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Sri Ramakrishna & Swami Vivekananda ·

Sri Ramakrishna & Swami Vivekananda English & Hindi 8 April 2023

Swami Vivekananda

असली विथ पीपल डेविल थिंक डेट ही इसे एन गुड मां ही इसे एन गुड परसों बट डीओईएसएन'टी मटर डेट ही इसे क्रिटिसाइज एवरीवन इन हज ऑन मन डेट ही इस फाइंडिंग फोर्ट विथ पीपल यू नो वे तेल रीड इन बुक्स और देवर फ्रॉम अदर पीपल दत आईटी इस नोट गुड तू फाइंड फॉल्ट विथ आदर्श सो व्हाट बिल डू वे बिल नेवर तेल अदर परसों डेट इयर्स दिस इस डी थिंक यू आर डूइंग रंग वे बिल नोट से था आउट राइट वे बिल नोट से था इन्वर्स बट इन अवर मन इन अवर हार्ट वे बिल को ऑन थिंकिंग डेट दिस इस एन इविल परसों ही इसे डूइंग जो एवरीथिंग रंग और व्हाट ही इसे व्हाट ही इसे डूइंग इसे नोट राइट दिस इस हो वे ट्रीटाइज आदर्श इन अवर ऑन मन बट यू नो व्हाट व्हाट फॉर्म्स अवर करैक्टर आईटी इसे नोट जस्ट ओवर शब्द और ओवर एक्शंस बट अलसो ओवर थॉट्स वॅटीवर विथ थिंक इन अवर मन आईटी इस व्हाट वे कम वे रीड इन योगसूत्र नियम सत्य अहिंसा स्थाई परिग्रह ब्रह्मचारी टॉप शोध संतोष स्वाध्याय ईश्वर फ्रॉम सेंट और सम होली पर सन और संप्रेटर और सम स्पीकर व्हेन वे लिसन तू सर्च थिंग्स और व्हेन वे रीड सर्च थिंग्स वे इमेजिंटेड ओके लेट स नोट टॉक अबाउट लाइक दिस तू पीपल लेटेस्ट नोट विकम एंग्री विद पीपल लेट स नोट फाइंड फोल्ड विथ अदर पीपल लेट स नोट डू दिस विद आदर्श लेटेस्ट मी कप एवरीथिंग सर्प्रेस्ड इन मी ऑन मन लेट मी सुप्रेस मैं एंगर लेट मी स्पेंस मी हार्ट रेट टुवर्ड्स आदर्श लेट मी स्पेंस मी एंगर टुवर्ड्स एवरीथिंग डेट जो दिस नेगेटिव इमोशंस आर डर लेट मी सुप्रेस डेम इन मी मन आई बिल नोट शो पीपल डेट व्हाट इस गोइंग ऑन इन मी मन आई बिल आउटसाइड आई बिल बी कम परफेक्टली फ्रेंडली आई बिल से डेट यस यू आर डूइंग वेरी गुड बट इन मी मन आई बिल क्रिएट आई बिल फाइंड आईटी इस सम विथ सी आई ही सच ए फली फूलिश फेलो दिस सच एन फूलिश परसों डेट एन वॅटीवर एवरी टाइम आई प्राइस हम ही बीकमस हैप्पी बट आई नो आईटी मी ऑन मन डेट एक्चुअली आई हते हम और आई एम फाइंडिंग अन्य चेस तू पुल हम डॉ तू हम हम इन एनीवे डेट आई कैन इन मी ऑन मी देवर आर जो दिस जेलर देवर इस एंगर डिस्ट टुवर्ड्स अदर पीपल बट आई एम हैडिंग आईटी फ्रॉम डी वर्ल्ड आई एम साप प्रेसिंग आईटी इन मी ऑन मन और फ्रॉम आउटसाइड आई बिल विकम एन परफेक्ट जेंटलमैन डेट यस यू सी डेट व्हेन आईटी इस टाइम तू कंग्रॅजुलेशंस यू आर डूइंग वेरी गुड बट इन मी ऑन हार्ड आई बिल थिंक डेट हो कम ही जेन सच रिकॉग्निशन और सक्सेस वेयर आई एम ए फेलियर आई हैव नोट गेन इन नंबर वन स्पोर्ट इन है प्लेस समथिंग लाइक दिस सो इन मी मन आई बिल बी कम एंग्री इन मी ऑन मन आई बिल विकम हीडफुल बट फ्रॉम आउटसाइड आई बिल शो डेट्स आई एम वेरी हैप्पी विथ एवरीथिंग एल्स आईएफ आई डू दिस दें स्वामी जी से स्टेट आईटी इस नोट जस्ट ओवर शब्द बट आईटी इस अलसो अवर थॉट्स विच डिटरमिन ओवर करैक्टर आईटी इसे नोट इनफ सिंपली तू हायड अवर ट्रू थॉट्स सिंपली तू हायड अवर ट्रू इमोशंस वे हैव तू एक्सपेंशन दिस इमोशंस एवं फ्रॉम अवर ऑन मन यस हैडिंग डेम इस डी फर्स्ट स्टेप सपोज मी नेचर इसे वेरी एग्रेस यू सो एवरी स्मॉल स्मॉल थिंक मैक्स मी एंग्री सो फर्स्ट स्टेप वुड बी नोट तू एक्सप्रेस दिस एंगर फ्रॉम आउटसाइड एन नोट तू एक्सप्रेस दिस एंगल इन मी शब्द और इन मी एक्सिलस लेट मी बोतल आईटी अप इन मी ऑन मन डेट इस ओनली डी फर्स्ट स्टेप डी सेकंड स्टेप वुड बी तू एक्सपेंड तू डिस्ट्रॉय दिस एंगर फ्रॉम मी मन आईटी सेल्फ फ्रॉम मी ऑन मी और शुड बी लाइक और ओसियन ऑफ क्वालिटी ट्यूब और ग्लाइसफुलनेस और पीसफुलनेस वॅटीवर डी टेंपेस्ट वॅटीवर डी स्ट्रांग विच इस गोइंग आउटसाइड आईटी बिल नोट अफेक्ट मी आईटी ओल्ड देवर माइट बायस अपन डी सरफेस ऑफ दिस ओसियन बट इन डी डेप्थ इन डी पीसफुल ब्लेसफुल डेथ आई बिल सीट और आई बिल बी हैप्पी इन मी मेडिटेशन इन मी इनर सर्टिट्यूड इनर कॉन्फिडेंस डेट यस आई एम दी आगमन और अल्टीमेटली दिस बॉडी माइ सकसीड और फेल इन दिस वर्ल्ड बट दिस वर्ल्ड इस एवं एसांइट डी वर्ल्ड इस ओनली ऑफ 2 3 मोमेंट आईटी बिल कम और आईटी बिल को मी आत्मन इस बियोंड सक्सेस और फैलियर्स मैं आत्मा इन एग्जामिनेशन मी आत्मन इस बियोंड दिस प्रमोशन और डिमोशन गेम डेट इसे गोइंग ऑन इन मी जब मी आत्मन इस बियोंड इस सक्सेस और फ्रस्ट्रेशन इन मी सोशल लाइफ मी आत्मा इस बियोंड इस वर्ल्ड इस बियोंड इस वर्ल्ड ऑफ माया इस बियोंड इस वर्ल्ड ऑफ हैप्पीनेस और मिजारी लेटर और किंग आई सी पर अबाउट जो दिस मॉल स्मॉल थिंग्स विच आर गोइंग ऑन इन अर्थ आई सीट आई अबाउट दिस प्लेन ऑफ अवर सोलर सिस्टम अब्जॉर्ब इन मी ऑन मेडिटेशन दिस इस व्हाट आईएफ आई थिंक इन मी ऑन हार्ट इन मी ऑन मी दें व्हाट बिल हैपन डेट दिस इवेंट्स विच उसे तू मेक मी एंग्री डी फर्स्ट ऑफ जो मी एक्सप्रेशन ऑफ एंगल बी स्टॉप सो आईटी इस नोट इनफ नोट तू मीयतरली एक्सप्रेस ओवर अग्रेशन आउटसाइड वे हैव तू डिस्ट्रॉय आईटी बाय रूट और ब्रांच वर व्हाट ओवर थॉट्स हैव मेड स सो टेक केयर ऑफ व्हाट यू थिंक आईएफ मी बिहेवियर आउटसाइड इस फ्रेंडली बट मी मन मी थॉट्स आर एग्रेसिव इनसाइड दें मी करैक्टर बिल बी फेटली विकंद मी करैक्टर बिल बी डेट मैच बेड मी करैक्टर बिल बी डेट मैच इवोल्वेस आर सेकेंडरी थॉट्स लीव डी ट्रैवल फॉर सपोज आउट ऑफ एंगर आई कॉल्ड समवन थिस यूज्ड तू हैपन आईएफ यू रीड ओवर हिस्ट्री वन दे व्हाट हैपन डेट स्वामी जी जस्ट आफ्टर स्वामी विवेकानंद रिटर्न फ्रॉम अमेरिका ही हेड कलेक्ट मनी और जो दिस फंड फ्रॉम गिविंग लेक्चरर्स और लेक्चरर्स इस हेल्थ पोस्ट डिस्ट्रॉय विकम सो वीक इंस्पीते ऑफ डेट ही कलेक्ट सो मैच मनी कैन तू इंडिया और इस्टैबलिश्ड बैलून और आफ्टर एस्टेब्लिश बेलूर मठ इस स्टार्टड सम रूल्स डेट मनी अकाउंट ऑफ डी मनी हज तू बी कैप परफेक्ट और स्ट्रिक्ट से रिगर और डिसिप्लिन आईएफ देवर इस अन्य ट्रबल इन डी अकाउंटिंग ऑफ डी मनी दें पीपल बिल लॉस फेथ इन बैलून मठ डी डोनर्स बिल लॉस फेथ फ्रॉम बेलूर मठ दे बिल अगेन बिल से डेट दे आर जस्ट अगेन वन मोर जो दिस रिलिजियस ऑर्गेनाइजेशंस हूं फ्रॉड डिफ्रॉड पीपल आउट ऑफ देवर मनी बाय शोइंग डेम सब मिरेकल्स दे बिल शो डेम दत आई बिल कर योर डिजीज आई बिल फाइंड सम रिमेडी पर योर प्रॉब्लम सो प्लीज गिव मी मनी सो बाई सेइंग दिस में रिलिजियस ऑर्गेनाइजेशंस आर डर हूं डिफार्ड मां पीपल आउट ऑफ देवर मनी सो आईएफ देवर इस अन्य से एरर और से अन्य लेग्सिटी और लजीनेस इन कीपिंग डी अकाउंट ऑफ डी बेलूर मठ आईटी बिल रिफ्लेक्टर पर जो टाइम ओवर डोनर्स बिल विकम एंग्री विथ हाज दे बिल विकम दे बिल स्टॉप गिविंग स मनी सो दिस इस डी रूल्स स्वामी विवेकानंद स्टार्टड एस्टेब्लिश इन बेलूर मठ सो वन दे व्हाट हैपेंड विथ हो सम मनी वज पेंट और समथिंग लाइक दिस इन शरद महाराज वज रिस्पांसिबल पर डेड प्रॉब्लम और समथिंग ही कम तू स्वामीजी तू टॉक अबाउट डेट प्रॉब्लम और व्हेन स्वामीजी लिजर्ड पर सम टाइम ही लिस्टेड कम और क्विटली बट देन सुद्दनली हज अंगूर फ्लर्ट अप और ही स्टार्टड स्कोल्डिंग शरदमारा 100 सीवियरली आधार पीपल स्टैंडिंग देवर दे थॉट देवर डी हार्ट फिल्म मस्त आउट एक्चुअली दे बिल नोट आईटी डी रिसीविंग और ऑफ डी स्वामीजी हैंगर आते डी रिसीविंग और बाज शरद महाराज स्वामी शारदानंद जी डी फर्स्ट सेक्रेटरी डी फर्स्ट जनरल सेक्रेटरी ऑफ रामकृष्ण ओल्डर रामकृष्ण मिशन ही वैसे डी वन हूं वज रिसीविंग आते डी रिसीविंग एंड ऑफ स्वामी विवेकानंद स्कोल्डिंग बट डी ओनली लक्स डी पीपल हूं वेयर सराउंडिंग दिस तू ही स्वामी स्वामी जी एंकर वह शरद महाराज जी विकम एंग्री देवर वैसे नथिंग तू स्टॉप आईटी इस लाइक यू नो लाइक ही वुड बी पजज्ड बाय डी रुद्रा डेट रुद्रा स्वरूप ऑफ शिवम ए स्मॉल परसों विद एन विकार हार्ट ही बिल गेट हार्ड फेलियर यू बिल गेट हार्ट अटैक सीवर वास स्वामी जी एंगर और स्कोल्डिंग इंस्पीते ऑफ थ्रेड व्हाट हैपन वे शरद महाराज ही सिंपली सीटेट डर कमली क्याइटली पीसफुली लिसनिंग तू एवरीथिंग डेट स्वामी जी वज सेइंग विदाउट सेइंग अन्य शब्द इन रिटन दिस इस सिंपली सेट बिफोर हम सडनली व्हाट हैपन कोलकाता ही वांटेड तू हैव एन शब्द विद स्वामी विवेकानंद तो स्वामीजी इमीडियाटली टॉप ही स्कोल्डिंग बिकॉज़ दिस वज डी मटर अमोंग डी मांस और यू डू नोट डिसकस्ड है अमोंग डी देवोट्स सो स्वामी जी स्टॉप स्कोल्डिंग शरारत दिस देवोतीस सेट विद डेम ऑन डी टेबल और देवर ही स्टार्टड आस्किंग स्वामीजी सम क्वेश्चंस और दे स्टार्टड रिमेंबरिंग ओल्ड डेज और दी स्टार्टड लाफिंग और टॉकिंग अमोंग डेम सिर्फ शरद स्टार्टड लाफिंग और टॉकिंग विद हिमसेल्फ ही फॉरवर्ड डेट जस्ट बिफोर एन मोमेंट एगो जस्ट एन फू सेकंड सगर स्वामीजी वास स्कोल्डिंग हम स्वामी जी वाजिद अली एंग्री विथ यू एवरीथिंग गोस फॉरगॉटेन दिस डेवोरिटी कम दे स्टार्टड टॉकिंग और स्पीकिंग और लाफिंग और वन मोंक ब्रोक सो जो दिस थ्री पीपल सेट टुगेदर ड्रिंकिंग और डी मोमेंट देवोतेली लेफ्ट सुद्दनली स्वामीजी एंगर रिटर्न और अगेन स्टार्टड स्कोल्डिंग शरद महाराज डी जो सीन शरद महाराज अगेन विकम वेरी सीरियस और स्टार्टड लिसनिंग तू स्वामीजी विदाउट सेइंग एनीथिंग इन रिटर्न डी मोंक हुवे विटनेसिंग दिस इंसिडेंट थे थॉट्स आईटी वन मोमेंट्स स्वामी जी वह सो एंग्री डेट ही वुड ब्रेड डी प्रलय ऑन अर्थ आते डी नेक्स्ट मोमेंट ही वैसे टॉकिंग और लाफिंग विथ देवोटी और विच रथ महाराज अलसो और डी मोमेंट देवोतेली लेफ्ट एंगर रिटर्न सो व्हाट इसे डी मीनिंग ऑफ दिस दिस एंगर इस ऑन डी सरफेस स्वामीजी वांटेड तू शो एंगर नोट इन ऑर्डर तू बी लिटिल शरद महाराज बट जस्ट तू टीच हम डेट अकाउंटिंग इस वेरी इंपॉर्टेंट और दिस एंगर बिल लीव इंप्रेशन अपन ही इस मन सो बट इन हज हार्ड देवर वज नथिंग बट लव सो सी डर आर सम पीपल हूं आर हीडफुल इन देवर हार्ट बट दे टॉक विद ग्रेट फ्रेंड्स फ्रेंड्लीनेस आउटसाइड बट दिस वज स्वामीजी डेट ही वुड शोइंग और अग्रेशन फ्रॉम आउटसाइड बट इन है हार्ट है वास परफेक्टली हैप्पी पूरे और फ्रेंडली विद एवरीवन एल्स ही इस कंपैशन एवरीवन इसे सो दत इसे वही स्वामीजी सेज हर डी शब्द आर

स्वामी विवेकानन्द

सेकेंडरी हम अपनी जुबान से क्या बोलते हैं उससे ज्यादा भी हम अपने मां में किस तरह का भाव रखते हैं वो ज्यादा इंपॉर्टेंट है जैसे हमने यहां देखा स्वामी जी शरद महाराज के साथ में इतना जोर-जोर से झगड़ रहे हैं उनको इतनी गलियां दे रहा है शरद मर्द ने शायद थोड़ा बहुत हो सकता है की अकाउंट में थोड़ा सा वो वेदरकारी का बेहद कार्य राखी हो थोड़ी असावधानी राखी हो अकाउंट में यह कोई ऐसा कुछ प्रश्न होगा स्वामी जी इतना जोर-जोर से उनको गली दे रहे हैं और फिर एक भक्ति है एक देवोते हैं तो सभी तीनों लोक शरत महाराज स्वामी जी और वो देवोटी तीनों आराम से बैठकर चाय पी रहे हैं हंसी मजाक कर रहे पुराने दोनों की बात याद कर रहे हैं और जैसे ही यह देवोटी खड़ा होकर चला गया फिर से स्वामी जी का रुद्रा स्वरूप कन्वर्ट हो गया और फिर से शर्ट महाराज को गली देना शुरू कर दिया वो जो दूसरे साधु लोग वहां पे खड़े थे वे लोग बोल रहे हैं की यदि इस तरह का जो गली प्रधान यदि स्वामी जी ने और किसी को किया होता तो उसका हार्ट फेल हो जाता इतना रुद्रेश्वर रूप में स्वामी जी ए गए थे किंतु क्या है की स्वामी जी को दिखाना था ऐसा नहीं है की उनके हृदय में शरद महाराज स्वामी शारदानंद जी के प्रति कोई गुस्सा था ये उनके मां में तो सबके प्रति प्रेम ही था किंतु बाहर से गुस्सा इसलिए दिखाई थे की जैसे की उनके गुरु भाइयों के मां में यह बात जो है गंभीर रूप से आपात करें गंभीर रूप से अंकित हो जाए की यह जो अकाउंटिंग है वह इतना परफेक्ट होना चाहिए की यदि अकाउंटिंग में थोड़ा सा भी यदि असावधानी बढ़नी जाए साधु लोग तो पैसा खाएंगे नहीं पॉकेट में डालेंगे नहीं किंतु क्या है की अभी एक जैसे की मेडिकल के लिए फंड आया है उसको हमने साधु सेवा में या ठाकुर सेवा में लगा दिया या तो फिर ऐसा कुछ भीतर में आपस आपस में ऐसा कुछ एक वहां परपज के लिए आया हुआ फंड दूसरे परपज में लगाना इसका अर्थ यही होता है की पैसा खाना स्वामी जी की दृष्टि में इतना पक्का रखना है अकाउंट को एक एक अकाउंटिंग से एक अकाउंट हेड से दूसरे अकाउंट में पैसा नहीं जाना चाहिए एक डिपार्मेंट में से दूसरे डिपार्मेंट में पैसा नहीं जाना चाहिए जो जी परपज के लिए दाता ने जो पैसा दिया है इस परपज के लिए ही उसका व्य होना चाहिए तो स्वामी जी कहते हैं शकीरा कोड़ी मच्छर जा बिना मच्छर पौड़ी सके जावे ना अर्थात जो पैसा शक बनाने के लिए आया है उसे पैसों से मछली नहीं खरीद ली है और जी जो पैसा मछली खरीदने के लिए आया है उससे शक नहीं खरीदना है और सब्जी तरकारी वगैरा नहीं खरीदना है क्यों क्योंकि जो है दाता आपको जो पैसा देता है बड़ा ही श्रद्धा भक्ति के साथ देता है बड़ा विश्वास करके देता है की स्वामी जी मैंने आपको ये रुपया इस परपज के लिए दिया तो वो परपज को आप चेंज करके क्यों कर देंगे ऐसा तो आपको अधिकार नहीं है यानी पॉकेट में तो पैसा नहीं डालना है वो तो बहुत दूर की बात है किंतु जो परपज इसीलिए आया है वह परपज के लिए पैसा नहीं खर्च करके और किसी परपज के लिए किया तो वह भी बहुत बड़ा अपराध है तो स्वामी जी इस तरह से गुस्सा करके अपने गुरु भाइयों के मां में यह सब छोटी-छोटी चीज जो की संस्था के लिए बहुत ही खास करके धार्मिक संस्था के लिए बहुत ही इंपॉर्टेंट है ये सब चीज इतना गुस्सा करके उनको कहते थे इतना मतलब गली गलौज करते थे और स्वामी जी की गलियां तो जो सुनेगा उसको पता चलेगा इतनी खराब खराब गली देते थे और इतना गुस्से से देते थे छोटा-मोटा यदि होगा तो उसका तो हार्ट फेल हो जाएगा इतना गुस्सा करके बोलते क्यों थे जैसे की सबको अपने मां में ये हमेशा के लिए अंकित हो जाए की इस तरह से ही संस्था को चलाना है इसी तरह से अपने संघ को चलाना है उसमें थोड़ा सा भी ये जो है यह नहीं होना चाहिए इधर का पैसा उधर नहीं होना चाहिए तो मुंह से गली दे रहे हैं मुंह से गुस्सा कर रहे हैं किंतु मां बिल्कुल शांत है और कैसे पता चला जैसे एक वक्त आया सब ने बढ़िया मजे से हंसी मजाक करते हुए चाय पी ली शरद महाराज ने भी वजह से चाय पीली हंसी मजाक कर ले और जैसे ही वह भक्ति चला गया फिर से स्वामी जी का गली देना शुरू हो गया तो ये देखिए यहां पे स्वामी जी कहते हैं की हम जो शब्द जो है उसके द्वारा जो कहते हैं वो