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ओ स्थापक य च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णा यते नम आज के बड़ो शुभ दिन आज के शिवरात्रि और आज अपनी क्लासे से एक बड़ो कथा ना हले तो आज के तो पूजो ो अनेक की छवा तो वेरी गुड स्वामी जी का लेटर प्राय तो समाप्त हो गया है लास्ट पैसेज में फिर से एक बार पढ़ लेता हूं राम कृष्ण अवतारे ज्ञान भक्ति और प्रेम अनंत ज्ञान अनंत प्रेम अनंत कर्म अनंत जीवे दया तोरा एकन बुझते पारिश नहीं अर्थात तुम लोग को अभी भी समझ में नहीं आया है श्रुत्वा पन वेद न चैव कश्च सुनने के बाद में भी समझे नहीं हो वट द होल हिंदू रेस जस थॉट इन एजेस ही लिव इन वन लाइफ पूरी हिंदू सभ्यता ने युगों युगों से जो आध्यात्मिक चिंतन अनुभूति और साधना की है वही श्री रामकृष्ण देव अपने एक जीवन काल के दरमियान इसको सिद्ध करके गए हैं हिज लाइफ इज द लिविंग कमेंटरी टू द वेदास ऑफ ऑल द नेशंस और सिर्फ हिंदू सभ्यता से ऊपर उठक देखें तो पूरे मानव समाज यह होमो सेपियन स्पीस जो है इसकी अभी तक की जो कोई भी उपलब्धि है उसकी व्याख्या या कहेंगे कि उसका प्रैक्टिकल एप्लीकेशन है श्री राम कृष्ण देव क्रमश लोके बुझे लोग धीरे-धीरे करके समझेंगे आरो पुरोनो बोल मेरी वही पुरानी बात स्ट्रगल स्ट्रगल अप टू द लाइट संघर्ष करते जाओ संघर्ष करते जाओ जब तक हमको प्रकाश की प्राप्ति नहीं होती ऑन वर्ड्स आगे बढ़ो तो यह स्वामी जी का यह लेटर समाप्त हुआ और मैं सोच रहा था कि आज क्या करना है जनरली हम मंडे को एक नया टॉपिक स्टार्ट करते हैं आज को सप्ताह का आखिरी दिन है तो मैंने सोचा कि इस पत्र के भीतर में जो कुछ भी टॉपिक्स हमने डिस्कस किए उसका थोड़ा सा एक और थोड़ा डिटेल में उसमें जाया जाए खास करके मैं यह जो सोच रहा था कि कितने ऑर्गेनाइजेशन के स्वरूप है और यह जो अपना ऑर्डर है उसका तात्पर्य क्या है इसका प्रयोजन क्या है तो हमने ऑलरेडी डिस्कस किया कि मां का जो ऑर्गेनाइजेशन का तरीका था या तो मां का जो ऑर्गेनाइजेशन था इट इज अ फैमिली यूनिट जयराम बाटी में जाकर देखेंगे कि अपने भाइयों के साथ में भाइयों की पत्नियों के साथ में उनके बच्चों के साथ में यह त्यागी संतान है यहां से इतने सारे भक्त कोलकाता से जाते थे सबको लेकर मां रहती थी उद्बोधन में भी वही बात जहां भी भी मां जाएगी तो साथ में उनके परिवार जन और यह त्यागी संतान से तो सभी तो मां के परिवार जन ही थे हमको तो इस तरह से डिस्टिंक्शन नहीं करना चाहिए कि कौन एक्चुअल फैमिली मेंबर से और कौन नहीं है इस तरह से डिस्टिंक्शन नहीं करके इस तरह से देखेंगे कि रिलेटिव्स एंड डिवोटा एंड त्यागी संतान यह तीन का मिलकर के सभी को मिलकर के य मां का परिवार था तो मां जद जयराम बाटी में रहेगी वहां पर भी मां का परिवार रहेगा उद्बोधन में आएगी वहां पर भी मां का परिवार साथ में था ठाकुर का ऑर्गेनाइजेशन का जो था वो था गुरुकुल जो ट्रेडिशनल गुरुकुल पद्धति हम लोग देखते आए हैं भारत में वही सांदीपनी मुनि वही वशिष्ठ ऋषि वही व्यास मुनि जहां पर सब यह लोग जाकर के विद्याभ्यासम करते थे वही सिस्टम वही पद्धति आप ठाकुर देखेंगे कि वहां पर पहले तो दक्षिणेश्वर में और बाद में काशीपुर उद्यान गृह में हमको वही दिखता है और आखिर में आता है स्वामी जी का ऑर्डर अभी देखिए कि ऑर्डर वैसे तो लगता है कि बुद्धिस्ट ऑर्डर तो थे वैसे भूतकाल में किंतु वह तो बहुत ही पुराना भूतकाल है ऐसा नहीं कि भारत में ऑर्डर्स नहीं थे और विदेश से ही हमने इस पूरे स्ट्रक्चर को इंपोर्ट किया है ऐसे नहीं है बुद्धिस्ट ऑर्डर भी थे अपने ऋषि मुनियों के बारे में जैसे मैंने पहले भी बताया था कि पराशर मुनि के आश्रम में एक बार सोचा गया गया कि अभी कलयुग आ रहा है तो अभी क्या किया जाए तो इसके लिए वेदों का संरक्षण करना चाहिए पुराणों की रचना करनी चाहिए जिससे कि लोग सहज रूप से हिंदू धर्म की व्याख्या समझ सके और फिर यह ब्रह्म सूत्र ब्रह्म सूत्र की रचना की जाए जिसमें कि सभी उपनिषदों का सार तत्व आ जाए तो वहां पर प्लान करके इस तरह से एक एग्जीक्यूट किया गया था एक बड़ा प्रोजेक्ट ऑर्डर होता है जनरली एक प्रोजेक्ट को एग्जीक्यूट करने के लिए ऑर्डर होता है जनरली सोसाइटल रिफॉर्मेशन के लिए सोसाइटल चेंज के लिए क्योंकि यदि हम लोग 10 लोग 20 लोग 30 लोग साथ में मिलकर जब तक काम नहीं करेंगे तब तक इस समाज में परिवर्तन लाना संभव नहीं तो अभी फिर से इन तीनों ऑर्गेनाइजेशनल स्ट्रक्चर को देखें फैमिली यूनिट क्या है एक तो है उसका फाउंडेशन है भालो भाषा और शक्ति यदि बांगला के दो शब्द यूज करें भालोबासा अर्थात कि प्रेम स्नेह एक दूसरे के प्रति एक प्रगड़ रिलेशन जो कि चाहे कितनी भी बाधा विपत्ति आ जाए मेरा भाई या मेरी बहन हमेशा मेरे साथ में खड़े हैं ऐसा एक रिलेशनशिप जो होता है वह फैमिली में होता है और दूसरा ही अभी जब भाइयों और बहनों के साथ में रहे होंगे आपको जद ऐसा अनुभव होगा ही होगा कि टे थे तो कितना झगड़ा करते थे कितना वो मने यह मेरा खिलौना है कोई अपना भाई बोलेगा बहन बोलेगी नहीं ये मेरा खिलौना तो ये झगड़ा भी साथ में रहकर होता है तो जद फैमिली को टिकाना है खास करके यह जो जॉइंट फैमिली तो सहन शक्ति एक बहुत ही हमारे भीतर में चाहिए तो माका देखिए कि सहन शक्ति कहां तक मां के जीवन में थी मां के उपदेश में थी तो बोल कर के वो जयराम बाटी का फैमिल एक इंटैक्ट रह पाया अच्छा यदि विद्याभ्यासम जाकर के तो बेसिक क्वालिटी क्या चाहिए वो है मुमुक्षु क्व मुमुक्षु उव अर्थात कि जो विद्या मुझे प्राप्त करनी है नॉट नेसेसरी कि मैं सिर्फ वेदांत या योग ही सीख रहा हूं हो सकता है मैं धनुर्वेद सीख रहा हूं हो सकता है कि मैं आयुर्वेद सीख रहा हूं तो किंतु वही धनुर्वेद वही आयुर्वेद सीखने के लिए भी गुरु के साथ में रहकर के लंबे समय तक साधना तो करनी ही होगी तो वह मुमुक्षु एकाग्रता विल पावर यह सब क्वालिटीज है जो कि गुरुकुल में काम लगती है या तो फिर गुरुकुल आपके भीतर में डेवलप करता है अच्छा अभी ऑर्डर की क्वालिटीज क्या है देखिए यहां पे एक इंटरेस्टिंग थिंग कि ऑर्डर में हम आते हैं अपने खुद के किसी प्रयोजन से नहीं हमको पता है कि ऑर्डर का अपना एक मिशन है वी आर गोइंग टू बी अ कोग इन दिस विल ये इंग्लिश शब्द प्रयोग करें तो वी आर गोइंग टू बी अ जैसे गिलहरी ने राम सेतु में एक छोटा सा पत्थर डाला वैसे ही अपना एक छोटा सा योगदान एक ऑर्डर का जो वर्ल्ड मिशन है उसमें हम करने के लिए यहां पर आते हैं यदि मैं यह चाहता हूं कि हां मुझे य अच्छा अभी रामकृष्ण ऑर्डर का वैशिष्ट्य क्या है कि यहां पे बिकॉज कि हमारे देवता ठाकुर मा स्वामी जी तीनों है ये तीनों कैरेक्टरिस्टिक अपने ऑर्डर में है कि मां के द्वारा जो फैमिली यूनिट का जो कांसेप्ट था वो गुरुकुल का आईडिया और यह ऑर्डर अर्थात कि यहां पर जितने भी लोग आते हैं नहीं सिर्फ साधु ही नहीं किंतु यह ब्रह्म ये वॉलंटस है डिवोटा है सब में एक एक स्ट्रांग एक ब्रदरहुड की भावना रहती है तो वो एक हो गया फैमिली यूनिट वाला कांसेप्ट गुरुकुल का कांसेप्ट तो है ही है यहां पे कि आपको साधना करनी है और आपको मुमुक्षा अपनी खुद की डेवलपमेंट के लिए जो करना है मुझे कोई स्टडी करनी है वेदांत का अभ्यास करना है योग का अभ्यास करना है योग में जो भी योग हो भक्ति योग है ज्ञान योग है या तो फिर राज योग है जो योग का मैं अभ्यास करना चाहता हूं वो यहां पर करना ही करना है ऐसा नहीं है कि यहां पर स्वामी जी ने ऑर्डर एस्टेब्लिश किया तो यह फैमिली वाला जो ब्रदरहुड वाला भा या तो फिर यह मुमुक्षा भ्यान ज्ञानार्जन का भाव वह नहीं रहेगा वह नहीं वो दो तो है ही है साथ में ही स्वामी जी का ऑर्डर का कांसेप्ट है देखिए स्वामी जी भारत में वापस आए उनकी यह जो गरीबों के प्रति य करुणा थी कंपेज था इतना स्ट्रांग था जहां पर भी जाते थे वह देखते थे कि अरे भारत की यह परिस्थिति है और मैं इस तरह से लग्जरी में कैसे रह सकता हूं वही अमेरिका में शिकागो में जाकर के वो व्या खन देकर के वर्ल्ड पार्लिमेंट ऑफ रिलीजन में पॉपुलर हो गए अभी धनी लोगों के घर में रह रहे हैं बड़े ही सुंदर बिछाने में बड़े ही अच्छे घर में खाने पीने की सब चीज है तो वो बिछाने पर नहीं सुके स्वामी जी जमीन पर सोते हैं और रोते हैं यह याद करके कि उनके भारतवासी देशवासियों की क्या परिस्थिति है तो स्वामी जी का पूरा था कि भारत का जो समाज है उसमें हम लोग क्या कंट्रीब्यूट कर सकते हैं ये चेंज एट द सोसाइटल लेवल ये सोर्स रेडिस्ट्रिक्टिंग का प्लान था इस रामकृष्ण ऑर्डर को बनाने का हालांकि मां का एक छोटा सा इंसिडेंट है वो एक बार बार किसी ने जाकर के मां को पूछा था मोस्ट प्रोबेबली ये केदार बाबू ही होंगे क्वाल पाड़ा आश्रम के अध्यक्ष शायद उन्होंने ही पूछा था कि मां को जाके कहा कि मां हम लोग तो यह दात व्य चिकित्सालय अर्थात कि यह निशुल्क दवाई हम जो लोगों को देते हैं तो वह तो गरीब लोगों के लिए देते हैं किंतु हमको पता है कि ऐसे लोग भी हमारी चिकित्सालय में हमारी डिस्पेंसरी में आते हैं जिनके पास में हमको पता है कि पैसा है और वो पैसा दे कर के डॉक्टर को दिखा सकते हैं तो हमको क्या करना चाहिए तो मां ने उत्तर दिया था बेटा देखो कि जो मांगने के लिए आता है वो सब वो गरीब है व मने सबको इक्वल ही हमको ट्रीटमेंट देना चाहिए उसमें फिर उच्च नीच या गरीब पुअर ये डिफरेंशिएबल गिनना ट्रीट करना किंतु स्वामी जी का जो था कि सोसाइटल डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ द रिसोर्सेस व जो गरीब है उसको हमको मने अपने जिस एरिया में हम लोग काम करते हैं जैसे कि यह जैसे डिस्पेंसरी है वहां पर हम बिल्कुल ही निशुल्क रूप से प्राय ₹ र इतना ही हमारा वो चार्ज होता है रूरल डेवलपमेंट सेंटर्स में जाएंगे गांव-गांव में हमारा कितना काम होता है तो वी कॉन्शियसली ट्राई कि उन लोगों तक पहुंचा जाए जिनके पास में ज्यादा कोई रिसोर्सेस नहीं है तो दिस इज द एम एंड ऑब्जेक्टिव ऑफ ऑर्डर अभी देखिए ये तीनों कैरेक्टरिस्टिक तीनों ही लाक्षणिक काएं एक जगह पे राम कृष्ण मिशन में एक साथ में इकट्ठा हुए हैं हमको यहां पर रहना है इसलिए इस तरह से जैसे कि हम एक फैमिली में रह रहे हैं अदर वाइज बाकी सब कॉर्पोरेशन के साथ में और रामकृष्ण ऑर्डर का क्या डिफरेंस यही एक डिफरेंस है एक तो है कि बाकी सब कॉर्पोरेशन में एक्सप्लोइटेशन का भाव रहता है आपको एक फैमिली मेंबर की तरह ट्रीट करना तो दूर रह गया आपके पास से मैक्सिमम कितना काम निकाल ले वो यह लोग देखेंगे और फिर आपको ट्रेनिंग देना जिससे कि आपका स्किल अपग्रेडेशन हो वैसे बड़ी-बड़ी जो कंपनियां होती है आजकल सिलिकॉन वैली की कंपनियां वगैरह वे लोगों में यह कॉन्शसनेस आ गया है कि अपने एंप्लॉई है उनका स्किल अपग्रेडेशन किया जाए वरना ज्यादातर कंपनियां होती है वह तो यही सोचती है कि जिस स्किल जो तुम्हारे पास है उसी स्किल का तुम जो मैक्सिमा यूज करना ना हो करो वरना निकलो यहां से माने एक एक्सप्लोइटेटिव एक्सट्रैक्टिंग एक मेंटालिटी बाकी सब कॉर्पोरेशन में रहता है राम कृष्ण मिशन उस सब जगह से यही इसी मामले में डिफरेंट है एक तो यहां पे फैमिली है एक यहां पे गुरुकुल है और एक यहां पे वर्ल्ड मिशन है सो ये तीनों लाक्षणिक काएं रामकृष्ण मिशन में इकट्ठा होती है हां आप जदी कहेंगे ऐसा कहा जा सकता है कि यह बात थियोरेटिकली जितनी सही है प्रैक्टिकली कितनी सही है तो इसमें हम लोग कुछ आर्गुमेंट कर सकते हैं कुछ इसमें कोई ऐसा ऑब्जेक्शन निकाल सकता है कि ज थिरी है वही प्रैक्टिस है कि नहीं किंतु एटलीस्ट हमारे सामने थिरी एकदम क्लियर है कि एक फैमिली एक गुरुकुल और एक ऑर्डर तीनों यहां पे है अच्छा अभी सोचेंगे कि जद यह तीनों यहां पे है तो क्या यह तीनों और किसी जगह पर नहीं थे जैसे क्रिश्चियन ऑर्डर से तो क्रियन ऑर्डर्स में भी तो यह सप्ताहिक ब्रदरहुड का कांसेप्ट था खास करके यह जो सेंट टेरेसा ऑफ एवला इनके बारे में जद हम सोचे उन्होंने ये जो डिस्का कार्मलाइट ऑर्डर उसका एस्टेब्लिशमेंट किया तो उनका भी नेचर इसी तरह था पहले तो शी वाज अ लेडी एक मने एक स्त्री होने के नाते एक तो भीतर में एक सबके प्रति स्नेह था तो हम कह सकते हैं कि मातृत्व का भाव उनमें था फिर साथ-साथ में ही ठाकुर की तरह उनको इतने सारे एक के बाद एक दर्शन होते थे और उनके साथ में जो लोग रहते थे उनके साथ में जवाइन करने के लिए जो लोग आते थे तो उनको वह सिखाती थी कि किस तरह से एक आध्यात्मिक उन्नति की जाए और फिर एक ऑर्डर की स्थापना की तो ऑर्डर का तो एक मिशन रहता ही रहता है तो ऐसा नहीं है कि यह एक यूनिक है राम कृष्ण ऑर्डर एक गुरुकुल फैमिली और ऑर्डर य मिशन ये तीनों कैरेक्टरिस्टिक तो दूसरी सब जगहों पर ही तो हो सकती हो सकती है ऐसा नहीं है कि नहीं है और ऐसा भी दावा नहीं किया जाना चाहिए कि रामकृष्णा मिशन यूनिक है यूनिक यह है कि एक वर्ल्ड क्लास अवतार ने डायरेक्टली इसको एब्लिश किया है यानी कि इसके पीछे जो इंटेंसिटी है इसके पीछे जो फोर्स है व्हिच इज फार ग्रेटर देन एनी अदर ऑर्डर व्हिच जज बीन एस्टाब्लिशड इन द हिस्ट्री अर् अर्थात कि जितने भी ऑर्डर आज के पहले आए एक अवतार स्वयं जिस ऑर्डर की स्थापना करता है इसके पीछे जो फोर्स जो पावर रहता है वो सबसे ज्यादा रहता है अर्थात ये तीनों लेवल पे यदि फैमिली लेवल प बोले तो हम सब में जो एक ब्रदरहुड की भावना इतनी स्ट्रांग है एक गुरुकुल की दृष्टि से बोले तो यहां पे अपना साधना करने की जो फैसिलिटी मिलती है साधना करने को जो इनकरेजमेंट मिलता है जो ट्रेनिंग मिलती है वच इज फार ग्रेटर फार बेटर और यह जो हम कार्य कर रहे हैं इसका इसके पीछे जो लॉजिक स्वामी जी ने यूज किया है बहुत बार में अभी देखिए मैं स्वामी जी का जो कहना था कि पहले तो अन्नदान फिर जीवन दन फिर विद्यादान और फिर आखिर में आता है ज्ञान दान तो सर्वश्रेष्ठ तो ज्ञान दान ही है किंतु जब तक सोसाइटी की नीड है हम लोग अन्नदान और जीवन दन अर्थात की स्वास्थ्य दान हमने ये मेडिकल एक्टिविटीज यह सब करते रहेंगे किंतु अपने ऑर्डर का मुख्य उद्देश्य तो है विद्यादान और ज्ञानदान विद्या अर्थात की एजुकेशनल एक्टिविटीज ज्ञान दन अर्थात की ये स्पिरिचुअल एक्टिविटीज कल्चरल एक्टिविटीज ये अपने ऑर्डर का मुख्य धय है तो स्वामी जी का एटलीस्ट कांसेप्ट क्लियर है कि ऑर्डर की ये जो लिमिटेड रिसोर्सेस है ये लिमिटेड मेन पावर है इसको कहां पर प्रॉपर्ली यूटिलाइज किया जाए बहुत बार ऐसे लोग होते हैं कि कुछ अच्छा तो करना चाहते हैं किंतु उनको डायरेक्शन नहीं मिलती अभी एक समय था मेरे पास में एक लड़का आता था और मेरे साथ में ये उसके भीतर में एक था कि कुछ करें एक यंग लड़के होते हैं तो कॉलेज के तो भीतर में उत्साह होता है एक ऐसा विजन होता है कि हम लोग समाज को चेंज कर देंगे फिर जैसे वो घर संसार करेंगे यह सब सपने चकना चोर हो जाते हैं समझ में आ जाता है कि संसार तो चेंज करना तो दूर की बात रही अपने को जो जॉब मिलती है नहीं मिलती है वो ठीक है कि नहीं वही चिंता में वो लोग डूब जाएंगे किंतु जो भी है ये लड़का आता था कॉलेज में था तो मुझे सब बीच बीच में बोलता रहता था चलिए महाराज हम एक नया प्रोजेक्ट चालू करते हैं ये करते हैं वो करते हैं तो मैं पूछता था कि बताओ तुम्हारा क्या विजन है क्या करना चाहते हो तो बोले कि हम क्लीनिंग ड्राइव एक करेंगे स्वच्छता अभियान करेंगे उसके बाद में यह लाइब्रेरीज वगैरह चालू करेंगे मैंने कहा देखो स्वच्छता अ वेरी गुड प्रोजेक्ट किंतु देखो कि तुम लोगों के पास में मान लो कि तुम चार पांच मित्र मिलकर के कुछ करना चाहते हो तो स्वच्छता एक ऐसी चीज है ना कि आज तुम एक स्ट्रीट क्लीन करोगे एक गली को साफ करोगे दूसरे ही दिन वो इतना ही कचरा वहां पे आ जाएगा तुम लोगों को ऐसा लगेगा जनरली लड़कों का होता है ना फोटो बोटो खींचा फिर यह सोशल मीडिया पर रख दिया 10 लोगों ने बोला अरे वाह बहुत अच्छा काम किया फिर तुम घर चले जाओगे वो जो गली है वो स्ट्रीट है वो वैसी की वैसी ही गंदी दूसरे दिन हो जाएगी बेटर है कि तुम्हारे पास में ये एनर्जी है यह इच्छा है तो यूटिलाइज इट इन टीचिंग मने गरीब कोई बच्चा होता है उसको कुछ अच्छी चीज सिखाने में लगाओ यदि तुम उसको मान मान लो कि पढ़ाई लिख पढ़ना सिखा दोगे मान लो लिखना तो चलो थोड़ा दूर की बात है एक गरीब का बच्चा है ये जो माइग्रेंट लेबर होते हैं ना माइग्रेंट लेबर क्या है कि गांव में वैसे तो खेती में वो मजदूरी का काम करते हैं कि जिसके पास में जमीन होती है वहां पर जाकर के वो मजदूरी का काम करते हैं बारिश के सीजन में अभी बारिश की सीजन चली गई तो ऐसा तो नहीं है कि बारों मास ये खेती होगी तो जमीन तो अपनी है नहीं वैसे ही तो खेती में तो दूसरे के जगह ही काम करते हैं तो फिर क्या करेंगे सिटी में आएंगे ये कंस्ट्रक्शन वगैरह में वो लगेंगे तो ये माइग्रेंट लेबर जो कि गांव से आते हैं व कंस्ट्रक्शन में काम करने के लिए वो बेचारे किस तरह से रहते हैं पूरा खुला मैदान है वो झुग्गी झुपड़ी उनकी होती है बारिश धूप जो भी हो वहां पर उनको रहना पड़ता है तो वहां पर वे लोग रहते हैं नहीं उनके बच्चे की केयर करने वाला कोई नहीं वो मां और पिताजी चले जाए जाएंगे लेबर के लिए कंस्ट्रक्शन साइट प तो बच्चे वैसे ही वहां पर खेलते रहते हैं और बूढ़ी अम्मा होगी एक दो तो उनको देखती रहती है तो यह परिस्थिति में ये लड़के रहते हैं तुम्हारे पास एनर्जी है जदी तो जाकर के उनको लिखना पढ़ना सिखाओ एटलीस्ट इतना उनको सिखाओ तो उनका माने कुछ तो अपने जीवन में कोई मूर्ख तो नहीं बना जाएगा हो सकता है कि पढ़ना लिख सिफ सीख पाए उससे कोई उसको कोई बड़ी जोब मिल जाए ऐसा शायद नहीं होगा किंतु कोई उसको बिल्कुल मूर्ख भी तो नहीं बना जाए भविष्य में तो इतना तुम करो तो अभी इन लोगों को क्या लगता है पता है कि यह सब एक्टिविटी उसमें कोई ऐसा यह नहीं है माने क्या कहेंगे कि बड़ा उसमें नाम नहीं होता है ठीक है गरीब के बच्चे को पढ़ाते हैं तो यह अभी बहुत सारे लोग ऐसा सोचते हैं यदि कुछ करने की इच्छा है तो क्या करेंगे ऐसा कुछ करेंगे जिससे कि क्विक रिजल्ट आए और इमीडिएट सोशल मीडिया में छा जाए अभी काम करने की बजाय दिखावे का भाव ज्यादा रहता है ऐसा कुछ कर दो जिस कि हमारी मिनिमम एनर्जी व्यय हो और मैक्सिमम प्रचार हो यह होता है लोगों की मेंटालिटी तो यहां पे स्वामी जी का लॉजिक है कि आपको इस तरह का काम करना है जो कि जीवन भर आप जद करते भी रहे ना किसी को पता ना चले किसी को इंटरेस्ट भी ना हो बिल्कुल ही बोरिंग एक्टिविटी दिखे वो आपको किंतु फिर भी वही काम फंडामेंटल लेवल पे होगा वही काम आपका फाउंडेशन रेडी करता है फॉर द फ्यूचर इंडिया ये जो स्वामी जी ने कहा ना कि जो नया भारत आ रहा है इट विल बी फार बेटर देन एंसेट इंडिया फ्यूचर इंडिया विल बी फार ग्रेटर दन एंसेट इंडिया तो यह फ्यूचर इंडिया का फाउंडेशन डालना है तो इस तरह से काम करके जाओ तो लोगों को भले ही चाहे कुछ ना दिखे किंतु वो भीतर से पुष्टि मिले इस समाज को इस सोसाइटी को तो पुष्टि देने का काम क्या है वो है विद्यादान और ज्ञानदान तो यह है स्वामी जी का कांसेप्ट अभी ये कांसेप्ट सेप्ट को मैंने यह फैमिली वाला कांसेप्ट और गुरुकुल वाला कांसेप्ट को छोड़ कर के सिर्फ स्वामी जी की दृष्टि से यह सेवा कार्य की दृष्टि से हम देखें और दूसरे बाकी जो लोग कर रहे हैं बहुत सारे लोग हैं बहुत सारे एनजीओ हैं जैसे कि मैं रांची में जाता था तो रांची में अपना आश्रम तो काम कर ही रहा है फिर किंतु हमारा ऐसा है कि हम लोग ज्यादा प्रचार प्रसार ऐसा कुछ नहीं करते थे जो एनुअल रिपोर्ट एक हेड क्वार्टर में भेजना होता है डोनर लोगों को जो एक त दो लेटर लिखने होते हैं इसके अलावा कोई बहुत ज्यादा हम लोग हल्लागुल्ला नहीं मच जाते थे अभी एक बार मैं एक गांव में गया तो किसी लोगों ने बोला कि अरे महाराज जी आप लोग चले जाते हैं ना फिर दूसरे एनजीओ वाले आते हैं फिर वह क्या करते हैं आपने ये जो सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाया है या तो फिर आपने ये अच्छी खेती का कोई अच्छा नुस्खा बताया है तो वे लोग यहां पर अपना बैनर लगा कर के फोटो खींच के चले जाते हैं तो मैंने सोचा यह तो बड़ा ही डेंजरस है कि काम हम लोग कर रहे हैं और नाम वे लोग कमा रहे हैं तो फिर मैंने जाकर के वो हमारे जो महाराज थे उनको बोला कि महाराज जी देखिए हमको तो अपना बैनर लगा देना चाहिए हम अपना बैनर नहीं लगाएंगे तो हमारा क्रेडिट दूसरे लोग ले जाएंगे तो बोला कि ले जाने दो क्या है क्या फर्क पड़ता है तो उस समय मुझे थोड़ा सा एक आश्चर्य हुआ था कि क्या यह अपने साधुओं का यह मेंटालिटी है किंतु अभी मुझे आई ट्रूली अप्रिशिएट दिस मेंटालिटी क्योंकि यदि मैं काम करता हूं उससे कुछ अपेक्षा नहीं रखता हूं ट मींस के मैं जो जिस कार्य की ओर जाऊंगा वो इट विल बी ग्रेविटेटिंग फेम मुझे नहीं चाहिए इमीडिएट मैं उसी कार्य को सिलेक्ट करूंगा जो कि फंडामेंटल है और यदि मुझे नेम एंड फेम चाहिए मैं ऑटोमेटिक वही कार्य करूंगा जहां पर कैमरा लेकर के 10 लोग खड़े हैं और वहां पर मुझे गाड़ी में बैठ कर के जाना है वो फोटो खींचवा देना है और इमीडिएट चले आना है तीन चार घ घंटे गए गाड़ी में बैठ कर के गप लगाते लगाते गए वहां पर गए तो जो देखा खाने पीने का अच्छा व्यवस्था है कैमरा से फोटो खींच लिया वापस आ गए बस काम समाप्त हो गया एक घंटे के बाद में मुझे याद भी नहीं रहेगा कि मैं कहां गया था मैंने क्या किया था तो ये जब नेम और फेम की इच्छा बहुत ही प्रबल हो जाती है तब इस तरह के चीप अ एक्टिविटी में हमारा मन जाता है और जब नेम और फेम की इच्छा समाप्त हो जाती है तो रियली फंडामेंटल एक्टिविटी क्या है फंडामेंटल वो कर्म क्या है सेवा क्या है वहां पर हमारी नजर जाएगी ऐसे कितने ही डॉक्टर है ऐसे ही कितने टीचर हैं अपने ऑर्डर में सन्यासी कि जिन्होंने सालों साल बैठ कर के यह कल्याण कल्याणा नंद जी महाराज की तई परमहंश हुवी एक बहुत ही सुंदर किताब एक अपने ऑर्डर में लिखी गई है तो कितने सालों के बाद उनके जाने के तो देखिए कि इन्होंने हॉस्पिटल में रोगियों की सेवा की ऐसे कितने टीचर होंगे जिन्होंने निर्वेद ंद जी महाराज एक थे कि एक विद्यालय बहुत ही अच्छे से चलाया किंतु जिनका नाम आज बहुत ही कम लोग जानते हैं जो अपने ऑर्डर के साथ में जुड़े हुए हैं वहीं को उन्हीं को सिर्फ यह नाम पता है तो जब नेम एंड फेम की इच्छा नहीं होगी तो ट्रूली फंडामेंटल वर्क होगा तो दिस इज द कैरेक्टरिस्टिक ऑफ द ऑर्डर एज एस्टेब्लिश बाय स्वामी विवेकानंद स्वामी जी ने जिस तरह से ऑर्डर स्थापित किया है इसका फाउंडेशन ही है कि हमको नेम एंड फेम नहीं चाहिए संपूर्ण रूप से निष्काम सेवा करनी है अर्थात कि बाकी जितने भी ऑर्गेनाइजेशन जिनको हम जनरली एनजीओ कहते हैं आजकल तो एनजीओ में और रामकृष्ण मिशन में यह एक डिफरेंस है एनजीओ को अपना कार्य दिखाना है जिससे कि उसको सतत एक फंडिंग मिलता रहे ऑफकोर्स फंडिंग हमको भी चाहिए ऑफकोर्स कर्म तो हमको भी दिखाना होगा वरना जो डोनर है वो पूछेगा कि महाराज जी आपको ये इतना रुपया क्या दिया था इसके साथ इसके साथ में आपने क्या किया वो प्रश्न तो होगा तो वो एक एक मैंने जितना नेसेसरी है उतना रिपोर्ट बनाइए उतना आप दिखावा कीजिए किंतु फिर रिपोर्ट बनाना और दिखावा करना ही जद एम एंड ऑब्जेक्टिव हो जाए तो तो फिर यहां पर इस ऑर्डर का तो कोई मने मीनिंग ही नहीं रहेगा तो दिस इज द बिग डिफरेंस बिटवीन एनी अदर एनजीओ एंड रामकृष्ण मिशन तो अभी देखिए कि अगेन एक ओवर सर्वे करके देखते हैं कि फैमिली दूसरे तरह के फैमिली होंगे ऐसा भी होता है फैमिली में कि किसी को सहाय की जरूरत है कोई सहाय नहीं करता ये जो ब्रोकन फैमिलीज ये न्यूक्लियर फैमिलीज आजकल देखते हैं डाइवोर्स का रेट विदेश में तो कितना बढ़ गया है अभी यहां पे भी भारत में भी देखिए कि धीरे-धीरे करके यह सब आता रहता है कि थोड़ा सा भी एक मतभेद हुआ इमीडिएट सेपरेट हो जाओ साथ में नहीं रहना क्यों क्योंकि मेरा भी राइट है अभी राइट है फैमिली में अपने ह्यूमन राइट्स को भूल कर के रहना पड़ता है ये इंडिविजुअल ह्यूमन राइट्स हम जैसे कि गवर्नमेंट से मांगते हैं सोसाइटी से मांगते हैं फैमिली में किंतु अपना ह्यूमन राइट्स भूल कर के रहना है मेरा मेन उद्देश्य होना चाहिए कि मैं मेरे भाई को मेरे बहन को मेरे पिताजी को नाना-नानी को पोते पोती को मैं कितना सहाय भूत हो सकता हूं यह है फैमिली का उद्देश्य यानी कि आपको प्रोएक्टिवली हेल्पफुल होना है दूसरों का जो मैंने ऐसे होता है ना कि अभी कोई कोई गांधी जी के लड़के की ही बात सु सुनिए हमको पता है कि वो शराब पीना शुरू कर दिया था और फिर मिसबिहेव करना शुरू कर दिया था और फिर उसका ब्लेम अपने पिताजी पर डालता था क्यों क्योंकि वो गांधी जी वो फ्रीडम मूवमेंट में इतने बिजी थे कि वो जब छोटा था तो उसको केयर करने का उसके पास में समय नहीं था तो वो कहता है कि आपने मेरी केयर नहीं की मुझे पिताजी का प्रेम नहीं मिला इसलिए मैं इस तरह से एक ट्रबल मेकर के रूप में मैं बड़ा हुआ हूं तो अभी इस तरह से होता है यदि आप फैमिली मेंबर की केयर नहीं करेंगे तो बच्चे भी जो होंगे ना उनका एक हेल्दी साइकोलॉजिकल डेवलपमेंट नहीं होगा तो ये दिस इज द फाउंडेशन ऑफ फैमिली केयर एक भलो बसा यदि यह नहीं होगा तो फैमिली मेंबर ये इग्नोर करना यदि किसी को एब्यूज करना बहुत सारे लोग कहते हैं साइकोलॉजिस्ट खास करके कि एब्यूज करना जो जितना डेंजरस है इससे भी ज्यादा डेंजरस है इग्नोर करना क्या आप इसको इस तरह से इग्नोर करते हैं सब कुछ दे देते हैं बच्चे को चलो यह लो जितना खिल होना चाहिए ले लो अच्छे से अच्छी स्कूल में चले जाओ कि तो माता-पिता वो इतने वो सोसाइटी में इतने बिजी है अपने कार्य में कि बच्चे का केयर करने का उसके साथ में बैठ कर के बात करने का समय नहीं मिलता तो अभी बच्चा अपने मन की बात किसी को कह नहीं पाता है तो भीतर भीतर में एक प्रेशर खड़ा होता है फिर वो प्रेशर किस डायरेक्शन में रिलीज होगा पता नहीं तो दिस इज द मेन कैरेक्टरिस्टिक ऑफ फैमिली एस डेवलप बाय मां शारदा और फिर गुरुकुल का तो हमको पता ही है कि एक विद्यार्थी के प्रति एक गुरु का कितना एक क्या कहेंगे कि कितना ठाकुर सबको एकएक को देख देख देख कर के इंडिविजुअली गाइड करते थे सबके ऊपर में इतना ध्यान रखते थे कौन कितना खाता है क्या पहनता है कब वो उठता है कब सोता है ठाकुर जब वो रात को जाते थे नबत के सामने से तो वो मैंने वो मां और लक्ष्मी दीदी ये दोनों नौबत में रहते थे अभी 3:00 बजे ठाकुर वो शोच की ओर जा रहे हैं शोच करने के लिए जा रहे हैं तो चिल्ला करके जाएंगे अरे लखी मने लक्ष्मी तो रात पूरी हो गई दिन आने शुरू होने की तैयारी है और कितना सोगे उठो उठो तुम उठो तुम्हारी इनको उठाओ मां को उठाओ और फिर जब ध्यान करने के लिए लग जाओ ऐसा मने रात को सोने नहीं देते थे मां को बोलते थे कि इसको इतना ही रोटी देना इसका इतना ही रोटी देना रात को ज्यादा खाके सोए वो खाएंगे तो फिर जब ध्यान नहीं होगा तो ठाकुर सबके ऊपर में कितना ध्यान रखते थे अभी कंट्रास्ट दिस विथ अदर एजुकेशन इंस्टिट्यूट आजकल के देखिए कि किस तरह से एक एजुकेशन होता है टीचर को शायद पता भी नहीं होगा कि उसके क्लास में कितने लड़के हैं और मतलब लड़के कितने हैं तो पता होगा किंतु इंडिविजुअली कौन सा स्टूडेंट कितना डेवलप हो रहा है नहीं हो रहा है वो उसको नहीं पता होगा उसका वो जो एक खास करके गवर्नमेंट स्कूल में तो देखिए कि वो सिलेबस कंप्लीट करके चले जा ते हैं स्टूडेंट का क्या होगा क्या नहीं होगा कुछ ठीक नहीं और प्राइवेट स्कूल में यदि आप जाएंगे आप चाहेंगे कि आपके लड़के के ऊपर में कोई प्रॉपर्ली अटेंशन दे तो प्राइवेट स्कूल में कितना रुपया खर्च करके जाना पड़ता है कभी-कभी तुम्हें कोई यहां पर आता है मैं सुनता हूं कि अरे इतना सारा तुम लोगों का फी है मैंने फर्स्ट स्टैंडर्ड से ही तो बाप रे बड़े होंगे तो कितना फी होगा तो मैंने प्रॉपर केयर चाहिए तो इतना रुपया खर्च करना पड़ता है तो यह रामकृष्ण मिशन क्या है यह एक आदर्श है हमको यहां पर फैमिली का आदर्श एक गुरुकुल का आदर्श और एक निष्काम सेवा का आदर्श यह तीन आदर्श की स्थापना यहां पर की गई है अभी प्रश्न होगा कि गिलहरी की तरह रामकृष्ण मिशन ने जदी इस सोसाइटी के इस जो भारत माता के यह जो एक ब्रिज है माने संसार समुद्र को पार करने वाला 100 150 करोड़ लोग हैं भारत में रामकृष्ण मिशन के सेवा कार्य में या तो रामकृष्ण मिशन के आश्रम में या तो साधुओं के संपर्क में 150 करोड़ में से कितने आते होंगे ढ़ दो लाख मुश्किल से आते होंगे 25 30 लाख आते होंगे इससे ज्यादा मुझे नहीं लगता तो 150 करोड़ लोगों को जो सर्व करना है और इससे भी आगे 750 करोड़ कीय विश्व की पॉपुलेशन है इसको सर्व करना है तो रामकृष्ण मिशन क्या कर रहा है हम लोग डायरेक्टली कुछ भी नहीं कर पाएंगे डायरेक्टली हो सकता है 30 35 लाख लोगों का जीवन परिवर्तन करेंगे डायरेक्टली यदि हम कुछ कर करना चाहे तो किंतु बाकी सबके लिए अपना एक आदर्श है यदि फैमिली में आप है तो फैमिली इस तरह से होना चाहिए यदि आप एक एजुकेशन इंस्टिट्यूट में है तो इस तरह से आपका एजुकेशन इंस्टिट्यूट होना चाहिए और यदि आप कोई भी गवर्नमेंट जॉब है कोई भी कॉरपोरेशन में है तो वहां पर यह सेवा का आदर्श थोड़ा बहुत भी तो होना ही चाहिए जिस तरह से कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी का एक नया चला है इस तरह से तो रामकृष्ण मिशन जगत के सामने तीन आदर्श स्थापित करता है फैमिली का गुरुकुल का और निष्काम सेवा का तो फिर आज यही तक अभी मंडे को मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तसत श्री राम कृष्णा अर्पण
Question Answer
मस्तु आज के तो खूब मने पूरो रात पूरी रात पूजा होगी और फिर शिव नृत्य होगा मने प्रत्येक प्रहर के अंत में व राजकोट की बड़ी पुरानी ट्रेडीशन है शिवरात्रि की अगल बगल के सेंटरों से साधु लोग भी आएंगे पूजा में पार्टिसिपेट करने के लिए किंतु यहां पर एक बात है कि यह जो कोई भी साधु किसी के साथ में फ्रैंकली बात भी करेगा ना इसके पीछे की किंतु एक फार्मूला है मैंने ऐ सा देखा है कि कोई कभी-कभी यहां पर आता है ना तो मैं क्या करता हूं मैंने यह किया मैंने वह किया ऐसा पूरा ऐसा सुनाना शुरू कर देगा कि उसके बाद में थोड़ी देर सुनने के बाद में हमको लगेगा अरे भैया ठीक है चलो बहुत हो गया और फिर दूसरे कुछ आते हैं वो पूछते ठाकुर के बारे में या तो ऐसी कोई बात करते हैं कि हमको इमीडिएट इसके बारे में बात करने की इच्छा हो जाती है तो मैंने ये एक सीक्रेट है मैंने एक दो लोग आश्रम में जाते थे तो मैं उनका नेचर पता था तो मैं उनको किसी आश्रम श्रम में दूसरे किसी सेंटर में भेजने से पहले पहले ही बता दिया देखो कि महाराज किसी को जाकर के प्रणाम करो ना तो ठाकुर के बारे में कोई प्रश्न करना सोच कर के जाना वैसे अपने बारे में बोलना मत शुरू कर देना कि मैंने यह किया मैं उनको पहचानता हूं मैं वहां पर गया था वो किसी को आपका बायोग्राफी सुनने में इंटरेस्ट नहीं है हां पहले एक बार रिलेशन बनाओ तो दूसरा चीज हो जाता है हम लोग तो एक दूसरे के अफेक्शन और केयर जैसे आपने कहा हम पूछेंगे ही पूछेंगे अच्छा क्या है आपके बारे में किंतु जाकर के सीधा अपने बारे में बोलना शुरू कर दोगे तो सामने वाला थोड़ा सा यह हो जाएगा तो आपका जो नेचर है मैंने देखा है कि ये जो मक्ष तोव है आप में ये क्यूरियोसिटी है प्र ये जो यहां पे वो सचिन भाई आए थे एक बार वो अपने ग्रुप में है ना वो सचिन भाई हा सचिन ठक्कर तो अभी मैं तो क्या है कि सोशल मीडिया में तो पहचान तो ऐसे बहुत सारे लोगों से होती है मैं पर्सनली उनको कुछ नहीं पहचानता तो मुझे बोले मैं राजकोट आ रहा हूं और आपसे मिलूंगा तो मैंने कहा ठीक है आओ मिलो आ कर के मिले थोड़ी देर बात कि अभी मैं क्या बोलूं मैं तो उनको कुछ भी पहचानता हूं मैं बड़ा ही इंट्रोवर्ट हूं मैं इजली किसी के साथ बात नहीं कर सकता तो उन्होंने क्या किया पता है वैसे तो थ थोड़ी देर तक वो भी चुपचाप बैठे रहे उसके बाद में उन्होंने सडन पूछा कि अच्छा ये एक प्रॉब्लम है तो इसका क्या सोल्यूशन है तो मैंने इमीडिएट बोलना शुरू कर दिया भाई गुरु भाव तो अभी हो जाता है ना साधुओं में एक लेवल के किंतु एक बार इस तरह से जो आइस ब्रेकिंग हो गया ना फिर हमने पूरा एक दो घंटे तक बैठ कर के गप लगाए तो ये है कि ऐसा सभी लोग सभी के साथ में इजली बात नहीं करते आपको आइस ब्रेकिंग का तरीका आना चाहिए जो पहली वाली जो आपने बात कही ना उसको आजकल कहते हैं रिवर्स इंजीनियरिंग कि पहले तो यह सोचो कि सोशल मीडिया पर किस तरह से मैक्सिमाइज होता है कोई भी एक्ट उसके बाद में वहां से रिवर्स इंजीनियर करना शुरू करो कि वहां से लेकर के हमको फिर एक्चुअली क्या करना है तो जैसे आपने कहा कि इसके ऊपर में रख दिया तो कितना लाइक हुआ वहां तो कितना लाइक हो सकता है वहां से सोच कर के चालू करो कि अभी हमको क्या करना है तो आजकल बहुत सारे लोग ऐसा ही सोचते हैं और यह जो आपने कहा कि यदि इवन हम ऑर्डर में रह कर के भी कार्य करते हैं तो उद्देश्य है सेल्फ ट्रांसफॉर्मेशन यस ऑफ कोर्स किंतु ऑर्डर का उद्देश्य है सोसाइटल ट्रांसफॉर्मेशन दिस इज द थिंग अदर वाइज ऑर्डर में रहने का कोई अर्थ नहीं है मैंने ऑर्डर में रह कर के इंडिविजुअल का एम है कि मुझे ईश्वर प्राप्ति करनी है किंतु ऑर्डर इट सेल्फ जद ईश्वर प्राप्ति के लिए बना होता तो इसमें और गुरुकुल में कोई फर्क नहीं रहता गुरुकुल जिस तरह की सिस्टम थी उसमें वही है कि विद्यार्थी लोग आते हैं गुरु की सेवा करते हैं समित पाणी ही वो मने वो हाथ में वो जो अग्नि प्रज्वलित करने के लिए होम के लिए लकड़ी है वो लेकर के जाते हैं गुरु गुरुकुल में सब सेवा करें अभी गुरुकुल में हम जो सेवा करते हैं व रामकृष्ण मिशन में सेवा करते हैं व फंडामेंटली डिफरेंट है हम लोग उस उस लोगों को करते हैं जिन लोगों की सही में आवश्यकता है तो दिस इज द डिफरेंस कि इंडिविजुअल लेवल पर मुझे मुक्ति चाहिए किंतु ऑर्डर इज वर्किंग फॉर द बेनिफिट ऑफ द सोसाइटी वरना गुल और ऑर्डर में डिफरेंस नहीं रहेगा बेस्ट एग्जांपल है अपना बॉडी बॉडी के जितने भी सेल्स है इंडिविजुअली सेल्स और ऑर्गन को देखोगे देखेंगे तो हमको यही लगेगा कि अभी जैसे हार्ट है या तो लिवर है या तो फिर यह ब्रेन है सबका खुद का जदी यही होगा कि अपना स्वास्थ स् बना रखें और अपना एक मैक्सिमाइजेशन हो मने जिस तरह से वे लोग अभी एक सेल है अपने शरीर में तो सेल का क्या उद्देश्य है सेल का उद्देश्य वही है कि वह सुख रूप से एक जीवन बिता सके वो इनपुट लेगा प्रोसेस करेगा आउटपुट करेगा उसका तो वहीं तक उसका एम है किंतु यह सभी सेल्स एंड ऑर्गन मिलाकर केय जो बॉडी तैयार होता है अभी बॉडी का एक डिफरेंट ही एक आउटलुक है डिफरेंट ही लेवल पे है मैं सोचता हूं कि मुझे डॉक्टर बनना है मैं सोचता हूं मुझे इंजीनियर बनना है अभी सेल इंडिविजुअल सेल्स और यह मेरा डॉक्टर होने का एम कंपलीटली डिफरेंट लेवल तो इसी तरह से है कि मैं यहां पर इवन पब्लिकेशन में जो छोटा सा काम कर रहा हूं और ओवरऑल वर्ल्ड लेवल पर ऑर्डर किस तरह से मैंने वो यह हो रहा है कंपलीटली डिफरेंट लेवल पता भी नहीं है मैं अपना कार्य कर रहा हूं वह एक हो गया ऑर्डर अपने वर्ल्ड लेवल पर कर रहा कंपलीट कोई एक सेल कभी यह नहीं सोचेगा कि मुझे डॉक्टर होना है य सेल या तो फिर हार्ट या तो लिवर कभी ऐसा नहीं सोचेंगे कि हां मुझे एक एंबिशन रखनी है अपनी लाइफ में मुझे किताब लिखनी है मुझे फिलोसोफर होना है मुझे जप ध्यान करना है मुझे ईश्वर प्राप्ति करनी है हार्ट लिवर ऐसा कभी नहीं सोचेंगे किंतु उन्हीं की वजह से ये जो बॉडी बनता है वो यह सब कर लेता है