प्रार्थना
ओम स्थापक यज धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूप अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नम स्वामी विवेकानंद भारत में दिए हुए भाषणों में से लेक्चर फ्रॉम कोलंबो टू अल्मोड़ा में से एक लेक्चर का हम पाठ कर रहे हैं नाम है माय प्लान ऑफ कैंपेन इसमें
राजाओं का अंत और लोकतंत्र की शुरुआत: सफल लोकतंत्र के लिए शिक्षा की आवश्यकता
हम देखते हैं कि स्वामी जी किस तरह से भारत में आकर के अपने भविष्यत कार्य की रूपरेखा को बता रहे हैं इस रूपरेखा के दो एस्पेक्ट है एक तो है कि थियोरेटिकल एस्पेक्ट हिस्टोरिकल सोसाइटल सिविलाइजेशनल एस्पेक्ट कि जिसमें स्वामी जी पहले तो पूरी वर्ल्ड सिविलाइजेशन की का एनालिसिस करते हैं और उसके बाद में हमको बताते हैं कि बेस्ड ऑन दिस एनालिसिस हाउ ही कैन इंप्लीमेंट हिज न्यू प्लान सो हम जो पॉइंट देख रहे थे उसमें स्वामी जी एक पूरा क्रुशल पॉइंट कि हाउ टू बेटर इंडिया एजुकेट पीपल ये पॉइंट मैंने दिए हुए हैं टेक्स्ट को मैंने सब डिवाइड कर दिया है पॉइंट्स में तो इसमें हमने देखा ऑलरेडी कि कल दो दिनों में पिछले दो दिनों में कि स्वामी जी पहले तो हिस्टोरिकल सिविलाइजेशनल एक आउटलाइन हमको देते हैं कहते हैं कि पहले तो राजाओं के पास में सत्ता थी द किंग यूज टू रूल विथ डिवाइन मेंडेट एक दिव्य सत्ता के आधारित राजा लोग राज किया करते थे यह दिव्य एक आदेश राजा को प्राप्त हुआ है जैसे कि रघुवंश है न कि सूर्यवंश है न कि चंद्रवंश है यह सब इस तरह के वंश है कि उसमें जन्म ग्रहण करने का अर्थ ही है कि आपको राजा बनना है और आपको जैसे कि किसी ना किसी देवता या किसी ना किसी ईश्वर का आशीर्वाद है इस आशीर्वाद से प्रेरित होक के आप राज्य करते हैं तो भारत में भी ऐसा था और यह यूरोप में भी एक नोबल कास्ट हालांकि भारत में जो कास्ट सिस्टम था क्षत्रिय ब्राह्मण वगैरह इस तरह का क्लास्ट सिस्टम यूरोप वाले बोलते हैं कि हम लोगों में नहीं है किंतु वहां पर भी एरिस्टोटल फैमिलीज जो थे नोबल फैमिलीज उन लोगों का उसी तरह का वर्चस्व था जिस तरह का भारत में क्षत्रियों का था किंतु अनफॉर्चूनेटली देखिए कि भारत में क्षत्रिय क्लास का संपूर्ण रूप से हनन हो गया वह लोग का अभी दो तीन तरह से हुआ पहले तो एक तो बुद्धिज्म आ गया तो उन्होंने कहा क्षत्रियों को कि अभी सब साधु हो जाइए माने जिन लोगों में शौर्य वीर्य था उन लोगों को और फिर यह विदेशी आक्रमण जब चालू हुए तो वैसे तो कोई क्षत्रिय ज्यादा बचे नहीं थे जो थोड़े बहुत बचे थे वो उसी में साफ हो गए तो फिर क्षत्रिय वंश चला गया अभी स्वामी जी कहते हैं कि देखिए जब लोकतंत्र या तो फिर यह जो मॉडर्न फॉर्म ऑफ गवर्नमेंट है वो डिक्टेटरशिप हो ना कि डेमोक्रेसी हो ना कि ये कॉलोनियल एडमिनिस्ट्रेशन हो जैसे कि ब्रिटिश राज्य था भारत में या तो उससे पहले ईस्ट इंडिया कंपनी थी इन लोगों के पास में कोई डिवाइन मैंडेट नहीं है यह लोग यदि कोई डिफिकल्ट रिफॉर्म लाना चाहेंगे इस देश में तो प्रजा का बड़ा विरोध होगा जिस विरोध के सामने आज की गवर्नमेंट नहीं टिक पाएगी तो स्वामी जी कहते हैं कि अभी वो डिवाइन मैंडेट तो चला गया है ईश्वर के आशीर्वाद से राज करना तो चला गया है अभी हमको पब्लिक ओपिनियन कंसेंसस खड़ा करना होगा एक मत खड़ी करनी होगी यदि सभी लोग एकमत होते हैं प्रजा में सिटीजन में नागरिक में तो वह राज्य में गवर्नेंस अच्छे से चलेगा यदि प्रजा में फुटफट है प्रजा में पोलराइजेशन है प्रजा के सिटीजंस के भीतर में नागरिकों में दल बन गए हैं एक दल दूसरे दल के साथ में बात करने को तैयार नहीं है एक एक जिस तरह जैसे कि एक फॉर एग्जांपल है कि ये वाटर डिस्प्यूट इस नदी एक नदी का पानी दो राज्य से जा रहा है तो अभी दोनों राज्य वाले कहते हैं कि हमको ज्यादा पानी चाहिए दूसरे राज्य ने क्या है कि अभी सेंट्रल गवर्नमेंट भी थोड़ी डरती है कि क्या है कि सेंट्रल गवर्नमेंट के भी तो उसी लो राज्य में पावर चाहिए तो मैंने क्या है कि यदि एकमत नहीं रहेगी कि सबके भले के लिए मुझे पर्सनल थोड़ा सा सैक्रिफाइस करना होगा यदि मैं पर्सनल सैक्रिफाइस करूंगा तो यह पूरे देश का भला होगा यह मैं पर्सनल सैक्रिफाइस कब करूं बहुत सारे देशों में देखिए कि वातावरण इस तरह से बिगड़ा हुआ है कि जितने भी लोग हैं अपना एक नैरो स्वार्थ खोजते हैं जैसे कलने कल हमने एक उदाहरण देखा कि एक रास्ता है एक रास्ते पर 1000 लोग रह रहे हैं भी रास्ता चौड़ा करने से पूरे शहर को फायदा होगा किंतु यह जो लोग वहां पर रह रहे हैं वे लोग सोचेंगे कि रास्ता चौड़ा करने को जाएंगे तो हमारी दुकान है हमारा घर है उसका आधा हिस्सा हमको गवर्नमेंट को देना होगा पब्लिक को देना होगा तो मैं पर्सनल लॉस सहन करके शहर का भला क्यों करो तो यह यह कोई लोकतंत्र है या मॉडर्न फॉर्म ऑफ गवर्नमेंट है उसको सक्सेसफुल होने के लिए जो क्रुशल एक इंग्रेडिएंट्स वो है कि नागरिकों को सेल्फ सैक्रिफाइस करना होगा तभी कहीं जाकर के यह मॉडर्न फॉर्म ऑफ गवर्नमेंट ठीक से कार्य करेगी और कल हमने यह भी देखा कि अमेरिका में देखिए कि $80000 पर कैपिटा उनकी इनकम है ऑन एवरेज 8 मैं कल एग्जैक्ट फिगर देखा मैंने कल एक्चुअल फिगर है $87 माने नियर $90000 पर एनम अब सोच लीजिए उसका आप रुपए में कन्वर्ट करेंगे मल्टीप्लाई बाय 80 कि 85 व्हाट एवर द एक्सचेंज रेट इज भारत में जद जितने भी अमेरिकन आएंगे ऑन एवरेज सभी अमेरिकन लखपति हो जाएगा और हमारी एवरेज इनकम कल मैंने एग्जैक्ट फिगर देखा 3000 नहीं है समथिंग लाइक 27 100 ना कि इतना कुछ है तो ये हम दोनों में देखिए कि फासला कितना बड़ा है उसके बावजूद ये अमेरिकन में खास करके देखिए कि सेल्फिश आजकल ग स्वामी जी के समय पूरा एक अलग ही था माहौल पता नहीं आज आजकल का किस तरह का माहौल है इतना इस हद तक सेल्फिश नेस चला गया है उनके भीतर में कि यह नियर 900000 लर पर कैपिटा इनकम होने के बावजूद उनको संतोष नहीं होता है इसके बावजूद यह लोग सोचते रहते हैं कि हमारे साथ में अन्याय हो रहा है हमारे साथ में चीटिंग हो रही है एक किस तरह का यह थिंकिंग प्रोसेस है इसलिए स्वामी जी कहते हैं कि मॉडर्न एजुकेशन को इंप्लीमेंट करना होगा नागरिकों को सिखाना होगा कि किस तरह से आप लोग एक रिस्पांसिबल जॉइस करें आपके रिप्रेजेंटेटिव्स ये जो जो लोग सेनेट में जाकर के पार्लियामेंट में जाकर के लेजिसलेटिव असेंबली में जाकर के जो लोग गवर्न करेंगे जिस चीफ मिनिस्टर प्राइम मिनिस्टर प्रेसिडेंट को आप इलेक्ट करेंगे रिस्पांसिबल पर्सन को इलेक्ट कीजिए आपको खुद को थोड़ा सैक्रिफाइस करना होगा फॉर द सेक ऑफ योर नेशन यह सब कुछ सिखाना होगा और साथ में ही सिखाना होगा स्वामी विवेकानंद का जो एजुकेशन का मूल मंत्र है योग और वेदांत योग और वेदांत भी आधुनिक शिक्षा के साथ में जाना चाहिए और जैसे हमने कल डिस्कस किया था कि देखिए कि ये दक्षिणेश्वर पाठशाला यह एक मॉडल है ठाकुर गुरु है और यह सब लड़के ठाकुर के पास में शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते हैं यह मॉडल हम यदि ठीक-ठीक समझे किस तरह से ठाकुर अपने पास में आए हुए युवा शिष्यों का मन समझ कर के उनके संस्कार के अनुसार उनको गाइड करते थे अभी आजकल का जो एजुकेशन सिस्टम है जिसमें से मैं खुद पसार हुआ हूं मैं जब प्राइमरी में सेकेंडरी में हाई स्कूल में पढ़ रहा था एकएक क्लास में 70 800 लड़के थे और जो टीचर है आधे लड़कों का नाम भी नहीं पता है वह आ कर के अपने बोर्ड के ऊपर में कुछ लिख कर के चले जाते हैं जो 10 1015 लड़कों को कुछ समझ में आया तो आया बाकी 50 लड़को 50 से ज्यादा लड़कों को तो कुछ समझ में भी नहीं आता था इतना हमारा भारत का जो ड्रॉप आउट रेशियो है हमें एजेक्ट फिगर मुझे याद नहीं किंतु बड़ा अलार्मिंग ड्रॉप आउट रेशियो है इस अर्थ में कि प्राइमरी जद स्कूल में 100 बच्चे जद एडमिट
Dropout rate between 1st and 12th standard is around 54
होते हैं तो ग्रेजुएट होते होते सिर्फ 30 बच जाते हैं यानी कि 70 पर ड्रॉप आउट रेशियो है फ्रॉम प्राइमरी टू ग्रेजुएशन लेवल तक का ये 70 70 पर ड्रॉप आउट मने कि इतना ही कुछ है देखना पड़ेगा एग्जैक्ट फिगर किंतु ये बड़ा ही एलआरएम फिगर है मने इतने सारे बच्चे यदि ड्रॉप आउट हो जाते हैं उसका अर्थ समझिए कि 70 पर पॉपुलेशन के लिए आपका एजुकेशन सिस्टम काम ही नहीं करता तो इस एजुकेशन सिस्टम को किस तरह से रूट एंड ब्रांच रिफॉर्म किए जाए और उसमें हमारी आध्यात्मिकता आध्यात्मिक धरोहर को किस तरह से मिश्रित किया जाए जिससे कि सिर्फ हेड नहीं हेड एंड हैंड नहीं हार्ट का भी डेवलपमेंट हो जैसे थ्री एज कहते हैं ना हेड हैंड एंड हार्ट हेड यानी कि अपना मस्तिष्क अपनी इंटेलिजेंस हैंड यानी कि अपने हाथ श्रम करने की कैपेसिटी ज्यादातर लड़कों को आजकल देखेंगे थोड़ा सा काम देंगे झाड़ू लगाने का ना कि गार्डनिंग करने का मां कुछ काम देगी तो फट करके मना कर देंगे हम कुछ काम नहीं करेंगे क्यों काम करना कभी सीखा नहीं है हाथ से और काम करने की कोई इच्छा नहीं है यह अपने हाथ से श्रम करना यह अपना कैरेक्टर बिल्ड करता है किंतु यह कांसेप्ट ही जैसे कि चला गया है और हार्ट हार्ट यानी कि एंपैथी हार्ट यानी कि शरणागति हार्ट यानी कि श्रद्धा और भक्ति तो यह है इंटेलेक्ट एंपैथी और यह श्रम करने की क्षमता फिजिकल वर्क करने की क्षमता ये अमेरिका में देखिए कि अपने यहां पर छोटा सा भी कुछ होता है तो फट करके हम प्लंबर ना की इलेक्ट्रिसिटी को बुला देंगे ऐसा कुछ करेंगे किंतु अमेरिका में देखिए कि वे लोग कुछ भी काम होता है इलेक्ट्रिकल वर्क होता है ना कि यह प्लंबिंग का कर्म होता है ना कि ये ये कोई भी सुथार का कार्य होता है वे लोग अपने हाथों से यह सब कार्य करेंगे तो अमेरिका में है एटलीस्ट ये अपने हाथों से काम करना व श्रम करने का श्रम का महत्व तो तो यह सब देखिए कि एजुकेशन सिस्टम के भीतर में इस तरह के सुधार लाने चाहिए अभी आज का जो इसी पॉइंट के भीतर में
most of the reforms like widow remarriage are superficial
आखिरी पैराग्राफ हमारा बच गया था इस आखिरी पैराग्राफ में स्वामी जी कहते हैं कि देखिए कि अभी तक यह जो रिफॉर्म सोसाइटी के बारे में ही स्वामी जी बात करते हैं कहते हैं कि यह रिफॉर्म सोसाइटी वाले जो कुछ भारत में करना चाहते हैं वह सब सुपरफिशियल सब है माने ये लोग कहते हैं कि विधवा का विवाह करवाओ वगैरह वगैरह स्वामी जी कहते हैं कि यह जो रिफॉर्म सब है वो सिर्फ एक अपर क्लास जो है सोसाइटी का जिसके पास में धन है लेजर है बैठ कर के खाने का सोचने का समय है ऐसे लोगों के लिए यह सब रिफॉर्म ठीक है किंतु भारत की यह जो गरीब प्रजा जो दिन प्रतिदिन धूप और बेकारी और गरीबी की इस चक्की में पिसती जा रही है इस तरह का एक जो लार्ज एक वर्ग है भारत का इस इस वर्ग को आपका एक भी रिफॉर्म टच नहीं करता है तो स्वामी जी कहते हैं कि मुझे भी रिफॉर्म चाहिए किंतु मैं रूट एंड ब्रांच रिफॉर्म लाना चाहता हूं ग्रास रूट लेवल से रिफॉर्म लाना चाहता हूं और यह जो एक बात है ना कि यह जो मिडल क्लास या अपर क्लास होते हैं उन लोगों को यह गरीब लोगों की जो कष्ट है वो वो लोग चाहे उसको इग्नोर करते हैं या तो फिर इसको देखना नहीं चाहते यह पूरे इतिहास में खास करके आजकल का जो मॉडर्न इतिहास आप पढ़ेंगे क्योंकि पहले में इस इस वत तक गरीबी नहीं थी आजकल का जो पिछले 200 300 सालों का इतिहास है वह क्या है इससे पहले क्या होता था कि एक एपल मींस ऑफ प्रोडक्शन हुआ करते थे जमीन है खेत है वन है एक खेत में से वन में से आपको जो भी प्रोड्यूस निकालना है वह निकालिए फिर यह जो हुनर होता है कारी ग जो सब होता है कोई यह साड़ी बनाता है फिर यह कोई यह कोई भी कार्य करता है कोई सिखाता है कोई यह स्मिथ जो होते हैं लोहे का कार्य करते हैं लोहे के औजार वगैरह बनाते हैं यंत्र वगैरा बनाते हैं बहुत सारा तरह का कार्य होता था हुनर होते थे स्किल होती थी आज की लैंग्वेज में कहेंगे स्किल तो ये स्किल बहुत हद तक डेवलप थी ये यूरोप में भी सही है भारत में भी सही है किंतु सडन यह जो इंडस्ट्रियल इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन आया उसने इस इस हत्ता का डिस्प्लेसमेंट कर दिया यूरोप में भी भारत में भी य यूरोप में ऐसा हुआ कि ज्यादातर लोग जो अपने घर में जो य कपड़े बनाते थे सूता का काते थे या घर जो हाउसहोल्ड कॉटेज इंडस्ट्रीज थी ऑलमोस्ट सब बंद हो गई ज्यादातर लोग बेकार हो गए और यह जो इंडस्ट्रियल मेन इंडस्ट्रियल लेवल पे सब मैन्युफैक्चरिंग चला गया लार्ज स्केल इंडस्ट्री जो इकोनॉमी ऑफ स्केल कहते हैं एडम स्मिथ है उसने सबसे पहले सबसे पहले तो नहीं किंतु मुझे लगता है सबसे फेमस व उसने ये इकोनॉमी ऑफ स्केल का उसने उदाहरण दिया कहता है कि यदि एक पिन एक आदमी बनाता है धीरे-धीरे करके बनाता है ऐसे 10 लोग मिलकर के 10 पिन बनाते हैं तो क्या होगा वो जो पिन बनाना जो प्रत्येक पिन के ऊपर में जो खर्चा होगा ज्यादा होगा प्रत्येक पिन की कीमत ज्यादा होगी किंतु आप मास मैन्युफैक्चरिंग कीजिए य वो पिन की कीमत 0 हो जाएगी इसको कहते हैं इकोनॉमी ऑफ स्केल एक आदमी बैठ कर के 10 पिन बनाता है और एक फैक्ट्री बैठ कर के 1 लाख पिन बना देती है जो जितनी ज्यादा पिन आप बनाएंगे उतना ही आपका जो इनपुट मटेरियल है वो आप सस्ते में ले पाएंगे बल्क में सेट करेंगे तो उतना ही सस्ता होगा तो यह जो एडम्स स्मिथ ये इकोनॉमी ऑफ स्केल ये मॉडर्न मैन्युफैक्चरिंग उसने ज्यादातर लोगों को बेकार कर दिया इस फिनोमिना को अभी तक हम लोग समझे नहीं है ये 19 सेंचुरी में जितने भी रेवोल्यूशन आए हैं ये कम्युनिस्ट रेवोल्यूशन हो नासी रेवोल्यूशन हो सोशलिस्ट रिवोल्यूशन हो या तो फिर ये नेशनलिस्ट रेवोल्यूशन हो जितने भी हो इन सबके पीछे यही था कि 10 आदमी बैठ कर के घर में अपना कार्य करते हैं वो दसों आदमी से काम छीन लिया फैक्ट्री में काम करना शुरू कर दिया भारत में ही देखिए कि हमको पता है कि ये जो लोग अपने हाथों से साड़ी बुनते थे उन लोगों के अंगूठे काट दिए क्यों क्योंकि इतनी सर सुंदर साड़ी बनाते थे कि मंचेस्टर की मिल में जो साड़ी वगैरह बनता है वस्त्र वगैरह बनते हैं वो भारत में कोई खरीदता नहीं था अभी इन लोगों के हाथ काट दिए वे लोग बेकार हो गए मिल का कपड़ा भारत में आना शुरू हुआ और सस्ते में मिलता है तो सस्ते में लोग खरीदना शुरू किए तो भारत के जो कारीगर है जिन लोगों के पास में ये स्किल है सब लोग बेकार हो गए तो यह जो मॉडर्न पॉवर्टी है उसके पीछे का सीक्रेट है उसके पीछे का रीजन है यह मॉडर्न मैन्यूफैक्चरिंग मेथड और खास करके ये पिछले 200 साल में देखिए कि बार-बार ये इंडस्ट्रियल अपग्रेडेशन होता ही जाता है और जितनी भी बार ये इंडस्ट्रियल अपग्रेडेशन होता है वो इतना रैपिड होता है कि एक फस्ट लेवल के लार्ज स्केल पर लोग बेकार हो जाते हैं इसका लेटेस्ट उदाहरण है देखिए कि आज से पा 10 सा साल पहले जद आप कहते कि मैं सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूं कंप्यूटर इंजीनियर हूं तो यह मैरेज के मार्केट में आपका रेट एकदम बढ़ जाता कि ओ हां चलो ये सॉफ्टवेयर इंजीनियर है इसके साथ में हम लोग विवाह करवाए अपनी लड़की का किंतु आज देखिए कि एआई के आने की वजह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ये जो टेक ले ऑफ है बड़ी-बड़ी कंपनियां क्योंकि अभी एआई ही ज्यादातर कोडिंग कर लेता है मैंने खुद एक्सपेरिमेंट करके देखा है वो इतना सुंदर कार्य करता है मैं तो अवाक हो गया मैं जद मुझे ऐसा लगता है कि मैं जद टेक इंडस्ट्री में होता तो अभी तक मुझे भी फायर कर दिया होता इतना यह कार्य कर लेता है और डिजाइनिंग कर लेता है सब कुछ कर लेता है तो देखिए कि ये अभी ये उने य टेक इंडस्ट्री मने जो इंजीनियर है सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर वे लोग बेकार हो गए ठीक है कोई ना कोई कुछ ना कुछ कर लेगा यदि आपने इंजेन है किंतु ये जो लार्ज स्केल जो ले ऑफ जो चल रहा है लार्ज स्केल अन एंप्लॉयमेंट आजकल का टेक इंडस्ट्री में वो सही में एक सीरियस मामला है तो क्या होता क्या है कि ये जो लोगों के पास में धन है लेजर है वैभव है वे लोगों को ना यह जो बेकार लोग है धीरे-धीरे करके य गरीबी की चक्की में पिसते जा रहे हैं वो उनको दिखते नहीं है वो लोग क्या करेंगे कि मैं अभी जैसे विद्यासागर है विद्यासागर क्या करता है वो सोचता है कि मुझे विधवाओं का विवाह करवाना है किंतु विधवाओं का विवाह करके कलकाता का जो ज्यादातर एक लोग जो कि बिल्कुल गरीब थे उनको क्या लाभ होने वाला है तो स्वामी जी कहते हैं कि ये जो आजकल की रिफॉर्म सोसाइटी में ये जो एजुकेटेड वेल्थी लोग बैठे हुए हैं अपना एक कोजी क्लब बना कर के कि वहां पर जाकर के चाय पानी होता है वो आपस में बैठ कर के गप लगाते हैं और थोड़े बहुत रिफॉर्म की बात कर लेते हैं तो यह रिफॉर्म समाज का 10 पर जो अपर क्लास है उसी को टच करते हैं है किंतु जो 70 पर एंड 80 पर यह गरीबी की भूख मरे की चक्की में जो पीस रहे उनको टच ही नहीं करते तो यदि उनका उत्थान करना है तो मॉडर्न एजुकेशन इन इन टेंडम विद अवर ट्रेडिशनल वेदांत यह देना होगा तभी रूट एन ब्रांच रिफॉर्म होगा तो यह लास्ट पैराग्राफ में स्वामी जी यह बात करते हैं क्या कहते हैं मोस्ट ऑफ द रिफॉर्म्स दैट हैव बीन एजिटेटेड फॉर ड्यूरिंग द लास्ट सेंचुरी हैव बीन ओना मेंट ट आखिरी एक सेंचुरी में आखिरी 100 साल में रिफॉर्म की जितनी भी बातें कही गई है वह सब र्न मेंटल है वह सब दिखा हुआ है एवरी वन ऑफ दिस रिफॉर्म्स ओनली टचेस द फर्स्ट टू कास्ट ये जितने भी रिफॉर्म के बारे में कहा गया वह जो दो हायर कास्ट है उसी को टच करता है एंड नो अदर और किसी को यह स्पर्श नहीं करता और किसी के जीवन में यह कोई बेनिफिट लेकर नहीं आता द क्वेश्चन ऑफ विडो मैरेज वुड नॉट टच 70 पर ऑफ इंडियन वीमेन यह जो विधवा का पुनर्विवाह करने का जो प्रश्न है यह प्रश्न भारत की 70 पर जो स्त्रियां है उसको स्पर्श नहीं करेगा उनके जीवन में किसी भी तरह का प्रोग्रेस लाक नहीं लाएगा एंड ऑल सच क्वेश्चंस ओनली रीच द हायर कास्ट ऑफ इंडियन पीपल हु आर एजुकेटेड मार्क यू एट द एक्सपेंस ऑफ द मासस और यह जो सुपरफिशियल रिफॉर्म है र्मेंस दिखावे के जो रिफॉर्म है वो उसी वेल्थी प्रजा को वेल्थी सिटीजंस को टच करते हैं जिन्होंने यह जो बाकी गरीब लोग है उसके खर्च पर उन्होंने अपना एजुकेशन प्राप्त किया है यह कैसी बात है पता है स्वामी जी यहां पर क्या कहते हैं कि भारत की आईआईटी है या तो फिर ये जितनी भी अच्छी-अच्छी कॉलेज है जेएनयू वगैरह देखिए कि टैक्स पेयर के मनी पे चलती है आप है मैं तो नहीं कि मैं तो टैक्स नहीं देता किंतु आप लोग में से जितने लोग टैक्स देते हैं उसी टैक्स का रुपया इस आईआईटी है जेएनयू है वगैरह वगैरह जो कि टॉक नोच कॉलेजेस है यूनिवर्सिटीज है भारत की उसको चलाने में जाता है इसी यूनिवर्सिटी में से ग्रेजुएट होकर के यह लोग क्या करते हैं विदेश में चले जाते हैं विदेश का इकोनॉमी में अपना कंट्रीब्यूशन देते हैं अमेरिका चले गए माइक्रोसॉफ्ट में जॉब कर लिया यानी कि माइक्रोसॉफ्ट जितना डेवलप होगा उतना ही उनको अच्छा है खुद का तो पॉकेट भर लिया कि तु माइक्रोसॉफ्ट भारत में आकर के पैसा लेकर के जा रहा है उसका क्या तो इस इसीलिए स्वामी जी कहते हैं कि जो लोगों ने भारत की जनता के खर्च पर यह एजुकेशन प्राप्त किया है यही लोग आराम से बैठ करके भारत की जनता को इग्नोर करके अपना य जो कोजी क्लब है अपना जो अपर क्लास जो एक ग्रुप है उसी के कल्याण के लिए यह लोग बातें करते हैं जनसाधारण को संपूर्ण रूप से विस्मृत हो गए हैं जनसाधारण को संपूर्ण रूप से छोड़ दिया है एवरी एफर्ट हैज बीन स्पेंट इन क्लीनिंग देर ओन हाउस बट ट इज नो रिफॉर्म उन्होंने जितना भी प्रयत्न किया है वह सब अपना खुद का घर साफ करने के लिए किया है किंतु यह तो कोई रिफॉर्म नहीं है देखिए मैं एक उदाहरण इस तरह का देता हूं कि मैं कुछ समय लखनऊ में रहा था तो लखनऊ में इस तरह से कुछ अच्छे लोगों के साथ में मेरी पहचान थी अच्छे लोग यानी कि जिनके पास पैसा टैसा होता है तो आप जद एक्चुअली लखनऊ का शहर का भ्रमण करेंगे इतने सारे स्लम है इतने सारे गरीब लोग हैं कितना सब कुछ है और ये सो कॉल्ड जो अच्छे लोग थे उनके पास एक्चुअली एनजीओ में थे ये लोग एनजीओ वगैरह चलाना है तो एनजीओ चलाना का अर्थ क्या है कि आपके पास में तो गरीब लोगों के लिए भले के लिए कुछ करना है ना उसी के लिए तो नॉन गवर्नमेंट ऑर्गेनाइजेशन होते हैं उसी के लिए तो उसको तो लोग डोनेशन देते हैं तो वो नहीं दे कर के वे लोग आपस में बैठ कर के बातें करते हैं कि अच्छा अभी योगा क्लासेस करा चालू किया जाए हम लोगों का वेट बढ़ रहा है तो हम लोग योगा करेंगे तो मैं तो एकदम क्या बोलूं मैं कि वे लोग तो एक तो पहले ही धनवान है सब जितना भी नॉनवेज है जो बटर है व सब खाते हैं खा कर के मोटे होते हैं और मोटापा कमाने के लिए योगा करेंगे तो फिर आपको जो डोनेशन का पैसा मिला है वो गरीब लोगों का क्या व आप सिर्फ अपना ही सोचते हैं इन लोगों को ये गरीब लोग दिखते भी नहीं है ये एक बात है आश्चर्य की बात है कि गरीब लोग बिल्कुल अदृश्य है ऐसे लोगों के लिए आप रास्ते से जाएंगे कोई भीख मांगने के लिए आएगा आपकी गाड़ी के सामने तो उसको गाली दे कर के भगा देंगे या तो दो पांच रुपया दे कर के उससे छुटकारा पा लेंगे इतना ही जैसे कि हमको यह लोग दिखते हैं अदर वाइज इस तरह के क्वार्टर्स में जाना इस तरह की शेरियो में गलियों में जाना कि जहां भी ये लोग रहते हैं उनकी क्या जीवन चर्या है क्या उनकी समस्या है क्या उनके दुख दर्द है वो सुनना उनके लिए सहानुभूति प्रकट करना वो तो रेर कोई आपको मिलेगा लाख में कोई एक व्यक्ति ऐसा आपको मिलेगा कि जिसके हृदय में गरीब के लिए पद दलित के लिए जगह है तो यह है हमारे स्वामी जी स्वामी जी कहते हैं बार-बार कहते हैं कि पूरा भारत भ्रमण करके एक दिन किसी राजा के महल में रहे हैं तो दूसरे दिन किसी गरीब की कुटिया में रहे हैं और यह गरीब की कुटिया में रह कर के स्वामी जी ने देखा है कि उनकी क्या-क्या समस्या है इसलिए स्वामी जी कहते हैं सब रिफॉर्म सोसा आज की लैंग्वेज में रिफॉर्म सोसाइटी को कहेंगे एनजीओ ये जितने भी एनजीओ है वो सब अपना खुद का कल्याण कर खुद मोटे हुए हैं अच्छा खाना खा करके और फिर यह योगासन गासन करके अपना मोटापा कम करवाने के लिए यह एनजीओ चला रहे हैं तो इस तरह का कुछ है वहां पर विधवा विवाह करना है विधवा विवाह से 70 पर स्त्रियों का क्या कुछ फर्क पड़ने वाला है जितने भी उनके इस तरह के जो आइडियाज है वह अपने अपर लेवल तक ही सीमित है भारत की जो गरीब प्रजा है उसको स्पर्श भी नहीं करते हैं इसलिए स्वामी जी कहते हैं ट इज नो रिफॉर्मेशन यह कोई सुधार तो हुआ नहीं भारत का यू मस्ट गो डाउन टू द बेसिस ऑफ द
You must go down to the basis of the thing, to the very root of the matter. That is what I call radical reform.
थिंग्स यह जो जितनी भी समस्याएं है उसकी जड़ तक चाहिए टू द वेरी रूट ऑफ द मेंटर ये समस्याओं की जो एकदम रूट है जो उसका जो फाउंडेशन है वहां तक आप जाइए दैट इज व्हाट आई कॉल्ड रेडिकल रिफॉर्म इसी को मैं कहता हूं रेडिकल रिफॉर्म यानी कि एक क्रांतिकारी सुधार एक तो होता है सुधार कि मोटे लोग धनवान लोग अपना योगा करके अपना वो जो है कि बॉडी वेट कंट्रोल करने का प्रयास करेंगे दूसरा है कि क्रांतिकारी सुधार कि भारत की यह जो जनसाधारण आम आदमी आम जनता है उसके जीवन में कुछ परिवर्तन लाना दैट इज व्हाट आई कॉल रेडिकल रिफॉर्म पुट द फायर देर एंड लेट इट बर्न अपवर्ड एंड मेक एन इंडियन नेशन वहां पे जैसे कि आप अग्नि को चलाइए और इस अग्नि को ग्रास रूप में से ऊपर आने दीजिए इस जैसे कि भ भक्ति इस इसको क्या कहेंगे धुनि में से इस भ भक्ति धुनि में से एक नए देश का निर्माण होगा एक नए भारत का नव निर्माण होगा यह जैसे होता है ना कि यह जो फॉरेस्ट्री जो लोग स्टडी करते हैं वे लोग कहते हैं कि कभी-कभी क्या होता है वन में जंगल में फॉरेस्ट में पत्ते जो गिरते हैं ऑटम सीजन में ये ऑटम को क्या कहेंगे तो शरत रुदु से पहले की जो सीजन होती है तो ऑटम सीजन में जो पत्ते गिरते हैं वो पत्ते क्या है कि जमीन पर पूरा फैल जाते हैं और कारपेट जैसा हो जाते हैं और फिर वह सूख जाते हैं तो अभी क्या होना होता है कि ये सूखे हुए पत्तों में कभी-कभी आग लगती है और फॉरेस्ट फायर फैलता है किंतु ये जो फॉरेस्ट फायर फैले का वाइल्ड फायर तो बहुत सारे लोगों का नुकसान होता है तो जो लोग ये फॉरेस्ट्री मैनेज करते हैं वे लोग कहते हैं कि ये जो सूखे पत्ते होते हैं ना उसको हमी को लगा देनी चाहिए बीच-बीच में इसको कहते हैं मैनेज वाइ फायर कि मनुष्य ने ही हमने ही आग लगाई है और बिकॉज कि हमने आग लगाई है ये आग की जो दिशा उसकी जो परिधि ठीक कर दी है और उसके आगे हम इस आग को नहीं फेलने देंगे हमने आग लगाई है तो हम उसको मैनेज भी कर सकते हैं किंतु नेचुरल वे में जद आग लगेगी तो पूरा तो वन तो नष्ट हो ही जाएगा आसपास के शहर भी नष्ट हो जाएंगे ये अमेरिका जितना एडवांस कंट्री लॉस एंजलिस जितना इतना एडवांस सिटी वहां पर देखिए कि दो-तीन महीने पहले जो आग लगी थी कितने सारे घर को जला दिया था तो यहां पर स्वामी जी कहते हैं मैनेज ड वाइल्ड फायर यदि आप गरीबों की जो समस्या है उसको इग्नोर करेंगे तो यह जो रशियन रिवोल्यूशन या तो चाइनीज रिवोल्यूशन इस तरह के विस्फोट करके वो होगा प्रगट और वह क्या करेगा आधि सिविलाइजेशन को खत्म कर देगा यह जो कम्युनिज्म जो चाइना में और रशिया में आया उसमें कितने लोगों ने जान गवाई है 101 करोड़ लोग अपनी जान गवा चुके हैं इस तरह के भयानक रेवोल्यूशन इस दो देशों में आए हैं क्यों क्योंकि जो शासक वर्ग था वो कंपलीटली जो गरीब लोगों की बातों को इग्नोर करता था तो इसके लिए अमेरिका में ही देखिए कि वो जो आज का जो प्रेसिडेंट है उसको लोग चन इलेक्ट करके ले आए इतनी बुद्धि होने के बावजूद क्यों क्योंकि बहुत सारे जो एक लार्ज स्केल पॉपुलर जो होती है उसकी डिमांड को आप कंपलीटली इग्नोर करेंगे बोलेंगे कि जो मैं कहूंगा वही सही है तो फिर वे लोग क्या करेंगे एक ऐसे पागल को इलेक्ट करके ले आएंगे कि जो आपका पूरा घर जला देगा तो स्वामी जी कहते हैं कि लेट अस मैनेज दिस वाइल्ड फायर अवर सेल्स हम खुद ग्रास रूट पे जाए हम खुद जाकर के इस तरह की धुनि जलाए इस तरह का वाइल्ड फायर जलाए कि जितना भी यह कचरा है जितने भी सूखे पत्ते हैं सबको भस्मी भूत कर दे जंगल को फिर से प्रिस्टाइन लेवल पे लेके आए और इस धुनि में से इस अग्नि में से नए भारत का नव निर्माण होगा एंड द सॉल्यूशन ऑफ द
the solution of the problem is not so easy, as it is a big and vast one. Be not in a hurry.
प्रॉब्लम इज नॉट सो इजी एज इट इज अ बीक एंड वस्ट वन किंतु ये सब बोलने की बातें हैं इस इस सब सोल्यूशन इजी नहीं होते हैं प्रॉब्लम बहुत विशाल है भारत की पॉपुलेशन उसी समय 30 करोड़ थी आज 150 करोड़ है सबसे पॉपुलर कंट्री है ऊपर में से ये मल्टी एथनिक मल्टीलिंगुअल मल्टीकल्चरल मल्टी रेसियल मल्टी रिलीजियस नेशन है इस नेशन में सब एक पब्लिक ओपिनियन खड़ा करना किसी एक पॉइंट के ऊपर में वो भी बड़ा मुश्किल है तो इसीलिए स्वामी जी कहते हैं कि जो प्रॉब्लम है वो बड़ा है बिग एंड वाश बहुत बड़ा है बड़ा ही विस्तृत है बी नॉट इन ए हरी ऐसा मत सोचो कि मैं एक 10 15 साल में ये सब ठीक कर दूंगा शांति से आराम से काम करो अपनी अकल को ठिकाने रख के काम करो दिस प्रॉब्लम हैज बीन नोन सेवरल हंड्रेड इयर्स पिछले कुछ 200 300 सालों से हमको पता है कि यह प्रॉब्लम है यहां पे स्वामी जी इंटरेस्टिंग यह सेंटेंस जो है दिस प्रॉब्लम हैज बीन नोन सेवरल हंड्रेड इयर्स यह इंप्ला करना चाहते हैं कि दूसरे भी कुछ-कुछ लोग थे जिन्होंने इस प्रॉब्लम के रूट तक गए हैं आध्यात्मिकता से भारत की भूमि का सिंचन करना इस बात को समझे हैं तो ये ये जो रिलीजियस ये आया था ना वेव आया था ठाकुर के आने से पहले बहुत सारे संत महात्मा भारत में प्रकट हुए थे और कितने ही को कोने में जाइए कितने ही हर गांव में हर शहर में आपको कोई ना कोई संत मिल जाएगा जिन्होंने चुपचाप शांति से ग्रास रूट लेवल पर यह सब कार्य किया है तो ये स्वामी जी का यह इनसाइट है कि पिछले 200 300 सालों से साइलेंटली एक आध्यात्मिक जवार आया है एक स्पिरिचुअल वेव आया है एक शांति से चुपचाप कितने ही सारे साधुओं ने संतों ने महात्माओं ने योगियों ने भारत की भूमि का सिंचन किया है आध्यात्मिकता से तो इसलिए
Scale of Ramakrishna Mission’s impact on society
देखिए कि मैं भी कभी-कभी सोचता था कि यह रामकृष्ण मिशन में जब आया था जॉइन करने को दैट वाज सम वेर अराउंड इन 2003 2004 तो मैं सोचता था कि रामकृष्ण मिशन नियर 100 इयर्स से भी थे तो एटलीस्ट एक था कि चलो एक लोगों में अवेयरनेस थी स्वामी जी के प्रति एक था श्रद्धा था आज आप देखिए कि 150 करोड़ की पॉपुलेशन में से कितने लोग रामकृष्ण मिशन के प्रति सहानुभूति संपन्न होगी या तो हमारी एक्टिविटी में पार्टिसिपेट करते होंगे एक करोड़ जद होगा फिगर तो मैं कहता हूं बहुत बड़ी फिगर है तो मैं सोचता था कि पिछले 100 सालों में रामकृष्ण मिशन ने किया क्या है कुछ चंद स्कूल चलाते हैं हमारी स्कूलों में से जद कितनी स्कूल होगी हमारी स्कूलों में एट ए टाइम कितने स्टूडेंट पढ़ते होंगे एक लाख ज्यादा से ज्यादा हमारी हॉस्पिटल में कितने पेशेंट ट्रीटमेंट लेते होंगे 10 15 लाख एट द मोस्ट तो हमने क्या कोई इंपैक्ट तो है नहीं भारत देश के ऊपर में किंतु यहां पर क्या है ना देखिए स्वामी जी कहते हैं बी नॉट इन अ हरी कोई जल्दबाजी मत करो जल्दबाजी करने से अपना क्वालिटी डाउन हो जाएगा दूसरा कि हमारी खुद की जो आध्यात्मिक जर्नी है ये पहले स्वामी जी ने कह दिया कि देखिए गुड एंड इविल आर टू एस्पेक्ट ऑफ द सेम कोई ये इष्ट और अनिष्ट एक ही सिक्के की दो बाजुए है यदि आप यह कहेंगे कि मैं अपनी आध्यात्मिक जीवन को सैक्रिफाइस करके सिर्फ लोगों के कल्याण के लिए काम करूंगा तो ये कुत्ते की पूंछ है वो कभी सीधी नहीं होने वाली आपको तो वर्क दिस सेवा कार्य इट्स मोर सब्जेक्टिव देन ऑब्जेक्टिव ये कार्य करते करते हमको अपना खुद का चरित्र है अपनी खुद की आध्यात्मिकता है उसको भी ड अप करना है सो इसलिए स्वामी जी यहां पर यह कोष देते हैं एक चेतावनी देते हैं पहले से ही बता के रखा है कि देखो यह पहले तो दो चीज समझ लो कुत्ते की पूंछ की तरह है इष्ट और अनिष्ट का जो परसेंटेज है 5050 पर सभी युग में इतना ही रहा है ऐसा मत सोचिए कि आप यदि गरीबी हटा देंगे तो फिर बाकी सब समस्याएं हल हो जाएंगी अमेरिका का उदाहरण है 87000 पर कैपिटा गरीब तो रे पैर होंगे किंतु फिर भी उतनी समस्याए कितनी सारी है तो रूमेटिज्म की तरह पैर में से हटाएंगे तो हाथ में आएगा हाथ में से हटाएंगे तो गर्दन में जाएगा तो ये दर्द तो रहने ही वाला है दूसरे एक न दूसरे स्वरूप में रहने ही वाला है इसलिए जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं है आध्यात्मिक जीवन कैरेक्टर बिल्डिंग ठीक रखना है और साथ में फिर एक स्टेडी लक्ष्य रख कर के कार्य करते जाना है दिस प्रॉब्लम हैज बीन नोन सेवरल हंड्रेड इयर्स कुछ सालों से 200 300 साल से हमको पता है कि यह प्रॉब्लम कार्यरत है और अभी देखिए कि स्वामी जी ने यह जो सब पूरा कहा कंपेयर टू ट आज आज उसको कितना 100 प्लस इयर्स बीत गए हैं तो फिर ये 100 प्लस इयर्स में हम लोग कहां तक पहुंचे हैं स्वामी जी के इस आइडिया को लेकर के वो भी एक इंटरेस्टिंग स्टडी रहेगा देखिए कि ज्यादातर खास करके एटलीस्ट पिछले 10 साल में जो हम देख रहे हैं कि भारतीय आध्यात्मिकता है उसको जैसे कि एक नव जीवन मिला है मैं जब घर में था तो उस समय क्या था कि मेरे घर में बहुत सारे न्यूज़पेपर आते थे तो हमारी एक एडवर्टाइज एजेंसी हुआ करती थी तो बहुत सारे न्यूज़पेपर आते थे तो मैं बड़ा एकदम इंटरेस्ट न्यूज़पेपर है मैगजिन है पॉलिटिकल आर्टिकल है वह पढ़ता रहता था और एक समय मुझे इस एक तरह का यह डिप्रेशन आ गया था कि भारत का कभी कुछ होने वाला नहीं वो सब कोलिशन गवर्नमेंट करप्शन करप्शन क्या सब चल रहा है भारत का बस भारत घटने में गया ऐसा मैं सोच रहा था उसके बाद में साधु बन गया 10 साल कि इतना मैंने न्यूज़पेपर वगैरह सब पढ़ना बंद कर दिया था क्योंकि मोनेस्ट्री लाइफ इतना डिफिकल्ट है मुझे बाकी सब की स्टडी करना था तो ये सब और फिर मैंने जब आखिर में राजकोट में मेरा पोस्टिंग हुआ तब से लेकर के फिर से मैं थोड़ा बहुत न्यूज़पेपर पढ़ना शुरू किया आई वाज सरप्राइज कि भारत में किस तरह का एक रेवोल्यूशन आ गया है ये भारतीय आध्यात्मिकता को जिस तरह का सम्मान फिर से मिलना शुरू हुआ है वही बड़ी ही आश्चर्य की बात है जैसे कि वो फिनिक्स की तरह भारतीय आध्यात्मिकता को जैसे किसी ने यह भस्मी बूत कर दिया हो उसमें से फिर से यह प्रकट हुई है पिछले 100 हज सालों में कितनी बार हमारी आध्यात्मिकता पर आक्रमण हुआ है तो हमारा स नाश कभी नहीं हुआ तो आज थोड़ी ना होने वाला है किंतु क्या है कभी-कभी ऐसा डिप्रेशन आ जाता है तो देखिए कि अभी जैसे कि योगा डे इंटरनेशनल योगा डे किस तरह से पूरे में हमारा जो योग सिस्टम है उसको एक तरह की सराहना मिल रही है एप्रिसिएशन मिल रहा है मैं कभी-कभी य इटर नेशन योगा डे के बारे में लोगों को कहता हूं कि देखिए बहुत बड़ा एक यह है कि हम लोग क्या है कि कभी अपने को प्रोजेक्ट नहीं करते हैं हमारे पास में वेल्थ एटलीस्ट मॉडर्न इंडिया जो है वो वेल्थी है कंपेरटिवली अपना जीडीपी नंबर फाइव है फिफ्थ लार्जेस्ट अपना इकोनॉमी है फोर्थ लार्जेस्ट हो जाएंगे किंतु कंपेयर टू ट जो इंटरनेशनल लेवल पे हमको जो एक प्रोजेक्ट करना चाहिए अपने कल्चर को अपनी सिविलाइजेशन को अपनी ये स्पिरिचुअलिटी को उतना कुछ हम लोग नहीं करते हैं सो व्हाई इज ट आई डू नॉट नो किंतु ये इंटरनेशनल योगा डे इज वन ऑफ द रेयर एग्जांपल्स कि व्हेन वी हैव प्रोजेक्टेड अवर स्पिरिचुअलिटी अवर कल्चर एंड अवर सिविलाइजेशन तो लोग क्या कहते हैं पता है क्या अरे वे लोग तो सिर्फ आसन करने को आते हैं हेल्थ वगैरह देखने के लिए वे लोग इंप्रूव करने के लिए योगासन करते हैं इसमें स्पिरिचुअलिटी जैसा कुछ नहीं है तो मेरा आर्गुमेंट है कि देखिए ऐसा करके ही तो आपको प्रवेश करना है ना लोगों के घर में लोगों के मन में आप कहेंगे कि आप हिंदू हो जाइए क्राइस्ट को छोड़ के कृष्णा का भजन गाना शुरू कर दीजिए वे लोग थोड़ी ना गाने वाले हैं यह सब ये स्वामी जी जो अमेरिका गए खास करके फिलोसोफी और ये स्पिरिचुअल प्रैक्टिस इन द फॉर्म ऑफ योगा इन द फॉर्म ऑफ वेदांता तो इसका प्रचार उन्होंने क्यों किया ऐसा क्यों नहीं ठाकुर का नाम उन्होंने क्यों नहीं लिया रेयरली ठाकुर का नाम लेते हैं माय मास्टर जैसे कुछ-कुछ लेक्चर है जो कि आखिरी आखिरी समय में उन्होंने दिए हैं बाकी शुरू में तो यह योग और वेदांत के प्रचार पे ही उन्होंने फोकस किया है क्यों क्योंकि ये जो अपनी स्पिरिचुअल फिलोसोफी है इन द फॉर्म ऑफ वेदांता एंड ये स्पिरिचुअल प्रैक्टिस है साइंटिफिक स्पिरिचुअल प्रैक्टिस इन द फॉर्म ऑफ योगा ये लोग इजली कैप्चर करेंगे किंतु आप ये लोग आप यदि जाकर के ऐसा कहेंगे कि क्राइस्ट को छोड़िए राम कृष्ण का भजन स्टार्ट कर दीजिए राम कृष्ण के नाम का मंत्र ले लीजिए तो वे लोग कहेंगे कि आपके पास में वो है तो हमारे पास में यह है हाउ कैन यू प्रूव ही इज बेटर है ना तो वो पर्सनालिटी का क्लेश ना हो इसके लिए स्वामी जी ने योग और वेदांत प फोकस किया है तो दिस इज हाउ वी एंटर देयर होम अदर वाइज तो अभी भारत में ये लोग क्या करते हैं कि ऐसा नहीं है कि आप हमारा धर्म स्वीकार कीजिए विदेशी धर्म वाले वे लोग कहेंगे अच्छा आपके पास में खाना नहीं है हम खाना देंगे रांची का जो मेरा एक्सपीरियंस है ट्राइबल गांव में मैं जो घूमता था वे कितना अच्छा कार्य कर रहा है हम देखेंगे तो हमको सराहना करनी पड़ेगी हां प कोई हिंदू पेर नहीं रखता है अपर कास्ट ये जो सिटी का वहां प ये लोग चले जाकर के वहां पर व लोग ट्राइबल लोगों के साथ में काम करते हैं वी शुड अप्रिशिएट देम एंड वी शुड लर्न फ्रॉम देम कि किस तरह से हमको खुद का सेल्फ सैक्रिफाइस करके ये ट्राइबल एरियाज में जाना चाहिए उनके जननली उनके कल्याण के लिए कार्य करना चाहिए फिर आप कहिए कि किस तरह से वे लोग हमारी बात नहीं सुनते हैं किस तरह से वो लोग अपने धर्म को नहीं स्वीकार करते हैं सो ट वी हैव टू लर्न फ्रॉम देम कि पहले तो और कुछ बोल कर के जैसे कि अपने ये जो चैतन्य देव है मागर माछ झोल जुगती मेहर ल बोल हरि बोल मागर मास अर्थात की मगुर नाम की मछली है उसका जूस पहले उसका वो याद दिलाया एक युवती लड़की है उसको पहले याद दिलवाया फिर वो याद आने से वो आपके घर में जैसे ही आएगा सीधे उसको बोल हरि बोल बुलवा दिया हरि बोल बुलवा दिया तो क्या है कि इसी तरह से आपको लोगों के हृदय में प्रवेश करना है और धीरे-धीरे करके उसके माध्यम से आपको डीपर स्पिरिचुअल ट्रुथ जो है वो सिखाना है आज भी योगा जर्नल बोल कर के एक है मैंने पहले भी उसका बताया था आप देखिए कि योगा जर्नल चलाने वाले हैं वही अमेरिकन उसका रीडरशिप भी पूरा अमेरिकन है उसको आप पढ़ेंगे देखिए कि वो धीरे-धीरे करके योग सूत्र उसमें आर्टिकल आते हैं कि अच्छा ये योग सूत्र का यह सूत्र है फिर उसका यह अर्थ है फिर यह प्रणव ओंकार का चैटिंग करते हैं उसका यह अर्थ है हम लोग जो नमस्ते बोलते हैं उसका यह अर्थ है यह संस्कृत के ये जो शब्द है एक के बाद एक आसन ये आसन वे लोग इंसिस्ट करते हैं कि हम लोग उसका अमेरिका इंग्लिश नाम नहीं बोल कर के ये डाउन वर्ड डॉग ना कि ये वरियर ऐसा नाम नहीं दे कर के एक्चुअल उसका जो नाम है वज्रासन है शशांकासना है ये संस्कृत नाम यूज करें तो धीरे-धीरे करके ये रेवोल्यूशन आ रहा है वी हैव टू बी पेशेंट धीरे-धीरे करके हमको अपनी आध्यात्मिकता को इंटरनेशनल ग्लोबल लेवल प प्रोजेक्ट करना है और यहां पे डाउन वर्ड लेवल पे यह जो ग्रासरूट लेवल प प्रोजेक्ट करना है वो जो स्वामी जी कहते हैं ना कि आई एम नॉट सेटिस्फाइड विद मियर
Every one of us ought to have seen that the time had arrived. Everything looks propitious, and Indian thought, philosophical and spiritual, must once more go over and conquer the world. … It is not only that we must revive our own country—that is a small matter; I am an imaginative man—and my idea is the conquest of the whole world by the Hindu race.
मैं चाहता हूं आई वांट इंडिया शुड कंकर द वर्ल्ड विथ इट स्पिरिचुअलिटी तो और स्वामी जी कहते हैं वेरी इंटरेस्टिंग स्वामी जी क्या कहते हैं कि बहुत सारे लोग आपको कहेंगे कि पहले अपने घर को ठिकाने प लाओ बाद में जब जाकर के विदेश में योग वेदांत का प्रचार करना भारत में ही इतनी गरीबी है आप विदेश में जाकर के क्या प्रचार करने वाले हैं तो स्वामी जी कहते हैं कि ऐसे लोगों की बातों को मत सुनिए जो लोग दूसरे के लिए कार्य करते हैं दे वर्क मच बेटर स्वामी जी का खुद का उदाहरण देखिए स्वामी जी यदि अमेरिका नहीं गए होते यूरोप नहीं गए होते तो मुझे डाउट है कि रामकृष्ण मिशन इतनी सक्सेस प्राप्त करता जो रामकृष्ण मिशन का आज का जो पावर है एक जनसाधारण उसी समय जनसाधारण में जो एक उसको ये मिला था फेवर मिला था एक ये रिकॉग्निशन मिला था उस समय भी नहीं मिलता विदेश जाकर के आए तब लोगों ने देखा कि हां इसके स्वामी जी के भीतर में सही सही सत्व है सही सही ओजस है सही सही दम है मर्दानगी है तभी तो जाकर के विदेश की धरती पर ये योग और वेदांत का झंडा गाड़ के आए हैं तब कहीं जाकर के स्वामी जी ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की वी बिकम सक्सेसफुल तो स्वामी जी कहते हैं कि ऐसे लोगों को मत सोचिए कि पहले अपना घर ठिकाने लाओ पहले भारत में से गरीबी दूर करो बाद में विदेश में जाकर के योग वेदांत सिखाना स्वामी जी कहते हैं दोज हु वर्क फॉर अदर दे वर्क फार बेटर ये आप दूसरों के लिए कार्य करते हैं तो सेल्फलेसली जद कार्य करते हैं तो आपकी कार्यक्षमता हजार गुनी बढ़ जाएगी सो दिस इज व्हाट इज नीडेड टुडे एक तो इंटरनेशनल लेवल पे हमको अपनी आध्यात्मिक धरोहर स्पिरिचुअल हेरिटेज को प्रोजेक्ट करना है एंड सेकंड एट द सेम टाइम क्रास रूट लेवल प में हमको इसको लेक जाना है क्योंकि स्वामी जी का जो डेफिनेशन
Dakshineshwar Pathshala: Spiritual education
ऑफ एजुकेशन है उसका परफेक्ट मॉडल हमको वो गदाधर पाठशाला या तो फिर यह दक्षिणेश्वर पाठशाला में देखने को मिलता है किस तरह से ठाकुर एक के बाद एक सभी लड़कों को उनका संस्कार समझ कर के एजुकेट करते थे किसकी क्या साधना है किसका क्या घर है हमने जैसे कि यह कथामृत में कल लास्ट वीक देखा था कि ठाकुर ने मास्टर महाशय का घर बता दिया फिर यह इसका क्या घर है अपना राखल का राजा महाराज का स्वामी जी का क्या घर है वो सबका घर पता है कोर्ट अन कोर्ट घर का अर्थ है कि उसकी साइकोलॉजिकल प्रोफाइल और साइकोलॉजिकल प्रोफाइल के अनुसार उसकी प्रैक्टिस तो ये दोनों ठाकुर उसका पर्सनल संस्कार दे कर के बता सकते थे आज का ये जो कुकी कटिंग एजुकेशन है मास एजुकेशन उसमें ये स्टूडेंट का प्रोफाइल क्या है उसका साइकोलॉजिकल मार्कअप क्या है उसको कंप्लीट इग्नोर कर देते हैं सबको एक ही चीज करनी है हालांकि आजकल की मॉडर्न कुछ कुछ स्कूलों में काफी इस तरह से इंडिविजुअल ध्यान दिया जाता है किंतु मैं जिस तरह की स्कूल में पढ़ा था कि 7080 लड़के क्लास में बैठे हैं टीचर आते हैं कुछ बोल के चले जाते हैं 70 पर बच्चों को कुछ समझ में नहीं आता था सो वी शुड मेक एजुकेशन अभी जद आप यह कहेंगे कि ये लेटर मैंने पढ़ाई लिखाई ज्यादातर लोगों को आती है आज क्या कहेंगे कि भारत में एजुकेशन परसेंटेज कितना है 70 पर ना कि इतना कुछ है चाइना में 90 पर लोग लिटरेट है भारत में लिटरेसी का परसेंटेज 1 कितना कुछ है तो इतने सारे लोग तो एजुकेट हो गए हैं अभी और एजुकेशन का क्या कार्य है तो एजुकेशन की सिस्टम को तो अपग्रेड करना है ना रीडिंग राइटिंग एंड एरिथ मेे िक थ आर इसको कहते हैं कि एजुकेशन में थ आर होने चाहिए रीडिंग राइटिंग एंड एरिथ मेे िक तो इस वी हैव टू गो फार बियोंड दिस थ्री आर थ एच है हेड हैंड एंड हार्ट देन वी हैव टू गो इवन ट कि बचपन से ही लड़का जदी मान लीजिए कि ध्यान करना सीखता है मन को एकाग्र करना सीखता है योगिक सब रहस्य आसन प्राणायाम करना सीखता है पहले ही स्टैंडर्ड से बाल मंदिर से ही यह सब सीखता है तो फिर देखिए कि ग्रेजुएट होने के समय में उसका जो चरित्र गठन है वो कितना हो जाएगा फिर वो चाहे गृहस्थ हो चाहे सन्यासी हो चाहे वह राजनीति में जाए चाहे इंडस्ट्री में जाए कॉर्पोरेट सेक्टर में जाए बैंकिंग सेक्टर में जाए साइंटिस्ट बने सोल्जर बने टीचर बने बिजनेसमैन बने डज नॉट मैटर कि हाउसवाइफ बने जिस क्षेत्र में ये स्टूडेंट्स जाएंगे अपनी ये जो यूनिवर्सिटी में से गदाधर पाठशाला में से निकले हुए बच्चे दे विल बी सक्सेसफुल इन एवरी फील्ड तो दिस इज द आइडियल तो इस आइडियल को एस्टेब्लिश करने के लिए अभी तो बहुत सारे साल हमारे सामने है वी हैव टू एक तो क्या
The problem is a big and vast one. Be patient. We must not be frustrated by frustration.
है कि मैं मेरे साथ में खास करके ऐसा होता है मैंने जब रांची छोड़ा था तो मैं एकदम डिस्पेरटनेस को यह यंग लड़कों को सिखाते थे इस तरह की पाठशाला सभी गांव में एस्टेब्लिश की जाए तो हमारी पाठशाला य थी रूरल नाइट स्कूल थे यह सर्व शिक्षा अभियान के सेंटर्स में मैनेज करता था मोर देन 300 400 सेंटर्स में मैनेज करता था किंतु मैंने देखा कि देखिए कि पहले तो अपने पास में ट्रेन मेन पावर नहीं है ठाकुर के समकक्ष तो छोड़ ही दीजिए किंतु एटलीस्ट ठाकुर को समझने वाला तो कोई टीचर होना चाहिए ऐसे टीचरों का अभाव है स्टूडेंट्स यदि आते हैं तो फिर उन लोगों में कमिटमेंट का अभाव है जो थोड़ा बहुत हार्ड वर्क करना होता है जद कुछ भी कहेंगे कि हां चलो ये स्तोत्र पाठ करते हैं गीता मुकस कर लो वगैरह वगैरह इमीडिएट लोग भाग जाएंगे स्टूडेंट भाग जाएंगे उसको करेंगे ही नहीं तो ये कमिटमेंट का अ भाव मैंने देखा यहां पर भी देखिए कि मैं स्टूडेंट्स का क्लास लेता हूं तो अभी कल की ही बात है जनरली क्या होता है 6:00 बजे का क्लास है तो मैं बड़ा ही मैंने क्या कहेंगे कि जी जान लगा कर के मैं उनको सिखाने का प्रयास करता हूं ठाकुर मा स्वामी जी है अपनी आध्यात्मिक कहानियां है वगैरह वगैरह तो मुझे ऐसा लगता था कि लड़कों में अच्छा रिस्पांस आ रहा है तो कल मुझे इतना एक रूड शौक लगा हम मैं गया था वहां पर क्लास लेने के लिए अ ये जो टीचर होते हैं वहां पर क्लास ऑलरेडी चलता है कंप्यूटर कोचिंग का तो टीचर क्या करेंगे 6:00 बजे तक क्लास लेंगे फिर 6:00 बजे जैसे 6:00 बज गया वो कहेंगे कि अभी ये कंप्यूटर का क्लास समाप्त हुआ अब ये प्रेयर क्लास हो रहा है तो प्रेयर हॉल में जाइए अभी ये टीचर के साथ में मुझे कुछ काम था तो मैंने उसको 10 मिनट पहले बुला लिया ऑफिस में कि तुम आओ मेरे साथ में बात करो तो टीचर ने अपना क्लासरूम 10 मिनट पहले छोड़ दिया अभी ये जैसे मेरे सामने बात कर रहा है 6:00 बजे मैं प्रेयर हॉल में गया इस अपेक्षा के साथ में सभी स्टूडेंट वेट करते होंगे 10 मिनट पहले छुट्टी हो गई है तो क्या है हो सकता है लेबोरेटरी में बैठ कर के थोड़ा प्रैक्टिस करें कंप्यूटर का बाद में आएंगे जाके देखा तो कोई वहां पर नहीं था आई वास सो सरप्राइज मुझे दुख भी हुआ कि देखिए मैं इतना मेहनत करके इन लोगों के लिए क्लास लेता हूं किंतु यह लोग 10 मिनट वेट नहीं कर पाए कि चलो आज का क्लास मिस नहीं करना है जैसे हुआ कि 10 मिनट प टीचर चले गए तो ये लोग सब उठ कर के भाग गए वहां से सो ये भी एक है आप हम लोग ये जो मैंने राची का जो ये फ्रस्ट्रेशन मुझे फिर से याद आ गया कि हम इन लोगों के लिए इतना मेहनत करते हैं किंतु फिर भी वहां पर ट्राइबल लोगों का यहां पर स्टूडेंट्स का रिस्पांस जो होना चाहिए उससे थ रिस्पांस भी हमको नहीं मिलता है हमारे मुंह प बोलेंगे अच्छा बहुत अच्छा चल रहा है बहुत अच्छा है किंतु जैसे ही उनको मौका मिला भाग जाएंगे क्योंकि क्या है कि जो ह्यूमन नेचर है इन डिसिप्लिन ह्यूमन नेचर मुझे भोग विलास करना है भोग विलास इन लोगों की दृष्टि से क्या एक क्लास में बैठे रहना तो एक मेंटल डिसिप्लिन है उसकी वजह है स्कूटी लेकर के भागो यहां से तो घूमेंगे फिरेंगे यहां सामने बीच है वहां पे टहलने को जाएंगे डू व्हाट एवर बट यू वांट एबल यू डोंट वांट टू डिसिप्लिन योर माइंड तो यह एक जो मैंने देखा है हम लोग सोचते हैं कि गरीब लोग राह देख कर के बैठे हैं कि जब हम कहां जब उनके पास में जैसे ही हम उनके पास में जाएंगे वैसे ही वे लोग बड़ा ही पॉजिटिवली रेस्पों करेंगे किंतु ऐसा नहीं है उन लोगों के भीतर में जो इनसिलिको मैंने देखा है कि कोई भी एक सिस्टमैटिक काम करने को बोलेंगे उसके प्रति एक जो रेजिस्टेंस जो मैंने देखा है वो बड़ा ही भयानक है राची में मैं जब भी उनको कहता था कि आपको यह उन्नत किस्म का यह सीड्स मिल रहा है तो इसको आप अपने आपस में बांट और बांटेंगे तो रजिस्टर मेंटेन कीजिए मैं देखना चाहता हूं कि किस तरह से इसका डिस्ट्रीब्यूशन हुआ है ये जो आपको यह जो पशुपालन के लिए जो हम लोग दे रहे हैं चिकन है या बकरा है वगैरह तो उसको संभालिए उसका आप मल्टीप्लिकेशन कीजिए अभी ये दे करर के मैं एक सप्ताह के बाद में एक महीने के बाद में जाऊंगा मैं पूछूंगा अच्छा वो बकरा कहां गया तो ये बोला सांप ने उसको काट लिया इसलिए मर गया तो मैं सोचता हूं कि सांप ने काट लिया हो सकता है ट्राइबल एरिया में सांप तो घूमते रहते हैं फिर वो जो मेरे साथ में जो वॉलंटस आते हैं वो भी तो ट्राइबल है उनको मेंटालिटी अच्छे से पता है मुझे बोलेंगे छुपके से महाराज इन लोगों ने काट के खा लिया है उसको थोड़ी ना साप काटने वाला है तो देखिए कि हम लोग देते हैं यह सब चीजें अभी सीट डिस्ट्रीब्यूशन के लिए दिए हैं तो उसको खाना पका करके भात बना करके खा लिया तो दैट इज व्हाट मुझे बहुत फील होता था भीतर से कि हम लोग जद इतनी मेहनत करते हैं तो सामने इतना रिस्पांस क्यों नहीं आ रहा यहां पे भी स्टूडेंट्स को देखिए कि स्टूडेंट आते हैं इसलिए क्योंकि वो लोग हमारे कोचिंग क्लास में आते हैं मैं कितना ही अच्छा उनको पढ़ाओ यदि उनको वॉलंटरी बिठाना चाहूंगा कि आपकी इच्छा है तो आइए तो यह जो 1520 में से मुश्किल से दो-तीन स्टूडेंट बैठे रहेंगे मैंने कल देखा था कि तीन बैठे थे वो तीनों वृद्ध थे कोचिंग क्लास तो सबके लिए ओपन है यंग और ओल्ड सभी के लिए तो जो तीन लोग मेरी राह देख रहे थे वो 10 मिनट पहले छुट्टी हो गया तो 10 मिनट जिन लोगों ने वेट किया सभी तीनों के तीनों सीनियर सिटीजन है तीनों रिटायर थे तीनों रिटायर है और वो जो एक स्किल अपग्रेड ना कि ऐसा कुछ के एंगेजमेंट मिलता रहे बोलके कंप्यूटर सीखने के लिए आता है तो तीन सीनियर स्टूड सीनियर सिटीजन बैठे थे और जितने यंग थे सब भाग गए थे सो ट इज अनदर की एक है कि यह जो स्वामी जी कहते ना बी नॉट इन हरी ये प्रब द प्रॉब्लम इज बिग एंड फस्ट ये बहुत बड़ी समस्या है यहां पर सिर्फ सरकमस्टेंसस अमीर लोगों की या तो अपर क्लास लोगों की नेगलेक्ट सिर्फ इतना ही कारण भूत नहीं है जो लोग गरीब है जो लोग को सहाय की सही सही में जरूरत है उन लोगों को अपना अपने को खुद को डिसिप्लिन करके एक सिस्टमैटिक मैनर में अपना खुद का डेवलपमेंट करना है वो सेल्स नहीं है व कम लोगों में है वो 100% नहीं है या तो फिर हमारी जितनी अपेक्षा है उतनी नहीं है सो दैट फ्रस्ट्रेशन वी हैव टू डील विद अब प्रैक्टिकल फील्ड में जब जाएंगे तो यह सब फ्रस्ट्रेशन का सामना करना पड़ेगा और इसीलिए स्वामी जी कहते हैं यह जो स्वामी जी का जो पहले वाला जो पॉइंट था कि इष्ट और अनिष्ट इस जगत में इतने 5050 पर है आप 100% कभी भी समाज को सुधारने वाले हैं यह बात मैं जब राची गया था मुझे समझ में नहीं आ रही थी या तो मुझे मेरा स्टडी में वो एक गैप रह गया था मैं यह सोच के गया था कि ये गरीब लोग बस नाथ देख करके बैठे हैं कि कब हम लोग जाए कब हम उनको हेल्प करें किंतु वहां जाकर के एक के बाद एक इतने सारे फ्रस्ट्रेशन मैंने देखे बाद में भी मैं यह गदाधर अभुदय प्रकल्प चलाता था लीमड़ी में यहां पर स्टूडेंट्स का क्लास ले रहा हूं फ्रस्ट्रेशन विल बी अवर कांस्टेंट कंपेनिया जो लोग लोकहित का कार्य करना चाहते हैं उन सबके लिए फ्रस्ट्रेशन को उने आना ही आना है जिनको हम सहाय कर रहे हैं वे लोग एक समय तो जैसे कि हमको हम दगा दे कर के या तो फिर बिट्रेट चले जाएंगे ट वी ऑल हैव टू एक्सपेक्ट इन द एडवांस और फिर जाकर के यह समझ कर के कार्य करना है कि ये सिर्फ समाज सुधारणा का कार्य नहीं दिस इज आल्सो ए कैरेक्टर बिल्डिंग प्रोग्राम तो ये कैरेक्टर बिल्डिंग भी साथ-साथ में करना है स्पिरिचुअलिटी अपने में भी जागृत करना है और दूसरों को भी स्पिरिचुअलिटी देनी है तो ड्यूल एजेट स्वर्ड दो धारी तलवार की तरह है ये जितने भी रिफॉर्म वर्क है अपने प भी करने चाहिए और उनके पर ऊपर में भी करने चाहिए टवे वी विल नॉट बी डिप्रेस्ड और वी विल नॉट बी फ्रस्ट्रेटेड बाय फ्रस्ट्रेशन और फेलर तो आज त नेक्स्ट पॉइंट कल देखते
प्रश्न: विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण में शिक्षकों का कार्य बड़ा कठिन है
हैं टीचर का जो कार्य है वह मेन कार्य है क्योंकि उनको फ्रस्ट्रेशन फेलर सहन करने है इतना मेहनत करके को पढ़ाते हैं यदि आधे फेल हो जाएंगे तो उनको तो दुख होगा ही होगा और अग अभी आज की जो सिस्टम है उसमें क्या है कि सभी को पास कर दो तो च न मोर डेंजरस आप अलर्ट होना भूल जागे सो बहुत यदि बहुत ज्यादा फेल हो जाते हैं तो हम फ्रस्ट्रेट हो जाएंगे और यदि सबको पास कर देंगे ऐसा पॉलिसी बना दिया तो फिर हम लोग फिर जो मेहनत करनी चाहिए वो नहीं करेंगे यह सोच कर के तो पास होने वाले है व्ट डज इट मैटर वो एक है कि दोनों तरह से यह सब टीचर के लिए इश्यूज है यह जो मैं
प्रश्न: आज के युवाओं में हम एस्पिरेशन की कमी देखते हैं। वे बड़ी महत्वाकांक्षाएं नहीं रखना चाहते। उनमें एम्बिशन नहीं दिखती। इसका क्या कोई उपाय है?
कंप्यूटर क्लास में जाता हूं ना तो मैं स्टूडेंट्स को पूछता रहता हूं के व्हाट इज योर मने होप क्या है एस्पिरेशन क्या है या तो फिर मैं जब क्लास लूंगा तो प्रश्न करो व्ट एवर यू वांट टू नो मैंने सिर्फ रिलीजियस नहीं अपना इंडस्ट्री टेक्नोलॉजी मॉडर्न कॉर्पोरेट मुझे थोड़ा बहुत पता है आई विल शेयर विथ यू सो मैं देखूंगा मने ूमबी की तरह बैठे हैं कोई जैसे चेहरे पे नो चेंज यहां पे हम लोग ने कुछ यूथ सेमिनार किए थे मैं जब यहां पर आया था नया-नया उस समय सेमिनार चल रहे थे तो बड़े अच्छे-अच्छे स्पीकर को पूरे आंध्र प्रदेश में से बुला करके हमने बुलाया उनको कहा कि यह स्टूडेंट है उसको आप सिखाइए तो मैंने ऐसा अपॉर्चुनिटी यदि आपके पास में आता है हु आर इंडस्ट्री लीडर्स हु आर एक्सपर्ट इन देर फील्ड यू आस्क देम समथिंग एक क्वेश्चन एक स्टूडेंट नहीं करेगा अद्भुत बात है और हमारे यहां पर तो ये फी भर के आते हैं हम लोग तो फ्री में सिखाते नहीं क्योंकि हमको पता है कि फ्री एजुकेशन का कोई मतलब नहीं रहा 000 की समथिंग हम दो महीने के लेते हैं उसमें भी आधे दिन छुट्टी लगाएंगे और पूछेंगे क्यों नहीं आए तो फ ऐसा बहाना करेंगे कि फिर दूसरे दिन आपकी पूछने की इच्छा ना हो अच्छा आपने रुपया भरा है नहीं आना है तो मत आओ मैं क्या कर लूंगा तो एक तरह का पथी बोलो ना कि एक तरह का तमस बोलो ऐसा आ गया है उनको ऐसा लग रहा है कि मेहनत करने से कोई लाभ नहीं है या तो रिजर्वेशन में कुछ पालो या तो फिर शॉर्टकट करके कुछ निकाल लो मेहनत करने से कोई लाभ नहीं ऐसा एक बड़े लंबे म लार्ज स्केल लोगों को लगने लगा है च इज वेरी डेंजरस ये जो आपने कहा कि लेक ऑफ एस्पिरेशन य मैंने भी नोट किया है वेरी डेंजरस कि मेहनत करके आदमी आगे निकल सकता है यह बात यदि हम जद विश्वास करना बंद कर देंगे देन वी विल लूज एवरीथिंग सभी चीजों में शॉर्टकट सभी चीजों में
प्रश्न: आध्यात्मिक जीवन में भी कई लोगों ने यह मानना बंद कर दिया है कि अगर हम साधना करेंगे तो हमें ईश्वर दर्शन प्राप्त होंगे। इसका क्या कारण है?
शॉर्टकट ये जो ये जो जनरेशन थी ना कि पोस्ट इंडिपेंडेंस जनरेशन या तो फिर हमारी जनरेशन है जो हम 40 50 तक पहुंचे हैं और ये आज की जो जनरेशन है यह पोस्ट मिलेनियल जनरेशन य जनरेशन में वेरी डिफरेंट जनरेशन कि हम लोग जो हार्ड वर्क का जो वैल्यू सीखे हैं हार्ड वर्क करके कुछ पा सकते हैं उनको ऐसा लगता ही नहीं है और यह सिर्फ मने सांसारिक क्षेत्र में नहीं आध्यात्मिक क्षेत्र में भी आपको शॉर्टकट करके स्पिरिचुअल बेनिफिट लेना है कौन से मंदिर में जाएंगे तो ज्यादा बेनिफिट होगा कौन सा स्नान करेंगे तो ज्यादा बेनिफिट होगा कौन सी विधि करवाएंगे तो होगा तो वो सब करवाएंगे किंतु आप इनको बोलेंगे कि सत्य वचन पालन करो थोड़ा बहुत ब्रह्मचर्य मन को डिसिप्लिन कर दो थोड़ा बहुत जब ध्यान मेडिटेशन कर दो प्राणायाम आसन कर दो तो बिल्कुल नहीं ट इज रियली डेंजरस
प्रश्न: में एक लाइफ-कोच के साथ बात कर रहा था. वह लाखो रुपये लेकर मोटिवेशन क्लास करता है. वो कह रहा है की लोगो में थोड़ा सा चेंज लाना भी बड़ा मुश्किल है.
दूसरा दूसरा इशू क्या होता है पता है कि हम लोगों को अपने पने एक ये हो जाता है डाउट आ जाता है मैं इन लोगों के साथ में जो स्टूडेंट्स के साथ में बात करता हूं तो मैं यह सोचता हूं कभी-कभी कि अच्छा देखिए सदगुरु जद बोलेगा तो इतने सारे लोग इकट्ठा हो जाएंगे वह श्री श्री बोलेगा तो इतने सारे लोग इकट्ठा हो जाएंगे यह लोग मेरा 15 मिनट का क्लास सुनने में यदि मौका मिलेगे तो भग जाएंगे ऐसा है ट मीस आई एम सम हाउ इन एडिक्ट आई डू नॉट हैव एनीथिंग बेटर टू टेल देम और दे फील दैट आई हैव नथिंग टू टीच देम सो ट फीलिंग ऑफ इन एडिक्स दैट फीलिंग ऑफ इंपरफेक्शन वो अपने मन में घुस जाएगी कि जुट मोट का मैं इतना मेहनत करके मैं क्लास ले रहा हूं इनके पीछे में दौड़ रहा हूं नहीं सीखना है तो मत सीखो ज मुझे क्या है लेट मी मैनेज माय ओन लाइफ वो भी एक आ जाता है नेगेटिव फीलिंग अपने में देन वी हैव टू सेल्फ मोटिवेट अवर सेल्फ म दूसरों को तो मोटिवेट छोड़ ही दीजिए आखिर में आपको सेल्फ मोटिवेट होना होगा देन यू कैन ल दिस एक्टिविटीज यह जो हमने कहा ना
प्रश्न: रामकृष्ण मिशन को भी युथ को अट्रैक्ट करने की स्ट्रेटेजी बदलनी होगी.
कि डिफिकल्ट टू चेंज द पीपल इट इज इक्वली डिफिकल्ट टू चेंज अवर ऑर्डर 100 यर का हिस्ट्री है पीछे में यू आर नॉट गोइंग टू चेंज इट ओवर नाइट ये जो फ्रस्ट्रेशन मैं फील करता हूं कभी-कभी किने सी पोटेंशियल पोटेंशियल वाइज अवर मूवमेंट ज फिलोसॉफिकल डेप्थ टैलेंट अपने साथ शीश महाराज को देखिए आयन को देखिए अपने विश्वरूप महाराज को देखिए टैलेंट वाइज पोटेंशियल मने फिलोसोफी वाइज डिविज हम किसी से कम नहीं है इनफैक्ट वी आर द बेस्ट ऑफ द बेस्ट टॉप 10 में हमारा नंबर आएगा इतना अपने पास में यह कैपेसिटी है इन स्पाइट ऑफ टना जो प्रोपोर्शनेट इंपैक्ट ऑन द सोसाइटी है इट इज मिनस का लिटरली मिनस का आजकल के ये जो लाइफ कोच का आपने उदाहरण दिया अवर साधू कैन बिकम फार मोर बेटर लाइफ कोच अभी एक आई बाबा चल रहा है अपने ऑर्डर में 100 आईआईटी वाले बैठे हैं किंतु एस इफ के उनका कोई मतलब इनविजिबल है तयार एस फार एस द इंपैक्ट न सोसाइटी इ कंसर्न व एक पागल एक आईआईटी ड्रॉप आउट व्ट एवर वो जो होगा वो एक जो स्टेटमेंट देता है पूरा नेशनल मीडिया उसके पीछे दौड़ता है अपने यहां पर एक आईआईटी वाले बोलक इकट्ठा हो करर के एक स्टेटमेंट भी देंगे तो भी कोई सुनने को नहीं आएगा स्वामी स्वामी जी गलती एक कर दी है क्या है कि एक तो हमको बहुत बड़ा एस्पिरेशन दे ग और फिर ये जो मेथोड इतना डिफिकल्ट लेके गए हैं हम कोई भी शॉर्टकट सोचना भी चाहे तो नहीं सोच
प्रश्न: इसीलिए हमारा प्रभाव लंबे समय तक रहेगा। हम कभी भी वायरल नहीं होंगे, हम कभी भी धार्मिक शॉर्टकट नहीं सिखाएंगे, लेकिन हमारे काम की गहराई अभूतपूर्व होगी।
सकते ये स्वामी जी के टाइम में भी था ना वो जो थियोसोफिकल सोसाइटी दो महात्मा पाल के रखे थे अभी ये दो महात्मा है कुथु मी और मोरिया वो सब जब मैंने जादू चमत्कार यह मिस्टिसिजम ये टेलीपैथी ये सियास आपके पूर्वज मरे हुए पूर्वजों को लेके आना उसके साथ बात करना यह सब नाटक भारत में ब्रिटेन में अमेरिका में सब जगह फैला था स्वामी जी कहते हैं कि इस तरह का मिस्टिसिजम में जो जाएगा वह पूरा स्पिरिचुअलिटी के रास्ते से भटक जाएगा सो इन स्पाइट ऑफ ट देखिए स्वामी जी हि ओन सक्सेस कितना मतलब जबरदस्त था कि यह महात्मा य मिस्टिसिजम इस सबके ऊपर में जाकर के स्वामी जी सक्सेसफुल होकर के आए थे सो ट समथिंग के मने दिस इ पॉसिबल मने स्ट्रेट एंड नरो पाथ पर चल कर के भी यू कैन बिकम एक्सट्रीमली सक्सेसफुल स्वामी विवेकानंद सर सितारा ही आपको इस तरह से मिस्टिसिजम में चले जाना है ना ही आपको फिर लोगों को भ्रमित करके शॉर्टकट करवा के काम निकाल देना है य कैन गो स्ट्रेट रोपा ब्रह्मचर्य विवेक वैराग्य त्याग इसके रास्ते पर चल कर के भी य कैन बिकम पॉपुलर मोमेंट स्वामी जी शोन दिस यस ने ठाकुर की तरह जद स्वामी जी का होता कि दक्षिणेश्वर के कोने में है व पे ही वो अभी जो उनके 50 60 जितने भी डिसाइल है उन लोगों में है उनका नाम और फिर स्वामी जी यदि ज्यादा से ज्यादा भारत भ्रमण करके फिर आक के बैठ गए होते बेलून मट बना दिया होता तो फिर तो फिर हमको डाउट होता कि हां हमने स्ट्रेट एंड नेरो पाथ प चलके क्या हम कैन वी बिकम वाइड स्प्रेड र नॉट माने देयर आर टू टाइप ऑफ मूवमेंट वन इज डीप एंड अनदर इज वाट किंतु जो वास्टप होती है उसका डेप्थ नहीं होता और जिसमें डेप्थ है वो स्प्रेड नहीं होती स्नेस नहीं होती वो एक कुए की तरह जलाशय और कुवा जलाशय का डेप्थ ज्यादा नहीं होगा किंतु बड़ा व्याप होगा कुए का डेप्थ बड़ा है किंतु व्याप छोटा है तो वो डाउट हमको तब होता बट वे स्वामी जी है बिकम फेमस एंड पॉपुलर वी हैव दिस होप यू कैन बी एक्सट्रीमली डीप एज वेल ए यू कैन बी एक्सट्रीमली वा बोथ थ आर पॉसिबल बट होप इ देर that's