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Swami Vivekananda's Macrocosm & Microcosm ·

ज्ञान योग स्वामी विवेकानन्द Cosmos Macrocosm 17 Oct 2023

आधुनिक विज्ञान और आध्यात्मिकता के बीच संघर्ष और स्वामी विवेकानन्द का समन्वय

स्वामी विवेकानंद के ज्ञान योग के बारे में हम लोग पढ़ रहे थे लेक्चर का नाम है कॉस्मस द मैक्रो कॉस्म अभी तक हमने देखा कि किस तरह से स्वामी जी समझाते हैं कि इवोल्यूशन के जो थिरी है आज का जो मॉडर्न साइंस हमको सिखाता है और हमारा धर्म इन दोनों के बीच में कोई बहुत बड़ा डिफरेंस नहीं है वो जब इवोल्यूशन की थिरी सबसे पहली बार शुरू हुई थी यह चार्ल्स न और बाकी सब लोगों ने इसको जो डेवलप किया उस समय यूरोप में खास करके अमेरिका में एक बहुत बड़ा एक उसके सामने विरोध प्रकट हुआ क्योंकि यह लोग कहते हैं कि वो चार्ल्स डार्विन का कहना था कि बंदर में से मनुष्य आया है तो अभी क्या है कि वह तो कोई हवाहवा में नहीं बोल रहा था उसने एक पूरे जहाज में बैठ कर के एक समुद्र यात्रा की थी एक ऐसे वो टापू प गया था द्वीप समूह पे जहां पर उस उसने देखा कि जो कि आज के मॉडर्न पशु या तो पंखी सब है उनके एंसेट या तो फिर कहेंगे कि उस कैरेक्टरिस्टिक रखने वाले उसके प्रेडिसेसर्स उसको वहां पर दिखे तो उसने पूरा यह मेजर किया कि किस तरह से एक स्पीशसिंथेसिस लोगों ने जेनेट जेनेट सिम यह सब डेवलप किया इन लोगों ने सबने मिलकर के यह कहा कि धीरे-धीरे करके एक स्पीस में से दूसरी स्पीस डेवलप होती है ओवर ए लॉन्ग पीरियड ऑफ टाइम बाइबल में लिखा था कि 3000 4000 5000 साल पहले की पृथ्वी की रचना हुई है किंतु जब इवोल्यूशन और फिर धीरे-धीरे करके आर्कियोलॉजी बोल कर के जो साइंस डेवलप हुआ उन्होंने देखा कि यह पृथ्वी के जो जो कि रॉक फॉर्मेशन है यह लावा फ्लो है उस सबका एनालिसिस करके कि पृथ्वी की रचना इट सेल्फ हुई है 400 450 करोड़ साल पहले 4 टू 4.5 बिलियन इयर्स अगो तो यह जो हमारी एक इंटेलेक्चुअल होराइजन का एक्सपेंशन यूरोप में हुआ आफ्टर दी रेनेसा उसको लेकर के यह कैथोलिक धर्म को बहुत ही बड़ा झटका लगा था उनको एक बहुत ही बड़ा शौक लगा था अभी यह कोपरनिकस ने कहा कि पृथ्वी तो कहीं वो विश्व का केंद्र नहीं है जहां तक सोलर सिस्टम का प्रश्न है सोलर सिस्टम का केंद्र है सूरज और सूरज इट सेल्फ अपना जो सूर्य है सन है इट सेल्फ इज वन स्टार अमंग द मिलियंस एंड बिलियंस एंड बिलियंस ऑफ स्टार्स व्हिच फॉर्म मिल्की वे गैलेक्सी और मिल्की वे गैलेक्सी की तरह कितनी ही गैलेक्सी है जो कि लोकल क्लस्टर सुपर क्लस्टर वगैरह बनाती है और जो जद एक ब्रह्मांड के बारे बारे में सोचा जाए तो कहीं यह 15 12 15 बिलियन इयर्स अगो यानी कि 1500 1200 करोड़ साल पहले बिग बैंग विस्फोट में से यह प्रकट हुआ है और उसके बाद में धीरे-धीरे करके एक के बाद एक एलिमेंट्स बनते गए एक के बाद एक स्ट्रक्चर्स बनते गए गैलेक्सी स्टार्ट हुई ब्लैक होल्स बने सोलर सिस्टम्स बनी सोलर सिस्टम में से प्लेनेट हुए प्लेनेट में से एक प्लेनेट है पृथ्वी पृथ्वी पर आज से 350 करोड़ साल पहले सर्वप्रथम वह केमिकल रिएक्शन में से वह मल्टी सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट म बनना शुरू हुए और फिर धीरे-धीरे करके उसमें से देखेंगे कि व पहले तो हुए ये फिश या तो फिर जो पानी में तैरने वाले पशु उसके बाद में जमीन पर चलने वाले और उसके बाद में मैमल्स रेप्टाइल्स में से मैमल्स मैमल्स में से ये बंदर एक आया और वही डेवलप होते होते आखिर में यह मनुष्य आया है तो यह जो रेनेसा है रीबर्थ ऑफ लर्निंग इस यूरोप में जो स्टार्ट हुआ उसने पूरे क्रिश्चन धर्म को बीच में भीतर में से हिला दिया कि किस तरह से बाइबल जो आपको सिखाता है सृष्टि की रचना के बारे में सृष्टि के बारे में और क्या आज का मॉडर्न साइंस कहता है तो इसको लेकर के यूरोप में खास करके साइंस और रिलीजन दोनों के बीच में बहुत बड़ा एक गैप हो गया अभी किंतु जब स्वा जी खुद यह मॉडर्न साइंस समझने का प्रयत्न आरंभ करते हैं तब वह देखते हैं कि जिस जो प्रॉब्लम क्रिश्चियनिटी को फेस करना पड़ा है क्रिश्चन बाइबल या तो क्रिश्चन थियोलॉजी जिस तरह से इस जगत को सीमित करके देखती है हमारा वेदांत या तो हमारे भारतीय शास्त्र हमारे पुराण उपनिषद इस विश्व ब्रह्मांड का एक विराट स्वरूप देखते हैं सृष्टि स्थिति प्रलय की यह साइकल चलती ही जाती है प्रत्येक साइक कल को एक कल्प कहते हैं और एक के बाद एक कल्प आते ही रहते हैं आते ही रहते हैं और इस कल्प के भीतर में जैसे कि स्वामी जी कहते हैं कि जब शून्य में से सृष्टि जिस तरह से क्रिश्चियनिटी कहता है ऐसा कभी नहीं हुआ यह साइकल हमेशा से चलती रही है एक ब्रह्मांड था ब्रह्मांड से उसका विनाश होकर के या तो प्रलय होकर के वो बीज स्वरूप में चला गया जिसको कहेंगे हिरण्य गर्भ उस में चला गया फिर उसमें से फिर से नए ब्रह्मांड की सृष्टि आरंभ हुई सृष्टि स्थिति प्रलय यह चक्र यह साइकिल हमेशा से चलती आ रही है तो अभी हम कहेंगे जैसे क्रिश्चियन लोगों को कहने में यह बड़ा ही परेशानी होती है कि बंदर में से मनुष्य कैसे आ सकता है या तो फिर कहेंगे कि वन सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट म में से मल्टी सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट म उसमें से फिर रेप्टाइल्स बर्ड्स मैमल्स ये सब इवोल्यूशन कैसे हो सकता है मनुष्य जिसका कि स्वभाव देवी स्वभाव है जीसस क्राइस्ट स्वयं ईश्वर के पुत्र पृथ्वी पर जन्म ग्रहण किए तो जिनका स्वभाव इस तरह से देवी है वह क्या किसी बंदर में से प्रकट हो सकते हैं तो यह उनका जो प्रॉब्लम था स्वामी जी कहते हैं कि हम लोग इवोल्यूशन स्वीकारने को तैयार है यदि इवोल्यूशन समझाते हैं इवोल्यूशन वाले साइंटिस्ट हमारी एक बात इन टर्न एक्सेप्ट करें क्या एक्सेप्ट करें कि आपको यह स्वीकार करना होगा कि जिस तरह से एक बीज स्वरूप में से सिंगल सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट में से इवोल्यूशन होते-होते आज का मॉडर्न मनुष्य होमो सेपियंस जिसको कहते हैं वह डेवलप हुआ है तो इन टर्न आप यह एक्सेप्ट कीजिए कि इवोल्यूशन से पहले इवोल्यूशन था इवोल्यूशन क्या है इवोल्यूशन है कि स्थूल में से सूक्ष्म में जाना अर्थात कि ईश्वर या तो एक डिवाइन पावर जिसको कि हम आत्मन कहेंगे ना कि ब्रह्मण कहेंगे इसमें से यह सृष्टि का आरंभ हुआ है तो यदि आप यह कहेंगे कि हां एक स्पिरिचुअल पावर है एक एक सटल पावर है एक सर्वव्यापी जो कि समय काल और मन की सीमाओं से परे है ऐसी एक कोई अंतिम सत्ता है जिसमें से फिर यह ट्रांसफॉर्म होकर के की अभी बहुत सारी थिरी है मायावादी है ना कि आप कुछ भी कहेंगे कि सृष्टि है वो क्या ब्रह्मण का ट्रांसफॉर्मेशन है ना कि ब्रह्मण का यह एक दूसरा जिसको कि मिराज कहेंगे जैसे कि वेदांत में कहते हैं दूध में से दही बनता है यह ट्रांसफॉर्मेशन है जबकि एक दूसरी प्रोसेस है डेजर्ट में रण प्रदेश में आपको पानी दिखता है अभी ऐसा नहीं है कि पानी है और डेजर्ट या तो रेत नहीं है या तो फिर रेत है और पानी नहीं है दोनों है हालांकि है एक ही किंतु दिखते हैं दो दृष्टि भ्रम की वजह से यदि आप रास्ते में चलते हैं रात को एक रस्सी पड़ी है तो आपको सडन ऐसा डर लग जाएगा कि मेरे रास्ते में साप चल रहा है और आप भयभीत हो जाएंगे किंतु थोड़ा सा लाइट