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Swami Vivekananda's Macrocosm & Microcosm ·

Swami Vivekananda's Cosmos Macrocosm: Summary And Outline 13 May 2024

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ओ स्थापक च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपिणी अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय नम एक के बाद एक स्लाइड हम लेंगे और उसका मैं थोड़ा सा डिस्कस करेंगे यह समरी एंड आउटलाइन ऑफ कॉस्मस मैक्रो कजम अच्छा अभी अभी यह जितने भी सेंटेंसेस है वह सब स्वामी जी के प्रवचन में से ही मैंने लिए हैं मैंने अपना खुद का एक भी शब्द ऐड नहीं किया यानी कि जो आप पढ़ेंगे स्वामी जी को ही पढ़ेंगे स्वामी जी के ही प्रवचन में से स्वामी जी के ही सेंटेंस को कलेक्ट करके मैंने यह समरी बनाई है और प्रत्येक सेंटेंस के एंड में आप देखेंगे मैंने रेफरेंस भी दिया है 2.23 इसका क्या अर्थ है वॉल्यूम टू पेज नंबर 203 के ऊपर में यह ऊपर में से यह कोटेशन लिया है और यह सभी कोटेशन एक ही मैक्रो कजम में से ही लिए हैं उसको समरी बनाने के लिए अच्छा तो स्वामी जी प्रारंभ किस तरह से करते हैं स्वामी जी के जो आइडियाज का आउटलाइन कैसे स्टार्ट होता है स्वामी जी कहते हैं द होल यूनिवर्स इज ब्यूटीफुल एंड मैन हैज बीन एंजॉयिंग इट सिल्स हिज अपीयरेंस ऑन अर्थ यह पूरा जो विश्व ब्रह्मांड है वो उसका जो नेचुरल ब्यूटी है वो इतना मन को सुहाने वाला वाला है और जब से मनुष्य का इवोल्यूशन या तो मनुष्य का प्रगट हुआ है इस पृथ्वी पर हम लोग इस प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद उठा रहे हैं सब्लाइम एंड ओ इंस्पायरिंग आर द माउंटेंस द जाइगर रशिंग रिवर्स रोलिंग टुवर्ड्स द सी द ट्रैकलेस डेजर्ट द इंफाइटिंग सब्लाइम एंड ब्यूटीफुल इनडीड क्या यह प्राकृतिक सौंदर्य का क्या डिटेल स्वामी जी बताते हैं यह जो माउंटेंस से यह जो पहाड़ है पर्वत है यह जागें यह जो बहुत ही विराट विशाल नदियां जो है जो दौड़ी दौड़ी समुंदर के साथ में संगम के लिए दौड़ी चली जा रही है और ट्रैकलेस डेजर्ट अर्थात कि इस तरह की मरुभूमि इस तरह के रण प्रदेश जहां पर किसी भी तरह की कोई भी गाइड पोस्ट नहीं है कोई भी ता नहीं है आप डेजर्ट में जाएंगे सहारा है ना कि गोभी है ना कि इवन अपने राजस्थान में जो डेजर्ट है वहां पर आपको रास्ता नहीं दिखेगा यदि आपके पास में एक सेंस ऑफ नेविगेशन नहीं है रात को तारे देख कर के आप अपने को नेविगेट नहीं कर सकते तो डेजर्ट में भूले भटके हो जाएंगे जैसे कि समुंदर में यह जो कैप्टन होते हैं जहाज के वह किस तरह से वह तारों की पोजीशन देख कर के वह अपने जहाज को वो गाइड करते हैं अपने अपनी शिप को नेविगेट करते हैं वैसे ही डेजर्ट इस तरह से ट्रैकलेस है वहां पे किसी भी तरह का गाइड पोस्ट नहीं है कि आपको तारों को देख कर के अपने को नेविगेट करना होगा द इनफाइनों विराट समुंदर और यह तारों से भरा हुआ यह आकाश ऑल दीज आर ओ इंस्पायरिंग सब्लाइम एंड ब्यूटीफुल यह सब हमारे मन में एक तरह की भव्यता का आरोपण करते हैं एक सौंदर्य की एक सेंस ऑफ ब्यूटी हमारे मन में उत्पन्न करते हैं द होल मास ऑफ एक्जिस्टेंस व्हिच वी कॉल नेचर हैज बीन एक्टिंग ऑन द ह्यूमन माइंड सिंस टाइम इमेमोरियल यह जो प्राकृतिक सौंदर्य है प्रकृति का एक भव्यता है प्रकृति से हमको एक डर भी लगता है वह आकाश में बिजली होगी कहां वह बिजली गिरेगी पेड़ के ऊपर में गिरेगी तो जंगल में आग लग जाएगी मेरे घर पर गिरे तो घर में आग लग जाएगी यह फ्लड से यह फेमिन से यह जो प्राकृतिक यह जो फोर्सेस ऑफ नेचर है प्रकृति की यह बड़ी-बड़ी विराट शक्तियां प्रकृति का सौंदर्य यह सब कुछ हमारे मन पर बिल्कुल प्रारंभ से ही हमारे मन पर इसका महत्व इसका एक प्रभाव विस्तारित करते आए हैं इट हैज बीन एक्टिंग ऑन द थॉट ऑफ मैन एंड एज इट्स रिएक्शन हैज कम आउट द क्वे व्ट आर दीज वेंस आर दे वह हमारे मन पर असर करते हैं प्रभाव डालते हैं और इस प्रभाव की वजह से एक प्रश्न हमारे मन में आता है यह प्राकृतिक नजारे यह प्रकृति की शक्ति जो कि हमको क्षण भर में मिटा सकती है एक ऐसा फ्लड आएगा कि मेरा घर परिवार मेरा यह गांव सब कुछ बहा के ले जाएगा अभी एक ऐसी आग ल लगेगी कि क्षण भर में मैंने मेहनत करके जो पूरा परिवार बसाया है खेत में वह अनाज उगाया है एक क्षण भर में आग से सब कुछ भस्मी भूत हो जाएगा बारिश होगी तो ऐसी बारिश होगी कि पूरे शहर के शहर इसके भीतर में डूब जाएंगे आज तो हमारे पास टेक्नोलॉजी की इतनी शक्ति है कि नेचुरल जो डिजास्टर होते हैं इसके सामने हम फिर भी थोड़ा बहुत जुज सकते हैं फिर भी ये नेचर तो अपने बस में नहीं है ना यह जो हम गुजरात की ही बात करें 2001 में जो अर्थक्वेक आया था जो धरती कंप हुआ था कितने लोगों की उसने जान ले ली हमारी आज की यह टेक्नोलॉजी ये जो सेस्मो ग्राफ जिसको कहते हैं ना कि जमीन के भीतर में वो मशीन रखे हुए हैं जिससे कि पता चले कि कब अर्थक्वेक आने वाला है किंतु कुछ भी काम नहीं करेगा जब प्रकृति जब हमसे रूठ जाएगी ये क्लाउड बर्स्ट होता है न किय सुनामी आती है मनुष्य जैसे कि प्रकृति के सामने एक क्षुद्र की कीड़े की तरह आंख फाड़ कर के देखता रहता है कब वह आएगा कब हमारा विनाश कर देगा तो टेक्नोलॉजी भी वैसे तो हमको लगता है कि टेक्नोलॉजी हमको बड़ा सेफ बना केर रखती है किंतु कुछ भी जब प्राकृतिक विपद आएगी कुछ भी काम नहीं करेगा तब यह प्रश्न होगा कि प्रकृति की शक्ति के पीछे में सही सही किसकी शक्ति है कौन है जो कि इस प्रकृति का नियंता है कौन है जो कि इस प्रकृति का राजा इस प्रकृति को वह चालित कर रहा है यह प्रश्न हमारे मन में अवश्य होगा तो स्वामी जी क्या कहते हैं देखिए अभी स्वामी जी स्टेप बाय स्टेप हमको इस प्रश्न के उत्तर की ओर ले जाते हैं प्रश्न क्या है कि प्रकृति का नि प्रकृति के पीछे कौन सी रहस्यमय शक्ति है तो इस शक्ति को समझाने के लिए स्वामी जी कहते हैं कि मैं विज्ञान के साथ में रहकर के इन हार्मो विथ सायंस में इसका उत्तर दूंगा तो यह जो उत्तर है वह उत्तर हमको स्वामी जी स्टेप बाय स्टेप ले जा रहा है सर्वप्रथम आर्गुमेंट स्टेप क्या है स्वामी जी कहते हैं टेक अ लिटल प्लांट एक छोटे से पौधे को लीजिए ही पुट्स अ सीड इन द ग्राउंड एंड लेटर ही फाइंड्स अ प्लांट पीप आउट एक छोटा सा पौधा जमीन के भीतर में एक अपना बीज बोता है और इस बीज में से एक नया पौधा व उगता है उसमें से वह उ प्रकट होता है लिफ्ट इट सेल्फ स्लोली अबाउ द ग्राउंड एंड ग्रो एंड ग्रो टिल इट बिकम अ जाइगर ट्री धीरे-धीरे करके य पौधा जमीन में से बढ़ता जाता है बढ़ता जाता है आखिर में एक विराट वटवृक्ष बन जाता है देन इट डाज लिविंग ओनली द सीड आखिर में यह पेड़ भी मृत्यु के हवाले हो जाएगा और पेड़ के बीज रह जाएंगे इट कंपलीट्स द सर्कल इट कम्स आउट ऑफ द सीड बिकम द ट्री एंड एंड्स इन द सीड अगेन यह पूरा यह प्रकृति का चक्र ये पौधे का चक्र पेड़ का जीवन मृत्यु का चक्र समाप्त होता है बीज में से पेड़ बनता है पेड़ बीज में चला जाता है बीज को छोड़ के पेड़ की मृत्यु हो जाती है एवरीथिंग इन नेचर बिगिंस एज इट वेर फ्रॉम सर्टेन सीड सर्टेन रेडिमेंट सर्टेन फाइन फॉर्म्स एंड बिकम ग्रोसर एंड ग्रॉसर एंड डेवलप्स गोइंग ऑन दैट वे फॉर अ सर्टेन टाइम एंड देन अगेन गोज बैक टू दैट फाइन फॉर्म एंड सबसाइट्स इस प्रकृति में आप जो कुछ भी देखेंगे वह सभी वस्तुएं सभी चीजें एक सूक्ष्म रूप से प्रारंभ होती है उस सूक्ष्म रूप में से धीरे-धीरे करके उसका वो जो भौतिक स्वरूप बनता जाता है उसका उसका साइज है उसका कद है वो बढ़ता जाता है बढ़ता जाता है वो पुक्त वय को प्राप्त होता है उसका कंप्लीट डेवलपमेंट होता है और फिर से वही रिवर्स साइकिल स्टार्ट होती है वो क्षीण होता जाता है और भौतिक में से सूक्ष्म की ओर वो यात्रा करता है फ्रॉम ग्रोस टू सटल एंड फ्रॉम सटल टू ग्रोस यह प्रकृति का चक्र है जैसे यहां पर सिर्फ पौधे का उदाहरण मैंने दिया है किंतु स्वामी जी जब यह उदाहरण डिस्कस करते हैं तो बहुत सारे उदाहरण एक के बाद एक देते हैं जैसे पंखी के बारे में कि अंडे में से पंखी आया पंखी अंडे को जन्म देता है और फिर इस अंडे में से फिर से एक नया पंखी जन्म लेता है तो यह जन्म मृत्यु जरा व्याधि का यह जो जीवन चक्र है इसका जो फाइनल कंक्लूजन क्या है फाइनल उसका यह क्या है कि एक सूक्ष्म रूप में से स्थूल स्वरूप आता है और स्थूल स्वरूप फिर से सूक्ष्म रूप में चला जाता है यह है स्वामी जी का पहला आर्गुमेंट इसके बाद में स्वामी जी क्या कहते हैं दस वी फाइंड दैट द इफेक्ट इज नेवर डिफरेंट फ्रॉम द कॉज इट इज ओनली दैट दिस इफेक्ट इज अ रिप्रोडक्शन ऑफ द कॉज इन अ ग्रोसर फॉर्म अर्थात कि परिणाम जो है वो अपने उसके जो कारण जो है कारण से परिणाम डिफरेंट नहीं है कारण सूक्ष्म रूप में होता है परिणाम स्थूल रूप में होता है बीज जो है सूक्ष्म है पेड़ जो है वह स्थूल है यह मने ये और यह जो साइकल है द होल पीरियड ऑफ वन मेनिफेस्टेशन ऑफ दिस यूनिवर्स इट्स गोइंग डाउन इन टू द फाइनर फॉर्म रिमेनिंग देयर फॉर सम टाइम एंड कमिंग आउट अगेन इज इन संस्कृत कॉल्ड अ कल्प और अ साइकल अच्छा अभी इसी जो यह चक्र जो है मने सूक्ष्म में से स्थूल में जाने का स्थूल में से फिर से सूक्ष्म में जाने का इस यह जो चक्र को यह पूरी लाइफ साइकल को पूरे विश्व ब्रह्मांड के ऊपर में आरोप करके देखिए आज का मॉडर्न साइंस क्या कहता है बिग बैंग में से यह विश्व ब्रह्मांड आया है और यह विश्व ब्रह्मांड फिर एक बिग क्रंच जैसा कुछ होगा और फिर से वह बीज रूप में चला जाएगा और वहीं से फिर से यह साइकल स्टार्ट होगी तो ये साइक्लिकल नेचर ऑफ द यूनिवर्स जिसको कि अपने संस्कृत में एक कल्प कहते हैं कि कल्प आरंभ जिसको कहते हैं कि एक कल्प प्रारंभ हुआ अर्थात कि बिग बैंग में से एक नया विश्व प्रकट हुआ फिर यह साइकिल कंप्लीट होगी ये पूरा बिग क्रंच होगा और बिग क्रंच में पूरा विश्व ब्रह्मांड नष्ट हो जाएगा विस्फोट हो जाएगा प्रलय हो जाएगा और यह प्रलय में से फिर से नई सृष्टि प्रारंभ होगी तो यह जो साइकल है वो सक्ष अपने पृथ्वी पे मने ह्यूमन लेवल प देखें तो पेड़ है पौधे हैं मनुष्य भी है और फिर इसी तरह से पंखी उसके लेवल प भी हमने बताया और यह विश्व ब्रह्मांड के लेवल प भी यही साइकिल काम कर रही है स्वामी जी नेक्स्ट क्या कहते हैं इवोल्यूशन एंड इवोल्यूशन अभी इसी साइकिल को और थोड़ा सा डिटेल में एनालिसिस करके कहते हैं दिस कमिंग आउट ऑफ द फाइन एंड बिकमिंग ग्रॉस सिंपली चेंजिंग द अरेंजमेंट ऑफ इट्स पार्ट्स एज इट वेर इज व्हाट इन मॉडर्न टाइम्स कॉल्ड इवोल्यूशन आज के जमाने में आज की भाषा में आज के वैज्ञानिक यह सूक्ष्म में से स्थूल का जो प्रगट करण होता है सूक्ष्म में से स्थूल का जो विकास होता है इस को कहते हैं इवोल्यूशन जैसे कि यह हम पहले यह चार 400 करोड़ साल पहले 4 बिलियन इयर्स एगो इस पृथ्वी की रचना हुई अभी इस पृथ्वी पर धीरे-धीरे करके आज के साइंटिस्ट जिस तरह से कहते हैं कि यह जो समुंदर के भीतर में ये गर्म पानी के झरने थे वेंट उसको कहते हैं कि पृथ्वी के रसातल में से गर्म पानी का फवारा छूटता था तो उसके आसपास में सर्वप्रथम ये ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल प्रकट हुए और यही ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल धीरे-धीरे होकर के मल्टी सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट म बने और यही मल्टी सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट म धीरे-धीरे डेवलप होकर के फिश यानी कि मछलियां पहली प्रथम जो उस समय की मछलियां वो बनी फिर यही मछली जल जमीन के ऊपर में आकर के पशु पक्षी बने और फिर यही पशु पक्षियों में से इवोल्यूशन होते-होते धीरे-धीरे आज का मनुष्य हुआ तो यह जो सूक्ष्म में से स्थूल की जो यात्रा है ये ह्यूमन इवोल्यूशन की वो भी और यह ब्रह्मांड की भी के बिग बैंग में से आज का स्थूल यूनिवर्स आया इन दोनों को आज के वैज्ञानिक कहते हैं इवोल्यूशन अभी स्वामी जी कहते हैं किंतु देखिए कि प्रत्येक इवोल्यूशन के पीछे में एक दूसरा सीक्रेट क्या है एव्री इवोल्यूशन इज प्रेसीडेड बाय एन इवोल्यूशन अर्थात कि पेड़ में से बीज हुआ तभी तो उस बीज में से नया पेड़ होगा अभी यह पेड़ में से बीज होने की प्रोसेस को कहते हैं इवोल्यूशन और फिर बीज में से पेड़ होता है इसको कहते हैं इवोल्यूशन ये इवोल्यूशन तो तभी हो सकता है जबकि यह पेड़ बीज में गया पेड़ का पूरा डीएनए है पेड़ का पूरा जो ब्लूप्रिंट है व उसके बीज में गया तभी तो कहीं जाकर के डीएनए या तो ब्लूप्रिंट मेनिफेस्ट होकर के ग्रोस और स्थूल में परिणत होक के धीरे-धीरे नया पेड़ बनता है अभी यह बीच के भीतर में मान लीजिए एक एक बीज है आम के पेड़ का अर्थात कि आम के पेड़ का डीएनए उस बीज में है तो उस बीज में से आम का पेड़ ही होगा एक अंडा है जैसे कि मान लीजिए मुर्गी का एक अंडा है तो मुर्गी के अंडे के भीतर में मुर्गी का डीएनए है तो उसी मुर्गी के अंडे में से मुर्गी का ही जन्म होगा और किसी का वो माने वो शेर का ना कि बिल्ली का जन्म नहीं होगा उसका डीएनए उसी तरह से बना हुआ है तो जो डीएनए में है वही बड़ा होकर के वो बनेगा इफ दिस इज क्लियर वी हैव नो कोरल विद द इवोल्यूशनिस्ट फॉर वी सी दैट इफ दे एडमिट दिस टेप इंस्टेड ऑफ देयर डिस्ट्रॉयिंग रिलीजन दे विल बी द ग्रेटेस्ट सपोर्टर्स ऑफ इट जद वैज्ञानिक लोग यह स्वीकार करते हैं कि प्रत्येक सूक्ष्म में से स्थूल में जाने वाले इवोल्यूशन के पीछे में स्थूल से सूक्ष्म की यात्रा है पेड़ का डीएनए छोटा सा बीच में समाहित होता और फिर यही बीच का डीएनए बड़ा होकर के पेड़ बनता है तो यह बीच में से पेड़ बनता है यह बात हमने स्वीकार की इवोल्यूशन हमने स्वीकार किया यदि वैज्ञानिक लोग इन टर्न यह स्वीकार करते हैं कि इवोल्यूशन भी हुआ है यहां पर स्वामी जी यह कहते हैं ना कि धर्म का विनाश करने की बजाय इवोल्यूशन की थिरी धर्म को सहाय करेगी ऐसा क्यों कहते हैं क्योंकि यह 18th सेंचुरी का जो उस समय जो क्रिश्चियन ऑर्थोडॉक्सी थी यूरोप में वे लोग ऐसा कहते थे कि बस भगवान ने एक जादुई लकड़ी घुमाई और पूरे ये विश्व ब्रह्मांड का एक साथ में ही क्रिएशन हो गया एक साथ में ही तारे आ गए एक साथ में ही ये पृथ्वी आ गई एक साथ में ये मिल्की वे गैलेक्सी आ गई ये जितने भी ग्रह है ये जुपिटर है ना सैटर्न है ना कि मार्स है फिर ये पेड़ पौधे ये आम का पेड़ ये लीची का पेड़ ना कि फिर ये केले का पेड़ ना कि ये बत्तक है ना कि चमड़ी अ अपने ये अ ये जो ये है आपकी स्पेरो है ना कि मनुष्य है ये जितने भी पशु पक्षी है सब एक साथ में ही भगवान ने जादुई लकड़ी घुमाई और एक साथ में सब प्रकट हो गया इवोल्यूशन बोलकर के कोई तत्व नहीं है ऐसा कहना कि बंदर में से मनुष्य आया है यह तो मनुष्य का बड़ा भयानक अपमान करने जैसा है क्यों क्योंकि जीसस क्राइस्ट भी तो मनुष्य के रूप में आए थे तो क्या यह बंदर क्या जीसस क्राइस्ट का एंसेट पर है ये किस तरह का ब्लास फेमी है अर्थात ये इवोल्यूशन के अगेंस्ट में क्रिश्चन लोगों का बड़ा ही भयानक विरोध था यह ब्रह्मांड के इवोल्यूशन के अगेंस्ट में भी और यह ह्यूमन इवोल्यूशन के अगेंस्ट में भी स्वामी जी कहते हैं हमको विज्ञान के साथ में झगड़ा नहीं करना यदि वैज्ञानिक लोग यह स्वीकार कर लेते हैं कि जो एक एक दूसरी एक सत्ता थी माने एक इवोल्यूशन हुआ है यदि एक इवोल्यूशन हुआ है यह वैज्ञानिक लोग स्वीकार कर दे तो हम लोग यह स्वीकार करने को तैयार है इवोल्यूशन अब ये स्वामी जी ऐसा क्यों कहते हैं इसका उत्तर हमको नेक्स्ट पॉइंट में मिलता है क्या कहते हैं स्वामी जी दिस इवोल्यूशन एंड इवोल्यूशन इज गोइंग ऑन थ्रू आउट द होल ऑफ नेचर यह इवोल्यूशन और इवोल्यूशन पूरी प्रकृति में हमेशा से चलता आ रहा है देखिए धीरे-धीरे करके स्वामी जी आर्गुमेंट बिल्ड अप करते हैं कि ईश्वर का अस्तित्व है यह आजकल के वैज्ञानिक हमारे सर के ऊपर में ये इवोल्यूशन की थिरी थोप देना चाहते हैं इवोल्यूशन की थिरी हमारे सर पर पे यदि आजकल के वैज्ञानिक बिठाना चाहते हैं तो उन्हीं की थिरी को यूज करके वह कांटे से कांटा निकालना उसकी तरह वैज्ञानिक लोगों की ही आर्गुमेंट को पकड़ करके हम वैज्ञानिक लोगों को यह सिद्ध करके दिखाएंगे कि हां ईश्वर भी है हम लोग इवोल्यूशन स्वीकार करते हैं यदि आप ईश्वर को स्वीकार करेंगे किंतु आप किसी भी साइंटिस्ट के पास में जाकर के ऐसा कहेंगे कि हां भाई हम लोग इवोल्यूशन स्वीकार करते हैं तुम ईश्वर को स्वीकार करो तो इमीडिएट वो बोलेगा अरे ईश्वर है ऐसा क्या प्रूफ है ऐसा वो इवोल्यूशन है ऐसा प्रूफ हम आपको दे सकते हैं यह जो विश्व ब्रह्मांड का इवोल्यूशन हुआ बिग बैंग में से उसके पीछे में बहुत सारा मैथमेटिक्स थिरी ये जो रिलेटिविटी ये वगैरह सब कुछ ये क्वांटम डायनेमिक्स और रिलेटिविटी ये दोनों बेसिक थिरी है जो कि आज के कॉस्मो मैक्रोकॉस्म और माइक्रो गजम दोनों को समझाती है अर्थात कि कॉस्मो ऑन द लार्जेस्ट स्केल एंड कॉस्मो ऑन द स्मॉलेट स्केल ये दोनों को ये दो थरियां समझाती है और ये जो ह्यूमन इवोल्यूशन की कांसेप्ट है ये ज टिक्स डीएनए वगैरह वह ऑर्गेनिक इवोल्यूशन को समझाती है तो हमारे पास में थिरी है समझाने के लिए साइंस है समझाने के लिए आपके पास में कौन सा साइंस है जो कि ईश्वर को प्रूव करता है तो स्वामी जी ने उन्हीं के साइंस को लेकर के उन्हीं की बात को काटते हैं क्या कहते हैं कि इवोल्यूशन एंड इवोल्यूशन इज गोइंग ऑन थ्रू आउट द होल ऑफ द नेचर द होल सीरीज ऑफ इवोल्यूशन बिगिनिंग विद द लोएस्ट मेनिफेस्टेशन ऑफ लाइफ एंड रिचिंग अप टू द हाईएस्ट द मोस्ट परफेक्ट मैन मस्ट हैव बीन द इवोल्यूशन ऑफ समथिंग एल्स यह जो पूरी सीरीज है इवोल्यूशन की जिसमें कि छोटे से छोटा यह जो कीड़ा है एक इस एक कोशी जीव है वहां से लेकर के यह जो परफेक्ट मैन है परफेक्ट मैन अर्थात कि भगवान राम कृष्ण व किसी एक चीज में से इवॉल्व हुए हैं तब तक बीज में से नया पेड़ कैसे बनेगा अर्थात कि यदि हमारे पास में श्री राम कृष्ण है तो किस डीएनए में से श्री राम कृष्ण प्रकट हुए हैं वह डीएनए जो होगा जिसमें भगवान श्री राम कृष्ण का पूरा उसमें ब्लूप्रिंट होगा वह डीएनए तो ईश्वर में से ही आ सकता है और किसी में से नहीं द क्वेश्चन इज इवोल्यूशन ऑफ व्ट किसमें से यह बीज बना है व्हाट वाज इवो क्या इवॉल्व हुआ था तो उत्तर है ईश्वर ईश्वर ने ही अपनी दिव्यता को इस बीज रूप में प्रकट किया उनकी पूरी दिव्यता उनकी पूरी आध्यात्मिक सिद्धि आध्यात्मिक उपलब्धि उन्होंने अपना पूरा ब्लूप्रिंट ईश्वर ने अपना खुद का एक बीज स्वरूप में प्रकट किया और इसी बीज में से विश्व ब्रह्मांड धीरे-धीरे इवोल्व हुआ इसी विश्व ब्रह्मांड के इवोल्यूशन के आखिरी छोर पे हमको भगवान राम भगवान कृष्ण और भगवान राम कृष्ण मिल जाते हैं तो यदि यह थिरी ठीक है कि एक बीज में जो डीएनए होगा उसमें से वही चीज प्रकट होगी आम के बीज में से आम का पेड़ ही बनेगा आम के बीज में से केले का पेड़ कभी भी नहीं बन सकता तो ऐसा कौन सा डीएनए है जिसका आखिरी मूर्त स्वरूप भगवान राम कृष्ण है तो उसका प्रारंभ कहां से होगा उस डीएनए का पिताजी कौन है उस बीच के पिताजी कौन है तो वह तो ईश्वर ही हो सकते हैं ईश्वर ने ही अपनी पूरी आध्यात्मिक शक्तियां आध्यात्मिक सिद्धियां बीज के रूप में प्रकट की और इसी बीज धीरे-धीरे इवॉल्व होकर के भगवान राम कृष्ण में परिणत हुआ कितना सुंदर साइंटिफिक एक्सप्लेनेशन ईश्वर क्या है ईश्वर है कि नहीं उसका यह वैज्ञानिक प्रूफ टेक दिस होल इवोल्यूशनरी सीरीज यह पूरा जो इवोल्यूशन उत्क्रांति का जो चक्र है वह उत्क्रांति की पूरी यात्रा है इसको देखिए फ्रॉम द प्रोटोप्लास्मिक कोशी जीव है वहां से लेकर के परफेक्ट मैन पुरुषोत्तम भगवान राम तक की ये जो पूरी जो जीवन यात्रा है एंड दिस होल सीरीज इज वन लाइफ यह जो पूरी जीवन यात्रा है उसको सिर्फ एक जीवन के रूप में आप देखिए इन द एंड वी फाइंड द परफेक्ट मैन सो इन द बिगिनिंग इट मस्ट हैव बीन द सेम यदि एक छोर पे इस जीवन यात्रा के एक छोर पर यदि पुरुषोत्तम राम हमको दिखते हैं तो उसके प्रारंभ में भी वही पुरुषोत्तम राम ही होने चाहिए पूर्ण ब्रह्म सनातन राम वही पूर्ण ब्रह्म सनातन राम में से ही यह विश्व ब्रह्मांड का बीज प्रकट हुआ और उसी डीएनए में से उसी ब्लूप्रिंट में से आखिर में यह पुरुषोत्तम राम हमारे सामने आए यह जो पूरी जो यात्रा है जीवन की ईश्वर में से यह विश्व ब्रह्मांड का बीज प्रकट हुआ और इस बीज में से उस डीएनए में से इवोल्यूशन उत्क्रांति होते होते परफेक्ट मैन बुद्धा मैन क्राइस्ट मैन स्वामी जी बाद में कहते हैं वो हुए प्रगट अभी इसी बात को समझाने के लिए स्वामी जी एक दूसरे तरीके से आर्गुमेंट देते हैं पहले तो इसी आर्गुमेंट को उन्होंने ये डीएनए के माध्यम से बीच के माध्यम से बताया कि प जो चिड़िया है चिड़िया के अंडे में से दूसरी चिड़िया ही प्रकट होगी कौवा कभी भी प्रकट नहीं होगा तो ईश्वर में से जो बीज हुआ है उसी में से ईश्वर प्रकट हो सकते हैं यदि किसी राक्षस में से यह बीज प्रकट होता तो उसमें से दूसरे कोने पे ईश्वर प्रकट नहीं होते वोह राक्षस ही प्रकट होते हैं तो इसी बात को स्वामी जी एक दूसरे तरीके से समझाते हैं वो जो इवोल्यूशन की जो थिरी है वो एक थिरी है अभी आज की एक दूसरी थिरी है थर्मोडायनेमिक्स बड़ी मॉडर्न थिरी तो इस थर्मोडायनेमिक्स थिरी की मदद से स्वामी जी उसी बात को क्या समझाते हैं इफ द लॉ ऑफ कंजर्वेशन ऑफ एनर्जी इज ट्रू यू कैन नॉट गेट एनीथिंग आउट ऑफ ए मशीन अनलेस यू पुट इट इन देयर फर्स्ट जद ये कंजर्वेशन ऑफ एनर्जी ये एक लॉ है थर्मोडायनेमिक्स का इसका क्या अर्थ है कि एक एंजन के भीतर में एक मशीन के भीतर में हमने जितनी ऊर्जा डाली है उसके उसमें से उतनी ही ऊर्जा का आउटपुट होगा जैसे कि मेरी कार में मान लीजिए कि 1 लीटर में 30 किमी तक का माइलेज देती है तो मैं यदि उसमें 1 लीटर पेट्रोल डालूंगा तो वो 30 30 किमी का ही माइलेज देगी ऐसा कभी नहीं होगा कि 60 किमी का माइलेज दे देगी सडन आउट ऑफ चमत्कार हो गया और 1 लीटर पेट्रोल में से 30 किमी माइलेज देने वाली कार एका एक 60 किमी देना शुरू कर दी ऐसा कभी नहीं होगा इंजन की जो कैपेसिटी है उसके अनुसार जितना इनपुट है उतना ही आउटपुट रहेगा यह इसको कहते हैं कंजर्वेशन ऑफ एनर्जी इट देयर फोर फॉलोज एब्सलूट दैट द परफेक्ट मैन द फ्री मैन द गॉड मैन हु जज गॉन बियोंड द लॉज ऑफ नेचर एंड ट्रांजेंडर टू गो थ्रू दिस प्रोसेस ऑफ इवोल्यूशन थ्रू बर्थ एंड डेथ दैट मैन कॉल्ड द क्राइस्ट मैन बाय द क्रिश्चियंस एंड द बुद्धा मैन बाय द बुद्धिस्ट एंड द फ्री बाय द योगी दैट परफेक्ट मैन हु इज एट वन एंड ऑफ द चेन ऑफ इवोल्यूशन वाज इवॉल्वड इन द सेल ऑफ द प्रोटोप्लास्मिक वेशन ऑफ एनर्जी है कि एक इंजन के भीतर में जितनी ऊर्जा डालेंगे उतनी ही ऊर्जा दूसरे छोर पे हमको मिलेगी इसको क्या कहते हैं पता है विश्व ब्रह्मांड के लेवल पे यदि कॉस्मिक स्केल के ऊपर में यूनिवर्सल स्केल के ऊपर में इस लो को अप्लाई किया जाए तो शुरुआत में जितनी एनर्जी थी आखिर में वही एनर्जी रहेगी जैसे कि मैं यहां पे प्रतिदिन सुबह को मैं अगरबत्ती जलाता हूं तो अगरबत्ती वैसे तो दिखती है इतनी लंबी किंतु जब जल जाएगी तो इतनी ही राख रह जाएगी चुटकी भर राख रह जाएगी तो आप प्रश्न करेंगे तो अरे इतनी बड़ी अगरबत्ती में से इतनी चुटकी भर राख रह गई तो बाकी की अगरबत्ती कहां चली गई एक्चुअली वो ऊर्जा के रूप में कन्वर्ट हो गई है य वहां पे जो स्थूल ऊर्जा के रूप में थी वह वहां पर वह सुगंध रूपी ऊर्जा में परिणत होकर के सुगंध रूपी ऊर्जा और यह राख यह दोनों के भीतर में परिणत हो गई किंतु यह जो सुगंध है या तो माने ये फ्रेगरेंस के जो पार्टिकल है और यह जो राख है इन दोनों को मिला दिया जाए तो उतना ही वो पदार्थ होगा जितना कि यह अगरबत्ती में था यानी कि अगरबत्ती 100% कन्वर्जन इस रूप में होती है ऐसा नहीं होगा कि इतनी सी अगरबत्ती बत्ती है और इतनी सारी उसकी खुशबू आएगी जितनी अगरबत्ती है उतना ही खुशबू में परिणत होगा तो यह कोई भी चीज है उसको ट्रांसफॉर्म कर सकते हैं किंतु उसमें से आप ऊर्जा डाल नहीं सकते कि निकाल नहीं सकते तो यह पूरे विश्व ब्रह्मांड में ऐसा ही है कॉस्मो के शुरू में जितनी एनर्जी थी आखिर में कॉस्मो के अंत में उतनी ही एनर्जी रहेगी हालांकि शुरू में एनर्जी एनर्जी के रूप में थी बाद में यही एनर्जी पदार्थ में परिणत हो जाती है आइंस्टाइन का जो फेमस इक्वेशन है e = एसी स्क अर्थात कि ये जो एनर्जी है व पदार्थ में परिणत होती है मैटर में परिणत होती है और मैटर जो है वह एनर्जी में परिणत होता है तो इस कांसेप्ट को लेकर के स्वामी जी क्या कहते हैं कि परफेक्ट मैन जो है फ्री मैन जो है ईश्वरीय मनुष मानुष मनुष्य जो है जो कि जो इस जगत के नियम कानून के परे चले गए हैं जो कुछ भी हमारे मनुष्य को बंधन में डाल के रखते हैं काम कांचन के प्रति हमारी स्पृहा काम क्रोध मद लोभ मोह मत्सर यह जो सब ड़ रिपु है जो कि हमारे मन को बंधन में रख के रखते हैं इन सभी बंधनों को तोड़ कर के यह ईश्वरीय स्थिति में जो स्थित हो गए हैं सभी बंधनों से परे हो गए हैं जिनको कि यह जन्म मृत्यु जरा व्याधि के चक्र में से पसार होने की कोई जरूरत नहीं वो अमृत्व को प्राप्त हो चुके हैं जिनको कि क्रिश्चन लोग कहते हैं क्राइस्ट जिनको कि बौद्धि कहते हैं बुद्ध और योगी कहते हैं मुक्त वह परफेक्ट मैन यदि इस उत्क्रांति के इस यात्रा में एक छोर पर है और दूसरे छोर पर यदि एक एक कोषी जीव है तो हम कहेंगे कि एक कोषी जीव के भीतर में जो डीएनए होगा वह वही परफेक्ट मैन का ही होगा अप्लाइज टू ल ऑफ द यूनिवर्स इसी रीजन को पूरे विश्व ब्रह्मांड के ऊपर में आरोपित करते हैं वी सी दैट इंटेलिजेंस मस्ट बी द लॉर्ड ऑफ क्रिएशन द कोस इंटेलिजेंस अर्थात की दिव्यता ही इस पूरी सृष्टि के फादर है इस पूरी सृष्टि के राजा है सम्राट है इस ईश्वर में से ही उस दिव्य सत्ता में से ही इस सृष्टि की रचना हुई यूनिवर्सल इंटेलिजेंस आगे स्वामी जी क्या कहते हैं द सम टोटल ऑफ द इंटेलिजेंस डिस्प्ले इन द यूनिवर्स मस्ट देयर फोर बी द इवॉल्वड इंटेलिजेंस इवॉल्वड यूनिवर्सल इंटेलिजेंस अनफोल्डिंग इट सेल्फ दिस यूनिवर्सल इंटेलिजेंस इज व्हाट वी कॉल गॉड यदि एक इंजन के भीतर में हमने 1 लीटर पेट्रोल डाला तो उसमें से 30 किमी तक का जो माइलेज मिलेगा ये एकदम पक्का है तो यदि मान लीजिए कि इस सृष्टि ने भगवान श्री कृष्ण की रचना की इसी सृष्टि ने भगवान श्री राम कृष्ण की रचना की की तो इस सृष्टि के भीतर में जो एनर्जी डाली गई होगी सृष्टि रूपी जो एंजिन है जिसने भगवान श्री राम कृष्ण को जन्म दिया तो इस इंजन के भीतर में जो इंधन डाला गया होगा वो भी तो भगवान श्री राम कृष्ण रूपी ही तो इंधन होगा अदर वाइज यह सृष्टि भगवान श्री राम कृष्ण को जन्म ही क्यों देती क्यों नहीं यह रावण है कंस है ये हिटलर है ऐसे सब राक्षसों को ही जन्म देती रहती क्यों इस सृष्टि ने भगवान राम को भी जन्म दिया भगवान कृष्ण को भी जन्म दिया ये जो एक के बाद एक संत महापुरुष जो कि हमारी धरातल को पवित्र करते हुए जिन्होंने जन्म लिया है जिन्होंने इस पृथ्वी पर कार्य किया है पूरी मानव जात को अपने आशीर्वाद से भरपूर कर दिया है ऐसे संत महापुरुष प्रत्येक युग में जन्म लेते रहेंगे ऐसा क्यों होगा क्यों इस पृथ्वी के ऊपर में एक के बाद एक संत पुरुष आते ही रहते हैं साधना करके सिद्धि प्राप्त करके अपनी सिद्धि मानव जात के कल्याण के लिए बटोर करके जाते हैं ऐसा क्यों होता है क्योंकि यह पृथ्वी रूपी यह जो एंजन है इसके भीतर में यही संत महापुरुषों की शक्ति पहले से ही इंधन के रूप में डाली गई होगी और इसी इंधन में से ही फिर यही संत महापुरुष प्रकट होते हैं कॉल इट बाय एनी अदर नेम इसको आप कोई भी नाम से पुका इट इज एब्सलूट सर्टेन ट इन द बिगिनिंग देर इज दैट इंफाइटिंग दिव्य सत्ता है जो कि इस ब्रह्मांड के प्रारंभ में थी जिसको कि आप कोई भी नाम से पुकारे आप ईश्वर कहे ना कि आत्मन कहे ना कि इसको आप ब्राह्मण कहे ना कि इसको आप शून्य कहे ना कि इसको आप कुछ भी कह ले श् इसको आप कहेंगे फादर इन हेवन कहेंगे कि कुछ भी कह दे ये दिव्य सत्ता तो रहेगी ही रहेगी इस विश्व ब्रह्मांड के प्रारंभ में दिस कॉस्मिक इंटेलिजेंस गेट्स इवॉल्वड एंड इट मेनिफेस्ट इवोल्स इट सेल्फ अंट्स द परफेक्ट मैन द क्राइस्ट मैन द बुद्धा मैन देन इट गोस बैक टू इट्स ओन सोर्स यही दिव्य वैश्विक सत्ता अपने को एक बीज रूप में इवॉल्व करती है अपनी पूरी दिव्यता एक डीएनए के रूप में वह प्रकट करती है और फिर यही डीएनए में से आज के भगवान बुद्ध भगवान जीसस भगवान राम भगवान कृष्णा या तो भगवान राम कृष्ण उसी डीएनए में से प्रकट होते हैं अभी एक प्रश्न आता है आई हैव बीन आस्ड मेनी टाइम्स मुझे बहुत बार पूछा गया है व्हाई डू यू यूज दैट ओल्ड वर्ड गॉड यह जो पुराना शब्द गॉड यानी कि ईश्वर है इसको आप बार-बार क्यों यूज करते हैं आप और भी कोई शब्द यूज कर सकते हैं यूनिवर्सल इंटेलिजेंस है ना कि डिवाइन इंटेलिजेंस है ना कि और कुछ भी शब्द आप यूज कर सकते हैं आप ईश्वर शब्द क्यों यूज करते हैं क्योंकि यह प्रश्न इसलिए किया गया क्योंकि यह जो वेस्टर्न सिविलाइजेशन है वहां पर धर्म के नाम पर बहुत सारे युद्ध हु हुए बहुत सारी कतले आम की गई बहुत सारे लोगों का शोषण किया गया अर्थात कि आज का मॉडर्न यूरोप एंड मॉडर्न अमेरिका यह लोग धर्म से थोड़ा सा डर करके रहते हैं कि जैसे ही धर्म को बढ़ावा दिया जैसे ही ज्यादा भगवान भगवान करना शुरू किया तो अभी दूसरी ही क्षण धर्म और भगवान के नाम पर खूना मर की प्रारंभ हो जाएगी तो उनका कहना है भगवान शब्द को ही छोड़ दीजिए कोई नया शब्द यूज कीजिए जैसे कि ये जो साइंस में ये जो नए-नए शब्द है ना एनर्जी है मास है प्रोटॉन है न्यूट्रॉन है कॉस्मो है ना कि गैलेक्सी है नेबुला है तो इस तरह से कोई नया शब्द खोज के निकालिए जिसके की साथ में इतिहास का यह जो सब बर्डन जो है भार है इस शब्द के ऊपर में ना हो स्वामी जी कहते हैं यूज द ओल्ड वर्ड ओनली यूज इट इन द ट्रू स्पिरिट स्वामी जी कहते हैं वही पुराने शब्द गॉड या तो फिर ईश्वर को ही इस्तेमाल कीजिए किंतु उसका जो सही स्पिरिट था व जो उसका सही मायने था वो सही अर्थ में में इसको इस्तेमाल कीजिए नई की बाद में जिसका कि विकृत अर्थ गटन किया गया और जिसके नाम पे शक्तिशाली लोगों ने कमजोर लोगों प शासन करने का प्रयास किया बाद में इस शब्द के साथ में जो कुछ भी गड़बड़ जो जुड़ गई है उसको हटा दीजिए और उसके सही अर्थ में उसका इस्तेमाल कीजिए क्लिंट ऑफ सुपरस्टिशन इसके साथ में जुड़ी हुई सभी अं शरता हों को उठा कर के फेंक दीजिए एंड रियलाइफ फुल्ली व्हाट दिस ग्रेट एंट वर्ड मींस और ये जो पुराना भव्य शब्द है ईश्वर उसका सही तात्पर्य उसकी सही महत्ता को पहचानिए इफ यू अंडरस्टैंड द पावर ऑफ द लॉज ऑफ एसोसिएशन यू विल नो दैट दिस वर्ड्स आर एसोसिएटेड विद इनमेल मेजेस्टिक एंड पावरफुल आइडियाज यह जो पुराने पुराने जदी आपको यह समझ में आएगा कि शब्द के सायह जो लॉज ऑफ एसोसिएशन अर्थात कि पता है कि क्या होता है लॉ लॉ ऑफ एसोसिएशन क्या है जैसे कि मैंने एक बार उदाहरण दिया था मैं एक रिलेटिव है वो एक जगह पर रहते थे घर में रहते थे अभी वो लोकेलिटी में उनके बहुत सारे परिचित लोग भी थे उनके पिताजी भी वहीं पर रहते थे अभी जब पिताजी का मृत्यु हुआ यह जो मेरे रिलेटिव के पिताजी का जब मृत्यु हुआ वो नए घर में रहने के लिए चले गए और यह जो पुराने घर के पास में से कभी भी पसार नहीं होते थे क्यों क्योंकि जैसे ही पुराने घर के पास में जाएंगे ना उस लोकाट में भी जद जाएंगे पिताजी की यादें सब आनी शुरू हो जाएगी अच्छा मैं अपने पिताजी के साथ में छोटा बच्चा था तब यहां पर खेला करता था यहां पर उनके साथ में इस तरह की बात हुई थी यहां पर उनके साथ में यह मधुर स्मृतियां विजड़ी है तो उस लोकेलिटी में जाने से ही इतना मन को भीतर में से कष्ट होता था उन्होंने उस जगह पर जाना ही बंद कर दिया था क्योंकि उस जगह के साथ में पिताजी की यादें सब जुड़ी हुई है और उनके जाने का बहुत दुख है तो जभी भी वहां पर जाएंगे वह दुख फिर से वापस आ जाएगा इसको कहते हैं लॉ ऑफ एसोसिएशन तो यह देखिए स्वामी जी कहते हैं कि यदि आपको यह लॉ ऑफ एसोसिएशन पता है तब आपको पता चलेगा कि यह जो पुराने शब्द है आत्मन है ब्राह्मण है ईश्वर है इनके साथ में कितने पावरफुल कितने भव्य विचार आइडियाज जुड़े हुए हैं दे हैव बीन यूज्ड एंड वरशिप्ड बाय मिलियंस ऑफ ह्यूमन सोल्स एंड एसोसिएटेड बाय देम विथ ल दैट इज हाईएस्ट एंड बेस्ट ऑल दैट इज रेशनल ऑल दैट इज लवेबल एंड ल दैट इज ग्रेट एंड ग्रांड इन ह्यूमन नेचर हजारों हजारों सालों से हम मनुष्यों ने इस भव्य शब्द के साथ में जुड़े हुए विचारों की आराधना की है उनकी स्तुति की है और उनकी उनकी पूजा की है और इसी पूजा के साथ में मनुष्य सभ्यता के जो हाईएस्ट विचार है सर्वश्रेष्ठ विचार है सर्वश्रेष्ठ अभिव्यक्ति आं है वह इस पुराने शब्दों के साथ में जुड़ी हुई है ऑल दैट इज लवे एंड ऑल दैट इज ग्रेट एंड ग्रांड इन ह्यूमन नेचर मनुष्य सभ्यता के साथ में जुड़ी हुई जो सर्वश्रेष्ठ जो फीलिंग है इमोशंस है आउटपुट है लिटरेचर है वह सब कुछ इस पुराने भव्य ईश्वर रूपी शब्द के साथ में जुड़े हुए हैं अभी आखिर में स्वामी जी आते हैं कंक्लूजन के ऊपर में कंक्लूजन क्या है एवरीथिंग दैट यू सी फील और हियर द होल यूनिवर्स इज हिज क्रिएशन और टू बी अ लिटिल मोर एक्यूरेट इज हिस प्रोजेक्शन और टू बी स्टिल मोर एक्यूरेट इज द लॉर्ड हिमसेल्फ इस सृष्टि के भीतर में इस पृथ्वी के ऊपर में आप जो कुछ भी देखते हैं स्पर्श करते हैं सुनते हैं वह सब ईश्वर ही है ईश्वर की ही रचना है या तो फिर और ज्यादा अच्छे से कहे ईश्वर में से ही प्रकट हुआ ईश्वर के ऊपर में यह सब आभास रूप से फैल रहा है एंड स्टिल मोर एक्यूरेट यदि और भी अच्छे से कहे तो लॉर्ड हिमसेल्फ ईश्वर ही है देखिए यहां पर द्वैत विशिष्ट द्वैत और द्वैत और अद्वैत यह तीनों विचार एक ही सेंटेंस में स्वामी जी ने कह दिया यह जो वेदांत की जो सब विभिन्न स्कूल्स से वे लोग क्या कहती है जदी आप द्वैत को फॉलो करेंगे तो कहेंगे कि ईश्वर ने सृष्टि को जन्म दिया है अद्वैत को यदि फॉलो करेंगे तो कहेंगे कि यह ईश्वर विश्व ब्रह्मांड जो है वह ईश्वर का ही एक दूसरा स्वरूप है और यदि अद्वैत को फॉलो करेंगे तो कहेंगे कि यह ईश्वर ही हमको विश्व ब्रह्मांड के रूप में आभाष प्रतिभास हो रहे हैं जैसे कि आप रास्ते में अंधेरे रास्ते में जाते हैं रास्ते में यदि एक रस्सी का टुकड़ा पड़ा हुआ है रस्सी के टुकड़े की सामने देख कर के ही एकाएक आप चौक जाएंगे कहेंगे कि अरे यह तो मेरे रे रास्ते में सांप खड़ा है किंतु जैसे ही उसके ऊपर में प्रकाश डालेंगे पता चलेगा सांप नहीं है रस्सी का टुकड़ा है तो सांप बोलकर के कुछ था ही नहीं वो रस्सी का टुकड़ा ही था तो ये जो कुछ भी देख रहे हैं ईश्वर ही है हमारे अज्ञान की वजह से हमको यह मनुष्य है ना कि यह किताब है ना कि यह पेड़ पौधे हैं ना कि यह पब्लिकेशन डिपार्टमेंट का बिल्डिंग है ना कि वोह मंदिर है वहां पे ठाकुर की मूर्ति है यह सब विभिन्न आकार से हमको सब कुछ दिखाई दे रहा है अज्ञान दूर हो जाएगा तो पता चलेगा यह शरीर ना कि यह पेड़ पौधे ना कि ये किताबें ना कि यह मंदिर ना मंदिर के भीतर की मूर्ति सब कुछ ईश्वर ही है इट इज ही हु इज शाइनिंग एज द सनस एंड स्टार्स ईश्वर ही सूर्य और तारों की रूप लेकर के प्रकाशित हो रहे हैं ही इज द मदर अर्थ ईश्वर ही है यह मां पृथ्वी ही इज द ओशन हिमसेल्फ यह समुंदर श् भगवान ही है ही कम्स एज जेंटल शॉवर्स ही इज द जेंटल एयर दैट वी ब्रीद इन एंड ही इट इज हु इज वर्किंग इज फोर्स इन द बॉडी यह बारिश हो रही है शीतल करती है हमको जैसे कि कोलकात्ता में अभी बारिश हुई और सबको यह गर्मी से मुक्ति दिलवाई वह बारिश भी वही ईश्वर है यह जो हमको प्राण देने वाली यह जो हवा जिसको कि हम सांस में लेते हैं वह भी ईश्वर है और यह जो पंच प्राण रूप यह अप अपने शरीर को जिस शक्ति चला रही है वह भी ईश्वर ही है ही इज द स्पीच दैट इज अटर ही इज द मैन हु इज टॉकिंग वह ईश्वर ही है जो कि इस वाक्य के रूप में प्रकट हो रहा है ईश्वर ही है जो कि बात कर रहा है ही इज द ऑडियंस दैट इज हियर ही इज द प्लेटफार्म ऑन व्हिच आई स्टैंड यह जो मेरे सामने शोत्र वर्ग है वह भी ईश्वर है जिस प्लेटफार्म के ऊपर में खड़े के मैं बोल रहा हूं वह भी ईश्वर है ही इज द लाइट दैट इनेबल्स मी टू सी योर फेसेस इट इज ऑल ही यह प्रकाश जिसकी मदद से मैं आपको देख पा रहा हूं प्रकाश भी ईश्वर है सब कुछ ईश्वर है ही हिमसेल्फ इज बोथ द मटेरियल एंड द एफिशिएंट कॉज ऑफ दिस यूनिवर्स इस विश्व ब्रह्मांड का निमित्त और उपादान कारण वही ईश्वर है एंड ही इट इज दैट ग इवॉल्व इन द माइन सेल यह जो प्रथम जो छोटा सा यह जो कीट जो कि परमाणु कहेंगे एक कोशी जीव जिसमें से पूरी सृष्टि प्रारंभ हुई उस वह एक कोशी जीव भी भगवान ईश्वर ईश्वर ही है एंड इवोल्व एट द अदर एंड एंड बिकम गॉड अगेन एक कोशी जीव में से उत्क्रांति होकर के इवोल्यूशन होकर के जो फिर से ईश्वर बनता है वह भी यही ईश्वर ही है ही इट इज ट कम डाउन एंड बिकम द लोएस्ट एटम मने पूरे महत में से एक सबसे सूक्ष्म एक परमाणु है वह भी व महत में से छोटा होने वाला परमाणु भी ईश्वर है एंड स्लोली अनफोल्डिंग हिज नेचर रिजॉस हिमसेल्फ महत् में से यह परमाणु हुआ परमाणु उत्क्रांति होते होते धीरे-धीरे अपना सही स्वरूप प्रकट होते होते वही महत में मिलित हो गया यह भी ईश्वर ही है दवा द मैन दाउ आर्ट द वुमन तुम ही हो पुरुष और तुम ही हो प्रकृति ऊ आर्ट द स्ट्रांग मैन वकिंग इन द प्राइड ऑफ यूथ तुम ही हो शक्ति से मुग्ध शक्ति से अपने घमंड लेकर के इस पृथ्वी पर चलने वाले मनुष्य ऊ आर्ट द ओल्ड मैन टोटरिंग ऑन क्रचस और तुम ही हो जो कि वृद्ध होकर के यह लकड़ी की सहाय से चल रहे हो ऊ आर्ट इन एवरीथिंग सब कुछ के भीतर में तुम ही हो आर्ट एवरीथिंग ओ लॉर्ड हे ईश्वर तुम हो सब कुछ दिस इज द ओनली सॉल्यूशन ऑफ द कॉस्मो दैट सेटिस्फाई द ह्यूमन इंटेलेक्ट मनुष्य की बुद्धि को सेटिस्फाई करने वाला यही एकमात्र सॉल्यूशन है इन वन वर्ड वी आर बोर्न ऑफ हिम वी लिव इन हिम एंड अन टू हिम वी रिटर्न एक शब्द में जद कहे एक वाक्य में यदि कहे हम उनमें से प्रकट हुए हम उनमें रह रहे हैं और हम उन्हीं में समाहित हो जाएंगे ईश्वर में से ही सृष्टि का प्रगट हुआ है ईश्वर में ही सृष्टि स्थित है और ईश्वर में ही सृष्टि का प्रलय होगा यह सृष्टि स्थिति प्रलय ईश्वर के ही ऊपर में सब कुछ हो रहा है तो यह है स्वामी जी का जो प्रवचन कॉस्मो स मैक्रो कजम उसका सारांश आउटलाइन एंड समरी तो इसके बारे में और थोड़ा डिस्कशन कि स्वामी जी का जो यह अल्टीमेट कंक्लूजन है तो कंक्लूजन क्या है उसके ऊपर में और थोड़ा सा डिस्कशन हम कल करेंगे और परसों दिन इसी तरह से कॉस्मो माइक्रो कजम जो है उसका स्लाइड शो में बना रहा हूं अभी बना नहीं बन जाएगा फिर उसका डिस्कशन करेंगे तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओ तसत श्री राम कपण

Questions & Answers

मस्तु माने यह देखिए कि वह ठाकुर की ब्रेन वश करने की कैपेसिटी कितनी डेंजरस है वही व हजरा के साथ में बैठ के मजाक कर रहे है यह थाली भी ईश्वर है घटी भी ईश्वर है बाटी भी ईश्वर है वही स्वामी जी आज अमेरिका जाकर के पूरे विश्व को बता रहे हैं उन्हीं के सायंस से उन्हीं की बात को काटते हुए होता क्या है यह जो शक्ति दई विचार वगैरह बुकलेट्स के साथ में हमको कंक्लूजन दे देता है किंतु फिर यह कंक्लूजन किस कांटेक्ट में अराइव हुए हैं वो हमको वो सब बुकलेट्स नहीं समझाती जैसे कि ये कहते हैं ना अभी ये उत्तिष्ठ जागृत प्राप्य वरान निबो दत तो ये सब पॉलिटिकल पार्टियां होती है उनकी रैली होती है वहां पर भी इस तरह से ये बड़े-बड़े बैनर लगा दिए हैं कि भारत देश को जागृत होना है तो भारत देश को जागृत होना है उस बात में कोई प्रश्न ही नहीं है स्वामी जी खुद य पेट्रियोटिक सबसे बड़े थे किंतु यह जो अपने हाथ में अपनी पूरी डेस्टिनी है वगैरह क्यों गया है क्या कांटेक्ट क्या है इसके भीतर में इसका भीतर में ये यह तो ही है कि हमको पॉलिटिकल पावर अपने हाथ में चाहिए तभी तो भारत का कल्याण होगा स्वतंत्रता चाहिए गुलाम भारत में से तो कुछ होने वाला नहीं था स्वतंत्रता तो चाहिए ही चाहिए किंतु गोइंग बियोंड ए पॉलिटिकल फ्रीडम दिस इज टॉकिंग अबाउट अ स्पिरिचुअल फ्रीडम ईश्वर ही हमारे भीतर में यदि डीएनए के रूप में है तो इसी डीएनए को मैं क्यों नहीं मेनिफेस्ट करूं क्यों नहीं मैं अपनी दिव्यता को प्रकाशित करूं इस अर्थ में यह सब कहा गया है तो अभी यह बहुत सारे लोग स्वामी जी को जो कभी पॉलिटिकली यूज करना चाहते हैं ना तो वे लोग स्वामी जी के यह सब सेंटेंस को लेकर के प्रोजेक्ट करते हैं देखो कि स्वामी जी ने ऐसा कहा है किंतु स्वामी जी वाज पेट्रियट किंतु स्वामी जी वाज वेरी क्लियर कि स्पिरिचुअलिटी ही मनुष्य जीवन का आधार है यदि अपने पास में स्पिरिचुअल फ्रीडम होगा तभी हमारे पास में यह पॉलिटिकल फ्रीडम होने का कोई तात्पर्य है यदि हम स्पिरिचुअली गुलाम है और हम पॉलिटिकल फ्रीडम के पीछे दौड़ेंगे तो तो हमारे भीतर का ये जो काम क्रोध मद लोभ मोह वगैरह जो ये है ना दुश्चिंता है दुर्गुण वही वो मैग्नीफाई होगा यदि देखिए कि ये ट्रेडिशनल वेदांत की दृष्टि से देखा जाए ना वेदांतिका फ्लिक्व विशिष्ट अद्वैत और अद्वैत इसके बीच बीच का जो ये रेजोल्यूशन लाता है जब हम शुरुआत करते हैं यह सब जगत के बारे में सोचने की तो यह चीज हमको बड़ा स्पष्ट दिखता है कि ये पंखी ने अंडा दिया और उसमें से नया पंखी आया तो हमने भी ऐसा एक अनुमान कर दिया कि भगवान ने एक बीच को प्रकट किया होगा बीच में से ब्रह्मांड हुआ है तो भगवान क्या है तो यह उपादान कारण है तो कि भगवान में से ही ये सब बना है जैसे दूध को ही कन्वर्ट करके यह दही बन गया है तो अभी किंतु जैसे-जैसे ही आप सोचना प्रारंभ करेंगे आपको पता चलता जाएगा कि इससे भी डीपर ये जो लास्ट स्लाइड जो है ना लास्ट स्लाइड में स्वामी जी कितना सुंदर रूप से समझा बिकमिंग मोर एक्यूरेट और एक्युरेटली जद कहे और जद ठीक रूप से कहे तो भगवान ही इस विश्व के रूप में हमको दिखाई देते और जद एक्युरेटली कहे तो भगवान ही व विश्व है है यह जो अपनी इवोल्यूशन ऑफ आवर अंडरस्टैंडिंग यह यहां पर है एक्चुअली दिस इज नॉट इवोल्यूशन ऑफ यूनिवर्स इवोल्यूशन ऑफ आवर अंडरस्टैंडिंग ऑफ यूनिवर्स अल्टीमेटली देखे तो तो वो जो जो रस्सी और सर्प ये है फाइनल कंक्लूजन कि ईश्वर ही है अज्ञान की वजह से दिखता है कि ईश्वर ने अंडे को जन्म दिया फिर अंडे में से ब्रह्मांड फिर से हुआ यह सब धीरे-धीरे करके अपनी अंडरस्टैंडिंग इवोल्व होती जा रही दिस इज द अल्टीमेट कंक्लूजन ऑफ द लास्ट स्लाइड देखिए ये जो 19th सेंचुरी अ ये जो वेस्टर्न यूरोप में जो रेनेसा एंड रिफॉर्मेशन जो आया वो एक्चुअली क्या था कि चर्च के भीतर में इतना भयानक करप्शन चालू हो गया था कि धर्म और ईश्वर को लेकर के उन्होंने पूरे समाज पर अत्याचार करना प्रारंभ कर दिया अभी यह समाज तो संकुचित होता है कुंठित होता ही जा रहा है उस समय कुछ-कुछ ग्रेट थिंकर्स प्रकट हुए उन्होंने कहा कि अरे साइंस के बारे में जो बाइबल में लिखा है वो गलत है बाइबल माइट बी एक्यूरेट अबाउट रिलीजन बट नॉट अबाउट साइंस साइंस को बाइबल से सेपरेट कर दो फिर एक नया मूवमेंट चालू हुआ कहते हैं कि पॉलिटिकल पावर को ये चर्च से अलग कर दो सेपरेशन ऑफ चर्च एंड स्टेट यह धर्म गुरु को धर्म धर्म की ही व्याख्या करने दो ये किसको क्या न्याय देना कौन राजा राज करेगा किसके साथ में शादी करेगा यह सब धर्म गुरुओं को बता कर के क्या काम है इ सेपरेशन ऑफ रिलीजन एंड साइंस एंड सेपरेशन ऑफ चर्च एंड स्टेट ये जो पूरा मूवमेंट स्टार्ट हुआ यूरोप में तो यूरोप इतना डेवलप हो गया इतना डेवलप हो गया और पॉलिटिकल मिलिटरी इकोनॉमिक इंडस्ट्रियल पावर इतना हो गया कि पूरे विश्व पर राज करने लगा सबके मन में यही डाउट हो गया कि जद यह धर्म को सभी क्षेत्र से हटा दिया है ईश्वर को लिमिट करके एक जैसे कि एक पिंजरे में पर कर बंद करके रख दिया है तो ऐसा जब हम नहीं करेंगे तो हम भी यह गुलाम बनते ही जाएंगे यह कुछ चंद ये फॉरेनर फिरंगी आएंगे और यह पूरे 30 करोड़ के लोगों के ऊपर में राज्य करेंगे 30 करोड़ लोग पूरे हजार दो हजार गोरे लोगों के सामने सर झुका के खड़े रहेंगे किस तरह का यह कल्चर एंड रिलीजन है भारत देश का सभी को इस बात पर डाउट होने लगा इंक्लूडिंग स्वामी जी हिमसे तो यह जो रिवर्स प्रोसेस थी कि भाई ईश्वर धर्म सत्य है उसके साथ में जो अंधश्रद्धा है जुड़ गई थी उस अंधश्रद्धा को दूर करो ये ईश्वर को ही सीधा-सीधा वो कहता है ना इंग्लिश में थ्रोइंग द बेबी विद द बाथ वाटर माने बाथ वटर में वो जो एक टब के भीतर में पानी भर के बच्चे को नहला रहे हैं फिर ये पानी फेंकने को गए तो टब में वो पानी के साथ में बच्चे को भी फेंक दिया तो डोंट थ्रो बेबी अलोंग विथ द बाथ वाटर ईश्वर को रखो ईश्वर के साथ में जुड़ी हुई अंधश्रद्धा को दूर करो सो ये जो रिवर्स प्रोसेस थी कि टेकिंग बैक गॉड मने ईश्वर को फिर से एक वही सम्मान देना जो सम्मान हम पहले से देते आ रहे हैं दैट इज वो साधना की ओर पहले तो जाता है यदि आपको आस्तिक बुद्धि ही नहीं है तो फिर आप साधना कहां से स्टार्ट करेंगे तो यह प्रवचन का जो पूरा यह है कंक्लूजन प्रवचन का जो पूरा मीनिंग है कि ईश्वर के ऊपर में सर्वप्रथम तो हम तो श्रद्धा प्रकट करनी है वो श्रद्धा प्रकट होगी तब तो कहीं जाकर के धीरे-धीरे हम साधना का प्रारंभ करेंगे सो ट इज द मेन कंक्लूजन ऑफ दिस इसके बाद में जो प्रवचन आएंगे फिर साधना में कैसे जाना या माइक्रो कजम कितना परफेक्टली इसके साथ में वह मैच होता है वो बाद में हम देखेंगे यह पूरा सप्ताह इसी कंक्लूजन के ऊपर में ही डिस्कस करेंगे कंक्लूजन एक्चुअली क्या है स्वामी जी का हमने डिटेल डिस्कशन डिटेल आर्गुमेंट देख लिया तो स्वामी जी अल्टीमेटली क्या प्रूव करना चाहते साधक के जीवन में उसका क्या ये है महात्म्य है एक्चुअली पता है ना कि जब ये पडेम चल रहा था तो यहां पर मैंने वो कोटेशन कार्ड यहां से बना कर के भेजता था तो वो कोटेशन कार्ड के लिए मैंने बहुत सारे पिक्चर बना के रखे थे तो एक्चुअली में ये ग्राफिक्स वाला जो सॉफ्टवेयर है ना वो जो उसमें बहुत डिटेल में मैं उसी समय गया था अदर वाइज हम लोगों का तो क्या है कि एक फिलोसॉफिकल जो रहता है कि जो ट्रांसलेशन राइटिंग हो रहा है उसका फिलोसॉफिकल इंटीग्रिटी हमको मेंटेन करना है किंतु ये सॉफ्टवेयर वगैरह तो अपना स्टाफ मैनेज करता है तो पडेम के समय में अकेला था तो अकेला बैठ कर के ये जो [हंसी]