह ये कंटीन्यूअस वॉर्स एंड बैटल्स एक जगह पर युद्ध होता है तो कहीं पर लोग आपस में झगड़ा करते हैं कहीं पर सिविल वर होता है तो कहीं पर पेंडम होता है तो कहीं पर नेचरल डिजास्टर होता है पता नहीं पृथ्वी के मानव सभ्यता ने ऐसा कौन सा पाप किया था तो ऐसा एक लंबा सा डार्क एजेस चला और फिर भारत में तो यह डार्क एजस लंबा चला किंतु यूरोप में एक इनलाइटनमेंट बोलकर के एक पूरी मूवमेंट स्टार्ट हुई और इस मूवमेंट ने क्या किया धीरे-धीरे रेशनल और साइंटिफिक टेंपर को वापस लेके आए तो ये एनलाइन मेंट के बाद की बात है लोग विश्व ब्रह्मांड के बारे में क्या सोचते थे तो जो सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक था उस समय का मिडिल एजेस का उसका नाम हमको पता है कि आ आइजक न्यूटन अभी न्यूटन ने क्या किया यह जो ग्रेविटी और वने लॉज ऑफ ग्रेविटेशनल वेव्स इसको जो उसने लॉज ऑफ डायनेमिक्स इसको बेसिकली कहते हैं तो ये जो लॉज ऑफ डायनेमिक्स खोज निकाले तो इससे हमको एक बड़ा ही पावरफुल एक मैथमेटिकल फ्रेमवर्क हमारे हाथ में आया इसकी वजह से हमको पता चला कि यह जो चंद्र है वह पृथ्वी की ओर घूम रहा है इर्दगिर्द पृथ्वी को सर्कल कर रहा है और फिर इतना ही नहीं पृथ्वी सूर्य की ओर अ इस तरह से ऑर्बिट कर रही है सूर्य की ओर चक्रा का गति में बह रही है और सूर्य भी इस तारों के साथ में लाखों लाखों करोड़ों जो तारे हमको दिखाई दे रहे हैं उसके साथ में इस कॉस्मो के भीतर में यूनिवर्स के भीतर में रह रहा है इससे पहले अभी अब हम लोग सिर्फ वेस्टर्न इवोल्यूशन की ही बात करेंगे वेस्टर्न थिंकिंग की ही बात करेंगे ईस्टर्न थिंकिंग को फिलहाल रहने देते हैं तो यह वेस्टर्न थिंकिंग उस समय का था कि बा में लिखा है कि 45 हज साल पहले यह ब्रह्मांड बना उसके साथ में भगवान ने क्या किया सभी को एक स्त्री और पुरुष की पेर में ये शेर है और शेरनी है फिर यह हाथी है और यह मादा हाथी है नर हाथी है ऐसा स्त्री और पुरुष की पेर में पूरे जितने भी पशु पक्षी है प्रकट किए और यह चलो कि इतिहास हमारा मानव सभ्यता पृथ्वी चालू हो गई किंतु अभी हमको पता है कि ये मैंने ये मिडल एजस में न्यूटन के बाद में ही कोपरनिकस रेवोल्यूशन के बाद में ही पता चल गया कि यह तो ब्रह्मांड तो इतना बड़ा है आप टेलिस्कोप से देखेंगे तो पता चलेगा कितने मने इतने सारे ग्रह हैं सितारे हैं तो अच्छा यह तो एक स्टार्ट हुआ किंतु यह जो पूरा कोपरनिकस रेवोल्यूशन था कोपरनिकस और आइजक न्यूटन और यह गैलीलियो यह तीन बहुत बड़े नाम थे उस समय के इन्होंने जो मैथमेटिकल और यह साइंटिफिक फि फिजिक्स की अंडरस्टैंडिंग जो डेवलप की उससे पता क्या चलता है कि ब्रह्मांड जो है वह क्लॉक वर्क की तरह कार्य करता है उस समय यह जो घड़ी जो है ना घड़ी बनाना एक बहुत बड़ी विद्या समझी जाती थी यदि आप यह जो मैकेनिकल घड़ी खोलेंगे आजकल तो सब डिजिटल घड़ियां आ गई है किंतु वो जो मैकेनिकल घड़ी खोलेंगे तो उसके पीछे में देखि कि कितने छोटे-छोटे कितने ही प्रेसा इज वो ये गियर होते हैं गियर ट्रेन इसको बोलते हैं एक के बाद एक गियर गोल गोल घूमेगा तो उसकी वजह से दूसरा गियर घूमेगा दूसरे की उससे लेकर के तीसरा घूमेगा ऐसा करके यह जो सेकंड का कांटा मिनट का कांटा और यह एक मैंने घंटे का कांटा ये तीनों गोलगोल घूमते हैं किंतु तीनों को घुमाने के लिए जो इतना फाइन मैकेनिज्म बनाना पड़ता है स्प्रिंग होती है गियर होते हैं कितना प्रेसा इजली आपको करना पड़ता है कि जो स्विस जो स्विस घड़ियां जिसको बोलते हैं वो मैंने उसकी क्वालिटी इतनी अच्छी होती है इतना मतलब परफेक्ट प्रेसीजन इंस्ट्रूमेंटेशन होता है कि गियर और स्प्रिंग की रचना की सालों साल तक यह घड़िया चलती ही जाए जब तक आप इसको चाब देते रहे या तो फिर इसके भीतर में बैटरी देते रहे तो वैसे ही यह ब्रह्मांड इस क्लॉक वर्क की तरह बना हुआ है यह स्प्रिंग है यह गियर है वो धीरे-धीरे करके चलते रहते हैं और यह पृथ्वी सूर्य सूर्य की आसपास घूमती रहती है चंद्र पृथ्वी के आसपास घूमता रहता है माने यह जो लॉज ऑफ डायनेमिक्स है ग्रेविटी के नियम इतने प्रेसा इज है इतने परफेक्ट है कि करोड़ों करोड़ों साल तक यह सब गोलगोल घूमता रहेगा जैसे घड़ी का कांटा घूमता है यह एक हमारी अंडरस्टैंडिंग थी किंतु 1915 में आइंस्टाइन अल्बर्ट आइंस्टाइन ने जनरल थिरी ऑफ रिलेटिविटी डिस्कवर की अभी इसके अनुसार एक बहुत ही सीरियस प्रॉब्लम उसको दिखाई दिया आइंस्टाइन क्या सोचता है कि अरे हम लोग तो ये जो क्लॉक वर्क यूनिवर्स कहते हैं यानी घड़ी तो चलती ही रहेगी चलती ही रहेगी अब घड़ी का कांटा देखिए घड़ी का कांटा कैसे एक दो तीन ये जो 12 ये जो घंटे होते हैं तो एक के बाद एक घंटे की ओर 1 दोती च ये 12 घंटे कैसे गोल-गोल घूमता रहता है उसमें कोई भी चेंज कभी भी नहीं होता ऐसा कभी होता है क्या कि सुबह को घड़ी का कांटा जोर-जोर से घूमेगा दोपहर को धीरे-धीरे घूमेगा बहुत धूप है चलो हम लोग थोड़ा सा दोपहर को खाना खाने के बाद विश्राम करते हैं तो घड़ी का कांटा धीरे-धीरे घूमेगा और फिर शाम को जब दुकान वगैरह खुलती है यह सब रास्ते में लोग आना जाना ट्रैफिक शुरू होता है जिसको कि रश ववर कहते हैं तो रश ववर में घड़ी का काटा एकदम जोर-जोर से घूमेगा ऐसा तो नहीं होता घड़ी का कांटा या तो मिडनाइट हो रात के 12:00 बजे हो ना कि दोपहर के 12:00 बजे हो ना कि सुबह को 7:00 बजे हो कि शाम के 7:00 बजे हो एक ही स्पीड से कंटीन्यूअस घूमता रहता है तो विश्व ब्रह्मांड भी ऐसे ही एक ही स्पीड से घूमते रहना चाहिए किंतु आइंस्टाइन ने क्या डिस्कवर किया पता है यह जितने भी तारे हैं जितने भी ये गैलेक्सी है गैलेक्सी खैर आइंस्टाइन को पता नहीं था गैलेक्सी बाद में डिस्कवर हुई किंतु यह तारे जो है यह सब क्या है पता है ये मने सिर्फ एक दूसरे के आसपास घूमते हैं ऐसा ही नहीं यह विश्व ब्रह्मांड को यदि इतिहास में देखा जाए टाइम फैक्टर यहां पे ऐड किया जाए तो ऐसा प्रतीत होता है कि ब्रह्मांड का धीरे-धीरे एक्सपेंशन हो रहा है तो अभी इसी लॉजिक को थोड़ा सा रिवर्स करें आज यदि ब्रह्मांड का एक्सपेंशन हो रहा हो अर्थात कि एक तारा दूसरे तारे से दूर जा रहा हो और इसको रिवर्स करें तो क्या होगा कि ये पहले तो पासपास में थे उसके बाद में एक्सपेंशन होकर के उसकी साइज बढ़ रही है अच्छा तो माने यह तो एक बिल्कुल ही नया रेवोल्यूशन आइडिया थिरी में से निकला कि पहले तारे पासपास में थे और फिर बाद बाद में धीरे-धीरे करके इसका एक्सपेंशन हो रहा है तो ये एक्सपेंशन कैसे हो सकता है भाई यूनिवर्स का यह तो बिल्कुल ही रेडिकल आईडिया है यह तो इसी के जैसा हो गया कहना कि घड़ी सुबह में फास्ट चल रही थी तो शाम को धीरे-धीरे चल रही है यह तो हो ही नहीं सकता घड़ी एक ही स्पीड से चलेगी वैसे ही यह विश्व ब्रह्मांड जैसा है वैसा का वैसा ही फिक्स ही रहेगा स्थिर ही रहेगा वो बढ़ेगा कम होगा ऐसा तो संभव ही नहीं है तो आइंस्टाइन ने एक कॉस्मोलॉजिकल स्टंट अपनी थिरी में ऐड किया कि ये बिना मतलब के जो इक्वेशन जो गलत गलत जो सब फेंक रहा है आइडियाज ने डेंजरस आइडियाज कि ये ब्रह्मांड एक्सपें हो रहा है कैसे होगा मने जो कि स्पेस एंड टाइम इट सेल्फ आर पार्ट ऑफ दिसने ब्रह्मांड ये तो ऐसा हो गया ना वेदांत की दृष्टि से कहेंगे कि आत्मन का एक्सपेंशन हो रहा है आत्मन का एक्सपेंशन कैसे होगा स्पेस एंड टाइम इट सेल्फ आर पार्ट ऑफ द आत्मन तो मने आत्मा इज बियोंड स्पेस एंड टाइम तो ऐसा जद कहेंगे कि विश्व ब्रह्मांड की जो बाउंड्री है इसी के भीतर में ही स्पेस एंड टाइम है फिर उसका एक्सपेंशन होगा यह तो मैंने बड़ा ही विचित्र लग रहा है पैराडॉक्सिकल काउंटर इंटूटिव लग रहा है अच्छा ठीक है इसके बाद में किंतु कुछ समय के बाद में एडविन हबल बोलकर के एक एस्ट्रोनोवा कर रहा था तारों का फिर ये नेबुलास का वगैरह तो उसने क्या पाया पता है यह जो बड़ी जो नेबुला दिखती है ना तारा तो ग्रह हमको पता है ग्रह क्या है कि जो पृथ्वी जैसे ये जो अपने सूरज के आसपास में सात आठ ग्रह है उसके उस समय तो सभी नौ के नौ नहीं खोजे गए थे बाकी दो तीन तो बाद में खोजे गए तो सात आठ जितने भी ग्रह है वो सूरज के आसपास घूमते हैं ये तो एक पता चला ग्रह ये है तारा हमको पता है सूरज एक तारा है फिर सेटेलाइट पता है कि मून एक सैटेलाइट है इसके बाद में एक नेबुला होती है नेबुला ना ही तो ग्रह है ना ही तारा है तो नेबुला है क्या मने इतना मने मने नेबुला का अर्थ है एक गैस का क्लाउड अभी गैस का क्लाउड कैसा वो हमको बिखरा हुआ दिखेगा तो ऐसा गैस का क्लाउड है क्या यह समझने के लिए गैस के क्लाउड के ऊपर में फोकस किया तो पता चला अरे ये तो एक एक बड़ी-बड़ी गैलेक्सी है माने ये मिल्की वे गैलेक्सी एक जो है वैसे ही ये एंड्रोमेडा गैलेक्सी ऐसी कितनी ही गैलेक्सी इस विश्व ब्रह्मांड में है माने ये तो एक बहुत ही बड़ा डिस्कवरी हो गया हम लोग सोचते हैं कि यह करोड़ों करोड़ों तारे मिल्की वे गैलेक्सी में है तो यही मिल्की वे गैलेक्सी ही एक्चुअली कॉस्मो है नहीं इस तरह की करोड़ों गैलेक्सी इस कॉस्मो के भीतर में है यह तो एक बहुत ही बड़ा डिस्कवरी जैसे हम लोग मानते थे कि यह सोलर सिस्टम ही है फिर पता चला जितने भी तारे हैं इट्स दे एक एक एक सोलर सिस्टम है अच्छा इसके बाद में पता चला कि ये जो पूरी मिल्की माने ब्रह्मांड कितना विस्तृत हो गया मनुष्य की अंडरस्टैंडिंग में ह्यूमन अंडरस्टैंडिंग के भीतर में जो कॉस्मो का एक्सपेंशन हुआ है कितना बड़ा इतना छोटा सा ब्रह्मांड था कहीं बड़ा हो गया ये तो एक एक्सपेंशन फिर जद ऐसा बोलेंगे कि मिल्की वे की तरह इतनी करोड़ों करोड़ों गैलेक्सी है और प्रत्येक गैलेक्सी के भीतर में करोड़ों करोड़ों तारे हैं बाप रे मैंने ये तो इतना बड़ा अंडरस्टैंडिंग ये ह्यूमन अंडरस्टैंडिंग इतना एक्सपें हुआ ये तो एक डिस्कवरी उसने किया फिर दूसरा एकदम डेंजरस एकदम नोबल रेडिकल डिस्कवरी उसने किया रेड शिफ्ट इसको बोलते हैं टेक्निकल सब्जेक्ट है उसको छोड़ दे किंतु रेड शिफ्ट का स्टडी करके उसको पता चला कि यह गैलेक्सी है वह सब एक के बाद एक से मने विस्फोट होता है तो कैसे गैलेक्सिया अलग-अलग एक दूसरे से