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Swami Vivekananda' Complete Life ·

Swami Vivekananda: Life and Teachings 10 Mar 2026

मङ्गलाचरण

ओम स्थापकाय च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूप अवतार वरिष्ठाय राम कृष्णाायते नमः स्वामी विवेकानंद का लाइव हम देख रहे थे इस सप्ताह तो यह एक्चुअली शारदा कोष मैंने

Outline of Swami Vivekananda’s life in Saradakosh

इसके के बारे में पहले भी थोड़ा सा डिस्कशन किया है। अ ठाकुर मां स्वामी जी के लाइफ की सब घटनाएं इसके भीतर में डालकर के एक प्रोग्राम बनाया है। यह मैं बना रहा था 2008 जबकि मेरा नागपुर पोस्टिंग हुआ था। मैं बेलूर मठ जॉइ किया। रांची से वापस आने के बाद में उसके बाद में मुझे बेलूर मठ से नागपुर भेजा गया। वह जो टेंपल क्सक्रेशन हुआ था उस समय की बात है। तो टेंपल क्सक्रेशन का काम तो खत्म हो गया। उसके बाद में ज्यादा तो कुछ काम है नहीं मंदिर में। तो मैं बैठे-बैठे यह डाटा कलेक्ट करता था और प्रोग्राम बनाता था। तो वह उस दिनों की घटना है। यहां पर देखिए कि किस तरह से स्वामी जी की लाइफ को मैंने कुछ मेजर पीरियड में बांट दिया है। ए चाइल्डहुड एंड यूथ यानी कि उनके बचपन की कहानी। उसके बाद में देखिए विद श्री रामकृष्ण ठाकुर के साथ में। उसमें भी ठाकुर के साथ के दिनों का भी दो फज़ में बंट जाते हैं। अह एक तो है कि पिताजी के मृत्यु से पहले और पिताजी के मृत्यु के बाद में। पहले था कि पूरा आनंद और हंसी मजाक वगैरह था। किंतु पिताजी की मृत्यु हुई। नरेंद्र ने मां काली को स्वीकार किया। तब से नरेंद्र की इंटेंस साधना प्रारंभ हुई। तो वो सेकंड फेज है। डेट थोड़ा इधर-उधर है। डोंट [गला साफ़ करने की आवाज़] वरी। इसको ठीक करना है अभी मुझे। तो एनीवे वराह नगर मठ का देखिए कि उसके बाद में फेस स्टार्ट होता है वराह नगर मठ। तो उसमें भी मठ में रहने के समय स्वामी जी फर्स्ट पिल्गिमेच टू नॉर्थ इंडिया। फिर वराह नगर मठ में वापस आना। फिर सेकंड पिल्गिमेच टू नॉर्थ इंडिया। फिर से मठ में वापस आना। थर्ड पिल्लगिरी मैच टू नॉर्थ इंडिया और उसके बाद में जो उन्होंने मठ छोड़ा तो सीधा वह फिर विश्व विजय होकर के ही सीधा अमेरिका से वापस लौटे थे। तो वह प्रवृज्जा के दिन प्रारंभ होते हैं। तो तपस्या इन हिमालयज दिल्ली एंड हिस्टोरिक राजपूताना फिर बॉम्बे प्रेसिडेंसी उसमें गुजरात है, काठियावाड़ है। उसके बाद में बॉम्बे प्रेसिडेंसी महाराष्ट्र इसमें जहां पे भी आप क्लिक करेंगे वह वहां की सब घटनाएं यहां पे दिखाई देगी। तो जैसे आप यहां पर इसको देख रहे हैं तो ये बॉम्बे प्रेसिडेंसी में महाराष्ट्र फिर बेल बेलगांव गोवा एंड मैसूर उसके बाद में कोचीन त्रावणकोर मद्रास प्रेसिडेंसी और फिर आखिर में विदेश जाने की तैयारी और फिर मेजर फेस है मिशन टू द वेस्ट अमेरिका में किस तरह से स्वामी जी ने कार्य किया तो वएज एंड अर्ली डेज इन अमेरिका फिर पार्लियामेंट ऑफ रिलीजन के जो कुछ दिन थे फिर साइक्लोनिक मक कि अमेरिका में प्रवचन करते-करते उन्होंने किस तरह से श्री रामकृष्ण और वेदांत का प्रचार किया। अर्ली डेज यह अर्ली डेज में हमको पता है कि स्वामी जी एक लेक्चर एजेंसी के साथ में जुड़े थे। जिन्होंने कि बाद में स्वामी जी को दगा दे दिया, धोखा दे दिया, पैसा भी दिया नहीं ज्यादा जो कि कलेक्ट हुआ था और स्वामी जी के पास में ओवरवर्क करवा लिया था। तो जो भी है वह वह पीरियड और इसमें स्वामी जी बहुत सारी जगह पर घूमे हैं। जहां पर यह लिस्ट हमको दिखाई ही दे रहा है। किंतु उसके बाद में स्वामी जी ने ठीक किया कि इस तरह से जगह-जगह जाकर के प्रवचन देना इससे एक हेतु यह सर होता है कि अमेरिका वासियों के मन के भीतर में भारत के बारे में जो गलत धारणाएं हैं, वह थोड़ी सी दूर होती है। किंतु [गला साफ़ करने की आवाज़] यह जो वेदांत का प्रचार बैठकर के जिस तरह से ठाकुर ने दक्षिणेश्वर में किया था, जिस तरह से उन्होंने अपना एक अंतरंग वर्तुल तैयार किया था, एक इनर सर्कल उनका था, जहां पर ठाकुर के पास में रेगुलर डिसाइपल आते थे और डिसाइपल का जीवन ट्रांसफॉर्म हुआ था। तो इस तरह से स्वामी जी को बैठकर के एक जगह पर नियमित क्लास लेने होंगे। साइक्लोनिक मक की तरह सुबह को एक सिटी में तो शाम को दूसरे सिटी में तो दूसरे दिन सुबह तीसरे सिटी में ऐसा करके घूम करके भारत की बारे में जो नेगेटिव धारणाएं हैं भले चाहे उससे दूर करें इससे लोगों का जीवन ट्रांसफॉर्म नहीं होने वाला। तो वो एक फेज समाप्त हो गया स्वामी जी के जीवन का यह साइक्लोनिक मक वाला कि ठीक है अक्टूबर से जनवरी स्वामी जी ने यह जो पूरा जो फेस था उनका ये ये उनका रहा ऑलमोस्ट मोर देन वन ईयर यह स्वामी जी का फेस रहा 1894 पूरा साल स्वामी जी ने इस तरह से कार्य किया किंतु फिर स्वामी जी ने कहा बहुत हो गया अभी एक जगह बैठकर करके वेदांत का प्रचार करना है। भले ही चाहे मुट्ठी भर डिसाइपल मेरे हाथ में आए किंतु उनका जीवन ट्रांसफॉर्म करना है। तो बोलकर के स्वामी जी ने न्यूयॉर्क सिटी को पसंद किया और वहां पर बैठकर के उन्होंने अमेरिका में प्रॉपर्ली वेदांत का प्रचार प्रारंभ किया। तो वेदांत इन अमेरिका यह फर्स्ट फेज बीच में वह फिर रिजली मैनर भी गए थे और फिर बीच में थाउजेंड आइलैंड पार्क में