सेकेंडरी है उसका इतने इंर्पोटेंस नहीं है जितना हम अपने मां में जो विचार रखते हैं यहां पर स्वामी जी के मां में तो सभी के प्रति प्रेम ही था और यही प्रेम उनका सत्य चरित्र का गठन करता था किंतु बहुत सारे लोग ऐसे होते हैं की बाहर में अच्छे-अच्छे बातें करेंगे मां में सबको गली देंगे तो यदि मां में ऐसा रखेंगे तो उनका चरित्र भी जो है वो इस तरह से एक सत्यानाशी एक तरह का एक चरित्र बन जाएगा जो की जो भी चीज को हाथ लगता है ना उसमें वो फेल हो जाता है ऐसे लोगों का चरित्र ऐसा हो जाता है जो की अपने मां में सब समय एक तरह का गुस्सा रख के फर्ट हैं सब समय दूसरों के प्रति द्वेष रख के पढ़ते हैं उनका फिर क्या है ना ये सब लाइफस्टाइल दिस इस स्ट्रेस इनसाइट है उसमें से क्या होगा तो यह हाय ब्लू प्रेशर यह डायबिटीज कोरोनरी हार्ट डिजीज यह जो सब ली फ़स्टाइल डिसीजन है वो इसीलिए बनते हैं की अपना गुस्से को अपना हृदय में ढाबा करके रखते हैं अपने मां को दबाकर मां में दबाकर के रहते हैं और बाहर में सब अच्छी-अच्छी बातें करते हैं घूमेंगे तो ऐसे लोगों के साथ में ये सब प्रॉब्लम फिर ज्यादा होता है हमारे जो विचार है वह बहुत ही दूर तक वह प्रसारते हैं और जहां पर भी वह जाते हैं वहां पर वह विचार कार्य करते हैं यदि अपने यदि हम एक जगह पे एक फैमिली में र रहे हैं और किसी का नेचर बहुत ही खराब है देखिएगा फैमिली में सबके ऊपर में उसका जो नेगेटिव नेचर है उसका इफेक्ट होगा उसका असर होगा और यदि कोई है की जिसका नेचर अच्छा है जिसका नेचर की वो एक सुमधुर सबके साथ में मित्रता से सबको मदद करने वाला नेचर है वो जो हेल्प हेल्पिंग नेचर है तो उससे क्या है की पूरा फैमिली का जो मेंटल हेल्थ है ना वो अच्छा रहेगा राजा महाराज ने एक बहुत अच्छी बात कहीं है की एक टच है एकता आश्रम चले जाए अर्थात यदि एक लड़का ठीक-ठीक थे तपस्या करता है एक लड़का है तो उसकी तपस्या से एक आश्रम चल जाता है उसकी तपस्या से एक आश्रम पूरा चल जाएगा फिर भले ही बाकी लोग तपस्या करें ना करें भले ही बाकी लोग कोई आध्यात साधना करें एन करें एक आश्रम को चलने के लिए एक लड़के की अर्थात एक साधु की तपस्या काफी है तो हमारे जो विचार है सिर्फ हमारे मां में नहीं रहते हमारा जो एटीट्यूड है वो सिर्फ मां में नहीं राहत लोग समझ पाते हैं की हमारे एटीट्यूड कैसा है यदि हम मुंह चड्ढा करके घूमेंगे चारों और तो आसपास के लोग भी डिप्रैस हो जाएंगे अरे भाई ये कहां से ए गया सबको मतलब की आप लोग हंसी-मजाक करते हैं वो जाकर के बैठ जाएगा तो सबका मूड बिगाड़ देगा तो जो है की सिर्फ आपके शब्द ही नहीं आपके मां में जो विचार है आपका जो मूड है आपका जो एटीट्यूड है वो सबको इफेक्ट करता है तो यहां पे भी महाराष्ट्र जो है इतने सारे जो हमारा स्टाफ है या तो वॉलिंटियर है कोई भी यहां पे आता है अभी किसी के घर में कुछ प्रॉब्लम हुआ है और बेचारा आकर के मुंह मटका करके बैठा है डिप्रैस हो के तो पूरा मतलब ऑफिस में ऐसा लगता है की डिप्रेशन का भाव है ये मैंने महसूस किया है यहां पर खास करके एक है उसके घर में प्रॉब्लम होते रहते हैं तो को थोड़ी डर बैठूंगा ना तब मैं समझ जाऊंगा की उसका घर में कुछ प्रॉब्लम है मैं पूछूंगा क्या हुआ तो वो बोलेगा बेचारा ऐसा हुआ वैसा हुआ अभी उसका भी गलती हो सकता है किसी का भी गलती हो सकता है फैमिली में वो बात नहीं है किंतु फैमिली में गड़बड़ होने से वो मुंह मटका करके यहां पे जो है वो मुझे पता भी नहीं चलेगा ऐसा नहीं है कैसा हूं मुंह करके बैठेगा वो मुंह पे भले चाहे हस्तियां होगा या तो फिर ठीक से कम कर रहा होगा उसका जो मूड है वो मूड पूरे ऑफिस को ऑफसेट करता है ये मैंने कई बार देखा है और यदि किसी के घर में कुछ अच्छा हुआ है तो उसका वो जो मां के भीतर से वो जो उल्लास है उमंग है वो जो होता है तो सबको पता चला है तो ये सब इनविजिबल फोर्सेस से जो की हमारे जीवन को गठित करती है हम लोग चाहे सोचते हैं की अरे मैं तो इतना अच्छी तरह से र रहा हूं मेरे घर में कोई प्रॉब्लम नहीं या तो मिस जहां पे कम करता हूं वहां पर कोई प्रॉब्लम नहीं फिर भी मेरे मां पे ये जो मेरे मां में सब समय ये टेंशन क्यों बना राहत है मेरे मां में सब समय ये दुश्चिंता का भाव क्यों और बना राहत है तो एक्चुअली वो शायद हमारे उसके मां में नहीं प्रकट होकर दूसरे किसी के मां में प्रकट हुआ होगा और फिर वहां से हमको संक्रमित होता है यह कोरोना से भी ज्यादा जो वायरल है ना ये सब हमारे मूड है जिसका भी मूड खराब होता है वो बाकी सबको इफेक्ट करता है और जो भी वो हास्य मतलब सुष्मिता वो प्रश्न जो जिसका मूड होता है ना वो सबको फिर उससे वो इफेक्ट होता है मैन की हमारे विचार जो है उसका पोटेंशियल उसका पावर कितना है वो हमको समझ में नहीं आता यदि हम उसके ऊपर में सोचना शुरू करें यदि हम अपने मां को खुद धीरे-धीरे करके एनालिसिस करना शुरू करें तो पता चलेगा की दूसरों के मूड से हम कितना इफेक्ट होते हैं और हमारे मूड से दूसरों को क्या असर होती है यह पूरा जो इनविजिबल इंटरेक्शन है ना हम लोग सब सोचते हैं की हमने बातें क्या की बटन बटन में अच्छे से बात की तो हमको लगता है की बहुत अच्छे से हम र रहे हैं किंतु हमारे भीतर का जो मूड है वह पूरा डिफरेंट हो सकता है तो हम लोग यही सोचते हैं की बाहर में क्या हो रहा है साथ-साथ में किंतु थोड़ा बहुत एनालिसिस करके भीतर में क्या हो रहा है उसका एनालिसिस करेंगे यह जो मोड नेटवर्क जो है यह जो सब सोशल मीडिया वगैरा जो है सोशल मीडिया नेटवर्क वो भी तो हमको अफेक्ट करता है किंतु इससे कहानी जाता है ये जो मूड नेटवर्क जो है वो हमको कहानी ज्यादा अफेक्ट करता है तो स्वामी जी इसलिए यहां पे कहते हैं की हमारे जो विचार है वो हमारे चरित्र का सही सही गठन करते हैं थॉट्स लीव थे ट्रैवल फॉर हमारे विचार जीता है मतलब जिंदा व्यक्ति को लेकिन जिंदा एक आर्गनिज्म की तरह चारों और फेल्ट हैं स्ट्रेंज विद अवर ऑन कैरक्टर्स सो डेट पर डी पूरे और होली मां एवं चेस्ट और एब्यूज बिल हैव डी ट्वीट ऑफ हज ऑन लव और प्योरिटी और तू गुड देखिए जो भी हम हमारे विचार है या तो जो भी हमारे कार्य है उसके ऊपर में हमारे चरित्र की बहुत गहरी छाप है इसलिए यदि कोई महापुरुष कोई हंसी मजाक भी करते है या तो किसी को गली गलौज भी करते हैं किंतु उसका हृदय पवित्र रहने से वह दी हुई गली भी जिसको गली देता है उसका वो जो है संकट मोचन करेगी उसके वो जो जन्म अंतर किया जो ये जो पाप है वो पाप को दो डालेगी अपने यहां पर जैसे सीनरी साडू होते हैं ना जनरल सेक्रेटरी महाराज या प्रेसिडेंट महाराज उनके साथ में बात करना ना बड़ा डेंजरस हो जाता है एकदम फाटक करके गुस्सा हो जाएंगे छोटी-छोटी चीजों में और ऐसा गुस्सा करेंगे आत्मा स्थान जी के बड़े में हमने सुना है ठाकुर की कृपा से मैंने विटनेस भी किया है एक इंसिडेंट मैंने देखा है आत्मस्थ आनंद जी का गुस्सा इतना भयानक था की और ऐसी गली देते थे की मतलब हमने बाहर भी ना सनी हो एक दिन यह इंसिडेंट मैंने खुद ने देखा है की एक बार हम लोग क्या है उनको प्रणाम करने के लिए प्रेसिडेंट महाराज का जो क्वार्टर है बेलूर मठ में हम लोग खड़े थे अभी अंधेरा था और हम लोग थोड़ा साइड में खड़े थे तो भाई प्रेसिडेंट महाराज अपना सानंद जी गाड़ी में से निकले उनको शायद दिखाने की हम लोग सब सब ब्रह्मचारी लोग वहां खड़े प्रणाम करने के लिए तो अभी महाराष्ट्र क्या है की बहुत वृद्ध हो गए तो चल नहीं का रहे थे तो उनके दो सेवक महाराष्ट्र उनके कंधों पे ऐसा हाथ रख के चल रहा है बहुत ही मतलब वीक हो गए थे उनके शरीर जान का कुछ समय पहले की बात है किंतु देखिए उनका तेल अभी कुछ किसी बात पे वो सडनली सेवक महाराष्ट्र में नाराज हो गए तो ऐसा हाथ रखा था ना उनके कंधे पे बेचारे चल भी नहीं का रहे इतने वीक थे और सुद्दनली उसके पीठ पे सेवक की पीठ पे इतना जोर से चांटा मारा की भूमिका क्या हुआ तो हम लोग वहां पे अंधेरे में खड़ा था हम लोग तो ऐसे डर गए और आप रे अभी जा के उनको प्रणाम करना है अभी हमारे पे गुस्सा निकलेंगे तो क्या होगा किंतु देखिए वो सेवक महाराज को इतना जोर से मारा ऐसा घूम करके आवाज हुआ किंतु जो है की उनका जो आत्मसानंद जी का हृदय इतना पवित्र है की उनका जो गुस्सा भी है ना वो हमारे कर्मों को कैट देता है इसलिए हम यहां पे साधु लोगों में खास करके ऐसी बात है यदि कोई सीनरी साडू नाराज होते हैं गुस्सा करते हैं गली देते हैं या तो फिर मार भी देते हैं तो हमारे ही कल्याण के लिए है क्योंकि इससे हमारे पाप जो है वो फटाफट करके कट जाते हैं क्योंकि उनकी गली या गुस्से के पीछे उनका जो महत्व चरित्र है उसका आशीर्वाद राहत है और ऐसी इतनी ही कहानी है एक गंभीर नानजी महाराज ने की कोई एक्जेक्टली नाम भूल गया वो जनरल सेक्रेटरी है और प्रेसिडेंट महाराज को मिलने के लिए गए अभी किसी बात से प्रेसिडेंट महाराज हो गया अभी है पूरे मठ मिशन पे जनरल सेक्रेटरी तो प्रेसिडेंट को प्रेसिडेंट और कुछ भी सिर्फ उल्टा पुल्टा कुछ बोल दिया तो फिर वो जनरल सेक्रेटरी महाराज बाहर आकर के अपने से बात कर रहा है और करो स्वामी जी का कम और करो स्वामी जी का कम स्वामी जी का कम करते-करते ही तो ऐसी गली सुन पड़ती है तो बाकी सब लोग सेवक जो है वो बेचारे डायरेक्टर चुपचाप खड़े हैं वो मतलब अभी ऐसा हुआ की प्रेसिडेंट महाराज को डाटा तो क्रिएट कर सकते हैं उनको डटेंगे सब लोग चुपचाप खड़े कोई कुछ बोल नहीं रहा है जैसे की उनका जो है गुस्सा वही पे समाप्त हो जाएगी किंतु क्या है देखिए ये जो ठाकुर भी नाराज हो जाते थे ठाकुर भी गलियां देते थे ठाकुर स्वामी जी इनकी गलियां तो मतलब सुनने से ही हमको लगेगा की बाहर में कोई ऐसी गली नहीं देगा ऐसा वह लोग देते थे तो उनका जो गुस्सा जो है वो गुस्से में भी एक तरह का प्रेम है गुस्से में भी एक तरह का आशीर्वाद है और हमारे संस्कारों को कटता है तो यहां पर दो बात है जो आदमी अपने गुस्से को मां में रखना है बाहर से अच्छी-अच्छी बातें करता है तो उसका चरित्र जो है वो मालिन हो जाएगा उसका जो चरित्र है वो पूरा नेगेटिव चरित्र हो जाएगा खुद डिप्रेशन में रहेगा को खुद को सब लाइफस्टाइल दिस इस हो जाएंगे वो जो हाइपरटेंशन हाय शुगर और कोरोनरी आर्टी और हार्ट डिजीज वगैरा सब उसको हो जाएगा और उसका मूड इतना नेगेटिव रहेगा की जहां जहां पे भी जाएगा सबको डिप्रैस कर देगा वो बैठा है सबके साथ में तो सबका मूड जो है वो बिगड़ जाएगा ऐसा उसका वो नेचर होता है जो अपने गुस्से को मां में मां में रखना है और जो है की अपने मां में भले ही चाहे प्रेम हो किंतु किसी को सीखने के लिए किसी को समझने के लिए जब गुस्सा करता है तो गुस्सा भी जो है वो आशीर्वाद स्वरूप राहत है तो यह जो पूरा साइकोलॉजी है यह स्वामी जी को देखिए ये इतने अच्छे सुंदर शब्दों में ये सब साइकोलॉजी हमको समझते हैं ये जो वेदांत जो है वो सिर्फ एक रिलिजियस साइंस नहीं है यह हमको सिर्फ यह नहीं बताता की ईश्वर प्रताप कैसे करनी है हमको यह भी बताता है की सुचारू रूप से सुंदर रूप से इस जगत में रहा कैसे जाए इस जगत में सक्सेस कैसे हुआ जाए यदि आपको किसी को सीखना है तो आप बाहर में गुस्सा कीजिए भले जैसे मां अपने बच्चे को मारती है तो ऐसा थोड़ी अपने मां को अपने बच्चे को दिक करती है या तो उसके ऊपर में गुस्सा है मां को पता है की यदि अभी इसको नहीं मारेंगे अभी इसकी जो यह कुव है बेड हैबिट्स है अभी उसको नहीं उसको संभालेंगे तो बाद में वो पता नहीं क्या से क्या कर देगा अभी कल परसों ही मैंने पढ़ा था न्यूज़पेपर ये अमेरिका में ये सब स्कूल में शूटिंग होता है ना छोटे-छोटे बच्चे बंदूक लेकर स्कूल में चले जाते हैं और वो अपने मित्रों को मार देते हैं तो अमेरिका में क्या है की ऐसा एक तरह का चला है वो एजुकेशन सिस्टम में बच्चों को डिसिप्लिन नहीं करना है बच्चों को कुछ बोलना नहीं है उनका जो जी तरह से विकास होता है होने दो फिर जी तरह से वो होने दो तो क्या है फिर वो गुस्सा हो जाएगा अपने गुस्से को संभल नहीं पाएगा अपने खुद को डिसिप्लिन नहीं कर पाएगा जब भी अच्छा होगा बंदूक लेकर दूसरों को मारना शुरू कर दे छोटे-छोटे बच्चे ऐसा करता है तो बच्चों को डिसिप्लिन करना या तो फिर जो भी हमारे से जूनियर है उनको डिसिप्लिन करना आवश्यक होता है जिससे की उन्हें का कल्याण होता है दूसरों का होना हो तो यह सब चीज करने के लिए शायद आपको गुस्सा करना पड़े तो इसलिए स्वामी जी यहां पर लगता हैं गली भी देता है तो उसके पीछे उसके मां का जो पवित्र भाव है आशीर्वाद है वो छुपा रहेगा और सामने वाले का कल्याण करेगा अभी कथा

श्रीरामकृष्ण कथामृत : कोलकाता में ईश्वरचंद्र विद्यासागर के साथ

हमने देखा की किस तरह से ठाकुर आकर के विद्यासागर के पास सीधे ही ब्रह्मज्ञान के बड़े में बात करना शुरू कर देता है विद्यासागर के मां में यह कन्फ्यूजन था थोड़ा सा की यह जो ब्रह्मज्ञान जो है या तो ईश्वर तत्व है उसके बड़े में इतने विरोधाभासी वक्तव्य या तो विरोधाभासी डिस्क्रिप्शन अपोजिट डिस्क्रिप्शन पैराडॉक्स डिस्क्रिप्शन अपने शास्त्र में क्यों है पुराण एक बात कहते हैं वेदांत एक चीज कहते हैं तंत्र है वो और एक चीज कहते हैं फिर जितने भी अवतार है वो अपने हिसाब से चलते हैं जितने भी संत महापुरुष हैं वो अपनी साधन पद्धति रखते हैं तो ऐसा जो ये पूरा जो है बेचारे को समझ में नहीं ए रहा है हम लोग तो मानते हैं की जिसका जो साइकोलॉजी है अधिकारिक अधिकारवाद अर्थात अब ये छोटा बच्चा है तो उसको इस तरह से कहा जाना चाहिए की जो भगवान है तुम्हारी मां के जैसे मां की तरह ह्यूमन लिविंग इनसाइड योर हार्ट आपके हृदय में ही विराजमान है हृदय पर ध्यान कीजिए तो फिर वो जो ईश्वर का वो जो ईश्वर का जो प्रेम है आपके हृदय में प्रगतित होगा सचित आनंदमय स्वरूप का जो उसका जो स्वरूप है वो आपके भीतर में प्रगति होगा तो बड़े किसी आदमी को या कोई फिलॉस्फर को ऐसा करके समझाएंगे तो ऐसा नहीं है की वो मातृ स्वरूप ईश्वर या तो फिर सच्चिदानंद स्वरूप ईश्वर एक दूसरों के विरोध बस ये है ये दोनों डिस्क्रिप्शन दिए गए विभिन्न विभिन्न तरह के सड़क को समझना के लिए अभी जैसे एक ही जैसे हाथी है जो छोटा बच्चा उसकी पूछ को पकड़ेगा तो बोलेगा ये सांप जैसा है हाथी और कोई बड़ा आदमी है जिसके आंखें बैंड कर दी गई है आंखों के ऊपर में वो ब्लाइंड फोल्ड लगाया गया पट्टी बंद दी गई है तो वो फिलॉस्फर उसकी सूट को स्पर्श करेगा क्यों बोलेगा की यह तो पूरे वो जो पेड़ का जो यह होता है ट्रक थर्ड उसके जैसा है तो बात है की हम ईश्वर को किस तरह से देखते हैं समझते हैं उसकी वजह से ईश्वर का विभिन्न रूप देते हैं किंतु ईश्वर जो है वह जैसे वह सहस्त्र दाल पदमा उसके जैसा है एक एक दाल को आप देखेंगे उसका खुद का एक महात्मा होता है और एक ईश्वर बनते हैं तो इसीलिए विद्यासागर का यह जो कन्फ्यूजन है उसे ठाकुर दूर कर रहा है है इसलिए ठाकुर ने कहा जैसे हमने कल पढ़ा था की वेद पुराने में जो ब्रह्मा के विषय में कहा गया है वह किस ढंग का है सो जानो जानते हो एक आदमी ने समुद्र देखकर लौट पर कहा की समुद्र कैसा है तो वो कहता है की हा क्या देखा किसी लहरें कैसी आवाज तो अभी उसे इतना विराट समुद्र जितना भाव इतना मतलब वो एक मजेस्टिक उसका एक यह है उसका वो शब्दों में वर्णन करने से कैसा दिखता है वो एकदम छोटा जैसा लगता है बस ब्रह्म का वर्णन भी वैसा है वेदों में लिखा गया है वह आनंद स्वरूप है सच्चिदानंद सुखदेव आदि ने यह ब्रह्म सागर किनारे पर खड़े होकर देखा और छुआ था किसी के मत अनुसार वे इस सागर में उतारे नहीं इस सागर में उतारने से फिर कोई लोट नहीं सकता अर्थात ब्रह्मा का दर्शन होता है तो किस दिन में मृत्यु होती है यदि आप समाधि में निर्विकल पर समाधि में चले जाएंगे तो किंतु जो जिन्होंने निर्विकल पर समाधि में प्रवेश नहीं किया उन्होंने सिर्फ ऊपर ऊपर से दर्शन किया है वे लोग तो आकर के भ्रमण के बड़े में बोलेंगे किंतु यहां पे ठाकुर खुद के बड़े में नहीं बताते की वो खुद 6 महीने रहे थे और फिर मां का आदेश अपने के बाद में फिर जगत में आकर के लोक कल्याण के लिए कार्य कर रहा है अभी आगे ठाकुर कहते हैं समादिष्ट होने से ब्रह्मज्ञान होता है ब्रह्म ज्ञान होता है उसे दशा में विचार बिल्कुल बैंड हो जाता है आदमी चुप हो जाता है ब्रह्मा कैसी वास्तु है यह मुंह से बताने का भी समर्थ नहीं रखना एक नमक का पुतला समुद्र नापने गया सब हंसते हैं नमक तो जो है वो समुद्र के पानी में से बंता है अभी आप नमक का साल्ट साल्ट का पुतला बनाएंगे एक गुड़िया बनाएंगे और उसको समुद्र के पानी में फेकेंगे और तुम गाल जाएगा पिघल जाएगा इनीशिएटली और समुद्र के साथ एक आकर हो जाएगा क्योंकि समुद्र के ही तो नमक से वो गुड़िया बनी है या तो पुतला बना है ठाकुर का भी वो जो इस तरह से एग्जांपल देते हैं ना फैट करके लोगों के मां में उतार जाए नमक का पुतला समुद्र मापनी गया पानी कितना दे रहा है उसकी खबर देना चाहता था पर खबर देना उसके नसीब ना हुआ वह पानी में उतरा की गाल गया बस फिर खबर कौन दे वो समुद्र मैं हो गया ईश्वर का साक्षात्कार करने से हम ईश्वर मैं हो जाते हैं वह जो एक बहुत सुंदर कहानी है ना उपनिषद में मैंने पहले भी कहीं है की एक पक्षी है बुध है बीमा है मृत्यु के डागर पे खड़ा है उसके जो पंख है उसके जो फिगर है मालिन हो गए हैं पूरा झुक गया है वो पेड़ के नीचे बैठा है अभी सदन भी उसकी नजर गई तो पेड़ की जो सर्वोच्च डाली है उसके ऊपर में एक दूसरा पक्षी बैठा है जुबान है उसके जो फेदर है एकदम शाइनिंग उसमें से प्रकाश निकाल रहा है उन्नत डे है उसके चेहरे पे प्रकाश है तो ये बूढ़े बीमा पक्षी ने सोचा की जाकर के उसके साथ बात की जाए चलो हमें थोड़ा सा इंस्पिरेशन मिलेगा तो जैसे ही जंप लगा करके पहले डाली पर जाकर देखा तो देखा की उसके खुद की वह जो बुढ़ापन था वो धीरे-धीरे करके कम हो गया उसके पंख है उसमें से थोड़ा शाइनिंग आना शुरू हुआ तो बोलना है यह कैसा चमत्कार है फिर वो झप लगा के ऊपर के डाली में जाता है फिर ऊपर की दिल्ली में जैसे-जैसे वो ऊपर की डाली में जंप लगता है वो सर्वोच्च डाली पर बैठा हुआ सुंदर पक्षी की और जैसा जैसा जाता है वैसा वैसा ही उसका बुढ़ापा भी कम होता जा रहा है उसकी बीमारी भी कम होती है उसका जो है उसके जो पंख फीडर्स उसका शाइनिंग भी बढ़ता जाता है आखिर में जब उसने सर्वोच्च डाली पर बैठे हुए इतने सर्वोच्च पक्षी के साथ में जाकर जंप लगा के बैठा तब पता चला की वो अदृश्य हो गया है और खुद वहां पे है तो वो सोचता है ऐसा कैसे हुआ वो दूसरा जो पक्षी था कहां चला गया किंतु फिर उसने अपने खुद की और देखा तो वही खुद वो पक्षी था मैंने नीचे में वह बुध पक्षी था वह भी वह था और ऊपर में जो जवान पक्षी है सुंदर पक्षी है वह भी वही है ये उसका सही शुद्ध आत्मा स्वरूप है उसके उसका साक्षात्कार करने से वो इस के जैसा हो जाएगा ऐसा नहीं है की वो दूसरे पक्षी के साथ में जाकर बैठेगा और दोनों बातें करेंगे ऐसा नहीं वो वो पक्षी खुद हो जाएगा तो वैसे ही ईश्वर का साक्षात्कार करने से ईश्वर के साथ बात नहीं होती वह तो थोड़ा नीचे की लेवल पे होती है ठाकुर जैसे मां के साथ बात करते थे तो यह भाव मुख्य था वो भाव मुख अवस्था में बॉर्डर लाइन कंडीशन में होती है किंतु जैसे ही वो समुद्र में झम पीला दिया तो ईश्वर मैं हो गया फिर कौन किसके साथ बात करें किसी ने प्रश्न किया क्या समाधि स्थल पुरुष पुरुष जिनको ब्रह्म ज्ञान हुआ है फिर बोलते नहीं है अर्थात अब यह प्रश्न सबके मां में आएगा जिसने समाधि प्राप्त कर ली वह तो देहाती कर देगा वह वापस कैसे आएगा तब ठाकुर क्या कहते हैं लोक शिक्षा के लिए शंकराचार्य ने विद्या का हम रखा था अर्थात की एक थोड़ी एक ऐसी वासना रखती है जी वासना को पकड़ करके ब्रह्मज्ञान से इस जागृति जगत में नीचे ए सके और लोगों को थोड़ा सा उपदेश दे सकें ठाकुर को खुद को जब वो समाधि में से नीचे आते थे तो ऐसा बोलते थे यानी तांबा खाबो अंबा अर्थात में थोड़ा सा तंबाकू खाऊंगा मैं वो जो है की थोड़ा पानी पियूंगा ऐसा कुछ वो बात करते थे जैसे की उसे वासना को पकड़ करके धीरे-धीरे करके इस जगत में जगत में वापस ए सके तो ईश्वर का नाम गुणगान कर सके ईश्वर का कीर्तन कर सकें इसलिए ठाकुर मां को बोलते हैं की थोड़ा बहुत खुश देखें रखना जैसे की मैं तुम्हारा नाम गुणगान कीर्तन कर सुकून एडरवाइज बिल्कुल बेहोश करके मत रख देना ऐसा वो ठाकुर मां को कहते हैं बेहोश करना अर्थात वह जो है ब्रह्मज्ञान में डूबा के रखना और होश में लाना अर्थात की इस जगत में रखना जैसे की वो भक्तों के साथ मिल्क मां का सुमधुर नाम ले सके और भक्तों को भक्तों को थोड़ा बहुत उपदेश दे सके अभी ठाकुर के मां में ये बात नहीं की उनको उपदेश देना है ठाकुर के मां में वही है की ईश्वर का गुणगान करना है किंतु फिर भक्ति लोग तो फिर इस से सीखने हैं जो महापुरुष है वो ईश्वर का नाम लेते हैं ईश्वर की आराधना साधना करते हैं इस से तो वक्त सीखने हैं फिर उनको कोई अलग से बताने की जरूर नहीं है की आपको ऐसा करना है मैं क्या कर रहा हूं उससे सीखो उससे ज्यादा कुछ सीखने को नहीं मिलेगा मैं क्या कर रहा हूं उससे सीखो ऐसा ये लोगों का भाव राहत है [प्रशंसा] इसलिए ठाकुर ने कहा की लोक शिक्षा के लिए शंकराचार्य ने विद्या का हम रखा था ब्रह्म दर्शन होने से मनुष्य चुप हो जाता है जब तक दर्शन ना हो तभी तक विचार होता है गी जब तक पाक ना जाए तभी तक आवाज करता है पैक गी से शब्द नहीं निकलता पर पैक गी में कच्ची पुरी छोड़ दी जाति है तो फिर एक बार वैसा ही शब्द निकलता है जब कच्ची पुरी को पकड़ डाला तब वह फिर चुप हो जाता है वैसे ही समादिष्ट पुरुष लोक शिक्षक के लिए फिर नीचे उतरता है फिर बोलना है अभी समादिष्ट पुरुष को यह सोने की जरूर नहीं है की मैं लोगों को सिखाऊंगा उसको आदेश मिलता है मां का आदेश मिलता है इस्ट देवता का आदेश मिलता है की हां तुम नीचे आओ थोड़ा सा जैसे शंकराचार्य के मां में एक ऐसी वासना रख दी मैन ईश्वर ने की हां वो लोक शिक्षा करेंगे वह जो है शास्त्र के ऊपर में यह जो सब कंट्री वगैरा लिखेंगे तो इसलिए उनको इच्छा दे दी तो उसको पकड़ कर के शंकराचार्य जो है इस जगत में रहते थे जब तक मधुमक्खी फूल पर नहीं बैठी तब तक भन-भिन्न आई रहती है फूल पर बैठकर मधु पीना शुरू करने के बाद वह चुप हो जाति है हां मधु पान के उपरांत मस्त होकर फिर कभी कभी बन बनती है मधुमक्खी मधु बीती मधु का अश्वदन करती है अर्थात जब तक वो सड़क जो है ईश्वर भाव में मगन राहत है और मधु का अश्वर्धन छोड़ देती है अर्थात फिर से बहे जगत में आकर के भक्तों के साथ में हंसी मजाक करते हैं ईश्वर के नाम गुंडन करते हैं तालाब में घड़ा भारते समय आवाज होती है घड़ा भर जान के बाद फिर आवाज नहीं होती समाजसे हां यदि एक खड़े से दूसरे खड़े में पानी डाला जाए तो फिर शब्द होता है देखिए कितने सुंदर सुंदर उदाहरण से मधुमक्खी मधु पान करती है और फिर गुनगुनाती है यह जो घड़ा में पानी भारत जाता है तब शब्द होता है तब शांत हो जाता है कितने सुंदर सुंदर यह जो पाक जाता है तो आवाज नहीं होता किंतु जब पाक रहा है जब पहले पहले बार कढ़ाई में डाला गया है तब आवाज होता है और जब भी पाक जाए तब आवाज नहीं होता कितने सुंदर उदाहरणों से ठाकुर ने बताया की ब्रह्मा ज्ञान अपने के लिए जब साधना होती है तब हम ईश्वर के बड़े में विचार चिंतन करते हैं और ब्रह्म ज्ञान होने से फिर जो है हम सब विचार बैंड हो जाते हैं फिर यदि ईश्वर का आदेश पाते हैं की हां जगत में जाकर के लोक कल्याण के लिए मेरा नाम गुणगान कीर्तन करो तब फिर वो आकर के ईश्वर का नाम गुंजन फिर से करता है तो जब ऊपर जाते हैं तब ईश्वर के बड़े में चर्चा होती है फिर समाधि अवस्था में सब शांत और फिर समाधि से नीचे आते हैं तब फिर से चर्चा होती है थोड़ा बहुत सात्विक अहंकार रख दिया जाता है तो ऊपर जान के समय राजस्व अहंकार फिर ब्रह्मज्ञान सब शांत फिर एक सात्विक अहंकार के साथ में इस जगत में वापसी ये जो पूरा वो जो स्पिरिचुअल सर्किल है ठाकुर ने यहां पर समझा दिया कल फिर से मिलते हैं कल छुट्टी कल संडे है कल नहीं मंडे को मिलता है ओम शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णा परमेश्वर