Transcript
ओम स्थापक य च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपिणी अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः आज सुबह को मैं कथामृत पढ़ रहा था तो अपना लिटरेचर तो पता है महासागर की तरह है कि कब उसमें इतना सब कुछ होता है कि याद भी नहीं रहेगा हमको कि कथामृत है इतना बड़ा लीला प्रसंग है कंप्लीट वर्क्स है तो कथामृत पढ़ रहा था तो एक इंसिडेंट ठाकुर जो कहते हैं जब मैंने पहली बार पढ़ा था और बाद में भी जब भी कथामृत पढ़ा मुझे वो इतना अच्छा लगा किंतु इतने कुछ समय से मैं उसको भूल ही गया था जब फिर से याद आ गया और याद मुझे बड़ा खुशी हुआ बड़ा आनंद हुआ ठाकुर एक दिन किसी को बोलते हैं कि देखो मुझे एक दिन कहीं पे जाना था तो रामलाल खड़ी के जिज्ञास करला राम लालर खड़ी अर्थात कि रामलाल की काकी वो कौन तो हमारी मां शारदा तो ठाकुर ने उनको पूछा कि मैं वहां पर जाऊं कि ना जाऊं तो उत्तर मिला वहां पर जाने की कोई जरूरत नहीं है तो ठाकुर ने कहा अच्छा ठीक है तो फिर मैं नहीं जाता हूं फिर वो अपने कमरे में गए और फिर कमरे में जाकर के थोड़ा सा सोचते हैं फिर उनको लगा अरे मैं सर्व त्यागी सन्यासी हूं मैंने पूरे जीवन में जितना भी माया है जितना भी भी अटैचमेंट है सब कुछ त्याग कर दिया है फिर भी मेरी स्त्री जो मुझे कहती है उसके अनुसार मुझे चलना पड़ता है तो दूसरे लोगों की संसारी लोगों की तो क्या अवस्था होगी वो जो कैप्टन कैप्टन के घर गए थे ठाकुर तो ठाकुर कहते हैं कि वो उसके वहां से और किसी के घर जाना था तो ठाकुर ने कैप्टन को बोला कि आ जो गाड़ी का भाड़ा दे दो तो कैप्टन फिर अपनी बीवी को जिज्ञास करने के लिए गया पूछने के लिए गया कि गाड़ी का भाड़ा दे कि ना दे तो उनकी बीवी थी जोर-जोर से वो हिंदी में पूछ रही है क्या हुआ क्या हुआ करके तो फिर थोड़ी देर के बाद में कैप्टन आ कर के ठाकुर को बोलता है कि अच्छा देखिए एक काम कीजिए आप जहां पे जा रहे हैं ना मोस्ट प्रोबेबली राम के घर ही जा रहे थे तो वो वहीं पे वही लोग गाड़ी का भाड़ा दे देंगे ऐसा करके तो ये ठाकुर कभी-कभी हंसी मजाक में भी इतना सुंदर बातें करते हैं वो हमको बड़ा आनंद आता है उससे इसके बाद में किंतु वो एक चीज कहते हैं कि सभी लोग अपनी बीवी के गुलाम है कोई ऐसा नहीं कहेगा कि हमार परिवार मंदो सभाई बोल हमार परिवार भालो अर्थात कि कोई ऐसा नहीं कहेगा कि मेरी पत्नी खराब है सभी लोग ऐसा ही कहेंगे मेरी पत्नी अच्छी है तो अभी ऐसा पढ़ कर के हमको लगेगा कि ठाकुर स्त्रियों के बारे में इस तरह से बात क्यों कह रहे हैं यह प्रश्न हो सकता है किंतु देखिए कि कथामृत मास्टर महाशय ने लिखा है इसलिए इसमें इस तरह की बातें हमको जानने को मिलती है यदि किसी स्त्री ने किसी स्त्री भक्त योगिन मां है या तो फिर फिर ये अपनी गोलाप मां है इन लोगों में से किसी ने ठाकुर ने उनको जो कहा वो यदि लिखा होता तो आई एम श्यर कि ठाकुर पुरुषों के बारे में ऐसी कोई बात करते होंगे क्योंकि ठाकुर तो कभी इस तरह किसी का पक्ष नहीं लेते थे पति या पत्नी का जो माया है उससे छूटना है बात यह नहीं है माया पति के रूप में आती है या पत्नी के रूप में या तो स्त्री के रूप में या तो पुरुष के रूप में हम जिस पोजीशन में है उस पोजीशन में माया किस रूप में आती है उस सा सापेक्ष रूप से इसको देखना है निरपेक्ष रूप से नहीं तो यदि ठाकुर स्त्रियों को यदि बोलते होंगे तो उनके पति के बारे में भी ऐसी ही बात करते होंगे आई एम श्यर ऑफ दैट तो हम ज्ञान योग कॉस्मो माइक्रो कजम का अभ्यास कर रहे थे हमने देखा कि किस तरह से स्वामी जी एक के बाद एक टेक्निकल आर्गुमेंट सब समाप्त करके अभी लास्ट फेज ऑफ हिज लेक्चर कॉस्मो माइक्रो कजम पे आ गए हैं और अभी दो पेजेस जो है दे आर प्योर इंस्पिरेशन ये पुनर्जन्म के बारे में उन्होंने जो कोई टेक्निकल डिस्कशन किया वो टेक्निकल डिस्कशन अभी उसकी जगह पे है अभी इंस्पिरेशनल लेवल पर एक प्रोफेट एक सेंट एक महापुरुष को हमको क्या कहना है पुनर्जन्म के बारे में वो अभी स्वामी जी हमको यहां पर बताएंगे एंड दिस इज रियली द एसेंस ऑफ बोथ ऑफ दिस लेक्चर अभी कल बात हो रही थी ना कि कल परसों दिन कि यह जो स्वामी जी टेक्निकल आर्गुमेंट करते हैं एक के बाद एक इसका क्या प्रयोजन है अल्टीमेटली स्वामी जी क्या प्रूव करना चाहते हैं तो मैं फिर इसके बारे में सोच रहा था कल शाम को और कल देरी तक मैं बैठा था अपनी ऑफिस में कॉस्मो मैक्रो कजम और कॉस्मो माइक्रो कजम यह जो दोनों लेक्चर है इसका सार समरी करके उसका एक पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन में बना रहा हूं जब भी यह लेक्चर कंप्लीट हो जाएगा माइक्रो कजम तब हम यह दोनों का यह जो समरी मैंने प्रिपेयर किया है पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन इसको हम मैं यहां पर डिस्प्ले करूंगा और एक ओवरऑल दोनों लेक्चर में स्वामी जी क्या कहना चाहते हैं ये जो जितनी भी टेक्निकल आर्गुमेंट दी गई है इन दोनों के माध्यम से स्वामी जी अल्टीमेटली क्या प्रूव करना चाहते हैं वो हम इस स्लाइड्स में देख लेंगे तो शायद एक दिन लगेगा मैक्रो कजम की स्लाइड्स एक्सप्लेन करने के लिए और एक दिन लगेगा माइक्रो कजम की स्लाइड्स एक्सप्लेन करने के लिए तो 2 दिन में यह पूरे हमारे में काउंट कर रहा था ऑलमोस्ट मोर देन 50 क्लासेस हमारे इन दोनों प्रवचन पे हुए हैं तो इन दोनों के जो यह प्रॉपर समरी है उसका जो आउटलाइन है इसका यह जो कंक्लूजन है वह हमको उसमें मिल जाएगा तो यह लेक्चर कंप्लीट हो जाएगा बाद में वह समरी हम देखेंगे तो स्वामी जी अभी जो कल जो कहते थे उसका एक जस्ट मैं पढ़ लेता हूं इट शांस इन इट्स ओन लाइट एंड इज फ्री नो मोर टू बी बोर्न नो मोर टू बी डाई नो मोर टू डाई यह जो लास्ट लाइन प कल जो पैराग्राफ हमने कवर किया उसकी है जब यह सूक्ष्म शरीर जन्म मृत्यु जरा व्याधि यह सत्कर्म दुष्कर्म जितने भी कर्म है जितनी भी इंप्रेशंस है जितने भी ट्रामा है उन सबसे पसार होते-होते एक के बाद एक देह धारण करते-करते आखिर में अपनी यात्रा के अंत तक पहुंचेगा जब ईश्वर की कृपा होगी या तो फिर उसकी साधना में सिद्धि प्राप्त होगी तब यह सूक्ष्म शरीर पिघल जाएगा गल जाएगा हवा में विलीन हो जाएगा और यह आत्मन का जो संयोग है देह के साथ में पंचमहाभूत के देह के साथ में वह विघटित हो जाएगा आत्मन हम ने अभी इस बात को कैसे बताए आत्मन तो एक ही है स्वामी जी का एक लेक्चर है इसी ज्ञानयोग सीरीज में ही सांख्य और वेदांत उसमें स्वामी जी यह जो फिलोसॉफिकल डेवलपमेंट के जो स्टेप्स वह हमारे सामने रखते हैं कि हां सबसे अपनी यह जो पूरी फिलोसॉफिकल जर्नी है उसमें कौन-कौन से च आर द स्ट्रोक ऑफ ब्रिलियंस स्ट्रोक ऑफ जीनियस कि हां हमने ऐसा कुछ डि कवर कर दिया ऐसा कुछ डेवलप कर दिया कि व्हिच ब्रिंग्स अनप्रेसिडेंटेड न्यू लाइट अपॉन अवर अंडरस्टैंडिंग ऑफ दिस एक्सटर्नल एंड इंटरनल कॉस्मो ऐसा तो क्या नया विचार हमारे ऋषि मुनियों को आया नया विचार तो नहीं यह कुदरत के जो नियम है वह तो हमेशा से ही है जैसे स्वामी जी कहते हैं कि क्या न्यूटन के आने से पहले लॉ ऑफ ग्रेविटेशन नहीं था था वही है कि न्यूटन ने उसको डिस्कवर किया मनुष्य की भाषा में उसको एक एक्सप्रेस किया मैथमेटिकल लैंग्वेज में उसको एक्सप्रेस किया तो वैसे ही यह सनातन जो अपना नियम है वह तो है ही है बस वही ऋषि मुनियों ने उसको डिस्कवर करके अपनी सनातन संस्कृत भाषा में उसको एक्सप्रेस किया तो यह जो किंतु ये जो जर्नी ऑफ डिस्कवरी है एक के बाद एक स्टेप उसमें सबसे पहला स्टेप क्या है जैसे मैक्रो कजम में ही स्वामी जी कहते हैं शुरुआत में ही ये इतना सुंदर विश्व है इतने सुंदर हिमालय है इतनी पावरफुल इतनी सुंदर गंगा नदी है मैग्नीफिसेंट रिवर गंगा एक के बाद एक अपनी यह जो इस मिट्टी में से जैसे कि सोना उपता है इतनी सुंदर यह मिट्टी इतना सुंदर यह देश तो यह प्राकृतिक सौंदर्य को देख कर के हमको यह प्रश्न होता है कि सौंदर्य का प्रयोजन क्या है इसका प्रारंभ क्या है अंत क्या है मनुष्य जीवन का क्या अर्थ है एक और दूसरा कि जब हम अपने भीतर में झा कहेंगे तो मेरा सही स्वरूप क्या है यह जब प्रश्न स्टार्ट होते हैं वहां से यह स्पिरिचुअल रिलीजियस फिलोसॉफिकल इंक्वायरी स्टार्ट होती है और सबसे पहला स्ट्रोक ऑफ जीनियस अपनी भारतीय परंपरा में क्या है तो यह विश्व में जितने भी घटक है उसको 24 तत्त्वों में बांट देना यह पंच महाभूत उसके बाद में यह पंच प्राण उसके बाद में पंच कर्मेंद्रिय उसके बाद में पंच ज्ञानेंद्रिय और मन बुद्धि चि और अहंकार यह 24 तत्त्वों में जगत को बांट दिया इसके बाद में पता चला कि यह जो 24 तत्व है ईवन मन बुद्धि चित्त और अहंकार भी यह सब जड़ प्रकृति के बने हुए हैं या तो जड़ प्रकृति के विकार मात्र है इसके परे एक पुरुष है एक चेतन सत्ता हमारे भीतर में विद्यमान है व्हिच इज बियोंड टाइम स्पेस एंड कोजन ऑफ प्रकृति तो यहां तक दिस वास द फर्स्ट स्ट्रोक ऑफ जीनियस कि हां मेरे भीतर में एक चेतन सत्ता है इसके बाद में जिस तरह से जैसे-जैसे समय बीतता गया यह मेरा मेरे भीतर में जो चेतन सत्ता है उसका क्या उसका नेचर है क्या स्वभाव है वह डिस्कवर करते करते एनालाइज करते करते पता चला कि सत चित आनंदमय यह आत्मन है एक के बाद एक नए शब्द भी इसके बारे में मिलते गए आत्मन भी कहा गया ब्रह्मण भी कहा गया तो इस शब्दों के के द्वारा इस आइडियाज के द्वारा हमको पता चला कि आत्मन जो है इज बियोंड स्पेस एंड टाइम इट इज बियोंड इवन इनफिनिटी इवन द आइडिया ऑफ इंफिनिटी इज विद इन द कन्फाइनमेंट सो आत्मन इज बियोंड इवन इंफिनिटी बियोंड स्पेस एेंट टाइम सो दिस देयर कैन बी ओनली वन आत्मन ये तो हो ही नहीं सकता कि सबके भीतर में अलग-अलग चेतन सत्ता विद्यमान है यदि एक ही अ समय और अवकाश से परे जद कोई सत्ता है तो वो एक ही हो सकती है अर्थात दिस इज द सेकंड स्ट्रोक ऑफ जीनियस सेकंड स्ट्रोक ऑफ ब्रिलियंस कि हां हम सबके भीतर में एक ही चेतन सत्ता है और जिसको कि हम आत्मन कहते हैं तो प्रश्न होगा कि यदि एक ही आत्मन है तो हम सबके भीतर में विभिन्न विभिन्न रूपों से किस तरह से प्रकाश करती प्रकाशमान होती है और इस आत्मन को प्राप्त करने का इस माया के प्रकृति के राज्य से छूटने का क्या तरीका है तो दैट वास द थर्ड स्ट्र जीनियस इट इज अद्वैत वेदांत डिफरेंट डिफरेंट स्कूल्स डेवलप होती गई द्वैत विशिष्ट द्वैत अचिंत्य भदा भेद व बहुत सारी स्कूल से वेदांत में बट इट ऑल कल्मिनेटेड इनटू दी अद्वैत वेदांत तो जो सबसे पहले जो फर्स्ट स्ट्रोक ऑफ जीनियस फर्स्ट पावरफुल डिस्कवरी जिसको कि हम गेम चेंजिंग कहते हैं आज की लैंग्वेज में तो वह था कि 24 तत्त्वों के परे एक चेतन सत्ता है एक सेकंड था कि चेतन सत्ता हम सबके भीतर में एक ही है विभिन्न नहीं हो सकती एंड थर्ड इज के चेतन सत्ता का क्या स्वरूप है कैसे माया से छुटकारा पाया जाए दिस आइडियाज आर कोडिफाइड इनटू अद्वैत वेदा तो यह तीन स्टेजेस से अपनी भारतीय परंपरा में भारतीय फिलोसोफी में जिसको कि ट्रेस करके हमको समझ में आता है कि किस तरह से अपना फिलोसॉफिकल डेवलपमेंट हुआ स्वामी जी को जब हम पढ़ते हैं तो हमको यह प्रश्न होता है बार-बार कि स्वामी जी टेक्निकल लैंग्वेज तो यूज नहीं करते बहुत सारे आइडियाज को वह कंफ्यूज कर देते हैं सोल शब्द बार-बार यूज करते हैं कहीं-कहीं सोल शब्द सूक्ष्म शरीर के बारे में यूज किया गया है कहीं-कहीं पर यही सोल शब्द आत्मन के बारे में उन्होंने प्रयोग किया है कहीं-कहीं उनको पढ़ कर के लगता है कि उनके आइडियाज एकदम द्वैत वेदांत के जैसे हैं कभी-कभी लगता है कि अद्वैत वेदांत जैसे हैं यह कंफ्यूजन शद स्वामी जी को पढ़ कर के हो सकता है स्वामी जी के मन में कोई कंफ्यूजन नहीं था प्रॉब्लम था कि उनको वेस्टर्न ऑडियंस के सामने यह सब आइडियाज रखने थे जिनको कि कोई टेक्निकल ऐसा कोई एक्सपर्टाइज्ड होता है कि नॉन टेक्निकल ऑडियंस के सामने स्वामी जी टेक्निकल इश्यूज टेक्निकल यह फिलोसोफी डिस्कस कर रहे हैं इसके लिए उन्होंने टेक्निकल बिल्कुल मिनिमम रखी है एक चीज और इंस्पिरेशन पर बहुत ज्यादा भार दिया है इस तरह से कि किस तरह से साधना की जाए साधना साधक और साध्य साध्य साधक साधना जैसे कि मैंने सोचा था कि इस अपना ये जो क्लास है इसकी एक ओवरऑल थीम क्या होनी चाहिए तो दिस इज अवर थीम कि साध्य अर्थात कि हम किस तरह से हमारा जीवन होना चाहिए साधना साधना किस तरह से होनी चाहिए और साधक अर्थात कि ईश्वर ईश्वर का स्वरूप क्या है ईश्वर के साथ में कैसे सहयोग करें तो यह साध्य साधक साधना के ऊपर में स्वामी जी बहुत भार देते हैं जैसे कि यह सब इंस्पिरेशनल पेसे से पता चलेगा किंतु एट द सेम टाइम टेक्निकल आर्गुमेंट जब स्वामी जी करते हैं तब बहुत सारे कंफ्यूजन खड़े हो सकते हैं खास कर के जो लोग टेक्निकल वेदांत और सांख्य पड़े हैं उनके मन में तो यह जो एक पैसेज है उसमें स्वामी जी जब कहेंगे कि सोल सोल विल शाइन फोर्थ इन इट्स ट्रू ग्लोरी द सोल विल नेवर टेक बर्थ अगेन इट विल नेवर बी एसोसिएटेड विद एनी फिजिकल बॉडी तो अद्वैत वेदांत तो कहता है कि फिजिकल बॉडी के साथ में एसोसिएशन वाली जो बात है वही तो सिर्फ एक माया है वही तो एक भ्रम है ऐसा तो नहीं है कि एक्चुअल फिजिकल बॉडी के साथ में संयोग होता है वो तो हमको दिखता है मात्र जैसे कि एक मरुभूमि है मरुभूमि में जा रहा हूं तो ये जैसे मिराज होता है ना मृग उसको हिंदी में क्या कहते हैं भूल गया इंग्लिश में कहते हैं मिराज अर्थात कि आंखों का भ्रम ये आंखों का भ्रम होने से हमको ऐसा दिखता है कि अरे यहां पर तो पानी है अरे वहां पर तो यह ना नारियल का वृक्ष है चलो दौड़ कर के वहां पर जाए जितनी भी प्यास लगी है वहां पर जाकर के हम मरीचिका मरीचिका हां मरीचिका किंतु बंगोली शब्द है वो हिंदी नहीं है हिंदी में वो मृग मृग से कुछ है तो एनीवे तो जब हम इसको देखेंगे पानी को देखेंगे वोह वृक्ष को देखेंगे दौड़ते दौड़ते जाएंगे पता चलेगा कि अरे यहां पर तो कुछ नहीं है तो ऐसा भ्रम मात्र है एक शारीरिक शरीर पंचम ये 24 तत्व जितने भी है ये 24 तत्व सिर्फ हमको ब्रह्मण के ही विभिन्न विभिन्न स्वरूप के रूप में दिखाई देते हैं जैसे ठाकुर ने कहा कि यह जो पूरा विश्व है मृगजल यस मृगजल यस वेरी गुड तो ये ठाकुर जैसे कहते हैं कि ये जो पूरा वो बेल वृक्ष का बेल फल का उदाहरण देकर के बेल फल का जो बाह्य आवरण है और भीतर में उसका जो उसका वो जो मसाला है जिसको कि खाया जाता है दोनों को मिलकर के हमको इस जगत को गिनना है यह जो ईश्वर ही इस जगत के रूप में परिणत हुए या तो फिर ईश्वर ही हमको जगत के रूप में दिखाई दे रहे हैं क्योंकि नजर के सामने माया का आवरण है तो जितनी भी आप जितना टेक्निकल डिस्कशन करते जाएंगे उतना ही कभी-कभी हमको लगेगा कि स्वामी जी एगजैक्टली कौन सी फिलोसोफी को फॉलो कर रहे हैं हमको पता है कि अपने ऑर्डर में किसी किसी किसी साधु सन्यासियों ने यह सब रिकंस इल करने का प्रयास किया है कि हां ठाकुर की यह फिलोसोफी है या तो फिर स्वामी जी की यह फिलोसोफी है मैं पर्सनली इस तरह का कोई प्रयास नहीं करता उसके दो रीजन है एक सबसे पहला रीजन तो यह है कि मेरा सांख्य और वेदांत में कोई बहुत डीप स्टडी नहीं है जिससे कि मैं क्वालिफाइड नहीं हूं इस तरह का डिस्कशन करने के लिए दूसरा कि मैंने खुद ने देखा है किसी किसी के साथ में मेरी बात होती है तो वो एक एग्जांपल देते हैं ठाकुर ने ऐसा कहा तो मैं ऐसा कहूंगा कि देखो ठाकुर ने या तो स्वामी जी ने या तो मां को अभी छोड़ देते हैं ठाकुर और स्वामी जी पर फोकस करते हैं फिलोसोफी के बारे में तो ठाकुर और स्वामी जी जो कुछ भी कहते हैं ना उसका एक काउंटर पॉइंट मिल जाएगा उसका एक अपोजिट एग्जांपल मिल जाएगा तो उसको तुम कैसे रिकन साइल करोगे राइट यदि हम लोग ठाकुर के ही ऐसा यदि ठाकुर कहेंगे कि नेती नेती करके हमको जगत का त्याग करना है फिर ब्रह्मज्ञान प्राप्त करना है फिर इति इती करके जगत में वापस आना है तो आप यदि कहेंगे कि यह विज्ञान वाद है क्यों क्योंकि विज्ञानी देखता है कि जिस चीज का जिस चीज के ये अपने ईश्वर बने हुए हैं इसी चीज का पूरा विश्व बना हुआ है तो यह हो गया विज्ञान वाद उसके सामने मां का काउंटर पॉइंट है मां अपने पत्र में लिखती है कि तुम्हारे गुरु अद्वैतवाद थे तुम भी अद्वैतवाद हो तो जद कोई ऐसा कहेगा उसका उत्तर में ऐसा कहेगा कि मां को फिलोसोफी नहीं आती थी मां तो कुछ भी बोल देगी नो नीड टू कंसीडर मदर्स ओपिनियन एज अ फिलोसॉफिकल पॉइंट मां का का ओपिनियन जो है उसको फिलोसॉफिकल पॉइंट में रूप में गिनने की जरूरत नहीं तो यह तो गलत हो गया ना आप जिस इंटेलेक्चुअल रिगर के साथ में एक फिलोसोफी प्रूव करने का प्रयास कर रहे है कथामृत में से एक पैसेज लेंगे स्वामी जी से मैं एक पैसेज लेंगे और फिर कहेंगे ये मेरा फिलोसोफी है किंतु बाकी के पैसेजेस को इग्नोर करेंगे तो तो वो तो हुआ नहीं अ रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर में बहुत ही डीप स्टडी चाहिए जितने भी काउंटर पॉइंट है जितने भी अपोजिट पॉइंट है सबको आपको रिकंस करना पड़ेगा एक एक चीज और दूसरा सांख्य वेदांत में जिसकी वेदांत की जितने भी स्कूल्स है उन सब में एक बड़ा ही रिगर स्टडी चाहिए तब कहीं जाकर के आप ऐसा कुछ प्रूव कर सकते हैं कि हां ठाकुर महा स्वामी जी इस पर्टिकुलर फिलोसोफी को फॉलो करते थे या तो फिर ठाकुर महास्वामी जी ने अपने से एक नई फिलोसोफी आविष्कार की है जो भी है मेरा कोई इस तरह का इस लेवल का मेरा स्टडी नहीं है इसलिए मैं क्या करता हूं कि जो भी इन लोगों ने कहा है जिस समय जो कुछ कहा है उस समय उसको इतना ही एनालाइज करता हूं और हमेशा कंट्रा इक्स खोजने का प्रयास करता हूं अच्छा यहां पर जद ऐसा कहा है तो इसके अपोजिट में कहां पर क्या कहा है य जितना कंट्रा कशंस हम बाहर लाएंगे उतना ही हमको यह डीपर और डीपर जाते जाएंगे उसका उत्तर प्राप्त करने के लिए क्योंकि क्या है ना कि पजल इज द मदर ऑफ अंडरस्टैंडिंग जैसे कि कहते हैं ना कि नेसेसिटी इज मदर ऑफ इन्वेंशन वैसे ही यहां पर पजल या तो फिर क्वेश्चन इज द मदर ऑफ अंडरस्टैंडिंग या तो फिर मदर ऑफ विजडम जब तक मेरे मन में प्रश्न नहीं खड़ा होगा तब तक मैं उसके ऊपर में सोचना नहीं शुरू करूंगा और जब तक मैं इसके बारे में सोचना नहीं शुरू करूंगा मैं उस टॉपिक को नहीं समझ पाऊंगा आज की जो एजुकेशन मेथड है उसमें क्या होता है सबको बोल दिया जाता है कि हां ये कैलकुलस है ये कैलकुलस स्टडी कर दो ये ट्रिगोनोमेट्री है ट्रिगोनोमेट्री स्टडी कर दो ये आपके इंग्लिश की एक ग्रामर है ग्रामर को स्टडी करो और यदि नहीं स्टडी कर पाते तो उसको मुख्यत कर दो अभी जिस चीज के बारे में मेरा कोई प्रश्न ही नहीं खड़ा हुआ उस चीज को मैं समझने का प्रयास करूंगा तो मेरा माइंड इस तरह का एक रेजिस्टेंस फेंके कि वो अल्टीमेटली मैं ब्लॉक कर दूंगा सभी चीजों को एक्चुअली यदि ट्रिगोनोमेट्री सीखना है तो सबसे पहले ऐसा समझा करके शुरू करो कि हां मेरे पास में एक समय था पुराना समय जबकि किसान लोगों खेती करते थे तो ये किसकी जमीन है वो किसकी जमीन है मेरी जमीन में कितना हिस्सा है वो सब मेजरमेंट करने के लिए जमीन का मेजर ट करने की जरूरत पड़ी और बड़ी-बड़ी जमीन होती है तो आप तो एक्चुअली मेजरमेंट से वो मेजर टेप से नहीं मेजर कर सकते इसलिए ट्र ट्रायंगुलेट करके उसको जमीन को मेजर करना है तो इस तरह से एक प्रश्न खड़ा हुआ इसके उत्तर में ट्रिगोनोमेट्री का जो मैथमेटिकल साइंस है वो डेवलप हुआ तो क्या नेसेसिटी थी वो पहले समझाओ और उसके बाद में समझाओ कि इसका यह उत्तर था रदर देन कि ये ट्रिगोनोमेट्री है इसको मुख स्त कर दो तो वैसे ही मेरा यह अप्रोच है रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर को स्टडी करने का कि पहले मैं देखता हूं कि क्या-क्या कंट्रा इक्स है कहां-कहां पे यह कंट्रा इक्स अपनी नजर के सामने आता है फिर मैं सोचता हूं कि कंट्रा इक्स को कैसे हमको रिजॉल्व कर सकते हैं जैसे कि यह जो पैसेज हमने पढ़ा कल वाला कल वाले पैसेज में ही हमने देखा था कि कहां पे स्वामी जी सूक्ष्म शरीर के बारे में बोल रहे हैं कहां पे वह आत्मन के बारे में बोल रहे हैं एक ही पैसेज में एक सेंटेंस में अभी लगता है कि सूक्ष्म शरीर के बारे में बोल रहे हैं और दूसरे सेंटेंस में लगता है कि अरे वो तो आत्मन के बारे में बोल रहा है कंट्रक्शन क्यों है ऐसा क्यों स्वामी जी एकदम स्पष्ट नहीं कर देते कि हां दिस इज दी वो सटल बॉडी एंड दिस इज द आत्मन या तो फिर दिस इज द ब्राह्मण ऐसा क्यों प्रत्येक पैसेज में प्रत्येक सेंटेंस में ऐसा स्पष्ट नहीं करते जाते क्यों हम भविष्य के जो उनके स्टूडेंट है भविष्य के जो रीडर्स है भविष्य के साधक है उनके लिए एक ऐसा पजल क्यों छोड़ कर के गए हैं तो मुझे लगता है कि स्वामी जी खुद भी शायद चाहते होंगे कि सब कुछ बहुत ज्यादा क्लियर कर देने से हम लोग अपना माइंड नहीं चलाएंगे हम लोग क्वेश्चन नहीं करेंगे जो पढ़ लिया है चुपचाप इसको स्वीकार कर लेंगे बेटर है कि थोड़ा बहुत पजल है यहां पे थोड़ा बहुत कंट्रक्शन है वो कंट्रक्शन पे चिंतन करते-करते अल्टीमेटली बिकॉज के फिलोसोफी टेक्स अस टुवर्ड्स द गॉड फिलोसोफी टेक्सस बियोंड फिलोसोफी जैसे कि वेदस एकमात्र शास्त्र है जिसमें कहा गया है कि वेद का अभ्यास करने से भी ईश्वर प्राप्ति नहीं होगी बाकी जितनी भी किताबें हैं वो कहेंगी कि ये जो किताब धार्मिक किताब है उसी का अभ्यास या तो इसी का चिंतन मनन जो भी है उन लोगों की लैंग्वेज जो भी यूज करते होंगे उसी से ईश्वर प्राप्ति होंगी हमारे एक मात्र शास्त्र ऐसा है कि यू विल हैव टू गो बियोंड वेदास इन ऑर्डर टू अंडरस्टैंड द वेद पुरुष वेद पुरुष कौन है उनकी प्राप्ति करने के लिए वेद के परे जाना होगा यह हमारे ही एकमात्र शास्त्र ऐसा कहता है तो मेरा भी स्वामी जी के बारे में यह सोचना है अल्टीमेटली वीी विल हैव टू गो बियोंड कंप्लीट वर्क्स ऑफ स्वामी विवेकानंद इन ऑर्डर टू अंडरस्टैंड ट्रू रियल विवेकानंद तो कंट्रक्शन से कांट्रडिक्शंस हमको हम सब समय पॉइंट आउट करने हैं नॉट नेसेसरी कि इसका उत्तर या सोल्यूशन मेरे पास में हो किंतु एटलीस्ट मुझे इतना तो समझ में आ रहा है कि हां यहां पर कुछ ना कुछ गड़बड़ है तो अभी हम आगे पढ़ते हैं वी विल नॉट गो नाउ इन टू द पार्टिकुलर्स ऑफ दिस स्वामी जी कहते हैं इससे आगे अभी इसकी बहुत ज्यादा डिटेल में नहीं जाएंगे पूरा तीन घंटा वो डिटेल दे दिया वो फिर बोलते हैं कि इससे ज्यादा डिटेल में नहीं जाएंगे और स्वामी जी ने एक बार अपने एक डिवटी को कहा था अमेरिका में कि वो किसी ने बोला अरे स्वामी जी आपका जो लेक्चर का समय है तो इतना ही है और आप तो बोलते ही जाते हैं बोलते ही जाते हैं तो स्वामी जी ने वो जो फ्रैंक रोडमल मोस्ट प्रोबेबली उसको बोला कि अच्छा एक काम करना जैसे ही प्रवचन का समय समाप्त हो गया तुम पीछे में खड़े रहना और वो घड़ी लेकर के उस समय तो वो चैन वाला घड़ी होता था ना वो पॉकेट में डालते थे तो घड़ी लेकर के ऐसा ऐसा करके घुमाना वो चैन के लगा हुआ तो मुझे पता चल जाएगा कि समय हो गया है तो वो फ्रैंक रोडमल कहता है अच्छा ठीक है स्वामी जी मैं इस तरह से घड़ी घुमाऊंगा और जैसे ही प्रवचन का जो ऑफिशियल टाइम दिया हुआ था वो समाप्त हो गया तो उसने फ्रैंक रोडमल ने वो गड़ी निकाली और ऐसा ऐसा करके घुमाई वो पेंडुलम की तरह तो स्वामी जी ने देखा कि अच्छा वो तो सही वो एक्चुअली स्टेज से बोलते हैं कि अच्छा वो समय समाप्त हो गया है ठीक है ठीक है अभी तक तो मैं पूर्व भूमिका बना रहा था अभी मैं एक्चुअल अपना जो विषय है आज प्रवचन का उसमें प्रवेश करता स्वामी जी इतना सब कुछ कह दिया फिर आखिर में बोलते हैं कि अभी और ज्यादा डिटेल में नहीं जाऊंगा और इतना डिटेल देने के बाद में बट आई विल ब्रिंग बिफोर यू वन मोर पॉइंट विद रिगार्ड टू दिस थरी ऑफ इंकार्नेट में नहीं जाते हैं फिर कहते हैं कि किंतु एक पॉइंट और एक यह जो पुनर्जन्म की हमारी थिरी है इसके बारे में और एक पॉइंट में आपकी नजरों के सामने लाता हूं क्या है इट इज द थिरी दैट एडवांस द फ्रीडम ऑफ द ह्यूमन सोल एक बहुत ही इंपॉर्टेंट पॉइंट है यह दोनों पेज भर कर के स्वामी जी ने इसी पॉइंट के बारे में डिस्कशन किया है क्या कहते हैं यह जो पुनर्जन्म वाद है पुनर्जन्म की थिरी है वह मनुष्य की दिव्य सत्ता को प्रतिपादित करता है जो फ्रीडम है यह अपनी आत्मन की आजादी है इसको प्रतिपादित करता है किस तरह से इट इज द वन थरी ट डज नॉट ले द ब्लेम ऑफ ऑल अवर वीकनेस अपॉन समबेसी स्वामी जी कहते हैं पुनर्जन्म वाद एक मात्र एक मात्र तो उन्होंने नहीं कहा उन्होंने कहा है एक ऐसा वाद है एक ऐसी थिरी है जो कि हमारी वीकनेस है हमारे शॉर्टकमिंग है हमारी कमजोरी है उसका दोष दूसरों के सल के ऊपर में नहीं डाल देती च इज अ कॉमन ह्यूमन फेलेज जो कि मनुष्य का जनरली स्वभाव होता है मेरे साथ में जो कुछ भी गलत हुआ है मेरे साथ में जो कुछ भी अन्याय हुआ है मेरे साथ मेरे भीतर में जो कोई भी वीकनेस है मैंने जो भी गलतियां की है उसके लिए दूसरे लोग जिम्मेदार है ऐसा बोलकर के दोष का टोपला हम दूसरों के सर पर डाल देते हैं यह ह्यूमन टेंडेंसी है कॉमन ह्यूमन नेचर है स्वामी जी कहते हैं कि पुनर्जन्म वाद इससे हमको बचाता है यह जो डिस्कवरी ऑफ इंडिया बोलकर के किताब जवाहरलाल नेहरू ने लिखी तो बहुत पहले आई मैं आई थिंक 12थ में था तब मैं उसको पढ़ रहा था तो उसमें जवाहरलाल नेहरू ने लिखा है कि सिविलाइजेशंस डाई और डिस्ट्रॉय नॉट बिकॉज ऑफ एक्सटर्नल अग्रेशन बट बिकॉज ऑफ द वीकनेसेस विदिन अर्थात कि यह जो मनुष्य सभ्यता है कोई भी सभ्यता है कोई भी देश है उसका विनाश कैसे होता है जो बाहर से जो आक्रमणकारी आकर के उसको खत्म कर देते हैं इससे नहीं उसके भीतर में जो कंट्रा इक्स होती है उसकी भीतर की जो वीकनेस होती है उसी से यह मनुष्य सभ्यता या तो फिर देश का विनाश होता है भारत की यह जो हजार साल की गुलामी इसके लिए जिम्मेदार कौन था यह बाहर से जो एक के बाद एक आक्रमण कारी आते गए वे लोग ना कि हम लोगों के भीतर में ही यह छुआछूत प्रथा थी हमने अपने समाज को टुकड़ों में बांट दिया था जिसका कि फायदा बाहर वालों ने आकर के ले लिया वो ज जिम्मेदार ज्यादा था तो यह जो आईडिया है कि हमारी वीकनेस के लिए कौन जिम्मेदार है तो हम खुद जिम्मेदार हैं पहले अपने को स्ट्रांग बनाए तो जगत पूरा हमको रिस्पेक्ट करेगा यहां पे भारत में 30 करोड़ लोग 40 करोड़ लोगों को दिन का खाना नहीं मिलता और बाहर में जाकर बोलेंगे हम लोग विश्व गुरु है तो ये गोरे लोग भी बड़े-बड़े हंसते हैं मन में मन में ये लोग कसे मुर हम लोग इसको थोड़ी सी प्रशंसा कर लेंगे तो हमारा सब काम कर लेंगे बस इनको ईगो को थोड़ा सेटिस्फाई रखना है तो इस तरह से अपने को वीक नहीं बना देना है हमारी खुद की वीकनेस देखने की क्षमता हमारे में होनी चाहिए यह जो दूसरे दूसरे जब कंट्री होते है ना डिक्टेटरशिप वहां पर क्या होता है जैसे नॉर्थ कोरिया का एक एग्जांपल है नॉर्थ कोरिया का जो एडमिनिस्ट्रेशन गवर्नेंस से इतना बेकार है इतना खत्म ही हो गया है जैसे कि पूरा वो जो रात का जो सैटेलाइट का नक्शा होता है ना नाइट लाइट्स जिसको कहते हैं अर्थात कि अब जैसे कि इंडिया में पूरे विश्व में देखिए अंधेरा हो जाएगा तो लोग अपने घर की बत्तियां फिर तो ये स्ट्रीट लाइट वगैरह जलाएंगे अभी ये जो उससे सैटेलाइट से जो पिक्चर लेते हैं वहां पे कहां पे सबसे ज्यादा लाइट है वो देख के पता चलता है कि कहां पे सबसे ज्यादा इंडस्ट्रियल इकोनॉमिकल डेवलपमेंट हुआ है तो ये जो रात का जो सैटेलाइट पिक्चर है उसमें देखेंगे कि ये जो वेस्टर्न यूरोप है फिर ये यहां पे सऊदी अरेबिया दुबई वगैरह है यह अमेरिका है अमेरिका का खासकर ईस्टर्न एंड वेस्टर्न कोस्ट इंडिया का नॉर्थ इंडिया दिल्ली के आसपास का रीजन है एकदम ब्रिलियंट लाइट में दिखाई देगा और जहां-जहां पे जैसे कि अपना यह जो सेंट्रल इंडिया जहां पे पहाड़ वगैरह ज्यादा है या तो फिर राजस्थान का डेजर्ट या तो फिर यह नॉर्थ अफ्रीका का सहारा डेजर्ट जहां पे कि ह्यूमन पॉपुलेशन और इकोनॉमिक इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कम है पूरा अंधेरा जैसा दिखाई देगा तो यह साउथ कोरिया और नॉर्थ कोरिया को सैटेलाइट पिक्चर रात को देखेंगे ना एकदम आपका आंखें खुल जाएंगी कि पॉलिटिक्स प्रॉपर गवर्नेंस किसको कहते हैं आपको पता होगा कि न कोरिया के दो टुकड़े हो गए हैं साउथ कोरिया कैपिट इस्ट है और नॉर्थ कोरिया कम्युनिस्ट है तो वहां पर सीधी एक लाइन दौरी गई है उस लाइन के नीचे वाला साउथ कोरिया और ऊपर वाला नॉर्थ कोरिया जो साउथ कोरिया जो है ना पूरा लाइट से झगमग है सेटेलाइट पिक्चर में रात को और नॉर्थ कोरिया को देखेंगे पूरा अंधेरे में डूबा हुआ है यह जो 50 साल के जो कम्युनिस्ट डेवलपमेंट हुआ और कैपिटिस डेवलपमेंट एकदम स्पष्ट एक ही सैटेलाइट पिक्चर से हमको देखने को मिल जाता है माने आप कम्युनिज्म के बारे में कैपिट इज्म के बारे में हजार थिरी पढ़े और किंतु वो कहते हैं ना कि वन पिक्चर इज वर्थ थाउ वर्ड्स एक पिक्चर हजार शब्दों के बराबर है वैसे ही यह नॉर्थ कोरिया साउथ कोरिया का सैटेलाइट पिक्चर रात का नाइट लाइट पिक्चर देख लीजिए पता चल जाएगा साउथ कोरिया पूरा रोशनी से झगमग रहा है और नॉर्थ कोरिया पूरा अंधेरे में डूबा हुआ है तो यह नॉर्थ कोरिया के जो रूलर है वह क्या कहते हैं गरीबी इतनी है बेकारी इतनी है वहां पे परेशानी इतनी है वे लोग कहेंगे कि गरीब लोग गवर्नमेंट पे आक्रमण ना करें इसके लिए कहेंगे कि देखो यह अमेरिका अपना दुश्मन है यह कैपिटिस अपने दुश्मन है साउथ कोरिया अपना दुश्मन है हमको मिलिट्री स्ट्रांग करो और इनके पर अटैक करो तो हमारे प्रॉब्लम सॉल्व हो जाएंगे अरे भाई ये जो बैड गवर्नेंस है व्हिच इज द रूट कॉज ऑफ योर पॉवर्टी तो दूसरे देशों को क्यों भाई तुम यहां पे जाकर के दोष देते हो तो ये एक कॉमन ह्यूमन टेंडेंसी है जितने भी राजनेता है वे लोग हमेशा इस बात का फायदा उठा लेंगे इन लोगों को एक दुश्मन दे दो पाकिस्तान जिंदा है उसका एक ही कारण है कि इंडिया रूपी दुश्मन इनके सामने है यदि इंडिया रूपी दुश्मन इनके सामने से चला जाए तो पाकिस्तान उसके जितने भी ये स्टेट है जितने भी रीजन है उस उतने टुकड़े हो जाएंगे उनको पकड़ कर के एक ही चीज बचा के रखा है कि भारत के साथ में दुश्मनी तो यह एक बहुत बड़ा दुश्मन सामने रख दो तो और लोगों को यूनाइट करो किंतु इस तरह की यूनिटी का फायदा क्या है यहां पे एक्सप्लोइटेशन है यह बढ़ता ही जाएगा बढ़ता ही जाएगा और जो लोग राज करते हैं वो लोगों का शोषण खून चूसना चालू ही रखेंगे इसीलिए यह जो प्रॉपर सिविला आज मैं अमेरिका के व न्यूज़ वगैरह में थोड़ा सा पढ़ता रहता हूं तो अमेरिका के कैंपस में यह जो वर के विरुद्ध में युद्ध के विरुद्ध में जो डेमोंस्ट्रेट चल रहा है उसको मैं देख रहा था कि किस तरह से स्टूडेंट डिमांड करते हैं अपनी गवर्नमेंट से कि यह जो युद्ध रुकवाने का कार्य चालू करें तो कभी-कभी हम स्टूडेंट्स को देख कर के गुस्सा भी आता है अरे इन लोगों को जिओ पॉलिटिक्स समझ में नहीं आता पता नहीं कौन विलन है कौन हीरो है यहां पे तो जो भी है हुई युद्ध क्यों हुआ किस चीज के लिए हो रहा है उस चीज को एक बार थोड़ा सा बा साइड पे रख दे किंतु यह स्टूडेंट अपनी खुद की गवर्नमेंट के अगेंस्ट में प्रोटेस्ट कर रहे हैं दैट शोज कि डेमोक्रेसी कितना स्ट्रांग है कितने देशों में ऐसा होता है कि जहां पर स्टूडेंट लोगों में इतना साहस हो कि गवर्नमेंट के अगेंस्ट में वोह आंदोलन करें गुजरात में ऐसा वो नव निर्माण का आंदोलन हुआ था और कितनी ही गवर्नमेंट इसमें हिल गई थी तो यह जो प्रोटेस्ट करना यह डेमोक्रेसी का एक फंडामेंटल राइट है जब तक यह आप अपनी गवर्नमेंट को क्वेश्चन करना नहीं सीखेंगे तब तक यह प्रॉपर गवर्नेंस होगा ही नहीं गवर्नमेंट आपको बोलेगी यह दुश्मन है इसके पीछे जाओ और बाकी सब भूल जाओ हम जितना भी गड़बड़ करते हैं करते रहने दो तो यह जो स्वामी जी कहते हैं कि यह जो कॉमन ह्यूमन टेंडेंसी है ना कि अपनी दुरावस्था के लिए दूसरों को दोष देना इसका बहुत ही डेंजरस दूसरे दूसरे तरह के परिणाम आते हैं हमको लगेगा किरे दोष दे दिया तो दे दिया तो उससे क्या हो गया किंतु परिणाम उसके बड़े ही डेंजरस होते हैं लॉन्ग टर्म परिणाम किंतु एक पुनर्जन्म वाद है वह कहता है क्या कहता है कि हमारी गलतियां और हमने जो सही डिसीजन लिए हमारे ही सर के ऊपर में है आज मैं जो हूं वह मैंने पिछले जन्म में या तो उसके पिछले जन्म में जो चॉइस जो ऑप्शंस मैंने सिलेक्ट किए थे उसी का परिणाम है यदि पिछले जन्म में मैंने बुरे बुरे गलत गलत ऑप्शन सिलेक्ट किए थे तो आज इस जन्म में मेरे साथ में बुरा हो रहा है इसलिए नहीं कि कोई देवता है ना कि कोई उप देवता ना कि कोई पिशाच ना कि कोई चंड मेरे सर पर चढ़ गया है और मुझे कोई बुरा कार्य करने के लिए प्रेरित कर रहा है मैं क्यों कोई भूत पिशाच पलित को अपना दोष दूं किसी देवता को दोष दूं ना कि किसी ग्रह को दोष दूं कि मेरे ग्रह अच्छे नहीं चल रहे आजकल तो यह सब कितना चलता है यह ग्रह का कुछ विधि विधान कर दीजिए मैं दक्षिणेश्वर गया था कलकत्ता में तो वहां दक्षिणेश्वर के सामने बड़े-बड़े होर्डिंग लगे हुए हैं कि वो काला जादू और ब्लैक मैजिक और तंत्र साधना एक यहां प जाकर के इस तांत्रिक को इतना रुपया दो तो आपका जो भी समस्या है वह दूर कर देगा तो होगा इसमें इसके भीतर में भी साइंस है ऐसा नहीं है कि ग्रह वगैरह इसके पीछे भी तो साइंस है किंतु देखिए कि यह सब चीजों को फॉलो करते करते ही आखिर में यह हजार साल की गुलामी अपने सर पे आके खड़ी रह गई तो ये स्वामी जी जो कहते हैं ना कि मैसेज ऑफ मैनली स यह मर्द होने का मैसेज ये पुरुषार्थ का जो यह संदेश है यह स्वामी जी दे रहे हैं कि वो है ग्रह होगा सही होगा गलत होगा उसके बारे में हमको कुछ कहना नहीं है भूत पिशाच भी होंगे इसके बारे में भी हमको कुछ नहीं कहना ठाकुर मां स्वामी जी के जीवन में ही इसके बहुत सारे उदाहरण है स्वामी जी ने खुद ने अपने शब्दों से वर्णन किया है कि उन्होंने क्या-क्या सब देवी जादुई चमत्कार देखे हैं तो यह सब चीजें है किंतु यह सब चीजों को स्वीकार करने से हम लोग वीक बन जाते हैं हम लोग कमजोर बन जाते हैं हमारा विल पावर खत्म हो जाता है बेटर टू बी मेन बेटर टू बी मेनली मर्द होना सीखो और मर्द होना अर्थात पुरुष होने के इससे नहीं किंतु भीतर से अपने विल पावर को स्ट्रांग बनाओ दैट इज व्ट स्वामी जी सेज मैन इन जनरल ले ऑल द ब्लेम ऑफ लाइफ ऑन देयर फेलो मैन मनुष्य जनरली अपने साथ में जो कोई भी समस्या खड़ी होती है उस समस्या में दोष का टोपला अपने साथी मनुष्य है उसके सर पर डाल देते हैं और फेलिंग ट ऑन गॉड और यदि सामने वाला जद उसके ऊपर सर के ऊपर में दोष का टोपला ढालने को जाएंगे और एक लात वो सामने से मार देगा ऐसा जद हमको वई लगता है कि अरे उसको कुछ बोलेंगे तो वो सामने आएगा झगड़ा करने के लिए तो भगवान के ऊपर में डाल दो और दे कंजर अप ए घोस्ट एंड से इट इज फेट और यदि भगवान को भी दोष देने की हमको डर लगता है कि अरे भगवान राम को कुछ बोल दिया और भगवान राम अपना वो जो वो तीर उठा कर के छोड़ेंगे एक राम बा और राम बाण आके लगेगा तो बेटर है कि किसी भूत को खड़ा कर दो या तो फिर नसीब को दोष दे दो यह मनुष्य का स्वभाव है वेयर इज फेट एंड हु इज फेट स्वामी जी कहते हैं नसीब क्या है कौन है यह नसीब वी रीप व्ट वी सो जो हम मिट्टी में डालते हैं उसी को वही मिट्टी में से उपज होता है और इसी को हम खाते हैं वी आर द मेकर ऑफ अवर ओन फेट हम ही है अपने नसीब के भाग्य विधाता हम ही है हमारे भाग्य विधाता नन एल्स हैज द ब्लेम नन हैज द प्रेज किसी को दोष देने का प्रयोजन नहीं किसी का किसी की प्रशंसा करने की आवश्यकता नहीं मेरे जीवन में प्रत्येक स्टेप प मैंने जो ऑप्शन सिलेक्ट किए हैं मैंने जो भी चॉइस मैंने की है उसी चॉइस का परिणाम उसी ऑप्शन का परिणाम मैं आज यहां पे हूं इसके लिए दूसरों को दोष देना या तो फिर दूसरों को बधाई देना हां मैं साधु हुआ इसके लिए वह स्वामी जी थे जिनके पास में मैं जाता था और उन्होंने मुझे इंस्पायर किया ऐसा एक ग्रेटफुल स होना अच्छा है देखिए स्वामी जी ऐसा नहीं कहते कि अन ग्रेटफुल हो दूसरों को दूसरों को बधाई नहीं देना अर्थात ये नहीं कि अन ग्रेटफुल हो जाना स्वार्थी हो जाना हां उसकी प्रश उसको सम्मान दो मुझे यहां पर आते आने के लिए जिन जिन सीनियर साधुओं ने गाइड किया है उनके प्रति हमेशा मेरे मन में ग्रेटू है किंतु ये एक बात याद रखना है यदि मेरे पूर्व जन्म के संस्कार ही ऐसे नहीं होते जो कि मुझे सन्यास के रास्ते पर ले आते हैं तो वे लोग जितने ही चाहे इंस्पिरेशन दे देते हैं कि साधु नहीं बना पाएंगे किसी को जबरदस्ती यहां पर मैं कभी-कभी महारे टेरेस गार्डन है तो टेरेस गार्डन में खड़े रह कर के मैं पौधों को पानी देता हूं तो बाहर में ही मेन रास्ता है मेन रास्ते पर देखेंगे कि प्रत्येक एक-एक मिनट पर 100 10000 लोग जाते होंगे एवरी मिनट तो ऐसे तो राजकोट में कितने ही लोग हैं कितने लोग रहते हैं कितने लोग उठते हैं अपने कार्य के लिए चले जाते हैं शाम को घर आते हैं कौन साधु बनता है साधु तो वही बनेगा जिसका वोह टेंडेंसी है कौन श्री राम कृष्ण के पास में आता है कौन श्री राम कृष्ण देव का भक्त होता हैम शाम को संध्या आरती के समय अपने मंदिर में जाकर देखिए कि अपने ठाकुर का खंडन चल रहा है और पूरा होल भरती भक्त लोग बैठे हुए हैं ये भक्त लोग कितने फॉर्चूनेटली को अटेंड करने का सद नसीब कितने लोगों को मिलता है वो बिल्कुल फॉर्चूनेटली आऊंगा चलो भाई हमारी आरती अटेंड करो तुम्हारा भाग्य खुल जाएगा तुम तुम्हारा सब कुछ ठीक ठाक हो जाएगा ठाकुर का आशीर्वाद प्राप्त होगा ऐसा करके कोई नहीं आएगा जिसके भीतर में वह सत संस्कार है ठाकुर के पास में आने के लिए उन्हीं को ठाकुर खींच के ले आ पाएंगे तो ग्रेटफुल होना है जिन्होंने हमको मार्गदर्शन दिया अन ग्रेटफुल नहीं रहना है किंतु साथ-साथ में यह भी समझना है कि हमारे अच्छे संस्कार की वजह से ही हम यहां पर आए हैं और कोई हमको चाह करके भी जोर जबरदस्ती करके कोई नहीं ले पाएगा द विंड इज ग पवन बह रहा है दोज वेसल्स हुज सेल्स आर अन फड कैच इट जो जहाज जिनके सर्ड खुले हुए हैं सेल वह इस पवन को कैच करेंगे इस सर्ड में पवन भराएगा और वह जहाज चलेंगे एंड गो फॉरवर्ड ऑन देर ओन वे यह जहाज अपने डेस्टिनेशन की ओर चलेंगे बट दोज च हैव दे सेल्स अन फड नॉट केच द विंड किंतु वह जहाज वो नौका जिसका सर्ड खुला हुआ नहीं है उसको बांध करके रख दिया है वह स्टोरेज में वह जहाज ईश्वर के यह कृपा पवन से चलने वाले नहीं है यह ठाकुर का फेमस उदाहरण है जो कि स्वामी जी यहां पर लेते हैं इ ट द फल्ट ऑफ द विंड यह क्या पवन का ये ये दोष है कि एक जहाज चल रहा है दूसरा नहीं चल रहा नहीं पवन तो सबके लिए बह रहा है यदि आपने अपना सड़ खोल दिया आपका सेल खोल दिया तो पवन उसमें जाएगा और आपको आगे ले जाएगा यदि सेल बंद रखेंगे तो पवन आपको कुछ नहीं कर पाएगा इज इट द फॉल्ट ऑफ द मर्सी फुल फादर हुज विंड ऑफ मर्सी इज ब्लोइंग विदाउट सीजिंग डे एंड नाइट हुज मर्सी नोज नो डिके इज इट हिज फॉल्ट दैट सम ऑफ अस आर हैप्पी एंड सम अनहैप्पी यह क्या वह परम दयामय परम कृपालु ईश्वरीय फादर हेवनली फादर ये उनका दोष है क्या कि जो कि उनका यह जो कृपा रूपी जो पवन बह रहा है उसमें कुछ-कुछ लोग तैर जाएंगे कुछ-कुछ लोग नहीं तैरें जो कि पवन दिन और रात बह रहा है हुज मर्सी नोज नो डिके उनकी दया अमर है उनकी दया में कभी भी को कोई भी कम कुछ भी कम नहीं होता इज इट हिज फॉल्ट क्या उनका दोष है कि हम में से कोई खुश है और कोई नाखुश कोई नाराज है और कोई बड़ा ही सबके साथ में मित्रता से वो वर्तन कर रहा है किसी के मन में बड़ा ही संताप है डिप्रेशन है ट्रॉमा है और किसी के साथ में किसी का मन हमेशा आनंद से भरा है क्या ईश्वर का दोष है ना कि वो हमारी ही चॉइस का ये गलती है यहां पे एक प्रश्न हो सकता है मान लीजिए कि हम रास्ते से जा चलिए कि एक तो यह हो गया कि मेरे खुद की चॉइस का क्या कुछ परिणाम है कि मैंने सिलेक्ट किया कि ऐसा कोई गलत कार्य करने का उसका कुछ ट्रॉमा हो सकता है और एक तो ट्रॉमा हो सकता है मेरे रास्ते में जा रहा हूं सडन एक्सीडेंट हो गया इसकी चीज के ऊपर में तो मेरा कोई यह नहीं है कोई कंट्रोल नहीं है कि अरे ऐसा कुछ भयानक घटना हो गई तब मेरे चॉइस का तो परिणाम नहीं है वो तो सामने वाले की गलती का परिणाम है कि मेरे साथ में एक्सीडेंट हुआ तो इसको आप किस दृष्टि से देख ख तो मेरा तो ऐसा मानना है जो कि स्टडी करके जो समझ में आ रहा है कि जितनी बाधा विपत्ति आती है जो कि अपने कर्म का फल नहीं है किंतु फिर भी बाधा विपत्ति तो आती ही है तो आती है तो हमारे जो भविष्य के कर्म है उसको काट देती है और हमारी जो मुक्ति के तरफ जाने वाली यात्रा है उसको शॉर्ट कर देती है उसको टूका देती है कि हां जो भविष्य में जो होने वाला था वह सभी हमने एक ही साथ में भुगत लिया और बस इस जन्म में अभी समाप्त हो जा जाएगा तो ये मेरा एनालिसिस है वी मेक अवर ओन डेस्टिनी हम हमारा ही भाग्य घ घडतर करते हैं हमारे भाग्य विधाता हम ही है ही सनशाइन फॉर द वीक एज वेल एज फॉर द स्ट्रांग ईश्वर रूपी सूर्य कमजोर के लिए भी वह प्रकाशमान है प्रकाश देता है और वह जो सशक्त है उसके लिए भी एक ही तरह का प्रकाश देता है हिज विंड ब्लोज फॉर सेंट एंड सिनर अलाइक ईश्वर का पवन यह कृपा रूपी पवन ये संत हो न कि सीनर हो साधु हो ना कि पापी हो दोनों के लिए एक समान बह रहा है ही इज द लॉर्ड ऑफ ऑल द फादर ऑफ ऑल मर्सी फुल एंड इंपार्शियल वो सभी के ईश्वर है वो सभी के ईश्वरीय पिता है वह मर्सी फुल है और इंपार्शियल है दयावान है और निरपेक्ष है ऐसा नहीं कहेंगे कि हां मैं इसके पक्ष में यह करता हूं और मैं इसके पक्ष में ऐसा नहीं ऐसा कोई कोई टीचर क्लास में देखेंगे उसके फेवरेट स्टूडेंट होते हैं ये मेरा फेवरेट स्टूडेंट है ये फेवरेट नहीं है तो जो फेवरेट नहीं होते उनको बड़ा दुख होता है हम सब ने यह सब थोड़ा बहुत अनुभव किया है फेवरेट और इन फेवरेट का अनफेवरेट का तो ईश्वर के लिए किंतु इस तरह से कोई फेवरेट नहीं कोई सोतेला नहीं सब उनके एक ही तरह के एक ही जैसे है अच्छा तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तसत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु