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ओ स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्मा स्वर अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः तो हम लोग ज्ञान योग के बारे में बात कर रहे थे जब ज्ञान योग शब्द प्रयोग हम करते हैं उससे अपने मन में एक ऐसी धारणा होती है कि हम लोग एक इंटेलेक्चुअल स्टडी कर रहे हैं हम लोग ये जैसे कि आज ज्ञान का मतलब क्या है यह ज्ञान शब्द सामान्यतः जिस तरह से आजकल व्यवहार में होता है हम लोग समझते हैं जैसे कि एक मैथमेटिक्स का कोई रिडल है मैथमेटिक्स का कोई इक्वेशन है उसको सॉल्व करना है तो वह एक जैसे कि उसके लिए हमको ज्ञान की जरूरत है या तो फिर यह जो पीरियोडिक टेबल है केमिस्ट्री का या या तो फिर यह गणित के जो अंक है उसको हम मेमोराइज करते हैं तो यह मेमोराइज करने के लिए या तो फिर कोई रिडल या इक्वेशन इसको सॉल्व करने के लिए या तो फिर किसी तरह का कंप्यूटर प्रोग्रामिंग करने के लिए हमको नॉलेज चाहिए हमको इंटेलेक्ट चाहिए तो इसके साथ में हम ज्ञान शब्द उस अर्थ में कहीं पर हम सोचते हैं कि ज्ञान योग का क्या अर्थ हुआ तो ये जो फिलोसोफी है फिलोसोफी को हम स्टडी करें फिलोसोफी को हम मेमोराइज करें फिलोसोफी की जो रिडल्स है उसको हम सॉल्व करें ऐसा एक चित्र हमारे मन में उठता है जब हम ज्ञान योग शब्द की व्या शब्द के बारे में जनरली सुनते हैं तब और बहुत सारे लोग हैं ऐसा सोचते हैं कि अरे भाई मेरे में तो इतना बुद्धि नहीं है मेरा मैथमेटिक्स में कभी इतना अच्छा नंबर्स नहीं आया मेरा लैंग्वेजेस में मैं थोड़ा सा वीक था तो किस तरह से मैं ज्ञान योग का स्टडी कर पाऊंगा यदि मुझे यदि मान लीजिए कि अभी ये पोस्ट ग्रेजुएशन या ग्रेजुएशन स्टडी करने के लिए हमको जितना नंबर्स चाहिए जितने मार्क्स चाहिए कोई अच्छी यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने के लिए वही जद मुझे नहीं मिलता है तो यहां पर मैं ज्ञान योग का स्टडी कैसे कर पाऊंगा ऐसा एक प्रश्न हमारे मन में उठता है दूसरा यह एक उठता है कि जद अपना ज्ञान योग का स्टडी करने के लिए इंटेलेक्ट जब अपने पास में है इनफ इंटेलेक्ट है इनफ यह बुद्धि शक्ति है किंतु जब मेरे सामने कोई एक बहुत ही बड़ा एक समस्या खड़ी हो जाए अब जैसे मेरा कोई प्रियजन है मेरे माताजी है पिताजी है मेरे भाई है या ऐसा कोई जिनके साथ में कोई बहुत ही बड़ी दुर्घटना हो जाए मान लीजिए किसी तरह का डिसीज उनको हो जाए तो फिर मैं उस समय मेरे मन में जो एक एक तुमुल ता पांडव की तरह एक ग्रीफ एक शोक एक अनिश्चितता एक अशांति इसका जो एक पूरा एक स्टोम की तरह एक वाह वंट की तरह मेरे मन में प्रकट होगा उससे उसको तो मैं कंट्रोल नहीं कर पाता हूं तो फिर मेरा यह ज्ञान योग का स्टडी है वह किस काम का है ऐसा भी एक प्रश्न मेरे हमारे मन में हो सकता है मैं अपने खुद की बात करू मैं कुछ कुछ चीजों के साथ में झुज हूं यह जो मोशंस कभी कोई कोई स्ट्रांग हो जाती है जैसे एक द्वेष का भाव मेरे में मैंने देखा है मैं हमेशा किसी के भी प्रति बहुत ही सहज तरीके से उसके प्रति मैं द्वेष करने लगता हूं कोई भी छोटी सी चीज हुई तो उसके प्रति मेरे किसी भी व्यक्ति के प्रति मेरे मन में बहुत ही ज्यादा गुस्सा आ जाता है हां मैं गुस्सा कभी दिखाता नहीं हूं एटलीस्ट इतना तो मैंने सीखा है किंतु मेरे मन में क्या चल रहा है यह तो मुझे पता है यह तो मैं एनालिसिस कर सकता हूं तो मैं देखता हूं कि छोटी-छोटी बातों में लोगों के ऊपर में यह गुस्सा हो जाना या तो फिर लोगों के ऊपर में यह द्वेष हो जाना यह मेरा एक बहुत बड़ा दुर्गुण है जो कि मैंने हमेशा से मेरे में लक्ष्य किया है तो अभी यह एक है स्ट्रांग इमोशन जैसे कि ग्रीफ जैसे कि शोक कभी भी हमारे किसी के साथ में कोई ऐसा हो जाए तो हमारा प्रिय पात्र तो हमको कितना भीतर से संताप महसूस होगा तो ज्ञान योग का स्टडी है इसको करने के बावजूद मेरी यह जो स्ट्रांग इमोशन है उसके ऊपर में मैं कंट्रोल क्यों नहीं कर पाता ठाकुर कहते हैं कामिनी और कांचन या तो फिर काम और कांचन से हमको मुक्ति पानी है अर्थात कि यह किसी के प्रति यह काम भाव है या तो फिर पैसों के प्रति मेरी मेरा लोभ स्पू हा या मेरी जो ग्रीड है उससे मुझे मुक्ति पानी है हम सभी साधकों को इससे मुक्ति पाने का प्रयास करना है तो अभी काम और कांचन से मुक्ति मिलने की बात तो आप छोड़ ही दीजिए वो बहुत दूर की बात है यह जो छोटे-मोटे जो है हिंसा द्वेष यह शोक ये ऐसी जो इमोशन वही सबसे पहले आकर के हमको ऐसा जकड़ करके धर लेती है हमारा गला ऐसा करके पकड़ लेती है तब हमको प्रश्न होता है कि मेरा यह जो ज्ञान योग का स्टडी है वह किस काम का है यह मैं दिन रात यहां पर बैठकर के मैं अपनी ही बात करता हूं स्वामी जी को मैंने बहुत पढ़ा ठाकुर की कृपा से स्वामी जी की कृपा से मुझे कंप्लीट वर्क्स दो बार एडिट करने का मौका मिला एक बार गुजराती में एक बार इंग्लिश में ओरिजिनल बेलूरमठ में बैठ कर के और मैंने जितना मेरी जो लिमिटेड इंटेलेक्ट है मैंने स्वामी जी को समझने का बहुत प्रयत्न किया किंतु फिर भी यह सबके बावजूद भी मैं देखता हूं कि ऐसी कोई स्ट्रांग इमोशन मेरे मन पर जब सवार हो जाता जैसे कि पजेशन होता है ना हम लोग ये पजेशन की कहानियां सुनते हैं ये इसके ऊपर में चंड का आवेश हुआ है ऐसा कभी हम सुनते हैं किसी के ऊपर में ये व ऐसा सब कहानियां तो हम लोग सुनते रहते हैं तो ऐसे ही ये हमारी स्ट्रांग इमोशन ऐसे एक डिमन एक राक्षस का स्वरूप धारण करके हमारे मन के ऊपर में वो बैठ जाती है और हम नहीं चाहते ऐसी हरकत हमसे करवाती है जैसे कि हमारी हमारी इंटेलेक्ट को वो हाईजैक कर देती है और यह इंटेलेक्ट से कहां कुछ अच्छा कार्य होने वाला है वह नहीं करके उसको डिस्ट्रक्शन में लगाती है तो ऐसा हम सभी ने खास करके मैंने अपने जीवन में महसूस किया है तो मेरे मन में यह प्रश्न हुआ कि ज्ञान योग का स्टडी मैं ऐसे तो मुंह से बोलता रहता हूं कि हां स्वामी जी को पढ़ा है हां मैं स्वामी जी को समझने का प्रयास कर रहा हूं तो फिर यह ज्ञान योग का स्टडी मुझे अपनी यह मेरी जो इमोशन स्ट्रांग इ मोशन से उससे मुझे क्यों नहीं बचा पाता यदि जब भी मेरे मन में ऐसी छोटी सी भी घटना हो जाए तो फटाक करके किसी के ऊपर में गुस्सा आ जाए या तो फिर छोटी-छोटी बातों में मेरे मन में दूसरों के प्रति जलसी ये जलसी एक बड़ा ही हम लोग स्वीकार नहीं करते क्योंकि हमको शर्म आती है मैं मुझे क्यों दूसरों के प्रति ईर्षा है वो मेरे से आगे बढ़ जाता है इसलिए मुझे दूसरों के प्रति ईर्षा आना स्वाभाविक है किंतु बहुत कम लोग इसको मुंह से स्वीकार करेंगे क्योंकि इसको स्वीकार करने से हमको शर्म आती है कि मैं मेरा एक स्टेटस है मुझे दूसरों से क्या जेलस होने की जरूरत है मैं मेरे पास में जो है ठाकुर ने मुझे जो दिया है इट इज इनफ किंतु फिर भी हमारे हमारे पास में चाहे कितना भी हो जाए मेरे बचपन की बात करूं मेरे कुछ रिलेटिव्स अमेरिका में रहते हैं तो वह बीच-बीच में अच्छे-अच्छे खिलौने वगैरह भेजते थे मेरे लिए जब मैं छोटा था तब की बात करता हूं और मेरा कजिन या मेरे काका का लड़का व उसका कोई ऐसा रिलेटिव नहीं था तो मेरे पास में हमेशा उससे अच्छे खिलोने थे ऐसा नहीं था वे लोग गरीब थे हम एक ही इकोनॉमिकली एक ही लेवल प थे किंतु क्या है कि जनरली पेरेंट्स खिलौने खरीदने में पैसा नहीं डालते हैं तो अभी इस तरह से गिफ्ट में मिले खिलौने का तो एक महत्व में रहता है इंपोर्टेंस रहता है तो मेरे पास में अच्छे-अच्छे खिलौने रहते थे किंतु जब भी ये मेरे जो कजन है उसके पास में मैं कोई भी एक भी लोना एक जद मैं देखूंगा एक कोई नई चीज देखूंगा इमीडिएट मेरे मन में ईर्षा आ जाएगी अरे इसके पास में यह है और मेरे पास में क्यों नहीं है हालांकि मेरे पास में उससे अच्छे और इससे ज्यादा खिलौने थे किंतु फिर भी उसका थोड़ा सा भी मैं जद कोई ऐसा देखता हूं तो मुझे मेरे मन में ईर्ष्या हो जाती थी अग कहीं पे से उसने अपने हाथों से उसकी मां ने उसके लिए कुछ बना दिया या तो उसके पिताजी ने कहीं से उसको कुछ लाकर दे दिया इमीडिएट मुझे होता था अरे मुझे भी ऐसा चाहिए मेरे पास क्यों नहीं है ऐसा ये जो ग्रीन आइड मनस्टर जिसको हम इंग्लिश में कहते हैं ऐसा मेरे साथ में बार-बार होता था अब भी होता है मुझे मैं कभी भी इस तरह से स्वीकार नहीं करता क्योंकि हम सबको शर्म आती है कि अरे इतना छोटा सा मन मेरा क्यों है मेरे पास में ठाकुर ने ठाकुर को जो देना था मुझे वो सब मेरे पास में बहुत ही अच्छे मेरे माता-पिता ने मुझे बहुत स्नेह किया पैसों की ऐसा कोई कमी कभ नहीं रही फिजिकली मैं फिट हूं मेंटली फिट हूं जो मैं चाहे मैंने इंटेलेक्चुअली मैं कर सकता हू फिर भी छोटी-छोटी चीजों में दूसरों के प्रति ईर्षा जो आ जाती है मेरे मन में इसका क्या कारण है यह तो नहीं होना चाहिए मैं इन स्पाइट ऑफ स्टडिंग ज्ञानयोग कि यह जो काम कांचन काम क्रोध मद लोभ मोह ईर्षा द्वेष हिंसा यह जो भी सब इमोशन से उसको हमसे यह सब नेगेटिव इमोशन है साधक को यह सब इमोशन से बिल्कुल दूर रहना है ठाकुर बार-बार कहते हैं काम कांचन का त्याग करना है यह सब सुनने के बावजूद इस तरह की स्ट्रांग इमोशंस एक एक बार हमारे सर पर खास करके मेरे सर पर जब बैठ जाती है सवार हो जाती है तो मैं क्यों नहीं इससे मुक्ति पा सकता हूं यह प्रश्न मुझे हुआ था अभी भी होता है और देखिए कि एक तरह से मैंने इसका सोल्यूशन खोजने का प्रयास किया है जब हम यह कहते हैं ज्ञान योग तो ज्ञान योग ये नहीं है कि मैथमेटिक्स का कोई इक्वेशन सॉल्व कर दे मैथमेटिक्स की कोई पजल सॉल्व कर दे उसके लिए जिस तरह का इंटेलेक्ट चाहिए या तो फिर क्रिएटिव थिंकिंग आजकल आर्ट्स है यह बहुत लोग अच्छे-अच्छे एनिमेशन बनाते हैं मैंने देखा है कोई उपदेशा क्मक एनिमेशन कि कोई अच्छा कार्य आप सीखे इसके लिए बच्चों के लिए एनिमेशन बनाना ऐसा कुछ छोटा सा हम देख लेते हैं तो हमको बड़ा एक आश्चर्य होता है कि अरे इतना क्रिएटिविटी एक मिनट का 30 सेकंड का 40 सेकंड का ये एनिमेशन कोई एक बच्चा देखेगा तो फट करके उसके मन में यह बात बैठ जाएगी तो कितना क्रिएटिविटी डाला होगा 30 मिनट का लेक्चर देना एक आसान बात है किंतु 30 सेकंड या एक 60 सेकंड के एनिमेशन बना कर के वह बात बता देना बहुत ही कठिन है जितनी आप इंपॉर्टेंट बात कम शब्दों में कह पाए जितना इफेक्टिवली कह पाए उसके लिए आपको उ उससे उतना ही ज्यादा क्रिएटिव वो आपके पास में क्रिएटिविटी होनी चाहिए क्रिएटिव एफर्ट आपको लगाना पड़ेगा तो हम लोग जब यह देखते हैं कि ये क्रिएटिविटी है हम लोग जब यह देखते हैं कि हां ये इंटेलेक्चुअल शार्पनेस है हम लोग किसी का मेमोरी पावर देखते हैं अभी बीच में मैंने एक वीडियो देखा था ये 1960 ना कि 70 की बात है एक महिला थी एक इंडियन लेडी शकुंतला देवी ने कि ऐसा कुछ उनका नाम था मैं नाम एक बार मुझे कंफर्म करना होगा शी इज अ मैथमेटिकल प्रॉडिजीज वो ये मल्टीप्लिकेशन यह सब करेगी डिवीजन मल्टीप्लिकेशन लाइक ह्यूमन कंप्यूटर जिनको कहते हैं तो उसको कहीं ऑक्सफोर्ड में ब्रिटेन में किसी बहुत बड़ी यूनिवर्सिटी में उसको ले गए उनको ले गए और एक मैथमेटिक्स का प्रोफेसर उनका इंटरव्यू ले रहा है उनका उनको टेस्ट कर रहा है वो ब्लैकबर्ड के ऊपर में बड़े-बड़े वो मैथमेटिक्स के पजल्स लिखते हैं कि थ 4 लाख 5 करोड़ ना की इसके साथ में एक बहुत बड़ी रकम दो बड़ी-बड़ी रकम का मल्टीप्लिकेशन तो वो ये लेडी थी वो बिल्कुल अपने माइंड से सब कलेशन करती थी और बाकी दो-तीन लोग बैठे थे कैलकुलेटर लेकर के चेक करने के लिए क्या ये जो ये लेडी जो मेंटली ये सब बड़े-बड़े कैलकुलेशन कर रही है इज इट इवन करेक्ट र नॉट तो जितनी भी बार इसको बड़े-बड़े कैलकुलेशन बड़ी सिक्स फिगर्स सेवन फिगर्स के नंबर्स के कैलकुलेशन करने का इनको बोला गया इन लेडी को हर बार वो एकदम करेक्टली वो करके दिखाते व जो लोग कैलकुलेटर से चेक कर रहे हैं वो आश्चर्य चकित कि बाप रे किस तरह की इंटेलेक्चुअल शार्पनेस मैथमेटिकल शार्पनेस है है तो यह वर्बल मेंटली यह सब कैलकुलेशन कर पाती है तो हम जब यह ज्ञान योग शब्द का नाम सुनते हैं तो भी हमको हमारे मन में प्रश्न होता है कि या तो ये एक इंटेलेक्चुअल एक्सरसाइज है एक इंटेलेक्ट से एक क्रिएटिविटी से हमको इसको समझना है एक चीज और दूसरा दूसरा प्रश्न होता है कि जब भी मेरे मन के ऊपर में इस तरह की कोई स्ट्रांग इमोशन सवार हो जाती है तो यह जो सब कुछ मैंने स्वामी जी को पढ़ा इसका मैं इस्तेमाल करके इसको यूज करके मैं क्यों नहीं अपने को फ्री कर पाता हूं यह दो प्रश्न हमारे मन में होते हैं मेरे मन में हुए हैं और उसका एक उसका उत्तर खोजने का मैंने प्रयास किया है सर्वप्रथम तो ज्ञान शब्द ज्ञान शब्द आज हम जिस अर्थ में व्यवहार कर रहे हैं इंटेलेक्ट या तो मेमरी पावर या तो क्रिएटिविटी यह ज्ञान शब्द का उद्भव इस अर्थ में नहीं हुआ था या तो फिर ज्ञान योग जो बताया जाता है शब्द उसका यह अर्थ नहीं है ज्ञान बेसिकली मींस दैट अंडरस्टैंडिंग दैट वर्ल्ड इज मिथ्या एंड आत्मन इज रियल ये परा विद्या अपरा विद्या एक विद्या ऐसी है जो कि आपको पैसे दे सकती है आपको सम्मान दे सकती है आपकी एक सोसाइटी में इज्जत खड़ी कर सकती है और एक विद्या है जो कि आपको ईश्वर की ओर ले जाती है ठाकुर कहते हैं सेे चातु चातु माने वह चालाकी चालाकी है वो चतुरी यानी चालाकी या तो फिर एक विद्या कौन सी अच्छी विद्या सही विद्या है जो आपको ईश्वर की ओर ले जाए नहीं कि आप 100 श्लोक आपने मुख कर दिए 700 श्लोकों की 750 श्लोकों की जद आपने गीता मुख स्त कर दी है उससे आपका यह य दिस इज नॉट मतलब यह तो कोई ज्ञान योग का अर्थ नहीं हुआ कि आपकी मेमोरी बड़ी ही स्ट्रांग है ज्ञान योग का अर्थ है कि यह धारणा बड़ी स्पष्ट होना कि यह जगत में जो कुछ भी हम देख रहे हैं यह सब मिथ्या है और मेरे भीतर में जो आत्मन है वह सही है और यहां तक कि यह जो जिसको मैं कहता हूं यह मैं यह मेरा बचपन मेरे बचपन की यह मेमोरीज मेरे मेरे मेरे जो पूर्व संस्कार इस जन्म के पिछले जन्म के मेरी एम्स एंबीशंस माय होप्पो में मेरे हाथ में जितने प्रोजेक्ट है यह सब जो मैं जिसको मैं करके मैं समझता हूं दैट इट सेल्फ इज लाइक अ लेयर ऑफ इग्नोर अबाउट दी ट्रू सेल्फ व्हिच इज कॉल्ड आत्मन मेरा जो सही नेचर है आत्मन इसके ऊपर में ये एक भसमा छाया की तरह एक एक अहंकार का जिसका आवण है इसको मैं जिसको कि फॉल्स ईगो कहेंगे या तो फॉल्स सेंस ऑफ आइडेंटिटी कहेंगे यह एक मैं यह मैं होना ही एक मिथ्या है ठाकुर बोलते थे आमी मोली ले गुजी बे जनजात मेरा जिस दिन मृत्यु होगा उसी दिन सब कुछ ये जो झंझा है झंझट है इस जगत की व समाप्त हो जाएगी तो ये अभी ऑफकोर्स इसका अर्थ नहीं कि सुसाइड करना है मेरा जो अहंकार है उससे मुक्ति पाना है तो यह तो एक बात हुई कि इसका एक्चुअल अर्थ क्या है कि ज्ञानी योग का कि इंटेलेक्ट या तो फिर स्टडी या तो फिर इवन स्वामी जी का कंप्लीट वक समझ पढ़ कर के मैं समझ गया ये जो हम ब्रेन से जो चीज करते हैं वो नहीं किंतु यह समझ होना ये अंडरस्टैंडिंग होना यह विजडम होना कि जगत में जो कुछ देखते हैं वो सब आज है और कल नहीं है क्षण भंगुर है आता रहेगा जाता रहेगा इसके पीछे जो आत्मन है आत्मन ही हमेशा के लिए रहेगा तो ये एक अंडरस्टैंडिंग अभी बोलेंगे अच्छा ठीक ठीक है चलो ये तो समझ लिया कि मैथमेटिक्स के लिए जो मेरा ब्रेन का जो पार्ट काम कर रहा है वो उस पार्ट से ही इस ज्ञान योग का कोई लेना देना नहीं है ज्ञान योग समझने के लिए एक दूसरा एक पार्ट मेरे ब्रेन का चाहिए चलो इतना तो समझ लिया किंतु फिर दूसरा प्रश्न होता है कि ये तो समझने के बाद में प्रैक्टिस का क्या जैसे ही छोटा सा भी मेरे सामने एक इमो कोई भी घटना हो जाएगी फट करके मैं र्षा वित हो जाऊंगा फट करके मेरे मन में द्वेष का भाव प्रकट हो जाएगा तो फिर मेरा ज्ञान योग स्टडी करने का क्या अर्थ है क्या ज्ञान योग में ऐसी कोई प्रैक्टिस नहीं है जिस प्रैक्टिस को करते करते फिर मैं अपने माइंड को इतना स्ट्रांग बनाऊं कि आखिर में जब यह लोभ लालच यह कोई दुर्घटना या तो फिर कोई आघात यह मेरे मन में मेरे सामने आ जाएगा तो मेरा माइंड इतना स्ट्रांग रिएक्ट नहीं करेगा रंग नाथा आनंद जी जो बार-बार कहते थे काम इन द मिडल ऑफ दिस टोम काम इन द सेंटर ऑफ द स्टोम यह जो स्टोम होता है हरिकन होता है इंडिया में ज्यादा नहीं होता अमेरिका में ज्यादा आता है हरिकन तो हरिकेन जद देखेंगे तो चक्रवात की तरह वह घूमता रहता है एक बहुत बड़ा एक तूफान और जहां पर भी जाएगा जिस घर से जाकर के टकराएगा घर को तोड़फोड़ कर देगा किंतु इस चक्रवात का जो सेंटर है आई ऑफ द स्टोम वहां पे एकदम पीसफुल शांति रहेगी अब यह बात में कितना सही हमको पता नहीं हमने तो सुना है हम तो कहीं जा कर के चक्रवाद के केंद्र में खड़े नहीं रहे किंतु ऐसा एक एक कहावत है काम इन द आई ऑफ द स्टोम यदि चक्रवाद के केंद्र में शांति तो वैसे ही मेरे चारों ओर यह पंच महाभूत का ये जगत यह जगत प्रपंच चलता रहे और मैं अपनी आत्मा में स्थित होकर के एक अनंत शांति का अनुभव करता रहूं क्या ऐसा होना संभव नहीं है एक चीज तो संभव है प्रैक्टिस है इसकी इस प्रैक्टिस को कहते हैं कि त्याग की प्रैक्टिस हमेशा हमारे सामने श्रेय और प्रे दो चीजें आती रहती है एक चीज ऐसी है कि जो कि मेरे मन को भाती है और एक चीज ऐसी है जो जिसका आचरण करना मेरे लिए श्रेष्ठ है बहुत ही सिंपल उदाहरण दे तो जैसे कि परीक्षा के सामने परीक्षा की डेट आ गई है परीक्षा सामने में है अभी मैं स्टडी करने के लिए बैठा हूं एकाएक मेरा एक मित्र आया यह मेरे साथ में हुआ है इसलिए मैं कह रहा हूं मेरा एक मित्र आया और उसने कहा कि चलो भाई एक बाहर में घूम कर के आ जाते हैं थोड़ा सा गप लगा लेते हैं क्या है बाद में तुम पढ़ते रहना तो अभी अरे हां तो बात तो गलत नहीं है चलो आधे घंटे थोड़ा सा घूम के आ जाते हैं एक आध घंटा गप लगा लेते हैं थोड़ा सा ऐसा है तो स्टडी तो बाद में भी होता रहेगा जद एक घंटा अभी मिस हुआ है तो वो घंटा रात को ज करके कवर कर लेंगे यह देखिए उस समय अपना मन किस तरह की कशमकश में डूब जाता है एक चीज है कि मित्र के साथ में घूमना फिरना गप लगाना या मूवी देखने के लिए जाना मेरे मुझे बहुत ही प्रिय है किंतु सामने परीक्षा है यदि मैं इसमें मेहनत नहीं करूंगा अच्छे नंबर्स नहीं आएंगे तो मेरा भविष्य का क्या परिवार का पालन पोषण करना है मुझे खुद में तो एक अपना एक होता है ना कि मैं अपना एक स्टेटस हो मेरा इस सोसाइटी में अदि मूर्ख की तरह मैं रहूंगा जॉब अच्छा नहीं मिलेगा बिजनेस नहीं कर पाएंगे और देखिए कि आप हायर इंस्टिट्यूट ऑफ लर्निंग में जाते हैं अच्छी-अच्छी कॉलेज में तो बात यह नहीं कि आपको सिर्फ डिग्री मिलती है आपका एक नेटवर्क बनता है आप लोग एक इस तरह से एक अपना मित्र मंडल तैयार करते हैं जबकि आप भविष्य में कोई भी काम होगा आप कोई भी एक प्रोजेक्ट आप स्टार्ट करना चाहेंगे तब आपका ये नेटवर्क जो होगा वो आपको काम लगेगा इसीलिए जो बड़ी-बड़ी एलिट यूनिवर्सिटी होती है उसमें जाने के लिए लोग बड़े ही आतुर होते हैं बात यह नहीं है कि मैंने उनकी इच्छा है कि वहां जाकर कोई स्टडी करे बहुत सारे लोग वहां पर नेटवर्क बनाने के लिए जाता है तो ऐसी अच्छी यूनिवर्सिटी में जॉब नहीं मिलेगी तो मेरा नेटवर्क नहीं बनेगा मेरा फ्यूचर का क्या यह सब मेरे सामने एक है और दूसरा है एक क्षणिक एक इंस्टेंट एंजॉयमेंट एक इंस्टेंट भोग कि थोड़ा सा चलो आधे गंड के लिए गप लगा देते हैं तो एक लॉन्ग टर्म एक प्लान करके मेरे जीवन को अच्छा करना और यहां पर एक इंस्टेंट एंजॉयमेंट ले लेना यह दो मेरे सामने आते हैं मैं किसको सिलेक्ट करूंगा मेरा यह जो विल पावर है क्या वह मुझे हेल्प करेगा कि नहीं आज गप नहीं लगाते हैं गप लगाने के लिए घूमने फिरने के लिए मूवीज देखने के लिए पूरा जीवन पड़ा है एक बार अच्छा जॉब एक अच्छा करियर लग जाए तो फिर यह करते रहेंगे हम लोग कोई फर्क नहीं पड़ता क्या यह होगा मेरे से मेरा विल पावर मुझे इसमें हेल्प करता है ये साइकोलॉजिस्ट आजकल जिसको कहते हैं डिलेड ग्रेटिफुली के ऊपर में उनके सामने स्वीट्स रखेंगे वो चॉकलेट होती है या कोई भी कप केक होती है उनके सामने रखेंगे और बोलेंगे कि देखो कि तुम लोग हम लोग अभी थोड़ा सा बाहर काम के लिए जा रहे हैं है आप लोग यहां पर अकेले रहे यदि आप हम आधा घंटे या इसमें थोड़ी देर के बाद में वापस आएंगे इतनी देर दरमियान आप यदि आपका सामने यह जो स्वीट रखा है उसको नहीं खाएंगे तो हम आपको इससे भी अच्छा कोई ट्रीट देंगे ऐसा बोलकर के ये रिसर्चर है वो उस कमरे में से चले जाते हैं और वह फिर देखते रहते हैं कैमरे से कि कौन सा बच्चा क्या करता है अभी जो बच्चा उसका एक इंटेलेक्चुअल अंडरस्टैंडिंग है या तो फिर उसकी मने भोग करने की भी और भी अच्छी एक इच्छा है वह सोचेगा कि नजर के सामने जो ट्रीट रखी हुई है इसको नहीं खाऊंगा तो बाद में आई विल गेट इवन बेटर ट्रीट इससे भी अच्छी स्वीट मिलेगी बाद में मुझे तो चलो मैं इस स्वीट को नहीं खाता हूं और कोई कोई बच्चे होते हैं उनको यह भविष्य का प्लानिंग करना भविष्य की चिंता करना भविष्य का मेरा बेटर बेनिफिट हो रहा है यह नहीं देख कर के नजर के सामने जो भोग है उसको उपभोग कर लेने की वो एक एक अदम्य इच्छा उसके सामने खड़ी हो जाती है जिसको कि वे लोग रेजिस्ट नहीं कर पाते वे लोग केक खा लेंगे जो भी ट्रीट उनके सामने रखा है वे लोग उसको खा लेंगे अच्छा अभी इसमें तो और तो कुछ करना नहीं है बच्चे हैं तो वो तो एक्सपेरिमेंट खत्म करके घर चले गए अभी रिसर्चर लोग इनडायरेक्टली इनके ऊपर में विद द परमिशन ऑफ पेरेंट्स एक उनका एकेडमिक प्रोग्रेस कैसा है उसके ऊपर में नजर रखते हैं और ऐसा पाया गया है कि जो बच्चों ने जो रेजिस्ट किया है टेंप्टेशन को कि मुझे भविष्य में यह नजर के सामने जो ट्रीट है वह मैं नहीं खा कर के भविष्य में और भी बेटर ट्रीट मिलेगा वह उसके ऊपर में जो विल पावर है ऐसा बच्चे हैं उनका एकेडमिक करियर उनका स्टडी उनका फ्यूचर हमेशा इज बेटर देन दोज कि जिन लोग रेजिस्ट नहीं कर पाए नजर के सामने मिठाई रखी है फट करके खा लिए ऐसा एक लड़का और नजर के सामने मिठाई रखी है नहीं खाया इस अपेक्षा से कि भविष्य में अच्छी मिठाई मिलेगी तो इस तरह से जिसका विल पावर ज्यादा डेवलप है वे लड़के अपनी कैरियर में हमेशा आगे जाते हैं कंपेयर टू वो लड़का जो कि नजर के सामने आई हुई मिठाई को इमीडिएट खा लेता है तो यह जो विल पावर ये जो डिलेड ग्रेटिफुली यह तो छोटा सा उदाहरण है ज्ञान योग का अर्थ क्या है फर्स्ट ऑफ ऑल ज्ञान योग कहता है कि व्हाट इज अ बेटर ट्रीट सबसे अच्छी मिठाई क्या है सबसे अच्छी मिठाई यह नहीं है कि आपकी करियर आपका फैमिली लाइफ आपका बैंक बैलेंस आपकी समाज में रिस्पेक्ट इससे भी अच्छी ट्रीट है इससे भी अच्छी मिठाई है आपके सामने और भी आगे जाओ ठाकुर बोल से वो वो एक कोई आदमी जा रहा था वो जंगल में तो यहां पर सोना की व सोना मिल गया तो बोला और भी आगे जाओ तो रूपा का वो जो पहले रूपा का खाई मिला फिर बोला और भी आगे जाओ तो सोना मिल गया उससे भी आगे जाओ हिरा जवाहरात मिल गए तो गो डीपर एंड डीपर इससे भी बेटर ट्रीट है इससे भी अच्छी स्वीट है दैट स्वीट इज आत्मन ये आत्मज्ञान सबसे बेटर एक मिठाई है हमारे लिए जिसको खाने से हमको सबसे ज्यादा संतुष्टि मिलेगी तो ये अंडरस्टैंडिंग सबसे पहले तो ज्ञान योग देता है मान लीजिए कि रिसर्चर है वो ठाकुर अब थोड़ा सा हम भी गेडा केन एक जर्मन वर्ड है गेडा केन अर्थात की थॉट एक्सपेरिमेंट हम भी ऐसा थॉट एक्सपेरिमेंट करते हैं ऐसा वो हम लोग दक्षिणेश्वर में गए हैं और रिसर्चर की जगह ठाकुर बैठे हैं और हमारे सामने सब कुछ लाकर के रख दिया यह भोग के साधन है वह ठाकुर के सामने वोह जो प्रलोभन खड़ा हुआ था एक ब्रिटिश खलासी और उसके हाथ में थाला थाला में मिठाई जवा ह रात अच्छे वस्त्र दो स्त्रियां तो ऐसा करके उपभोग की चीजें ठाकुर हमारे सामने रख देते हैं और बोलते हैं कि अच्छा देखो कि अभी इसका भोग तुम छोड़ दोगे तो इससे भी अच्छी ट्रीट इससे भी अच्छा भोग तुमको मैं बाद में दूंगा और हमारे जैसे 1015 लड़के वहां पर बैठे हैं तो हम किस कैटेगरी में आएंगे हम यह भोग अपनी नजर के सामने देख कर के उसके पीछे अंधे होकर के उसको ग्रहण कर लेंगे ना कि भविष्य की चिंता करके अभी कहेंगे कि नहीं अभी मैं इससे दूर रहता हूं हो सकता है कि यह जितने हीरा जवाहरात एक थाल में मिले हैं हो सकता है कि ठाकुर 10 थाल में आकर के ऐसे हीरा जवाहरात दे दे कि अल्टीमेटली जब वो हीरा जवार मिलेगा पता चलेगा पूरा विश्व ब्रह्मांड ही हमको मिल गया वो व इसकी बात है मथुर बाबू की व राधाकांत के मंदिर में गहने चोरी हो गए तो मथुर बाबू जाकर के पूछते हैं कि अरे ठाकुर भन को बोलते हैं कि आप आपका कैसा आप कैसे भगवान है कि आप अपने खुद के हीरा गहने जवा रत की रक्षा नहीं कर पाए तो अभी ठाकुर वे लोग शब्द ठाकुर ईश्वर को उद्देश करने के लिए बोलते हैं इसलिए वो ठाकुर शब्द मथुर बाबू ने इस अर्थ में यूज किया भगवान को उद्देश करके कह रहा है वहां पर साथ में अपने ठाकुर खड़े थे भगवान श्री राम कृष्ण अपने भगवान तो उन्होंने क्या कहा कि अरे मूरख यह सोना जवारा तो तेरे लिए उसकी कीमत है भगवान के लिए तो सब मिट्टी के टुकड़े हैं यह सब जिसका यह पूरा विश्व ब्रह्मांड है करोड़ों करोड़ों सितारे यह करोड़ों करोड़ों प्लेनेट जिसके की गर्भ में ऐसे कितने कोटि कोटि धन जवाहरात हीरे माणिक पड़े होंगे उसके लिए तुम्हारे छोटे से तीन चार हीरा जवाहरात की क्या कीमत है उसके लिए क्या बेत की बातें करते हो ऐसा करके मथुर ठाकुर ने मथुर को डांटा था आज हम इमेजिन भी नहीं कर सकते कि अपने एंप्लेयर को डांटे इस तरह से ठाकुर में ऐसा था तो देखिए कि हमको ऐसा लगेगा कि हां यदि एक थाला भर कर के हीरा जवारा यदि हम छोड़ देंगे तो 10 थाला भर के देंगे ठाकुर चलो इससे तो शुरुआत करो आखिर में जो जो सही सही हीरा जवाहरात मिलेंगे उसकी तो कोई कीमत ही नहीं है अमूल्य है प्राइसलेस तो देखिए कि यह प्रेय और श्रेय हमारे सामने सतत खड़े रहते हैं सतत आते रहते हैं और हर बार मुझे यह पॉजिटिव चॉइस करनी है मैं श्रेय सिलेक्ट करूंगा नहीं कि प्रे मेरे लिए जो श्रेष्ठ है उसको मैं सिलेक्ट करूंगा नहीं कि मेरे लिए जो मेरी इंद्रियों को जो अभी इंस्टेंट ग्रेटफुल बचपन से यह जो ब्रह्मचर्य श्रम 25 साल का यह जो था पीरियड वह क्यों बनाया गया क्यों इसकी कल्पना की गई बच्चे के सामने हर समय उसको यह चॉइस दी जाती है सुबह को अर्ली मॉर्निंग उठना है ठंडे पानी नदी का गंगा का ठंडा पानी है उसमें डुबकी मारनी है उसके बाद में जो प्रातः वंदना करनी है इसके बाद में गुरु के सामने बैठ कर के गुरु जो पाठ सिखाते हैं उसको ग्रहण करना है तो यह फिर उसके बाद में गुरु की सेवा करनी है गुरु जो गुरुकुल में जो भी फिजिकल वर्क करना है वो करना है तो यह पूरा एक डिसिप्लिन था बच्चों के भीतर में ये डिसिप्लिन इनकल्केट्स का उद्देश्य था आजकल हम स्कूलों में इंटेलेक्ट किस तरह से डेवलप किया जाए क्रिएटिविटी किस तरह से डेवलप की जाए किस तरह से आपका यह टीम वर्क लीडरशिप यह सोशल स्किल्स डेवलप हो यह सब सिखाते हैं किंतु यह डिसिप्लिन के बारे में बात करने से ही आजकल ऐसा होता है कि बच्चों को डिसिप्लिन नहीं सिखाना है उन लोगों की बुद्धि जड़ हो जाएगी अरे भाई डिसिप्लिन इज द वे बाय विथ व्हिच यू कैन अंडरस्टैंड एवरीथिंग एल्स स्वामी जी ने क्या कहा यदि मेरा एजुकेशन मेरे हाथ में होता तो मैं यह कोई मैथमेटिक्स ना लैंग्वेज ना कि साइंस वो सब ज्यादा पढ़ने के लिए नहीं जाता फर्स्ट ऑफ ऑल आई वुड हैव डेवलप माय पावर ऑफ कंसंट्रेशन सबसे पहले मैं अपनी एकाग्रता की शक्ति को डेवलप करता फिर विद दिस पावर ऑफ कंसंट्रेशन आई वुड हैव लर्न एनीथिंग दैट आई वांट वुड हैव वांटेड टू इस एकाग्रता की शक्ति से मैं जो सीखना चाहता हूं वो मैं इमीडिएट सीख सकता हूं ऐसा स्वामी जी ने कहा तो यह हमारे सामने हमारे जीवन में बिल्कुल बचपन से ही यह सब चॉइस आती है इसमें से हम किस चॉइस को सिलेक्ट करते हैं इसके ऊपर में यह संस्कार बनते जाते हैं बचपन से ही एक लूज डिसिप्लिन रहा है अपने जीवन में कि कुछ भी चीज हो तो एक इंस्टेंट ग्रेटिफुली करना अपने मन को या एक लंगर टर्म स्ट्रेटेजी बनाना ये सब छोड़ो अभी चलो इंस्टेंट ग्रेटिफुली एकदम बेबस असहाय कर देते हैं छोटी-छोटी कोई भी घटना हुई हमारा मन ईर्षा से क्रोध से उत्तेजना से भर जाता है क्यों क्योंकि बचपन से ही हमने इंस्टेंट ग्रेटिफुली बार फेल हो किंतु इन जनरल एक हम श्रेय को सिलेक्ट करके चलते तो आज ऐसी परिस्थिति आती कि छोटी-छोटी घटनाएं हमारे मन को विचलित ना कर पाती तो यह मेरा एक कंक्लूजन है कि ज्ञान योग का क्या अर्थ है ज्ञान योग का शब्द का क्या अर्थ है और ज्ञान योग की साधना क्या है अभी इस विश्लेषण को मैं सामने रख कर के मेरे खुद के जीवन के सामने देखता हूं तो मुझे लगता है कि ऐसा कि एक श्रेय को सिलेक्ट करना मेरे जीवन में सब समय मैंने नहीं किया है एक इंस्टेंट ग्रेटफोर घटनाएं मेरे मन को विचलित कर देती है यह अदर वाइज तो और तो कोई फिर इस बात का कोई यह नहीं है सोल्यूशन नहीं है कि क्यों ऐसा होता है यदि ज्ञान योग सही है तो तो फिर मैं इवन इन स्पाइट ऑफ बीइंग ए मोंक हमने मैंने एक बहुत बड़ा त्याग किया है घर छोड़ कर के तो चलो वो एक बड़ा त्याग है किंतु ज्ञान योग के जो संस्कार है वो एक बड़ा त्याग ना दूसरा बड़ा त्याग इसके में नहीं बनते हैं छोटे-छोटे लाखों त्याग हम अपने जीवन में करते जाएंगे तब यह ज्ञान योग का एक संस्कार बिल्ड होता है विल पावर एक डेवलप होता है देखिए आप सोल्जर्स को देखिए कि उनके भीतर में इतना साहस है कि हंसते-हंसते दुश्मन की गोलियां अपने सीने प धारण करते हैं उससे ज्यादा साहस इससे ज्यादा विल पावर और क्या कहेंगे मेरे हाथ में थोड़ा सा कटता भी है तो मैं तो ऐसा जान चली जाएगी ऐसा हो जाता है एक बि ू खून भी निकला तो मुझे बेहोश हो जाऊंगा और वहां पर हाथ कट गए पैर कट गए दुश्मनों की गोलियां चलती ही रही कारगिल की हम जब कहानी सुनते हैं अरे बाप रे ऊपर में पहाड़ के ऊपर में दुश्मन बैठे हैं कंटीन्यूअस मशीन गन चला रहे हैं और अपने वीर जवान बिना किसी प्रोटेक्शन के वह पहाड़ उ चढ़ते जा रहे हैं चढ़ते जा रहे हैं यह अपना मित्र चला गया यह साथी गिर गया फिर भी भारत मां की रक्षा करने के लिए पहाड़ के बाद पहाड़ हम चढ़ते ही गए तो वो जो पावर है वो कैसा होगा अभी प्रश्न होता है कि यदि विल पावर की डेफिनेशन के अनुसार यदि ज्ञान योग की व्याख्या की जाए तो सैनिक तो सबसे बड़ा ज्ञान योगी है क्या यह बात सही है कि नहीं है एक तरह से सही है क्योंकि विल पावर हम लोग डेवलप कर रहे हैं ये देखिएगा कि ज्ञान योग का प्रचार ज्ञान योग का विकास क्षत्रिय लोगों ने किया है भगवान राम भगवान कृष्णा भगवान बुद्ध जितने भी ज्ञान राजा जनक ये जो क्षत्रिय थे उन्होंने ज्ञान योग को सबसे ज्यादा प्राधान्य दिया है तो एक तरह से देखा जाए तो सोल्जर जिसके भीतर में जबरदस्त सेल्फ डिसिप्लिन है जबरदस्त करेज है जबरदस्त विल पावर है उसके भीतर में ज्ञान योग का यह सीड तो होगा ही होगा वही बात है कि व जद एक फंडामेंटल इसका थियोरेटिकल बेसिस एक्सेप्ट कर ले कि हां जगत मिथ्या है जब आर्मी का सर्विस समाप्त होकर के जद वो साधु बनने के लिए जाएगा तो मुझे लगता है कि एक सोल्जर विल इजली बिकम ए बेटर मोंक देन आई एम कोई सैनिक अपनी आर्मी ड्यूटी समाप्त करके साधु बनेगा तो बहुत ही इजली मेरे से अच्छा साधु हो जाएगा क्योंकि उसमें ये करेज वगैरह सब कुछ है वही बात है कि उसको जगत मिथ्या है यह स्वीकार करना है और मेरे भीतर में जो आत्मन है हम सबके भीतर में उस आत्मन को प्राप्त करने के लिए साधना करनी है वो करेज वो विल पावर वो फियर लेसनेस इस सबसे वो इजली हमसे बहुत आगे चला जाएगा स्वामी जी कहते हैं ना कि अमेरिका में क्यों उन्होंने ज्ञान योग के बारे में प्रवचन दिए वेस्ट इन जनरल अमेरिका और ब्रिटेन दोनों में क्योंकि वे लोग भोग की चूड़ा सीमा के ऊपर में बैठे हैं तो वैसे ही वो चुड़ा सीमा पर नहीं बैठे मैं अभी वो मैजेला फिर ये वास्को डी गामा इन सब की मैं पढ़ रहा था उनके बारे में उनके एक्सप्लोरेशंस के बारे में पृथ्वी पूरा सर्कल करके कहां अनजाने समुंदर में चले जाना इस सब चीजों के लिए जो साहस करेज चाहिए उसके ऊपर में उन्होंने यह वेस्टर्न सिविलाइजेशन बिल्ड अप की है वेस्टर्न सिविलाइजेशन वैसे हवाहवा में बिल्ड अप नहीं हुई बातें करके कि हम लोग एशियन से बेटर है बिकॉज कि हमारी स्किन वाइट है ऐसा बोलते हुए ने ऐसी मान्यता करके नहीं हुई करेज मैं इमरे बल इंस्टेंसस ऑफ करेज इतनी घटनाएं है साहस शौर्य और वीर्य की इसके ऊपर में उनकी ये वेस्टर्न सिविलाइजेशन आज वहां पर बैठी है तो साहस का इतना परिचय जो लोग दे सकते हैं वे लोग एक भोग की सीमा तक चले जाएंगे बाद में यह पॉसिबिलिटी है कि यदि वह आत्मज्ञान के पीछे लगे तो वह आत्मज्ञान भी वह प्राप्त कर पाएंगे तो ये बेसिकली मेरा जो ज्ञान योग का जो अंडरस्टैंडिंग है वो मैंने आज शेयर किया सबसे पहले तो है थियोरेटिकल फाउंडेशन कि जगत मिथ्या है आत्मन इसके भीतर में है वह सही है और जगत के साथ में जो मैं इसको मैं कहता हूं मेरा अहंकार वो भी मिथ्या है तो वो एक थियोरेटिकल अंडरस्टैंडिंग और दूसरा है एक प्रैक्टिकल एस्पेक्ट साधना का एस्पेक्ट कि जीवन भर ऐसे छोटे छोटे छोटे करके हजारों हजारों डिसीजंस हमको लेने पड़ेंगे कि जो कि मुझे श्रेय की ओर ले जाए नहीं कि प्रेय रूपी इंस्टेंट ग्रेटफोर हजारों लाखों डिसीजन कोटी कोटी डिसीजन धीरे-धीरे करके मेरे विल पावर को मेरी इस रेजिस्टेंस कैपेसिटी को इतना स्ट्रांग बनाएंगे कि जब नजर के सामने टेंप्टेशन आ जाए या तो फिर नजर के सामने कोई बहुत बड़ा डिस्टरबेंस आ जाए तो इससे मेरे मन की शांति में कोई खले नहीं पहुंचेगी शांति में कोई डिस्टरबेंस नहीं होगा तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तस्त श्री राम कृष्णर्पण मस्तु