Swami Vivekananda
और हर लेट मी शेर मी स्क्रीन लेट मी सिमी जी से डी गुड थॉट्स ऑफ डी यूनिवर्स पीपल सोमेटाइम्स थे थिंक था यू नो संस्कार एवरीवन थिंक अबाउट संस्कार व्हेन देवर इसे एन क्लास ऑफ से 60 स्टूडेंट और टीचर थिंग्स डेट व्हाट बिल हैपन तू दिस बॉयज आफ्टर 20 वर्ष 30 वर्ष आईएफ डी टीचर ट्रेस तो पाठ ऑफ एवरी से 60 स्टूडेंट ऑफिस क्लास ही बिल फाइंड डी सम बॉयज हैव विकम यू नो वेरी गुड से दे हैव गो वेरी गुड अकादमी क्वालिफिकेशन दे हैव गान वेरी फॉर अहेड इन एवरी फील्ड ऑफ डी लाइफ और देवर आर सम स्टूडेंट हूं हैव नो दान वेरी वेल और देवर आर सम स्टूडेंट होम क्रिमिनल सो आ व्हेन वे सी डी बैकग्राउंड ऑफ स्कूल और फैमिली वे माइ वंडर था फ्रॉम वेयर इस सीड्स ऑफ प्रोग्रेशन और इवोल्यूशन और दी देवोल्यूशन स्टार्टर्स इसे आईटी पॉसिबल डेट वे टेक दिस बेसिसकारस विथ उस फ्रॉम ओवर प्रीवियस लाइफ और गुड संस्करण अलसो यस वे नो डेट फ्रॉम प्रीवियस लाइफ वे करी फॉरवर्ड ओवर बैलेंस ऑफ लाइफ एक्टिविटी सो पर एग्जांपल हेड आयोडीन सो में बेड करमास इन दी प्रीवियस लाइफ और दिस लाइफ आई बिल हैव वेरी बेड संस्कार स और आईएफ आई हेड दान वेरी गुड क इन प्रीवियस लाइफ धी धी लाइव पर दिस बर्थ आई बिल हैव गुड सेल्फ डेट इस वन से डेट इस अलसो अंदर रीजन दे संस्कार डेट प्लस कम हर स्वामीजी से स्टेट जो डी गुड थॉट्स ऑफ डी यूनिवर्स वे आर जो हेयर तू डेट गुड थॉट्स ऑफ यूनिवर्स आईटी इस नोट लाइक डेट से देवर इस एन वन बाय और देवर इसे अंदर बाय और दिस बाय हज एक्सेस तू जो डी नॉलेज और दी अनॉर्दर बाय डीओईएसएन'टी हैव एक्सेस तू अन्य नॉलेज सो ही देश कमिट्स डी से ही कमिट्स बेड करमास आउट ऑफ इग्नरेंस आईटी इस नोट लाइक डेट अन्य वन देश कम बेड कर्म आउट ऑफ इग्नरेंस एवरीवन हज डेट अपॉर्चुनिटी तू लर्न हिमसेल्फ तू कल्टीवेट इंसेक्ट दिस इनफॉरमेशन और दी इतिहास आर डर ओपन तू एवरीवन एल्स इन दिस यूनिवर्स ओनली थिंक इसे वे हैव तू ओपन ओवर सेल्स तू आईटी आईएफ आई डू आईएफ आई क्लोज मी मन तेरे इस यू नो डेट दुर्योधन से जाना माइट तमाम नता में प्रति जन्मी में धर्म नटक्रेम निवृत्ति डेट मेंस इन महाभारत दुर्योधन से स्थित आइनोकोटिस धर्म बट आई कनॉट डू आईटी आई नो व्हाट इस अधर्म बट आई कनॉट गेट रीड ऑफ आईटी सो सम टाइम्स आईटी हैपेंस डेट अवर से डेट टेंडेंसी थी मार्क्स वन बट दिस इस जस्ट अंदर नाम ऑफ एन वीक माइट ऑफ एन वीक बिल आईटी तू कल्टीवेट विद स्ट्रांग बिल बट एस पर एस इनफॉरमेशन इत्सेल्फ इस कंजर्व्ड स फॉर स व्हाट इस थर्मो और व्हाट इसे अधर्म डेट इनफॉरमेशन इस कंसर्न आईटी इस ओपन बिफोर स एवरीवन बिफोर स व्हेन वे सीट यू वांट एन सिंपल स्मॉल बुक व्हेन वे रीड आईटी बिल टीचर्स यू नो डेट देवर इस आईटी ग्रेट एग्जांपल ऑफ दिस व्हाट इस है नाम दिस रालेगांव सिद्धि डी परसों हूं इसे डी डेवोरिटी ऑफ गांधीजी आई फ़ॉरगोट हज नाम देवर लीव्स इन महाराष्ट्र ही सुसाइडल थॉट्स और हज गोइंग है वास गोइंग तो कम सुसाइड और ऑन डी रेलवे स्टेशन ही फाउंड वन स्मॉल बुक विचार थॉट्स ऑफ पावर बाय स्वामी विवेकानंद व्हेन ही इस सो दत बुक हज स्टार्टड रीडिंग आईटी और फ्रॉम डेट वन सेल्फ ही इसे आइडिया ऑफ सुसाइड आईटी सेक्टर डेट वेट आवे ही स्टार्टड डूइंग सोशल सर्विस और हज विकम वेरी प्रॉमिनेंट परसों टुडे आई फ़ॉरगोटिज्म रालेगांव से दे सो एनीव्हेयर देवर आर सो में अदर एग्जांपल्स डेट मास्टर महाशय हिमसेल्फ बिल सो डेट हो ही वैसे गोइंग तू कम ऑलमोस्ट ही वज ड्रिवन तू डी आगे ऑफ ही वैसे ऑलमोस्ट गोइंग तू कम सुसाइड और सुद्दनली ही वेट तू मीत ठाकुर और ठाकुर कोल्ड हम दिस इस व्हाट हैपेंस सोमेटाइम्स विथ थिंग्स डेट ही आई एम गोइंग तू मेक ठाकुर आई एम गोइंग तू आश्रम आई एम गोइंग तू टेंपल बट आईटी इस गॉड हूं कल सर व्हेन गॉड रिलाइज थिस डेट यस वे आर पी फ्रॉम विदीन ओवर हार्ट दें गॉड कोर्सेज यू नो डेट वेरी नाइस स्टोरी ऑफ अवर गिरीश चंद्र घोष
स्वामी विवेकानन्द
गिरीश घोष ने क्या किया ठाकुर को एक बार ठाकुर वहां पे गए थिएटर में जो ठाकुर को बहुत घर पहले तो ठाकुर को कहा वो चैतन्य लीला एन की ऐसा कोई एक नाटक देखने के लिए गए थे कथामृत में बहुत सुंदर वर्णन है तो गिरीश जाकर के ठाकुर को कहता है ठाकुर को जाकर के बहुत बढ़िया सब बॉक्स में बिताया वहां को आम लोगों के साथ में नहीं वो बॉक्स एक अलग से सीट होता है और फिर जाकर के दो लोगों को पंखा डालने के लिए रख दिया फिर कुछ समय के बाद में गिरीश जाकर के ठाकुर को प्रणाम करके कहता है की आपको मेरे यहां पर मेरे घर पर जन्म लेना होगा मेरे लड़के के रूप में क्यों क्योंकि मैं तो इस जन्म में तो आपकी सेवा नहीं कर पाऊंगा किंतु आप मेरे मेरे लड़के हो करके जन्म लेंगे तो मैं आपकी पुरी सेवा करूंगा यह बात सुनकर के ठाकुर बोलते हैं अरे मैं तुम्हारा लड़का बनकर के क्यों जन्म लूंगा मुझे क्या ऐसा तुम्हारी सेवा का ऐसा है ऐसा ठाकुर जनों ने वह अर्थात मृत्यु तुम्हारा लड़का होकर के जन्म लूंगा यह बात सुनकर के गिरीश का गुस्सा ए गया और फिर उसने जो ठाकुर को गली देना शुरू किया है ये बात देख करके फिर उन साथ में लट्टू महाराष्ट्र है तो लातूर महाराज को बड़ा गुस्सा ए गया और लात मैराथन महाराष्ट्र एकदम पहलवान भी थे और हाथ में लाठी भी था तो लाठी लेकर खड़े हुए मारता हूं साला गिरीश को ऐसा बोल करके लाठी लेकर खड़े हो गए तो ये देख करके जो दूसरे भक्ति थे ठाकुर के साथ में मनमोहन मित्र की ऐसा कोई होगा मोस्ट प्रोबेबली तो उन्होंने कहा की अरे ठाकुर चुपचाप सुन रहे तुम क्यों गुस्सा करते हो चलिए ठाकुर को जल्दी जरूर होता की उसको सबक सिखाए या फिर उसको डिसिप्लिन करें तो तुमको सामने से ही बोलते हैं फिर तो हम सब लोग हैं तुम अकेले थोड़ी ना हो तो ऐसा जब कहा तो तुम्हारा शांत हो गया फिर सब भक्तों ने कहा चलो महाशय हम यहां से चले जाते हैं और गिरीश का कुछ ठीक नहीं है ठाकुर को दक्षिणेश्वर ले आए फिर वहां पर बैठे हैं जरूर सबको बोल रहा है जो भी भक्ति आता है की देखो गिरीश के वहां पर मैं गया था उसने मुझे इस तरह से गली दिया उसने इस तरह से मेरा अपमान किया तो ये बात सुनकर के सभी लोग बोलते हैं हां महाशय ठीक है अभी अब गिरीश के वहां फिर समझ जाएगा और वो तो मतलब वैसे ही वो ये है जुगाड़ी और शराबी ऐसा है उसका कोई संस्कार नहीं उसके वहां पे मत जाएगा अभी उसे समय रामचंद्र डेट ए गए तो ठाकुर ने इम्मीडिएटली राम राम बाबू को बोला की देखों रहा वो आम के शब्द बोले राम देखा तुमने गिरीश ने मुझे इस तरह से अपमान किया तो राम कहता है की देखिए जिसके पास जो चीज है वो वही चीज से आपकी पूजा करता है काली ये नेन भगवान कृष्णा को बोला था मैं आपको जहर क्यों दे रहा हूं क्योंकि आप ही ने मुझे जहर दिया है आपने मुझे जो दिया है इस चीज से मैं आपकी पूजा करूंगा तो आपने मुझे जहर दिया है तो मैं आपको जहर से ही पूजा करूंगा ऐसा कालिया नाग ने भगवान कृष्णा को बोला था तो आप ही ने तो गिरीश को इस तरह सीक्वेंस कर दिए हैं तो फिर वह आप ही के संस्कार आपको फिर इस चीज से आपकी पूजा कर रहा है तो यह बात सुनकर के ठाकुर बड़े खुश हो गए देखा सबको रामबाबू राम कितना अच्छा बात किया है फिर ठाकुर ने कहा की चलो जाकर के गिरीश को मिलता हूं तो वे लोग गाड़ी में वो घोड़ा गाड़ी बैठ करके गिरीश के घर गए देखा तो गिरीश खाना नहीं खाया था वैसे ही चुपचाप बैठा था और आंखों में से सतत शुरू धारा बा रही है और अपने को कोश रहा है की क्यों मैंने ठाकुर को इस तरह से कहा और जैसे ही उसने देखा की ठाकुर आए हैं सामने से किंतु उसके मां में ये था की मैं सामने से जाकर के ठाकुर के पास क्षमा नहीं चंगा क्यों यदि वो सही सही मैन ईश्वर के अवतार है सही-सही खुशना क्या होता है तो उनको समझ में आना चाहिए की मेरे हृदय में क्या है मैं क्यों जा कर के उनको सामने से बोलो की मेरी गलती हो गई मुझे क्षमा कीजिए मेरा तो यह इरादा नहीं था मैं तो एक्चुअली आपकी सेवा करना चाहता था किंतु आपने ऐसा बोल दिया तो मुझे गुस्सा ए गया क्यों जाकर के सामने से अपने से बोलो उनको यदि लगता है की हां वह मेरे हृदय में जो बात सही है उनको यदि दिखता है तो वह आकर के मेरे पास आए तो ठीक है तब मैं मानूंगा वह ठीक टेक परमहंस है तो देखा सही सही में ठाकुर आए उनको मिलने के लिए तो जाकर सीधा साष्टांग प्रणाम किया और ठाकुर को हाथ जोड़ के बोलना है जल्दी आप नहीं आते तो मैं विश्वास नहीं करता की आप अपने ईश्वर दर्शन हुआ है मैं भी मानता की जैसे वो हजार ढोंगी घूमते हैं गेरुआ पहन के अपने को क्या कोई सिद्ध महापुरुष बुलवाते हुए आप भी उन्हें के दाल में से एक है तो देखिए गिरीश को पता था यहां पे जो स्वामी जी कहना चाहते हैं की यह संसार में जितने भी अच्छे विचार हैं जितने भी सुविचार हैं हम उसके हम सभी के हम वायरस स्टार है यदि हम अपना मां को खुला रखें उसे अपना अपना जो यह है अपना यह इन्हेरिटेंस उसे ग्रहण करने के लिए जो खजाना है उसको ग्रहण करने के लिए यदि हम अपना मां रुला रखें तो यह पूरा जगत संसार में जितने भी अच्छे विचार हैं सब मेरे खुद के हैं उससे मैं अपना जीवन बहुत ही सुंदर रूप से सुगठित कर सकता हूं ऐसा स्वामी जी यहां पर कहते हैं और इसके बड़े में और भी एक सुंदर कहानी है शशि महाराज चेन्नई में थे तो उसे समय विशुद्ध नानजी महाराज को उनके सेवक के रूप में भेजो गया था वहां पे आश्रम में रहेंगे वो शशि महाराज को सब तरह से वो हेल्प करेंगे तो विशुद्ध रंजीत तो बाद में तो पता है की हमारे एक प्रेसिडेंट हुए थे रामकृष्ण संघ के किंतु उसे समय बिल्कुल नए नए जॉइन हुए थे तो बैलून मठ में आए बेलूर माथुर को चेन्नई भेजो गया की जो जाकर के शशि महाराज के साथ रहो तो अभी विशुद्ध आनंद जी जो है शशि महाराज के साथ र रहे हैं और शशि महाराज का ऐसा है की ठाकुर सेवा है या कोई भी कार्य जो मठ का दिया गया है उसको बिल्कुल बिना त्रुटि के करना है इतना सा भी यदि आपका ध्यान भांग हुआ थोड़ा सा भी हो गया थोड़ा सा भी आपसे गलती हो गया तो इतना जोर से आपसे आपको ऊपर चिल्लाएंगे इतनी गाला-गाली करेंगे की आप सहन नहीं कर पाएंगे और आजकल के लड़के को तो क्या है ना की उसे समय से ही ऐसा था की हमने ऐसा कोई बहुत ही कठिन हमने समझ से जो मिडिल क्लास है हमने फेस में ही किया है पहले ऐसा था की बार-बार युद्ध होते थे बार-बार रिवॉल्यूशन होते थे महामारी होती थी फिर घर का वो जो एटमॉस्फेयर वो भी बहुत खराब राहत था अभी आजकल ज्यादातर मिडिल क्लास फैमिली इसमें ऐसा नहीं होता चलिए होता भी है तो वो सब कॉन्शियस हो मतलब राहत है वो पर कॉन्शियस लेवल पे ज्यादा नहीं राहत स्ट्रगल है या फिर जो की है कठोर एक एटमॉस्फेयर है तो बेचारे विशुद्ध जी ऐसे ही संस्कृत फैमिली से आए थे ऐसा गली गलौज इस तरह से कठोर व्यवहार इस तरह से तो उन्होंने कभी देखा ही नहीं था और आजकल तो क्या होती है ना मां अपने बच्चे को बड़ा सवाल कर रखती है यदि पिताजी उसको जल्दी दो शब्द अभी बोल है तो मैं नाराज हो जाति है क्यों मेरे लड़के को ऐसा बोल रहे हो टीचर यदि बच्चे को यदि डिसिप्लिन करना चाहे तो वो फिर माताजी पिताजी ए करके कंप्लेन करते हैं की आपका आपने क्यों मेरे बच्चे को इस तरह से धमक दिया आजकल तो पता है ना बाकी सब स्टेटमेंट मुझे नहीं पता गुजरात में तो ऐसा है की जो है एक वन तू 12 आई थिंक वन तू नाइंथ स्टैंडर्ड तक एग्जामिनेशन ही चला गया है अर्थात आपको लड़कियों को किस तरह से वो पढ़ाई कर रहा है नहीं कर रहा है आखिर तक पता नहीं चलेगा और ऐसे लड़के को मैंने देखा है की आठवीं कक्षा में है और बेचारा अपना नाम नहीं लिख पता क्यों क्योंकि उसको कभी डिसिप्लिन नहीं किया गया है अच्छा पढ़ना है तो पढ़ो नहीं पढ़ना है तो मत पढ़ो ऐसा एक गवर्नमेंट का एटीट्यूड हो गया है खास करके गवर्नमेंट स्कूलों में तो ऐसे विशुद्ध आनंद जी बेचारे संस्कृत फैमिली से आए थे और यहां पर तो ऐसा है की छोटी-छोटी चीजों में ही एकदम जोर-जोर से गली गलौज चुन्नी पड़ती है तो बेचारे बड़े ही नाराज हो मतलब बड़े ही वो डिप्रैस हो गए थे उसे समय राजा महाराज स्वामी ब्रह्मानंद जी ठाकुर के स्वतंत्र स्वतंत्र वो खुद और रामकृष्ण संघ के प्रेसिडेंट तो वहां पर गए चेन्नई में यात्रा करने के लिए सेशन महाराज ने बहुत ही मेहनत करके राजा महाराज की यात्रा जो है साउथ इंडिया की वह पूरा आयोजन किया था उनको सब जगह पे वो जो है लेकर जाएंगे कन्याकुमारी वो मीनाक्षी मंदिर रामेश्वरम सब पूरे साउथ इंडिया के अच्छे-अच्छे तीर्थ क्षेत्र हैं और राजा महाराष्ट्र को दिखाएंगे तो ऐसा करके राजा महाराज को बुलाया है अभी राजा हमारा चेन्नई मठ में भी कुछ दिन रहे तो एक दिन विश्वविद्यालय उनको कंप्लेंट करते हैं की शशि महाराज मुझे इतनी गली देते हैं की अभी मेरे से सहन नहीं होता इतना कटु व्यवहार कठोर व्यवहार अब मेरे से सहन नहीं होता आप कुछ आप मुझे अपने साथ में बेलूर मठ ले जाइए तो यह बात सुनकर के राजा महाराज को बड़ा दुख हुआ कहां की अरे देखो तुमने शशि महाराज का यह कठोर व्यवहार ही सिर्फ मां में रखा तुमने क्या उनका प्रेम है उनका स्नेहा है यह सब कुछ तुम भूल गए विश्वविद्यालय सीमा राज कैंप की बात तो सही है की शशि महाराज का जो प्रेम भी है तो मतलब गली भी देते हैं तो एकदम जी जान प्राण भर के गली देते हैं तो प्रेम भी करेंगे आपको पूरा वो अपना हृदय खोल करके प्रेम करेंगे यदि उनको खाने में कुछ अच्छा ए गया तो जैसे ही वो खाया की अरे ये मिठाई है या आम है या ऐसा कोई अच्छा वो जो फल है वो बहुत अच्छा है टेस्ट में इमीडियाटली विशुद्ध जी को दे देंगे अच्छा देखो का करके कितना मीठा लगता है अपने से थोड़ा सा ही ग्रहण करेंगे तो खाने की कोई भी चीज अच्छी जैसे शशि महाराज को मिलेगी पहले तो वो थोड़ा ग्रहण करके बाकी सब में बांट देंगे तो यह प्रेम भी तो इतना है और दूसरी बात है की शशि महाराज तो ठाकुर के स्वयं संतान थे ठाकुर की अपने हाथों से सेवा की थी तो उनके साथ में रहकर के हमारे जो जितने भी वो जो कचरा है मां का वो सब तो भूल जान वाला है तो यह राजा महाराज की बात सुनकर के उनको लगा की नहीं नहीं सही बात है की मुझे का बैलेंस एसेसमेंट करना चाहिए दूसरी बात है की साधु बने के लिए आए हैं तो साधु बनकर के यदि हम अपने को डिसिप्लिन नहीं कर पाएंगे यदि हम अपने संस्कारों का सामना नहीं कर पाएंगे तो फिर मैं किस तरह से जो है आध्यात्मिक जीवन की जो सर्वोच्च सिद्धि है जैसे की निर्विकल्प समाधि या तो सभी कल का समाधि या तो ईश्वर दर्शन जिसको भी मैं मानता हूं वो मुझे कैसे प्राप्त होगा यह बात सुनकर के विश्वविद्यालय वहां पे र गए फिर दो-तीन दोनों के बाद एक बहुत सुंदर घटनाएं और सपश खेलने पेट पेट खेलने को बैठा है ताश खेलने जिसको हिंदी में कहते हैं तो अभी वो क्या था की अभी आजकल के जैसे एंटरटेनमेंट के तो कोई साधन नहीं थे तो एवं राजा महाराजा शशि महाराज सब लोग ऐसा वो कभी-कभी समय मिलने से थोड़ा बहुत ऐसा खेलने थे खासकर के राजा महाराजा का मां जो था वो इस तरह से वो ब्रह्मभाव में लेने राहत था की इस तरह से कोई सांसारिक एक्टिविटी थोड़ी बहुत नहीं रखेंगे अर्थात की जिसको ऐसी कोई एक्टिविटी जो की उनके मां को पकड़ करके इस धरातल पर जो आम कॉन्शसनेस लेवल है उसके ऊपर यदि नहीं रहेंगे तो सब समय वो ब्रह्म भाव में वो नीलीन हो जाएंगे जिससे की उनके जो आशीर्वाद है उनके साथ में रहने का जो ये है फल वो सब को नहीं मिलेगा ठाकुर का भी हमको पता है की बीच-बीच में समाधि में चले जाते थे और समाधि में ऐसे निकालने के लिए वापस आने के लिए ऐसी कोई मतलब ऐसी कोई एक सामान्य इच्छादर्शित करेंगे कोई जिसको कहते हैं इंद्रियों के रिलेटेड जो की उनको खींच करके ले आए तो बीच मैच में बोलते थे अमित को खाऊंगा या ऐसा कुछ जिससे की उनका मां खींचकर के इस पृथ्वी पर लोट आए तो ऐसे ही महापुरुष महाराज का ऐसा होता है की जो कोई महापुरुष जो होते हैं अपने मां को हमको क्या है की अपने मां को उर्दू ले जान के लिए सब यह जो है मतलब उन एसेंशियल जिसको बोलेंगे वह सब चीजों को छोड़ देना पड़ता है और इन लोगों का उल्टा है की अपने मां को गि करके पकड़ रखना के लिए जमीन के ऊपर में पृथ्वी के ऊपर में उनको यह सब कोई सांसारिक एक्टिविटी करनी पड़ती है तो राजा महाराज का की उनको ताश खेलने अच्छा लगता था तो ऐसा बीच-बीच में ताश खेलने थे तो दो टीम है एक और एक साइड में है एक राजा महाराजा और शायद हीरानंद जी या ऐसा कोई उनके सेवक होंगे और दूसरी साइड में है शशि महाराज और विश्वविद्यालय की जो आपको पेट दिए गए हैं तो पत्तों में से जिसका की अच्छा है वो जितना है तो विशुद्ध जी ने सोचा की बस इस बार तो मुझे राजा महाराज को हर नहीं है वो मतलब प्रेसिडेंट है तो उनको हारने में और मजा आएगा मतलब ऐसा होता है ना तो उन्होंने थान लिया तो जितने भी उन्होंने बहुत मेहनत करने लगे जितने के लिए कहां से अच्छा पत्ता मिलता है किस तरह से खेलेंगे वो प्लेन बनाएंगे शशि महाराज को कहेंगे महाराज जी आप ऐसा कीजिए दोस्तों हम राजा महाराज को आज बनाएंगे तो ये देख कर के राजा महाराज खुश होते थे की अच्छा तुम मुझे हरण चाहते हो देखा हूं तुम मुझे कैसे हर सकते हो तो देखें की बार-बार राजा महाराजा जीत जा रहा है और विशुद्ध जी और शशि महाराज का टीम है वो बार-बार हर रहा है ये देख कर के राजा महाराजा बड़े ही खुश हो रहे हैं देखा तुम मुझे हारने का पर्यटन कर रहे हो किंतु मुझे कभी नहीं हर पाओगे पत्तों के इस खेल में और विशुद्ध आनंद जी ने देखा की शशि महाराज क्या करते हैं अच्छे-अच्छे पेट जो है वो छोड़ देते हैं और जो की जी पेट का कोई ज्यादा वैल्यू नहीं है इससे पेट लेकर के वो खेलने हैं तो ये देख करके विशुद्ध जी महाराज को बार-बार कहते हैं की महाराज आप ऐसे ऐसा मत कीजिए आप ऐसा करते हैं तो हम हर जाते हैं थोड़ा सा अच्छे से के लिए और अच्छे से के लिए ये बात किंतु शशि महाराज जैसे पता नहीं वो नहीं विशुद्ध अनुज की बात सुन रहे हैं या तो उनको पता ही नहीं की अच्छे से किस तरह से खेलने है ताज वो जितने भी वो खेल वो पूरे जितने भी गेम्स वो सब वो हर गए राजा महाराज इतने खुश हो गए इतने खुश हो गए उनके चेहरे पे एकदम आरसीएम उसका तुमको हर दिया तुमको हर दिया और मतलब विशुद्ध आनंद जी इतना मेहनत करेंगे जितने के लिए और फिर मेहनत करने के बाद में भी हर जाएंगे तो ये देखकर के राजा महाराज को और ज्यादा मजा आता था अभी ये सब देख कर के जब गेम खत्म हुआ तब शशि महाराज ने वो विशुद्ध आनंद जी को पड़ा ये चलो अभी तुमको मैं बताता हूं की मैं क्यों हारता था ऐसा करके वो कहानी साइड पे ले गए एकांत में और फिर जो विशुद्ध आनंद जी को गली देना शुरू किया है की महामूर्ख तुमको समझ में नहीं आता है की हमको हर करके राजा महाराज के चेहरे पे किस तरह का एक मधुर दिव्या मुस्कान एक दिव्या हंसी जो उनके चेहरे पर प्रकट होता था मैं वो दिव्या मुस्कान को दिव्या हंसी को देखते देखते तो तुम ये तपेसर खिलवाड़ हुए थे जो मैंने पूरा रीति मत तो एक तुम जुगाड़ी हो गए हो क्या तुम यहां पे जुगाड़ खेल रहे थे क्या तुम जुगाड़ में जितना चाहते थे पैसा जितना चाहते थे तो हमारा तो कम है की कैसे भी तरस से राजा महाराज को खुश रखना नहीं की उनको इस तरह की गेम में हर ना ऐसा करके उन्होंने विश्व को जो झगड़ा है वो इतना गली दिया है विशुदानंद जी महाराज लिखने हैं की देखो मुझे तो पता नहीं था की ये जो महापुरुष जो होते हैं वो जो पेट भी खेलने हैं तो उसमें कितना गहन संदेश राहत है हमारे लिए तो देखिए यहां पे जो स्वामी जी कहते हैं की गुड थॉट्स ऑफ दिस यूनिवर्स इस फूल ऑफ गुड थॉट्स यदि हम अपने मां को यदि ओपन करें अपने हृदय को खोलें तो ये जितने भी अच्छे सुविचार है जितने भी अच्छे संस्कार है वो हमारे में प्रवेश होंगे और हमारे जीवन को धन्य बनाएंगे किंतु यही है की आप हमारे हृदय को खोलना होगा यदि मैं चाहता हूं की नहीं मैं कुछ नहीं करना चाहता मैं अपने से कोई मेहनत नहीं करूंगा भले ही चाहे तो फिर क्या होगा की जितने भी चाहे अच्छे संस्कार हो अच्छे विचार हो ऊपर ऊपर से चले जाएंगे उससे मुझे कोई लाभ नहीं होगा
श्रीरामकृष्ण कथामृत : कोलकाता में ईश्वरचंद्र विद्यासागर के साथ
अभी कथा अभी ठाकुर ने हमको एक के बाद एक पॉइंट के द्वारा बताते हैं की यह जो जगत संसार है वो असर है और ब्राह्मण जो है वही एक अंतिम सत्ता है वही एक अल्टीमेट रियली टी है और ब्राह्मण जो है समय कल और जो पोजीशन है कोसलिटी जो है वो सबके पर है समय कल और हमारा जो मां है मां बुद्धि चितंकर इससे पैर है तो बाहर का विश्व कहो की अंदर का विश्व कहो इन दोनों से पैर जो है ब्राह्मण का अस्तित्व है और हमारा ये जो इंद्रिय जनत इस जगत जो है उससे जैसे हम मुक्ति का लेंगे वैसे ही हम ब्राह्मण में स्थित हो जाएंगे तो पहले यह एक बात बता करके ठाकुर एक के बाद एक एग्जांपल देते हैं की ब्राह्मण को कैसे समझे और ब्रह्म साक्षात्कार उसके लिए साधना क्या है है तो ठाकुर कहते हैं की जो है की किताब में से यह विद्या पढ़ कर के आपको यह ब्राह्मण नहीं मिल सकता क्यों नहीं मिल सकता क्योंकि यहां पे वो जैसे एक साधु का उद्धरण है की साधु सब समय अपनी ये जो किताब है उसमें वो लिखना राहत था तो वो किसी ने पूछा की सतु बाबा जी आपकी किताब में क्या लिखा है तो किताब उन्होंने दिखा दिया देखा भीतर में सिर्फ राम नाम लिखा है अर्थात की आप ये जो की जितने भी हमारे शास्त्र है ये जितने भी हमारे ये जितने भी हमारे धर्म ग्रंथ हैं वेद वेदांत उपनिषद यदि हम उसको सिर्फ पढ़ने रहेंगे और अपना हृदय को नहीं खोलेंगे जैसे स्वामी जी ने कहा आईएफ वे ओपन ओवर हार्ड तू आईटी यदि हम अपने हृदय को खोल करके इस जो उपदेश है उसको हमारे हृदय में नहीं बिठाएंगे अर्थात की उसको हमारे जीवन व्यवहार में उसका जो है उसको प्रैक्टिकल करके नहीं दिखाएंगे तब तक जो है इस उपदेशों का हमको कोई लाभ नहीं है उसके बाद में ठाकुर कहते हैं की गीता क्या अर्थ है गीता को जो 10 बार बोलना है तो जो होता है वो गीता का अर्थ है तो गीता को 10 बार बोलने से क्या होगा गीता गीता अर्थात त्यागी त्यागी अर्थात त्यागी तो त्याग जो है रिनाउजन जो है वो गीता का वो जो है वो मध्यवर्ती विचार है गीता का कर टीचिंग जो है वो है त्याग अच्छा इसके बाद में अच्छा त्याग इसके बड़े में ठाकुर ने हरि महाराज को कहा था हरि महाराज यानी की टूरियां जी उनको थोड़ा सा शास्त्र उनको पढ़ने का थोड़ा बहुत उनका था मां तो जब ठाकुर के पास आते थे तो ठाकुर ने उनको एक बार बोला अरे ये तू वेदांत और उपनिषद सब पढ़ रहा है उसका लाभ क्या है तुम तुम मुझे बताओ की तुम्हारे वेदांत और उपनिषद में क्या लिखा है ब्रह्मा सत्य जगत मिथ्या यही तो लिखा है इसके अलावा तो और कुछ है नहीं तो तुम जगत को मिथ्या तुम अपने जीवन में साधना करके जगत को मिथ्या तुम प्रूफ करो अपनी इंद्रियों को इस जगत के भूख से संपूर्ण रूप से तुम विरोध करो और ब्रह्म साक्षात मैं आपके लिए अपने मां को एकाग्र करके यह जो ज्ञान योग की जो साधना है हम ब्राह्मणी उसको तुम अनुष्ठान करो तभी तो तुमको कुछ लाभ होगा तुम उपनिषद पढ़ने जाओगे पढ़ने जाओगे उसमें लिखा रहेगा ब्रह्मा सत्य जगत मिथ्या तो उसका तुमको क्या लाभ है ये बात सुनकर के हरि महाराज कहते की हां सही तो सही तो उपनिषद में तो यही लिखा है इसके अलावा और कुछ है नहीं तो उन्होंने अपने जितने भी शास्त्र थे सब जाकर के गंगा में उनका वह जो है उनको फेक दिया गंगा में उनका विसर्जन कर दिया और जो है साधना में ग गए और एक उदाहरण ठाकुर देते हैं की चैतन्य महाप्रभु जो है वो दक्षिण दक्षिण आत्या में एक बार भ्रमण कर रहे थे देखा की एक आदमी बैठ करके गीता का पाठ कर रहा है और पंडित जो है गीता का पाठ कर रहा है और एक सामान्य आदमी बैठ करके वो सुन रहा है और रो रहा है यह देखकर के चैतन्य महाप्रभु उसको पूछता है की अरे तुमको क्या ये जो संस्कृत में जो पार्ट हो रहा है या तो ये जो शास्त्र पार्ट जो हो रहा है गीता का यह तुमको समझ में ए रहा है तो ये देख कर के वो तो सामान्य आदमी था वो बोलना है नहीं प्रभु मैं तो देखा हूं मुझे नजरों से ये दिखाई देता है की कुरुक्षेत्र है और वहां पर वो कुरुक्षेत्र का जो मेटल ग्राउंड जो है युद्ध क्षेत्र वहां पर और कृष्णा को भगवान कृष्णा अर्जुन को भगवान कृष्णा स्वयं गीता का उपदेश दे रहे है ये मुझे अपनी नजरों से दिखता है इसलिए मैं रो रहा हूं तो देखिए की गीता है या जितने भी धर्म ग्रंथ है उसको ग्रामेटिकल स्टडी तो है वह अच्छी बात है किंतु इसके अलावा इसका जो सर जो है सर हम यदि नहीं ग्रहण करेंगे तो क्या है की हमको उसके पाठ का कोई लाभ विशेष नहीं होगा है इसके बाद में ठाकुर और एक बात कहते हैं की विज्ञानी क्यों भक्ति लिए रहते हैं इसका उत्तर यह है की मैं नहीं दूर होता मैं अर्थात की मेरा अहंकार विज्ञानी जो है वो क्यों भक्ति लेकर र गया अच्छा वैज्ञानिक कौन है सबसे पहले तो ये बात है की जो ज्ञानी कौन है ज्ञानी वो है जो की नेत्री नेत्री करके जगत संसार का त्याग करके साधना का अनुष्ठान करता है वो है ज्ञानी उसके बाद में ज्ञानी को ईश्वर दर्शन होता है या तो आत्मज्ञान की प्रताप होती है जब वो ईश्वर दर्शन होता है तब उसको यदि ईश्वर की इच्छा है यह तो फिर उनको कहेंगे की हां तुम फिर से यह शरीर धरण करके तुम जो है लोक कल्याण के कार्य करो तो वो जो वापस आता है समाधि से तो उसको विज्ञानी कहते हैं ज्ञानी अर्थात की जो सड़क है विज्ञानी अर्थात की जो सिद्ध है अभी सड़क जो सिद्ध होता है उसका तो अहंकार राहत ही नहीं है तो फिर वह भक्ति लेकर क्यों रहेगा हमको तो पता है की भक्ति मार्ग का अनुष्ठान करेगा जिसका हम है जिसका की अहंकार बना हुआ है की भक्ति मार्ग का अनुष्ठान करेगा अर्थात की अपने अहंकार को ईश्वर के श्री चरणों में वो अर्पित कर देगा किंतु जिसने सिद्धि प्राप्त कर ली है या तो फिर जिसका की संकल्प शक्ति जिसका की बिल पावर इतना स्ट्रांग है की उसको फिर वो जो चाहे अपनी इंद्रियों को इस तरह से संयम में रख सकता हूं तो वो कौन कर सकता है तो जिसने सिद्धि प्राप्त कर ली है वही तो अपनी इंद्रियों का कम कर सकता है किंतु फिर भी ठाकुर कहते हैं की जो विज्ञानी है वो कभी-कभी भक्ति लेकर राहत है तो वो जो भक्ति है ऐसा क्यों तो ठाकुर कहते हैं की अहंकार जो है मैं वह वैसे जाता नहीं समाधि अवस्था में चला जाता है किंतु फिर ए जाता है साधारण जीवन का हम नहीं जाता पीपल का पेड़ कैट डालो फिर भी उसके दूसरे दिन अंकुर निकाल आता है सब हंसने लगे ज्ञान लाभ के बाद में भी एन जान कहां से मैं फिर ए जाता है स्वप्न में तुमने वाघ देखा शेर देखा इसके बाद जगह तो भी तुम्हारी छाती धड़कती रहती है जीवन को जो दुख होता है वह अहंकार से ही होता है इसी से इसी से तो इतनी यात्रा मिलती है हाल में जो ता जाता है वर्षा और धूप सहन करनी पड़ती है और फिर कसाई लोग काटते हैं चमड़े से जूते बनते हैं ढोल बंता है तब खूब पिता है तब भी निस्तार नहीं अंत में हाथों से ताई बंटी है और उसे गुनिया अपने लगता है तब वह मैं नहीं कहता तब कहता है तुम तो हूं अर्थात की तुम तो जब तुम कहता है तब निस्तार होता है है ईश्वर में दास हूं तुम प्रभु हो मैं संतान हूं तुम मां हो अच्छा किंतु यह बात समझना है की जो सिद्ध है उसका अहंकार जो है वो सात्विक अहंकार है लोक कल्याण के लिए उसको रखा जाता है तो फिर भी इसे लोक कल्याण के लिए भी रखें हुए अहंकार को यदि है तो भक्ति लेकर रहना बहुत अच्छा है और साथ में ही पूरा ये बेल का उदाहरण दे दिया अभी आजकल क्या है की गौ हत्या वगैरा का जो मामला है वो इतना पॉलीटिकल हो गया है की इस तरह के उदाहरण वैसे पब्लिक में एन डिस्कस करें तो ही ठीक है यहां पे लिखा है की कसाई उसको ले जाता है फिर उसको कटता है फिर उसका चमड़े में से ढोल बनाता है तब भी निस्तार नहीं होता फिर वह जो यह जो होता है ना कॉटन जो कॉटन को यह करता है कटता है कॉटन अर्थात की हुई को जो कटता है उसके लिए एक बड़ा सा ये मशीन राहत उसमें पतला सा तार राहत है आवाज होगा जिसमें से वो जो हुई है उसको ये किया जाता है काटा जाता है नहीं की उसको जो भी उसको प्रोसेस किया जाता है तो आखिर में चमड़ा भी फैट गया ढोल बजाने के बाद में भी और फिर वो उसमें से वो जो तार बंता है तार जब बजेगा तू हूं तू हूं आवाज होगा तब कहानी जाकर के वो बेल का वो मुक्ति है एडरवाइज तब तक वो आखिर गाड़ी तक उसकी मुक्ति नहीं जब तक वो हम्मा हम्मा कहता है किंतु यह बात है की आजकल के जो इस तरह के उदाहरण देने से लोग बोलेंगे की गौ हत्या है वगेरा वो हमको नहीं करना चाहिए या तो फिर इसके कोई उदाहरण भी नहीं देने चाहिए पहले के जमाने में ऐसा होता था की बहुत साड़ी चीज जो हैं हम लोग के आम सेंस के रूप में ले लेते थे उसके पीछे की हमारी कोई खुद ऐसा कोई किसी को आहट करने की या किसी को मतलब यह मतलब सेंसेटिव होता है तो किसी को ये खाने की वो हमारी ये नहीं होती है इसके पीछे किंतु आजकल क्या है सब कुछ पॉलीटिकल हो गया आप किसी को सरदार जी है या तो फिर बनिया है यह सब नहीं का सकते वरना बोलेंगे की हमारी कास्ट को आपने जो है उसका अपमान किया है ऐसा बहुत आजकल ये सब सेंसेटिव चला है वो दिखा राहुल गांधी ने वो बोल दिया मोदी के बड़े में तो उसके ऊपर में कोर्ट कैसे हो गया तो मतलब आजकल पब्लिक में भी जो भी बोलना है तो हम लोगों को बड़ा संभल के बोलना पड़ता है स्वामी जी ने कहानी पे जाकर के उनके कंप्लीट शब्द में जो लोगों के बड़े में ये जो जुड़ाइएसएम है ना यहूदी धर्म तो यहूदियों के बड़े में ऐसा कुछ का दिया अभी क्या है की यहूदियों के बड़े में तो हमको पता है की जब सेकंड वर्ल्ड वार में हिटलर ने उनके ऊपर इतने समाचार की है की उसके बाद में यहूदियों के अगेंस्ट में या तो फिर उनको क्या एक एक करी कैचर होता है ना की हिटलर ने ऐसा क्यों किया था यहूदियों का मर्डर क्योंकि यहूदी थे की वो सब व्यापारी थे और जो बिजनेस कम्युनिटी पे उनका बहुत ही बड़ा मोनोपोली था तो अब जर्मनी में जब डिप्रेशन ए गया तो लोग सोचना शुरू कर दिए की यहूदी लोग जो है उन लोगों ने पैसा सब मोनोपोली करके रख दिया है और जर्मन लोगों का खून कस रहा है इसलिए जर्मन पूरे जितने भी लोग हैं वो गरीबी में है और यहूदी लोग जो है वो सब अपने मचा ले रहे हैं पैसे वाले हो रहे हैं तो ये देख करके हिटलर ने क्या किया लोगों का वो जो वोट अपने के लिए लोगों को अपने पक्ष में करने के लिए उसने बोला की मेरे पास दे सत्ता होगी तो जितने भी यहूदी है मैं सबका सहर कर दूंगा अब ये बोलने से तो अच्छा लगता है लोगों ने वोट दे दी है किंतु जब वो तीन करोड़ लोगों को जब हिटलर ने मार दिया तब हमको पूरे जगत संसार को पता चला की अरे इसने कितना भयानक कम कर दिया तो इसको तो यदि इस घटना के बाद में ऐसा हुआ की लोगों ने बोलना शुरू कर दिया खासकर के पश्चिम में की आपको किसी को भी यदि यहूदी के बड़े में इस तरह का करी कैचर नहीं करना है उनको ये नहीं करना की पैसे वाले हैं और लोगों का खून चूसते हैं लोगों को एक्सप्लोइट करते हैं ऐसा नहीं कहना है किंतु यह तो सेकंड वर्ल्ड वार में हुआ था ना 1930 के बाद की ये सब घटनाएं हैं स्वामी जी तो अमेरिका गए थे 191893 के बाद की वो बात है 1893 तू 1900 इतने समय तक वो सामने जी जो है दो बार फॉरेन की विजिट की है अभी एक बार वो बात बात में बोल देते हैं ज के बड़े में यहूदी के बड़े में की वो किस तरह से वे लोग व्यापारी बुद्धि उनकी रहती है तो अभी ये बात देख कर के हम लोग का जब कंप्लीट चल रहा था तो यह बात आई थी की स्वामी जी ने यहूदियों के बड़े में ऐसा कहा है व्यापारी बुद्धि अभी तो सेकंड वर्ल्ड वार के बाद में हम लोग उनको उनका व्यापारी बुद्धि इतना तेज है की लोगों का वह शोषण करते हैं यह बात हम कभी नहीं कहते क्योंकि 2 करोड़ यहूदियों का मर्डर करना कितनी भयानक घटना है आप यदि ऐसी बातें करना शुरू करेंगे तो बोलने से अच्छा लगता है किंतु कोई पगला आकर के सही-सही में लोगों का मर्डर कर दे तो क्या होगा इसलिए ऐसी बातें भी नहीं करनी है ऐसा वो बहुत आजकल विदेश में चला है तो हमारे एक महाराज ने कहा की चलो हम नीचे में ऐसा फुट नोट लिखने हैं की उसमें लिखेंगे की स्वामी जी को हिस्ट्री का इतना अंडरस्टैंडिंग नहीं था खासकर के वेस्टर्न हिस्ट्री का ये तो इसलिए उन्होंने ऐसी बात कहीं किंतु बिकॉज़ के उनको समझ में नहीं ए रहा था इसलिए ऐसा कहा तो मैंने कहा अरे भाई स्वामी जी तो वेस्टर्न हिस्ट्री जो है वो तो वेस्टर्न लोगों से ज्यादा अच्छे से जानता था वही है की जो सेकंड वर्ल्ड वार में हुआ था भविष्य में होने वाला था वो तो स्वामी जी को कैसे पता की ऐसा कोई पगला आएगा 2 करोड़ यहूदियों को मार देगा ऐसा कहना चाहिए की जब स्वामी जीवित थे तब ऐसी दुर्घटना नहीं हुई थी इसलिए यह समय सापेक्ष बात की गई है उसे समय सापेक्ष बात को कभी वर्तमान में ले आकर के उसके ऊपर में जजमेंट नहीं देना ऐसा करके फुट नोट लिखो नहीं समझ में ए रही है तो वैसे ही कभी यहां पे ऐसे कोई उदाहरण को हम लोग पढ़ देते हैं जैसे तो हमको ऐसा नहीं मानना ही की ये लोग जो है किसी का अपमान करते हैं किसी नाथ का या किसी जाट का वही है की उनके उसे समय की जो स्थिति लोग जी तरह से बातें करते थे महत्व रानी ऐसे सब शब्द जो उसे करते थे जो की आज हम नहीं करते तो वो उसे समय की स्थिति के अनुसार था आज की स्थिति अलग है तो शब्द भी हमको इस तरह से सिलेक्ट करना है आज अच्छा तो आज यही तक और फिर से मिलता है ओम शांति शांति