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Swami Vivekananda My Plan Of Campaign ·

मेरी क्रान्तिकारी योजना : स्वामी विवेकानन्द : भारतीय व्याख्यान || 14 Mar 2025

प्रार्थना

ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठा राम कृष्णाय ते नमः स्वामी विवेकानंद का माय प्लान ऑफ कैंपेन भारत में दिए हुए भाषणों में से एक चेन्नई में दिया हुआ था उसका हम पाठ कर रहे हैं स्वामी जी ने एक बड़ा ही महत्त्वपूर्ण

दो प्रकार के शिक्षक = जो छात्रों को डांटते हैं, और जो छात्रों को प्रेरित करते हैं

स्टेटमेंट दिया स्वामी जी कहते हैं मैन नेवर ट्रेवल्स फ्रॉम एरर टू ट्रुथ मैन ऑलवेज ट्रेवल्स फ्रॉम लोअर ट्रुथ टू हायर ट्रुथ मनुष्य कभी गलती से सही की ओर यात्रा नहीं करता किंतु वह छोटा सत्य से बड़े सत्य की ओर यात्रा करता है इस बात का एक बड़ा ही गंभीर तात्पर्य है दिस हैज वेरी डीप मीनिंग हम लोग जैसे मान लीजिए कि एजुकेशन सिस्टम है अब एक छोटा बच्चा स्कूल में जाता है अभी उसको तो कुछ आता नहीं है ज्यादा कुछ और क्या होता है बहुत बार हम जब नया क्लास स्टार्ट करते हैं मैं सेकंड ग्रेड में से थर्ड ग्रेड में आया तो अभी क्या है कि सब कुछ मेरे लिए तो नया है सिलेबस नया है हो सकता है टीचर नए हो तो अभी मैं जब पढ़ने की शुरुआत करूंगा और यदि मैं गलती करना शुरू करूंगा तो टीचर दो तरह के टीचर होते हैं देखिए एक तरह के जो टीचर होते हैं वो बच्चे को डांटते हैं कहते हैं कि तुम मूर्ख हो तुमको इतना भी समझ में नहीं आ रहा इस तरह से वह बच्चे का सेल्फ कॉन्फिडेंस जो होता है पढ़ाई लिखाई करने का उसके ऊपर में ही जैसे कि यह लोग आघात कर देते हैं जबकि दूसरे लेवल के हायर कैटेगरी के टीचर होते हैं वे लोग क्या करते हैं बच्चे को प्रेम से समझाते हैं कि अच्छा तुमने यह जो मैथमेटिक्स का यह जो प्रॉब्लम यह जो अभी जैसे छोटे बच्चे होते हैं उनको यह सब मल्टीप्लिकेशन टेबल याद रखने होते हैं 1 * 1 इज 1 1 * 2 इज 2 1 * 3 इज 3 लाइक दैट 5 * 1 इ 5 5 * 2 इज 10 5 * 3 इ 15 येय दिस मल्टीप्लिकेशन टेबल वगैरह याद रखने हैं अभी यदि कोई बच्चा भूल जाता है गलती करता है तो यह टीचर उसको बड़े प्रेम से समझाएंगे कि अच्छा भाई देख ो तुमने प्रयास तो किया है आगे बढ़ने का तुम सीखने का साहस तो कर रहे हो गलती तो होता रहता है गलती तो जीवन का नियम है तुम और ज्यादा थोड़ा सा मेहनत करो तो देखो कि तुम कितना आसानी से यह सब सीख लोगे फिर यह जो बेटर टीचर होते हैं उत्तम आचार्य वे लोग क्या करेंगे जो बच्चे यदि अच्छा क्लास में परफॉर्म करते हैं जो लोग मेमोराइज अच्छे से कर लेते हैं उनको कुछ ना कुछ रिवा बाड़ देंगे यह रिवॉर्ड देने की प्रथा इतनी पावरफुल है कि बच्चा यह रिवॉर्ड पाने की अपेक्षा से अभी रिवॉर्ड देना है तो ऐसा नहीं कि कोई ज्यादा रुपया दे देना है कोई महंगी गिफ्ट दे देनी है क्लास में सबके सामने बुला कर के यदि बच्चे की प्रशंसा भी करें कि हां भाई यह तुमने जो किया है मेमोराइज करने का यह तुमने बड़ा अच्छा कार्य किया यह हमको पता है कि हम 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 अप टू 10 यह मल्टीप्लिकेशन टेबल याद रखते हैं तो यदि वन का वन टू वन वाला यदि याद रख लिया मैंने तो उसको रिवॉर्ड दिया टू वाला जद याद रख लिया 2 * 1 इ 2 2 * 2 इ 4 2 * 3 इ 6 ये टू वाला यदि याद रख लिया जिस दिन तो वह उस दिन उसको रिवॉर्ड दिया यानी कि बच्चा धीरे-धीरे करके सीखता है बच्चा बेबी स्टेप्स लेता है और टीचर का कार्य है कि यह बच्चे का जो जितने भी बेबी स्टेप्स से सभी बेबी स्टेप्स की सराहना करना उसको प्रेज करना उसको कॉन्फिडेंस देते जाना भले चाहे क्लास में 50 बच्चे हो 50 बच्चों में से ऐसा हो सकता है कि 10 बच्चे जो है वह जल्दी से सीख ले और बाकी के 40 बच्चे हैं धीरे-धीरे करना सीखे तो डज नॉट मैटर यह जो स्लो बच्चे हैं उनको आप सराह जाइए उनको कॉन्फिडेंस बिल्ड अप करते जाइए जो पहले 10 बच्चे हैं जो कि काफी इंटेलिजेंट है मेमरी पावर काफी डेवलप है उनको आप प्रेज कीजिए कि हां बहुत अच्छा कर रहे हो तो इस तरह के टीचर हम सबने देखे हैं बड़े रेयर होते हैं किंतु होते हैं बच्चों का बिल्ड अप कॉन्फिडेंस बिल्ड अप करेंगे उनकी आत्म श्रद्धा बिल्ड अप करेंगे बच्चों को कहेंगे कि धीरे-धीरे करके प्रोग्रेस करते जाओ जहां पर अटक हो मुझे पूछो बार-बार गलती करते हो डज नॉट मैटर कीप ऑन ट्राईंग तो ऐसे टीचर को भी देखा है जिनको कि हम उत्तम आचार्य कहेंगे और अधम आचार्य को भी हमने देखा है इस अधम आचार्य के पास में इस तरह के टीचर कि बच्चा कुछ भी गलती करता है मेमोराइज नहीं कर पाता है आज होमवर्क दिया है कि आपको थ्री वाला जो मल्टीप्लिकेशन टेबल है वह मेमोराइज करके आना है तो 3 * 1 इ 3 3 * 2 इ 6 3 * 3 इ 9 यह पूरा मेमोराइज करके आओ 50 बच्चे हैं इस अधम आचार्य के क्लास में उसमें से मान लीजिए 15 बच्चों ने मेमोराइज किया और 15 बच्चों ने आधा मेमोराइज किया पहले 15 बच्चों ने पूरा मेमोराइज किया था दूसरे आधे 15 बच्चों ने आधा मेमोराइज किया और फिर 20 बच्चे ऐसे होंगे जो कि कुछ नहीं कर पाए तो यह जो अधम आचार्य होगा वर्स्ट टीचर वह क्या करेगा जिन लोगों ने आधा मेमोराइज किया है या तो फिर जिन लोगों ने मेमोराइज कर ही नहीं पाए हैं सबके सामने बुला कर के उसको डांट उसकी निंदा करेंगे उसका कॉन्फिडेंस तोड़ देंगे कहेंगे कि तुम मूर्ख हो तुम कभी नहीं सीख पाओगे तो अभी जब यह टीचर बच्चे को कहता है कि तुम कभी नहीं सीख पाओगे तो यह इसको कहते हैं रिइंफोर्समेंट साइकल बच्चे को ऑलरेडी कॉन्फिडेंस लो हो चुका है आज मैं क्लास में आया हूं मेमोराइज नहीं कर पा रहा हूं मैं देखता हूं कि मेरे कुछ मित्र हैं मेरे कुछ फ्रेंड्स हैं उन्होंने मेमोराइज कर लिया है तो उसको देख कर के ऑलरेडी मेरा कॉन्फिडेंस डाउन हो चुका है अभी ऊपर में से टीचर मुझे सबके सामने डांट कहेंगे कि तुम महामूर्ख हो तुम कभी कुछ भी मेमोराइज नहीं करने वाले तो इसको कहेंगे रिइंफोर्समेंट लर्निंग या तो फिर रिइंफोर्समेंट साइकल वैसे ही मेरा कॉन्फिडेंस डाउन ऊपर से टीचर कहेंगे तुम मुर्ख हो फिर मैं कभी नहीं सीखू जैसे कि मेरे माइंड के भीतर में एक तरह का ब्लॉक बन जाएगा जब भी मल्टीप्लिकेशन टेबल लेकर के बैठूंगा मेरी आंखों के सामने अंधेरे आना शुरू हो जाएंगे थोड़ा सा भी एक दो लाइन भी मैंने मेमोराइज करने का प्रयास किया इमीडिएट भीतर में से एक ऐसा रिबेलियस रेजिस्टेंस आके खड़ा होता है कि यह बच्चा अपनी किताब फेंक कर के उठ कर के दौड़ कर के चला जाएगा वहां से और फिर मम्मी पापा जद उसके पीछे में लगेंगे जोर जबरदस्ती करवाएंगे तो यह रोना धोना शुरू कर देगा और इवेंचर ट्रबल मेकर हो जाएगा कुछ ना कुछ इस तरह का मिश्चीफ करेगा जो कि सबको तकलीफ में डालेगा भारत की एजुकेशन सिस्टम में हमने कुछ दिनों पहले बात किया था ऑलमोस्ट आई थिंक अप टू 70 पर ड्रॉपआउट रेशियो है उसका अर्था उसका मीनिंग है कि यदि आज 100 बच्चे प्राइमरी स्टैंडर्ड में यदि एडमिशन लेते

Out of 100 students enrolled in the 1st standard in India, approximately 44 are estimated to pass out from the 12th standard.

हैं तो अप टू ग हाई स्कूल पास करने तक 12वीं कक्षा 12थ स्टैंडर्ड पास करने तक वो 100 में से मुश्किल से 30 रह जाते होंगे मैं एग्जैक्ट फिगर भूल गया किंतु ये ऐसा ही कुछ अलार्मिंग फिगर है बड़ा ही डेंजरस फिगर है कि 100 में से सिर्फ 30 लड़के 12वीं कक्षा तक पहुंचते हैं पहली कक्षा से 12वीं कक्षा तक 70 पर के आसपास के कुछ ड्रॉप आउट हो जाते हैं कोई थर्ड स्टैंडर्ड में ड्रॉप आउट हो जाएगा काम घर में काम करना खेत मजूरी का काम करना शुरू कर देगा कोई फिफ्थ स्टैंडर्ड में ड्रॉप आउट हो जाएगा कोई 10थ स्टैंडर्ड में हो जाएगा ऐसा करते-करते 12वीं कक्षा तक 12थ क्लास तक जब कोई बच्चा जाते हैं तो 100 में से मुश्किल से 30 ना कि ऐसा कुछ बच्चे रह जाते हैं स्टूडेंट्स बच जाते हैं तो इतना हाई ड्रॉपआउट रेशियो हमारी इंडियन एजुकेशन सिस्टम में क्यों है क्योंकि यह जो एजुकेशन का फंडामेंटल कांसेप्ट है कि टीचर शुड ऑलवेज एंकरेज अ स्टूडेंट कीप ऑन इनकरेजिंग कीप ऑन गिविंग हिम टाइम टिल इवेंचर बैरियर्स ऑफ रेजिस्टेंस ब्रेक डाउन कंप्लीट ब एक टीचर को एक स्टूडेंट के पीछे सतत लगे रहना चाहिए सतत उसको आत्मविश्वास दिलवाना चाहिए सतत उसकी प्रशंसा करती रहनी चाहिए कि अच्छा तुमने आज इतना सा तो किया कल तुम और ज्यादा बेटर करके आओ हो ग कल यदि थोड़ा सा ही किया या नहीं कर पाए तो परसों दिन और ज्यादा मेहनत करने का प्रयास करना यह जो पॉजिटिव रिइंफोर्समेंट साइकल स्टार्ट होनी चाहिए मान लीजिए यह हमने नेगेटिव रिइंफोर्समेंट साइकल देखा कि ऑलरेडी मैं नहीं कर पा रहा हूं स्ट्रगल कर रहा हूं और फिर मैं देखता हूं कि मेरे फ्रेंड्स जो है वोह आगे बढ़ जा रहे हैं तो ऑलरेडी मेरा कॉन्फिडेंस डाउन हो जाएगा ऊपर से टीचर डांट तो बिल्कुल वह नेगेटिव रिइंफोर्समेंट लर्निंग स्टार्ट हो जाएगा और उसके सामने पॉजिटिव देखिए देखिए आज मैं स्ट्रगल कर रहा हूं क्लास में आकर के मुझे जो मल्टीप्लिकेशन टेबल मेमोराइज करने को कहा गया है मैं नहीं कर पाया हूं अभी देखता हूं कि मेरे जो फ्रेंड्स है वे लोग मेमोराइज कर रहे हैं उससे मेरा कॉन्फिडेंस डाउन हो रहा है किंतु मुझे डांटने की वजह टीचर कहते हैं कि ओके ठीक है चलो सभी की मेमोरी सभी का कंसंट्रेट प्रशन सभी का लर्निंग प्रोसेस इक्वल नहीं होता है इस क्लास में कुछ स्टूडेंट्स ने बड़ा मेहनत करके मेमोराइज किया दे आर प्रेज वर्थी उनको प्रेज वर्धी उनको प्रशंसा योग्य है वो स्टूडेंट किंतु जो लोग मेमोराइज नहीं कर पाए हैं दे कैन आल्सो ट्राई हार्डर एंड हार्डर भले ही चाहे आज नहीं किए कल हो जाएगा कल नहीं होगा तो परसों होगा परसों नहीं होगा तो नरसो होगा इवेंचर मेमोराइज और फिर उनको क्या है कि थोड़ा सा प्रेज किया कि चलो तुमने एफर्ट तो किया है मुझे पता है कि तुम्हारा जो लर्निंग प्रोसेस है थोड़ा सा भले ही स्लो हो किंतु तुम एफर्ट तो बढ़िया कर रहे हो ऐसा करके यदि मान लीजिए कि मैं मेमोराइज नहीं कर पाया हूं किंतु मेरे टीचर यदि मेरी इस तरह से प्रशंसा करते हैं मुझे सेल्फ कॉन्फिडेंस दिलवा हैं मुझे भरोसा दिलवा हैं मुझे एक तरह का उत्साह देते हैं इनकरेज करते हैं एंथ म के साथ में मुझे कहते हैं कि आज नहीं तो कल हो ही जाएगा तब मेरे माइंड में एक तरह का पॉजिटिव फीडबैक लूप स्टार्ट होगा यह पॉजिटिव फीडबैक लूप देखिए कि वह मुझे पीछ पीछे में से धक्का लगाएगा वह मुझे ज्यादा इनकरेज करेगा स्टडी करने के लिए यदि आज मैं घर जाता हूं कल मैंने जेनुइनली ज्यादा टाइम नहीं दिया था सही सही में ज्यादा टाइम नहीं दिया था क्योंकि मुझे मल्टीप लिकेशन टेबल मेमोराइज करना अच्छा नहीं लगता है किंतु आज यदि टीचर ने मेरी प्रशंसा की है आज टीचर ने कहा है कि मेरी तुम्हारे पर बहुत सारी आशाएं हैं मेरी आशाओं को भंग मत करना आई हैव ए ग्रेट होप फ्रॉम यू डोंट शटर माय होप्ली कहते हैं तो आज वोह स्टूडेंट शर्मिंदा हो जाएगा वो स्टूडेंट सोचेगा कि अरे मैं पढ़ाई लिखाई नहीं करता हूं या मैं होमवर्क करने में इसको फाकी बाजी करता हूं या तो फिर मैं मेमोराइज नहीं कर पाता हूं इसका मुझे जितना दुख है उससे ज्यादा दुख तो मेरे टीचर को है तो टीचर को मुझे शर्मिंदा नहीं करना टीचर की जो आशाएं मेरे पे है उसको मुझे बिगाड़ने नहीं है टीचर को मुझे खुश रखना है ऐसा करके यह लड़का घर आएगा और ज्यादा मेहनत करके मल्टीप्लिकेशन टेबल मेमोराइज करना शुरू करेगा देखिए मैं इस तरह की कहानी मेरे फैमिली में ही हुई है मेरे एक अंकल थे अ है अभी भी तो वह जब अप टू नाइंथ स्टैंडर्ड अप टू 10थ स्टैंडर्ड उनका परफॉर्मेंस बड़ा ही पुअर था एकेडमिक परफॉर्मेंस किंतु फिर जब 10थ स्टैंडर्ड में आए तभी उनको पता चला कि देखिए अभी यह तो पूरा कैरियर अपना बिल्ड अप करना है यदि आपका कैरियर बिल्ड अप नहीं करेंगे तो आप फैमिली को हेल्प कैसे करेंगे आप लोगों के ऊपर में अपने परिवार के ऊपर में एक बर्डन होकर के रह जाएंगे तो इस तरह से ऐसा कुछ उनको भीतर में इनकरेजमेंट मिला कि ही एक्सेल्ड इन ऑल द एकेडमिक पैरामीटर्स वो 10थ स्टैंडर्ड में इतना मेहनत करके उन्होंने इतने अच्छे मार्क्स लाए और आज फिर उन्होंने बहुत अच्छी कॉलेज में बहुत अच्छे सिलेबस में उनको एडमिशन मिला आज वह पूरे एक ग्लोबल एग्जीक्यूटिव है मने एक बहुत मल्टीनेशनल कंपनी में है अमेरिका में रहते हैं पूरे वर्ल्ड में घूम हैं प्लेन में एवरी वीक एवरी मंथ आधा जगत वह घूम लेते हैं तो देखिए कि उनका जो प्रीवियस एकेडमिक रिकॉर्ड था और बात का एकेडमिक रिकॉर्ड भीतर में से यदि कोई आपको बिठा करके शांतना देता है आपको यदि भरोसे के दो वचन कहता है आपके ऊपर में अपनी आशाएं बांधता है कि देखो भाई तुम अच्छा करोगे तो मुझे भी खुशी होगी तो यह जब प्रेम किसी को मिलता है तो प्रेम के बंधन में हम लोग ज्यादा मेहनत करने की शुरुआत करते हैं दिस इज कॉल्ड पॉजिटिव रिइंफोर्समेंट साइकल पॉजिटिव फीडबैक और पॉजिटिव रिइंफोर्समेंट लर्निंग अभी देखिए कि स्वामी जी का यह जो स्टेटमेंट है कि मैन नेवर प्रोग्रेसेस फ्रॉम एरर टू ट्रुथ बट मैन ऑलवेज प्रोग्रेसेस फ्रॉम लोअर ट्रुथ टू हायर

“...man is not traveling from error to truth, but from truth to truth, from lower to higher truth.” -- Swami Vivekananda

ट्रुथ मनुष्य कभी गलती से सही की ओर यात्रा नहीं करता मनुष्य हमेशा निम्न सत्य से उच्च सत्य की ओर यात्रा करता है यह कितना इंपॉर्टेंट है यदि मैं किसी को कहता हूं तुम गलत हो किंतु एक काम करो तुम यह करो तो तुम सत्य ठीक करना शुरू करोगे तो पहले ही यदि आपने किसी को बोल दिया कि तू तुम जो कर रहे हो वह गलत है इमीडिएट उसके माइंड में एक नेगेटिव फीडबैक आना शुरू होगा उसका माइंड जभी भी वह कार्य करना चाहेगा उस भीतर में से एक इस तरह का रेजिस्टेंस खड़ा करेगा कि वह आदमी उस उसको कर ही नहीं पाएगा किंतु जिस तरह से स्वामी जी का फार्मूला है हम किसी को कहे कि भाई तुम जो कर रहे हो उसमें गलत कुछ भी नहीं है वह तुम्हारा जो ऐतिहासिक बैकग्राउंड है हिस्टोरिकल कॉन्टेक्स्ट है तुम्हारा जो उस कर्मों का प्रवाह है संस्कार का जो बंधन है तुम्हारे ऊपर में उससे तुम यह कार्य कर रहे हो किंतु तुम यू कैन डू बेटर यू कैन डू मच बेटर इफ यू फॉलो दिस मेथोडोलोग्य को करने के लिए तो यहां पर भी देखिए कि स्वामी जी जब यह माय प्लान ऑफ कैंपेन प्रवचन के बारे में जो कह रहे हैं प्रवचन में जो कह रहे हैं उस समय की जो रिफॉर्म सोसाइटीज थी आज की लैंग्वेज के एनजीओ तो एनजीओ या तो फिर यह सोशल एक्टिविस्ट आजकल की लैंग्वेज में इनको हम एक्टिविस्ट भी कहते हैं या तो फिर यह लिबरल एक्टिविस्ट वगैरह वगैरह जो शब्द है आजकल के तो उसी तरह की यह रिफॉर्म सोसाइटीज थी उस समय की और आजकल के एक्टिविस्ट की तरह ही यह रिफॉर्म सोसाइटी का एक बहुत बड़ा कार्य था भारतीय समाज को इंडियन सोसाइटी को दिन जैसे ही दिन हुआ सुबह हुई सुबह से लेकर के रात तक भारतीय समाज को गाली देना समाज की निंदा करना समाज अंधश्रद्धा में डूबा हुआ है समाज में जो कुछ भी हो रहा है वह सब गलत है सब हटा दो यहां से सब कुछ फेंक दो पुरानी प्रथाएं पुराने आचार पुराने विचार पुरानी ट्रेडिशनल चर अपना सनातन हिंदू धर्म सब कुछ खत्म कर दो और यह यूरोपियन थिंकिंग यूरोपियन आइडियो जीी यूरोपियन फिलोसोफी यूरोपियन रिलीजन भारत में लाकर के इनके सर पर बिठा दो तभी भारत का कुछ अच्छा होगा तो यह रिफॉर्म सोसाइटीज या तो आज की लैंग्वेज में एनजीओ या तो एक्टिविस्ट सुबह से लेकर के रात तक अपने भारतवासियों को इंडियंस को जो गाली देते थे क्रिटिसाइज करते थे स्वामी जी कहते हैं कि इन द वे फिर ये अपने जो इंडियन ऑर्थोडॉक्स है उन लोगों के भीतर में यह नेगेटिव रिइंफोर्समेंट स्टार्ट हो गया व अभी ये मेरा एनालिसिस है स्वामी जी का नहीं किंतु मैं कहता हूं स्वामी जी के आइडियाज के अनुसार कि यदि कोई इस तरह से आपको गाली देगा क्रिटिसाइज करेगा तो आपके भीतर में रेजिस्टेंस आएगा ही आएगा तो इस रेजिस्टेंस की वजह से आप देखिए कि भारत में फिर यह जो ऑर्थोडॉक्स लोग हैं उनको जैसे कि एक इंधन मिला उनको एक फ्यूल मिला और वह इसी रिफॉर्म वालों के सामने इतना ही डट करके उनकी निंदा करने लगे परिणाम यह आया स्वामी जी कहते हैं कि भारत में एक इस तरह का लिटरेचर एक इस तरह का एक एटमॉस्फियर खड़ा हुआ जहां प यह लिबरल एक्टिविस्ट या तो रिफॉर्म सोसाइटी दिन रात हमारे ऑर्थोडॉक्स लोगों की निंदा करते हैं और यह जो ऑर्थोडॉक्स लोग हैं वह इस तथाकथित सो कॉल्ड लिबरल्स की निंदा करना शुरू करते हैं पूरा वातावरण बिगड़ गया है यहां का तो स्वामी जी कहते हैं कि देखिए पहले तो यह समझिए कि यह प्रॉब्लम आया कहां से है भारत की इस सोसाइटी में इंडियन सोसाइटी में इंडियन सिविलाइजेशन

भारत के पतन का मूल कारण = बौद्ध धर्म में गिरावट

में तो वह प्रॉब्लम का प्रारंभ हुआ देखिए कि यहां पर किसी एक व्यक्ति या किसी एक धर्म को निंदा करने की बात नहीं है यहां पे इस लेक्चर में स्वामी जी ने बुद्धिज्म के बारे में बोला है कि बुद्धिज्म में डिटेरेड डिग्रेडेशन आया दैट वाज उसकी वजह से भारत में फंडामेंटल कमजोरियां आना शुरू हुई किंतु फिर यदि स्वामी जी के सभी लेक्चर को एज ए होल देखेंगे स्वामी जी का जितना भी यह कंप्लीट वर्क्स है कंप्लीट वर्क्स को एज ए होल देखेंगे तो हमको समझ में आएगा कि स्वामी जी का माइंड है साइक्लिकल थिरी पर कार्य करता है पहले एक वैदिक युग था य वैदिक युग में जो एक ग्रेटनेस थी वह तो हमको सबको पता है हम लोग उसको सत्य युग कहते हैं गोल्डन एज कहते हैं कृत युग कहते हैं इसको किंतु इसी वैदिक युग में डिटेरिंग आया यह बलि प्रथा फिर यह कर्मकांड यह सब इतना लोगों के ऊपर में फिर यह जा नाती प्रथा यह सब इस तरह से क्रिस्टलाइज होने लगा कि समाज इसके भार के नीचे में बिनीत द बर्डन ऑफ ऑल दिस कर्मकांड अपना समाज डूबने लगा तो फिर इस समाज का उद्धार करने के लिए भगवान बुद्ध आए स्वामी जी का एक जो बड़ा पावरफुल शार्प इंसाइट है एनालिसिस है स्वामी जी क्या कहते हैं कि यही ब्राह्मण लोगों ने अपनी तीव्र मेधा शक्ति के माध्यम से तीव्र विद्वत्ता के माध्यम से बुद्धिमत्ता के वजह से उन्होंने माया का पर्दाफाश करके माया के भीतर में माया के परे जो आत्मन है या ब्रह्मण है उसको तो हमने पहचान लिया ब्राह्मण लोगों ने किंतु सम हाउ जैसे हम कल डिस्कस कर रहे थे कि जिस ब्राह्मण ने आत्म तत्व साक्षात्कार किया है या तो फिर जिस ब्राह्मण ने ब्रह्म तत्व साक्षात्कार किया है वह ब्राह्मण सेल्फलेस सेल्फिश कैसे हो सकता है कि ऐसा किस तरह से हो गया कि इस ब्रह्म तत्व आत्म तत्व या तो फिर ईश्वर तत्व को उन्होंने कर्मकांड के भीतर में इस तरह से बांध दिया कि यह जो आम आदमी है उस तक यह ना पहुंच पाया तो इसका रीजन भी कल हमने देखा कि देखिए कि हरि महाराज को हम स्वामी जी ने खुद ने कहा कि ही इज एन आइडियल ब्राह्मण किंतु यही हरि अभी ऐसा कोई हरि महाराज के ऊपर में इस तरह का दोषारोपण नहीं कर सकता नो वन कैन एक्यूज हरि महाराज कि वह छोटे हृदय के हैं दूसरों के प्रति उनके मन में द्वेष है या फिर दूसरों की निंदा करते हैं उनका तो विराट हृदय था किंतु यह जो ब्राह्मण माइंड जो होता है वो बाय डिफॉल्ट बाय इट्स वेरी नेचर इंट्रोवर्ट होता है अंतर्मुखी होता है यदि अंतर्मुखी है बोलकर के ही तो वह ब्राह्मण है बोलकर के ही तो वह घंटों के भर घंटों शास्त्र पाठ वेदा भ्यान कर सकता है अंतर्मुखी है इंट्रोवर्ट है बोलकर के ही आवर्स आफ्टर आवर्स डे आफ्टर डे दिन प्रतिदिन वह एक जगह पर बैठ कर के मेडिटेशन कर सकता है जप ध्यान कर सकता है यह अंतर्मुखी मन जो होता है वह ब्राह्मण की स्पेशलिटी है अभी इसी ब्राह्मण को यदि आप कहा जाए कि इसको आपको हिंदुइज्म को एक मिशनरी रिलीजन में कन्वर्ट कर दीजिए देश विदेश में जाकर के आपने यह जो महत् ब्रह्म तत्व खोज निकाला है उसका प्रचार कीजिए तो ब्राह्मण नहीं कर पाएगा उसका नेचर ही इस तरह का है उसके लिए आपको एक कर्मी चाहिए एक क्षत्रिय चाहिए एक कर्मठ पर्सन एक्सट्रोवर्ट पर्सन चाहिए तो यह एक्सट्रोवर्ट या तो फिर कर्मी या तो क्षत्रिय अपनी ही परंपरा में प्रकट हुए थे भगवान राम भगवान कृष्ण तो भगवान राम और कृष्ण ने इसका फैला वा तो किया ब्रह्म तत्व का किंतु एक समय एक ऐसा आया कि जो जैसे संसार का नियम ही है जन्म मृत्यु जरा व्याधि जिस तरह से एक इंडिविजुअल के साथ में यह होता है कि उसका बर्थ भी होगा ओल्ड एज भी होगा डिसीज भी होगा और डेथ भी होगा तो इसी तरह से एक सिविलाइजेशन के साथ में भी यही होता है व राइज होता है उसका डेवलपमेंट होता है इवेंचर होता है जन्म मृत्यु जरा व्याधि बर्थ डेथ ओल्ड एज एंड डिसीज जिस तरह से इंडिविजुअल के साथ में कार्य करते हैं वैसे ही सिविलाइजेशनल लेवल पर भी कार्य करते हैं तो वह वैदिक एज का वैदिक युग का एक अंत तो आना ही था आया भगवान बुद्ध का राइज हुआ भगवान बुद्ध का हृदय क्षत्रिय थे तो उनका हृदय इतना विशाल था कि घर-घर गांव-गांव शहर शहर जाकर के एक राज्य से दूसरे राज्य जाकर के उन्होंने इस ब्रह्म तत्व का उपदेश दिया या तो फिर कहेंगे कि भगवान बुद्ध का कांसेप्ट बड़ा ही क्लियर था कि यह ब्रह्म तत्व क्या है उसको समझाने की वजह कि ब्रह्म तत्व को किस तरह से प्राप्त किया जाए मोर प्रैक्टिकल ब्राह्मण जो होते हैं थियोरेटिकल होते हैं पूरा ब्रह्म तत्व क्या है माया क्या है जीव जगत ईश्वर क्या है यह पंच महाभूत क्या है पंचकोष क्या है पंचप्राण क्या है पंच ज्ञानेंद्रिय पंच कर्मेंद्रिय 24 तत्व सब कुछ यह पंचकोष वगैरह वगैरह पूरा जगत का वह इंटेलेक्चुअल एनालिसिस करेंगे बिकॉज दे आर मच मोर एकेडमिकली थियोरेटिकली ओरिएंटेड जबकि एक क्षत्रिय होते हैं बड़े प्रैक्टिकल होते हैं कि इस कार्य को करने के लिए मुझे क्या करना होगा इस इस यदि मुझे यह मेरा गोल है तो हाउ टू अचीव दिस गोल तो ये 24 तत्व का आप जीवन भर एनालिसिस करते रहेंगे उससे मुझे क्या फर्क पड़ता है जैसे ठाकुर ने कहा कि आप एक आम के बागान में जाते हैं और फिर यदि आप कित कितने पेड़ है आम के बागान में उस पेड़ की कितनी डालियां है उस डालियों के ऊपर में कितने पत्ते हैं यह गिनते रहेंगे तो आम तोड़ कर के आम खा कर के रुष्ट पुष्ट कब होंगे किंतु यह ब्राह्मण का माइंड है थियोरेटिकल एनालिटिकल कि कितने पेड़ है कितनी डालियां है कितने पत्ते हैं किसका गार्डन है कब इसको लिस्ट पे लिया गया किसका मालिक ही है क्या उसका फ्यूचर है वगैरह वगैरह वगैरह किंतु क्षत्रिय है एकदम प्रैक्टिकल है वो आम जैसे ही वह आम मैंगो गार्डन में जाएगा आम के बागन में जाएगा उसका सबसे पहला टारगेट है आम को तोड़ो और आम को खाओ बाकी सब भूल जाओ यदि आम खाने के समय में जब हम रुष्ट पुष्ट होंगे ऑटोमेटिक मेरा माइंड सुपरकॉन्शियस के साथ में कनेक्ट हो जाएगा और ये सुपरकॉन्शियस में से जो भी नॉलेज आना है वह आना शुरू हो जाएगा वही नॉलेज मुझे चाहिए जो जिसकी मुझे आवश्यकता है झुठ मुठ का दुनिया भर का कचरा इकट्ठा करने से कोई काम नहीं है सो यह जो प्रैक्टिकल क्षत्रिय और यह थियोरेटिकल ब्राह्मण यह विद्वत ब्राह्मण और उदार हृदय क्षत्रिय यह जो था अपना भूतकाल यह भूतकाल में देखिए कि भगवान बुद्ध के आने से एक स्प्लिट खड़ा हुआ पहले तो क्षत्रिय और ब्राह्मण एक ही समाज के एक दूसरे के पूरक थे एक दूसरे के एक तरह से कहेंगे कि कंप्लीमेंट थे दोनों मिलाकर के हार्मोनी हार्मोनी से इस सोसाइटी को चलाते थे किंतु बुद्धिज्म के आने से क्षत्रिय ब्रांच ने एक तरह से ब्राह्मण ब्रांच को साइड पर कर दिया एक क्षत्रिय और ब्राह्मण के बीच में एक डिवीजन खड़ा हुआ यह उदार हृदय क्षत्रिय जो कि प्रैक्टिकली आपको बताते हैं कि आपके जीवन में यदि दुख है तो यह अष्टांग मार्ग को अनुसरण करके दुख का निवारण कीजिए निर्वाण प्राप्त कीजिए सब कुछ आपका ठीक हो जाएगा जबकि यह ब्राह्मण जो ब्रांच थी वह एक इस तरह के कर्मकांड वि विधि विधान और थियोरेटिकल यह सब रिगमरोल में डूब गई कि फिर वह जैसे स्वामी जी कहते हैं ना शंख चक्र गदा पद्म पद्म चक्र शंख गदा ऐसा ही करते रहेंगे दिन भर यह पूरा आपका रिलीजन किचन में चला गया है तो क्यों ऐसा कहते हैं क्योंकि थियोरेटिकल एंटेंगलमेंट में ऐसा डूब गए कि यह विशिष्ट द्वैत है ना कि अद्वैत है ना कि द्वैत है ना कि यह भेद भेद है अचिंत भेद भेद है ना कि ये क्या है इतनी सारी थिरी एक के बाद एक सते रहे यहां पर जन समाज जो है दिन प्रतिदिन गरीबी में बेकारी में एक एक तरह से डूबा जा रहा है उसकी जैसे की कोई फिक्र ही नहीं तो यह जो स्प्लिट कि एक और अपने पास में प्रचंड विद्वत्ता है किंतु इस विद्वत्ता को हम प्रॉपर्ली लोगों के कल्याण तक चैनला इज नहीं कर पाए चैनला इज करने वाले जो प्रैक्टिकल क्षत्रिय लोग थे उन्होंने अपना घर अलग जाकर के बसा लिया कहते हैं कि ब्राह्मणों के साथ में हमारा कोई लेना देना नहीं है स्वामी जी का जो एनालिसिस है

