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ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूप पिणे अवतार वरिष्ठ राम कृष्णा यते नम स्वामी जी का राजयोग उसका पाठ कर रहे थे हम तो आज का टॉपिक है प्राणिक हीलिंग और यह बड़ा ही इंटरेस्टिंग टॉपिक है क्योंकि देखिए कि हीलिंग एक ऐसा सब्जेक्ट है जो कि हमको एकदम डायरेक्टली हम सबको ये अफेक्ट करता है क्यों क्योंकि आध्यात्मिक जीवन तो ठीक है चलो वह तो आज नहीं ना कल धीरे-धीरे करके इस रास्ते पर हम आगे बढ़ते ही जाएंगे किंतु जिस दिन शरीर में आकर के बीमारी ने घर कर लिया एक डिसीज ने हमारे शरीर में निवास करना आरंभ कर दिया उसके बाद में आध्यात्मिक जीवन कहो कि सांसारिक जीवन कहो सब कुछ जैसे कि हमको ऐसा लगता है कि इस सब चीजों में ना ही इंटरेस्ट रहता है ना ही हमारे जीवन में हमारे शरीर में उत्साह रहता है इसलिए व जैसे संस्कृत में कहा है कि शरीरं आद्यम खलु धर्म साधन शरीर या तो फिर सुस्त शरीर ही धर्म का साधन है यदि शरीर ही खराब होने लगा धीरे-धीरे तो फिर हम धर्म साधन भजन यह सब कहां पर करेंगे ठाकुर का हाथ फ्रैक्चर हो गया था तो ठाकुर ने रोते-रोते मां को कहा था कि वो एशियाटिक सोसाइटी में जैसे कि स्केलेटन जो होता है ना उसको कैसे तार बांध कर के रख दिया है तो ऐसे ही मेरे हाथ को कैसे भी करके बांध करके रख दो तो मैं तुम्हारा हंसी खुशी तुम्हारा नाम ले पाऊंगा वरना तो जैसे ठाकुर एक दूसरा उदाहरण देते हैं दांत का दर्द जिसको होता है तो वह फिर कहां साधन भजन करेगा कि क्या करेगा सब समय उसका मन दांत के दर्द के ऊपर में ही पड़ा रहता है तो जब भी शरीर में बीमारी आती है अस्वस्थता आती है असु होता है तो सब काम छोड़ कर के अपना मन वहीं पर लेकर रहता है फिर डॉक्टर के पास जाना सब पूरा लाइफ बिखर जाता है तो यह जदी ऐसा कोई उपाय है कि जिससे कि यह बीमारी ठीक हो पाए तो यह सुनकर के हम सभी लोग एकदम व्याकुल हो कर के इसके बारे में जानना शुरू कर देते हैं और देखिए कि एक सुंदर उदाहरण भी है स्वामी उस समय बेलूरमठ बन गया था और स्वामी जी वहां पर रह रहे थे तो पता चला कि एक सन्यासी वहां पर बड़ा ही बीमार है मठ में उसको पता नहीं बुखार हो गया था कि क्या तो स्वामी जी ने कहा एक दूसरे एक साधु को कि जाओ तुम एक काम करो जाकर के ठाकुर र का चरणामृत ले आओ जाकर के ठाकुर का चरणामृत उस साधु को खिलाना तो उससे वह ठीक हो जाएगा तो अभी जैसे यह जिस साधु को स्वामी जी यह कह रहे थे चरणामृत लाने को वह हंस पड़ा क्यों क्योंकि यह देखिए कि भारत में जो अंधश्रद्धा एं थी यह सती प्रथा है बाल्य विवाह प्रथा है पर्दा प्रथा है इसी सब अंधश्रद्धा हों ने तो हमको गुलाम बना करके रखा था आखिरी 1000 साल में यहां पर स्वामी जी फिर से वही वेदांत की वाणी का वेदांत की वाणी का प्रचार करने को आए हैं जो कि रेशनल है जो कि लॉजिकल है और मॉडर्न साइंस के साथ में बिल्कुल मैच होता है तो फिर जो चीज मॉडर्न साइंस के साथ में मैच होती है जो रेशनल है उसी को हमको ग्रहण करना चाहिए ऐसा नहीं है कि वेदांत में मिरेकल नहीं है किंतु सब मिरेकल का साइंटिफिक बेसिस है तो यहां पर कहां स्वामी जी अमेरिका भर में जा करके अमेरिका के डिवोटा हों को भारत में ले आक के मिसेस ओली बुल वगैरह को बेलूरमठ की स्थापना की कहां यह रेशल कहां यह लॉजिक और कहां यह साइंस के बेस पर रिलीजन की बात कर रहे हैं और कहां यह स्वामी जी कि चरणामृत खिलाना चाहते हैं बीमार साधु को तो जिस साधु को स्वामी जी यह कह रहे थे कि जाओ चरणामृत लेकर आओ वह हंस दिया तो स्वामी जी ने इमीडिएट कहा स्वामी विवेकानंद ने भैया तुमको चरणामृत लाने की जरूरत नहीं नहीं है क्योंकि तुमको उस परे विश्वास नहीं है मैं मैं ही लेकर के आता हूं और मैं ही उस बीमार साधु को चरणामृत खिलाऊंगा तो देखिए कि हमको यह सब चीजें पता है किंतु इसके पीछे का जो साइंस है जैसे कि स्वामी जी ने कहा कि वेदांत इज बेस्ड ऑन साइंस साइंटिफिक बेसिस पे ही वेदांत आधारित है भले ही चाहे वेदांत का साइंस मॉडर्न साइंस से डिफरेंट होगा ब बट इट इज साइंस वो सिर्फ मान लेने की बात नहीं है बस यह नहीं कहना है कि जीसस क्राइस्ट इज द सन ऑफ गॉड यह विश्वास कर लो तो तुम्हारा हो जाएगा अविश्वास करोगे तो तुमको जिंदा जला देंगे जैसे कि वो मिडिवल यूरोप में होता था यहां पे सिर्फ विश्वास करने की बात नहीं है यहां पे जिस तरह से साइंटिफिक प्रूफ होते हैं तो वैसे ही वेदांत में भी आपको ईश्वर दर्शन या आत्मज्ञान रूपी प्रूफ आपको मिलेगा यदि आप उसको फॉलो करेंगे तो ये प्रूफ के बेस पे साइंटिफिक आधार पर वेदांत बना हुआ है तो यहां योग भी राज योग भी और यह प्राण का साइंस भी सॉलिड वेदांत सॉलिड साइंस के ऊपर में बना हुआ है तो यह जो हीलिंग का साइंस है यह हीलिंग प्राणिक हीलिंग क्या है उसके बारे में साइंटिफिक बेसिस यहां पर स्वामी जी डिस्कस करते हैं हम पढ़ते हैं ऑल द सिकनेस एंड मिजी फेल्ट इन द बॉडी विल बी परफेक्टली कंट्रोल्ड जितने भी शरीर में बीमारियां है जितने भी दुख दर्द है वह संपूर्ण रूप से हमारे नियंत्रण के भीतर में आ जाएंगे नॉट ओनली सो यू विल बी एबल टू कंट्रोल अनदर बॉडी और बात सिर्फ यह नहीं है कि अपने शरीर के दुख दर्द को कंट्रोल कर पाओगे दूसरों के शरीर में रहे हुए दुख दर्द को भी कंट्रोल कर पाओगे एवरीथिंग इज इनफेक्शियस इन दिस वर्ल्ड गुड और बैड इस जगत में अच्छा हो ना कि बुरा हो सब कुछ संक्रमित होता है सब कुछ इनफेक्शियस है जैसे कि कोरोना इनफेक्शियस था हमको लॉकडाउन करना पड़ा तो यह जो हंसी खुशी होती है यह जो आनंद होता है जो सुस्त हेल्थ होती है यह भी इनफेक्शियस है इसको भी जैसे आप दूसरों को कोरोना हो सकता है आपके कांटेक्ट में आकर के तो दूसरों को हंसी खुशी भी मिल सकती है दूसरों को आनंद भी मिल सकता है हम हमारे कांटेक्ट में आकर के यदि अपना स्वभाव आनंदमय है तो देखिए मैं बेलूर मठ में था तो आपको पता होगा वहां पर एक आरोग्य भवन है आरोग्य भवन अर्थात कि साधुओं के रिटायरमेंट होम तो हम लोग जब रिटायर होते हैं तो आरोग्य भवन में रहते हैं वैसे तो रिटायर साधु दूसरे सेंटर में भी रहते हैं किंतु बेलूरमठ में हम लोग रहते हैं आरोग्य भवन में तो मेरा एक ऐसा था कि मैं वहां पर बीच-बीच में जाया करता था और कुछ-कुछ साधुओं को मिला करता था मैंने देखा कुछ साधु लोग ऐसे आनंदमय होते हैं ऐसे हास्य उनके चेहरे पर हमेशा लगा ही रहता है उम्र कितनी ही हो गई है 80 90 साल मैं जिस महाराज जी को मिलने के लिए जाता था काली पदो महाराज को उनकी उम्र उस समय 90 से भी ज्यादा थी प्रभानंद जी के साथ में उन्होंने टीसी किया था ट्रेनिंग सेंटर उन्होंने स्वामी प्रभानंद जी महाराज जी के साथ में किया था इतने सीनियर थे वो ट्रेनिंग सेंटर का फर्स्ट बैच उसमें से वो महाराज थे फर्स्ट बैच ब्रह्मचारी में तो किंतु उनके चेहरे पर ऐसा हमेशा मैंने आनंद देखा है अभी 90 इयर्स की उम्र है बीमारी नहीं होगी क्या ऐसा हो सकता है बीमार थे सब कुछ थे किंतु चेहरे पे हंसी खुशी ऐसा कि मैं मेरी उम्र उनसे आधी आधे से भी कम है थी और फिर भी मैं हमेशा चाहता था कि जाकर के महाराज के साथ में गप लगाऊं महाराज के साथ में बातें करूं और वोह वॉकिंग करने को जाते थे उस समय इवनिंग वॉक करने के लिए बेलूरमठ में तो उनके साथ में मैं वॉकिंग करने के लिए भी जाता था उनका संग प्राप्त करना सत्संग मुझे बड़ा अच्छा लगता था क्यों क्योंकि उस समय मुझे लॉजिक जो होता है ना लॉजिकली हम लोग क्या सोचता है कि वह बड़े ही विद्वान है उस उम्र में भी वेदांत के उपनिषद के सब श्लोक मुख स्त है और बात-बात में एक के बाद एक श्लोक उसको हम वो मुख स्त रट करके चैटिंग करके समझाएंगे तो मैं सोचता था चलो उनके साथ में गप भी लगाना होता है और वेदांत भी सीखना होता है किंतु आज अभी मुझे समझ में आता है ऐसे वेदांत सिखाने वाले साधु बहुत सारे हैं किंतु उस पार्टिकुलर उन पार्टिकुलर महाराज के पास क्यों जाता था क्योंकि वह हमेशा आनंदमय दिखते थे उनकी जीवन में कोई रिग्रेट नहीं होगा ऐसा नहीं है वो कभी भी वो उनको हेड ऑफ द सेंटर कभी भी नहीं बनाया गया था कोई ऐसा इंपॉर्टेंट पोजीशन भी उनको नहीं मिला था थे तो भंडारी थे कभी तो शायद मैनेजर रहे होंगे किसी समय मुझे उतना डिटेल उनके बारे में नहीं पता था भूतकाल के बारे में किंतु मैंने उनको देखा कि जैसे कुछ-कुछ लोग होते हैं कि मेरे साथ में इस तरह से अन्याय हुआ मेरे साथ में इस तरह से अन्याय हुआ ऐसा जो वह अपनी जो राम कहानी जो सुनाते हैं ना वह कभी-कभी वृद्ध होने के बाद में ऐसा होता है तो उन्होंने अपनी राम कहानी मुझे कभी नहीं सुनाई अपने दुख दर्दों की कहानी मुझे कभी नहीं सुनाए हमेशा ऐसे ही प्रसंग सुनाए हैं जो सुनकर के मुझे आनंद आता हो तो देखिए कि उनका आनंद ऐसा संक्रमित था कि उस आनंद का पान करने के लिए मैं हमेशा उनके पास में जाता था तो जहां पर स्वामी जी कहते हैं कि हमारा मूड जद जिस तरह से बैक्टीरिया या वायरस उसको हम दूसरों को इफेक्ट कर सकते हैं यदि मुझे बुखार हुआ है तो डॉक्टर कहेगा कि आप मास्क पहन के रखिए वरना तो फिर जो आपके साथ में बात कर रहा है वह उसको भी शायद हो सकता है बुखार हो जाए तो आप मास्क पहन के रखिए तो वह वो यह है कि मैं यदि मेरे भीतर में वायरस या है वायरस है बीमारी के तो मैं दूसरों को उसको इफेक्ट कर सकता हूं उस वायरस है तो वैसे ही यदि मेरा मूड जो है मेरे मूड से दूसरे लोग इफेक्ट हो सकते हैं यदि मैं खराब मूड में हूं तो मैंने इमीडिएट देखेंगे कि बाकी लोग सब मेरे साथ में बात करना अवॉइड करेंगे मैं मैंने ऐसे कितने लोगों को देखा है कि जिनसे लोग दूर ही रहना पसंद करते हैं अरे भाई उनके पास में जाएंगे पता नहीं कैसी बात करेंगे और कोई उल्टी पुल्टी बात ना भी करें तो उनका जो मूड है जिस तरह का उससे हम लोगों का दिन बिगड़ जाएगा उससे दूर ही रहो ऐसा वो हम लोगों को सुनने में आता है कभी-कभी किसी के बारे में और जैसे कि यह काली पदो महाराज जैसे सन्यासी है ऐसे जैसे मैं अपने घर में भी बताऊं मेरे मां के पिताजी थे थे और उनके भी पिताजी थे वह हमेशा सहस्य आनंदमय रहा करते थे और हम बच्चे बच्चे थे तो उनके पास में जाकर के खेलने का हमको कितना अच्छा लगता था तो यह आनंद भी संक्रमित होता है अच्छा या बुरा मूड भी संक्रमित होता है इफ योर बॉडी बी इन ए सर्टेन स्टेट ऑफ टेंशन इट विल हैव ए टेंडेंसी टू प्रोड्यूस द सेम टेंशन इन अदर्स यदि आपका शरीर कोई एक पार्टिकुलर अवस्था में है तो वह अवस्था आप दूसरों के भीतर में संक्रमित करेंगे इफ यू आर स्ट्रांग एंड हेल्दी दोज दैट लिव नियर यू विल आल्सो हैव द टेंडेंसी टू बिकम स्ट्रांग एंड हेल्दी जद आप स्ट्रांग है आप हेल्दी है आप में शारीरिक बल और मानसिक बल दोनों है तो जो आपके साथ में रह रहे हैं उनके भीतर में भी यह शारीरिक और मानसिक बल संक्रमित होगा बट इफ यू आर सिक एंड वीक दोज अराउंड यू विल हैव द टेंडेंसी टू बिकम द सेम किंतु यदि आप बीमार है यदि आप कमजोर है तो आपके आसपास में रहने वाले लोगों के ऊपर में भी इस बीमारी की असर होगी देखिए जिस घर में लंबी बीमारी चलती है किसी की भी हो तो वह बीमारी से दूसरे लोग अवश्य अफेक्ट होते हैं सबका मूड धीरे-धीरे खराब होता है अभी एक एक बात ध्यान में रखनी है बात सिर्फ यह नहीं है कि यह जो खराब मूड है वह सिर्फ बीमारी से फैलता है अपना मूड और अपना शरीर यह दो अलग है जैसे मैंने यह काली पदो महाराज के बारे में कहा बात वह नहीं है कि वह बीमार नहीं थे 90 इयर्स की उम्र में आपके शरीर में कितने ही प्रॉब्लम होंगे अब तो 40 साल की उम्र में प्रॉब्लम होते हैं तो 90 इयर्स में तो कितने होंगे किंतु मन जो है वो हमेशा प्रसन्न रहता था तो यहां पे जो स्वामी जी कहना चाहते हैं वो बीमारी संक्रमित होती है वो नहीं बीमारी की वजह से जो आपका मूड खराब होता है वह खराब मूड संक्रमित होता है यानी कि एक चीज हमको हमेशा ख्याल रखना है कि हम बीमार हो ना कि सुस्त हो रहना है सदा हास्यम आपको लगेगा कि अरे मुझे यदि यह हो गया है इतना सीरियस बीमारी में कैसे हास्यम रह सकता हूं तो वो हो सकता है प्रैक्टिस करना है मैं इतने अच्छे एक साधक को पहचानता हूं जिनको कैंसर हो गया है किंतु कैंसर होने के बावजूद बार-बार सर्जरी करवाने के बावजूद मैंने उनके चेहरे पर हास्य का अभाव कभी नहीं देखा मैं हमेशा जाकर के उनके साथ में बात करता था क्यों क्योंकि कैंसर तो शरीर को हुआ है ना मन को थोड़ी ना हुआ है शरीर का कैंसर मन में थोड़ी ना आपको संक्रमित करना है यदि हम इन दोनों को सेपरेट करना सीख ले तो ये अपना जो प्रसन्नता है अपने मन की वह प्रसन्नता दूसरों को भी अफेक्ट करेगी और शरीर को भी अफेक्ट करेंगी सटल सूक्ष्म रूप से जिससे कि हमारे शरीर की बीमारी जो है उसका बढ़ावा रुक जाए और ट्रीटमेंट प्रॉपर्ली उसको मिले तो यह मूड जो है अपना मन की जो सुस्त है उसको शरीर की सुस्त के साथ में कनेक्ट नहीं करना है दिस इज द प्रिमिटिव सॉर्ट ऑफ हीलिंग अच्छा जो आदमी स्वस्थ है उसका मन स्वाभाविक रूप से स्वस्थ रहेगा जैसे कि देखिए कि ठाकुर के पास में यह जो लड़के जो जितने भी आते थे सब लोग कुश्ती करते थे ना कि क्या-क्या सब सीखते थे वो तो फिजिकली सब लोग कितने स्ट्रांग थे वो चाहे राजा महाराज हो ना कि शशि महाराज हो ना कि स्वामी जी हो ना कि विज्ञान महाराज हो ना कि फिर ये लाटू महाराज हो सबको देख लीजिए सब लोग फिजिकली इतने स्ट्रांग थे तो फिजिकली स्ट्रांग होने की वजह से मन भी नेचुरली स्ट्रांग रहता था निरंजन महाराज जैसे की तो यह बात है कि शरीर वीक होने से भी आप मन को स्ट्रांग रख सकते हैं किंतु यदि शरीर स्ट्रांग रहेगा तो तो मन अवश्य स्ट्रांग रहना चाहिए जिसका शरीर अच्छा है शरीर सुस्त है किंतु मूड खराब रहता है ऐसे लोगों के बारे में तो कहना ही क्या फिर आखिर में वे लोग जानबूझ कर के अपना भी जीवन खराब करते हैं दूसरों का भी जीवन खराब करेंगे तो सुस्त शरीर लेकर के रहना और उस सुस्त शरीर के साथ में सुस्त मन होना और यह सुस्त मन अपने आसपास रहने वाले लोगों को प्रभावित करें यह हो गया प्रिमिटिव टाइप का हीलिंग अर्थात कि यह प्राइमरी हीलिंग है प्राथमिक कक्षा का हीलिंग है कॉन्शियसली और अनकॉन्शियसली हेल्थ कैन बी ट्रांसमिटेड हम चाहे तो जानबूझ कर के या तो अनजान पने में अपनी हेल्थ दूसरों को ट्रांसमिट कर सकते हैं अ वेरी स्ट्रांग मैन लिविंग विथ अ वीक मैन विल मेक हिम लिटिल स्ट्रांग एक बड़ा ही सबल व्यक्ति है यदि वह किसी कमजोर व्यक्ति के साथ में रहेगा तो कमजोर व्यक्ति को भी थोड़ा बहुत सबल बना पाएगा जैसे कि इसका आध्यात्मिक उदाहरण दे तो वह ठाकुर के साथ में वोह हजरा रहता था तो हाजरा के भीतर में वैसे तो बहुत सारे वो वासना ये थी इच्छाएं थी कि हां उसका देना है जो एक आध लाख का ना कि कितना वो जद उसको कोई मूर्ख मिल जाए भक्त तो उसके पास में से पैसा निकाल कर के वह अपना वो ऋण वो चुका दे तो यह सब वो सब वो मनो वासना लेकर के रहता था किंतु ठाकुर के साथ में रहने की वजह से उसके मन की उन्नति तो हुई थी तो वोह आध्यात्मिक लेवल पर हो गया शारीरिक लेवल पर भी देखिए कि ऐसा होगा ही होगा कि यदि आपका मित्र या तो आपका कोई परिवार जन फिज ली स्ट्रांग है तो उसकी देखादी आपके शरीर में भी थोड़ा सा तो शक्ति आएगा आप उसको ऑब्जर्व करते हैं तो उसकी लाइफ स्टाइल को ऑब्जर्व करते हैं वह किस तरह का खाना खाता है किस तरह का उसका लाइफ स्टाइल है किस तरह की एक्सरसाइज करता है किस तरह का उसका रूटीन है जैसे जिन लोगों में फिजिकल और मेंटल स्ट्रेंथ होती है उनको सब लोग आइडियल मानते हैं और आइडियल को देख कर के सब लोग अपना जीवन अनकॉन्शियसली या कॉन्शियसली उसके अनुसार बनाने का प्रयास करते हैं परिवार में देखेंगे आजकल तो परिवार सब छोटे-छोटे हो गए हैं किंतु पहले जब संयुक्त कुटुंब होते थे तो उसमें वह जो चाचा न की मामा जो भी सबसे वय मतलब जो मेंटली और फिजिकली स्ट्रांग होते हैं तो जितने भी छोटे-छोटे बच्चे हैं सब वो उनके पीछे पीछे दौड़ते रहेंगे मामा मामा काका काका या फिर ऐसा कुछ करके और फिर उनको इमिटेटर का उनकी उनका अनुसरण करने का प्रयास करेंगे यह जो आदर्श होता है हम सभी लोग कॉन्शियसली और अनकॉन्शियसली किसी को अपना आदर्श मान कर के चलते हैं और उस आदर्श को फॉलो करने का प्रयास करते हैं तो यदि इस तरह का आदर्श होता है हमारे सामने तो तो बहुत अच्छी बात है मैं अपने खुद के बचपन की बात बताता हूं जब मैं अपनी मां के घर वो जाता था गांव में वहां पे थे हमारे एक मामा इस तरह से जो कि हमारे बड़े फेवरेट है तो हम लोग उनका अनुसरण करने का प्रयास करते थे भले ही चाहे वह अनुसरण परफेक्ट ना हो किंतु जो थोड़ा बहुत भी किया हमने तो वह भी तो हम उनके जैसा होने का प्रयास की है तो जो जिन लोगों के भीतर में यह जो एक मैग्नेटिज्म होता है एक करिश्मा होता है एक लोगों को अट्रैक्ट करने की शक्ति होती है हम लोग उसको अनुसरण करने का प्रयास करेंगे ही करेंगे आजकल यह फिल्म के हीरो को देख लीजिए यह लड़के लोग वह सब उसकी कॉपी करेंगे वह किस तरह की हेयर स्टाइल रखता है किस तरह के ड्रेस पन ता है यदि पता चला वह जिम में जाता है तो हम भी जिम में जाने का प्रयास करेंगे तो यदि जिसको हम आदर्श मानते हैं जिनको हम नजर के सामने देखते हैं उनको अनुसरण करने का प्रयास करेंगे ही करेंगे अ वेरी स्ट्रांग मैन लिविंग विथ ए वीक मैन विल मेक हिम अ लिटिल स्ट्रांग वेदर ही नोज इट र नॉट और यह तो हो गया कि अ स्ट्रांग व्यक्ति शारीरिक मानसिक सुस्त व्यक्ति अपने साथ में रहे हुए कमजोर व्यक्ति को अपनी सुस्त प्रदान करेगा ही करेगा यह तो दो लेवल पर होता है एक तो जैसे मैंने कहा कि अनुकरण करके वीक जो है या छोटा जो है बड़े को फॉलो करने का प्रयास करता है दूसरा कि यह जो स्ट्रेंथ इट सेल्फ इट कैन बी ट्रांसफर्ड इट कैन बी शिफ्टेड फ्रॉम वन पर्सन टू अनदर व्हेन कॉन्शियसली डन इट बिकम क्विकर एंड बेटर इन इट्स एक्शन यह जो स्वस्थ है शारीरिक या मानसिक उसको हम यदि अब इच्छा से दूसरों के भीतर में संक्रमित करें तो वह इमीडिएट हो जाता है जैसे कि देखिए ठ ठाकुर का जो उदाहरण बड़ा ही फेमस है कि मथुर बाबू की पत्नी थी वह बीमार हो गई अभी बात ऐसी है कि म उसका मृत्यु होने ही वाला था तो मथुर बाबू जाकर के ठाकुर को क्या कहते हैं मथुर बाबू कहते हैं कि देखिए मेरी जद पत्नी की मृत्यु होगी तो एक्चुअली वह जो कालीवाड़ा बू का जो एडमिनिस्ट्रेशन था अधिकार था तो मथुर बाबू तो मालिक नहीं थे कालीवाड़ा रास मणि और रास मणि के मृत्यु के बाद में मालिक का अधिकार जाता था उनकी लड़कियों को तो यदि मथुर बाबू जितने दिन तक उस अपनी पत्नी के साथ में विवाहित है तभी तक कालीवाड़ा तो फिर दूसरी जब लड़कियां है रानी रासमुल बाबू को दूर कर देंगे वहां से तो मथुर बाबू जाकर के ठाकुर को कहते हैं कि मेरी पत्नी का मृत्यु हुआ यदि होगा और कालीवाड़ा तो मुझे उसका दुख नहीं है कि चलो मेरा अधिकार चला गया किंतु इस बात का दुख होगा कि मैं आपकी सेवा नहीं कर पाऊंगा तो ठाकुर ने कहा ठीक है तो ठाकुर ने क्या किया उनकी पत्नी की बीमारी अपने ऊपर में ले ली अपना स्वास्थ्य उनकी पत्नी को दे दिया और उनकी बीमारी अपने पर ले ली ठाकुर ने छ महीने भुगता बहुत किंतु मथुर बाबू की पत्नी बच गई तो देखिए कि जो हेल्थ अपनी दूसरों को देना ठाकुर का तो एक्सट्रीम एग्जांपल है ठाकुर के जितने भी एग्जांपल होते हैं सब एक्सट्रीम होते हैं किंतु कुछ हद तक हम अपनी हेल्थ दूसरों में संक्रमित कर सकते हैं नेक्स्ट कम दोज केसेस इन व अ मैन मे नॉट बी वेरी हेल्दी हिमसेल्फ यट वी नो दैट ही कैन ब्रिंग हेल्थ टू अनदर ऐसे भी केसेस है कि कोई व्यक्ति शायद हो सकता है कि अपने से इतना हेल्दी ना हो किंतु वह अपनी हेल्थ दूसरों को दे सकता है द फर्स्ट मैन इन सच अ केस हैज अ लिटिल मोर कंट्रोल ओवर द प्राणा एंड कैन राउज फॉर द टाइम बीइंग हिस प्राणा एज इट वेर टू ए टेन स्टेट ऑफ वाइब्रेशन एंड ट्रांसमिट इट टू अनदर पर्सन जो व्यक्ति अपने से बहुत अच्छा नहीं है बहुत सुस्त नहीं है वह आदमी दूसरे को कैसे सुस्त दे सकता है तो वह प्राण को कंट्रोल करके उसके भीतर का जो प्राण है व्यक्तिगत प्राण व्यष्टि प्राण उसको वह कंट्रोल करेगा और फिर उस कंट्रोल करके प्राण को दूसरों में संक्रमित करेगा और यह जो कनेक्टिंग ब्रिज क्या है व है समष्टि प्राण व्यष्टि प्राण से समष्टि प्राण को कंट्रोल करो समष्टि प्राण दूसरे व्यक्ति के भीतर में रहे हुए व्यक्तिगत व्यष्टि प्राण को कंट्रोल करेगा तो इस तरह से यदि मेरा प्राण के ऊपर में कंट्रोल है तो मैं खुद बहुत ज्यादा सुस्त ना भी हो मैं दूसरों को सुस्त दे सकता हूं नेक्स्ट कम दोज केसेस इन व्हिच हां द फर्स्ट मैन इन सच ए केस हैज लिटिल मोर कंट्रोल ओवर द प्राणा एंड कैन राउज फॉर द टाइम बीइंग हिज प्राणा एज इट वेर टू ए सर्टेन स्टेट ऑफ वाइब्रेशन देयर हैव बीन केसेस वेयर दिस प्रोसेस हैज बीन कैरिड ऑन एट ए डिस्टेंस बट इन रियलिटी देयर इज नो डिस्टेंस इन द सेंस ऑफ अ ब्रेक ऐसा भी हुआ है ऐसे भी केसेस है कि आप जो व्यक्ति को हील करना चाहते हैं जिस व्यक्ति को आप ठीक करना चाहते हैं वह व्यक्ति आपके सामने नहीं है किंतु और किसी जगह पर रह रहा डिस्टेंट हीलिंग तो यह भी संभव है क्यों क्योंकि प्राण के जगत में कोई डिस्टेंस नहीं है यह जो स्पेस और टाइम जो हम देख रहे हैं यह सिर्फ भौतिक लेवल पर ही है प्राण के लेवल पर स्पेस और टाइम का डिस्टेंस नहीं है तो यदि हम प्राण के लेवल पर चले जाते हैं प्राण के लोक में चले जाते हैं जदिया ऑफ प्राणा देयर वी विल फाइंड दैट देयर आर नो डिस्टेंस वी कैन टच एनी वन प्राणा एज इफ वी आर टचिंग समवन विथ अवर ओन हैंड्स अपने हाथों से जिसको स्पर्श कर सकते हैं ऐसे ही हम अपने प्राण से दूसरे को स्पर्श कर सकते हैं प्राणी के जगत में तो वयर इज द डिस्टेंस दैट हैज अ ब्रेक जहां पे ब्रेक ही नहीं है वहां पे डिस्टेंस क्या इज देर एनी ब्रेक बिटवीन यू एंड द सन इट इज अ कॉश इट इज अ कंटीन्यूअस मास ऑफ मैटर द सन बीइंग वन पार्ट एंड यू अनदर यहां पे इवन भौतिक जगत में भी स्वामी जी कहते हैं कि पदार्थ का जो जगत बना हुआ है यह पूरा जगत आकाश के माध्यम से जुड़ा हुआ है जैसे प्राण का जगत प्राण के माध्यम से जुड़ा हुआ है तो भौतिक जगत आकाश के माध्यम से जुड़ा हुआ है तो कॉन्शियस वर्ल्ड जगत को यदि हम भौतिक और मानसिक इन दो परिस्थिति इन दो जगहों में इन दो जगत में बांटे तो भौतिक जगत आकाश के माध्यम से जुड़ा हुआ है और और जो मानसिक जगत है वह प्राण के माध्यम से जुड़ा हुआ है जो प्राण है वह जैसे कि मान लीजिए बहुत बड़ा समुंदर है इस समुंदर में जैसे कि मेरा मन एक नौका के रूप में सवार है और आपका मन दूसरी नौकाओं के रूप में सवार है तो जैसे कि मोबाइल है मोबाइल फोन किस तरह से वह हम एक मोबाइल से दूसरे मोबाइल के साथ में बात कर सकते हैं क्यों क्योंकि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव की मदद से यह जितने भी मोबाइल है वह मोबाइल नेटवर्क में जुड़े हुए हैं तो जैसे ही वह इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स जो है मोबाइल नेटवर्क को जोड़ कर के रखते हैं मोबाइल को जोड़ कर के रखते हैं वैसे यह आकाश है आकाश रूपी नेटवर्क है वो प्राण रूपी नेटवर्क है जैसे 10 मोबाइल एक एक आराम से एक दूसरे के साथ में बात कर सकते हैं तो वैसे 10 मन भी आराम से एक दूसरों के साथ में कम्युनिकेट कर सकते हैं जैसे कि चांद सितारों के साथ में हम कम्युनिकेट कर सक सकते हैं शारीरिक रूप से यदि आकाश को हम कंट्रोल करना सीख ले प्राण की मदद से तो यह जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स मोबाइल नेटवर्क मोबाइल को कनेक्ट करके रखता है यह प्राणिक नेटवर्क प्राण रूपी नेटवर्क मन को कनेक्ट करके रखता है जैसे ही मैंने उसका नंबर डायल किया अपने मन से तो प्राण नेटवर्क के माध्यम से सीधे उसके मन को जाकर के उसने वोह डायल रिंग वो डायल टोन बजाएगा वो रिंग जाएगी और जदी उसने उसको रिसीव कर लिया तो माइंड टू माइंड कनेक्शन बैठ जाएगा तो मन के द्वारा जो दूसरी जगह पर रहता है अमेरिका में भी शायद कोई रहता हो मान लीजिए यूरोप में कोई रहता हो तो उनको भी हील करना वो असंभव नहीं है इज देर अ ब्रेक बिटवीन वन पार्ट ऑफ ए रिवर एंड अनदर जो नदी के जो दो किनारे है उसमें क्या कोई ब्रेक है उसमें क्या कोई गैप है मान लीजिए कि नदी के भीतर में से हम लोग तो बेलूर मठ में रहे हैं तो हमने यह देखा है कि गंगा में से जहाज जाता है बड़ा सा तो जहाज वो पानी के साथ में टकराता है तो पानी में ये बड़े-बड़े ये वेव्स खड़े होते हैं तो वेव्स जैसे कि बेलूरमठ के किनारे पे जाकर के टकराते हैं तो सामने वाले किनारे पे भी जाकर के टकराएंगे ऐसा नहीं है कि बेलूरमठ का किनारा और सामने वाला किनारा इन दोनों के बीच में गैप है वो नदी जो है वो नदी के माध्यम से दोनों किनारे जो है वो कम्युनिकेशन में है पानी सब जगह पर इक्वली फ्लो होता है तो जद कोई पत्थर डालेगा पानी में तो उसके जो वेव्स फैलेंग तरंग फैले गी तो तरंग बेलूरमठ के किनारे को भी आकर के टकराए गी सामने वाले किनारे को भी जाकर के टकराएंगे देन व्हाई कैन नॉट एनी फोर्स ट्रावेल यदि पानी में तरंगे पसार हो सकती है यदि बेलूर मठ के किनारे पर जाकर के मैंने पत्थर फेंका तो वो तर े सामने के किनारे की ओर जाकर के टकरा सकती है तो मैंने अपने मन में से प्राण का एक तरंग यदि मेरे मन में से प्रवाहित होता है तो आपके मन को क्यों नहीं स्पर्श करेगा देयर इज नो रीजन अगेंस्ट इट ऐसा कोई भी रीजन नहीं है जो कि इस बात को नकार सके केसेस ऑफ हीलिंग फ्रॉम ए डिस्टेंस आर परफेक्टली ट्रू दूर से दूसरों को हमने हील किया हो इस तरह के केस जो होते हैं वो बिल्कुल सही है अभी मुझे तो ऐसा कोई केस अभी खास याद नहीं आ रहा है और जैसे कि हमारा जो एजुकेशन हुआ है ना हम लोग जो किताबें पढ़ते हैं अ जैसे कि एक किताब है मैं नाम बताता हूं ऑटोबायोग्राफी ऑफ ए योगी तो वह योगानंद परमहंस करके एक है तो उन्होंने यह किताब लिखी है तो जब मैं वो पहली पहली बार जब इस क्षेत्र में प्रवेश किया था आध्यात्मिकता के तो ऐसी में बहुत सारी किताबें पढ़ा करता था जिसमें थोड़ा बहुत जादू चमत्कार जैसा हो और एकदम मन को छू लेता हो कहानियां इतनी सुंदर-सुंदर हो कि यहां पे ऐसा कुछ जादू हुआ वहां पे ऐसा कुछ हुआ तो वो क्या है कि हमको बड़ा अच्छा लगता था अच्छा आध्यात्मिक जीवन में ऐसा भी होता है फिर जैसे धीरे-धीरे करके ठाकुर मा स्वामी जी को पढ़ना शुरू किया तो देखेंगे कि ये राजयोग छोड़ कर के इस तरह के चमत्कार य ऐसी बातें कहीं पर नहीं है तो हमारा मन भी क्या है ना सेकुलर हो लगता है हम लोगों को वह जादू चमत्कार वाली बात अच्छी नहीं लगती उसके बाद में यह जो सब रीडिंग होता है वह हमारा धीरे-धीरे करके बंद हो जाता है क्योंकि सभी चीजों में हम लॉजिक और रेशनल खोजने का प्रयास करते हैं स्वामी जी के पत्र है स्वामी जी के लेक्चर फ्रॉम कोलंबो टू अमोडपी शिष्य संवाद है जो भी किताब आप पढ़िए सब कुछ आपको लॉजिक और रीजन के ऊपर में बनी हुई दिख गी यहां तक कि कथामृत भी है तो कथामृत में ठाकुर के दर्शन होते हैं किंतु ठाकुर इस तरह की बातें कभी नहीं करते कि उसको मैंने यहां से वो उसको मैंने ऐसा मैसेज भेजा तो उसको वहां पे ऐसा मैसेज मिला इस तरह की बातें ठाकुर कभी नहीं करते वो है किंतु ठाकुर हिमसेल्फ डिस्कस ठाकुर ये सब चीजों को थोड़ा डिस्कस कर देते हैं तो और मां के जीवन में तो कोई प्रश्न ही नहीं है जादू चमत्कार का ना ही डायरेक्ट डिसाइल के जीवन में ना ही फिर हमारे रंगनाथ आनंद जी महाराज परम पूजनीय रंगनाथ आनंद जी महाराज परम पूजनीय भूतेशानंद जी महाराज जिनको कि हम बाद में पढ़ना शुरू करते हैं यती स्वरानंद जी महाराज का मेडिटेशन एंड स्पिरिचुअल लाइफ है यह सब स्टैंडर्ड किताबें हैं अपने ऑर्डर की देखेंगे कि इस तरह का डिस्कशन कहीं नहीं मिलता है तो फिर हम लोग क्या है कि धीरे-धीरे करके इस तरह के रीडिंग से दूर चले जाते हैं तो यहां पर स्वामी जी बाद में कहेंगे कि यह जो सब फेथ हीलिंग जो है प्राणिक हीलिंग इस सब में बहुत ज्यादा फ्रॉड होते हैं इसीलिए लोग इस सब चीजें खास करके आज के आधुनिक युग में लोग बहुत ही ज्यादा कोशियन हो जाते हैं थोड़ा सा चौकन हो जाते हैं कि अरे भैया जो ये सब हीलिंग की बातें करता है वो आदमी निश्चय फ्रॉड ही होगा अदर वाइज वो अपना खुद का जीवन क्यों नहीं ठीक करता ये जितने भी ज्योतिषी है जितने भी तांत्रिक है वो लोग कहेंगे हम आपको करोड़पति बना देंगे वो बैठा है सड़क के किनारे तो यदि मुझे करोड़पति बनाने की उसकी क्षमता है मेरे दुश्मनों को हानि पहुंचाने की उसमें क्षमता है तो अपना खुद का क्यों कुछ नहीं करता वो अपने खुद को ₹10 देकर के दूसरों को करोड़पति बनाने की बात करता है तो यह देख कर के बिल्कुल हमारे मन में संदेह उपस्थित होता है और होना ही चाहिए तो यहां पे जब स्वामी जी ऐसा कहते हैं कि ऐसे केसेस है जिससे कि प्राणिक हीलिंग डिस्टेंस लॉन्ग डिस्टेंस पे हो सकता है तो हम स्वामी जी की बात यहां पे मान लेते हैं मैंने तो इस तरह का रीडिंग करना काफी समय से बंद कर दिया है इसलिए इस तरह के उदाहरण में नहीं बता पाऊंगा और जो उदाहरण होते भी है उसमें हम कैसे मान ले कि यह फ्रॉड नहीं है कैसे कह दे स्वामी जी ने खुद ने तो कोई उदाहरण इस तरह के दिए नहीं है स्वामी जी ने कुछ कुछ उदाहरण दिए हैं जैसे कि उनकी मां जब स्वामी जी चेन्नई में थे तो पता चला कि उनकी मां म उनका मृत्यु हो गया है अभी यह स्वप्न था कि कैसे भी उनको इस तरह का दिखा तो अभी वह विदेश में जाने वाले हैं कैसे जाएंगे फिर वहां चेन्नई के डिवोटा जो है उनको एक तांत्रिक के पास में ले गए वह एक आदमी था स्मशान में बैठा हुआ था बिल्कुल उसके बिखरे हुए बाल थे और फिर स्लेट के ऊपर में लिख लिख रहा था लिख कर के फिर उसने स्वामी जी को बताया कि नहीं उनकी माता जी ठीक है तो ऐसे ऐसे कुछ कैसे स्वामी जी ने डिस्कस किए है किंतु स्वामी जी के जीवन के अलावा और बिकॉज कि स्वामी जी कह रहे हैं तो हम इसको स्वीकार करते हैं किंतु अदर वाइज इसके अलावा और कोई भी केस स्वीकार करना हमारे लिए मुश्किल होता है तो यहां पे भी इस तरह का कोई उदाहरण मेरे पास में है नहीं फिलहाल और होगा भी दूसरे लोगों का तो 10 बार सोचना पड़ेगा कि यहां पर फ्रॉड तो नहीं हो रहा यह बात सही तो है कि नहीं तो यहां पर स्वामी जी जो कहते हैं वह हम मान लेते हैं उन्होंने कुछ-कुछ केस ऐसे देखे होंगे जो जिसके बारे में उनको विश्वास आया होगा और नहीं विश्वास होने जैसा भी बहुत कुछ है स्वामी जी ने एक बार कहा था ये जो स्पिरिचुअलिज्म है ना इसका डिस्कशन बाद में आएगा इसी टॉपिक के बाद में तो ये स्पिरिचुअलिज्म अर्थात क्या जो मृत लोग जो होते हैं उनकी आत्मा को उनके अभी आत्मा शब्द तो ठीक नहीं है वेदांत की दृष्टि से अंतःकरण कहते हैं कि उ उनका अंतःकरण जो है इधर-उधर भटकता रहता है उनका जीवात्मा इधर-उधर भटकता रहता है तो वह उसको कभी-कभी बुलाते हैं तो उनको समन करके फिर वह जीवात्मा आपको कुछ ना कुछ बताएगा भविष्य के बारे में बताएगा फिर वह जो दूसरी जगह पर क्या हो रहा है दूसरों के मन में क्या हो रहा है यह सब बताएगा तो स्वामी जी कहते हैं कि मेरा एक रिलेटिव है जिसका कि अकाल मृत्यु हुआ है अभी स्वामी जी के कौन से रिलेटिव का काल मृत्यु हुआ है तो उनकी बहन ने सुसाइड किया था तो स्वामी जी कहते नहीं है वो मेरी बहन है किंतु अभी हम लोग अनुमान करके कह सकते हैं तो स्वामी जी कहते हैं कि जिसका इस तरह से मृत्यु हुआ था अकाल मृत्यु वह मेरे पास आकर के कभी-कभी कुछ ना कुछ बताता है कि हां वहां पे दूसरी जगह पे ऐसा हो रहा है वैसा हो रहा है तो स्वामी जी कहते हैं कि मैंने ऐसा पाया है कि वह सब समय सच नहीं बोलता यह जो व्यक्ति है उनकी बहन होगी जो भी होगा वो सब समय सच नहीं बोलता या तो वो झूठ बोलता है या उसको खुद को पता नहीं है तो देखिए कि स्वामी जी के साथ में ऐसा होता था तो स्वामी जी बिल्कुल चौकन हो जाते थी सभी चीजों पर संदेह करके वेरीफाई करके उसको स्वीकार करते थे तो यह जद स्वामी जी ऐसा कहते हैं कि ऐसे केसेस होते हैं जो कि डिस्टेंट हीलिंग कर सकते हैं जो कि ब बिल्कुल ठीक है तो स्वामी जी ने वेरीफाई करके ही यह बात कही होगी द प्राणा कैन बी ट्रांसमिटेड टू ए वेरी ग्रेट डिस्टेंस बट टू वन जेनुइन केस देयर आर हंड्रेड्स ऑफ फ्रॉड यहां पे स्वामी जी कहते हैं कि प्राण सच में कितने ही लंबे डिस्टेंस पर आप इसको प्राणिक हीलिंग कर सकते हैं किंतु उसमें यदि एक सही किस्सा होगा तो हजार झुठ मुठ के केसेस होंगे दिस प्रोसेस ऑफ हीलिंग इज नॉट सो इजी एज इट इज थॉट टू बी ये जो इस तरह से मन के द्वारा दूसरों को हील करने की प्रोसेस है वो इतनी सहज नहीं है जितना कि आप सोच रहे हैं इन द मोस्ट ऑर्डिनरी केसेस ऑफ सच हीलिंग यू विल फाइंड दैट द हीलर सिंपली टेक एडवांटेज ऑफ द नेचुरली हेल्दी स्टेट ऑफ द ह्यूमन बॉडी ज्यादातर जो केसेस होते हैं इस तरह के हील करने के देखेंगे कि जो हीलर जो होता है जो सुस्त करने वाला व्यक्ति जो शरीर की जो स्वाभाविक टेंडेंसी है स्वास्थ्य के प्रति जाने की उसी का फायदा ले लेता है जैसे कि योग सूत्र में एक सूत्र है कि आपके खेत जो होता है खेत के भीतर में आपने कैनल बना दी है अभी कैनल में बारिश की वजह से पानी भर गया है किंतु एक कैनल में ऐसा हुआ कि वहां पर कुछ अंतराय है मिट्टी गिर गई है बीच में तो पानी नहीं बह रहा तो जैसे ही आपने मिट्टी रूपी अंतराय को वहां से हटा दिया मिट्टी पत्थर रूपी अंतराय जो भी होंगे कैनल के जैसे ही आपने उसको हटा लिया वैसे ही पानी बहना शुरू हो जाएगा तो वैसे ही अपना आध्यात्मिक जीवन का है अपने भीतर में जो आत्मन है उसकी सहज उर्ध्व गति है आत्मन अपने को सब समय प्रकाशित करना चाहता है अज्ञान रूपी आवरण है तो फिर आत्मन प्रकाशित नहीं हो पाता है तो ये आध्यात्मिक जगत के लिए जितना ठीक है उतना ही भौतिक जगत के लिए भी यदि आत्मन प्रकाशित होना शुरू हो जाएगा तो शारीरिक मानसिक दोनों तरह की सुस्त हमको प्राप्त होगी तो शरीर का नेचुरल टेंडेंसी ही है उर्ध्व गति अर्थात कि स्वास्थ्य के प्रति जाना यदि इसके बीच के भीतर के जो अंतराय है जो हीलर होता है उसको यदि स्वास्थ्य सिर्फ देना नहीं है उसके जो व्यक्ति बीमार व्यक्ति है उसी के भीतर में तो प्राण है उस प्राण की अभिव्यक्ति के जितने भी अंतराय है उसको हटा दो तो वह स्वास्थ्य ऑटोमेटिक मेनिफेस्ट होगा आध्यात्मिक जगत में आप आत्मन ऑलरेडी प्रकाशमान है अंतराय हटा देने से अविद्या फिर यह अस्मिता वगैरह जो पंच क्लेश है अविद्या अस्मिता राग द्वेष अभिनिवेश यह पंच क्लेश को हटा देने से आत्मन जैसे ऑलरेडी प्रकाशित होगा बादल सूरज तो प्रकाशित हो रहा है अभी किंतु यहां पर तीन-चार दिन से बड़ी जोर से बारिश हो रही है तो सब समय बादल वाला वातावरण है तो जब तक बादल रहेंगे सूरज नहीं दिखाई देगा तो जिसको सूरज को दिखाना है उसको सूरज को नए सूरज को बना कर के उसको प्रकाशित नहीं करना वो तो बड़ी मुश्किल बात है किंतु वोह बादल को जद हटा देगा व्हिच इज रिलेटिवली इजी यदि आकाश में बम वगैरह कुछ फोड़ो उसको विस्फोट करो तो बादल हट जाएंगे टेंपरेरिली तो इस तरह से यदि बादल को हटा दिया जाए तो इमीडिएट सूरज का दर्शन हो जाएगा तो दो तरह से है हीलिंग कोई असंभव जैसी कोई बहुत डिफिकल्ट चीज नहीं है सिर्फ अंतराय को ही हटाना है दूसरा कि यदि मान लेते हैं कि यह बड़ा इजी होगा अंतराय हटाना तो वो इतना इजी भी नहीं है एन एलोपैथ कम्स एंड ट्रीट्स कोलेरा पेशेंट्स एंड गिव्स देम हिज मेडिसिन अभी मान लीजिए कोई कोलेरा का पेशेंट है या तो फिर आजकल की लैंग्वेज में कहेंगे कि कोरोना का पेशेंट है वो यदि डॉक्टर के पास में जाएगा मॉडर्न मेडिसिन जिसके पास में होती है वो आकर के उसको दवाई देगा एलोपा एलोपैथ अर्थात की आज की जो मॉडर्न मेडिसिन जो देता है वह द होम्योपैथ कम्स एंड गिव्स हिज मेडिसिन एंड कर्स परहे पस मोर देन द एलोपैथ डज और किंतु जद यही बीमार व्यक्ति होम्योपैथ के पास में जाएगा और उसकी दवाई लेगा तो हो सकता है कि आज की मॉडर्न मेडिसिन से भी ज्यादा उसकी ठीक सारवान द होम्योपैथ डज नॉट डिस्टर्ब हिज पेशेंट्स ब अलाउ नेचर टू डील विद देम क्यों क्योंकि होम्योपैथ जो होता है वह पेशेंट का जो बैलेंस होता है भीतर में उसका प्राण का उसको डिस्टर्ब नहीं करता उसको नेचुरली हील होने देता है जबकि यह एलोपैथिक दवाई हम जितनी भी लेंगे उसकी साइड इफेक्ट कितनी होती है हम सबको पता है होम्योपैथिक दवाई की साइड इफेक्ट इतनी नहीं होती किंतु यही एक देखिए कि होम्योपैथी कहो ना कि आयुर्वेद कहो आजकल की जो एक खास करके भारत में ऐसी अवस्था है कि हमारा ओरिजिनल थिंकिंग ओरिजिनल रिसर्च एंड डेवलपमेंट नहीं है यह कोई कोई लोग करते हैं किंतु जो लोग करते हैं ना उन लोगों को भी हम लोग बड़े ही संदेह से देखते हैं इसीलिए जब कोरोना होता है तो सभी लोग कोरोना का वैक्सीन लेने के लिए रेडी हो जाते हैं किंतु फिर जो आयुर्वेद वाले हैं होम्योपैथ वाले हैं वे लोग कहेंगे कि हमारे पास में भी दवाई है उसका आप सेवन कर करेंगे तो वह आयु कोरोना की वैक्सीन लेने से कैसे बहुत सारे लोगों को रिएक्शन होता था बुखार होता था कितनी साइड इफेक्ट होती थी वह हमारी दवाई से नहीं होगी किंतु प्रॉब्लम क्या होता है कि मॉडर्न मेडिसिन जो है उसके ऊपर में भरोसा इसलिए है कि उन लोगों की रिसर्च एंड वो जो डेवलपमेंट मेथड है ना वो बड़ी ही साइंटिफिक होती है या तो फिर वे लोग दिखावा करते हैं साइंटिफिक है जबकि हम लोग जो होते हैं होम्योपैथी या आयुर्वेद का प्रैक्टिस करने वाले हम लोग करते क्या क्या है कि वह जो प्रॉपर एक उसका एक यह होना चाहिए टेस्टिंग होना चाहिए फिर टेस्टिंग के जो रिजल्ट है रिजल्ट को प्रॉपर्ली इसको मेडिकल जर्नल में पब्लिश करने चाहिए मेडिकल जर्नल भी दो तरह की होती है एक तो रेफरल जर्नल्स होती है दूसरी वैसी ही जर्नल्स होती है रेफरल जर्नल्स में क्या होता है आपको आर्टिकल देना है तो जो उस क्षेत्र के विद्वान है उस विद्वानों के माध्यम से इस आर्टिकल को पढ़ाया जाता है फिर वह अपना मताम प्रदर्शित करेंगे तब कहीं जाकर के जर्नल में आप दे पाएंगे जबकि दो नंबरी जर्नल जो होती है उसको थोड़ा सा पैसा देकर के वोह जो भी आर्टिकल है सब छाप देंगे तो यह क्या है कि भारत में करप्शन इतना ज्यादा है कि यदि जेनुइन रिसर्च भी होता है ना तो हमको हमेशा यह संदेह रहता है कि अरे भैया यह आदमी जेनुइन है ना कि फ्रॉड है जबकि विदेश से जो भी आता है हम लोग आंख बंद करके ले लेते हैं स्वामी जी हिमसेल्फ इज अ उदाहरण भारत में कितने राजा महाराजाओं ने स्वामी जी को सम्मानित किया है किंतु उन राजा महाराजाओं की बिल बकल इज्जत मिट्टी में मिल गई है क्योंकि उन्होंने ब्रिटिश लोगों के साथ में मिलकर के आजादी की वजह अपनी सत्ता टिकाने में अपना राज सिंहासन टिकाने में ज्यादा समय व्यतीत किया है तो किसी को भी अपने राजाओं पर भरोसा नहीं है अपना राजा कहेगा ब्रिटिश लोगों भी अच्छे हैं और स्वामी जी भी अच्छे हैं अब ऐसा तो फिर आप किसकी उनकी बात कहां पर सुनेंगे किंतु वही ब्रिटिशर खुद जाकर के कहेंगे हम पर राज्य करने वाले कि हां स्वामी जी जो कह रहे हैं जेन्युइन है तब कहीं जाकर के हमको विश्वास होता है तो यहां पे भी साइंस के रूप में यदि देखा जाए तो मॉडर्न मेडिसिन जितना इफेक्टिव है उतना ही आयुर्वेद या होम्योपैथ होगा यदि इसके जो प्रैक्टिशनर है उनके ऊपर में हमको भरोसा बैठे है ये जो भारत में जो सिस्टम है उसमें करप्शन यदि थोड़ा सा कम हो तो द फेथ हीलर कर्स मोर स्टिल बिकॉज ही ब्रिंग्स द स्ट्रेंथ ऑफ हिज माइंड टू बियर एंड राउसेस थ्रू फेथ द डोरम प्राणा ऑफ द पेशेंट अभी होम्योपैथ और आयुर्वेद वाले जितना हील करते हैं जितना क्योर कर सकते हैं उससे कहीं ज्यादा प्राणिक हीलिंग जो करते हैं वे लोग कर पाएंगे क्यों क्योंकि यह लोग पेशेंट के भीतर में जो प्राण का इंबैलेंस ये प्राण का जो बैलेंस है ना इसके बारे में स्वामी जी बाद में बताएंगे कि शरीर में किस तरह से प्राण का बैलेंस बिगड़ जाने से यह सब व्याधि होते हैं तो यह जो प्राण का बैलेंस है उसको फिर से वह रिस्टोर कर पाए यदि ये फ जो फेथ हीलिंग या प्राणिक हीलिंग करते हैं तो शरीर में उसकी ट्रीटमेंट से किसी भी तरह की आड असर नहीं होगी अभी यह बुखार की दवाई ले रहे हैं डॉक्टर ने कहा इस दवाई लेने के बाद में दूध पीना है क्यों क्योंकि दवाई से आपको एसिडिटी होगी यह बड़ी ही गर्म दवाई है तो यहां पे जो प्राणी हीलिंग वहां पे उसका कोई आड असर होने की संभावना नहीं है क्योंकि वह जो ऑलरेडी जो नेचुरल बैलेंस था उसी को यह लोग ठीक करते हैं देयर इज अ मिस्टेक कांस्टेंटली मेड बाय फेथ हीलर्स दे थिंक दैट फेथ डायरेक्टली हिल्स अमन कोई कोई लोग जो फेथ हीलिंग करते हैं जो लोग विश्वास के बहाने विश्वास के आधार पर लोगों को ठीक करते हैं यह लोग कहते हैं कि यह विश्वास के माध्यम से ही आदमी ठीक हो जाएगा जैसे कि ठाकुर कहते हैं ना जे शाला बोले पापी पापी सेही शाला पापी होए जाए अर्थात कि जो साला ये मैं जब जो साला बोलेगा पापी पापी वह साला पापी ही हो जाएगा मैं जब पहली पहली बार बंगोली पढ़ रहा था ना अभी यह मैं पहली बार तो कथामृत पढ़ा था गुजराती में तो गुजराती में क्या है कि कथामृत को बड़ा ही सैनिटाइज करके रख दिया है जहां पर ठाकुर मछली खाते हैं वहां पर उनको संदेश खिला दिया है और जहां पर गाली गलोज करते हैं वह सब शब्दों को हटा दिया है तो ऐसा बड़ा ही सैनिटाइज वर्जन कथामृत का मैंने गुजराती में पढ़ा था फिर जब मैं पहली बार वो बंगाली कथामृत बांगला लैंग्वेज सीखा उस उसके बाद में मुझे अभी भी याद है बिल्कुल पक्का याद है मैं उस समय बेलूर मठ में था पीपीटीसी में प्री प्रोफेशनल ट्रेनिंग सेंटर और शाम का समय था मैंने वोह बंगाली कथामृत खोला और अभी तो बांगला पढ़ना आ गया है तो पहला ही लाइन मैंने पढ़ा और ठाकुर क्या कहते हैं पहली ही लाइन में ज सालारा हरि ना में मत होए नाचते पारे ना श शलादर कखन होबेना जो साले हरि नाम लेकर के मत होकर के नाच नहीं सकते उन सालों का कभी कुछ होने वाला नहीं मैं तो एकदम आघात पहुंच गया मुझे मैंने कहा ठाकुर किस तरह की बातें करते हैं ये साला साला किसको कहते हैं तो यहां में भी ठाकुर की वो सब हैबिट थी वो बोलने की तो यहां पे भी जो लोग जो फेथ हीलिंग करते हैं तो ठाकुर दूसरा भी एक उदाहरण देते हैं कि यदि मैं बीमार हूं मैं बीमार हूं बोलते रहेंगे बीमार ही हो जाएंगे तो यहां पर स्वामी जी कहते हैं कि यह जो फेथ के माध्यम से विश्वास के माध्यम से जो लोग हील करते हैं वह कहते हैं कि विश्वास से ही सब कुछ हो जाएगा किंतु यह बात सही नहीं है फेथ अलोन डज नॉट कवर ऑल द ग्राउंड विश्वास के माध्यम से मात्र सब नहीं होगा विश्वास पूरा ग्राउंड पूरा एरिया कवर नहीं करता देयर आर डिसीसेस वेयर द वर्स्ट सिम्टम्स आर दैट द पेशेंट नेवर थिंक्स दैट ही हैज दैट डिसीज ऐसे जो भयानक डिसीज होते हैं जिसमें कि रोगी को विश्वास है कि मुझे कोई बीमारी हुई ही नहीं है तो पूरा पूरा विश्वास है कि मैं ठीक ही हूं किंतु इस तरह के विश्वास से रोगी ठीक नहीं होता वो और भी ज्यादा बीमार वो और भी ज्यादा उसके साथ में डेंजरस अवस्था होती है दैट ट्रिमेंडस फेथ ऑफ द पेशेंट इज इट सेल्फ वन सिमटम्स एंड यूजुअली इंडिकेट्स दैट ही विल डाई क्विकली कोई कोई रोगी सोचेगा मुझे कुछ भी नहीं है कोई भी दिक्कत नहीं है मेरे साथ में किंतु फिर भी दिक्कत है और यह जो विश्वास होना कि मुझे कुछ नहीं हुआ है यह विश्वास एक बीमारी का एक प्रकाश मात्रा है और यह निशानी है कि व रोगी मर जाएगा इन सच केसेस द प्रिंसिपल दैट फेथ कर्स डज नॉट अप्लाई ऐसे केस में सिर्फ विश्वास अकेला क्यर करता है वह विश्व वोह बात सही नहीं ठाकुर कहते है ना विष नाई विष नाई बोलले मानुष से विष चले जाए माने साप ने आदमी को काटा है तो मुझे नहीं काटा साप ने नहीं काटा सा आपने ऐसा यदि विश्वास होगा तो वह विश्वास के माध्यम से वह विष यानी आपका जहर चला जाएगा स्वामी जी क्या कहते हैं वह यहां पर ऐसे केसेस में सिर्फ विश्वास अकेला काम नहीं करता इसके बाद में भी एक दूसरा फैक्टर है इफ इट वेर फेथ अलोन दैट क्योर्ड दिस पेशेंट आल्सो वुड हैव बीन क्योर्ड माने जो लोग पूरा विश्वास रखते हैं इस तरह की बीमारी होती है कि जिसमें विश्वास ही एक तरह का सिटम है तो यह लोग भी क्योर हो जाता है किंतु यह बात सही नहीं इट इज बाय द प्राणा ट रियल क्यूरिंग कम्स प्राण के माध्यम से से सही सही वो क्यूरिंग होती है सही सही स्वास्थ्य मिलता है द प्योर मैन हु हैज कंट्रोल द प्राणा हैज द पावर ऑफ ब्रिंगिंग इट इनटू अ सर्टेन स्टेट ऑफ वाइब्रेशन व्हिच कैन बी कन्वेट टू अदर्स अराउसिंग इन देम अ सिमिलर वाइब्रेशन जो प्योर व्यक्ति होता है जो शुद्ध आत्मा होता है वह प्राण को इस तरह के वाइब्रेशन लेवल प ले जाएगा और उस वाइब्रेशन को सामने वाले बीमार व्यक्ति में प्रवेश करवाएगा जिससे कि सामने वाला ठीक हो जाए और इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि सिंहवाहिनी की मिट्टी खिला करके मां अपनी मां शारदा लोगों को ठीक करती थी एक बार की बात है कि वहां पर एक लड़के को रखा था मां के घर में कुछ गाय रखी थी जयराम बाटी में तो गाय की रखवाली करने के लिए एक लड़के को रखा था लड़का छोटा ही था तो अभी एक बार उसको एक अपनी उंगली प सांप ने दस लिया तो जैसे ही सांप ने तो वो मॉडर्न मेडिसिन जैसे होता है ना वो डॉक्टर दौड़ता दौड़ता आया वहां पे एक डॉक्टर रहते थे वो वहां पे वो जो दात चिकित्सालय था चेरिटेबल डिस्पेंसरी था किया हुआ था उस समय तो डॉक्टर आए दौड़ते दौड़ते और उसका हाथ पे जो एक वो जैसे कि वह जहर दूसरे अंग में ना चला जाए तो हाथ को बांध देते हैं जिससे कि वह ब्लड सर्कुलेशन उस हाथ में रुक जाए तो ब्लड सर्कुलेशन रुक जाएगा तो जहर भी उसी हाथ उंगली तक ही रुक जाएगा तो उन्होंने उस हाथ को बांधा और फिर जो सर्जिकल प्रोसेस करने का समय वो कर रहे थे आया उसी समय मां आ गई मां ने कहा यह सब मत करो इस लड़के को जाकर के सिंहवाहिनी के मंदिर में ले जाओ फिर इस लड़के को सिंहवाहिनी के मंदिर में ले जाया गया मां ने मिट्टी गिली करके सिंहवाहिनी के मंदिर की पूरे अंग पे उसका लेपन कर दिया इस लड़के के और फिर ऐसा लेपन करके उसको वहीं पर सुला करके रखा बाकी सबको कहा तुम लोग चले जाओ मैं यहां पर बैठती हूं तो फिर मां ने पूरा दिन उस लड़के के साथ में बिताया लड़के को पूरे बदन पे मिट्टी लगाई हुई थी गिली करके और फिर दूसरे दिन देखा कि मिट्टी को जब हटाया गया देखा उसकी उंगली को खोल कर के कि बिल्कुल ठीक हो गया है बिल्कुल सुस्त हो गया है बस वही बात थी कि उंगली पे जहां पर वह डॉक्टर ने वह जो व रस्सी बांध दी थी जिससे कि ब्लड सर्कुलेशन रुक जाए तो वहां के बाद की उंगली टूट कर के गिर गई वह भी नहीं होता यदि उसने ऐसा नहीं किया होता तो यह जो हीलिंग है कि सिंहवाहिनी की मिट्टी से वो ठीक हो हो गया हमको लगता है कि मां के विश्वास ने इसको ठीक कर दिया यहां पर स्वामी जी कहते हैं कि सिर्फ मां की भक्ति या मां का देवी त्व ही कारण भूत नहीं था इसके अलावा भी जो एक्चुअल मैकेनिज्म था वह था प्राण प्राण के माध्यम से मां ने बच्चे को ठीक किया था यह मैकेनिज्म है और किंतु हमको दिखता है विश्वास के रूप में तो यह टॉपिक पूरा यहां पर होता है कल इसी प्राण के बारे में दूसरे भी ट है पावर ओवर पीपल एंड बैलेंस ऑफ प्राणा य जो बैलेंस ऑफ प्राणा बीमारी आती कैसी है तो यह बैलेंस बिगड़ जाता है जब शरीर में तब यह बीमारी आती है तो यह सब हम अभी कल डिस्कस अच्छा कल तो सैटरडे है मंडे को करेंगे डिस्कस आज यही तक ओम शांति शांति शांति हरि ओम तस्त श्री राम कृष्णा अर्पण मस्तु किंतु देखिए कि यह जो मैं स्क्रीन शेयर कर रहा हूं ना वह स्वामी जी का ही लिखा है मेरा नहीं है मैं तो सिर्फ उसको एक्सप्लेन कर रहा हूं इंग्लिश आप देख रहे स्क्रीन के ऊपर में वह पूरा स्वामी जी का है एक भी शब्द मेरा नहीं है उसमें ना ना पररो टेक्स्ट पूरा टेक्स्ट टच है हा हा यह राज्य का जो ना ना ना सिलेक्टिव नहीं सिलेक्टिव नहीं ए इट इज स्वामी जी का मैंने कुछ भी चेंज नहीं की मैंने सिर्फ हेडिंग दिए है बस इतना ही व जो हेडिंग आप देख रहे हैं ना वही मैंने दिए है बाकी स्वामी जी का टेक्स्ट जैसा किताब में है एगजैक्टली वैसा आपको दिख रहा है अनी जद आप इंग्लिश किताब है इंग्लिश किताब अपने साथ में रख कर के फॉलो करेंगे ना तो मैं जैसे जैसे बोल रहा हूं ऐसा ही आपको दिखेगा उसमें एक भी शब्द मैंने चेंज नहीं किया हो सिर्फ मैंने अपने हेडिंग दिए है हां वो टॉपिक मैंने दिए है सिर्फ जिससे क्या होगा कि टॉपिक कंप्लीट हो जाए ना एक दिन में एक टॉपिक तो क्या है कि हमको वह समझने में सुविधा रहे बस इतना ही इट इज पॉसिबल एंड यू कैन लर्न इट आल्सो बट एस स्वामी जी सेज इट इज डिफिकल्ट टू सी दैट हु इज जेनुइन एंड हु इज फ्रॉड सो इफ वी वांट टू लर्न इट वी कैन लर्न इट देयर इज नो हार्म बट माय पर्सनल सजेशन इज बेटर फोकस फ्रॉम ठाकुर म स्वामी जी ऑन द स्पिरिचुअल एस्पेक्ट ऑफ लाइफ वंस अवर स्पिरिचुअल एस्पेक्ट इज टेकन केयर ऑफ देन वी विल सी दैट ऑल अदर एस्पेक्ट वेदर इट मे बी अवर हेल्थ फिजिकल मेंटल ऑल विल बी टेकन केयर ऑफ ऑटोमेटिक अन सो या इट इज पॉसिबल टू हील अदर्स आल्सो बट व्हाई शुड वी गो इन टू दैट व्हाई डोंट वी जस्ट फोकस ऑन ठाकुर्स नेम देन डिपेंड अपऑन ठाकुर यह जो बात है कि हम दूसरों को हील कर सकते हैं मैं कहता हूं कि उसमें जाने की जरूरत ही क्या है ठाकुर पे सब भर दे दो ठाकुर पे बिल्कुल शरणागत हो जाओ यह तो देखिए स्वामी जी हमको यह सब बता रहे हैं तो हम डिस्कस कर रहे हैं नो प्रॉब्लम विद दैट बट नो नीड टू गो इन टू दैट ये सब कैसे है पता है हम लोगों के साथ में देखिए सबसे बड़ा प्रॉब्लम क्या है हम लोगों की उम्र 30 35 40 साल हो जाती है उसके बाद में हम लोग इस फील्ड में आते हैं तो पहले तो अपना कुछ ठीक करें फिर तो हम दूसरों को करने को जाएंगे यदि वो जो हमारी वो जो वैदिक प्रथा थी कि बचपन से बच्चों को पाठशाला में बेचते थे गुरु ग्रह में गुरु के पास में रहकर के योग वेदांत आसन प्राणायाम सीखते थे वे लड़के लोग बड़े होकर के यह सब आयुर्वेद के विद्वान होंगे प्राणायाम के विद्वान होंगे प्राणी हीलिंग करेंगे वगैरह करेंगे हम लोगों का तो प्रॉब्लम है बचपन तो वैसे ही वेस्ट गया जवानी भी वेस्ट गई अभी वह मिडिल एज में जाकर के हमको यह सब थोड़ा सा हुआ है कि नहीं कुछ करना चाहिए तो बेटर है कि फोकस ऑन आध्यात्मिकता ठाकुर का नाम लेकर उनके शरण में रहो किंतु यदि अपने बच्चों को अभी से सिखाना यह सब शुरू करेंगे तो वे लोग बड़े होकर के यह सब क्षेत्र में माहिर हो सकते हैं तो ये हमको दो चीज सीखनी है हमको खुद को यह सब में नहीं जाना ठाकुर माहा स्वामी जी को लेकर रहना है किंतु अपने बच्चों को बचपन से ही योगा प्राणायाम आसन वगैरह सब सिखाते रहना है ठाकुर महा स्वामी जी की कहानियां उनको बताते रहनी है तो वे लोग जब बड़े होंगे देयर विल बी अ न्यू इंडिया वो जो वैदिक भारत फिर से एक नए युग में खड़ा होगा m