Sri Ramakrishna as We Saw Him : Swami Shivananda
स्वामी शिवानंद जी महाराज नवीन डट स्वामी शिवानंद जी महाराज अन ही वंस सईद डेट ही वैन सेड डेट आई वाज नॉट अन ईश्वर कोटि सी नो डेट श्री रामकृष्ण क्लासिफाइड हिज डिसाइड इन सैम ऑफ डी डिसीप्लस इन ईश्वर कोड और लेटेस्ट से डेट डी पीपल हु हेड अटेंड डी हाईएस्ट ऑफ स्पिरिचुअल realisession सी नो डेट महापुरुष महाराज हिमसेल्फ सईद डेट सी वेयर आई वाज नॉट ईश्वर कोटि बट ठाकुर हिज मेड मी ईश्वर कोटि डेट मेंस ही मिटे नॉट हैव पूरेस्ट ऑफ sanskaaraaj लाइक सेफ फॉर एग्जांपल राजा महाराज और स्वामी जी बट बाय डी ग्रेट ऑफ ठाकुर प्रेसिडेंट ऑफ रामकृष्ण ओल्डर सो है लाइफ सी कैन सी डेट शिवानंद जी महाराज इसे नाम सी नो डेट इनिशियली डी नेम्स विच व्हेयर गिवन तू मॉनेस्टिक डिक इस groupise डेट नेम्स व्यूअर गिवन की स्वामीजी हिमसेल्फ एंड एच नाम हेडेड फॉर डिपर मीनिंग सी नो डेट डी नाम स्वामीजी हिमसेल्फ तोक डेट वाज विविध शासन डेट मेंस ही वास तिल अंडर डी इंप्रेशन डेट आई हाव लॉट तू लर्न इंस्पीते ऑफ हिज अटेनिंग निर्विकल्प समाधि इन काशीपुर ही है गान फर्थेस्ट अहेड इन डी स्पिरिचुअल लाइफ इंस्पीते ऑफ डेट स्वामी विवेकानंद केप्ट फॉर हिमसेल्फ डी नाम विविध शासन बट ही गावे सच नाम शारदानंद नेम्स लाइक दिस तू डी हमिलिटी ऑफ स्वामी विवेकानंद वे नो था स्वामी वेरी बिग इट इसे डिफिकल्ट फॉर डी स्मॉल स्मॉल ऑफ शूट्स तू ग्रो इन इट्स शॉप डेट मेंस वेंस स्वामी विवेकानंद फिलोसॉफिकल अंडरस्टैंडिंग हिज अंडरस्टैंडिंग ऑफ डी वे इंडिया वर्क्स हिज प्लांस फॉर डी रिजूवनेशन ऑफ इंडिया हिज प्लांस फॉर डी मॉनेस्टिक ओल्डर exteraware सो फार एडवांस्ड डट हिज गुरु भाई स्वामी विवेकानंद इस अलाइव ही इस ग्रुप है इस विल नॉट टेक अन्य रिस्पांसिबिलिटी अपॉन देयर ऑन हेड दे विल सिंपली थिंक डेट राज हेयर एंड लेट हिम गाइडर्स बिकॉज सी आर नथिंग कंपेयर तू नरेन डेट इस वही स्वामी विवेकानंद अटेंड महा समाधि इट अन वेरी यंगर आगे ऑफ 39 इयर्स सो व्हेन स्वामी विवेकानंद महासमुंद हिज आदर ग्रुप शाइनिंग फोर्थ जस्ट यस्टरडे आई एम ट्रांसलेट इन वेरी नाइस बुक दिव्या वाणी इस कलेक्शन ऑफ शिवानंद जी महाराज डिसीप्लस आई एम ट्रांसलेट इट इन गुजराती फॉर अवर मिल्क एंड dheries अंदर बुक अलसो इट्स नाम इस देव लोकेश सो एंड देयर इस अंदर बुक श्रीमद् स्वामी शिवानंद जी महाराज इट इस दिस बी कपूर सो व्हेन सी रीड ऑल दिस बुक्स एंड दें सी रिलाइज्ड सी दिस आर एच वैन ऑफ डेम और हिडन जेम इंस्टिट्यूट रामकृष्ण यूनिवर्सिटी कॉसमॉस ऑफ श्री रामकृष्ण एंड एच वैन ऑफ डेम हर देयर ऑन इंडिविजुअल ब्यूटी पावर स्ट्रेंथ देयर ऑन इंडिविड यूनिक मैसेज तू बी गिवन तू दिस वर्ल्ड सो महापुरुष महाराज फर्स्ट प्रेसिडेंट लाइक राजा महाराज स्वामी ब्रह्मानंद जी महापुरुष महाराज अलसो वेरी इंट्रोवर्ट पर्सन स्वामीजी रिक्वेस्ट हिम सेवरल टाइम्स तू गो तू अन साउथ अफ्रीका इन अफ्रीका सोमव्हेयर तू स्टार्ट सेंटर सैम तू गो संवारे इन साउथ इंडिया अलसो महापुरुष महाराज वेट इन साउथ हिज इंडिया एटलिस्ट नोट इन दिस साउथ अफ्रीका ही वेट देयर फॉर सैम डेज़ एंड दें ही वेट आदर प्लेसिस अलसो बट अल्टीमेटली ही रिटर्न बैक तू बैलून बिकॉज महापुरुष महाराज न्यू ही वैसे नामेद तू महापुरुष महाराज स्टोरी हर अलसो आई विल तेल यू लेटर रूट इन स्पिरिचुअल ईटीसी रदर ऑन इन वर्किंग फील्ड रदर ऑन डी फील्ड आनंद जी से राम कृष्णानंद जी हरि महाराज ऑल ऑफ डेम हेड डैन आते वर्क फॉर डी अकॉर्डिंग तू डी आइडियल ऑफ कर्म योग अस्पत स्वामी विवेकानंद बट महापुरुष महाराज स्पेशली वाज वेरी इंट्रोवर्ट पर्सन एंड इंस्पीते ऑफ स्वामीजी रिपीटेड रिक्वेस्ट ही प्रेफर तू ही प्रेफर एंड इनर लाइफ रदर दें एक्सटर्नल लाइफ सो दिस आर ऑल यूनिक करैक्टेरिस्टिक्स ऑफ एवरी डिसीप्ल यू नो व्हाट हैपन व्हेन स्वामी विवेकानंद फर्स्ट स्टार्टेड बैलून बट रिंग इट इन डी मॉर्निंग 4 ओ'क्लॉक एंड एवरीवन विल हैव तू गेट डी इन डी शाइन फॉर मॉर्निंग आरती मॉर्निंग प्रेयर एंड दें विल बी अन रिंग अगेन फॉर इवनिंग आरती एंड एवरीवन विल बी कम एवरीवन विल हैव तू कंपलसरी अटेंड मॉर्निंग एंड इवनिंग आरती एंड पर्सन हु कैन नोट विल हैव तू ही कनॉट फाइंड फूड इन ए एंड ही विल हैव तू डू भिक्षा बाई गोइंग आउटसाइड एंड ही वैन दे व्हाट हैपेंड डियर राजा महाराजा फेवर एंड ही कंडत अटेंड मॉर्निंग आरती एंड स्वामीजी से डेट्स सी रूल्स रुलज़ फॉर एवरीवन सो एवं राजा महाराजा रिटर्न विद bhikshanding वेटिंग फॉर हिम एंड ही सेड डेट गिव मी बिग शोना एवं स्वामी जी haidant आइटम्स स्वामी जी मेरे वैन हु कैन नॉट अटेंड मंगल आरती ही विल हैव तू कंपलसरी तू भिक्षा बट व्हेन ही सेंड ही ऑन गुरु भाई बैगिंग फॉर फूड ही हिमसेल्फ कैन यू टेक फूड इन डी फ्रेम इन बैलून मट वही बिकॉज दर वो सच ए ग्रेट बॉन्ड ऑफ अफेक्शन बिटवीन हिम एंड हिज गुरु भाई इस डेट हो कैन ही शीट इन अन कंफर्टेबल पंगत एंड इट नाइस फूड विच वास ऑफर्ड तू ठाकुर minwel हिज गुरु भाई इस आर वर्किंग फ्रॉम अंडर डी सैन फ्रॉम वैन होम तू अंदर होम बैगिंग फॉर फूड हो कैन स्वामीजी इट इन फूड इन फंगर सो ही वैसे वेटिंग फॉर राजा महाराष्ट्र एंड डी मोमेंट राजा महाराजा रिटर्न्स स्वामी जी से शिक्षण इस सच होली पूरे अन्ना पवित्र अन्ना प्लीज गिव मी अन पोर्शन ऑफ इट एंड सी विल इट टुगेदर सो डेट वास्ता हो स्वामी जी मेड रूल्स बट अलसो ही मेड शो डेट इट वाज फॉलोज की एवरीवन स्वामीजी हिमसेल्फ अंडरवेंट इस मच पोस्टेरिटी इस अन्योन एल्स डेट इसे हो धीस रूल्स बिकम से डेट स्टीमूलन तू हायर स्पिरिचुअल प्रैक्टिस raidhar दें रेजिमेंट एंड पनिशमेंट सो वैन दे महापुरुष महाराज आई वांट तू तेल यू फनी स्टोरी अबाउट महापुरुष मारत वनडे हर सी हज डेट आई वांट तू मीत सैम वैन आई थिंक महापुरुष महाराज देयर एंड दिस वुमेन दिस लेडी देवोटी सी वांटेड तू मीत अन मॉम सो समवन कॉल्ड हर डेट से महापुरुष महाराज इस द यू कैन गो एंड मीत हिम सो दिस लेडी कम वेरी इमेज डी सी इसे डेट व्हाट काइंड ऑफ महापुरुष ही डट ही इस लिविंग ऑन अर्थ ऑन ऑन फ्लोर आई हैव डेट महापुरुष लाइव ऑन ट्री इसे नॉट लिविंग ऑन ट्रीस सो व्हाट काइंड ऑफ महापुरुष इस ही सो सच अन फनी इंप्रेशन पीपल हैव इन डी माइंड माय सेल्फ डू नॉट नो व्हाट इस ओरिजिन ऑफ दिस ट्रेडीशन देख महापुरुष लीव्स ओपन ट्री डी नाम महापुरुष इस गिवन तू अन्य वैन ही इसे अन पर्सन हु लाइव्स अपॉन ए ट्री आई डू नॉट नो फ्रॉम वेयर दिस तेल ओरिजनेटेड बट दिस लेडी दी वोटिंग न्यूज़ डेट अन्य वैन हु इसे नामेद महापुरुष टेक मेंस ईस्ट तू लाइव ऑन ट्री अन ही मस्ट बी परफॉर्मिंग सैम सॉर्ट ऑफ पोस्टेरिटी अप ऑन डी ट्री सो डेट वाज व्हाट सी थॉट एंड व्हेन सी सो डेट महापुरुष महाराज सीटेट इन अन कंफर्टेबल चेयर एंड ही वास टॉकिंग विद देवोतीस ही वैसे अमेजिंग बट सी नो डेट महापुरुष डी नाम इसे गिवन तू पर्सन हु इस होली ऑस्ट्रेलिया एंड हिज एबल तू स्टेम डी टाइड ऑफिस सेंशुअल प्लेजेस कम कंचन डी पर्सन हु कैन रिनाउंस वुमेन एंड कोल्ड डेट इस लस्ट एंड ग्रिड ओनली हिट काइंड ऑफ पर्सन कैन बी कॉल्ड महापुरुष एंड रिगार्डिंग दिस महापुरुष सीड्स मॉनेटरी देयर इसे वेरी नाइस फनी इंसीडेंट इन ठाकुर स्लाइड सी नो डेट वेंट ठाकुर वास परफॉर्मिंग ए stearities इन दक्षिणेश्वर ही उसे तू हैव डिफरेंट मूड्स अपॉन हिम सैम टाइम्स ही वुड इमेजेस महावीर एंड एचआईवी टेक टॉय डेट्स गधा इन हिज हैंड अपॉन ही इस शोल्डर एंड ही विल वॉक अराउंड सेइंग महावीर राम राम लाइक दिस एंड सोमेटाइम्स यू वुड हैव द्वेष सखी डेट इसे राधा आगे इफ ही इसे वरशिपिंग कृष्ण बीइंग अन गोपी इन मधुर भाव आते द टाइम ही वुड वेयर डी क्लॉथस ऑफ अन वुमेन एंड ही विल दें आदर लेडी वुमेन ऑफ मथुरा बाबू'एस होम दे वुड कम एंड दे वुड डेकोरेट हिम सो नाइसली गिव हिम मेकअप एंड ही वुड इमेजिंग डेट ही इस गोपी वरशिपिंग कृष्ण ठाकुर विदाउट क्लॉथ एंड ही वास सीटेट ऑन अन ब्रांच यू नो malumutra त्याग है इन बंगाल इट इस रिटर्न सो इट डेट टाइम डी haldhari कैंप एंड सो डेट haldhari वाज ठाकुर अंकल ही सो डेट व्हाट इस है नेप यू डूइंग डेट ही टेड ऑन ए ब्रांच ऑफ अन ट्री एंड यू कंठे के मल मूत्र त्याग कर haldhari थॉट डेट ठाकुर हज टर्न मेड वैन ओके ब्राह्मण इतनी तेज है दिस इस व्हाट haldhari सेस डेट मेंस ही इस बिन पोजेस बाय अन डेमों विच इस वेरी पावरफुल ब्रह्मदेव स्टोरी आर इंटरलिंक एंड डी मोमेंट सी स्टार्ट रीडिंग समथिंग समथिंग समथिंग आदर कम इन माय माइंड सो aneware सपोज तू स्टार्ट डी स्टोरी ऑफ शिवानंद जी महाराज एंड बिकॉज सी हैव स्टार्टेड इट इस 8 ओ'क्लॉक बट आई विल जस्ट रीड डी बिगिनिंग ऑफ दिस इंसीडेंट इस अन हो महापुरुष महाराज सर हो ही कम तो ठाकुर hijpur आश्रम कथा ही टेल्स लिटिल बीट महापुरुष महाराज डट वन आई वाज अन बॉय आई हेडेड दीप लॉन्ग गेम तू नो गोद एंड रिलाइज हिम एंड हिट लोंगिंग इंटेंसिफाइड विद डी ईयर वुड गो तू डी ब्रह्मो समाज एंड विजिट होली मैन हो आई थॉट वुड बी एबल तू हेल्प मी व्हाट डी एडवाइस मी तू डू इफेक्टिव फाइनली लाइफ नो अट्रैक्शन फॉर मी एवं व्हेन आई वाज यंग माय एजुकेशन कैंप एंड earlion ऑन दी अकाउंट ऑफ दिस ट्रेंड स्ट्रीट एंड सरकमस्टेंसस ऑफ माय फैमिली ही फैमिली वाज पुर सो दे कनॉट अफोर्ड हिज एजुकेशन सो ही हेड तू स्टॉप स्टडाइंग कम तू दुर्घटना इन सर्च ऑफिस जॉब एंड अलसो अट्रैक्टेड टुवर्ड्स समाधि सी सी सेड डेट महापुरुष महाराज जी इस एंटीरे लाइफ इंट्रोवर्ट एंड टर्न इन्वर्स हर ही हिमसेल्फ डट आई वाज वेरी अट्रैक्टेड बाय समाधि एंड आय ऑलवेज वांटेड तू लर्न डी नेचर ऑफ समाधि साइंस आई वाज डी ओनली मेल चाइल्ड एंड आई हते तू डिपेंड ऑन सिस्टर आई हैव तू कम तू कोलकाता तू सिक्का जॉब दिस मेड माय हार्ट वेरी हैवी एंड आई ओपन वेब एंड ब्रेड तू गोल्ड आस्किंग हिम तू फ्री मी फ्रॉम ऑल दिस स्वामी ऑफ है फादर कंपेल्ड हिम तू सिख जॉब एंड हो ही कम तू ठाकुर एंड आस्क फॉर मणि बट इंसटिड ऑफ एवरी टाइम आस्किंग फॉर मदर काली फॉर मणि एंड एवरी टाइम भक्ति नौकरी करने के लिए उनको कोलकाता आना पड़ा अभी वो पूरा संसार त्याग करके ठाकुर के पास चले जाएंगे तो उनकी बहनों का क्या होगा मैन का क्या होगा दूसरे यदि परिजन परिवार लोग होंगे उनका क्या होगा वो कोई चिंता नहीं अभी ये एक बात है की आप चिंता मुक्त कब हो सकते हैं ठाकुर ने खुद अब ये कथामृत पढ़ रहे हैं तो कथामृत में हमने देखा की जब ईश्वर का नाम लेने से आंसू में आंखों में से आंसू आने लगे तब समझ लो की संसार त्याग करने का समय हो गया है तो ये जो ठाकुर की शिक्षा है की आंखों में से आंसू आए ईश्वर का नाम ना लेने के बाद तभी तुम संसार पिया करो आदर वाइस क्या होगा की
श्रीरामकृष्ण कथामृत : तृतीय दर्शन
वो जैसे कथामृत नहीं ठाकुर कहते हैं ना की वो प्रताप का भाई आया था उसके बीवी बच्चे हैं दूसरों को घर पर रखकर के आया है ससुराल पे अभी उनकी फिक्र कौन करेगा और यहां पर आकर के वो माने भगवान की बातें करता ईश्वर की बातें करता है तो जब तक जवाबदारी सर पे है और जवाबदारी का बोध है मैंने जवाबदारी ऐसा नहीं है की इतने साधु लोग यहां पर आते हैं इनके सर पर jawabdhari नहीं थी घर पे थी किंतु क्या था की वो जवाबदारी है वो बौद्ध जब चला गया जब एक हायर मिशन अपने जीवन में एक आता है एक हायर एम जब खुलता है जब हम अपने आप को संपूर्ण रूप से उसमें डेडिकेट कर देते हैं अपने को उसमें संपूर्ण रूप से एकाकार कर देते हैं तब हम अपने खुद का जो सुख स्वच्छंद अपने खुद के जो भोग है उसको जब विस्मृति हो जाते हैं तब वो समय आता है की आप जो आपकी जो सांसारिक जवाबदारी है इसका आप त्याग कर सकें और इसीलिए हमारे भारतीय शास्त्रों में कहा गया है की ब्रह्मचर्य आश्रम vrihastha श्रम वानप्रस्थ आश्रम और सन्यास आश्रम धीरे-धीरे करके यदि आपने डायरेक्ट यदि सन्यास आश्रम नहीं ग्रहण किया तो फिर भी तो धीरे-धीरे करके त्याग की ओर जाना हम सबके लिए उचित है अच्छा अभी श्री रामकृष्ण कथामृत तृतीय दर्शन नरेंद्र भावना तथा मास्टर उसे समय वराह नगर में अपनी बहन के यहां ठहरे द जब से श्री राम कृष्ण के दर्शन हुए तब से मैन में सब समय उन्हें का चिंतन चल रहा है मानो आंखों के सामने सदा वही आनंदमय रूप दिखाई दे रहा हो कानों में वही amritmai वाणी सुनाई दे रही हो मास्टर सोचने लगे इस निर्धन ब्राह्मण ने इन गंभीर आध्यात्मिक तत्वों को कैसे खोज निकाला किस प्रकार उनका अति उनका ज्ञान प्राप्त किया इसके पहले उन्होंने इतनी सरलता से इन घूंट तत्वों को समझते हुए कभी किसी को नहीं देखा था मास्टर दिन रात यही विचार करने लगे की कब उनके पास जाऊं और कब उनको देखो वो जो पहले दिन की बात है की मास्टर महाशय जाकर के उनके कमरे में प्रवेश कर बोल रहे द देखा की कमरा बंद है तो जैसे अपने यह जो इंग्लिश वो जो एटीकेटी के अनुसार ये जो आज की मॉडर्न एटीकेटी के अनुसार आप जो बंद कमरा फैट करके खोल के भीतर नहीं चले जाएंगे आप थोड़ा सा khatkhataenge देखेंगे की यदि वो अवेलेबल है की नहीं होगा हमारे साथ बात करने के लिए एक सामान्य शिष्टाचार है अभी शहरों में आजकल खास करके तो मास्टर महाशय ने वो वृंदा दासी को पूछा उनके कमरे के सामने खड़ी थी की क्या वो साधु महाशय भीतर में है मैं उनको मिलने को जाऊं तो वृंदावन जाने कहां आप चाहिए तो साथ-साथ में ही मास्टर महाशय ने पूछा की क्या उन्होंने बहुत सारी किताबें पढ़ी है पढ़ के रखिए की इतनी समझता से इतने गहन गंभीर आध्यात्मिक तत्वों को लोगों के सामने प्रस्तुत कर रहे हैं तो वृंदावन जी ने क्या कहा था सब तो और मुख्य सरस्वती का उनको वरदान है तो मैन सरस्वती जितना बोलते जाते हैं उतना ही राष्ट्र खेलते जाती है वो राज तलने बंगाली शब्द पता नहीं हिंदी में क्या है वह धान kutenge तो धान जैसे खत्म हो जाता है तो एक औरत पास में बैठी होती है वो डैन वो वो जितना खत्म हो जाता है तो उतना उतना वो वहां पे आगे करते जाती है जिससे की वो कुटी के भीतर में ध्यान हमेशा रहे तो जैसे ही आपके मैन ठाकुर के मैन में वाणी खत्म होती थी मैंने एक उपदेश खत्म होता था तो दूसरा साथ-साथ में ही दूसरा उपदेश जो है मैन सरस्वती उनकी जिह्वा पे रहकर के उनके मुंह में वो प्रस्ताव उनके मुंह में वो प्रस्तुत कर देते द तो इसीलिए मास्टर मशक किंतु अभी भी थोड़े समय में है वो असमंजस में है की जिसने कुछ पढ़ा नहीं है जो निरक्षर है वो किस तरह से इतना सब कुछ का सकते हैं हालांकि हमको यह भी बात पता है ठाकुर ने खुद कहा था की किसी ने पूछा की आपने तो कुछ पढ़ा नहीं है तो ठाकुर ने कहा की अरे अमी सुनेची को तो डेट मिंस के बहुत सारे जो उनके गुरु उनके पास आए द और बहुत सारे वेद पुराण तंत्र उपनिषद की बातें ठाकुर को कही थी और ठाकुर की बहुत ही शार्प मेमोरी थी तो जो भी पुराण की कहानियां है यह जो उपदेश आत्मक जो ग्रंथ है हमारे जो शास्त्र है उसका पाठ जब होता था उनके सामने तो सब कुछ को immediatli ग्रहण कर देते द उनकी स्मृति में हमेशा के लिए वो अंकित हो जाता था तो इसलिए जरूरी नहीं है की आपको पढ़ना ही होगा और आजकल देखिएगा हम लोग वो जो रिवर्स पहले ऐसा था ना की स्टोरी टेलिंग जब वो गांव में और कोई एंटरटेनमेंट के ये जो साधन नहीं होते द तो यात्रा होती थी खासकर के मंगल के गांव में यहां पे गुजरात में डायरो जिसको बोलते हैं जहां पे जो सब कलाकार इकट्ठा होते हैं और पुराण की बातें हैं या तो फिर वह जो समसामयिक कोई घटना है उसके ऊपर में नाटक है ऐसा कुछ प्रस्तुत करेंगे डायरो जो यहां पर होता है बहुत अच्छे लोक कलाकार होते हैं बहुत अच्छी तरह से यह जो upnisha पुराने की जो कहानियां है वो लोगों के सामने प्रस्तुत करते हैं तो वह जो ओरल मेंस ऑफ कम्युनिकेशन लेकिन जो था बात-बात में यह जो लेखन का जो इन्होंने बहुत ज्यादा व्याप्त बढ़ गया किताबों का तो ज्यादातर लोग किताबों में से पढ़ना प्रेफर करने लगे फिर ऐसा एक बात हुआ की जो आदमी बढ़ नहीं सकता लिख नहीं सकता वो मूर्ख है किंतु उसे समय हम ये भूल गए की ये जो ओरल ट्रेडीशन तो हमेशा के लिए चली ए रही है और ओरल ट्रेडीशन का एक प्रॉब्लम है की जो कोई अब जैसे किताब है तो किसी बहुत ही अच्छे लेखक ने किताब लिखी अब यह लेखक का देहांत भी हो गया या तो फिर लेखक कहां पे वो मैन लीजिए वाराणसी या काशी में बैठा है तो पूरे भारत के लोग जो है उसे किताब को पढ़ सकते हैं जबकि यह जो ओरल ट्रेडीशन थी जो हमारे बहुत ही अच्छे लोग गायक लोक कलाकार द वह जहां पर जाएंगे वहीं पर वो अपनी बात प्रस्तुत कर पाते द अर्थात उनकी जो उनकी बातों से सुनकर के और जो उनकी बातों को ग्रहण करके अपने जीवन को समृद्ध करने वाला जो शत्रु वर्ग है वह बहुत ही सीमित रहा था इसलिए लेखन की महिमा बहुत ज्यादा है और इसीलिए यह भ्रम प्रकट हो गया की जिसको लिखना पढ़ना नहीं आता वह मूर्ख है निरक्षर है उसको कुछ नहीं आता तो मास्टर महाशय भी उसी भ्रम का शिकार है की बिकॉज के ठाकुर नगर कुछ पढ़ा लिखा नहीं है तो ठाकुर को कुछ आता नहीं है हालांकि अभी मास्टर महाशय भी तो किस तरह से अनुमान कर सकते हैं की इतने सारे हमारे जो गुरु आचार्य साधु संत उनको हमारे शास्त्र के बारे में इतना गंभीर गहन ये जो ज्ञान है वो सब एक के बाद एक दक्षिणेश्वर में आए सब लोगों ने ठाकुर को सामने ये जो पुराने अक्षय का है सबका पाठ किया है और ज्यादातर मतलब पढ़ सब कुछ अपने उनके स्मृति में अभी भी अंकित होकर के पड़ा है ये मस्त मासे को पता नहीं था किंतु अभी आज देखिए की आज फिर से वह चक्र टर्न हो रहा है अभी जैसे यह जो लोग कलाकार है जो अपनी वाणी से जो लोगों को शिक्षा देते हैं तो यह वाणी अभी यह यूट्यूब है या तो फिर ऑडियो है पॉडकास्ट उसके माध्यम से घर घर तक पहुंच सकती है यानी किताब का जो बेनिफिट था की एक लेखक ने काशी में बैठकर के जो किताब लिखी शंकराचार्य ने जो टीका भाषा लिखा तो पूरे भारत में पूरे विश्व में उसका प्रचार हो सकता है कहीं से भी हम शंकराचार्य को पढ़ सकते हैं किंतु जैसे तोता पुरी द तो तोता पुरी की बात ट्रिप ठाकुर ने ही सुनी क्योंकि उन्होंने तो जो भी कहा अपनी वाणी से ही लिख करके यदि उन्होंने कुछ रखा होगा तो पता नहीं हमारे पास में तो है नहीं तो उनकी वाणी द सिर्फ ठाकुर तक की सीमित थी किंतु आज है की जैसे हम लोग जो इस तरह से ऑनलाइन क्लास लेते हैं या तो फिर ये यूट्यूब पर ये जो सब सर्वप्रिय आनंद जी के क्लास आप देखते होंगे तो एक और ये जो ओरल ट्रेडीशन अभी ये भी मॉडर्नाइज हो गया है और वाणी से भी आप पूरे विश्व के सभी छोड़ में पहुंच सकते जरूरी नहीं है की आपको पढ़ लिखाई आणि ही चाहिए यदि आप यदि यूट्यूब पे अच्छे-अच्छे वीडियो देख लेते हैं अच्छे कोई टीचर कोई अच्छा क्लास करता हो तो फिर भी आप इतना ही पढ़ लिख सकते हैं जिसको की पढ़ना लिखना बहुत अच्छे से आता हूं हान एक बात है की मैन का जो कंसंट्रेशन है वो होना चाहिए और लिखने में या पढ़ने में जो कांस्टेंट प्रेशर जिसको कहते हैं वो बहुत ही ज्यादा चाहिए तो वो जो कंसंट्रेशन और संकल्प शक्ति की जो प्रैक्टिस होती है वो प्रैक्टिस को आप और कहीं पे भी लगा सकते हैं तू योर बेनिफिट कोई बहुत ही बड़ा कम हाथ में ले लिया तो लिखा ही पढ़ करने के समय जो कंसंट्रेशन लगाया जो संकल्प शक्ति लगाई की हान मेरे मैन को यह बहुत ही बोरिंग कम है मेरा मैन 10 जगह जा रहा है तो उसको पकड़ पकड़ कर के मैं बार-बार इसे किताबें लेके आऊं इसी लेखन पे लेके आऊं वो संकल्प शक्ति यदि आपकी बहुत दृढ़ हो जाती है तो आपके जीवन के कोई भी कार्य है उसमें आप सफल हो सकते हैं बाय अपलेइंग डी इसी संकल्प शक्ति का इस्तेमाल करके जबकि यह है की सुनने में आपको बहुत ज्यादा संकल्प शक्ति है कंसंट्रेशन नहीं मिलता है तो एक हो सकता है की मतलब संकल्प शक्ति इतनी डिवेलप ना हो मैंने किंतु यदि कंटेंट अच्छा है तो वो कंटेंट के माध्यम से भी आप बहुत कुछ ग्रहण कर सकते हैं और अल्टीमेटली कंसंट्रेशन का प्रैक्टिस करके संकल्प शक्ति को बढ़ा सकते हैं तो यह हुई बात की मास्टर महाशय बार-बार सोचते हैं की ठाकुर को पढ़ लिखाई नहीं आती तो इतना सब कुछ कैसे जान लिया किंतु यह जो ओरल ट्रेडीशन है वो भारत में हमेशा के लिए थी रिच थी और आजकल मॉडर्न टेक्नोलॉजी की वजह से ओरल ट्रेडीशंस जो हमारी है वाणी के द्वारा शिक्षा देना वो आजकल बहुत ही सहज लग के सबके लिए हो गया है अच्छा मास्टर महाशय क्या कहते हैं देखते ही देखते रविवार ए गया वराह नगर के नेपाल बाबू के साथ दोपहर को तीन-चार बजे के लगभग वे दक्षिणी ईश्वर में ए पहुंचे देखा श्री रामकृष्ण अपने कमरे में छोटे तखत के ऊपर विराजमान है कमरा भक्तों से ठसा तास भरा हुआ है रविवार के कारण अवसर पाकर कई भक्त दर्शन के लिए आए हैं उसे समय मास्टर का किसी के साथ परिचय नहीं हुआ था वे भीड़ में एक और जाकर बैठ गए देखा श्री रामकृष्ण भक्तों के साथ प्रसन्न मुख होकर वार्तालाप कर रहे हैं देखिए यह जो पूरा डिस्क्रिप्शन लिखा है छोटे तखत पे विराजमान है कमरे में बहुत सारे भक्त बैठे हुए हैं और फिर तो यह जब हम यह जो लीला चिंतन करते हैं लीला अनुदान करते हैं उसे समय यह सब चीज हमको कम में लगती है की किस तरह ठाकुर बैठे द किस तरह से बोलते द किस तरह से उनके सामने लोग बेचते द और किस तरह से पूरा व कारण बनता था देखा की एक 19 साल के लड़के की ओर देखते हुए रामकृष्ण बने आनंद के साथ वार्तालाप कर रहे हैं लड़के का नाम है नरेंद्र अभी ये कॉलेज में पढ़ते हैं और साधारण ब्राह्मण समाज में कभी-कभी जाते हैं उनकी आंखें पानी दर और बातें जोशीली है चेहरे पर भक्ति भाव है ये नरेन का सर्वप्रथम परिचय अपने कथामृत में और अपने साहित्य में भी सबसे पहला परिचय नरेंद्र का यह है देखिए मास्टर महाशय कहते हैं बातें बड़ी जोशीली है चेहरा बड़ा दमदार है आंखें भी उनकी देखी है आंखें पानी दर है और बातें जोशीली है चेहरे पर कितना भक्ति भाव है पहली बार देखा फिर भी देखिए नरेंद्र को देख करके मास्टर मैन से कितने इंप्रेस हो गए हैं मास्टर को अनुमान से मालूम हुआ की विषय या सख्त sansariyon की बातें चल रही है यह लोग ईश्वर भक्त धर्म पारायण व्यक्तियों की निंदा किया करते हैं फिर संसार में कितने दुर्जन व्यक्ति है उनके साथ इस पात्रता बर्तन करना चाहिए यह सब बातें होने लगी अभिषी रामकृष्ण नरेंद्र से पूछते हैं नरेंद्र भला तू क्या कहेगा संसारी मनुष्य तो एन जाने क्या कहते रहते हैं पर याद रहे की हाथी जब जाता है तब उसके पीछे पीछे कितने ही जानवर बेट रह चिल्लाते हैं पर हाथी लौट कर देखता तक नहीं तेरी कोई निंदा करें तो तू क्या समझेगा नरेंद्र कहता है की मैं तो यह समझूंगा की कुत्ते भोंकते हैं तो ठाकुर हंसकर के बोलने लगे अरे नहीं यहां तक नहीं अभी देखिए ठाकुर ने खुद को हाथी और कुत्ते का उदाहरण दिया और अभी जब नरेंद्र कहते हैं की मैं मानूंगा की कुत्ते भोंक रहे तो ठाकुर कहते हैं यहां तक यह भी है की हम जब ठाकुर और नरेंद्र यह जो रिलेशन जो है वह उसको हम स्टडी करते तो पता चलता है की नरेंद्र जो है वो जो वही कहता है आखिर में वो स्वामी जी अमेरिका गए पूरे भारत में घूमे बहुत सारी उन्होंने बातें की किंतु अल्टीमेटली जो भी बातें हैं उसका सोर्स ही देखा जाए जो भी बात कही स्वामी जी ने सबका जो है वो श्री राम कृष्ण की वाणी में है किंतु साथ-साथ में ही ठाकुर का अभी देखिए ये भी एक देखने की बात है की ठाकुर कहते एक चीज है नरेंद्र उसको थोड़ा सा अलग तरह से रिप्रेजेंट करता है माने जैसे की वो माने और ज्यादा इंजेक्शन लगा कर के और ज्यादा एड्रीनलीन दल करके वो स्ट्रांग बना करके नरेंद्र उसको प्रेजेंट करता है यहां पे ठाकुर कहता है की कुत्तों को अवगड ना करो यहां पर स्वामी जी कहते हैं की मैं सोचूंगा की वो भोक रहा है अर्थात उनको tuchchhkar करो अभी dekhiaeta करना उसकी प्रति घृणा करना यह दो अलग चीज है अभी कुत्ते भोंकते हैं तो कुत्तों को इग्नोर करना चाहिए किंतु यह नहीं है की उनकी ओर घृणा करनी चाहिए तो ठाकुर एक और उनको सीखते भी है की क्या बोलना है साथ-साथ में ऊपर से उनको यह स्प्रेस भी करते हैं की देखो भी यहां तक भी नहीं जाना है एक बहुत अच्छा उदाहरण है मैंने देखा है की इस तरह से ठाकुर एक बात कहते हैं स्वामी जी उसको दूसरी तरह से प्रेजेंट करते हैं गीता में कहा गया है की पुरुषार्थ और परमार तो परमार्थ जो है वो ईश्वर की हम पे कृपा है और पुरुषार्थ क्या है की हमको खुद को आध्यात्मिक जीवन में आगे बढ़ाने के लिए हमको क्या करना है उसको हम पुरुषार्थ कहेंगे तो अभी गीता हो या हमारे कोई भी धर्म शास्त्र हो सब लोग एक बात एग्री करते हैं की पुरुषार्थ और परमार्थ दोनों का हम अपने जीवन में अपने आध्यात्मिक जीवन में समान महत्व है ऐसा नहीं होगा की कोई व्यक्ति 100% जो है ईश्वर पर निर्भर होकर देखिए 100% ईश्वर पर निर्भर होना मतलब ये पुरुषार्थ मांग लेता है क्योंकि को अपने अहंकार को संपूर्ण रूप से ईश्वर को समर्पित करना है तो कितनी साधना करने के बाद ये होता है तो ये एक हो गया की पुरुष संपूर्ण शाना गति ऑन डी आदर हैंड संपूर्ण अध्ययन या तो संपूर्ण स्वर साधना करने से भी ईश्वर प्राप्ति हो ऐसी कोई जरूरत नहीं है माने जैसे स्वामी जी वगैरा जैसे कोई मतलब शिव भगवान शिव के अवतार स्वयं वो का सकते हैं की हान मैं सिर्फ जब ध्यान करके मेडिटेशन करके ईश्वर प्राप्ति करूंगा किंतु एवं देखिए स्वामी जी के जीवन में भी कृपा का कितना बड़ा स्थान है तो कृपा और साधना ये दोनों का समान अधिकार है अपने जीवन में तो किंतु अभी एक उदाहरण है इस उदाहरण का इंटरप्रिटेशन ठाकुर करते हैं की कृपा का क्या महत्व है और उसी उदाहरण का स्वामी जी इंटरप्रिटेशन करते हैं की purushat का क्या महत्व है वह जो हमने उदाहरण सुना और ठाकुर कहते हैं की वह गंगा में नौकर जा रही है अभी आपको अपना जो यह पाल है जो शर्ट है सेल उसको खोल देना है क्योंकि क्या ईश्वर का कृपा बतास ईश्वर का जो कृपा का जो पवन है वो हमेशा के लिए बा रहा है तो जैसे ही आपने अपना शर्ट खोल दिया जो सेल खोल दिया तो ये कृपा पवन की मदद से आपकी नोखा आराम से चलने लगेगी तो यहां पे ठाकुर ने कृपा के बारे में यह उदाहरण दिया अभी स्वामी जी यही उदाहरण देते हैं नौका का स्वामी जी कहते हैं की कृपा पवन जो है वो हमेशा के लिए बा रहा है किंतु आपको अपना शर्ट खोलने के लिए सेल खोलने के लिए पुरुषार्थ करना होगा धर्म इस जो है आपका सेल जो है यह कृपा पवन को कैच नहीं कर पाएगा तो अभी एक ही उदाहरण है स्वामी जी इंटरप्रेट करते हैं पुरुषार्थ की दृष्टि से और ठाकुर इंटरप्रेट करते हैं कृपा की दृष्टि से परमार्थ की दृष्टि से तो यहां पर भी वही से उधर हमको देखने को मिलता है अभी ठाकुर सकते हैं की कुत्ते भोक रहे तो उनको इग्नोर करो तो स्वामी जी कहते हैं की मैं सोचूंगा वो भोंकते हैं अर्थात उनको तिरस्कृत करूंगा अभी तेरस कुरुत करना और उसको इग्नोर करना ये बहुत बड़ा डिफरेंस है उसमें तिरस्कृत करना अर्थात अपने मैन में उनकी ओर टच भाव आता है इग्नोर करना वर्ण अर्थात हमारे मैन में उसकी और एक दया का भाव आता है उसको बेचारे को पता नहीं है इसलिए कुत्ता भोक रहा है की हम बाकी स्वामी जी तो सोचेंगे की वो मूर्ख है इसलिए भौंक रहा है तो मूर्ख नहीं है वो दया का पत्र है वो तिरस्कार का नहीं वो हमारे प्रेम का पत्र है यह डिफरेंस ठाकुर को हिला सकते हैं इसलिए ठाकुर ने कहा था की वो जब स्वामी जी छोटे द उनके कल पे वो घाव हुआ था और बहुत सारा खून बा गया था तो उनकी जो थोड़े से शारीरिक कमजोर हो गए द थोड़े से अल्फा तो ठाकुर ने कहा था अरे वो उसका क्षमता पहले जैसा ही होता शारीरिक शक्ति तो पूरे जगत को तोड़ पढ़ कर देता किंतु मैन को अपना कम करवाना है सौम्या भाव से करवाना है इसलिए नरेंद्र की शक्ति को थोड़ा कम कर दिया देखिए कम करके भी शक्ति को यदि पूरे जगत को उन्होंने घुमा दिया तो पुरी शक्ति होती तो नरेन क्या से क्या नहीं कर सकता था