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ओम स्थापक य ज धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार षय राम कृष्णाय ते नमः कंप्लीट वर्क्स ऑफ स्वामी विवेकानंद वॉल्यूम टू पेज नंबर 200 कॉस्मो स मैक्रो कजम तो कल हमने देखा कि एक बड़ा ही इंपॉर्टेंट पॉइंट जो स्वामी जी कह रहे हैं कि कभी-कभी लोग मुझे पूछते हैं कि आप ईश्वर के बारे में यह जो पुराना शब्द है गॉड इज ओल्ड वर्ड उसको आप क्यों यूज करते हैं क्यों आप कोई नया शब्द ना कि कॉस्मिक इंटेलिजेंस या तो यूनिवर्सल इंटेलिजेंस यह शब्द स्वामी जी ने खुद आगे यूज किया है स्वामी जी ने कहा है कि कॉस्मस या तो विश्व ब्रह्मांड की शुरुआत में एक यूनिवर्सल इंटेलिजेंस था एक विश्वव्यापी एक बौद्धिक चैतन्य था एक दिव्य चैतन्य था जो कि एक बीज के स्वरूप में उसका इवोल्यूशन हुआ फिर वहां से उस बीज में से इस विश्व ब्रह्मांड का इवोल्यूशन हुआ तो स्वामी जी स्वयं एक शब्द यूज करते हैं यूनिवर्सल इंटेलिजेंस वैश्विक दिव्य चैतन्य यह शब्द स्वामी जी किंतु बाद में ही इमीडिएट स्वामी जी ईश्वर शब्द की ओर चले आते हैं गड शब्द की ओर चले आते हैं तो स्वामी जी कहते हैं कि जब मैं ईश्वर शब्द का प्रयोग करता हूं और हमको पता है कि ईश्वर शब्द के अगेंस्ट में वेस्टर्न सिविलाइजेशन का जो एक क्या कहेंगे कि ऑब्जेक्शन था कि ईश्वर और धर्म के नाम पे बहुत साल तक 1000 साल तक जो डार्क एजेस यूरोप में चला एट द एंड ऑफ दी ये जो रोमन एंपायर का डिसइंटीग्रेशन हुआ वहां से लेकर के रिफॉर्मेशन मार्टिन लूथर का जो रिफॉर्मेशन स्टार्ट हुआ वहां तक का जो 1000 इयर्स का जो एक हिस्ट्री है वोह हम उनको पता है कि किस तरह से धर्म का दुरुपयोग किया जाता है लोगों को बौद्धिक और सामाजिक और आर्थिक बंधन में डालने के लिए उनका शोषण करने के लिए तो आज की मॉडर्न यूरोपियन या वेस्टर्न सिविलाइजेशन कहो तो ये प्रोटेस्टेंट रिफॉर्मेशन में से ये डेवलप हुई है और वे लोग कहते हैं कि ईश्वर का एक स्थान है नो डाउट देयर इज अमेरिका की बैंक नोट के ऊपर में देखिएगा उन्होंने लिखा है इन गॉड वी ट्रस्ट तो ऐसा तो नहीं है कि और बैंक नोट यानी कि पता है कि मटेरियल इसिक सिविलाइजेशन है तो डॉलर को कितना इंपोर्टेंस देते हैं तो डॉलर के ही ऊपर में ईश्वर का नाम लिखा है भगवान का गोड ऐसा करके लिखा है तो ऐसा नहीं है कि वे लोग भगवान या तो गॉड या तो ईश्वर इसको संपूर्ण रूप से तिलांजलि दे दिए है उन्होंने कहा है कि उसका एक सीमित स्थान है समाज में उस सीमित सीमित स्थान से बाहर जद उसको निकाल करके यह साइंस टेक्नोलॉजी रेशनल थॉट्स फिलोसोफी या तो फिर यह गवर्नेंस यह इकोनॉमिक्स यह सब चीजों में यदि बाइबल के पुराने आइडियाज को ले आएंगे तो हम वही डार्क एजेस की ओर चले जाएंगे तो यह ऑब्जेक्शन जब खड़ा होता है तब स्वामी जी इसका उत्तर देते हैं कि मनुष्य सभ्यता में जितना भी शुभ्र जितना भी सर्वश्रेष्ठ जितना भी अ सर्वोत्तम जो कोई भी आइडियाज है विचार है एक्सप्रेशंस से इमोशंस है वह सब इस ईश्वर शब्द के साथ में जुड़े हुए हैं मनुष्य सभ्यता के सर्वश्रेष्ठ हीरोज यदि हम यदि कहेंगे कि हमारे हीरोज कौन है हम किनको हम अपने आदर्श स्वरूप मानते हैं आजकल देखेंगे वे लोग कोई क्रिकेटर का नाम देंगे कोई फिल्म स्टार का नाम देंगे और आजकल यह सुंदर पिचाई जैसे ये टेक एग्जीक्यूटिव्स इनका भी नाम बड़ा चलता है किंतु इनके साथ-साथ में ही हमारे हीरोज य तुलसीदास है मीराबाई है नरसिंह मेहता है भगवान कृष्ण चैतन्य है साउथ इंडियन संत के बारे में तो अभी मुझे इतना ज्यादा पता नहीं है मैं पढ़ना चाहता हूं कभी होगा वो तो यह हमारे हीरोज यह भी हमारे हीरोज है सिर्फ यह जिनको कि हम सेकुलर हीरोज कहते हैं यह जिनको हम स्पिरिचुअल हीरोज कहते हैं बहुत हमारे आदर्श है दोनों से हमको सीखना है यदि आप इस सोसाइटी में सिर्फ आइंस्टाइन है या तो सुंदर पिचाई है या तो फिर यह बिल गेट्स है ऐसे ही लोगों को रखेंगे और अपने मीराबाई है नरसिंह मेहता है तुलसीदास है ऐसे लोगों को जद आप हटा देंगे तो वो सिविलाइजेशन का क्या होगा वह भी हमको पता है स्वामी जी ने यूरोप में जाकर के जो कुछ भी देखा तो उन्होंने जो कहा था कि यूरोप इज सिटिंग न ने पाउडर केग ऑफ माउंटेन ऑफ पाउडर गन पाउडर माने ये दारू ये जो गोला बारूद है उसके पहाड़ के ऊपर में यूरोप बैठा है एक समय आएगा यह गोला बारूद में आग लगेगी और पूरा यूरोप व युद्ध की ज्वाला में वो दफन हो जाएगा और सही में यह हुआ भी सही फर्स्ट और सेकंड वर्ल्ड वॉर में जिस तरह से नर संहार हुआ है और युद्ध के मैदान पर चलो नर संहार हो वो एक चीज हम समझ सकते हैं किंतु सिविलियन पॉपुलेशन के ऊपर में जिस तरह से अटैक हुआ है और उससे भी ज्यादा ये जो रेशल ट्रेड ये जू लोगों को पकड़ कर के कंसंट्रेशन कैंप में डालना उनके ऊपर में मेडिकल एक्सपेरिमेंट करना एक बहुत ही सुंदर किताब है एन फ्रेंस डायरी पढ़ी होगी नाम भी सुना होगा बहुत सुंदर किताब है मैं मैंने इसको मैं जब 10थ मेरा 10थ स्टैंडर्ड में था उसके वेकेशन में मैंने इसको पढ़ा था और वो किताब पढ़ के ना मैं एक सप्ताह तक अपने घर से बाहर नहीं निकला था उसने मेरे पर इतना डीप असर किया था इतना मतलब जो एक स्टोरी जो बनती है छोटी सी लड़की है उसको पकड़ करके कंसंट्रेशन कैंप में डाल देते हैं इतना उसके ऊपर अत्याचार होता है उसकी बहन उसकी मां उसके पिताजी एक जीवित रहे थे किंतु उसको सेपरेट कर दिया था एन फ्रैंक को तो वो इतना जब यह क्राइसिस के भीतर में भी उसका जो रेसिलियंस है एक सेंटस मुझे अभी भी याद है अभी इतने सालों पहले पढ़ा था तो ज्यादातर मैं भूल गया हूं वो इमोशंस अभी मेरे साथ में किंतु एक सेंटेंस है वो लिखती है कि मैंने इतना बर्बेरिस लोग हमारे साथ में कर रहे हैं इसके बावजूद मैं यह स्वीकार नहीं कर सकती कि हम लोग सब वी हैव लॉस्ट ऑल होप हमने सब आशाएं हमारी चली गई है हम निराशा में डूब गए हैं यह बात मैं स्वीकार नहीं कर सकती देयर इज ऑलवेज होप ये एग्जैक्ट सेंटेंस नहीं है पैराफ्रेसिंग है किंतु यह जो उसका जो अल्टीमेटली की एक छोटी लड़की 12 13 साल की होगी शायद उस समय व तो अभी हम लोग जैसे फिलोसोफर हम लोग बूढ़े हो गए हैं ठाकुर महास्वामी जी को इतना पढ़ा है अपने को दार्शनिक समझने का एक हम लोग दिखावा भी करते हैं हम लोग जद ऐसा बोले कि अरे चलो जीवन में जो भी कष्ट आ जाए तो आखिर में तो एक देयर इज अ हायर आइडियल हायर एक कोई है अपने जीवन में एम एम है किंतु हम लोग बोलेंगे तो चलेगा किंतु उसको तो क्या है वह छोटी लड़की है उसने तो कोई ऐसा थियोलॉजिकल स्टडी भी नहीं किया है लाइफ उसका इतना कठिन है वो एक्सपीरियंस से गुजरने के बाद में वह कहती है कि देयर इज ऑलवेज अ हायर हो नॉट एवरीथिंग इज लॉस्ट ये जो बार्बेट ये नाजी यूरोप ये जो सेकंड वर्ल्ड वॉर का य जो यूरोप है एक ट्रेवलर की एक डायरी मैंने पढ़ी थी वो कहता है कि ये हिटलर के हिटलर 1933 के आसपास में उस उसके पास में पावर आया और उसने वॉर स्टार्ट किया कहीं 1939 तो पावर आने से और युद्ध शुरू करने के बीच में पाछ साल का गैप था तो वह उस समय जब युद्ध शुरू नहीं हुआ था किंतु हिटलर पावर में था उस समय यह ब्रिटिश ट्रेवलर ना कोई एक ट्रेवलर था उसने बर्लिन की यात्रा की थी वो कहता है कि आई एक्चुअली सेंस द डार्कनेस कमिंग आउट ऑफ एवरी वेयर अ सेंस ऑफ फोर बोर्डिंग जैसे कि एक एक विभ स एक भयावह घटना होने वाली है लोगों के मन के भीतर में एक अंधकार प्रवेश रहा है एक हैवानियत लोगों के मन में प्रकट हो रही है यह मैं वहां पर अनुभव करता था तो यह तो युद्ध शुरू होने से पहले की बात है जब युद्ध शुरू हो गया उसके बाद में यह यूरोप में जो हैवानियत का प्रदर्शन हुआ है उसको तो जो लोग डिटेल में जाते हैं हमको तो हिस्ट्री पढ़ कर के सिर्फ एक अंदाज होता है जो लोग उस समय वहां पर रहे होंगे वो तो हम लोग उनकी मानसिक स्थिति की कल्पना ही कर सकते हैं तो देखिए कि जब हम अपने यह डिवाइन हीरोज को स्टोरी में से ह्यूमन हिस्ट्री में से हटा देंगे और सिर्फ यह सेकुलर हीरोज को ही रखेंगे