Skip to transcript
ClassesSaradakosh

Swami Vivekananda My Plan Of Campaign ·

मेरी क्रान्तिकारी योजना : स्वामी विवेकानन्द : भारतीय व्याख्यान || 3 Jan 2025

Invocation

ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः स्वामी विवेकानंद का लेक्चर फ्रॉम कोलंबो टू अल्मोड़ा सीरीज का एक प्रवचन माय प्लान ऑफ कैंपेन जो कि उन्होंने मद्रास में दिया था इसका जैसे हमने कल भी देखा था इस लेक्चर का स्ट्रक्चर यदि हम एनालाइज करें तो हमको तीन मेजर थीम या तीन मेजर पॉइंट देखने को मिलेंगे सर्वप्रथम थीम इट इज यूनिक टू दिस माय प्लान ऑफ कैंपेन के स्वामी जी पर जब जितने भी आक्रमण हुए विदेश में भी और यहां भारत की भूमि में भी उसका प्रति उत्तर या तो उसका रिप्लाई स्वामी जी ने कभी नहीं दिया स्वामी जी का अब जैसे और ठाकुर ने बिल्कुल कथामृत के शुरू में ही जैसे कि स्वामी जी के एटीट्यूड का एक आभास हमको मिल जाता है दूसरे ती पहली बार जब नरेद को इंट्रोड्यूस किया गया आई थिंक उसी समय का ये ठाकुर एक कहानी है कि ठाकुर नरेद को कहते हैं कि जब लोग तुम्हारी निंदा करें तो तुम क्या कहोगे तो ऐसा ही कुछ प्रश्न किया था ठाकुर ने तो नरेंद ने क्या उत्तर दिया था कि वो मैं सोचूंगा कि लोकेरा भाव भाऊ मतलब हाउ हाउ मतलब जब हाथी जब बाजार से जाता है तो कुत्ते कैसे भोकते हैं और हाथी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता तब नरेंद्र ने जब ऐसा कहा तो ठाकुर हंसने लगे और कहा कि नहीं इतना दूर भी नहीं जाना है अर्थात कि अपने मन में जो अपने निंदक है उनके प्रति इतनी तुच्छ होता का भाव भी पोषण नहीं करना है तो हमने देखा स्वामी जी के पूरे जीवन में कि स्वामी जी ने इस तरह का तुच्छ होता का भाव किसी के प्रति पोषण नहीं किया था उनके खुद के जो निंद दुक थे यहां तक कि ये जदार जो कि इसके बारे में बाद में बोलेंगे स्वामी जी या तो फिर यह क्रिश्चियन मिशनरीज इनमें से किसी ने तो स्वामी जी की हत्या करने का प्रयास किया था जब स्वामी जी ने कल हमको कहा कि देयर हैव बीन सर्टेन सरकमस्टेंसस ग्रोइंग अराउंड मी टेंडिंग टू थर्ट मी अपोज माय प्रोग्रेस एंड क्रश मी आउट ऑफ एक्जिस्टेंस इफ दे कुड मेरे इर्दगिर्द इस तरह की कुछ परिस्थितियों का निर्माण किया गया है जो कि भारत कल्याण के यह जो महायज्ञ है इस युग का इसके साधित होने में कुछ लोग बाधाएं डाल रहे हैं मेरा जो विकास है उस विकास में जैसे कि किसी तरह के विघ्न उपस्थित कर रहे हैं और इतना ही नहीं क्रश मी आउट ऑफ एक्जिस्टेंस इफ दे कुड यदि वह चाहते यदि वह कर पाते तो मेरी हत्या भी कर सकते थे तो यह जो क्रश मी आउट ऑफ एक्जिस्टेंस कभी-कभी हम तो लगता है कि स्वामी जी क्या थोड़ा ज्यादा ही मेलो ड्रामे िक होकर के बोल रहे हैं किंतु नहीं वो जो प्रसिद्ध कहानी है कि स्वामी जी किसी के घर पर गए थे विदेश में कॉफी उनको पीने के लिए दी गई और जैसे ही कॉफी का कप अपने मुंह के पास में लाए तो जैसे कि ठाकुर खुद कॉफी के भीतर में प्रकट हुए और उन्होंने कहा इसको पीना मत इसके भीतर में विष है इस कॉफी के भीतर में जहर मिलाया हुआ है हमको लगेगा कि अरे यह बात क्या सही है कि कोई इस तरह से इतनी दूर तक जाएगा साधुओं के प्रति इतनी ईर्षा कि साधुओं की हत्या करने के लिए वो तैयार हो जाए तो

Swami Akhandananda is poisoned by jealous people

किंतु देखिए कि इसी तरह का सिमिलर इंसिडेंट अखंडानंद जी के जीवन में भी है अखंडानंद जी जब यह काठियावाड़ में एक सेठ के वहां पर रहते थे अभी क्या था यह शेठ बड़ा धनी था तो अभी उसने सोचा कि ये अखंडानंद जी है यह गंगाधर महाराज और यंग है चेहरे पर ब्रह्म तेज है सुसंस्कृत है सुसंस्कार उनमें भरे हुए हैं साधु है तो ऐसे किसी को अपने पास में रखा जाए जिससे कि क्या है कि अपना भी कल्याण हो तो यह सेठ जी बार-बार अखंडानंद जी को अपनी हवेली पर बुलाते थे उस समय ही किसी ने अखंडानंद जी को चेतावनी दे दी कि यह सेठ के जो रिलेटिव है उनको यह डर लग गया है कि आप अभी इनकी संपत्ति को छीन लेंगे और वे लोग आप की हत्या का षड्यंत्र कर रहे हैं अभी अखंडानंद जी तो बेचारे भोले भोले थे एकदम उन्होंने सोचा अरे साधू की हत्या करने का पाप कौन अपने सर पर ले सकता है वो अभी भी बेचारे सतयुग में जीते थे और पता नहीं अभी यहां प कलयुग प्रारंभ हो गया है तो उस समय एक दिन वहीं पे एगजैक्टली देखिए सेम मैकेनिज्म जैसे स्वामी जी को कॉफी में जहर मिलाकर पिलाया गया था ये शेठ जी के वहां पर भी एक दिन उनको कॉफी दी गई तो अब अखंडानंद जी नेय कॉफी का कप लिया तो देखा कि कॉफी के ऊपर में ऑयल की तरह कुछ तरल पदार्थ तैर रहा है तो अखंडानंद जी ने सोचा कि होगा कुछ कुछ नया इंग्रेडिएंट्स कॉफी में डालेंगे किसको पता तो अभी ये ऐसा सोच कर के अखंडानंद जी कॉफी पीने लगे अभी उसका टेस्ट भी बड़ा विचित्र आ रहा है किंतु क्या है नाभी एक प्रोटोकॉल होता है ना कि गेस्ट के वहां पे गए हैं व कुछ खाने को पीने को दिया है फिर आप रिजेक्ट करके उसको रख देंगे वो भी तो ठीक नहीं लगेगा तो फिर यह अखंडानंद जी ने पूरी कॉफी पी ली जब वापस आए आई थिंक झंडू भट्ट के घर पर ही उस समय वो रहते थे वोह विख्यात जिसके झंडू बोलकर के ये जो पूरा आयुर्वेद लाइन जो आज का चल रहा है तो उन्हीं के घर पर वो रहते थे मोस्ट प्रोबेबली तो अभी यह वैद्य था तो उन्होंने अभी जैसे ही अखंडानंद जी घर गए उनके तो एकदम वोमिटिंग तो अभी उन्होंने सोचा ऐसा क्यों हो रहा है फिर उन्होंने ज वैद्य को जब कहा तो उन्होंने कहा कि आपके ऊपर में विष प्रयोग हुआ है आपको पहले ही चेतावनी दे दी थी कि ये शेठ जी के जो रिलेटिव है आपकी हत्या करना चाहते हैं तो उन्होंने सोचा कि अरे नहीं नहीं ऐसा कैसे हो सकता अखंडानंद जी बहुत ज्यादा भोले बाले हैं एक बार वो प्लेग का अच्छा वो कहानी बाद में बताता हूं पहले ही इसको खत्म कर देते हैं वरना कहानियों में से कहानियां निकलती ही जाएगी तो अभी ये फिर से वही देखिए भोले भाले इतने हैं बीमार हो गए हैं कैसे भी करके औषध का प्रयोग करके ठीक हुए हैं फिर से वो उस शेठ जी के घर गए वो जाना नहीं चाहते थे किंतु शेठ जी बार-बार बुला रहे उनकी उनके ऊपर में इतनी निष्ठा एकदम प्रकट हो गई थी तो फिर से उसके घर गए और फिर से उनको वही जहर दिया गया और अखंडानंद जी मने ये भी एक आश्चर्य की बात है देखा कि फिर से कॉफी के ऊपर में वही तरल पदार्थ दिख रहा है और जैसे कॉफी पीना प्रारंभ किया वही एक विचित्र तरह का टेस्ट आ रहा है और फिर भी अभी दिया है तो हम होते तो उसको फेंक ही देते कि क्या है यह और झगड़ बैठते शेट के साथ में कि देखिए आपके रिलेटिव्स मेरी हत्या करना चाहते हैं अखंडानंद जी ने फिर से कॉफी पी लिया फिर से वो जब वो वैद्य के वहां पे गए फिर से इतने बीमार हो गए फिर से उनकी ट्रीटमेंट करके उनको ठीक किया गया तब कहीं जाकर के उन्होंने ठीक-ठीक ये समझा कि हां या सही सही मेरी हत्या का षड्यंत्र है और इसी तरह की अच्छा ये जो अखंडानंद जी का जो भोला भला पन है ना अ जब प्लेग रिलीफ चल रहा था कलकाता में तो उस समय अ हमको पता है कि स्वामी जी ने वो एक पैंफलेट जो चिपकाने वाला आता है ना वो दीवाल के ऊपर में ऐसा एक तैयार करवाया था उसमें लिखा था कि मां भई ही मां भई ही अर्थात कि डरो मत डरो मत और फिर ऐसा करके वो प्लेग के बारे में कुछ इंस्ट्रक्शन कि इतना डरने की जरूरत नहीं हम लोग रिलीफ कर रहे हैं वगैरह वगैरह ऐसा करके पेंपलेट को कहीं दीवा पे चिपकाने के लिए लोगों में सर्कुलेट करने के लिए अखंडानंद जी एक बार निकले अभी देखिए कि यह जब यह हाई टेंशन एटमॉस्फियर होता है उस समय आप यह सब करने को जाएंगे आपको 10 बार सोचना है कि लोगों का रिएक्शन क्या होगा इन स्पाइट के आप लोगों को सहाय करना चाहते हैं लोग और ही कुछ सोचना शुरू कर देते हैं और उस समय कलकाता में एक ऐसी बात निकली थी कि ब्रिटिश गवर्नमेंट प्लेग का बहाना करके लोगों को झूठ मुठ का वैक्सीन दे रही है झुठ मुट की दवाई दे रही है या तो फिर इनको क्वारंटाइन करना चाहती है जिससे कि यह लोग कलकाता छोड़कर बाहर ना जाए और दूसरे सिटीज में दूसरे गांव में प्लेग ना फैलाए तो ऐसा करके गवर्नमेंट के ऊपर में एक बड़ा असंतोष उस समय चल रहा था ये एक प्रजा में था और गवर्नमेंट में ऐसा था कि कुछ असामाजिक तत्व यह जो एक डेंजर का फायदा उठा कर के लोगों के भीतर में एक तरह का अशांति खड़ा करना चाहते हैं और ब्रिटिश गवर्नमेंट को तो हमेशा यही क्रांतिकारियों का डर था और क्रांतिकारी अभी उसमें भी क्रांतिकारियों में भी 1857 का फर्स्ट फ्रीडम मूवमेंट अपना जो था उस समय जो लोग बच के निकल गए थे ब्रिटिश लोगों के चंगुल से उन्होंने कुछ उसमें से कुछ-कुछ लोग साधु होकर के गांव-गांव घूमते थे ये रेवोल्यूशन का ये उसका क्रांति का संदेश फैलाते फैलाते तो ब्रिटिश गवर्नमेंट को वैसे ही साधुओं प थोड़ी नाराजगी थी कि ये क्रांतिकारी है ना कि सही सही साधु है ना कि झूठ मूठ का कोई है तो ये दोनों ओर से विस्फोटक पर परिस्थिति थी और इसी विस्फोटक परिस्थिति में अपने भोले भाले अखंडानंद जी ऐसा वो पेंपलेट डिस्ट्रीब्यूटर को निकले अभी जैसे ही थोड़ा सा आगे गए कुछ भक्तों ने देखा कि अरे महाराज इस तरह की परिस्थिति में जा रहे हैं तो उन्होंने महाराज को कहा कि अभी आप जिस लोकेलिटी में जाएंगे ना वहां प बड़ी टेंस सिचुएशन है लोग भी बड़े उत्तेजित है पुलिस वाले भी डंडा लेकर के खड़े हैं कब क्या हो जाए कुछ ठीक नहीं आप वहां पे मत जाइए तो ये तो अखंडानंद जी है उनको तो ये सब चीजों से कोई वास्ता नहीं फिर स्वामी जी ने कहा है कि ये तो कोलकाता में प्लेग रिलीफ करना ही है तो ये लोकेलिटी में नहीं जाएंगे उस लोकेलिटी में नहीं जाएंगे ऐसा थोड़ी ना चलेगा अखंडानंद जी सीधे निकल गए अभी जैसे वहां पर पहुंचे देखा एक कुछ लोग खड़े थे ऐसा ही कुछ ट्रबल मतलब ट्रबल वाज ब्रूइंग इंग्लिश में कहते हैं ना कि वो कुछ ना कुछ गड़बड़ होने वाली थी ऐसी मतलब तैयारी करके कुछ लोग वहां प खड़े थे और कुछ पुलिस कांस्टेबल भी खड़े थे अभी अखंडानंद जी जाकर के उनको सीधा सधी जाकर के कहने लगे देखिए प्राण की भी परवाह नहीं है और कोई होता तो वहां से यह सब देख कर के वह दूसरे रास्ते से निकल लेता अखंडानंद जी सीधा सामने जाकर के खड़े रह गए और ये पेंपलेट डिस्ट्रीब्यूटर शुरू कर दिया कहने लगे रामकृष्ण मिशन की ओर से रिलीफ हो रहा है वगैरह वगैरह तो अभी ये जो लोग थे उन्होंने सोच लिया कि ये वैक्सीन देना चाहता है और उस समय ऐसी बातें चल रही थी अभी भी गांव-गांव में किसी किसी गांव में देखें ना कि वैक्सीन से इंपोर्टेंस हो जाता है नप सकता आ जाती है ऐसा सब वो बहुत चित्र विचित्र बातें वो लाई जाती है तो अभी इन्होंने बोल जो लोग खड़े थे उन्होंने सोचा कि बिल्कुल हमको कुछ गड़बड़ करने के लिए यहां पर आया तो वो सीधा अखंडानंद जी को मारने के लिए दौड़े अभी अखंडानंद जी अभी जब मारामारी की बात जा तो इनको तो दौड़ना ही पड़ेगा अभी दौड़ कर के य कांस्टेबल के पास में गए तो कांस्टेबल ने सोचा कि यह क्रांतिकारी ना कि ऐसा कुछ है निश्चय ये भी कुछ यहां पे इनसाइट इनसाइटमेंट जिसको कहते हैं ना तूफान जब चालू होता है रायोट चालू होता है कोई कोई लोग जाकर के लोगों को उत्तेजित करते हैं तो ऐसा इनसाइटमेंट करने के लिए ये यहां पर आया है तो एक ने वो लाठी दिखा कर के कहा रस्टा बड़ो गड़िए पड़ छे देखी मने कि यह जो ये जो करुणा का ये जो रस है तुम्हारे भीतर में लोगों के प्रति यह बड़ा ही बहुत ज्यादा निकल रहा है तुम में से देख रहा हूं तो पुलिस स्टेशन में ले जाएंगे थोड़ा सा डंडा मारेंगे सब ठीक हो जाएगा अभी पुलिस वाले ऐसा कह रहे हैं तो अभी क्या करें फिर ये जो डिवटी था साथ में फिर सब लोग उनको मारने के लिए दौड़ रहे अखंडानंद जी भी दौड़ रहे हैं क्या करें क्या ना करें तो ये डिवोटा का प्रेजेंस ऑफ माइंड था कि किसी के घर में ले गया और कोई डिवोटा या पहचान वाला था और उसमें जाकर के उनको छुपा दिया तो ये उनकी सरलता का उदाहरण किंतु ये देखिए कि साधुओं की हत्या करना ये कोई नई बात नहीं है अपने संघ में ही देखिए कि त्रिगुणा तीता नंद जी महाराज कैलिफोर्निया में थे और एक पागल ने आकर के बम ब्लास्ट करके उनकी हत्या कर दी थी तो यह पागल लोग है या तो फिर ये मोटिवेटेड लोग है कुछ कुछ लोग जिनका कि बिजनेस जो है वह खतरे में आ जाता है ऐसे लोग हमारे साधुओं को बिल्कुल पसंद नहीं करते थे जब हम इस तरह से इंटरफेयर करने इनकी दृष्टि से इंटरफेरेंस हमारी दृष्टि से जगत कल्याण

Attacks on Swami VIvekananda

तो देखिए कि जगत कल्याण करते करते भी आपको यह सब परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है और जब तक स्वामी जी के साथ में यह सब होता रहा और स्वामी जी ने खुद ने कहा है वो न्यू डिस्कवरीज किताब जो है उसका फर्स्ट एंड सेकंड वॉल्यूम उसमें बहुत ही डिटेल में स्वामी जी के अगेंस्ट में यह जो आक्रमण होता रहा पर्सीक्यूशन स्वामी जी का होता रहा बड़ा ही डिटेल उसमें चितार बड़ा ही डिटेल हमको लेखन मिलता है ऐसा है कि स्वामी जी किसी के घर पर गए हैं किसी किसी ने उनको बुलाया सज्जन ने कि आप आइए इस शहर में रहिए प्रवचन कीजिए स्वामी जी गए हैं तो पहले ही अभी यह सज्जन अभी ये मिशनरीज लोग हैं जो कि स्वामी जी के जो विरोधी थे वो लोग विरोध पक्ष क्या करेगा कि पहले तो यह जो सज्जन जो उ को बुला रहा है उसके किसी रिलेटिव्स को जिसके ऊपर में ये सज्जन का भरोसा है अभी कोई रैंडम आदमी जाकर के फोन करके कुछ बताएगा तो ये नहीं विश्वास करेंगे तो पहले तो साइकोलॉजी देखिए कैसे काम करती है पहले तो ये सज्जन का कोई भरोसा पात्र आदमी है उसको फोन करके बोलेंगे कि देखिए हम तो यह वाइट पीपल है गोरे लोग हैं हमारी तो सुपीरियर सिविलाइजेशन है सुपीरियर रिलीजन है ये काला आदमी काला फकीर कहां वो गुलाम देश से आ गया कहां वो अंधश्रद्धा हम में फैला रहा है और आपकी ये जो रिलेटिव है वो समझते ही नहीं है आप एक काम कीजिए उनको फोन करके बताइए कि काले आदमी का चरित्र कितना खराब है वो इससे पहले जिस सज्जन के घर पर रह रहा था वहां पे ये जो काम वाली बाई थी या उनकी लड़की थी उसके साथ में इसने इस तरह का दुराचार किया है ऐसा हमको समाचार मिला है अभी ये रिलेटिव भी थोड़ा सा ये प्रभावित हो जाएगा अरे चर्च के बड़े-बड़े लोग मुझे फोन करके बोल रहे हैं तो फिर वो अपना वो सज्जन जिसके यहां पर स्वामी जी रुकने वाले हैं उसको कोई भरोसा पात्र आदमी साइकोलॉजी वो उसको फोन करके बताएगा कि ये जो काला फकीर जो आपके घर में रुक रहा है उसका चरित्र तो बड़ा ही खराब है आपके घर में ये लड़कियां भी है आप संभालिए वरना वो कब से क्या कर देगा तो इस तरह से स्वामी जी खुद कहते हैं मेरे पास में कुछ-कुछ इन्विटेशन आते थे बाद बाद में वही लोग मुझे मैसेज करके बता देते थे कि नहीं नहीं इसको मत बुलाइए अभी एक काम कीजिए हम लोग बिजी है बाहर जा रहे हैं इसलिए अभी आप मत आइएगा पोलाइट डिक्लाइन तो कर रहे हैं किंतु स्वामी जी समझ गए कि मामला क्या है इसके पीछे

why swamiji replies to attacks on him now?

तो इस तरह के बहुत कुछ स्वामी जी के साथ में हुआ था स्वामी जी ने जब तक अमेरिका थे या तो फिर उससे पहले भी कोई उत्तर नहीं दिया किंतु अब उत्तर देने की बात क्यों आ गई देखिए हमने कल देखा था कि ठाकुर क्या कहते हैं ठाकुर दो कैटेगरी बनाते हैं साप को कहा कि तुमको दसना नहीं है तुमको फोस करनी है जिससे कि तुम अपनी आत्म रक्षा कर पाओ किंतु साथ-साथ में ही क्या कहा कि साधु को आत्मरक्षा करने की भी आवश्यकता नहीं जरूरत नहीं क्योंकि साधु की साधना ही है जितना दुख कष्ट आए उस सबको सहन करके इससे परे जाना टू ट्रांसडर्म हैप्पीनेस ऑफ दिस लाइफ तो अब ठाकुर ने जब ऐसा कहा तो प्रश्न होगा कि स्वामी जी क्यों अपनी आत्मरक्षा करने के लिए उन्होंने आगे कदम किया तो उसका उत्तर भी स्वामी जी ने ही एक जगह पर दिया है कहते हैं कि देखिए संघ का कार्य प्रारंभ होने वाला है उस समय यदि हम भारतीयों में जैसे हमने कल देखा था कि अमेरिका में स्वामी जी गए इस आशा के साथ में कि अमेरिका में योग और वेदांत भारतीय आध्यात्मिकता को यदि एक सराहना मिलेगी तो उसका हजार गुना असर यह भारतीय गुलाम मानस पे होगा तो यह जद पॉजिटिव असर यदि होती है तो नेगेटिव असर भी हजार गुना होकर के होगी यदि ये गोरे लोग ऐसा कहना शुरू कर देंगे कि स्वामी जी का चरित्र अच्छा नहीं है तो भारत में भी इस तरह की बात हजार गुना होकर के फैले गी और यह बेलूर मट का बेलूर मट तो बाद में बना ये रामकृष्ण संघ जो कि की नाम उनके मन में था वो रामकृष्ण संघ का जो कार्य प्रारंभ होने वाला था वो वही प्रारंभ से ही मिट्टी में मिल जाएगा इसके लिए स्वामी जी को यह प्रतिकार या तो फिर प्रति आक्रमण करने की आवश्यकता पड़ी और

Swamiji's Tyaga

स्वामी जी ने प्रति आक्रमण करने के पहले ही क्या कह दिया कि मैं अभी भी वही सन्यासी हूं जो कि आज से कुछ साल पहले दंड कमंडल लेकर के आपके शहर में जिसने प्रवेश किया था और मैं वही सन्यासी हूं जिसके सामने यह विशाल जगत खुला पड़ा हुआ है खुला आसमान खुला समुंदर खुली नदियां खुले पहाड़ मैं जब चाहूं आपका शहर छोड़ कर के आपका यह जो एक कंफर्ट जोन आपने खड़ा किया मेरे लिए वो छोड़ कर के कभी भी मैं जाकर के सन्यासी की तरह रह सकता हूं और यह स्वामी जी के लिए सिर्फ बातों की बातें नहीं थी प्लेग जब प्रारंभ हुआ स्वामी जी ने कह दिया मठ बेच करके हम लोग आमरा तो गाज तला साधु हम लोग तो पेड़ के नीचे रहने वाले साधु है ये मठ फट क्या है हमारे लिए मठ में देंगे किंतु गरीब लोगों ये प्लेग के रोगियों की सेवा करेंगे वो तो अच्छा था मां वहां पे थी और मां ने बोल दिया कि तुम कौन होते हो मठ बेचने वाले देखिए और किसी को ऐसा कुछ कहा जाता तो उसके मन पे क्या बीती किंतु ये स्वामी जी है अपना खून मने अपने देह अपने हृदय का खून बहा करके ये डायबिटीज वगैरह उनको तो स्वामी जी को वहीं प तो सब अमेरिका में प्रारंभ हो गया था स्वामी जी ने कहा मेरी पूरी प्राण शक्ति मैंने बहा दी है अमेरिका में वेदांत और योग का प्रचार करते-करते तो वहीं से तो ये डिसीज सब स्वामी जी के शरीर में आ गए तो अपना हृदय का खून लहू बहा करके जिन्होंने मठ की स्थापना की है उसी स्वामी जी को मां ने कह दिया कि मठ किसका है मठ तुम्हारा थोड़ी ना है तुम उसको बेचो ग तो ठाकुर का मठ है तो ये मतलब स्वामी जी के लिए सब बातें की बातें नहीं थी कि अभी भी पूरा जगत मेरे लिए खुला है यह सही सही है जो भी हाथ में आया फेंक देने के लिए वो तैयार थे और आखिर में ऐसा किया भी सही आखिर आखिर में जब सेकंड टाइम स्वामी जी अमेरिका से लौटे थे उन्होंने अपने को विड्रॉ कर दिया था मट के ये जो गवर्निंग बॉडी से और उनके गुरु भाइयों को ही धीरे-धीरे करके पूरा रिस्पांसिबिलिटी दे दिया था यहां तक कि यहां तक कि स्वामी जी ने यह जो कोर्ट केस वगैरह चल रहा था उनके घर पे तो जो कुछ कर्ज लिया था तो मठ से कर्ज लिया था अभी देखिए इंटरेस्टिंग सिचुएशन अपने खुद ने अमेरिका जाकर के मेहनत करके पैसा कमा के लाए हैं मठ चालू करने के लिए उसमें कि तू अपनी मां के लिए अपने भाई बहन के लिए घर की व्यवस्था करनी थे मठ में से 5000 का कर्जा लिया है और यह कर्जा चुकाने के लिए सेकंड टाइम जब स्वामी जी अमेरिका गए पता है कैलिफोर्निया में प्रवचन दे रहे हैं समझ रहे हैं कि स्वास्थ्य धीरे-धीरे करके बिगड़ता जा रहा है किंतु सर के ऊपर में वह चिंता है कि वह 5000 का कर्ज चुकाना है मठ को वो अपना ही मठ है अपने ही मेहनत करके पैसा इकट्ठा किया है किंतु फिर भी अपने पर्सनल कार्य के के लिए जो 5000 लिए 5000 का कर्ज चुकाना है इस चिंता में ही स्वामी जी ने यह जो बात-बात में यह कैलिफोर्निया के सैन फ्रांसिस को शहर में बीमार होने के बावजूद भी ये जो एक के बाद एक प्रवचन देना चालू रखा सब समय यह टेंशन कि 5000 कब खत्म हो मैं कब वापस दे पाऊं कर्ज से मुक्ति पाऊं और यह 5000 जब हो गया तब फिर उन्होंने कैलिफोर्निया का कार्य समाप्त करके भारत आके पैसा दे दिया और फिर अपने को विड्रॉ कर लिया देखिए ये थे स्वामी जी तो इस स्वामी जी को कोई डरा सकता है क्या तो स्वामी जी पहले ही कह देते हैं कि जो लोग मुझे डराना चाहते हैं मुझे धमकाना चाहता है उनके जो वे लोग क्या बोलेंगे मेरे प्रतिकार से इस बात की जैसे मुझे परवाह नहीं वैसे ही ये जो तमस में जो घिरे हुए लोग हैं जो लोग सोचते हैं कि हिंदू संन्यासी को चुपचाप रहना है उसको कोई भी टेंशन नहीं लेना है किसी बात का प्रतिकार नहीं करना है वही ठाकुर की वो कहानी याद दिलवा कर के कि हमको तो फोस भी नहीं मारनी है तो उन लोगों वे लोग भी मेरे इस प्रतिकार से क्या सोचेंगे इसकी मैं परवाह नहीं करता हूं क्योंकि स्वामी जी यहां पर सिर्फ अपने बारे में नहीं समस्त रामकृष्ण संघ के भविष्य के बारे में सोच रहे हैं जैसे स्वामी जी ने कहा पौदा जब छोटा होता है उसको आपको एक बैरियर बना कर के प्रोटेक्शन में रखना होगा आज रामकृष्ण संघ इतना बड़ा हो गया है कि 1015 कंट्रोवर्सी यदि आके चली भी जाए तो हमको बहुत ज्यादा कोई फर्क नहीं पड़ने वाला किंतु वो सब कार्य का प्रारंभ ही हो रहा था उस समय ऐसी कोई कंट्रोवर्सी आके गले में लग जाए तो फिर एक बड़ी मुश्किल हो जाए हमारे भविष्य के लिए यह सब सोच कर के स्वामी जी ने यह प्रतिकार किया प्रति आक्रमण किया और उसमें भी स्वामी जी जो जिस सेंटेंस में हम रुके थे जिसको मैंने हाईलाइट किया है वी हियर सो मच टॉक इन दिस वर्ल्ड सो मच टॉल टॉक इन दिस वर्ल्ड ऑफ लिबरल आइडियाज एंड सिंपैथी विद डिफरेंसेस ऑफ ओपिनियन यह जो लिबरल लोग है कुछ इस जगत में उनसे हम बड़ी-बड़ी बातें सुनते हैं टॉल टॉक बड़े-बड़े वो बातें हम सुनते हैं कि गुजराती में शब्द है बणगा फूक वा आई डोंट नो कि इसका हिंदी क्या होगा तो बहुत बड़ी-बड़ी बातें सुनते हैं कि हां दूसरों का जो ओपिनियन है उसके साथ में हमको सहानुभूति रखनी चाहिए दैट इज वेरी गुड ये अच्छी बात है बट एज अ फैक्ट वी फाइंड दैट वन सिंपस विथ अनदर ओनली सो लंग एस द अदर बिलीव्स इन एवरीथिंग ही हैज टू से यह बात तो बड़ी अच्छी है थियोरेटिकली किंतु प्रैक्टिस में हम क्या देखते हैं प्रैक्टिस में हम लोग य इवन ये जो लिबरल सो कॉल्ड बल तथा कथित यह जो मुक्त विचार वाले जो लोग है वे लोग दूसरे के साथ में सहमत तभी तक ही होते हैं जब तक दूसरे लोग उनके खुद के विचारों के साथ में सहमत होते हैं तो सामने वाला व्यक्ति जैसे ही अपने विचारों के विरुद्ध में कुछ बोलना शुरू कर दिया वैसे ही यह तथाकथित लिबरल सीधा नाराज होकर के उसके साथ में झगड़ा करने को तैयार हो जाते हैं यह बात स्वामी जी ने नहीं कही यह मैं कह रहा हूं बट ऐ सुने ही डे टू डिफर द सिंपी इज गोन ट लव वनी श स्वामी जी थोड़ा सा उसको माइल्ड करके कहते हैं जैसे ही सामने वाला हमारा विरोध में बात करता है या तो फिर उसके विचार हमारे से विभिन्न तरह के होते हैं वैसे ही उसके प्रति करुणा और उसके प्रति का प्रेम हमारे मन में से अदृश्य हो जाता है हवा में विलीन हो जाता है देखिए आजकल न्यूजपेपर जो लोग पढ़ते होंगे उनको इस सेंटेंस का कितना मतलब कितना एक्यूरेट है आज के युग के लिए वो बोलने की जरूरत नहीं रहेगी इसके बारे में यदि आज के युग को लेकर के चर्चा की जाए तो पूरा एक क्लास खत्म हो जाएगा दो-तीन क्लास खत्म हो जाएंगे इतना सब कुछ हम यह जो विदेश में जो लोग है तथाकथित लिबरल व भारत के ऊपर में भारतीय संस्कृति के बारे में हिंदू धर्म के बारे में जो एक ओपिनियन देते रहते हैं सब समय नेगेटिव ओपिनियन नेगेटिव ओपिनियन भारत में आएंगे तो क्या देखेंगे गरीबी दिखेगी यहां पर कचरा पड़ा हुआ है वहां पर कचरा पड़ा हुआ है पहले तो ऐसा में अभी तो मैं सब विदेशी लोगों को ज्यादा पढ़ना बंद कर दिया है किंतु एक जो हिंदू एक गुलाम मानस होता है ना अपना एक तो पहले था मेरा कि अच्छा बीबीसी पे वो भारत के बारे में वाराणसी के बारे में कोई एक रिपोर्ट आया है क्या है देखते हैं उनका डॉक्यूमेंट्री क्या कहता है तो ये लोग भी करेंगे क्या करेंगे ये जो वाराणसी जाएंगे फिर ये काशी वृंदावन जाएंगे धार्मिक स्थानों प जाकर के जहां पर कुड़ा पड़ा हुआ है जहां पे ये लोग कुछ असंतोष तत्व होता है ना असंतोष तो सभी सोसाइटी में सभी लोगों में होता है तो कुछ असंतोष तत्व होते हैं वो कूड़े कचरे का वो वीडियो लेंगे फिर असंतोष तत्व का वीडियो लेंगे तो मैं सोचता हूं कि अरे भारत में यही है सब गरीबी है असंतोष है डिसेटिस्फेक्शन है और ये कुड़ा कचरा कितना गंदा भारत है तो अभी कुछ दिनों पहले अभी यह जो एक वीडियो सब तरह के चल रहे हैं अमेरिका में वो जो एक हत्याकांड हुआ उसका वीडियो देखेंगे वो गली देखेंगे जो स्ट्रीट कहा जाता है कि बड़ी फेमस स्ट्रीट है उस स्ट्रीट में पूरा कड़ा कचरा पड़ा हुआ है पूरा जगत देख रहा है कोई कोई लोग बोल भी रहा है कि इतनी फेमस स्ट्रीट है इतना बड़ा टूरिस्ट पोर्ट है इतना कचरा क्यों है अभी आजकल अमेरिका के वीडियो देखेंगे इतना ही कूड़ा कचरा पड़ा हुआ है वहां की गलियों में जितना आपको भारत की गली में दिखता है तो बात यह नहीं है जैसे स्वामी जी ने

A tree is to be known by its fairest fruit

अखंडानंद जी को कहा था बड़ा ही मतलब एप्ट इस इस सिचुएशन में बड़ा ही एप्ट डिस्क्रिप्शन है अखंडानंद जी तिबेट जाकर के आए और स्वामी जी को कहते हैं कि मैंने देखा कुछ कुछ लोगों को मैंने मैंने इन जनरल मेरा ये रहा कोई लोग ऐसा कहते हैं कि बुद्धिज्म के बारे में कुछ विरोधी बातें करते हैं या तो फिर बड़े ही मटेरियल िक है तिबेट में जाकर के कहां बुद्धिज्म कहां धर्म कहां लामा ये तो मैंने और ही कुछ देखा वहां पे तो इमीडिएट स्वामी जी ने कह दिया कि अरे तुम जाओ कोलकाता में जाकर के माच बाजार में जाकर के मछली बाजार जहां प मछली बिक्र होती है सेल होती है वहां प जाकर के तुम बोलोगे कि अच्छा सभी जितने भी बंगाली है ऐसे ही है मछली बाजार का उदाहरण स्वामी जी क्यों दे रहे हैं वहां पे टिपिकल एक माइंड सेट वाले लोग इकट्ठा होते हैं जो मछली बेचना मछली खरीदना यानी कि बड़ा ही मटेरियल िक बड़ा ही क्या कहेंगे कि जिनका आउटलुक थोड़ा नैरो होता है ऐसे लोग वहां पे मलब झगड़ा वगैरह भी होगा तो स्वामी जी कहते हैं कलकाता के मछली बाजार में जाकर के तुम जो देखोगे तुम ऐसा कह दोगे कि ये पूरा कलकाता ही ऐसे बंगाली लोग ही ऐसे बने हुए हैं नहीं फ्रूट अ ट्री हैज टू बी नोन बाय इट्स फेरेट फ्रूट नॉट बाय एनी नंबर ऑफ रोटन फ्रूट दैट ट्री प्रोड्यूस एक पेड़ है उसकी पहचान क्या है जो सर्वश्रेष्ठ फ ये पेड़ देता है वो इस पेड़ की पहचान है नहीं कि दूसरे 100 मल सड़े हुए फल इस पेड़ के ऊपर में से गिरे वो इस पेड़ की पहचान नहीं है तो वैसे ही अखंडानंद जी को कहा कि तुम तिबेट में जाकर के बाजार में जाकर के लोगों की बातें सुनोगे फिर हमको आके कहोगे पूरा तिबेट देश ऐसा है लामा सब ऐसे है ये तो ठीक नहीं है एनी सिविलाइजेशन इज टू बी नोन बाय द ग्रेटेस्ट माइंड दैट सिविलाइजेशन हैज प्रोड्यूस्ड नॉट बाय द असामाजिक तत्व है ना कि डिस सेटिस्फाइड लोग है ना कि ये कूड़ा कचरा है पॉवर्टी है अभी ऐसा नहीं है कि पॉवर्टी कूड़ा कचरा इसके बारे में हमको कुछ करना नहीं है फिर एक दूसरा एक्सट्रीम स्टार्ट हो जाता है कुछ-कुछ लोगों का कहना है कि अपने देश में सब कुछ ठीक-ठाक है और कुछ करने की जरूरत नहीं है जद सब कुछ ठीक-ठाक होता तो स्वामी जी को ये सेवा यज्ञ करने का क्यों आवश्यकता आन पड़ती क्यों ऐसा कहते कि ये सेवा यज्ञ अभी 1500 साल तक चलेगा सो दोनों एक्सट्रीम से हमको बचना है पूरा एक विदेशी लोगों के गुलाम होकर के वे लोग जब भी कहते हैं भारत में तो कचरा है भारत में में पॉवर्टी है भारत में करप्शन है अभी यह जो विदेश में जितने भी रैंकिंग है यह डेमोक्रेसी रैंकिंग है फ्रीडम ऑफ प्रेस रैंकिंग है फिर ये फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन सब में देखिए कहां-कहां पे तो भारत अफगानिस्तान से पाकिस्तान से पीछे है श्रीलंका से पीछे है ऐसा कैसे हो सकता है भाई ऐसा इसलिए होता है मैंने मैं भी सोचता था कि इस तरह से यह जो फ्रीडम और ये सब इंडेक्स में इतना पीछे क्यों है इंडिया डेमोक्रेसी इंडेक्स में फिर मैंने थोड़ा सा इसका इन्वेस्टिगेशन करना सोचा कि क्या है इसके पीछे तो एक्चुअली क्या है यह जो एजेंसीज है अभी देखिए कि ऐसा नहीं है कि एक कंसंट्रेटेड एक अटैक है भारत के ऊपर में वो होगा कुछ-कुछ लोग भारत को बदनाम करना चाहते हैं देख नहीं पा रहे हैं कि लार्जेस्ट कंट्री इन द वर्ल्ड मोस्ट पॉपुलर कंट्री एंड विद द लार्जेस्ट अमाउंट ऑफ जीडीपी रेट ऑफ ग्रोथ ये अपना भारत का सबसे ज्यादा है जी-20 कंट्रीज में तो ये लोग नहीं देख पा रहे हैं ईर्षा के मारे भारत के विरुद्ध में ये सब बातें करते हैं स्ट्रांग गवर्नमेंट आती है तो उनकी निंदा करते हैं दैट इज वन पॉइंट कि कंसंट्रेटेड एफर्ट चल रहा है किंतु एक दूसरा पॉइंट भी है जो कि मुझे थोड़ा रिसर्च करने के पता चला ये जितने भी इंडेक्स वाली एजेंसियां है वे लोग क्या करते हैं लोकल लोगों को कुछ-कुछ होते हैं प्रॉमिनेंट उनको पकड़ करके रखते हैं और उनके पास में सेय फीडबैक लेते हैं और जो फीडबैक उनके पास में जाता है उस फीडबैक के ऊपर में ये लोग इंडेक्सिंग करते हैं तो सभी देश में उनके ये जो लोकल कुछ लोग रहते हैं रिपोर्ट करने वाले फीडबैक देने वाले इंडिया में जितने भी फीडबैक देने वाले लोग हैं वो सब भारत को धक् काते हैं भारतीय होने के बावजूद ये जो एक बहुत ज्यादा पॉलिटिक्स में नहीं जा कर के व हमको पता ही है कि अ जब भी प्रोग्रेस होता है जब ये ट्रेडिशनल वैल्यूज का एक राइज होता है तभी यह कुछ-कुछ जिसको यहां पे स्वामी जी लिबरल शब्द यूज करते हैं वैसे लिबरल लोग सिर्फ वहां पे नहीं अपने यहां पे भी है और उन लोगों से देखा नहीं जाता कि अपनी संस्कृति थ अपनी ट्रेडिशनल वैल्यूज अपना हिंदू धर्म उसका राइज हो रहा है जैसे ये रिफॉर्म सोसाइटीज का था कि ये हिंदू धर्म ही सब समस्या की जड़ है जो छुआछूत प्रथा यह सती प्रथा यह बाल्य विवाह प्रथा यह दहेज प्रथा फिर यह काला पानी क्रॉस नहीं करना स्वामी जी जब अमेरिका से वापस आए तो वह उनको दक्षिणेश्वर काली मंदिर में नहीं प्रवेश करने दिया गया एक बार जब पहली बार आ गए थे तो उनका साहस नहीं था शुरू शुरू में कुछ बोलने का तो जब स्वामी जी जब गए वापिस तो गर्भ ग्रह वगैरह सब गंगा के पानी से धुआ गया क्योंकि यह काला पानी क्रॉस करके आया है जात बहार हो गया है उसके आने से काली मंदिर अछूत हो गया है ऐसा सोच कर के मां काली क्या कभी अशुद्ध होती है पागल लोग थे ये सब भी तो ये जितना भी हम देख रहे हैं जिसको अंधश्रद्धा कहते हैं जिनको कि एंटी डेवलपमेंट एलिमेंट्स कहते हैं वो सब हिंदू धर्म से आए हैं हिंदू धर्म को हटाओ एक तो विदेशी कुछ भावधारानी हो जाएगा ऐसा जो भारत में रहने वाले लिबरल लोग कुछ सोचते हैं और लिबरल लोगों में भी यह जो रिफॉर्म सोसाइटीज थी यानी कि सिर्फ बात यह नहीं है कि विदेशी संस्थाएं जो कि भारत का अहित चाहती थी स्वामी जी का अहित चाहती थी उनके साथ में यह देशी लोग भी ये अपनी रिफॉर्म सोसाइटीज के कुछ-कुछ लोग भी आन मिले थे तो दोनों के बारे में स्वामी जी कह रहे हैं आज भी वही बात सही है जैसे मैंने कहा कि ये जो इंडेक्सिंग जो एजेंसीज होती है वे लोग रिलाई करती है अपने लोकल लोगों के फीडबैक के ऊपर में और भारत एक ऐसा देश है जहां पर सबसे ज्यादा इस तरह के भारत अपने ही देश को गाली देने वाले सबसे ज्यादा लोग भारत में ही मिल जाएंगे और यदि देखें कि इवन पाकिस्तान है इवन अफगानिस्तान है इवन चाइना है जहां पे जो लो लोकल लोगों प भरोसा किया जाता है कि आप हमको फीडबैक दीजिए वे लोग अपने देश के विरुद्ध में बियोंड वन पॉइंट जाकर के नहीं बोलेंगे यहां पे भारत में उसका बिल्कुल विरुद्ध है अपने ही देश को गाली देना जैसे कि यहां पर एक धर्म हो गया है और बार-बार में बात-बात में यह हिंदू धर्म ऐसा है हिंदू धर्म ऐसा है तो यह दोनों जैसे आज मिले हुए हैं भारत के ही कुछ लोग भारतीय होने के बावजूद भारतीय धरोहर संस्कृति के बारे में बड़ा ही उनका एक विचित्र तरह का विचार है और वह विदेशियों के साथ में मिलकर के सब करते हैं स्वामी जी के टाइम में भी ऐसा था वही मजूमदार की बात बाद में ही आएगी तो यहां पर स्वामी जी कहते हैं यह जितने भी लिबरल आईडिया रखने वाले लोग हैं उन लोगों में देखेंगे कि जहां तक आप जब तक उनके साथ में सहमत हो रहे हैं तभी तक वो आपका स्वागत करेंगे जैसे ही उनसे थोड़ा सा ही डिफरेंट हुए तो इमीडिएट आपका विरोध करना शुरू कर देंगे अभी ये लिबरलिज्म सही सही ठाकुर का था देखिए ठाकुर बार-बार कहते थे कि किसी का भाव भंग नहीं करना है जो जिस भाव से ठाकुर के पास में आता था उसी के भाव से ठाकुर रंग देते थे अपने को जैसे कि जो वैष्णव आएगा तो वैष्णव की भाव में बात करेंगे यदि शाक्त आएगा तो शाक्त के भाव में बात करेंगे यह ब्राह्मण समाजी कहते थे सब समय पूरे गांव में जाकर के प्रचार करते थे कि व परमहंस महाशय तो हमारे ही दल के हैं और उनका गलत भी नहीं था जब ठाकुर उनके साथ में बात कर र हैं जैसे कि उन्हीं के जैसे हो जाएंगे ठाकुर बात यह नहीं है कि वट इज द हाईएस्ट अवेलेबल फॉर यू बात यह है कि आप जहां पे है वहां से नेक्स्ट स्टेप उसके बाद का स्टेप आपके से ले पाएंगे बिगिन फ्रॉम वेयर यू आर डोंट वरी अबाउट व्हाट इज द हाईएस्ट गोल बिफोर यू वो कितना दूर है कब वहां पर पहुंचेंगे किसको पता है जहां पे है वहां से प्रारंभ करके प्रकाश की ओर शुद्धता पवित्रता की ओर आप जितना जा पाए उतना जाइए तो दैट वाज ठाकुर्स एटीट्यूड सही सही में यदि लिबरल शब्द जिसके बारे में प्रयोग कर सकते हैं करना चाहिए तो वो ठाकुर श्री राम कृष्ण परमहंस और यह भगवत गीता भगवत गीता में देखिए सभी जितने भी मत है सभी ऐसा कभी नहीं कहा गया कि ये ज्ञान योग का ही आचरण करो भक्ति गलत है या तो भक्ति का आप फॉलो करो यह राज योग गलत है ध्यान गलत है जितने भी चैप्टर है एक एक योग की महिमा गाई गई है कभी-कभी कहा भी जाता है कि यह योग श्रेष्ठ है किंतु कभी भी यह नहीं कहा जाता कि दूसरे योग गलत है तो ये जो ये जो मत समन्वय है वो समन्वय तो सबसे पहले सबसे पहले समन्वय तो भगवान कृष्ण है जो कि श्रीमद् भगवत गीता में उन्होंने समन्वय किया है दूसरों के मत को अपना लिया है कहा है कि आप जहां स्वामी जी बड़ा सुंदर बात कहते हैं अ मैन नेवर प्रोग्रेसेस फ्रॉम एरर टू ट्रुथ मैन ऑलवेज प्रोग्रेसेस फ्रॉम लोअर ट्रुथ टू हायर ट्रुथ एक मनुष्य कभी भी गलत होकर के सही की दिशा में आगे नहीं बढ़ता उसका सत्य ही है उसकी जो पोजीशन है बस वही बात है कि उसका जो सत्य है उससे भी एक उतर सत्य की ओर उसको जाना है सो दिस इज अवर हिंदुइज्म जितने भी धर्म है जितनी भी साधनाएं हैं सबका समन्वय ठाकुर का खुद का जीवन गिरजा घर में जाकर के उन्होंने जीसस का व उन्होंने दर्शन किया फिर मतलब ये इस्लाम धर्म की साधना करना क्रिश्चन धर्म की साधना करना इतना लिबरल और कौन हो सकता है मने भारत के जितने भी ये मत थे वो मत में जो आपस में ये जो था उनका ये डिफरेंस ऑफ ओपिनियन उसको तो वो ट्रांसजेंडर ही गए वैष्णव शाक्त द्वैत अद्वैत ये सबको तो ट्रांसजेंडर ही गए किंतु साथ में ही विदेशी जो धर्म थे उनको भी अपना करके उनके पत को चल कर के उनका जो सर्वोच्च धय है उसको प्राप्त करके उसको भी जैसे कि अपने में समाहित कर दिया सी कि किस तरह से उन्होंने अपने में यह सभी धर्मों को समाहित किया है सो दिस इज अवर ठाकुर यदि सही सही में लिबरल होना है तो ठाकुर की तरह लिबरल होना है श्र राम कृष्ण की तरह लिबरल होना है श्री कृष्ण की तरह लिबरल होना है नहीं कि आज के कुछ विदेशी तत्व स्वामी जी के समय के भी विदेशी तत्व और ऐसे कुछ हमारे देशी तत्व जो कि हमारे देशी धर्म को ही भारतीय धरोहर को ही सुबह उठ कर के गाली देना शुरू करते हैं सो हियर स्वामी जी का इसके ऊपर में बहुत डिस्कस कर सकते हैं खास करके करंट पॉलिटिकल कॉन्टेक्स्ट में किंतु फिर वो एक पूरा एक डिफरेंट डायरेक्शन में चला जाएगा सो लेट अस गो अहेड फ्रॉम र

There are others, again, who have their own axes to grind; and if anything arises in a country which prevents the grinding of them, their hearts burn, any amount of hatred comes out, and they do not know what to do.

देयर आर अदर्स अगेन हु हैव देयर ओन एक्सेस टू ग्राइंड वहां पे ऐसे लोग भी है कुछ जिसका कि अवर ओन एक्सेस टू ग्राइंड अर्थात कि अपना एक हेतु सिद्ध करना है अपना हेतु सिद्ध करने वाले लोग भी कुछ है एंड इफ एनीथिंग अराइज इन अ कंट्री व्हिच प्रीवेंट्स द ग्राइंडिंग ऑफ देम दे हार्ट्स बर्न एनी अमाउंट ऑफ ट्रेड कम्स आउट एंड दे डू नॉट नो व्हाट टू डू किसी देश में जाकर के देश का अहित भी हो तो भी अपना एक बेनिफिट उसमें से निकाल लेना है ऐसे सोचने वाले लोग भी है और जब यह लोग देखते हैं कि उस देश में जाकर के अपना हेतु सिद्ध करने में उनको कुछ रुकावट बाधाएं आ रही है तो उनका हृदय जैसे कि जल जाता है और यहां पर स्वामी जी का इशारा किसकी ओर है क्रिश्चन मिशनरियों की ओर यह लोग क्या करते थे तो यह जो धनी महिलाएं होती थी अभी जिनको पाप का डर है बहुत सारा रुपया तो क्या है कि दो नंबर करके कमाया गया है तो अभी यह पादरी लोगों के हाथ में जाकर के ऐसे धनी लोग पढते हैं और पादरी लोग क्या करेंगे क्रिश्चियन मिशनरीज क्या करेंगे उनको ये हेल्प अर्थात की नरक का डर दिखाएंगे और कहेंगे डोनेशन दो ये हिद जितने भी है अफ्रीका और एशिया में विधर्मी जो भी है उनको क्रिश्चियनिटी का रास्ता दिखाओ गिव देम द लाइट ऑफ गॉड मने ईश्वर का प्रकाश इनको दिखाओ तो उनका कल्याण होगा तो आप नरक में से बच जाएंगे ऐसा करके उनसे पैसा निकालेंगे और यहां पे आकर ये प्रवृत्तियां करेंगे और इस प्रव करने में बाधा तब आएगी जब इसी काले देश का एक संत वहां जाकर के उनको ये मिशनरियों से 10 गुना अच्छा धर्म समझाए तब ये पैसे वाले लोग सोचना शुरू कर देंगे कि अरे इसको मैं ईश्वर के प्रकाश देने के लिए मैं पैसा गवाता था क्या बात है ये किस तरह का नाटक है तो दोनों तरह से इनको ये तकलीफ हो रही थी भारत में कन्वर्जन बंद हो जाएगा विदेश में पैसों का जो स्रोत है सोर्स है वो भी बंद हो जाएगा स्वामी जी के वहां पर रहने से तो ऐसे लोगों का हृदय जल रहा था व्हाट

What harm does it do to the Christian missionary that the Hindus are trying to cleanse their own houses?

हार्म डज इट डू टू द क्रिश्चियन मिशनरी दैट द हिंदू आर ट्राइट क्लींज देयर ओन हाउस यह जो मिशनरी है उनको क्या तकलीफ हो रही है जब हिंदू अपना खुद का घर ठीक करने में लगे हो व्हाट इंजरी विल ट डू टू द

What injury will it do to the Brahmo Samaj and other reform bodies that the Hindus are trying their best to reform themselves? Why should they stand in opposition? Why should they be the greatest enemies of these movements?

ब्रह्मो समाज एंड अदर रिफॉर्म बॉडीज दैट द हिंदू आर ट्राइबेन देम सेल्व यह ब्रह्म समाज है ना कि और दूसरे जो रिफॉर्म करने वाले लोग है उनको क्या पड़ी उनको क्या पेट में दर्द हो जाता है जब हम हिंदू लोग अपना घर ठीक ठक करने में ल हो व्हाई शुड दे स्टैंड इन अपोजिशन वे लोग क्यों विरोध में खड़े हैं व्हाई शुड दे बी द ग्रेटेस्ट एनिमी ऑफ दिस मूवमेंट ये रिफॉर्म सो कॉल्ड रिफॉर्मर्स सो कॉल्ड ब्रिंग्स ऑफ लाइट इन लोगों को क्या तकलीफ हो रही है जब हम हिंदू लोग अपना घर ठीक ठाक कर रहे हैं जब हम लोग जग गए हैं हजार साल की निद्रा से स्वामी जी कहते हैं ना द जायंट इज अवेक निंग आफ्टर अउ इयर्स यहां पे एक बड़ा इंटरेस्टिंग मैं गुजराती ट्रांसलेशन देख रहा था कोट में जब था तो यह अभी क्या है कुछ कुछ ट्रांसलेशन डिक्शनरी देख कर के किए गए तो अभी स्मी 18 1963 स्वामी जी का बर्थ सेंटिन था उस समय कंप्लीट वर्ष को ट्रांसलेट करना है गुजराती में तो अभी उस समय तो इतने साधु या तो ऐसे लोग नहीं थे जो कि स्वामी जी को बड़ा अच्छे से समझते हो और गुजराती करें तो कुछ कुछ प्रोफेसर लोगों को ऐसे इंटेलेक्चुअल लोगों को रखा गया जिनको कि स्वामी जी के बारे में शायद इतना अंडरस्टैंडिंग नहीं किंतु गुजराती और इंग्लिश दोनों लैंग्वेज अच्छे से समझ में आती है तो अभी यह जो स्वामी जी का सेंटेंस है और ये लोग क्या करेंगे कि अब कुछ अर्थ घटन करना है तो डिक्शनरी पे आधार रख के करना है तो यह जो स्वामी जी का सेंटेंस है तो जायंट इज अवेक निंग अर्थात कि होना क्या चाहिए यह भारत रूपी महा महा विराट पुरुष महापुरुष ये हजार साल की निद्रा से जग रहा है ऐसा तो एक होना चाहिए उसकी बजाय देखा कि जायंट का डिक्शनरी का क्या अर्थ है तो लिखा है राक्षस तो ये लिख दिया कि ये राक्षस एक साल की नींद के बाद में जग रहा है मैंने जब देखा मैंने कहा ये राक्षस बना दिया भरत को ये देखिए इन लोगों ने तो अनइंटेंशनली ये गलती कर दी किंतु बाकी ये जो उस समय की ये जो कुछ रिफॉर्मर्स थे विदेशी और भारतीय उस समय के भी और आज के भी यह लोग लिटरली यह भारत का यह जो उत्थान है भारत का जो पुनः यह जो राइज हो रहा है उसको यह लोग राक्षस उठ रहा है वैसा ही समझते हैं उनके मन में ये दो बात एक तो हो गई है एक पहली बात जो लोग रिफॉर्म चाहते हैं वे लोग कहेंगे कि भारत के जो जितने भी दुर्गुण है भारत के देश में वो सब हिंदू धर्म की वजह से आए हैं फिर से हिंदू धर्म का जागरण होगा तो वही दुर्गुण वही अंधश्रद्धा वापस आएगी यह तो एक लोग एक दल का मानना था दूसरे दल का मानना था कि भारत को हम अपने विचारधारा में कन्वर्ट करेंगे तो भारत हमारा एक आश्रित हो कर के रहेगा गुलाम जदी नहीं होगा ये सबको पता है कि गुलामी का पीरियड ज्यादा नहीं टिकने वाला है कभी ना कभी तो इनको फ्रीडम देना ही पड़ेगा तो जब फ्रीडम दे दे उस समय किंतु उनका इस तरह से ब्रेन वश करके फ्रीडम दे कि आखिर में तो उनको हमारे ही पास में आकर के हमारी ही भिक्षा प जीना पड़ेगा बाद बाद में स्वामी जी कहते भी है यह जो निग्रो लोग है अमेरिका के जिन लोगों को यह अमेरिकन सिविल वॉर में आजादी दिलाई गई उन लोगों की परिस्थिति किंतु ऐसी हो गई है कि जब वे लोग गुलाम थे तो एटलीस्ट उनका एक मालिक था मालिक उनको खाना खिलाता था किंतु अभी ये लोग इंडिपेंडेंट हो गए हैं उनको नौकरी दे देने वाला कोई नहीं है और उनकी परिस्थिति भिखारी से भी बदतर हो गई है तो इस तरह का फ्रीडम किस काम का तो बेटर है हम इंडियन लोग भी हो सकता है कुछ कुछ सोचना शुरू कर दे इस तरह का फ्रीडम किस काम का कि हमारे पुरखे जो थे सब हमारे दुश्मन थे हमारा जो धर्म है वह पूरा हमारा ही अहित करना चाहता था बेटर है कि विदेशी विचार विदेशी वर्तन विदेशी भाषा विदेशी संस्कृति अपना ले और विदेश के गुलाम होकर के हम रहे माने वे लोग जद अपनी आर्मी को नेवी को पिस भी बुला देंगे फिर भी हम इंटेलेक्चुअली उनके गुलाम हो कर के रहेंगे ये पूरा सिविलाइजेशनल कन्वर्जन एक प्लान था उनका तो स्वामी जी यहां पर किंतु उनका ये जो दिवा स्वप्ना है उसमें वो एटम बम फेंक देते हैं कहते हैं कि जब हम हिंदू अपना घर ठीक करने में लगे हैं तो इन लोगों के पेट में क्या दर्द हो रहा है वई आई आस्क क्यों मैं पूछता हूं इट

Why—I ask. It seems to me that their hatred and jealousy are so bitter that no why or how can be asked there.

सीम्स टू मी दैट देर हेट ेड एंड जलसी आर सो बिटर नो वई और हाउ कैन बी आस्क देयर लग रहा है क्यों मैं पूछता हूं क्यों इन लोगों के पेट में दर्द हो रहा है फिर स्वामी जी क्या उत्तर देते हैं ऐसा लग रहा है कि इनकी हमारे प्रति णा घृणा और द्वेष ट्रेड और जलसी घृणा और ईर्षा ये इतने स्ट्रांग है इतने जबरदस्त है कि हम कुछ भी चाहे करें वो हमको कभी भी एक स सन्मान और एक सहान अनुभूति की दृष्टि से कभी नहीं देखने वाले हैं वह हमेशा घृणा और ईर्ष में अपने मन को इतना यह करके रखेंगे हृदय में ऐसी आगुण जला के रखेंगे कि हमेशा हमारा अहित ही चाहेंगे फोर इयर्स अगो व्हेन आई अ

Four years ago, when I, a poor, unknown, friendless sannyāsin was going to America, going beyond the waters to America without any introductions or friends there, I called on the leader of the Theosophical Society.

पुअर अननोन फ्रेंडलेस सन्यासिन वाज गोइंग टू अमेरिका गोइंग बियोंड द वाटर्स टू अमेरिका विदाउट एनी इंट्रोडक्शंस ऑफ फ्रेंड्स देयर आई कॉल्ड ऑन द लीडर्स ऑफ द थियोसोफिकल सोसाइटी चार साल पहले मैं एक गरीब सन्यासी एक फकीर सन्यासी बिना किसी मित्र के बिना किसी पहचान के अमेरिका जाने का साहस कर रहा था उस समय यह थियोसोफिकल सोसाइटी के कुछ नेताओं को मैं मिला आई कॉल्ड ऑन द लीडर ऑफ द थियोसोफिकल सोसाइटी इस थियोसोफिकल सोसाइटी के नेता को मिला नेचुरली आई थॉट ही बीइंग एन अमेरिकन एंड अ

Naturally I thought he, being an American and a lover of India, perhaps would give me a letter of introduction to somebody there.

लवर ऑफ इंडिया परहे पस वुड गिव मी अ लेटर ऑफ इंट्रोडक्शन टू समबलपुरी कि यह व्यक्ति जो कि अपने को भारत का मित्र दिखाता है भारत का मित्र बोलकर घोषित करता है और खुद एक अमेरिकन है तो हो सकता है कि मैं अमेरिका जाऊं तो मुझे एक लेटर ऑफ इंट्रोडक्शन दे देगा वहां पर जाकर के मैं किसी के घर रुख सकता हूं कोई मुझे सहाय कर सकता है तो क्या हुआ किंतु ही

He asked me, "Will you join my Society?"

आस्ड मी उस आदमी ने मुझे पूछा विल यू जॉइन माय सोसाइटी क्या तुम हमारी थियोसोफिकल सोसाइटी के मेंबर बनोगे नो आई रिप्ला मैंने कहा नहीं हाउ कैन आई मैं कैसे जॉइन कर सकता हूं फॉर आई डू नॉट बिलीव इन मोस्ट ऑफ योर डॉक्ट्रिन क्योंकि तुम्हारे जो मत है उसमें से किसी मत पे मेरा विश्वास नहीं है तो क्या उत्तर मिला देन आई एम सॉरी आई कैन नॉट डू एनीथिंग फॉर यू उस नेता ने कहा तो फिर में मुझे खेद है कि मैं आपके लिए कुछ नहीं कर सकता एक्चुअली स्वामी जी कैसे अपेक्षा कर लेते हैं कि इस प्रश्न का उत्तर इस तरह से देने के बाद में वो आपको लेटर ऑफ इंट्रोडक्शन देगा स्वामी जी भी थोड़े अखंडानंद जी की तरह भोले हैं अपेक्षा कर लेते हैं कि वो मानव इनके हृदय में है तो सामने वाले की भी हृदय में है और जैसे स्वामी जी खुद उसको हेल्प करते हैं कोई आक के मान लीजिए स्वा बेलूर मठ में आके कहेगा कि अच्छा आपके वहां पर मुझे रहने को दीजिए यह कुछ फैसिलिटी दे दीजिए और हम कहेंगे ठाकुर में विश्वास करते हो तो बोलेगा कि नहीं हमको ठाकुर में विश्वास नहीं तो फिर क्या हम उसको मदद करेंगे आई डू नॉट नो तो ये ह्यूमन टेंडेंसी कि आप या तो मेरे मत के साथ में आपका यह रखिए विचार रखिए या तो हमारे साथ जवाइन कीजिए तभी हम आपको सहाय करेंगे अदर वाइज क्यों सहाय करेंगे किंतु स्वामी जी थे भोले भले थे वो सोच लिए कि अपने को भारत का मित्र कहलाता है तो भारत का जब उत्थान होगा तो उसमें वह बड़ा खुशी खुशी सहाय करेगा किंतु नहीं ऐसे लोगों का उद्देश्य भारत का उत्थान नहीं था भारत के उत्थान के नाम पे अपना एक बेनिफिट निकाल देना यह उनका हेतु था बहुत बार ऐसा कभी-कभी मैंने ऐसा सुना भी है आई डोंट नो कि सही कितना है इसमें कि ये जो कुछ कुछ सेवाभावी संस्थान होते हैं वह पैसा लेकर के जहां पर सेवा करते हैं फिर व फोटोग्राफ भेजते हैं यह लोग गरीब है ये लोग गरीब है ऐसा करके फिर जब वहां का जब एक डेवलपमेंट चालू हो जाता है तो ये लोग बेचारे बड़े दुखित हो जाते हैं क्यों क्योंकि अभी गरीब लोगों के फो फोटो लेकर के डोनर को भेजना डोनर से पैसा आना वो तो बंद हो जाएगा अभी आप अच्छे-अच्छे घर गवर्नमेंट योजना में मिल गए हैं और उसमें रहने वाले लोगों के फोटो भेजेंगे थोड़ी ना आपको ड डोनेशन मिलने वाला है बात ये नहीं है कि वो लोग गरीबों का भला चाहते हैं गरीबों के नाम पर डोनेशन ले लेना चाहता है तो ऐसा आज भी है उस समय भी है अभी जो मैंने सुना सही गलत मुझे पता नहीं ये सब हवाहवा में बहुत चलता है सो व्हाट एवर दैट वाज नॉट पेविंग द वे

That was not paving the way for me.

फॉर मी किंतु ये जो स्वामी जी कहते हैं ये जब मैंने कहा कि मुझे थोड़ा सा सहाई करोगे लेटर ऑफ इंट्रोडक्शन दोगे तब उसने पूछा कि हमारे मत में विश्वास करते हैं स्वामी जी ने कहा नहीं तो उन्होंने कहा कि नहीं देंगे तो स्वामी जी ने कहा कि क्या ये मेरे लिए रास्ता आसन करना था नहीं बिल्कुल नहीं आई रिच्ड अमेरिका एज यू नो थ्रू द

I reached America, as you know, through the help of a few friends in Madras. Most of them are present here. Only one is absent, Mr. Justice Subramania Iyer, to whom my deepest gratitude is due. He has the insight of a genius and is one of the staunchest friends I have in this life, a true friend indeed, a true child of India.

हेल्प ऑफ अ फ्यू फ्रेंड्स इन मद्रास मैं अमेरिका पहुंचा आप लोगों को पता है मद्रास के कुछ मित्रों की सहाय से मोस्ट ऑफ देम आर प्रेजेंट हियर ज्यादातर यह मेरे मित्र यहां पे इस हॉल में इस प्रवचन में उपस्थित है ओनली वन इज एब्सेंट मिस्टर जस्टिस सुब्रह्मण्य अयर सिर्फ एक मिस्टर जस्टिस सुब्रह्मण्य अयर एब्सेंट है टू हुम माय डपेस्ट ग्रेट च्यूड इज टू जिनके प्रति मेरी सबसे गहन कृतज्ञता में उनके प्रति ज्ञापित करता हूं ज्ञापित करनी चाहिए ही हैज द इंसाइट ऑफ ए जीनियस एंड इज वन ऑफ द स्टा चस्ट फ्रेंड आई हैव इन दिस लाइफ अ ट्रू फ्रेंड इनडीड अ ट्रू चाइल्ड ऑफ इंडिया वो उनके पास में एक जीनियस यानी कि एक प्रतिभाशाली मेधावी व्यक्ति की एक इनसाइट है एक अंतर्दृष्टि है इनसाइट यानी अंतर्दृष्टि है और वो मेरा एक सबसे मने टाउन चेस्ट फ्रेंड सबसे मैंने मेरा बेस्ट फ्रेंड है मेरा इस जीवन में है ट्रू फ्रेंड इ अ ट्रू चाइल्ड ऑफ इंडिया वो सही सही भारत का एक सुपुत्र है आई अराइव्ड इन

I arrived in America several months before the Parliament of Religions began. The money I had with me was little, and it was soon spent. Winter approached, and I had only thin summer clothes.

अमेरिका सेवरल मंथ्स बिफोर द पार्लियामेंट ऑफ रिलीजन बिगन मैं अमेरिका में पार्लिमेंट ऑफ रिलीजन के प्रारंभ से थोड़ा समय पहले पहुंचा द मनी आई हैड विथ मी वाज लिटिल एंड आई वास इट वास सून स्पेंड मेरे पास में थोड़ा सा ही पैसा था और कुछ ही समय में वह पैसा सब चला गया विंटर एप्रोच एंड आई हैड ओनली वन थीन ओनली थीन समर क्लोज सर्दी का समय आ रहा है और मेरे पास में पतले गर्मी में पहने वाले कपड़े ही थे

I did not know what to do in that cold, dreary climate, for if I went to beg in the streets, the result would have been that I would have been sent to jail.

आई डिड नॉट नो व्हाट टू डू इन दैट कोल्ड ड्रेरी क्लाइमेट फॉर इफ आई वेंट टू बैग इन द स्ट्रीट द रिजल्ट वुड हैव बीन दैट आई वुड हैव बीन सेंट टू जेल ये बड़ा इंपोर्टेंट है स्वामी जी ने कहा पहनने के लिए कपड़े भी नहीं थे उस ठंडी के दिनों में और यदि मैं शेरियो में भिक्षा मांगने के लिए जाता तो पुलिस वाले पकड़ करके जेल में डाल देते ये तो भारत नहीं है कि भिक्षा मांगना और यह भिक्षा देना वो कोई धर्म है वहां पर तो यह सब एक तरह का लोइटरिंग एक तरह का एक क्राइम ही समझा जाता है देयर आई वाज विथ द लास्ट फ्यू डॉलर्स

There I was with the last few dollars in my pocket. I sent a wire to my friends in Madras. This came to be known to the Theosophists, and one of them wrote, "Now the devil is going to die. God bless us all."

इन माय पॉकेट तो वहां पे मैं था इस तरह से मेरी पॉकेट में मेरे कुछ आखिरी डॉलर को लेकर के आई सेंट अ वायर टू माय फ्रेंड्स इन मद्रास मैंने मद्रास में मेरे मित्रों को एक तार भेजा दिस केम टू बी नोन टू द थयो सोफिस्ट एंड वन ऑफ देम रोट नाउ द डेविल इज गोइंग टू डाई गॉड ब्लेस ल यह जो पत्र था स्वामी जी का कि अभी मेरे पास में ज्यादा कुछ नहीं है मैं सर्दी में शायद हो सकता हूं कि ठंड के मारे मर ही जाऊं तो कुछ सहाय भेजो तो यह टेलीग्राम इस थियोसोफिकल सोसाइटी के किसी के पास में गया और उसने ऐसा लिखा कि नाउ द डेविल इज गोइंग टू डाई अभी यह जो दानव है वह मरने वाला है एंड गॉड ब्लेस अस ऑल ईश्वर की हम पर कृपा है कि ये दानव यह राक्षस अभी यह मरने वाला है वाज दैट द पेविंग द फेव फॉर

Was that paving the way for me?

मी क्या यह मेरा रास्ता आसान करना था बिल्कुल नहीं देखिए इतना ये झर स्वामी जी के विरुद्ध में निकालना वो थोड़ा आश्चर्यजनक इसलिए है कि स्वामी जी जब तक पार्लिमेंट ऑफ रिलीजन में सक्सेसफुल नहीं हुए थे तब तक इस तरह के हजार फकीर आए जाए किसी को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला था एक तरह से उनको बेनिफिट ही होता ये मिशनरीज लोगों को या रिफॉर्म सोसाइटी वालों को वे लोग वहां पर जाकर के कह सकते हैं कि देखो कैसा एक चित्र विचित्र फकीर से आया है ऐसे लोगों को तो ईश्वर की लाइट लाइट ऑफ गॉड दिखानी है तो इसलिए हमको और ज्यादा पैसा दो तो एक तरह से उनको बेनिफिट ही था कि ऐसा व्यक्ति ज जाएगा और हमारा ही प्रचार करके आएगा यह दिखा करके कि भारत सही सही ऐसे विचित्र फकीरों को जन्म देता है किंतु इन लोगों ने स्वामी जी के साथ में बात की थी पता था कि स्वामी जी की प्रतिभा क्या है और यह भी भीतर भीतर में डर बैठ गया था कि इस तरह की प्रतिभा वाला एक संत महापुरुष जब अमेरिका में जाएगा और वह यदि अपना प्रभाव विस्तार करने में सक्षम हो गया तो हमारा दाना पानी दूसरे दिन से बंद हो जाएगा तो यह डर उनको तभी से लग गया था मजूमदार इतना चालक नहीं था मजूमदार के बारे में बाद में स्वामी जी कहते हैं कि पहले तो उसने मेरे से थोड़ा अच्छे से बात किया किंतु जिस दिन में ओवरनाइट सक्सेसफुल हो गया था शिकागो में उसी दिन से दूसरे ही दिन से उसका स्वभाव परिवर्तन हो गया किंतु वो मजूमदार को बेचारे को इतना टाइम लगा स्वामी जी को सक्सेसफुल होने में उसका वो चरित्र परखने की इतनी क्षमता शायद नहीं होगी किंतु यह जो कुछ लोग थे जिन्होंने यह कहा कि हां नाउ द डेविल इज गोइंग टू डाई देखिए स्वामी जी के बारे में ऐसा स्ट्रांग शब्द यूज करते हैं वरना देखिए आज कोई भी वहां पर जाकर डिसर पशन करना चाहे क्षमता कितनी है डिस्ट्रक्ट करने की आज अमेरिका जाकर हजार प्रवचन दे दे हजार ू चैनल चला दे हजार सोशल मीडिया पोस्ट कर दे कह दे भारत इतना श्रेष्ठ है और अमेरिका इतना नहीं है श्रेष्ठ किसको फर्क पड़ता है ऐसे कितने ही लोग करते रहते हैं प्रति प्रति देख कर के रिएक्शन होता है कि इस तरह की प्रतिभा का आदमी किंतु स्वामी जी की प्रतिभा का आदमी वहां पर जाएगा कुछ बोलेगा इट विल हैव रियल लाइफ कंसीक्वेंसेस ये प्रतिभा समझ ली है इसीलिए इतना स्ट्रांग रिएक्शन दिया है वो भी हमको अप्रिशिएट करना है सभी लोग स्वामी जी की प्रतिभा नहीं समझ पाए इट्स अ वेरी सैड थिंग एक्चुअली कि सो कल्ड जो स्वामी जी के हित श थे बहुत सारे लोग वे लोग स्वामी जी की प्रतिभा को समझ नहीं पाए थे और यहां पर जो लोग स्वामी जी के विरोध में खड़े थे जो स्वामी जी का विकास नहीं चाहते थे उन्होंने स्वामी जी की प्रतिभा समझ ली थी इसीलिए कहते हैं कि नाउ द डेविल इज गोइंग टू डाई इतनी स्ट्रांग प्रतिभा का आदमी मरेगा तो हमारे लिए अच्छा है वरना हजार फकीर जाए यहां से वो नरसिंहा चार्य व वगैरह कितने ही लोग भारत से गए थे किसी को कोई परवाह नहीं है क्यों क्योंकि ऐसे हजार लोग जाएंगे तो अपने को बदनाम करके आएंगे ऐसा कुछ उल्टा पुल्टा आचरण कर देंगे तो बेटर है कि वे लोग जाए और अपना प्रचार करें किंतु स्वामी जी इज अ टोटल डिफरेंट बॉल गेम ये उनको पता था इसीलिए स्वामी जी के बारे में ऐसा कहा है कि नाउ द डेविल इज गोइंग टू डाई एंड गॉड ब्लेस अस ऑल किंतु डेविल इज नॉट गोइंग टू डाई स्वामी जी ने खुद ने कहा एक पत्र में लिखा है कि इन लोगों को समझ में नहीं आ रहा है कि क्या हो रहा है इसके घर में शेर घुस गया है बाघ घुस गया है इनके घर में ऐसा उनको लग रहा है ऐसा डर इन लोगों के मन में बैठ गया है स्वामी जी खुद अपने पत्र में लिखते हैं तो सही सही में शेर उनके घर में जाकर के उनके मुह मु से शिकार छीन कर के आने वाला है स्वामी जी ने खुद ने ऐसा यह भी लिखा है जब भारत में से कोई लेटर जाता था कि अच्छा इसको थोड़ा पैसों की जरूरत है इसको थोड़ा हेल्प कर दो इसको थोड़ा हेल्प कर दो स्वामी जी बोलते मेरे पास में क्या ऐसा वो पेड़ का ये पैसों का पेड़ लगा है ना क्या यहां पर मिशनरियों की गुफा में जाके शेर के मुंह से शिकार छीन के खाना है मुझे वैसा ऐसा मत सोचो कि मुफत का पैसा मेरे पास पड़ा हुआ है तो शेर की गुफा में जाकर के शेर की पिटाई करके उसके मुंह से शि छीन के स्वामी जी ही खाने वाले थे और इन लोगों को पहले ही पता चल गया था यह भी विधि की विचित्र होता है स्वामी जी के मित्र नहीं समझ पाए किंतु दुश्मन समझ लिए कि कितना बड़ा खतरा अभी अमेरिका में प्रकट होने वाला है फर्स्ट ट द पेविंग द वे फॉर मी क्या वो मेरा रास्ता आसन करना था जी नहीं और भी बहुत कुछ है किंतु अभी टाइम बहुत हो जाएगा तो अभी नेक्स्ट टाइम ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्त श्री राम कृष्णर्पण

Q: श्री रामकृष्ण के बाद, स्वामीजी की महानता को सबसे पहले उनके मद्रास के शिष्यों ने पहचाना। जैसा कि आपने कहा, मिडिल क्लास, एडुकेटेड युथ

मस्तु एक्चुअली देखिए यहां पर क्या है पता है ये जो राजपूताना के जो राजा है ना वो लोग स्वामी जी देखिए स्वामी जी का जो ठाकुर का एक सर्कल था जो कि ओबवियसली ठाकुर के कहने पर स्वामी जी की महत्ता को समझे थे तो दैट वाज इफ वी पुट ट असाइट स्वामी जी जब बाहर निकले तो अभी ये प्रम दादास मित्र वगैरह को वैसे उनका स्वामी जी के रिस्पेक्ट था किंतु स्वामी जी पर डाउट भी करते कि स्वामी जी ने जब कहा कि अभी ये बलराम बसु का मृत्यु हो गया है मेरे गुरु भाई का मुझे जाना पड़ेगा तो प्रम दादास पूछने लगे आप साधु है और अपने गुरु भाई के मृत्यु से दुखित क्यों होते है माने रिस्पेक्ट है तो डाउट भी करते हैं किंतु अन डाउटेड श्रद्धा ट वास फर्स्ट गिवन टू हिम बाय राजास ऑफ राजपूताना किंतु राजपूताना में प्रॉब्लम यह था कि वे लोग इतना एक बंधे हुए थे ना कि स्वामी जी का जो रेडिकल आइडिया था वो एक्सेप्ट नहीं करने वाले थे तो मद्रास का एडेड जो एक था लेयर स्वामी जी को अनक्वेश्चनेबल स्वीकृत भी किया राजपुताना के राजा की तरह किंतु साथ में उनके आइडिया पर काम करने के लिए रेडी भी हो गए सो द ड्यूल एडवांटेज वास देर इन मद्रास देखिए रामकृष्ण मिशन का ही हम लोग

Q: कुछ NGO वास्तव में नहीं चाहते कि लोग प्रगति करें, ताकि उन्हें फण्ड मिलता रहे सेवा कार्य के लिए

रिलीफ में बड़े हमारा सुनाम था रिलीफ डिपार्टमेंट अपना तो बहुत बड़ा था बड़ा एक्टिविटी था किंतु अभी कोई भी गवर्नमेंट ना रिलीफ हमको नहीं करने देना चाहती क्योंकि सभी को तो वोट चाहिए तो फ फटाफट करके जैसे डिजास्टर होता है वो लोग पहले पहुंच जाते हैं स्कीम अनाउंस कर देते हैं तो नेचरली है कि वी विल हैव टू इवोल्व बियोंड ट तो फिर वी हैव इवोल्व एजुकेशनल एक्टिविटी है हेल्थ एक्टिविटी है जिसमें की कल्चरल एक्टिविटी है हम ज्यादा फोकस करते हैं वरना ये प्लेग रिलीफ ये जो दुष्का रिलीफ ये अनाथ आश्रम चलाना जिससे कि हमने ओरिजिनल प्रारंभ किया है वो भी धीरे से कम से कम होता जा रहा है अभी यदि हम उसको स्टिक करके रहते कि नहीं अखंडानंद जी इस तरह से प्लेग रिलीफ किया है निवेदिता ने किया हमको वही करना है तो आज हमारा तो बंद हो जाता सब कुछ वी हैव टू इवोल्व अकॉर्डिंग टू सिचुएशन अच्छा अच्छा

Q: कुछ सरकारी योजनाएँ बहुत अच्छी हैं

मने गवर्नमेंट का स्कीम जो है हमारे इंटरनल जो डिस्कशन जो हो रहा है अभी रिसेंटली और रिसेंटली नहीं मैं जब टीसी में था ना तो मैंने पहली बार यह बात सुनी थी मुझे थोड़ा सा आश्चर्य हुआ था किंतु क्या है कि बाय द टाइम मैं टीसी में पहुंचा मेरा ये न्यूज़पेपर पढ़ना में काफी समय से मैंने बंद कर दिया था पहले मैं बहुत पढ़ता रहता था न्यूज़ तो लास्ट फाइव इयर्स सिक्स इयर्स के न्यूज़ मैंने नहीं पढ़े थे बाय द टाइम मैं टीसी में पहुंचा तो वहां पे ऐसी बातें सुनना मैंने शुरू किया पहली बार कि अभी देखिए कि बहुत सारा स्कीम चल रहा है तो हमको यह रिलीफ है या तो डायरेक्ट सर्विस जो है वो नहीं करके थोड़ा सा एक स्टेप अप जाना है मोर हेल्थ मोर एजुकेशन और उसमें भी आजकल बहुत चल रहा है बेटर की लेट अस गो मोर फॉर कल्चरल एक्टिविटीज वगैरह सो यस की बहुत सारी स्कीम्स चल रही है बहुत अच्छे लोग अच्छा काम कर रहे हैं वो जो कि धन्यवाद के पात्र है वही है कि वे लोग फिर यहां पर फिक्सेशन न हो जाए जैसा था कि गरीब लोगों को खिलाना है तो वहां पर फिक्सेशन हो गया कि गरीब लोग चाहिए ही अपना ऑर्गेनाइजेशन चलाने के लिए तो फिर यह स्कूल चला रहे हैं तो बेटर ऑप्शन को डेवलप नहीं करने देना है जो भी एकने मने लो क्वालिटी वाला जो चल रहा है उसको चलाने दो सो लेट अस नॉट हैव फिक्सेशन अपऑन एनीथिंग दैट इज अ मेन थिंग ये जो स्कीम चल रही है ना उसके बीच इसके बारे में भी ये इकोनॉमिस्ट का बड़ा डिबेट चल रहा है वो लोग बोल रहे है कि इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट करने की अभी की इतना इंसेंटिव दे दिया इतना 000 ना इतना हजार रुपया प्रति फैमिली को चला गया ये लोग कहते हैं कि अभी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट है रुक जाएगा क्योंकि गवर्नमेंट तो अभी डेट में आ गई है तो ये भिक्षा देना वो इंपॉर्टेंट है माने इस तरह से वो इंसेंटिव कैश इंसेंटिव देना वो इंपोर्टेंट है कि इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना हेल्थ एजुकेशन फिर ये अ क्या कहेंगे रोड इलेक्ट्रिसिटी वगैरह जिससे कि आपका बिजनेस डेवलप हो बिजनेस डेवलप हो कर के आपको ऑटोमेटिक इनकम बढ़े तो बहुत लोग कहते हैं कि इनकम बढ़े इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप हो हेल्थ एजुकेशन सर्विस डेवलप हो ऐसा नहीं करके ये कैश इंसेंटिव हाथ में थमा देते हैं जैसे कि ये लोग गरीब के गरीब रहे हमको वोट देते रहे व्हिच इज अ वेरी डेंजरस थिंग एक्चुअली ये आपको गरीब ही रखना है कैश इंसेंटिव देकर के वोट ले लेना है तो फिर आपका भविष्य तो बड़ा ही अंधकारमय है अभी चाइना में जाकर के के देखिए जिस तरह से उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप किया है तो अभी ये गवर्नमेंट को कैश हैंड आउट देने की जरूरत नहीं क्योंकि इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेस ये दो डेवलप होगा लीगल फ्रेमवर्क डेवलप होगा तो बिजनेस डेवलप होगा तो फिर आदमी अपने से मेहनत करके कमा सकता है व्हिच इज मोर डिजायरेबल

प्रश्न: हम अभी भी यह नहीं समझ पाए हैं कि स्वामीजी ने हमारे लिए क्या किया है

देखिए सिंपल सा बताऊ स्वामी जी नहीं होते तो क्या होता या तो फिर स्वामी जी होने का जो बेनिफिट आज हमको नहीं दिख रहा है भविष्य में दिखेगा सरदार पटेल ने कुछ ही दिनों में पूरे भारत के स राजाओं के पास में यह इंडियन यूनियन में रहने के लिए उनको मना दिया क्यों ऐसा हुआ क्योंकि स्वामी जी ने भारत की यात्रा करके भारत को ऑलरेडी जोड़ दिया था तभी बोलकर के सरदार पटेल सासा फट कर के सक्सेसफुल हो गए अभी सरदार पटेल का ग्रेटनेस है कोई प्रश्न ही नहीं है दिस इज अ रियल सक्सेस ऑफ स्वामी जी ये जो भगवान राम ने अयोध्या से साउथ इंडिया या श्रीलंका तक की मुसाफर की भारत को एक किया यह काम आज स्वामी जी ने फिर से किया है टू यूनाइट द इंडिया दैट इज ग्रेटेस्ट कंट्रीब्यूशन जो कि भविष्य में हमको पता चलेगा वरना ऐसे जो पोस्ट कॉलोनियल जो कंट्रीज है उसमें कितना सिविल वॉर कंबोडिया देखिए इंडो चाइना देखिए चाइना देखिए अफ्रीका के कंट्रीज देखिए मिडिल ईस्ट देखिए पोस्ट कॉलोनियल पीरियड है फुल ऑफ ब्लड शेड फुल ऑफ सिविल वॉर भारत में वो नहीं हुआ भारत ऑलरेडी एक हो चुका था दैट इज अ कंट्रीब्यूशन रियल कंट्रीब्यूशन ऑफ स्वामी जी ये प्रव्रज्या आप जो उस दिन बात कर रहे थे ना हम लोग कि दो यात्राएं पहली यात्रा है प्रव्रज्या लर्निंग फेर और दूसरी है कि व गिविंग फेस लर्निंग फ यूनाइटिंग फेस नॉट सि अम य तो अल्मोड़ा नॉर्दन टीप है और अल्मोड़ा बोलना अच्छा लगता है वरना यात्रा तो रुकी है लाहौर जाक के लाहौर से भी व नीचे काठियावाड़ वगैरा तक गए थे यह जो पोप था ना य कौन सा पोप में भूल गया रिसेंट हिस्ट्री का ही पॉप उसने एक स्टेटमेंट दिया था इन द फर्स्ट मिलेनियम फील्ड वास ओल्ड वर्ल्ड यानी य जो जीसस का फर्स्ट मिलेनियम फ्रॉम हिज बर्थ टू 1000 यर द फील्ड वाज ओल्ड वर्ल्ड ट इज की यूरोप द सेकंड मिलेनियम द फील्ड वाज न्यू वर्ल्ड यानी कि ये जो 100 से 2000 टका न्यू वर्ल्ड यानी कि अमेरिका नॉर्थ अमेरिका साउथ अमेरिका इन द थर्ड मिलेनियम द फील्ड विल बी [हंसी] एशिया सोच लो कि वो थर्ड मिलेनियम में एशिया नहीं थर्ड मिलेनियम में फील्ड इ गोइंग टू बी ओल्ड वर्ल्ड एंड न्यू वर्ल्ड बट इन रिवर्स बाय वेदांत स्वामी जी ने कहते आई डोंट वाट जस्ट राइज ऑफ वेदांत आई वांट कॉक्वेस्ट ऑफ द वर्ल्ड बाय वेदांत अभी थर्ड विलम गोइंग टू रिवर्स किंतु यह जो आप कह रहे हैं ना दिस

प्रश्न: 19वीं सदी का कोई भी सुधारक संगठन हिंदू धर्म की महानता को समझने में सक्षम नहीं था। वे सभी हिंदू धर्म को खत्म करके भारत को बेहतर बनाना चाहते थे।

इज पोस्ट रामा कृष्णा ठाकुर के आने के बाद के हमारी यह विचार है ठाकुर के पहले जो परिस्थिति थी कि हजार साल का यह रिलीज न हजारों हजारों साल का यह रिलीजन अभी पूरा खुद गड्ढे में गिरा है और इस रिलीजन के जितने भी फॉलोअर है वे लोग भी गड्ढे में गिरे हैं ऐसा भाव बड़ा ही दृढ़ था क्योंकि इस भाव के विरुद्ध में कुछ पॉजिटिव साइन इनको नहीं दिख रही थी ये लोग कितने ही अच्छे रिफॉर्मर हो साधु संत तो नहीं थे और समाज में ऐसे साधु संत कहां है जो उनको कहे कि नहीं नहीं यह सही सही य जो भारतीय धर्म है वो जितना क्लेम कर रहा है उतना यहां पे है जैसे आपको एक इन्वेस्टमेंट अपॉर्चुनिटी कहते हैं कि आपको इतना परसेंट रिटर्न मिलेगा रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट किंतु आप इन्वेस्ट करने को गए उससे आधा मिला उससे थ मिला डिस पॉइंट हो जाएंगे कि इतना इन्वेस्टमेंट किया कुछ नहीं मिला तो हिंदू धर्म ये क्लेम तो करता है ब्रह्म ज्ञान है आत्मज्ञान है भगवान विष्णु है भगवान शिव है परिस्थिति तो भारत की देखिए क्या है 30 करोड़ लोग जब अकाल पड़ता है तो मां बच्चे को काट के खा जाती है ऐसी परिस्थितियों परिस्थिति में है तो कहां है धर्म तो बातों ही बातों का है या तो फिर 10000 साल पहले होगा आज इसका कोई रिलेवेंट नहीं है ये डाउट इज वेरी स्ट्रांग ये तो सिंसियर लोग भी थे वो भी इस माया जाल में फंस गए थे एंड बेस्ट एग्जांपल इज ये केशव सेन केशव सेन वाज अ वेरी सिंसियर पर्सन तो वो भी सोचता था कि हिंदू धर्म के ऊपर में हमको एक नया एक धर्म लाना पड़ेगा कुछ हिंदू धर्म के एलिमेंट कुछ विदेशी एलिमेंट किंतु ये सिंसियर पर्सन व्हेन ही केम इन टच विद श्री रामा कृष्णा ही राइट्स कि हमको पता नहीं था कि हिंदू धर्म का ये जो वेल स्प्रिंग है मने हिंदू धर्म में वही अमृत का एक फवारा है जिसमें से श्री रामकृष्ण देव जैसे लोग प्रकट हो सकते हैं यानी कि सोच के देखिए कि हिंदू धर्म में कितना रेजिल है कितना पोटेंशियल है सो फॉर ए सिंसियर पर्सन इट टूक द अराइवल ऑफ श्री रामकृष्णा टू रिकॉग्नाइज द वर्थ ऑफ हिंदुइज्म आज हम बड़ा ही आसानी से कहते हैं कि ना हिंदू धर्म इज ग्रेट बट दिस इज पोस्ट अराइवल ऑफ श्री रामकृष्णा एंड विवेकानंद जिनका की लाइफ हमने देखा है लाइफ देख कर के हम लोग अभिभूत हो गए हैं तब कहीं जाकर के जिस आइडियो जी को उन्होंने फॉलो करके ये अटेंड किया उसकी हम प्रशंसा करते हैं यदि ठाकुर और स्वामी जी नहीं होते तो योग वेदांत कौन पढ़ने वाला था या तो फिर एक मिस्टिसिजम एक तंत्र मंत्र जैसा एक हो कर के रह जाता सो वे लोग को बिल्कुल ही रिजेक्ट नहीं करके ऐसा कहना चाहिए कि अकॉर्डिंग टू द सिचुएशन दे ट्राइड देयर बेस्ट और ठाकुर और स्वामी जी का प्रभाव ऐसा था कि दुश्मन भी देख लिए कि हां ऐसा आदमी यदि योग वेदांत का प्रचार करेगा तो सही सही हमको घटा होने वाला है सोट इ द ग्रेटनेस ना दुश्मनों को भी मनवा दिया नरसिंहा चार्य के बारे में कोई नहीं कहेगा कि डेविल है डाइड वो जिए मरे हजार लोग आए गए कौन फर्क पड़ता है