दूर-दूर जा रही है सब गैलेक्सी एक से एक एक एक दूसरे से दूर दूर जा रही है जैसे कि एज इफ एक दिन सभी गैलेक्सिया पासपास में थी फिर विस्फोट होता तो सभी गैलेक्सिया कैसे एक दूसरे से दूर जा रही है यह तो इतना रेडिकल आईडिया है कि मैंने हम लोग मैंने इतने 2000 साल 4000 साल 6000 साल में जो हम लोग सोच रहे थे विश्व ब्रह्मांड के कॉस्मो के बारे में यूनिवर्स के बारे में ये तो पूरा ही उलट गया यह सब आइडिया न्यूटन ने ये जो क्लॉक वर्क यूनिवर्स कहा था कि घड़ी के कांटे की तरह सब कुछ घूमता रहता है ये सब कुछ उलट-पुलट हो गया गैलेक्सी जद विस्फोट हुआ सभी गैलेक्सी को एक साथ में रख दीजिए फिर विस्फोट कीजिए तो क्यों चारों ओर वो एक दूसरे से वह दौड़ती चली जाएगी तो यह ऐसा कैसे हो सकता है तो अभी यह एडविन हबल ऐसा सोच रहा था उसी समय आइंस्टाइन यह हबल को मिलने के लिए आया और इन दोनों का जो मने मीटिंग हुआ इट इज क्लासिकल मने ये जो य ह्यूमन सिविलाइजेशन में यह जो हाई पॉइंट होता है ना एक रेडिकल माने एक डिपार्चर हो होता है तो यह मीटिंग भी ऐसा एक रेडिकल एक पॉइंट था एक रेवोल्यूशन पॉइंट था साइंस की दृष्टि से आइंस्टाइन की थिरी में ऑलरेडी पता चल गया है कि ये ब्रह्मांड का एक्सपेंशन हो रहा है और एक समय था जबकि यह सितारे अभी ये गैलेक्सी आइंस्टाइन को तो पता ही नहीं था गैलेक्सी है अभी पता चला इसके साथ में बैठ कर के मीटिंग करके एडविन हबल के साथ में कि हां गैलेक्सी भी है और यह सब एक समय एक दूसरे के साथ-साथ में थे और आज सबका एक्सपेंशन हो रहा है यानी जद गैलेक्सी का एक्सपेंशन होगा इसका अर्थ है गैलेक्सी को शून्य में तो एक्सपें नहीं करेगी यह कॉस्मो इट सेल्फ इज एक्सपेंडिंग यूनिवर्स अपने से एक्सपें हो रहा है तो इन दोनों की मीटिंग से यह बात तो पक्की हो गई यह एडविन हबल के पास में ऑब्जर्वेशनल प्रूफ है और आइंस्टाइन के पास में यह थिरी ऑफ जनरल रिलेटिविटी है किंतु यह दो पॉइंट तो हुए एक तीसरा क्रुशल पॉइंट था कि आपने वर्तमान तो देख लिया कि वर्तमान में गैलेक्सी एक्सपें हो रही है तो किंतु भूतकाल में ऐसा तो क्या हुआ होगा कि जिसकी वजह से यह सब एक विस्फोट हुआ और गैलेक्सी एक दूसरे से दूर दूर जा रही है ऐसा क्या हुआ होगा तो यह जो तीसरा जो क्रुशल लिंक है तीसरा क्रिटिकल पॉइंट है जॉर्ज लिमा इटर बोलकर के एक कैथोलिक पृष्ठ था मा कैथोलिक पृष्ठ था और कॉस्मोलॉजिस्ट भी था उसने एक पेपर पब्लिश किया 1930 के आसपास में जिसमें कि उसने यह बिग बैंग थिरी बोल कर के एक कांसेप्ट डेवलप किया कि यह विश्व ब्रह्मांड एक छोटे से बीज के रूप में होगा फिर उस बीज में एक एक्सप्लोजन हुआ होगा या तो फिर बीज का शब्द ही छोड़ दीजिए शून्य में से एक विराट एक्सप्लोजन हुआ होगा जिसको कि इसने नाम दिया बिग बैंग और इस एक्सप्लोजन के बाद में धीरे-धीरे करके यह गैलेक्सी स्टार्स बनते गए और बिकॉज की एक्सप्लोजन की वजह से इनको जो वेलोसिटी मिली थी जो गति मिली थी तो आज भी एक्सपें हो रहे हैं तो यह तीसरा क्रिटिकल पॉइंट था इसके बाद में कॉस्मोलॉजिस्ट ने एक के बाद एक इस बिग बैंग थिरी को काफी डेवलप किया किस तरह से एक्सप्लोजन हुआ होगा किस तरह से एनर्जी रिलीज हुई होगी किस तरह से एनर्जी में से धीरे-धीरे एनर्जी कंडेंस होकर के थिरी ऑफ रिलेटिविटी एकदम परफेक्ट दिखाती है कि एनर्जी मास में कैसे कन्वर्ट होती है तो यह एनर्जी कन्वर्ट होते-होते यह एटॉमिक पार्टिकल्स सब एटॉमिक पार्टिकल्स उसमें से एटॉमिक पार्टिकल्स उसमें से फिर धीरे-धीरे करके ये स्टार्स ये गैलेक्सी वगैरह बनना शुरू हुआ जिसको कि स्टैंडर्ड मॉडल कहते हैं स्टैंडर्ड मॉडल और कॉस्मोलॉजी का और ये क्वांटम डायनेमिक्स का तो अभी अपने पास में एक परफेक्ट थिरी है कि बिग बैंग थिरी कि शून्य में से विस्फोट हुआ और यह विश्व ब्रह्मांड आज का बना और इसके पीछे में कितने सैकड़ों साइंटिस्ट की अपने पूरे जीवन की एक क्रिटिकल एक कंट्रीब्यूशन है पूरा जीवन देकर के कितनी पावरफुल थिरी डेवलप की है तब कहीं जाकर के ये सब हुआ है अच्छा अभी ये तो हुआ आज का मॉडर्न साइंस स्वामी जी यहां पे कहां पे आते हैं स्वामी जी का कॉस्मो मैक्रो कजम हम पढ़ रहे थे तो देखिए कि स्वामी जी के समय में एक इवोल्यूशन की थिरी थी किंतु ये इवोल्यूशन यानी कि ऑर्गेनिक इवोल्यूशन एक सिंग अमीबा एक था स्वामी जी की लैंग्वेज में या तो आज की लैंग्वेज में कहेंगे कि सिंगल सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट म था पृथ्वी के ऊपर में आज से मान लीजिए कि 100 करोड़ साल पहले कि 200 करोड़ साल पहले पृथ्वी पे एक सिंगल सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट म या तो अमीबा का जन्म हुआ फिर अमीबा का इवोल्यूशन होते-होते मल्टी सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट म बने उसमें से शायद मछली बनी मछली समुंदर में तैरती थी यह समुंदर में से यह पृथ्वी पे आई चलना शुरू किया फिर यह उसमें से यह डायनोसोर वगैरह आए डायनोसोर को रेप्टाइल बोलते हैं डायनोसोर का इवोल्यूशन होकर के मैमल्स आए हम