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Swami Vivekananda's Macrocosm & Microcosm ·

ज्ञान योग स्वामी विवेकानन्द Cosmos Microcosm 27 Mar 2024

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ओम स्थापक च धर्मस्य सर्वधर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठा राम कृष्णाय ते नमः तो बड़ा ही दुखद समाचार शायद सबने सुना ही होगा कि परम पूजनीय प्रेसिडेंट महाराज का कल रात को महासमाधि हो गई और अभी सब न्यूज आ रहा है धीरे-धीरे जीएस महाराज का प्रेस रिलीज भी आया तो मैंने अपने ग्रुप में शेयर भी किया है तो जैसे यह जन्म मृत्यु जरा व्याधि की यह साइकिल है वह चलती रहेगी और एक बार जैसे अपने एक सीनियर स्वामी जी ने कहा था कि प्रति प्रत्येक वर्ष प्रत्येक साल हम बेलूरमठ में एक दुर्गा पूजा में एक मूर्ति की स्थापना करते हैं पूजा हो जाती है तो मूर्ति का विसर्जन कर देते हैं तो वैसे ही यह प्रेसिडेंट महाराज व श्री राम कृष्ण लोक में चले जाते हैं तो दुख तो होता ही है किंतु यह भी है कि यह साइकिल में से हम सबको पसार होना है और हम लोग एक्चुअली जो बात कर रहे हैं वह बात भी इसी तरह से है ज्ञान युग में अभी तक हमने देखा कि सर्वप्रथम तो मैक्रो कजम और माइक्रो कजम कॉस्मस मैक्रो कोम माइक्रो कजम यह दो प्रवचन के ऊपर में हम चर्चा कर रहे हैं मैक्रो कजम का प्रवचन समाप्त हो गया माइक्रो कजम का चल रहा है माइक्रो कजम का जो की थीम है जो अपना मेन इसका थीम है स्वामी जी साइंस के द्वारा आत्मन का अस्तित्व प्रतिपादित करने का प्रयास कर रहे हैं और उन्होंने एक के बाद एक आर्गुमेंट दिए कि मन बुद्धि चित्त अहंकार और यह इंद्रिया यह पंचमहाभूत का बना हुआ इंद्रियों का बना हुआ देह और यह मन बुद्धि चित्त अहंकार का बना हुआ सूक्ष्म शरीर इन दोनों से परे आत्मन है और आत्मन के गुणधर्म क्या है व्हाट इज द नेचर ऑफ दी आत्मन यह सब हमको स्वामी जी ने बताया मैं एक की पैसेज पढ़ लेता हूं उसके बाद में हम आज का प्रारंभ करेंगे स्वामी जी आत्मन के बारे में क्या कहते हैं इट ऑलवेज एसिस्टेड देयर वाज नेवर ए टाइम व्हेन इट डिड नॉट एजिस्ट आत्मा हमेशा था ऐसा कोई समय नहीं था जब आत्मन नहीं था बिकॉज इफ द सोल डिड नॉट एक्सिस्ट वेयर वाज टाइम यदि समय आत्मन नहीं था तो समय कहां था टाइम इज इन द सोल इट इज व्हेन द सोल रिफ्लेक्ट्स इट्स पावर ऑन द माइंड एंड द माइंड थिंक्स दैट टाइम कम्स समय आत्मन के भीतर में है आत्मन अपनी शक्ति अपना मेनिफेस्टेशन मन के ऊपर करता है मन जब सोचने का प्रारंभ करता है तब तो समय प्रारंभ होता है जब कोई कार्य प्रारंभ होगा तब समय प्रारंभ होगा कार्य से पहले सोचने से पहले या तो फिर आत्मन का यह सूक्ष्म देह के साथ में संगम होने से पहले समय अवकाश मैटर एनर्जी स्पेस टाइम कुछ भी होगा नहीं वेन देर वाज नो सोल सर्टेनली देर वास नो थॉट जब यहां पर लिखा है स्वामी जी ने कि व्हेन देर वाज नो सोल सोल अर्थात कि जीवात्मा यह जीवात्मा अर्थात कि यह आत्मन है और यह जड़ शरीर है इन दोनों के बीच की मिसिंग लिंक इवोल्यूशन की लैंग्वेज में इसको कहेंगे मिसिंग लिंक अर्थात कि इवोल्यूशन वाले ये जो सर्च करते हैं ना ये जंगल में जाकर के पहाड़ में जाकर के वो देखेंगे वो खुदाई करके जमीन में कि किसकिस तरह के फॉसिल मिलते हैं तो अभी मनुष्य का स्ट्रक्चर कैसा है पता है डायनोसोर का स्ट्रक्चर या तो ये ए है ए का बंदर का स्ट्रक्चर कैसा है वो पता है किंतु मनुष्य और जब बंदर में से मनुष्य हो रहा था उस समय जो स्ट्रक्चर होगा वो जिस तरह का वो रहा एप मैन कहेंगे जिसको उसको कहेंगे होमो इरेक्टस तो ये होमो इरेक्टस है उसका स्ट्रक्चर कैसा होगा वो आधा बंदर जैसा होगा आधा मनुष्य जैसा होगा तो आज तो वो जीवित नहीं है उसका तो वो तो मने चला गया या माने समय के प्रवाह में बह गया है तो वह है मिसिंग लिंक बंदर और मनुष्य के बीच में माने ए और होमोसेपियंस के बीच में मिसिंग लिंक है होमो इरेक्टस तो जैसे ही यह होमो इरेक्टस का यह हमको हार्ड पिंजर मिल गया स्केलेटल मिल गया तो हमको पता चला कि हां यह है कि इसी तरह से एप में से मनुष्य हुआ होगा इवोल्व हो करके तो व है ये जीवात्मा है वह है मिसिंग लिंक हमको दिखता नहीं हम अनुभव करते हैं किंतु खैर यह लुप्त नहीं हो गया यह तो हमारे साथ में ही है आत्मन और यह जड़ शरीर के बीच में तो जब यह जीवात्मा नहीं होता तब यह विचार नहीं होता विचार एंड विदाउट थॉट देयर वाज नो टाइम बिना विचार के यह समय नहीं होता हाउ कैन द सोल देयर फोर बी सेड टू बी एसिस्टिंग इन टाइम वन टाइम इट सेल्फ एजिस्ट इन द सोल तो हम कैसे कह सकते हैं आत्मन समय के भीतर में है जबकि समय ही आत्मन के भीतर में है तो यह की पैसेज हमने अभी तक का जो मैंने स्टडी किया उसका था अभी हम आगे से देखते हैं आगे का अपना जो टॉपिक चल रहा है व है रिइनकारनेशन या तो फिर कहेंगे कि पुनर्जन्म और पुनर्जन्म के बारे में स्वामी जी ने कहा कि जैसे यह क्रिश्चियन थियोलॉजी है वे लोग क्या कहते हैं एक बार आपका देह अ आपका जन्म होता है तो आपके देह का जन्म और आपकी की आत्मा मानी यह लोग जिसको आत्मा कहते हैं क्रिश्चन लोग माने तो आपकी आत्मा और आपका देह एक साथ में जन्म लेगा और आपका देह जब विनाश पाम वह जब मृत्यु होगा आपके देह का तब आपकी आत्मा उसके कर्म के अनुसार या तो स्वर्ग में जाएगी या तो नरक में जाएगी और इटरनल डेमन या तो फिर यह इटरनल बीटिट्यूड ये क्या या तो फिर नर्क में जाएगी तो हमेशा के लिए नरक भोग करेगी स्वर्ग में जाएगी तो हमेशा के लिए स्वर्ग का उपभोग करेगी स्वामी जी कहते हैं कि यदि आप यह कहते हैं कि जिसका मृत्यु नहीं है आत्मन का तो उसका जन्म कैसे हो सकता है यह तो कंट्रा इक्टर लगता है लॉजिकली जो यदि देह आपका जन्म है तो देह का मृत्यु भी है और यदि आत्मन का मृत्यु नहीं है तो उसका अर्थ यह कि आत्मन का जन्म भी नहीं होना चाहिए आत्मन का मृत्यु नहीं है तो उसका जन्म भी नहीं है तो यह एक स्टेप स्वामी जी ने कहा उसके बाद में दूसरा स्टेप होता है कि यदि आत्मन का जन्म और मृत्यु नहीं है तो एक देह के चले जाने के बाद आत्मन क्या करता है तो वह एक नया देह धारण करता है स्वामी जी कहते हैं कि यह जो बात है आत्मन एक के बाद एक देह धारण करता जाता है और यह आत्मन और देह के बीच में यह जो सूक्ष्म शरीर है स्थूल शरीर और सूक्ष्म शरीर और यह आत्मन तो आत्मन तो इटरनल है समय और काल के परे हैं कि किंतु यह देह पंचमहाभूत का जड़ देह और यह सूक्ष्म शरीर यह दोनों एक सक्ष देह चला जाता है और सूक्ष्म शरीर एक के बाद एक एक के बाद एक देह धारण करता जाता है सूक्ष्म शरीर का इवोल्यूशन होता है और यह इवोल्यूशन होते होते जैसे-जैसे अच्छे कर्म करता जाएगा वैसे-वैसे बेटर एंड बेटर बॉडीज वो देह प्राप्त होता रहेगा एक समय आएगा कि साधना संपूर्ण हो जाएगी और वो मुक्ति प्राप्त करेगा और यह सूक्ष्म देह व शून्य में विलीन हो जाएगा हम लोगों की मुक्ति हो जाएगी तो यह सूक्ष्म देह है उसका जन्म है उसका मृत्यु है और देह व बार-बार जन्म मृत्यु अर्थात देह धारण करता है तो यह हो गया लॉजिक स्वामी जी का कि देह है उसका टाइम पीरियड बड़ा ही शॉर्ट है जन्म मृत्यु का सूक्ष्म शरीर है उसका जन्म मृत्यु का टाइम फ्रेम बहुत लं है कोटि कोटि जन्मों तक कोटि कोटि देह धारण करने तक वह शायद जीवित रह सकता है और यह जो आत्मन है दैट इज एक्चुअली बियोंड टाइम तो यह तीन लेवल पे मनुष्य का एक्जिस्टेंस है तीन टाइम फ्रेम में हम जीते हैं एक तो है कि ह्यूमन टाइम फ्रेम दूसरी है कि यह सटल बॉडी की टाइम फ्रेम सूक्ष्म देह की टाइम फ्रेम और तीसरा एसिस्टेंसिया टाइम तीन टाइम फ्रेम में हमारा अस्तित्व है इतना कहने के बाद में स्वामी जी कहते हैं आई विल ट्राई टू आंसर अ फ्यू ऑब्जेक्शंस दैट आर जनरली ब्रॉट अगेंस्ट द थिरी यह थियर है इसके अगेंस्ट में जो कोई भी ऑब्जेक्शन है उसका उत्तर देने का मैं प्रयास करूंगा लद मेनी ऑफ यू विल थिंक दे आर वेरी सिली ऑब्जेक्शंस स्टिल वी हैव टू आंसर देम यदि आप लोगों को ऐसा लगे कि ऑब्जेक्शंस तो बड़े ही सिली है अर्थात कि इसका मने मूर्ख जैसे है यह ऑब्जेक्शन किंतु फिर भी ऑब्जेक्शन का उत्तर तो हमको देना ही होगा फॉर सम टाइम्स वी फाइंड दैट द मोस्ट थॉटफुल मेन आर रेडी टू एडवांस द सिस्ट आइडियाज यह जो बहुत ज्यादा बुद्धिशाली लोग होते हैं वह यह जो महामूर्ख जैसे आइडियाज है उसको एडवांस करने में उसके बा बारे में बात करने से बिल्कुल बाज नहीं आते उनको बड़ा ही आनंद आता है वेल हैज इट बीन सेड दैट देयर नेवर वाज एन आइडिया सो एब्सर्ड दैट इट डिड नॉट फाइंड फिलोसोफर टू डिफेंड इट हमें अच्छा माने वो ठीक ही कहा गया है कि ऐसा कोई भी विचित्र आइडिया नहीं कि जिसको डिफेंड करने के लिए कोई ना कोई फिलोसोफर ना मिला हो अर्थात कि जितना ही वो उटपटांग आईडिया है कोई ना कोई फिलोसोफर खड़ा होकर के इस आईडिया को डिफेंड तो करता ही तो ठीक है तो फर्स्ट ऑब्जेक्शन इज व्हाई डू वी नॉट रिमेंबर अवर पास्ट सबसे पहला ऑब्जेक्शन है कि यदि हमारा सूक्ष्म शरीर बार-बार देह धारण करता है तो इस देह में जो हम है तो पुराने देह पिछले आए हुए देह के बारे में हमको कुछ याद क्यों नहीं है हमारी मेमोरीज क्यों वहीं तक अटक गई है अभी स्वामी जी उत्तर देते हैं डू वी रिमेंबर ऑल ववर पास्ट इन दिस लाइफ अभी मैंने पिछले जन्म की कोई बात याद रखना तो छोड़ दो इस जन्म में हमारे साथ में जो कुछ भी हुआ क्या सब कुछ हमको याद है क्या हाउ मेनी ऑफ यू रिमेंबर व्हाट यू डिड व्हेन यू वेर बेबीज तुम लोगों में से कितने लोगों को पता है कि तुम जब बच्चे थे तो तुमने क्या किया है बेबी यानी कि बच्चा नन ऑफ यू रिमेंबर योर अर्ली चाइल्डहुड एंड इफ अपॉन मेमोरी डिपेंड्स ऑन योर मेमोरी डिपेंड्स इफ अपॉन मेमोरी डिपेंड्स योर एक्जिस्टेंस देन दिस आर्गुमेंट प्रूव्स दैट यू डिड नॉट एक्सिस्ट एस बेबीज हम में से कोई भी अपना बचपन अर्ली मने व मैंने जब एक साल के थे दो साल के थे उस समय हमने क्या किया कैसे थे हम में से किसी को याद नहीं है और यदि यह अपनी याददाश्त के ऊपर में ही हमारा अस्तित्व होता तो तो हम तो ये कह सकते हैं कि बिकॉज कि मुझे याद नहीं है कि मैं एक साल का था दो साल का था न साल का था तब मैंने क्या किया तो तो फिर यह प्रूव होता है कि मैं एक साल 2 साल 3 साल का था ही नहीं जब से मेरी याददा स्टार्ट होती है मैं सोचता हूं कि मेरी अर्लीस्ट मेमोरीज क्या है तो मुझे याद है कि एक छोटे से गांव में हमें बाल मंदिर में जाया करता था बाल मंदिर अर्थात कि आज का ये किंडर गार्डन ये केजी जिसको बोलते हैं वहां पर मैं जाया करता था वह मुझे याद है मेरी अर्लीस्ट मेमोरी अभी यह बाल मंदिर में बच्चे कब से जाते हैं आई थिंक चार साल के 5 साल के होने के बाद में तो क्या इससे पहले मेरी मेमोरीज नहीं है इसके पहले मेरी कोई याद नहीं है तो उसका अर्थ है कि मैं एक दो तीन साल का था ही नहीं सीधा चार साल का होकर के ही मैंने जन्म धारण किया है किस तरह की यह विचित्र बात है बिकॉज यू नॉट रिमेंबर योर बेबी हुड माने अपना बेबी हुड हम सब बेबी थे वो आप त कैसे थे वो याद नहीं है बोल कर के यह तो प्रूव नहीं कर सकते कि हम लोगों का अस्तित्व नहीं था अच्छा यहां पर स्वामी जी ने वैसे यह तो बात कर दी किंतु आज की मॉडर्न फिजियोलॉजी के अनुसार यह ब्रेन डेवलपमेंट जो होता है तो बच्चे का जब जन्म होता है तो बच्चा तो बहुत ही छोटा होता है ना तो उसका ब्रेन जो है ब्रेन भी बड़ा छोटा होता है और छोटे से ब्रेन में ही फिर धीरे-धीरे करके बच्चा बड़ा होता है तो ब्रेन बड़ा होता है और ब्रेन बड़ा होने के बाद में यह मेमोरी कैपेसिटी उसकी बनती है ये एक मैंने चार्ट देखा था यह चार्ट कैसा है पता है कि यह ब बच्चे का यह शून्य अर्थात कि जन्म हुआ जन्म से लेकर के सीधा ऊपर जाता है तीन चार साल पाच छ साल का है ये एकदम ऊपर जाता है छ सात साल 10 11 12 साल का सीधा ऊपर जाता है उसके बाद में यह लेवल आ जाता है अर्थात कि क्या है कि ब्रेन डेवलपमेंट है वो बचपन से लेकर के 121 साल तक फुल फ्ले एकदम सुपर फास्ट स्पीड में चलता है अपना जो एक एडल्ट ह्यूमन होता है उसका जो ब्रेन का साइज होता है वो ब्रेन का साइज वो बचपन में ही ये 121 साल की उम्र में ही मोर और लेस आ जाता है उसके बाद में ब्रेन का साइज बहुत ही धीमे-धीमे करके इंक्रीज होता है तो यह बचपन में ही ये जब शरीर बड़ा होता है तभी हमारा ब्रेन का साइज एकदम फटाफट बढ़ने लगता है आप यह अपना देह के बारे में भी देखिए बच्चा जब जन्म लेता है तो इतना छोटा होता है किंतु यह जब फिफ्थ स्टैंडर्ड मने 12 13 14 15 साल का हो जाता है तो उसकी हाइट जो होती है वह एक एडल्ट ह्यूमन के हाइट के जैसी हो जाती है माने यह 121 साल में जितना रेपिडली उसका हाइट वेट ब्रेन का साइज बढा है उतना रेपिडली बाद में नहीं बढ़ेगा एक्चुअली ऐसा होगा कि बाद में धीरे-धीरे डिटेरेड होगा तो यह एक ह्यूमन बॉडी का जो डेवलपमेंट है फिजिकल डेवलपमेंट वो अर्ली इयर्स में होता है इसीलिए यह फिजियोलॉजिस्ट जिनको कहते हैं या साइकोलॉजिस्ट है वो कहते हैं कि ये तीन चार साल के पहले ब्रेन की साइज इतनी छोटी होती है कि वह मेमोरी को धारण करने के लिए सक्षम नहीं होता यह तो एक बात हुई स्वामी जी जो कहते हैं उसके अगेंस्ट में यदि हमको आर्गुमेंट देना है कि हम छोटे थे तो उन दिनों की बात हमको क्यों याद नहीं है तो यह तो एक पहली बात हो गई कि अरे भाई मतलब ब्रेन ही छोटा था तो छोटे से ब्रेन में तो मेमोरी कहां से टिकेगी ब्रेन जब बड़ा हुआ तीन चार पा साल के हुए हम सबकी जब अर्लीस्ट जो यादें होगी वो उस समय की होगी तो तभी ब्रेन की साइज इतनी बड़ी हुई कि वो हमारी मेमोरीज को धारण करने के लिए सक्षम था ऐसा तो हम कह सकते हैं स्वामी जी के साथ में सामने अगेंस्ट में ये एक आर्गुमेंट दूसरा है कि देखिए कि अपने हिंदू धर्म में गर्भ संस्कार बोलकर के एक एक पूरी एक प्रणाली है एक प्रथा है अर्थात कि जब बच्चा मां के पेट में होता है तभी से मां अच्छे-अच्छे संस्कार युक्त अच्छे सद ग्रंथ अच्छे साधु संग सत्संग वगैरह करना आरंभ कर देती है तो बच्चे का जो संस्कार होता है उसका जो सबकॉन्शियस होता है उसमें ऑटोमेटिक यह बात धीरे-धीरे लिखनी शुरू हो जाती है उसका संस्कार अच्छा होना शुरू हो जाता है महाभारत में तो यहां तक है कि अभिमन्यु जो था उसने वह जो चक्रव्यूह भेदने का वह कहां पर सीखा जब उसकी मां गर्भवती थी भगवान कृष्ण उसको बता रहे थे तब मां के गर्भ में ही उसने यह सब सीख लिया था तो यह सब तो है कि यह जदी बच्चा बचपन में ही मां के गर्भ में से ही यदि मां कोई अच्छे सद ग्रंथ का पाठ करती है अच्छा सत्संग करती है तो उसका अच्छा संस्कार तो बच्चे के ब्रेन के ऊपर में लिखा ही जाएगा भले ही चाहे बच्चे को वैसे बड़ा होकर के कॉन्शियस मेमोरी का भी है ना एक कॉन्शियस होता है लेयर एक सबकॉन्शियस लेयर होता है मेमोरी का भी तो सबकॉन्शियस लेयर पे चेतना का जो नीचे का स्तर है एक चेतना का स्तर है जिससे कि हम पूरे विश्व के साथ में इंटरेक्शन करते हैं और चेतना का एक नीचे का स्तर है सबकॉन्शियस लेवल जहां पर बहुत कुछ पड़ा रहता है तो वहां पर यह जब अच्छे संस्कार गर्भ के व वहां पर लिखित हो जाएंगे यह तो अपने हिंदू धर्म में ही है तो स्वामी जी ने यह जो कहा कि बच्चा हम जब बच्चे थे तो मेमोरी हमारी नहीं थी उन दिनों की यादें हमारी नहीं थी तो क्या इसका अर्थ यह है कि हम लोग उस समय जीवित नहीं थे नहीं यह बात तो नहीं है किंतु खैर कि स्वामी जी जब कोई भी उपमा देते हैं तो उसको उपमा के रूप में ही लेना है जैसे कि हमको बचपन की यादें हमारे कॉन्शियस लेवल पर नहीं थी कहेंगे कि सबकॉन्शियस लेवल पे है तो वैसे ही पूर्व जन्मों की यादें हमारे कॉन्शियस लेवल पर नहीं है किंतु सबकॉन्शियस लेवल पे है क्योंकि यह सबकॉन्शियस लेवल जो है वो यह सूक्ष्म शरीर के साथ-साथ में जन्म जन्मांतर से हमारा पीछा करता आया है और यह कॉन्शियस लेयर है उसी को हम इस जन्म में बनाते हैं जब एक ऐसा समय आ जाएगा कोई एक बड़ी घटना होगी या तो कोई दिव्य दर्शन होगा तो यह कॉन्शियस और सबकॉन्शियस के बीच का यह जो गेट है कॉन्शियस और सबकॉन्शियस के बीच कीय जो बैरियर है वोह टूट जाएगी यह बाधा टूट जाएगी और सबकॉन्शियस में जो कुछ भी रहेगा अपने पूर्व जन्म का इतिहास या तो फिर यह दिव्य ईश्वरीय संस्कार सब कुछ फटाफट करके यह क लेवल पे आकर के मिलित हो जाएंगे यानी कि यह देखिए कि आजकल हम लोग यह कहते हैं ना मेरा जो पर्सनली ऐसा सोचना है कि यह हम लोग कहते हैं कि सबसे आखिरी लेयर है सबकॉन्शियस उसके ऊपर का लेयर है कॉन्शसनेस और उसके ऊपर का लेयर है सुपरकॉन्शियस अभी मैं क्या सोचता हूं देखिए सबके सबसे ऊपर में तो है आत्मन जो कि समय और अवकाश के परे है किंतु इसके बाद में में आता है यह सूक्ष्म शरीर और इसके बाद में आता है यह स्थूल शरीर तो यह सूक्ष्म शरीर है व हो गई हमारी सबकॉन्शियस या तो फिर कहेंगे कि हां वो हो गई हमारी सबकॉन्शियस और यह स्थूल शरीर है उसके साथ में हमारी कॉन्शसनेस रिलेटेड है जब यह सबकॉन्शसनेस के दरवाजे खुल जाते हैं तो वही सुपरकॉन्शियस होक के हमको दिखाई देती है अर्थात कि ये आत्मन और अपनी यह जो बाह्य कॉन्शसनेस के बीच में जो मिसिंग लिंक है वह है अपनी सबकॉन्शियस और यह सबकॉन्शियस के दरवाजे खुल जाएंगे तो उसी को हम सुपरकॉन्शियस रूप से प्रतीत होंगे यानी कि ये सबकॉन्शियस और सुपरकॉन्शियस कोई अलग-अलग चीजें नहीं है जब ये दरवाजे बंद होते हैं कमरे का दरवाजा बंद होता है अंधेरा होता है तो हमको लगता है यह अंडरग्राउंड है और हम सबकॉन्शियस में है किंतु दरवाजे खुल जाएंगे यह 1000 वोट का ये लाइट बल्ब ऑन कर देंगे पूरा प्रकाश से प्रकाशमान हो जाएगा देदीप्यमान हो जाएगा तब हमको लगेगा कि अरे यही कमरा तो सुपरकॉन्शियस है किंतु सुपरकॉन्शियस और सबकॉन्शियस में एक ही है कि एक प्रकाशमान है एक अंधेरे में है जब यह आत्मन और यह स्थूल देह दोनों के बीच में कनेक्शन बैठ जाता है तब यह सुपरकॉन्शियस माने सबकॉन्शियस सुपरकॉन्शियस होकर के प्रकाशमान होता है तो ये मेरा थिरी है तो ये सबकॉन्शियस कहो ना कि सुपरकॉन्शियस कहो उसके भीतर में पूर्व जन्म के भी संस्कार और इस जन्म के भी संस्कार अर्ली संस्कार गर्भ के संस्कार या तो बिल्कुल अर्ली बचपन के संस्कार वहीं पर सब स्टोर होते हैं जितने भी संस्कार हैं सबको हमको वर्कआउट करना ही करना है तो यह यदि ऐसा आप ऑब्जेक्शन खड़ा करेंगे स्वामी जी के अगेंस्ट में तो उसका यह एक उत्तर होगा कि कॉन्शियस निस को दो लेयर में बांट दो एक लेयर के बारे में हम हमको पता है हम अवेयर है दूसरे लेयर के बारे में हम अनअवेयर है उसके बारे में हमको पता नहीं है इट इज सिंपली अनमिस गटे नॉनसेंस टू से दैट अवर एक्जिस्टेंस डिपेंड्स ऑन अवर रिमेंबरिंग इट हमारा अस्तित्व हमारी याददाश्त के ऊपर में डिपेंडेंट है यह कहना एक नंबर की मूर्खा है व्हाई शुड वी रिमेंबर द पास्ट हम लोग इ भूतकाल को क्यों याद रखें ट ब्रेन इज गन ब्रोकन इनटू पीस एंड अ न्यू ब्रेन हैज बीन मैन्युफैक्चर्ड जिस ब्रेन के भीतर में यह भूतकाल के यह मेमोरीज रखी हुई थी वह ब्रेन तो चला गया उसके टुकड़े टुकड़े हो गए अभी एक तो नया ब्रेन का व गठन हुआ है मैन्युफैक्चर हुआ है व्हाट हैज कम टू दिस ब्रेन इज द रिजल्टेंट द सम टोटल ऑफ द इंप्रेशंस एक्वायर्ड इन अवर पास्ट विथ वच द माइंड है कम टू इनहैबिट द न्यू बॉडी इस देह के साथ में क्या आया है इस ब्रेन के साथ में क्या आया है इट इज द रिजल्टेंट सम टोटल ऑफ द इंप्रेशंस पिछले जन्म के जितने भी संस्कार जितनी भी मेमोरीज होती है जितने भी कार्य होते हैं जितने भी कर्म हम करते हैं वह अपना संस्कार एक संस्कार अपने ब्रेन के ऊपर में छोड़कर जाते हैं तो वह संस्कार का लेखा जोखा जो है वह पिछले ब्रेन के साथ में वह जितने कर्म तो चले गए किंतु संस्कारों का लेखा जोखा संस्कारों का बैलेंस शीट इस जन्म में साथ में आता है व्ट हैज सम टोटल ऑफ द इंप्रेशंस अक्वायर्ड इन अवर पास्ट विथ व्हिच द माइंड हैज कम टू इनहैबिट द न्यू बॉडी यह सम टोटल ऑफ द इंप्रेशंस ये बैलेंस शीट यह जितने भी संस्कारों का है हमने एक बार इस तरह से बात की थी कि यदि हम एक बैंक में अकाउंट क्लोज करके नए बैंक में अकाउंट ओपन करें तो नई बैंक के साथ में क्या जाएगा आपकी जो पुरानी बैंक थी आपके सभी ट्रांजैक्शन उस बैंक में थे मैंने आज पैसा डिपॉजिट किया कल पैसा विड्रॉ किया कल का ही बैंक में से ही पेमेंट करवाया तो वह पूरा लेखा जोखा पूरा उसका बैलेंस शीट उसका पूरा डिटेल पुरानी बैंक में होगा किंतु जब मैं पुरानी बैंक में अकाउंट क्लोज करता हूं और नई बैंक में मैं अपने रुपए ले जाता हूं तो वह ऐसा पूरा लेखा जोखा पूरा बैलेंस शीट नहीं जाएगा इतना ही जाएगा कि आपका बैंक बैलेंस क्या है अब मान लीजिए मैंने ₹ करोड़ डिपॉजिट किए और उसमें से 90 लाख मैंने स्पेंड कर दिए तो ₹ लाख रहे तो ₹1 लाख ही जाएंगे ₹ करोड़ रुप यानी कि ₹ लाख उसमें से मैंने कौन-कौन से कब-कब डिपॉजिट किए कब-कब विड्रॉ किए कौन सी तारीख को किस पार्टी को देना था कहां से लिया वह सब डिटेल चली जाएगी सिर्फ बैंक बैलेंस ही नई बैंक में जाएगा तो इसी तरह से मैंने पूर्व जन्म में या तो मान लीजिए कि इस जन्म मैंने जो कोई भी कर्म किया सभी कर्मों का एक रिकॉर्ड बैलेंस शीट के रूप में यह जितना भी ट्रांजैक्शन होता है तो कंप्यूटर में रिकॉर्ड रहता है तो ट्रांजैक्शन एक चीज है कंप्यूटर का रिकॉर्ड दूसरा चीज है तो वैसे ही मैं कर्म एक चीज है और कर्म का रेखा पात जो अपने ब्रेन के ऊपर होता है संस्कार वो दूसरा चीज है कर्म सब चले जाएंगे किंतु यह संस्कार जो रह जाते हैं फिर संस्कार में भी यह पॉजिटिव संस्कार पॉजिटिव संस्कार इस तारीख को पॉजिटिव डिपॉजिट हुए संस्कार और इस इस तारीख को संस्कार को यह विड्रॉ किया गया यानी कि नेगेटिव संस्कार तो आखिर में मृत्यु के समय में इसका पॉजिटिव का पूरा टोटल और नेगेटिव का पूरा टोटल फिर वो प्लस माइनस होक के जो बैलेंस संस्कार बचते हैं बैलेंस अमाउंट बचती है वही नए ब्रेन के साथ में जाएगी हां ऐसा हम कहते हैं किंतु साथ-साथ में ही पता है हमको इसके बाद में ही स्वामी जी कहेंगे एक जगह प कि ऐसा समय आएगा कि जबकि हमारा आखिरी जन्म होगा तो जितने भी संस्कार है माने जितने भी कर्म किए थे जितने भी संस्कारों का लेखा जो का था इस जन्म में भी और पूर्व जन्म में भी वह सब हमारी नजर के सामने से एक के बाद एक जाएगा टूट जा टूटता जाएगा संस्कार और आखिर में हमको मुक्ति प्राप्त होगी यह एक ऐसा हो गया कि आप ईडी के चक्कर में फंस गए किसी भी कारण से तो ईडी वालों ने आपका जो करंट बैंक अकाउंट है उसके तो सभी ट्रांजैक्शन खुलवा के देख ही लिए किंतु आप के पूर्व पूर्व जितने भी बैंक में जितने भी अकाउंट थे वह भी सब खुलवा करके उसके भी सभी ट्रांजैक्शन निकाल करके उन्होंने देख लिए तो वैसे ही यह ठाकुर एक ईडी के जैसे है ठाकुर के चक्कर में पड़ गए तो हमारे जितने भी संस्कार है इस जन्म के पूर्वज मनम के सब खोल खोल करके सबको एक एक बार एक काट के जाएंगे और आखिर में हमको मुक्ति प्राप्त होगी तो सम टोटल ऑफ द इंप्रेशंस एक्वायर्ड इन अवर पास्ट विथ चच द मा है कम टू इनहैबिट द न्यू बॉडी इस नए ब्रेन में सिर्फ एक बैलेंस ही आता है जिसके साथ में हम नए देह के भीतर में रहने के लिए जाते हैं इनहैबिट शब्द स्वामी जी ने यूज किया है बड़ा ही इंटरेस्टिंग है जब हम नए घर में रहने के लिए जाते हैं तो उसको इनहैबिट करना कहते हैं कि हां हम नए घर में रहने के लिए जाते हैं तो वैसे ही नए देह में रहने के लिए आए हैं और यह देह भी चला जाएगा हम दूसरे घर में चले जाएंगे आई एस आई स्टैंड हियर एम द इफेक्ट द रिजल्ट ऑफ ऑल द इनफाइनों के जितने भी संस्कार है उसका बैलेंस जो है वह बैलेंस का परिणाम रू रूप होकर के बैलेंस का परिणाम स्वरूप होकर के मैं यहां पर आपके सामने खड़ा हूं जो कि यह पहे जो बैलेंस है ना टेक ऑन टू मी स्वामी जी का यह शब्द प्रयोग है मेरे साथ में चिपक गए हैं पिछले पिछले जन्म के जितने भी संस्कार का बैलेंस है मेरे साथ में चिपका हुआ है और उसी को धारण करके मैं यहां पर आपके सामने खड़ा हूं एंड व्हाई इज इट नेसेसरी फॉर मी टू रिमेंबर ऑल द पास्ट मुझे भूतकाल के जितने भी जन्म है उसको याद रखने का क्या प्रयोजन है स्वामी जी पूछते हैं व्हेन ए ग्रेट एंट सेज अ सीयर और ए प्रोफेट ऑफ ओल्ड हु केम फेस टू फ फेस विद द ट्रुथ सेज समथिंग दिस मॉडर्न मैन स्टैंड अप एंड से ओह ही वाज अ फुल अभी एक पूरा एक सेपरेट ही टॉपिक स्वामी जी खड़ा करते हैं स्वामी जी क्या कहते हैं इतिहास में पूर्व पूर्व जमाने में जो संत महापुरुष ग्रेट मेन वो रहे थे उन्होंने जब कुछ कहा तो आज के ये जो मॉडर्न साइंटिस्ट मने साइंटिस्ट तो नहीं किंतु साइंटिस्ट होने का जो दिखावा करते हैं साइंटिस्ट होने का वो लोग जो बड़ा गर्व करते हैं है नहीं किंतु गर्व करते हैं ऐसे लोग खड़े होकर के बोलते हैं कि पुराने जमाने के जितने भी ऋषि मुनि थे जितने भी यह वाइज मैन थे सब मूर्ख थे उन्होंने जो कुछ कहा वह सब मूर्खा म है सब गलत गलत है किंतु आज का कोई मॉडर्न साइंटिस्ट खड़ा होकर के बोलेगा तो वो लोग क्या कहेंगे कि जस्ट यूज अनदर नेम हक्सली सेज और टिंडल देन इट मस्ट बी ट्रू एंड दे टेक इट फॉर ग्रांटेड ये हगज ली क हो ना कि टिंडल कहो यह सब उस समय के 19th सेंचुरी के 20th सेंचुरी के यह सब बड़े-बड़े नाम है उस समय के साइंटिस्ट थे तो यह जो लोग ये दिखावा करते हैं ना कि हां मेरा साइंटिफिक टेंपरामेंट है उन लोगों को कहिए किसी ऋषि मुनि ने कहा था कि किसी एंसेट फिलोसोफर भूतकाल में इतिहास के कोई बड़े फिलोसोफर ने कहा तो ये लोग बोलेंगे अरे यह फिलोसोफर बोलो कि ये ऋषि मुनि बोलो ये लोग तो मूर्ख थे उनके समय में तो उस विज्ञान का डेवलपमेंट ही नहीं हुआ था किंतु आज का एक विज्ञान ज्ञानिक खड़ा होकर के जो कुछ भी उटपटांग बोलेगा सब कुछ सही है क्यों क्योंकि मैं विज्ञान में मानता हूं यह वैज्ञानिक लोग विज्ञान को डेवलप करते हैं माने वे लोग जो कुछ भी बोलेंगे सब सही होना चाहिए ऐसा मने स्वामी जी क्या कहते हैं देन इट मस्ट बी ट्रू एंड दे टेक इट फॉर ग्रांटेड आज का वैज्ञानिक खड़ा होग उटपटांग भी बातें करेगा तो यह लोग चुपचाप इसको आंख बंद करके स्वीकार कर लेते हैं इन प्लेस ऑफ एंट सुपरस्टिशस दे हैव इरेक्टेड सुपरस्टिशन इन प्लेस ऑफ द ओल्ड पोपस ऑफ रिलीजन दे हैव इंस्टॉल्ड मॉडर्न पोपस ऑफ साइंस भूतकाल की इतिहास की जो अंधश्रद्धा है उसको हटा कर के आधुनिक युग की अंधश्रद्धा उन्होंने अपना ली है इतिहास में यह जो पोप है या धर्म गुरु थे उनको उनको पसंद नहीं आया तो आज के यह जो विज्ञान के पोप है विज्ञान के जो वैज्ञानिक धर्म गुरु है उनको अपना लिया है बात भी सही है देखिए एक तरह से हम देखेंगे कि अरे वैज्ञानिक लोग तो इतना सब रिसर्च करते हैं रेशनल है एक्सपेरिमेंट करते हैं उस मैथमेटिक्स है उसको प्रूव करके ही तो यह लोग सब बोलते होंगे यानी कि अभी चलो आइंस्टाइन क्या कहता है मुझे समझ में नहीं आता किंतु आइंस्टाइन की थिरी के ऊपर में एटम बम बन गया है या तो फिर यह सॉलिड स्टेट फिजिक्स बन गया है यह आज का मॉडर्न इलेक्ट्रॉनिक्स बन गया है यह तो मुझे नजर से दिखता है तो भले ही मुझे आइंस्टाइन की थिरी ऑफ स्पेशल रिलेटिविटी या तो उसका क्वांटम डाय िक्स में जो कंट्रीब्यूशन है वो भले ही चाहे मुझे समझ में ना आए मेरी मेरी बुद्धि शक्ति तो लिमिटेड है बड़े-बड़े विज्ञानिक क्या कहते हैं मुझे क्या पता किंतु ये जो कहता है ना कि मैंने प्रूफ ऑफ द पुडिंग इज इन ईटिंग माने ये जो पुडिंग अर्थात की केक होती है तो केक अच्छी है इसका प्रूफ क्या है जब आप खाएंगे ऑटोमेटिक पता चल गया है वो आपका बेकर जो बेकरी होती है बेकरी बेकरी में जाएंगे केक खरीदने के लिए तो बड़ा सायह डिस्प्ले केस होगा और उसके भीतर में काच के वो कबाटरे भीतर में बहुत सुंदर-सुंदर केक रखी होगी तो मुझे सुंदर देख कर के अरे ये केक मुझे बड़ा हम लोगों का एक फेवरेट कलर होता है ना तो फेवरेट कलर सबकॉन्शियसली हमको आकर्षित करता है अभी मान लीजिए मेरा फेवरेट कलर है ब्लू तो ब्लू कलर की केक होगी तो मैं कहूंगा अरे ये बहुत सुंदर केक है मुझे यही वाला दे दो तो दिखाओ में देखने में तो बड़ा सुंदर है किंतु खाया तो लगा अरे यार ये तो बड़ी बेकार है उसका टेस्ट मुझे तो अच्छा नहीं लगा मैं तो कलर देख कर के ले लिया और ऐसा हो सकता है कि दूसरी केक साथ में पड़ी थी दूसरे दिन जाकर के उसको ले लिया और उसको खाया तो बड़ा ही अच्छा टेस्ट निकला तो खा कर के पता चला कि केक अच्छी है या नहीं अच्छी है तो वैसे ही यह साइंटिस्ट लोग आज के साइंटिस्ट जो कह रहे हैं उसका प्रूफ तो यह आधुनिक युग है यह सब कुछ यह स्पेसशिप है यह रॉकेट्स है यह अपना लूनर लैंडर है ये इलेक्ट्रॉनिक्स है यह मोबाइल फोन है सुपर कंप्यूटर है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है आज का मॉडर्न मेडिसिन है यह सब तो प्रूफ है नजर के सामने दिख रहा है तो हम इसको कैसे ना स्वीकार करें और इतिहास में यह जो सब अपने ऋषि मुनि कह के गए हैं कि तुम आत्मन हो तुम यह देह नहीं हो तुम यह मेमोरी नहीं हो तुम ये इंटेलेक्ट नहीं हो इससे परे बियोंड स्पेस एंड टाइम तुम्हारा अस्तित्व है यह जो सब बोल के गए हैं इसका प्रूफ कहां पे है मैं साधना भी यदि करता हूं तो कुछ ही दिनों के बाद में डिप्रेसो करर के बैठ जाता हूं कि अरे भाई इतने एक सप्ताह दो सप्ताह तो किया कुछ मिला नहीं ध्यान किया कुछ मिला नहीं प्राणायाम किया कोई फर्क नहीं पड़ा प्राणायाम करने से या ध्यान करने से योग शास्त्र में जो सब सिद्धियां लिखी गई है कि दूर का दृश्य दिखाई देगा दूर के आवाज सुनाई देंगे दूसरों के मन में क्या हो रहा है वह दिखाई देगा टेलीपैथी यहां से बैठ कर के दूसरों के साथ में मैं बात करूंगा माइंड टू माइंड यह सब तो होता नहीं है कहां यह सब उलट पुलट लिख कर के रखा है तो तो ऐसा हम कह सकते हैं तो इसके दो प्रूफ है माने इसके बारे में दो आर्गुमेंट है इसके अगेंस्ट में सर्वप्रथम तो वेदांत और योग में जो लिखा गया है उसको हम प्रूव कर सकते हैं यदि आप डेडिकेटेड साधना करें डेडिकेटेड साधना किसी को करनी नहीं है ऊपर ऊपर से थोड़ा बहुत देख कर के हम इमीडिएट कंक्लूजन प आ जाते हैं कि अरे भाई तो कुछ होता नहीं है साधना या योग वगैरह हम कौन सी उम्र में करना शुरू करते हैं जबकि हम लोगों का अ हम लोगों के सर पर थोड़ी सी जवाबदारी आती है तभी तो हम इस डायरेक्शन में जाते हैं ना इवन हम लोग जो साधु बनते हैं हम लोग भी तो कॉलेज में जब होते हैं उसी के आसपास में यह सब सोचना शुरू करते हैं जबकि ये मैथमेटिक्स है या तो लैंग्वेज है हम जब 5 साल के हैं तब से ख सीखना स्टार्ट करते हैं तो योग और वेदांत को भी 5 साल का बच्चा होता है यह किंडरगार्डन में होता है या बाल मंदिर में होता है तभी से उसको सिखाना शुरू करो फर्स्ट स्टैंडर्ड सेकंड स्टैंडर्ड थर्ड स्टैंडर्ड योग और वेदांत इसको प्रॉपर्ली सिखा ते जाओ देखो कि बाय द टाइम वह ग्रेजुएट होता है योग और वेदांत में भी उसका एक्सपर्टाइज्ड है कि पहली बार यह सब सोचना शुरू किया था तो बाय दैट टाइम तो हमारा यह जो ब्रेन डेवलपमेंट है मेजर जो अपना व डेवलपमेंट का फेस तो चल गया अभी तो एक एक रिजडन उसके बाद में तो हम यह सब सोचते हैं और वह भी लंबा समय इधर-उधर भटक तब कहीं जाकर के कोई सद्गुरु मिलेगा और वह हमको दीक्षा देगा उपदेश देगा तो हम लोगों को लॉजिकली सोचना नहीं है और यह सिर्फ कंप्लेन करनी है कि यह योग वेदांत में जो लिखा है उसका फल तो मुझे दिखता नहीं है वह एक आर्गुमेंट हो गया इसके अगेंस्ट में दूसरी एक आर्गुमेंट है कि ये साइंटिस्ट लोग जो कुछ भी क कहते हैं सब कुछ सही नहीं होता यह न्यूटन को ही देख लीजिए आज मैंने मॉडर्न साइंस के जो ग्रेटेस्ट दो लोगों दो मने साइंटिस्ट है उनका एक है न्यूटन और दूसरा आइंस्टाइन ये न्यूटन को देखिए न्यूटन पता है वो क्या था वो अल्केमी सीखता था अल्केमी बोलकर के एक उस समय का साइंस था उसमें क्या करते हैं कि ये जो ऐसा कोई पत्थर बनाना है को कोई भी धातु को स्पर्श करेगा वोह सोने में परिणत हो जाएगा कोई भी धातु में से सो सना बनाना है तो ऐसा उन लोगों का था कि हम लोग लेबोरेटरी में सोना बनाएंगे तो एक अल्केमी बोलकर के उटपटांग एक साइंस था जो कि आज कंपलीटली डिस्क्रेडिट हो गया है किंतु यह न्यूटन था वो अल्केमी में उसने इतना सब कुछ सोचा था उसकी नोट्स देखे वो थियोलॉजी यानी कि एक दूसरा एक मैंने क्रिश्चियनिटी के रिलेटेड एक है तो थियोलॉजी अल्केमी ये सबके बारे में न्यूटन इतना सोचता था उसकी इतनी सारी नोट्स है आपको आश्चर्य होगा कि जि जिस आदमी ने यह मॉडर्न साइंस को इतना जबरदस्त बूट दिया इतना बड़ा कंट्रीब्यूशन किया वो यह सब जिसको साइंस नहीं है नॉन साइंटिफिक ये जो सब थिंकिंग है उसमें इतना क्यों जाता था ऐसा तो क्या था माने कि जद न्यूटन के दृष्टिकोण से देखें तो ये थियोलॉजी और अल्केमी ऑन वन हैंड और ये फिजिक्स ऑन अनदर हैंड इन दोनों में कोई वाटर टाइट कंपार्टमेंट नहीं थे इन दोनों में एकदम क्लियर बॉर्डर लाइन नहीं थी दोनों एक दूसरे के साथ में जुड़े हुए थे न्यूटन के माइंड में कभी वह थियोलॉजी की दृष्टि से देखता था तो कभी मैथमेटिक्स की दृष्टि से देखता था कभी अल्केमी की दृष्टि से देखता था कभी यह ऑप्टिक्स की दृष्टि से देखता था ऑप्टिक्स इज अनदर फील्ड कि जिसमें उसने बड़ा कंट्रीब्यूशन किया है तो यह सब फील्ड उसके माइंड में मिले हुए थे आज तो हम लोग बिकॉज के हम लोग अच्छे-अच्छे साइंटिस्ट के मने साइंस एक्सेप्ट कर रहे हैं तो हमने न्यूटन का जो राइटिंग है उसमें क्लियर बॉर्डर लाइन खींच दी है कि यह जो राइटिंग है वो फिजिक्स और मैथमेटिक्स के रिलेटेड है और यह अच्छा है और यह दूसरा जो पार्ट है न्यूटंस के पेपर्स का जिसमें वो अल्केमी है थियोलॉजी है उस सबके बारे में स्पेक्युलेटिव तो यह तो हमारा मॉडर्न थिंकिंग है कि इस तरह से एक आर्टिफिशियल डिवाइडर खड़ा करना न्यूटन के माइंड में तो ऐसा नहीं था आइंस्टाइन का ही देखिए कि जब आइंस्टाइन का एक दूसरा बहुत बड़ा एग्जांपल है दो ग्रेटेस्ट साइंटिस्ट देखिए कि दोनों ने किस तरह से एक डिफरेंट डायरेक्शन में चले गए थे न्यूटन का एक न्यूटन का भी आइंस्टाइन का भी ऐसा ही था जब यह क्वांटम डायनेमिक्स डेवलप होना शुरू हुआ यह कोपनहेगन स्कूल ऑफ क्वांटम डायनेमिक्स ऐसा कहते हैं तो कोपनहेगन में नेल्स बोहर था फिर यह यह था ये दूसरा यह नेल्स बोहर मेन था उसमें तो इन लोगों ने क्या किया एक नया एक थिरी डेवलप करना शुरू किया कि यह जो सब एटॉमिक पार्टिकल्स जो होते हैं वो एक जगह पर स्थिर नहीं होते हैं अनसर्टेनटीज इसको कहते हैं अर्थात कि यदि उसकी जिस स्पीड से गति कर रहे हैं व यदि आप ठीक-ठीक से मेजर कर लेंगे तो वह कहां पे लोकेटेड है वह आप ठीक नहीं बता पाएंगे और उसका लोकेशन फिक्स कर देंगे तो जिस स्पीड से वह गति कर रहा है वो नहीं हमको समझ में आएगा अर्थात कि ए सब एटॉमिक लेवल देयर इज अ सॉर्ट ऑफ अनसर्टेनटीज तो जैसे ही आइंस्टाइन को यह पता चला वो क्या कहता है गॉड डज नॉट प्ले डाइस ईश्वर ये जो डाइस अर्थात की पता है ना वो जो साफ सीढ़ी खेलते हैं तो उसमें वो छोटे-छोटे वो पासे आते हैं पासा गुजराती में पासा कहते हैं तो उसमें एक दो तीन चार इस तरह के डोट होते हैं स्क्वेयर होते हैं फिर फेंकें तो कभी एक आएगा तो कभी दो आएगा कभी तीन आएगा तो उसके अनुसार ये जो साप सीढ़ी का जो गेम है उसमें आप अपनी ये जो ये कुटी कहते हैं उसको गुजराती में उसको आप एक के बाद एक ले जाएंगे माने यह खेल के भीतर में ये पासे होते जुगार खेलने के भी ये पासे होते हैं तो आइंस्टाइन क्या कहता है ईश्वर जुगार नहीं खेलते हैं गॉड डज नॉट प्ले डाइस कि हां अभी उसका लोकेशन यह है तो अभी उसका पोजीशन यह है तो अभी उसका स्पीड यह है ऐसा नहीं अनसर्टेन नहीं है साइंस तो कहता है सब कुछ सर्टेन होना चाहिए किंतु देखिए कि ये क्वांटम डायनेमिक्स डेवलप करने वालों के बीच में और आइंस्टाइन के बीच में यह जो चला आर्गुमेंट लंबे टाइम तक चला आइंस्टाइन ने जितनी भी आर्गुमेंट की सब एक के बाद इन लोगों ने काट दी और आज हम लोगों ने क्वांटम डायनेमिक्स को एक प्रॉपर साइंस के रूप में एक्सेप्ट किया है क्वांटम डायनेमिक्स के ऊपर में जो कोई भी डेवलपमेंट टेक्नोलॉजिकल हुआ है हमारी नजर के सामने है तो आइंस्टाइन भी इतना ग्रेट साइंटिस्ट था वो क्वांटम डायनेमिक्स को एक्सेप्ट करने को तैयार नहीं था हालांकि क्वांटम डायनेमिक्स का जो पायनियरिंग वर्क जो जिसने किया था मैक्स प्लांक उसके साथ में यह आइंस्टाइन भी था तो यह एक ऐसा विचित्र होता है कि कोई भी साइंटिस्ट कितना ही बड़ा हो जाए जो जो कुछ भी कहता है सब सही है ऐसा नहीं है न्यूटन और आइंस्टाइन दो सबसे बड़े एग्जांपल उन्हीं लोगों के जीवन में हमको एक ऐसा दिखता है कि उन्होंने सत्य को स्वीकार नहीं करके और किसी एक डायरेक्शन में चले गए तो दो तरह से हम इसको काट सकते हैं कि कोईकोई लोग कहता है कि पुराने इतिहास के ऋषि मुनि सब गलत है मॉडल साइंटिस्ट सब सही है तो इसके यह दो काउंटर है बचपन से ही योग और वेदांत का अभ्यास कीजिए देखिए कि जिसा साइंस में रिजल्ट मिलता है वैसा ही यहां पर मिलेगा एक चीज दूसरा की मॉडर्न साइंटिस्ट जो कुछ भी कहते हैं सब सही है ऐसा बिल्कुल नहीं अच्छा तो आज यही तक कल फिर सन ओम शांति शांति शांति हरि ओम तसत श्री राम कृष् परम