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Swami Vivekananda Raja Yoga ·

राजयोग : Ch.3 प्राण : स्‍वामी विवेकानन्द 20 Nov 2024 | Raja Yoga | Swami Vivekananda

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ओम स्थापक य च धर्मस्य सर्व धर्मा स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नम जय जय राम कृष्ण हो स्वामी जी का राजयोग इसका हम पाठ कर रहे थे और चर्चा कर रहे थे हमने देखा कि अभी तक के जो छह टॉपिक हमने कवर कर लिए हैं स्वामी विवेकानंद की पुस्तक राजयोग उसमें से थर्ड चैप्टर प्राण उसके छ टॉपिक हमने कवर कर लिए हैं अभी सेवंथ टॉपिक की और जाते हैं और जिस तरह से मैंने आपके साथ में इसकी लिंक शेयर की है उस लिंक के भीतर में स्वामी जी के प्राण चैप्टर का पूरा टेक्स्ट है पूरी टेक्स्ट है बस उसको मैंने टॉपिक्स के भीतर में बांट दिया है कैटेगरी इज कर दिया है जिससे कि हमको इस टेक्स्ट को समझने में सुविधा रहे तो अभी सेवंथ टॉपिक और कल हमने ऑलरेडी वन टू सिक्स टॉपिक्स जो थे जो कि ऑलरेडी डिस्कस हो चुके थे उसकी एक समरी हमने कल देख ली अभी आज से हम नया टॉपिक प्रारंभ करते हैं पावर ओवर पीपल देखिए स्वामी जी क्या कहते हैं सर्वप्रथम तो स्वामी जी ने यह एस्टेब्लिश कर दिया कि प्राण रूपी जो शक्ति है वह पूरे जगत संसार में जितने भी पदार्थ है उन सबको अपने नियंत्रण में ला सकती है तो यह प्राण रूपी शक्ति चांद सितारे मनुष पेड़ पौधे पशु पक्षी सबको नियमन करती है तो यदि हम इस प्राण को नियमन करना सीख ले तो पूरा विश्व ब्रह्मांड अपने वश में आ जाएगा तो यहां तक स्वामी जी ने प्रतिपादित किया अभी मान लीजिए कि ऐसा कोई योगी है ऐसा कोई साधक है या ऐसा कोई मनुष्य है जिसने कि यह प्राण रूपी शक्ति प्राप्त कर ली है तो यह व्यक्ति क्या से क्या नहीं कर सकता उसका उदाहरण स्वरूप स्वामी जी कहते हैं यू सी दैट इन एवरीडे एक्शंस आई एम टॉकिंग टू यू अच्छा इससे पहले पहले वाला पैराग्राफ पढ़ लेते हैं इट इज बाय द प्राण दैट रियल क्यूरिंग कम्स यह जो कल जो हमने टॉपिक देखा था या तो जो लास्ट टॉपिक था सिक्स्थ वो कि प्राणिक हीलिंग जो आदमी बीमार है उसको हम अपनी प्राण शक्ति से उसको हम सुस्त कर सकते हैं और स्वामी जी ने साथ में यह भी कहा जो व्यक्ति ियर फुल है जिसके भीतर में उत्साह उल्लास उमंग है उसके साथ में जो लोग रहेंगे उनके भीतर में भी आत्म श्रद्धा उत्साह वगैरे का प्रवेश होगा और जो व्यक्ति हमेशा एक डिप्रेशन में रहता है हताशा में रहता है सोचता है मैं इस जगत में हार गया हूं पता नहीं किस तरह के गम में गमगीन रहता है तो फिर उसके आसपास में जो लोग रहेंगे वे लोग भी यह इस तरह का आदमी जैसे ब्लैक होल की तरह अपने आसपास में रहने वाले लोगों की खुशी को खा जाता है ब्लैक होल के बारे में आपने सुना ही होगा आकाश में होते हैं जब सूरज या ऐसा कोई बड़ा सा तारा तो वह स्पेस टाइम रूपी फैब्रिक है उसमें एक होल बना देता है उसको जैसे कि एक चादर है चादर में आपने कैची से एक यह बना दिया होल बना दिया तो अभी चादर के ऊपर में जो कुछ भी चीजें रखी होगी वह उस होल के भीतर में से नीचे गिर जाएगी तो ऐसा यह जो स्पेस टाइम फैब्रिक है उसमें यह जो ब्लैक होल रूपी जो होल है तो जितने उसके आसपास में जो कुछ भी जाएगा इवेंट होराइजन न कहते हैं उसकी लिमिट को उसके पास में जो कुछ भी जाएगा वह ब्लैक होल में खींच जाएगा और उसका अस्तित्व वहीं पर समाप्त हो जाएगा तो जो लोग डिप्रेसो ब्लैक होल की तरह होते हैं आसपास में रहने वालों की हसी खुशी को यह लोग खा जाते हैं इसीलिए ऐसे लोगों का संग कोई पसंद नहीं करता तो यहां पर स्वामी जी कहते हैं बाय द प्राण दैट रियल क्यूरिंग कम्स द प्योर मैन हु हैज कंट्रोल्ड द प्राण हैज द पावर ऑफ ब्रिंगिंग इट इनटू ए सर्टेन स्टेट ऑफ वाइब्रेशन व्हिच कैन बी कन्वे टू अदर्स अराउजल इन देम अ सिमिलर वाइब्रेशन यदि मैं अपने प्राण को नियमन करना सीख लूं अपने प्राण को इस तरह से मैनिपुलेट करूं कि मेरी भावनाएं मेरी इमोशंस मेरी क्रिएटिविटी मेरा स्वास्थ वह सब सुपरचार्जड हो जाए जैसे कि इस प्राण की मदद से तो मैं इस प्राण को इस तरह के वाइब्रेशन लेवल पर ला सकता हूं मेरे भीतर में और उसको इस तरह से ट्रांसमिट कर सकता हूं कि दूसरों के भीतर में इसी तरह के वाइब्रेशन प्रकट हो जैसे कि मास्टर महाशय ने एक बार कथामृत में लिखा है अभी देखिए कि आप जब काली मंदिर में जाते हैं तो काली अब ऐसे बहुत सारे मंद मंदिर है भारत में जहां पर भी जाएंगे आपको मन को शांति मिलेगी ही क्योंकि भारत में किस तरह से होता है कि पहले एक साधक कहीं एक वीरान जगह पर बैठ कर के साधना करते हैं तपस्या करते हैं उसके बाद में साधक के जीवन के दौरान ही या तो फिर साधक की महासमाधि के बाद में वहां पर एक मंदिर ऐसा कुछ खड़ा हो जाता है धीरे-धीरे करके यहां पर और जितने भी मंदिर है ऐसे किसी ना किसी ऋषि मुनियों की साधना के ऊपर में या तो ऋषि मुनियों के द्वारा स्थापित ज्यादातर मंदिर भारत में है जहां पर भी आप जाएंगे आपके मन को सुकून मिलना ही है किंतु काली मंदिर दक्षिणेश्वर की बात ही अलग थी जब ठाकुर वहां पे थे सदेव वर्तमान थे जीवित थे उस समय ठाकुर की आध्यात्मिकता जैसे कि काली मंदिर को पूरा प्लाविनी थी मास्टर महाशय लिखते हैं एक बार वह काली मंदिर में आए और फिर वहां पर दर्शन करते-करते टहल रहे हैं तो जैसे कि यह बागान है यह पेड़ पौधे हैं यह जो चौकीदार लोग हैं यह काम करने वाले हैं सब लोग जैसे कि मोम के बने हुए हैं वक्स के बने हुए हैं यह मोमबत्ती जो होती है ना जिसमें मोम में से जो मोमबत्ती बनती है यह वेक्स जिसको कहते हैं इंग्लिश में तो सब कुछ मोम का बना हु हुआ है अर्थात कि क्या कि सब कुछ जैसे कि पहले के जमाने में होता था मैंने भी देखा था यह मोम के फल बनाते थे ये आलू है ये सेब है बनाना है इस तरह से मोम के इस तरह से शेप देक के फल के उसको कलर करके सुंदर कलर करके मोम का सेब बनाया है उसको सुंदर रेड कलर कर दिया है और उसको बाउल में सजा करके टेबल पर रखते थे किसी को लगेगा अरे वाह इतने सुंदर फल यहां पे रखे हैं टेबल की शोभा बढ़ती है लोगों को लगता है चलो घर में थोड़ा जाह जलाली है थोड़ा सा धन वगैरह है एक्चुअली क्या होता था वो जो मोम का बना हुआ सिर्फ डेकोरेशन के लिए यह फल रहते थे किंतु मोम का बना अर्थात कि आनंद का बना सब कुछ काली मंदिर में जैसे कि आनंद का बना हुआ है बाहर से लगता है यह फल का आकार है किंतु भीतर में मोम है तो वैसे ही यहां पे बाहर से लगता है कि पेड़ है पौधे हैं वगैरह भीतर में से किंतु हमको पता है मास्टर महाशय को अनुभव होता था कि यह सब जैसे कि आनंद के बने हुए हैं तो यह आनंद काली मंदिर में जाकर के ही मास्टर महाशय को अनुभव होता था बात सिर्फ यह नहीं है कि ठाकुर के भीतर में आनंद है ठाकुर जिस चीज को स्पर्श करते हैं जहां पर निवास करते हैं जिनके साथ में वार्तालाप करते हैं वो सब कुछ जैसे कि ठाकुर का अमर स्पर्श पाक के आनंद में परिणत हो जाता है जैसे कि वह पारसमणि रूपी एक पत्थर के बारे में वह कहानियां प्रचलित है कि यह पत्थर जिस को कोई भी धातु को स्पर्श करेगा यह धातु सोना हो जाएगी सोने की गोल्डन हो जाएगी तो यहां पे भी ठाकुर उस पारसमणि पत्थर की तरह है वो जिनको स्पर्श करेंगे जिनका जिनके ऊपर में उनका आशीर्वाद आएगा वह आनंद रूपी एक दिव्य आनंद में परिणत हो जाएगा तो यहां पर भी स्वामी जी कहते हैं कि हमारे अच्छा यह किस तरह से होता है हमने यह थिरी तो पढ़ी है यहां पर स्वामी जी उसको थोड़ा सा मैकेनिज्म थिरी के पीछे का हमको बताते हैं कि एगजैक्टली किस तरह से यह होता है ट्रांसफॉर्मेशन तो वो ट्रांसफॉर्मेशन होता है प्राण की शक्ति से अच्छा उसके बाद में स्वामी जी आगे क्या कहते हैं यू सी दैट इन एवरी डे एक्शंस प्रतिदिन की कार्यावटम टॉकिंग टू यू मैं आपके साथ में बात कर रहा हूं व्हाट एम आई ट्राइट डू मैं क्या करने का प्रयास कर रहा हूं आई एम सो टू से ब्रिंगिंग माय माइंड टू अ सर्टेन स्टेट ऑफ वाइब्रेशंस एंड द मोर आई सक्सीडेंस विल बी अफेक्टेड बाय व्हाट आई से मैं आपके साथ में बात कर रहा हूं किंतु इस बात करने के पीछे क्या मैकेनिज्म कार्य कर रहा है मैं अपने मन को एक स्पेशल एक खास तरह के भाव में ले आता हूं और फिर जितना मैं इस भाव में मग्न होता जाऊंगा उतना ही यह भाव आपके तक संप्रसारण कोई आप जैसे कि सिनेमा है सिनेमा में आप देखिए ये एक्टर लोग एक्टिंग करते हैं तो कभी-कभी यह लोग कॉमेडी होता है तो वो इस तरह से एक्टिंग करेंगे जैसे कि वो पूरा सीन कॉमेडी जैसा लगे और आप भी इसकी वजह से हंसना शुरू कर दे क्योंकि वह हास्य रस जो उन्होंने प्रकट किया अपने भीतर में वो हास्य रस रंग मंच के माध्यम से आपके भीतर में प्रसारित होता है अभी करुण रस कभी-कभी किसी का मृत्यु हो गया स्टेज के ऊपर में और वह मां रो रही है या फिर इस तरह से करुण रस जब उसका अभिनय होता है तो हम भी देखिए कि कई बार रोने लगते हैं जैसे कि यह कथामृत में है कि हरिश्चंद्र नाटक का अभिनय हो रहा है अभी हरिश्चंद्र की परीक्षा करने के लिए राजा हरिश्चंद्र की उनको राज्य में से निकाला गया उनकी पत्नी को उनके बच्चे को अभी इतना वह उनको एक किया गया अपनी बच्चे अपने बच्चे और पत्नी को उनको किसी के यहां पर एक ब्राह्मण के यहां पर दास के रूप में रखना पड़ा और वह खुद एक स्मशान में चीता जलाने वाले के रूप में बैठे हुए हैं अभी आधी रात हुई वहां पर वह हरि राजा की पत्नी रानी जो थी उसने देखा कि उसके पुत्र का राजकुमार का सर्प के दंश से ना कि ऐसा किसी से उसका मृत्यु हो गया अभी किस मां को यह दृश्य देखा जाएगा नजर के सामने छोटा बच्चा अपना खुद का मर गया अभी क्या करेगी रोती रोती उसको बच्चे को लेकर के स्मशान में आई उसकी चीता जलाने के लिए यहां पर राजा हरिश्चंद्र का कार्य है कि जो भी चीता जलाए उसके पास में से पैसा इकट्ठा करना है तो भी उसकी खुद की रानी उसका खुद का पुत्र वो मृत्यु हो गया है उसका अभी रानी कह रही है बड़ी ही कातर होकर के विनती कर रही है बार-बार कि आपको तो पता है मेरे पास में पैसा नहीं है मैं कहां से पैसा लाऊं और यह तो आपका खुद का बच्चा ही इसकी क्या चिता नहीं जलाएंगे उसका सत्कर्म सत्कार्य आप नहीं करेंगे किंतु यह तो राजा हरिश्चंद्र थे जो सत्य के रक्षा करने के लिए बैठे थे वहां पे व कैसे स्वीकार कर ले कि असत्य खुद का बच्चा है इसलिए क्या सत्य का त्याग कर दे सत्य अपने खुद के बच्चे से महान है राजा ने मना कर दिया कि जब तक इसका पैसा नहीं मिलेगा तब तक इसकी चिता नहीं जलेगी अभी यह नाटक का अभिनय हो रहा है और ठाकुर नाटक देखते देखते उनकी आंखों में आंसू आ रहे हैं अभी यह किस तरह से जो लोग अभिनय कर रहे थे उन्होंने अपने अभिनय अपनी जो भावना करुण रस का जब आप अभिनय करते हैं तो अपने भीतर में करुण रस प्रकट करना होगा और उसको दर्शन करके उसको देख कर के उसके जो यह है जो श्रोत वृंद है दर्शक है वो दर्शक के मन में भी वही रस प्रकट होगा यह नाट्य शस्त्र का यह एक बड़ा ही एक बेसिक ये सिद्धांत है वीर रस हो करुण रस हो या जितने भी रस हो ये शौर्य जो भी है आपको पहले अभिनेता सर्वश्रेष्ठ अभिनेता कौन है यह सर्वश्रेष्ठ अभिनेता वही है जो कि वो फील करता है जिस पात्र का वो अभिनय करता है उस पात्र का वो अपने भीतर में फील करता है उसको वैसे ही वह बाहर बाहर से अभी नहीं नहीं करता जैसे कि यह ठाकुर ने ही एक कहानी बताई है कि एक नाटक का अभिनय हो रहा था एक अभिनेता साधु का स्वांग रच करके बैठा है अभी उसका अभिनय इतना अच्छा हुआ कि जब नाटक समाप्त हो गया तो कुछ बाबू लोग थे वहां पे धनी लोग उन्होंने उसकी सराहना करने के लिए उसको रुपए देने के लिए गए तो अभी जिस अभिनेता ने साधु का भेष रचा था वो ऐसा मुंह घुमा करके उनके सामने से चला गया तो अब यह लोग बड़े ही आश्चर्य चकित हो गए दर्शक गण कि अरे यह अभिनेता है उसको हम पैसा दे रहे हैं पैसा नहीं लेगा आश्चर्य की बात है अभी किंतु कुछ देर के बाद में यही अभिनेता उनके पास में वापस आया पहले मना कर दिया था तब साधु के कपड़े पहने थे अभी अपने साधे अपने प्रतिदिन के कपड़े पहन कर के बाबू के पास में आया कहने लगा कि कहां आप तो पैसा देने वाले थे अभी दीजिए तो बाबू ने पूछा कि अरे पहले तो तुमको पैसा दिया तो तुम मुंह घुमा कर के चले गए अभी तुम सामने से पैसा मांगते हो क्या है यह तब यह अभिनेता ने क्या कहा मैंने उस समय साधु का स्वांग रचा था जब साधु का स्वांग रचा है साधु का अभिनय कर रहा हूं साधु के वस्त्र परहित परिधान किए हैं तब तक मेरे लिए पैसा त्याज्य है मैं उसको ग्रहण नहीं करूंगा किंतु अभी तो मैं आम आदमी हो गया हूं फिर से एक अभिनेता हो गया हूं अभी दीजिए पैसे तो यह नाट्य शस्त्र का यह बड़ा ही एक फाउंडेशन नियम है पक्का एक नियम है कि यदि अभिनेता या अभिनेत्री को सक्सेसफुल होना है तो जिस रस का अभिनय कर रहा है करुण रस वीर रस माधुर्य रस जितने भी रस है उस सबका उसको पहले अपने भीतर में अपने जिगर में उसको फील करना होगा अपने भीतर में उसको प्रकट करना होगा तब इस तरह का नाटक देख कर के जो दर्शक गण है वे लोग अभिभूत हो जाएंगे मोहित हो जाएंगे और यह तो नाटक की बात हुई अपने दिन प्रतिदिन के समय में देखिए कि यदि कोई भी आदमी आप जैसे कि अब बच्चे हैं यह साइकोलॉजी में कहा जाता है मां का जो मूड है उसके बच्चे में वह इमीडिएट वह ट्रांसमिट होता है मां यदि नाराज है या तो फिर डिप्रेसो बच्चा रोने लगता है और मां यदि खुश है या हेल्दी है ना कि है है तो बच्चा भी बड़ी खुशी-खुशी से खेलता है तो यह जो भाव का संबंध यह सभी के बीच में है कोई भी आदमी ऐसा नहीं कर स कह सकता कि मैं पत्थर दिल हूं मेरे हृदय में किसी भी तरह का भाव होता ही नहीं है यह डॉक्टर सरकार स्वयं यह डॉक्टर सरकार कहते थे मुझे तो यह भाव वगैरह अच्छा नहीं लगता ठाकुर के गले में कैंसर हुआ है डॉक्टर सरकार गए हैं ट्रीटमेंट करने के लिए और वह कहते हैं कि देखिए आपको यह भाव भाव में ज्यादा मत जाइए वरना यह गले का कैंसर है गले का घाव और भी बिगड़ेगा तो अभी यहां पर नरेंद्र गाना गा रहा है और बाकी तीन-चार लोग खड़े हो गए भाव में भक्त लोग और ठाकुर भी धीरे-धीरे करके भाव में जा रहे हैं अभी यह डॉक्टर सरकार जो कि ठाकुर को यह कहते थे कि यह भाव में मत जाना जो लोग के भीतर में भाव का प्रकोप होता है आवेश होता है यह लोग या तो नौटंकी कर रहे हैं या तो फिर यह कमजोर मन वाले लोग हैं जिनका कि व्यक्तित्व वीक है वीक पर्सनालिटी है उनके भीतर में यह सब होता है किंतु अभी नरेद का गाना और ठाकुर स्वयं वहां पे भाव राज्य के राजा स्वयं बैठे हैं यहां पे और डॉक्टर सरकार कौन खेत की मौली है कि वह भाव का संवरण करके रख पाएगा किंतु एटलीस्ट वो खड़ा तो नहीं हुआ जैसे कि बाकी सब लोग खड़े हो गए भाव में आकर के नृत्य गीत कीर्तन रोना धोना कोई हंसता है यह सब जो चालू हो जाता था ऐसा तो उन्होंने नहीं कहा किया किंतु बाद में जब यह कीर्तन समाप्त हुआ तो व ठाकुर के सामने वह स्वीकार करते हैं कि एक क्षण के लिए तो मेरे भी मन में आ गया कि मैं भी खड़ा हो जाऊं इस तरह से भाव का प्रवाह बह रहा था किंतु फिर बड़े ही कष्ट करके बड़े ही जोर से मैंने अपने भाव का संवरण किया तो देखिए इस तरह के डॉक्टर सरकार भी जो है वे लोग भी भाव में मग्न हो जाते थे जबकि कीर्तन वगैरह चलता था तो यहां पर स्वामी जी कहते हैं कि हम जब किसी के साथ में बात करते हैं तो बहुत सारे लोग खास करके यह अभिनेता की तरह हम लोग अपना भाव दूसरों में संक्रमित करने का प्रयास करते हैं और भाव को दूसरों में संक्रमित करने का प्रयास किस तरह से होता है पहले तो हमको ही उस भाव में आ जाना पड़ेगा कोई-कोई लोग प्रवचन देते हैं बड़े गुस्से में आकर के जिससे कि लोग भी बड़े ही उत्साहित हो जाए गुस्से में आ जाए और हमको वोट दे दे तो यह किसी को मनाने का किसी को पटाने का किसी को भाव में अपने भाव से भावित कर देने का इसका सीक्रेट क्या है कि स्ट्रांग भाव है स्ट्रांग रस स्ट्रांग इमोशन इसको पहले अपने जिगर में अपने हृदय में उसको जन्म देना है फिर वह भाव यह प्राण शक्ति के द्वारा दूसरों में संक्रमित होगा और दूसरे लोग भी उसी भाव में भावित हो जाएंगे ऑल ऑफ यू नो दैट द डे आई एम मोर एंथू सिस्टिक द मोर यू एंजॉय द लेक्चर एंड व्हेन आई एम लेस एंथिया यू फील लैक ऑफ इंटरेस्ट आप सबने यह शायद अनुभव किया होगा कि जिस दिन प्रवचन देने के समय मेरे में उत्साह की बढ़ोतरी होती है या तो मैं उत्साहा वित होता हूं उस दिन आपको भी बड़ा अच्छा लगता है आप लोग भी बड़े ही आनंद से मेरे प्रवचन का आनंद उठाते हैं उसका वो आपका रसपान करते हैं किंतु जिस दिन मेरा उत्साह या तो फिर मेरे में आनंद की कमी हो जाती है तब आपको भी ऐसा लगता है कि स्वामी जी के प्रवचन में आज इंटरेस्ट नहीं आ रहा है हालांकि यह हम तो सोच भी नहीं सकते कि स्वामी जी प्रवचन दे और बिना किसी उत्साह के अभी स्वामी जी का खुद का स्टैंडर्ड इतना ऊंचा था कि उनके स्टैंडर्ड के अनुसार कोई प्रवचन में उनका उत्साह ज्यादा होगा और उनके स्टैंडर्ड के अनुसार कम होगा अदर वाइज हम लोग जैसे आम आदमियों के साथ में कंपेयर करें तो स्वामी जी का उत्साह और एंथू सियाज म हिमालय की तरह है और हम लोग य छोटे-मोटे ये दो-तीन मंजिला मकान पे रहते हैं और स्वामी जी रहते हैं ये एवरेस्ट के शिखर के ऊपर में उत्साह रूपी तो उनकी दृष्टि से शायद ऐसा हो सकता है कि स्वामी जी को लगा होगा कि आज मेरा उत्साह कम है तो स्वामी जी अपने ऑडियंस को कहते हैं जिस दिन आपको महसूस होगा कि मेरे में उत्साह कम है तो आपको भी मेरे प्रवचन में शायद थोड़ा सा इंटरेस्ट कम आए तो ये क्यों क्योंकि यह अपना भाव है वह प्राण के माध्यम से दूसरों में संक्रमित होता है द जाइगर विल पावर्स ऑफ द वर्ल्ड द वर्ल्ड मूवर्स कैन ब्रिंग देर प्राणा इनटू अ हाई स्टेट ऑफ वाइब्रेशन एंड इट इज सो ग्रेट एंड पावरफुल दैट इट कैचेज अदर्स इन अ मोमेंट एंड थाउजेंड्स आर ड्रॉन टुवर्ड्स देम एंड हाफ द वर्ल्ड थिंक एस दे डू यह जो महाशक्ति से संपन्न जो प्रतिभाशाली व्यक्ति यां है इस जगत की वे लोग क्या करते हैं अपने प्राण को एक उच्च वाइब्रेशन के लेवल पर उच्च तरंग वित लेवल पर लेकर जाते हैं और फिर यह उनका वाइब्रेशन प्राण का वाइब्रेशन या तो मैग्नेटिक पर्सनालिटी जिनको कि हम प्रतिदिन की भाषा में में डे टू डे लैंग्वेज में मैग्नेटिक पर्सनालिटी कहते हैं तो यह मैग्नेटिक पर्सनालिटी उनका इतना स्ट्रांग हो जाता है और टेक्निकल वर्ड में कहा जाए तो उनके प्राणों का स्पंदन इतना उच्च कक्षा में चला जाता है इतना रैपिड हो जाता है कि फिर वह प्राण का स्पंदन दूसरे लोगों में प्रवेश करता है उनकी मैग्नेटिक पर्सनालिटी दूसरों के ऊपर में असर करती है और हजारों लाखों लोग उनसे आकर्षित होकर के उनकी वाणी का श्रवण करने के लिए उनकी बातें सुनने के लिए इकट्ठा हो जाते हैं और आधा जगत उनको अनुसरण करता है हाफ द वर्ल्ड थिंक एज दे डू जिस तरह से ये लोग मनवाना चाहते हैं लोगों को लोग उनकी बात मान लेते हैं इस तरह के उदाहरणों की कोई कमी नहीं है पॉजिटिव और नेगेटिव दोनों तरह के हमने कल देखा था जो लोग आसुरी वृत्ति संपन्न है जैसे कि हिटलर था जैसे कि रावण था जैसे कि स्टालिन था ऐसे कुछ-कुछ लोग और भी बहुत सारे हैं लिस्ट बहुत लंबा है इस आसुरी वृत्ति वाले लोगों का जो कि बड़ी ही आसानी से लोगों को मोहित कर देते थे लोगों को अपनी एक भयावह विचारधारा में बांध करके उनके पास में से आसुरी वृत्ति वाला कार्य करवाते थे उनके पास में से सब भयानक कर्म करवाते थे इतना शक्ति इन लोगों में था दूसरी और हम देखें कि यह जैसे भगवान कृष्ण है ना कि भगवान राम है ना कि ये जीसस है न कि बुद्ध है न कि इवन आइंस्टाइन है न कि महात्मा गांधी है यह लोग जो पॉजिटिव एटीट्यूड वाले थे उनकी पॉजिटिव आकर्षण शक्ति से प्रभावा वित होकर के मोहित होकर के लाखों लोगों ने अपना जीवन परिवर्तित किया है ऐसे स्वामी विवेकानंद स्वयं इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है और बात सिर्फ यह नहीं है कि इस तरह के लोगों को उन लोगों के सामने जाकर के आपको प्रवचन देने ही होंगे आपकी वाणी से आपको उनको आकर्षित करना होगा ऐसा नहीं है स्वामी जी तो यहां तक कहते हैं कि इस तरह के उच्च भावा पन्न महापुरुष यदि एक गुफा में बैठ करर के पांच उच्च विचार महत विचार करते हैं तो यह पांच विचार यह गुफा की दीवाल को भेद करके इस समाज में आकाश मार्ग से गमन करके समाज में चारों ओर फैल जाएंगे किसके किसके मन में प्रवेश करेंगे और उनसे अपना कार्य करवाएंगे तो यह विचारों की यह शक्ति है प्रबल इसका प्रभाव है और यह पूरा जो मैकेनिज्म है प्राण का मैकेनिज्म है अभी जैसे कि देखिए कि मुझे किसी के साथ में अपने मोबाइल से बात करनी है या फोन से बात करनी है और सामने वाले के पास में दूसरा मो मोबाइल फोन है या दूसरा कोई फोन है तो अभी यह एक फोन के मा दूसरा फोन तक यह जो बात होती है तो ऐसा तो नहीं है कि फोन के भीतर में ऐसी कोई शक्ति है कि जादू चमत्कार से वह दूसरे फोन में मेरी बात पहुंचा दे उसके बीच में यह इलेक्ट्रोमैग्नेटिक किरण जो है यह जो वो ट्रांसमिट होती है और कैसे ट्रांसमिट होती है या तो केबल के द्वारा या तो फिर यह मोबाइल टावर जो कि आजकल हमको हर जगह पर दिखते हैं उनके माध्यम से है फिर यह सैटेलाइट कम्युनिकेशन है यह अंडर सी मरीन केबल्स जो है इन सबके माध्यम से यह हमारी कन्वर्सेशन ट्रांसमिट होती है तो बात सिर्फ यह नहीं है कि दो मोबाइल से काम चल जाएगा एक मेरे पास में है एक अमेरिका में बैठे हुए मेरे मित्र के पास में है सिर्फ मोबाइल होने से तो काम नहीं चलेगा इन दोनों के बीच में कम्युनिकेशन का एक मीडियम चाहिए और वह मीडियम चाहे मोबाइल टावर हो चाहे सैटेलाइट हो ना कि चाहे अंडर सी केबल हो ना कि कुछ भी हो एक मीडियम चाहिए तो यहां पर भी मेरे मन के भीतर में उत्साह है अभी मन तो आपके भी पास में है और मैं चाहता हूं कि मेरा उत्साह आपके भीतर में संक्रमित हो किंतु सिर्फ चाहने से जादू चमत्कार से यह उत्साह संक्रमित नहीं होगा उसके लिए एक मीडियम ऑफ कम्युनिकेशन चाहिए ट्रांसमिटिंग मीडियम चाहिए वो मीडियम ऑफ ट्रांसमिशन है प्राण यह प्राण के माध्यम से मेरा भाव मेरा उत्साह या तो मेरी गम गिनी या मेरा गम दूसरों के मन में प्रवेश करेगा और ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपने प्राण को इस तरह से कंट्रोल करके रखा है इतने हाई वाइब्रेशन पर लेकर गए हैं कि आधा जगत उनसे प्रभावित होकर के उनकी बातों को सुनता है ऑल मेनिफेस्टेशंस ऑफ पावर अराइज फ्रॉम दिस कंट्रोल मैन मे नॉट नो द सीक्रेट बट इट इज द वन एक्सप्लेनेशन यह शक्ति के जितने भी प्रदर्शन है इस जगत में सभी प्राण के माध्यम से ही प्रसारित होते हैं हम चाहे इस बात को ना स्वीकार करें या नजर अंदाज करें या तो इसके बारे में हम अज्ञानी ही रह जाए किंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि यह बात गलत है प्राण रूपी शक्ति प्राण रूपी मीडियम ऑफ ट्रांसमिशन इस जगत में है जो कि जितने भी पदार्थ है सबको आवृत करके रखता है सबको कंट्रोल करके रखता है अच्छा इसके बाद का टॉपिक है बैलेंस ऑफ प्राण टॉपिक मैंने दिया है अभी स्वामी जी क्या कहते हैं देखते हैं सम टाइम्स इन योर ओन बॉडी द सप्लाई ऑफ प्राण ग्रेविटेटिंग या तो आपके एक अंग में इकट्ठा होता है या तो फिर दूसरे किसी अंग में इकट्ठा होता है द बैलेंस इज डिस्टर्ब एंड व्हेन द बैलेंस ऑफ प्राण इज डिस्टर्ब व्हाट वी कॉल डिसीज इज प्रोड्यूस यह बैलेंस गड़बड़ हो जाता है यह बैलेंस में कहीं ना कहीं खले पहुंचती है और यह बैलेंस जब आउट ऑफ बैलेंस हो जाएगा तब हमको रोग होगा जैसे कि मान लीजिए मैं एक उदाहरण के स्वरूप में कहता हूं स्वामी जी ने तो ऐसा नहीं कहा मैं अपनी ओर से उदाहरण देता हूं हां स्वामी जी ने कहा है थोड़ा सा अलग से उदाहरण देते हैं अपने हृदय में प्राण की कमी हो गई और लीवर में ज्यादा प्राण चला गया तो ऐसा होगा कि हृदय का रोग लग गया हमको क्यों क्योंकि लिवर और हृदय दोनों में जो बैलेंस होना था प्राण का वो बैलेंस चला गया इसके लिए तो यहां पे देखिए कि ये रोग की एक अभिनव व्याख्या स्वामी जी यहां पे करते हैं आज किसी भी व्यक्ति को रोग होता है तो इसके पीछे में लाखों कारण जो है डायग्नोसिस जिसको बोलते हैं मेडिकल साइंस में ये डायग्नोसिस बहुत सारे होते हैं कि हां ये वायरल इंफेक्शन है ना कि ये इंजरी है ना कि ये जेनेटिक प्रॉब्लम है ना कि ये लाइफस्टाइल डिसीज है ना कि ये स्ट्रेस से हुआ है ना कि ऑर्गन ऑर्गन मेल फंक्शन हो गया है क्या है ऐसे बहुत सारे डायग्नोसिस होते हैं और जिस तरह का डायग्नोसिस होता है ब्लड टेस्ट होगा फिर यह यह स्ट्रेस टेस्ट होगा दुनिया भर के टेस्ट होंगे उसके बाद में उस डायग्नोसिस के आधार पर रोग को वि विराम देने के लिए कोई ना कोई औषध है या तो दवाई का प्रयोग किया जाता है यहां पर स्वामी जी रोग की एक अभिनव व्याख्या करते हैं किसी को कैंसर हो गया तो कहेंगे कि यह जेनेटिक प्रेडिस्पोजिशन है उसके घर में और भी किसी को कैंसर हो वो कैंसर वाले जीन इसके भीतर में चले आए हैं किसी को डेंगी हो गया ना कि मलेरिया हो गया तो कोई कहेगा डॉक्टर कहेंगे कि मलेरिया का जो मच्छर है मॉस्किटो उसने उसको काटा है उसके भीतर में यह वायरस प्रवेश हो गए हैं तो यह वायरस का इलाज करो ना कि ये फिर जेनेटिक डिसऑर्डर अभी जेनेटिक डिसऑर्डर का अपना तो उपाय नहीं है बस ऑर्गन जो है फेल हो रहा है उसको ठीक करो तो यह सबके अलावा स्वामी जी कहते हैं कि अपने देह में प्राण का बैलेंस है और यह प्राण का बैलेंस गड़बड़ हो जाने से अपने देह में व्याधि का प्रवेश हो जाता है व्हेन द बैलेंस ऑफ प्राण इज डिस्टर्ब व्हाट वी कॉल डिसीज इज प्रोड्यूस्ड जब यह बैलेंस गड़बड़ हो जाता है तब हम जिसको रोग कहते हैं रोग का आक्रमण होता है टू टेक अवे द सुपरफ्लुअस प्राणा और टू सप्लाई द प्राणा दैट इज वांटिंग विल बी क्यूरिंग द डिसीज कहीं-कहीं पर किसी अंग में बहुत ज्यादा प्राण इकट्ठा हो जाता है तो उस प्राण को वहां से निकालना पड़ेगा या तो फिर किसी अंग में प्राण की कमी हो जाती है तो वहां पर प्राण का सप्लाई पहुंचाना पड़ेगा तो यह बहुत ज्यादा इकट्ठा हो जाना या उसकी कमी हो जाना जिस अंग के साथ में इस तरह का इंबैलेंस होता है उस इंबैलेंस को ठीक करने से ही अपनी रोग की हम रोग से मुक्त हो जाएंगे ट अगेन इज प्राणायाम और यह बैलेंस किस तरह से लाएंगे हम अपने देह में अपने अंगों में तो वह प्राणायाम के माध्यम से टू लर्न व्हेन देयर इज मोर और लेस प्राणा इन वन पार्ट ऑफ द बॉडी एंड देन देयर शुड बी द फिलिंग विल बिकम सो सटल दैट द माइंड विल फील दैट देयर इज लेस प्राणा इन द टो और द फिंगर देन देर शुड बी एंड विल पोसेस द पावर टू सप्लाई इट हम जैसे-जैसे प्राणायाम करते जाएंगे वैसे-वैसे हमको अपने देह का डायग्नोसिस पता चलना शुरू हो जाएगा मैं समझ पाऊंगा कि मेरे एक अंग में प्राण की ज्यादा वह एक्सेस हो गया है और दूसरे अंग में प्राण का डेफिसिट हो गया है प्रैक्टिस करते-करते मेरा माइंड इतना सूक्ष्म और सटल हो जाएगा कि मेरे अंगूठे में ज्यादा प्राण है ना कि अंगूठे में प्राण कम हो गया है और यदि प्राण कम हो गया है तो प्राण को सप्लाई कैसे करें और ज्यादा हो गया है तो वहां से उसको हटाए कैसे यह मैं बहुत अच्छे से कर पाऊंगा यह कैसा हो गया पता है इनबिल्ट एक्सरे मशीन की तरह अभी डॉक्टर ने कहा एक्सरे निकलवाना है तो आप लेब में जाएंगे लेबोरेटरी में वहां पर आप व एक्सरे मशीन के सामने बैठेंगे वह एक्सरे मशीन से आपका वह दांत जैसे कि मैंने वह आखिरी एक्सरे अपने दांतों का करवाया था तो डेंटल एक्सरे तो वो डेंटल एक्सरे का म होता है मुंह रखना होता है अपना चेहरा और फिर वह चारों ओर से उसका एक्सरे ले लेता है तो यह जैसे कि यह इनबिल्ट एक्सरे मशीन है यह इनबिल्ट लैब है आपका ब्लड टेस्ट करवाना है आपका यह बोन मेरो टेस्ट करवाना है जितने भी टेस्ट होते हैं एक्सरे करवाना है यह सबका यह सेंसिटिव मशीन अपने मन के भीतर में ही बैठा है जैसे-जैसे प्राणायाम की प्रैक्टिस करते जाएंगे वैसे-वैसे पहले तो हम डायग्नोज करना शुरू कर देंगे किसी भी डॉक्टर के पास जाएंगे कहेंगे बुखार हुआ है दवाई दीजिए तो डॉक्टर पहला क्या करेगा आपका ब्लड टेस्ट करवाएगा या जितने भी दूसरे टेस्ट है वोह करवाएगा क्यों वो कहेगा कि पहले यह तो देख ले कि किस चीज की वजह से आपको बुखार हुआ है यह वायरल फीवर है ना कि डेंगी है ना कि ये मलेरिया है ना कि ये आम जग आम एक सर्दी जुकाम है क्या है तो उसका तो पहले डायग्नोसिस करवाएगा फिर वो आपको दवाई देगा तो ये डायग्नोसिस मशीन भी अपने भीतर में है और यह फिर ये मेडिसिन या तो फिर इवन सर्जरी कभी-कभी पता चला कि ट्यूमर है सर्जरी करवानी पड़ेगी तो ये पूरा ऑपरेशन थिएटर अपने भीतर में है पूरी लेबोरेटरी अपने भीतर में है ये जो ड्रग स्टोर मेडिकल शॉप जहां पे दुनिया भर की दवाई उपलब्ध है वो भी अपने पतर में है और ये ऑपरेशन थिएटर वहां पे इतने आधुनिक सब सत्र सरंजम रहते हैं ये सब डॉक्टर वगैरह खड़े रहते हैं वो भी अपने भीतर में यदि प्राणायाम करके अपने मन को इतना सेंसिटिव कर दे तो हम यह डायग्नोसिस और ट्रीटमेंट यह दोनों अपने मन से अपने देह की कर पाएंगे और सिर्फ इतना ही नहीं स्वामी जी ने जैसे कहा दूसरा जद व्यक्ति बीमार है अपना प्रिय पात्र या तो कोई भी तो हम अपने प्राण की मदद से उसकी बीमारी को भी ठीक कर सकते हैं दीज आर अमंग द वेरियस फंक्शंस ऑफ प्राणायाम प्राणायाम की विभिन्न क्रियाओं में से यह एक है क्रिया वलियों में से यह एक है दे हैव टू बी लर्न स्लोली एंड ग्रेजुएट टीच द कंट्रोल एंड डायरेक्शन इन डिफरेंट प्लेंस ऑफ प्राण किंतु इस प्राणायाम को सीखने के लिए समय लगेगा धीरे से स्लोली एंड स्टेडी यह होगा स्लोली एंड ग्रैजुअली यह होगा धीरे-धीरे करके आप सीख पाएंगे और देखिए कि जो पूरा राजयोग रूपी विज्ञान है वह उसका यही कार्य है कि आपको यह प्राण को नियमन करना सिखाता है द होल स्कोप ऑफ राज योगा इज रियली टू टीच द कंट्रोल एंड डायरेक्शन इन डिफरेंट प्लेनस ऑफ द प्राण प्राण के जो विभिन्न ये स्तर है विभिन्न स्तरों पर प्राण किस तरह से का करता है यही राज्य का पूरा विज्ञान हमको सिखाता है वन अ मैन हैज कंसंट्रेटेड हिज एनर्जीस ही मास्टर्स द प्राण ट इज इन हिज बॉडी जब मनुष्य अपनी शक्तियों को केंद्रित कर सकता है तब वह अपने भीतर में रहे हुए प्राण को भी केंद्रित कर सकता है प्राण के ऊपर में कंट्रोल पा सकता है व्हेन अ मैन इज मेडिटेटिंग ही इज आल्सो कंसंट्रेटिंग द प्राण जब कोई भी मनुष्य ध्यान कर रहा है तब वो प्राण के ऊपर में ही कंसंट्रेशन कर रहा है या तो फिर वो प्राण को एकाग्र प्राण को वो शार्पन कर रहा है प्राण को कंसंट्रेट कर रहा है जैसे कि चाकू है आप किचन में चाकू का इस्तेमाल करते हैं देखा कि कुछ दिनों के बाद में उसकी धार जो है वो कम हो गई है काटने में असुविधा होती है तो चाकू को लेकर के आप उसके पास में किसी के पास में जाएंगे जो चाकू को धार करतो उसकी शार्प करता है पत्थर ऐसा गोलगोल घूमता रहता है उसके ऊपर में चाकू रखेगा जिससे कि उसकी धार है बड़ी ही शार्प हो जाएगी फिर उससे आप फिर से फल काटिए सब्जी काटिए फटाफट करके कटने लगेगा तो यह प्राण है तो प्राण को भी कंसंट्रेट करना है उसको भी शार्पन करना है जैसे आप प्राण को कंसंट्रेट करते हैं शार्पन करते हैं उसकी धार निकालते हैं इस प्राण का अब बड़े ही सुंदर रूप से इस्तेमाल कर सकते हैं अच्छा तो आज यहीं तक विकल्प फिर से देखते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तसत श्री राम कृष्ण मस् यह सब चीजों को पढ़ कर के लगता है कि अभी प्राणायाम सीख लेते हैं अभी सब बीमारियों से दूर हो जाते हैं h