मैमल्स अ स्पीशीज के भीतर में कहे जाते हैं मैमल्स में से ये घोड़ा हाथी वगैरह आए जिसमें से कि एप्स आए बंदर आए और फिर बंदर का इवोल्यूशन होकर के मनुष्य आए तो यह इवोल्यूशन की थिरी उस समय यह डार्विन था चार्ल्स डार्विन उसने डेवलप की थी और उस उसको लेकर के धार्मिक जगत में बहुत बड़ा हल्लागुल्ला मच गया था कि बंदर में से यह मनुष्य कैसे आ सकता है मैं यह सब यह हिस्ट्री ऑफ साइंस मुझे पढ़ना अच्छा लगता है तो मैं जब पढ़ रहा था तो उसमें कार्टून था उस समय के जो लंडन का एक न्यूज़पेपर एक चार्ल्स डार्विन का एक कार्टून बनाया है उसका चेहरा ना बिल्कुल बंदर की तरह बनाया है और बोला कि तुम्हारे पूर्वज बंदर में से आए होंगे क्योंकि तुम बंदर जैसे दिखते हो हम बंदर जैसे नहीं दिखते माने हमारे पूर्वज तो बंदर में से नहीं आए माने ये कि कैसे स्वीकार कर ले कि भाई हम लोग बंदर में से जीसस क्राइस्ट बंदर में से प्रकट हो सकते हैं क्या ऐसा कैसे हो सकता है किंतु यह देखिए एक्सक वेशन करके धीरे-धीरे करके हमको जो यह जो हड्डी कंकाल वगैरह जो मिलता है स्केलेटन वगैरह यह तो एकदम क्लियर प्रूव करता है कि भाई यह इवोल्यूशन तो सही है गलत नहीं है तो स्वामी जी ने उस समय क्या कहा कि देखो आप लोग इवोल्यूशन कहते हैं हम लोग इवोल्यूशन स्वीकार करते हैं वेदांत इवोल्यूशन स्वीकार करता है किंतु तो साथ-साथ में ही आप एक दूसरा कांसेप्ट स्वीकार कीजिए हम आपका इवोल्यूशन लेते हैं तो आप हमारा इवोल्यूशन लीजिए एक ईश्वर था एक दिव्य सत्ता थी वो दिव्य सत्ता बीज स्वरूप होकर के एक अमीबा बना फिर ये माने सिंगल सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट म और फिर इसमें से जैसे कि वृक्ष है वृक्ष उसमें से बीज बनता है तो बीज के भीतर में क्या होता है वृक्ष का डीएनए होता है या तो फिर वृक्ष का ब्लूप्रिंट होता है अभी ये बी मिट्टी में गिरता है इसको हवा पानी खुराक फर्टिलाइजर मिलते हैं तो बीच में से फिर से वृक्ष बनता है तो आप कहेंगे इतने छोटे बीच में से इतना बड़ा वृक्ष कहां पे आया किंतु देखिए कि लॉजिक बड़ा क्लियर है ऑलरेडी एक वृक्ष था यह वृक्ष में से उसका इवोल्यूशन होकर के बीज बना फिर इस बीज में से इवोल्यूशन होकर के वृक्ष बना तो वैसे ही पहले ईश्वर था ईश्वर बीज होकर के डीएनए रूप बने ब्लू प्रिंट में एक छोटा सा बीज बना और फिर इसी बीज में से धीरे-धीरे करके अमीबा आया फिर बाकी सब इवोल्यूशन स्टार्ट हुआ तो आज हमारे पास में श्री राम कृष्ण है श्री राम है श्री कृष्ण है जीसस है तो ये एक छोर पे जद ये ईश्वरीय महापुरुष है तो उसके सामने के छोर पे ईश्वर ही होंगे अदर वाइज तो बीच में से इवोल्यूशन सिंगल सेलुलर अमीबा में से इवोल्यूशन होकर के श्री राम कृष्ण कैसे प्रकट हो सकते हैं यह तो असंभव लगता है लॉजिक की दृष्टि से तो जब स्वामी जी हमको यह सब समझा रहे थे तो मैं इसका तो मैंने यह बायोलॉजिकल इवोल्यूशन का उदाहरण तो देता ही था साथ-साथ में ही अर्ली अर्ली मैंने उस समय के क्लास में मैं यह ब्रह्मांड का भी उदाहरण देता था कि हां बिग बैंग हुआ और इसके बाद में से ये गैलेक्सी वगैरह बनी और आज कहीं जाकर के हमारे सामने यह एक्सपेंडिंग यूनिवर्स है तो हम अनुमान कर सकते हैं कि ईश्वर ही बीज स्वरूप होकर के वो बिग बैंग हुए होंगे और फिर बिग बैंग में ऑलरेडी वो डीएनए होगा तो वो डीएनए में से आए स्ट किंतु ये जब मैं एक्सप्लेन कर रहा था उस समय मुझे यह बात स्ट्राइक नहीं हुई थी यह बात मुझे याद नहीं रही कि बिग बैंग थिरी तो 1930 की डेवलपमेंट है नहीं कि स्वामी जी के समय की स्वामी जी यह लेक्चर तो दिए हैं 18955 18944 उस समय में यानी कि एटलीस्ट 35 साल पूर्व स्वामी जी ने ऑलरेडी यह आईडिया लॉजिकली डेवलप कर दिया था कि वृक्ष में से बीच बना यह वृक्ष का डीएनए या ब्लूप्रिंट बीच में है और फिर यही डीएनए ब्लूप्रिंट एक्सपें होक के उसका वृक्ष बनता है तो यानी कि यह कॉस्मो आज जिस स्वरूप में हमको दिख रहा है वह यदि बिग बैंग का परिणाम है तो बिग बैंग से पहले एक ब्राह्मण कहो ना कि दिव्य सत्ता कहो वो होगा तभी तो कहीं जाकर के आज का यह लिविंग यूनिवर्स बना है हम लोग इस यूनिवर्स के भीतर में जीवित है और हमारे भीतर में यह मक्ष क्व है और यह मक्ष क्व ही हमको यह टेलिस्कोप बना कर के यह कॉस्मो की ओर देखना ऑब्जर्वेशन करना सिखाते हैं कि हां मैं देखना चाहता हूं मैं पृथ्वी पर सीमित नहीं रहना चाहता मैं देखना चाहता हूं कि पूरे विश्व ब्रह्मांड में कौन सी चीज कहां पे है यदि आप अभी आप देखिए अभी तो हमने मॉडर्न साइंस की बात की किंतु एंसटिटाइट कि किस तरह से एक के बाद एक यह जो पुरानी सभ्यताएं थी तो रात को एक जंगल में या तो खेत में सुए हुए हैं और आकाश में इतने सारे तारे देखते हैं तो कौन से तारों का कहां पर पोजीशन है कौन सा प्लेनेट कहां पर चल रहा है बोलकर के उन्होंने ऑब्जर्वेशन करके यह कांस्टेलेशंस अर्थात कि नक्षत्र खोज निकाले भारत में ज्योतिष विद्या डेवलप हुई तो यह ज्योति कांस्टेलेशन तारों का यह ऑब्जर्वेशन उसमें से ये ज्योतिष विद्या उस समय के लोग यह एक्लिप्स प्रिडिक्ट कर सकते थे यह सूर्य ग्रहण अभी हो रहा है कुछ दिनों के बाद में तो वे लोग सूर्य ग्रहण चंद्र ग्रहण यह कैलकुलेट करके प्रिडिक्ट कर सकते थे भविष्यवाणी कर सकते थे कि हां इस समय सूर्य ग्रहण चंद्र ग्रहण होगा यह ब्रिटेन में स्टोन हेंज है ये इजिप्त में पिरामिड है यह सब एस्ट्रोनॉमिकली ऑब्जर्वेशन करके यह सब स्ट्रक्चर बनाए गए हैं एक पार्टिकुलर समय में सूरज यदि उकता है तो एगजैक्टली उसके किरण यहां पे गिरेंगे तो यह अपनी अंडरस्टैंडिंग ऑफ ये कॉस्मोलॉजी अपना उस समय से य एडवांस है तो ऐसा तो हमें भाई क्या है कि यह पशु की तरह खैर पशु भी तो इवोल्व हो के हम ही हुए हैं किंतु ये जड़ पदार्थ की तरह नहीं होकर के हम लोग यह चाहते हैं कि हम बाहर में देखें आकाश में देखें और सोचे कि हमारा इस इतने विराट यह जो उस समय तो एक बड़ा आकाश ही दिखता था तारों से भरा हुआ और हम छोटे से एक पृथ्वी इतनी विराट पृथ्वी के ऊपर में छोटे से हम लोग बैठे हैं तो मेरा स्थान क्या है इस विराट प्रकृति के भीतर में ऐसा सोचना यह जो सोच जो हमको मिली है वह सोच कोई जीरो में से उत्पन्न नहीं हुई जीरो में से यदि बिग बैंग होता तो हम लोग इस तरह से क्या जीवंत मक्ष वाले मनुष्य प्रकट होते हो ही नहीं सकता स्वामी जी का जो लॉजिक है एक दिव्य सत्ता हो एक ब्रह्मण होगा ब्रह्मण इवॉल्व होकर के बीज स्वरूप हिरण्य गर्भ स्वरूप बना होगा उस बीज में से एक्सप्लोजन हुआ होगा फिर इसमें से आज का मुमुक्षु बीइंग एक चेतन वंत मनुष्य आज प्रकट हुआ है तो स्वामी जी जब यह थिरी बता रहे हैं उनका जो जितने भी उदाहरण दिए हैं वोह ऑर्गेनिक ये इवोल्यूशन में से दिए हैं नहीं यह कि कॉस्मिक इवोल्यूशन में कॉस्मिक इवोल्यूशन का आइडियाज तो मैं अपना बिठा दे रहा था आज सुबह को सडन मुझे स्ट्राइक हुआ कि अरे स्वामी जी के समय में तो यह बिग बैंग थिरी थी ही नहीं तो इसका अर्थ है स्वामी जी एक्चुअली प्रिडिक्टेड बिग बैंग थिरी जैसे यह जॉर्ज लि माइटर है जिसने कि यह 1930 में पेपर लिखा और वह कैथोलिक पृष्ठ था तो एक्चुअली मैंने कैसा आयर निक है ना कि एक कैथोलिक पृष्ठ था जिस को आज हम लोग स्वीकृत करते हैं कि यह बिग बैंग थिरी का प्रथम जिसने कि उसको एक्सप्लेनेशन दिया तो स्वामी जी भी तो एक साधु थे स्वामी जी भी तो एक मने पृष्ठ ही कहे जाएंगे कि जिन्होंने एक्चुअली हमारी दृष्टि से सर्वप्रथम बिग बैंग थिरी के बारे में हमको बताया माने स्वामी जी इज द रियल फादर ऑफ बिग बैंग थिरी नहीं किय जो ली माइटर नहीं कि आइंस्टाइन नहीं कि एड एडविन हबल तो ये आज सुब मैं सोच रहा था सडन ऐसा स्ट्राइक हुआ मैंने कहा इसके बारे में बोलते हैं हालांकि ये टॉपिक थोड़ा हैवी हो जाता है किंतु मतलब मैं सोचते सोचते मुझे इतना अच्छा लग रहा था कि जैसे एक डिस्कवरी होता है ना देखिए मैं अभी हम लोग समझ सकते हैं कि ये एडविन हबल है या तो आइंस्टाइन है या तो ये न्यूटन ये जितने भी ग्रेट साइंटिस्ट है कुछ चीज के बारे में सोचते सडन एक फ्लश होता है और एक नया ही आईडिया मिलता है जो कि पहले किसी ने नहीं सोचा होगा तो उस समय कैसा एक शुद्ध सात्विक आनंद मन के भीतर में प्रकट होता है वो आज मैं इमेजिन कर सकता हूं कि हां ऐसा एक फ्लश हुआ स्वामी जी के बारे में ऐसा तो मैंने ही सबसे पहले सोचा होगा मुझे नहीं लगता कि और किसी ने ऐसा सोचा होगा कि स्वामी जी ने बिग बैंग थिरी डेवलप कर दी है तो मैंने आज का सुबह मेरा बहुत अच्छा गया और मैंने सोचा आपके साथ ये शेयर करूं थोड़ा सा और कुछ दिनों पहले मैं अपने स्टेटस प यह सब रखता रखता रहता हूं तो कुछ दिनों पहले मैंने एक स्टेटस रखा था कि शजर उपनिषद के बारे में क्या बोलते होता है तो उसको देख कर के वो वेदांत केसरी के एडिटर महाराज ने मुझे मैसेज किया कि अरे भाई तुम तो मुझे प्रॉमिस किए थे तुम आर्टिकल वगैरह दोगे तुम ये तो स्टेटस पर रखते हो मुझे कुछ नहीं देते मैंने कहा अच्छा ठीक है ठीक है मैं देता हूं आर्टिकल क्तु क्या है अभी तो यहां पर ऑलरेडी मैं दिन भर लिखता रहता हूं एडिट करता रहता हूं फिर और एक एक्स्ट्रा क्या लिखना तो मैं सोच रहा था क्या लिखूं क्या लिखूं किंतु अभी मुझे टॉपिक मिल गया कि स्वामी विवेकानंदा प्रिडिक्ट द बिग बैंग थिरी अभी ये तो संडे भी आ रहा है तो मैं इसको आर्टिकल को लिख के वेदांत केस में भेजूंगा उनको पब्लिश करना है तो करें किंतु एटलीस्ट मुझे लिखने में आनंद आएगा आज तो आज यही तक कल फिर से मिलते अच्छा कल तो सैटरडे है अभी मिलेंगे मंडे को ओम शांति शांति शांति हरि ओम तसत श्री राम कृ

Question Answer

माने आपनी जटा बोल कृष्णा ग सेटा हो गलो बिग बैंग सरी सेलो ब्लक होल सेटा गलो ब्लक होल ब्लक होल एक थोड़ा सा डिफरेंट टॉपिक है उसके बारे में भी कभी डिस्कशन करेंगे व ब्लक होल का भी कैसे डेवलपमेंट हुआ उसको भी कैसे वेदन के साथ में जोड़ देंगे देखता हूं एक इंस्टिट्यूशन होना चाहिए इंडिविजुअल का काम नहीं है इंस्टिट्यूशन होना चाहिए जैसे कि यह मैंने बताया ना यह अपना फेमस मुझे ब बहुत अच्छा लगता है कि यह इंस्टिट्यूट ऑफ कल्चर में कॉन्शसनेस के ऊपर स्टडी होता है वर्कशॉप होती है अभी देखिए यह आइडियाज कैसे डेवलप होते हैं जब आइंस्टाइन तो अंधेरे में था वो बोल रहा है कि यूनिवर्स कैसे एक्सपेंड हो सकता है मैं गलत ग झुठ मुठ का एक कॉस्मोलॉजिकल कांस्टेंट डाल दिया बाद में यही आइंस्टाइन यह एडविन हबल को मिलता है क्या बोलता है पता है कि कॉस्मोलॉजिकल कांस्टेंट जो मैंने इंट्रोड्यूस किया ये ब्रह्मांड का एक्सपेंशन रोकने के लिए थियोरेटिकल एक्सपेंशन दैट इज द ग्रेटेस्ट ब्लंडर ऑफ माय लाइफ ऐसा वो आइंस्टाइन कहता है तो देखिए कि वो इतना सर्वश्रेष्ठ माने एक इंडिविजुअल की बुद्धि की बात करें तो आइंस्टाइन वो एकदम हिमालय की टोच के ऊपर में बैठ एवरेस्ट की शिखर पर बैठा हुआ है वो यदि ऐसा कहता है कि मैं जब तक यह एडविन हबल को नहीं मिला था तब तक मुझे पता ही नहीं था कि मैं सही डायरेक्शन में जा रहा हूं झूठ मूठ की डायरेक्शन मैंने ले ली थी तो मीटिंग ऑफ माइंड होता है ना तब कहीं जाकर केय थिरी हम अब मैंने एक मने इसको क्या बोलेंगे किने क्रिटिकल डेवलपमेंट तब होता है एक इंडिविजुअल बैठ कर के कितना ही सोचते रहे ना वो बियोंड वन पॉइंट नहीं जा सकता तो इंस्टीट्यूशनल होना चाहिए वर्कशॉप होनी चाहिए लाइक माइंडेड पीपल मिलने चाहिए लोग पेपर प्रेजेंट करने चाहिए फिर वह चाय पीते पीते गप लगाने चाहिए उसी में जो एक्चुअल डेवलप होगा ट विल बी रियल कंट्रीब्यूशन इसका जो ग्रेटेस्ट एप्लीकेशन है ना कॉस्मोलॉजी में तो यही है कॉन्शियस नेस स्टडीज में ग्रेटेस्ट एप्लीकेशन हो सकता है क्योंकि देखिए कि वेदांत इट सेल्फ इज अ सब्जेक्ट ऑफ कॉस्मोलॉजी कॉन्शसनेस राइट तो अभी हम मॉडर्न दृष्टि से तो कॉन्शसनेस को स्टडी करना प्रारंभ ही नहीं किए हैं ये देखिए कि अपने मनुष्य का ये जो सिविलाइजेशन का हिस्ट्री देखेंगे ना देयर इज अ वन पॉइंट आता है कि हम लोग फिलोसोफी में से साइंस में कन्वर्जन हुआ हम लोगों का यह पॉइंट है रेनेसा रेनेसा से पहले थिंकिंग था ना वो एक फिलोसॉफिकल थिंकिंग था हां यह तारे हैं यह ईश्वर है यह है वो है किंतु रेनेसा के बाद में एक्चुअल साइंस स्टार्ट हुआ तो यह नेचुरल साइंस में तो यह रेनेसा आ चुका है अपने ये कॉन्शसनेस स्टडी में अभी तक नहीं हुआ है कॉन्शसनेस स्टडी एकदम स्प्लिट हो गई है एक और है वेदांत जो कि अपनी ही एक डायरेक्शन में जा रहा है दूसरे में यह मॉडर्न साइंटिफिक मेथड्स अप्लाई होते हैं किंतु उन लोगों का प्रॉब्लम क्या है दे ट्रीट कॉन्शियस एज एन ऑब्जेक्ट वे लोग कॉन्शियस को एक बाहर क्योंकि मैं साइंटिस्ट हूं मैं एक्सपेरिमेंट कर रहा हूं मैं दूसरों की कॉन्शसनेस को स्टडी कर रहा हूं माने मैं कॉन्शसनेस को ऑब्जेक्ट बोल कर के स्टडी कर रहा हूं एक्चुअली कॉन्शसनेस साइंस ऑफ सब्जेक्ट कि मेरे भीतर में कॉन्शसनेस है मुझे अपनी कॉन्शसनेस एक्सप्लोर करनी है वो एक शिफ्ट होना चाहिए ना साइंटिफिक थिंकिंग में ऑब्जेक्टिव टू सब्जेक्टिव म एक्सटर्नल टू इंटरनल वो जदी होगा ना माने देयर विल बी इंडियन रेनेसा वेदांतिका रहने सा तो माने विश्व पूरा चेंज हो जाएगा ये नेचुरल साइंस में डेवलपमेंट होकर के आज अपने पास में ये आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है आज हम मार्स के ऊपर में कॉलोनी बनाने का मैंने साहस मने सोच सकते हैं कि ये पॉसिबल है टेक्नोलॉजी इज देयर मेन पावर मनी पावर दूसरा चीज है टेक्नोलॉजी हमारे पास में आ गया है कि मार्क्स के ऊपर में कॉलोनी बनाए तो ये जो है आज जद नेचरल साइंस में एडवांसमेंट होकर के यहां तक पहुंचे तो कॉन्शसनेस स्टडी में इस तरह से रहने सा आए और तो क्या से क्या नहीं हो जाएगा माने रामकृष्ण मिशन शुड डू दिस हम लोग तो है स्वामी जी के एक्चुअली ज्योतिर दर वंश दर उनके वंश किंतु क्या है कि ये अकेले का काम नहीं दिस रिक्वायर्स एन इंस्टिट्यूशन मने मल्टी डिसिप्लिन टीम होनी चाहिए कोई मैथमेटिक्स का एक्सपर्ट है कोई कॉन्शसनेस स्टडीज का एक्सपर्ट है कोई वेदांत का एक्सपर्ट है फिर ये ब्रेनस्टॉर्मिंग से होने चाहिए सब एक अपने एक के बाद एक रेडिकल आइडियाज फेंकें जितना ही रेडिकल लगे ना क्यों फिर साइंटिफिक मेथड्स डेवलप करनी चाहिए अल्फा वेव वगैरह जो विदेश में डेवलप हुआ इ अ वेरी गुड कि वोने इलेक्ट्रोड्स लगा कर के जद आप मेडिटेशन करते हैं ऐसा सब एक्सपेरिमेंट हुआ है ना कि वो मक एक बुद्धिस्ट मंक को बुलाया साधु को बुलाया बोला कि तुम ध्यान करो ध्यान करने को बोला फिर उसके सर के ऊपर में वो इलेक्ट्रोड्स लगा दिए फिर ब्रेन वेव्स को मेजर कर रहा है अभी इन्होंने मनुष्य की जितनी भी इमोशन है कोई रोता है तो उसके ब्रेन वेव मेजर किए कोई सैड है डिप्रेसेंट वेव मेजर किए कोई हैप्पी है एक्सटिक है तो उसके ब्रेन वेव मेजर किए और फिर यह मेडिटेशन कर रहा है तो क्लियर पैटर्न दिखती है तो डिप्रेशन से लेकर के मेडिटेशन टक्का ये जो इमोशनल स्पेक्ट्रम है बीच में आप सैड भी है बीच में आप एक्सटिक भी है हैप्पी भी है तो एकदम क्लियर पता चलता है कि देखिए आपके ब्रेन वेव अलग-अलग इमोशन में अलग-अलग दिख हैं इसके बाद में इन्होंने क्या किया पता है ये अल्फा म्यूजिक वगैरह एक डेवलप किया है बोलता है कि हमको पता है कि ये मेडिटेशन वाले ब्रेन वेव कैसे दिखते हैं तो क्या हम इस तरह के म्यूजिक डेवलप कर सकते हैं कि आपके ब्रेन को वो डिप्रेशन वाला जो एकदम उटपटांग ब्रेन वेव था उसमें से लेकर के एकदम सुंदर एक गति में जो जा रहा है अल्फा वेव्स जिसको बोलते हैं उस तरह के ब्रेन वेव में ले ऐसा है तो अल्फा म्यूजिक है पता नहीं अभी उसपे एक्सपेरिमेंट हो रहा है पता नहीं कितना कार्यत है कार्यरत है किंतु ये तो रेडिकल आईडिया है ना कि मैं डिप्रेशन में हूं मैं कितने 100 म 10 15 20 साल तक मेहनत करके मैं जब ध्यान सीखू यहां पर कथामृत पढ़ते पढ़ते आंखें चली जाएगी तब कहीं जाकर के थोड़ा बहुत मैं 1015 मिनट आधा घंटा बैठने हां म्यूजिक थेरेपी मने ये रिसर्च का जद एक ऐसा मशीन आ जाए कि सर के ऊपर में पहन लो तो ऑटोमेटिक मेडिटेशन होना शुरू हो जाए सही बात है कि एजुकेशन यदि अपना वेदांत को जिस तरह से हमने साइंस को एजुकेशन में बुन लिया है रेनेसा के बाद में जो डेवलपमेंट हुए हम फर्स्ट स्टैंडर्ड सेकंड स्टैंडर्ड से ही सिखाना शुरू कर देते हैं तो वेदांत को भी वेदांत और योग को भी फर्स्ट सेकंड स्टैंडर्ड से सिखाना शुरू करें तो नेचुरली अभी देखिए गवर्नमेंट आज की गवर्नमेंट इतनी मतलब अंडरस्टैंडिंग है उनकी अपनी भारतीय संस्कृति पर इतनी श्रद्धा है कि हमको थोड़ा बहुत आशा है किंतु क्या है पता है यह स्वामी जी रामकृष्ण संघ की जो स्थापना करके गए हैं ना इसीलिए करके गए हैं कि अपनी पुरातन संस्कृति को नए युग में ढाल कर के आज के लोगों को सिखाना देखिए ये स्वामी जी क्यों इतनी मेहनत कर रहे हैं क्यों अमेरिका जाकर के वो रास्ते के ऊपर में भिक्षा मागते घूमते थे लोग उनके ऊपर में पत्थर फेंकते थे उनको काला आदमी समझकर वहां पर तो निग्रो गुलाम रहता है ना तो स्वामी जी को भी एक निग्रो समझ कर के होटल में रहने नहीं देते थे इतना मने आत्म सन्मान के ऊपर में आघात जो सतत हो रहा है अपमान हो रहा है उसको भी सहन करके वो वहां पर गए वहां के लोगों की भाषा में वेदांत सिखाया क्यों सिखाया स्वामी जी ने क्योंकि स्वामी जी यह चाहते थे कि वेदांत में भी एक रेनेसा हो वेदांत को भी एक मॉडर्न एक साइंटिफिक फाउंडेशन के ऊपर में रखा जाए तो हमारा यह कार्य है सबसे पहले हमारा होना चाहिए बाकी सब लोग करें तो ठाकुर कहते हैं ना टा फाऊ मने अच्छा ये तो बोनस है ये बोनस में जो होता है वो गवर्नमेंट करेगी बाकी सब संस्थाएं करेगी सो करेगी वो तो बोनस है तो हमारा मेन काम होना चाहिए ये किसानों के खेत में लेकर आओ ब्रिंग वेदांत टू द फार्मर्स हट माने गृहिणी किचन में काम करती है रसोई में वहां तक लेकर आओ विद्यार्थी के क्लासरूम में लेकर आओ इसको ना एक जर्मन शब्द है शेडन फ्रॉड अर्थात कि जो अपने दुश्मन है उसका कष्ट देख कर के मुझे आनंद होना है एक्चुअली स्वामी जी ने इसीलिए तो शिव ज्ञान जीव सेवा का यह जो आइडियल वेदांत में से ही तो निकाला वेदांत का एक मिसअंडरस्टैंडिंग है कि हां सब्जेक्टिव तो मैं सिर्फ मेरी कॉन्शसनेस के बारे में ही सोचूंगा किंतु एक ल वेदांत तो अद्वैत वेदांत की दृष्टि से देखे तो सभी कॉन्शसनेस इंटरकनेक्टेड तो आपके भीतर में जो चल रहा है इस पार्ट ऑफ माय कॉन्शसनेस ओनली यह जो बंधन है जैसे-जैसे मेरी मैं जब ध्यान करता जाऊंगा ना तो ये जो चार क्वालिटीज कही है ना चित्त प्रसाद वे योग शास्त्र में कहते हैं चित्त प्रसाद कितना सुंदर नाम है मैत्री करुणा मुदिता और उपेक्षा यह चार अपने भीतर में प्रकट होगी यह करुणा का प्राग्यवारे कर के मुझे कष्ट होना यह कितनी बड़ी मने एक बात है कि मेरा एंपैथी कनेक्शन सबके साथ में हो रहा है तो जैसा जैसा मैं जब ध्यान साधना करता जाऊंगा वेदांत में इतना डूबता जाऊंगा लोगों के साथ में मेरा कनेक्शन बैठता ही जाएगा फिर मैं यदि ऐसा कहूंगा कि हां एक जगह पे यदि क्लाइमेट क्राइसिस हुआ है और वहां पर डिसर्टिफिकेशन हुआ है तो मेरा देश है तो मुझे कष्ट होगा दूसरों का देश है तो मुझे आनंद होगा चलो दे डिजर्व दैट उनके कर्म ही ऐसे है शर्ड एन फ्रॉड कि दूसरों का कष्ट देख कर के मुझे आनंद होना किंतु ये तो जब किंतु वेदांत में मैं ठीक-ठीक जाऊंगा तो मैं मेरे देश बांधव तो ठीक मेरे जो दुश्मन है वो उनके भीतर में तो वही आत्मन है वो तो रास्ता भटक गए हैं उनको रास्ता दिखाना है उनको संहार नहीं करना सही रास्ते प लेकर आना है ये तो अंडरस्टैंडिंग तो वेदांत के थ्रू ही आएगा स्वामी जी ने दोनों डेवलप करके गए हैं एक तो मैंने एक कॉस्मिक लेवल पे कॉन्शसनेस को डेवलप किया है दूसरा जो प्रैक्टिकल एप्लीकेशन है वो भी डेवलप करके गए दोनों हमारे पास में जैसे कॉस्मो मैक्रो कजम माइक्रो कजम है वैसे ही लेक्चर फ्रॉम कोलंबो टू अल्मोड़ा है वैसे ही वो रामेश्वरम में जाकर के स्वामी जी कहते हैं कि सही सही शिव पूजा क्या है तो शिव पूजा वही है कि जहां पर आपको शिवलिंग को आप देखेंगे वही शिवलिंग को आप प्रत्येक मनुष्य के भीतर में देखेंगे तो स्वामी जी आपको दोनों आईडिया दिया है बात यही है कि हमने एक आईडिया को मैंने डेवलप किया है म शिव ज्ञान से जीव सेवा वाले को दूसरे आइडिया को अभी इतना डेवलप नहीं किया दोनों आइडिया डेवलप होने चाहिए तभी ये बैलेंस बना रहेगा एग्जैक्ट नंबर हम प्रिडिक्ट नहीं कर सकते इन्यूमैला है देखिए हम लोग एगजैक्टली प्रिडिक्ट क्या किया पता है ये विजिबल यूनिवर्स देखिए आज का जो मॉडर्न साइंस हमको कहां तक ले जाता है जैसे जैसे जैसे वो जो कथामृत में है ना कि प्रत्येक बात ठाकुर कहते हैं तो मास्ट महाशय के अहंकार को आघात लगता है तो मास्ट मास्टर महाशय को पूछते हैं तुमने शादी कर ली तो मास्टर महाशय बोलते हां शादी कर ली तो अरे ठाकुर चिला उठे उसने शादी कर ली तो माश महाशय को पहला आघात लगा फिर पूछा बच्चे हो गए तो क हां बच्चे हो गए तो अरे बच्चे हो गए बच्चे हो गए तो दूसरा आघात लगा फिर बोले तुम्हारी स्त्री कैसी है तो बोले क्या अविद्या स्त्री है तो शायद तुम तुम तुम्हारे में विद्या है क्या तो ऐसा एक के बाद एक माश महाशय को अहंकार के ऊपर में जो आघात लगा था वैसे ही ये जो कॉस्मोलॉजी की एक के बाद एक डेवलपमेंट हुई पहले सोचते थे कि हम ही लोग है पृथ्वी के राजा फिर पता चला अरे इतना बड़ा पृथ्वी है जैसे-जैसे एक्सप्लोरेशन करते गए पृथ्वी का सरकम नेविगेशन किया मे जेलन बोल कर के उसने तब पता चला अरे इतनी विराट पृथ्वी है बाद में पता चला कि पृथ्वी कोई सूरज पृथ्वी के आसपास नहीं घूमता पृथ्वी सूरज के आसपास घूमती है तो य और एक धक्का लगा अपने अहंकार को कि अरे हम लोग तो मेन थे अभी हम ही लोग सूरज के आसपास घूमते फिर पता चला कि सूरज तो एक तारा है ऐसे करोड़ों तारे हैं तो एक दूसरा धक्का लगा अरे भाई तो ऐसे करोड़ों तारों में एक छोटा सा तारा है हम लोग अच्छा ठीक है उसके बाद में पता चला ये जो करोड़ों तारे मिलकर के जो मिल्की वे बनाते हैं वो मिल्की वे एक ही ग ग ऐसी तो करोड़ों करोड़ों गैलेक्सी है तो और एक बड़ा धक्का लगा अरे हम लोगों को इतना भी पोजीशन नहीं इससे भी छोटे हैं इसके बाद में आज का जो मॉडर्न एकदम लेटेस्ट थिंकिंग है वो क्या कहता है पता है यह जो विजिबल यूनिवर्स है यह जो इतनी सारी करोड़ों गैलेक्सी हमको दिख रही है दिस इज जस्ट अ मिनुकुथैया दो करोड़ों गैलेक्सी के भीतर में लाखों करोड़ों लाखों लाखों करोड़ों तारों को मिला दो 4 पर यह विजिबल यूनिवर्स एक्चुअल यूनिवर्स जो है उसका जो टोटल मास कहोगे टोटल वेट कहोगे तो जितने करोड़ों करोड़ों करोड़ों तारे गैलेक्सी है व 4 पर है इसके 95 पर इ डार्क मैटर डार्क मैटर और डार्क एनर्जी 95 पर यह आज का लेटेस्ट थिंकिंग है दिखता नहीं नहीं दिखता पता ही नहीं है क्या है तो मैंने अभी आप सोच लीजिए कि हमारी क्या पोजीशन है और यह भी जो हमको यह 15 बिलियन लाइट इयर्स अक्रॉस हमारी नजर जहां तक गई है इसको कि विजिबल यूनिवर्स कहते हैं तो ये विजिबल यूनिवर्स के बियोंड क्या है अभी तो हमको पता ही नहीं है और यह तो एक चीज हुई अभी मैथमेटिक्स ये प्रिडिक्ट करता है कि देर आर मल्टीवर्स अभी आप सोच लीजिए कि हमारा स्थान कहां पे है यह सब मेरा मनुक पार्ट है रिवर्स हो जाएगा आज मैं जो 4 पर विजिबल यूनिवर्स हूं रिवर्स हो जाएगा कि विजिबल यूनिवर्स इज 1 पर ऑफ मी सुब कॉन्शसनेस ब्रह्मांडम गोस्प दम तुलम गोषित अर्थात की यह जो गाय होती है गाय का पेर जहां पर गिरता है गीली मिट्टी में तो छोटा सा एक बनता है होल इसके भीतर में पानी गिरता है तो कितना पानी होता है गो पदम भव वारी माने यह जो पूरा अपना जो भव है ना यह जो गोषट में तैरने के बराबर है यदि भगवान श्री राम कृष्ण का सहारा ले लेंगे तो माने ऑलरेडी वेदांत मने यह जो वेदांत ऑलरेडी उस लेवल पर पहुंच चुका था स्वामी जी का ही उदाहरण लेते हैं तो वह वेदांत का व जो डीएनए है व आज के साइंटिस्ट में जाकर के धीरे धीरे करके य विजिबल यूनिवर्स को एक्सपें कर रहा एक बड़ा ही सुंदर एक इंसिडेंट है स्वामी जी अमेरिका से वापस आए फिर कलकाता में वो लो टाउन हॉल में लेक्चर वगैरह दे रहे हैं ना तो लाटू महाराज वहां पर बैठे थे अभी लाटू महाराज एकदम डर के मारे बिल्कुल मतलब कंप रहे हैं कि अरे इतने बड़े-बड़े विद्वान लोग इतने राजा ये लोग सब स्वामी जी का प्रवचन सुनने के लिए आए हैं तो पता नहीं नरेद कोई गड़बड़ ना कर दे सबके सामने नाक ना कटवाले तो वहां पर बगल के कमरे में बैठ कर के ठाकुर को प्रार्थना करते हैं कि नरेंद्र की रक्षा करना नरेंद्र की इज्जत रखना वो कोई गड़बड़ कुछ ना बोल दे उसको कोई सुमत देना बोल कर के प्रार्थना कर रहा है और फिर यहां पर नरेंद्र ने बोलना शुरू किया लाटू महाराज कहते हैं कि ये वही नरन है जिसको कि मैं पहचानता था जिसके साथ में हम लोग गप लगाते थे जिसके साथ में फाइटिंग किया है जिसके साथ में ये वही नरेण है दिस इज अ डिफरेंट नरेन ऑल टूगेदर माने जैसे कि देव मानव वहां पर सरस्वती स्वयं आकर के अपनी वाणी प्रसार कर रही है बाप रे लाटू महाराज ने स्वयं ये लिखा है कि मैं किस नरेण को पहचानता था और ये क्या नरेंद्र आ गया यहां पे