शंकराचार्य का हिंदू धर्म में सुधार = हिंदुओं को आशीर्वाद देकर, उनकी निंदा करके नहीं

स्वामी जी कहते हैं कि दिस स्प्लिट बिटवीन ब्राह्मण एंड क्षत्रियस द स्प्लिट बिटवीन थियोरेटिकल अंडरस्टैंडिंग ऑफ ब्रह्म तत्व एंड प्रैक्टिकल एप्लीकेशन ऑफ इट यह जो स्प्लिट है उसी ने जैसे कि भारत देश को डुबा दिया और जब धीरे-धीरे करके जैसे काल चक्र घूमता है तो काल चक्र के साथ में बुद्धिज्म में भी डिटेरेड आना शुरू हुआ उस समय शंकराचार्य चार्य का उदय हुआ शंकराचार्य का देखिए कि सबसे इंपॉर्टेंट अवदान क्या है सबसे पहले जो हमने वह कांसेप्ट समझा था स्वामी जी कहते हैं कि मैन नेवर ट्रैवेल्स फ्रॉम एरर टू ट्रुथ बट फ्रॉम लोवर टू ट्रुथ टू हायर ट्रुथ तो शंकराचार्य ने आकर के यह जो स्वामी जी के समय में जो भारत की अव दशा थी डिटेरेड डिक्लाइन हो रहा था वही शंकराचार्य के समय में भी था स्वामी जी कहते ते हैं कि आज से हजार गुना डेंजर हजार गुना डिटेन एंड डिग्रेडेशन उस समय था किंतु क्या शंकराचार्य ने भारतीय समाज को गाली दी क्या शंकराचार्य ने ऐसा कहा कि आप लोग झूठ मुट के बुद्धिस्ट क्यों हो गए आप लोगों ने यह ब्राह्मण लोगों को क्यों तेज दिया आप लोगों ने क्यों हमारी थोरेट्स से यह जाती नाती प्रथा में आ जाइए इस तरह से भारतीय समाज की इंडियन सोसाइटी की निंदा या तो फिर क्रिटिसिजम शंकराचार्य ने कभी नहीं किया शंकराचार्य का एगजैक्टली स्वामी जी वाला ही मत था शंकराचार्य हो ना कि रामानुजाचार्य हो जितने भी आचार्य हो आपस में जो थियोरेटिकल एकेडमिक वाद विवाद आर्गुमेंट चाहे जितना भी इनका चलता रहता हो इन सबका एक बेसिक कांसेप्ट बड़ा ही क्लियर था यह लोग कहते हैं कि मनुष्य की जो जर्नी है ह्यूमन सोल द जर्नी ऑफ स्पिरिचुअल जर्नी ऑफ द ह्यूमन सोल इट इज ऑलवेज फ्रॉम डिविटो का हमारा जो मार्ग है वो इवोल्व होता जाता है मनुष्य इवोल्व होता है यानी कि आज मैं जहां पर हूं वहां से मैं ग्रेटर और ग्रेटर होता जाऊंगा आज हमारे सामने एक बंदर है या एक चिड़िया है या एक हाथी है या एक घोड़ा है हम क्या उनको यह कहेंगे कि तुम जो कर रहे हो हाथी बनके गलत कर रहे हो तुमको तो मनुष्य होना है ऐसा हम नहीं कहेंगे हिंदू धर्म कहता है कि देखिए 84000 ना कि 84 कोटि ना इतनी योनि है इतने बर्थ है जो कि आपको लेने पड़ेंगे वन आफ्टर अनदर इन ऑर्डर टू इवोल्व टुवर्ड्स ह्यूमन ये जो मनुष्य जन्म लेना है जदी तो इतने कोटि कोटि जन्मों से आपको गुजरना होगा तो वह तो इवोल्यूशन है आज वह बंदर है ना कि हाथी है ना कि मछली है तो क्या हो गया इतने कोटि जन्मों के बाद में उसको धीरे-धीरे करके मनुष्यवकाशा रख कर के आत्म श्रद्धा पुरुषार्थ से तुम एक के बाद एक स्टेप्स आगे बढ़ते जाओ सो दिस इज द की इंसाइट अबाउट शंकराचार्य इन स्वामी जीस माइंड स्वामी जी कहते हैं कि अनलाइक टुडेज लिबरल्स आजकल के लिबरल या रिफॉर्म सोसाइटी है उनका जो पहला ही कार्य होता है सुबह को चाय पीने के साथ-साथ में ही इंडियंस को गाली देना क्रिटिसाइज करना ऐसा नहीं कर कर के ये जो उस समय के शंकरा आचार्य गण थे शंकराचार्य मधवा चार्य रामानुजाचार्य इन सबके हृदय में मनुष्य के प्रति अनंत प्रेम था इन सबके होठों के ऊपर में भारतीयों के लिए आशीर्वचन के अलावा और कुछ नहीं था इन सबके मन में अपने जीवन का एक ही मकसद था कि हिंदू समाज को किस तरह से उत्थान किया जाए हिंदू समाज को किस तरह से प्रगति की ओर ले लिया जाए तो यह जो पॉजिटिव उनका आईडिया था इसका रिजल्ट अपने समाज पे यह पॉजिटिव फीडबैक के रूप में होना शुरू हुआ अपना हिंदू समाज धीरे-धीरे करके इन आचार्य गण यानी कि यहां पर स्वामी जी सिर्फ शंकराचार्य की बात नहीं करते हैं स्वामी जी यह रामानुजाचार्य मधवा चार्य जितने भी आचार्य हैं सभी के बारे में कहते हैं कहते हैं कि इस आचार्य गणों का हिंदू समाज के पर जो प्रेम था एक तरह का कंपेज था एंपैथी था इसकी वजह से हमारा हिंदू समाज इन आचार्य गणों के कहे अनु अनुसार यह जो डिग्रेडेड फॉर्म ऑफ बुद्धिज्म था उसको छोड़ कर के धीरे-धीरे करके यह हिंदू धर्म के जो सनातन सत्य है ब्रह्म तत्व आत्म तत्व ईश्वर तत्व इसकी ओर धीरे-धीरे करके वापस आना शुरू हुए फिर से योग और वेदांत को अपना फंडामेंटल धर्म के रूप में फंडामेंटल स्पिरिचुअल पाथ के रूप में स्वीकार किया तो यह जो बुद्धिज्म से पूरी प्रजा को हिंदुइज्म की या तो फिर यह सनातन धर्म की ओर लाने की यात्रा है कहीं पर भी आप यह नहीं देखेंगे कि आचार्य गण भारतीय प्रजा को गाली दे रहे हैं आचार्य गण या तो फिर इवन बुद्धिस्ट को गाली दे रहे हैं वाद विवाद करते हैं आर्गुमेंट करते हैं कहते हैं कि हमारी थिरी उनकी थिरी से बेटर है हमारा कांसेप्ट उनके कांसेप्ट से बेटर है आर्गुमेंट करते हैं किंतु उन लोगों का सब कुछ गलत है वे लोग भ्रम में पड़े हुए हैं आपको भ्रमित कर रहे उनको गाली देना उनकी निंदा करना उनको कर्स देना श्राप देना इस तरह से श्राप यह लोग कभी नहीं देते जो कि आजकल के जो लिबरल रिफॉर्म वाले जो है वे लोग दूसरों के साथ में जब भी बात करेंगे व श्राप दे कर के ही बात करेंगे निंदा दे निंदा करके ही बात करेंगे और जैसे ही आपने प्रजा को श्राप देना शुरू किया प्रजा को कर्स करना प्रजा का क्रिटिसिजम करना शुरू किया पीपल विल अप अग अप इन आर्म्स अगेंस्ट यू इंग्लिश में जैसे कहते हैं कि लोग एकदम इकट्ठा होकर के आपका विरोध करना शुरू कर देंगे फिर वे लोग कहेंगे कि अच्छा यह आदमी मुंह से तो हमारे कल्याण की बात करता है किंतु इसके हृदय में हमारे प्रति धिक्कार के अलावा और कुछ नहीं है इन हिज हार्ट ही हेट्स अस तो इमीडीएटली लोग क्या करेंगे कि व जितने भी रिफॉर्मर हैं उनकी अच्छी बातें भी होगी उसको भी स्वीकार नहीं करेंगे क्यों क्योंकि उनको लगता है कि उनके मुंह पे तो अच्छी बातें हैं हृदय में हमारे प्रति धिक्कार के अलावा और कुछ नहीं है तो

उत्तम आचार्य और अधम आचार्य

यह वह जो साइकोलॉजी समझनी है रिफॉर्म साइकोलॉजी साइकोलॉजी ऑफ रिफॉर्म यदि आपको किसी को ठीक करना है किसी को आपको अच्छे रास्ते पर ले जाना है तो आपको उसके प्रति प्रेम चाहिए यह प्रेम यदि नहीं होगा तो आपका किसी का भी कल्याण नहीं कर पाएंगे उत्तम आचार्य अधम आचार्य अधम आचार्य जो होगा एक इस तरह का टीचर कि जो कि क्लासरूम में जाकर के बच्चों को सिखाता तो है किंतु उसके मन में सब समय बच्चों के प्रति एक तरह का क्रोध एक तरह की घृणा एक तरह का ट्रेड दिखने को मिलेगा बात-बात में बच्चों को डांटे बात-बात में बच्चों को मारेगा बात-बात में बच्चों की निंदा करेगा ऐसे टीचर देखे हैं ऐसे बॉस भी हमने देखे हैं वर्क प्लेस में जाइए कहां पे भी जाइए ये जिसके भीतर में इस इतना एक गुस्सा क्रोध या तो फिर रेज जिसको कहते हैं यह भरा हुआ है कि व छोटी-छोटी बातों में वह प्रकट हो जाता है तो ऐसे लोगों के अगेंस्ट में ना अपने माइंड में नेचुरली एक तरह का रेजिस्टेंस खड़ा हो जाएगा हम उसकी बात ही सुनना बंद कर देंगे यदि वो हमारे भले के लिए भी कुछ कहता होगा किंतु साइकोलॉजी एक ऐसी चीज है कि वह उसको सुनेगा ही नहीं जबकि ऐसा कोई टीचर ऐसा कोई बॉस या तो फिर ऐसा कोई सीनियर सुपीरियर जिसके हृदय में हमारे प्रति प्रेम है हमारे प्रति करुणा है हमारे प्रति एक तरह की सहानुभूति है तो यह सहानुभूति के साथ में जब वह हमारे साथ में बात करेगा यह ह्यूमन हार्ट टू हार्ट कांटेक्ट ऐसा है कि इमीडिएट हम उसकी बातों को ग्रहण करेंगे इमीडिएट हम उसकी बातों को फॉलो करना शुरू करेंगे तो यदि आपको समाज में रिफॉर्म लाना है तो समाज के प्रति यदि आपके मन में यह घृणा बैठ गई है समाज के प्रति यह जो एक ट्रेड आपके हृदय में बैठ गई है उस ट्रेड को दूर करना होगा उस घृणा को दूर करना होगा और फिर उनके प्रति आपके हृदय में सहानुभूति प्रकट करनी होगी तभी तो आप लोगों को अपनी बात मनवा पाएंगे यदि मैं किसी के भले के लिए कुछ कहता हूं तो डोंट थिंक के वह मेरी बात इमीडिएट सुन लेगा वो मेरे हृदय में देखेगा यह मनुष्य का स्वभाव है आप खुद देखिए कि आप अपने सीनियर की बात जब सुनते हैं तो आप क्या देखते हैं क्या उसके शब्दों को सुनते हैं कि उसके हृदय को सुनते हैं हमेशा यह देखिए हम लोगों के साथ में भी मां पिता जी की बात हम लोग सुनते हैं क्यों क्योंकि हमको उनके हृदय की जो हमारे प्रति सहानुभूति है वह दिखती है हमारे प्रति सहानुभूति का गान है उसको हम श्रवण कर पाते हैं सुन पाते हैं किंतु ऐसे किसी को देखेंगे जो कि हमको धिक्कार आता है किंतु वो मुंह पे चाहे जितनी भी अच्छी बातें बोले हम उसको सुनेंगे ही नहीं क्यों क्योंकि उसके शब्द से ज्यादा हम उसके हृदय को देखते हैं मैंने खुद के जीवन में इस तरह से दोनों तरह के लोगों का मुझे परिचय मिला है कोई-कोई लोग होते हैं सीनियर होते हैं जिसके साथ में मैं काम करता हूं हर छोटी-छोटी बातों में यह लोग क्रिटिसाइज करेंगे हर छोटी-छोटी बातों में निंदा करेंगे वो प्रोफेस करेंगे कि हां मैं तो तुम्हारा अच्छा चाहता हूं मैं तो इस आश्रम का अच्छा चाहता हूं या तो फिर मैं इस इंस्टिट्यूशन का अच्छा चाहता हूं किंतु आपको एक एक से दो दिन लगेंगे मुश्किल से एट द मोस्ट कि उसके हृदय में क्या है वह समझने के लिए जबकि ऐसा कोई व्यक्ति जो कि भले ही चाहे हमको डांटता भी हो किंतु हमको पता चल जाएगा कि इसके हृदय में हमारे प्रति प्रेम है तो उसकी डांट भी ना हमको डांट नहीं लगेगी यह ठाकुर है स्वामी जी है

कहानी: स्वामी विवेकानंद डांटते भी हैं और स्नेह भी करते हैं

कितना डांटते थे लोगों को स्वामी जी और राजा महाराज की तो कितनी सारी कहानियां है इस तरह की कि एक बार हुआ कि बेलूरमठ में वह घाट बना रहे हैं तो व घाट बनाते बनाते अभी ऐसा हुआ कि उस समय विज्ञानानंद जी महाराज बेलूर मठ में थे तो स्वामी जी ने विज्ञाना स्वामी विवेकानंद ने विज्ञानानंद जी महाराज को कहा कि अच्छा पेशन वो विज्ञान महाराज को पैशन करके बुलाते थे तो अच्छा पेशन एक काम करो तुम मुझे इसका घाट का जो कंस्ट्रक्शन का बजट है मुझे एस्टीमेट दे दो तो विज्ञान महाराज तो उस समय डिस्ट्रिक्ट वो इंजीनियर थे अपने पूर्वा श्रम में साधू होने से पहले तो उन्होंने यह घाट बनाने का एक एस्टीमेट स्वामी विवेकानंद को दे दिया अभी स्वामी जी ने एस्टीमेट देखा कहा अच्छा ठीक है चलो ये एस्टीमेट विद इन अवर मींस अपने पास में जितना फंड है तो उसमें ये हो जाएगा फिर स्वामी जी ने राजा महाराज को बुलाया स्वामी ब्रह्मानंद वो ठाकुर के मानस पुत्र और बेलूरमठ के उस समय के प्रेसिडेंट तो स्वामी जी तो ऑलमोस्ट रिटायर हो गए थे किंतु स्वामी जी का पावर इतना ही था तो स्वामी जी ने राजा महाराज को बुला कर के कहा कि देखो राजा पैशन घाट बना रहा है तुम देखना सब सुपरविजन करना अकाउंटिंग वगैरह मेंटेन करना अभी यहां पे ऐसा हुआ कि स्वामी जी तो फिर हजार कार्य में बिजी रहते हैं यहां पे वह घाट बनने की शुरुआत हुई विज्ञान महाराज बनाते बनाते थोड़े ही दिन में पता चल गया कि स्वामी जी को जो एस्टीमेट दिया है उस से दो-तीन गुना ज्यादा खर्च हो जाएगा तो वह बड़े टेंशन में आ गए राजा महाराज के पास में जाकर के कहा कि देखिए मैंने तो जो एस्टीमेट दिया था उससे तो दो-तीन गुना खर्चा हो होगा ऐसा मुझे लग रहा है तो राजा महाराज ने कहा तुम चुपचाप काम करो स्वामी जी को यदि कोई भी उत्तर देना है तो मैं उत्तर दे दूंगा तुम निश्चिंत रहो तो ठीक है यहां पे विज्ञान महाराज घाट बना रहे हैं राजा महाराज अकाउंट मेंटेन कर रहे हैं अभी कुछ दिनों के बाद में स्वामी जी ने एकाएक राजा महाराज को पूछ लिया कि अच्छा राजा बताओ तो वो जो घाट जो बन रहा है कितना खर्चा हुआ उसमें क्या एस्टीमेट के अनुसार किस तरह से टेली हो रहा है तब राजा महाराज ने स्वामी जी को कहा कि हमने जितना एस्टीमेट किया था उससे दो-तीन गुना हो रहा है किंतु मैं मैनेज कर लूंगा मैंने आपको बताया नहीं आपको टेंशन में नहीं डालना चाहता था मैं मैनेज कर लूंगा किंतु ये तो थे स्वामी विवेकानंद उन्होंने जैसे ही सुना कि एस्टीमेट से इतना ज्यादा खर्चा हुआ है वैसे ही विस्फोट हुआ और और फिर उन्होंने राजा महाराज को जो डांटना शुरू किया है जो डांटना शुरू किया है बाप रे कच्चा पच्चा आदमी जदी होगा तो उसका हार्ट फेल हो जाएगा इतनी भयानक डांट उन्होंने राजा महाराज को लगा दी यहां पे वो विज्ञान महाराज चुपचाप देख रहे हैं सुन रहे हैं वो बोल रहे हैं स्मृति कथा में वो कह रहे हैं देखिए गलती मेरी थी किंतु डांट पड़ रही है राजा महाराज को और राजा महाराज चुपचाप सब सुन रहे हैं कोई कोई उसमें विरोध नहीं कर रहा है कोई प्रतिवाद नहीं कर रहे कुछ नहीं और जैसे स्वामी जी की डांट बंद हुई अब राजा महाराज अपने कमरे में गए कमरे का दरवाजा बंद करके अपने बिस्तर में लेट करके रोने लगे कि देखिए कि उन्होंने तो जीवन सब कुछ ठाकुर के चरणों में अर्पित कर दिया स्वामी जी के प्रति इतना उनका श्रद्धा है व स्वामी जी ने खुद ने कहा है कि मेरे प्रति यदि किसकी सबसे ज्यादा निष्ठा होगी तो वो राजा की है तो यही राजा महाराज को स्वामी जी इतना बुरी हद से डांट कैसे वो म सहन हो पाएगा राजा महाराज तो वैसे ही तो वह कोमल हृदय के थे तो बिस्तर में लेटे लेटे रो रहे हैं रो रहे हैं यहां पर स्वामी जी को एकाएक अकल आई कि अरे मैंने यह क्या कर दिया तो इमीडिएट उन्होंने विज्ञान महाराज को कहा जाओ जाओ देखो राजा क्या कर रहा है तो फिर विज्ञान महाराज दौड़ते दौड़ते गए राजा महाराज का कमरा बंद है कमरा खटखटाया कोई उत्तर नहीं आ रहा है भीतर में से तो विज्ञान महाराज ने आकर के स्वामी जी को कहा कि राजा महाराज तो अपने कमरे में है कमरा खोल नहीं रहे है दरवाजा बंद है तो फिर स्वामी जी खुद गए दौड़ कर के दरवाजा खटखटाया राजा बाहर आओ बाहर आओ तो फिर राजा महाराज ने आंखों के आंसू पोछे कमरे का दरवाजा खोला और जैसे ही दरवाजा खोला स्वामी जी राजा महाराज को आलिंगन करके इतना जोरों से रोना शुरू कर दिया कि भाई तुम तो ठाकुर के मानस पुत्र स्वयं हो गुरु महाराज तुमको इतना प्रेम करते थे तुम्हारी आध्यात्मिक उन्नति तुम्हारी आध्यात्मिक सिद्धियों के सामने मैं फीका पड़ जाता हूं और मैंने ना कि तुमको इतना बुरी तरह से डांटा प्लीज मुझे क्षमा कर दो मेरा स्वास्थ्य ठीक नहीं है मैं बड़ा ही इंपेशेंट हो रहा हूं मुझे ऐसा लग रहा है कि मेरा मृत्यु समय नजदीक आ रहा है और मैं देख कर के जाना चाहता हूं कि गुरु महाराज का कार्य मैंने एक प्रगति के पंथ पर लाकर खड़ा किया है और इसके लिए मैं इंपेशेंट होकर के तुमको डांट रहा था प्लीज मुझे क्षमा कर दो और ऐसा बोलकर के स्वामी जी इतना रो रहे हैं इतना रो रहे हैं और राजा महाराज अपनी रुलाई भूल गए और स्वामी जी को शांत करने में लग गए तो देखिए कि ये मठ के

कहानी: स्वामी विवेकानंद माँ सारदा से बुखार होने का आशीर्वाद मांगते है

जितने भी गुरु गुरु भाई थे जितने भी साधु सन्यासी थे पता था कि यह स्वामी जी यदि डांट तो समझ लेना कि उनके हृदय में हमारे प्रति कितना प्रेम है यह जो एक वो जो सुंदर कहानी है कि दुर्गा पूजा बेलूरमठ में हो रही है मां शारदा देवी आई है बेलूर मठ में और स्वामी जी ने जाकर के मां को प्रणाम करके कहा मां मुझे आशीर्वाद दीजिए कि मुझे बुखार हो जाए तो मां तो बड़ी टेंशन में आ गई कि नर क्या मांग रहा है वो पूछती है बेटा तुम ऐसा आशीर्वाद क्यों मांग रहे हो तो स्वामी जी ने कहा कि देखिए ये बच्चे तो बेचारे कितने दिनों से प्राण पण मेहनत कर रहे हैं दुर्गा पूजा सक्सेस होने के लिए किंतु मेरा नेचर अभी आजकल ऐसा हो गया है कि थोड़ा सा भी मुझे कोई त्रुटि या कमी दिखती है तो मैं एकदम गाली देना शुरू कर देता हूं एकदम डांटना शुरू कर देता हूं हो सकता है कि उनको दो-तीन झपट में मार दूं मारामारी भी कर दूं पिटाई भी कर दूं कोई ठीक नहीं है और यह तो स्वामी जी तो पहलवान थे तो अभी वो पिटाई करेंगे तो क्या होगा वह समझ लीजिए तो स्वामी जी कहते हैं कि मुझे बुखार दे दीजिए मैं बुखार लेकर के पड़ा रहूंगा जब यह उत्सव दुर्गा पूजा स हो जाएगी फिर से मैं खड़ा रहूंगा जिससे कि मैं अपने गुरु भाई या तो फिर यह मठ के जो यंग साधु सन्यासी है उसके ऊपर में अत्याचार ना बरसाओ तो अभी मां ने क्या कहा तो वह तो पता नहीं किंतु स्वामी जी को सही सही बुखार आ गया किंतु जैसे ही दुर्गा पूजा समाप्त हुई मां शारदा देवी फिर से स्वामी जी के पास में गई कहा कि नरेंद दुर्गा पूजा तो हो गई है समाप्त तुम खड़े हो जाओ अभी तो साथ-साथ में ही यह बात मां स्वयं कह रही है मां कहती है कि जैसा ही मैंने उसको ऐसा कहा नरेंद ने बुखार को फेंक कर के बिल फिर से खड़ा हो गया तो देखिए कि आपके हृदय में जद सामने वाले के प्रति सहानुभूति है प्रेम है तो आप उनको डांट भी आप उनकी निंदा भी करेंगे पिटाई भी कर देंगे गाली भी देंगे तो सामने वाला आपकी बातों को सुनेगा क्योंकि आपके हृदय में उसके प्रति प्रेम है किंतु आपके हृदय में उसके प्रति घृणा है ईर्षा है द्वेश है क्रोध है ट्रेड है तो उसके भले के लिए भी यदि आप कुछ भी ंगे ना वह सामने वाला सुनने वाला नहीं है दिस इज अ कॉमन साइकोलॉजी और इसीलिए यहां पर स्वामी जी कहते हैं कि

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देखिए भगवान बुद्ध के हृदय में पूरे मानव समाज के प्रति करुणा थी बोलकर के वैदिक संस्कृति की अवनति के समय जो भारतीय समाज की अवस्था थी भगवान बुद्ध उनको एक बिल्कुल नए पथ के ऊपर में लाने को समर्थ हुए या तो फिर हम इस तरह से कहेंगे कि भगवान बुद्ध ने उनको वैदिक धर्म का ही स सही हार्ट क्या है आत्म तत्व वह बताया कहा कि कर्मकांड को छोड़ो ज्ञान कांड की ओर आगे बढ़ो वैदिक धर्म का ही रियल हार्ट क्या है वह समझाया बाद बाद में बुद्ध के जो फॉलोवर है उन्होंने बुद्ध के नाम का बेनिफिट उठा कर के उनको भ्रमित करके दूसरे धर्म में ले गए तो जिस किंतु यह कैसे पॉसिबल हुआ कि पूरी भारतीय जनता को भ्रमित करके दूसरे रास्ते पर ले जाना उसके पीछे का जो फंडामेंटल रीजन था भगवान बुद्ध की करुणा और प्रेम और यही करुणा और प्रेम 1000 2000 साल के बाद में वही आचार्य गणों के हृदय में प्रकट हुई यही आचार्य गण फिर से भारतीय समाज की स्तुति करके निंदा नहीं करके भारतीय समाज की ओर प्रेम और करुणा रख कर के बुद्धिज्म से फिर से उनको सनातन धर्म की ओर लाने में सक्षम हुए किंतु यहां

शंकराचार्य ब्राह्मण की मेधा शक्ति और बुद्ध के उदार हृदय को एक साथ नहीं जोड़ सके

पर एक बात समझनी है स्वामी जी कहते हैं कि यह जो ब्राह्मण और क्षत्रिय प्रैक्टिकल एप्लीकेशन ऑफ वेदांता एंड थियोरेटिकल माया जाल इन दोनों में जो स्प्लिट हो गया था वह स्प्लिट उस समय भी बनी रही यह शंकराचार्य के समय में शंकराचार्य खुद इतने ज्यादा कॉम्प्लिकेटेड इंटेलेक्चुअल एकेडमिक थे कि वह एक जो दोनों को इकट्ठा करना है कि भगवान बुद्ध का हृदय और यह जो ब्राह्मण लोगों की तीव्र मेधा शक्ति इन दोनों को इकट्ठा नहीं कर पाए रामानुजाचार्य ने किया है वैसे रामानुजाचार्य को जब भी उनने उनके गुरु ने मंत्र दिया कहा कि यह मंत्र किसी को देना मत यह मंत्र तुमको सिद्ध करेगा दूसरों को बता दोगे तो तुम सिद्ध नहीं होगे दूसरे हो जाएंगे सिद्ध किंतु तुम नहीं हो गए तो रामानुजाचार्य ने सर्वप्रथम कार्य किया सबको बुला कर के सबके भीतर में मंत्र बांटना शुरू कर दिया अपना जो भी हो लोगों का कल्याण हो किंतु तो यह समन्वय हालांकि रामानुजाचार्य ने किया था किंतु फिर भी उनके भीतर में जो तीव्र मेधा शक्ति होनी चाहिए थी जो शंकराचार्य की थी वो शायद रामानुजा आचार्य की नहीं थी इसीलिए स्वामी जी कहते हैं कि स्प्लिट अभी भी बना हुआ है वैदिक युग में भगवान बुद्ध के आने के समय यह जो दोनों अलग हो गए शंकराचार्य दोनों को इकट्ठा नहीं कर पाए हैं यह इकट्ठा करने का कार्य ब्राह्मण की तीव्र मेधा शक्ति और क्षत्रिय का विराट विशाल हृदय इन दोनों को कंबाइन करने का कार्य अभी भी बचा है और वह कार्य करने वाले हैं भविष्य में श्री राम कृष्ण तो यह स्वामी जी का पूरा एनालिसिस है अपने हिंदू धर्म का शंकराचार्य के बारे में क्या कहते हैं दो चीज कहते हैं फंडामेंटली कि सबसे पहले तो शंकराचार्य जो रिफॉर्म लाना चाहे हैं वह अपने हृदय में प्रेम और अपने होठों प आशीर्वाद देकर के वह रिफॉर्म लाए हैं बोलकर के हिंदू समाज ने उनकी बात सुनी यह एक पॉइंट है दूसरा कि जो स्प्लिट थी ब्राह्मण और क्षत्रीय थिरी और प्रैक्टिस वो स्प्लिट अभी भी बरकरार है और वो जो स्प्लिट है वो कंबाइन करने का कार्य भविष्य में श्री राम कृष्ण करने वाले हैं तो यह हो गया शंकराचार्य के पॉइंट का एक सारांश इसको अभी जब नेक्स्ट क्लास होगा इसको हम लाइन बाय लाइन पढ़ेंगे और थोड़ा डिटेल में डिस्कशन करेंगे आज यही तक ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु

प्रश्न: अपने कार्यस्थलों पर लोगो सहानुभूति पूर्वक कैसे व्यवहार करे? वहा तो जो लोग ठीक से कार्य न करे उनको डांटना भी पड़ेगा।

देखिए टीचर को यदि हम चार कैटेगरी में बांटे टू सराइज अगेन एक है कि उसका हार्ट में लव है और मुंह पर भी बड़ी अच्छी बातें करता है वह कैटेगरी वन हो गया दूसरा है कि हृदय में उसके सबके प्रति घृणा है ट्रेड है और बातें भी ऐसी ही करता है वो तो दूसरी कैटेगरी हो गई तीसरा जैसे आपने कहा कि हृदय में तो घृणा है किंतु मुंह पर अच्छी बातें करना प्रयास करता है किंतु वो ज्यादा सक्सेसफुल नहीं होगा क्योंकि ह्यूमन नेचर वो हार्ट देख लेगा वी ऑलवेज लुक एट हार्ट वो सभी के साथ में है किसी का यह स्पेशलिटी नहीं है छोटा बच्चा भी होगा अरे कुत्ता भी होगा कुत्ते को आप थोड़ा सा प्रेम करेंगे कुत्ता वो फट करके आपको रेस्पों करेगा बिकॉज ही सीज द लव और चौथा है जैसे स्वामी जी का हृदय में अनंत प्रेम है किंतु लोगों को डिसिप्लिन करना है तो मार भी देंगे को फर्क नहीं पड़ेगा हमको प्रेम दिखता है अभी चार कैटेगरी में यदि हम टीचर को बांटे देखिए कि स्वामी जी ने कहा है कि रिफॉर्मेशन इज मोर सब्जेक्टिव ऑब्जेक्टिव वो जो ग्रेट स्टेटमेंट स्वामी जी का वह था कि इससे पहले जो हमने पढ़ा था वो कौन सा था यदि मेरे पास में यहां पे है कि इट्स मोर सब्जेक्टिव देन ऑब्जेक्टिव य हा यस वर्क अगेंस्ट इविल इज मोर सब्जेक्टिव देन ऑब्जेक्टिव यह जो स्वामी जी ने कहा कि जितना भी रिफॉर्मेशन हम कर रहे हैं वो एक्चुअली वी हैव टू रिफॉर्म अवर सेल्फ समाज को आप क्या सुधार समाज है वो जैसे 50 पर इविल 50 पर गुड यदि यह समझ में आ जाए तो मैं यह जो भीतर में से जनून होता है कि इसका कुछ नहीं होने वाला है या एकदम मैं यह हो जाता हूं मेरा खुद का जो रांची का अनुभव था मैं बहुत फ्रस्ट्रेट हो गया था एक समय में मुझे लगता था कि मेरा जो मेरी जो इच्छा है उसके अनुसार मैं कर ही नहीं पा रहा हूं बात बाद में मुझे यह सब समझ में आया कि देखिए कि समाज का नेचर है जो है 50 पर स्टूडेंट है आपके वह प्रोग्रेस करेंगे 50 पर नहीं करेंगे आप अच्छे टीचर हो कुछ भी हो यू कैन नॉट चेंज द फंडामेंटल रूल ऑफ द गेम देन बाय टीचिंग यू इंप्रूव योरसेल्फ यदि टीचर यह समझ ले कि मैं जो बच्चों को पढ़ाता हूं एक्चुअली में अपने को पढ़ा रहा हूं अपने को मैं सिखा रहा हूं न वो टीचर सही में ग्रेट हो जाएगा वो जो मनसुख मास्टर की कहानी जैसे हमने देखी थी मोरारी बापू ने कही थी कि वो डाकोर के बगल में रहते हैं रणछोड़ राई का मंदिर है कितने डिवोटा आते हैं किंतु मनसुख मास्टर अपनी बीवी को कह देते हैं कि किसी को भिक्षा नहीं देनी अभी बीवी बड़ी उसकी भक्ति मती है तो अभी एक दिन साधु लोग आए तो मनसुख मास्टर नहीं थे तो बीवी ने भिक्षा दे दी तो अभी वे लोग भिक्षा लेकर के साधु लोग जा रहे हैं खुशी-खुशी सामने से देखा मनसुख मास्टर आ रहे हैं अभी उन्होंने देख लिया कि बीवी ने भिक्षा दी है तो अभी वह क्रोध करने ही वाले थे एक साधु समझ गया कि माजरा क्या है बोला कि उसने सोचा कि हमारी वजह से इतनी भक्तिमला को डांट पड़ेगी तो उन्होंने जाते-जाते मंसू मास्टर को स्पर्श कर दिया और जैसे ही स्पर्श किया वो भीतर में था ही ऑलरेडी ऐसा नहीं कि नहीं था स्पर्श करने से कुछ नहीं आता स्पर्श एक ट्रिगर फैक्टर हो सकता है जो कि भीतर का जो सत्व है उसको जैसे कि जागृत कर देता है तो वह सत्व जो जागृत हुआ आखिर में वह कितने मने एक बड़े संत के रूप में वह यह हो गए सो ट वी हैव टू अंडरस्टैंड दिस इज एन इंटरनल जर्नी सिखाता हूं बच्चे को सीख रहा हूं मैं खुद देखिए यह लव जो है या एंपैथी या

प्रश्न: आज हम देख रहे हैं कि बाहरी दुनिया कितनी क्रूर है। अगर हम नरम बने रहेंगे, तो दुनिया हमें खा जाएगी। तो इस दुनिया में जीवित रहते हुए अपनी प्रेम शक्ति को कैसे बढ़ाया जाए?

सिंपैथी है दिस इज नॉट परफॉर्मेटिव इस अर्थ में कि मुझे दिखाना नहीं है मुझे फील करना है अभी जैसे वो हमने उस कंट्रोवर्सी को देखा था एक बड़े सीनियर व्यक्ति ने ऐसा कहा कि मां ने श्राप दिया यह घटना में सत्य मानता ही नहीं हूं जो समाधि जिसको प्राप्त हुई श्राप कैसे दे सकता है जबकि मेरी दृष्टि से मां अवतार है उसकी सबसे बड़ा प्रूफ ही है कि मां ने श्राप दिया अदर वाइज इफ शी इज सो परफेक्ट कि मैं तो उस आइडियल को कभी पहुंच ही नहीं पाऊंगा मैं खुद अपने जीवन में ऑब्जर्व कर रहा हू आई एम सो इंपरफेक्ट नाउ इफ मदर इज आल्सो 1 पर इंपरफेक्शन इज देयर देन आई कैन एटलीस्ट एस्पायर कि आई कैन बी समवन लाइक हर सो दिस इंपरफेक्शन इज देयर इन अवर लाइफ स्वामी जी मार देते थे डांटते थे मां श्राप देते ती थी ठाकुर हृदय की पिटाई कर देते थे दिस आर द एग्जांपल्स कि इवन इफ यू रीच द पिनेकल ऑफ स्पिरिचुअल हिमालयाज स्पिरिचुअल एवरेस्ट यू आर नेवर गोइंग टू बी परफॉर्मेटिव परफेक्ट इस अर्थ में कि आपका बिहेवियर कभी परफेक्ट नहीं होने वाला है बट योर हार्ट कैन बी परफेक्ट सो परफेक्ट हार्ट एंड परफेक्ट परफॉर्मेंस आर टू डिफरेंट थिंग्स वी कैन नेवर वी शुड नेवर जो परफेक्ट परफॉर्मेंस करता है ना या तो वो फेक है हाइपोक्राइट है उसका हृदय में कुछ है मुंह पर कुछ बोलता है या तो फिर वो ईश्वर है बोथ द थिंग्स वी डू नॉट वांट टू डू मैं ईश्वर बनने नहीं वाला हूं और मुझे फेक पर्सन बनना नहीं है हाइपोक्राइट बनना नहीं है मेरे लिए आइडियल है कि मैं हार्ट को परफेक्ट करूं डज नॉट मैटर कि मेरा परफॉर्मेंस क्या है मेरा एक्सटर्नल बिहेवियर क्या है इट विल टेक केयर ऑफ इट सेल्फ डांटना है डांट दीजिए स्वामी जी डांटने में कम नहीं थे किसी को भी डांटते थे जोर ठाकुर खुद स्वामी जी को डांट देते थे तो ये जो डांटना है डिसिप्लिन करना है वो गलत कुछ नहीं है आपकी जो इन द परफॉर्मेंस ऑफ योर ड्यूटी जो आता है यदि आप नहीं डांट देन यू आर नॉट सिंसियर टू योर ड्यूटी जो आपके अपने जो कार्य है उसको आपने न्याय नहीं दिया है आपका जो धर्म है मैनेजर का उसको आप न्याय नहीं दिए हैं तो वो डांटना है डांट दीजिए बट हैव ए पैरेलल जर्नी ऑफ परफेक्टिंग योर हार्ट कि बीच-बीच में ठाकुर जैसे कहते हैं वने मने कोण है वन में जा इन अ फॉरेस्ट रिट्रीट इन अ कॉर्नर ऑफ अवर होम और इन द कॉर्नर ऑफ अवर माइंड बैठ कर के मुझे इंट्रोस्पेक्ट करना है माइंड को प्यूरिफाई करना है एक बात याद रखनी है कि मैंने उसको डांटा तो मैंने डांटा इसलिए क्योंकि वह उसका ड्यूटी ठीक नहीं कर रहा था नहीं कि उसके प्रति व्यक्तिगत कोई मेरा द्वेष है ये आजकल चलता है ना मैं इस तरह की ऊंची जाति का हूं वह नीची जाति का है तो फिर मैं उसके प्रति पहले से ही प्रेजुड होकर रहूंगा ये प्रेजुड अपने में ना घुस जाए उसके प्रति क्योंकि वह उसका काले काला है जैसे अमेरिका में यह रेसिजम है या तो फिर यह रिलीजियस एंटागनिस्ट म है मेरा धर्म अलग है उसका धर्म अलग है इसके लिए मैं उसको धिक्कार आता हूं मेरी जाति अलग है उसकी जाति अलग है बोलकर के मैं इसको धिक्कार आता हूं मैं अपर क्लास हूं वो लोअर कास्ट है इसके लिए मैं धिक्कार आता हूं उसको वो प्रेजुड नहीं आ जाए अपने ऊपर में दैट इंट्रोस्पेक्शन दैट वी शुड डू मने वने और कोण है एवरी वंस इन ए वाइल रिट्रीट में जाकर के इतना अपने हृदय को टिक कर लेना है डांटते हैं वो गलत नहीं है किंतु डांटना इट शुड बी आउट ऑफ द परफॉर्मेंस ऑफ ड्यूटी रदर देन टुवर्ड्स एनी पर्सनल प्रेजुड यहां पे क्या है ना इजी आंसर नहीं है एवरी आंसर इज अ लॉन्ग टर्म [हंसी] आंसर ये देखिए जो साप का एग्जांपल दिया ना तो देखिए अ ये स्वामी जी के साथ में कंट्रास्ट कैसे होता है ठाकुर ने कहा सांप को कि आत्मा रक्षा के लिए तुम दसे गए नहीं किंतु फोस तो करना है माने किंतु यहां पर देखिए स्वामी जी जैसे राजा महाराज को इस तरह से डांटते हैं कि वो ठाकुर का उपदेश जैसे और क्योंकि बाद में ही ठाकुर कहते हैं कि साधु को किंतु यह भी नहीं करना है वेरी क्लियर कि साधु को फोस भी नहीं करनी है ऑन द अदर हैंड स्वामी जी का जिस तरह से बिहेवियर था इतना डांटते थे इतना नाराज हो जाते थे सम टाइम्स वी फील कि किसा ये पैराडॉक्स है राइट अब थरी थिरी लगा कर के आप इसको रिसल कर सकते हैं बट पैराडॉक्स इज देर वो मारवाड़ी का खाना लेकर आए थे तो

प्रश्न: स्वामीजी कितने अद्वितीय और महान हैं!

इसको मत खिलाओ किंतु नरेंद्र के भीतर में ज्ञाना अग्नि है सब हजम हो जाएगा किंतु सामने देखिए मां का भी माने जद बच्चों को कहते हैं कि दो से ज्यादा रोटी नहीं खिलानी है तो मां उनको डांट देती है कि मेरे बच्चों की चिंता मैं करूंगी य साधु लोगों को दोनों और से रक्षा है यहां पर स्वामी जी का एग्जांपल है यहां पर मां रक्षा करने वाली है वो जो ठाकुर ने कहा ना कि ये ऐसी औरत को जिसका चरित्र अच्छा नहीं मेरे पास खाना लेकर क्यों बेजती हो तो मां ने कहा कि मां बोले ऐसे दंड लेमी किंतु थकते पबोना मां बोल कर के आके जो भी कोई भी मांगेगा मैं फिर रह नहीं पाऊंगी तो ठाकुर ने मां को सुधारने का प्रयास तो किया किंतु मां के मातृत्व के सामने हार मान ली गंभीरानंद जी स्वयं यह बात लिखते हैं कि ठाकुर ने मां के मातृत्व के सामने हार मान ली देखिए इन लोगों का इंपरफेक्शन देख कर के हमको भरोसा मिलता है यह लोग 100% परफेक्ट होते तो हमारी नजरों से हमारी कहां पर ऊपर होंगे वी कैन नेवर एस्पायर टू बी लाइक देम इंपरफेक्ट है तो बोल के अरे ठाकुर का भी ऐसा होता है तो फिर हम किस खेत की मूली है कोई भी ग्रेट इंस्टिट्यूशन होता है ना

प्रश्न: उत्तम आचार्य का प्रेम सचमुच विद्यार्थियों के जीवन को बदल सकता है!

उसके पीछे में लव होता है यदि लव नहीं होगा ना इवन देयर इज अ ओनर अमंग थीव्स आल्सो चोर लोग जो होते हैं उनके भीतर भीतर में कोड ऑफ कंडक्ट होता है कि भाई तुमको हमारे आपस में चीटिंग चोरी नहीं करनी है एक चोर दूसरे चोर से चोरी नहीं करेगा वो आप दूसरे लोगों से जितना चोरी करो एक चोर दूसरे चोर से चोरी नहीं करेगा मीन देयर इज अ कोड ऑफ कंडक्ट ममंग इवन अमंग थीव्स सो वो एक क्या है कि देर इज अ बंड ऑफ लव जदी होगा तो इंस्टिट्यूशन बनेगा अदर वाइज नो इंस्टिट्यूशन आज फैमिली है फैमिली हैप्पी फैमिली भी देखे हैं अनहैप्पी फैमिली भी देखे हैं व्हाट इज द डिफरेंस बिटवीन देम कि बंड ऑफ लव है यदि प्रेम है तो उस घर के बच्चों के भीतर में हमको वह दिखेगा ये शेरलॉक होम्स की एक कहानी है शेरलॉक हो उसको बताया गया कि हमको ना एक पर्सन के ऊपर में डाउट है कि जो कि वह मर्डर करता है किंतु हम हमारे पास में कोई प्रूफ नहीं है तो हम इसके लिए ना अभी हम इसके ऊपर में हम डाउट नहीं कर रहे हम दूसरी डायरेक्शन में जा रहे हैं तो शेरलॉक होम्स को लगा कि पहले तो आप यह बताइए कि इनिशियल डाउट कैसे आया इस व्यक्ति के ऊपर में तो जो डिटेक्टिव था वो मर्डर केस इन्वेस्टिगेट कर रहा था वो बोला कि यह यह सब स सरकमस्टेंसस थे किंतु आखिर में एविडेंस नहीं मिला तो हमने उसको छोड़ के अभी दूसरे के प्रति हमारा डाउट है तो शेरलॉक होम्स ने सोचा कि उसका इनिशियल इनसाइट तो था कुछ तो वह जाकर के उस व्यक्ति के घर में गया अभी उस व्यक्ति को जिसके ऊपर इनिशियल डाउट था उसके साथ में शेरलॉक होम्स बात करता है वह व्यक्ति इतना सुंदर रूप से बात करता है कि इवन शेरलॉक होम्स खुश हो जाता है कि नहीं नहीं यह तो मर्डर हो ही नहीं सकता बोलक के वह घर के बाहर आता है देखता है इस व्यक्ति का लड़का छोटा लड़का एक चिड़िया को मार रहा है फिर उसने उस बच्चे के पीछे इन्वेस्टिगेशन करना शुरू किया अभी बच्चा तो म मडरर नहीं है मुश्किल से पाछ साल का होगा किंतु देखा यह बच्चा है ना एनिमल्स को पकड़ करके टॉर्चर करता है उसका मर्डर करता है इमीडिएट शेरलॉक होम वापस आया वह देखा कि यदि बच्चा ऐसा करता है तो उसका पिता क्या करता होगा समझ लीजिए तो जिसके ऊपर कोई डाउट नहीं था वह घर में वापस आया और फिर से अभी ये तो शेरलॉक होम्स है उसने वोह सब क्लू खोज निकाले और उसको मर्डर के रूप में प्रूव कर दिया बट व्हाट वास द क्लू कि लड़का जो है ही टॉर्चर्स एनिमल्स दैट मींस कि उसके फादर में कुछ ना कुछ सो दिस इ यह जो घर हैप्पी होता है यू कैन सी ट वहां पर लव है और अनहैप्पी है यू कैन सी कि झगड़ा कंका क्लेश है