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Sri Ramakrishna Teachings ·

Sri Ramakrishna : Life and Teachings : English & Hindi : 27 Jan 2023

Sri Ramakrishna as We Saw Him : Swami Adbhutananda

ओम स्थापकााय च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूप अवतार वरिष्ठाय राम कृष्णाायते नमः ससेस श्री रामकृष्ण एस स्वामी प्रेमानंदा जी व्हाट ही सेड अबाउट श्री रामकृष्ण व्हाट वेर हिज एक्सपीरियंसेस एंड व्हाट वेयर ह मेमोरीज। सो फर्स्ट ऑफ ऑल वी सॉ दैट ही केम टू मीट श्री रामकृष्ण एट दक्षिणेश्वर एंड इट वाज़ द फर्स्ट दर्शना ऑफ ठाकुर। व्हाट डिड ही सी? ही सी दैट ठाकुर इज़ कमिंग फ्रॉम काल मधर कालिस टेंपल टू हिज ओन रूम एंड ही वाज़ एज इफ ही वाज़ ड्रंक। ही कुडंट इवन वॉक प्रॉपर्ली। सो राजा महाराज स्वामी ब्रह्मानंदा जी ही वास होल्डिंग हिम एंड गाइडिंग ह स्टेप्स। नाउ वी मे थिंक दैट सी इफ ही कैन नॉट इवन वॉक प्रॉपर्ली दैट मींस श्री रामकृष्णा मस्ट बी आइदर ड्रंक और ही मस्ट हैव सम सॉर्ट ऑफ़ मेंटल प्रॉब्लम। बट बाबूराम महाराज इवन देन ही न्यू दैट इट इज नॉट ड्रंकननेस ऑन ठाकुरस पार्ट बट रेथन द डिवाइन एक्सटसी ठाकुर मस्ट हैव अ विज़ ऑफ़ मदर काली और ही मस्ट हैव सम डिवाइन एक्सपीरियंस विद इन हिज़ ओन हार्ट दैट इज़ व्हाई ही कैन नॉट वॉक प्रॉपर्ली। सो बाबूराम महाराज प्रॉपर्ली गेस्ड दिस मच एंड आफ्टरवर्ड्स ठाकुर केम इनू हिज रूम एंड ऑल ऑफ दे मेक प्रणाम रामदयाल बाबू राजा महाराज बाबूराम महाराज लेटर ऑन ड्यूरिंग द नाइट ठाकुर एंड राजा महाराज दे स्लेप्ड इन देयर ठाकुरस ओन रूम एंड बाबूराम महाराज एंड रामदयाल बाबू स्लेप्ड इन द वरांडा अह वेयर दे बेड्स वेर मेड फॉर देम। नाउ व्हाट हैपेंड ड्यूरिंग द मिडनाइट ठाकुर ही हैड सम डिवाइन एक्सटसी ही वाज़ इन भावराज्य एस वी नो दैट आफ्टर निर्विकल्प समाधि मदर काली हैड ऑर्डर्ड ठाकुर टू बी भावमुख्य थाक दैट मींस टू लीव ऑन द बॉर्डर लैंड ऑफ दिस नॉर्मल कॉन्शियसनेस एंड सुपर कॉन्शियसनेस एट विल वी मे हैव टू टू इयर्स एंड इयर्स ऑफ तपस्या परहप्स बर्थ आफ्टर बर्थ फॉर मिलियंस ऑफ बर्थ परहप्स वी मे हैव टू डू तपस्या साधना देन परहप्स वी मे गेट इंटू समाधि वी मे गेट अ टेस्ट ऑफ समाधि बट द ठाकुरस कंडीशन वाज़ दैट इवन अ स्मॉल थिंग दैट वुड रिमाइंड हिम ऑफ गॉड और ऑफ स्पिरिचुअलिटी ही वुड इमीडिएटली गो इनू समाधि ही वुड इमीडिएटली गो इनू सुपरकॉन्शियस स्टेट तो समथिंग मस्ट हैव हैपेंड आइदर ठाकुर माइट हैव अ विज़ और अ ड्रीम और एनी सम अह डिवाइन एक्सपीरियंस ही वाज़ रिमाइंडेड ऑफ़ नरन एंड बिकॉज़ वी नो दैट हाउ नरन वाज़ ब्रॉट टू अर्थ बाय ठाकुर हिमसेल्फ ठाकुरस विज़न वाज़ दैट देयर वेर सप्तर्षि द सेवन ऋषिज़ सेवन ग्रैंड ऋषिज़ ऑफ़ इंडियन ट्रेडिशन दे वेर मेडिटेटिंग एंड देन वन स्मॉल चाइल्ड अ वेरी हैप्पी वेरी ब्यूटीफुल चाइल्ड ही अपीयर्ड नियर द नियर वन ऋषि एंड दिस चाइल्ड से दैट आई एम गोइंग टू अर्थ यू विल आल्सो हैव टू कम डाउन विथ मी सो दिस ऋषि ओपन वन आई ओपन हिज आईज अ लिटिल एंड ही नोडेड हिज एसेंट हिज एक्सेप्टेंस सो दैट वे दिस स्मॉल चाइल्ड वाज़ ठाकुर एंड द ऋषि ही वाज़ स्वामी जी। सो ठाकुर हिमसेल्फ हैड ब्रॉट स्वामी जी टू अर्थ। सो दैट नाइट ही सडनली रिमेंबर्ड दैट आई हैव नॉट मेट नरेंद्र फॉर क्वाइट अ लॉन्ग टाइम। सो ही स्टार्टेड गेटिंग यू नो एंजियस स्टार्टेड गेटिंग स्टार्टेड हैविंग लोंगिंग टू मीट हिम। सो जस्ट लाइक अ चाइल्ड द वे अ चाइल्ड रिमूव्स हिज़ क्लोथ एंड परहेप्स ही पुट्स हिस क्लोथ बिनीथ हिज़ आर्म पीट ऑर ही थ्रोस अवे हिज़ क्लोथ। जस्ट लाइक अ दिगंबर स्मॉल टोडलर और अ चाइल्ड ठाकुर केम टू दिस रामदयाल बाबू एंड बाबूराम महाराज वेयर दे वेर अस स्लीप इन वरांडा ही वोक्कड हिम अप एंड देन ही सेड दैट सी आई हैव नॉट मेट नरे फॉर ए लॉन्ग टाइम एंड माई हार्ट इज़ यू नो द वे देयर इज़ माय हार्ट इज़ पेनिंग एज़ इफ इफ यू स्क्वीज़ अ वेट टॉवेल ट्राई द वे यू स्क्वीज़ द वे यू टर्न अह वेट टॉवेल टू ड्राई इटसेल्फ। द सेम वे माय हार्ट इज बीइंग ट्विस्टेड एंड स्क्वीज़्ड एंड आई एम सफरिंग फ्रॉम पेन बिकॉज़ आई हैव नॉट सीन नर इन सच अ लॉन्ग बाइल। सो दिस मच वी हैव सीन एंड रामदयाल बाबू आल्सो न्यू दैट ठाकुर अबाउट ठाकुर दिस भावराज्य एंड दिस विज़ंस एटसेट्रा ही यू नो ही अह काम हिम डाउन जस्ट लाइक अ मदर से दैट व्हेन सम चाइल्ड ही स्टार्ट्स थ्रोइंग टैंट्रम ही स्टार्ट्स थ्रोइंग आस्किंग फॉर थिंग्स आई वांट दिस टॉय आई वांट दैट कैंडी आई वांट दिस फूड एंड द वे मदर कम्स हिम डाउन ओके ओके बेटा आई विल कम डाउन नाउ आई विल टुमारो आई विल विल गिव यू दैट द डे आफ्टर टुमारो वी विल गो टू मार्केट एंड आई विल परचेस फॉर दैट द वे मदर कम्स डाउन हर चाइल्ड दिस रामदयाल बाबू आल्सो कम डाउन ठाकुर दैट दे विल अरेंज सम हाउ फॉर हिम टू मीट नरेंद्र ओके सो आई एम जस्ट रीडिंग दैट लास्ट पैसेज अगेन ठाकुर सेस लुक आई हैव नॉट सीन नरन फॉर अ लॉन्ग टाइम एंड आई फील एज इफ माई होल सोल वेर बीइंग फोर्सिबली रंग लाइक अ वेट टॉवेल द वे यू रंग रंग द वे यू ट्विस्ट अ वेट टॉवेल टू रिमूव द वाटर आउट ऑफ इट ही फील्स दैट हिज हार्ट इज आल्सो बीइंग स्क्विज़्ड एंड रंग लाइक अ वेट टॉवेल प्लीज आस्क हिम टू कम वंस एंड सी मी ही इज़ अ पर्सन ऑफ प्योर सत्व क्वालिटीज़ ही इज़ नारायणा हिमसेल्फ दिस इज़ ठाकुर दिस रेफर्स टू ठाकुरस विज़न दैट नर एंड नारायण ऋषि हु वेर वन ऑफ़ द ग्रेट सेजेस दे हिमसेल्फ हैव कम टू अर्थ टेकिंग द फॉर्म फॉर्म ऑफ नर आई कैन नॉट हैव पीस ऑफ माइंड इफ आई डोंट सी हिम नाउ एंड देन बिकॉज़ देयर रिलेशनशिप देर बॉन्ड वाज़ डिवाइन एंड इट ट्रांसेंट द सिंगल बर्थ दैट बॉन्ड ऑफ़ ठाकुर एंड नर इट ट्रांसेंट सो मेनी बर्थ्स एवरी टाइम अन अवतार कम्स अ शक्ति कम्स दैट इज़ मां शारदा द वे विथ श्री राम श्री रामा मदर सीता वाज़ देयर बट आल्सो हिज सेवक कम्स अ समवन सोस्ट अ वॉरियर और अह यू मे से अ प्रिंस हु बी हु डज़ द बडिंग ऑफ़ अवतार एंड स्प्रेड्स द मैसेज ऑफ़ अवतार वि श्री कृष्णा इट वाज़ अर्जुन वि श्री रामा इट वाज़ महावीर अह विथ भगवान बुद्ध इट वाज़ आनंद तो वि श्री रामकृष्णा दिस वॉरियर प्रिंस हु वुड स्प्रेड द मैसेज ऑफ़ दिस धर्म हु वुड मेड दिस धर्म विक्टोरियस ऑन अर्थ दिस वॉरियर द अवतार ऑफ शिवा हिमसेल्फ वाज़ स्वामी विवेकानंद रामदयाल बाबू हैड बीन विजिटिंग दक्षिणेश्वर फॉर सम टाइम सो द बॉय लाइक नेचर ऑफ ठाकुर वाज़ नॉट अननोन टू हिम। द वे ठाकुर वुड बिहेव समटाइ्स जस्ट लाइक ए टोडलर और अ स्मॉल चाइल्ड इट वाज़ नॉट अननोन टू रामदयाल बाबू बिकॉज़ रामदयाल बाबू यूज्ड टू विजिट दक्षिणेश्वर क्वाइट रेगुलरली सीइंग दैट चाइल्ड लाइक बिहेवियर ही न्यू दैट ठाकुर वाज़ इन एक्सटसी ही ट्राइड टू कंसोल ठाकुर बाय प्रॉमिसिंग दैट ही वुड सी नरन फर्स्ट थिंग इन द मॉर्निंग एंड आस्क हिम टू कम एंड सिमिलर अदर थिंग्स द वे व्हेन अ चाइल्ड थ्रोस टेंड्रम दैट आई वांट दिस टॉय और आई वांट दिस कैंडी हाउ मदर कम्स हिम डाउन ओके आई विल डू दिस फॉर यू टुमारो और द डे आफ्टर टुमारो आई विल आई प्रॉमिस टू ब्रिंग दिस टू यू द वे मदर कम्स डाउन अ चाइल्ड रामदयाल बाबू न्यू दैट व्हेन ठाकुर गो इनटू एक्सट्रेसी डिवाइन एक्सट्रेसी ओर ही हैड वंस ही हैड अ विज़न ऑफ एनी डीईटी ही वुड बिकम जस्ट चाइल्ड लाइक बिकॉज़ यू नो व्हाट इज़ अ डिफरेंस व्हाई दिस हैपेंस अगेन एंड अगेन द व्हाट इज़ द सीक्रेट बिहाइंड दिस चाइल्ड लाइक नेचर ऑफ़ ठाकुर वी ग्रोन अप्स वी हैव सो मेनी यू नो अंकट बंकट वी मे कॉल वी सो मेनी डिजायर्स एंड ग्रीफ एंड अह डिजायर फॉर रिवेंज ऑल दिस थिंग्स आर देयर इन आवर माइंड। सो दैट इज व्हाई वी बिहेव वेरी सीरियसली दैट यस अ आई एम समबडी आई शुड बी रिस्पेक्टेड एंड दिस पर्सन इज़ नॉट रिस्पेक्टिंग मी दैट मींस आई विल टेक रिवेंज अपॉन हिम ऑल दिस सॉर्ट ऑफ़ थिंग्स इनसिक्योरिटी दिस से लस्ट ऑल दिस थिंग्स काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह, मत्सर ऑल दीज़ थिंग्स आर एसोसिएटेड विथ अस। एंड दैट इज़ व्हाई वी बिहेव एज़ इफ वी आर लाइक ग्रोन अप्स। तो ग्रोन अ पर्सन हैज़ रिस्पांसिबिलिटीज़, ही हैज़ डिजायर्स, ही हैज़ टू टेक सर्टेन मेजर्स इन ऑर्डर टू एस्टैब्लिश हिज़ ओन प्राइमसी अमोंग हिज़ ब्रदर्स एंड सिस्टर्स। ऑल ऑफ़ दिस काइंड ऑफ़ बिहेवियर वी कंसीडर दिस इज़ अ ग्रोन अप लाइक बिहेवियर। बट एक्चुअली दिस इज़ नॉट अ नॉर्मल बिहेवियर। अ चाइल्ड व्हेन ही टेक्स बर्थ एंड हिज़ फर्स्ट सिक्स इयर्स व्हेन हिज़ माइंड इज़ फ्री फ्रॉम ऑल दिस इंप्योरिटीज़। दैट इज एक्चुअली अ नॉर्मल बिहेवियर फॉर अ ह्यूमन बीइंग बिकॉज़ ही डजंट थिंक लाइक आई वांट टू हर्ट अदर और ही डजंट फील लाइक समवन एल्स इज़ हर्टिंग हिम इफ समवन टेक्स अवे समथिंग फ्रॉम हिम देन ही डजंट फील दैट दिस थिंग बिलोंग्स टू मी बिकॉज़ दिस आइडिया ऑफ़ बिलोंगिंग दैट आइडिया ऑफ़ ओनरशिप दैट आइडिया ऑफ़ यू कैन से वेल्थ एंड प्रोस्पेरिटी ऑल ऑफ़ दिस इज़ एब्सेंट। इन चाइल्ड्स माइंड। ऑफकोर्स वी हैव टू अंडरस्टैंड दैट फिजिकल सेफ्टी इज़ पैरामाउंटेंस फॉर अ चाइल्ड। सपोज़ चाइल्ड इज़ इल और समवन इज़ थ्रेटनिंग हिम और समवन इज़ बीटिंग द चाइल्ड। चाइल्ड विल ऑफ़ कोर्स क्राई एंड क्राई फॉर हिज़ मदर टू प्रोटेक्ट हिम और क्राई फॉर हेल्प एटसेट्रा। सो दिस फिजिकली समवन व्हेन थिटन्स हिम देन ऑफ़ कोर्स चाइल्ड ट्राइ टू प्रोटेक्ट हिमसेल्फ। बट बिय्ड दैट दिस इज अ बिय्ड दैट गोइंग बिय्ड दैट व्हेन ही ग्रोस अप हिज डिजायर्स आर नॉट कनेक्टेड जस्ट फॉर फिजिकल सेफ्टी हिज़ डिजायर्स आर हिज डिजायर्स स्पान होल वर्ल्ड ही सीज़ दैट देयर इज़ समवन अ वैरी नाइस होटल इन पेरिस सो दैट आई आई आई वांट टू अर्न एज़ मच मनी सो मच मनी दैट आई विल गो टू पेरिस एंड आई विल स्टे इन दैट होटल ऑल दिस लॉन्ग टर्म प्रोजेक्शन ऑफ हिज ईगो दैट इज़ अ परव्यू ऑफ़ अ एडल्ट पर्सन। सो दैट इज़ व्हाई अह व्हेन ठाकुर बिहेव जस्ट लाइक अ चाइल्ड दैट मींस ही हैड अ डिवाइन विज़न एंड हिज़ एडल्टहुड एनी इवन एनीवे ठाकुरस डिज़ायर्स व मिनिमल बट व्हेन अ पर्सन ग्रोस अप समथिंग और अदर्स स्टिक्स टू हिम। बट आफ्टर अ विज़ ऑफ मदर इवन दिस स्मॉलस्मॉल थिंग्स व्हिच आर स्टिकिंग टू हिम इवन दैट गोज़ अवे एंड ही बिकम्स जस्ट एस ही इज़ द पर्सन हु हैज़ बोर्न यस्टरडे द चाइल्ड हु हैड बोर्न यस्टरडे हाउ प्योर हाउ सात्विक एंड हाउ हैप्पी ही इज द सेम थिंग यूज टू हैपन वि ठाकुर ओके नाउ वी विल स्टार्ट विद हिंदी श्री राम कृष्ण कथामृत

श्रीरामकृष्ण कथामृत : द्वितीय दर्शन

हमने देखा कि किस तरह से मास्टर महाशय जो है उनके घर में कुछ समस्याएं थी। उनका मन जो है बहुत ही हताश हो गया था। सुसाइड करने के विचार भी एक दो बार आए थे और शायद ठाकुर को देख कर के ऐसा भी सोच लिया होगा कि बहुत अच्छी जगह है। यहां पे ही रह जाते हैं। क्यों घर जाएंगे? ये जो घर की जवाबदारी, संसार की जवाबदारी सब छोड़ देते हैं। तो ठाकुर ने क्या कहा कि दो चीज कही कि जब ईश्वर का नाम लेने से आंखों में आंसू आते हैं तभी जो है हम लोग को ये जो संसार त्याग करने का सही-सही अधिकार मिलता है। दूसरा के प्रताप के भाई की बात कही कि वो अपने बीवी बच्चों को ससुराल छोड़ के आया था और यहां पे रह रहा था तो ठाकुर ने उसको वो डांट करके भगा दिया कि अरे तुम्हारे बीवी बच्चों की संभाल कौन लेगा। तो इतना करके फिर ठाकुर जो है वो मास्टर महाशय का असेसमेंट करना शुरू करते हैं कि क्या तुमने शादी कर दिया? तो मास्टर महाशय कहते हैं हां मैंने शादी कर ली तो ठाकुर एकदम बड़े व्यथित हो जाते हैं और रामलाल उनका जो भतीजा है जो कि काली मंदिर में पुजारी थे उस समय वो बुला के कहते हैं अरे इसने शादी भी कर ली फिर कहते बीवी बच्चे हैं तुम्हारे तो है मास्टरमाशा कहते हैं हां मेरे बच्चे भी है तो ठाकुर और भी व्यथित हो गए और फिर उन्होंने कहा कि अच्छा तुम्हारी बीवी जो है कैसी है वो विद्या स्त्री है कि अविद्या स्त्री है तो मास्टर महाशय कहते हैं कि हां वैसे तो उसका नेचर अच्छा है किंतु उसमें अज्ञान है अभी अज्ञान क्यों कहा? क्योंकि मास्टर महाशय को पता था। मतलब मास्टर महाशय क्या समझते थे? जैसे हम लोग भी सब जनरली क्या समझते हैं कि किसी के पास कोई बड़ी डिग्री होती है। कोई अच्छा सा उसका एजुकेशन होता है तो उसके पास ज्ञान है। जिसने कि कोई अच्छी तरह से पढ़ाई नहीं की है। या तो फिर जिसको यह नहीं पता है कि संसार में व्यवहार किस तरह से किया जाता है। एक कॉमन सेंस कैसे होता है? पैसे कैसे कमाया जाता है? यह सब जिसके पास नहीं होता वो अज्ञानी है। तो मास्टर महाशय ने कह दिया कि मेरी बीवी अज्ञानी है। तो ठाकुर और भी नाराज हो गए और तिरस्कार करते हुए कहा अच्छा तुम क्या ज्ञानी हो? अर्थात अभी मास्टर महाशय का डेफिनेशन और ठाकुर का डेफिनेशन दोनों में डिफरेंस क्या है? मास्टर माश सोचते हैं या तो पैसा कमाने की शक्ति या तो ये जो है एकेडमिक क्वालिफिकेशन एजुकेशन क्वालिफिकेशन ये दो हमको ज्ञान देती है और ठाकुर क्या कहते हैं कि ईश्वर को प्राप्त करने की विद्या जो है वही इस उसी को सही-सही विद्या कहा जाता है। बाकी सब विद्याओं का कोई अर्थ नहीं है। जैसे कि वो ठाकुर का एक बहुत ही सुंदर एग्जांपल है। पंडित जी जो है वो नौका में बैठ के जा रहे थे तो वो जो नौका चला रहा था तो पंडित जी बार-बार पूछ रहे हैं कि अच्छा तुमने क्या व्याकरण का अभ्यास किया है क्या तुमने ये पंचदशी पढ़ी है क्या तुमने सांख्य वेदांत पढ़ा है तो बेचारा वो गरीब नौका चलाने वाला कहता है कि पंडित जी मैंने तो कुछ पढ़ाई नहीं की अच्छा उसके बाद में एक तूफान आ जाता है नौका उलट जाती है और पंडित जी और जो नाविक है दोनों नदी में गिर जाते हैं तो फिर वो जो नाविक पूछता है पंडित जी को कि अच्छा आपको क्या तैरना आता है तो पंडित पंडित जी के तैरना नहीं आता। तो उसने क्या कहा कि मुझे तैरना आता है। तो मतलब ये जो भवसागर को जो पार करवा ले वही विद्या सही सही विद्या है। वरना हमारे पास कितना ही पैसा हो, शहरत हो, इज्जत हो, प्रतिष्ठा, मान सम्रांत सब कुछ हो किंतु हमको बार-बार इस पृथ्वी पे अवतरण करना पड़ेगा, जन्म लेना पड़ेगा। जब तक कि हम अपने कर्मों से मुक्त ना हो जाए। साधना करके साधन भजन करके ईश्वर की कोई अनुभूति करना ना कर ले या तो आत्मदर्शन ना कर ले तब तक इस भवसागर में हमको बार-बार तैरते ही रहना पड़ेगा। तो इस तरह से ठाकुर ने कहा कि क्या तुम फिर ज्ञानी हो? तुमको पता ही नहीं है कि ज्ञान और अज्ञान का डेफिनेशन क्या है? फिर मास्टर ठाकुर फिर से पूछते हैं मास्टर महाशय को कि साकार और निराकार किस पे विश्वास है? तो मास्टर महाशय कहते हैं कि निराकार पे विश्वास है। तो ठाकुर कहते हैं कि देखो निराकार पे विश्वास है तो कोई म दिक्कत नहीं है। किंतु जो कुछ भी चीज पे तुम विश्वास रखते हो उसको एक निष्ठा के साथ उस पथ का तुम अवलंबन करते जाओ। क्योंकि अल्टीमेटली हम किसकी भी आराधना करते हो। मां दुर्गा है, मां काली है, भगवान कृष्ण है, भगवान महावीर है, भगवान राम है, जिसकी भी हम आराधना पूजा साधना करते हो। एक निष्ठता, प्रमाणिकता और यह जो है कि करुणा, मैत्री यह सब गुण होने से ही हमारी ठीक-ठीक साधना होती है। वरना आप यदि कितना ही चिल्ला-चिल्ला के कहेंगे कि मेरे भगवान आपके भगवान से ज्यादा श्रेष्ठ है। आप इतना चिल्लाएंगे साथ-साथ में ही आपका वर्तन में यदि दुराचार दिखाई देता है। आपका जो वर्तन जो है वो अक कपटी है। आप कपटी पर्सन है। तो फिर क्या है कि वह साधक जो है या तो भक्त जो है अपने जीवन में कोई ईश्वर आराधना के मार्ग में कुछ ज्यादा पा नहीं सकता है। सफल नहीं हो सकता है। तो यहां तक हमने देखा कि ठाकुर के साथ उनकी बात हुई। अभी कल हमने यह भी देखा था कि जब ठाकुर पूछते हैं कि तुम साकार भी है और निराकार भी है। दोनों सत्य है। दोनों एक लेजिटमेट पाथ ऑफ साधना है। उस समय मास्टर महर्षि थोड़ा सा सोच कर के यह बोलते हैं कि अच्छा यदि आप पत्थर की मूर्ति की पूजा करेंगे उससे तो यह तो अंधश्रद्धा नहीं फैलेगी। आपको किसने कह दिया कि पत्थर की मूर्ति को आप नैवेद्य चढ़ाने से या तो पत्थर की मूर्ति को जैसे हम यहां पे करते हैं अपने मंदिर में मार्बल की ठाकुर की मूर्ति है। ठंडी के दिनों में उनको भी ये शॉल वगैरह पहनाते हैं। तो क्या ये सब अंधश्रद्धा नहीं है? मार्बल को कहां ठंडी लगने वाला है कि आप उनको शॉल पहनाने को जाएंगे। तो ठाकुर कहते हैं कि अरे वो मिट्टी की प्रतिमा नहीं है। चिन्मई प्रतिमा है। हमको ये जो मार्बल के जो ठाकुर है उसके भीतर में उनके भीतर में हमको सही-सही ठाकुर देख के इस तरह से बिहेव करना है कि हम उनकी सेवा कर रहे हैं। तो बात ये नहीं है कि सामने ठाकुर बैठे हैं कि मार्बल की वो मूर्ति बैठी है। बात ये है कि हमारे ह्रदय में क्या भाव जागृत होते हैं। यदि मैं दिखाने के लिए पीछे में ऑडियंस बैठा है। भक्त लोग बैठा है। उनको दिखाने के लिए मैं बढ़िया मजे से पूजा कर रहा हूं। तो फिर सामने यदि सही-सही ठाकुर भी बैठे होते तो कोई फर्क नहीं पड़ने वाला था। मुझे कोई लाभ नहीं होने वाला था। और सामने यदि सिर्फ मार्बल की भी प्रतिमा पड़ी है और मैं लोगों को पीछे में जो भक्त लोग बैठे हैं उनको दिखाने के लिए नहीं किंतु ठाकुर की पूजा करने के लिए पूरे मतलब एक निष्ठ हृदय से श्रद्धा पूर्वक यदि मैं आरती करता हूं या तो पूजा करता हूं तो फिर वो सामने कौन बैठा है वो फर्क नहीं पड़ता। मेरी एक निष्ठता और मेरी जो श्रद्धा भक्ति है उसी से मेरा काम हो जाने वाला है। अर्थात बाहर में कौन है? उसकी बजाय मेरे हृदय में क्या है? उसी का ज्यादाेंस है। इनफैक्ट उसी का ही सही-सहीेंस है। तो इसलिए ठाकुर कहते हैं कि वो मिट्टी की प्रतिमा क्यों ना होने लगे? वो मिट्टी नहीं चिन्मय प्रतिमा है। अभी चिन्मय मूर्ति यह बात मास्टर न समझ सके। उन्होंने कहा अच्छा जो मिट्टी की मूर्ति पूजते हैं उनको समझना भी तो चाहिए कि मिट्टी की मूर्ति ईश्वर नहीं है और मूर्ति के सामने ईश्वर की ही पूजा करना ठीक है परंतु मूर्ति की नहीं। अभी मास्टर वहां से वो वहां पर जाते थे ब्राह्मण समाज वगैरह में तो ये लेक्चर सुन सुन के ये आर्गुमेंट कर करके करके उनको ऐसा लगने लगा कि ये जो फिलॉसोफिकल आर्गुमेंट है वही धर्म का सार है तो हमको लोगों को ये सब समझा देना चाहिए लेक्चर दे दे के कि ये जो मिट्टी की प्रतिमा नहीं है ये तो सही सही ईश्वर बैठे हैं ऐसा यदि अपने मन में भाव रखोगे तो आपका कल्याण होगा ऐसा हमको बात फैलानी चाहिए तो ठाकुर ने ये सब सुनकर के अप्रसन्न हो गए और कहा तुम्हारे कलकत्ते के लोगों में यही एक बात है कि लेक्चर दोना और दूसरों के बारे में सोचते रहना। मैंने दूसरों को यह समझा दूंगा, दूसरों को वो समझा दूंगा। यही तुम कोलकाता वाले सोचते हो। अपना खुद का क्या होगा? नीचर की होवे ता ठीक नहीं। अपना खुद का क्या होगा? उसका कोई मतलब ठिकाना नहीं है। अपने को कौन समझाए इसका ठिकाना नहीं। अजी समझाने वाले तुम कौन हो? जिनका संसार है वे समझाएंगे। अभी देखिए ठाकुर जब कहते हैं कि कौन समझाते हैं तो कितना सुंदर पोएटिकली उन्होंने उपमा देकर कहा है। जिन्होंने सृष्टि की रचना की है। सूर्य, चंद्र, मनुष्य, जीव-जंतु बनाए हैं। जीव-जंतुओं के भोजन के उपाय किए हैं। उनका पालन करने के लिए माता और पिता का गठन किया है। माता-पिता में स्नेह का संचार किया है कि जिससे कि माता-पिता अपने बच्चों का यह समाज का वो जो है कल्याण करने के लिए कुछ करें। वे समझाएंगे ये सब जिन्होंने सूर्य चंद्र बना दिया ये पूरी सृष्टि की रचना कर दी क्या वो इतना नहीं कर सकते कि अज्ञानी लोग को ये समझा दे कि हां भाई तुम ये मत सोचो कि तुम्हारे सामने पत्थर की प्रतिमा है ये सोचो कि तुम्हारे हृदय में मेरे प्रति कितनी श्रद्धा भक्ति है वो क्या ईश्वर ये सब नहीं समझा सकते तुम्हारी क्या जरूरत है ये सब करने में तुम पहले अपना देखो तो इतने उपाय तो उन्होंने किए और यह उपाय वे ना करेंगे अगर समझाने की जरूरत होगी तो वे खुद समझाएंगे क्योंकि वे अंतर्यामी है। यदि मिट्टी की मूर्ति पूजने में कोई भूल होगी तो क्या वे नहीं जानते कि पूजा उन्हीं की हो रही है। वे उसी पूजा से संतुष्ट होते हैं। इसके लिए तुम्हारा सिर क्यों धमक रहा है? तुम यह चेष्टा करो जिससे तुम्हें ज्ञान हो और भक्ति हो। और यहां पर देखिए ये जो ठाकुर ईश्वर को पुकारने में यदि हमारी गलती होती है तो ईश्वर क्या ये नहीं समझते कि वो तो एक निष्ठ होकर मुझे पुकार रहा है उसमें वो जो मंत्र यदि ठीक से नहीं बोले गए या तो पूजा की विधि में जो दशोपचार पूजा होता है उसमें धूप दीप बिल पत्र ये चंदन वगैरह जो ऑफर नैवेद्य वगैरह जो ऑफर किया जाता है उसमें कुछ गड़बड़ी हो गई है तो भगवान क्या यह नहीं समझते कि वो एक निष्ठ होकर के मुझे पूज रहा है तो ये सब ये जो विधि या तो आचार या तो मंत्र पाठ उसमें यदि कोई गलती हो तो फिर उस गलती को गलती नहीं कहना चाहिए। ये ठाकुर इसके बारे में यहां तो नहीं बाद में किंतु एक उदाहरण भी देते हैं कि एक बड़ा बच्चा अपने पिताजी को पिताजी कह के पुकारता है और जो छोटा बच्चा अभी बहुत ही छोटा है अपने पिताजी को बा या पा ऐसा करके कुछ करके पुकारता है। तो पिताजी को पता नहीं है कि वो छोटा है तो बोल नहीं पाता। तो इसलिए उसका अपना जो प्रेम है इस तरह से दिखा रहा है और बच्चा बड़ा हो गया है तो ठीक-ठीक उनका नाम उच्चारण कर रहा है। तो ऐसा तो नहीं है कि छोटा बच्चा उनका नाम नहीं ले रहा है तो प्रेम कम है। बड़ा बच्चा ठीक से पिताजी को बुला रहा है तो वो उसमें ज्यादा प्रेम है। ऐसा तो नहीं है। जब पिताजी को यदि यह बात पता है कि दो बच्चों में समान प्रेम है तो भई भगवान ये नहीं समझ पाएंगे कि जो एकनिष्ठ होकर के मेरी आराधना करते हैं साधना करते हैं वो यदि विधि आचार मंत्र पाठ में यदि कोई गड़बड़ भी हो जाए या तो फिर यह जो मूर्ति जो है उसको पत्थर की मूर्ति मान करके भी मेरी पूजा करना शुरू कर दे तो क्या फर्क पड़ता है जब तक उनका हृदय शुद्ध सात्विक पवित्र ना हो तब तक यह सब बाह्य आचार विधि वगैरह का कोईेंस नहीं रहता अब शायद मास्टर महाशय का अहंकार संपूर्ण रूप से चूर्ण होने लगा। वे सोचने लगे यह जो कह रहे हैं वह ठीक ही तो है। अभी देखिए मास्टर महाशय ने अभी तक आर्गुममेंट किया किंतु इसके बाद में किंतु उनको लगा कि जो ठाकुर के पास आते थे उनका तो अंतिम जन्म होता था। उनका मन जो है वो बिल्कुल ठीक तरह से तैयार हो के हो जाता था। जैसे आप वघार कर लेते हैं उसके बाद में वो फिर उसमें वो सब्जी वगैरह काट करके डाल ही देना होता है तो फिर शब्दी तैयार हो जाती है तो वो उनके जो संस्कार जो है वो उस तरह से परिपक्व हो ही चुके थे कि ठाकुर ने जब एक बार उनको कुछ कहा तो उनका मन जो है उसको समग्र रूप से स्वीकृत करके अपने उस ठाकुर के उपदेश के आधार पे नए तरह से नया जीवन गठित करने के लिए वो तैयार थे उस समय तो मास्टर महाशय कहते कि यह जो कह रहे हैं वह ठीक ही तो है। मुझे दूसरों को समझाने की क्या जरूरत है? क्या मैंने ईश्वर को जान लिया है या मुझ में उनके प्रति विशुद्ध भक्ति उत्पन्न हो गई है? स्वयं के सोने के लिए जगह नहीं है और लोगों को न्योता दे रहे हैं। इस बात से क्या कहना चाहते हैं? मुझे तो कुछ समझ में नहीं आया और मैं दूसरों को समझाने को जा रहा हूं। स्वयं को कुछ ज्ञान नहीं, अनुभव नहीं और दूसरों को समझाने चले हैं। वास्तव में कितनी लज्जा की बात है। कितनी हीन बुद्धि का काम है यह। क्या यह गणित, इतिहास या साहित्य है कि दूसरों को समझा दें। यह ईश्वरीय ज्ञान है। ये जो बातें कह रहे हैं वे कैसे हृदय को स्पर्श कर रही है। अच्छा हमने पहले भी इसको डिस्कस किया था कि यदि ये जो माने मटेरियल साइंस है ये जो एक्सटर्नल नॉलेज जो है बाह्य जगत का जो ज्ञान उसमें आपका चरित्र के साथ में ये सब चीजों को कोई ज्यादा लेना देना नहीं है। यदि आप बहुत ही कोई व्यक्ति बहुत ही बद चरित्र भी होता है तो बहुत अच्छा शिक्षक हो सकता है शायद क्योंकि उसको जो है गणित जो है या तो फिर मैथमेटिक्स जो है या तो फिर आर्किटेक्चर है या तो इंजीनियरिंग है या तो फिर रॉकेट साइंस है व्हाटएवर उसके ऊपर में उसकी बहुत ही अच्छे से उसकी ग्रिप है। बहुत ही अच्छी उसकी स्किल है। किंतु ये जो आध्यात्मिक जगत से जुड़े हुए जितने भी विज्ञान है वो चाहे आयुर्वेद हो आध्यात्मिक साधना की तो बात ही छोड़ दीजिए। वेदांत, योग, उपनिषद वगैरह-वगैरह। किंतु इसके अलावा हमारे भारतीय शास्त्र में जो विज्ञानों के बारे में बताया गया है वास्तु शास्त्र आयुर्वेद या तो फिर धनुर्वेद ये सब के बारे में ज्योतिष ये सब हमारे चरित्र के साथ में हमारी साधना के साथ में जुड़े हुए हैं। मां की लाइफ में एक बहुत ही अच्छा एक इंस अच्छा तो नहीं कह सकते किंतु एक बहुत ही एक पोइंग एक इंसिडेंट है कि मां का देहांत के कुछ समय पहले मां जय राम भाटी या कोलपाड़े में कहीं पे थी तो एक युवा ज्योतिष मां के पास आया तो अभी उसने क्या किया कि वो जो जैसे होता है कि कोई ज्योतिष आता है तो मां के साथ में ये जो राधु माकू नलिनी वो जो सब थे वो उनको दिखाना शुरू कर दिया कि अच्छा वो राधु का भी बच्चा हुआ था नलिनी दीदी या या तो मां को दी। दो में से एक का भी एक लड़का हुआ था उस समय एक सेट मैं भूल गया। तो अभी वो ज्योतिष है। उसने वो नलिनी दीदी या तो मां को दी। दो में से एक को कह दिया कि आपका लड़का जो है कुछ दिनों के बाद में वो मर जाएगा। वो उसकी मृत्यु हो जाएगी। वो ज्यादा जिंदा नहीं रहेगा। ये सुनकर के वो तो एकदम चिल्लाना रोना शुरू कर दिया। मां के पास आकर के बोलने लगी। अरे मां मेरा बेटा मर जाएगा। मैं क्या करूं? ये वो तो मां भी थोड़ी परेशान हो गई। व्यथित हो गई। फिर वो ज्योतिष जो है यंग लड़का उसको बुलाया कहा कि अरे भाई यदि तुम्हारा ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ऐसा कुछ दिखता है कि ये छोटा बच्चा वो बहुत ही जल्दी से मृत्यु पामेगा बहुत जल्दी से मर जाएगा तो भाई वो उसकी मां को क्यों कहते हो बेचारी वो परेशान हो गई मुझे आकर के बताना था तो हम कुछ व्यवस्था करते हैं अभी तुम्हारे शास्त्र में जो भी शांति स्वस्थ है तुम करो अभी जो भी दक्षिणा लगेगी मैं करूंगी व्यवस्था तो ये ज्योतिष जो है उसमें ये सब जो है वो शांति शांति स्वस्थ जो भी करना है किया किंतु वो जो उनका बच्चा बचा नहीं कुछ दिनों के बाद में वो सही सही मर गया। अभी यह बात शरद महाराज को पता थी कि ये जो युवा ज्योतिष जो है उसके पास में यह सिद्धि सही सही है कि वो ठीक-ठीक बता पाता है। तो मां का खुद का जब अंतिम बीमारी चल रही थी। मां पहले भी कई बार बीमार हुई थी। तो सब समय वो रिकवर होती जाती थी। अभी इस समय की बीमारी जो है दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जाती है। मां का जो शरीर है ज्यादा से ज्यादा क्रूश और रिग्न होता जा रहा है। तो यह देख के शरद महाराज ने उस ज्योतिष को बुलाया यंग लड़के को कि अच्छा तुम मां की कुंडली देखकर के बोलो कि क्या होने वाला है? तो ज्योतिष ने कह दिया कि इस बार जो है मां का शरीर नहीं बचेगा। तो निश्चय अभी यह सुनकर के शरद महाराज ने भी उनको कहा कि जो भी शांति स्वस्थ है तुम्हारी विधि के अनुसार तुम करो। उसने किया भी सही किंतु जब महामाया ने ठीक कर ही लिया है कि शरीर रखने का उनका जो प्रयोजन है वह समाप्त हो गया है तो फिर उनको कोई नहीं रोक सकता। मां ने शरीर त्याग कर दिया। महासमाधि ग्रहण कर ली। किंतु ये देखिए कि इस तरह के लोग भी होते हैं जो कि ठीक-ठीक हमको कह पाते हैं। अर्थात ज्यादातर केसेस में 99% केसेस में जो हम फ्रॉड देखते हैं और न्यूज़ पेपर में पढ़ते हैं कि कैसे इस तरह के लोग लोगों को मूर्ख बनाते हैं। तो ये देख के ये नहीं सोच लेना है कि विज्ञान गलत है। वही है कि विज्ञान को वो उसका उसकी साध्य करने वाले उस विज्ञान में सिद्धि प्राप्त करने वाले लोग अभी बहुत कम बचे हैं। और ये सीक्रेट लोगों को नहीं पता चलता कि जिस तरह से मास्टर महाशय कहते हैं ना कि आध्यात्मिक जीवन जो है वो गणित है। क्या तो फिर ये मैथमेटिक्स है ना कि ये लैंग्वेज है, हिस्ट्री है, ज्योमेट्री है, जग्राफी है। उसकी तरह वो मुखस्थ करके वो नहीं आयत हो जाता। उसके लिए सही-सही बैठकर के साधना करनी पड़ती है। अच्छा तो आज यहीं तक कल फिर से मिलेंगे। ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्ण नमस्तु। जय मां जय मां