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Ma Sarada Life ·

Ma Sarada devi 13 June 2023 मातृसान्निध्ये : स्वामी ईशानानन्द लिखित

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बुक निशानानंद जी महाराज केदार बाबू बोलकर के टीचर थे उनके जो लड़के थे विद्यार्थी उन लोगों ने सब ने मिलकर के आश्रम की शुरुआत की पहले तो शरद महाराज को बुलाया फिर मां को आमंत्रण दिया और फिर देखा हमने किस तरह से मैन वो आश्रम में अपने चरण राज की अपने चरणों की राज ने चरणों की धूल रख के किस तरह से उनके आश्रम को पवित्र किया और जहां पे वो इन लोगों के केदार बाबू का जो घर था उसके पास में एक जगह थी वहां पे तो यहां तक हमने पढ़ा अभी उसके बाद में हमने पढ़ा की किस तरह से मां जो है और रात को ही उन्होंने प्रस्थान कर दिया तेरी रात हो गई थी इन लोगों को कलकत्ता जाना था शरद महाराज को साथ में थी ये गोलाप माटी और और भी एक दो साधु ब्रह्मचारी थे सब को कोलकाता जाना था रात को डेरी हो गया करता है तो क्या करेंगे तो जाकर के उन्होंने जल्दी से उसे रात को निकाल लिए अभी देखते हैं की इसके बाद क्या होता है मां के चले जान के बाद गांव वाले तो आपस में वो मां का प्रसाद ग्रहण करके वो बड़ी डर रात तक आदि रात तक मां के बड़े में चर्चा विचारण की थी मां के वो जो आशीर्वाद किस तरह ने उनको प्राप्त हुए इसके बड़े में डिस्कशन किया था और फिर आदि रात को होने के बाद में घर गए थे उसके बाद में क्या हुआ और दिन शौचालय खबर एक शिवा मंदिर नाथ मंदिर है शक्ल के दाढ़ी हुई ते ना मैया शोकोलाया आहार आदि व्यवस्था को क्या हुआ था एक्चुअली गांव वालों को तो क्या पता था की मां जो है वो संध्या के समय आएगी और संध्या के समय रहकर के कुछ समय रहकर चली जाएगी तो मां के रात्रि के आहार की व्यवस्था उन्होंने नहीं की थी अभी एक्चुअली हुआ क्या था की मां की गाड़ी का जो पहिया जो है वहां पर वह दलदल में फैंस गया था तो उनको आते-आते रात हो गई अभी रात हो गई है गांव वालों मां के आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए इतने अधीर हो गए हैं मां के साथ में बात करते करते इस तरह से तन्मय हो गए हैं की इन मूर्ख को पता ही नहीं चला की रात हो गई है और मां का तो आहार नहीं हुआ है जी महाराज का आहार नहीं हुआ है और यहां तो सब मां के आशीर्वाद लेने में ही मस्त है तो अभी ये लोग सामने से तो कहेंगे नहीं ना शरद महाराज या मां की अभी आप लोग हमारे लिए खाना बनाया उन लोगों को कष्ट होगा यानी उनको तो पता नहीं है की लोगों को कष्ट हो रहा है बोलकर के उन्होंने खाना नहीं बनाना चाहते ना की बात में इतने बटन बटन में इतने हो गए हैं की खाना नहीं बन्ना चाहता है किसको पता तो इस तरह से वो खाना बना नहीं और रात को वो जो नई कल के लड्डू जो है नारियल के जो लड्डू और वह जो संदेश बस इतना सा मां को मिला दिया और मां के साथ में बातें बनाए ही जा रहे हैं तो इसीलिए शर्ट महाराज ने ज्ञानानंद जी महाराज को भेजो था मां को ये खाने के लिए किया रे चल मां को तो नहीं भक्तों को खाने के लिए किया चलो बहुत डेरी हो जा रहा है हम लोग