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आध्यात्मिक नवजागरणकी ओर || जनसमूह में श्रीरामकृष्ण का प्रभाव || 28 Feb 2025

प्रार्थना

ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते

प्रसंग: वास्तविक आध्यात्मिकता है हमारी चेतना (consciousness) का अध्ययन और अनुशासन

नमः कुछ समय पहले किसी के साथ मेरी मेरा वार्तालाप हो रहा था तो यह जो है थे वह शी गुड एक्चुअली वह क्या करती है कि यह जो पाठशाला वगैरह होता है वहां पर बच्चों के लिए वह रिलीजन के क्लासेस व कंडक्ट करती है हिंदुइज्म के ऊपर में या तो फिर इसी तरह से कुछ तो उन्होंने एक बार बहुत पहले की बात है एक्चुअली मुझे एक वीडियो भेजा था तो क्या है कि अभी कुछ तो बोलना है उनको तो उनका ऐसा है कि कुछ ऑथेंटिक बोलना चाहिए उनको जो भी बच्चों को सिखाना है हिंदुइज्म के ऊपर में या तो फिर हमारी यह रिलीजन और स्पिरिचुअलिटी के बारे में उसका कोई सॉलिड बेसिस होना चाहिए तो नेचुरली वी विल ऑल एग्री कि बिना रेफरेंस के यह सब बातें बोलना ठीक नहीं तो अभी आजकल का क्या है लोगों का कि ऐसा तो नहीं है कि गीता और उपनिषद पढ़ लेंगे उनको तो वैसे ही तो सभी लोग वर्किंग पीपल है इस तरह की पाठशाला में जो बच्चे आते हैं उनको भी सब सप्ताह में एक दिन यह अमेरिका की बात है तो सप्ताह में एक दिन वे लोग आते हैं सैटरडे संडे उनको छुट्टी होता है तो आधा घंटा एक घंटा वह पाठशाला में जाएंगे और यह जो लेडी है शी इज आल्सो ए वर्किंग वुमन तो टाइम कहां पर रहेगा यह सब पढ़ाई लिखाई करने का तो वीडियो एक दो देख लिए और उसमें से कुछ बता रही है तो मुझे एक वीडियो भेजा कि अच्छा इस वीडियो को देखिए तो कि इसमें जिस तरह से लिखा है ये इतने लोग है फिर इतने वह ब्रह्मा का दिन फिर यह मनुष्य का दिन फिर यह पंच महाभूत यह व मतलब यह जो सब एसोटेस्ट जिसको कहे जाते हैं कि जगत की रचना इस तरह से हुई वगैरह वगैरह तो इसके बारे में आपका क्या मानना है तो अभी क्या है कि देखिए मैं या तो अपने मन की सही बात बताऊं इस सबके ऊपर में मेरा ओपिनियन या तो फिर इस तरह से बोलू कि किसी के मन को बुरा ना लगे तो मैंने कहा कि देखिए इतना वीडियो देखने का तो मेरे पास में समय नहीं है आपके पास में यदि कोई प्रश्न है तो मुझे कर सकते हैं तो खैर उन्होंने कोई प्रश्न कभी किया नहीं किंतु यह तो मैंने बात को घुमा दिया सही में अपने मन की बात बताता तो मुझे यह कहना होता कि यह जो सब आप इतने लोग है फिर इतने यह सब है देवता एं यक्ष किन्नर वगैरा वगैरह वगैरह वह सबको भूल जाइए स्पिरिचुअलिटी को सही सही में देखा जाए तो इन सब चीजों के साथ में कोई लेना देना नहीं है जो लोग राम कृष्ण विवेकानंद लिटरेचर को सही सही समझे हैं उनको पता है कि यह स्पिरिचुअलिटी इज अ मैटर ऑफ कॉन्शसनेस अपनी कॉन्शियस जो है उसमें जो होता है वही है रियल स्पिरिचुअलिटी यदि मैं यह कहूं कि हां मेरे मन में अब जैसे कि भाव है भाव क्या है तो रिलेशनशिप विद गॉड आप किसी भी तरह की रिलेशनशिप एस्टेब्लिश कीजिए या तो फिर है कि संकल्प शक्ति है अपने मन को दृढ़ करना जिससे कि यह इंद्रियों के पीछे इंद्रियों के विषय के पीछे ना दौड़े या तो फिर है कि एकाग्रता अपने मन को अपने इष्ट के ऊपर में एकाग्र करने की क्षमता जिससे कि जब मैं इष्ट के ऊपर में एकाग्र कर रहा हूं तो बाकी 10 विषयों में यह ना छूटे या तो फिर अपने जीवन में एक एथिक्स और मोरालिटी का पालन कि मैं जब दूसरों के साथ में व्यवहार कर रहा हूं तो मैं उनके साथ में कोई अन्याय ना कर बैठूं उनका शोषण ना कर बैठूं उनको उनके साथ में चीटिंग करके उनका धन ना हड़प लूं यह झूठ बोल कर के लोगों के लोगों को ठगना यह सब में ना कर बैठूं इसको कहते हैं एथिक्स एंड मोरालिटी एथिक्स या मोरालिटी मोरालिटी इज वैल्यूज एथिक्स इज द साइंस ऑफ वैल्यूज यह स्वामी भजनानंद जी का डेफिनेशन है अभी उन्होंने इंस्टिट्यूट ऑफ कल्चर से पब्लिश जो जर्नल है वो उसमें उन्होंने एक आर्टिकल लिखा था उसमें उन्होंने इस तरह से इस दोनों की डेफिनेशन दी थी कि व्हाट इज मोरालिटी मोरालिटी इज अ सेट ऑफ वैल्यूज जैसे कि सत्य है झूठ नहीं बोलना किसी के साथ में अन्याय नहीं करना सत्य है अहिंसा है यानी कि दूसरों को ठग करके उनका उनकी जो वेल्थ है उसको हड़प नहीं लेना सत्य अहिंसा अस्ते अपरिग्रह यानी कि धन का संचय नहीं करना यह जो सब वैल्यूज है उसको हम कहते हैं मोरालिटी और मोरालिटी क्या है इसका क्यों पालन करना चाहिए आध्यात्मिक जीवन में इसका क्या प्राधान्य है क्या महात्म्य है वह जो थियोरेटिकल क्वेश्चंस जो डिस्कस करता है उसको कहते हैं एथिक्स तो यह एथिक्स और मोरालिटी यह आध्यात्मिक जीवन का फाउंडेशन है इस फाउंडेशन के ऊपर में ही बाद में यह कॉन्शियस निस में जो कोई भी फिनोमिना है कॉन्शियस निस में जो कोई भी डेवलपमेंट है वह हमको करनी है हां आप जद कॉन्शियस मेंस को अपनी कॉन्शियस निस को डेवलप करते उसके बाद में देखिए कि जादू चमत्कार की कमी यहां पे भी नहीं है यह जो स्वामी जी का हमने राजयोग पढ़ा स्वामी जी क्या कहते हैं यदि म प्राण को आप संयम कर पाए प्राण को कंट्रोल कर पाए तो यही प्राण एक्चुअली इट इज अ कॉस्मिक एनर्जी कॉस्मिक फोर्स हम अपने शरीर में अपने देह में से प्राण को यही कॉस्मिक फोर्स को कंट्रोल करके सूर्य और चंद्र की गति परिवर्तित कर सकते हैं दूर कहां पर क्या हो रहा है दूरदर्शन दूर श्रवण टेलीपैथी टेली काइनेसिस यह सब कुछ हम कर सकते हैं और इवन कि ये जो रिमोट हीलिंग जिसको कहते हैं कोई कहां पर बीमार है तो उसके प्रति मैंने स्वास्थ्य के वाइब्रेशंस स्प्रेड किए भेजे यहां से तो वह व्यक्ति स्वस्थ हो जाएगा तो यह प्राण का सायंस समझने से यह सब कुछ संभव है किंतु इवन यह प्राण का साइंस भी है अपने यहां पे इट इज फॉर्मली बेस्ड ऑन द साइंस ऑफ कॉन्शसनेस योगा है योगा इज अ साइंस ऑफ मेडिटेशन एंड कॉन्शसनेस इसी को फर्द डेवलप करके आप अपनी चेतना को अपनी कॉन्शियस निस को प्राण के प्रति आप प्राण के साथ में कनेक्शन बिठा सकते हैं सो दिस कॉन्शियस इज अ रूट ऑफ द स्पिरिचुअलिटी यदि हम अपनी कॉन्शियस निस को ना समझे यदि हम अपने को खुद को सेल्फ स्टडी सेल्फ एनालिसिस ना कर पाए तो फिर रिलीजियस फील्ड में हमने ज्यादा कुछ पाया नहीं है कौन से देवता क्या कर रहे हैं उनकी क्या कहानियां है वह सब अच्छा यह सब कहानियां अपने चित्त को शुद्ध करती है बट अगेन दैट इज अ कॉन्शियस लेवल फिनोमिना यदि हम चित्त की शुद्धि को इग्नोर करके कहानियों के पीछे में ही दौड़ते रहेंगे जैसे कि हरि महाराज के पास में एक लड़का आया था तो एक साधु ने कहा हरि महाराज को कि आप यह लड़के के साथ में बात कर रहे हैं उसको पाशुपत अस्त्र चाहिए तो हरि महाराज बड़े ही आश्चर्य चकित हो गए लड़के को बोला क्या रे तुमको पाशुपत अस्त्र से क्या करना है तुम पहले तो जब ध्यान करो ब्रह्मचर्य का पालन करो अपने जीवन में सत और जो भाव है उसको डेवलप करो पाशुपत अस्त्र लेकर तुम क्या करोगे क्या तुमने कुछ दुश्मन बना रखे हैं उनकी हत्या करना चाहते हो क्या पाशुपत अस्त्र से तो यह जो सब ज्योतिष शास्त्र है यह ग्रहों की गणना है हाथ में अंगूठी पहनने से यह कुछ हो जाएगा मेरे बिजनेस में इससे कुछ बेनिफिट हो जाएगा वगैरह वगैरह जो हम देख रहे हैं अभी ऐसा नहीं है कि रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर में इसके प्रति कुछ ऐसा हमने कहा है कि यह गलत है स्वामी विवेकानंद तो हमेशा से कहते हैं कि मैन नेवर ट्रावेल्स फ्रॉम एरर टू ट्रुथ मैन ऑलवेज ट्रेवल्स फ्रॉम लेजर ट्रुथ टू हायर ट्रुथ मनुष्य कभी गलती से सही की ओर यात्रा नहीं करता जो छोटा सत्य है या तो कहेंगे कि जो सत्य वो रिलेटिवली कंपेरटिवली लोअर लेवल पर है उ उससे वह हायर लेवल के सत्य की ओर यात्रा करता है तो यह सब चीजें ज्योतिष शास्त्र ग्रहों की गणना ये इतने लोग है इतने देवताओं हैं वगैरह वगैरह उसमें गलत कुछ नहीं है किंतु यदि सही सही अध्यात्मिकता का बेनिफिट उठाना हो तो हमको अपनी कॉन्शसनेस की स्टडी करनी होगी अपनी कॉन्शसनेस को डेवलप करना होगा और ये डेवलपमेंट के जो आधार स्तंभ है वो है त्याग भाव एकाग्रता या तो फिर त्याग की जगह मैं संकल्प शक्ति या विल पावर कह दूं तो फिर वह सिनोनिम ही है क्योंकि संकल्प शक्ति के माध्यम से ही हम त्याग कर पाएंगे तो यह संकल्प शक्ति एकाग्रता और भाव यह तीन जद अपने जीवन में आए अपनी कॉन्शियस में डेवलप हो तो फिर यह कॉन्शियस निस धीरे-धीरे एक्सपें होकर के सुपरकॉन्शियस लेवल पर जाए आगी और फिर सुपरकॉन्शियस लेवल प यह जो सब फिनोमिना है वह सब हमारी नजर के सामने स्पष्ट होना शुरू हो जाएंगे देखिए कि ठाकुर को कैसे सब अद्भुत अद्भुत दर्शन होते थे अभी यदि हमारा लिटरेचर पढ़ कर के कोई यदि ऐसा कह दे कि मैं यह जो फर्स्ट स्टेप्स जो है उसको स्किप करके सीधे ठाकुर के दर्शन की ओर या तो फिर स्वामी जी यह प्राण का साइंस जिस तरह से समझाते हैं जिस तरह की मिरेकल शक्तियां हमको मिलती है वही डायरेक्ट में प्राप्त करना चाहता हूं तो इसके लिए क्या विधि करनी होगी वह बता दीजिए कौन से ग्रहों की गणना करनी होंगी कौन सी अंगूठियां पहननी होगी कौन सा तावीज पहनना होगा कहां पर जाकर के मिन्नत माननी होगी ऐसा कुछ बोल दीजिए तो जिससे कि मैं वह सीधा बाकी सब ब्रह्मचर्य सत्य फिर ये भाव यह सब स्टेप्स को स्किप करके सीधा मैं उसी लेवल पर पहुंच जाऊं यदि राम कृष्ण संघ में आकर के कोई ऐसी बातें करेगा तो हमको कैसे हंसी आएगी कि उसको कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है किंतु देखिए कि बाहर के जगत में आध्यात्मिकता या धर्म के बारे में जैसे ही आप बात करेंगे ज्यादातर लोग यही बोलेंगे कि कौन सी विधि करनी है कहां पर जाकर के मिन्नत माननी है कहां पर धरावा चढ़ाना है क्या कौन सी अंगूठी पहननी है कौन से किसी को पैसा देकर के विधि करवा लेनी है जिससे कि उसके जो बेनिफिट है आध्यात्मिक जगत के रिलीजियस फील्ड के वो मुझे इंस्टेंट प्राप्त हो जाए मुझे अपने को सामने से कुछ देना ना पड़े देने को मैं तैयार हूं धन देने को तैयार हूं समय देने को तैयार हूं किंतु अपना मन देने को मैं तैयार नहीं हूं मैं डिसिप्लिन होने को तैयार नहीं हूं मैं अपना हृदय परिवर्तन करने के लिए तैयार नहीं हूं अपने जीवन को परिवर्तन करने के लिए मैं तैयार नहीं हूं मैं जैसे जी रहा हूं वैसे ही मुझे जीना है मेरे हृदय में जो भी कपट है जो भी पाप है जो भी घृणा है जो भी क्रोध है वोह वैसे का वैसे ही मैं रहने देना चाहता हूं इसके साथ में मैं कुछ भी छेड़खानी नहीं करना चाहता बस बाकी का और कोई ऐसा उपाय बताइए जिससे कि मुझे धर्म प्राप्ति हो जाए तो यह एक एटीट्यूड रहता है और यह एटीट्यूड काफी कॉमन है मैं खास करके बिकॉज कि मैं तो रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर के साथ में इतना क्लोजल कनेक्टेड हूं कभी-कभी मेरी आंखें जैसे कि झ मेरी आंखें के सामने पर्दा जैसा आ जाता है जबकि मैं बाहर के जगत को देखता हूं हां मैं बाहर को जगत को देखूंगा तो मेरे जो फेवरेट टॉपिक है साइंस है ना हिस्ट्री है ना कि साइकोलॉजी है वह सब मैं पढ़ता रहूंगा किंतु ये जो डे टू डे लेवल पे रिलीजियोसिटी जो जगत में एक्सप्रेस हो रही है एक आम आदमी धर्म के बारे में क्या सोचता है एक आम आदमी आध्यात्मिकता के बारे में क्या सोचता है तो इस तरह के कोई रेयर इंटरेक्शन होते हैं कि जो कि अपनी स्ट्रीम में नहीं है रामकृष्ण विवेकानंद भावधारानी है किंतु फिर भी वह रिलीजियस है फिर जब उनके साथ में बात करते हैं तब यह चीजें सडन एकदम जैसे कि कंट्रास्ट होक के मुझे दिखती है कि अरे देखिए कि यहां पे हम किस तरह से सोचते हैं और बाहर में लोग किस तरह से सोचते हैं अभी जैसे कहा कि गलत कुछ नहीं है हमको ऐसा कोई दावा नहीं करना चाहिए कि वी आर बेटर देन देम किंतु वही बात है कि यदि आपको ठीक ठीक राम कृष्ण विवेकानंद साहित्य के प्रति प्रेम है ठाकुर के प्रति श्रद्धा भक्ति है तो हम उस चीजों को कभी कंसीडर भी नहीं करेंगे ऐसा कभी नहीं सोचेंगे कि हां मुझे इस शॉर्टकट अपना करके अपने जीवन में धर्म को उतारना है

प्रसंग: रामकृष्ण-विवेकानन्द भावधारा का प्रचार प्रसार

देखिए अभी जैसे कि रियल लाइफ उदाहरण देना ठीक नहीं है किंतु इस तरह से यदि हम देखें कि यह जो कॉन्शियस निस स्टडी है वह कॉन्शियस निस स्टडीज पॉपुलर कितना होगा इस जगत में क्योंकि मैं कभी-कभी ऐसे सोचता हूं कि जो अपने संघ के जो पॉपुलर स्पीकर है उनका जो व्याप है उनका जो ऑडियंस है वह कहां तक जाता है अपने संघ के जो मोस्ट पॉपुलर स्पीकर भी हो होंगे जो कि ठाकुर मां स्वामी जी की और प्योर वेदांत की बातें करते हैं उनका जो दायरा जो है ना वह राम कृष्ण विवेकानंद डिवोटा तक ही सीमित है खूब रेयर आपको किसी को देखने को मिलेगा विचार पॉपुलर बियोंड रामकृष्ण विवेकानंद सर्कल तो दो उदाहरण है अपने सामने जैसे कि यह सर्वप्रियनंद जी महाराज है और वह दिव्यानंद प्राणा माता जी है कि हमारी संघ की धरोहर के साथ में बहुत ही क्लोजी कनेक्टेड भी है एट द सेम टाइम उन्होंने एक जो एक्सटर्नल ऑडियंस कहा जाए उनके साथ में एक ब्रिज भी एस्टेब्लिश किया है किंतु आप कुछ-कुछ मूवमेंट्स को देखिए एक्चुअली यह सब आया कहां से पता है मैं एक किताब पढ़ रहा हूं उसका ऑथर है फिलिप गोल्डबर्ग और किताब का नाम है अमेरिकन वेदास इसमें क्या है कि किस तरह से ईस्टर्न स्पिरिचुअलिटी वेस्ट में स्प्रेड हुई है तो उस का जो रिसेंट इतिहास है वह यह लिखता है अच्छी किताब है और वह शुरू भी स्वामी जी से ही करता है कि किस तरह से 1893 वर्ल्ड पार्लिमेंट ऑफ रिलीजन में स्वामी जी ने वेदांत को प्रेजेंट किया और तब से लेकर के यह ग्राउंड लेवल पर यह मूवमेंट स्टार्ट हुई है पहले तो इतना प्रकाश ज्यादा नहीं था किंतु बाद बाद में यह 60 और 70 में जो कुछ-कुछ सेलिब्रिटीज थे वह स्पिरिचुअलिटी की सर्च के लिए जब इंडिया आए उसमें यह बीटल्स था फिर यह स्टीव जॉब्स भी था टू नेम टू मोस्ट प्रोमिन अ पीपल इन द वर्ल्ड बिटस बैंड ग्रुप है चार-पांच लोग हैं उसमें मैं तो पहचानता नहीं इतना डिटेल किसी को और स्टीव जॉब्स तो हमको पता ही है कि जो वन ऑफ द बेस्ट कंपनीज उसने एस्टेब्लिश की है एल तो यह लोग जब इंडिया आए इंडिया के जो संत महात्मा है उनसे प्रभावित होकर के अपने जीवन को थोड़ा बहुत परिवर्तन करने के लिए उन्होंने प्रयास किया कभी वे लोग डिसपिटर भी हमने उनको डिसपिटर दे दिया है क्योंकि यह धर्म का जो बड़ा दिखावा करते हैं कभी-कभी पता चलता है कि उनका चरित्र इतना अच्छा नहीं है यह किताबों में इस जो किताब है उसमें दोनों तरीके से जनरली जो इंडियन स्पिरिचुअलिटी के ऊपर में अमेरिकन ऑथर्स लिखते हैं तो वह हमेशा उसको क्रिटिसाइज करेंगे अभी जैसे कि यह जो महा कुंभ के बारे में अमेरिका के जो कुछ-कुछ प्रॉमिनेंट न्यूज़पेपर है मैगजीन है तो आप इमीडिएट समझ जाएंगे कि गोरे आदमी इंडिया की आध्यात्मिकता के बारे में लिख रहा है क्या लिखेगा महाकुंभ में स्टेपेड हुआ यानी कि यह जो इतना बड़ा इवेंट है उसका इतना बड़ा सिग्निफिकेंट है इतने करोड़ों करोड़ों लोगों ने स्नान किया है उसमें से उसको दो ही चीज दिखाई देगी कि वहां का पानी पोल्यूटेड है और इतने लोग धक्का मुखी में मर गए स्टेंप एड में मर गए गए व यही है उनकी दृष्टि से इंडियन स्पिरिचुअलिटी तो वे लोग हमेशा यहां पर आकर के स्कैंडल खोजते हैं क्यों कि यह थर्ड वर्ल्ड कंट्री काले लोग हैं उनका क्या कुछ है उनके भीतर में कुछ दम नहीं है हम गोरे लोगों के साथ में कंपटीशन करने को जाते हैं तो उनका पूरा एक हाइपर क्रिटिकल एटीट्यूड रहता है ऑन द अदर हैंड कुछ-कुछ गोरे लोग ऐसे भी है कि भीतर से जैसे कि पूरे हिंदू बन जाते हैं हिंदू धर्म के बारे में जो कुछ भी है वैसे विधा डाउट क्वेश्चन कभी-कभी यह लोग अपना लेते हैं व कभी-कभी किसी साधु को है या कोई महात्मा है या कोई रिलीजियस टीचर है उसको इतना उसके प्रति यह उनका यह हो जाता है डेडिकेशन ना कि रिस्पेक्ट कि इतना हम इंडियन लोग भी नहीं सोच पाएंगे कि हम किसी साधु अपने भारतीय साधु के प्रति इतना रिस्पेक्ट रखें तो दो पूरे दो एक्सट्रीम है किंतु एक बैलेंस अप्रोच मिलना जद वो क्रिटिकल लोग है वह हिंदुइज्म के बारे में लिखेंगे तो सब गाली देंगे क्रिटिसिज्म के अलावा और कुछ नहीं और यह लोग जो कि बहुत ज्यादा मने इन्फ्लुएंस हो गए हिंदुइज्म से वह हमारा एक भी नेगेटिव पॉइंट नहीं देख पाएंगे पूरा पॉजिटिव प्रेज करते करते ही लिखते जाएंगे यह जो योग जर्नल बोलक के अमेरिका में एक पब्लिकेशन है तो यह योगा जर्नल बड़ा वैसे तो काफी उसका वाइड स्प्रेड उसका रीडरशिप है और योगा और स्पिरिचुअलिटी इंडियन स्पिरिचुअलिटी के बारे में काफी आर्टिकल आते रहते हैं उसमें आप इस तरह के एडलेट आर्टिकल्स देखने को मिल जाएंगे कि हां इंडिया में इतना सरस योग चल रहा है वगैरह वगैरह किंतु किसी का एक बैलेंस एटीट्यूड हो यानी कि हमारे पॉजिटिव पॉइंट भी उसको समझ में आए और नेगेटिव पॉइंट भी समझ में आए और दोनों को बैलेंस करके लिखे इस तरह के ऑथर बड़े रेयरली देखने को मिलेंगे तो उसमें से एक फिलिप गोल्डबर्ग को देखा मैंने अच्छा लिखता है यह किताब में प्लस पॉइंट और माइनस पॉइंट दोनों की काफी अच्छे से डिस्कशन है कि ये इंडियन बाबाज वहां पर जब जाते हैं तो इतने लोग वहां के अमेरिकन पब्लिक प्रभावित हो जाते हैं अरे हम जैसे कि पूरा जीवन उनको दे देते हैं अपना धन वगैरह अपनी गाड़ी बंगला मकान सब उनको दे देंगे उ उन्होंने जो वह आश्रम एस्टेब्लिश किया है वहां पे आकर के रहने लगेंगे फिर वो फिर उनको एक समय के बाद में ऐसा लगने लगता है अरे यह मैंने अपना पैसा दे दिया इस आश्रम को ठीक नहीं किया मैंने अपना बंगला अपना घर बेच करके पैसा इनको दे दिया यह ठीक नहीं किया फिर यही बाबा जी का कोई स्कैंडल पकड़ा जाएगा फिर वह पूरे हतो उत्साह हो जाएंगे कि अरे बाहर से तो बातें इतनी अच्छी करते हैं किंतु भीतर से ऐसे निकले अभी जो अमेरिकन रिपोर्टर है उसको जैसे ही यह स्कैंडल मिला तो वो स्कैंडल के ऊपर में ही वह पूरा अपना समय बिता देगा कि हां देखिए कि इस तरह से यह लोग करते हैं किंतु फिर जो हिंदुइज्म का जो पॉजिटिव एस्पेक्ट है बहुत सारे साधु महात्मा स्पिरिचुअल एस्पायरेंट योगीश साधक बिल्कुल साइलेंटली कार्य करते हैं जिसको कि कोई मीडिया पब्लिसिटी नहीं चाहिए इन लोगों के बारे में इन लोगों की जो डे टू डे आध्यात्मिक जर्नी है अचीवमेंट है उसके बारे में यह लोग इतना कुछ नहीं बोलेंगे तो ये यहां पे इस किताब में एटलीस्ट मुझे एक बैलेंस एटीट्यूड दिखाई दिया इस बैलेंस एटीट्यूड में किंतु मैंने एक बात देखी कि रामकृष्ण विवेकानंद भावधारानी आज का जो वेस्टर्न स्पिरिचुअलिटी है योगा है वेदांत के प्रति उनका यह जो अट्रैक्शन है वह तो स्टार्ट तो हमने किया है स्वामी विवेकानंद ने वहां पर जाकर के यह सब कुछ स्टार्ट करया किंतु बाद बाद में बाकी सब लोगों ने इसका बेनिफिट ले लिया यह जो रमण महर्षि है या तो फिर यह अ नीम करोली बाबा है अच्छे लोग हैं उसमें उनके बारे में कुछ बुरा कुछ नहीं कहना चाहता बहुत अच्छे हैं किंतु फिर हमने जो मूवमेंट स्टार्ट की थी उसका ना हम बेनिफिट शायद नहीं ले पा रहे हैं हमारा दायरा ना जैसे कि धीरे-धीरे करके नैरो होता जा रहा है और बाकी लोग जो सब हमने जो क्यूरियोसिटी स्पार्क की थी वहां पे कि हां ईस्टन स्पिरिचुअलिटी में यह सब अमूल्य रतन है तो वो अमूल्य रतन को जनसाधारण में फैलाने का कार्य ना जैसे कि बाकी सब लोग कर रहे हैं भले ही उनका जीवन हमारे जितना पवित्र ना हो भले ही उनका जीवन स्कैंडल से भरा हुआ हो किंतु वह जो लोग जनता में जो स्प्रेड करते हैं योग और वेदांत को व्हिच इज रियली अमेजिंग आजकल यह लोग क्या कहते हैं कि ऑलमोस्ट 1015 पर अमेरिकंस रेगुलरली प्रैक्टिस योगा वो जो एक स्टेटिस्टिक्स आया था योगा जर्नल में मैंने पढ़ा था अभी मैं फिगर सब भूल गया एक दो साल पहले मैंने पढ़ा था यह योगा जर्नल जो है वो अमेरिका में योगा सीन किस तरह से यह हो रहा है योगा के क्षेत्र में ये लोग काफी अच्छे आर्टिकल्स भी लिखते हैं और फिर उसके ऊपर में वो वो स्टेटिस्टिक्स वगैरह भी पब्लिश करते रहते हैं फिर यह कहते हैं कि 6 बिलियन डॉलर्स का यह योगा इंडस्ट्री है अलोंग विद ऑल दिस जो क्लोथिंग ब्रांड है वगैरह वगैरह को मिला कर के तो व्हिच इज वेरी बिग एक्चुअली तो अभी बात है कि हम लोग यह सब जब पढ़ते हैं तो प्रश्न होता है कि रामकृष्ण विवेकानंद मूवमेंट यहां पे कहां पे है इस सब चीजों में कहां पे है क्योंकि इवन भारत में भी देखें तो यदि हम जिसको कि पॉपुलर रिलीजियस फिगर्स कहते हैं उन लोगों में फिर बाकी सब बहुत सारे नाम आपको दिखाई देंगे तो प्रश्न है कि जिसको जहां पे कि प्योर स्पिरिचुअलिटी जहां पर डेवलप हुई है आज के आधुनिक युग में उस प्योर स्पिरिचुअलिटी का प्रेजेंटेशन एक वाइडर वर्ल्ड में क्यों नहीं है हम लोग क्यों नहीं ये एक पॉपुलर इमेजिनेशन और प्योर स्पिरिचुअलिटी इन दोनों के बीच में एक ब्रिज क्यों नहीं बना पाते हैं पॉपुलर इमेजिनेशन हमेशा देखेंगे कि वह कुछ मिरेकुलम है कहां पर कुछ शॉर्टकट है वह देखने को जाएगी अब जबक रामकृष्ण विवेकानंद मूवमेंट है व्हिच इज प्योर बेस्ड ऑन द ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ हार्ट ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ लाइफ अभी आप यह कहेंगे जैसे मैंने भी कुछ दिनों पहले कहा था अपने संघ में भी कहीं-कहीं पर इस तरह का डिस्कशन चल रहा है कि एक तो क्लास मूवमेंट होता है एक मास मूवमेंट हो होता है क्लास मूवमेंट में क्या होता है कि वही डेडिकेटेड डिवोटा यहां पे आएंगे हु आर विलिंग टू चेंज देयर लाइफ भले ही चाहे उसमें बहुत ज्यादा सक्सेसफुल ना हो किंतु एटलीस्ट थियोरेटिकली तो उन्होंने यह एक्सेप्ट कर दिया है कि अपने स्वभाव को परिवर्तन करने की जरूरत है यह जो वैल्यूज है वैल्यूज के अनुसार अपनी लाइफ को परिवर्तन करने की जरूरत है यह थियोरेटिकली हमने एक्सेप्ट कर लिया है भले ही चाहे इन प्रैक्टिस हम इसको ना करते हो थियोरेटिकली तो एटलीस्ट एक्सेप्टेड है बाहर में यह थियोरेटिकली भी एक्सेप्टेड नहीं है तो क्या यह हम कभी भी मास मूवमेंट नहीं बन पाएंगे और फिर इसी के रिलेटेड जैसे कि हमारा उस दिन का भी डिस्कशन हुआ था कि शारदानंद जी महाराज ने फर्स्ट जनुअरी जो हुआ था घटना काशीपुर में उसको कहा है आत्मप्रकाश अभयदान आत्मप्रकाश से ठाकुर हमको अभयदान देते हैं क्यों क्योंकि ठाकुर कल्पतरु नहीं हुए थे क्यों नहीं हुए थे शरत महाराज ने स्वामी शारदानंद जी ने लीला प्रसंग में स्पष्ट लिखा है कि कल्पतरु होना यानी कि आपकी सांसारिक जो इच्छाएं हैं उसको भी पूरी करना किंतु ठाकुर तो आपकी आध्यात्मिक इच्छाएं ही पूरी करेंगे सांसारिक इच्छाएं नहीं इसलिए इस दिन को कल्पतरु दिन कहना गलत होगा हमारे संघ की जो सर्व महत्व स सर्व सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण जो किताबें है उसमें से एक किताब में यदि कथामृत कहा जाए यदि लीला प्रसंग कहा जाए यदि स्वामी जी का कंप्लीट वर्ष कहा जाए और गंभीरानंद जी की स्वामी जी की लाइफ और यह मां की जीवनी इतनी जो कुछ चंद गिनी चुनी सबसे फंडामेंटल किताब है हमारे संघ की उस किताब उसमें से एक किताब में जद ये स्पष्ट रूप से कहा है कि इस दिन को कल्पतरु दिन कहना गलत है किंतु फिर भी राम कृष्ण संघ के बहुत सारे सेंटर में आप देखिए कि इस दिन को अभी हम कल्पतरु दिन के रूप में एकदम उसका सेलिब्रेशन करना स्टार्ट कर दिए हैं यहां पे भी मैंने तो सोचा कि विशाखापट्टनम तो आउट ऑफ द वे जगह है एक छोटा सा आश्रम है कहां इस दिन का कुछ महत्व है किंतु उस दिन मैंने मंदिर में जाकर देखा तो पूरा मंदिर भर गया था इतने सारे डिवोटा बैठे थे क्यों क्योंकि इवन हमारे डिवोर्स में इवन हम मैं खुद की बात करूं दूसरों की तो क्या एक छुपा हुआ मोह तो रहता ही है कि अरे भाई बहुत हो गया है यह दिन प्रतिदिन मंगल आरती में जाना दिन प्रतिदिन बैठ कर के पढ़ाई लिखाई करना दिन प्रतिदिन प्रत्येक क्षण अपने मन के ऊपर में नजर रखना कि कहीं उल्टा पुल्टा विचार उसमें ना आ जाए गलत दिशा में यह दौड़ा ना चला जाए ऐसा प्रति क्ण अलर्ट रह कर के थक जाते हैं अरे भाई कहीं से कोई तो बीच-बीच में कोई शॉर्टकट दे दो तभी तो कुछ लगेगा कि हां इस जीवन में में हमने जो किया आध्यात्मिकता में वह सार्थक है यह छुपा हुआ मोह तो मेरे मन में भी है तो यह कल्पतरु ठाकुर किसको पसंद नहीं होंगे किंतु यह जो फिर वह बात है कि क्या यह कल्प थरू ठाकुर जो है वह ब्रिज है एक जनरल पब्लिक में जो आध्यात्मिकता के प्रति जो एटीट्यूड है और अपने रामकृष्ण संघ का यह जो वराह नगर मठ अपना जो थिंकिंग प्रोसेस है रामकृष्ण संघ की वो कहां से स्टार्ट हुई है वो वराह नगर से स्टार्ट हुई है इंटेंस तपस्या और फिर यह काशी अपना ये जो काकड़ काछी वाली स्ट्रीम है काकड़ काछी यानी कि ये कल्पतरु वाले ठाकुर यहां पे ये तपस्या वाले ठाकुर वराह नगर मठ के सो व्हाट इज दैट कनेक्टिंग ब्रिज क्या ये कांकड़ गाछी वाली जो स्ट्रीम है कि ठाकुर को कल्पतरु के रूप में डिक्लेयर करो उनके सामने फर्स्ट जनवरी को जाकर के जो मांगेंगे दे देंगे विल देड बी अ कनेक्टिंग ब्रिज बिटवीन ये जनसाधारण और यह रामकृष्ण विवेकानंद का जो कोर टेनेट है वो क्या यह कनेक्टिंग ब्रिज होगा कि नहीं होगा रामकृष्ण विवेकानंद मूवमेंट एक व्यापक जनसाधारण में कब यह प्रवेश करेगा उनके मन के भीतर में यह कब इसकी एंट्री होगी वी डू नॉट नो स्वामी जी का खुद का सॉल्यूशन है

प्रसंग: "शिव ज्ञाने जीव सेवा" के आदर्श के साथ बड़ी संख्या में लोग हमसे जुड़ सकते हैं

शिव ज्ञाने जीव सेवा किंतु अगेन आप देखिए कि बहुत कम लोग होंगे जो कि समय देना चाहते हैं जिस तरह से कोई अपना हृदय परिवर्तन नहीं करना चाहता वैसे ही बहुत कम लोग जो होंगे जो कि अपना समय देना चाहेंगे उनको आप कहेंगे कि अच्छा यहां पे यह हॉस्पिटल चल रही है यहां पे यह सेरेब्रल पाल्सी क्लीनिक है यह बच्चे जो है जन्म से ही इस तरह से वह अपाहिज उनका जन्म होता है दिव्यांग जिसको कहते हैं उन लोगों के लिए हमको कुछ करना है तो आप कुछ मदद कीजिए तो वे लोग क्या करेंगे डिवोटा पैसा दे देंगे कि हां यह डोनेशन ले लीजिए उनको हेल्प कीजिए किंतु बड़े रेयर कोई आपको देखने को मिलेगा खुद हॉस्पिटल में आकर के बच्चों की सेवा करें यहां पे एक लेडी डिवटी आती है हमारे सीपी क्लीनिक में रेगुलर आती है बच्चों का क्लास लेती है देख कर के मैं बड़ा आश्चर्य चकित हो गया कि इस तरह के डिवटी भी है यहां पे तो यदि पॉपुलर एक्सप्रेशन स्वामी जी ने जो करना चाहा था देखिए कि कोर रामकृष्ण विवेकानंद भावधारानी सिस्टम कि आपको हृदय परिवर्तन करना है उसको आप जनसाधारण में कैसे ले जाएंगे तो काकड़ गाछी वाला रामचंद्र दत्त का है कि ठाकुर को कल्पतरु के रूप में डिक्लेयर करो यहां पर स्वामी जी का एक सेकंड सॉल्यूशन है कि जनसाधारण में जाने के लिए जनसाधारण को प्रेरित करो कि आपकी यह जो गरीब या दो या तो फिर यह पद दलित या तो फिर यह जो अनफॉर्चूनेटली उनके भीतर में ईश्वर का दर्शन कीजिए उनके उनका उनके उत्थान के लिए कुछ ना कुछ कार्य कीजिए दिस विल बी योर टिकट टू डीपर स्पिरिचुअलिटी आपको यदि कहा जाएगा कि चलो आज से ब्रह्मचर्य का पालन करना शुरू कर दो एक आम आदमी को कहा जाएगा हो सकता है यह संभव नहीं होगा किंतु यदि उसको ऐसा कहा जाए कि हां देयर आर इजी स्टेप्स टुवर्ड्स अ डीपर लेवल्स ऑफ स्पिरिचुअलिटी और यह इजी स्टेप क्या है जिस तरह से अपनी जॉब में तुम काम करते हो एडमिनिस्ट्रेटिव वर्क है अकाउंटिंग वर्क है कि या टीचिंग वर्क है जो कुछ भी करते हैं बैंकिंग फील्ड में है ना कि एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस में है इवन सोल्जर है इवन बिजनेसमैन है इवन स्पोर्ट्समैन है इवन आर्टिस्ट है ऑथर है राइटर है एक्टर्स है व्हाट एवर यू आर इन योर अदर लाइफ इन योर बिजनेस लाइफ यू कैन यूटिलाइज सम ऑफ दो स्किल्स इन ऑर्डर टू टीच दिस अनफॉर्चूनेटली बालक संघ बनाए उसमें यदि आपको गाना अच्छा आता है तो इनको गाना सिखाए यदि आपको अकाउंटिंग अच्छा आता है तो इनको अकाउंटिंग सिखाए व्हाट एवर द स्किल दैट यू हैव अर्न्ड इन ऑर्डर टू बी सक्सेसफुल इन योर फाइनेंशियल लाइफ यू कैन टीच द सेम स्किल्स टू दिस पुअर चिल्ड्रन टू दिस पुअर पीपल

प्रसंग: "शिव ज्ञाने जीव सेवा" के आदर्श की कुछ कहानियाँ

मैं जब रांची में था तो वहां पे हम लोगों को बैंक के साथ में बार-बार काम करना पड़ता है क्योंकि क्या है कि ट्राइबल लोगों को तो लोन चाहिए यदि कुछ भी डेवलप करना है गौशाला के लिए शेड बनाना है या तो फिश टैंक बनानी है मछलियों मछली पालन करने के लिए किसी भी कार्य के लिए लोन सब समय चाहिए अभी जो भारत की यह जो कम नसीबी है कि ये जो लोन देने वाले कौन है है तो कुछ-कुछ लोकल लोग बैठे होंगे वह आपको लोन तो देंगे किंतु फिर यह चक्रवृद्धि ब्याज इस तरह से लेंगे कि वो जैसे वह पूरा धीरे-धीरे करके कर्ज के वो उसके भीतर में डूबता जाएगा फिर यह लोग जाकर के उसका धन छीन ले उसका घर छीन लेंगे उसका खेत छीन लेंगे उसको गुलाम बना कर के काम करवाएंगे यह सब बहुत हुआ है भारत में तो अभी बैंक वाले क्या करते हैं बैंक वाले भी लोन देते हैं अभी बैंक से लोन लेना है तो आपको बहुत सारा कॉलेटरल दिखाना पड़ेगा अब यह कॉलेटरल यानी कि सामने कुछ गिरवी रखना पड़ेगा यह गरीब किसानों के पास तो कुछ होता नहीं है तो किसान के रिलेटेड कुछ स्कीम चालू की है कॉलेटरल यदि इतना कुछ नहीं होगा तो चलेगा वगैरह वगैरह डिटेल है बहुत सारी इसमें तो हमको मुझे खास करके बैंक के साथ में इसलिए काम पड़ता है क्योंकि मैं किसी ना किसी गरीब किसान का वह कैस लेकर के वहां पर जाऊंगा कहूंगा बैंक मैनेजर को भाई इसको पास करवा दो वगैरह वगैरह उस समय वहां की एक लोकल बैंक का एक मैनेजर मेरे साथ में उसके फ्रेंडशिप हो गई तो पहले तो मुझे देखा बैंक में आते हुए इतना आश्चर्य चकित हो गया बोला कि आप साधु है साधु होकर के आप पैसों का व्यवहार करते हैं कर्ज दिलवा हैं यह क्या हो गया आपको आप तो साधु नहीं आप तो भ्रष्ट है फिर मैंने उसको थोड़ा बिठा करके समझाया भाई ये रामकृष्ण मिशन क्या है स्वामी जी का आइडियाज क्या है वगैरह वगैरह तो सुनने के बाद में मेरा बड़ा अच्छा दोस्त बन गया था कुछ समय के बाद में अपने घर अपने घर ले गया खाना-वाना खिलाया वगैरह फिर मैं जब भी उसको किसी को को रिकमेंड करूंगा इमीडिएट वो उसको हेल्प करेगा तो ऐसे लोग भी है कि बैंक मैनेजर है उसके हाथ में क्या है लोगों को हेल्प करने के लिए वही तो वो बैंक लोन पास करवा देता है तो वो बड़ा ही इजली लोगों को मतलब कभी-कभी इन लोगों का एटीट्यूड ऐसा होता है गरीब आदमी देखते हैं किसान देखते हैं तो एकदम उसको तुच्छ ता छिल करते हैं उसके साथ में इंसल्ट करके बात करते हैं किंतु ऐसे लोगों को सम्मान देक के बात करना उनके भीतर में एक मनुष्यवकाशा प्रशन करना दिव्यता का तो छोड़ ही दीजिए यह आदमी जो गरीब आदमी मेरे सामने खड़ा है वह पशु नहीं है एटलीस्ट मनुष्य है जैसा मनुष्य मैं हूं इतना तो आप यदि कर पाए तो वह भी तो एक बहुत बड़ी बात है तो ऐसे लोगों को जब मैं मिलता था तब मैं कहता था कि देखिए दिस इज अ वे टुवर्ड्स डीपर स्पिरिचुअलिटी यह हायर रिचस ऑफ आध्यात्मिक साधना है वहां पे जाने के लिए यह ब्रिज है यदि यही बैंक मैनेजर हजार तीर्थ यात्रा कर लेता मुझे लगता है कि यह जो किसानों के साथ में उसने रिस्पेक्ट पूर्ण व्यवहार करना शुरू किया उनको हेल्प करने की शुरुआत की दैट मुझे लगता है कि इट विल टेक हिम नियरर टू गॉड सून देन एनी अदर पिलग्रिम एजेस और एनी अदर ये जो लोग होते हैं जो ग्राउंड लेवल पे कार्य करते हैं गवर्नमेंट ऑफिसर होते हैं बैंक मैनेजर्स होते हैं पुलिस ऑफिसर होते हैं उ मैं मुझे पुलिस के साथ में भी वहां पर बहुत काम करने की क्योंकि क्या है कि गांव में कुछ ना कुछ होता रहता है अभी एक केस ऐसा हुआ कि वह हमारे हमने अडॉप्ट किए हैं कुछ गांव 75 ना की इतने कुछ और हमारे सेवा संघ है हमारे वॉलंटस थे तो वहां पे एक लड़की थी किसी एक वॉलंटिली उसको पटा करके एक लड़का उसको उठा कर के ले गया फिर अभी ऐसा हुआ कि उसके फादर ने पुलिस में कंप्लेन की इस पुलिस वाले ने इस लड़के को पकड़ भी लिया फिर ये उसके फादर ने मुझे फोन किया कि आप यहां पर आइए देखिए कि वह लड़के को ठीक ठीक पनिश करें वरना क्या है कि ये लोग पैसा बैसा देक के छोड़ छूट जाएंगे और लड़कियों का शोषण तो इसी तरह से चलता रहेगा तो अभी मैं हमेशा इस तरह के रिक्वेस्ट को रिस्पॉन्ड करता हूं गांव में जितना भी मुझसे हेल्प हो पड़े मैं करता हूं तो मैं इमीडीएटली गांव गया पुलिस स्टेशन में गया पुलिस ऑफिसर के साथ बात किया अब यह पुलिस ऑफिसर भी जनरली इन लोगों का जो एटीट्यूड होता है वैसे तो बड़ा ही क्या कहेंगे आपने तो सब पढ़ा ही है न्यूज़पेपर वगैरह में किंतु बिकॉज कि मैं साधु हूं रामकृष्ण मिशन से आया हूं मेरे साथ में इतना रिस्पेक्टफुल बात करता है कि अच्छा स्वामी जी आप बैठिए मैं इस लड़के को बुलाता हूं फिर लड़के को बुला कर के सीधा मेरी नजर के सामने उसको डंडा मारना शुरू किया मैंने कहा अरे क्या कर रहा है साधु के सामने इस तरह से किसी को मिस्ट ट्रीट नहीं करते भले ही चाहे वो क्रिमिनल है आप तो मुझे कहता है कि स्वामी जी आप है तो आप कहते हैं तो इसकी पिटाई नहीं करेंगे किंतु एक समझ लीजिए कि कोर्ट में उसको कोई सजा फजा नहीं होने वाली है ये लोग बड़े चालाक होते हैं यह सब ट्रिक्स उनको हजार समझ में आती है यदि उसको पिटाई करके छोड़ेंगे नहीं तो यही सब कुछ करता रहेगा मैंने कहा कि देखो मेरे सामने कुछ भी मत करो इस तरह का जो कि इलीगल है बाद मैं जब जाऊं उसके बाद में आपको जो करना है करो उसके बारे में मैं मुझे कुछ बोलना नहीं एटलीस्ट साधु का सम्मान रखिए जब तक साधु वहां पर प्रेजेंट है तो वो बोलता है हां हां आपने यह बात बिल्कुल ठीक कही है देखिए कि यह लोग जो कि दूसरों को हेल्प करने के लिए इस तरह से रता यानी कि ईगर निस है या तो फिर इस तरह से एक आगे आते हैं मुझे ऐसा लगता है कि यही यह जो थानेदार जो था वह हजार तीर्थ यात्रा भी करेगा उससे ज्यादा पुण्य उसको इस बात में मिलेगा कि उसका जो कार्य है वह कार्य यदि ठीक-ठीक करें लोगों को सहाय रूप हो सहाय भूत हो तो इट विल टेक हिम नियरर टू स्पिरिचुअलिटी एंड दिस इज द स्पिरिट ऑफ राम कृष्ण विवेकानंद मूवमेंट मान लीजिए कि राम कृष्ण आश्रम में आकर के हमारी हॉस्पिटल है हमारे स्कूल्स है या हमारे सेवा कार्य है उसमें पार्टिसिपेट करने के लिए आपके पास समय ना हो किंतु आप खुद जो कार्य कर रहे हैं उसमें आप ऐसे लोगों को सहाय भूत हो जो कि नीडी है जो कि डिसएडवांटेज है जो कि अनफॉर्चूनेटली कम नियरर टू गॉड देन जैसे कि स्वामी जी ने कहा ना कि बाय प्लेइंग फुटबॉल यू विल कम नियरर टू गॉड देन बाय रीडिंग गीता तो यदि इसी सेंटेंस को थोड़ा सा चेंज कर दे बाय हेल्पिंग दोज हु आर लेस फॉर्चूनेटली इंग्स इन योर जॉब इन योर एक्टिविटीज यू विल कम मच नियरर टू गॉड देन जस्ट बाय रीडिंग गीता तो दिस इज अवर ब्रिज टू टुवर्ड्स दिस कोर प्रिंसिपल्स ऑफ रामकृष्ण विवेकानंद मूवमेंट कि हृदय को परिवर्तन करना है कॉन्शियस निस के ऊपर में हमको कॉन्शियस निस को डेवलप करना है फ्रॉम देयर वी विल रीच गॉड किंतु यह तो डिफिकल्ट है आप एक दिन की बात नहीं है एक जन्म की बात नहीं है तो इजी बेबी स्टेप्स क्या है यहां पे ऐसा क्या है जो कि आपको धीरे-धीरे करके यह हायर रिचज की अब यदि आपको हिमालय एवरेस्ट की यात्रा करनी है मान लीजिए कैलाश मानसरोवर की यात्रा करनी है तो सबसे पहले तो अपने घर में से निकल कर के बस है या ट्रेन है उसमें तो आपको उठना होगा वहां से जाकर के आपको यह जो दि दिल्ली या तो फिर दिल्ली से आगे जो हरिद्वार है वहां पर तो जाना होगा वहां से तो फिर आगे आपको कैलाश मानसरोवर लेकर जाएंगे यहां से जैसे ही घर के बाहर निकले वैसे ही कैलास मानसरोवर आप नहीं पहुंच जाने वाले हैं तो व्हाट आर द प्राइमरी स्टेजेस व्हाट आर द बेबी स्टेप्स थ्रू व्हिच यू कैन रीच डीपर लेवल्स ऑफ स्पिरिचुअलिटी सो दीज आर द बेबी स्टेप्स अकॉर्डिंग टू राम कृष्ण विवेकानंद मूवमेंट कि आप लेस फॉर्चूनेटली में व वो भी नहीं है कि कंफर्ट जोन के बाहर जाकर के हेल्प करना है विथ इन योर कंफर्ट जोन विद इन योर प्रोफेशनल सर्कल विद इन योर प्रोफेशनल एक्सपर्टाइज्ड लॉयर मैरिज नहीं किया था बड़ी उम्र हो गई थी उनकी 80 85 साल हो गई थी शी वाज ऑलमोस्ट रिटायर्ड तो मैं उनके घर पर गया कुछ काम के लिए बात कर रहा हूं तो बात-बात में उन्होंने कहा कि देखिए कि अभी तो मैं रिटायर हूं अभी तो एक्टिवली केसेस फाइट करना मेरे से पॉसिबल नहीं है किंतु मैं क्या करती हूं कि इस तरह से जो गरीब लोग होते हैं वह लोग किसी कोर्ट केस में फंस जाते हैं तो वे लोग तो ज्यादा पैसा देकर के अच्छे लॉयर्स को नहीं रख पाएंगे तो मैं क्या करती हूं आई प्रो ड माय सर्विसेस फॉर फ्री अभी अनमैरिड है घर में बच्चे या हस्बैंड नहीं है कि उसकी सब चिंता करनी हो पैसों का कोई अभाव नहीं है तो फिर हाउ टू स्पेंड टाइम सो दिस इज हाउ आई स्पेंड माय टाइम कि मेरी जो प्रोफेशनल एक्सपर्टाइज्ड इट तो मैं तो बड़ा खुश हो गया था और यह उन दिनों की बात है जबकि मैं ऐसा रामकृष्ण संघ में प्रवेश मने रामकृष्ण भावधारानी मैंने कहा कि बिल्कुल ठीक कह रही है आप कि यदि आपके पास में समय है अपॉर्चुनिटी है मतलब पॉसिबिलिटीज है देन व्हाई नॉट टू गिव बेनिफिट ऑफ योर एक्सपर्टाइज्ड की उसको हायर कर लेंगे और यह लोग भी जो टॉप क्रिमिनल लॉयर होते हैं स जो दुष्ट लोग हैं उनके पास में से पैसा लेने के लिए अपनी एक्सपर्टाइज्ड पीपल सो दैट यू कैन गो नियरर टू गॉड तो

प्रसंग: श्रीरामकृष्ण भावधारा की लोकप्रियता का माध्यम - शिव ज्ञाने जीव सेवा

दिस आर सम ऑफ द आइडियाज क्योंकि मैं यह सब पढ़ रहा था कुछ दिनों से मैं सोच रहा था कि मैं इतना सब कुछ कि क्यों रामकृष्ण विवेकानंद मूवमेंट कहां पे है टुडे इन टुडेज वर्ल्ड आज महाकुंभ में देखिए कि इतने करोड़ लोग जाकर के स्नान करके आए आज जद योगा और वेदा योगा और इन जनरल अभी जैसे कि मैं कुछ दिनों पहले मुझे एक डिवोटा ने बताया कि एक है एक कथाकार है शिव कथा कहते हैं और उसमें इतने लाखों लोग वो कथा सुनने को जाते हैं वो इतनी सुंदर बात करते हैं कि अच्छा यह शिव पूजा करने का यह बेनिफिट है फिर यह कौन सा रुद्राक्ष का क्या पावर है कौन से बिल्व पत्र से मतलब वो सब कुछ शिव पूजा रिलेट टेड बात करते हैं और इतने लोग सुनते भी हैं इतने कॉलेज के स्टूडेंट जाते हैं आईआईटी के स्टूडेंट जाते हैं सुनते हैं तब मैं सोच रहा था कि सी इवन रामकृष्ण विवेकानंद मूवमेंट है सच डीप पावरफुल स्पिरिचुअल जेम्स हमारे पास में जो आध्यात्मिक रत्न है उसकी कोई कमी नहीं है किंतु आज हम सपने में भी नहीं सोच पाएंगे कि ठाकुर मा स्वामी जी की बात को सुनने के लिए करोड़ों लोग हैं या तो लाखों लोग है इकट्ठा हो अ हमारी बात सुनने के लिए ज्यादा से ज्यादा जैसे कि सर्व प्रियानंदनसेक्स व्ट विल बी द पॉपुलर एक्सप्रेशन ऑफ डीपर स्पिरिचुअल ट्रुथ यह सब कुछ देखने की और सोचने की बात है हम अपनी मूवमेंट को डाइल्यूट नहीं कर पाएंगे यदि हम खुद बाकी की लोगों की तरह चमत्कार का आश्रय लेना शुरू करें यह कल्पतरु ठाकुर का प्रचार करना शुरू करें तो मुझे लगता है कि दैट विल गो अगेंस्ट द बेसिक आइडियाज ऑफ अवर मूवमेंट हमको यदि पॉपुलर होना है तो यह जो शिव ज्ञान जीव सेवा है उसके माध्यम से हमको पॉपुलर होना है 15-20 करोड़ है 30 40 करोड़ है इतने लोग अपने साथ में कैसे जुड़ेंगे ऐसा तो उनके मतलब व्हाट इज द हार्ट ऑफ ए कॉमन पीपल व्हाट इज अ हार्ट ऑफ ए कॉमन पर्सन कि जिसको हम टच कर पाएंगे जिसको टच करके हम अपनी ओर उसको ले आ पाएंगे सो दिस इज समथिंग कि वोह सोचने की बात है इसका कोई इजी सोल्यूशन नहीं होता है और ऐसा होता है कि यह सब ठाकुर की इच्छा के ऊपर निर्भर होता है जब ठाकुर कहेंगे कि हां यह समय आ गया है कि लोगों को इतने इतने कर लोगों को यहां पर उठाकर ले आना तो ठाकुर ले आएंगे हो सकता है कि हम कुछ करें ना करें ट माइट नॉट मैटर बट एटलीस्ट सोचने की कैपेसिटी ठाकुर ने हमको दी है तो हम लोग सोचते हैं तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं कल तो छुट्टी है अभी मंडे को ओम शांति शांति शांति हरि ओम तसत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु

प्रश्न: आज आम आदमी दो सवालों के समाधान खोज रहा है। अगर हम इनका उत्तर दे सकें, तो हम सचमुच लोकप्रिय हो सकते हैं। 1) अपने दैनिक जीवन में आध्यात्मिक साधना को कैसे शामिल करें? 2) हमारे दैनिक संघर्षों में आध्यात्मिकता हमारी कैसे मदद कर सकती है?

नहीं ये आपने बिल्कुल बहुत अच्छा एनालिसिस है कि हाउ टू इनकॉरपोरेट स्पिरिचुअलिटी इन द एक्टिविटीज व्हिच आई एम ऑलरेडी डूइंग जिससे कि मुझे वह स्टेप आउट ना होना पड़े बिल्कुल अच्छी बात है कि इवन मेरे पास में यह जद ऑप्शन होता ज जद मैं स्टूडेंट था तो मुझे लगता है कि आज मैं कितना डेवलप हो गया होता मुझे यह पूरा हार्ड पाथ लेना पड़ा है कि रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर को एकदम बड़ा डिटेल में पढ़ा तब कहीं जाकर के यह सब कुछ समझ में आया एक बेबी स्टेप्स लेने का यदि कोई ऑप्शन होता मेरे पास में कि ऑलरेडी तुम स्टडी कर ही रहे हो हाउ कैन यू इंप्लीमेंट हा हाउ कैन यू इनकॉरपोरेट दिस इन योर लाइफ सो इट वुड हैव हेल्प हेल्प मी अ लॉट और तो दैट इज वन थिंग और सेकंड कि जैसे आपने कहा कि व्यवहार जीवन में आध्यात्मिकता डे टू स्पिरिचुअलिटी इन डे टू डे लाइफ और वो भी नो मिरेकल्स बिल्कुल ठीक कहा आपने कि विदाउट मिरेकल के हृदय को स्पर्श कर देने वाली जो आध्यात्मिकता यह देखिए कथाकार का पावर कहां से आता है यह जो मोरारी बापू है या जो इस तरह के जो कथाकार है उनका पावर कहां से आता है कि वो राम कथा या जो कृष्ण कथा इस तरह से कहते हैं कि जिसे सीधा हृदय में वो प्रवेश कर जाए तो यह कथा सुनकर के ही हमको लगता है कि जैसे आधे समस्याओं का समाधान आ गया क्योंकि बहुत बार ऐसा होता है ना कि हमको कोई स्पेसिफिक क्वेश्चन है उसका स्पेसिफिक आंसर की वजह इन जनरल जद स्पिरिचुअलिटी मिल जाए तो बहुत सारे क्वेश्चन वैसे ही सॉल्व हो जाए तो रदर देन के प्रत्येक इंडिविजुअल क्वेश्चन का इंडिविजुअल सॉल्यूशन हो इन जनरल यदि हृदय में कुछ होता है कि हां संतोष मिला एक अच्छा लगा दैट इट सेल्फ माइट सोल अ लॉट ऑफ क्वेश्चन तो दैट इज व्हाई ये कथा का इंपॉर्टेंस क्यों है और इसीलिए मेरा खुद का ये जो बड़े ही दृढ़ता से मानना है कि यदि हमारे जो प्रसंग है रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर के मां शारदा देवी के प्रसंग आप देखिए कि सुनकर के ही मन को संतोष मिलता है सुनकर के ही मन में एक जैसा ठंडा पन महसूस होता है कि हां यह जो संसार का जो ताप है उससे कहीं कुछ हमको अच्छा लगा सो यह प्रसंग जो है उसको एक कथाकार की भाषा में एक जनसामान्य में ले जाना वो भी अपनी इंडियन लैंग्वेजेस में अपना यह प्रॉब्लम एक मैंने क्या नोट किया है अपने यहां पे बंगाली स्पीकर बहुत अच्छे हैं बहुत सारे हैं और फिर इंग्लिश स्पीकर्स है किंतु ये जो रीजनल लैंग्वेजेस जो होती है उसमें भी खास करके यह हिंदी जो कि मोस्ट पॉपुलर लैंग्वेज है उसमें इफेक्टिव स्पीकर्स नहीं है सर्वप्रिया अंद जी भी बोलेंगे तो इंग्लिश में बोलेंगे अभी ऐसा है कि आजकल की पूरी जनरेशन इंग्लिश समझती है तो वह इवन हिंदी भाषी रीजन में भी इंग्लिश समझने वाले लोग हैं उसमें कोई प्रश्न नहीं है बट इन स्पाइट ऑफ दैट कि हम ये कथाकार की सक्सेस को देखते हैं तो हमको लगता है है कि फॉर रीजनल लैंग्वेज देयर इज अ ह्यूज मार्केट खास करके हिंदी के लिए वगैरह के लिए तो इसमें यदि इस तरह के स्पीकर हो कि जो कि रामकृष्ण कथा को कथा के रूप में यदि यह कर पाए देन इट विल बिकम रियली सक्सेसफुल लोगों को 15 20 हजार लोग बैठे हैं सुन रहे हैं ठाकुर के बचपन के प्रसंग चल रहे हैं ठाकुर की साधना का प्रसंग चल रहा है वहां पर दक्षिणेश्वर में पंचवटी के नीचे ठाकुर बैठे हैं साधना कर रहे हैं यह जो प्रसंग के बाद प्रसंग चलते जाए जयराम बाटी में मां है वहां अमेरिका में स्वामी जी है रिजली मैनर में अपने भक्तों के साथ रह रहे हैं वो इतने प्रेरक प्रसंग है जनसाधारण की भाषा में कथा के रूप में जद यह चले ना तो एकदम यह हिट हो जाए किंतु जैसे आपने कहा यह सब क्रैक करने के लिए दो चीज चाहिए एक तो जो कथाकार है उसका सॉलिड नॉलेज भी चाहिए दूसरा है कि ये जनसाधारण की भाषा ये पॉपुलर कथा का जो ये है ना उसमें वो प्रेजेंट करने का ये स्टाइल भी चाहिए आज देखिए कि इवन हमारे कुछ साधु है कि मैं भागवत कथा तो करते हैं किंतु रामकृष्ण कथा करने में उनको पता नहीं मतलब आदर थोड़ा सा डरते हैं या तो फिर व्हाट एवर तो वह कथा का मीडियम हमारे सामने है विच वी कैन एक्सप्लोइट रियली एक्सप्लोइट मैं पर्सनली क्या सोचता हूं ना

प्रश्न: माँ शारदा अपने रिश्तेदारों के साथ रहती थीं। उनके कुछ रिश्तेदार वास्तव में बुरे स्वभाव के थे। माँ भी उनका स्वभाव नहीं सुधार सकीं। इसलिए हमें भी अपने रिश्तेदारों के साथ रहना सीखना होगा, चाहे वे कितने भी बुरे स्वभाव के क्यों न हों।

कि देखिए संसार के जो प्रॉब्लम होते हैं इन सबका कोई इजी सोल्यूशन नहीं होता है वो वी हैव टू मैनेज व्हाट एवर बेस्ट वी कैन किंतु अपने मन को तो हम बड़ा ही सुंदर शांत बना सकते हैं पर्सनली मैं क्या करता हूं बाह्य जीवन है और आंतरिक जीवन है इन दोनों को मैं थोड़ा सा स्प्लिट कर देता हूं अभी बाहर के जीवन में जो होना है सो होगा कहीं पर मुझे प्रमोशन मिला कहीं पर डिमोशन मिला किसी के साथ में मेरा अच्छा रिलेशन है 10 लोगों के साथ में बुरा रिलेशन भी है तो अभी ऐसा क्या है कि जिनके साथ में मेरा रिलेशन बिगड़ा है उसका मैं अच्छा करने को जाऊंगा वो मतलब यदि मैं उस रास्ते प जाऊंगा ना कि इसके साथ में मेरा रिलेशन खराब है चलो अच्छा करो या तो फिर इसके साथ में झगड़ा हुआ है कहीं से जाकर के मैं समाधान करो तो वो वो है ना उसका कभी अंत नहीं होने वाला है क्योंकि ये माया का जगत में अशुद्धि की वजह से ये तो माया का जगत बना है परफेक्ट होगा तो यह जगत ही नहीं रहता मना हम लोग सीधे वो ब्रह्म ज्ञान में विलीन हो जाते हैं हम लोग अपूर्ण है अशुद्ध है अभी मुझको यदि दूसरों में जद समस्या दिखती है तो जैसे आपने कहा यह तो सब्जेक्टिव असेसमेंट है ना 10 लोगों को मुझ में समस्या दिखती होगी सो आई एम नॉट गोइंग टू एबल टू चेंज माइसेल्फ इन ऑर्डर टू आई कैन अपीज देम तो क्या है कि एटलीस्ट अपना मन शांत हो जाए अपने मन में एक तरह का सुकून हो शांति हो संतोष हो एक कंटेंटमेंट हो लाइफ में कि चलो मेरा लाइफ वेस्ट नहीं गया है रिग्रेट नहीं हुआ है मैं एडिक्शन में नहीं फंस गए क्योंकि रिग्रेट जो होता है ना हमको एडिक्शन में फंसा देता है आजकल हम लोग एडिक्शन सोशल मीडिया के माध्यम से यह मोबाइल के माध्यम से आता है हम लोग इसको एडिक्शन के रूप में देख भी नहीं पाते किंतु बहुत सारे लड़कों को आप देखेंगे ना टीनएजर्स को जैसे ही थोड़ा टाइम मिला फट करके मोबाइल निकाल कर बैठ जाएंगे क्यों क्योंकि अभी अमेरिका में एक स्टडी हुआ था बोलते हैं कि आजकल के लोग इतने लोनली है वो इंटरपर्सनल रिलेशनशिप बना ही नहीं पाते क्यों क्योंकि जैसे ही रिलेशनशिप बनाने का प्रयास करेंगे झगड़े में चले जाएंगे इसका नेचर ऐसा है इसका ऐसा है मेरा ऐसा है मैच नहीं होता है आज लोग हम लोगों के साथ में फ्रेंडशिप करने को डरते हैं ऑन एवरेज आज से 15 20 30 साल पहले लोगों के जितने मित्र होंगे 10 मित्र 15 मित्र आज उस मित्रों की संख्या 1 थर्ड वन हाफ से भी ज्यादा हो कम हो गई है हमारे मित्र कम हो रहे हैं पहले हम जिस तरह से जॉइंट फैमिली में रहते थे अच्छा बुरा सुख दुख जॉइंट फैमिली में रह जाते थे आज सपने में भी नहीं सोच सकते जैसे ही शादी हुई वह चलो सेपरेट घर ले लिया मां पिताजी को छोड़ दिया मतलब मां पिताजी के साथ में रहना मुश्किल है जॉइंट फैमिली को तो भूल ही जाइए आप वो चाचा चाची मामा मामी फई फुआ उनके साथ में रहना ये तो भूल ही जाइए तो ये जो ह्यूमन रिलेशन है वह टूटता जा रहा है और अभी इसका असर यंग जनरेशन पर जाता है मैं कभी-कभी कुछ-कुछ बच्चों को देखता हूं ना छोटे बच्चे हैं बहुत रोते हैं बहुत अपनी मां को परेशान करते हैं मैं तो सो मैं तो सोचता था कि मैंने मैं जब छोटा था तो मेरी मां तो या इतना बड़ा जॉइंट फैमिली है कभी मैं अपनी चाची के पास में दौड़ा जाला जाता कभी अपनी मामी के पास साथ में चला जाता कभी मामा के साथ में मेरी मां को ऐसा कोई टेंशन नहीं था कि यह मेरा लड़का क्या कर रहा है क्योंकि पूरा एक घर एक मुझे जो प्रेम करते हैं ऐसे लोगों से भरा है छोटे बच्चे को जो प्रेम करने वाला चाहिए अभ यह जो न्यूक्लियर फैमिली है फैमिली टूटते जा रहे हैं बच्चे को प्रेम करने वाला कोई नहीं है मां बेचारी परेशान हो जाती है बच्चे के पीछे दौड़ती दौड़ती उसकी अकेली की रिस्पांसिबिलिटी है कि मैं वो अपने बच्चे को संभालूं और कोई हेल्प करने वाला नहीं है फिर मां सोचेगी इसको खास करके अमेरिका में डे केयर में रख दो स्कूल में रख दो किंडरगार्डन में वो मेरे सर से वो टेंशन जाए इतना तो बचपन से ही बच्चे को प्रेम ही नहीं मिलता ऐसा नर्चरिंग एटमॉस्फियर ही नहीं मिलता कि 15-20 लोगों से घिरा हुआ हो सभी उसको प्रेम करते हो तो उसका जो हृदय का जो डेवलपमेंट है इमोशनल डेवलपमेंट वो स्टंटेड हो जाता है फ्रॉम द बिगिनिंग तो यह सब क्यों होता है बिकॉज ऑफ द लैक ऑफ स्पिरिचुअलिटी इन अवर डे टू डे लाइफ तो इस स्पिरिचुअलिटी को यदि लाना है तो इजस्ट माध्यम है यह कथा कि आप कथा सुनते जाइए मैंने और तो बहुत कुछ कर सकते हैं कोई प्रश्न ही नहीं है कि आप खुद पाठ कर सकते हैं खुद सुबह को उठ कर के पूजा कर सकते हैं खुद मंदिर में प्रतिदिन जाकर के कुछ ना कुछ कर सकते हैं जो कि बहुत सारे लोग करते भी हैं किंतु इज एस्ट वे इज टू लिसन ये कथा और गुजरात में तो आपने देखा होगा पूरा रात भर डायरो चलता है वो कथाकार है कथा करता ही जाएगा डोंगरे जी महाराज है डोंगरे जी महाराज की कथा सुनेंगे तो ऐसा लगेगा कि हां चलो आज मन में बहुत संतोष मिला एक कंटेंटमेंट मिला यही कंटेंटमेंट विल सीप आउट इन माय डे टू डे रिलेशनशिप मेरे कलीग्स के साथ में रिलेशन है मेरे बच्चों के साथ में रिलेशन है चाचा चाती मामा मामी फुई फुआ उनके साथ में रिलेशन है दिस कंटेंटमेंट विल स्प्रेड इसको आप यदि प्योर स्पिरिचुअलिटी के कैटेगरी में ना भी रखें तो ये जो संतोष है मन का वो हमको संतोष मिले 10 लोगों को संतोष दे पाए दैट इट सेल्फ विल एलीवेट द क्वालिटी ऑफ अवर लाइफ आजकल देखें कि लोगों के पास में में बैंक बैलेंस है या इन्वेस्टमेंट है यह सब तो बढ़ गया है किंतु क्वालिटी ऑफ लाइफ है कंटेंटमेंट है यह कम होता जा रहा है एंड द रिजल्ट इज लाइफस्टाइल डिसीसेस अब जहां पर भी जिसको भी पूछे 40 50 साल की उम्र हुई वह बीपी का टेबलेट खा रहा है ना तो शुगर का टेबलेट खा रहा है कितना वाइड स्प्रेड हो गया है यह सब सो दिस कथा जो है मेरे ख्याल से एक बड़ा ही उत्तम माध्यम है एक्चुअली आई एम ट्राइम टू फॉर्म माइसेल्फ इन अ कथाकार और रदर टू स्पीक द स्टाइल ऑफ कथा क्योंकि देखिए हमारा इंटेलेक्चुअल कंपोनेंट है हम डिस्कस करते हैं क्वेश्चन आंसर्स करते हैं सब कुछ करते हैं किंतु बोलना जब कथा के स्टाइल में होता है ना तो बोलने वालों को भी संतोष मिलता है सुनने वालों को भी संतोष मिलता है इवन यदि हम आर्गुमेंट भी करते हैं विदन अवर डिस्कशन इट सेल्फ जब मैं कुछ बोलता हूं तो आप देखेंगे कि मैं हमेशा पैराडॉक्सेस खड़ा करता रहता हूं इवन दैट कैन बी डन इन द स्टाइल ऑफ कथा ट कैन मेक इट एवरीवन हैप्पी वन इंटेलेक्ट कैन बी प्रेजेंटेड इन फॉम ऑफ कथा पर्सन स्किलफुल नफ इवन इंटेलेक्चुअल डिस्कशन इंटेलेक्चुअल डाउट कैन बी प्रेजेंटेड इन फॉर्म ऑफ कथा बो बोग फिर वो डिस्कशन भी होता है ना बहुत

प्रश्न: स्वामी विवेकानंद ने भी अपने व्याख्यानों में प्रश्न उठाए और उनका उत्तर दिया। तर्क-वितर्क सीखने का एक पुराना माध्यम है।

बार मैं हमारा जो यह जो प्रश्नोत्तरी जो होता है मैं अपने जनरल क्लास में इनकॉरपोरेट करता हूं कर लेता हूं तो स्वामी जी भी तो डिस्कशन अे गुरु भाई ही तो कम थोड़ी ना थे सब तो भैरव थे एक के बाद एक न लोगों के जो वरा नगर मठ का जो डिस्क्रिप्शन पढ़ेंगे पता चलेगा आपस में कितना वो उनका वाद विवाद चलता था काली महाराज का स्वामी जी का काली महाराज का एक डिस्क्रिप्शन है कि मैं नरेद के साथ में डि प्रतिदिन आर्गुमेंट करता था हर बार नरेंद जीत जाता है एक दिन ऐसा हुआ कि मैंने नरेद को कॉर्नर कर दिया मैंने इस तरह से चारों ओर से उसको घेरा नरेद कुछ बोल नहीं पा रहा है तो फिर मैं बड़ा खुश हो गया कि चलो आज स्वामी जी को पकड़ लिया है आज स्वामी जी को आर्गुमेंट में हराया है तो उस दिन स्वामी जी ने कहा अच्छा ठीक है आज का दिन रुक जाओ मैं कल फिर से इसका स्टार्ट करते हैं फिर कहते हैं कि दूसरे दिन स्वामी जी ने जो काउंटर आर्गुमेंट किया है मेरी सब आर्गुमेंट को तोड़ के फेंक दिया किंतु ये तो सेटिस्फेक्शन है कि एक दिन तो कॉर्नर कर दिया इनको नाउ दिस आर्गुमेंट काउंटर आर्गुमेंट दिस स्टोरी इट सेल्फ कैन बी प्रेजेंटेड इन फॉर्म ऑफ कथा जो कि हमको अच्छे से आनंद

प्रश्न: स्वामी विवेकानंद स्वयं तर्क-वितर्क में पराजित हुए थे!

देगी अरे लाटू महाराज कम नहीं थे लाटू महाराज एक बार कहते हैं कि मैंने सोचा कि मैं नरेंद्र को जब ध्यान में हरा दूंगा तो नरेंद्र जितना जप करता है उतना मैं करूंगा उससे भी ज्यादा करूंगा अभी देखिए स्वामी जी के जीवन में जब ध्यान करने की बहुत ज्यादा बातें नहीं है कुछ-कुछ प्रसंग है जो कि काफी फेमस है किंतु इन जनरल स्वामी जी साधना कर रहे हैं दिन प्रतिदिन दिन जप कर रहा है ऐसा कोई रेयरली पढ़ने को मिलता है किंतु यहां पर लाटू महाराज ऐसा कहते हैं कि नरेंद्र जब ध्यान करता है पूरी रात बैठा रहेगा मुझे नरेंद्र को हराना है तो मैं जप करते करते करते और फिर यह सब सुपर स्पिरिचुअल लेवल पे हो रहा है नॉर्मल लेवल पे कुछ नहीं उनको पता है कि दोनों में कौन आगे है कौन पीछे हम बाहर से नहीं पता चलेगा तो लाटू महाराज खुद कहते हैं कि मैं इतना जप कर रहा हूं इतना जप कर रहा हूं मैं इतना आगे बढ़ गया किंतु फिर आंखें खोल के देखी मैंने सोचा कि नरेंद्र तो अभी पीछे रह गया होगा तो पीछे देखा नहीं है आगे देखा तो और कहां आगे चला गया है तो प्रॉब्लम यह है लाडू महाराज कहते हैं मैं जब जप कर रहा हूं नरेंद्र तो वैसे ही बेकार नहीं बैठा है वो भी तो कर रहा है स्वामी जी तो हंबल बहुत थे ना वो स्वामी

प्रश्न: उनके गुरुभाई उनसे प्रतिस्पर्धा करें यह शायद स्वामी विवेकानंद भी पसंद करेंगे

जी बार-बार कहते हैं स्पिरिचुअलिटी ते राजा अर चेयो बढो मने स्वामी राजा महाराज के बारे में ब्रह्मानंद जी के बारे में स्वामी जी तो स्पष्ट स्वीकार करते थे हालांकि यह उनकी हलने थी और वट वेदर इट इज अ रियल फैक्ट वी डू नॉट नो किंतु बोलते थे कि आध्यात्मिकता में राजा मेरे से भी बड़ा है ये जो मां के पास में जो उल्टा-पुल्टा

प्रसंग: स्वामी विवेकानंद माँ से अपने को बुखार होने का आशीर्वाद मांगते है

आशीर्वाद मांगने की बात है ना वह बेलूर मठ में पहली बार दुर्गा पूजा हो रही है मां को बुलाया है स्वामी जी जाके मां को बोलते हैं मां मुझे बुखार करवा दो तो मां बोलती है शे की बेटा तो क्या बोल रहे हो मैं तुमको बुखार करवा दूं ऐसा आशीर्वाद क्या पागल हो गए हो क्या तो स्वामी जी कहते हैं देखिए यह बच्चे लोग जो है बेचारे दिन भर मेहनत कर रहे हैं दुर्गा पूजा को सक्सेस करने के लिए किंतु मेरी एक्सपेक्टेशन इतनी ज्यादा है कि मैं कभी भी संतुष्ट नहीं होऊंगा सब समय में इनके साथ में झगड़ा करता रहता हूं इनको डांट डांटते रहता हूं और यदि मेरा टेंपर बढ़ गया ना मैं चाटा भी मार दूंगा पिटाई भी कर दूंगा तो फिर बच्चों को दुख होगा तो बेटर है कि आप मुझे बुखार दे दो मैं एक दिन बुखार में पड़ा रहूंगा यह जब खत्म हो जाएगा तब मैं खड़ा होऊंगा अभी मां ने आशीर्वाद दिया कि नहीं पता नहीं किंतु सही में स्वामी जी को बुखार हो गया उस दिन को दुर्गा पूजा समाप्त हुई फिर मां गई स्वामी जी को मिलने के लिए स्वामी जी लेटे हैं बुखार में तो मां कहती है कि अरे बेटा नरेण दुर्गा पूजा खत्म हो गई अभी तो तुम बुखार छोड़ दो अभी खड़े हो जाओ तो नरेंद्र कहता है हां मां मैं बुखार छोड़ देता हूं ऐसा बोलक नरेंद्र खड़ा हो गया बुखार चला गया और यह बात पूरी मां ने स्वयं कही है बो य इसको कहते बचपना

प्रश्न: स्वामीजी बुखार होने से अच्छा माँ से अपना क्रोध वश हो ऐसा भी आशीर्वाद मांग सकते थे.

यह जो बालक भाव जब प्रकट होता है ना तब रेलिटी है या तो फिर यह कॉमन सेंस है वो सब कहां हवा हो जाती है देखिए कि यह सब प्रसंगों में आपको ऐसा कोई शायद वेदांतिका के चर्चा करके आनंद कितना आता है और यह जो आनंद है यह कंटेंटमेंट है दैट इज आई थिंक इट इज ब्रिज टुवर्ड्स हायर स्पिरिचुअलिटी नरेश में चिकन सु फॉर द सोल