देन यूरोप विल स्लीप वक इनटू वॉर ऐसा एक हिस्टोरियन ने कहा है 1918 को जो फर्स्ट वर्ल्ड वॉर था तो फर्स्ट वर्ल्ड वॉर के समय जो हिस्टोरियन थे वे लोग कहते थे यूरोप इ स्लीप वकिंग इन टू द वर अर्थात कि उन लोगों को पता नहीं है कि वे लोग की जो पॉलिसीज है उन्होंने जो अपनी फॉरेन पॉलिसी डोमेस्टिक पॉलिसी वगैरह जो वो डेवलप कर रहे है ये कॉलोनियलिज्म य एंपायर वर्ल्ड वाइड एंपायर यूरोप का जो है ये इंडस्ट्रियल पोलिस है इसकी वजह से वे लोग आंख बंद करके युद्ध के कुए में गिरने वाले हैं उनको पता नहीं है आंख बंद करके चल रहे युद्ध के कुए में गिरेंगे तो ये उस समय उनको नहीं पता था आज हम देखें देखेंगे कि जितने भी ग्रेटर फिलोसोफर है फर्स्ट लाइन में जो फर्स्ट ऑर्डर के फिलोसोफर से थिंकर से सभी लोग स्वीकार करते हैं कि एक हायर आइडियल की मनुष्य के जीवन में जरूरत है यह मटेरियल ज्म या तो यूटिलिटेरियन जम कि मनुष्य का जीवन इंद्रियों तक ही सीमित है इंद्रियों के भोग को बढ़ाना इंद्रियों के आनंद को मैक्सिमाइज करना यही हमारा जीवन का सब सर्वोच्च उद्देश्य ऐसा आजकल कोई स्वीकार नहीं करता है हां यह लोग यह नहीं स्वीकार करेंगे कि ईश्वर दर्शन या तो आत्मा साक्षात्कार हाईएस्ट है मनुष्य के जीवन में किंतु यह लोग इतना तो कहेंगे कि हां एक उच्च आदर्श जीवन में होना चाहिए भले वह उच्च आदर्श आप और उस उच्च आदर्श को प्राप्त करने के लिए आपकी इंद्रियों के भोगों को आप सीमित करें व आरो बेटर है तो यहां तक तो यह जो य से लर सिविलाइजेशन है वो पहुंच गई है तो इसीलिए स्वामी जी कहते हैं कि ईश्वर को यदि बाद दे देंगे तो फिर क्या रहेगा ईश्वर के इर्दगिर्द ही तो हमारे सर्वोच्च आदर्श वो घूम रहे हैं ईश्वर को लेकर के ही तो हमारे सर्वोच्च आदर्श है इसके बाद का जो पूरा पैराग्राफ है उसके भीतर में स्वामी जी ने इसी आईडिया को थोड़ा सा ज्यादा डेवलप किया है स्वामी जी कहते हैं इट इज इंपॉसिबल नाउ टू चेंज द वर्ल्ड ईश्वर शब्द को बदलना अभी असंभव है वर्ड्स लाइक दिस वेर फर्स्ट कोइ बाय ग्रेट सेंट्स हु रियलाइफ एंड अंडरस्टूड देयर मीनिंग ईश्वर या तो भगवान इस तरह के शब्द महापुरुषों ने संतों ने इस शब्दों का आविष्कार किया है और इस शब्दों के भीतर में हु रियलाइफ एंड अंडरस्टूड देयर मीनिंग से संतों ने ऐसे शब्दों का आविष्कार किया है जिनको पता है कि यह शब्द शक्ति क्या है मंत्र शक्ति क्या है यह तो मंत्र है मंत्र के भीतर में एक शक्ति होती जैसे कि अपने संघ में पूजनीय प्रेसिडेंट महाराज या तो पूजनीय वाइस प्रेसिडेंट महाराज जब मंत्र देंगे तो मंत्र के भीतर में एक शक्ति होती है व सिर्फ ऐसा नहीं है कि हम लोग अपनी मेहनत करके मंत्र का जप करके अपने पुरुषार्थ के माध्यम से ही ठाकुर का दर्शन होगा गुरु के द्वारा जो प्रदत्त मंत्र है मंत्र के भीतर में शक्ति होती है तो यदि हमको ठाकुर का दर्शन होता है यदि हो जाएगा हम इतने फॉर्चूनेटली शक्ति होगी ऐसा ना सोचिए कि हम मेरे पुरुषार्थ से ही मुझे सब कुछ प्राप्त हो गया तो यह मंत्रों की शक्ति का महत्व उन ऋषि मुनियों ने समझा था इसीलिए जब वोह हायर सुपरकॉन्शियस नेस स्टेट में थे समाधि अवस्था में थे तब यह शब्दों का उनको दर्शन होता था स्वामी जी का एक बहुत ही सुंदर विजन है एक समय उन्होंने देखा कि गंगा के किनारे ना कि हिमालय के कहीं पे वो एक ऋषि मुनि बैठे हुए हैं और वो मतलब वो भाव में है बड़े ही हायर सुपरकॉन्शियस स्टेट में है और एक के बाद एक वेदों की रचाओ का उच्चारण उनके मुंह से हो रहा है वेदों की ऋचाओं का गान कर रहे हैं और सर के ऊपर में बादल मंडरा रहे हैं जैसे कि एक तूफान जैसा आ रहा हो जैसे ऋषि के हृदय में से वो आध्यात्मिक तूफान ये आध्यात्मिक टॉरनेडो जाकर के वो प्रकट होकर के पूरे आकाश पाताल बादल हवा पानी सब कुछ को वो उसके सब कुछ के भीतर में वो समाहित होता जा रहा हो इतना सुंदर वो स्वामी जी का विजन था अभी स्वामी जी के वो जिस शब्दों में इस दर्शन का उन्होंने वर्णन किया है वो शब्द मुझे याद थे कुछ समय पहले अभी मैं भूल गया हूं मुझे उस को फिर से याद करना होगा बहुत ही सुंदर तरीके से स्वामी जी ने अपने दर्शन का वर्णन किया है तो इस तरह से वेदों की रिचाई हमको प्राप्त हुई है ऐसा नहीं है कि हमने वह पेन और पेंसिल लेकर के बैठे और वह इस मीटर के अनुसार इसकी रचना करनी है और मैं इमेजिन करके सोचता हूं दिस आर नॉट द मैटर ऑफ इमेजिनेशन और थिंकिंग दिस आर डायरेक्ट रेवलेशंस ठाकुर कहते हैं ना मां राष् ठेले दे ठाकुर ज विद्यासागर वगैरह बड़े ही विद्वान लोगों के साथ में केशव चंद्र सेन उसके साथ में बात करते हैं तो ऐसा नहीं है कि वह कुछ सोच कर के आए हैं इतना मैं इतना इतना बोलूंगा इस सीक्वेंस में बोलूंगा इस तरह का लॉजिक दे कर के बोलूंगा वो बोलना शुरू कर देते हैं और जहां पर उनकी वाणी खत्म हो जाती है समाप्त हो जाती है वहीं से मां और ज्यादा वाणी मां सरस्वती स्वयं उनकी जिवा पर सवार होकर के और ज्यादा वाणी उनको प्रदत्त कर देती है स्वामी जी अमेरिका में पार्लिमेंट ऑफ रिलीजन में जाकर के जब पहला उनको बोलने को बोला गया तो उन्होंने मां सरस्वती को याद करके बोलना शुरू किया तो मैं जब पहली पहली बार पढ़ रहा था तो मैंने सोचा कि अरे ठाकुर का नाम नहीं लेकर के मां सरस्वती का नाम क्यों लिया ये तो बड़े ही ट्रेडिशनल देवता है ट्रेडिशनल देवताओं से तो अभी तो हम ऊपर आ गए हमारे सर्व देव देवी स्वरूपाय ठाकुर स्वयं है तो फिर मां सरस्वती को याद करने की क्या जरूरत है बाद में किंतु पता चला कि ठाकुर ने कहा है कि य शारदा सरस्वती ज्ञान देते से छ मां के बारे में ठाकुर कहते हैं कि वो शारदा सरस्वती ज्ञान देने के लिए आई है और अभी तो मुझे पता है कि मां का आध्यात्मिक शक्ति मां की आध्यात्मिक शक्ति ठाकुर से कई लाखों गुना ज्यादा थी यानी कि स्वामी जी ठाकुर को नहीं उनको पता है कि किसके पास में दाल गिलनेट करने से काम हो जाएगा तो सीधा मां को याद करते हैं वो मां सरस्वती को तो उनकी आशीर्वाद से वो वर्ल्ड पार्लिमेंट ऑफ रिलीजन में स्वामी जी बोलते हैं तो वो जो महापुरुष जिन्होंने ईश्वर गॉड भगवान यह शब्द दिए उनको पता था कि इसके पीछे में मंत्र शक्ति का प्रभाव क्या है बट एज दे बिकम करंट इन सोसाइटी इग्नोर पीपल टेक दिस वर्ड्स एंड द रिजल्ट इज दैट दे लॉज देर स्पिरिट एंड ग्लोरी जब यह अंध श्रद्धालु लोग है यह ऐसे लोग हैं जो लोग दूसरों को ठगना चाहते हैं ऐसे लोग जब ईश्वर या तो भगवान जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके गलत इस्तेमाल करके करना शुरू करते हैं तब यह शब्द जो है वह अपनी शक्ति गवा बैठते हैं ऐसा नहीं है कि शब्द अपनी शक्ति गवा बैठता है किंतु जन साधारण को उन शब्दों के ऊपर में अविश्वास हो जाता है जैसे कि अभी हम लोग साधु हैं तो अभी जब तक आप ऐसे साधुओं को देखेंगे कि जिनका चरित्र बड़ा ही शुभ्र है जो कि बड़े ही नियम और उनके जो स सियों के जो नियम है उसमें वह रहते हैं तब तक आपको उन साधुओं के ऊपर में श्रद्धा रहेगी फिर आप ऐसा कोई साधु देखेंगे जो गेरुआ पहन के दुराचार भ्रष्टाचार कर रहा है व्यभिचार कर रहा है तो आपका सीधा वोह गेरवा के ऊपर में अश्राथा हम जैसे न्यूज़पेपर में देख रहे और मैं दूसरों का क्या बोलूं मैं अपना खुद का उदाहरण देता हूं मैं जब साधुओं को इन सबको देखता था जब मैं स्टूडेंट था तब मुझे यही लगता था कि इन लोगों को और कहीं पर खाना पना नहीं मिलता होगा इसलिए गेरवा पन के लोगों को ठक हैं मेरा खुद का एक ऐसा मानना था बाद बाद में जब ठाकुर को देखा स्वामी जी को देखा मां को पढ़ा तब कहीं जाकर के पता चला कि गेरवा की गरिमा क्या है किंतु गेरवा की गरिमा आपके मन में तभी तक रहेगी जब तक आप इस गरिमा को गरिमा के भीतर में रहने वाले साधु को देखेंगे गरिमा को श्रद्धा देने वाले साधु को देखेंगे वरना तो फिर जिस कैसे को भी कोई भी गेरुआ पहन कर के ये जो कोई भी काम करता है लोगों को ठगने का तो हमारा तो अ श्रद्धा हो ही जाएगा हालांकि देखिए कि वस्त्र का भी एक महिमा है ठाकुर की बड़ी सुंदर कहानी है कि एक चोर एक किसी शेठ के एक धनी व्यक्ति के बागान में चोरी करते हुए वो लोगों को पता चल गया कि यह चौराया है तो लोग सब उसके पीछे दौड़ना शुरू कर दिए तो इसने क्या किया वो बागान में था तो वो उसने अपने कपड़े वगैरह उतार करके वो जो कपिन मात्र पहन के अपने शरीर पर मिट्टी लगा कर के पेड़ के नीचे बैठ गया ऐसा ध्यान मुद्रा में तो लोग आकर के दौड़ते हुए आकर के देखा कि चोर तो नहीं है किंतु एक साधु बाबा बैठे हैं तो उन्होंने तो बड़े ही श्रद्धा भक्ति पूर्वक उनका आदर किया उनको प्रणाम किया उनको कहीं फल मिठाई वगैरह लाकर दे दी तो वो चोर सोचता है क रे मैं झूठ मूठ का साधु बना हूं फिर भी मुझे इतना सम्मान मिल रहा है तो क्यों नहीं सच्चा साधु हो जाओ तो ये भेक जिसको कहते हैं वैष्णव शास्त्र में भेक अर्थात की ये वस्त्र या तो फिर ये आवरण इसका भी एक गरिमा है ठाकुर खुद कहते हैं कि चैतन्य महाप्रभु ने गधे को भेक पहना करके उसको प्रणाम किया था वैष्णव लोगों का भग क्या होता है वो माला पहनते हैं तिलक करते हैं वो पीतांबरी पहनते हैं तो गधे को भेक पहनाया और फिर उनको प्रणाम किया कि वो भेक यानी कि ये जो वस्त्र है या आवरण है उसकी क्या महिमा है वह प्रदर्शित करने के लिए तो वो देखिए कि झूठ मुटका भी जद कोई ऐसा करता है और उसके मन में थोड़ा सा भी एक सुसंस्कार होगा तो उसका भी मन परिवर्तित होना शुरू हो जाएगा किंतु वो एक बात हो गई जब तक जहां तक साधारण लोगों के मन में है वे लोग तो हमेशा यदि ऐसा एक घटना भी देखेंगे तो 100 अच्छे साधु है वो नहीं देखेंगे देखेंगे कि एक बुरा साधु है और वही उनके मन में रह जाएगा तो इसीलिए स्वामी जी कहते हैं कि एक अज्ञानी लोगों के हाथ में ठग लोगों के हाथ में ईश्वर शब्द चले जाने से उसकी महिमा गरिमा धीरे-धीरे करके क् क्षय होने लगी है क्षीण होने लगी है द वर्ड गॉड हैज बीन यूज्ड फ्रॉम टाइम इमेमोरियल अनंत काल से ईश्वर या भगवान शब्द वो चलन में है एंड द आइडिया ऑफ दिस कॉस्मिक इंटेलिजेंस एंड ऑल दैट इज ग्रेट एंड होली इज एसोसिएटेड विथ इट ये वैश्विक चैतन्य है जो कुछ भी मनुष्य समाज में सर्वश्रेष्ठ है दिव्य है श्रद्धा के पात्र है वह सब कुछ यह ईश्वर शब्द के साथ में मिलित है ईश्वर शब्द के साथ में जुड़ा हुआ है डू यू मीन टू से दैट बिकॉज सम फूल सेज इट इज नॉट ऑलराइट वी शुड थ्रो इट अवे यदि कोई मूर्ख ऐसा कहता है कि अरे ईश्वर शब्द का दुरुपयोग भी बहुत हुआ है क्रिश्चन चर्च ने भी बहुत किया है और यहां पर भी करप्ट साधुओं की तो कमी कहीं पर भी नहीं है किसी भी सिविलाइजेशन में नहीं है तो उन्होंने ईश्वर धर्म शब्द का दुरुपयोग किया है बोलकर के शब्दों को फेंक दो नए शब्द ले आओ तो ऐसा जद कोई कहेगा तो ऐसा मैं ऐसा मूर्ख थोड़ी ना हूं कि उनकी बात मान लो अनदर में में कम एंड से टेक माय वर्ड और दूसरा आदमी आएगा कहेगा मेरा शब्द ले लो मैं कहता हूं कि चलो ईश्वर नहीं तो मान लो कि पुरुष आत्मन ब्रह्मण कॉस्मिक इंटेलिजेंस वगैरह वगैरह मेरा एक शब्द ले लो एंड अनदर अगेन सेज टेक माय वर्ड दूसरा एक आदमी आएगा कहेगा मेरा शब्द ले लो ईश्वर की बजाय मैं और एक नया शब्द देता हूं तो इसका अर्थ थोड़ी ना है कि हम ईश्वर शब्द को इन लोगों की बात सुन कर के छोड़ देंगे सो देयर विल बी नो एंड टू फूलिश वर्ड्स ऐसा यदि मान लीजिए कि हमने एक आज नया शब्द ले भी लिया तो इसका दुरुपयोग नहीं होगा इसका क्या गारंटी है आज जैसे ईश्वर शब्द का दुरुपयोग किया तो कल आपने नए शब्द का भी दुरुपयोग किया इस तरह से यदि हम शब्द बदलते ही रहेंगे तो फिर एक बहुत बड़ा कंफ्यूजन खड़ा होगा इसलिए स्वामी जी कहते हैं बहुत ही सुंदर उनका यह पैसेज है मैंने अपने किताब में इसको पूरा हाईलाइट करके रखा है स्वामी जी कहते हैं यूज द ओल्ड वर्ड ओनली यूज इट इन द ट्रू स्पिरिट पुराने शब्द ईश्वर को ही व्यवहार करो किंतु वह जिस स्पिरिट में जिस जिस विचार के साथ में जिस आदर्श के साथ में कहा गया है उस आदर्श के परिणत रूप में उसका व्यवहार करो ट्रू स्पिरिट क्लींज इट ऑफ सुपरस्टिशन एंड रियलाइफ व्ट दिस ग्रेट एंट वर्ड मींस इस शब्द के साथ में जुड़ी हुई सभी अंधश्रद्धा हों का त्याग करो इस शब्द को अंधश्रद्धा से जो मिला हुआ है वह अंधश्रद्धा है इस शब्द से धो डालो और फिर उसका जो ग्रेट एंसेट वर्ड यह जो महत्त्वपूर्ण गरिमामय यह हमारा प्राचीन शब्द है उसकी सही सही गरिमा समझ कर के श्रद्धा भक्ति पूर्वक इसका व्यवहार करो इफ यू अंडरस्टैंड द पावर ऑफ द लॉज ऑफ एसोसिएशन यह लॉज ऑफ एसोसिएशन अर्थात की यदि किसी शब्द के साथ में किसी व्यक्ति के साथ में कोई विचार जुड़ा हुआ है तो वह का नाम देने से ही वह विचार हमारे मन में आ जाएगा यह पावलो का जो एक्सपेरिमेंट है ना वो रशियन साइंटिस्ट बड़ा ही फेमस एक्सपेरिमेंट है वो साइंटिस्ट नहीं साइकोलॉजिस्ट इसको कहेंगे जो भी है वो क्या करता है एक कुत्ते को मांस का टुकड़ा देता है फिर मांस का टुकड़ा देने से पहले किंतु एक घंटी बजाता है अभी जितनी भी बार उसको मांस का टुकड़ा दिया गया कुत्ते को उससे पहले एक घंटी बजाई गई अभी क्या हुआ उसने कुछ दिनों के बाद में अभी कुत्ते के मन में यह घंटी और मांस उसका आहार यह दोनों के बीच में एसोसिएशन तो बैठ गया अभी वह जब उस कुछ दिनों के बास में वो जब घंटी बजाएगा कुत्ते के मुंह से लाल निकलना शुरू हो जाएगा सलाइवा आना उसके मुंह से शुरू हो जाएगा क्योंकि उसके मन में ये एसोसिएशन बैठ गया है जब घंटी बजेगी हमको भोजन मिलेगा तो यह लॉ ऑफ एसोसिएशन है कि जब किसी वस्तु के साथ में किसी परिस्थिति के साथ में किसी घटना के साथ में आपकी कुछ जुड़ा हुआ जैसे ग्रीफ जिसको कहते हैं ना अ किसी चीजों के साथ में आपके कोई बहुत ही प्रिय कोई है पिताजी है या माताजी है या कोई प्रिय बंधु है जबी उनका मृत्यु होता है तो उनके एसोसिएटेड उनके साथ में एसोसिएटेड जो जगह है वहां पर जाने को फिर हम वहां पर जैसे ही जाते हैं हमारे मन में वो एकदम शौक वो ग्रीफ स्टार्ट हो जाती है मेरे ही एक रिलेटिव के बारे में बहुत छोटा था उस समय मेरे जो रिलेटिव थे उनके पिताजी का मृत्यु हो गया अभी ऐसा था कि जब तक उनके पिताजी जीवित थे तब तक वह एक पुराने मकान में रहते थे किंतु पिताजी के मृत्यु के कुछ समय पहले ही वह एक नए जगह पर वह शिफ्ट कर दिए थे नया अपना खुद का मकान परचेस किया था अभी पिताजी का जब मृत्यु हुआ तो यह जो भाई है वो उनकी वो उन्होंने तो नहीं किंतु उनकी वाइफ ने हम मुझे बताया था कि वो जो है वो कभी भी वो अपने पुराने मकान के पास में से जाते नहीं है कहीं काम प जाना है तो रास्ते में तो वह जगह आएगी तो वो जद लंबा रास्ता भी हो तो भी वो वो पुराने घर जो है उनका उसको अवॉइड करेंगे क्यों क पुराने घर को देख कर के ही पिताजी की स्मृति फिर से वो व उनके मन में आ जाती है और वह शौक होता है कि अरे मैंने अपने पिताजी को गंवा दिया इस जगह के साथ में मेरे पिताजी का बहुत ही क्लोज एसोसिएशन था वो पुराना घर था उनके पिताजी ने वो घर लिया था बचपन वहां प बीता था पिताजी के साथ में खेलकूद की थी हंसी मजाक किया था सब कुछ उस घर के साथ में एसोसिएटेड है तो लॉ ऑफ एसोसिएशन वो घर के साथ में वो मधुर यादें जड़ी हुई है अभी उस घर के पास जाने से ही वो याद आता है कि मैंने वो पुराने दिन गवा दिए वो वो याद आने से ही मन के भीतर में एक शौक प्रकट होता है ग्रीफ प्रकट होती है इसलिए वो भाई जो है वो जद कहीं काम से जाना है व वो घर उनका पुराना रास्ते में आता है तो लंबा रास्ता लेकर के उस घर को अवॉइड करेंगे वहां पर नहीं जाएंगे तो इसको कहते हैं लॉ ऑफ एसोसिएशन अपने रामकृष्ण देखिए ये जो भगवान को जब आप मंगल आरती वगैरह जो होता है उसमें घंटी बजाई जाती है ये धूप दिया जाता है यह पुष्प प्रदान किए जाते हैं तो ठाकुर कहते हैं कि वो एक ब्राह्मण महिला को उन्होंने देखा था वो दक्षिणेश्वर आई थी तो ठाकुर कहते हैं कि उसको थोड़ा सा चंदन उनको स्पर्श करवा करके धूप लगा उनके सामने जैसे ही दिया जाएगा वैसे ही वह समाधि में चली जाएगी क्यों क्योंकि देखिए कि मैंने जब यह बात पहली बार पढ़ी थी तो मैंने सोचा कि वह जो स्त्री है ब्राह्मण लड़की जो है उसने क्या है कि बहुत सारी साधना वगैरह किया होगा इसकी वजह से ठाकुर ने धूप दूर वगैरह देने से ही वह समाधि में चली जाती होगी किंतु देखिए कि अभी हमको पता चलता हैय जो लॉ ऑफ एसोसिएशन है छोटी उम्र से ही जो लड़के लड़कियां पूजा वगैरह करते हैं तो उनके मन में यह सब स्मृतियां जड़ित हो जाती है मैं खीर बनाता हूं पायस बांगला में जो कहते हैं या तो फिर मैं ये जो फूल चुन कर के ले आता हूं मंदिर में अपने घर में जो छोटा सा श्राइन है भगवान का फोटो उसके सामने रखता हूं अगरबत्ती जलाता हूं धूप दिया जलाता हूं घी का दिया तो यह सब ये जो हमारे सुसंस्कृत इंद्रियों के विषय है वो इमीडिएट हमारे मन में वह एसोसिएटेड फीलिंग्लेस है किस तरह से हमारी इंद्रियों के माध्यम से हमारे मन में वह पवित्र विचारों को व प्रकट करते हैं पवित्र विचारों के लिए हमको सिर्फ यह जप ध्यान साधन तपस्या वही नहीं इंद्रियों को भी हम इस्तेमाल कर सकते हैं ठाकुर ने कहा ना कि काम और क्रोध तो जाएगा नहीं तो वो इंद्रियों को उनको डायरेक्ट ड चेंज कर दो मोड़ फिर दवना बांगला ठाकुर बोले उनकी डायरेक्शन चेंज कर दो उनकी दिशा बदल दो पवित्र विषयों को की ओर हमारी इंद्रियों को ले जाओ तो ये इंद्रियों को यह पवित्र खुराक देने से ये हमारे मन में लॉ ऑफ एसोसिएशन बैठता है जब भी मैं वो घी के दिया घी का दिया देखता हूं उसकी मुझे सुगंध मिलती है ये अगरबत्ती है उसकी सुगंध मुझे मिलती है या तो फिर फूल है खीर है वह सब मैं देखता हूं तो इमीडिएट उसके साथ में संलग्न वह शुभ चिंतन मेरे मन में स्टार्ट हो जाएगा ये ये जो बायो रिदम जिसको बोलते हैं ना बायोलॉजिकल क्लॉक इसके भीतर में भी यह सब है कि आपका जो एक समय है आहार का उसी समय आप आहार कीजिए क्यों क्योंकि क्या है कि आपके वो जठर में लीवर में वो सब एंजाइम सीक्रेट होना शुरू हो जाते हैं क्योंकि वो आपके बॉडी को पता है कि बायोलॉजिकल समय है आपके आहार का वो आहार का समय कोई भी हो सुबह का 8 बजे का हो ना कि रात के 8:00 बजे का हो यदि आपने कुछ दिनों तक वो समय मेंटेन किया है तो आपका बॉडी बायोलॉजिकल क्लॉक बायो रिदम उसको वो अटैच हो जाता है उसी समय वो फिर वो डाइजेस्टिव एंजाइम सीक्रेट होना शुरू हो जाते है और उस समय यदि आपने शरीर में आहार नहीं होगा तो एंजाइम फिर आपको वो अल्सर या तो एसिडिटी वो सब करवाएंगे तो इसीलिए यह जो बायो रिदम है लॉ ऑफ एसोसिएशन है यह काम करने से यह फीलिंग मेरे मन में आती है कोई कोई का ऐसा होता है जैसे मेरा एक मैं 12थ में फेल हुआ था तो एक्चुअली ऐसा था कि मैंने ठीक कर लिया था कि मुझे पढ़ाई लिखाई नहीं करनी ये करियर वगैरह नहीं बनाना तो मैं उस समय जब स्कू स्कूल में था उस समय मैंने सोचा था घर छोड़ के चला जाऊंगा और गांधी जी वगैरह को बहुत पढ़ा था तो गांव में जाऊंगा और गांव वासियों की सेवा करूंगा तो ऐसा मैंने वो 12थ की शुरुआत में ही मैंने सोच लिया था अभी ऐसा हुआ कि 12थ का जो पूरे छह सात महीना जो मैं स्कूल में जाता था घर में किसी को बताया नहीं था मैं वैसे ही स्कूल में तो जाता ही था क्लास भी करता था किंतु जब मैं स्कूल में जाता था आखिरी बेंच पर बैठा रहता था आखिरी बेंच में बैठे रह कर के मैं ऐसा ही कुछ सोचता रहता था कि गांव में जाऊंगा तो क्या करूंगा या ऐसा ही कुछ उल्टा पुल्टा चिंतन पढ़ाई लिखाई के साथ में जिसका कोई रिलेशन नहीं किंतु वो जो मैं आखिरी आखिरी दिन जो मैंने स्कूल में बिताया वो क्या है ना कि एक ऐसा होता है ना कि भविष्य तो पूरा अनिश्चित है मेरे साथ में जितने भी लड़के थे उन सबका भविष्य एक तरह से कि एक एक नॉर्मल रास्ते प जा रहा है प्री डिटरमाइंड पाथ पे जा रहा है पता है कि वो ग्रेजुएशन करेंगे पता है कि जॉब या बिजनेस ऐसा कोई खोजने का प्रयत्न करेंगे पता है कि वोह मेरे शादी करेंगे पता है कि परिवार के साथ में रहेंगे मेरा जीवन संपूर्ण रूप से अनिश्चित था नहीं ठाकुर म स्वामी जी को मैंने पढ़ा था राम कृष्ण मिशन है वो भी मुझे पता नहीं किंतु एक संसार में मुझे नहीं रहना वह ठीक हो गया था तो यह एक अनिश्चितता का जो दौर था तो मैं वह जो स्कूल में वो आखिरी बेंच पर बैठा रहता था ना वो ऐसा मेरे मन में एक ऐसा एक एसोसिएशन हो गया कि जब भी मैं यह स्कूल में जाता हूं ना कि ऐसा कोई आखिरी बेंच वगैरह देखता हूं ना उसी दिन रात को मुझे व नाइटमेयर्स आते थे मैंने कि मैं फिर से वोह अपनी स्कूल में चला गया हूं फिर से वोह आखिरी बेंच में बैठा हूं मेरा भविष्य पूरा अनिश्चित है पता नहीं मेरे साथ क्या होगा क्या नहीं होगा यह नाइटमेयर ना मेरे साथ में बहुत सालों तक चला और अभी भी कभी-कभी वह ऐसा हो जाता है कि फिर से मैं वो स्कूल में चला गया हूं फिर से मैं पूरा भविष्य अनिश्चित है तो देखिए कि ये लॉ ऑफ एसोसिएशन है ना वो आपके मन में कहां डीप चला जाएगा आपको पता भी नहीं चलेगा पॉजिटिव एंड नेगेटिव दोनों अर्थ में कोई बहुत अच्छी घटना हुई अब जैसे कि दुर्गा पूजा है दुर्गा पूजा के साथ में मेरा एसोसिएशन बहुत ही स्ट्रांग पॉजिटिव है क्योंकि मैं बेलूरमठ में पहली बार गया था तो उस समय दुर्गा पूजा का उत्सव देखा था तो मैं तो बंगोली नहीं हूं दुर्गा पूजा का क्या महात्म्य है क्या दुर्गा पूजा है कुछ नहीं पता वो सडन एक एक ऐसा उत्सव जो कि मेरे लिए बिल्कुल नया है और मेरा ऐसा मुझे एक मौका मिला था उस समय ठाकुर की कृपा से उसको एंजॉय करने का सब समय फर्स्ट लाइन में बैठ कर के भजन के जो काली कीर्तन होता है उसमें पार्टिसिपेट करने का वो इतना सुंदर मौका मिला था आई रियली एंजॉय दैट दुर्गा पूजा सो दुर्गा पूजा इज वेरी स्ट्रांग पॉजिटिव एसोसिएशन फॉर मी जब भी मैं दुर्गा पूजा आती है तो मैं एकदम वह पहली दुर्गा पूजा गंगा के किनारे बैठ कर के जिसको कि मैंने ट्रूली एक एंजॉय किया एक मेरे लिए ट्रूली एक यूनिक डिवाइन ओकेज था वो इमीडिएट मेरे मन में वो फ्लश हो जाता है तो ये पॉजिटिव एसोसिएशन एंड नेगेटिव एसोसिएशन दोनों अपने ब्रेन में इतना डीप चले जाते हैं यह जो सबकॉन्शियस एनालिस साइको एनालिसिस वगैरह जो है ना वो यही ट्रिक है कि जद आपको नाइट र्स आते हैं यदि आपके मन में बार-बार यह द्विधा संकोच डिप्रेशन फ्रस्ट्रेशन यह सब आ जाता है तो यह लोग देखने को प्रयत्न करते हैं कि ये सब ट्रिगर क्या करता है क्या कोई ट्रिगर फैक्टर है कि नहीं जिसकी वजह से यह सब सडन वो सरफेस हो जाता है आप बड़े ही मजे से आपके परिवार में रह रहे हैं बड़े ही मजे से आप अपना डेली काम कर रहे हैं सडन ऐसा कुछ हो जाएगा कि आपकी पॉजिटिव या नेगेटिव इमोशन सरफेस हो जाएगी आपको पूरा पैरालाइज कर देगी यदि नेगेटिव इमोशन है तो साइकेट्रिस्ट के पास में जाएंगे तो वो देखे ना प्रयत्न करेगा कि ट्रिगर क्या करता है आपकी य नेगेटिव इमोशन को तो यह सब है लॉ ऑफ एसोसिएशन किसी घटना किसी ऑब्जेक्ट या किसी पर्सन के साथ में आपकी स्ट्रांग फीलिंग एसोसिएटेड है तो वह घटना पर्सन उसको देख कर के वो आपकी फीलिंग ट्रिगर हो जाएगी तो यहां पर स्वामी जी कहते हैं इफ यू अंडरस्टैंड द पावर ऑफ द लॉज ऑफ एसोसिएशन यू विल नो दैट दिस वर्ड्स आर एसोसिएटेड विथ इन रेबल मैजेस्टिक एंड पावरफुल आइडियाज यदि यह लॉ ऑफ एसोसिएशन आपको पता है तो आपको समझ में आना चाहिए कि ईश्वर भगवान वेद उपनिषद ब्रह्मनम इन सब इन सब शब्दों के साथ में सर्वश्रेष्ठ विचार सर्वोत्तम विचार इन सब शब्दों के साथ में एसोसिएटेड है दे हैव बीन यूज्ड एंड वशिप बाय मिलियंस ऑफ ह्यूमन सो एंड एसोसिएटेड बाय देम विथ ऑल ट इज हाईएस्ट एंड बेस्ट लाखों करोड़ों मनुष्यों ने ईश्वर शब्द की उपासना की है और जो सर्वश्रेष्ठ चिंतन है उस चिंतन को इस शब्दों के साथ में जोड़ा है ऑल ट इज रेशनल ऑल ट इज लवेबल एंड ऑल ट इज ग्रेट एंड ग्रांड इन ह्यूमन नेचर मनुष्य के स्वभाव में जो सर्वश्रेष्ठ है जो जिसको हम सर्वश्रेष्ठ सर्वोत्तम स सर्व उदात्त जो विचार है वह सब इस शब्दों के साथ में जुड़े हुए हैं तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम श्री राम कृष्णर्पण मस्तु