यहां से चलते हैं तो वे लोग रात को जल्दी जल्दी निकाल गए गांव वाले सोचते हैं की उनको कोलकाता जाना है तो उनको डेरी हो जा रही है बोलकर के चले गए हैं किसी मूर्ख को यह नहीं समझ में आया की इनके रात्रि का आहार तो हुआ ही नहीं अभी शरद महाराज ने वहां से निकाल कर के क्या किया कोतुलपुर के पास में एक शिवा मंदिर था वहां पे वो बैलगाड़ी कमाई और वहां पर किसी को जो मेरा अर्थात ये जो दुकान में खाना बनाने वाले होते हैं उन लोगों को मैं से किसी को बुलाया सबके लिए आहार की व्यवस्था की और ये रात को हुआ था ये सब कुछ गांव में किसी को यह समझ नहीं आया की इनको आने में डेरी हो जा रही है तो चलो सबके आहार की व्यवस्था करते हैं गांव में कोई एन किसी ने सोचा भी नहीं और शरद महाराज ने या तो मैन सामने से कहा भी नहीं श्री श्री मां आशीर्वाद आएगी कितना समय रुकेगी यह किसी को नहीं पता था बोल करके गांव में किसी ने रात के आहार की व्यवस्था नहीं की थी तो चलो मैं रात्रि के हर की व्यवस्था नहीं की पता नहीं है की मां कब आएगी की तुझे ए गई है रात को डेरी हो गई है आते-आते तो आने के समय तो कहना चाहिए मां आपको आने से इतना डेरी हो गया अभी रात को तो इतना डेरी अभी आप और कहां जाएंगे भजन करने के लिए थोड़ा सा रुक जाइए हम लोग आपके आहार की व्यवस्था कर देते हैं ऐसा खाने की बुद्धि किसी में नहीं आई सूत्रण विष्णु पर होइत विष्णु पुराण शीलो केदार बाबू और अमर पीतम तो लज्जित तो ही है मनुष्यता कोरिया बोलते लागेले ताकि कोरबो बेला चरताई ताडर अशआर कोठा श्री जूनो शमर सानो बिष्ट व्यवस्था करेली अमर निश्चित तो छीना एवं समय महत्व पहुंच छीना देखें दोपहर को 4:00 आने की इनकी बात थी तो हम लोग तो एकदम चटक नजर से बड़े ही व्याकुल हृदय से इनकी र देख रही थी देख रहे थे और आते-आते डेरी हो जा रहा है बोलकर के हम लोग सब चींटी क्यों दे रही हो जा रहा है उसके बाद में समाचार आया की मां की गाड़ी का पहिया बैलगाड़ी का पहिया फैंस गया है तो फिर वह तो सब लड़के लोग तो वहां पर चले गए बैलगाड़ी को उसमें से वो पहिए को उसमें से निकालना के लिए और फिर जब वापस आए तो मक्के और आशीर्वाद ग्रहण करने में ही सभी लोग व्यस्त थे किसी को ये याद ही नहीं रहा की चलो मां को पूछे की मां को आते-आते इतना 4:00 बजे आने के बाद फिर दोपहर को इसलिए हमने आपके लिए सिर्फ संदेश और नारियल के लड्डू बनाए हैं किंतु आते-आते तो अभी आपको इतना डर हो गया है जब तो संदेश और नारियल के लड्डू से चलेगा नहीं अब थोड़ा सा अपेक्षा कीजिए हम आपके लिए आहार की व्यवस्था कर देते हैं ऐसा खाने की किसी में वो जो है वो आम वो जो उपस्थित बुद्धि जा के बोले तो वो किसी में वो आई नहीं ये बात और ये सब अरेंज करने वालों में मुख्य कौन थे तो वर्धा महाराज के पिताजी और केदार बाबू शिक्षक दोनों ही बड़े ही लज्जित हो गए और सोचा की देखो की मां की सेवा हम लोग सोच रहे हैं की हम लोग मां के बड़े भक्ति हैं हम लोग सोच रहे हैं की हम लोग मां के बड़े सेवक है देखो हमने मां को यहां पर लाकर के मां को अपने घर में बिठाकर के किस तरह से कितना भक्ति भाव से प्रणाम किया किस तरह प्रणाम किया किसने भक्ति भाव से उनके आशीर्वाद ग्रहण किया किंतु यह सब करते करते मां के आहार की जो व्यवस्था करनी है वो महत्वपूर्ण ही गए तो ये दोनों ही बड़े ही लज्जित हो गए ग्वालपाड़ा हुईटे जयवर्धन मां बेटी है वहां पर लोग मां को प्रणाम कर रहे हैं बड़े भक्ति भाव से डेरी हो जा रही है तो ज्ञानानंद जी महाराज ने ज्ञान आनंद जी महाराज को भेजो बोला की जो मां के लिए मां को लेकर आओ तो ज्ञानानंद जी महाराज के देखते हैं सब लोग भक्ति लोग मां को घर के खड़े हैं प्रणाम कर रहे हैं बात कर रहे हैं तो किसी में यह अकल नहीं है की मां को पूछने की मां भजन किया है की नहीं तो वो नाराज हो गए महाराज और बोला की वो आगे आगे पिछली बार हमने देखा था बड़ों डेरी हुए अच्छे ऐसा करके नाराजगी के सहित कहा था की बहुत डेरी हो जा रही है चलिए अभी चलते हैं तो मां के ऊपर में वो नाराजगी नहीं थी वो नाराजगी थी गांव वालों के ऊपर में तो मैन इम्मीडिएटली क्या किया एकदम व्यस्त हो करके जो संदेश वगैरा था उसका एक अंश ग्रहण करके बाकी का प्रसाद कर दिया बाकी लोग सब प्रसाद का करके मजे में बैठे हैं और किंतु कोई किसी को यही याद नहीं है की हमने प्रसाद ग्रहण किया तो मां का क्या होगा सब लोग समझ गए की वह क्यों शरद महाराज जान के लिए डेरी कर रहे थे जो ज्ञानानंद जी महाराज नाराज हो गए थे पूरे पूजनीय गोला मां प्रयाई आमदर निकोट्रोशे कोरिया बोलियां तो मोम डर रात्रि जाते थे या तो फिर कोलकाता जाते थे यह बोल पड़ा वाले तो गुलाब मां को बोलने का बहन मिल गया गोलापी मां का नेचर जिन्होंने वो मां की कहानी पड़ी मां की वो जो जीवनी पड़ी है सबको पता होगा बहुत ही उपग्रह नेचर था उपग्रह स्वभाव था और स्पष्ट वक्त थी किसी कोई भी वो मुंह पे ऐसा कुछ का दे की जिससे की उसको बड़ा ग जाए ये सब चिंतक गुलाब मां नहीं करती थी ऐसा एक उदाहरण है जब मां आखिरी समय से ऐसी अवस्था हमने देखा है की जय राम बाटी में कल ज्वार बार-बार हो जाता था और कितनी ही मैन शरीर का पूरा वेट मैंने वेटलेस हो गई थी वहां पूरा हड्डी पास दिखे रही थी ऐसी आवत शरीर का जो वर्ण है पूरा कल हो गया था मां के आखिरी आखिरी चित्र देखिए तब पता चलेगा इतनी मां को बीमारी से इतनी कष्ट का रही थी आखिरी बार जब मां जयरामबाती से कोलकाता आई थी उसे समय तो उसे समय मंमुट्टू चाहिए पर पड़ी है मां को किसी भी तरह का कष्ट एन हो किसी भी तरह का बड़ा समाचार ना मिले ये बात को लेकर के सभी लोग कितने व्यस्त रहते थे कितना सावधान रहते थे उसे समय काशी में लाटू महाराज का देहांत हो गया अभी जैसे देहांत हुआ शरद महाराज ने सबको बोल दिया की मां को बताना नहीं है की लातूर महाराज का डे गया है क्योंकि मां तो वैसे ही बीमा है वैसे ही मां का खुद का डे कितना दिन तक रहेगा ठीक नहीं है उसमें से यदि मां के प्रिया संतान लातों महाराज की शरीर त्याग का महासमाधि का समाचार जल्दी उनको मिलेगा तो मां के हृदय पर क्या अवस्था होगी मां के हृदय पर क्या गुजरेगी तो शरद महाराज हम सबको बोल दिया की कोई ना कहें की लाटू महाराज की महाशय मालतू महाराज महासमाधि को प्राप्त हो गए हैं अभी यहां पर मां जो है मां बार-बार का रही है की मां को पता है की काशी में लट्टू महाराज जो है अद्भुत आनंद जी महाराज बीमा है तो अपने सेवकों को का रही है की अरे पत्र लिखो चिट्ठी लिखो पूछो उनको खबर पूछो मैं चाहती हूं की उनकी खबर पूछना वो आप तुम उनको पूछो की मुझे पत्र लिखकर के कुछ बताएं की क्या स्थिति है तो मां के सेवक जो है वो वैसे तो मां का कम करने के लिए हनुमान की तरफ सब समय सदा तट पर रहते हैं मां जो रहेगी सब कर लेंगे किंतु आज ऐसी स्थिति ए गई है की मां कहती है की लड़कों को पत्र लिखो कोई पत्र लिखने को तैयार नहीं कोई ना कोई बहन बना रहा है कोई कहता है मां अभी नहीं मुझे अभी मैं कम है मुझे शरत महाराज ने कम दिया है बाद में करूंगा कोई दूसरा बहन बना रहा है कोई तीसरा बहन बना रहा है मां को समझ में नहीं ए रहा है की क्यों उनकी बात कोई नहीं मानता है है तो वहां बेचारी बड़े ही नाराज हो गई और बोलने लगी परेशान हो गई दुखित हो गए उसे समय जब मां बार-बार बोल रही है क्या रे लेटो को पत्र क्यों नहीं लिखने लाटू का समाचार मुझे क्यों नहीं बताते उसे समय गुलाब मां का नेचर ऐसा है ना शोभा की स्पष्टवक्ता जो भी है एकदम फटकार के बोल देंगे तो उन्हें जोर से बोल दिया एकदम उच्च स्वर से अरे लाटू का तो लेटो तो मा गए अभी इतने दिन हो गए मां को अभी नहीं बताने से क्या लाभ है बता दो मां को ऐसा करके जोर से बोलो की तुम मां को ऐसे आघात लगेगा की इस तरह से जब पता चले हमको यदि अपने प्रिया पत्र की मृत्यु की संवाद जब हमको देता है कोई तो बड़े ही हल्के स्वर से बड़े ही समझा बुझा कर के बड़े ही प्रेम से बोलते हैं अच्छा भाई बड़ा दुख मत करना यह तो संसार का नियम ही है की ऐसा होता है ऐसा पूर्व भूमिका बंद करके फिर आखिर में कहता है की आपके यह जो प्रियजन है उसका देहांत हुआ है ऐसा वह हम लोग सभी लोग ऐसा करने का पर्यटन करते हैं और यहां पे योगेन मां है जोर से चिल्लाओ ठीक है लेटो तो मा गया इतने दिन हो गए अभी मां को नहीं बताने से क्या लाभ है बता दो आपको मानो जब सुना तो बेचारी एकदम इतना आखेट लगा की उनको और बुखार तो था ही और बुखार बाढ़ गया और कितने दोनों तक वो बुखार से उनको भूखाड़ना पड़ा तो ये योगेंद्र मां का ऐसा स्वभाव था फैट करके किसी को कुछ भी बोल देती थी वो इसीलिए जब यह ऐसी घटना हुई की कल पड़ा बुलाया आदि रात उन्होंने डर रात तक उनको नारियल के लड्डू और संदेश मिला करके बिठा के रखा कोई खाने का नाम नहीं दे रहा है इसलिए जब कल पड़ा वाले का मुलाकात योगेन मां के साथ में होता था सॉरी बोला मां के साथ में तो गोला अपना सब समय बोलती थी की तुम लोगों का सी है आदि रात को हमको संदेश और नारियल के लड्डू मिला है किसी के मां में यह बात नहीं आई की हमको आहार के बड़े में भजन के बड़े में पूछे ऑफर्स ये सब लीला है ऐसा नहीं है की गुलाबमा जो मां की सेवा करते-करते उनका स्वभाव जो है वो खराब हो गया था या तो फिर अग्रसर एग्रेसी हो गया था ये सब क्या है की ईश्वर की ये सब लीला है तो ठाकुर बोला तो उनके जटिल कुटिल था केले लीला पोस्ट टाइप हुए अर्थात की ऐसे कोई वो हंसी मजाक करने वाला नक्की कोई गुस्सा करने वाला इस तरह के अलग-अलग पत्र जब रहते हैं तब वो जो है कहानी पढ़ने में और भी हमको आनंद आता है वरना क्या है सीधे-सीधे कहानी पढ़ लेंगे सभी लोगों ने आकर के मिलकर के अच्छे से बात किया अच्छे से खाना क्या और फिर सब विदाई लिया तो ऐसी कहानी पढ़ने में हमको कहां आनंद आएगा किसी ने झगड़ा किया है किसी ने गुस्सा किया है किसी ने कोई मजाक की है किसी ने किसी कॉमेडी कर दी है कोई ईश्वर की बातें करता है ऐसा विभिन्न पत्र रहने से कहानी पढ़ने में मजा आई है तो इसीलिए बुद्धि तो रात रे संदेश तुम लोगों की ऐसी ही बुद्धि है आदि रात को हमको संदेश और नारियल के लड्डू खिलाएं अच्छा अभी यह पूरा प्रसंग समाप्त हुआ की जैसे पूरा प्रश्न था की अपने शरद महाराज जो है वो कोर्ट में जयरामबाती आए थे जयरामबाती आकर के मां के भाइयों का जो झगड़ा था जमीन के बड़े में वो संपत्ति के बड़े में भी संपत्ति तो क्या है अभी छोड़ दे थोड़ा सा तो जमीन है वो थोड़ी दो-तीन तो चीज हैं तो उसमें भी किंतु झगड़ा चल रहा था तो वो बंटवारा कर दिया और फिर मां को लेकर के कोलकाता वापस जान वाले थे इतने समय में शरद महाराज सबको प्रवचन दिया आध्यात्मिक उपदेश दिया फिर वो जो रामबाती वापस चले गए फिर कल पड़ा है मां को लेकर के गोलपारा को लेकर के योगिन को लेकर के कोलकाता जान के रास्ते में रात को ये सब कुछ हुआ फिर कोलकाता वो चले गए तो ये पूरा प्रसंग समाप्त हुआ अभी कोलकाता से जो है मां जय रामबाती वापस आई है ये दूसरे प्रसंग के बड़े में वर्धा महाराज क्या लिखने हैं श्री मां कोलकाता हुई ते जयरामबटेड पोते गौर गाड़ी ते रातों प्रभृति के लाइयां कव्वाल पड़ा पहुंचे इस साल को जी साल यह लोग कोलकाता गए थे जयरामबाती से इस साल को कोलकाता से जय राम बाटी वापस भी ए रहा है तो इस समय क्या हुआ वही बैलगाड़ी है वही मां है वही वो राहु वगैरा है बैलगाड़ी में बैठकर के वो यात्रा करते-करते पहुंच गए उन्होंने शुभागमन किया श्री श्री मेयर मजो भाई पूजनीय काली मां जोयरामती हुई ते एटा पुर्बे पूर्व खूब शक्ल ही पालकी लोहिया उपस्थितों को ही अच्छी लेने मां के जो भाई थे काली मामा वो ऑलरेडी वो चेहरा बाटी से पालकी लेकर के पड़ा पहुंच गए थे मां को पालकी में बिठाएंगे और बिना कोई भी आ मां को सरलता हो मां को सुविधा हो यात्रा करने के लिए इस तरह से जो व्यवस्था करनी है करेंगे ऐसा करके काली मां का कल पड़ा ए गए थे पहले ही ए गए थे अच्छा मां आई थी समय थी ये ये समय था जगतद्री पूजा का समय था और देखिए की जितनी भी बार जगतद्री की पूजा आएगी मां जो है कोलकाता से जयरामबाती अवश्य आएंगे क्योंकि जगतद्री पूजा जय राम वाटिका जय राम बाटी में जो जगतद्री पूजा का जो महत्व है जो जगतद्री पूजा का जो इंपॉर्टेंट है जो लोग गए हैं सब देखा होगा जयरामबाती में जाकर के जगतद्री पूजा का दर्शन करना यह इस शुभ मतलब चेस ये जो गुड फॉर्चून मैन वो जिसको मिला है वही समझते हैं की ये कितना सुंदर कितना देवी कितना पवित्र यह अनुष्ठान होता है मुझे खुद मुझको खुद को ये चेस नहीं मिला जयरामबाती में जगतद्री पूजा देखने का क्योंकि जितने भी बार बेलूर मठ में जगतद्री पूजा होती है तो वहां शारदा पीठ में होती है तो हम लोग सब वहीं पर रहते थे तो मेरा अभी इच्छा है की कभी जाएंगे जय रामबाते जगतद्री पूजा वहां की देखेंगे जैसे वो बाकी सब जगह पे एक दिन की होती है जगत दादरी पूजा जय राम बाटी में तीन दिन की होती है ये पुरी व्यवस्था जो है वो मां की मां श्याम सुंदरी देवी उन्होंने ये सब व्यवस्था करके गई थी बाद में फिर मैन ही शुरू किया था मैन ही शुरू रखा था वो मां का वह जो दर्शन है ना पहले पहले बार तो जो है की जगतद्री पूजा किस तरह से हुई थी शाम जो गांव में होने वाली थी और कुछ वह जो लीडर्स जो थे गांव के वह जो कुछ अग्रणी लोग जो थे वो सबसे वो चंदा इकट्ठा कर रहे थे पूजा के लिए तो श्याम सुंदरी देवी ने जो कर धन वगैरा जो रखा था पूजा के लिए तो उन्होंने लिया नहीं ये का कर के की उनकी कुछ गलती हुई है अभी वो मां की मां की गलती तो क्या होने वाली है वे लोग बड़े घमंडी थे और अपना वो जो प्रभुत्व जो है स्थापित करना चाहते थे तो उन्होंने गुस्सा करके मां की मां का वो जो श्याम सुंदरी देवी का वो धन जो है पूजा का ग्रहण नहीं किया ये देख करके वो श्याम सुंदरी देवी बड़ी ही व्यतीत हो गई और बार-बार सोच रही है की ये जो पूजा का जो धन है जिसको की अलग से रखा है अभी इसको कौन ग्रहण करेगा देवता के लिए जो चीज राखी गई है मनुष्य का कभी उसको ग्रहण कर सकता है तो बड़ी व्यक्तित्व हृदय से सोनी को गई उसने वो जगतद्री देवी ने आकर के श्याम सुंदरी देवी को सपना में दर्शन दिया की तुम मेरी पूजा करो और फिर पूजा करने के लिए जो है की अच्छा वो जो मी श्याम सुंदरी देवी ने जो धन इकट्ठा किया था जगाधरी पूजा के लिए नहीं दुर्गा पूजा के लिए दुर्गा पूजा के लिए वो धन और सबसे चंदा कलेक्ट कर रहे थे उसमें से ये श्याम सुंदरी देवी ने अपना वो हिस्सा इकट्ठा किया था तो दुर्गा पूजा के लिए नहीं वो हुआ तो फिर इसका क्या करेंगे तब वो रात को सो गई है तब एक देवी ने आकर के सिंह पर चढ़ी हुई सिंगापुर पर बैठी हुई एक देवी ने आकर के सपना में कहा की तुम मेरी पूजा करो तो फिर श्याम सुंदरी देवी दूसरे दिन सुबह को मां शारदा देवी को पूछता है अपनी लड़की अपनी बच्ची साधना देवी तो उसको पूछते हैं की हां शारदा ठाकुर शेक के मैन एक पर के ऊपर में दूसरे पर चड्ढा करके जो देवी बेटी है वो कौन है वो मैन कहा की वह तो है जगतद्री तो श्याम सुंदरी देवी कहती है की मैं जगतद्री की पूजा करूंगी क्योंकि मुझे सपना में उन्होंने दर्शन दिया है तो श्याम सुंदरी देवी ने वो पूजा एक बार तो की दूसरी बार जब पूजा करने की बड़ी आई तो मां कहती शारदा देवी कहती है की अरे ये सब जमीला क्या बार-बार होगा उसे बार तो चलो दुर्गा पूजा का धन जो था वो उन्होंने लिया नहीं तो उसका तो कुछ करना था फिर मैन भी दर्शन दिया था बोल करके एक बार किया हर साल कैसे करेंगे वो तो जयरामबाती छोटी सी जगह है वहां पे तो नहीं वो कोई आपके भक्ति आते हैं ना ही कोई साधु रहते हैं ना ही पैसों की कोई व्यवस्था है गरीब कुटुम है गरीब ब्राह्मण कुटुम वे लोग बार-बार इतना बड़ा अनुष्ठान कैसे करेंगे बोलकर के मैन का दिया की हर बार करने की जरूर नहीं है तो मां शारदा देवी को स्वयं रात को सपना आया जगतद्री देवी प्रकट होकर के कहती है की टहल्यामी की जागो तो फिर क्या मैं यहां से जाऊं यह सुनकर के ही मां शारदा देवी एकदम व्यस्त हो जाति है बोलती है की अरे अरे आप क्यों यहां से जाएंगे हम हर बार आपकी पूजा करेंगे उसे दिन से लेकर के मैन मां शारदा देवी ने वहां पर वो जो प्रतिवर्ष प्रति वर्ष वहां पर जगह धात्री की पूजा करने का वो जो प्रथम जो आरंभ किया है वो अभी तक चल रहा है तो हर बार जगतदारी के समय मां कहां पर भी होगी उसे समय मां को जय रामबाती आना ही आना है तो इस बार जय राम पड़ा उन्होंने विश्राम करने के लिए रुकने का वो नक्की किया था जैसे माहिर विश्राम घर ऐसा करके हो गया था कोलकाता जाएगी कोलकाता से मजे रामबाती आएगी दोनों समय कल पड़ा तो विश्राम करना ही है श्री श्री मां स्नानांनते श्री ठाकुर पूजा कोरिलैंड एवं किछु जोल-झोक कोरिया पालकी ते जयरामबाती रावण हिला के लन मैन जो है स्नान किया स्नान के बाद में ठाकुर की पूजा की उसके बाद में थोड़ा सा आहार थोड़ा सा नाश्ता किया और उसके बाद में ही जयरामबाती वो रावण हो गई ग्वालपाड़ा महादेव स्कूल बड़ी तहर विश्रामेर व्यवस्था कोई अच्छी लाल पड़ा में जहां पे लड़कों की स्कूल थी उसे स्कूल में उनके विश्राम की व्यवस्था हुई थी शेख ने को एक खानी दांत और ठाकुर घर छीलो दांत अर्थात की वो चरखा जो कहते हैं ना गांधी जी जो चरखा बंटी थे तो वैसे कुछ दांत थे चरखा थे और फिर वहीं पर जो है ठाकुर घर पर था वही स्कूल के भीतर में बढ़ो रास्ता हुई थे ठाकुर घर पर जान तो सामान्य पोट नाइज डर टेंट बोना कापड पता उटाहार ऊपर पड़ा फूल छड़ानो ही अच्छे लो मैन यह लड़के जो स्वदेशी के लिए जो चरखा जो ये करते थे चढ़े के ऊपर में कादर का कपड़ा बनाते थे तो वो जो में रास्ते से वो जो ठाकुर घर तक जान का जो रास्ता है देखिए लोगों की भक्ति देखिए उन्होंने अपने हाथों से चढ़े से जो कपड़ा खड्डर का जो खड़ी का जो कपड़ा है वो बनाया है वो कपड़ा उन्होंने वो बढ़ा दिया जमीन के ऊपर में और उसे कपड़े के ऊपर में पदमा फूल जो है वो उन्होंने बढ़ा दिए वो उन्हें स्प्रेड कर दी है देखिए मां का किस तरह से स्वागत करते हैं मां आई है अभी देखिए गरीब ऐसा तो नहीं है की लोग राजा की तरह जी तरह से राजा लोग स्वामी विवेकानंद की अभ्यर्थना करते थे स्वामी जी जब भारत में घूम रहे थे तब वो खेतड़ी का राजा है जयपुर का राजा है लिमडी का राजा है यह सब राजा लोग स्वामी जी की कितने धन वैभव से अभ्यर्थना करते थे मां का तो बचती का ऐसा नहीं है ये कुछ गांव वाले हैं अपने हाथों से खड्डर का कपड़ा वो बना है खड़ी का कपड़ा वही बिछाया है और पास में ही जो वे तालाब है उसमें सही है पद्मफुल तू है चुने हैं और वही पदमा फूलों को बढ़ा दिया है और इस तरह से मां को रास्ते से अपूर्व की और ले जा रहा है किंतु धन वैभव नहीं रहने पर भी जो अपने हृदय की आंतरिकता से ये लोग जो मां का स्वागत करते हैं मां की आराधना भक्ति श्रद्धा करते हैं वो यदि हम लोग वहां उपस्थित होते तो हमको पता चला की किसको सही-सही श्रद्धा भक्ति कहते हैं वो जो ठाकुर एक कहानी कहते हैं ना की भगवान कृष्णा और नारद की बात हो रही थी भगवान कृष्णा का सबसे बड़ा भक्ति कौन तो नारद कहते हैं की रुक्मणी है वगैरा करती है वही तो आपके सर्वश्रेष्ठ भक्ति होंगे तो भगवान कृष्णा ने उनके लिए टेस्ट किया की ये टेस्ट करते हैं की कौन सबसे बड़ा भक्ति है परीक्षा करते हैं वो नारद को बोला की जो तुम जाकर के मेरे जितने भी भक्ति हैं जाकर के बोलो की मैं बड़ा ही बीमा हो गया हूं तो आपके चरणों की राज दीजिए चरणों की राज मेरे सर पे चढ़ाने से वो जो है की बीमारी से मुक्त हो जाऊंगा तो अभी जो अपने चरणों की रैक देगा वो कहा जाएगा की वो श्रेष्ठ भक्ति है भगवान के सर पे अपने चरणों की रथ चड्ढा ना ये तो कितना बड़ा पाप है पाप ग्रहण करके भी भगवान सुखी हो जाए भगवान की बीमारी मिट्टी जाए वो जो करेगा वो असली भगत है तो भगवान ये जो नारद मनी है गए वो जहां पे ये रुक्मिणी वगैरा रानियां बैठी थी बोला की भगवान कृष्णा बीमा हो गए हैं तो आपके चरणों की राज दीजिए वो ग्रहण करने से वो जो है बीमारी से मुक्त हो जाएंगे तो ये रानियां बेचारी बड़ी परेशान हो गई की अरे मां-बाप में पढ़ेंगे यदि हम अपने चरणों सूरज भगवान कृष्णा को देंगे हम ऐसे पाप क्यों करने को जाएंगे वो तो कृष्णा है वो तो लीला करते हैं लीला करते-करते बीमा हो गए हैं लीला करते-करते वो स्वस्थ भी हो जाएंगे उसे हमारे चरणों की रति उनको जरूर नहीं है तो नारद मनी समझ गए फिर वो गए वृंदावन में वृंदावन में जाके गोपियों को कहा की आपके चरणों की रख दीजिए कृत भगवान कृष्णा के लिए जिससे की वो बीमारी से वो निकाल जाए तो गोपिया इनीशिएटली अपने पैरों के चरण राज लेकर के नारद को देने लगी ये सोचा भी नहीं की भगवान को अपने चरणों की रस देंगे तो हम कितने बड़े मा पाप में पढ़ेंगे हम पाप में पढ़ेंगे किंतु भगवान ठीक हो जाए स्वस्थ हो जाए तो उन्होंने कोई मैन एक क्षण भर के लिए बिना चिंता किया अपने चरणों की राज लेकर के नारद मनी के हाथ में देने लगी खाने लगी की भगवान को जाके दीजिएगा उनकी सेवा करने के लिए हम यहां सादात तक पर है तो इसको कहते हैं भक्ति भक्ति ये नहीं है की आपके पास में कितना धन वैभव है अब भगवान के चरणों में उसको ऑर्पण करते हैं किंतु आपके पास में जो कुछ भी है उसको सही सही श्रद्धा भक्ति से आप अर्पण करते हैं उसको कहते हैं असली भक्ति तो ये कॉलपारा की बात मैंने ये किताब बहुत पहले में जब पीसी में था तब पड़ा था और तब से लेकर के किताब पढ़ने मां के बड़े में बहुत साड़ी किताब है किंतु एक कोयल पड़ा की कितना पढ़ के मुझे दो किताब है ये तो है की मंत्र ऐसी ही एक दूसरी है श्री मां जो है तो ये दोनों किताबें पढ़ के मुझे इतना अच्छा लगता है की देखिए इन लोगों के पास ऐसा नहीं है की कोई बड़े धनी है या कोई स्वच्छ दिन की अवस्था है जो कुछ भी है बड़े प्रेम भक्ति से ये लोग मां को देते हैं मां की सेवा करते हैं तो ये देख करके हमको भी पता चला है की सेवा का स्टैंडर्ड क्या है सेवा का श्रद्धा भक्ति का आदर्श क्या है ये इन लोगों को सरल गांव वीडियो को देखकर के हमको पता चला है ओम शांति शांति