भूमिका, चैतन्य महाप्रभु की कहानी
ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः कंप्लीट वर्क्स ऑफ स्वामी विवेकानंद उसमें से हम पाठ कर रहे हैं स्वामी जी के ज्ञान योग की सीरीज जो है उसमें से एक लेक्चर कॉस्मो मैक्रो कजम कल हमने देखा कि किस तरह से स्वामी जी ने एक बड़ा ही इंपॉर्टेंट पॉइंट हमारे सामने रखा है यह जो पूरा डिबेट है जिसको कहेंगे कि डायलेक्टिक्स डायलेक्टिक्स यानी कि पक्ष और प्रतिपक्ष दोनों एक के बाद एक अपने पॉइंट्स रखेंगे उत्तर पक्ष और पूर्व पक्ष यह जिस तरह से हम शंकराचार्य के कमेंट्रीज में देखते हैं या तो फिर सोक्रेट के डायलॉग्स में देखते हैं सब जगह पे यदि कोई भी कॉम्प्लिकेटेड फिलोसॉफिकल पॉइंट हमको एक्सप्लेन करना है तो सब समय यह एक बहुत ही सुंदर मेथड है कि हम सबसे पहले अपना जो प्रूव करना चाहते हैं हम जो अपनी जो बेसिक थिरी है व सबके सामने रख दें उसके बाद में सामने वाले का क्या ऑब्जेक्शन है हमार थिरी के अगेंस्ट में वो ऑब्जेक्शन को पॉइंट बाय पॉइंट कंसीडर करें हमारी यह एक ग्रांड ट्रेडिशनल धर्म में कि वाद और विवाद जब पक्ष और प्रतिपक्ष इकट्ठा होते हैं तब वे दोनों लोग डिस्कशन करते हैं अपना अपना पॉइंट रखते हैं और जो जीत जाता है तो उसको फिर वह दिग्विजय ना कि क्या-क्या सब खिताब मिलते हैं गौरांग महाप्रभु के बारे में एक सुंदर बात मैंने पहले भी एक बार बताई थी कि एक दिग्विजय पंडित था वो चारों ओर घूम रहा था न्याय न्याय का पंडित मैं न्याय के बारे में आपके साथ में वाद विवाद करूंगा और फिर यदि मैं जीत जाता हूं तो आपको मुझे चक्रवर्ती ना कि विश्व विजय ना कि ऐसा कोई खिताब देना होगा आपको मुझे वो विजय पत्र देना होगा कि आप यहां पर आए हैं और आपने मेरे साथ में आर्गुमेंट किया है वाद विवाद किया है और आप जीत गए हैं इसका मैं आपको साक्षी देता हूं यह देता हूं ऐसा करके आपको विजय पत्र मुझे देना होगा और उस समय के कुछ राजा भी थे कि इस तरह से जो दिग्विजय लोग थे उनको बड़ा सम्मान देते थे तो एक ऐसा एक पंडित नदिया में आया नदिया के वो अपने गौर गौरांग महाप्रभु स्वयं वहां पर विराजित है अभी हालांकि उन्होंने वो तो पंडित ही थे उस समय तो उनका वो जो भीतर की जो धार्मिक चेतना जो है वो इतनी विकसित उस समय नहीं हुई थी तो वो न्याय के पंडित थे और सब स्टूडेंट उनके सामने वो बैठ कर के पढ़ा करते थे जैसे कि टोल होती है ना ठाकुर के बड़े भाई ने जिस तरह से कलकाता में टोल खोली थी ठाकुर खुद जैसे कि लाह बाबू की पाठशाला में जाते थे हालांकि वोह पाठशाला पार्टिकुलरली संस्कृत की नहीं थी किंतु जो भी है वो एक संस्कृत टोल थी उनकी और वो उसमें वोह पढ़ाते थे तो जब यह पंडित आया तो सबने कहा कि अरे बाप रे यह तो इतना मतलब इस तरह का उसकी मेदा शक्ति है उसकी इस तरह की उसकी कैपेसिटी है बोलने की वाद विवाद करने की नदिया में आएगा नदिया में यदि हम लोग हार जाएंगे उसके सामने तो क्या होगा हमारा तो ऐसा बोल कर के सब डरना शुरू हो गए तो सबने कहा कि यह जो है वो अपना निमाई पंडित उसको पकड़ो और निमाई पंडित के साथ में जाकर के जितना आर्गुमेंट करना हो करें वो निमाई भी इस तरह के थे कि वो जिसके साथ में भी वो वाद विवाद करेंगे गांव में सबको परेशान करके रखा था जैसे वो भगवान कृष्ण छोटे थे वृंदावन में सबके घर में जाकर के वो मक्खन चोरी करके खाते थे फिर गोपियां जाकर के मां यशोदा को कंप्लेन करती थी तो ऐसे ही निमाई पंडित थे इस तरह से वो सबके साथ में वो किसी ना किसी तरह से वाद विवाद करके सबको परेशान करके रखेंगे तो जाओ निमाई पंडित के साथ में झगड़ा करो जितना भी करना है वो दोनों पागल लड़े आपस में तो वो अभी निमाई पंडित बैठे थे अपने स्टूडेंट्स के साथ में के किनारे और यह पंडित आया और उसके साथ में पूरा लश्कर है वो कोई ढोल बजा रहा है कोई शंख बजा रहा है विश्व विजय पंडित हैं मतलब उसका तो एक समान होना चाहिए तो पं निमाई के सामने बैठ गए तो अभी यह पंडित कहता है कि अच्छा मैं आपके साथ में इस तरह से कोई भी एक पॉइंट उठाइए मैं आपके साथ में आर्गुमेंट करना चाहता हूं वाद विवाद करना चाहता हूं यदि आप हार जाते हैं तो आपको मुझे विजय पत्र देना होगा तो ठीक है अच्छा तो बहुत अच्छी बात है गौरांग महाप्रभु कहते हैं एक काम करो यह गंगा के किनारे हम बैठे हैं तो गंगा के ऊपर में मुझे कोई अच्छी सी स्तुति माने उसको मुझे सुनाओ मैं चाहता हूं कि गंगा की महिमा आपके जैसे विश्व प्रसिद्ध पंडित के सामने मैं उसका उसका श्रवण करूं तो मने पहले तो यह सब चीजों में क्या है अहंकार प्रदर्शित नहीं करना होता है जिसको पैसिव अग्रेशन जिसको कहते हैं बड़े ही विनम्रता से सामने वाले की बात काटनी होती है तो ये बड़े ही विनम्रता से उन्होंने कहा कि मैं आपके साथ में मैं तो आप मैं तो सुना है कि आप इतने बड़े पंडित है और गंगा के किनारे गंगा की कोई अच्छी सी वो तवन स्तुति सुनाइए तो यह पंडित ने ऐसा सुना कि बोला कि अच्छा ठीक है तो बड़े ही मने खड़े-खड़े इतने कॉम्प्लिकेटेड वर्ज में उसने गंगा के कितने 50 न की 100 स्तोत्र 100 श्लोक खड़े-खड़े उसने बोल दिए और जो लोग इस घटना के साक्षी थे जिन्होंने इसका वर्णन किया है वे लोग लिखते हैं कि जैसे बिजली गिरती है बारिश जैसे कि तूफान आता है इस तरह से पंडित की मेदा और उसकी वाक शक्ति जैसे कि सरस्वती स्वयं उसकी जीवा पर विराजमान है बिजली गिरती है इस तरह से प्रचंड मेदा शक्ति का पूर जो आता है उस तरह से एक के बाद एक इतने कॉम्प्लिकेटेड इतने सुंदर ताल बद्ध श्लोक उसने खड़े-खड़े 100 श्लोकों की रचना कर दी तो ये जिस लोगों ने देखा वे लोग दंग रह गए कि इस तरह के श्लोकों की रचना करने के लिए किसी भी पंडित को किसी भी आचार्य को अपना पूरा जीवन लगा देना पड़ेगा और यहां पर गौरांग महाप्रभु ने उसको कहा तो उसने खड़े-खड़े ऐसे श्लोकों की रचना कर दी बाप रे वो निमाई करेंगे तो क्या करेंगे तो अभी हुआ क्या कि गौरांग महाप्रभु ने चुपचाप सब कुछ सुन लिया फिर उन्होंने क्या कहा कि देखिए पंडित जी आपके जो श्लोक है उसमें एक श्लोक और दूसरे श्लोक में यहां पर ग्रामर की छोटी सी मिस्टेक रह गई है है तो यह बात जैसे सुना तो व पंडित एकदम भयभीत हो गया एकदम चौक गया कि सबसे पहली बात तो है कि इतने सारे कॉम्प्लिकेटेड श्लोकों को सुनने कर सुन कर के समझने की क्षमता किसी में नहीं इस तरह की कक्षा का इस तरह की बुद्धिमान उस तरह की इंटेलेक्चुअल लेवल का पर्सन उसको कभी नहीं मिला था यहां पे यह कहता है कि मेरे दो लोको में ग्रामेटिकल मिस्टेक रह गई तो बोला कि संभव ही नहीं है बताओ तुम मुझे मिस्टेक कारण करके बताओ तो गौरांग महाप्रभु ने उसने जो श्लोक एक से उने एक से लेकर के 100 तक उसकी रचना की थी सीधे-सीधे अपनी मेमोरी में से निकाले उसको बताए और कहां पर ग्रामर की गलती हुई थी उसको बता दिया यह देख कर के पंडित इतना भयभीत हो गया सबसे पहले तो इस तरह के श्लोक उन्होंने मेमोराइज कर लिए सीधे-सीधे वो बोला और यहां पे मेमोरी में फिट हो गए फोटोग्राफिक मेमोरी और दूसरा के साथ में इतना ही नहीं वो उसे एकदम सूक्ष्म कॉम्प्लिकेटेड ग्रामर की गलती है वो वो भी उनको निकाल के बता दी वो पंडित इस तरह के भयभीत हो गया कि वो जैसे वो पैरालाइज होता है ना सांप के सामने वो चिड़िया किस तरह से पैरालाइज हो जाती है वो सांप के दृष्टि से मोहित होक के जिससे कि सांप चिड़िया को अच्छे से भक्षण कर पाए उसका शिकार कर पाए साप के पास में इस तरह की मोहिनी शक्ति होती है जो कि अपने शिकार को मोहित करके हिप्नोटाइज करके फ्रिज कर देता है उसको जड़ बना देता है तो वैसे ही भगवान गौरांग महाप्रभु के सामने वो पंडित इस तरह से वो भयभीत होक के बैठ गया कि यह श्लोक उसने रचना की उन्होंने मेमोराइज भी कर लिए उसमें से गलती भी निकाल दी किस लेवल की उनकी इंटेलेक्ट है वो अभी अब देखा गौरांग महाप्रभु ने कि पंडित बेचारा बड़ा ही डर भी गया है और शर्मिंदा भी हो गया है उसके जो साथ में शिष्य वगैरह थे पंडित के साथ में वे लोग भी बेचारे डर गए कि अरे पंडित महाशय का सबसे पहली बार इस तरह से किसी ने उनके ग्रामर में गलती निकाल दी यह तो कितनी भयानक बात हो गई और गौरांग महाप्रभु के जो शिष्य थे वो बड़े ही खुश हो गए बड़ा ही चखना चलाना शुरू कर दिया तो देखिए जो विनम्रता इन लोगों के भीतर में जिस तरह से होती है गौरांग महाप्रभु ने कहा देखो जो हार जाता है उसकी कभी भी व उसका इंसल्ट नहीं करना चाहिए उसकी अवमानना अवहेलना कभी भी नहीं करनी चाहिए वो भी तो पंडित है सनातन संस्कृति को उसने जागृत करके रखा है बोलकर के उन्होंने गौना महाप्रभु ने बड़े ही विनम्रता से कहा पंडित महाशय बड़ी रात हो गई है एक काम कीजिए अपने घर जाइए विश्राम कीजिए हां पे आप रह रहे हैं कल सुबह को फिर से मिलेंगे ऐसा बोल कर के बड़े ही विनम्रता के साथ में अभिवादन करके गौरांग महाप्रभु अपने शिष्यों के साथ में वहां से चले गए किंतु यह जो पंडित था बेचारा वो गंगा के किनारे पूरी रात भर बैठा रहा मैंने इस तरह से उसके हृदय के भीतर में भय का संचार हो गया था और आखिर में जब सुबह की लाली मां जब आकाश में प्रस करने लगी सूरज का उदय होने लगा उसके साथ में ही वो गांव छोड़ कर के भाग गया तो देखिए कि यह ट्रेडिशनल परंपरा में हमेशा से रही है दूसरी एक बहुत ही सुंदर कहानी हमारे पास
शंकराचार्य की कहानी
में है जो कि ज्यादातर लोगों को पता है कि शंकराचार्य जब वो वेदांत का प्रचार अद्वैत वेदांत का प्रचार कर रहे थे तोत मुंडन मिश्र के साथ में उनका वाद विवाद हुआ था और व कहानी भी बड़ी फेमस है जस्ट थोड़ा सा आउटलाइन कि उन्होंने दोनों ने डिस्कस किया कि जो हार जाएगा वह सामने वाले की फिलोसोफी को एक्सेप्ट कर लेगा जद मुंडन मिश्रा हार जाएंगे तो अधत वेदांत स्वीकार करके संन्यास ग्रहण करेंगे और यदि शंकराचार्य हर जाएंगे तो वो पूर्व मीमांसा एक्सेप्ट करके अ गृहस्थ हो जाएंगे जो वेद वेद का जो कर्मकांड का पार्ट है उसका प्रच उसका ये स्थापना मुंडन मिश्र कर रहे थे उसका मतलब उसको लेकर के वो रह रहे थे तो शंकराचार्य हर जाएंगे तो गृहस्थ हो जाएंगे वेद का जो कर्मकांड का पोर्शन है उसको अपनाएंगे वेद के जो कर्म लिखे गए हैं उसका वो अपने जीवन में वो स्प उसका पालन करेंगे तो अभी देखिए कि उस समय ऑनेस्टी भी कितनी थी मुंडन मिश्र की जो पत्नी थी उभय भारती उसको एंपायर बनाया गया उसको जज बनाया गया वो ठीक करेगी कि कौन जीतेगा अभी नेचुरली हमको यह पढ़ कर के आश्चर्य होगा कि अरे भाई ये तो उनकी पत्नी है उ तो वो तो चाहेगी कि अपने पति की ही जीत हो क्योंकि उसके साथ में दो चीज थी बात सिर्फ ये नहीं थी कि न्याय और धर्म इसके साथ में एक पर्सनल एंगल भी जुड़ा हुआ था यदि मुंडन मिश्र हार जाएगा तो उसको जब सन्यास ग्रहण करना यानी कि सबसे पहले तो अपना श्राद्ध करना पड़ेगा श्राद्ध करना यानी कि मृत्यु प्राप्त होना तो उभय भारती तो विधवा हो जाएगी तो उसका एक पर्सनल एंगल भी है और देखिए कि अपने पर्सनल अपने पर्सनल इंटरेस्ट जो है उसको भी वह सैक्रिफाइस करने को तैयार है और साथ-साथ में न्याय और धर्म की स्थापना करने को भी तैयार यह हमारी स्त्रियों का चरित्र था उस समय में तो अभी डिस्कशन आरंभ हुआ आर्गुमेंट आरंभ हुई भारती ने दोनों के गले में फूलमाला पहना दी और कहा कि जिसकी फूलमाला जो सबसे पहले मुर्झा जाएगी वो हार जाएगा और जिसकी फूलमाला जो है वो वैसी की वैसी फ्रेश रहेगी वो जीत जाएगा लॉजिक क्या है कि जो जीतता है उसका मन प्रसन्न रहता है और जो हार जाता है या तो फिर उल्टा कहिए जिसका कैपेसिटी इंटेलेक्चुअल कैपेसिटी कम है वो एक आफ्टर वन पॉइंट वो जब आर्गुमेंट करेगा तो उस उसके भीतर में क्रोध प्रकट होगा और साथ-साथ में ही ग्लानि भी प्रकट होगी तो क्रोध और ग्लानि के पर्वश होकर के जब वो आर्गुमेंट करेगा तो दो चीज होगी सबसे पहले तो क्रोध और ग्लानि की वजह से जो ताप प्रकट होता है उताप प्रकट होता है वो फूलों को मुर्जा देगा और दूसरा कि ये उसकी जो उसकी ये वीकनेस जो है वो उसकी आर्गुमेंट को वीक बना देगी उसकी आर्गुमेंट को भीतर से वो कमजोर कर देगी और जिसके भीतर में सही सही की जिसने साधना करके सिद्धि प्राप्त की है उसके हृदय में मैत्री करुणा मुदिता उपेक्षा अविद्या अस्मिता फिर ये जितने भी सद्गुण है वह सब सद्गुण उसके हृदय में एकदम जैसे कि पद्म होता है ना कीचड़ के ऊपर में पद्म खिलता है तो यह हमारा पंचकोष का जो शरीर बना हुआ है पंच महाभूत और पंच तन मात्राओं का तो इस मटेरियल शरीर के ऊपर में घटक शरीर के ऊपर में एक आध्यात्मिक पद्म की तरह उसकी सिद्धि वो विराजित होगी उसके हृदय में और वो जो कुछ भी बोलेगा उसके पीछे में एक साधना से प्राप्त हुई सिद्धि की शक्ति होगी तो उसमें से जो ओजस प्रकाशित होगा वो ओजस फूलों को तो फ्रेश रखेगा ही साथ में उसकी जो आर्गुमेंट है वो आर्गुमेंट को भीतर में से इतना स्ट्रेंथ देगा कि उसके सामने उसका प्रतिवादी जो है वो कुछ बोल नहीं पाएगा तो आर्गुमेंट शुरू हुआ और धीरे-धीरे देखा कि जैसे-जैसे दिन जाते गए वो मुंडन मिश्रा की माला मुर जाती गई और शंकराचार्य की माला वैसी की वैसी फ्रेश रही तो अभी तो नेचुरली है कि शंकराचार्य का विजय हुआ तो भी आखिर में भारती क्या कहती है कि हां मैं उनकी धर्म पत्नी हूं इसके हिसाब से इस नाते मेरा भी एक हक बनता है मैं आपको एक प्रश्न करूं तो वोह प्रश्न किया संसार के बारे में फिर किस तरह से शंकराचार्य ने एक राजा के शरीर में प्रवेश करके वह संसार का ज्ञान प्राप्त करके वापस आए और उभय भारती का प्रश्न का उत्तर दिया और वह जीत गए ये स्टोरी बड़ी ही फेमस है तो यह वाद विवाद की प्रथा जिस तरह से भारत में फेमस थी वैसे ही जितनी भी एंसेट सिविलाइजेशन है सब जगह पे ये डायलेक्टिक्स जो है इस तरह से फेमस रहता है यह
ठाकुर और मां की कहानी
मार्क्सिज्म कम्युनिज्म जो है वो भी डायलेक्टिक्स का बड़ा ही वो उसका यह करता है यूज करता है प्लेटो के डायलॉग सोक्रेट के डायलॉग्स में भी यह पाया जाता है तो यहां पे स्वामी जी एक के बाद एक पॉइंट काउंटर पॉइंट देते हैं और उसका खंडन करते हैं हालांकि अ यह प्रश्न है कि स्वामी जी उन लोगों की पोजीशन को जिस तरह से आर्टिकुलेट करते हैं एगजैक्टली वही पोजीशन उन लोगों की होगी कि भी नहीं वो एक प्रश्न है क्योंकि जैसे हम लोग ट्रेनिंग सेंटर में और अपनी किताबों में पढ़ते हैं कि अद्वैत वेदांत जो है इट इज सुपीरियर टू बुद्धिज्म किस तरह से तो बुद्धिज्म का यह पॉइंट है सामने अद्वैत वेदांत का यह पॉइंट है फिर बुद्धिज्म यह कहता है तो उससे बेटर पोजीशन अद्वैत वेदांत की है तो हमेशा प्रश्न यह होता है कि बुद्धिज्म यह कहता है या बुद्धिज्म वोह कहता है तो हम कहते हैं बुद्धिस्ट लोग सही सही ऐसा कहते हैं कि नहीं किसको पता तो जैसे कि एक बार एक क्रिश्चियन मिशनरी के साथ में मेरा थोड़ा डिस्कशन हुआ था तो मैंने कहा जैसे हम लोग हमारी किताब पढ़ कर के बोलते हैं फिलोसॉफिकली अद्वैत वेदांत वेदांत इ मच बेटर देन एनी फिलोसोफी इंक्लूडिंग क्रिश्चन थियोलॉजी तो मुझे बोला कि क्या आपने क्र थियोलॉजी का बड़ा अच्छे से स्टडी किया है मैंने कहा नहीं ऐसा तो कुछ नहीं है हमारी किताब में जो क्रिश्चियन थियोलॉजी के बारे में लिखा है उसी के बेस पर मैं कह रहा हूं तो फिर बोला कि आपकी किताब में सही लिखा है या तो फिर वो एगजैक्टली हमारी पोजीशन है कि नहीं किससे पता कोई भी किताब कोई भी फिलोसोफी को जब प्रेजेंट करती है वो एक कांटेक्ट में करती है और इस कॉन्टेक्स्ट में हम उसको प जब किंतु हम किताब पढ़ते हैं और उस फिलोसोफी का हमको नॉलेज नहीं रहता तब हम वो कॉन्टेक्स्ट मिस कर जाते हैं जैसे कि राम कृष्ण विवेकानंद लिटरेचर इट सेल्फ जद आप कथामृत पढ़ेंगे सिर्फ या तो फिर मां की बातें पढ़ेंगे तो कभी-कभी जब कॉन्टेक्स्ट मिस हो जाएगा तो किस तरह से भ्रम प्रकट होगा पता है बंगाल के कुछ कम्युनिस्ट लोगों ने इस तरह से बात फैलाना शुरू कर दिया कि ठाकुर ने अपनी पत्नी को नेगलेक्ट किया अपने उस शादी भी की और फिर उसके साथ में संसार भी नहीं किया तो क्यों इस तरह से एक उसकी लाइफ बर्बाद करने की जरूरत थी इस तरह से वहां के कम्युनिस्ट लोग उल्टा प्रचार करते हैं और किस तरह से करते हैं हमारी किताब पढ़ कर के करते हैं क्या आपी की किताब में लिखा है देखिए कि मां कामा जयराम बाटी से दक्षिणेश्वर आई उस रात को थकी हुई है क्या बेचारी मतलब चल कर के आना कितनी कठिन जर्नी है और वो भी एक महिला के लिए वो आई तो कहां उसको स्वागत करना चाहिए क्या ना कुछ करना चाहिए तो ठाकुर ने कहा कि तुम कम मरत में कुछ बुरे समय तुम घर से निकली होगी तो देखो मेरा हाथ टूट गया उस समय ठाकुर गिर गए थे हाथ में फैक्चर हो गया था तो तुम एक काम करो तुम घर वापस चले जाओ यात्रा बदल करके आना तो मने कोई अच्छे से वो मुहूर्त में आना वो बुरे मुहूर्त में आई इस तरह से मेरे साथ हुआ ऐसा तो मैंने जब यह पहली बार पढ़ा था तो मुझे भी बड़ा थोड़ा भीतर में से गुस्सा आ गया था कि ठाकुर क्या यह सब करते हैं मां को बिचारी को थोड़ा सा विश्राम भी नहीं करने दिया पूछा भी नहीं कि भाई इतनी लंबी जर्नी करके आई हो तो तुम्हारा क्या हाल है घर में लोग कैसे हैं कुछ नहीं सीधा सधी बोल दिया तुम बुरे मुहूर्त में आई हो इसलिए मेरा हाथ टूट गया दूसरी बार क्या हुआ था था मां जब आई थी तो हृदय ने क्या सब उल्टा-पुल्टा बोल दिया तो ठाकुर डर के मारे चुपचाप बैठ गए हृदय को कुछ बोल नहीं पाए मां को कहा ठीक है तुम चली जाओ अरे बाप रे मां के साथ में इतना अपमान और कोई करेगा तो हमारा खून घोल जाएगा ठाकुर ने खुद मां के साथ में दो-तीन बार ऐसा काम किया है जिसने हमको मतलब अभी हमारे पास कॉन्टेक्स्ट है बोलकर के हम यह सब चीजें समझते हैं ठाकुर अवतार है मां आध्या शक्ति जगदंबा स्वयं है उनका जो भी कुछ कार्यकलाप है वो लीला है हमारी खुद की एक टीचिंग एक टीचिंग बाय फिलोसोफी बड़ा ही डिफिकल्ट है किंतु टीचिंग बाय लाइफ टीचिंग बाय इंसिडेंट टीचिंग बाय ये स्मृति कथा दिस इज इजियर टू अंडरस्टैंड तो ये सब जो है वो हम कांटेक्ट की वजह से हम लोग इसको उसके प्रॉपर प्लेस में ठीक कर पाते हैं किंतु ये कम्युनिस्ट लोग वैसे ही एक प्रेजुड मने एक माइंड सेट लेकर के ये सब पढ़ेंगे और फिर बोलेंगे कि अच्छा देखो तो ठाकुर ने ही मां का अपमान किया है अब क्या वो मातृशक्ति की बात करते हो गंभीरानंद जी की मां की जीवनी है उसका हम लोग वो फॉरवर्ड पाठ कर रहे हैं उसमें से उपो गत उसमें लिखा है कि नारी शक्ति के जागरण के लिए मां का पृथ्वी पर आगमन हुआ है अभी यहां पर ठाकुर को ही देखिए ठाकुर मां का ध्यान नहीं रखते हैं वो वहां पर जाने की बात हुई उत्सव में तो मां ने बोला कि क्या मैं आऊं क्या तो ठाकुर ने बोला सभी लोग जा रहे हैं वो कौन सा उत्सव था मैं भूल गया तो वहां पर सभी लोग जाने वाले हैं और गुलाप मां है योगिन मा है ठाकुर के जितने भी डिसाइल है तो इतना उत्सव होगा नाच गान होगा कीर्तन होगा हासी मजाक होगा और मां अकेली बेचारी पानी हाटी यस थैंक यू पानी हाटी यस तो तो पाणी हाटी के उत्सव में तो मां बेचारी घर में बैठेगी अपने वहां पर दक्षिणेश्वर में बैठेगी उनके मन में कितना वो दुख होगा कष्ट होगा किंतु माने जब पूछा ठाकुर को कि क्या मैं जाऊं क्या तो ठाकुर ने कहा और यदि इच्छा था कि वो अशक उसकी जद इच्छा है तो वो आए तो मां ने इमीडिएट समझ लिया कि नहीं ठाकुर की इच्छा नहीं है मैं जाऊं तो मां ने कहा ठीक है मैं नहीं जाती हूं तो ठाकुर ने कहा कि देखो वो कितनी बुद्धिमता है उसमें कितनी इंटेलिजेंस कितना उसका स्ट्रांग है यदि हम लोग दोनों साथ में जाते तो लोग कहते हंसो हंसी ऐसे छ एक परमहंस ठाकुर का नाम है तो हंस और हंसी आए हैं ऐसा बोल कर के लोग मजाक उड़ाएंगे देखिए आदर्श की स्थापना करने के लिए इन दोनों का अवतरण हुआ है तो समाज क्या कहता है समाज को नए सिरे से गड़ना भी है और साथ में समाज की जो उस समय की व्यवस्था है उसको तोड़ भी नहीं देना है मां इतने छोटे से कमरे में नबत में रही बोलकर के अभी मेरी बहन अमेरिका में है वो जॉब करती है तो क्या मैं उसको कहूं कि तुम एक छोटी सी कुटिया में बैठो जोब पोप छोड़ दो इंडिया वापस आ जाओ ये तो बहुत ही गलत होगा उसके लिए आज की स्त्रियों के लिए मां का आदर्श हमको किस तरह से देना है ये करके कि तुमको कहीं नहीं जाना है एक जगह पर बैठे रहना है किसी भी तरह का वो जो एंजॉयमेंट है लाइफ का वो नहीं लेना है वो विधवा हो गई मां तो उसके बाद में किस तरह से मां को रहना पड़ा है कामर कुकुर रहती थी तो लक्ष्मी दीदी और रामलाल दादा जो कि बाद में बोलते थे कि मां हमारी खबर नहीं रखती वही लोग मां को कितना नेगलेक्ट करते थे मां ने कहा था बाद में कि ये लोग अभी कहते हैं कि मैं उनकी खबर नहीं रखती मेरे पास में मां ने अपने मुंह से तो नहीं कहा किंतु वीी कैन सी द कांटेक्ट कि किस तरह से मां के पास में भक्त आने लगे ये फल मिठाई यह सब आने लगा तो ये लोग ने इन लोगों को लगने लगा कि मां अभी हमारी केयर नहीं करती हमको नेगलेक्ट करती है तो मां ने खुद ने कहा था कि उस समय जब मैं कामर पुकुर में रह रही थी तो यही लक्ष्मी दीदी जो कि वो वहां पे वो शाग भाजी वो मां लगाती थी तो उसको अपने पैरों से तोड़ के चली जाती थी उसको मिट्टी में रगड़ करके चली जाती थी उन लोगों ने मां को पूरा नेगलेक्ट किया इसलिए तो श्यामा सुंदरी देवी जब जयराम बाटी से कमार पुकुर गई देखा कि मां ने फटी हुई साड़ी पहनी है खाने का भी कुछ ठिकाना नहीं है मात हृदय रो उठा और मां को लेकर के जयराम बाटी आ गई वरना ठाकुर ने खुद कहा था देखिए ठाकुर का एक दूसरा नेगलेक्ट ठाकुर ने कहा था कि कामर पुकुर में रहना यहां भक्तों के यहां मत रहना जिसके सामने तुम हाथ फैलाओ गी तो उसका हमेशा ऋणी रहकर होना पड़ेगा भक्तो जब बुलाएंगे तब आना किंतु कलकाता में कलकाता में ठाकुर का सब कुछ था किंतु फिर भी ठाकुर ने मां को मना कर दिया कलकाता मत रहना कमार पुकुर का अपना घर कभी मत बेचना वहां पर जाकर रहना किंतु आखिर में श्यामा सुंदरी देवी मां को जयराम बाटी लेकर आई तो देखिए कि यह सब कुछ हमको कांटेक्ट पता है कि आदर्श की स्थापना करने के लिए यह हो रहा है किंतु जो लोग यह सामने वाले पढ़ेंगे एक प्रेजुड माइंड सेट को लेकर के वे लोग उसमें से पूरा सब गलत गलत अर्थ घटन करेंगे तो यहां पर भी ऐसा है जब हम अपने लिटरेचर में सामने वाले पक्ष की कोई आर्गुमेंट सुनते हैं और जब उसके सामने अपनी आर्गुमेंट श्रेष्ठ है यह बोलकर प्रतिपादित होती है तो यह थोड़ा सा विवेक
स्वामी विवेकानंद की कहानी
बुद्धि अपने होना अभी ये स्वामी विवेकानंद खुद आर्गुमेंट काउंटर आर्गुमेंट कर रहे है तो हम लोग तो कह सकते हैं कि अरे भाई स्वामी जी का उनका अंडरस्टैंडिंग है मस्ट हैव बीन बेटर देन व्हाट दे देम सेल्फ आर अंडरस्टैंडिंग ये मटेरियल ज्म जो है ये यूटिलिटेरियन ज्म जो है या तो फिर यह जो 19th सेंचुरी यह सोशलिज्म जो है वे उसके प्रतिपादित करने वाले जो लोग थे उनकी उस फिलोसोफी या तो फिर उस आइडियो जीी या तो फिर उस थिरी की जो अंडरस्टैंडिंग थी स्वामी जी की अंडरस्टैंडिंग उन लोगों से भी ज्यादा होगी क्योंकि अलग-अलग विभिन्न विभिन्न फिलोसोफर ने विभिन्न विभिन्न समय कुछ-कुछ अलग-अलग मॉड्यूल किए होंगे तो ऐसा कौन सा फिलोसोफर है जिसके माइंड में सभी मॉड्यूल एक साथ में फिट होक के उसका एसेंस निकल आएगा वो तो स्वामी जी ही है और कोई नहीं हो सकता तो स्वामी जी का जहां तक प्रश्न है हम लोग कह सकते हैं कि स्वामी जी जब उनकी पोजीशन आर्टिकुलेट करते हैं स्वामी जी जब उनका पक्ष हमारे सामने रखते हैं और फिर वेदांत से उनका पक्ष का खंडन करते हैं तो हमको यहां तक तो थोड़ा सा भरोसा रहना चाहिए कि हां स्वामी जी जो कह रहे हैं वो बिना सोच समझ किए कि या तो फिर बियोंड गोइंग बियोंड इंटेलेक्ट गोइंग बियोंड मियर रेशनल स्वामी जी जो कह रहे हैं इट कम्स डायरेक्टली फ्रॉम हायर लेवल एक बार स्वामी जी विदेश का एक प्रसंग है कि स्वामी जी अपने कमरे में थे क्लासेस चल रहे थे तो किसी एक वहां के स्वामी जी का जो फ्रेंड वे लोग फ्रेंड कहेंगे वो डिसाइल नहीं कहेंगे फॉलोवर कहेंगे फ्रेंड कहेंगे डिसाइल कहना अमेरिकन लोगों को मेरी लुईस जिसने न्यू डिस्कवरीज लिखा है वो कहती है कि इन द ट्रू इंडियन सेंस जिस इंडियन भारतीय परंपरा में जिसको शिष्य कहा जाएगा तो स्वामी जी का उस अर्थ से शिष्य कहा जाए तो यदि वह सिस्टर निवेदिता ही थी क्योंकि उसने स्वामी जी को संपूर्ण रूप से शरणागत स्वामी जी के सामने हुई थी बाकी सबका था कि हां वी हैव समथिंग ऑफ अवर ओन लाइफ अवर ओन आइडियाज अवर ओन वे ऑफ थिंकिंग बट वी एडमायरीन लोग थे स्वामी जी के एडमाइट्स थे फॉलोवर्स थे ब डिसाइल कहना थोड़ा सा इन लोगों के लिए गलत हो जाएगा तो वन ऑफ द स्वामी जी एडमाइन खड़ी थी तो उसने देखा कि स्वामी जी के कमरे से कमरे में से आवाज आ रही है जैसे कि स्वामी जी किसी के साथ में बात कर रहे हो तो याद दूसरे किसी की आवाज आ रही है तो थोड़ी देर के बाद में जब स्वामी जी ने कमरा खोला अपना तो वो जाकर के देखा कि वो तो अकेले थे तो उसने पूछा स्वामी जी को आप किसके साथ में बात कर रहे थे तो स्वामी जी ने कहा मैं किसी के साथ बात नहीं कर रहा था भी मेरा क्लास होता है या प्रवचन देना होता है तो इस तरह से कोई हायर लेवल से यह सब आइडियाज कन्वर्सेशन के रूप में मेरे मन में मेरी चेतना में प्रवेश होते हैं फिर उसमें से पॉइंट लेकर के मैं दूसरे दिन प्रवचन या क्लास लेता हूं तो यह मेरी लुईस इस तरह से हमको बताती है तो स्वामी जी जो कुछ भी कहते हैं ट कम्स फ्रॉम हायर प्लेन सो वी कैन एक्सेप्ट दिस किंतु हमेशा बीइंग अ स्टूडेंट ऑफ वेदांत हमको अपनी विवेक शती अपनी रेशनल को ओपन रखना है किसी भी बात को फिर अल्टीमेटली देखिए कि रेशनल की हमेशा लिमिट है ठाकुर की जो बात कि ब्रह्मा अभी झूठा नहीं हुआ यह बिल्कुल सही है हम लोग कभी भी अपनी रेशनल की सीमा से इस हायर चीजों को बांध नहीं सकते अल्टीमेटली यह सब अनुभूति की बात है तो यहां पर जो कुछ भी लिखा गया है वी हैव टू टेक इट वन पिंच ऑफ सॉल्ट वन ग्रेन ऑफ सॉल्ट तो इस टेक मने जिसको कहते हैं डिस्क्लेमर तो विथ दिस डिस्क्लेम स्वामी जी की जो आर्गुमेंट है हमने कुछ
सृष्टि के प्रारंभ से आज तक, पूरी उत्क्रांती को एक जीवन के रूप में देखें
दिनों तक देखा कि किस तरह से वो इवोल्यूशनिस्ट कहते हैं कि यदि ईश्वर चेतन है और चेतन ईश्वर में से पृथ्वी की रचना हुई है तो यह बात बताओ कि पृथ्वी या पृथ्वी या तो विश्व ब्रह्मांड कि हजारों करोड़ों साल तक यहां पर जड़ विश्व जड़ ब्रह्मांड ही क्यों रहा जिसको कि हम हायर इंटेलिजेंस या तो चेतना शक्ति कहते हैं जो कि हायर एनिमल स्वामी जी कहते हैं सिर्फ मनुष्य नहीं हायर एनिमल्स यानी कि हायर एनिमल्स में आज के रिसर्च की दृष्टि से देखा जाए तो या तो वेल्स डॉल्फिंस या तो फिर ये प्राइमेट तो सबको मिलाकर के आखिर में होमो सेपियंस मनुष्य और मनुष्य में भी परफेक्ट एन भगवान राम पुरुषोत्तम मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम भगवान कृष्ण जीसस क्राइस्ट अल्बर्ट आइंस्टाइन स्वामी विवेकानंद भगवान राम कृष्णा सो ऑन वन हैंड देयर आर परफेक्ट मेन एंड द ऑन दी अदर हैंड देयर इज 1200 1500 करोड़ साल का बिग बैंग से लेकर के आज का इवोल्यूशन ईश्वर यदि चेतन है तो चेतन ईश्वर में से जड़ सृष्टि इतने करोड़ों साल तक क्यों रही पहले से ही क्यों नहीं चेतना चेतन शक्ति का आविर्भाव क्यों नहीं हुआ तो यह आर्गुमेंट का खंडन करने के लिए स्वामी जी कहते हैं कल वाला पैसेज में फिर से पढ़ता हूं इफ दैट इ सो टेक दिस होल इवोल्यूशनरी सीरीज फ्रॉम द प्रोटोप्लास्मिक वन सेल्यूलर ऑर्गेनिस्ट म या तो फिर वहां से प्रारंभ करके परफेक्ट मैन है दूसरे एंड पर भगवान राम कृष्ण यह पूरा सीरीज है उसको आप एक साथ में कंसीडर कीजिए या तो फिर बिग बैंग से लेकर के भगवान श्री राम कृष्ण तक की यह पूरी जो कॉस्मिक इवोल्यूशन की यात्रा है आप इसको एक ही प्रवाह के रूप में कंसीडर कीजिए एंड दिस होल सीरीज इज लाइफ यह पूरी जो सीरीज है यह पूरा जो प्रवाह है वह एक सिंगल जीवन है देयर इज वन कॉस्मिक कॉन्शसनेस अद्वैत वेदांत का यह मतलब जैसे कि सूर्योदय होता है ना जब आर्गुमेंट काउंटर आर्गुमेंट होती है तब रात होती है और फिर जैसे कि जब अद्वैत वेदांत का सर्वप्रथम सिद्धांत प्रतिपादित हुआ तो जैसे कि आकाश में लाली मा छाने की वजह जग मतलब वो जिस तरह से छाती है वैसे ही यह सर्वप्रथम हम अद्वैत वेदांत की आर्गुमेंट का सर्वप्रथम पॉइंट हमारे सामने प्रकट हुआ किय पूरा जो जर्नी है टेक इट एज वन लाइफ बिकॉज अद्वैत वेदांत सेज जैसे इवोल्यूशन ऑफ गॉड ये आश्चर्य होगा जो लोग यह सब चीजों का स्टडी करते हैं इवोल्यूशन ऑफ गॉड जो संपूर्ण परफेक्ट है उसी को तो हम गड ईश्वर कहेंगे तो ईश्वर का इवोल्यूशन कैसे हो सकता है तो स्वामी जी ये पूरी थिरी प्रतिपादित करते क्या कहते हैं एक्चुअली ईश्वर का इवोल्यूशन नहीं किंतु अवर अंडरस्टैंडिंग ऑफ गॉड हमारी ईश्वर के बारे में जो समझ है वह किस तरह से विकसित होती है तो सबसे पहले हम लोग जंगल में रहते थे और हमारे जितने भी हमारे रिलेटिव्स थे हमारे स फ्रेंड्स व वो सडन उनका मृत्यु हो जाता था साप ने आकर के काट लिया शेर ने आकर के उनको शिकार कर दिया बिजली गिरी आग लगी हमारा पूरा फैमिली उसमें मर गया तो मृत्यु सब समय हमारे साथ में रहती थी आज हमारी सोसाइटी इतनी सेफ है कि फटाफट करके इस तरह से छोटी उम्र में मृत्यु हम लोग नहीं देखते आज हमारे भारतीय लोगों की एवरेज एज जो है एवरेज लाइफ स्पान वो समथिंग 68 70 के आसपास में है उस समय इंडिपेंडेंस के समय हमारी एवरेज लाइफ स्पान था 36 ना 35 ऐसा कुछ देखिए कि इतने कुछ 100 75 इयर्स में ही हमारा लाइफ स्पान ऑलमोस्ट डबल हो गया है तो यदि इस समय ऐसा होता होगा तो उस समय प्रीहिस्टोरिक टाइम देखा जाए तो मनुष्य का जीवन कितना होता होगा यदि 30 40 हो गया तो तो बूढ़ा हो गया वोह आदमी मने बहुत हो गया तो मृत्यु जो था सब समय हमारे साथ में लग कर के रहता था मृत्यु के साथ में जीना है बच्चा प्रकट हुआ उसको कुछ बीमार हो गया तो कुछ नहीं है आप आप एक ट्राइब ट्राइबल एक आपका एक लाइफ है आप शिकार करते हैं जहां पे यह होर्ड्स होर्ड्स का क्या करेंगे यह पशु है जैसे कि बेल है ना कि बाइसन जैसे कि उस समय हुआ होते थे तो बायंस का एक पूरा वो एक झुंड है या तो कहेंगे होर्ड है उसके पीछे-पीछे आप जाएंगे उसका शिकार करेंगे और इस तरह से आप रहेंगे तो यह आपका लाइफ था बच्चा जद बीमार हो गया तो क्या करना है किसी वोह समान को बुलाना है समान ना कि कुछ उलट पुलट कुछ विधि कर चखेगा चिल्लाएगा और कहेगा कि इसके भीतर में कोई स्पिरिट आ गया है ना कि कोई प्रेतात्मा का प्रवेश हो गया है तो इसलिए अभी बचेगा नहीं बच्चा गया अभी आज की तरह वह जो प्राइमरी हेल्थ केयर सेंटर जिस तरह से गांव-गांव में है ऐसा तो नहीं था तो उस समय हमारे भगवान कौन थे हमारे ईश्वर कौन थे क्रोधी घमंडी दंभी ऐसे ईश्वर के जिनको सब समय आपको सैक्रिफाइस देते रहना है सैक्रिफाइस नहीं दिया उनको सामने आपका अच्छे से अच्छा शिकार जला करके उनको ऑफर नहीं किया अपने अच्छे से अच्छा जो धन होता है अपने खेत में वह यदि उनको ऑफर नहीं किया तो बड़े ही नाराज हो जाएंगे आकाश में आकाश में से बिजली फेंकें ना कि वह धन धान्य जो है उसमें आग लगा देंगे ना कि क्या होगा तो इस तरह से क्रोध रखने वाले घमंडी और और व्यभिचारी ऐसे सब ईश्वर थे हमारे ईश्वर नहीं किंतु हमारी ईश्वर की अवधारणा उसके बाद में प्रेममय ईश्वर की अव धारणा प्रारंभ हुई जब जीसस है या तो फिर हमारे यहां पर ऋषि मुनि है उन्होंने एक के बाद एक समाधि और हायर लेवल कॉन्शसनेस में प्रवेश करके देखा कि ईश्वर जद कहा जाए या तो फिर एक हायर चेतन शक्ति कहा जाए हायर कॉन्शसनेस सुपरकॉन्शसनेस यदि कहा जाए तो उसका स्वरूप प्रेममय है तो ये ट्रांजीशन जो है उसकी कहानी हमको भगवान कृष्ण की वोहा वृंदावन की कहानी में हमको उसका एक एक आभास मिलता है कि इनलोग लोगों ने वो वृंदावन के रहवासियों के ऊपर में वो भगवान इंद्र किसी तरह नाराज हो गए और उन्होंने इतना सारा बारिश और यह सब भेजना शुरू कर दिया तो अभी ये लोग बोलते हैं कि भगवान कृष्ण स्वयं हमारे साथ में है भगवान कृष्ण का तो प्रेममय स्वरूप है गोपियों के साथ में रासलीला करते हैं नहीं कि क्या करते हैं तो अभी ये क्रोधित भगवान क्रोधित ईश्वर क्यों हम उनकी पूजा करने को जाए क्यों हम उनको ऑफि करने को जाए तो ये अभी उसका कोप यदि हमारे ऊपर में बरस रहा है तो हमको कौन बचाएगा तो भगवान कृष्णा ने अपनी आखिरी उंगली से गोवर्धन धारण किया और इंद्र ने कितने दिन तक वो बारिश की कुछ नहीं हुआ आखिर में जब वो वो हार गया तब उसने वो बारिश बंद कर दी तो दिस इज वन सिंबॉलिक वे ऑफ सेइंग के क्रोध भरे हुए घमंड से अपना व क्या चकनाचूर ऐसे ईश्वर का समय जाकर के प्रेममय ईश्वर का समय आरंभ हुआ और उसके बाद में जद इवोल्यूशन आगे देखेंगे तो पता चलेगा कि सांख्य क्या कहता है कि हमारे भीतर में सांख्य सबसे पहले तो पूरे विश्व का एक कल्पना करता है कहता है जड़ विश्व है यह 24 तत्व है किंतु 24 और 24 तत्व जड़ है इसके पीछे में जो चेतन है वही सही सत्ता है पुरुष जिसको कहा जाता है किंतु सांख्य क्या कहता है कि पुरुष एक ही है किंतु उसके सांख्य कहता है कि हम सबके भीतर में अलग-अलग पुरुष है यानी कि यदि पृथ्वी की आज की पॉपुलेशन 700 करोड़ है समथिंग लाइक सेन बिलियन प्लस तो सभी के भीतर में एक एक पुरुष चेतन सत्ता विद्यमान है तो इसके आगे जाकर के अद्वैत वेदांत कहता है वन स्टेप अहेड सांख्य के ऊपर में फाउंडेशन करके कि जितनी भी चेतन सत्ता हैं जितने भी पुरुष है अल्टीमेटली दे आर वन एक ही अद्वैत चेतन सत्ता इस पूरे विश्व में विद्यमान है जिसके आधार पर यह पूरा जड़ विश्व उसके प्रकाश से प्रकाशमान होकर के चांद चांद का खुद का कोई प्रकाश नहीं है सूर्य के प्रकाश से प्रकाशित वह है तो इस तरह से यह ड़ जगत आत्मन या तो फिर ब्रह्मण यह वर्ल्ड कॉस्मिक कॉन्शियस नेस उसकी चेतना से प्रकाशित होकर के यह जड़ जगत कार्यरत है सो दैट इज द हाईएस्ट य तो पूरा इवोल्यूशन ऑफ आइडियाज है तो वो जो अद्वैत वेदांत है उसका प्रारंभ स्वामी जी ने यहां पर एक आर्गुमेंट के द्वारा कर दिया कि टेक दिस एंटायस ऑफ इवोल्यूशन दिस एंटायस को प्रवाह ऑफ लशन फ्रॉम द प्रोटोप्लास्मिक फाइनल मैन भगवान राम कृष्ण कंसीडर इट एज वन लाइफ उनको पूरे को एक ही जीवन के रूप में देखिए और यह यहां से अद्वैत वेदांत का प्रारंभ होता है फिर आगे स्वामी जी क्या कहते हैं वो हम कल देखते हैं आज ओम शांति शांति शांति हरि ओम तसत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु