Invocation
ओम स्थापक यज धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः स्वामी विवेकानंद का माय प्लान ऑफ कैंपेन भारत में दिए हुए व्याख्यान में से एक अभी जो पॉइंट हम डिस्कस कर रहे हैं जो थीम है वह है हाउ टू इंप्रूव भारत की जो उस समय की परिस्थिति थी उसके अनुसार स्वामी जी ने हमारा इतिहास हमारी धरोहर हमारी संस्कृति हमारा धर्म हमारे पुरखों का टीचिंग्स और उपदेश उस सबको ध्यान में रख कर के स्वामी जी ने एक पूरा प्लान बनाया कि किस तरह से भविष्य का भारत होना चाहिए अभी देखिए कि यह प्रवचन ऑलमोस्ट दिए हुए सवा स साल ऑलमोस्ट कंप्लीट हो गए हैं और इस समय क्या आज का भारत स्वामी जी के दिए हुए प्लान के ऊपर में चल रहा है कि नहीं चल रहा वह एक प्रश्न की बात है जिसको कि हम इस पूरे प्रवचन के आखिर में एक बार रिव्यू करेंगे किंतु अभी आज जो पॉइंट है वह है कि इंप्रूव इंडिया हाउ टू बेटर इंडिया उस थीम का सेकंड पॉइंट गुड एंड इवल आर टू साइड्स ऑफ द सेम कोइन अच्छा और बुरा इष्ट और अनिष्ट यह दोनों एक ही सिक्के की दो पहलु एं है तो इसके इस पॉइंट का एक पैराग्राफ हमने कल पढ़ा था मैं एक बार रिपीट कर देता हूं स्वामी जी कहते हैं इविल्स आर प्लेंटीफुल इन अवर सोसाइटी बट सो आर देयर इविल्स इन एवरी अदर सोसाइटी हमारे देश में हमारे समाज में बहुत सारे दूषण है बहुत सारे अनिष्ट है किंतु फिर यही दूषण यही बुराइयां यही अनिष्ट दूसरे देशों में भी है हियर द अर्थ इज शॉक्ड सम टाइम्स विथ विडोस टयर्स देयर इन द वेस्ट द एयर इज रेंट विद द साई ऑफ द अनमैरिड यहां पे भारत में विधवाओं के आंसू से धरा भीगी हुई है वहां पे यूरोप और अमेरिका में पश्चिमी देशों में अनमैरिड स्त्रियों की निराशा से हवा और वातावरण पूरा जैसे कि भर गया है तो यहां पे जैसे हमने देखा यह विधवा विवाह पुनर्विवाह की बात यह लोग सब कर रहे थे रिफॉर्म सोसाइटी तो उनका कहना था कि देखिए कि भारत में ही इस तरह की दुरावस्था है कि एक स्त्री यदि विधवा हो जाती है तो उसको इतने कठिनाई में रहना पड़ता है तो स्वामी जी कहते हैं कि अमेरिका में और यूरोप में देखिए कि स्त्रियों को शादी करने के लिए इजली पुरुष मिलते नहीं है और जो अनमैरिड रह जाती है उन के दुख से वहां पर वह हवा भरी हुई है वातावरण भरा हुआ है तो माने यहां पर इस तरह का अनिष्ट है तो वहां पर उस तरह का अनिष्ट है हियर पॉवर्टी इज द ग्रेट बेन ऑफ लाइफ देर द लाइफ वेरीनेस ऑफ लग्जरी इज द ग्रेट बेन दैट इज अपॉन द रेस यहां पर जदी गरीबी है जदी पूरे देश को खाए जा रही है तो वहां पर जीवन से थक कर के इस तरह की लगजरी इस तरह का जैसे कि धन वि भव के जिससे लोग थक गए हैं और इस थकावट के मारे वे लोग डिप्रेशन में चले गए हैं यह अभी आजकल यह लोनलीनेस पर स्टडी होती है अमेरिका में कुछ-कुछ स्टडीज मैंने रिसेंटली पढ़े कि वहां पर लोग इतना अपने को लोनली महसूस करते हैं अपने को इतना अकेला महसूस करते हैं कि ये लोनलीनेस आखिर में उनको खा जाती है अभी जापान की परिस्थिति देखिए जापान है चाइना है आज सभी देशों में बर्थ रेट डाउन हो जा रहा है यह एक बड़े आश्चर्य की बात है यह जो पॉपुलेशन डायनेमिक्स से एक ऐसा विचित्र साइंस है माल्थुस बोलकर के एक था सोशियोलॉजिस्ट
Thomas Malthus, an 18th-century economist and demographer, warned that unchecked population growth would eventually overwhelm the available food supply, leading to inevitable shortages and widespread hardship. In his influential 1798 work, An Essay on the Principle of Population, Malthus argued that while human populations can increase geometrically, food production tends to grow only arithmetically. This imbalance, he predicted, would result in recurrent famines, disease, and social instability unless natural checks—such as increased mortality or voluntary restraint—curbed population growth. His stark warning continues to spark debate on sustainability and resource management even today.
उसने 200 साल पहले ऐसा प्रेडिक्शन किया था कि इस जगत में इतने सारे बच्चे हो जाएंगे इतने सारे यह यंग लोग हो जाएंगे क्योंकि अपनी पॉपुलेशन तो बढ़ती ही जाती है तो आखिर में एक ऐसा समय आएगा कि ये जो पृथ्वी की ये जो रिसोर्सेस है नेचुरल रिसोर्सेस वो कम पड़ जाएंगे लोगों को खिलाने के लिए अभी किंतु देखिए कि आश्चर्य की बात हमने देखा है आखिरी 100 साल में कि यदि गरीब देश होता है तो वहां पे यह जो बर्थ रेट होता है वह हाई होता है अभी जैसे साउथ एशिया में ही देखिए कि बांग्लादेश और
birth rate per countries
पाकिस्तान का बर्थ रेट भारत से ज्यादा है हालांकि भत भारत में उन लोगों से ज्यादा प्रोस्पेरिटी है अभी पूरे विश्व में देखेंगे तो यह अफ्रीकन कंट्री से नाइजेरिया वगैरह वहां पे हाईएस्ट बर्थ रेट है जो कि सबसे गरीब देश है और जो कि सबसे अमीर देश है ये जैसे कि ये जापान है अमेरिका है यूरोप है फिनलैंड है नेदर मैड है वगैरह वगैरह सब जगह पे देखिए इवन चाइना में भी सब जगह पर बर्थ रेट डाउन हो रहा है और कहीं-कहीं देशों में तो ऐसी परिस्थिति आ गई है कि अभी यह 2.1 पर को कहा जाता है कि वो इक्विलियम बनाने के लिए इतना बर्थ रेट चाहिए मान लीजिए कि आज अपना पॉपुलेशन 1 करोड़ का है एक देश का या कहीं का अभी आपको यही 1 करोड़ पॉपुलेशन बनाए रखनी हो तो जितने लोगों का मृत्यु होता है उतने ही सामने इक्वल नंबर ऑफ बर्थ होने चाहिए तो वो जो मृत्यु और डेथ रेट और बर्थ रेट इन दोनों में यदि सामंजस्य एक तरह का एक पेरिट बनाए रखना है तो मिनिमम बर्थ रेट होना चाहिए समथिंग लाइक 2.1 तो ये 2.1 से यदि आपका इस देश का बर्थ रेट कम होगा तो वहां की पॉपुलेशन धीरे-धीरे कम होती जाएगी क्योंकि यह 2.1 अर्थात कि प्रति 1000 महिला पे एक साल में दो इतने बच्चों का जन्म और समथिंग लाइक दैट एग्जैक्ट में फॉर्मूलेशन भूल गया किंतु इस तरह का है 2.1 उसका बर्थ रेट होना चाहिए तो अभी देखिए कि बहुत सारे देशों में खास करके जितने धनी देश है जापान है साउथ कोरिया है चाइना है फिर यह यूरोप के कंट्रीज है इन सब जगह पर बर्थ रेट इतना डाउन हो गया है कि वह रिप्लेनिशमेंट लेवल पेरिट लेवल से कम हो गया है अर्थात कि अभी उनका डेथ रेट बर्थ रेट से ज्यादा है जितने लोग जितने बच्चे जन्म ग्रहण करते हैं उससे ज्यादा लोगों का मृत्यु होता है हर साल अर्थात कि और कुछ साल ऐसे जाएंगे तो उनकी पॉपुलेशन अभी धीरे-धीरे करके डाउन होती जाएगी अभी ये हम लोग सोच रहे थे कि सबसे ज्यादा धनी देशों में ही ऐसा होता है किंतु यहां पे देखिए कि चाइना में भी अभी यह जो पेरिट बनाए 2.1 से कम हो गया है उनका बर्थ रेट भारत में ऐसी परिस्थिति है कि साउथ अ जो साउथ इंडियन कंट्रीज जितने भी है साउथ इंडियन कंट्रीज में यह बर्थ रेट अभी धीरे-धीरे करके कम हो रहा है क्योंकि साउथ इंडिया में नॉर्थ इंडिया से ज्यादा प्रोस्पेरिटी है नॉर्थ इंडिया में बर्थ रेट अभी ऑलमोस्ट 2 प व तक आ कर के रह गया है यानी कि अभी भारत की पॉपुलेशन इससे बहुत ज्यादा आगे नहीं बढ़ेगी और जितने भी एडवांस इंडस्ट्रियल इंडस्ट्रियलिज्म कर करके कम होती ही जाएगी तो एक बहुत बड़ा प्रश्न अपने सामने आता है कि यह उल्टा लॉजिक क्यों है भाई यदि देश गरीब है तो कम बच्चे होने चाहिए क्योंकि लोगों बच्चों को खिलाने के लिए ज्यादा अन्न नहीं है और यदि देश धनी है तो वहां पर ज्यादा बच्चे होने चाहिए क्यों क्योंकि वहां पर खिलाने के लिए बच्चों की केयर करने के लिए धन भी है और गवर्नमेंट की सब योजनाएं भी है वहां पर यह एजुकेशन सिस्टम हेल्थ सिस्टम अच्छे से कार्य भी करता है तो यह एंटाई इंटूटिव लॉजिक किस तरह से काम कर रहा है जो कि हमको सामान्य बुद्धि से समझ नहीं आता इस तरह का यह पॉपुलेशन डायनेमिक्स क्यों है मुझे नहीं पता कि इस बात का कोई परफेक्ट उत्तर अ अभी तक दे पाया है किंतु यह भारत का यह जो डेमोग्राफिक डिविडेंड की बात हम लोग आजकल कर रहे हैं वह क्यों कर रहे हैं क्योंकि भारत में आज यंग लोगों की पॉपुलेशन वृद्ध लोगों की पॉपुलेशन से ज्यादा है जिसको कि एवरेज एज कहते हैं एवरेज आयु एवरेज उम्र जिस देश की तो भारत की एवरेज एज यंग है ज्यादातर भारतीय और 30
average lifespan per countries
के आसपास की एज के है पाकिस्तान या तो अफ्रीका के देश की एवरेज एज हमारे से भी कम है क्योंकि वहां पर प्रोस्पेरिटी कम है बोलक के और यह जो जापान वगैरह वहां पे एवरेज एज देखेंगे वो कहीं-कहीं पे तो 50 को क्रॉस कर गई है यानी कि वहां पे वृद्ध लोगों की संख्या यंग लोगों की संख्या से ज्यादा है यानी कि यहां पे दो प्रॉब्लम होते हैं जो कि इंडस्ट्रियल इज्ड नेशन है आज के जगत में एक तो बर्थ रेट डाउन हो जा रहा है यानी कि उनकी पॉपुलेशन धीरे-धीरे करके कम होगी और दूसरा है कि पॉपुलेशन में जो एवरेज एज है ज्यादातर लोग वृद्ध होंगे यंग लोगों की संख्या कम होगी अभी इससे होता क्या है देखिए कि कोई भी इनोवेशन टेक्नोलॉजी डिस्कवरीज यह सब तो यंग लोग करते हैं आइंस्टाइन ने अपना जो वो थिरी ऑफ रिलेटिविटी वगैरह जो लिखा वो 40 इयर्स के पहले ही उसने अपनी सब इन्वेंशन कर दी थी आइंस्टाइन है न्यूटन है जितने भी ग्रेटेस्ट साइंटिस्ट है अपनी यंग में एज में ही सबसे ज्यादा कार्य करते हैं स्वामी जी को भी देखिए कि 39 से पहले उनका मृत्यु हो गया जो कुछ उनको करना था 39 के पहले उन्होंने कर दिया शंकराचार्य ने 16 साल की उम्र में अपना संपूर्ण कार्य समाप्त कर दिया था लेखनी टीका भाष्य वगैरह आखिर में कहीं जाकर के उन्होंने बाकी के 16 साल उसका प्रचार किया था 32 साल में तो उनका भी उन्होंने भी महासमाधि ले ली थी ठाकुर खुद 50 साल की आयु में चले गए थे तो मैंने आध्यात्मिक कहो ना कि साइंस कहो ना कि आर्ट्स कहो जो भी क्षेत्र में आप देखेंगे कि जो सर्वश्रेष्ठ कार्य होने वाला है यह क्रिकेटर्स को देखिए एक्टर्स को देखिए आर्ट्स सिनेमा स्पोर्ट्स कोई भी कॉर्पोरेशन फाइनेंस कोई भी फील्ड में जाकर के देखेंगे आपके बेस्ट यर्स आर बिफोर 50 50 हो गए उसके बाद में आपने जो किया है वोह मेंटेन कर सकते हैं कम ही लोग होते हैं दे कैन ब्रेक अ न्यू ग्राउंड आफ्टर 50 तो यह जो यूथ है व्हिच इज वेरी इंपोर्टेंट इन दी डेवलपमेंट एडवांसमेंट ऑफ अ नेशन किंतु जिस देश में यंग लोगों की संख्या कम हो जाएगी जहां पर बर्थ रेट डाउन हो जाएगा उस देशों का होगा क्या अभी जापान में देखिए कि एल्डरली केयर यानी कि जो वृद्ध लोगों की जो केयर करनी होती है उन लोगों के लिए अभी कोई नर्स वगैरह मिलते नहीं है या तो फिलिपींस वगैरह से जो कि गरीब देश है आसपास के वहां से वो इंपोर्ट करेंगे यह वर्कर्स को या तो फिर अभी वे लोग रोबोट डेवलप करना शुरू कर दिए है तो यह रोबोट है वह जो वृद्ध लोगों की केयर करेगा किंतु आप यदि वृद्ध है 60 70 साल हो गए हैं आपको अभी एक केयर करने के लिए कोई चाहिए साथ में और वह रोबोट ही हो चारों ओर से आप रोबोट से घिरे हुए हो तो यह अकेलापन कैसा महसूस होगा अभी यह कनाडा में वो वहां पे वह इच्छा मृत्यु जिसको कहते हैं ना कि यदि मेरी इच्छा नहीं है जीने की तो मैं सुसाइड कर सकता हूं लीगल सुसाइड तो इस तरह से वे लोगों ने इसको लीगलाइज कर दिया है आपको मैंने वो बहुत ज्यादा पेन नहीं होगा एक चेंबर में सुला देंगे वहां पर स्लीपिंग गैस वगैरह कुछ देंगे तो आप सो जाएंगे और नींद में ही नींद में मृत्यु हो जाएगा असिस्ट सुसाइड लीगल सुसाइड यह सब नाम दिए जाते हैं तो ये हट एकाएक इतना पॉपुलर हो गया है कि वहां की गवर्नमेंट भी एकदम चौक गई कि इतने सारे लोग क्या अपने को मैंने सुसाइड करना चाहते हैं व्हिच इज वेरी सरप्राइजिंग इतना धनी देश है कनाडा में आप जद जाएंगे कि संख्या पॉपुलेशन कम है और वास्टली रिसोर्सेस है आप बड़े आनंद से वहां पर रह सकते हैं तो वहां पर क्या इतने लोग मैंने एसिस्टेड लीगल सुसाइड करना चाहते हैं व्हिच इज वेरी सरप्राइजिंग तो देखिए कि यहां पे जो स्वामी जी कह रहे हैं कि वर्ल्ड वेरीनेस बोर्न आउट ऑफ लग्जरी तो मैं जब पहली बार यह सब पढ़ रहा था मुझे थोड़ा सा हंसी आ रही थी कि कौन मने मुझे यदि ऑप्शन दिया जाए कि गरीबी से सुसाइड करना है कि लग्जरी से सुसाइड करना है बेटर कि वो लग्जरी में में सुसाइड करो किंतु यह इंडिविजुअल चॉइस के बारे में सिर्फ नहीं है पूरे देश के बारे में है पूरा देश धीरे-धीरे करके डिप्रेशन में जाता जाएगा यह जो नंबर ऑफ बर्थ रेट कम होता जाएगा एवरेज एज बढ़ती जाएगी लोनलीनेस बढ़ती जाएगी आज अमेरिका इतना जो एडवांस अभी तक है उसके पीछे का सबसे बड़ा कारण क्या है कि नॉर्मसिंव ये अमेरिका में हर साल जो मिलियन मिलियन रिफ्यूजीस एंड इमीग्रेंट घुस जाते हैं अभी यह लोग उसको गाली तो देते हैं किंतु उनकी पूरी इकोनॉमी इस इमीग्रेंट पर चलती है आज मैनुअल लेबर करने वाले लोअर लेवल वर्क करने वाले ये जितने भी वर्कर्स है सब ये साउथ अमेरिका से ना कि एशिया से इंपोर्ट हुए हैं और सिर्फ यह फिजिकल लेबर ही नहीं इंटेलेक्चुअल लेबर हम एशियन लोग करते हैं बड़ी-बड़ी कॉर्पोरेशन में आपको घंटों घंटों भर तक बैठ कर के कोडिंग करते रहना होता है बैक ऑफिस वर्क करते र रना होता है ये एडमिनिस्ट्रेटिव रिपिटेटिव टास्क करते रहना होता है तो यह सब कौन करेगा तो यही अपने इंडियन आईआईटी वाले ही तो करेंगे उसके अलावा कौन मिलेगा तो अभी देखिए कि यह अमेरिका एक यूनिक नेशन है कि जिसमें वाइट पॉपुलेशन की संख्या वैसे तो कम होती जाती है किंतु बिकॉज ऑफ दिस इमीग्रेशन उन्होंने अपना इकोनॉमिक पावर अभी तक मेंटेन करके रखा है उस समय देखेंगे कि स्वामी जी के समय में यह वाइट रेस जो है कोके शियन जिनको कहते हैं यह इट रेस ने पूरे जगत पर अपना अधिकार स्थापित करके रखा था यह अधिकार आज भी है किंतु यह इसके लिए नहीं है कि वाइट लोगों में बहुत ज्यादा पावर है उनका टोटल वर्ल्ड पॉपुलेशन में यदि परसेंटेज देखा जाए इट इज लेस देन 15 पर
a reasonable rough estimate is that about 10–15% of the world’s population is white. Keep in mind that “white” in this context generally refers to people of European origin and their descendants.
देखिए कि मैंने 85 पर आर नॉन वाइट इन दिस वर्ल्ड राइट नाउ ये पॉपुलेशन की अवस्था है वो जो तिलक ने उस समय जो कहा था कि पूरा भारत इतने कम ब्रिटिशर भारत पर राज करते हैं कि यदि पूरा भारत एक साथ में थूके का भी तो उसमें से इतना बड़ा यह जो जवार आएगा कि ये ब्रिटिश लोग बह जाएंगे और दुनिया में अभी यही परिस्थिति है 15 पर ना समथिंग ये वाइट लोग है 85 आर नॉन वाइट किंतु बिकॉज कि ये जैसे हमने कल डिस्कस किया था उस समय ये वाइट लोग देखिए उन लोगों की इंजेन उन लोगों की शार्पनेस इतनी जबरदस्त है कि पहले तो मिलिटरी बाकी के पूरे जगत पर राज किया आज वे लोग मेंटली कल्चरल इंटेलेक्चुअली पूरे जगत पर राज कर रहे हैं भत हो ना कि य ज्यादातर देश में देखिए कि अमेरिका में कोई एक स्टेटमेंट देता है तो पूरा देश खड़ा हो जाता है अरे अब हमारे देश के बारे में ऐसा बोल दिया हमारे देश के बारे में और यहां पर पूरे भारत के 100 करोड़ लोग एक साथ में मिलकर के अमेरिका को गाली भी देंगे उनके पेट का पानी भी नहीं हिलने वाला क्यों क्योंकि उनको पता है कि ये मूर्ख एशियन लोग तो ऐसे ही है कुछ भी बोलते रहेंगे डजन मैटर तो वो जो मर्दानगी है उनके भीतर में एक स्ट्रेंथ ऑफ कैरेक्टर है एक इंटेलेक्चुअल एक्यूमेन है सिर्फ प्योर इंटेलेक्ट के ऊपर में पहले तो उन्होंने मिलिटरी यह किया पूरे जगत पर राज किया अभी यह लोग कल्चरल हमारे पर राज कर रहे हैं तो दैट इज वन थिंग स्वामी जी ने यह सब उसी समय देख लिया था कि इन लोगों का कल्चरल डोमिनेंस जो है मिलिटरी डोमिनेंस ये धीरे-धीरे करके डाउन होगा किंतु फिर सामने इस वैक्यूम जो क्रिएट होता है उसका बेनिफिट लेने के लिए सामने और तो कोई खड़ा होना चाहिए सामने इस तरह की ऐसी रेस खड़ी होनी चाहिए जो कि इंटेलेक्चुअली मोरली एथिकली सोशली पॉलिटिकली मिलिटर ली इतनी इक्वली पावरफुल हो तो अभी भारत उस पोजीशन में कब पहुंचेगा हम लोग नाम से तो विश्वगुरु है किंतु देखिए कि ये डीप सिक चाइनीज एआई अभी कुछ दिनों पहले उन्होंने रिलीज किया तो अमेरिका में एक ट्रिलियन डॉलर ना कि आधे ट्रिलियन डॉलर वो मार्केट शेयर एक ही दिन में टूट गया अभी उस दिन मैंने बहुत सारा डिस्कशन सुना था पढ़ा था कि भारत में डि डीप स कब डेवलप होगा भारत का एआई कब डेवलप होगा तो इसका कोई उत्तर देने के लिए कोई भी तैयार नहीं है एक भी ऐसी कंपनी भी नहीं चाइना में तो एटलीस्ट वन डजन कंपनीज है जो कि वोह एआई मॉडल्स लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स मशीन लर्निंग पे काम करती है आई डू नॉट नो कि भारत में कोई काम करता होगा कि नहीं भारत में इस तरह का इनिशिएटिव है कि नहीं होगा भी तो वो मुझे नहीं लगता कि डीप सिक जैसा एक इमेंस वो एक फ्रंटियर मॉडल वे लोग डेवलप कर पाए तो ये भारत की आज की परिस्थिति है हमारे सामने देखिए कि दोनों चीज है अपने पास में पोटेंशियल है अपने पास में मैन पावर है इंडिया टुडे इज इन अ डेमोग्राफिकली गोल्डन स्पोर्ट अपने पास में जो पॉपुलेशन है हाईली एजुकेटेड है आप सरप्राइज टू हियर कि लार्जेस्ट नंबर ऑफ इंग्लिश स्पीकिंग पीपल आर इन इंडिया भारत में सबसे ज्यादा इंग्लिश स्पीकिंग लोग हैं अमेरिका ब्रिटेन से भी ज्यादा तो ये एक अपने पास में है कि वी आर ग्लोबल कनेक्टिविटी हम लोग जिस तरह से कर पाते हैं यह चाइनीज लोग कभी नहीं कर पाएंगे क्योंकि वे लोग पहले से ही यह इंग्लिश को एक तरह से उन्होंने एक हाथ दूरी पर रखा है आज अपने आईआईटी इंडस्ट्रियल कॉलेज यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएट्स की अमेरिका में यूरोप में जिस तरह से डिमांड है इतनी और किसी की भी नहीं है ए1 बी वीजा देखिए सबसे ज्यादा एलोकेट अपने इंडियंस को होता है इन स्पाइट ऑफ लिविंग विद इन दिस डेमोग्राफी स्वीट स्पोर्ट हम लोग इसका लिवरेज अपनी इकोनॉमी पर कब कर पाएंगे अपनी इकोनॉमी कब 10 पर के साथ में ग्रो करेगी चाइना का सबसे बड़ा बेनिफिट क्या था अप टू 1980 भारत के साथ में चाइना का डेवलपमेंट हो रहा था किंतु फिर 1980 में देखिए कि चाइना का हिस्ट्री देखेंगे ना दो हिस्सों में बंटा हुआ है यह पोस्ट इंडिपेंडेंस हिस्ट्री अभी वहां पे वैसे वे लोग गुलाम नहीं थे किंतु कल्चरल बड़े ही व लोग सहमे हुए थे तो जैसे हीय कम्युनिस्ट रेवोल्यूशन आया तो भारत में यह इंडिपेंडेंस मिला वहां पर कम्युनिस्ट रेवोल्यूशन आया वो ऑलमोस्ट मोरर लेस इक्ली साथ में ही हुआ है तो वहां की हिस्ट्री दो हिस्सों में बटी हुई है एक तो पागल माओज दोंग करके था जो कि कम्युनिस्ट लोगों का पहला लीडर था और उसने जो खूना मर्की की है वहां पे चाइना में यह ग्रेट लीप फॉरवर्ड ना कि कल्चरल रेवोल्यूशन इस तरह के पागलपन करके अपने ही खुद के देश के करोड़ों करोड़ों लोगों को मौत के घाट उसने उतार दिया किंतु उस उसका यह एक बेनिफिट यह हुआ कि वहां की जो बची हुई पॉपुलेशन है वह हाईली डिसिप्लिन हाईली ओबेडिएंट हाईली ऑर्गेनाइज्ड उसने करके रख दी तो अभी ये जो पावरफुल मशीन उसने तैयार किया है डिसिप्लिन ऑर्गेनाइज्ड एंड ओबेडिएंट उस मशीन का अभी क्या करना है तो सेकंड फेज स्टार्ट हुआ यह द शियाओपिंग तो दें शियाओपिंग की जो इकोनॉमिक इक्विपमेंट इतनी पावरफुल थी उसने कहा कि डज नॉट मैटर द कैट इज वाइट और ब्लैक एज लंग एज इट चस द माउस एक बिल्ली जदी सफेद है ना कि काली है उससे कोई फर्क नहीं पड़ता जब तक वह चूहे को पकड़ती है तब तक वह काम की है अर्थात कि आप कम्युनिज्म रखे अपने देश में ना कि ये कैपिट ज्म रखे देश में प्रोस्पेरिटी चाहिए तो अभी उसने जिस तरह से सिस्टम में चेंजेज करना शुरू किया अमेरिका के साथ में फ्रेंडशिप वगैरह किया वगैरह वगैरह तो इसकी वजह से यह जो डब्ल्यूटीओ वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन में उनको एडमिटेंस मिला वगैरह इट्स बाद में जैसे कि चाइना हैज बिकम अ जैसे कि यह फैक्ट्री ऑफ द वर्ल्ड यह मैन्युफैक्चरिंग सेंटर ऑफ द वर्ल्ड उस समय चाइना वाज ग्रोइंग फॉर 10 पर ऑन एवरेज फॉर टू डिकेड्स मने 20 साल तक ऑलमोस्ट 10
Over roughly the past two decades—from the early 1990s through the 2000s—China’s economy underwent a transformation that has often been described as nothing short of miraculous. Annual GDP growth averaged close to 10%, as sweeping market reforms, opening to foreign investment, and rapid industrialization propelled the country from an agrarian economy into a global manufacturing and export powerhouse. This unprecedented expansion not only lifted hundreds of millions out of poverty but also reshaped global economic dynamics, positioning China as the world’s second-largest economy.
पर के आसपास उनका इकोनॉमिक ग्रोथ हुआ है तो अभी देखिए कि भारत का आखिरी 10 साल 20 साल में देखा जाए तो मुझे नहीं लगता कि
In the last two decades, both China and India have emerged as major engines of global economic growth, but their trajectories and growth rates have followed distinct paths. China’s rapid transformation—marked by annual GDP growth often near 10%—was driven by extensive market reforms, export-led manufacturing, and massive infrastructure investments, which catapulted it into the ranks of the world’s largest economies. By contrast, India’s growth, while robust and dynamic—averaging between 6% and 8% over similar periods—has been characterized by a more service-oriented expansion and a gradual pace of structural reform. Although India’s economy has expanded significantly and lifted millions out of poverty, its growth rate has generally been lower than China’s, reflecting differences in industrial policies, investment levels, and the pace of regulatory reform.
एवरेज ग्रोथ अपना 7 पर से ज्यादा है तो यह एक बहुत बड़ी बात है कि अपने पास में पोटेंशियल है अपने पास में थिरी है अपने पास में यह कल्चर है अपने पास में ठाकुर महा स्वामी जी है किंतु भारत की जो हमेशा से वो जो राम कहानी रही है कि बातों में सबसे आगे हैं कर्म में सबसे पीछे तो नहीं कहेंगे किंतु वो फ्रंट लाइन पे नहीं है फ्रंटियर लेवल पे नहीं है सो आई डू नॉट नो व्हाट द फ्यूचर इज किंतु स्वामी जी का यह जो पश्चिम के बारे में यह जो मत था भविष्यवाणी थी ये बिल्कुल ठीक है ये लाइफ वेरीनेस ऑफ लग्जरी इज अ ग्रेट ट बैन दैट इज अपॉन द रेस बहुत ज्यादा प्रोस्पेरिटी हो जाने से बर्थ रेट कम होगा एवरेज एज बढ़ जाएगी और फिर धीरे-धीरे करके लोनलीनेस आ कर के खा जाएगी और देश धीरे-धीरे करके अभी जैसे जर्मनी है फ्रांस है यह ब्रिटेन है इन तीनों देशों को देखिए वहां पर पॉपुलेशन इंक्रीज होना ऑलमोस्ट बंद हो गया है अमेरिका की तरह वे लोग रिफ्यूजीस को इमीग्रेंट को वेलकम नहीं करते हैं तो फिर इसका परिणाम क्या आएगा कि इमिक स्टैग्नेशन एंड इवेंचर इकोनॉमिक रिसेशन तो यह
Recent International Monetary Fund forecasts show that Europe’s major advanced economies are growing at very modest rates. In 2023, Germany’s GDP is projected to rise by about 1.3%, France’s by roughly 1.4%, and the United Kingdom’s by around 1.5%. These figures stand in stark contrast to the robust, double-digit growth rates seen in emerging markets over past decades, highlighting the ongoing structural challenges and limited dynamic development in these mature economies.
परिस्थिति ऑलरेडी यूरोप में आकर के खड़ी हो गई है तो इसलिए अभी आगे स्वामी जी कहते हैं हियर मेन वांट टू कमिट सुसाइड बिकॉज दे हैव नथिंग टू ईट दे दे कमिट सुसाइड बिकॉज दे हैव सो मच टू ईट यहां पर लोग आत्महत्या करते हैं क्योंकि खाने के लिए कुछ नहीं वहां पर आत्महत्या करते हैं क्योंकि खाने के लिए बहुत ज्यादा है इविल इज एवरी वेयर दूषण अनी ट बुराइयां सब जगह पर है इट इज लाइक क्रॉनिक रूमेटिज्म यह जो यह आर्थराइटिस रूमेटिज्म होता है क्रॉनिक रूमेटिज्म मेरे हाथ में दर्द जॉइंट का दर्द य साधों का दर्द तो यहां पर जॉइंट में दर्द हो रहा है मेरे एल्बो में वहां से जाएगा तो मेरी नीज में होगा और नीज में से जाएगा तो गर्दन में होगा तो कहीं ना कहीं यह दर्द शरीर में ही गोलगोल घूमता रहेगा दर्द जाएगा नहीं तो लाइक क्रोम क्रॉनिक रूमेटिज्म ड्राइव इट फ्रॉम द फुट इट गोज टू द हेड ड्राइव इट फ्रॉम देयर इट गोज सम वेयर एल्स पैर में से हटाओ तो गर्दन में जाएगा सर में जाएगा सर से हटाओ तो और कहीं जाएगा इट इज अ क्वेश्चन ऑफ चेजिंग इट फ्रॉम प्लेस टू प्लेस ट इज ऑल एक जगह से हटाओ से दूसरी जगह भेजो दूसरे से तीसरी जगह पे भेजो बस इतना ही है ए चिल्ड्रन टू ट्राई टू रेमेडी एविल इज नॉट द ट्रू वे सुनो बच्चों ये इविल यानी कि अनिष्ट का निराकरण करना यह सही रास्ता नहीं है अवर फिलोसोफी टीचस दैट इवल एंड गुड आर इटरनल कंजो द ओवर्स एंड द रिवर्स ऑफ द सेम कोइन हमारी फिलोसोफी हमारा दर्शन हमको सिखाता है कि इष्ट और अनिष्ट अच्छाई और बुराई हमेशा से एक दूसरों के साथ में मिली हुई है वो जैसे कि एक ही सिक्के की एक साइड और दूस दूसरी साइड है इफ यू हैव वन यू मस्ट हैव द अदर अ वेव इन द ओशन मस्ट बी एट द कॉस्ट ऑफ ए होलो समवेल सवेर यदि आपके पास में इष्ट है तो अनिष्ट आना ही है अनिष्ट है तो इष्ट आना ही है यदि समुंदर में एक लहरी उठती है तो लहरी को उठाने के लिए कहीं ना कहीं पर थोड़ा सा डिप्रेशन तो आएगा ही आएगा ने ऑल लाइफ इज इवल इससे भी ज्यादा आगे बढ़कर स्वामी जी कहते हैं पूरा जीवन ही जैसे कि अनिष्ट है नो ब्रेथ कैन बी ब्रेथ विदाउट किलिंग समवन एल्स एक सांस भी आप नहीं ले सकते बिना जिसके बिना आप किसी की हत्या ना करिए जैन मुनियों को देखा है ना चाहे मुंह के ऊपर में वह जो सफेद कपड़ा लगा के घूमते हैं क्यों क्योंकि सांस भी लेंगे छोटे-छोटे जीवाणुओं की हत्या होगी किंतु आप चल रहे हैं तो आपके पैर के नीचे तो कुछ ना कुछ जीव जंतु आने ही वाले हैं यानी कि अब जैन मुनि की तरह भी जिद कितनी भी केयर कर ले आप बिना हत्या के रह नहीं पाएंगे खाना खाना है तो यह सब्जी है यदि आप वेजिटेरियन भी है चलिए मैं नॉनवेज नहीं खाता हूं वेजिटेबल खाता हूं तो अपने ही तो वो जगदीश चंद्र वो क्या नाम था साइंटिस्ट
Jagadish Chandra Bose, a pioneering Indian scientist of the early 20th century, demonstrated that plants exhibit life-like responses. Using a sensitive instrument known as the crescograph, Bose was able to record minute movements in plant tissues when exposed to various stimuli—such as mechanical pressure or temperature changes. His experiments revealed that plants generate electrical responses similar to those observed in animal tissues, suggesting that they are not passive organisms but are dynamically responsive. Bose’s groundbreaking work not only challenged the prevailing notion of plants as inert life forms but also laid the foundation for modern studies in plant physiology and signaling.
का जिसने कि प्रूव किया कि हां य पौधों के बीच भीतर में भी जीवन है अपने ही साइंटिस्ट ने प्रूव किया है तो जद आप फल मूल भी खाते हैं तो उससे भी हत्या होगी जीवन धारण करने के लिए बिना हत्या के आप नहीं रह सकते हैं नॉट ए मोर्सल ऑफ फूड कैन बी इटन विदाउट डिप्राइविंग समवन ऑफ इट एक भी एक एक भी टुकड़ा आप खाने का नहीं खाएंगे जिससे कि आप और किसी के मुंह से छीन लिया ना हुआ हो दिस इज द लॉ दिस इज द फिलोसोफी यह नियम है यह दर्शन है देयर फॉर द ओनली थिंग वी कैन डू इज टू अंडरस्टैंड दैट ऑल दिस वर्क अगेंस्ट इविल इज मोर सब्जेक्टिव देन ऑब्जेक्टिव इसलिए हमको अभी यह समझना होगा कि दूषण के सामने जो भी कार्य हम कर रहे हैं वो सब्जेक्टिव है ऑब्जेक्टिव नहीं है देखिए बहुत बड़ी बात स्वामी जी ने इस पूरे पैसेज में कही है स्वामी जी कहते हैं कि देखिए पहले तो इसको दो पार्ट में विभाजित कर देते हैं कि इस पैसेज को कि इस सोसाइटी के बारे में स्वामी जी क्या कहते हैं फिर सोसाइटी को करेक्ट करने के बारे में रिफॉर्म करने के बारे में इंप्रूव करने के बारे में स्वामी जी क्या कहते हैं पहले तो है कि यह जगत माया का जो जगत है उसमें सत्य सत्व रजस तमस यह तीनों मिला ही हुआ है आप जो जदी कहेंगे कि एक ऐसा आदर्श इंस्टिट्यूशन होना चाहिए या तो फिर एक आदर्श मनुष्य होना चाहिए एक आदर्श मूवमेंट होनी चाहिए जहां पर सब कुछ अच्छा हो कभी भी कुछ भी बुरा ना हो तो यह हो ही नहीं सकता इवन अवतार के द्वारा प्रारंभ किए हुए धर्म जयद अ हम भगवान जीसस या है या तो फिर यह और जितने भी है भगवान बुद्ध है भगवान राम है भगवान कृष्ण है सबके द्वारा प्रारंभ किए धर्मों ने यदि यह देखें कि जितना अच्छा किया है पृथ्वी के ऊपर में जितने साधु संतों को जितने की मुमुक्षु को जितने साधकों को जितने आम आदमियों के हृदय में शांतना पहुंचाई है उतना ही उन्होंने अनिष्ट भी किया है धर्म के नाम पर जो अत्याचार जो हत्याएं इस जगत में हुई है इतना और किसी भी आइडियो जीी के नाम पर नहीं हुई ना ही कम्युनिज्म ना ही नाजिम ना ही फासिज्म सबने जितनी हत्याएं की होगी उससे ज्यादा जगत के धर्मों ने हत्याएं की है भारत में ही देखिए भारत में चाहे सिविल वॉर या युद्ध महाभारत के बाद में इतने बड़े ना हुए हो किंतु यह जो नाथ जात की प्रथा स्वामी जी जो कहते हैं वह जो त्रावणकोर वगैरह जगह पर गए थे बोला कि पूरा देश एक पागला गारद है कि पागल खाना जैसा है वह जो जो कि आउटकास्ट या तो लोअर कास्ट जिनको कहा जाता था उस समय वो एक घंटी लेकर के बाजार में चलेगा जिससे कि उसकी परछाई किसी के ऊपर में उच्च वर्ण के ऊपर में ना गिर जाए उसकी परछाई भी यदि उसके ऊपर में गिरेगी तो उच्च वर्ण वाले को वह स्नान करना पड़ेगा उसकी अशुद्धि मिटाने के लिए तो स्वामी जी बड़ा कटाक्ष करके कहते हैं कि नीच लोगों की यह जो लोअर कास्ट की स्त्रियों के साथ में संबंध शारीरिक संबंध बनाने के समय अशुद्धि नहीं लगती बस किंतु उनके हाथ का खाना खाना उनका स्पर्श होना बाकी सब समय आपको अशुद्धि लग जाती है स्वामी जी खुद इस तरह से कटाक्ष करके कहते हैं तो जो पागलपन हमने धर्म के नाम पर चलाया था पूरे विश्व में एक समय ना दूसरे समय सब समय जो चलता रहता है तो आप यह कै मने आश्चर्य की बात है कि वही भगवान कृष्ण है या तो वही भगवान जीसस है जिन्होंने सबसे ज्यादा उदार हृदय वाले धर्म मत को प्राण दिया सबसे उदार हृदय वाले धर्म को उन्होंने एक तरह से एक्सप्रेस किया वही उदार मत वाले धर्मों ने इस तरह से खूना मर की इस तरह से एक तरह का कास्टि जम नात जात वगैरह फैलाया है तो कोई भी मने यदि यह धर्म की यह हालत है तो आपकी एक भी पॉलिटिकल फिलोसोफी एक भी पॉलिटिकल नेता एक भी पॉलिटिकल मूवमेंट एक भी इकोनॉमिकल सिस्टम ऐसी नहीं है कि जिसको आप अप्लाई करेंगे और फिर उसका दुष्प्रभाव दूसरों के ऊपर में ना पड़े जो लोग हिस्ट्री इकोनॉमिक्स पॉलिटिक्स फिलोसोफी रिलीजन ये जो कि लार्जर स्टडीज है ह्यूमैनिटीज की जो लोग इसको ठीक-ठीक करते हैं वे लोग स्वामी जी की इस बात की सत्यता को संपूर्ण रूप से समझ जाएंगे अजी भारत में देखिए कि सबसे आदर्श पीरियड कौन सा था यदि आखिरी 10 15 20 हज साल की हिस्ट्री खोल कर के कहे मुझे यदि टाइम मशीन दिया जाए कहे कि चलो एक ऐसा पीरियड खोज लो जिसके राज्य में जिस पॉलिटिकल सिस्टम में तुम जाकर के रहना चाहोगे तो सभी भारतीय कहेंगे राम राज्य में जाकर के रहना है तो वही राम राज्य में एक धोबी भी था जो कि मां सीता के ऊपर में झूट मूट का लांछन लगाया करता था जिसकी वजह से मां सीता को वनवास में जाना पड़ा था दो बार मां सीता को वनवास करना पड़ा था पहले तो वह राजा की हट की वजह से वो रानी की हट की वजह से दूसरी बार वो धोबी की हट की वजह से तो देखिए कि मां सीता जैसी मां सीता को राम राज्य में इतना सफर करना पड़ा है तो हम लोगों की तो क्या हालत होगी पूरे हिस्ट्री में जाकर के चाहे आप पावर इकट्ठा कीजिए मने स्ट्रेंथ नहीं योर से दूसरों का शोषण कीजिए और अपने को स्ट्रेंथ बनाइए स्ट्रांग बनाइए या तो फिर यदि कमजोर रहेंगे तो दूसरे लोग आकर के आपका शोषण कर लेंगे व चाहे कितनी भी इनलाइटेंड सिस्टम क्यों ना हो चाहे कितना ही प्रॉस्परस कंट्री क्यों ना हो आज सबसे ज्यादा इंडस्ट्रियल सबसे ज्यादा प्रोस्पेस सबसे ज्यादा टेक्नोलॉजिकल एडवांस कंट्री है अमेरिका और जो लोग न्यूज़पेपर पढ़ते हैं उन सबको पता है कि अमेरिका की आज की हालत क्या है इन स्पाइट ऑफ के एवरेज उन लोगों की ये जो जो पर हेड पर कैपिटा इनकम है $70000 ना समथिंग है भारत की मुश्किल से न 4000 होगी पर एनम पर कैपिटा इनकम तो ती
nominal GDP
4000 डॉलर में मुझे लगता है कि हम लोग जितना सुकून की सांस लेते हैं तो हमारे से 10 गुना 20 गुना ज्यादा पर कैपिटा इनकम से भी अमेरिकन लोग कितने परेशान है तो ऐसा कोई भी सिस्टम नहीं है ऐसा कोई भी पॉलिटिकल आइडिया नहीं है ऐसा कोई भी इकोनॉमिकल आईडिया नहीं है ऐसा कोई भी फिलोसोफी रिलीजन नहीं है जो कि समाज के सभी लोगों को एक साथ में सांत्वना देगा एक साथ में उनको बेनिफिट पहुंचाएगा यदि किसी के पास में बेनिफिट आना है तो दूसरों के पास से वह बेनिफिट छीना जाएगा सत असत इष्ट अनिष्ट अच्छाई बुराई इस जगत के साथ में लगा ही रहेगा और इसीलिए तो धर्म या तो फिर आध्यात्मिकता हमको कहती है कि यह जगत माया है जगत के परे जाना है यदि जगत परफेक्ट होता तो हम जगत को छोड़ने के बारे में सोचते ही नहीं यह कष्ट है पेन है दे आर सॉर्ट ऑफ एन इनकरेजमेंट इस तरह से आप देखिए वरना तो मुझे सब कुछ मेरी लाइफ में आज सब कुछ परफेक्ट है मुझे कोई भी टेंशन नहीं है कोई चिंता नहीं है नहीं भूतकाल में थी नहीं वर्तमान में है नहीं भविष्य में होने वाली है तो फिर मैं क्यों इस जगत को छोड़ कर के दूसरे जगत में जाने के लिए झूठ मूठ का ब्रह्मचर्य सत्य अहिंसा यह अप परिग्रह इस सब तरह की तपस्या में क्यों करता घूमू क्यों मैं एक जगह पर अर्ली मॉर्निंग मंगलारती में जाने के लिए उठ जाऊंगा क्यों मैं जाकर के फिर एक घंटा दो घंटा बैठ कर के जप करूंगा क्यों झूठ मूठ का में यह सब शास्त्र पाठ करूंगा यदि मेरा जीवन परफेक्ट है तो तो इसीलिए ये इंपरफेक्शन जगत में जितने भी धर्म के आचार्य हैं जितने भी साधु संत महापुरुष है देखिए कि उनका जीवन कितना कष्ट से भरा हुआ है ठाकुर का ही आप उदाहरण देख लीजिए पिताजी की मृत्यु हुई वैसे ही पिताजी के समय में ही वह तो शिव का संसार था पिताजी के मृत्यु होने के बाद में अभी घर में खाने का भी समस्या है बड़े भाई कोलकाता जाकर के नौकरी कर रहे हैं वो वो टोल पाठशाला चला रहे हैं तो छोटे भाई को कहा भाई तुम भी चलो मुझे हेल्प करो वरना तो फिर मां को कौन खिलाएगा तो बोल कर के अपनी लाडली मां का उनका जो आंगन छोड़ कर के छोटे से गदाई को कोलकात्ता आकर के नौकरी करनी पड़ी थी गदाधर की यह हालत थी स्वामी जी के पिताजी के मृत्यु के बाद में स्वामी जी की क्या अवस्था हुई हमने तो सबने देखा है उनकी बहन को आत्महत्या तक करनी पड़ी थी तो ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं है जो जगत के सबसे बड़े से बड़े बिलिनियर को भी आप देखेंगे जगत के सबसे पावरफुल व्यक्ति कौन है तो अमेरिका का प्रेसिडेंट सबसे सबसे धनी व्यक्ति कौन है तो ये टेक बिलियने सबसे पॉपुलर कौन है तो यह फिल्म स्टार यह क्रिकेट स्टार वगैरह उन सबका जद टॉप लेयर जद आप स्टडी करके देख लीजिए सबका लाइफ टेंशन है स्ट्रेस है चैलेंज है एंड दे दिस पीपल थ्री ऑन टेंशन दे थ्राइव ऑन चैलेंज दे थ्राइव ऑन प्रॉब्लम्स एंड ट्रबल्स एंड ट्रायल्स एंड ट्राइबल शंस उनको चाहिए यदि उनको यह सब नहीं मिलेगा लाइफ बड़ा ही आसान हो जाएगा तो वे लोग पागल हो जाएंगे यानी कि दे क्रेव चैलेंज आ बेल मुझे मार जैसा वोह हिंदी में कहते हैं उस तरह का उनका एटीट्यूड हो होता है ट्रबल नहीं है तो कहां से ट्रबल खड़ा करो वरना उनका जो रेले स नेचर है वो रह नहीं पाएगा वो उनको पूरा डिप्रेसो दिस इज द सिचुएशन ऑफ द वर्ल्ड जैसे स्वामी जी कहते हैं एक जगह पे कि कुत्ते की पूछ को सीधे करने बराबर है यदि आप बोलेंगे कि मैं जगत को पूरा ठीक कर दूंगा तो ऐसा कभी होने वाला नहीं है स्वामी जी सेज दिस इन स्पाइट ऑफ कि भारत के देशों के जो गरीबों के प्रति स्वामी जी की जो करुणा है इस करुणा के बावजूद स्वामी जी हमको यह बात कहते हैं क्या सबसे बड़ा स्टेटमेंट वर्क अगेंस्ट इविल इज मोर सब्जेक्टिव देन ऑब्जेक्टिव तो यह सब समझने के बाद में यह विश्व का इष्ट अनिष्ट नेचर समझने के बाद में हमको यह ठीक करना है कि यदि मैं जगत कल्याण के लिए कुछ भी करता हूं तो वो आखिर में तो मैं अपना ही कैरेक्टर फॉर्म करता हूं मैं अपने ही हृदय का ट्रांसफॉर्मेशन लाता हूं सब्जेक्टिव अर्थात कि जो मेरे खुद के ऊपर में हुआ कार्य ऑब्जेक्टिव यानी कि मैं दूसरों के साथ में दूसरी चीज वस्तुओं के साथ में दूसरे लोगों के साथ में जो करता हूं व कार्य तो जगत में सुधारणा का कार्य इज मोर सब्जेक्टिव देन ऑब्जेक्टिव अर्थात कि यदि मैं जगत कल्याण भी करता हूं तो उससे ठीक-ठीक जगत कल्याण मैंने किया तो दूसरों को तो लाभ होगा ही होगा किंतु साथ में मेरा भी चरित्र गठन होगा मेरे भी कर्म शय होंगे मेरी भी आध्यात्मिक उन्नति होगी और यह बात स्वामी जी क्यों कहते हैं हमको लग लगेगा कि यदि हा अब एक काम कीजिए कि सबका भला करना शुरू कर दीजिए बाकी जो होना है सो होगा किंतु इस तरह की फिलोसोफी के साथ में आध्यात्मिक एंगल नहीं समझ कर के कार्य करने के बारे में प्रॉब्लम यही होगा कि धीरे-धीरे करके आप अन एथिकल इम्मोरल रास्तों का उपयोग करना शुरू कर देंगे शॉर्टकट लेना शुरू कर देंगे मुझे इसको कुछ बेनिफिट पहुंचाना है तो उससे छीन लो इसके दे दो तो उससे छीन करके इसको देने के उसको तो जिसको मैं हेल्प कर रहा हूं उसका तो भला हो होगा किंतु जिससे मैंने छीना है उसको प्रॉब्लम होगा यह पॉलिटिक्स है अल्टीमेटली भारत में तो बाकी सब देशों की बात अलग है भारत में आप जो पॉलिटिकल मूवमेंट ये कांग्रेस जो स्टार्ट हुई ब्रिटिश साम्राज्य से भारत को छुटकारा देने के लिए आखिर आखिर में देखिए कि जो इन लोगों ने जिस तरह से देश चलाया पहले 20-30 साल छोड़ देते हैं बाद बाद में जिस तरह से देश चलाया देखिए कि अपने ही पॉकेट सबसे पहले भर लिए बाकी का जो होना है सो होगा तो अब चालू शुरू तो कि थे कि भारत को फ्रीडम देने के लिए भारत का कल्याण देने के लिए करने के लिए और आखिर में अपना ही कल्याण करना शुरू कर दिया अपने ही पॉकेट भरना शुरू कर दिया तो आध्यात्मिक जदी व्यक्ति है वो ठीक-ठीक कार्य भी तभी कर पाएगा जबकि वह जगत का इंपरमानेंस समझेगा जगत में यह समझेगा अच्छाई बुराई दोनों एक साथ में चलती है और आध्यात्मिक जर्नी उसकी साथ-साथ में चालू रहेगी यदि एक आध्यात्मिक व्यक्ति कोई भी कार्य करता है तो सबसे पहले तो वह यह सोचेगा कि सत्य अहिंसा अस्ते अपरिग्रह ब्रह्मचर्य तप शोच संतोष स्वाध्याय ईश्वर प्रण दन यह जो पांच यम नियम है उसका पालन करते-करते वह जगत का कल्याण करें इससे दोनों चीज ठीक होगी ये फिलोसोफी देखिए कि चाहे हमको अधर वल्ली लगती है किंतु जगत का कल्याण करने के लिए यही अधर वर्ली फिलोसोफी ही सबसे ज्यादा कार्य करेगी सबसे ठीक-ठीक कार्य वही कर पाएगा जो कि संपूर्ण रूप से निष्पक्ष है जो कि संपूर्ण रूप से डिस एसोसिएटेड है संपूर्ण रूप से वैरागी है यदि उसका खुद का पर्सनल इंटरेस्ट कहीं पर भी होगा तो वह फिर पर्सनल इंटरेस्ट को लेकर के जो कार्य कर रहा है उसमें कहीं ना कहीं प्रॉब्लम अवश्य खड़ा होगा भगवान राम के सामने यह डिसीजन जब आया कि धोबी की बात को सुने कि मां सीता की बात को सुने तो उन्होंने निष्पक्ष रूप से निर्णय किया ये निष्पक्षता ही राम राज्य का सबसे बड़ा ये आप कहेंगे कि कैरेक्टरिस्टिक है जैसे ही मैंने पक्ष लेना शुरू कर दिया कि यह जो क्ला से यह कास्ट है यह ग्रुप है या इंटरेस्ट ग्रुप है वह मेरा ज्यादा प्रिय है तो वे लोग जो कहेंगे वो मैं करूंगा तो इमीडिएट आप देखेंगे कि बाकी क्लास बाकी कास्ट बाकी इंटरेस्ट ग्रुप को आप हानि पहुंचाना शुरू कर देंगे गवर्नमेंट के सामने सब समय यह जो पिछले जो चार पाच साल का हिस्ट्री आपने न्यूज़पेपर पढ़े होंगे यदि फार्मर्स के लिए कुछ करते हैं तो उसको गुस्सा आएगा इंडस्ट्रियलिस्ट को इंडस्ट्रियलिस्ट को लिए कुछ करेंगे तो फार्मर्स को गुस्सा आएगा तो ब दोनों को खुश करके चलना माने वो एक बहुत बड़ा एक कार्य है तो एक ग्रुप के लिए आपने कुछ किया दूसरा ग्रुप नाराज हो जाएगा इसको रिजर्वेशन दिया तो वो नाराज हो जाएगा उसके लिए कुछ किया तो ये नाराज हो जाएंगे सब जगह पर इंटरेस्ट ग्रुप बैठे हुए हैं जो कि बड़े ही जेलस अपने प्र प्रेरोगेटिव अपने इंटरेस्ट को जेलस गार्ड करते हैं दूसरों के लिए कुछ भी करने से वो लोग इतना जोर-जोर से चिल्लाना शुरू करेंगे कि आपको उनके लिए भी कुछ करना पड़ेगा उनके लिए कुछ करेंगे तो तीसरे के पास से लेना पड़ेगा यानी कि समाज में इतने सारे इंटरेस्ट ग्रुप है इतने विरोधाभासी टेंडेंसीज है पोजिंग टेंडेंसी से एक एक दूसरे से कि आप सभी को कभी भी खुश नहीं कर पाएंगे राजा को हमेशा यह पाथ ऑफ लिस्ट रेजिस्टेंस लेना है या तो फिर यह बहुजन सुखाय बहुजन हिताय ऐसा कोई कार्य करना है तो जिससे कि ज्यादातर लोगों को बेनिफिट हो और जो मने डिसएडवांटेज हो कम से कम लोगों को हो तो वो डिसीजन उसको लेना है किंतु इस तरह के जो डेंजरस डिसीजंस जो होते हैं वो वही व्यक्ति ठीक-ठीक ले सकता है जिसका खुद का कोई इंटरेस्ट नहीं है वो खुद कोई कम्युनिटी कोई प्रेशर ग्रुप कोई इंटरेस्ट ग्रुप को रिप्रेजेंटेटिव नहीं करता तभी कहीं जाकर के उसका जो डिसीजन है वो देश के कल्याण के लिए कार्य करेगा यानी कि यहां पे जो स्वामी जी हमको एक अधर वर्डली फिलोसोफी देते हैं कि जगत में आप कितना ही अच्छा कार्य कीजिए आप सभी को संतुष्ट कभी नहीं करने वाले हैं यह समझ कर के जगत में इस तरह से कार्य करना है जैसे कि आप अपनी आध्यात्मिक साधना कर रहे हैं तो आध्यात्मिक साधना जो व्यक्ति करेगा वही सबसे ज्यादा लोगों का कल्याण करेगा दिस इज अ वेरी पैराडॉक्सिकल वेरी जैसे कहेंगे कि वो एक एक तरह का ये स्टेटमेंट है एक ऐसा आईडिया है जिसको यदि हम समझ ले तो अपना वेदांत के बारे में अंडरस्टैंडिंग बड़ा ही डीप जाएगा द वर्क अगेंस्ट इवल इज मोर एजुकेशनल देन एक्चुअल हाउ एवर बिग वी मे टॉक जो अनिष्ट के सामने जो कार्य करना है वह एजुकेशनल ज्यादा है एक्चुअल कम है भले ही चाहे हम चाहे कितनी ही बड़ी बातें कर दें अभी देखिए मैं अपना खुद का उदाहरण बताता हूं रांची में मैंने इतने साल कार्य किया अभी मुझे यह नहीं पता है कि मेरे काम करने से वह ट्राइबल लोगों को क्या बेनिफिट हुआ होगा बेनिफिट हुआ है उसमें कोई प्रश्न ही नहीं है मैं खुद जो सब रिपोर्ट कंपाइल करके सबमिट करता था उसमें सब तरह के स्टेटिस्टिक्स हेल्प ग्रुप बने इतने सर्व शिक्षा सेंटर खोले गए इतने स्टूडेंट्स को हमने एग्जामिनेशन देक के स्टडी मटेरियल पहुंचाया इतना एग्रोनॉमिक डेवलपमेंट हुआ वगैरह सब तरह के स्टेटिस्टिक्स रिपोर्ट होंगे किंतु मेरे लिए सबसे बड़ी बात यह है कि रांची में रहकर के मैंने जो समझा ठाकुर महास्वामी जी का उपदेश मैंने जिस तरह से उसको आत्मसात करने का प्रयास किया और रांची के बाद में मेरा जीवन एक बिल्कुल ही डिफरेंट डायरेक्शन में जाना शुरू हुआ एक मॉनेस्टिक डायरेक्शन में तो दैट इज माय बिगेस्ट टेक अवे फ्रॉम देयर मैंने उन लोगों के लिए बहुत कुछ किया है अभी वे लोग का जो होना है सो हो अभी तो मैं हमेशा के लिए उनके लिए दाई नहीं हूं मेरे रहते-रहते जो कुछ लोगों को जो कुछ बेनिफिट हुआ अभी हो सकता है कल कुछ डिजास्टर हुआ और सभी बेनिफिट चले गए आई कैन नॉट डू एनीथिंग अबाउट दैट पूरे जीवन भर मैं सभी के लिए दाई नहीं हो सकता हूं मेरे लिए सबसे बड़ी बात है कि यदि रांची में मैंने अपने जीवन का एक परिवर्तन शुभ परिवर्तन किया दैट इज द बिगेस्ट बेनिफिट फॉर मी दैट इज द बिगेस्ट अचीव मेंट ऑफ मी और जैसे वो डॉक्टर के बारे में हमने डिस्कस किया था कि उसका पता नहीं वो उसके मन में इस तरह का हो गया इतने साल उसने वोह ट्राइबल लोगों के लिए काम किया और आखिर में उसकी ऐसी बुद्धि भ्रष्ट हो गई कि 20 हज 2025 हजार की नौकरी के लिए डायरेक्टरशिप के लिए मिशन को तो छोड़ दिया मिशन के साधुओं को गाली दे रहा है तो फिर यह तु जो तुमने इतने लोगों को बेनिफिट पहुंचाया इतना तुमने ट्रीटमेंट किया क्या फायदा हुआ अभी वो आज एक पेशेंट को ट्रीट करते हैं कल कहीं जाकर के दूसरी बीमारी में वह मर गया तो अभी उसको ट्रीट करने का क्या फायदा बात यह है कि यदि मैंने उसके भीतर में शिव ज्ञान से उसको पेशेंट की सेवा की होती तो मेरी जो आध्यात्मिक उन्नति होती है दैट वुड बी मच ग्रेटर आउटकम तो इसलिए स्वामी जी कहते हैं कि वर्क अगेंस्ट इवल इज मोर एजुकेशनल देन एक्चुअल हाउ एवर बिग वी मे टॉक ये कितने ही बड़े स्टेटिस्टिक्स बना दे यह कितने ही हम नंबर्स बड़ा बता दे कि हम मैं जब रांची में था तो तो हमारे 400 सर्व शिक्षा सेंटर थे एक सर्व शिक्षा सेंटर में आप ऑलमोस्ट 100 स्टूडेंट्स को ले ले तो ऑलमोस्ट 4000 ना कि इतने वो बच्चे हमारे वो सेंटर्स में स्टडी करते थे और इतने ही अपने टीचर्स वहां पर रहते थे 100 200 टीचर्स थे उन सब की ट्रेनिंग और उन सबकी स्टडी मटेरियल का जुगाड़ करना उन लोगों का अकाउंट देखना गवर्नमेंट को रेगुलर रिपोर्ट सबमिट करना ये सब आप जितना ही बड़ा-बड़ा बातें कर ले देयर इज नो गारंटी कि ये जो 4 हजार बच्चे हैं उन्होंने जो दो-तीन साल मेरे रहते-रहते कुछ सीखा बाद में भी जो कुछ सीखा होगा इससे उनका भविष्य उज्जवल हो गया है देयर इज नो गारंटी वो अभी कोरोना में पता नहीं कितने लोगों का कहां पर डेथ हो गया होगा जो भी हमने पिछले 1015 साल में किया है पता नहीं कोरोना में कितना वश आउट हो गया होगा वी डू नॉट नो किंतु मुझे यह बात पक्का पता है कि मैंने उस पीरियड से बहुत कुछ सीखा अपने खुद के जीवन के बारे में तो इसलिए स्वामी जी कहते हैं कि हाउ एवर बिग वी मे टॉक और आज की लैंग्वेज में कहे कितना ही बड़ा-बड़ा स्टेटिस्टिक्स आप दिखा दीजिए आपके खुद का चरित्र परिवर्तन हुआ कि नहीं आपका खुद का एजुकेशन हुआ कि नहीं आपके खुद के संस्कार पड़े कि नहीं वो जदी होगा तो यह सारा कार्य सफल होगा अदर वाइज क्या होगा मैंने अपना चरित्र अपने संस्कार सब भ्रष्ट करके जो कार्य किया कल जा कर के एक कोरोना आ गया ना कि कुछ आ गया सब जैसे कि पानी में भस जाएगा पानी में जैसे कि बह जाएगा कुछ भी रहेगा नहीं उसमें से दिस फर्स्ट ऑफ ऑल इज द आइडिया ऑफ वर्क अगेंस्ट इवल तो यह सबसे पहले याद रखना है कि जगत कल्याण का कार्य करते हैं तो वह इस तरह से करना है जिससे कि अपनी खुद की चित्त शुद्धि हो संस्कार शुद्धि हो कर्म शुद्धि हो एंड इट ट टू मेक अस कार्मर इट ट टू में इट ट टू टेक फेनेटिसिजम आउट ऑफ अवर ब्लड और यह समझ कर के हम यदि इस समझ कर के हम कार्य करेंगे तो अपना मन शांत रहेगा अपने मन के भीतर में यह जो नूनी भाव है वह कम हो जाएगा देखिए यह धर्म जनून के बारे में तो आजकल हम बात ही नहीं करते हैं वरना हिस्ट्री देखेंगे यह धर्म जनून को लेकर के इस धर्म ने मेरा जीवन परिवर्तित किया तो मैं चाहता हूं कि बाकी जितने भी लोग हैं सबके ऊपर में जोर जबरदस्ती यही धर्म थोपा जाए जिससे कि उनका जीवन परिवर्तित हो जाए अभी वह चाहते भी है कि नहीं धर्म परिवर्तन करना वी डू नॉट नो ये इस्लामिक कोंक्स है उन सब की हिस्ट्री पढ़ेंगे क्या सब भयानक अत्याचार लोगों के ऊपर में हुए हैं तो आपको लगेगा कि ये इस तरह के अत्याचार करके आप यदि उनको कोई एक आध्यात्मिक रास्ता दिखाना चाहते हैं इससे बेटर है कि वह जो पहले जिस परिस्थिति में थे उस परिस्थिति में देवे मच बेटर देन व्हाट हैपन टू देम आफ्टर वर्ड्स तो इसीलिए यदि ठीक-ठीक जगत का स्वरूप समझे ठीक-ठीक आध्यात्मिक कार्य करें तो उससे हमारे मन को भी शांति होगी और हमारे में से ये धर्म जनून दूर चला जाएगा तो टू टेक फेनेटिसिजम आउट ऑफ अवर ब्लड हमारे खून में से ये नून निकाल देगा द हिस्ट्री ऑफ द वर्ल्ड टीचस अस दैट व्हेन एवर वर एवर देयर हैव बीन फेनेटिकल रिफॉर्म्स द ओनली रिजल्ट हैज बीन दैट दे हैव डिफीटेड देयर ओन एंड्स ये इतिहास हमको सिखाता है कि जब भी यह नूनी रिफॉर्म करने का प्रयास किया है समाज के ऊपर में सोसाइटी के ऊपर में जोर जबरजस्ती कोई कानून थोप दिया गया है तो इससे कोई बुरा ही हुआ है इस कानून ने इस तरह के रिफॉर्म ने दे हैव डिफीटेड देयर ओन एंड्स जिस उद्देश्य के लिए यह कानून यह रिफॉर्म या तो यह फिर जो नया सिस्टम लागू किया गया था उस उद्देश्य का ही उस सिस्टम ने खात्मा कर दिया तो अच्छा अभी इसके बाद में और भी बहुत है मैं सोचता था कि आज यह पॉइंट पूरा हो जाएगा अभी कल और आगे कल देखते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णर्पण
प्रश्न: लोक कल्याण करते करते चरित्र गठन हो वही उत्तम है
मस्तु किंतु देखिए इसमें ग्रांड स्ट्रेटेजी जैसा क्या है पता है जगत का कल्याण करते करते समझ में आया कि अपना चरित्र गठन करना आवश्यक है चरित्र गठन करते करते पता चला कि जो ईश्वर को हम भीतर में या मंदिर में खोज रहे हैं वही ईश्वर लोगों के बीच में है लोगों के भीतर में है यानी यह सर्कल इटरनल सर्कल है जो प्रॉब्लम कहां पर होता है जब इसको स्प्लिट करते हैं जो लोग सिर्फ सोशल रिफॉर्मर है वह भी ठीक से नहीं समझ पाते जो लोग कहते हैं मैं प्योर रिलीजियस हूं वो भी समझ नहीं पाते रामकृष्ण विवेकानंद भाव दरा हमको यह पूरा सर्कल बताती है ग्रांड स्ट्रेटेजी ऑफ द यूनिवर्स लोगों का कल्याण करते करते आपका चरित्र गठन होगा आपका आध्यात्मिक उन्नति होने से साथ में ही पता चलेगा कि लोगों के हृदय में वही शिव विराजमान
प्रश्न: साधन-भजन करते करते, ईश्वर प्राप्ति की आशा रखते रखते क्या हम कमजोर नहीं हो जाते? क्या इसी लिए हम आर्थिक दृष्टि से पछात है ? जी जान लगा कर कर्म करने से देखिए चीन-अमेरिका कहाँ से कहाँ चले गए.
है ना किंतु स्वामी जी का ऐसा तो टीचिंग नहीं है कि जैसे कि अभी देखिए हमने तो स्वामी जी को आधा ही पढ़ा है इस प्रवचन में एक ही पॉइंट को डिस्कस किया है अदर वाइज यदि स्वामी जी का जो होल पॉइंट है कि ब्रह्म भी सत्य जगत भी सत्य आप ऐसा तो नहीं कहेंगे कि मतलब जगत को छोड़ कर के सिर्फ आध्यात्मिक साधना करो या तो फिर माने दोनों ओर से जो इलोन मस्क जो कर रहा है कि जगत ही सत्य है उसी में पूरा डूब जाओ तो कहीं जाकर के वो न्यूक्लियर वर की ओर हमको फेंक देगा किसको पता यह जो एकदम एक्स्ट्रीम मैटेरियलिज्म जो यूरोप में आया था तो उसका परिणाम क्या आया फर्स्ट वर्ल्ड वॉर सेकंड वर्ल्ड वॉर अभी कितना भी प्रोस्पेरिटी आपका हो आज यदि इस जगत में वर्ल्ड वॉर होगा तो न्यूक्लियर वेपंस की वजह से पूरा जगत खत्म हो जाएगा सो एक्सट्रीम मैटेरियलिज्म द वे इट इज नॉट गुड एक्सट्रीम रिट्रीट इनटू दैट रिलीजियस वर्ल्ड दैट आल्सो इज नॉट गुड अपना जो आदर्श है कि दोनों एक साथ में करो यदि टेंपरली आप एक में बहुत ज्यादा आगे बढ़ जाते हैं जैसे मैं अपना खुद का कि रांची में था तो मैं उसी वो रूरल डेवलपमेंट पे ही मेरा सबसे ज्यादा फोकस था इन स्पाइट ऑफ माय बीइंग ए मोंक मैं उसी पे सबसे ज्यादा फोकस था अभी है कि मैं पब्लिकेशन में हूं तो स्टडी पे ही मेरा सबसे ज्यादा फोकस है इट डजन मीन कि आई एम नेगेटिंग द अदर आपने उस समय व कर लिया इस समय यह कर लिया अभी फिर से मुझे रांची भेजा जाए तो मैं फिर से जीजन लगा करके वही करूंगा सो फॉर अस इट इज अ सर्कल इट्स अ कंप्लीट स्कीम ऑफ लाइफ जब वो हार्ड वर्क करना है हार्ड वर्क कर लीजिए जब साधना करनी है साधना कर लीजिए ऐसा कभी मत सोचिए बोथ आर म्यूचुअल एक्सक्लूसिव ऐसा सोचिए बोथ आर कम्प्लीनोस या इसके जितने जितने भी जो एक्सट्रीम डेवलपमेंट अभी ये जो सोवियत यूनियन अमेरिका का एग्जांपल देख लीजिए कि 10-1 हजार न्यूक्लियर वेपन एक दूसरों के सामने वो लोग तान कर के खड़े थे एक भी एक्सीडेंट यदि हो जाता एक ने गलती से न्यूक्लियर बम छोड़ दिया या तो एक किसी मेलिश एक्टर के हाथ में वो आ जाता उसने दूसरे पर हमला कर दिया तो वो जो युद्ध होता पूरा जगत खत्म हो जाता सो द वे ट एक्सट्रीम मटेरियल जम इज नॉट गुड तो सिमिलरली एक्सट्रीम रिलीजियस फेनेटिसिजम इ आल्सो नॉट गुड अपना है ब दोनों का कंप्लीमेंट दोनों का बैलेंस बैठे थे जो कि हम तमस में थे तमस
प्रश्न: हम भारतीय तमस में डूब रहे हैं
में से तो स्वामी जी ने जगाने के लिए तो यह कर्मयोग का प्रारंभ किया जो कि उनके गुरु भाई खुद शुरू शुरू में नहीं समझ पाए थे किंतु यह जो अपना अनु अव है ना कि धर्म
प्रश्न: सेवा करते करते चरित्र गठन कर लो -- यह बात सुन कर डर लगता है. फिर कही हजार साल की नींद में न डूब जाए.
व्यक्ति को वीक बना देता है दैट इज जैसे हमने डिस्कस किया था ना भारत में यदि चार फेसेस देखे जाए धर्म के तो अपना वैदिक एज था जबकि राजा खुद अपने को उपनिषद सिखाते थे आज कृष्ण और राम के जि ज्यादा कर्मठ कौन हो सकते हैं तो वो लोग उपनिषद भी उन्होंने सिखाया साथ-साथ में राज्य भी चला लिया यह बुद्धिज्म और बाद में ये ये जो शंकराचार्य का जो मूवमेंट है उस समय का यह कंफ्यूजन है कि आप लोगों ने सोशल एस्पेक्ट को छोड़ दिया जो वैदिक युग के जो धर्म कहे जाते थे विद्यार्थी धर्म राज्य धर्म वोह सबको छोड़ करर के एक्सट्रीम मोनेट जम में चले गए धन ये स्प्लिट हुआ है तो स्वामी जी हैज टेकन अस बैक टू द एज ऑफ उपनिषद ए ो एज ऑफ श्री रामा एंड श्री कृष्णा हमको भगवान राम की तरह क्षत्रिय भी होना है और ब्रह्मज्ञानी भी होना है दोनों होना है दैट इज द आइडियल आपका जो एक्सपीरियंस कहां से आता है जो पिछले 1000 यह बुद्धिज्म के बाद का जो 2000 साल का पीरियड है वह हमारे सबके मन में बैठा हुआ है हम लोग जैसे ही सोचते हैं यह धार्मिक हो गया है त उसका अर्थ यही हुआ कि य मेंटली इंटेलेक्चुअली कमजोर हो गया है बट ट इज लास्ट 2000 इयर्स
प्रश्न: भगवान बुद्ध ने सबको संन्यास लेने को कहा. अभी हम कैसे उनकी बात को गलत मान ले.
एक्सपीरियंस स्वामी जी खुद भगवान बुद्ध के ऊपर में कितनी आस्था रखते हैं आश्चर्य की बात है सबसे पहला दर्शन भगवान बुद्ध का हुआ था ना यह भी समझना है कि उन्होंने
प्रश्न: भगवान बुद्ध या शंकराचार्य को हम इतना सन्मान देते है की उनकी यह बात की जगत मिथ्या है यह अस्वीकार करने के लिए बड़ा साहस चाहिए. अस्वीकार करना उनकी निंदा करना है ऐसा लगता है ?
अपने कांटेक्ट में बोला था चलो बु की आपको निंदा नहीं करनी है तो इतना तो कह सकते हैं कि वह जो कॉन्टेक्स्ट था वह पूरा डिफरेंट था आज के कॉन्टेक्स्ट से इतना तो हम कह ही सकते हैं बिना निंदा किए भी कह सकते हैं जैसे ठाकुर ने खुद कहा था कि मैं
प्रश्न: एक साधु ने कहा की एकाग्रता और निर्लिप्तता आ गयी तो सब हो गया. किन्तु निर्लिप्तता की चिंता करते करते हम आलसी, निकम्मे, तामसिक नहीं हो जाएंगे? आध्यात्मिक साधक कड़ी महेनत करने के लिए प्रेरणा कहा से लाएगा?
भक्तों का राजा होना चाहता था स्वामी जी ने कहा कि द वे बुद्धा हैज अ मैसेज फॉर द ईस्ट आई हैव मैसेज फॉर द वेस्ट तो यह जो ड्राइविंग फोर्स इन दोनों का था और एक स्पिरिचुअल एंबिशन होना बुरा बिल्कुल नहीं है ज जैसे कि हम लोग कह हैं कि हां जगत का कल्याण करना है इट्स अ गुड ड्राइविंग फोर्स इसमें गलत कुछ नहीं है वही है कि आपका जो जर्नी का अंत है व शुद्धता की ओर जाता है आप यह मत सोचिए कि बिगिनिंग उसके साथ में करते हैं बिगिनिंग उसके साथ में करने को जाएंगे सीधा तमस में घुस जाएंगे इसका अंत वहां पर जाके आना है तो बिगिनिंग हैज टू हैव वेरी स्ट्रांग ड्राइविंग फोर्स फिर वो ड्राइविंग फोर्स कोई भी हो अभी आइंस्टाइन की तरह यू वांट टू फाइंड अ सोल्यूशन टू डीपर कॉस्मोलॉजिकल प्रॉब्लम्स आर्टिस्ट होता है है कि जो अपना भाव व्यक्त करना चाहता है इन द फॉर्म ऑफ दी आर्ट स्पोर्ट्समैन है कि जो स्पोर्ट्स में एक्सेल होना चाहता है नो व्हिच एवर द फील्ड यू सिलेक्ट आपका सॉलिड ड्राइविंग फोर्स बिगिनिंग में चाहिए एंड टेक्स यू टुवर्ड्स द निर्लिप्त जद स्टार्टिंग में ही निर्लिप्त है तो आप या तो ब्रह्मज्ञानी हो गए या तो फिर महाता मशिक हो गए हां हां वो अमेरिका से वो यूरोप से
प्रश्न:रंगनाथानन्दजी ईगो के बारे में क्या कहते थे?
वापस आए थे तो बता रहे थे कि मैंने वहां पे यह किया वो किया तो बार-बार मैं मैं मैं बोल र है मैंने यह किया मैंने वो किया तो एक साधु ने वह साहस करके पूछ लिया कि आप इतना मैंने किया मैंने किया करते हैं क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि आपका ईगो बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा तो रंगनाथ आनंद जी कहते हैं कि मेक योर ईगो स्काई हाई एंड देन सैक्रिफाइस इट टू द लोटस फिट ऑफ श्री राम कृष्णा इट द एंड ऑफ द जर्नी नॉट अ बिगिनिंग ऑफ द जर्नी और अल्टीमेटली देखिए आध्यात्मिक जीवन की यदि दो वैल्यूज की जाए तो सत्य और ब्रह्मचर्य बाकी सब कुछ है नहीं है डज नॉट मैटर ट मच यह दोनों होना चाहिए यदि सत्य और ब्रह्मचर्य बिगिनिंग में है तो आप सीधे ब्रह्मज्ञानी हो जाएंगे और यदि नहीं भी है तो एट द एंड ऑफ द जर्नी यदि यह दो आते हैं तो आपकी जर्नी सक्सेसफुल हो जाएगी ना होगा होगा मैंने एक सप्ताह ठाकुर एक सप्ताह मां एक सप्ताह स्वामी जी और एक सप्ताह शास्त्र वो होगा पहले थोड़ा सा मैं हिम्मत जुगाड़ कर लो हां बिल्कुल बिल्कुल सिस्टमैटिक करेंगे जब भी करेंगे बहुत ही सिस्टमिक करेंगे डोंट वरी अबाउट दैट मैंने वो एक प्लान बना
प्रश्न: शास्त्र पे क्लास शुरू करने के बारे में
करके रखा है हम लोग वेदांतसार से स्टार्ट करेंगे वेदांतसार इज अ यदि आप जैसे साइंस कहते हैं ना साइंस में आपको एक प्रपोजिशंस होते हैं प्रूफ होते हैं प्रमेय होते हैं आपको एकदम सिस्टमिकली पूरा आईडिया दे देता है बाकी आप डिटेल बाद में जितना करना चाहे तो सिमिलरली ये वेदांतसार जो है इसे सॉर्ट ऑफ ए सिस्टमिक अप्रोच टुवर्ड्स वेदांत हमने टीसी में सबसे पहले यह टेक्स्ट हमको सिखाया था यानी कि आप देख लीजिए कि रामकृष्ण संघ का जितना शास्त्र शास्त्रज्ञ सर्वोच्च साधु है उन सबका कंबाइन विजडम इस एक किताब में आता है वह कहते हैं कि सबसे पहले वेदांतसार सीखो बाद में बाकी सब तो वेदानु सार में आपको एकदम फाउंडेशन एकदम क्लियर हो जाएगा उसके ऊपर में हम जितना बिल्ड अप करें कर सकते हैं सो वी विल बिगिन विद दैट मैंने किताब भी ठीक कर लिया है कौन सा किताब से स्टार्ट करेंगे वेदानु सार का बहुत अच्छा किताब मैंने खोज निकाला है किंतु वही है थोड़ा सा मेरा साहस कम पड़ जाता है शास्त्र एक ऐसा चीज है और थोड़ा सा फाउंडेशन से चालू करने की जरूरत है जिससे कि जितने भी शब्दों क्या व्यवहार हो उन सबका डेफिनेशन अपने माइंड में क्लियर हो उन दोनों उन सबका इंटरनल रिलेशनशिप क्या है इंटरेक्शन क्या है वह सब क्लियर हो अभी जैसे कि उस दिन हमने पंचकोष के बारे में ठाकुर का वह जो बोल रहे थे उस समय मैंने कहा था कि इसको थोड़ा सा बाद में डिस्कस करेंगे और पंच कोष को डिस्कस करने को जाएंगे तो फिर वह प्राण की बात आ जाएगी तो प्रश्न है प्राण क्या है तो फिर माने वो एक सब समय क्वेश्चन खड़े होंगे बेटर है कि जितने भी फाउंडेशन कांसेप्ट है वो एक आईडिया क्लियर हो जाए उसके बाद में आप जितना बिल्ड अप करना चाहे कर सकते हैं सो वेदांतसार इज ट वन बुक जिसमें पूरा फाउंडेशन क्लियर कर देता है वो जैसे आप फर्स्ट स्टैंडर्ड में जाएंगे तो सबसे पहले आपको अल्फाबेट और लेटर ये दो सिखाएंगे अभी अल्फाबेट और लेटर सीखने के बाद में आप जो भी जगत है पूरा अल्फाबेट और लेटर्स पे ही बना है इससे बाहर फिर कुछ नहीं सो सिमिलरली नहीं वो तो लास्ट स्टेप है पहले तो सब डेफिनेशन क्लियर हो जाए फिर डेफिनेशन के बेस पर हम उत्तर देंगे यह बात आपकी बिल्कुल सही है शास्त्र का नाम लेने से ही क्या है देखिए दोनों तरह से एक तो अपने ऑर्डर में इतने बड़े सब शास्त्रज्ञ है गंभीरानंद जी वगैरह बाहर में देखेंगे तो ये रमण महर्षि वगैरह है तो प्रश्न होता है कि मैं जो कुछ करूंगा उसमें एक यूनिकनेक्ट होना चाहिए अभी जैसे ठाकुर महा स्वामी जी का लिटरेचर है तो मेरा एक कॉन्फिडेंस है इसमें मैं कॉन्फिडेंस से बोल सकता हूं शास्त्र एक जगत ऐसा है पूरा कि इतने सारे उसमें सब कुछ है व थोड़ा कॉन्फिडेंस आना वो थोड़ा सा कम हो जाता है मेरा बट लेट अस सी लेट अस सी ठीक है अ कल मिलते हैं