उसके ऊपर में डाल के देखेंगे तो पता चलेगा साप नहीं है यह रस्सी है तो यह ट्रांसफॉर्मेशन किसी भी तरह से हुआ हो ब्रह्मण का विश्व में परिणति हुई हो कि ब्रह्मण के ऊपर में यह आभास दिखता हो वेदांत की बहुत सारी स्कूल से जो भी स्कूल को हम फॉलो करें डजन मैटर किंतु ब्राह्मण में से यह सृष्टि की उत्पत्ति हुई है या तो फिर स्वामी जी जिस तरह से बहुत सुंदर स्माइल देकर के उदाहरण देकर के कहते हैं कि यह रेल की दो पटरी की तरह है ब्रह्मण और विश्व सृष्टि यह हमेशा साथ-साथ चल रहेगी कभी एक दूसरे के साथ में मिलेगी नहीं क्यों क्योंकि ब्रह्मण के ऊपर में सृष्टि का आभास जति होता है तो सृष्टि हमेशा से जब तक ब्रह्मण जो कि बियोंड टाइम स्पेस एंड कोजन है सृष्टि भी विदन दिस टाइम स्पेस एंड कोजन उसका चक्र चलता रहेगा हालांकि ब्रह्मण भी इटरनल है सृष्टि भी इटरनल है इटरनल शब्द ब्राह्मण के लिए यूज करना ठीक नहीं क्योंकि इटरनल का अर्थ है कि विदन द टाइम बाउंड ऑफ टाइम यू आर देयर एट द बिगिनिंग एंड यू आर देयर एट द एंड द ब्रह्मण इज बियोंड टाइम बट स्टिल हमारी भाषा जो है ब्रह्मण को डिस्क्राइब करने के समय में वो छोटी पड़ जाती है ठाकुर ने विद्यासागर को कहा था कि सब कुछ झूठा हो गया है ब्रह्मण झूठा नहीं हुआ तो विद्यासागर कहते हैं कि अरे वाह आज मुझे एक नई चीज सीखने को मिली तो झूठा नहीं हुआ इसका क्या अर्थ बाकी सब चीजों का बाकी सब देवी देवताओं का बाकी सब शास्त्र के मंत्रों का यह विश्व में जितने भी साइंस टेक्नोलॉजी विद्या है परा अपरा दो तरह की विद्या के बारे में जो उपनिषद में कहा गया है सभी विद्या एं मुंह से बोल कर के मुंह से वर्णन करके मन से सोच कर के वो क्योंकि मु मुंह में से वो उसका वर्णन हुआ है मुंह से इसलिए व जुटी हुई है किंतु ब्रह्मण का वर्णन मुंह से नहीं कर सकते मन से सोच नहीं सकते इसलिए ब्रह्मण जूठा नहीं हुआ है तो नेचरली नेसेसरीली कि हम जब ब्राह्मण के बारे में कुछ भी कहेंगे वो हमारी लैंग्वेज हमेशा के लिए वो छोटी पढ ही जाएगी वो लिमिटेड हो ही जाएगी किंतु विद इन दिस लिमिटेड फ्रेमवर्क ऑफ लैंग्वेज हम कहेंगे कि ब्रह्मण और सृष्टि दोनों हमेशा से रहे हैं और रहेंगे ही हमेशा के लिए वही बात है कि ब्राह्मण अचल अटल निष्क्रिय है उसमें कोई परिणाम नहीं है जबकि सृष्टि जो है वो सृष्टि स्थि स्थिति प्रलय की साइकल से वो गुजर रही सृष्टि स्थिति प्रलय की साइकल उसमें वह डायनेमिक है और यह साइकल उसमें चलती रहती है तो दिस इज द एसेंशियल डिफरेंस एक ही है हमको भ्रम स्वरूप दो दिखती है या तो फिर आप वेदांत की जो भी स्कूल ले लीजिए वेदांत की कोई कहता है कि ये ट्रांसफॉर्मेशन है कोई कहता है ब्रह्म है कोई कहता है माया है व्हाट एवर दो है तो स्वामी जी कहते हैं इवोल्यूशनिस्ट को जो इवोल्यूशन की थिरी सिखाते हैं आप यह बात एक्सेप्ट हम आपकी यह बात एक्सेप्ट करने को तैयार है कि सिंगल सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट सम में से मल्टी सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट म एक डेवलप हुए फिर उसमें से इवोल्यूशन होते होते आज का मॉडर्न होमोसेपियंस स्पीस जो है वो डेवलप हुआ हम स्वीकार करने को तैयार है और अस्वीकार करने का कुछ नहीं है यह जो आर्कियोलॉजिकल एविडेंस जो हमको मिलते हैं तो वो तो बड़े ही स्पष्ट है कोई अंध या तो मूर्ख व्यक्ति ही इस प्रूफ का विरोध करेगा कोई कहेगा मैं एक सीनियर साधु के साथ में मेरी बात हो रही थी तो मैंने वैसे ही बात बात में कहा कि ये डायनोसोर थे इतने बड़े थे उसमें से हम मनुष्य आए हैं ऐसा कुछ इवोल्यूशन का कोई पॉइंट मैंने बोल दिया होगा तो महाराज जी मेरे पर इतना गुस्सा हो गए अरे तुम मूर्ख आदमी की तरह क्या बात कर रहे हो डायनोसोर में से क कभी मनुष्य आ सकता है क्या वोह कहां उसका साइज और उसका देखो तुम उसका स्ट्रक्चर कहां हम है मैंने कहा डायरेक्ट डिसेंडेंट नहीं है हम किंतु वो इवोल्यूशन होते होते हम आए हैं किंतु फिर मैंने देखा कि देखिए वो महाराज ज इतने सीनियर भी है इंजीनियर मने वो इनके पास में इंजीनियरिंग की डिग्री थी पूर्वा श्रम में किंतु फिर भी वो इवोल्यूशन को एक्सेप्ट करने को तैयार नहीं है तो मैंने इमीडिएट वो बात वहीं पर छोड़ दी मैं वैसे ही बड़ा जूनियर था और जिन लोगों के बड़े ही एक दृढ़ विचार होते हैं उनके साथ में आर्गुमेंट करना ठीक नहीं है तो इवन आज के समय में भी कोई कोई कहता है कि यह जो हमारी नजर के सामने इतने सारे प्रूफ दिखाई देते हैं वो प्रूफ गलत है या तो फिर प्रूफ को एक्सेप्ट नहीं करना है स्वामी जी इस तरह से नहीं थे स्वामी जी ने कहा कि वी आर रेडी टू एक्सेप्ट योर थिरी ऑफ इवोल्यूशन प्रोवाइडेड दैट यू एक्सेप्ट इन टर्न कि सृष्टि ब्रह्मण में से प्रकट हुई है तो फिर हमको यह बात स्वीकारने में दिक्कत नहीं है कि चलो फिजिकल फॉर्म ओवर ए पीरियड ऑफ टाइम डेवलप होते रहेंगे इवोल्व होते रहेंगे और अकॉर्डिंग टू दी नेसेसिटी अकॉर्डिंग टू द टाइम स्पेस एंड एज वो उसका इवोल्यूशन होता रहेगा कल कहीं जाकर के हम हम देखते हैं कि आज हम जमीन पर चल रहे हैं बोलकर के हमारे दो पैर है दो हाथ है कल कहीं जाकर के पृथ्वी का विनाश हो गया मान लीजिए न्यूक्लियर वर हो गई 1015 न्यूक्लियर बम इसने वहां पे फेंक दिए वो सामने वाले ने यहां पे फेंक दिए पृथ्वी रेडियो एक्टिव हो गई तो अभी ह्यूमन काइंड मैनकाइंड हम लोग क्या करेंगे हम लोग बड़ी-बड़ी स्पेसशिप बना कर के अवकाश में चले जाएंगे स्पेस कॉलोनी बनाएंगे अभी यदि हम अवकाश में स्पेस में रहने को जाते हैं तो हमारा जो स्ट्रक्चर है वो बिल्कुल रेडी नहीं है स्पेस में रहने के लिए जो एस्ट्रोनॉट जब पृथ्वी पर आते हैं तो उनको बड़ा ही पेन होता है पूरे बॉडी में क्यों क्योंकि स्पेस में बोन डीके होता है हमारी जो हड्डियां है उसका क्षय होना शुरू हो जाता है क्योंकि हड्डियों में शक्ति जहां पर ग्रेविटी है वह ग्रेविटी सहन करने के लिए चाहिए किंतु अवकाश में जहां पे ग्रेविटी है ही नहीं वहां पे तो यह शक्ति की जरूरत नहीं है तो इमीडिएट इवोल्यूशन अपना काम शुरू कर देता है यह लोग क्या 50 दिन 100 दिन के लिए अ 30 40 50 दिन के लिए इंटरनेशनल स्पे स्टेशन में रहेंगे इन लोगों को एवरी डे वन आवर टू टू वर कंपलसरी एक्सरसाइज करनी पड़ती है क्योंकि इवोल्यूशन इस तरह से काम करता है कि 30 दिन ना 40 दिन भी स्पेस में रहे तो इमीडिएट उनका बंड के आरंभ हो जाता है हड्डियों का क्षय आरंभ हो जाता है इतना पावरफुल ये इवोल्यूशन है य मैंने बहुत सारे इस तरह के एग्जांपल पड़े हैं यह जो यूरोप में यूरोप में एक जगह पे एक जंगल था एक फॉरेस्ट था फॉरेस्ट में देखा गया कि वहां पे जो यह होती है फंगस फंगस जो कि पेड़ को लग के रहती है उसका ग्रीन कलर की फंगस थी वहां पे अभी सडन क्या हुआ कि फॉरेस्ट में कहीं पास में आग लग गई तो तो अभी क्या है कि आग लगने से पत्तों का पत्ते तो जल जाते हैं वो उसके ये जो थड है जो ट्रंक कहते हैं उसका पेड़ का वो सॉलिड पार्ट वो रह जाता है ब्रांचेस वगैरह ब्रांचेस एंड ट्रंक किंतु पत्ते जल जाता है तो इस तरह से पत्ते जल गए और जल कर के उस जंगल ये फॉरेस्ट का कलर ग्रीन में से ग्रे हो गया अभी ये जो फंगस जो पेड़ को लग कर के रहती है उसको तो अपने को डिफेंड करना है है ये जो उसके जो शिकारी है प्रिडेटर है उससे तो वो अपने को कैमफ्लेज करती है अपना कलर चेंज करके वो पेड़ के कलर के साथ में मिल जाती है अभी जंगल का कलर तो ग्रीन था तो फंगस का कलर ग्रीन था अभी जब आग लगी और जंगल का कलर ये राख एश वगैरह गिर कर के ग्रे कलर का हो गया तो विद इन वन टू थ्र फोर डेज ये फंगस है उसने अपना कलर चेंज कर दिया ग्रीन में से उसका कलर भी ग्रे हो गया क्योंकि ग्रीन और ग्रे बैकग्राउंड में ग्रीन फंगस होगी तो इमीडिएट देख जाएगी और जो भी उसके शिकारी है फंगस खाने वाले जो भी प्राणी है पशु है वो खाएंगे उसको तो विदन थ्री फोर डेज उसने अपना कलर चेंज कर दिया तो इवोल्यूशन इतना फास्ट काम करता है और यह इवोल्यूशन देखिए ठाकुर की बात है कि ठाकुर जब हनुमान भाव की साधना कर रहे थे महावीर भाव की साधना कर रहे थे तब क्या हुआ हमने देखा कि कि वो उनकी जो कि करोड़ रज्जू का वह जो आखिरी वह जो पार्ट है व धीरे-धीरे बढ़ना शुरू हो गया जैसे कि एक हनुमान की पूंछ होती है तो पूंछ की तरह तो यह देखिए कि इवोल्यूशन अपने मन के साथ में या तो फिर वो कंडीशंस व एटमॉस्फियर एनवायरमेंट के साथ में मिलकर के कितना रेपिडली काम करता है तो इवोल्यूशन को ना स्वीकार करने का कोई प्रश्न ही नहीं है यह समुद्र की सतह के कितने ही नीचे सैकड़ों फीट नीचे जहां पर सूरज का प्रकाश बिल्कुल नहीं जाता वहां पर जो प्रेडेट ये जो मछलियां वगैरह होती है उनकी आंखें नहीं होती क्योंकि उनको आंख से देखने से कोई दिखेगा नहीं क्योंकि वह प्रकाश ही नहीं वहां पे तो वो सोलर सोनार जिसको कहते हैं सोनार सेंस वे लोग डेवलप कर देती है सोनार अर्थात की साउंड वेव्स वे लोग साउंड वेव्स फेंकें उसके रिटर्न में जो साउंड वेव्स आएंगे उसका एनालिसिस करके वे लोग अपने ब्रेन में एक पिक्चर बनाएंगे यह जो सोनार वेव्स से चमगादड़ के भी होते हैं बेट जिसको कि इंग्लिश में कहते हैं तो यह चमगादड़ वह रात को उड़ते हैं रात को शिकार करते हैं रात को खाना खाते हैं इसलिए उनके पास में भी सोनार सेंस है तो यह इवोल्यूशन काम करता है शरीर को किसी भी ऑर्गेनिस्ट म को वो किस एनवायरमेंट में है उसके अनुसार उसको इमीडिएट मॉडिफाई करना शुरू कर देते हैं जो लोग इस तरह का स्टडी करते हैं उनको है कि यह ट्रांसफॉर्मेशन कितना रैपिड हो सकता है तो इसीलिए यह कहना कि यह इवोल्यूशन गलत है मॉडर्न साइंस गलत है आज तो हम लोग दूरबीन से देखते हैं यह जो वेब स्पेस टेलिस्कोप है जेम्स वेब टेलिस्कोप वह सबसे ज्यादा वह दूर में देखता है तो वह देखते हैं कि आज से 1200 करोड़ साल पहले समथिंग अराउंड 12 बिलियन इयर्स 10 बिलियन इयर्स अगो यह जो फर स्पेस स् चर थे वह आरंभ हो गए थे उसका डेवलप होना और उसका पिक्चर भी यह लोग निकालते हैं अभी मैथमेटिक्स और फिजिक्स आज का इतना एडवांस है कि हम लोग यह फस्ट स्केल ऑफ टाइम एंड स्पेस एंड डिस्टेंस हम लोग कैलकुलेट कर पाते हैं क्योंकि हमारे पास में थिरी ऑफ रिलेटिविटी है जिसकी मदद से हम ब्रह्मांड को कॉस्मो को समझ सकते हैं तो जब मॉडर्न साइंस इतना डेवलप हो गया है जब मॉडर्न साइंस की वजह से हमारे पास में ये सॉलिड स्टेट फिजिक्स है और इसके माध्यम से अपने पास में ये इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट्स है जिसका कि हम डे टू डे लाइफ में यूज करते हैं तो वह यूज करने के बाद में हम कैसे कहेंगे कि यह मॉडर्न साइंस गलत है या तो फिर यह मोबाइल टेक्नोलॉजी है यह मोबाइल टावर्स में सुबह को वॉक करता हूं यहां पे पब्लिकेशन की टेरेस पे तो कुछ चीजें मैंने अभी-अभी नोट करना शुरू की है मैं जहां पे भी देखता हूं सब जगह प ये मोबाइल टावर लगे हुए हैं यह मोबाइल टावर का डेंसिटी इतना बढ़ गया है पहले ऐसा होता था हम जब वो वॉकिंग करते थे सुबह में कुछ भी तो पेड़ दिखते थे अच्छे से वो पशु पक्षी दिखते थे अभी है कि चारों ओर आपको खास करके ये सिटी सेंटर्स में इतने सारे मोबाइल टावर्स हो गए हैं तो ये दिस इज अ न्यू आर्किटेक्चरल नोम ये जो कि आज से 10 15 20 50 साल पहले वो जो लोग रहते होंगे वे लोग आज के समय को रिकॉग्नाइज ही नहीं कर पाएंगे किस तरह से मोबाइल टेक्नोलॉजी ने वि विद इन अ वेरी शॉर्ट पीरियड ऑफ टाइम इतना मासिफ रेवोल्यूशन पूरे जगत में लाया है ये सोशल मीडिया है यह इंटरनेट टेक्नोलॉजी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के ऊपर में मैं पहले से ही नजर रख रहा हूं आज से चार पाच साल पहले इसके एकेडमिक पेपर्स पब्लिश होना शुरू हुए थे जिसको कि आज न्यूरल लर्निंग कहते हैं या तो फिर इफोर्स लर्निंग कहते हैं न्यूरल नेट कहते हैं वह सब चीजों के बारे में आज से 1015 साल पहले फंडामेंटल रिसर्च शुरू हुआ था एकेडमिक्स में जिस तरह का यह दिखता है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पागल हो गया और उसने सभी लोगों को मनुष्य को मारना शुरू कर दिया यह जो सब साइंस फिक्शन सिनेरियो जो है उसको सही होते होते मने कितने 100 साल लग जाएंगे और वह सही होंगे कि भी नहीं होंगे ह्यूमन माइंड की जो कॉप्लेक्स है ह्यूमन ब्रेन की कॉप्लेक्स मोर देन 100 ट्रिलियन कनेक्शंस विद इन अवर ब्रेन अर्थात की यह जो नंबर ऑफ न्यूरॉन सेल्स है उसके बीच के जो कनेक्शन है 100 ट्रिलियन से भी ज्यादा मने विश्व ब्रह्मांड में जितने तारे होंगे इससे भी ज्यादा शायद हमारे भीतर में न्यूरल कनेक्शन है तो इसका कॉप्लेक्स की कंपैरिजन कौन कर सकता है किंतु ऑलरेडी साइंटिस्ट हैव डेवलप द आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वर्थ 100 ट्रिलियन कनेक्शंस विदन इट तो अभी इन लोगों की लैंग्वेज तो हमको इतनी कोई समझ में नहीं आती क्या मैथमेटिक्स है क्या साइंस है किंतु हम देख रहे हैं कि रिजल्ट सही सही देख रहे हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज कितनी स्मार्ट हो गई है तो स्वामी जी का यह जो सोल्यूशन है एक 19th सेंचुरी में एक भय प्रकट हुआ था एक डर प्रकट हुआ था कि रिलीजन और साइंस इन दोनों के बीच में एक फंडामेंटल गैप हो जाएगा एक फंडामेंटल फाइट एक फंडामेंटल स्कज म हो जाएगा जो कि कभी एक दोनों को साथ में नहीं रहने देगा और इसके बाद में यह जो इमेजिनेशन करके लोग जो सब लिखते हैं ना कि भविष्य कैसा होगा तो मनुष्य पूरा मटेरियल िक होगा ईश्वर और भगवान के बारे में वही बातें करेंगे जो कि इस जीवन संग्राम में हार गए या तो कोई मेंटली डिफेक्टिव है या तो फिर वह कायर है कवर्ड्स है ऐसे ही लोग धर्म और भगवान के बारे में बात करेंगे और जिन लोगों में थोड़ा भी विल पावर है थोड़ी भी मेंटल मेधा शक्ति है वे लोग हमेशा साइंस को मानेंगे तोय भय यह आज से कुछ समय पहले चल रहा था 19th सेंचुरी में खास करके स्वामी जी हैज ब्रिज दिस गैप बिटवीन साइंस एंड स्पिरिचुअलिटी स्वामी जी कहते हैं कि यदि आप लोग हमारी एक बात मान ले तो हम आपकी सब बात मानने को तैयार है यह ब्रह्मांड की सृष्टि की उत्पत्ति जैसे क्रिश्चन बाइबल में लिखा है कि भगवान ने एक साथ में सभी जितने भी यह सिंह शेर ये पंखी ना कि यह पृथ्वी ना कि तारे ना मनुष्य ना कि समुंदर ना पहाड़ जो कुछ भी है एक जादुई लकड़ी घुमाई एक साथ में सब कुछ प्रकट हो गया ऐसा नहीं है ऐसा तो वेदांत भी नहीं मानता वी आर रेडी टू एक्सेप्ट योर थिरी ऑफ इवोल्यूशन सब तरह का इवोल्यूशन है पृथ्वी का इवोल्यूशन ब्रह्मांड का कॉस्मो का इवोल्यूशन यह बायोलॉजिकल इवोल्यूशन सब स्वीकार करने को तैयार है यदि आप साथ में यह स्वीकार करते हैं कि मटेरियल वर्ल्ड जो है यह जो सृष्टि स्थिति प्रलय की जो साइकल है इसके पीछे एक चेतन सत्ता विद्यमान है और इसी चेतन सत्ता का रि लेक्शन इस जड़ जगत में हो रहा है यदि आप लोग यह एक बात स्वीकार करते हैं तो हम आपकी सब बात स्वीकार करने को तैयार है तो यहां तक हमने पछ अभी तक देखा था अभी हम देखते हैं स्वामी जी आगे क्या कहते हैं थोड़ा सा आगे

ईश्वर में से सृष्टि की रचना

पढ़ते हैं स्वामी जी कहते हैं वी सी देन दैट नथिंग कैन बी क्रिएटेडटेड वॉल्यूम का पेज नंबर 208 स्वामी जी कहते हैं वी सी देन दैट नथिंग कैन बी क्रिएटेड्रॉअर्नेविगेटर फ्रेम समय के भीतर का यह कांसेप्ट है टर्निंग किंतु ब्रह्मण यह टर्निया तो समय के बाहर है किंतु वो डिस्क्राइब करने के लिए अपनी लैंग्वेज जो है वो वो बेचारी उसका ये कैपेसिटी नहीं कि वो आइडिया शब्दों में व्यक्त करें इसलिए जो कि यह शब्द हालांकि गलत है फिर भी हमको यूज करने पड़ रहे हैं एवरीथिंग एसिस्ट्स थ्रू टर्निन विल एजिस्ट थ्रू जो कुछ भी है अनंत काल से था अनंत काल तक रहेगा ओनली द मूमेंट इज इन सक्सी इंग वेव्स एंड होलोज गोइंग बैक टू फाइन फॉर्म्स एंड कमिंग आउट इन टू ग्रोस मेनिफेस्टेशंस वही है कि सृष्टि स्थिति प्रलय की यह साइकल चलती रहेगी मूवमेंट इज इन सक्सी वेव्स एंड होलोज यह जो यह सृष्टि का यह जो धारा है प्रवाह जो है वो वेव्स एंड होलो यानी कि तरंग और तरंग के बाद में जो आता है होलो यानी कि होलो का हिंदी करेंगे व तरंग का वो जो नीचे का जो भाग होता है वोह य तरंगा का सृष्टि की प्रवाह चलता रहेगा सूक्ष्म रूप में जाएगा स्थूल रूप में आएगा स्थूल रूप में से सूक्ष्म रूप में जाएगा दिस इवोल्यूशन एंड इवोल्यूशन इज गोइंग थ्रू आउट द होल ऑफ नेचर ये इवोल्यूशन अर्थात कि स्थूल में से सूक्ष्म में प्रकट स्थूल की सूक्ष्म में गति और इवोल्यूशन यानी कि सूक्ष्म की स्थूल में गति यह पूरे प्रकृति में जहां तक हमारी नजर जाती है पूरी जो प्रकृति है विभिन्न रूप से यह साइकल चलती रहेगी द होल सीरीज ऑफ इवोल्यूशन बिगिनिंग विद द लोएस्ट मेनिफेस्टेशन ऑफ लाइफ एंड रिचिंग अप टू द हाईएस्ट द मोस्ट परफेक्ट मैन मस्ट हैव बीन द इवोल्यूशन ऑफ समथिंग एल्स दिस इज द क्रक्स यह जो एकदम इंपोर्टेंट बात है स्वामी जी ने कहा कि इवोल्यूशन एंड इवोल्यूशन एंड द होल सीरीज ऑफ इवोल्यूशन बिगिनिंग विद द लोएस्ट मेनिफेस्टेशन ऑफ लाइफ यह पूरी इवोल्यूशन की साइकल जो है यह पूरी इवोल्यूशन का यह जो प्रवाह है सबसे छोटे से छोटे सिंगल सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट म में से मनुष्य तक त की जाने की यह पूरी यात्रा है यह जो जर्नी है रिचिंग अप टू द हाईएस्ट हाईएस्ट क्या है मनुष्य सिंगल सेल ऑर्गेनिस्ट म में से एक कोषी जीव में से मनुष्य तक आने की यह यात्रा है द परफेक्ट मैन हाईएस्ट क्या है परफेक्ट मैन यानी कि कहो कि भगवान राम कृष्ण ना कि आइंस्टाइन ना कि महात्मा गांधी ना कि यह लोग जो कि हमारे लिए आशीर्वाद समान है पृथ्वी के लिए ऐसे लोगों का पृथ्वी पर जन्म लेना एक कोशी जीव में से मस्ट हैव बीन द इवोल्यूशन ऑफ समथिंग एल्स यह पूरी जर्नी है एक कोशी जीव में से परफेक्ट मैन तक की महात्मा गांधी अल्बर्ट आइंस्टाइन स्वामी विवेकानंद यह जो जर्नी इससे पहले व कोई एक ऐसी चीज होगी उसमें से यह एक कोशी जीव बना है एक दिव्य सत्ता होगी एक डिवाइन पावर होगा जिसमें से कि एक कोशी जीव बना है तभी तो यह एक कोशी जीव में से सिंगल सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट म में से यह महात्मा गांधी या तो अल्बर्ट आइंस्टाइन या तो स्वामी विवेकानंद आए होंगे अदर वाइज वो सिंगल सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट म में ऐसा तो क्या है जो कि इस तरह के परफेक्ट मनुष्य को जन्म दे पाए तो उसके पीछे इवोल्यूशन है अर्थात कि दिवाइन एक डिवाइन पावर है एक दिव्य सत्ता है जिसमें से एक कोषी जीव प्रकट हुआ है यह ब्रह्मांड बिग बैंग में से आरंभ हुआ और धीरे-धीरे करके स्टार्स एंड गैलेक्सी एंड प्लेनेट बनती गई और फिर इस छोटी सी एक प्लेनेट के ब्रह्मांड के एक छोटे से कोने में एक छोटी सी प्लेनेट पृथ्वी उसके ऊपर में एक छोटा सा एक कोशी जीव और उसमें से धीरे-धीरे हम मनुष्य हुए तो यह जो पूरा इवोल्यूशन का प्रवाह है उसके पीछे में ईश्वर में से सबसे पहला वो हिरण्य गर्भ यानी कि एक बीज प्रकट हुआ होगा जिसमें से यह बीज में से आज ये विराट वटवृक्ष बना है द क्वेश्चन इज द इवोल्यूशन ऑफ वट व्हाट वाज इवॉल्वड प्रश्न है कि किस चीज में से यह बीज प्रथम रण्य गर्भ हुआ जिसमें से यह सृष्टि प्रारंभ हुई ऐसा कौन सा चीज है ऐसी कौन सी सत्ता है ऐसी कौन सा यह है एसिस्टेंसिया जिसमें से कि ये सृष्टि का आरंभ हुआ तो उत्तर है गॉड ईश्वर और यदि हम वेदांत की भाषा में कहेंगे तो आत्मन या ब्रह्मण द इवोल्यूशनिस्ट विल टेल यू दैट योर आइडिया दैट इट वाज गॉड इज रंग किंतु जब हम यह इवोल्यूशनिस्ट को कहेंगे कि हम आपका सब कुछ स्वीकार करने को तैयार है धीरे-धीरे करके यह ब्रह्मांड बना पृथ्वी बनी तारे बने हम सब स्वीकारने को तैयार है जब तुम कहोगे कि ब्रह्मांड की उत्पत्ति इट सेल्फ ईश्वर में से हुई है तो इवोल्यूशनिस्ट कहेगा कि ईश्वर में से उत्पत्ति होना यह गलत सिद्धांत है क्यों बिकॉज यू सी गॉड इज इंटेलिजेंट बट वी फाइंड दैट इंटेलिजेंस डिपेंड्स डेवलप्स मच लेटर ऑन इन द कोर्स ऑफ इवोल्यूशन कितना मॉडर्न आर्गुमेंट करते हैं ईश्वर है मेधा शक्ति ईश्वर के भीतर में है ईश्वर सेंटियंट जद मड लैंग्वेज में कहा जाए ईश्वर इस सेंटेट अर्थ इसका अर्थ हुआ कि ईश्वर के भीतर में चेतन मेधा शक्ति है किंतु सृष्टि के प्रारंभ की हम देखेंगे कि आज से 1200 करोड़ साल पहले 1500 करोड़ साल पहले सृष्टि का प्रारंभ हुआ बिग बैंग में से तो जिसको कि हम सेंटियंट ह्यूमन बीइंग कहते हैं उसका प्रादुर्भाव कब हुआ होमो सेपियंस जिसको हम कहते हैं आज से 3 लाख साल पहले तो कहां 1500 करोड़ साल पहले सृष्टि का प्रारंभ हुआ जो कि इनसेंटियंट थी जड़ थी और जड़ में से चेतन आते-आते 1500 करोड़ साल में से जड़ में से चेतन आते-आते ऑलमोस्ट 1500 करोड़ साल ही लगे हैं क्योंकि यह चेतन सत्ता या तो फिर सिंगल सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट म जिसको कि हम सेंटियंट कहेंगे जीवंत कहेंगे जिसमें से थोड़ा बहुत एक लॉजिकल पावर है उसमें तो वह आज से मुश्किल से 350 करोड़ साल पहले उसका प्रादुर्भाव हुआ था 3.5 बिलियन इयर्स अगो पृथ्वी के ऊपर में और मनुष्य होमोसेपियंस मॉडर्न ह्यूमन तो आया मुश्किल से 3 लाख साल पहले तो कहां 1500 करोड़ साल पहले सृष्टि की रचना कहां मुश्किल से 3 लाख साल पहले मनुष्य का प्रादुर्भाव तो ईश्वर यदि सेंटियंट है ईश्वर यदि रेशनल है ईश्वर में जयदिश क्ति है तो वह मेधा शक्ति सृष्टि के इतने लंबे समय तक वह मेधा शक्ति प्रकट क्यों नहीं हुई क्यों यह जगत जड़ था और जड़ में से चेतन या तो फिर यह बुद्धि शक्ति सेंसस इतने करोड़ों करोड़ों साल के बाद प्रकट हुई यह प्रश्न जद की उद्भव होता है वह बताता है कि ईश्वर सेंटियंट नहीं थे ईश्वर थे ही नहीं देखिए किस तरह का एक सुंदर आर्गुमेंट है इट इज इन मैन एंड हायर एनिमल्स ट वी फाइंड इंटेलिजेंस अच्छा ठीक है किंतु अभी टाइम हो गया है अभी कल देखेंगे ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु