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Sri Ramakrishna Teachings ·

Sri Ramakrishna Hindi 26 April 2023

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अच्छा ठाकुर क्या ज्ञानी और विज्ञानी दो लोगों की यहां पर बात हो रही है ज्ञानी कौन है तो ज्ञानी है सड़क उसको पता है की यह जगत संसार जो है वो नश्वर है दो दिन का है ये ब्रह्म मंत्र है ये माया है और उसको धीरे-धीरे करके एक के बाद एक त्याग करते जाना है और विज्ञानी कौन है विज्ञानी वो है जिसने एक बार इस संसार में से त्याग करके ईश्वर का दर्शन का लिया है और वही ईश्वर की कृपा से या वही ईश्वर की इच्छा से वो लोक कल्याण के कार्य करने के लिए उसका शरीर धरण है तो ज्ञानी का जो मैं है या तो फिर साधु का जो मैं है वो मैं कैसा है की मैं यह शरीर हूं मैं यह मां हूं मैं यह मेरे संस्कार है मेरा यह परिवार है मेरा यह देश है मेरी यह भाषा है यह उसका में है और विज्ञानी का मैं क्या है यह सामग्र अनुसार यह जो जितना भी जो कुछ भी जीवित है जो कुछ भी जीवित नहीं है जो हुआ था जो है जो होने वाला है भूतकाल वर्तमान कल भविष्य कल ये चारों लोग तीनों लोग ये सभी लोगों में सभी कल में जितने भी जीवित लोग हैं सभी में मैं ही हूं अर्थात की मेरे भीतर में जो ईश्वर है या तो मेरे भीतर में जो आत्ममन है इसी का प्रकाश इस सभी लोगों में है तो उसका में जो है वो संस्कृत हो जाता है सामग्र जगत संसार को वो आवर्त कर लेट है तो वो हो गया विज्ञानी अभी ठाकुर कहते हैं की ज्ञानी की र भी र है ज्ञान भक्ति की र भी रहा है फिर भक्ति की भी र एक र है ज्ञान योग भी सत्य है भक्ति योग भी सत्य है सभी रास्ते से ईश्वर के समीप जय जा सकता है ईश्वर ईश्वर जब तक जीवन में मैं दिशा रखना है तब तक भक्ति पाठ भी सरल है यहां पे ज्ञान और भक्ति दोनों रास्ते जो है ईश्वर प्रताप के एक दो विभिन्न रास्ते हैं किंतु क्या है की जैसे की सड़क की जो अपनी इच्छा होती है या तो फिर सड़क का वो जो एक इवोल्यूशन कहां तक पहुंच है सड़क की साइकोलॉजी क्या है उसके अनुसार जो है वो अपनी र निश्चित करता है जिसका की संकल्प जैसे-जैसे लोग हम साधना में आगे बढ़ते जाते हैं वैसे-वैसे देखेंगे की हमारी जो संकल्प शक्ति है वो दृढ़ से दृढ़ता होती शक्ति है पहले ऐसा होता था की अब विदेश में ऐसा होता है साइकोलॉजिस्ट क्या करते हैं की डेलेड ग्रिटिफिकेशन बोल करके एक एक्सपेरिमेंट करते हैं क्या करेंगे की दो बच्चों को सामने सामने बिठा देंगे और फिर बच्चों की मां को बोलेंगे की बच्चों के सामने एक चॉकलेट है या तो फिर ऐसा कैंडी है वो इनके सामने रख दो जो की बच्चों को बहुत पसंद है खाना अभी बच्चों के सामने रख दो और फिर ऐसा कहो बच्चों को की मां को बोलेंगे की मां बच्चों को रहेगी की मैं अभी यहां से थोड़ी डर के लिए किसी कम से जा रहे हो जब तक मैं वापस नहीं आई तब तक तुम लोग यह कैंडी मत खाना ऐसा बोल के मां चली जाएगी अभी दो बच्चे बैठे हैं और बच्चे देख रहे हैं की उनकी नजर के सामने है अभी क्या होगा की मां के भीतर में तो उनको खाने की बहुत इच्छा हो रही है किंतु सामने सामने मैन भी कहा है की अरे मैं जब वापस नहीं आई हूं तब तक इसको मत खाना तो क्या होता है की उनके मां में एक तो है की मां की बात सुनने का या तो मां की आजा का पालनपुर करने का एक एक क्या बोलेंगे एक यह है की मां की आजा का पालनपुर करूं की या तुम मुझे यह कैंडी बहुत पसंद है तो मैं कैंडी को का लो मैं क्या करूं इस तरह का धंधा जो है वो बच्चे के मां में वो प्रकट होता है अभी यहां पर गम इतना पद रहा है की बार-बार पानी पीना पड़ता है तो बच्चे के मां में इस तरह प्रकट होता है की वह कैंडी खाएगा क्या करेगा तो साइकोलॉजिस्ट जो है वो चुप करके यह ऑब्जर्व करते हैं की बच्चा क्या करता है अपनी मां की अब्सेंस में अभी एक बच्चा जो है वो 10 मिनट है 15 मिनट है उसे अभी तक उसने र देखा फिर देख रहा है की मां आई नहीं है मां लो उठ करके ए नहीं रही