Skip to transcript
ClassesSaradakosh

Swami Vivekananda Raja Yoga ·

राजयोग: Ch.3 प्राण: स्‍वामी विवेकानन्द || 11 Dec 2024 || Raja Yoga || Swami Vivekananda

Start

ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपिणी अवतार वरिष्ठा राम कृष्णाय ते नमः स्वामी विवेकानंद रचित राजयोग चैप्टर थी प्राण इसके आखिर तक हम पहुंच गए हैं अभी आखिरी दो पैराग्राफ बचे हैं इस टॉपिक का मैंने नाम दिया है साइंस एंड प्राणायाम जैसे मैंने पहले भी कहा था कि यह टॉपिक सिर्फ मैंने दिए हैं अदर वाइज जो टेक्स्ट में पढ़ रहा हूं वह पूरे पूरा 100% स्वामी विवेकानंद का है तो आखिरी दो पैराग्राफ आज पढ़ते हैं देखते हैं स्वामी जी क्या कहते हैं स्वामी जी कहते हैं इवन द फिजिकल साइंसेस कैन बी इंक्लूडेड इन प्राणायाम यह जो नेचरल साइंस है फिजिकल साइंस है इसको भी हम प्राणायाम के एक जो ओवरऑल फ्रेमवर्क स्वामी जी ने दिया है उसके माध्यम से हम लोग यह नेचुरल साइंस को भी समझ सकते हैं कल हम स्वामी जी ने हमको बताया कि यह जो स्पिरिचुअलिज्म जैसा एक बोगस एक बोगस तो नहीं कहेंगे किंतु जिसमें कि इतना ज्यादा कुछ यह नहीं है ऐसा नहीं है कि स्पिरिचुअलिज्म या तो तो फिर प्रेतात्मा हों को बुलाना मीडियम के माध्यम से उनके साथ बात करना या प्रेतात्मा वगैरह नहीं है ठाकुर ने तो अनुभव किया है ठाकुर के भूत के साथ में ठाकुर का एनकाउंटर भी हुआ था तो बात यह नहीं है कि वह नहीं है वही है कि आज के युग में यह सब जो क्लेम करते हैं वो ज्यादातर लोग फ्रॉड होते हैं विद दिस काव आट स्वामी जी जो कहते हैं कि यदि प्रेतात्मा हों को भी समझना है यह स्पिरिचुअलिज्म रूपी जो चलता है उसको भी यदि समझना है तो आप प्राणायाम या तो फिर राजयोग के माध्यम से समझ सकते हैं तो यह जो राजयोग का जो फ्रेमवर्क है आकाश और प्राण का जो कि स्वामी जी इस चैप्टर में एक्सप्लोर करते हैं तो स्वामी जी अल्टीमेटली यह भी कहते हैं कि यदि हम स्पिरिचुअलिज्म को आकाश और प्राण रूपी फ्रेमवर्क से यदि समझ पाए तो नेचुरल साइंस तो कोई बात ही नहीं है नेचरल साइंस हम बहुत ही आसानी से यह जो फ्रेमवर्क है उसके माध्यम से हम लोग समझ सकते हैं देखिए यह

How a scientific theory or philosophy is developed

जो साइंटिफिक थिरी या तो कोई भी एक फिलोसोफी है वह डेवलप कैसे होती है कि पहले तो बहुत सारे ऑब्जर्वेशन होते हैं कि हां अभी जैसे कि बुद्धिज्म बुद्धिज्म की जो फिलोसोफी डेवलप हुई है तो वे लोग ऑब्जर्व करते हैं हे हे हेतु हान और नो पाय इस तरह से उनके ऑब्जर्वेशन चार पॉइंट में उन्होंने डिवाइड किए हैं है क्या है उनका ऑब्जर्वेशन बेसिक ऑब्जर्वेशन क्या है तो जगत में दुख है अभी है य हेतु क्या है मने नेचरली आप जद ऑब्जर्व करेंगे आप जगत

Story of Swami Vivekananda and a boy who wanted to meditate

में अपने घर से थोड़ा सा भी बाहर निकलेंगे तो आपको पता चलेगा कि जगत में दुख तो है ही है यह बात किसी अंधे को ही नहीं समझ में आएगी स्वामी जी की जो फेमस कहानी है कि एक लड़का स्वामी जी के पास में आकर के कहता है कि मुझे ध्यान करना है किंतु ध्यान नहीं हो पा रहा है तो स्वामी जी ने पूछा उसको तुम क्या कर रहे हो तो ये लड़का कहता है मैं अपने घर के खिड़की दरवाजा सब बंद करके अंधेरा करके मैं अपने कमरे में बैठता हूं ध्यान करने के लिए तो स्वामी जी क्या उत्तर देते हैं सर्व जो तुमको ठीक-ठीक ध्यान करना है तो सर्वप्रथम यह खिड़की दरवाजों को खोल दो उसके बाद में अपने घर से बाहर आओ और उसके बाद में जो तुम्हारे आसपास में यह गरीब लोग रहते हैं जिनके पास में खाने का अभाव है पहनने के वस्त्र का अभाव है रहने के लिए घर का अभाव है उनको तुम सर्वप्रथम मदद करो उनको कुछ शिक्षा दो उनके जीवन का चरित्र का घड़ करो तब कहीं देखोगे कि तुम्हारे हृदय में अपने आप सुकून प्रसारित होने लगेगा और वही तुम्हारे मन को स्थिर कर देगा तुम अपने को जगत से कट ऑफ करके यह जो ध्यान करने का प्रयास कर रहे हो यह कभी होने वाला नहीं है यह ठाकुर या तो स्वामी जी या मां जैसे जो कोई विरल साधक होते हैं युग युगांतर में कभी एक दो बार आएंगे वो यदि अपने मन को आदेश करेंगे मन तुम शांत हो जाओ और उनका मन भी इस आदेश का पालन करके शांत हो जाए ऐसे तो एक युग में शायद एक या दो इस तरह के साधक सिद्ध अवतार पुरुष आएंगे हम लोग जो आम आदमी है हमको तो इस जगत के साथ में कट ऑफ करने की बजाय अपने मन को अपने संस्कारों को सुसंस्कृत करना है जिससे कि हमारा मन यह जो महत विचार है उच्च आदर्श है यह ब्रह्म ज्ञान या आत्मज्ञान की बातें हैं उसको ग्रहण करने के लिए स्पिरिचुअली मैचोर हो उसकी जो क्षमता है उसको जो धारण करने की कैपेसिटी है वह विस्तृत हो त तो कहीं जाकर के हम आध्यात्मिक जीवन में आगे बढ़ पाएंगे तो देखिए कि बुद्धिज्म की

Buddhism: Desires are the reason of suffering

फिलोसोफी इस तरह से स्टार्ट होती है सबसे पहले तो पूछते हैं कि बेसिक ऑब्जर्वेशन क्या है तो बेसिक ऑब्जर्वेशन है इस जगत में दुख है तो नेचुरली फिर यह दूसरा प्रश्न होगा कि दुख है तो दुख का कारण क्या है तो दुख का हा हैय हेय हेतु हेय हेतु है दुख का कारण है कि ज्ञान है इस जगत में माया के द्वारा हम लोग अपना जो सही स्वभाव है रियल नेचर आत्मक आत्मन आत्मन की प्रॉपर्टीज या क्वालिटीज क्या है या तो फिर कहेंगे आत्मन की प्रॉपर्टीज नहीं करके कहेंगे कि आत्मन क्या है बेसिकली सत चित आनंद तो यदि सत चित आनंदमय मेरा सही स्वरूप है तो हाउ कैन आई बी मिजबिल मैं दुखी कैसे हो सकता हूं तो उसका यह रीजन है कि इस आत्मज्ञान के ऊपर में एक अविद्या का आवरण लगा हुआ है अज्ञान का तृष्णा का एक आवरण इसके ऊपर में छाया हुआ है तृष्णा का पाली तृष्णा संस्कृत शब्द है यह लोग पाली में इसको कहते हैं तन्हा तो यह तन्हा का एक आवरण हमारे मन पर छाया हुआ है जो कि हमको निर्वाण प्राप्त नहीं करने देता यहां पर मैं दो फिलोस ऑफि इस को थोड़ा बहुत इंटरचेंज कर दे रहा हूं आत्मज्ञान बोलकर के बुद्धिज्म तो स्वीकार नहीं करता यह अपनी वेदांत की थिरी है उसको थोड़ा सा मैंने यहां पर लगा दिया अदर वाइज बुद्धिज्म कहता है कि निर्वाण से हमको अनंत शांति प्राप्त होगी या तो फिर निर्वाण ही मनुष्य जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य है और यह तन्हा यानी कि यह तृष्णा जब हम इसको भगा देंगे तो वैसे ही निर्वाण में स्थित होंगे तो हेय हेय हेतु

Buddism: Nirvana is the solution of suffering

अभी है हान तो पहले तो तीसरा प्रश्न होगा कि जद यह पूरा जगत संसार य तृष्णा की यह जो माया में यह जो माया की यह जो उसमें फंसा हुआ है ग्रीप में तो क्या इससे मुक्ति भी है कि नहीं तो हां मुक्ति है यह रिएश्योरेंस हमको चाहिए वरना तो जद आप यह कहेंगे यह उपाय है उपाय का इस्तेमाल करो आप डॉक्टर के पास जाते हैं सर्दी जुकाम हो गया एक सामान्य डॉक्टर एमबीबीएस डॉक्टर के पास जाते हैं वह दवाई दे रहा है दे रहा है उसका कोई सॉल्यूशन हमको नहीं मिल रहा है स्वास्थ्य इंप्रूव नहीं हो रहा है तब हम क्या करेंगे कोई सुपर स्पेशलिस्ट के पास में जाएंगे ईएनटी सर्जन है या ईएनटी स्पेशलिस्ट है एमडी है सर्जन है ऐसे किसी के पास जाएंगे अभी ऐसे सुपर स्पेशलिस्ट के पास जाएंगे नेचरली विजिटिंग फी ही वह सीधा एक दो 3000 ले लेगा तो अभी हमको यह भरोस है कि यह सुपर स्पेशलिस्ट को कंसल्ट करेंगे तो यह जो एमबीबीएस जो नहीं कर पा रहा है वह यह कर पाएगा यह भरोसा है तो हम उसको इतना रुपया देते हैं राइट तो यह पहले तो भरोसा होना चाहिए कि उपाय के पास में जाए उससे पहले क्या इसका निराकरण है तो हां है निराकरण है निर्वाण और फिर यदि प्रश्न होगा कि हान उपाय क्या है हान अर्थात कि निराकरण वह है

Buddhism: attain Nirvana by Ashtanga Marga

निर्वाण तो हान उपाय हान उपाय क्या है तो है अष्टांग मार्ग बुद्धिज्म में जो अष्टांग मार्ग है वह है उसका उपाय तो

How a scientific theory or philosophy is developed

देखिए कि पहले यह फ्रेमवर्क तैयार कर दी गई विदन दिस फ्रेमवर्क जितने भी ऑब्जर्वेशन है इस जगत के सबको सेटिस्फाई किया गया इक्वेशन के भीतर में सभी ऑब्जर्वेशन को लाया गया जैसे कि यह कहा जाता था कि यह जो हम लोग टेलिस्कोप लेकर के अवकाश में यह जो प्लेनेट है इनकी गति का जो ऑब्जर्वेशन करते हैं उससे हमको लगता नहीं है कि यह पृथ्वी के आसपास घूम रहे हो पहले तो यही लोग यूरोप में सोचते थे कि पृथ्वी सेंटर है और सूरज पृथ्वी के आसपास घूमता है किंतु टेलिस्कोप लेकर के यदि आप ऑब्जर्वेशन करेंगे चाहे सूरज का चाहे चांद का चांद का तो नहीं चांद तो सही में पृथ्वी के आसपास घूमता है किंतु यह जो प्लेनेट है ये प्लेनेट का जद ऑब्जर्वेशन करेंगे तो आपको यह फ्रेम वर्क में फिट नहीं बैठता कि पृथ्वी सेंटर है चारों ओर बाकी सब घूम रहा है तो एक नई फ्रेमवर्क खड़ी कर गई उसका फ्रेमवर्क का है कि वह यह जो सूरज के आसपास में सब कुछ घूमता है इंक्लूडिंग अर्थ तब यह फ्रेमवर्क में जो ऑब्जर्वेशन है वह फिट मैच हो जा रहे हैं तो इस तरह से सबसे पहले तो ऑब्जर्वेशन होता है फिर ऑब्जर्वेशन को सेटिस्फाई करने के लिए एक के बाद एक थियोरेटिकल फ्रेम फ्रेमवर्क्स प्रपोज की जाती है तो स्वामी जी ने जो कुछ ऑब्जर्व किया यह वेस्टर्न साइंस या तो फिर यह इवन यह जो स्पिरिचुअलिज्म जैसा एक बोगस साइंस ना कि फिर यह जीवन के जितने भी दुख है दर्द है स्वामी जी ने देखिए कि अ दो तरह की

Science of Prana explains human coonsciousness + natural world + spiritual world

स्ट्रीम्स ऑफ थिंकिंग होती है ना एक तो ह्यूमैनिटीज है दूसरा है साइंस तो ह्यूमैनिटीज में आता है आपका इकोनॉमिक्स आता है सोशियोलॉजी आता है साइकोलॉजी आता है पॉलिटिकल साइंस आता है व आर्ट्स वगैरह जो आता है वह ह्यूमैनिटीज ब्रांच में जाता है एकेडमिक दृष्टि से यदि एनालिसिस किया जाए तो और एक दूसरा एक साइंस है जिसको कि नेचुरल साइंस कहते हैं साइंस एंड इंजीनियरिंग जिसमें कि ये फिजिक्स केमिस्ट्री बायोलॉजी मैथमेटिक्स यह नैनोटेक्नोलॉजी यह रोबोटिक्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यह सब इस साइंस एंड इंजीनियरिंग वाले पार्ट में जाएंगे अभी यह जो स्मी जी ने जो फ्रेमवर्क दी है यह फ्रेमवर्क इस तरह से कार्य करती है कि सिर्फ वह अपनी ह्यूमैनिटीज को ही नहीं एक्सप्लेन करती यह नेचुरल साइंस एंड इंजीनियरिंग है उसको भी एक्सप्लेन करती है दैट मींस कि पहले तो आप यह देख लीजिए कि स्वामी जी की ऑब्जर्वेशन कैपेसिटी कितनी भयानक थी पहले तो ह्यूमन नेचर को उन्होंने डीपी समझा अच्छा यदि हम ह्यूमैनिटीज और साइंस एंड इंजीनियरिंग इस तरह की दो ब्रांचेस करते हैं तो थर्ड ब्रांच भी करनी होगी दैट इज अ मेनस जर्नी टुवर्ड्स गॉड अ मेस जर्नी टुवर्ड्स एनलाइन मेंट तमसो मा ज्योतिर गमय एक मनुष्य की आत्मज्ञान की ओर निर्वाण की ओर प्रकाश की ओर की यह यात्रा दैट इज अवर इनर कंपलीटली इनर साइंस तो फिर तीन ब्रांचेस हो जाएंगे एक तो है स्पिरिचुअल साइंस या तो फिर स्पिरिचुअल ब्रांच दूसरा है ह्यूमैनिटीज और तीसरा है साइंस एंड इंजीनियरिंग तो अभी स्वामी जी ने तीनों ब्रांच का बड़ा ही डीप अंडरस्टैंडिंग था स्वामी जी को डीप स्टडी किया था स्पिरिचुअलिटी तो उनकी थी ही थी कोई प्रश्न ही नहीं है पूरे भारत में घूम कर के उन्होंने देखा कि यह अपने देश की यह सिविलाइजेशन की क्या अवस्था है हिस्ट्री और फिलोसोफी को उन्होंने बड़ा ही अच्छे से स्टडी किया था और जब विदेश में गए तो निकोला टेस्ला जैसे साइंटिस्ट लोगों के साथ में डिस्कस करके और उनका खुद का जो एक क्यूरियोसिटी था तो यह सब स्टडी करते रहते थे तो इसके माध्यम से वह नेचुरल साइंस तीनों ब्रांचेस को स्वामी जी ने अपने ऑब्जर्वेशन में आवृत कर दिया है फिर हमको जो एक थियोरेटिकल फ्रेमवर्क दी है दिस थोरेट्स इन ऑल थ्री ब्रांचेस ऑफ ह्यूमन एक्जिस्टेंस या तो फिर कहेंगे कि यह जो पूरा कॉस्मो है कॉस्मो के भीतर में ह्यूमैनिटीज या तो फिर यह ह्यूमन

Difference between science of prana and vedanta

स्पीशसिंथेसिस वेदांत तो यह प्रकृति को काट करके ही फिर वहां से तो प्रारंभ करता है कि प्रकृति ही नहीं है या तो फिर प्रकृति को आप उसको समझना प्रकृति के विज्ञान को समझना दिस इज अ वेस्ट ऑफ टाइम जस्ट गो डायरेक्टली टुवर्ड्स आत्मज्ञान तो वेदांत तो प्रकृति से या इस जगत संसार से अपने चेहरे को घुमा कर के एकदम फॉर्मली ब्रह्मज्ञान की ओर देख कर के ही आगे बढ़ता है जबकि यह राज्य का फ्रेमवर्क है स्वामी जी ने इस तरह से तैयार किया है कि यह सिर्फ आत्मज्ञान ही नहीं किंतु यह ह्यूमन टीज और नेचुरल साइंस यह तीनों को अपने इसके भीतर में कवर कर दे और इसीलिए राज्यों का स्टडी थोड़ा सा डिफिकल्ट है राज्यों को समझना भी थोड़ा सा डिफिकल्ट है ऐसा नहीं है कि वेदांत को समझना सहज है किंतु वेदांत की अपनी डिफिकल्टी है राज्य की अपनी डिफिकल्टी है तो यह दोनों ब्रांचेस को स्वामी जी ने अपने जो कंप्लीट वर्क से उसमें आपको देखने को मिलेगा वेदांत के ऊपर में भी स्वामी जी का बड़ा ही सुंदर एक्सपोजिशन है ज्ञान योग के भीतर में वो ज्ञान योग के दो लेक्चर कॉस्मो स मैक्रो कजम और माइक्रो कजम यह दोनों हमने कवर किए थे और साथ-साथ में ही यह जो राजयोग है उसके ऊपर में भी स्वामी जी का यह लेक्चर है अच्छा तो अभी स्वामी जी आगे क्या कहते हैं व्हाट मूव्स द स्टीम इंजन प्राण एक्टिंग थ्रू द स्टीम स्टीम इंजिन को कौन चलाता है तो प्राण चलाता है स्टीम के माध्यम से व्हाट आर ऑल दिस फिनोमिना ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एंड सो फोर्थ बट प्राण यह जो इलेक्ट्रिसिटी वगैरह जो कुछ भी देख रहे हैं वह क्या है तो यह भी प्राण है व्हाट इज फिजिकल साइंस द साइंस ऑफ प्राणायामा बाय एक्सटर्नल मींस ये फिजिकल साइंस नेचुरल साइंस क्या है वो भी तो यह प्राणायाम ही है उसका एक्सटर्नल मेनिफेस्टेशन है प्राण मेनिफेस्टिंग इट सेल्फ एज मेंटल पावर कैन ओनली बी कंट्रोल्ड बाय मेंटल मींस प्राण जद अपने कॉन्शसनेस में यदि कार्य करेगा या तो कॉन्शियस निस में मेनिफेस्टेशन करेगा तो उसको कॉन्शियस या तो माइंड के माध्यम से ही उसको हम कंट्रोल कर पाएंगे दैट प पार्ट ऑफ प्राणायामा व्हिच अटेम्प्ट्स टू कंट्रोल द फिजिकल मेनिफेस्टेशन ऑफ प्राणा बाय फिजिकल मींस इज कॉल्ड फिजिकल साइंस किंतु प्राणायाम का वो पार्ट जो कि एक्सटर्नल वर्ल्ड में नेचुरल वर्ल्ड में फिजिकल वर्ल्ड में मेनिफेस्ट होता है उसको जब जब हम समझते हैं तब हम उसको नेचुरल साइंस या तो फिजिकल साइंस कहते हैं एंड दैट पार्ट व्हिच ट्राज टू कंट्रोल द मेनिफेस्टेशन ऑफ प्राणा इज मेंटल फोर्स बाय मेंटल मींस इज कॉल्ड राजयोग और वो पार्ट जो कि अपने मन में उसका मेनिफेस्टेशन होता है और वही जो कि अपने मन को चालित करता है उसको यदि समझना है तो उसको हम कहेंगे राजयोग देख देखिए दो पार्ट इस जगत में है प्राणायाम एक्सटर्नली फिजिकल वर्ल्ड में मेनिफेस्ट होता है इंटरनली अपनी कॉन्शसनेस में भी मेनिफेस्ट होता है यदि एक्सटर्नल मेनिफेस्टेशन ऑफ प्राण को यदि आपको समझना है उसके लिए है नेचुरल साइंस और इंटरनल मेनिफेस्टेशन को समझना है तो वह है राजयोग अभी प्रश्न होगा

natural science for external world, vedanta for internal. Raja Yoga connects both.

यदि एक्सटर्नल मेनिफेस्टेशन उसको समझने के लिए यदि अपने पास में नेचुरल साइंस है और इंटरनल मेनिफेस्टेशन जिसको कि हम ज्यादातर लोग वेदांत के माध्यम से समझने का प्रयास करते हैं तो फिर यह राजयोग का प्रयोजन कहां पर आ जाता है तो स्वामी जी यहां पे क्लियर कहते हैं कि एक्सटर्नल मेनिफेस्टेशन के लिए साइंस है और इंटरनल मेनिफेस्टेशन के लिए उन्होंने वेदांत तो काफी अच्छे से समझाया ही है तो व्हाट इज द रोल ऑफ राज योगा यहां पे जो मेरा खुद का एक पर्सनल थिरी यदि मैं प्रपोज करूं तो मुझे लगता है कि वेदांत और नेचुरल साइंस इन दोनों के बीच में कहीं पे कनेक्टिंग लिंक नहीं है नेचुरल साइंस फॉर्मली वर्क्स विद इन द रियम ऑफ मैटर एंड एनर्जी स्पेस एंड टाइम ऑन द अदर हैंड वेदांता वर्क्स विद इन द रिएल्म ऑफ कॉन्शसनेस मन बुद्धि चित्त अहंकार और इससे भी परे जो आत्मन है वो अर्थात कि यह जो बाह्य विज्ञान है जिसको कि हम मैटर एनर्जी स्पेस एंड टाइम व जैसे क्वांटम फील्ड इस तरह के उस माध्यम से समझ पाएंगे उसके लिए नेचुरल साइंस है भीतर में समझने के लिए वेदांत है जिसके लिए मन बुद्धि चित्त अहंकार आत्मन माया वगैरह ईश्वर वगैरह कांसेप्ट के माध्यम से समझते हैं जो कि सत्वर रजस तमस यह सांख्य है वेदांत है इसके माध्यम से समझते हैं किंतु इन दोनों के बीच में कनेक्टिंग लिंक नहीं है क्योंकि नेचुरल साइंस बिल्कुल नेचुरल साइंस के फील्ड में काम करता है वह कभी भी यह नहीं कहेगा कि यह कॉन्शसनेस फिनोमिना जो है वह आप फिजिक्स या बायोलॉजी की मदद से समझ पाएंगे वेदांत कभी यह क्लेम नहीं करेगा कि यह बिग बैंग है या तो फिर यह क्वांटम इलेक्ट्रोडायनेमिक्स है यह सब हम लोग वेदांत के माध्यम से समझा पाएंगे यह दोनों अपने-अपने विस्तार में ही अपने-अपने फील्ड में ही रहते हैं दूसरे फील्ड में कभी भी वो इंटरफेयर नहीं करते तो वह दोनों को कनेक्ट करने का काम है राजयोग का राजयोग में प्राण का एक्सटर्नल मेनिफेस्टेशन भी है इंटरनल मेनिफेस्टेशन भी है एक्सटर्नल मेनिफेस्टेशन को आप अल्टीमेटली अ फिजिकल साइंस के साथ में नेचुरल साइंस के साथ में कनेक्ट कर सकते हैं और इंटरनल मेनिफेस्टेशन है उसको आप यह मन बुद्धि चित्त अहंकार और अल्टीमेटली ईश्वर माया ब्रह्मण इसके साथ में कनेक्ट कर सकते हैं यदि नेचुरल साइंस को आपको

Study Akasha and Prana to understand our cosmos

एकदम बहुत ही अच्छे से समझना है तो अंडरलाइन यह जो प्राण का प्रिंसिपल है आकाश और प्राण रूपी जो फ्रेमवर्क स्वामी जी ने दी है व्हिच विल बी वेरी हेल्पफुल टू अंडरस्टैंड नेचुरल साइंस तो वैसे ही यह आकाश और प्राण रूपी फ्रेमवर्क के माध्यम से हम वेदांत को भी अच्छे से समझ पाएंगे हालांकि यदि आप किसी ट्रेडिशनल वेदांती को

Thakur rejects asana, pranayama

यह बात कहेंगे तो वह बड़ा ही नाराज हो जाएगा कहेगा कि यह प्राण प्राणायाम या तो फर इवन ठाकुर को भी देखिए ठाकुर एकदम ना कर देते हैं मना कर देते हैं अपने शिष्यों को वह एक हठयोगी वहां पर आया था उसके पास जाने के लिए यह आसन है प्राणायाम है यह स्वामी जी खुद पहारी बाबा के पास गए थे उन्होंने सोचा कि यह मेरा देह दुर्बल है तो जद मैं यह हठयोग आसन प्राणायाम वगैरह करूंगा तो हो सकता है स्वास्थ्य उन्नति हो जिससे कि मैं अच्छे से साधन भजन तपस्या कर पाऊं किंतु वो फेमस घटना हमको पता है कि स्वामी जी रात को सोए हुए हैं एकाएक ठाकुर उनके सामने प्रकट हुए बड़ा ही करुण चेहरा लेकर के तो पहली एक दो बार तो नर ने ध्यान नहीं दिया स्वामी जी ने उसके ऊपर ज्यादा कुछ सोचा नहीं किंतु यह बार-बार होने लगा तब स्वामी जी ने सोचा तब स्वामी जी को समझ में आया कि ठाकुर की इच्छा नहीं है कि मैं हठयोग की शिक्षा करूं मैं हठयोग सीखूं तो फिर स्वामी जी वहां से चले गए थे तो देखिए कि अभी हठयोग एक चीज है राजयोग दूसरी चीज है नो डाउट उसमें कोई प्रश्न ही नहीं है किंतु रामकृष्ण संघ में और जो भी वेदांत सीखते हैं उसमें से कोई भी यह नहीं कहेगा कि राजयोग या तो हठयोग के माध्यम से आप वेदांत समझ सकते हैं इनफैक्ट वे लोग कहेंगे कि राजयोग में जो सब सिद्धियां है जिसका कि विवरण स्वामी जी ने आगे ही दे दिया कि जिसके पास में प्राण का कंट्रोल आ जाता है वह चाहे सूर्य चंद्र तारों को अपनी जगह से विचित कर सकता है वह चाहे तो दूसरों के मन पर अधिप जमा सकता है लोगों को हिप्नोटाइज कर सकता है वह चाहे तो हर किसी का स्वास्थ्य उद्धार कर सकता है रिमोट हीलिंग वगैरह के माध्यम से और यह सभी चीजें वही है जिसके बारे में ठाकुर ने हमको स्ट्रांग वार्निंग दिया है ठाकुर ने एक दो बार कहा है कि यदि यहां पर मैं एक दो लोगों का स्वास्थ्य कुछ ठीक कर दूं या आशीर्वाद दे दूं तो यहां पर छोटा-मोटा अस्पताल जैसा बन जाएगा और लोगों की भीड़ लग जाएगी तो और फिर सिद्धाई के बारे में या तो फिर यह मिरेकल स पावर के बारे में ठाकुर की जो चेतावनी है वह तो बड़ी ही मतलब फेमस है कि स्वामी जी को भी ठाकुर ने जब स्वामी जी को यह कहा कि हां मैं तुमको हमारी मेरी सारी शक्तियां तुमको दे देता हूं मेरे पास में वह सब मिरेकल अस पावर है किंतु मुझे वह सब पावर्स की जरूरत नहीं है मेरे जीवन में उसकी कोई आवश्यकता नहीं थी किंतु तुमको तो मां जगदंबा का कार्य करना होगा तो तुम इस पावर्स को ग्रहण करो तो स्वामी जी ने सामने इमीडिएट पूछा कि क्या इस पावर्स या मिरेकुलम आ जाने से क्या मुझे ईश्वर प्राप्ति होगी तो ठाकुर ने कहा नहीं नहीं ईश्वर प्राप्ति तो नहीं होगी यह तो तुमको मां का जो कार्य करना है उसमें यह सब सहाय भभूत होगी तो स्वामी जी ने इमीडिएट कह दिया कि तो फिर रहने दीजिए मुझे यह सब नहीं चाहिए तब ठाकुर बड़े खुश हो गए अ ये ऐसी ही बात है

Story of Ma Sarada and Radhu's tyaga

एक बार मां गई थी साउथ इंडिया की टूर में तो मां आई थी पता है ना तो वो रामनाथ रामनाथ पुरम जहां भी यह राम सेतु है तो राम सेतु का दर्शन किया फिर वह समुंदर के किनारे मां ने जो वह शिवलिंग देख कर के कहा कि जे मंटी रखेगी लाम तमन अच्छे अर्थात कि सीता रूप में मां जब आई थी समुंदर के किनारे रेती का जो शिवलिंग बनाया था वह मां ने देख कर के शिवलिंग को देख के कहा कि मैं जैसे रख के गई थी वैसे का वैसा ही है हालांकि यह प्रश्न होगा कि रेती का शिवलिंग तो कब का नष्ट हो गया होगा जो भी है अभी मैं खुद तो वहां पर गया नहीं इसलिए मुझे पता नहीं कि किस तरह का है यह तो अभी उस समय वहां का जो राजा था उसने वहां का जो लोकल गवर्नर था उसको कहा कि मेरे गुरु के गुरु परम गुरु वहां पर आ रहे हैं अर्थात मां थी स्वामी विवेकानंद की गुरु और स्वामी विवेकानंद थे इनके गुरु इस राजा के तो मां हुई उनकी परम गुरु तो यह राजा ने कहा वहां का लोकल जो गवर्नर होगा उसको कि तुम अपने में जो खजाना है खजाना पूरा खोल दो उसमें से मां को जो चाहिए वो दे देना तो मां जब गई वहां पर तो यह उनको खजाने में ले गए भंडार में तो वहां पर उसको खोला तो हीरा माणिक जवाहरा सोना महर क्या-क्या सब पड़ा हुआ था तो यह देख कर के मां ने कहा कि नहीं मुझे तो इसमें से कुछ भी नहीं चाहिए किंतु राधू को यदि कुछ चाहिए तो राधू ले अभी राधू है वो वो योग माया मां को पृथ्वी पर रखने के लिए उसका जन्म हुआ था और उसके जो नाटक थे वो

Pic: Ma and Radhu

कभी-कभी भद पार कर जाते थे तो अभी राधू पता नहीं क्या सोचेगी क्या करेगी तो जैसे मां ने एक बार कह तो दिया किंतु फिर साथ-साथ में ही मां खुद वर्णन करती है कि मेरा जो हृदय है वो धकधक करने लगा क्यों राधु जदी उसमें से कुछ मांग लेगी पैसा चाहिए सोना मोहर चाहिए तो कैसा लगेगा तो मां ने कह तो दिया मुंह से कि राधू तुमको जो चाहिए वो ले लो इसमें से किंतु फिर मां सोच रही है कि वो क्या मांगेगी तो राधु ने यह सब देखा चारों ओर फिर आखिर में कहा कि ये सब लेकर के मैं क्या करूं मुझे तो इसका कोई आवश्यकता नहीं है मेरी लिखने की पेंसिल जो है वह टूट गई है खो गई है मुझे नई पेंसिल ला दो तो मां ने कहा मां के हृदय को शांति मिली वो उसको लेकर के बाहर आए और बाजार में से एक पेंसिल लेकर के उसको खरीद करके दे दी तो देखिए कि अपने

Why Swami Vivekananda teaches powers of Raja Yoga

संघ में इस तरह की कहानियों का अभाव नहीं है कि धन दौलत या तो फिर धन दौलत का यह जो मिरेकल मेनिफेस्टेशन है पावर्स इसको हमने रिजेक्ट किया हो बार-बार तो नेचुरली है कि स्वामी जी ने खुद ने ठाकुर ने जब पावर्स ऑफर किए थे वो रिजेक्ट किया फिर स्वामी जी यहां पे राजयुग में यह सब बातें क्यों कर रहे हैं व्हाई देयर इज एन एक्सटर्नल मेनिफेस्टेशन ऑफ प्राणा जिसको कंट्रोल करके ये फिजिकल यूनिवर्स को हम कंट्रोल कर पाएंगे यह सब बातें स्वामी जी कर ही क्यों

Pic: Swami Vivekananda

रहे हैं और उसका जो इंटरनल मेनिफेस्टेशन है प्राण अपान व्यान उदान समान यह जो पंच प्राण और इसके ऊपर में भी मन बुद्धि चित्त अहंकार को कंट्रोल करने की इनकी जो कैपेसिटी है इसके बारे में बात कर ही क्यों रहे हैं स्वामी जी तो यहां पे मुझे

In Raja Yoga Swamiji brings together best of East and best of West

पर्सनल जो मेरा बिलीफ जा रहा है वह इस तरह से है कि स्वामी जी ने हमको फ्रेमवर्क दे दिया क्योंकि यदि एक नई सिविलाइजेशन को आपको खड़ी करना है तो यह नई सिविलाइजेशन में आपको बेस्ट एलिमेंट फ्रॉम द ईस्ट एंड बेस्ट एलिमेंट फ्रॉम द वेस्ट पश्चिमी सभ्यता के सर्वश्रेष्ठ जो अंश है वह और यह अपनी पूर्वी सभ्यता के जो सर्वश्रेष्ठ अंश है वह इन दोनों का कॉमिनेशन करना था तो मुझे ऐसा लग रहा है कि यह राज्य के माध्यम से स्वामी जी ने शायद वह अटेंप्ट किया है ये किस तरह से अनफोल्ड होता है भविष्य में वह तो अभी भविष्य ही बता पाएगा किंतु एटलीस्ट हमने इसका एक इंटेलेक्चुअल डिस्कशन किया इसका प्रैक्टिस करने का कोई प्रश्न ही नहीं आता है ना ही आप घर में कीजिएगा ना मैंने कभी किया है प्राणायाम का प्रैक्टिस हालांकि मैंने प्राणायाम का प्रैक्टिस किया है मैं योगा टीचर्स ट्रेनिंग कोर्स किया था मैंने तो उस समय यह सब करते थे किंतु वह अभी पूर्वा श्रम की बात है यहां पर आने के बाद में जैसे ही मैंने देखा कि ठाकुर की इच्छा नहीं है कि हम लोग हठ योग का अभ्यास करें तो मैंने जो बंद कर दिया तो फिर से कभी स्टार्ट नहीं किया सो य इंटेलेक्चुअल अंडरस्टैंडिंग के लिए अच्छा है तो इसके लिए मैंने इसका डिस्कशन किया है तो फिर आज यहीं तक यह चैप्टर भी समाप्त हुआ कल से अभी स्वामी जी का ही कोई एक दूसरा टॉपिक देखेंगे ओम शांति शांति शांति हरि ओम तस्त श्री राम कृष्णा अर्पण मस्तु कल कल मैं वहां पर गया था यहां पर ना गीता प्रचार समिति है तो उन लोगों का एक प्रोसेशन था सी शोर पर तो मुझे बुलाया था बोला कि दो दो मिनट तीन मिनट व बात कीजिए और फिर फ्लग ऑफ कीजिए प्रोसेशन को तो मैं गया था और य श्लोक से स्टार्ट किया था क्षुद्र हृदय दबलम ष परंतपा क्लेम मासम गम पार्थ न तत्व उपते क्षुद्र हृदय दबलम त परं तप यह स्वामी जी का मतलब बड़ा ही फेवरेट श्लोक था कि नप सकता को मत प्राप्त हो यह तुमको शोभा नहीं देता है यह क्षुद्र हृदय दबलम ये क्षुद्र हृदय की दुर्बलता है उसका नाश करो तक्त तिष्ठ परं तप राइज एंड राइज अवेक एंड स्टॉप नॉट टिल द गोल इज रीच स्वामी जी का फेवरेट गीता का श्लोक फिर उ दो पांच मिनट समझाया फ्लग ऑफ किया फिर उनकी यात्रा शुरू हुई