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Swami Vivekananda's Macrocosm & Microcosm ·

ज्ञान योग स्वामी विवेकानन्द Cosmos Macrocosm 04 Oct 2023

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ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः स्वामी विवेकानंद कंप्लीट वर्क्स में से हम पाठ कर रहे हैं कॉस्मस मैक्रो कोसम अभी तक हमने देखा कि स्वामी जी किस तरह से सृष्टि की वर्णना कर रहे हैं जो भी सूक्ष्म रूप से था उसी उसी में से कोई भी एक चीज स्थूल रूप से प्रकट हुई है और बढ़ती जाती है जैसे कि बीज में से वटवृक्ष प्रकट होता है या तो फिर अंडे में से पक्षी प्रकट होता है या तो फिर बादल में से नदी बनती है और साथ में ही स्वामी जी कहते हैं कि वही स्थूल स्वरूप आखिर में उस बीज रूपी सूक्ष्म स्वरूप में विलीन हो जाएगा वटवृक्ष दूसरे बीजों को प्रकट करेगा जन्म देगा और खुद का विनाश हो जाएगा पक्षी दूसरा अंडा देगा और उसका मृत्यु हो जाएगा चट्टाने पानी की मार की वजह से पानी का वो जो फोर्स होता है वेव्स का उसकी वजह से चट्टानों के टुकड़े-टुकड़े हो जाते हैं फिर वही टुकड़ों में से वही धूल मिट्टी के लेयर आफ्टर लेयर बन कर के चट्टाने प्रकट होती है तो यह पूरा साइकल स्वामी जी हमको बता रहे हैं उसके बाद में स्वामी जी क्या कहते हैं थाउजेंड्स ऑफ इयर्स अगो इट वास डेमोंस्ट्रेटेड बाय कपिला द ग्रेट फादर ऑफ ऑल फिलोसोफी हजारों साल पहले फिलोसोफी यानी कि दर्शन शास्त्र के पितामह कपिल मुनि ने कहा था कि डिस्ट्रक्शन मींस गोइंग बैक टू द कोज डिस्ट्रक्शन या तो विनाश या तो मृत्यु वह अंत नहीं है मृत्यु है कि आप जिस सूक्ष्म बीज रूप से प्रकट हुए उसी में फिर से विलीन हो जाना हम लोग बहुत सालों पहले सोचते थे कि जिस तरह से हमारा शरीर का मृत्यु हुआ उसका अर्थ कि जगत संसार भी हमारे साथ में खत्म हो गया और इस जगत में हमको फिर से कभी आना नहीं है यह जो पिरामिड जब हमारे पिछली सदी में जब पहली पहली बार पिरामिड को खोला गया यह यूरोपियन एक्सप्लोरर पिरामिड खोल कर के भीतर में प्रवेश किया तो उन्होंने क्या देखा कि 2000 साल पहले ाज साल पहले जो फेरोज उनका मृत्यु हो चुका था उन्होंने यह पिरामिड बनाए थे एक नौका के रूप में कि जैसे कि वह उनको भव सम मने वह उनको मृत्यु के पार मृत्यु का लोक जो है वहां पर ले जाए और वहां पर उनके पास में जिस पृथ के ऊपर में उनके भोग विलास की जो जो भी चीजें थी वह मृत्युलोक में भी उनके पास में वह रहे और उसी का वह आनंद वहां पर उठा पाए तो किसी फेरो का पिरामिड खोला उसकी जो बरियल चेंबर जिसको कहते हैं जहां पर उसको दफनाया हुआ होता है वह पिरामिड का एक छोटे एक छोटी सी चेंबर होती है पिरामिड के सेंटर में जहां पर फेरो का डेड बॉडी रखा हुआ है ममीफाई करके तो वहां पर चारों ओर देखा कि हनी या या कि मध के वह बड़े-बड़े यह है वह जार्स है माने बोतल है फिर इवन खाने पीने की चीजें हैं सबको सखा सूखा करके वहां पर रखा गया है जो खिलोने या तो फिर जो उसके अस्त्र शस्त्र जिसको लेकर के वह युद्ध करता था वो वो भी वहां पर अच्छे से सजा करके रखे गए हैं यहां तक कि उसके नौकर चाकर जो उसकी सेवा करते थे उनका मर्डर कर दिया फर के मृत्यु होने से उसके नौकर का चाकर का जो भी उनकी सेवा में जो थे उसको मार डाला और उनको भी ममीफाई करके वहां पर रखा है कि यदि फेरो मृत्यु लोक में जाएगा तो उनकी सेवा करने के लिए नौकर भी उसके साथ में जाएंगे तो यह उनका माइंडसेट था कि मृत्यु हुआ अर्थात कि सब कुछ खत्म हो गया किंतु हमारे यहां पर हिंदू परंपरा में सर्वप्रथम यह बात आई कि मृत्यु अंत नहीं है मृत्यु है एक नई शुरुआत का पहला कदम हमारा जब शरीर जाता है तब यह हमारे भीतर में जो जीवात्मा है वो नया शरीर धारण करता है अपने कर्म के अनुसार पुण्य किया ना कि पाप किया उसके अनुसार वह नया शरीर धारण करेगा और वह जो बैंक बैलेंस जो है होता है हमारा कर्मों का उसके अनुसार जो भी कैरी फॉरवर्ड हुआ है यदि पॉजिटिव बैलेंस है तो पॉजिटिव प्रॉफिट है तो प्रॉफिट और लॉस है तो लॉस वहां से हमको फिर से नया जन्म शुरू करने की वो हमको नया जन्म शुरू करना पड़ता है तो यह मृत्यु अंत नहीं है एक नई शुरुआत है यह भारत में सर्वप्रथम खोजा गया यह क्रिश्चियनिटी है जिसको कि अब्राहम रिलीजन कहते हैं क्रिश्चियनिटी जुडा इजम और इस्लाम वहां पर कहते हैं कि एक बार शरीर समाप्त हुआ उसके बाद में जजमेंट डे होगा अर्थात वो ईश्वर सबको इकट्ठा करके वो उनका वो जो जो भी प्लस और माइनस है जमा और उधार है उनके कर्मों का उस कर्मों के आधार पर कर्मों के अनुसार इनको स्वर्ग में भेजेंगे या तो फिर नर्क में भेजेंगे वहां पर वो अनंत काल तक स्वर्ग या नर्क का भोग करते रहेंगे हमारे यहां पर जबक है ऐसा नहीं है कि स्वर्ग या नर्क नहीं है ऐसा है कि यदि आपने अच्छे पुण्य कर्म किए हैं तो आपको कुछ समय तक स्वर्ग में जाना होगा जाने को मिलेगा वहां पर आपके पुण्य क्षय हो जाएंगे फिर से आप मृत्य लोक में आ जाएंगे और यदि आपने पाप किए हैं तो शायद नर्क लोक में जाएंगे वहां पर पाप का क्षय होगा फिर से आप मृत्य लोक में अर्थात पृथ्वी पर आ जाएंगे यह जन्म मृत्यु जरा व्याधि यह नर्क स्वर्ग और पृथ्वी ये चक्र कब तक चलता रहेगा जब तक मोक्ष प्राप्ति नहीं होती है जब तक संपूर्ण कर्म मिट नहीं जाते हैं तब हमको मोक्ष प्राप्ति होगी यह पूरा चक्र समाप्त हो जाएगा तो यह जो चक्र का जीवन जो है यह चक्रा का जीवन की कल्पना सर्वप्रथम हमारे कपिल मुनि ने की इस तरह से स्वामी जी हमको बता रहे हैं इस तरह का मैंने और कहीं पढ़ा नहीं है मैंने थोड़ा बहुत फिलोसोफी और पढ़ा है किंतु स्वामी जी का जो इंटरप्रिटेशन है अपनी फिलोसोफी का वो यूनिक है वो इस तरह से और कोई भी भाष्य का या तो कोई भी लेखक इतना वो जो लार्ज स्केल एक अंडरस्टैंडिंग होता है जब भी कोई भी लेखक कुछ भी लिखता है तो क्या करता है छोटे-छोटे पॉइंट्स को लेकर के उसके ऊपर में अर्थ विस्तार करता रहेगा शंकराचार्य के जो भी भाष्य है उसमें मैंने यह देखा है कि कोई भी एक शब्द लेकर के उसके ऊपर में बहुत सारा विचार होगा किंतु स्वामी जी का मैंने देखा है उल्टा है वो कोई पार्टिकुलर शब्द या पार्टिकुलर श्लोक को पार्टिकुलर टेक्स्ट जैसे कि एक कोई पार्टिकुलर उपनिषद है जैसे ई उपनिषद उसको लेकर के इतना नहीं बात करते उन्होंने किया है कठोपनिषद है मुंडक उपनिषद है उन्होंने ऐसे भी बात की है गीता के ऊपर में भी उनके प्रवचन है किंतु इससे भी कहीं ज्यादा स्वामी जी का जो अंडरस्टैंडिंग है इस वाट जनरल अंडरस्टैंडिंग ऑफ अवर हिंदू लिटरेचर हिंदू रिलीजियस लिटरेचर कि इतनी सारी हिंदू धर्म की किताबें हैं उसका सार तत्व क्या है तो वह लेकर के स्वामी जी हमारे सामने इस तरह के स्टार्टिंग माने आश्चर्यजनक हम हो जाएं हम चौक जाए इस तरह के सेंटेंस में स्वामी जी हमारे सामने रखते हैं तो यह स्वामी जी का जो है इंटरप्रिटेशन कि हमारे हिंदू धर्म में यह चक्रा का जीवन है इसकी सर्वप्रथम कल्पना हमारे हिंदू धर्म में की गई ये अब्राहम रिलीजन है जुडा इजम क्रिश्चियनिटी और इस्लाम जो कि पूर्व पश्चिम में पाए जाते हैं उन्होंने चक्रा का जीवन की कल्पना नहीं की उन्होंने कहा है कि यह हमारा जीवन है जीवन जैसे ही समाप्त हुआ वो बस वहीं पर समाप्त हो गया वह जीवन पुनर्जीवित कभी नहीं होगा यह सृष्टि की रचना भगवान ने ईश्वर ने की एक साथ में कर दी आज से 4000 साल पहले वो क्रिएशन बोलकर के एक इवेंट हुआ जिसमें यह हाथी घोड़ा पेड़ पौधे फूल अ फल मनुष्य पशु पंखी सब कुछ पृथ्वी चांद सितारे गैलेक्सी कॉस्मो ये ग्रेविटी इलेक्ट्रो मैग्नेटिज्म सब कुछ एक साथ में खोज दिया गया और जब जजमेंट डे होगा प्रलय का दिन होगा सब कुछ खत्म भी हो जाएगा और वहीं पर समाप्त भी हो जाएगा हमा आज मॉडर्न साइंस जो कहता है कि इवोल्यूशन ये बिग बैंग जहां से यह ब्रह्मांड का जन्म हुआ फिर बिग क्रंच व्हिच इज वन ऑफ द पॉसिबल इवेंट इन व्हिच कॉस्मो विल बी डिस्ट्रॉयड तो यह इवन फिजिक्स मॉडर्न फिजिक्स है मॉडर्न बायोलॉजी जो है या यह सभी लोग कहते हैं कि यह चक्रा का जीवन है देखिए एक कितना ही मॉडर्न कांसेप्ट है कि यह एटम्स जो है एटम्स बने हैं इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन और न्यूट्रॉन में से और यह इले ॉन प्रोटॉन और न्यूट्रॉन जिसको कि सब एटमिक पार्टिकल कहते हैं वह बने हैं स्ट्रिंग्स में से स्ट्रिंग या तो क्वार्क दो तरह की थिरी है और यह स्ट्रिंग और क्वार्क के बने सब एटॉमिक पार्टिकल सब एटॉमिक पार्टिकल के बने एटम्स एटम्स ने डेवलप एटम्स इकट्ठा होकर के बने एटम्स इकट्ठा होकर के नहीं एटम्स का डिफरेंट डिफरेंट कन्फेशन यह जो सब एटमिक पार्टिकल है इलेक्ट्रॉन प्रोटोन और न्यूट्रॉन का उनका जब अलग-अलग तरह का कन्फेशन होता है जब सेंटर में एक न्यूट्रॉन होता है और प्रोटॉन होता है न्यूट्रॉन और प्रोटॉन और इसके इर्दगिर्द सिर्फ एक इलेक्ट्रॉन घूमता है तब वो हाइड्रोजन एटम बनता है जब वो दो इलेक्ट्रॉन दो न्यूट्रॉन या दो प्रोटॉन होता है तो वो हीलियम एटम बनता है तो ये उसका सब एटॉमिक पार्टिकल्स का डिफरेंट डिफरेंट कॉन्फिन हमको ये पीरियोडिक टेबल पे सब डिफरेंट डिफरेंट एलिमेंट्स देते हैं डिफरेंट डिफरेंट एलिमेंट्स हाइड्रोजन ऑक्सीजन निकल अ कार्बन प्लूटोनियम रो यूरेनियम यह सब एलिमेंट्स इकट्ठा होकर के हमको केमिकल कंपाउंड्स देते हैं केमिकल कंपाउंड्स बायोलॉजिकल सेल में कन्वर्ट होते हैं जो कि डीएनए आरएनए यह सब बनाते हैं तो मनुष्य का शरीर को जब चिता पर दाह किया जाएगा तो सिर्फ आध्यात्मिक दृष्टि से हम एक पुनर्जीवन एक नया स्टेप चालू होगा हमारे जीवात्मा के लिए वो तो है ही है किंतु फिजिकली भी मटेरियल भी हमारा शरीर जिस स्टार स्टफ का बना हुआ है आज के साइंटिस्ट लोग ये स्टार स्टफ कहने में उनको बड़ा आनंद आता है तो मुझे भी यह शब्द बड़ा पसंद आ गया है कि एक तारा होता है तारे के केंद्र में एक भट्ठी होती है भयानक गर्म होता है जो जिसमें से विस्फोट होकर के फिर आखिर में उसके भीतर में जितने भी हेवियस बने हैं यूरेनियम प्लूटोनियम आइंस्टाइन एम आइंस्टाइन के नाम के ऊपर से आइंस्टाइन एम बोलक एलिमेंट है तो ये हेवियस उसकी तारे की सितारे के केंद्र में भट्ठी होती है उसमें ये सब वो बनते हैं तो यह जब सितारे का विस्फोट होता है तो पूरे ब्रह्मांड में यह फैला फैलते जाते हैं हेवीर एलिमेंट्स जो कि हमारे जब डीएनए शरीर का गठन करता है मां के गर्भ में बच्चे का तो यह बच्चे के शरीर के गठन के लिए जो एलिमेंट्स चाहिए वो वही स्टार स्टफ तारे के भीतर में से जो निकले हैं एलिमेंट्स वही एलिमेंट्स को लेकर के इसका नए शरीर का गठन होता है माने यह जो जीवन चक्र है वह सिर्फ आध्यात्मिक नहीं है स्वामी जी कहते हैं फिजिकल भी है इतने सारे फिजिकल उदाहरण स्वामी जी ने पहले दिए इसके बाद में स्वामी जी हमको दूसरे तरह के उदाहरण से देकर के स्पिरिचुअल उदाहरण देकर के समझाएंगे किंतु यह जीवन चक्र का जो कांसेप्ट है एक सूक्ष्म बीज में से एक स्थूल कोई भी चीज प्रकट होती है बड़ी होती है और फिर वह धीरे-धीरे उसका क्षय होकर के विनाश होता है और विनाश जब होता है उससे पहले दूसरे सूक्ष्म बीजाणु को बीच को वह जन्म देती है जो कि जिसके भीतर में से एक नया स्थूल जीव या तो पदार्थ जन्म ग्रहण करेगा प्रकट होगा तो ये साइक्लिकल नेचर ऑफ द यूनिवर्स विश्व का चक्रीय स्वरूप इसकी सर्वप्रथम कल्पना स्वामी जी कहते हैं कि दर्शन शास्त्र के पितामह पिल मुनि ने की थी इफ दिस टेबल हियर इज डिस्ट्रॉयड जद ये टेबल है इसका विनाश हो जाए इसको जला दिया जाए इट विल गो बैक टू इट्स कोस्ट टू दोस फाइन फॉर्म्स एंड पार्टिकल्स व्हिच कंबाइंड मेड दिस फॉर्म व्हिच वी कॉल अ टेबल यदि यह टेबल को जला दिया जाए तो यह एनर्जी और मैटर पार्टिकल्स में फिर से विलीन हो जाएगा जिसमें से ओरिजनली इसका जन्म हुआ है ओरिजनली जिसमें से इसका डेवलपमेंट इवोल्यूशन हुआ है और फिर उसी में चला जाएगा इफ अ मैन डाइज ही विल गो बैक टू द एलिमेंट्स व्हिच गेव हिम दिस बॉडी जद एक मनुष्य का मृत्यु होता है और यदि उसको चीता पे जलाया जाता है या जमीन में दफन किया जाता है वह उसी एलिमेंट्स में से चला जाएगा विलीन हो जाएगा जिसमें से उसका जन उसके शरीर का डेवलपमेंट हुआ है जन्म हुआ है क्रिएशन हुआ है इफ दिस अर्थ डाइज माने उस समय में यह कहना कि पृथ्वी का विनाश हो जाएगा पृथ्वी पर विस्फोट हो जाएगा इट विल गो बैक टू द एलिमेंट्स व्हिच गेव इट फॉर्म उसी एलिमेंट में व चली जाएगी विलीन हो जाएगी जिस एलिमेंट्स में से उसका जन्म हुआ है उसका डेवलपमेंट हुआ है कल हमने देखा कि आज का कॉस्मोलॉजी एस्ट्रोनॉमी क्या कहता है कि किस तरह से प्लेनेट और स्टार और ये सोलर सिस्टम का डेवलपमेंट हुआ बड़े-बड़े गैस क्लाउड थे उस उस गैस क्लाउड गोलगोल घूमते हैं बड़े ही स्पीड से जिसमें से सेंटर में सूरज बनता है और उसके इर्दगिर्द चारों ओर ये प्लेनेट बनती है तो यह जब भी पृथ्वी पर विस्फोट होगा पृथ्वी जदी विनाश हो जाएगी उसी गैस क्लाउड में वो परिणत हो जाएगी देयर फोर वी लर्न दैट द इफेक्ट इज द सेम एज द कॉज जो इससे हमको पता चलता है कि जिस चीज से जो इफेक्ट होती है वो कोज के सिमिलर होती है कोज अर्थात कि वह चीज जिसमें से इफेक्ट यानी कि जो स्थूल चीज है वह प्रकट हुई है सूक्ष्म चीज में से जो स्थूल चीज प्रकट हुई है तो हम कह सकते हैं जो प्रकट हुई स्थूल चीज यह सूक्ष्म बीज जिसमें से वह प्रकट हुआ है उसके समांतर है वह एक ही है उसी के जैसा ही है देयर फॉर वी लर्न दैट द इफेक्ट इज द सेम एज द कॉज नॉट डिफरेंट इट इज ओनली इन द अदर फॉर्म इफेक्ट और कोस दो अलग स्वरूप है चीज एक ही है वही बीज है वही वटवृक्ष है उसका स्वरूप चेंज हो गया है इसके भीतर का अब जैसे कि ब्रह्मण और माया अच्छा चलो ब्रह्मण और माया के ऊपर में तो स्वामी जी बाद में आएंगे किंतु अंडा और पंखी जिसका कि स्वामी जी ने उदाहरण दिया जिस एलिमेंट्स का अंडा बना था उसी एलिमेंट का पंखी बना है वही है कि दोनों का स्वरूप अलग-अलग है वही प्रोटीन वही आप कहेंगे कि कार्बोहाइड्रेट्स और ही सब जो लोग खाते हैं उनको पता होगा तो दिस इज व्हाट इज कॉल्ड डिस्ट्रक्शन गोइंग बैक टू द कोज देयर फॉर वी लर्न दैट इफेक्ट दिस ग्लास इज एन इफेक्ट एंड इट हैज इट्स कॉज यह जो ग्लास है स्वामी जी एक पानी पीने का ग्लास शायद वहां पर रखा होगा उसकी ओर इशारा करके स्वामी जी कह रहे हैं यह जो ग्लास है वो वही है वो एक परिणाम है और जो परिणाम जो है उसका एक एक रीजन होना चाहिए एक कोज होना चाहिए एंड दिस कॉज इज प्रेजेंट इन दिस फॉर्म जो ग्लास है वो एलुमिनियम का अथ या तो फिर ग्लास बोलकर के जो एलिमेंट है जो कार्बन जो है कार्बन ग्लास में परिणत होता है क्रिस्टलाइज कार्बन ग्लास में परिणत होता है एलुमिनियम है वो मेटल है तो जद का वो ग्लास होगा तो एलुमिनियम का वो एलुमिनियम जो जमीन में से निकाला है एलुमिनियम की ओर इसको इंग्लिश शब्द है और और मुझे पता नहीं हिंदी शब्द क्या है जब आप माइनिंग करते हैं एलुमिनियम या एलुमिनियम शायद डायरेक्ट नहीं आता वो आयरन वगैरह वो आते हैं बेसिक जिसको कि प्रोसेस करके आप स्टील है वगैरह बनाते हैं तो वो जमीन में से जो निकाला जाता है माइनिंग करके जो मेटल वो मेटल का ही दूसरा स्वरूप है ग्लास मेटल एलिमेंट वही है उसका दूसरा स्वरूप है ग्लास वैसे ही कार्बन जद क्रिस्टलाइज हो जाता है ग्लास के फॉर्म में उसको बनाते हैं तो व कार्बन एटम्स ही है वो कार्बन एटम जमीन में से निकालते हैं तो कोयले की तरह या क्रिस्टलाइज कार्बन रहता है और उसके ऊपर में वो प्रोसेस भट्ठी में गिला कर के उसको प्रोसेस करते हैं तब वो ग्लास बनता है एलिमेंट्स वो वही रहते हैं अ सर्टेन अमाउंट ऑफ द मटेरियल कॉल्ड ग्लास प्लस द फोर्स इन द हैंड्स ऑफ द मैन्युफैक्चरर आर द कोज द इंस्ट्रूमेंटल एंड मटेरियल व्हिच कंबाइन प्रोड्यूस दिस फॉर्म कॉल्ड अ ग्लास एक तरह का खास तरह का एलिमेंट रहता है एक खास तरह का एक पदार्थ रहता है जिसको हम ग्लास कहते हैं अभी इस ग्लास को भट्ठी में जला दिया जाए भट्ठी और जो मैन्युफैक्चरर जो होता है जो ग्लास बनाने वाला जो आर्टिस्ट होता है कारीगर या तो जो भी उसको कहा जाए वो जो होता है उसके ऊपर में मेहनत करके उसको बहुत सुंदर रूप से किसी एक पानी पीने के गिलास है या तो वा उसमें वो परिणत करता है तो ग्लास क्या है तो ग्लास रूपी जो ओरिजिनल मेटल एलिमेंट था वह प्लस व जो कारीगर था उसकी मेहनत और जो ऊर्जा लगी उसको भट्ठी में जलाने की वह तीनों का कॉमिनेशन है यह ग्लास द फोर्स चच वाज इन द हैंड्स ऑफ द मैन्युफैक्चरर इज प्रेजेंट इन द ग्लास एस द पावर ऑफ एडिशन जो मैन्युफैक्चरर या तो जो कारीगर है जो इस ग्लास को बनाता है उस उस कारीगर की जो मेहनत है वह इस ग्लास के भीतर में छुपी हुई है स्टेटिक उसको फोर्स ऑफ एडिशन अर्थात कि उसको इकट्ठा करने वाली जोड़ कर के रखने वाली फोर्स जो है उसके रूप में व परिणत होती है विदाउट व्हिच द पार्टिकल्स वुड फॉल अपार्ट इस फोर्स के बिना पार्टिकल्स जो है जो कि ग्लास बनाते हैं वो टुकड़ों टुकड़ों में बिखर जाएंगे एंड द ग्लास मटेरियल इज आल्सो प प्रेजेंट जिस मटेरियल का ग्लास बना है वह तो वहीं पे है ही है द ग्लास इज ओनली ए मेनिफेस्टेशन ऑफ दिस फाइन कोसेस इन अ न्यू शेप ग्लास बनाने वाला ग्लास बनाने के लिए जो लगी वो ऊर्जा और ग्लास बनने के लिए लगे जो एलिमेंट वह उन्हीं का परिणत स्वरूप ग्लास है वह एक दूसरे स्वरूप में परिणत होता है वो ग्लास है एंड इफ इट बी ब्रोकन टू पीस यदि इस ग्लास को टुकड़ों टुकड़ों में ज ग्लास गिर गया टुकड़ों में बट गया तो क्या होगा द फोर्स व्हिच वाज प्रेजेंट इन द फॉर्म ऑफ एडिशन विल गो बैक एंड जॉइन इट्स ओन एलिमेंट जो फोर्स जिसने कि इस ग्लास के एलिमेंट को जोड़ कर के रखा था वह फोर्स अभी अपने ओरिजिनल स्वरूप में वापस मिल जाएगी विलीन हो जाएगी एंड द पार्टिकल्स ऑफ ग्लास विल रिमन द सेम अंट्टी कल में से ग्लास बना है वो वैसे ही रहेंगे किंतु जब तक उसको फिर बहुत बड़ी कोई पावरफुल प्रोसेस ना की जाए तब तक व उसी स्वरूप में रहेंगे देखिए स्वामी जी ने यहां पर ये थोड़ा सा 19वीं सदी के साइंस की दृष्टि से बताया है आज 20वीं सदी का साइंस थोड़ा सा हमको डिफरेंट यह सब चीजें बताता है मैटर और एनर्जी एलिमेंट्स और ये वो फोर्सेस एनर्जी मैटर यह सब शब्द आज का मॉडर्न साइंस यूज करता है यदि हम यह भी कह दे सुपरफिशियल जद कहे कि स्वामी जी का साइंस का अंडरस्टैंडिंग आज से 100 200 साल पुराना है मॉडर्न साइंस के साथ मैच नहीं होता डजन मैटर आप कह सकते हैं ऐसा किंतु जो अंडरलाइन आइडिया जो है कि मैटर और एनर्जी में से सभी पदार्थ जिसको ऑब्जेक्ट कहते हैं वो सब बनते हैं चाहे वो ऑर्गेनिक ऑब्जेक्ट हो ना कि इन ऑर्गेनिक ऑब्जेक्ट हो और इस ऑब्जेक्ट्स का विनाश होता है तो वही मैटर एनर्जी स्पेस टाइम में वो परिणत हो जाते हैं जहां से वो ओरिजनली प्रकट हुए हैं किंतु यह जो चक्रा का आइडिया है चक्रा का जीवन का जो विचार है वह आज का मॉडर्न साइंस वैसे का वैसा ही एक्सेप्ट करता है बस उसके उसके शब्द उसकी टर्मिनोलॉजी मैथमेटिकल एक्सप्रेशंस यह सब इसके पीछे थोड़ा सा चेंज हो जाता है तो यह हमारा आध्यात्मिक जीवन मात्र नहीं कि जीवात्मा ने एक के बाद एक शरीर धारण करता जाता है जन्म मृत्यु जरा व्याधि की साइकिल से गुजरता है कर्म सत कर्म असत कर्म वो करता जाता है फिर आखिर में मृत्यु के समय बैंक बैलेंस जो होगा उसका सत और असत कर्म उसके अनुसार नया जीवन नया शरीर ग्रहण करेगा और वह अनंत काल तक यह जन्म मृत्यु जरा व्याधि सत असत कर्म करना और फिर उसके अनुसार नया जीवन धारण करना यह चलती जाएगी यह साइकिल कब तक जब तक कि उसके भीतर में ूश ना आए कि हां कोटि कोटि जन्म तो चले गए और अभी तो ईश्वर दर्शन हुआ भी नहीं ठाकुर का ऐसा था कि एक दिन पूरा हो जाता था तो तो शाम को व रोना शुरू कर देते अरे मां एक दिन और चला गया आपका दर्शन आज भी नहीं हुआ हमारे साथ है कि जन्म जन्मांतर खत्म हो जाते हैं तब कहीं जाकर के हमको किसी दिन ंश आएगी अरे इतने सारे जन्म कोट कोटी जन्म चले गए अभी भी ईश्वर का दर्शन नहीं हुआ चलो आज का दिन एटलीस्ट में यह सब यह मोबाइल है या फिर जो कुछ भी है उसको साइड पर रख कर के जो भी काम जो भी मेरा ड्यूटी जो भी मेरा रिस्पांसिबिलिटी फैमिली का रिस्पांसिबिलिटी यहां पर ये डिपार्टमेंट यह हमारा जो भी है ड्यूटी वगैरह यह जितने भी रिस्पांसिबिलिटीज है उसको थोड़े दिन के लिए थोड़ा सा साइड करके चलो मैं सब कुछ मेरा मन मेरा अहंकार मेरा बुद्धि सब कुछ मैं ईश्वर के श्री चरणों में अर्पित करता हूं एकाग्र करता हूं ऐसा जद सेंस यदि जन्म जन्मांतर में एक बार भी आ जाए हमको तो भी वह हमारे लिए बहुत बड़ी बात होगी दस वी फाइंड दैट द इफेक्ट इज नेवर डिफरेंट फ्रॉम द कोज इससे हमको पता चलता है जो परिणाम है वह जिसमें से परिणत हुआ है उससे बहुत ज्यादा भिन्न नहीं है इट इज ओनली दैट दिस इफेक्ट इज अ रिप्रोडक्शन ऑफ द कॉज इन अ ग्रोसर फॉर्म जो सूक्ष्म रूप से जो बीज था उसी का स्थूल स्वरूप यह इफेक्ट है या तो परिणाम है नेक्स्ट वी लर्न ट ऑल दिस पार्टिकुलर फॉर्म्स विच वी कॉल प्लांट्स एनिमल्स और मेन आर बीइंग रिपीटेड एड इंफिनिटम राइजिंग एंड फॉलिंग यह बहुत बड़ा इंपॉर्टेंट कांसेप्ट स्वामी जी ने दिया है स्वामी जी या तो फिर कहे कि कपिल मुनि ने हमारे हिंदू धर्म में या तो फिर हिंदू सभ्यता में यह सर्वप्रथम यह कांसेप्ट दिया है स्वामी जी कहते हैं कि नेक्स्ट हम यह सीखते हैं हमको यह पता चलता है कि ऑल दिस पार्टिकुलर फॉर्म्स यह जितने भी परिणाम है यह जितने भी स्वरूप है विभिन्न स्वरूप जिसको कि हम पशु पक्षी या तो मनुष्य करके बुलाते हैं या मनुष्य के रूप में पहचानते हैं यह सब अनंत काल तक एड इंफिनिटम शब्द स्वामी जी ने यूज किया है फ्रेंच वर्ड है इसका अर्थ है अनंत काल तक अनंत काल तक यह स्वरूप बनते ही जाते हैं बनते ही जाते हैं बिखरते ही जाते हैं राइजिंग एंड फॉलिंग प्रकट होते हैं और विलीन होते हैं एक अंडे में से पंखी आया पंखी फिर अंडा प्र अंडे अंडे को जन्म देकर के पंखी चला गया इस अंडे में से दूसरा पंखी आया ये अंडे में से पंखी बनने की जो साइकिल है वह चलती ही जाए अनंत काल तक नहीं चलेगी इसलिए क्योंकि फिर इवोल्यूशन होकर के पंखी में से और कोई चीज आ जाए जैसे कि आज हम हमको यह पता है हमारे आर्कियोलॉजिस्ट या तो फिर जो लोग लोग इवोल्यूशनिस्ट है वे लोग कहते हैं कि पंखी ओरिजनली डायनोसोर में से आए हैं तो हम लोग कह सकते हैं कि एक समय था कि जबकि अंडे में से डायनासोर आता था डायनोसोर फिर अंडे को जन्म देता था उसमें से दूसरा डायनासोर आता था आज हम कहेंगे कि वही डायनोसोर इवोल्यूशन के माध्यम से धीरे-धीरे पंखी में परिणत हुआ है और आज पंखी अंडा देता है अंडे में से पंखी आता है तो ऊपर ऊपर से आप आर्गुमेंट कर सकते कहां हमेशा के लिए तो डायनासोर रहा नहीं कहां हमेशा के लिए तो पंखी रहा नहीं किंतु अंडे में से जन्म होना जन्म फिर अंडा ये साइकिल तो चलती रहती है मनुष्य हम कहेंगे कि बंदर था एक समय में आज हम मनुष्य है भविष्य में क्या होगा किसको पता किंतु ये जन्म मृत्यु जरा व्याधि की साइकिल बंदर के भीतर में मनुष्य के भीतर में या तो फिर हम भविष्य में कभी इवोल्यूशन होकर के देवता हो जाए तो देवता के भीतर में भी चलती रहेगी तो ये साइकिल ये साइकल हमेशा के लिए रिपीट होती रहेगी इन वन फॉर्म और द अदर द सीड प्रोड्यूस द ट्री द ट्री प्रोड्यूस द सीड अंड बीज में से वृक्ष बनता है वृक्ष में से बीज बनता है चच अगेन कम्स अप विथ अनदर ट्री और उसी बीच में से नया ट्री नया नए पेड़ का जन्म होता है एंड सो ऑन एंड सो ऑन य ये चलता ही जाएगा चलता ही जाएगा देयर इज नो एंड टू इट इसका कोई अंत नहीं है वाटर ड्रॉप्स रोल डाउन द माउंटेंस इनटू द ओशन इमेजिनरी कितना सुंदर स्वामी जी ने दिया है कि पहाड़ के ऊपर में से पानी का बारिश का बिंदु धीरे-धीरे करके रोल डाउन अर्थात की रोल डाउन अर्थात कि इसका हिंदी क्या करेंगे उसमें से गिरते गिरते यह पानी के भीतर में नदी के भीतर में या तो फिर समुंदर के भीतर में जाता है एंड राइज अगेन एज वेपर और फिर वेपर यानी कि बापी भूत होकर के फिर से हवा में उठता है गो बैक टू द माउंटेनस बारिश वो जो बादल बनता है बादल में से फिर से पहाड़ पर आता है एंड अगेन कम डाउन टू द ओशन पहाड़ में से फिर से समुंदर में जाता है सो राइजिंग एंड फॉलिंग द साइकिल गोज ऑन इसी तरह उठना और गिरना जन्म और मृत्यु यह साइकल चलती ही जाती है तो आज यहीं तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु