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Swami Vivekananda's Teachings ·

Swami Vivekananda Hindi 30 May 2023

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स्वामी विवेकानंद टीचिंग स्क्रीनशॉट कर रहा हूं यस अभी स्वामी आइडिया ऑफ फ्रीडम बट दिस ह्यूमन बॉडी इस डी बेस्ट और डी ह्यूमन मन तू डी आत्मन स्टेट ही कैन टेक एन बॉडी मेकिंग आईटी तू शूट हिमसेल्फ हज अबाउट डॉ डेट मिंस मां विराट तू पार्ट्स ऑफ अवर बीइंग देवर आर तू पार्ट्स ऑफ अवर लाइफ एक तो है मेरा शरीर और एक है आत्मन अभी मैं ये भी का सकता हूं जो की हम लोग ज्यादातर लोग हम यदि हम मैच यदि ये भी कहता भी हूं की हां मैं आत्मा हूं किंतु वह आत्ममन रूपी रिलाइजेशन तो मुझे हुआ नहीं है आत्मन कैसा है तो जिसका कोई अंत नहीं है जिसका कोई आदि नहीं है जिसको कोई सुधा नहीं है जिसको तृष्णा नहीं है जिसको रोग शोक विकार नहीं है कम क्रोध मैड लाभ मो रूपी ये जो शाद रिपु है वो आत्ममन में नहीं है इस धारा का एक आत्मन है जो की हमारे ही भीतर में है जो की हमारा ही असली स्वरूप है हमारा ही रियल नेचर है किंतु जब हम कहते हैं की मैं मैं यह हूं या मैं वो हूं मैं सन्यासी हूं मैं रामकृष्ण मिशन में राहत हूं तो मैं कोई तापमान को रेफर नहीं करता किंतु मुझे थियोरेटिकल पता है की हां आत्मन के पास में क्या है आत्मन क्या क्या गन है किंतु वह जो गन है उसमें से मुझे फूल तो कुछ पता नहीं है मेरा तो यह छोटा सा बॉडी है कहां वो आत्म पूरा विश्व व्यापी पूरे विश्व ब्रह्मांड में फैला हुआ या तो फिर यह का सकते हैं की समय और स्पेस टाइम और स्पेस ये जो विश्व ब्रह्मांड है और ये कल की जो गति है ये दोनों से भी पैर वो आत्मन है तो मुझे तो ऐसा कुछ फूल नहीं होता है मुझे तो यह फिल्म होता है की हां ये एक छोटा सा एक ऑफिस है उसमें एक पूरे विश्व ब्रह्मांड में एक छोटा सा प्लेनेट अर्थ है उसके ऊपर में एक छोटी सी एक आ जगह है जिसका नाम है रामकृष्ण आश्रम उसमें एक छोटी सी ऑफिशल ऑफिस है और उसमें एक छोटा सा दे है जिसको की मैं मैं करके पुकारता हूं और इस डे को जन्म मृत्यु जरा व्याधि रूपी ये जो संसार चक्र जो है उसका तो यह उसका तो शिकार बना ही हुआ है तो फिर मैं ये कैसे का डन की मैं आत्मा हूं किंतु भले ही चाहे में ये एन फूल कर पाऊं किंतु एटलिस्ट हमको यह बात ख्याल में रखती है की उपनिषद में या तो हमारे जो पूर्वज है ये ऋषि मनी थे या तो फिर एक के बाद एक अवतार आते गए उन सब ने हमको कहा है की यदि भी भले ही चाहे आगे ऑफ टुडे अभी जो मुझे ये जो कुछ भी महसूस हो रहा हो जो मैं अपने को मां रहा हूं की मैं क्या हूं और मैं क्या फूल कर सकता हूं वो अपनी जगह पे है और दूसरी चीज है की इसके भीतर में आगमन है यह हमको जान के रखना है भले ही चाहे हम इसको फूल एन कर पे भले ही चाहे हम इसको जो है की उसका अनुभव ना कर पे किंतु मैं आत्मा हूं यह बात यदि हम जान के रखेंगे तब क्या होता है जब सबसे बड़ी क्राइसिस आई है सबसे बड़ा वह जो हमारे जीवन में वह जो समस्याएं खड़ी होती है उसे समय यह हमारा जो नॉलेज है हमको कम में लगता है देखिए सब समय हमारे सामने ऐसे क्रिटिकल डिसीजन आते जाते हैं मुझे ऐसा लगता है की किसी ने मेरी अवगणना की है या तो फिर किसी ने मेरा अपमान किया है तो उसे समय यदि मैं फैट करके उसके मुझे लगेगा की मुझे उसका उत्तर देना चाहिए मुझे उसका प्रतिवाद करना चाहिए किंतु जब मैं प्रतिवाद करता हूं तो क्या होगा मेरा मां जो है वो राजस्व भर जाएगा मेरा मां जो है वो रिस्टलेस हो जाएगा और इस रिस्टलेस मां से फिर मैं कहां साधना करने को जाऊंगा या तो फिर जड़ी में नजर के सामने कोई प्रलोभन की वास्तु देख लो और फिर मेरा मां चंचल होकर के इसके पीछे दौड़ने की शुरुआत कर दे तो फिर कहां से मैं इस चंचल मां को लेकर के साधना कर पाऊंगा अर्थात मैं जो आत्मा हूं वो रिलाइजेशन तो शुरू होगा तब होगा किंतु एस ऑफ टुडे में आत्मन हूं वह मुझे एक सत्यारा देता है वो मुझे एक भरोसा देता है जैसे देखिए कल ही मार्मिक भाई के साथ मेरी बात हो रही थी ये जो मैन आजकल कुछ कुछ लोग ऐसे होते हैं की धर्म के नाम पे ऐसी बातें करते हैं की कभी हमको ऐसा लगता है की अरे धर्म का ये दुरुपयोग तो नहीं हो रहा धर्म का तो ये कहानी मिसयूज तो नहीं हो रहा ऐसा हमको लगता है किंतु यह लोगों के पास में पावर कहां से आता है इतने हजारों लोगों को कन्वेंस करने का इतने हजारों लोगों को अपनी मतलब वो आम सेंस से उसको छोड़ करके कुछ विचित्र कार्य उनसे करवाने का यह इंडिया में तो फिर भी चलो मैन जो आम आदमी है उसको पता है की धर्म सही सही क्या है और धर्म के नाम पर जो अनाचार होता है उसको कैसे पड़ा जाए हां अभी वह बेचारा गरीब है और उसके पास में कोई ऑप्शन नहीं है और का कोई शोषण कर दें तो वो दूसरी चीज है किंतु जिसके पास में ऑप्शन है जो की पढ़े लिखे हैं वो इतना इजीली ये सब धर्म के नाम पे होते हुए दुराचार में नहीं फास्ट किंतु अमेरिका में क्या है की वे लोग तो वैसे धनवान तो बहुत है मटेरियल जो की प्रोस्पेरिटी जिसको कहते हैं विपुल संपत्ति है मतलब वो जो मिलिट्री पावर है सब कुछ है किंतु मां में शांति नहीं है यह जो सब समय एक अपूर्णता की एक अनुभूति होती रहती है एक डिप्रेशन जैसा होता है एक लोनलीनेस होती है आजकल देखिए की लोनी ने अभी मैं कुछ दिन पहले पढ़ रहा था आजकल तो यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जो इतना चला है तो कोई कोई एक इस तरह से किसी ने लिखा की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सबसे मतलब जिसको कलर अप बोलते हैं ना की अभी मैंने सबसे अच्छा उसे कहां पे है ऐसा कौन सा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उसे है जिसको करने से ज्यादा से ज्यादा लोग उसको अपनाएंगे तो बोलते हैं की चाटबॉट बना चाट बोट क्या है आप उसके साथ में बात कीजिए वो आपको रिप्लाई देगा अभी आपको अभी कंप्यूटर के साथ में या एक सॉफ्टवेयर के साथ में बात करने की क्यों जरूर पद गई क्योंकि आपके पास में मित्र नहीं है या तो फिर परिवारजन नहीं है या तो फिर ऐसे कोई लोग नहीं है जिसको की आप अपना खुद का का सके और जिसके साथ में आप मां खोल करके दो बात कर सके ये जो लोनी ने पेडेमिक जो है वो सबसे ज्यादा डेंजरस है लोनलीनेस एक बार फूल होने जरूर हो जाति है उसके बाद में ये जितने भी वो जो लाइफस्टाइल डिजीज है की हाइपरटेंशन है ब्लू शुगर बढ़ता है कोरोनरी आर्ट हार्ड दिस इस यह जो सब है यह सब जो लाइफस्टाइल दिस इसे दो-तीन चीज से आते हैं एक तो है की डिप्रेशन डिप्रेशन एक बहुत ही डेंजरस एक मानसिक अवस्था है दूसरी है ये लोनलियस्ट ये लोनी ने इस डिप्रेशन और फिर जो है की स्ट्रेस स्ट्रेस अर्थ की मैं कोई ऐसी जब में हूं मैं एक इस तरह की एक नौकरी कर रहा हूं या इस तरह का मेरा बिजनेस है जहां पे सब समय मेरे से जो अपेक्षा राखी जाति है वो मैं फुलफिल नहीं कर का रहा हूं या तो फिर सामने इतनी बड़ी क्राइसिस ए गई है जिसका की मैं सामना नहीं कर का रहा हूं तो वो स्ट्रेस है तो देखिए ये स्ट्रेस है या तो फिर ये लोनलीनेस है या तो फिर ये जो डिप्रेशन है यह सब सबसे बड़े डेंजरस जो है मानसिक रोग है और इसका इलाज जो है हमको कोई साइकैटरिस्ट के पास जाकर के करना चाहिए किंतु क्या होता है की हम अमेरिका में तो लोग चले जाते हैं चलो वहां पर ऐसा कोई ताबू नहीं है की साइकैटरिस्ट के पास जाएंगे कोई हमको कुछ बोलेगा इंडिया में आप ऐसा कहेंगे की नहीं मुझे डिप्रेशन फाइल हो रहा है या तो मुझे ऐसा ग रहा है की मुझे कोई मानो मनोविज्ञान चिकित्सा जो है मानो चिकित्सा उनको मिलने की जरूर है तो यहां पे सीधा-सीधे लोग समझ लेते हैं अरे ये पागल हो गया है किंतु ऐसा कुछ नहीं है ये मन है जो की जैसा शरीर है वैसा ही मां है जैसे शरीर के विकार है वे सही मां के विकार है तो अमेरिका में देखिए लोग वैसे दो तरह से है एक तो उनको पता है की यदि मन यदि मां में यदि कोई प्रॉब्लम होता है डिप्रेशन या लोनलीनेस ऐसा कुछ तो साइकैटरिस्ट के पास में जाना चाहिए किंतु साथ-साथ में ही वे लोग इस तरह से मतलब धार्मिक बाबतों में इस तरह से भोले भी हैं की जो कोई धर्म के नाम पे उनका शोषण करना शुरू कर दे तो बिजली वे लोग उसका वो जो है शिकार बन जाते हैं तो ऐसी बहुत साड़ी बायोग्राफी लिखी गई है की जहां पर वह लोग लिखने हैं की हां मैं एक समय मुझे ऐसा लगता था की मुझे चेंज चाहिए लाइफ में तो मैं कोई उसे धर्मगुरु के शरण में चला गया और हम लोगों ने एक ऐसा कम्युनिटी बनाया जो की हम एक कहानी जाकर के एकांत में एक बहुत बड़ा खेत है वहां पे हमारा 20-25 लोगों का कम्युनिटी था वहां पर हम लोग रहते थे और जो है वो जो हमारे गुरु थे या तो वो जो की रिविडेंट या तो फादर जो भी है सब समय हमारा शोषण किया करते थे फिर इतने सालों के बाद में मुझे अकाल आई और फिर मैंने वो उसको कल्ट बोलते हैं ये लोग सी यू ल टी इंग्लिश में कहते हैं कल्टी यानी की धर्म नहीं वो संप्रदाय भी नहीं कल्ट अर्थात की मैन एक जो बांग्ला में वो जो करता बजा बोले तो मैन एक ऐसा एक गुरु या धर्मगुरु जिसकी पूजा करना ही सबसे बड़ा कम होता है एक्चुअली धार्मिक साधना करेंगे तो आप या तो कोई ईश्वर की या तो कोई अवतार की या तो फिर कोई मैं आत्मा हूं इस तरह के कोई विचार की ऊपर साधना करनी चाहिए ये लोग अर्थ की क्या है उनका जो गुरु है इस की मैंने इस को मतलब इस तरह से ट्वीट करना शुरू करेंगे जैसे वो भगवान है अभी आदमी को भगवान बना देंगे तो क्या होगा सभी तो रामकृष्ण या स्वामी विवेकानंद नहीं होते उसके भीतर में भी ये सब वो विकार वगैरा है तो उसको इतना बहुत ज्यादा सम्मान देंगे तो उसका वो जो है मां जड़ी वो मां अहंकार घमंड से भर जाएगा और जो है लोगों को शोषण करने की शुरुआत कर देगा तो ऐसे वो कल्ट में जॉइन करके छोड़ करके निकाल आए कितने सालों के बाद में और अपना अनुभव वर्णन करते रहे ऐसे लोगों की संख्या अमेरिका में कम नहीं है भारत में क्या भारत में ऐसा होता है की हमको यह तो पता है की चलो की धर्म के नाम पे जो धर्म करता है उसको हम पहचानते हैं क्योंकि भारत की जो भूमि है उसमें इतने सारे साधु संत महात्मा आए हैं जैसे मैं भी गुजरात में ही वो जो नरसी मेहता है तो नरसी मेहता का जीवन पढ़ कर के ही हमको पता चला है की सही सही साधु या संत के सा होना चाहिए हम लोग ऐसे सहज किसी के बहकावे में नहीं आएंगे किंतु साथ-साथ में ही हमको जो साइकाइट्रिक ट्रीटमेंट चाहिए वह हम नहीं ले पाते हैं तो इससे क्या होता है की ये जो कुछ-कुछ लोग हैं की वे लोग इस तरह से हमको भ्रमित कर देंगे मतलब अच्छी-अच्छी बातें करके जो की वो सभा करेंगे तो हजारों लाखों लोग इकट्ठा हो जाएंगे और जो बोलेगा उसको सही मां लेंगे शायद सही नहीं भी मानेंगे किंतु उसको सुना उसको बड़ा अच्छा लगता है तो यह जो होते हैं कुछ कुछ धर्म गुरु उन लोगों को लोगों का ये जो ये मतलब लोगों की साइकोलॉजी समझना की उन लोगों की जो जस होती है उसको रखने की उनकी बड़ी ही उनकी ये ये स्किल होती है उनकी अवदत होती है तो ये स्किल जो है वो स्किल्ड उससे वो समझ जाते हैं की ये जो ये आदमी जो है वो उसका वो साइकोलॉजी का ही कुछ वो डिप्रैस फाइल कर रहा है ऐसा कुछ फिर इस तरह से बात करेंगे की अभी जैसे देखिए हमको कोई अपना आदमी तो चाहिए जो की हमारा मां समझ करके हमारे साथ में कोई दो अच्छी बातें करें तो अभी से नहीं कोई रिलेटिव मिलता या मित्र मिलता तो हम लोग जो है ऐसे लोगों की चल में फैंस जाता है तो ये सब किंतु कब होता है जब हमको ऐसा लगता है की हां मैं किसी भगवान पर विश्वास है मेरा तो मेरा जो विश्वास है तो श्रद्धा भक्ति जो है मुझे इस तरह से वो जो कोई डिफिकल्ट टाइम आता है मेरे जीवन में कठिन समय आता है कोई मुश्किल दो आता है मेरे जीवन में तो मुझे वो युगा देगा वो मुझे बच्चा लगा किंतु ईश्वर के ऊपर में या किसी गुरु के ऊपर में श्रद्धा होना आईटी इस नोट इनफ यदि साथ-साथ में मुझे ये पता है की हां मैं ब्राह्मण हूं हां मेरे भीतर में वो जो जैसे अमर ज्योति जैसे प्रज्वलित हो रही हो इस तरह से वो मां प्रज्वलित आत्मा है और वो आत्मा आज नहीं नकल में साधना करता जाऊंगा और वो आत्मा साक्षात्कार मुझे होगा ये भरोसा यदि हमको होगा ये कनविक्शन यदि होगी यह मतलब सेल्फ कॉन्फिडेंस यदि होगा आत्मा श्रद्धा जिसको की हमारे उपनिषद में कहा गया है और स्वामी जी बार-बार कहते हैं अभी ही अभी ही अभी ही अभी ही अर्थात अभय ये संस्कृत शब्द है जिसका की हम यदि हिंदी करेंगे तो अभय अभय अर्थात बी करें तो अभय और ये आत्मा श्रद्धा स्वामी जी कहते हैं की हमारे उपनिषद में बार-बार कहा गया है की हमारे में इतनी आत्मा श्रद्धा चाहिए की जो आत्म श्रद्धा के सहारे जो है हम हमारे जो डिफिकल्ट यह जो पीरियड आते हैं हमारे जीवन में उससे हम बैक जाए अभी ये समझना है की आत्मा श्रद्धा और घमंड या तो फिर अहंकार ये दोनों के बीच में जो भी ये डिवाइडिंग लाइन है बड़ी पतली है कई बार हमको लगता है की मेरे में बड़ी आत्मा श्रद्धा है किंतु वो आत्मश्रद्धाव नहीं हो करके घमंड हो जाता है हमको की हां आई एम संबदी में यह हूं मैं हूं ऐसा ही घमंड ए जाता है तो घमंड और आत्मा श्रद्धा में फर्क क्या है जिसमें आत्मा श्रद्धा है वो हमेशा दूसरों के बड़े में कुछ अच्छी बात सोचेगा जैसे की वो जो युधिष्ठिर है वो दुर्योधन को सुयोयोजन बोलते थे मैन वो दुर्योधन के भीतर में भी कुछ मैन रेली कुछ सदगुण देखने को मिलेगा और दुर्योधन के भीतर में सदगुण था करण को जी तरह से उसने आश्रय दिया पनाह दी जबकि करण का पांडवों ने ही उसका त्याग कर दिया था तो उसमें कुछ कुछ तो सदगुण थे राजा जब होता है तो मैन लॉयल्टी जब आपको लोगों की अर्जन करनी होती है लोगों का क्या कहेंगे लोगों का विश्वास अर्जन करना होता है तो आपको लोगों को बड़ा डिसेंटली ट्रिक करना पड़ता है तो दुर्योधन में तो वह था तो मैन देखिए युधिष्ठिर उसमें वह भी एक अच्छा गन देखते थे हालांकि दुर्योधन के साथ में उनको युद्ध करना था सबको पता था की एक बार तो युद्ध की बड़ी आएगी ही पांडवों ने कहा था यदि यह जो सी है सी सी मैन वो जो नीडल जिसको बोलते हैं मैन नीडल को या तो सी को जमीन पे रख दे तो जितनी जमीन रहेगी उतनी जमीन भी हमको दे दे तो युद्ध नहीं होगा तो उन्हें वो का वो होना ये दुर्योधन कहता है की इतनी जमीन भी नहीं देंगे सी जड़ी जमीन पे रख दे तो सी कितनी जगह लगी इतनी बर्फ जगह लगी तो इतनी जमीन भी मैं आपको नहीं दूंगा तब कहानी जाकर के वह महाभारत का युद्ध हुआ तो यह बात तो निश्चय ही थी की युद्ध होना है किंतु फिर भी जो आत्मा श्रद्धा जिसमें होती है वह हमेशा लोगों के सदगुण देखा है और जिसमें घमंड होता है वो हमेशा लोगों के दुर्गुण देखा राहत है मैन ठाकुर के भी मैन निंदा करने वाले लोग बैठे थे कालीबाड़ी में अभी भी मैन कोई कोई स्कॉलर होते हैं ये कांबिनेशन मन सेट वाले कुछ स्कॉलर ठाकुर के ऊपर में स्वामी जी के ऊपर में ऐसे वो एक नेगेटिव लिखने रहते हैं की हां अभी ठाकुर को यह सब जो अनुभव हुआ था वो सब तो ठीक है किंतु मां शारदा को जितना मतलब बडली ट्वीट किया मैंने वो मां के प्रति कोई भक्ति विश्वास नहीं है किंतु ठाकुर की निंदा करने के लिए पॉइंट चाहिए की मां को अपने साथ में नहीं रखा दूर-दूर रखा उसको मैंने उसकी केयर करने की वो कोई चिंता नहीं की अरे भाई तुम मां को अपने पर छोड़ दो ठाकुर और मां को देखने दो किन तीन लोगों का ऐसा है मैं ठाकुर में की मैंने कुछ निकलेंगे स्वामी जी के बड़े में तो कितना सब कुछ नेगेटिव लिखा जाता है तो यह यदि हमको करने लगेगा की मेरे में बहुत आत्मविश्वास है तो सही-सही आत्मविश्वास है सही-सही आत्मा श्रद्धा है ना की घमंड है तो ये यदि टेस्ट करना है तो देखो की दूसरों के प्रति हम किस तरह के विचार जो है वो रखते हैं और देखिए ये साइकोलॉजी है मेरा भी बहुत सारे लोगों के प्रति मेरे मां में भी गुस्सा है मुझे भी ऐसा लगता है की उनको अनफैव मैन वो उनको ज्यादा फीवर कर रहे हैं मेरे से ज्यादा उनको फीवर मिल रही है मेरे से ज्यादा उनकी उनसे ज्यादा बुद्धि का हो ना की साधना कहो ना की आध्यात्मिकता कहो मेरे में है किंतु उसको जो है लोग ज्यादा ट्रिक करते हैं मेरे से अच्छा ट्वीट करते हैं ऐसा क्यों हो रहा है ऐसा मुझे भी होता है ह्यूमन साइकोलॉजी किंतु यह नहीं की हमारे मां से सभी तरह के नेगेटिव विचार चले जाए किंतु आत्मा श्रद्धा होने का यह अर्थ है की जी क्षण मुझे लगे की हां मैं दूसरों के बड़े में कुछ नेगेटिव सोच रहा हूं तभी इमीडियाटली वो कोई हमारा वो जो उन्हें विवेक है आकर के हमारा कान पकड़े की अरे देखो यह जो तुम उसके बड़े में बोल रहे हो या तो सोच रहे हो वो ठीक नहीं है उसके जैसी दुर्गुण भी होंगे तो उसके सदगुण भी है और यदि दुर्गुण हजार भी होंगे तो वो जान वो ठाकुर जान मैं तो सब कुछ छोड़कर के त्याग करके यहां पे साधु हो क्या आया हूं मुझे यह सब चीजों से दूसरे लोग क्या करते हैं क्या नहीं करते उससे मुझे क्या लेना देना है मेरी जो साधना है मेरी ये जो मैंने साधन भजन है प्रतिदिन सुबह को मैं उठाता हूं की नहीं नियमित में जाप करता हूं की नहीं ठाकुर कहते है ना मास्टर महाशय को क्योंकि वो जो प्रतिमा है यदि उसकी चिंता करते हो तो उसमें बुराई क्या है तो मास्टर महाशय कहते हैं किंतु वो तो श्री मैन वो प्रतिमा तो जड़ वास्तु है जड़ चीजों की हम जो है ईश्वर मां के किस आराधना कर सकते हैं तो ठाकुर कहते हैं की अरे वो तो नहीं है चिन्मय प्रतिमा मैन ऐसा देखो की मां काली की प्रतिमा है वो मां काली साक्षात यहां पर विराजमान है तो मास्टर महाशय क्या कहते हैं की अच्छा तो फिर हमको लोगों को यह समझा देना पड़ेगा ना की जब मां काली के सामने वो जो आप जाकर पूजा करते हो या तो प्रार्थना करते हो तो वो तो मिट्टी की या तो पत्थर की मूर्ति नहीं है वो तो साक्षात मां जगदंबा स्वयं खड़ी है ऐसा तो हमको समझा देना चाहिए तो ठाकुर बड़े ही नाराज हो जाते हैं वो क्या कहते हैं तो हमारे कोलकाता डर हुई कोलकाता डर रॉक डर वही एक बुझे देव और मैन तुम लोगों का खाली कलकत्ता के लोगों का वही एक बात है किस तरह से लोगों को समझा दो किस तरह से लोगों को उपदेश दे दो किस तरह से लोगों को मैं मैन शिक्षा दे दो अरे भाई तुम्हारा खुद का क्या है वो तो तुमको पता नहीं है तुम्हारा खुद का कोई ठिकाना नहीं है और दूसरे को जगत को समझने को चले हो तो मास्टर महाशय इम्मीडिएटली लिखने हैं की हां ठाकुर की बात तो बिल्कुल सही है अभी वो उनसे वो गली भी का रहे हैं अभी कथामृत में तो बड़ा मतलब सिविल लैंग्वेज में लिखा है बड़ी भद्रक भाषा में लिखा है की ठाकुर क्या बोल रहे हैं किंतु हमको तो पता है की ठाकुर का जब टाइम पर जाता था तो सीधा-सीधी गली देना शुरू कर देते थे तो मतलब वह ठाकुर से वो मैन वो जिसको स्कोल्डिंग जिसको इंग्लिश में कहते हैं गली भी सुन रहे हैं और साथ में मां में उनके वो बात भी ठीक बैठ गई की हां ठाकुर जो बोल रहे हैं वो तो बात तो सही है मेरा खुद का कुछ ठिकाना नहीं है मुझे ईश्वर प्रताप हुई है मुझे ईश्वर प्रताप नहीं हुई है ईश्वर एक ही भी नहीं वो बात मुझे विश्वास या श्रद्धा नहीं है और कहां मैं दूसरे लोगों को समझने को जाऊंगा तो है यह जो आत्मष् श्रद्धा है या तो फिर जिसको कहेंगे की ईश्वर के ऊपर में विश्वास ये फेथ या तो फिर श्रद्धा और ये है आत्मा श्रद्धा यानी की ईश्वर के ऊपर श्रद्धा आत्मा श्रद्धा यानी की मैं आत्मा हूं इस बात के ऊपर में मेरा दृढ़ विश्वास तो ये ईश्वर के ऊपर में श्रद्धा और ये आत्मा श्रद्धा यह दो चीज जो है हमारे जो जीवन में जो डिफिकल्ट टाइम है उसे टाइम में हमको वो खींच कर के ले जाति है जैसे देखिए स्वामी जी के सांसद ने वो यहां पे वो जो थे भारत में तो उनके पिताजी का देहांत होने के बाद में जो हुआ वो तो हमको पता ही है किंतु सिर्फ ये तो कुछ नहीं है जब स्वामी जी अमेरिका गए तो अभी तो एक देखिए की वो अपनी मां की सेवा कर सकते थे मां की संभल कर रख सकते थे तो वह नहीं करके सब कुछ त्याग करके अपने फैमिली को छोड़कर के अमेरिका गए की जैसे की चलो अमेरिकन लोगों को वेदांत का उद्देश्य दे सके तो वह नहीं तो मेरी कुछ बहुत सारे लोग थे उसे समय जो स्वामी करते थे तो स्वामी जी का विरोध करने वाले भी बहुत सारे लोग थे मिशनरी लोग जो की भारत में आकर के वो जो सब कन्वर्जन का कम करते थे वह लोग अमेरिकन जो बहुत जो धार्मिक लोग होते थे खासकर के जो चर्च में रेगुलर जाते हैं तो उनको वे लोग इस तरह से पटाते थे की अरे भारत में तो देखिए की सब तार चारों और क्यों से चारों और अराजकता है मां अपने बच्चे को जो है उन नदी में फेक देती है और मगर का जाता है और मगरमच्छ उसको आके का जाता है या तो एक औरत का यदि पति मा जाता है तो वो उसके पीछे में जो अग्नि दहा देते हैं जब उसके व को मृत्यु हो जाति है इस तरह से भारत में जो क मैन अर्ज जाता है अंदर स्टेशन है उसको दूर करने के लिए उनको क्रिश्चियनिटी में कन्वर्ट करने की जरूर है और आप हमको डोनेशन यह सब बातें सुनकर के इतना सर डोनेशन देते थे तो बहुत सारे चर्च तो इसी तरह से चलते थे अभी उसे जो डोनेशन मिला भारत को कन्वर्ट करने का उसमें से सही-सही भारत में कितना रुपया आया 10% ना 20% और 80% उनके पॉकेट में ही अमेरिका में ही चला गया तो वो कौन देखने को जाता है तो ऐसे लोगों का बिजनेस पूरा स्वामी जी के आने से बैंड होने लगा था लोग समझ लोग एकदम आश्चर्य चकित हो गए अरे जो भारत में बच्चों को मगरमच्छ को मिला देते हैं इस भारत देश में से ये मगरमच्छ के सामने बचकर के किस ये ए गया यहां पे और स्वामी जी को जब लोग जब स्वामी जी प्रवचन के बाद में प्रश्न वो क्वेश्चन आंसर होता था तो लोग स्वामी जी को पूछते थे की अच्छा स्वामी जी हमने सुना है की वहां पर मां जो है अपने बच्चे को मगरमच्छ को मिला देती है तो क्या ये बात सही है तो स्वामी जी उसके बड़े ही फनी उत्तर देते थे विनोद प्रिया उत्तर देते थे वह कभी-कभी कहते थे की हां अभी वो क्या है की मुझे भी फेक दिया था किंतु मैं इतना मोटा तगड़ा हूं की मगरमच्छ ने मुझे खाने जिसकी वजह मुझे वापस जमीन पर फेक दिया इस तरह के पागल लोगों का क्या उत्तर देंगे और और एक बार किसी ने पूछा की हमने सुना है की जो लड़की होती है उसका जब जन्म होता है तो अभी लड़की को तो शादी के समय इतना दहेज देना पड़ता है तो लड़की को ये लोग क्या करते हैं वो मगरमच्छ को मिला देते हैं क्या बात सही है तो स्वामी जी कहते हैं हां वो बात सही है की अभी भारत ने सभी लड़कियां खत्म हो गई है अभी जो बच्चों को जन्म देते हैं पुरुष लोग देते हैं तो ये बात सुनकर के सब लोग जोर से हंस पड़े हैं क्योंकि कटक से जो है इस तरह की अंधश्रद्धा का एक मंत्र उत्तर है एक बार किसी औरत ने कुछ इस तरह का कुछ प्रश्न कर दिया यूटीपी तो स्वामी जी ने इतना कटाक्ष पूर्ण उत्तर दिया और लोग इतना जोर-जोर से हंसना शुरू कर दिए की जी औरत ने इस तरह का प्रश्न किया था वो कुर्सी के पीछे चुप गई जाकर के तो स्वामी जी ने कहा की वो ठीक है मैंने भी यदि इस तरह का मूर्खामी पूर्ण प्रश्न किया होता और मुझे इस तरह का उत्तर मिला होता तो मैं भी शर्म के इस तरह से चुप जाता तो लोग जो है की यह अंधश्रद्धा है या तो फिर ये जी तरह से हमको जीवन में जीना है तो श्रद्धा यानी की ईश्वर के ऊपर श्रद्धा और आत्मा श्रद्धा ये दो जब हमारे जीवन में रहेंगे अच्छा किंतु स्वामी जी की बात कर रहा था स्वामी जी के वहां पे जाकर के देखें की अमेरिका में इतना विरोध सहन करना पद रहा है कोई कोई पादरी लोग जो है वो क्या करते थे स्वामी जी यदि किसी देवोते के वहां पे जाएंगे कोई फ्रेंड है स्वामी जी को इनवाइट करेगा रहेगा की आप हमारे घर में आकर के रहे तो ये पादरी लोग जो है वे लोग क्या करते थे वो जो उसके जो फ्रेंड है वो तो सब तो वैसे क्रिश्चियन ही है अमेरिका के उसे समय के लोग तो जाकर के उनको स्वामी जी के बड़े में सब उटपटांग बातें बताते थे कहते थे देखो यह तो इंडिया से आया है उसका चरित्र कुछ अच्छा नहीं है आपके घर में उसको लेंगे तो आपकी जो लड़की है या तो आपकी वाइफ है पत्नी है उसके साथ में वह अनाचार करना दुराचार करना शुरू कर देगा उसको क्यों आप अपने अगर मैं बुलट है यह तो बड़ा ही डेंजरस चीज है मैंने वह इंडियन फकीर कहां जिसका कोई जाट नहीं नाथ नहीं उसका कुछ नहीं जिसके बड़े में उनको कुछ नहीं पता इसको आप अपने घर में लाकर बुलाएंगे जहां पे आपकी लड़कियां रहती है मैंने अपने कोई अकाल बाकल आम सेंस है की भी नहीं एवं हम लोग भी हम लोग यदि किसी को मिलते हैं रास्ते में किसी के साथ में अच्छी बात होती है तो अच्छा ठीक है और रास्ते में ही ठीक है थोड़ी ना हम उसको अपने घर में लाकर के उसको रखेंगे उसको खिलाएंगे पिलाएंगे ऐसा तो हम कभी नहीं करेंगे तो मैं ये लोग जाकर के वो इस तरह से लोगों को भड़कते थे अभी स्वामी जी के जो फ्रेंड होते थे ज्यादातर उन लोगों को पता था की ये जो पादरी लोगों का खुद का चरित्र इतना खराब है की वो स्वामी जी के बड़े में जो कुछ बोलते हैं उसके ऊपर ज्यादा ध्यान नहीं देना किंतु इससे भी कुछ लोग होते थे की यह बात से भ्रमित होकर के स्वामी जी को फिर लेटर लिखने थे अच्छा अभी हमारे घर पे कुछ कम चल रहा है या तो हम कहानी वेकेशन पर जा रहे हैं तो आपको आने की जरूर नहीं है तो स्वामी जी समझ जाते थे की ये पोलाइट लैंग्वेज में जो एक्सक्यूज दिया है तो उसका यही अर्थ है की ये लोग नहीं चाहते की स्वामी जी उनके घर पे जाए क्योंकि उनको ये डर बिठा दिया गया उनके मां में की ये जो व्यक्ति जो भारत से आया है दुष्ट चरित्रवान व्यक्ति है तो ये सब जब वो स्वामी जी जब देखेंगे सुनेंगे अनुभव करेंगे तब उनके मां में कितना कष्ट होता होगा कहानी अपने मां है अपने भाई है उनको छोड़कर के अमेरिका आए हैं उन लोगों को दो अच्छी बातें कहें और ये लोग जो है उनके चरित्र के ऊपर में ही फिर उंगली चिन्ह देना शुरू कर देते हैं उनके चरित्र पर ही प्रश्न करना शुरू कर देते हैं ये तो किसी मतलब विडंबना है तो स्वामी जी के मां में भी दुख होता होगा की थूक ये जो है की आत्मा श्रद्धा अभी स्वामी जी को तो सिर्फ मैंने बटन की बटन नहीं मतलब जैसे हम लोग कहते हैं ना जैसे मैं सोचता हूं की मैं आत्मा हूं या तो फिर मुझे ठाकुरपेश श्रद्धा है तो मुझे तो बात करके मैंने शब्दों से अपने को कन्वेंस करना पड़ता है किंतु स्वामी जी का तो सही सही वो आत्मा साक्षात्कार या तो फिर ब्राह्मण बुद्धि हो चुकी थी और वह जो अनुभूति थी उसके सहारे जो है जितने भी यह लाइफ में फैलियर्स आई है या तो जिसको सेट में कहते हैं लाइफ में जितने भी सेट में आते हैं स्वामी जी उसका प्रतिकार आसानी से कर पाते थे तो जब हमारे जीवन में दो अवस्था उपस्थित होगी जब हम साधना कर रहे हैं तब हमको अपने खुद को शब्दों से कन्वेंस करना है शब्दों से समझना है की हां जब भी हम मेरे सामने कोई बड़ा कम करने का मतलब ऐसी कोई स्थिति ए जाए की मैं झूठ बोलकर के अपने को बच्चा लूं या तो फिर झूठ बोल करके ऐसा कोई कार्य करके दूसरों को हनी पहुंचाओ उसे समय मुझे ये नेगेटिव कर्म करने से रोकने वाला है मेरे जो आत्मा स्वभाव मेरा जो है अंतर निहित यह जो ज्योतिर्मय ब्रह्मा स्वभाव और जब मुझे ब्रह्मा साक्षात्कार हो जाए तो वो साक्षात्कार ही मेरे मां को इतना मजबूत बना लगा यह छोटी-मोटी जो किस थे या तो एवं बड़ी क्राइसिस जीवन में होती है उससे मैं कभी विचलित नहीं होगाi ठाकुर को जब कैंसर हो गया था खाना खाता थे भजन आहार ग्रहण करते थे तो गले में इतना बड़ा गाव हो गया था की वहां से जो है अन्ना सो बाहर ए जाता था तो अब सोच के देखिए की कितना कष्ट होता होगा कितना भयानक कष्ट होता होगा उनके शरीर में तो उसे समय जाकर के कोई उनको कहता है की आप मां को प्रार्थना कीजिए की आप तो मां के बड़े ही लाडले बच्चे हैं तो मां को प्रार्थना कीजिए की आपका ये जो कैंसर है आपकी ये जो असाध्य बीमारी है उसको वो आराम कर दे उसको वो मित दे तो ठाकुर क्या कहते हैं की देखो की मुझे ऐसा लगता ही नहीं है की मेरे इस शरीर में मैं हूं या तो मुझे कोई सफरिन हो रहा है और फिर नरेंद्र को जब नरेंद्र जब एक बार ऐसी बात कहीं थी तो की आप तो हर भी ग्रहण नहीं कर का रहे तो आपका मां को बोलिए की कुछ खाना तो का सके तो ठाकुर ने क्या कहा था की देखो इतने सारे मुंह से का रहा हूं यानी की यह जो उनके जो भक्तगण थे जो सामने बैठे थे वो जो आहार ग्रहण कर रहे हैं तो वो तो ठाकुर तो आत्मा है आत्मन तो सर्वव्यापी है तो वो जो आहार ग्रहण कर रहा है वो तो आहार तो ठाकुर ने ही ग्रहण किया वैसा ही होगा तो ये जो आत्मावुभूति है ईश्वर के पास में अपने खुद के स्वार्थ के लिए कुछ नहीं मांग करके ज्ञान भक्ति वैराग्य की मांगना ये दोनों ने सिद्ध कर दिया स्वामी जी ने जबकि उनके घर में इतनी कठिन स्थिति थी ठाकुर ने जबकि कैंसर हो गया था और भयानक का कष्ट हो रहा था तब भी उन्होंने इस तरह से नहीं कहा तो यह जो आत्मविश्वास है या तो आत्मा श्रद्धा है या तो ईश्वर पर श्रद्धा है वह हमको चाहे हम शब्दों से अपने को कन्वेंस करें ना की हमारी साधना के अंत में हमको कोई साक्षात्कार हो वही जो है हमको जो दुष्कर्म करने से या तो नेगेटिव कर्म करने से बचता है तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति जय मां जय मां