भी गए थे। वो ब्रेक लेने के लिए जब यह हेक्टिक हो जाता है क्लास का स्ेड्यूल तब कहीं जाकर के वह बीच में एक बार रिजली मैनर एक बार थाउजेंड आइलैंड पार्क जाके आए थे तो वो एक हो गया इसके बाद में और ये थाउजेंड आइलैंड पार्क की तो हमको पता है कि बहुत सारी कहानियां अपने ऑर्डर में प्रसिद्ध है तो वो एक हो गया इसके बाद में एक्सप्लोरिंग द यूरोप यूरोप से वो जो एटी स्टडी का निमंत्रण आया था। तो स्वामी जी ने सोचा कि चलो एक बार यूरोप जाकर के देख के आते हैं। तो फ्रांस और इंग्लैंड दोनों जगह पे गए। एक्चुअली वो जो फ्रांसिस लेगेट और यह जो बेटी लेगेट इनका विवाह था तो वे लोग स्वामी जी को साथ में ले गए थे फ्रांस में। फिर बाद में स्वामी जी इंग्लैंड जाकर के आए। इसके बाद में स्वामी जी अमेरिका वापस आकर के फिर से वही बात कि एक जगह पर बैठकर के उनको ठीक-ठीक उसका प्रचार करना है। तो फिर से न्यूयॉर्क में वेदांत का प्रचार रेगुलर क्लासेस यह जो न्यूयॉर्क में जो रेगुलर क्लासेस लिए गए और बाद में यह जो लंदन में यह जो रेगुलर क्लासेस लिए गए इसी का परिणाम हमारे पास में वो जो स्वामी जी के चार योग है कर्म ज्ञान भक्ति ध्यान वो इसी न्यूयॉर्क क्लास की ही लंदन क्लास की ही देन है। इसके बाद में क्रिसमस एट रिजली फिर से न्यूयॉर्क फिर डेट्रोएट बोस्टन शिकागो और लास्ट डेज इन अमेरिका अमेरिका का मिशन समाप्त स्वामी जी आते हैं यूरोप लंदन में फर्स्ट सीजन ये जो आजकल टीवी सीरीज होती है ना फर्स्ट सीजन सेकंड सीजन तो स्वामी जी का फर्स्ट सीजन ऑफ लेक्चर फिर बीच में ब्रेक लेकर के यूरोप में जाके आए फिर विंबल्डन जहां पे भी यह अपना निवेदित वेदिता का घर है। वहां पे गए थे। फिर यह लंदन में सेकंड सीजन ऑफ लेक्चर्स क्लासेस। फिर ये लंदन में फोल क्लासेस फोल यानी कि ऑटम शरद ऋतु का क्लास और फिर यूरोप ऑन द वे टू इंडिया। तो यह देखिए कि पूरे यूरोप के जितनी भी घटनाएं हैं सबको मैंने इस तरह से बांट दिया है। जहां पर भी आप क्लिक करेंगे वहां पे उस दिन की सब एज डिटेल एज पॉसिबल घटना आपको यहां पे दिख जाएगी। तो और क्या है कि ऑलमोस्ट मोर देन आई थिंक 30,000 ना कि इतनी इवेंट्स इसके भीतर में है। तो ये अमेरिका का प्रथम विजिट टू अमेरिका फर्स्ट मिशन टू अमेरिका समाप्त हुआ। फिर मिशन टू द ईस्ट। इंडिया वापस आए तो सिर्फ ऐसा नहीं कि वह अपने घर वापस आए हैं। उनके पास में एक मिशन है। जिस तरह से यह प्रवरज्या के समय वह भारत में घूमे थे तो उस समय उनका पर्पस था कि भारत को अच्छे से समझे। यह जो परिवराजक डेज तो जुलाई 1892 मई 1893 यह जो पीरियड है भारत को ठीक से समझना था। तो हिमालय राजपूताना वगैरह जो गए थे स्वामी जी तो यहां पर उनका पपस है कि अभी अमेरिका से वापस आकर के भारत को तो समझ ही लिया है। अमेरिका को भी समझे हैं। अभी भारत में उनको प्रवचन देने हैं। तो यह ट्रायफ ऑफ द लॉर्ड यह जो आने के बाद में इमीडिएटली स्वामी जी ने जनवरी 1897 से जनवरी 1898 ये ऑलमोस्ट 12 महीने का एक साल का पीरियड जिस तरह से अमेरिका में वर्ल्ड पार्लियामेंट ऑफ रिलीजन के समाप्त होने के बाद में पूरे अमेरिका में यह जो खास करके ईस्ट ईस्टर्न सी बोर्ड है ईस्टर्न जो पार्ट है मिड ईस्ट वगैरह जिसको को कहते हैं वहां पर घूम के मोर देन वन ईयर स्वामी जी गांव-गांव घूमे जिस तरह से तो वैसे ही भारत में भी वो पूरे गांव-गांव शहर-शहर घूम कर के उन्होंने वही वेदांत का प्रचार किया वहां पे और यहां पर देखिए भारत के कार्य में और अमेरिका कार्य अमेरिका के कार्य में सिमिलरिटीज कैसे हैं? अमेरिका में एक बार वर्ल्ड पार्लियामेंट ऑफ रिलीजन में सक्सेस होने के बाद में फर्स्ट फेज है साइक्लोनिक मक कि सब जगह पर जाकर प्रवचन देना और फिर एक जगह पर बैठ यह फेज समाप्त होने के बाद में एक जगह पर बैठकर के रेगुलरली डिसाइपल्स के लिए क्लासेस करना। तो एक हो गया साइक्लोनिक मोंक फेस और फिर सेकंड हो गया रेगुलर क्लासेस फॉर द ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ डिसाइपल्स लाइफ्स। अपने शिष्यों का जीवन परिवर्तन करने के लिए न्यूयॉर्क में बैठकर के क्लासेस कंडक्ट करना और फिर न्यूयॉर्क वेदांत सोसाइटी का गठन करना। तो यह जो पैटर्न है एग्जजेक्टली सेम पैटर्न स्वामी जी इंडिया में फॉलो करते हैं। यह ट्रायफ ऑफ द लॉर्ड यह जो पूरा पीरियड है 12 महीने का स्वामी जी कोलंबो से लेकर के पूरे भारत में भ्रमण करके इतने सारे लेक्चर देते हैं। इन लेक्चरों का जो कंबाइलेशन है लेक्चर फ्रॉम कोलंबो टू अल्मोड़ा वो हम स्टडी कर ही रहे हैं। तो आज सुबह को यह वाला पीरियड में जो देख रहा था और यह तो हो गया कि फर्स्ट पीरियड कि साइक्लोनिक मोंग की तरह पूरे भारत में भ्रमण करके उन्होंने प्रवचन दिया और इसके बाद में फिर यह एक जगह पर बैठकर के बेलूर मठ में अपने डिसाइपल्स को ट्रेनिंग दे रहे हैं। स्वामी जी के जीवन में एक जगह पर बैठना ज्यादा होता नहीं है। किंतु जो भी है प्रवचन का जो दौर है वह यहां पर समाप्त हो जाता है। स्वामी जी के जीवन में। इसके बाद में स्वामी जी वैसे सेकंड विजिट टू वेस्ट जाते हैं। किंतु इतना इंटेंस जो प्रवचन जो उन्होंने दिए हैं अमेरिका में वर्ल्ड पार्लियामेंट ऑफ रिलीजन के बाद में और फिर भारत में आकर के पहले साल में यह जो दो साल ऑलमोस्ट आप कहेंगे 