है तो फिर उसकी जो लालसा है वो जो कैंडी खाने की वो जीत जाति है और वह कैंडी को का लेट है अभी दूसरा बच्चा है वो र देखा है की मैन तो कहा है की कैंडी को मत खाना चॉकलेट मत खाना तो फिर वह बैठ करके र देखा है 10 मिनट होगी 15 मिनट हो गई दूसरा बच्चा कैंडी का रहा है तो उसको देख कर के और भी उसकी जो है कैंडी खाने की इच्छा जो है वह तीव्र प्रबल हो जाएगी किंतु फिर भी वह जो है वो वेट कर रहा है धीरे-धीरे करके आधा घंटा हो गया उसके बाद में मार रोटी तो मैन देखा की एक बच्चे ने अपने मां के ऊपर में संयम रखा है मां की आजा का पालनपुर करेगा बोलकर के वो कैंडी जो की उसको अति प्रिया है उसको भी उसने नहीं खाया अभी दूसरा बच्चा है उसकी वो जो खाने की वो कैंडी खाने की इच्छा इतनी प्रबल हो गई इतनी तीव्र हो गई की मां की आजा का पालनपुर नहीं करके उसने जो है वो कैंडी खाली अभी साइकोलॉजी ये दो बच्चे हैं उनका पूरा जो फ्यूचर है वो धीरे-धीरे करके वे लोग मेजरमेंट करते हैं और सब समय वो जाकर के देखेंगे की किसका परीक्षा में अच्छे वो मार्क आते हैं किसका रैंकिंग अच्छा आता है वह जो कॉलेज में या तो यूनिवर्सिटी में कौन से कोर्स में उन पर एडमिशन मिलता है जो की अच्छे जो कोर्स कहे जाते हैं ये मैथमेटिक्स से इंजीनियरिंग है मेडिकल है उसे तरह की फिर वो जो सामान्य कहे जाएंगे इस तरह के कोर्स इसमें ऐसा करके साइकैटरिस्ट जो है वो पूरा आई का लाइव जो है उसका ऑब्जरवेशन करते हैं और उन लोगों ने इस तरह का एक्सपेरिमेंट बहुत सारे बच्चों पे किया और उनका पूरा फ्यूचर करियर जो है उन्होंने मेजर किया और उनको पता चला की जो बच्चा अपनी मां की बात सुनकर के ये जो कैंडी खाने की अपनी जो लालसा है कैंडी खाने की उसकी जो इच्छा है उसको जिसने रॉक के रखा है वो सब जगह पे वो जब भी स्कूल में एग्जामिनेशन होगी कॉलेज में एग्जामिनेशन होगी सब जगह पे उसका परफॉर्मेंस दूसरे बच्चे की दूसरे बच्चे से जिसने कैंडी खाली उससे उसका परफॉर्मेंस जो है हमेशा बटर रहेगा तो साइकैटरिस्ट इसको क्या कहते हैं वे लोग कहते हैं डिलीट ग्रिटिफिकेशन अर्थात ग्रिटिफिकेशन अर्थात की मेरी जो इंद्रियों की जो भूख है वासना है उसको मैं उसको मैं भोग करो इसको ग्रिटिफिकेशन बोलते हैं जैसे की कोई बहुत अच्छा कैंडी मेरी नजर के सामने ए गई अभी मुझे पता है की मेरा जो है शुगर बाढ़ जाता है बात बीच-बीच में तो ये जो मीठी चीज मुझे नहीं खानी चाहिए तो ये मैं नहीं खाऊंगा ये मेरा अपने मां पे संयम हो गया किंतु कोई कोई लोग ऐसा सोचते हैं अरे शुगर बढ़ेगा तो बढ़ेगा एक दिन तो मरना ही है क्या है ऐसा करके चलो मिठाई का लेते हैं और फिर बाद में पछताते भी है इतने है की अरे इतना कष्ट हो रहा है अभी शुगर बढ़ाने से अभी मैं और कभी मिठाई नहीं खाऊंगा किंतु जैसे ही मिठाई ए गई सामने फिर से वे लोग का लेते हैं तो इस तरह से लोग अपने मां पे संयम नहीं रख पाते तो इसको क्रिएटिफिकेशन कहते हैं ग्रेविटेशन अर्थात भोग तो यह डिलीट ग्रेट वेरीफिकेशन का अर्थ है जो की अपने भोग को संयम में रख सकता है ऐसा नहीं कहा साइकैटरिस्ट ने की तुम लोग कैंडी खाओ ही मत ऐसा कहा की जब तक मां वापस नहीं आई तब तक अपने जो इंडिगो मत खाना तो जो लड़का अपने मां पे इतना संयम रख सकता है की मां के वापस आने की रात देख सकता है उसका जो सेल्फ डिसिप्लिन है जो सेल्फ अवेयरनेस है संयम की शक्ति है वो दूसरे बच्चे की अपेक्षा ज्यादा है और जिसकी संयम की शक्ति ज्यादा है वो सभी तरह की एग्जामिनेशन में सभी तरह की कंपटीशन में वो क्रिएटिव एक्टिविटी में वो हमेशा जो है वो आगे रहेगा तो ये जो भोग करने की क्षमता जो है उसको रोकना वही है ज्ञान योग की साधना और भक्तिओन के साधना जैसे हमने कहा की जो भी मैं जो हूं कोई अभी शशि महाराज का शशि महाराज को स्वामी जी ने चेन्नई में भेजो अभी शशि महाराज की स्टोरी तो हम सबको पता है की वो उनको जी दिन ठाकुर का ठाकुर की महासम्मती हुई थी उसके दूसरे तीसरी दिन से ही वह जो अस्थि थे ठाकुर्गाची में स्थित थोड़े से इन लोगों ने चूड़ा लिए थे रामचंद्र डेट की इच्छा थी की ठाकुर के अस्थियों जो है वह काकुर्गाची में ही दफन करें और वहीं पर उनकी पूजा हो तो क्या हुआ था की जी कमरे में अस्थिर रखें थे वहां स्काईलाइट स्काईलाइट पता है की ऊपर में से प्रकाश आने के लिए छठ पे थोड़ा सा खुला जगह छोड़ दिया जाता है और इतना जो जगह है उसको कांच से ढंग लेते हैं इसको स्काईलाइट बोलते हैं तो जी कमरे में अस्थि रखें थे उसे कमरे की स्काईलाइट से शशि महाराज और निरंजन महाराज दोनों चोरी चुपके जो है वो उसे कमरे में गए और वो जो अस्थि जो थे अस्थि कलश में से ज्यादातर अस्थि चूड़ा लिए और वो चूड़ा कर के वे लोग जो है वो भारत नगर मठ में ले आए तो अभी रामचंद्र डेट को ऐसा लगता है की जितने भी स्थित है ठाकुर के वो इस के पास है किंतु एक्चुअली ज्यादातर अस्तित्व नगर मठ में यह गुरु भाइयों के पास है तो शशि महाराज जो है इस तरह के ठाकुर के अस्थि ले आए और नियमित प्रतिदिन इतनी निष्ठापूर्वक ठाकुर की सेवा करते थे चर्चा करते थे जब आरती होती थी तो जय शिवा ओंकार वैसा बोलकर के वो नृत्य करते थे चमार वियोजन करते करते और उनका वो जो नृत्य है वो देखकर के मतलब जैसे शिवा का वो जो ये होता है ना प्रलयुट्त्य वो इतना प्रभावशाली होता है इतना मर्दानगी भारत होता है तो वो देख कर के जितने भी वो दर्शन थे श्रोतोफंड थे भक्तगण थे वो उनका हृदय जो है वो अभिभूत हो जाता था भक्ति से बाढ़ जाता था इस तरह से जो है वो शशि महाराज की वो तो उनका शरीर भी है की इतना मतलब स्ट्रांग था और उनकी पर्सनालिटी भी इतनी प्रभावित थी और फिर उनका जो गुरु भक्ति तो वो जब जय शिवा ओंकार हर ओम ओमकारा ऐसा बोलकर के जब मृत्यु करेंगे तो कितना भाव और सुंदर लगेगा तो उन्होंने अपना पूरा जीवन जो है यह जो जितने भी ग्रुप है उन्होंने पूरे भारत में भ्रमण किया स्वामी जी तो अमेरिका तक चले गए फिर यह जो है की नॉर्थ इंडिया हिमालय फिर इस साइड में आएंगे तो राजपूताना जितने भी गुरु भाई है राजा महाराजा है लथु महाराज है स्वामी जी है निरंजनानंद जी है सब लोगों ने भारत में भ्रमण करके वो प्रव्रज जाकर जीवन जिया किंतु शशि महाराज ही एक अकेले थे उन्होंने ठीक किया की ठाकुर की सेवा करने के लिए वो मठ छोड़ कर के कहानी नहीं जाएंगे यहां तक की वो काशी वृंदावन की दर्शन के लिए तक नहीं गए थे तो पूरा जो उन्होंने बिना एक दिन के भी छुट्टी लिए उन्होंने अपना जो पूरा समय है वो वहां पे वर नगर मठ में ठाकुर की पूजा करके निकाला किंतु जब स्वामी जी वापस आए अमेरिका से तो स्वामी जी ने शशि महाराज को कहा की देखो मैं तुमको मां दक्षिण में प्रचार कार्य करने के लिए भेज रहा हूं चेन्नई में वहां पर जाकर के ठाकुर के नाम का तुमको प्रचार करना है तो यह बात जैसे स्वामी जी ने कहीं इम्मीडिएटली जो है महाराज ने बिना किसी विद्या के स्वीकार कर ली अभी वह दक्षिण चेन्नई में आए चेन्नई में प्रतिदिन क्लास लेते थे क्लास लेकर के वो चारों और मतलब उनको तो क्या है चेन्नई में जाना पड़ता था बीच-बीच में वो बेंगलुरु जाते थे बीच में वो पूरा वो दक्षिण भारत है उन्होंने भ्रमण किया था ठाकुर का नाम प्रचार करने के लिए और एक बहुत ही सुंदर डिस्क्रिप्शन है विशुद्ध जी महाराज उसे समय चेन्नई में थे और शशि महाराज के और असिस्टेंट के रूप में वो एक बहुत ही सुंदर डिस्क्रिप्शन लिखने हैं वो लिखने हैं की एक दिन उन्होंने देखा की जैसे वह शशि मारे हो मतलब एक दिन नहीं ऐसा नियमित होता था की शशि महाराज जो है की प्रवचन देकर के ए रहे हैं और उन्होंने गेरुआ कपड़ा पहने है चेहरे पे एकदम वो जो सन्यास की जो दिव्या अब है वो उसमें से प्रकाशित हो रही है वह जो पगड़ी पहनी है उनका तो शरीर भी इतना एकदम प्रभावशाली था उनका व्यक्तित्व जो है पर्सनालिटी इतना अट्रैक्टिव था पर्सनालिटी जिसको कहते हैं उसे तरह का था और जो प्रवचन देते थे तो कितने सारे लोग इकट्ठा हो जाते हैं पूर्व दक्षिण भारत में ठाकुर की भावधारा की जो न्यू राखी निश्चित स्वामी जी ने रची किंतु फिर उसको वो जो उसको जो नर्चर करना होता है वो शशि महाराज ने किया था आज दक्षिण भारत में रामकृष्ण मिशन के इतने सारे केंद्र है चेन्नई में इतने सारे एक्टिविटीज जो हमारे गौतम आनंद जी वहां जो है वो कर रहे हैं तो उसका वो जो फाउंडेशन स्वामी जी के साथ-साथ में रखा था शशि महाराज ने तो शशि महाराज का वहां पे जो श्रद्धा भक्ति आदर्श इतना था की और कोई सामान्य व्यक्ति होगा तो उसका दिमाग घूम जाएगा उसका जो ये अहंकार है ना उसके सर में चला जाएगा और वो ये सोचना शुरू कर देगा ऐसे कोई कोई लोग होते हैं की ये जो कम जो हो रहा है ये जो सब कार्य जो हो रहा है वो मेरी वजह से हो रहा है क्योंकि मैं जो हूं जितना सब कम करता हूं मेरी मेरी पर्सनालिटी है मेरा नॉलेज है एन मेरी आध्यात्मिक शक्ति है इसकी वजह से ये सब होता है तो ये नहीं कर करके ये विश्वविद्यालय नंद जी लिखने हैं जब भी शशि महाराज इस तरह से प्रवचन करके वो वापस आते हैं मठ में चारों और से गुरु महाराज की जय गुरु महाराज की जय ऐसे नारे ग रहे हैं कितने लोग जो है शशि महाराज का दर्शन करने के लिए इकट्ठा होकर खड़े हैं उसे समय शशि महाराज सीधे सबसे पहले स्वामी जी के चित्र के स्वामी जी का फोटो था वहां पे उसके सामने चले जाएंगे दो हाथ जोड़कर के कहेंगे की भाई ये ठाकुर का प्रचार करने की क्षमता तो सही-सही तुम्हारी है ठाकुर का प्रचार तो तुम ही कर रहे हो मैं तो एक निमित्त मंत्र हूं छोटा सा एक रजकां मंत्र हूं तुम्हारे इस प्रचार कार्य में देखो की यह जो अहंकार है यह जो साफ ये जो सक्सेस है वो मेरे मां में ना चली जाए मेरा मां जो है हमेशा यह जो भगवान श्री रामकृष्ण के श्री चरणों में पड़ा रहे थोड़ा सा भी अहंकार मेरे मां में आए ऐसा करना ऐसा करके शशि महाराज नियमित स्वामी जी के फोटो के सामने ऐसा जब भी बाहर से आएंगे दो हाथ जोड़कर के प्रार्थना करेंगे रंग ना था नदी का शायद आपको पता होगा रंगनाथन जी तो इंडियन गवर्नमेंट के द्वारा ही इंडियन कलर एम्बेसडर के रूप में उनकी नियुक्ति हुई थी और कितने सारे कंट्रीज में घूमे थे स्वामी जी के नाम का प्रचार करने के लिए तो उनका एक नियम था जब भी वो विदेश से लौटेंगे एक महीना वो मायावती रहेंगे दाढ़ी बढ़ाएंगे किसी के साथ में बात नहीं करेंगे मौन पालनपुर करेंगे और संपूर्ण रूप से जो है साधन भजन में अपना था समय निकलेंगे पूरा एक महीना जब भी वो विदेश से लौटेंगे एक महीना इस तरह से एकांत में दाढ़ी बना करके रहेंगे जैसे की कोई ट्रेडिशनल सन्यासी हो तो वो उनका कहना था देखो विदेश में जाते हैं वो रामकृष्ण मिशन के रिप्रेजेंटेटिव हो करके इंडियन गवर्नमेंट के रिप्रेजेंटेटिव हो करके तो बहुत सम्मान को मिलता है तो सलमान जो है उनके सर में एन चला जाए सलमान जो है उनका अहंकार कहानी बड़ा ना दें इसलिए वो एक महीना वो प्रवास के बाद में आकर के मायावती में ट्रेडिशनल साधु की तरफ रहेंगे ये जो हमारी ये जो सनातन आध्यात्मिक जो धारा है प्रवाह है सनातन आध्यात्मिक गंगा जो बड़ा ही है उसमें डुबकी लगाएंगे उसमें डुबकी लगाकर के जितने भी ये अहंकार है जितने भी यह जो मैं कर रहा हूं वो जो विचार है सब जो है वो कहानी पे वो गाल करके वो रात हो जाएंगे तो यह जो लोग सही सही प्रचार कार्य करते हैं जो लोग सही सही उन लोगों के सिद्धि प्राप्त होती है उन लोगों को पता है की यह सिद्धि अपने सर में एन चले जाए यह सिद्धि हमको अहंकारी एन बना दे यह सिद्धि हमको घमंडी ना बना दे इसके लिए ऐसा कोई कार्य ऐसी कोई साधना करनी जरूरी है जिससे की सिद्धि प्राप्त कर मिशन जिसको आजकल कहते हैं ना डिटॉक्स मैन की इस तरह उत्सव में बहुत कुछ का लिया है मिठाई का ली है तले हुए पदार्थ खाली है समोसा वगैरा ये जो भी जंक फूड मिलता है तो इसके बाद में हम डिटॉक्सिफिकेशन करते हैं वो पता नहीं वो दही का करके नहीं ऐसा करके हम कुछ दिन रहते हैं ऐसा आजकल बहुत चला है तो इस तरह का इस स्पिरिचुअल डिटॉक्सिफिकेशन इस वेरी नेसेसरी हम सबके लिए जैसे ही सफलता मिली तो अहंकार बाढ़ गया और साथ-साथ में ही निष्फलता मिलती है तो हम बड़े ही परेशान हो जाते हैं अरे जैसे शशि महाराज का ही जब शुरू शुरू में आए थे जब क्लास ले रहे हैं तो यही विशुद्ध आनंद जी उनके साथ में जाते थे देखते थे क्लास में कोई नहीं आया है तो किंतु शशि महाराज का ऐसा है की जैसे जी समय पर क्लास शुरू होना है तो इस क्षण शार्प 8:00 बजे का क्लास है शार्प 8 ओ'क्लॉक शुरू कर देंगे पूरा उपनिषद की वो किताब लेकर गए हैं उसमें पूरा पाठ करेंगे प्रवचन करेंगे सब कुछ इतनी निष्ठा से करेंगे किंतु सामने एक व्यक्ति भी नहीं बैठा एक भक्ति भी सामने नहीं बैठा तो ये देख करके वो विशुद्ध जी को बड़ा आश्चर्य होता था वो होल में कोई है नहीं ऑडियंस और शशि महाराज इतनी तन्मयता से इतनी निष्ठा से प्रवचन देते हैं पाठ करते हैं तो इसे उनसे कैसे संभव है वो ऐसा क्यों करते हैं क्यों नहीं वो मठ में चले जाते और कोई दूसरा कम करते हैं वो क्लास को छोड़ दो उसे दिन जी दिन कोई नहीं आया है हम लोग तो ऐसा ही करते हैं यदि कोई नहीं आएगा तो हमारा क्लास तो बैंड ही रहेगा मैं ऐसे कोई हवा में तो बोलने वाला नहीं हूं किंतु शशि महाराज को जब विशुद्ध आनंद जी ने पूछा की आप ऐसा क्यों करते हैं तो शशि महाराज कहते हैं देखो मैं क्लास लेट हूं गुरु महाराज को सुनने के लिए मैं क्लास लेट हूं मेरी खुद की आध्यात्मिक साधना के रूप में लोग उसको सुन ना सुन इससे मुझे क्या फर्क पड़ता है तो जब फेलियर भी ए जाए जब निराशा या हटा ए जाए तो ऐसा सोच लेना की मेरे में कोई कमी है बोलकर के मैं फेल हो रहा हूं ये भी तो एक दूसरा अहंकार का ही एक मतलब यह दूसरा मेनिफेस्टेशन है अहंकार का एक मेनिफेस्टेशन है की सफलता मेरी है तो इसी अहंकार का दूसरा मेनिफेस्टेशन है की निष्फलता मेरी है ये सफलता निष्फलता दोनों ठाकुर की है दोनों ठाकुर ने हमको दी है इस तरह से मानकर के जो रहे इस को सही सही शरणागति कहते हैं शरणाग गति का और एक उदाहरण है स्वामी विवेकानंद का वह जो है वहां पर गए थे खीर भवानी खीर भवानी की बात मैंने शायद पहले की होगी खीर भवानी में अर्थात की कश्मीर में स्वामीजी इन लोगों के साथ में गए थे निवेदिता है फिर यह जो सर अली बिल है वगैरा के साथ में तो उन्होंने सोचा की अमरनाथ यात्रा की जाए तो अभी अमरनाथ यात्रा तो आपको पता है की किस तरह से ट्रेडिशनल वे में होती है की जो साधु सन्यासियों का जो पूरा एक वृद्ध है वह सब एक साथ में जाता है क्योंकि रास्ता जो है वो बड़ा ही विकेट है रास्ता जो है बड़ा ही भाया हुआ है तो अकेला जो यात्री जाएगा तो उसके लिए प्राण रक्षा करना शायद कभी कभी मुश्किल हो जाए हां ऐसे सड़क है जो की निश्चय अकेले जाएंगे वो साथ में जाता है इसे गाइड के रूप में तो दम जा रहा है कुछ सिपाही वगैरा है कुछ वो जो नौकर वगैरा है और साथ में सब साधु सन्यासी ट्रेडिशनल साधु सन्यासी हम हमारे हिंदू धर्म के साथ में जा रहा है तो स्वामी जी भी जा रहे हैं अभी स्वामी जी के साथ में निवेदिता भी है और स्वामी जी का टेंट यहां पर रखा गया निवेदिता का पास में रखा गया और सब साधु संन्यासियों का भी वहां पे है तो एक दिन कुछ सन्यासियों ने आकर के स्वामी जी को निवेदन किया स्वामी जी को प्रार्थना की रिक्वेस्ट किया की देखिए आप तो सिद्ध महापुरुष है आप तो जो है की ब्रह्मज्ञान में स्थित है इतने आपने तो विदेश में जाकर के वेदांत का प्रचार किया है इसलिए आप हमारे सबके प्राणायाम है किंतु हमारी भारतीय परंपरा के अनुसार यदि एक सन्यासी है तो वो स्त्री संघ कभी नहीं करेगा सब ठीक है की आप उनको दीक्षा दे उपदेश उनका जो स्पिरिचुअल गाइडेंस जो भी है वो आप उनको दें वो ठीक है किंतु एक स्त्री वो आपकी जितनी ही चाहे भक्ति क्यों ना हो इसके साथ में इस तरह से यात्रा करना वो साधु सन्यासी को हमारे हिंदू सन्यासी को शोभा नहीं देता आज आप ऐसा करेंगे तो इस तरह का एक नेगेटिव एग्जांपल आप रख के जाएंगे की जिससे जो है पूरा साधु समाज में ऐसे ऐसे विचित्र लोग तो होते ही है जो लोग की सब समय भोग करने के लिए कोई ना कोई एक्सक्यूज पूछते रहते हैं तो इन लोगों को एक एक्सक्यूज मिल जाएगा की ग्रेट विवेक आनंद स्वामी विवेकानंद स्वयं एक महिला भक्ति के साथ में अमरनाथ यात्रा की है तो हम लोग भी महिला वक्त के लोग यात्रा करेंगे तीर्थ यात्रा करेंगे इससे जो है की साधु समाज में कितना करप्शन फैलेगा सोच के देखिए उन साधुओं ने जैसे स्वामी जी को ऐसा कहा स्वामीजी इम्मीडिएटली मां गए की हां आप लोगों की बात सही है की इस तरह से प्रकाशीय रूप से निवेदिता मेरे साथ में सब समय चल रही है मेरे साथ में ही उसका टेंट जो है प्रत्येक रात को वह जो रखा जाता है वह ठीक नहीं है यह दिखाओ मतलब ये जो है दिस इस नोट ए गुड विजुअल आज की लैंग्वेज में जो कहता है ना तो स्वामी जी ने फिर निवेदन को का दिया की वो जो दम जो था जिला मजिस्ट्रेट वो उसका टेंट जो है थोड़ा सा दूर लगता था तो साधुओं के साथ में नहीं तो निवेदिता को बोल दिया कल से जो तुम्हारा टेंट जब रात को हम रखेंगे वो वहां पे जिला मजिस्ट्रेट के साथ में रखेंगे हम साधु लोग जो है वो अलग से रहेंगे तो निविधिता ने भी ये बात मां ली तो इस तरह से उन्होंने जो है की देखिए स्वामी जी चाहते तो एकदम गुस्सा हो जाते नाराज हो जाते हैं की दो दो टेक के साथ देखिए भारत में साधु लोग तो कितने ही है और किसकी क्या क्षमता है किसकी क्या नहीं है सबको पता है तो रामकृष्ण के स्वयं संतान मैन शिवा के अवतार स्वयं सन्यासी स्वामी विवेकानंद को कोई ऐसा बोल दे की आपने विधि तक के साथ में यात्रा मत कीजिए तो स्वामी जी को तो कितना गुस्सा ए सकता है और बाद में उन्होंने एक्चुअली नेवी तक के साथ यात्रा की थी जब वो भारत से ब्रिटेन गए थे सेकंड टाइम जो सेकंड विजिट तू डी वेस्ट था तो वह तो निवेदिता के साथ में ही वो जो जहाज में जब बैठ करके वो तो अमेरिका लंदन सब जगह पे गए और लंदन में भी जहां पे गए थे तो निवेदिता के साथ में गए थे तो स्वामी जी को ये पता था की वो निवेदिता के साथ में जहां पे भी जा रहे हैं तो उनका मां भी शुद्ध पवित्र शिवा स्वयं और निवेदिता की तो भक्ति कितनी है स्वामी जी के प्रति तो कोई भी तरह का खूब विचार किसी के मां में आना संभव ही नहीं है तो स्वामी जी फैट करके इन साधुओं को गली देकर के भाग देते हैं और ये डीएमसीएस तो सब तो स्वामी जी से एकदम वो डर के रहते थे वो इतने विश्व प्रसिद्ध प्रसिद्ध विवेकानंद स्वयं वॉइस रोहित जो है यह जो एम्बेसडर वगैरा जो है ये जो रॉयल फैमिली के जो मेंबर्स जो थे लंदन में वो स्वामी जी को मिले थे स्वामी जी के वो वो शीशे थे तो स्वामी जी तो जो चाहे वो कर सकते थे कश्मीर का राजा था वो स्वयं स्वामी जी प्रतिशत था तो मतलब वह तो किसी को भी गली देकर भाग सकते थे किंतु नहीं स्वामी जी ने इमीजेटली ये बात स्वीकार कर ली की हां जो साधु समाज की रक्षा करने के लिए जो करना चाहिए वो सब कुछ में अवश्य करूंगा उनका वो जो घमंड स्वामी जी के मां में कभी नहीं हुआ की जो मैं करता हूं सब सही है देखिए भगवान राम का की हम लोग मैं खुद जब किसी ने कहा की मां सीता अशोक वाटिका में रही थी तो उनके चरित्र की जो मतलब वो शुद्ध पवित्र एक ही भी नहीं इस बात की क्या मतलब गारंटी है तो ये बात सुनकर के भगवान राम ने जो है वो अपनी परीक्षा भी हुई मसीत की और उसके बाद में भी जो है मां को उन्होंने वनवास में फिर से भेज दिया तो मुझे ये सुनकर के मुझे बहुत गुस्सा आता था की राम कैसे भी हो मां सीता को इस तरह से वन में भेज दिया वह दो टेक के धोबी की बात सुनकर के उनको थोड़ी सी भी दया या ऐसे नहीं आई तो अपने सोचता था किंतु देखिए मैंने जितना ही आध्यात्मिक जीवन में हम लोग आगे बढ़ते जाते हैं हमको पता चला है की हम जितने बड़े होते हैं ना इतना ही हमारा अहंकार जो है वो इतना ही बड़ा होता जाता है वो इतना ही सूक्ष्म रूप से स्ट्रांग होता है आज मैं चाहे भले प्रकाशीय रूप से ऐसा घमंड ना करूं की मैं बहुत अच्छा एडिटर हूं मैं बहुत अच्छा प्रवचन देता हूं या मैं बहुत अच्छा लिखना हूं किंतु सूक्ष्म रूप से यह बात मेरे मां में से की हां की मैं विद्वान साधु हूं मैंने कहा है ना जैसे की हाथ किरदार सोना दिए मोड अर्थात की हाथी का दांत आइवरी वैसे भी तो महंगी होती है वैसे ही तो बहुमूल्य होती है उसके ऊपर में आप सोनी का क लगा दे तो उसकी जो वैल्यू है और भी बाढ़ जाएगी तो वो जो है उन्होंने किन के बड़े में कहा था वो प्रभु भारत के दूसरे एडिटर के बड़े में मैं उनका नाम भूल गया तो उनके बड़े में मैन यह बात कहीं थी तो अभी मैं इस संबंध में मां में सोचता हूं अर्थात मैं भी तो साधु हूं और मैं भी विद्वान हूं ये सूक्ष्म अहंकार जो है वो सभी के मां में रहेगा ही रहेगा आप चाहे कितना ही कर लीजिए तो अहंकार रहने से किंतु दो चीज सब समय याद रखना है सब समय ठाकुर की शरण में रहना है जैसे शशि महाराज प्रवचन देकर के जब आते थे और स्वामी जी के चित्र के सामने दो हाथ जोड़कर खड़े रहकर के प्रार्थना करते थे की भाई ये जो भी मुझे लोग मेरे प्रति इतनी श्रद्धा भक्ति प्रदर्शित कर रहे हैं तो यह श्रद्धा भक्ति का अधिकारी मैं नहीं हूं वो तुम हो क्योंकि ठाकुर का सही सही प्रचार करने की दायित्व क्षमता तुम्हारी ही है मेरी नहीं है मेरा जो भी यह जो सक्सेस है यह जो प्रवचन करने की मेरी यह जो सिद्धि है वो सब तुम्हारे चरणों में अर्पण है तो इस तरह से वह जो भक्ति योग जो है भक्ति मार्ग है उसको बड़ा ही रूप से पकड़ के रखना है थोड़ा सा भी इधर उधर अपना मां विच्छेद हो गया थोड़ा सा भी ऐसा एक बैठ गया अपने मां में एक बार की हां मैं एक आई एम संबदी में कोई एक ऐसा एक सिद्ध व्यक्ति हूं सिद्ध पुरुष तो फैट करके जो है की महामाया हमको कहां से कहां फेक देगी ये जो वो उपनिषद में कहते हैं ना की छुरासिया धारा मानेकी और ये जो एक ब्लड है ना ब्लड की वो जो धार है उसके ऊपर में चलने के बराबर है ये आध्यात्मिक जीवन थोड़ा सा भी ध्यान भांग हो गया तो फैट करके एक और गिरेंगे या दूसरी और गिरेंगे या तो फिर पर कटेगा तो इतना सूक्ष्मिया अहंकार और इतने सूक्ष्म रूप से हमको ये भक्तिओन को पकड़ के रखना है तो ये दोनों चीज है एक ज्ञान योग अर्थात की अपने इंद्रियों का संयम और भक्ति योग अर्थात अपने अहंकार को संपूर्ण रूप से भगवान के श्री चरणों में समर्पित कर देना ये दो साधनाएं है आगे कहते हैं देखो ना यह जगत कैसा विचित्र है कितने प्रकार की वस्तुएं सूर्य चंद्र नक्षत्र कितने प्रकार के जीव इसमें है बड़ा छोटा अच्छा बड़ा किसी में शक्ति अधिक है किसी में कम है इस यह बात सुनकर के विद्यासागर कहते हैं क्या ईश्वर ने किसी को अधीक्षक दी है और किसी को कम ठाकुर कहते हैं यह वह अर्थात की भगवान ईश्वर विभु रूप के सब प्राणी में विद्यमान है ईश्वर से सब प्राणी में वित्तीय मां है किंतु चीटियां तक में है किंतु शक्ति का तारतम्य होता है ईश्वर सब में है किंतु शक्ति सब में अलग-अलग है नहीं तो क्यों कोई आदमी 10 आदमियों को हर देता है क्यों एक ही और एक आदमी जो है उसमें इतनी शक्ति होती है की वह 10 लोगों को हर दे जो लोग जो है एक आदमी से डरते हैं उसमें इस तरह की कौन सी शक्ति है हालांकि ईश्वर यदि सपना है तो शक्ति भी तो से हनी चाहिए किंतु ऐसा नहीं है ईश्वर सब में है आत्मा का प्रकाश सब में आत्मन सब में है किंतु आत्मा का जो मेनिफेस्टेशन है आसमान की जो शक्ति है वो विभिन्न विभिन्न होती है किसी की शक्ति ज्यादा किसी की कम और ऐसा ना हो तो भला तुम्हें ही सब कोई क्यों मानते हैं क्या तुम्हारे दो सिंह निकले हैं औरों की अपेक्षा तुम में अधिक दया है विद्या है इसलिए तुमको लोग मानते हैं और देखने आते हैं क्या तुम यह बात नहीं मानते हो यह बात सुनकर के विद्यासागर मुस्कुराते हैं देखिए ठाकुर कहते हैं की ये जो इतना विशाल जगत संसार है उसमें इतनी विभिन्न विभिन्न चीज हैं इतने विभिन्न विभिन्न पशु पक्षी है और सभी में अलग-अलग तरह की शक्ति है तो ये बात सुनकर के ये जो मॉडर्न लोग जो है ना आजकल के सबको एक वोट मिलन चाहिए तभी ये डेमोक्रेसी होगी पहले हो सकता राजशाही है या तो फिर यह जो बोलेंगे ना की ये ऑटोक्रेसी है तो उसमें क्या होता है की कुछ लोग जो है उनके पास में इतना पावर होता है की तो वही लोग पूरा राज्य चलते हैं किंतु आज डेमोक्रेसी का जमाना है सबको एक-एक वोट मिलेगा किसी कोई आदमी जैसे वो ये अदानी है या तो फिर ये अंबानी है तो उनको भी सपोर्ट है और यह जो झोपड़ी में जो राहत है उसको भी एक ही वोट है ऐसा नहीं है की जो की करोड़पति है उसके 10 वोट है या तो 100 वोट है और जो झोपड़ी में राहत है उसका आधा वोट है और हम लोग जो की मिडिल क्लास है हमारा एक वोट है ऐसा नहीं है हम चाहे डॉक्टर हो ना की हम चाहे भिखारी हो एन कोई चाहे वो गवर्नमेंट ऑफिसर हो ना की कोई चाहे टीचर हो ना की कोई चाहे स्टूडेंट हो कोई चाहे लखपति हो कोई चाहे जो है वो सामान्य लोअर क्लास बैकग्राउंड से आता हूं सबके पास में एक वोट है यह हमारा डेमोक्रेटिक प्रिंसिपल है आजकल तो आजकल लोग यह सुनकर के किसी की शक्ति ज्यादा है किसी की कम लोगों को बड़ा बड़ा लगता है की अरे भगवान क्या इस तरह से भेदभाव करेंगे भगवान के इस तरह से वो जो है की फेवरेटीज्म करेंगे हां हम इंसान लोग करेंगे की ये मेरा फेवरेट है यह मेरा फेवरेट नहीं है भगवान तो ऐसा नहीं करने वाले हैं तो आपने जब ऐसा कैसे का दिया की किसके पास में ज्यादा शक्ति है किसी के पास कम शक्ति है तो ठाकुर कहते हैं की देखो ईश्वर की जो प्रकाश है वह तो में सिम है किंतु उसका मेनिफेस्टेशन है वह डिफरेंट डिफरेंट होगा यह नहीं होता तो लोग तुमको मिलने के लिए क्यों आते हैं ये जो मास्टर महाशय ने विद्यासागर का ये जो चैप्टर है शुरू में ही एक बहुत सुंदर वर्णन किया था ना की विद्यासागर के टेबल पे बहुत सारे पत्र पड़े हैं पत्रों में वो लोग रिक्वेस्ट कर रहे हैं कोई विधवाह है तो विधवा ने लिखा की आप मेरा अनाथ बच्चा है उसको दूध पीने की व्यवस्था आप करते हैं तो प्रतिमा आप मुझे इतना रुक के देते हैं किंतु इस महीने अब बाहर गए थे तो मुझे रुपया नहीं मिला इस समय बहुत कष्ट में हूं कोई विद्यार्थी वो लंदन गया है पढ़ाई करने के लिए वह कहता है की इस बार आपकी फी मुझे समय पर नहीं मिली तो मैं अपनी पढ़ाई जो है वो कंटिन्यू नहीं कर पाऊंगा कोई टीचर लिखना है की मेरे घर में जो तो अभी तक तो क्या था की वह मेरी बहन है मेरे बीबी है मेरे बच्चे हैं तो जो तनख्वाह जो आप दे रहे हैं सैलरी उससे वो हमारा घर नहीं चला आप सैलरी बधाई तो लोग आकर के विद्यासागर को क्यों ऐसा का आप हमारा हमको पैसा दीजिए हमको मदद कीजिए क्या ठाकुर बोलते हैं तुम्हारे दोस्त सिंह निकले हैं की लोग तुमको देखने को आएंगे ऐसे जो लोग बहुत छोटे होते हैं बहुत लंबे होते ऐसे लोगों को सर्कस में रखा जाता है तो ऐसे लोगों को देखने के लिए लोग सर्कस में जाते हैं तो तुम्हारे दो सिंह निकले हैं क्या तुम को सर्कस में रखा गया है की लोग तुमको देखने को आएंगे तुम्हारी विद्या शक्ति जो है तुम्हारी दया शक्ति जो है तुम्हारी धन शक्ति जो है इसकी वजह से लोग तुम्हारे पास आते हैं ये बात सुन करके विद्यासागर मुस्कुराने लगे देखिए ये जो आधुनिक समय की ये जो सब कुछ कुछ ब्रह्म कल्पना है डेमोक्रेसी हनी चाहिए उसमें कोई प्रश्न ही नहीं है एक राजा राम कितने हजार साल में एक बार आते हैं किंतु बाकी सब समय देखेंगे की वो जो है वह तुगलक है ना तो वो औरंगज़ेब है इस तरह के पागल लोग राज करते हैं तो इससे तो बटर है की हमारे यहां डेमोक्रेसी हो तो जो की है थोड़ा बहुत तो अकाउंटेबिलिटी रिस्पांसिबिलिटी रहे वरना तो आधे राजा तो पागल होता है तो इसलिए यह जो मॉडर्न जो इतिहास है साथ-साथ में ही ये जो हमारे ट्रेडिशनल इतिहास है इन दोनों का संयम जो है अपने को राम कृष्णा साहित्य और मां स्वामी जी के टीचिंग्स में और उनकी लाइफ में देखने को मिलता है अच्छा तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं