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Sri Ramakrishna's Stories ·

स्वामी ब्रह्मानन्द कथित : श्रीरामकृष्णदेव : जैसा हमने उन्हें देखा 14 Nov 2022

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ओम sthapa kaychya धर्म स्वरूप तो आज फिर से हम मिले ठाकुर के बारे में बात करने के लिए राजा महाराज ठाकुर के जो मानस पुत्र द वह ठाकुर के बारे में क्या कहते हैं वह हम पढ़ रहे हैं वेयर रीडिंग वोट राजा महाराज ठाकुर मॉनेस्टिक विषय पर प्रेसिडेंट ऑफ रामकृष्ण ओल्डर इस सेइंग अबाउट ठाकुर श्री राम कृष्ण देव सभी को ईश्वर के रूप में ही देखते द श्री राम कृष्ण देव स्टूडियो एक बार स्वामी विवेकानंद ने उनसे कहा था महाराज महाशय आप हमें इतना अधिक प्रेम करते हैं तो आगे चलकर के आपकी जड़ भारत की अवस्था हो जाएगी वनडे विवेकानंद हो जाएंगे ऐसा स्वामी जी ने कपूर को कहा स्वामी विवेकानंद ठाकुर ठाकुर ने उत्तर दिया जड़ पदार्थ का चिंतन करते रहने से ही मनुष्य जड़भारत के समान हो जाता है किंतु महत्व केवल चैतन्य का ही चिंतन करता हूं तुम लोगों के प्रति आसक्ति का बोध होते ही मैं तुम लोगों को यहां से दूर हटा दूंगा अभी देखिए यह कितनी बड़ी बात का दी मैंने हमारा शरीर जड़ पदार्थ का बना हुआ है किंतु शरीर के भीतर में जो प्रकाश है वह आसमान का प्रकाश है या तो ईश्वर का प्रकाश है तो इस ईश्वर के प्रकाश का चिंतन करने से आपके भीतर में चैतन्य के गुण प्रवेश होंगे नहीं की यह जड़ शरीर रिलेशन है तो वह संसार के गुण जो है आप में आएंगे और आध्या इस रिलेशन होगा तो आपके भीतर में आध्यात्मिक गुण आएंगे इसीलिए बृहद raniyank उपनिषद में जो कहती जो है वो अपनी पत्नी को प्रेम करता है वो इसलिए नहीं की वो उसकी पत्नी है किंतु उसके भीतर में आत्मन है मा अपने बेटे को प्रेम करती है वो इसलिए नहीं की वो उसका बेटा है किंतु उसके बेटे के भीतर में उसके संतान के भीतर में आत्मा है मानिए आत्मा है एक दूसरे के भीतर में वह आत्मा का जो संबंध है या तो उसके भीतर में ईश्वरीय प्रकाश है यह जो चैतन्य है वो ऐश्वर्या प्रकाश है उसके साथ में यदि रिलेशन करते हैं तो यह ऐश्वर्या रिलेशन हो जाता है और दही संबंध जो होते हैं तो हमारा जो हमारे भीतर में जो कम कंचन यह कम क्रोध मैड लोभ मोहमद सर ये सब जो गुण है वो ज्यादा प्रकाशित होंगे योग शास्त्र में दो प्रकार के गुना के बारे में कहा गया है एक तो है क्लेश दूसरा है चित्रा प्रसाद तो यह चित्त के जो क्लेश क्या है अविद्या अस्मिता राग द्वेष और abhinevash यानी की हम दहिक संबंध किसी के साथ में रखते हैं तो हमारे भीतर में यह क्लेश युक्त गुना का प्रवेश होगा और ये चित्रा प्रसाद है मैत्री करुणा मोदित और उपेक्षा यदि किसी के साथ में हमारा आध्यात्मिक संबंध होता है तो एक चित प्रसाद जो है उसका उदय हमारे मैन में होगा तो यह मैत्री करुणा मोदित उपेक्षा कोई भी हमारे प्रति कोई बुरा asarn करता है या तो फिर मोदी का अभाव कोई हमारे से आगे बढ़ जा रहा है तो हमको ईर्षा नहीं होगी उपेक्षा यानी की यदि कोई हमारे साथ में दुर्व्यवहार करता है तो हम उसको क्षमा कर देंगे मुदिता और उपेक्षा करुणा यानी की किसी के प्रति लगने का संबंध किसी का जो कष्ट देखकर के हमारे मैन में दया का भाव होना तो यह मैत्री करुणा मुदिता और उपेक्षा यह चार तरह आते हैं मित्रता फ्रेंडली ने यदि कोई हमारे साथ में कटु व्यवहार करता है तो उसे क्षमा कर देना कोई हमारे से आगे बढ़ जा रहा है इस जीवन में या तो कोई हमारे से ज्यादा सक्सेसफुल हो जा रहा है तो उसके प्रति ईर्षा ना करना और करुणा यानी की दूसरों का कष्ट देख करके उसके प्रति हमारे मैन में प्रेम का उदय होना हमारे मैन में दया या करुणा का उदय होना जिससे की हम उसको मदद कर पाए तो आध्यात्मिक संबंध रहने से चित्त प्रसाद जो है हमारे मैन में उदित होते हैं और यदि दही संबंध होगा तो इस तरह अस्मिता राग फ्रेश और अभिनेश अविद्या और अस्मिता हमको पता है की विद्या यानी मैं यह शरीर हूं जड़ शरीर हूं यह हमको ज्ञान होना अस्मिता यानी की उसके भीतर से एक अहंकार होना की यह जो जन्म जन्मांतर के संस्कार लेकर के मैं आया हूं वो मेरे हैं और फिर मेरी अकांप्लिशमेंट से यह मैन बुद्धि चित अहंकार रूपी ये जो मेरा मैन है उसके साथ में मेरा आईडेंटिफिकेशन होना राग और द्वेष क्या है अच्छी चीज लगती हैं उसके प्रति आकर्षण और जो अच्छा नहीं लगता है उसके pratibirakti और अभिनेश क्या है मृत्यु का भाई तो ये राग भेष और abhinavesh और इसकी जो जड़ है और विद्या और अस्मिता ये दही संबंध की वजह से उत्पन्न होती है और मैत्री करुणा मुदिता उपेक्षा चित्त प्रसार आध्यात्मिक संबंध से उत्पन्न होते हैं इफ सी हैव रिलेशनशिप विद समवन विच इस फिजिकल विच इसे डी वर्ल्ड रिलेशनशिप इट विल प्रोड्यूस इनसाइड अस नेगेटिव इमोशंस विच आर कॉल्ड क्लेश इन योगशास्त्र अविद्या अस्मिता राग फ्रेश सी नो विद्या बॉडी रदर थन धीस आत्मा प्रॉब्लम अस्मिता माय आईडेंटिफिकेशन की मैन बुद्धि ऑल दिस ग्लेशियर विल आरिस इन माय माइंड आईएफ आई वर फिजिकल रिलेशन और वर्ली रिलेशन विद समवन एंड इफ स्पिरिचुअल रिलेशन की समवन दें इन माय माइंड विल राइट सो इट इस आफरिंग ऑफ एंड सी योग शास्त्र में नाम भी ऐसे रखते हैं जैसे हमने पिछली बार बात की थी ना की दुग्ध बी हो जाना उसे समय में ये जो जितने भी किसान द खेत में कम करते द सबको पता था की हान ये बीच का डाबड़ा हो जाने से उसमें से पेड़ में ही निकलता है adervise आप जो भी मैं डालेंगे तो उसमें से पेड़ निकलेगा तो यह अविद्या स्मितास अभी निवेश रूप ये जो क्लेश है वो तब तक प्रकट होते रहेंगे जब तक उसका रूट अभी दिया का बी रहा है और बीच दर्द हो जाएगा तो फिर ये क्लेश उत्पन्न नहीं होंगे वो कितने अच्छे नाम रखे हैं तो यहां पर नाम रखा है चित्रा प्रसाद प्रसाद यानी की ईश्वर को जो कुछ अर्पण किया है जिसको हम ग्रहण करते हैं ईश्वर हमको हमको प्रणाम हमको अपने पर दया करके कुछ देखते द इसको हम प्रसाद कहते हैं तो यह जो सद्गुण है उसको कितना अच्छा नाम दिया है चित्रा प्रसाद सो व्हाट आर दिस चित्त प्रसाद मैत्री करुणा मुदिता एंड उपेक्षा व्हाट इस मैत्री फ्रेंडली ने करुणा इस कंपैशन टुवर्ड्स समवन हो इस सफरिंग उपेक्षा संबंध ओवर रिलेशन शिप आर स्पिरिचुअल दें दिस चिक डी प्रसाद विल राइज इन अवर माइंड एंड इट विल मेक अवर लाइफ होली एंड पूरे एंड इट विल मेक अन स्वीट तू जर्नी फादर एंड फादर अहेड ऑन डी पथ ऑफ स्पिरिचुअल अभी चिता प्रसाद यदि हमारे मैन में उदित होते हैं तो हमारा जो मैन है वो करुणा वो प्रेम और ईश्वर की जो सुभाष होती है उससे भर जाएगा और हम जो भी है हमारे आसपास में जो रहते हैं उन लोगों के लिए हम वरदान स्वरूप हो जाएंगे यह भगवान बुद्ध है या तो भगवान महावीर है उसके जो चित्रा देखते हैं तो देखते हैं की शेर बैठा है एक साइड में और एक साइड में भेद बैठी है या तो गे बैठी है अभिषेक और गे या तो फिर यह भेद एक साथ में कभी नहीं बैठेंगे क्योंकि शेर का तो कम ही है इनका शिकार करना फिर भी यह जो भगवान बुद्ध है महावीर दोनों के बारे में से चित्रा दिखाएं देखो मिलते हैं की उनकी प्रेजेंस में यह जो शेर और ये भेद बकरियां ये गे ये अपनी जो भावना है वो खुलकर के उनके मैन में भी मित्रता और करुणा का उदय होता है तो यदि हमारे मैन में चित्त प्रसाद है तो ये chitaprasad की जो श्वास है उसकी जो खुशबू है उससे आकर्षित होकर के उसका जो मतलब रेडिएशन ओजस एक शक्ति जो प्रकट होती है इसको योग शास्त्र में कहते हैं ओजस तो ये ओजस जब हमने से बाहर निकलेगा तो ये ओजस से आकर्षित होकर के एवं ये पशु-पक्षी भी जो है वो अपनी जो अपनी जो जेनेटिक यूनिटी है माने उसका तो नेचर ही है उसको खाना वो भूल कर के मित्रता के साथ में एक दूसरे के साथ बैठेंगे आईएफ यू अफसर द पेंटिंग्स ऑफ इदर बुद्ध और महावीर जैन यू विल सी उन वैन हैंड देयर इस अन टाइगर एंड अंदर हैंड अकाउंट इस सीटेट टुगेदर फॉर गेटिंग देयर नीति वही देयर इस अन chitaprasad दिस फ्रेगरेंस ऑफ दिस चित्रा प्रसाद इट अट्रैक्ट्स एवं एनिमल्स एंड एवं था फॉरगेट डियर जेनेटिक एनटीटी अंधे बिकम फ्रेंडली टुवर्ड्स एक दिन ठाकुर कुछ कर्म वर्ष स्वामी जी से नहीं बोले किंतु स्वामी जी इससे anudbhign रहे और प्रसन्न ही बने रहे ऐसा देखकर ठाकुर ने कहा वह महान आत्मा है देखिए ये ठाकुर स्वामी जी के साथ में नहीं बोले उसका भी एक साइंस है ठाकुर को कैंसर हो गया था बहुत सारे लोग ठाकुर से दूर चले गए और सोचना शुरू कर दिए अरे इन्हीं को कैंसर हो गया है खुद को नहीं बचा का रहे मुझे क्या हेल्प करेंगे तो ऐसा एक bhavnat करके एक था और ठाकुर बोलते हैं 6 दिन वह माने अच्छे से कपड़े पहन के आके बोलता है ऐसा नहीं की ठाकुर के साथ में रहकर ठाकुर की सेवा करें ऐसा नहीं तो ऐसे सब दूर चले जा रहा है तो किसी ने ठाकुर को बोला की ठाकुर मतलब यह तो आपके इतने अच्छे शिष्य हैं आपको कैंसर हो गया तो ये लोग आपसे दूर क्यों चले गए तो ठाकुर ने कहा देखो ये कैंसर हुआ है लोग बादशाह एयर जनरल बंगाली शब्द है इसका अर्थ है जो chunande जो भक्त है उनको यहां पे रखेंगे और जो अपने खुद के लाभ के लिए आते द की ठाकुर के पास आएंगे हमको कुछ बेनिफिट हो जाएगा ठाकुर के पास जाकर के कुछ फायदा ले लेंगे तो वैसे लोग चले गए और अपने कोई बेनिफिट नहीं दे का रहे हमको क्या देंगे ऐसा सोच कर वे लोग चले गए तो यह फिल्टरिंग करने के लिए ठाकुर कभी-कभी इस तरफ से परीक्षा करते द यदि हम किसी के पास जाते हैं और हमारे साथ में उसने बात करना बंद कर दिया तो हमको भी हम कर आता है ना अरे उसको नहीं बात करना है तो क्या मेरे पास थोड़ी ना टाइम हो उसके साथ बात करने के लिए मैं भी चलता हूं मैं भी बात नहीं करूंगा ठाकुर ने इस तरह से स्वामी जी की परीक्षा करने के लिए नेचर उसके साथ बात नहीं करता वह रुकेगा की क्या करेगा तो ऐसा देखने के लिए उन्होंने परीक्षा की और देखा की स्वामी जी उससे विचलित बिल्कुल नहीं होते यहां पर तो प्रशांत संक्षिप्त में दिया है किंतु और कहीं पे विस्तृत पढ़ा है मैंने ठाकुर स्वामी जी जाकर के वो जो हजरा होता था ना वो ठाकुर का वो एक साथ में गांव का एक पास के गांव का एक रेवासी हजरा वो वहां पे रहता था वहां तो हजरा महाशय के साथ में बैठकर के स्वामी जी तंबाकू पंगे और फिर वहां पर थोड़ा बहुत घूम करके वापस चले जाएंगे भले चैट ठाकुर ना बोला है और फिर से बात करना शुरू कर दिया टॉक विथ मी अलसो विल नॉट टॉक की सेइंग इंसटिड ऑफ सेइंग डेट स्वामीजी यूज्ड तू कम रेगुलरली एंड ही वुड सीट विथ हजरा महाशय हु वास्ता जेंटलमैन डूइंग साधना ही उसे तू लीव इन विलेज नियर बाय ठाकुर्स अमरपुर सो हजरा महाशय यूज्ड तू लीव वेरी नियर बाय तू ठाकुर एन्सेस्ट्राल विलेज एंड ही उसे तू सीट इन ठाकुर्स वरांडा ऑफ ठाकुर स्वरूप एंड हिज तू डू जप ऑन हिज माला सो स्वामी जी विल कम एंड सीट विथ हजरा महाशय एंड ही विल स्मोक समथिंग आ हुक्का और एंड फॉर ए विले एंड दें ही विल वंडर हियरिंग इविल रिटर्न्स बट ही नेवर स्टॉक कमिंग तू ठाकुर अगेन कोल्ड हिम इन हिज रूम एंड स्टार्टेड टॉकिंग विथ हिम नॉट पुट ऑफ आते ऑल व्हेन हिज तू आई वैन आई स्टॉप टॉकिंग विद हिम एंड वही ठाकुर नरेन बिकॉज वेंट ठाकुर हेड कैंसर में ऑफिस डिसएबल स्टॉप कमिंग तू ठाकुर डेथ हॉट डेट आई है कैंसर एंड इफ ही कनॉट से हिमसेल्फ हो इस इट गोइंग तू से उस व्हाट बेनिफिट इस ही गोइंग तू गिव तू अन सो दिस टॉप गुड कमेंट सो ठाकुर वांटेड तू सी डेट कॉम तू हिम बिकॉज हिज जेनुइनली अट्रैक्टिव टुवर्ड्स इन और बिकॉज ठाकुर गिव्स हिम एंड आउट ऑफ टर्न रिस्पेक्ट एंड वेलकम हमने जहां पर भी स्वामी जी के बारे में देखा है हमने देखा है की ठाकुर उनको कितना प्रेम करते द चार-पांच एक दर्जन डिसएबल बैठे हैं तो ठाकुर इस तरह से बात करते हैं जैसे वह नरेंद्र के साथ में ही बात कर रहा है वो पहली बार आए द तो ठाकुर ने रोना शुरू कर दिया था उनका हाथ पकड़ लिया था कहां की तुमने इतने साल मुझे वेट क्यों करवाया तुम इससे पहले मेरे पास क्यों नहीं आए तुम नहीं आते तो तुम्हारी एक्शंस में ये जो संसारी लोगों की बात सुनकर के मेरे कान ज्वेलर्स गए तुम आए क्यों नहीं तो इतना जो प्रेम दे रहे द ठाकुर सो इससे आकर्षित हो करके नरेन ए रहे द की मैं रेंट के मैन में सही सही एक आध्यात्मिक जिज्ञासा थी जिससे की आकर्षित हो करके वो आते द तो ठाकुर का प्रेम उनको खींच लता था की नरेंद्र उनको खींच लता था यह टेस्ट करने के लिए ठाकुर ने ऐसा किया था प्रीवियस टेस्ट ठाकुर वेलकम नरेंद्र ठाकुर फॉर डी फर्स्ट टाइम ठाकुर सो ही वांटेड तू सी इफ नरेन कम्स बिकॉज ऑफ दिस एक्स्ट्राऑर्डिनरी वेलकम आउट ऑफ टर्न वेलकम और ही कम्स बिकॉज तू लर्न स्पिरिचुअल थिंग्स आफ्टर दिस टेस्ट ठाकुर वेलकम से बट बिकॉज ही रियली रेस्पेक्ट वरशिप ठाकुर एंड वांट्स तू लर्न फ्रॉम हिम अन्य एक दिन जब केशव चंद्र सेन ठाकुर के एक भक्त उन्होंने स्वामी जी की प्रशंसा की तो ठाकुर ने उनसे कहा इसकी इतनी अधिक प्रशंसा मत करो अभी इसे विकसित होना बाकी है तो अभी देखिए यह जो प्रशंसा जो है वह सर में चली जाती है अपने मतलब प्रशंसा से हम मतलब यह हो जाएंगे कभी अहंकारी हो जाएंगे तो हमको तो पता है की हम कल जो है आध्यात्मिक रास्ते पे एक बहुत बड़ी अड़चन है अभी हम प्रश्न कर सकते हैं की नरेंद्र तो शिव के अवतार द उनको यह सब अहंकार वगैरा कैसे होगा किंतु हम तो ठाकुर के खुद के जीवन में देखते द की ठाकुर कभी अपने को मैं ठाकुर हूं या ऐसा कुछ या तो अपनी प्रशंसा कभी नहीं करते द अपने शरीर की ओर अंगुली करके और पॉइंट करके कहते इसने किया इसको खाना है यहां तक वह nirahankar होने की चेष्टा करते द यह जो कम कंचन है या तो यह दही आसक्ति है इससे आप फिर भी धीरे-धीरे करके बच सकते हैं इससे फिर भी यदि आप जिस वातावरण में रह रहे हैं वो सही है तो फिर भी इससे आप बच सकते हैं किंतु यह जो अहंकार है अहंकार से मुक्ति पाना बहुत ही कठिन है इसलिए ठाकुर का कहना था की किसी भी व्यक्ति की उसके मुंह पे प्रशंसा नहीं करनी चाहिए हान कभी-कभी आप कंपलीमेंट्स दे सकते हैं गलत कुछ नहीं है एवरीवन लाइक्स कंपलीमेंट कंपलीमेंट्स देना एक संसार में क्या रिलेशनशिप बनाए रखने का एक अच्छा तरीका है किंतु फिर प्रशंसा करना यानी की उसकी चापलूसी करके उससे कुछ कम निकल लेना या तो फिर बार-बार प्रशंसा करते रहना वह भी ठीक नहीं है वनडे केशव सेन ब्रेस्ट नरेन इंफ्रंट ऑफ ठाकुर ठाकुर अहंकार इन हिम एंड डेट विल मेक हिम आते डेट विल रिड्यूस एफिशिएंसी वैन दे एवं इन ठाकुर स्लाइस प्लीज सी डेट व्हेन समवन उसे तू प्राइस हिम ही डिड'टी लाइक एंड व्हेन ही वांटेड तू रेफर तू हिम यू वुड नेवर से डेट आई हैव डैन दिस यू वुड ऑलवेज हिमसेल्फ अन फिंगरप्रिंट टुवर्ड्स हिमसेल्फ एंड हिल्स पर्सन तू रिड्यूस और अट्रैक्शन प्रार्थना का महत्व क्या है प्रार्थना एक ऐसी शक्ति है जो की अहंकार की जड़ पे पुथरा घाट करती है बाकी ये जो तपस्या है कर्मयोग है बाकी सब चीज जो है उससे कम कंचन जो है हमारे शिन हो जाएंगे किंतु यह जो अहंकार को निवि शेष करना है अहंकार की जड़ से काटना है अहंकार को जड़ से काटना है तो ये प्रार्थना ही सबसे ज्यादा असर कारक ये हथियार है क्योंकि हम अपने अहंकार को ईश्वर के चरणों में समर्पित करते हैं अपने अहंकार को ईश्वर के चरणों में बाली प्रदत करते हैं यह जो बाली देना इसके पीछे भी यही है की अहंकार की बाली देते हैं तू गेट रीड ऑफ अवर अहंकार बाय डूइंग अट्रैक्शन और अवर डिपेंड्स अपॉन कमा एंड कंचना बट इफ यू वांट तू गेट रीड ऑफ अवर अहंकार मोस्ट एफिशिएंट मेथड इस प्रेयर तू ऑफर स्वामी जी और विच एवर ishtviy वर्षीय एंड प्राय तू डेम दे प्लीज मेक मी होली एंड पूरे एंड टेक आवे माय अहंकार यह मंदिर में जाते हैं ईश्वर के सामने जो हम पूजा करते हैं या ईश्वर को कुछ भी ऑफर करते हैं यह जो ऑफर करना ये कभी पेड़ा है या मिठाई है या स्वीट है या तो फूल है या तो पैसा है यह कुछ भी हम ऑफर करते हैं हम अपने अहंकार को ठाकुर को ऑफर करते हैं फ्लावर्स फ्रॉम इनसाइड है तो आज यहां तक कल फिर से मिलेंगे ओम शांति शांति