14 और 12 ऑलमोस्ट 26 मंथ स्वामी जी के हैं। सबसे ज्यादा सबसे इंटेंस कार्य उन्होंने इस समय किया है। तो मैं आज सुबह को ही देख रहा था कि यह जो भारत में दिए हुए जो प्रवचन है कहां-कहां स्वामी जी गए हैं। देखिए कि इतनी जगह स्वामी जी घूमे हैं। भारत में वापस आने के बाद में कोलंबो में आए हैं 15th जनवरी। फिर कैंडी अनुराधापुरम और यह वेवोनिया जाफना फिर वहां से पंबन यह सब को सिलोन उस समय का सिलोन आज का श्रीलंका फिर वहां से इंडिया रामेश्वरम रामनाथ परमकुड़ी फिर ये मानुराई मदुराई वगैरह वगैरह वगैरह फिर वहां से ये कोलकाता कोलकाता में ये रामकृष्ण मिशन की स्थापना ये मद्रास के लेक्चर बहुत ही इंपॉर्टेंट है। फिर कोलकाता, दार्जिलिंग, लखनऊ, काठगोदाम, अल्मोड़ा, बरेली, अंबाला, अमृतसर, धर्मशाला, मुरी, बारामूला, श्रीनगर, पैंपोर, अनंतनाग, मार्तंड, रावलपिंडी, जम्मू, सियालकोट, लाहौर, देहरादून, दिल्ली, अलवर, जयपुर, खेतड़ी, किशनगढ़, जोधपुर, इंदौर, खंडवा, रतलाम, देवघर और फिर वहां से कोलकाता वापस। तो जहांजहां पे स्वामी जी गए हैं वहां वहां पर उन्होंने प्रवचन दिया है या तो फिर उन्होंने वहां के डिसाइपल्स के साथ में बात की है। देखिए कितने प्लेसेस होते हैं। यह फर्स्ट रो छोड़ दें तो यहां पे 48 एटलीस्ट 48 प्लेसेस का अपने पास में रिकॉर्ड है कि स्वामी जी एक साल में घूमे हैं। और याद रखना है कि वो आजकल का वो जो क्विक ट्रैवल वाला युग नहीं कि आपके पास में फर्स्ट क्लास कार है, ट्रेन है, प्लेन है, नहीं। यह ब्रिटिश साम्राज्य का समय था। उस समय ट्रैवल बड़ा ही कष्टकर होता था। तो नियरली 50 प्लेसेस 12 महीने में कवर करना और फिर जाना ही नहीं। वहां पर वो जो इंटेंस एक्टिविटी करना लोगों को इकट्ठा करके पूरे भारत को जिस तरह से स्वामी जी ने अपलिफ्ट किया है ये ये सिर्फ एक ही टेबल से हमको देखने को मिलता है। स्वामी जी का जो कंट्रीब्यूशन है सही में यह सब जगह पे काठ गोदाम है। अल्मोड़ा, बरेली, अंबाला, अमृतसर वहां पे जाकर के स्वामी जी ने किस तरह से वहां के लोगों के ऊपर में प्रभाव डाला होगा। किस तरह से भारत का जो हजार साल का तमस है उसको काट दिया है। किस तरह की प्रचंड स्पिरिचुअल ऊर्जा उनके भीतर में से प्रकट हुई होगी। यह सही में आज हमारे पास में यह सब अनुमान करना ही मुश्किल है। तो यह फिर देखिए इसके बाद में रिटर्न टू आवर शारदा कोश। तो ये जो ट्रायफ ऑफ द लॉर्ड ये 1887 से 1898 के 12 महीने ऑलमोस्ट 50 प्लेसेस का ऑन रिकॉर्ड है। ऑफ रिकॉर्ड पता नहीं कितना ऑन रिकॉर्ड इतनी जगह पर स्वामी जी गए और फिर किंतु इसके बाद में मठ में रहकर के स्वामी जी अपने डिसाइपल्स को ट्रेन किया किंतु ज्यादा नहीं बहुत ज्यादा नहीं चारप महीना। इसके बाद में फिर से नॉर्थ इंडिया वेस्टर्न डिसाइपल आए थे ये निवेदिता मिसेज ओलीबुल जोसेफाइन मैक्लाउड तो उनको लेकर के फिर से नॉर्थ इंडिया निकल गए तो हिमालय में अल्मोड़ा पंजाब फिर कश्मीर वो जो फेमस अमरनाथ और कश्मीर खीर भवानी वो जो फेमस सब घटनावली जो निवेदिता ने माय मास्टर मास्टर एज आई सो हिम एंड वंडरिंग्स इन हिमालय विद स्वामी विवेकानंद वहां पे जो वर्णन किया है वही सब घटना है। फिर से बेलूर मठ वापिस और फिर देखिए कि सेकंड मिशन टू द वेस्ट फिर से अमेरिका गए तो रास्ते में लंदन निवेदिता के घर गए। फिर अमेरिका यहां पे वह जो ईटी स्टडी ने स्वामी जी को धोखा दे दिया था। वह सब घटना है। फिर यह अमेरिका में ईस्ट कोस्ट पे किंतु ज्यादा नहीं रहे। किंतु यह जो रिजली मैनर का जो पीरियड है द ग्रेट समर इसके बारे में पहले भी कुछ डिस्कशन हमने किया है और भी करेंगे। वन ऑफ द बेस्ट पीरियड इन स्वामी जीसस लाइफ। फिर न्यूयॉर्क और फिर यह जो वेस्ट कोस्ट वाला जो पीरियड है वन ऑफ दी मोस्टेंट वन ऑफ द लिस्ट डिस्कस्ड कि किस तरह से यह कैलिफोर्निया आज का होम ऑफ टेक एंड एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री सिलिकॉन वैली भी वहां पे है और फिर यह हॉलीवुड भी वहां पे है तो और यह कालटेक कैलिफोर्निया इंस्टट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी भी वहां पे है और स्वामी जी कालटेक की मुलाकात के लिए गए थे उस समय थर इंस्टट्यूट हाउस का नाम तो स्वामी जी ने कहा था कि भारत में इस तरह की इंडस्ट्रियल स्कूल्स होनी चाहिए तो वह लॉस एंजेलस पेसडीना स फ्रांसिस्को आलाेडा केम टेलर शिकागो एंड न्यूयॉर्क म वापस आ गए। फिर यूरोप और मेडिटेरानियन होकर के भारत में वापस मिशन ओवर कुछ समय के लिए वहां बेलूरमठ वगैरह रहे। नॉर्थ इंडिया गए थे और फिर ईस्ट इंडिया माने ईस्टर्न इंडिया की ओर भी गए थे कामाख्या वगैरह अपनी मां को लेकर के किंतु फिर आखिर में टुवर्ड्स द एंड उनके जीवन की आखिरी पल तो देखिए कि यह एक बनाया है मैंने सोच रहा हूं इसको यह तो पुरानी टेक्नोलॉजी है किसी के साथ में शेयर करना भी मुश्किल है तो अभी तो एआई में डाल के पूरा डाटा डाटा इसका फिर से मॉडर्न प्रोग्रामिंग सिस्टम में मैं कन्वर्ट करने को सोच रहा हूं। सो एनीवे हम लोग इस पीरियड को देख रहे हैं वराह नगर मठ वाले। इसके बाद में देखेंगे परिवराजक डज़ और फिर स्टार्ट होगा यह फर्स्ट मिशन टू द वेस्ट। फिर यह मिशन टू द ईस्ट वगैरह-वगैरह। तो यह वराह नगर मठ वाला पीरियड हम देख रहे हैं। वराह नगर मठ में

वराहनगर मठ में प्रथम शिवरात्रि महोत्सव

देखिए कि मास्टर महाशय आए हैं। ठाकुर की महासमाधि के बाद में वो पहली बार उनका यह ओन रिकॉर्ड वो वराह नगर मठ आए हैं। पहले तो आए ही होंगे किंतु रिकॉर्ड जो है कथामृत में वह इसी समय का है। तो फिर यह 21 फरवरी 1887 फिर 2 फरवरी 1887 वह शिवरात्रि की शिव पूजा जो हो रही थी उस समय की बात है। अगले दिन रात को शिवरात्रि की पूजा थी और इसका जो वर्णन मास्टर महाशय ने किया है। फिर से एक बार पढ़ लेता हूं। इतना सुंदर उन्होंने डिस्क्रिप्शन किया है। पहले तो हमने देखा कि मटका ही मटके ही एक गुरु भाई शिव की पूजा कर रहे थे और बीच-बीच में काली वेदांती अपने अभेदानंद जी महाराज गीता पाठ कर रहे हैं और नरेंद्र के साथ में चर्चा विचारणा कर रहे हैं। गीता पाठ समाप्त होने के बाद में ही नरेंद्र वगैरह गुरु भाई सब खड़े होकर के नृत्य गीत करतेकरते बिल्व वृक्ष की परिक्रमा कर रहे हैं और बीचबीच में समस्वरे शिव गुरु शिव गुरु इस मंत्र का उच्चारण कर रहे हैं। गंभीर रात्रि है। कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि चारों ओर अंधकार है। जीव जंतु सब निस्तब्ध है। कोलकाता नगरी सोई हुई है और यह योगी गण जागृत है। यह गैरिक वस्त्रधारी यह गेरवा वस्त्रधारी कौमार वैराग्यवान किस तरह के वैराग्य वाले जो कुमार है बूढ़े नहीं हो गए हैं। कौमार वैराग्यवान भक्तगण के कंठ से उच्चारित शिव गुरु शिव गुरु यह महामंत्र ध्वनि मेघ गंभीर स्वर से अनंत आकाश में उठकर के अखंड सच्चिदानंद में लीन होने लगा। माने मास्टर महाशय इस कैपेबल ऑफ पोएट्री इन प्रोज़। जब भी उनको लगता है आवश्यकता होती है। इसके बाद में पूजा समाप्त हुई। अरुणोदय होए होए। कितना सुंदर यह सेंटेंस है। अरुणोदय हो रहा है। हो रहा है। नरेंद्र वगैरह भक्तगण ब्राह्म मुहूर्त में गंगा स्नान किया। तो यहां तक हमने पढ़ा था 2 फरवरी इसके बाद का जो दिन है उसका अभी वर्णन प्रारंभ होता है। सुबह हुई

स्वामी विवेकानन्द का दिव्य सौंदर्य

शकाल होलो सुबह हुई स्नानते भक्तगण मठे ठाकुर घरे गया ठाकुर के प्रणामंतर दाना दे घरे अर्थात बैठक खाना घरे क्रम क्रमे आशिया एकत्रित होते छे स्नान करने के बाद में भक्तगण मठ में ठाकुर घर में जाकर के गर्भ गृह में जाकर के ठाकुर को प्रणाम करके यह जो दानव ओं का कमरा है। अर्थात कि वहां का जो बैठक खाना जो घर है कमरा वहां पर एक के बाद एक आकर के एकत्रित हो रहे हैं। [नाक से की जाने वाली आवाज़] नरेंद्र सुंदर नवगैरी को वस्त्र धारण करिया छे नरेंद्र ने सुंदर नवगरी वस्त्र सुंदर नया गेरवा वस्त्र धारण किया है। बसनेर सौंदर्य शंगे ताहार मुखेर ओ देहेर तपस्या शंभूत अपूर्वो स्वर्गीय पवित्र ज्योति ही मिशया छे वस्त्र के सौंदर्य के साथ में उनके चेहरे का और देह का तपस्या से प्रकट हुआ अपूर्व स्वर्गीय पवित्र ज्योति जैसे कि वस्त्र के सौंदर्य के साथ में एकीकृत हो जा रहा है। वदन मंडल तेज परिपूर्ण चेहरा है तेज से परिपूर्ण है। वदन मंडल अर्थात कि चेहरा तेज से परिपूर्ण है। आभार प्रेमानुरंजित तेज से परिपूर्ण तो है ही है। प्रेम से अनुरंजित भी है। जेनो अखंड सच्चिदानंद सागर एक्ट फुट जैसे कि अखंड सच्चिदानंद सागर की एक किरण ज्ञान भक्ति शेख जनो देव देह धारण करिया छे ज्ञान भक्ति सिखाने के लिए यह देह धारण किया है। अवतार लीलाय सहायतार जन अवतार लीला में सहाय होने के लिए अखंड सच्चिदानंद सागर की एक किरण ज्ञान और भक्ति सिखाने के लिए जैसे कि यह मनुष्य देह धारण किया है। अवतार लीला में सहायता करने के लिए कितना सुंदर वर्णन जे देखते छे शे आर चखू फिराइते पारते छे ना जो देख रहा है वह अपनी नजर को घुमा नहीं पा रहा है वहां से नरेंद्र्रे वह क्रम ठीक चतुरबिन शतिबोर नरेंद्र की उम्र है ठीक 24 साल चतुरबिन शति 24 साल ठीक ए वयो से श्री चैतन्य संसार त्याग करिया छिले यही उम्र में ठीक इसी उम्र में श्री चैतन्य ने संसार त्याग किया था। देखिए यह मास्टर महाशय इतना सुंदर वर्णन कर रहे हैं। यह यही मास्टर महाशय कि जिन्होंने ठाकुर की पवित्रता ठाकुर की तपस्या से संभूत यह जो दैहिक पवित्रता और दैहिक लीला है यह उन्होंने ठाकुर के भीतर में भी दर्शन की थी। यह मास्टर महाशय ने तो देखिए कि मास्टर महाशय ने कथामृत में एक जगह पे लिखा है। पहली बार जब नरेंद्र का उन्होंने भजन सुना गीत सुना तो वो लिखते हैं कि ठाकुर को छोड़कर के इतना भजन का गान का मास्टर महाशय ने और कहीं नहीं सुना है। वो उन्होंने खुद ने कथामृत में लिखा है। यानी कि जब नरेंद्र गाता था उस समय भी उनके स्वर का जो माधुर्य था ऑलमोस्ट ठाकुर को टच हो जाता था और फिर यह देह का जो यह पवित्र तेज परिपूर्ण जो यह उनका ये सौंदर्य है वह भी आप देखिए कि ठाकुर के देह के साथ में ऑलमोस्ट मैच हो जाता है। मां ने कहा था कि अभी तो आप लोग ठाकुर का सौंदर्य कहां देखें? एक समय था अभी तो बादबाद में यह बीमारी वगैरह की वजह से और ठाकुर को सौंदर्य पसंद नहीं था। बार-बार अपने देह के ऊपर में ऐसा ऐसा मार करके कि सौंदर्य को कहते हैं तू भीतर में चला जा। भीतर में चला जा। ऐसा करके सौंदर्य को डंक दिया था। वरना मां खुद कहती है जब वह सोने का तावीज पहन करके वो थस थस करते वो गंगा में नहाने को जाते तब ऐसा लगता कि उनके देह की कांत जो है देह का जो सौंदर्य है वो सोने के साथ में मिल जा रहा है। सुवर्ण जो होता है कितना चमकता है सूर्य प्रकाश में कितना सुंदर लगता है। इसी तरह से ठाकुर का देह भी सुवर्ण की तरह प्रकाशित होता था। सौंदर्यवान होता था। कामार पुकुर की एक घटना है। वहां पर ठाकुर गए थे और एक बार वह गमछा पहन करके वह कहीं यह हलदार पुकुर में कि स्नान वगैरह करने को जा रहे होंगे। देखा कि यह सब औरतें रास्ते पर खड़ी है। तो ठाकुर ने आश्चर्यचकित होकर के यह अपने हृदय हृदय उनका भांजा और उनका सेवक। तो हृदय को ठाकुर ने पूछा कि अरे हृदय यह सब औरतें यहां पे क्या कर रही है? खड़ी-खड़ी तो हृदय कहता है कि मामा वह आपको देखने के लिए खड़ी है। आप इतने सुंदर दिखते हैं तो तो ठाकुर ने कहा भगाओ इनको यहां से वरना अभी मैं नंगा होता हूं। तो म वो जैसे ही गमछा निकाल देंगे तो सभी औरतें भाग जाएगी तो ठाकुर कहते हैं भगाऊं इनको ना हले खून आमीन नेटो हो तो हृदय कहता है ना मामा नेटो होवे नाटो होवे ना मामा आप नंगे मत होइए मैं कहता हूं इनको जाने के लिए तो देखिए कि ठाकुर के देह का जो सौंदर्य था उसका भी वर्णन हमारे पास में है और यहां पर स्वामी जी के जो दैहिक सौंदर्य इतना सुंदर वर्णन मास्टर महा महाशय करते हैं। फिर से एक बार पढ़ता हूं। बड़ा सुंदर है। नरेंद्र ने सुंदर नया गेरुआ वस्त्र धारण किया है। वस्त्र के सौंदर्य के साथ में उनके चेहरे और देह का तपस्या से संभूत अपूर्व स्वर्गीय पवित्र ज्योति जैसे कि मिल जा रही है। वदन मंडल तेज से परिपूर्ण है और फिर प्रेम से अनुरंजित है। सिर्फ तेज से नहीं प्रेम से भी अनुरंजित है। जैसे कि अखंड सच्चिदानंद सागर की एक किरण ज्ञान और भक्ति सिखाने के लिए देह धारण करके आई है अवतार लीला में सहायता करने के लिए जो देख रहा है वह अपनी आंखों को फिरा नहीं पा रहा है। तो देखिए कि कभी-कभी हम स्वामी जी का यह जो जीवन पढ़ते हैं ना तो बार-बार पढ़ते हैं कि वराह नगर मठ के दिनों में स्वामी जी के ऊपर में इतना टेंशन था। घर की समस्या कोर्ट केस चल रहा है। मां और छोटे भाई बहनों को खाने का कोई उपाय नहीं है। यह तो सही ही सही। फिर वराह नगर मठ की भी अवस्था ऐसी है कि खाने की अवस्था माने खाना पीना कब कैसे मिलेगा कुछ ठिकाना नहीं। और फिर दूसरा कि ठाकुर ने इतना बड़ा जिम्मा दिया है पूरे विश्व में वेदांत का प्रचार करना है। धर्म चक्र प्रवर्तन करना है। हजार साल की निंद से सोए हुए भारत को फिर से जागृत करना है। तो इतना सब टेंशन नरेंद्र अपने सर पर लेकर के घूमता होगा। तो कितना वो एजिटेटेड फ्रेम ऑफ माइंड में रहता होगा। कितना रेस्टलेस फ्रेम ऑफ माइंड में रहता होगा। कितना वो डिप्रेशन में चला जाता होगा। ऐसा एक लगता है। एक आम आदमी के ऊपर में इतना रिस्पांसिबिलिटी जब आ जाता है तो हम लोगों का जो एक्सपीरियंस है अपने सर पे यदि इतना रिस्पांसिबिलिटी आ जाए तो हम लोग भी तो एजिटेटेड हो जाएंगे। हम लोग भी तो टेंशन में आ जाएंगे। हम लोग भी रेस्टलेस हो जाएंगे। तो हमारा जैसा ही स्वामी जी का होता होगा। किंतु स्वामी जी कहां? हम लोग कहां हम लोगों का इतना सा बुद्धि है, इतना सा कैपेसिटी है टेंशन झेलने का। जबकि स्वामी जी का तो विराट महासागर की एक किरण है। माने जो अनंत महासागर की एक किरण है। ज्ञान और भक्ति सिखाने के लिए देह धारण करके आई है। उनके सर पर हजार भी टेंशन डाले तो बाहर से जो एक सरफेस के ऊपर में एजिटेशन दिखता होगा। समुंदर में आप स्कूबा डविंग के लिए जाएंगे तो देखेंगे कि सरफेस के ऊपर में वेव्स आफ्टर वेव्स आकर के किनारे के साथ में टकराते हैं। किंतु थोड़ा सा 5 मीटर 10 मीटर गहरा में जाइए समुंदर के देखिए शांत प्रशांत वातावरण है। वहां पर अंडर करंट्स होते हैं। किंतु सरफेस की तरह वेव्स नहीं होते हैं। तो यह जो भीतर की प्रशांति है, सरफेस के ऊपर में इतना एजिटेशन वगैरह दिख रहा है, किंतु भीतर में जो शांति और प्रशांति है, वह उसका अंदाज जो है, रेयरली हमको कभी-कभी मिलता है। तो, वह जो रेयरली कभी-कभी यह हमको मिलता है। यह विनीत द सरफेस देखने का सद्भाग्य तो यह एक पैसेज में मास्टर महाशय ने हमारे लिए प्रस्तुत किया है। इतना सुंदर लैंग्वेज और कितना सुंदर रूप से नरेंद्र के बारे में यह लिखा है कि जो देख रहा है नजरों को फिरा करके और कहीं देख नहीं पा रहा है। भक्तों देर पारणर जन श्रीक्त बलराम तहार बाटी होइ ते फल मिष्ठान आदि पूर्व दिन पाठाईया छे भक्तों के पारण के लिए उपवास रखा है तो तो उपवास के बाद पारण होता है अर्थात कि भोजन होता है उपवास को तोड़ने के लिए उसके लिए श्रीयुक्त बलराम ने अपने घर से फल और मिष्ठान वगैरह अगले ही दिन भिजवा दिए हैं। इसके बाद भी है। अभी यह टॉपिक चेंज होता है थोड़ा सा तो वह अभी हम कल देखते हैं। आज यहीं तक ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णपणमस्तु।

modernization of Saradakosh

मुझे ना शारदा कोष को मॉडर्नाइज करना है। तो सुबह को मंगल आरती से आया आकर के सीधा मैं काम करने को बैठ गया। यह पुराना सब यह मैंने बनाया है एक्सेस और वीबी में तो पुराना पुराना सब खोल करके मैं सुबह से देख रहा हूं कि क्या कर सकते हैं। तो अभी स्वामी जी का तो पूरा कैपेसिटी है जगत का टेंशन लेने का। मेरा तो ज्यादा है नहीं तो ये किस तरह से पूरा लाइफ टाइम का वर्क अभी ये कन्वर्ट करना है न्यू टेक्नोलॉजी में वो टेंशन के मारे मेरा गला सूख जा रहा है [हंसी] आज पता नहीं मैंने कहा आज जल्दी खत्म कर देते हैं [हंसी] ना ए ही करना है ना और तो अभी कोई उपाय ही नहीं है और इसलिए तो मैं साहस कर रहा हूं कि वाइप कोडिंग मैं बोलूं कि इसके बाद में ऐसा करो इसके बाद में ऐसा करो। यह टेस्ट वो जो टेबल है ना टेबल मैंने टेस्ट करने के लिए ही बनाया। एआई के थ्रू ही बना है। तो इतना टेबल बनाने के लिए मुझे मिनिमम एक महीना चाहिए होता। सभी किताबों में से सब डेट्स इकट्ठा करना। यहां पे मैंने कमांड दिया तो उसने यह टेबल बना दिया। सो [हंसी] और सेकंड स्टेप है कि इसको मुझे मैप में कन्वर्ट करना है कि स्वामी जी यहां यहां पे गए। तो एक एक अटेम्प्ट मैंने किया। मैं शेयर करता हूं। अटेम्प्ट सक्सेसफुल नहीं हुआ। अ इन दैट सेंस कि मैं सेटिस्फाइड नहीं हुआ अटेम्प्ट से। बट किंतु फिर भी देखिए अटेम्प्ट तो हुआ और बहुत बुरा भी नहीं। मेरा स्टैंडर्ड थोड़ा हाई है सक्सेस का बोल के वरना देख सकते हैं। तो ये ये सिलोन जो है ना सिलोन को मैग्नीिफाई करके यहां पे लेके आए हैं। तो कोलंबो टू फिर ये वो वगैरह वगैरह रामेश्वरम यहां से यह कुंभकणम मीना यह फिर यह जो देखिए आर्किटेक्चर वगैरह वहां के लोकल फिर वहां से यह चेन्नई वगैरह एक्यूरेट सी थोड़ा सा अच्छा नहीं है इसका किंतु फिर भी ये नैनो बनाना ये जो आजकल का [हंसी] हां हां हां हां हां हां किंतु मैं करने क्या वाला हूं ये तो फिर भी इनक्यूरेट है ना मैं क्या करूंगा कि मैं करूंगा एआई को ऑर्डर करके जितने भी लोकेशन है Google अर्थ में बिठा दूंगा एजेंट के थ्रू। तो मैंने वह ओपन क्लॉ आजकल वह जो बहुत फेमस है ना म जब से मुझे पता चला एक महीने पहले मैंने इसको इंस्टॉल किया है। अच्छा काम कर रहा है। प्रॉब्लम है कि उसका जो एपीआई की है ना उसमें डालना पड़ता है और बहुत ही रैपिडली वो टोकन खा जाता है। सो फ्री वर्जन में डेली ज्यादा काम नहीं कर सकते। सो दिस लिमिटेशंस इंक्लूडेड धीरे-धीरे करके स्टेप बाय स्टेप करूंगा। वो प्रो वर्जन जो है ना इसका जेमिनाई का 2000 पर मंथ ऐसा है। यानी कि 12 महीने का 24,000 के आसपास होगा। मेरा प्रॉब्लम क्या हुआ कि Jio का सिम था तो वह सिम फिर वहां राजकोट के किसी के नाम से मैंने लिया था। अभी यह लोग वेरीफाई करने के लिए बार-बार बोल रहे हैं। यह एसआईआर वगैरह चल रहा था ना। तो मैंने इस डिवोटी को बहुत बार बोला कि तुम वेरीफाई कर दो। तुम्हारे आधार कार्ड से लिया है। तो उसने वेरीफाई किया नहीं। अब मुझे नया सिम लेना पड़ा। अभी मेरा एड्रेस भी वहां का है। आधार कार्ड के ऊपर में इतना सारा कॉम्प्लिकेशन तो टेंपरेरी आईडिया का लिया है। 4 महीने के बाद में Jio में पोर्ट करना है। तो 2 महीना हुआ। 2 महीने के बाद में जब पोर्टिंग होगा तब Jio का सिम आएगा ना। फिर तो इंटरनेट बेस ही कर देंगे ना। वेबसाइट ही बना देंगे ना। अभी तो सब कुछ ऑनलाइन है ना। ये देखिए एक्सेस वीबी में जो प्रोग्राम है उसके लिए आपको एक इंस्टॉलर बनाना पड़ता है। ये इंस्टॉलर आप अपने डालिए अपने पीसी में फिर ही वह काम करेगा। तो मैंने इंस्टॉलर बनाया नहीं है। उसका अर्थ है कि सिर्फ वो जो एनवायरमेंट जो मैंने क्रिएट किया है अपने लैपटॉप में वही काम करेगा। तो फिर अभी अभी जब इसको मॉडर्नाइज करेंगे तो सीधा उसको वेब टेक्नोलॉजी में ही कर देंगे ना। वेबसाइट ही बना देंगे सीधा। तो वेबसाइट के ऊपर में सब अवेलेबल है। मैप रहेगा। मैप में जहां पर भी क्लिक करें तो स्वामी जी के रिलेटेड जो इंफॉर्मेशन होगी वह जिओ लोकेशन पर वह मिल जाएगी। फिर ये टाइमलाइन होगी वगैरह-वगैरह। सो एवरीथिंग विल बी देयर। ग्राफिकल इंटरफसेस होंगे। फिर ये जो फिल्टर्स होंगे म एवरीथिंग विल बी देयर। एक बार बेसिक डाटा तो मेरे पास में पूरा रेडी है। तो बेसिक डाटा मुझे कन्वर्ट ही करना है ऑनलाइन डेटाबेस में। उसके बाद में उसके ऊपर में एक के बाद एक इंटरफसेस ही बिठाने हैं। द वर्क शुड नॉट बी टू मच डिफिकल्ट। मुझे स्टेप्स बनाने पड़ेंगे जिससे कि क्या होगा डुप्लीकेशन या एरर्स ना आ जाए। सो स्टेप्स मैं सोच रहा हूं कि किससे स्टेप बाय स्टेप इसको मैं कन्वर्ट करूं। कौन सा डेटाबेस यूज़ करेंगे। थोड़ा रिसर्च करना पड़ेगा क्योंकि ऑनलाइन टेक्नोलॉजी भी बहुत ही रेपिडली चेंज होती है। तो आपको रेपिडली एक क्योंकि और मासिव डेटाबेस है। सो इंस्टेंट आपको मिलना चाहिए वो रिजल्ट माने चेंजेस के साथ में इसको ये करना है। कहां स्टोर करेंगे? सो मेनी फैक्टर्स आर देयर। वेबसाइट परचेस करनी पड़ेगी। सो फैक्टर्स आर देयर। मैं रिसर्च कर रहा हूं। लेट अस सी।

प्रश्न: आप बाहर जा कर प्रवचन क्यों नहीं देते?

जितना छुप करके रहे उतना अच्छा है क्योंकि देखिए मैं अत्या देखिए मेरे पास में दो-तीन बहुत बड़े प्रोजेक्ट है। एक तो मुझे अपनी किताब कंप्लीट करनी है। दैट इज वन बिग प्रोजेक्ट। यह शारदा कोष के बारे में मैं ऑन एंड ऑफ ऑन एंड ऑफ बहुत लंबे समय से सोच रहा हूं। मैं जब यहां पे आया था तो मेरा वन ऑफ द पर्पस था कि मेरा किताब कंप्लीट हो जाए। 10 वॉल्यूम मुझे लिखने हैं। एक ही वॉल्यूम हुआ है। सो दैट इज वन शारदा कोष को मॉडर्नाइज करना है। दैट वाज़ अनदर बिग प्रोजेक्ट। हां हां [हंसी] हां वो हिस्टोरी मैं लिख रहा हूं तो। सो तो वो एक है सेकंड कि ये शारदा कोष को अपग्रेड करना है। थर्ड इसके अपनी जो पूरी फिलॉसोफी है ना रामकृष्ण विवेकानंद वेदांत साहित्य उसका मुझे एक ना वर्ल्ड मॉडल बनाना है। एक ओवरऑल पिक्चर बनाना है। जिसको समझ करके यू कैन अंडरस्टैंड ईच एंड एव्री एस्पेक्ट ऑफ आवर फिलॉसोफी आवर आइडियाज एव्री इंसिडेंट आप इसके माध्यम से समझ सकते हैं। इसको वर्ल्ड व्यू कहते हैं फिलॉसोफी की लैंग्वेज वर्ल्ड मॉडल ये वर्ल्ड मॉडल अर्थात कि वो एक मॉडल लगा करके जितनी भी इंसिडेंट है सबको आप इंटीग्रेटेड वे में समझ सकते हैं। कहीं पे भी आपको कंफ्लिक्ट नहीं लगेगा। वरना ठाकुर कहते हैं कर्मनाशा नदी है। स्वामी जी कहते हैं कर्म योग से ही आपको निर्विकल्प समाधि होगी। हाउ इज दिस बोथ पॉसिबल? सो एक वर्ल्ड व्यू रहने से वर्ल्ड मॉडल रहने से ईच एंड एव्री सेंटेंस मेक्स सेंस एंड दे आर इंटीग्रेटेड रेदर देन बीइंग स्कैटर्ड एंड ऑोजिट। सो वो एक मुझे क्रिएट करना है। सो कुछ-कुछ बड़े प्रोजेक्ट है मेरे पास में। लेट अस कंप्लीट देम फर्स्ट।

प्रश्न: कभी कभी ठाकुर और स्वामीजी में विरोधाभास दिखता है, जैसे की ठाकुर कहते है कर्मनाशा नदी है, जब की स्वामीजी कहते है, कर्मयोग से भी मुक्ति संभव है.

एक्चुअली देखिए यह जो अजातिवाद में जगत की रचना हुई ही नहीं है। वो जो एक्सट्रीम पोजीशन है उसको मॉडरेट करने के लिए शंकराचार्य ने परमार्थ और व्यवहार ऐसे दो डिवीजन बनाए हैं ना अपने ऑर्डर में यह डिवीजन सबकॉन्शियसली ठाकुर मां और स्वामी जी को अप्लाई कर दिए गए हैं कि परमार्थ है तो ठाकुर है। व्यवहार है तो मां और स्वामी जी है। बट फ्रॉम अ ठाकुर का जो ब्रह्मशक्ति अभेद वो कांसेप्ट यदि लाएंगे तो ठाकुर मां स्वामी जी तीनों को एक पेडेस्टल पर रखना होगा। वो एक कहानी है वो जो पूर्व बंग आज का जो बांग्लादेश है कुछ डिवोटी आए मां के पास में कहा कि पहले में दो ग्रुप आए। पहले ग्रुप वालों ने कहा मां मंदिर बनाया है स्वामी जी का फोटो नहीं रखा क्योंकि आपका और ठाकुर का ही रखा है जो कि ऐसा होना उचित है तो मां इतनी नाराज हो गई कहती है जहां पर स्वामी जी पूजा नहीं ग्रहण करेंगे वहां पर ठाकुर भी पूजा नहीं ग्रहण करेंगे ऐसा डांट करके कह दिया तो वे लोग डर के मारे चले गए कहा नहीं नहीं वह स्वामी जी का फोटो रख देंगे डोंट वरी ऐसा करके अभी दूसरा ग्रुप आया उनको पता चल गया ऑलरेडी कि ऐसा हुआ है तो उन्होंने स्वामी जी का फोटो रखा तो सही ही किंतु बड़े डरते डरते कि वह कहां वह कायस्थ कहां यह ब्राह्मी अवतार और शक्ति तो आकर के बड़े डर के डर के कहते हैं मां को कि मां स्वामी जी का फोटो ठाकुर के साथ में रखा है कहीं अपराध तो नहीं हो गया तो मां ने कहा यदि ठाकुर रहते तो स्वामी जी को क्या अपने बगल में बैठने देते तो भक्त लोग बोले अरे यह तो गड़बड़ हो गया बगल में रखा तो अभी नीचे रखना चाहिए था मां कहती है नहीं ठाकुर होते तो नरेंद्र को अपनी गोद में बिठाते [हंसी] है ना ये ठाकुर मा स्वामी जी एक तीन तीन एक ये जितना अपना लिटरेचर पढ़ेंगे अपेरेंट कंट्राडिक्शन है तो अपना वो फ्रेमवर्क है कम्युनिटी सिविलाइजेशन और स्पिरिचुअलिटी कॉन्शियसनेस तो इसके माध्यम से ये रॉल्व हो सकता है किंतु डीपर फैक्टर इज ब्रह्मशक्ति अभेद यदि ब्रह्मशक्ति अभेद नहीं रहता तो आप कम्युनिटी लाइफ और यह सिविलाइजेशनल एस्पेक्ट को स्पिरिच के साथ में बिठा ही नहीं पाएंगे। सो बोथ ऑफ दी आर कॉम्प्लीमेंटरी। ठाकुर का फंडामेंटल है ब्रह्मशक्ति अभेद और फिर इसका लॉजिकल कंक्लूजन है ठाकुर मां स्वामी जी 33 31 एक

प्रश्न: हमें आपकी क्लास में हमेशा कुछ नए विचार मिलते हैं।

मैं खुद क्योंकि मैं यह फिलॉसोफी एक फ्रेमवर्क बना रहा हूं तो मुझे भी कंटीन्यूअस अपने को एक नया टाइप का थिंग और अभी भी मैं मैं मेरा ऐसा अभी रिसेंट ऑब्जरवेशन है कि पहले मेरा जो क्रिएटिविटी था ना वो अभी बहुत कम हो गया है। पहले मुझे डेली 10-15 नए विचार आते थे। मेरे पास में वो नोटबुक वगैरह है जिसमें मैं लिख करके रखता था। अभी इतना ज्यादा नए विचार नहीं आते। तो ऑलरेडी मेरा क्रिएटिविटी डाउन हो रहा है। मेरा डर यही है कि रैपिडली [हंसी] म जितना जल्दी हो सके मुझे जो करना है मैं कंप्लीट कर दूं। क्योंकि देखिए जितने भी ग्रेट साइंटिस्ट वगैरह है उनकी ग्रेटेस्ट इन्वेंशन डिस्कवरी वगैरह अराउंड 40 या 45 के आसपास में कंप्लीट हो गई है। उसके बाद में जो है वो क्रिएटिव एज नहीं बना रहता। आई एम ऑलरेडी नियरली 50। सो आई हैव टू वेरी रेपिडली फिनिश माय वर्क। देखिए बेसिक फिलॉसोफी बन गया है। बेसिक फ्रेमवर्क बन गया है। ब्रह्म शक्ति अभेद कोर आईडिया है और उसका डिराइवेटिव है ठाकुर मास्वामी जी अभेद। तो यह कोर अपना जो है बन गया है। अभी उसको वर्कआउट ही करना है। दैट वे आई एम सेटिस्फाइड। आई एम फुल्ली सेटिस्फाइड कि हां मतलब जो फाउंडेशन डालना है वो डल गया है। है ना? तो मुझे वर्कआउट करना है। क्योंकि देखिए आप यदि प्रेजेंट करेंगे ना आप कोई भी एक आईडिया को यू नीड टू हैव अ वेरी सॉलिड आपको आइंस्टाइन का। आइंस्टाइन का प्रॉब्लम क्या था पता है? फिजिक्स और मैथमेटिक्स दोनों बहुत ही अभिन्न जुड़ा हुआ है। फिजिक्स का कोई भी कांसेप्ट आप प्रेजेंट करेंगे ना आपका पक्का मैथमेटिकल फाउंडेशन होना चाहिए। और सरप्राइजिंगली आइंस्टाइन इज़ नॉट दैट गुड विद मैथमेटिक्स। सो क्या था कि आइंस्टाइन के कुछ एसोसिएट्स थे जो कि वो मैथ्स वर्कआउट करने में हेल्प करते हैं। बट आइडियाज वेर ऑलरेडी प्रेजेंट आइंस्टाइन के साथ में। द सेम थिंग विथ मी कि मैंने फंडामेंटल आइडियाज को ले लिया है बट टू वर्क देम आउट इन अ प्रॉपर थीसिस आप एक थीसिस प्रेजेंट करेंगे ना किताब के रूप में है या आर्टिकल के रूप में है दैट विल रिक्वायर माने सॉलिड वर्क होना चाहिए रेफरेंस के साथ में लॉजिकल स्टेप बाय स्टेप के साथ में रेपटेशंस क्या है ऑपोजिट आर्गुमेंट्स क्या है वह वगैरह सब लेकर के एक थीसिस प्रेजेंट करनी है। दैट विल टेक सम टाइम बट फ्रेमवर्क इज देयर।

प्रश्न: आप अपनी पूरी किताब के पूरा होने का इंतज़ार करने के बजाय, हमारी पत्रिकाओं में लेख लिखना शुरू कर सकते हैं।

किंतु मेरा ये सेंस ऑफ एकम्प्लिशमेंट का क्या है? ये वीडियो मैं अपलोड करता हूं ना YouTube पे तो एक सेंस ऑफ एकंप्लिशमेंट आ जाता है। फिर ये आर्टिकल लिखने का ऐसा कोई यह नहीं रहता। आप यदि देखेंगे मैं आजकल जो वीडियो एडिट करता हूं वो रेफरेंस दे के करता हूं। वह मैंने काफी समय से यह स्टार्ट ऑलरेडी कर दिया है। यहां पे मैं जो बोलता हूं फ्री फ्रॉम में बोलता हूं क्योंकि मैं रेफरेंस लेके बोलने को जाऊंगा तो आपको इंटरेस्ट नहीं आएगा। अपने आइडियाज को मैं वंडर होने देता हूं क्लास में। जहां पे भी जाए जो भी उसको बोलना है आई लेट इट वंडर। सो इसी वजह से क्या होता है? क्लास इंटरेस्टिंग होता है। किंतु यदि उसको आप प्रेजेंट करने को जाएंगे तो क्या होगा कि मैं बिकॉज़ कि एक्सटेंपोर बोल रहा हूं। फैक्ट्स शायद थोड़े इधर-उधर हो सकते हैं। इयर्स है, डेट्स है, पर्सन का नाम है, लोकेशन है, वो थोड़ा इधर-उधर हो सकता है। तब जब मैं वीडियो क्रिएट करूंगा, तो आप देखेंगे साइड पैनल पे पूरे रेफरेंस रहते हैं। सो ऑलरेडी दैट सेंस ऑफ एकम्प्लिशमेंट मेरा हो जा रहा है कि मैं जो फ्रेमवर्क डेवलप कर रहा हूं, आई एम वर्किंग इट आउट। आई एम डेवलपिंग इट एंड आई एम आल्सो प्रेजेंटिंग इट इन द फॉर्म ऑफ़ वीडियो। सो बिकॉज़ ऑफ़ दैट सेंस ऑफ़ कंप्लिशमेंट है। अह मैं आर्टिकल की ओर ज़्यादा नहीं जाता। मुझे करना क्या चाहिए? दो-तीन बार सोचा था इसका ट्रांसक्रिप्ट निकाल करके एआई में डाल दूं। कह दूं प्रॉपर आर्टिकल के रूप में कन्वर्ट कर दो। तो इंस्टेंटली आर्टिकल निकलना शुरू हो जाएंगे। सो दैट इज देयर। [हंसी] नथिंग नथिंग। वो ट्रांसक्रिप्ट एक्सट्रैक्ट करके एआई में डाल देना है। इंग्लिश में कन्वर्ट कर दो और सिस्टमेटिक कर दो। बस हो गया। ओम