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Swami Vivekananda's Teachings ·

Swami Vivekananda National Youth Day : 12 Jan 2023 : English & Hindi

English

सी ऑल थिंक डेट स्वामीजी इस baseekly अन पैतृक प्रॉफिट में पीपल थिंक डेट बिकॉज स्वामी जी इस गिविंग दिस इंस्पिरेशनल लाइफ ऑफ फ्रेमिंग मैसेज ही इस जस्ट अनदर पैतृक इन डी आ लाइक सुभाष चंद्र बोस और आदर्श हुए द फ्रीडम फाइटर्स बट स्वामी विवेकानंद इस अन मच बटोर एंड स्पिरिचुअल ओरिएंटेड फ्रीडम फाइटर ही वो समथिंग लाइक डेट एंड दें ही इंस्पायर्ड एंटीरे इंडिया तू राइज अप एंड बिकम ए सक्सेसफुल नेशन दिस इस अवर जनरल अंडरस्टैंडिंग ऑफ स्वामी विवेकानंद ऑफ इंडिया वेयर ही इवेंट व्हेन ही वास ए परिवार समाधि और श्री रामकृष्ण हिट ट्रेवल्स थ्रोट इंडिया एंड ही सो डेट इंडियन आर सिंक दे बाय दे इन तमस नौ व्हाट इस तमस तमस इस लजीनेस तमस इस इम्मोरलिटी थॉमस इसे इनेबिलिटी तू हैव फेथ इन अवर सेल्फ समथिंग विच सी कॉल coldise दिस लजीनेस ऑल दिस थिंग्स आर कॉल्ड कलेक्टिवली तमस तामसिक स्टेट ऑफ माइंड सो स्वामी जी सो डेट ऑल इंडियन आर सिंकिंग दे आफ्टर दे इन तू डी सो डेट दे शुड बी शुड बी रोज दे शुड बी एवं लाइफ ऑफ फार्मिंग मैसेज दे शुड बी गिवन सेल्फ कॉन्फिडेंस एंड आत्मा श्वेता सो दिस वाज दिस इस ऑलमोस्ट एवरीवन हु कम तू मीत स्वामी विवेकानंद डेट इस दे कम तू रीड स्वामी जी दिस इस देयर इंप्रेशन एंड ही बेसिकली टीचर्स फिलासफी बट सी हैव तू अंडरस्टैंड डेट बिहाइंड स्वामीजी टीचिंग ऑफ atmashradha एंड अल्टीमेटली कर्मयोग डेट इस डी सर्विस ऑफ पुर आगे आई सीन डेट गोद शिवा हिमसेल्फ लीव्स इनसाइड थे सो दिस सर्विस तू पुर एंड दिस आत्मा श्रद्धा बोथ हैव फाउंडेशन ऑन अर्थक्वेक वेदांत दिस इसे डी सीक्रेट डट वेरी फ्यू जनरल रीडर्स जनरल स्टूडेंट्स रेड स्वामी विवेकानंद फॉर इंस्पिरेशन एंड वेयर दे गो देयर गिवन डी स्पीच ऑन स्वामी जस्ट स्पीकिंग सो देयर यंग पीपल कैन गेट सैम बूस्ट इन डी कॉन्फिडेंस इंस्पिरेशनल इंजेक्शन इन स्टूडेंट्स ऑफ हिंदू धर्म सी नो डेट स्वामी श्रद्धा आज वेल आज स्वामी जस्ट टीचिंग्स ऑन कर्म योग डेट इसे डी सेल्फलेस सर्विस तू मैन सिंग शिवा इन डेम दे बोथ आर founddered इन डी फिलासफी ऑफ अथवा दिस इस व्हाट स्वामीजी सेज रिपीटेडली बट सी डोंट गोट फार इन स्वामी vivekanandas लाइफ एंड टीचिंग स्वामी गो डेट सी शुड एंड से इंप पर्सनल हॉट घोड़ी समथिंग दिस इस डी इंग्लिश वर्ड बाय विच सी मिन डेट गोद हिल्स ह्यूमन लाइक ऑल इट इसे बेसिकली अवर गोल्ड सर जनरली लाइक ह्यूमंस बट देयर आंसर ह्यूमन आर्म्स ओनली एंड टुडे अंडरस्टैंड बिल्डिंग ऑफ साइंस सी नो डेट अवर यूनिवर्स इस सो फास्ट एंड थम में भी इंटेलिजेंट लाइफ ऑन आदर प्लैनेट्स अलसो सो सपोज तेरे इस अन वर्ल्ड ऑफ वाटर वाटर वर्ल्ड एंड हिल्स आर क्रिएचर्स लाइक वेल आर लिविंग इन डेट वाटर वर्ल्ड एंड दे हेल्प डेवलपमेंट और ब्यूटीफुल टुवर्ड्स द सोसाइटी कंपैशनेट टुवर्ड्स डी सोसाइटी ऑल दिस करेजियस इन डी फेस ऑफ एमिटी वन एनीमीज कम एट एट अटैकिंग डियर सोसाइटी ही शुड बी एबल तू फाइट विथ कोलाइटिस शुड बी देर इन अन ह्यूमन परफेक्ट मैन और एंड दें इधर इस अन कांसेप्शन ऑफ अन परफेक्ट वुमेन डेट सी इस शुड हैव दिस में इट रेब सो सी टेक दिस आइडिया ऑफ परफेक्शन इन ह्यूमन एंड दें सी imposit अपॉन गोद सी विल यू गेट गोल्ड अलसो हज दिस ह्यूमन फॉर्म गोद अलसो हस दिस हैंड्स एंड लेग्स एंड हेड एंड फूड अलसो इट्स एंड गोद अलसो सी नो डेट देयर आर तू इतिहास ऑफ कोड और विमा से सुप्रीम रियलिटी वैन इस दिस एंथ्रोप anthropomaicin वर्ड डेट इस गोद इन अन ह्यूमन फॉर्म इन दी आदर इस अन गोद इस इंपर्सनल डेट इस सी डू नॉट थिंक डेट दिस इस सैम वैन लाइक अन पर्सन हु हे हैंड्स एंड लेट्स दिस आत्मन और ब्राह्मण आगे इट वाज आईडेंटिफाई इन डी अन ओवर उपनिषद इन ओवर वेदांत डेट मेंस व्हाट इस नो अटरीब्यूट्स बता तो एन माता एन बंधु इस शंकराचार्य निरवाना शतकम इस सो ब्यूटीफुल एक्सप्लेन दिस impersional क्वालिटी ऑफ गोद डेट आई एम नीदर माय फ्रेंड्स आई एम नीदर माय फैमिली डेट इसे आई एम नॉट रिलेटेड तो थे और आई एम नॉट आईडेंटिफाई विथ रिस्पेक्ट आई एम लाइक लाइक शिवा लेटेस्ट शिवा इसे नॉट ह्यूमन लाइक शिवा हु लाइव्स ऑन डी माउंट कैलाश बट दिस आइडिया डीड दिस सुप्रीम एंटी ब्रह्मा डेट गोज बियोंड स्पेस एंड टाइम डेट इस बियोंड बर्थ एंड डेथ डेट इसे बियोंड अन्य फॉर्म ओर कांसेप्शन दिस ब्रह्मांड लाइव्स इन एवरीवन ऑफर्स इन फैक्ट सी आर नॉट समथिंग आदर दें ब्रह्मांड सी आर जस्ट शैडो ऑफ ब्रह्मांड डी वे सी ऑन ए प्रोजेक्टर सी सी डेट प्रोजेक्टर सी कैन ऐड वैन पार्टिकुलर आरआईएल एंड इट विल शो दिस मूवी वैन मूवी इफ सी रिमूव इट रेल एंड ऐड डी रेट इट विल शो अंदर मूवी इन डेट मूवी दे विल बी में कैरक्टर सैम विल बी हीरो सैम विल बी विलन सैम विल बी जोकर्स देयर विल बी फाइट एंड सोंग्स एक्स्ट्रा बट व्हेन सी रिमूव रिश्ते नान ऑफ दिस एक्टर स्क्रीन bikams ब्लैक दें सी ऐड अंदर स्क्रीन विल अगेन शो अंदर मूवी नौ सी नो दिस ह्यूमन लाइफ इस एंटीरे पैनोरमा ऑफ ह्यूमन लाइफ इस लाइक दिस मूवी सी सी ऑन डी स्क्रीन बेसिकली डी स्क्रीन व्हाट एक्जिस्ट इस ओनली दिस प्रोजेक्ट इनसाइड वेस्ट डी वर्ल्ड इस कॉन्सेप्ट्लाइज्ड एंड दिस कॉन्सेप्ट्लाइजेशन ऑफ दी वर्ल्ड डेट इस बिकॉज ऑफ डी माया और वूमेंस से डेट इग्नॉरस नौ हो धीस इग्नरेंस और माया अपर इन डी फर्स्ट प्लेस इस डी क्वेश्चन डेट सी हिंदू नॉट सिख देयर आर में आंसर्स बट डी सर्चिंग फॉर ठोसे आंसर्स इस फुटाइल बिकॉज लम विल लीव इन दिस वर्ल्ड ऑफ माया सी कैन नेवर अंडरस्टैंड डी बिगिनिंग एंड ऑफ दिस anteyer डायनामिक्स ऑफ माया इन ऑर्डर तू अंडरस्टैंड परफेक्टली डेट हो मच अपॉन अस सी हैव तू गो बॉन्ड माया सी हैव तू रिलीज और ट्रू नेचर विच इस ब्रह्मांड ओनली थिंग सी कैन अंडरस्टैंड हो दिस माया कम एंड हो इट इसे एबल तू स्टील ट्रिक स्टील कन्वींस सो में पीपल विद देयर इंडिविजुअल ह्यूमन बीइंग्स विद देयर ऑन फेर विद देयर ऑन कोल्ड आइस विद देयर ऑन एगो स्पेशियल्स विद देयर ऑन स्ट्रगल्स एंड एंबिशियस दिस माया क्रिएट्स ऑल दिस इंडिविजुअल्स डी मोमेंट डी स्क्रीन ऑफ माया इस रिमूव्ड डी मोमेंट रियल फ्रॉम डी प्रोजेक्टर इस रिमूव्ड ओनली ब्राह्मण रीमेंस सी ऑल दिस अपर दिस इंडिविजुअल आई यू आर इंडिविजुअल्स इस एंटीरे वर्ल्ड इन दिस अल्टीमेट सिंगल यूनिटरी रियलिटी विच ब्राह्मण सो दिस इसे डी बेसिक टीचिंग ऑफ वेदांत / विच स्वामी जी बिल्डसिस आइडिया ऑफ कर्म योग एंड atmahita दें दिस आत्मा श्रद्धा एंड कर्म योग डीसेंट बेडरूम ऑफ डी फिलोसॉफिकल फाउंडेशन ऑफ कर्म योग इफ देयर इसे नो अद्वैत अध्ययन कर्म योग विल सिंपली बिकम anchority डेट आई एम गिविंग यू समथिंग यू टेक इट बिकॉज आई लाइक तू गिव यू आर अन बिगर सॉल्यूशन इन माय वेल्थ एंड यू शुड बी थैंकफूल यू शुड बी सब मिस यू इन योर रिसीविंग ऑफ माय आर्म्स दिस स्पेसशिप बिटवीन अन बिगर एंड तू दिस रिलेशनशिप ऑफ अन दाता एंड वेदर लम इसे सी आर इन डी वर्ल्ड ऑफ आई बिलीव इट देयर इसे अन बोट एंड आई विल यू डेट आई एम अन devotic ऑफ दिस कोट ओके

Hindi

अभी हिंदी में भी मैं इसी बात को थोड़ा सा और विस्तृत करके बताता हूं जैसे की हम सबको पता है की आज स्वामी विवेकानंद की जन्मतिथि है इंग्लिश कैलेंडर के अनुसार और जो बंगाली विशुद्ध सिद्धांत पंजिका है उसके अनुसार उनकी तिथि पूजा है 14 तारीख को 14थ ऑफ दिस मंथ सो 29 आज के दिन बहुत सारे स्कूल कॉलेजेस में कार्यक्रम वगैरा होंगे और राजकोट में भी बहुत सारे लड़के आएंगे और कर्म हो इसके पीछे का जो फिलोसॉफिकल फाउंडेशन है दार्शनिक उसका यह जो आधार है उसके बारे में हम थोड़ा सा डिस्कस करते हैं हम सबको पता हम सबको लगता है की जब हम स्वामी जी को पहली बार पढ़ते हैं उन्होंने सिखाया है वो फेथ इन योरसेल्फ इतना अपने आप में आत्मविश्वास रखो की दुनिया भारती कितनी ही विपत्तियां हमारे सर पे क्यों ना जाए हम उसका दृढ़ करके मतलब दृढ़ मैन से उसका सामना करेंगे विथ स्ट्रांग विल पावर हम जितने भी मुसीबत है आपत्ति है यह टेंशन है ये वो स्टूडेंट परीक्षा के हॉल में जाता है पूरा उसका फ्यूचर उसका पूरा कैरियर उसके ऊपर में मतलब डिपेंड करता है की वो एक दो घंटे में किस तरह से वो एग्जामिनेशन देता है पुरी लाइफ का असेसमेंट वो एक-दो घंटे में होता है तो नो डाउट स्टूडेंट्स कितने हैं वो टेंशन मतलब ए जाती है आपके ऊपर में की आपको इतने टाइम पीरियड में ये पार्टिकुलर टास्क डिफिकल्ट टास्क जो है वो आपको कंप्लीट करनी है तो फिर एक प्रेशर ए जाता है फिर वो कंपटीशन भी होता है वो मतलब प्रमोशन के लिए वो वगैरा बहुत कुछ है अपने जगत में वो मुसीबतें वगैरा तो चैलेंज हमको कहना चाहिए मुसीबत की जगह कहना चाहिए चैलेंज क्योंकि वो जो दृढ़ विश्वास वाला आदमी है ठीक है ऑलवेज चैलेंज को अपॉर्चुनिटी में कन्वर्ट कर दे सकता है तो यह चैलेंज होती है हमारे सामने तो एक चैलेंज जिसके सामने हमको किस तरह से हमको फाइट करना चाहिए या तो किस तरह से उसके सामने हमको स्टैंड होना चाहिए किस तरह से हमको एक उसका मतलब उसका सामना करना चाहिए तो उसके लिए स्वामी जी को हम पढ़ते हैं हमको लगता है की आत्मा श्रद्धा के बारे में सिखाया या तो फिर यह जो है की कर्मयोग के बारे में सिखाया अपने मैन को स्वच्छ निर्मल पवित्र करने के लिए हम कर्मयोग करते हैं जिससे की क्या है इसलिए नहीं की मुझे आती है और मैं किसी को भिक्षा देना चाहता हूं किंतु यह है की मतलब मैं देखता हूं की मेरे भीतर में भी जो आत्मन है वो भी उसके भीतर में है तो मतलब क्या है की वो एक हमारा भीतर में एक आत्मन का रिलेशनशिप है रिलेशनशिप बिटवीन आत्मा एंड आत्मा अभी यह तो पता है की आत्म दो नहीं हो सकते ब्राह्मण धोनी हो सकते हैं तो एक ही है अर्थात उसके भीतर में भी जो है सत्ता वो मेरे भीतर में भी है तो ये जो है की कर्म योग और फिर ये आत्मा श्रद्धा यह दोनों का जो फाउंडेशन है वो है ये अद्भुत वेदांत और यदि हम अद्वैत वेदांत को नहीं समझते हैं तो हम क्या होगा पता ये जो आत्मविश्वास वाली बात है ना वो सिंपली इट विल जेनरेट इन जस्ट मोटिवेशनल स्पीकिंग आजकल के बहुत सारे मोटिवेशनल स्पीकर होते हैं कहते हैं की आपको सेल्फ कॉन्फिडेंस डिवेलप करना चाहिए आपको ही लोग क्वेश्चंस स्किल्स सब डिवेलप करनी चाहिए आपको ये स्किल मतलब वो जो है की प्रेजेंटेशन पब्लिक स्पीकिंग स्किल्स डिवेलप करनी और इसके लिए कोशिश भी होते हैं वह आपको फोर्स करते हैं की आपके भीतर का सेल्फ कॉन्फिडेंस जो है उसको आप रिलाइज कीजिए उसको आप मेनिफेस्ट कीजिए और यह जो दूसरों को हेल्प करने की बात है वो एक चैरिटी में बदल करके रह जाती है आपको लगता है की ये करीब आदमी है तो चलो उसको भिक्षा दे दी तो उसको भी वो मेरे को बड़ा थैंकफूल रहेगा और मेरे मैन में लगेगा अरे मैं तो कितना बड़ा दानवीर हूं तो ये यदि उसके पीछे का ये जो अद्वैत भाव जो है ये जो atmavigyan जो है आत्मा ज्ञान का विज्ञान स्वामी जी के टीचिंग्स के पीछे में वो नहीं समझेंगे तो इस तरह से यह जो आत्मा श्रद्धा जो है और ये जो कर्मयोग है वो उसका हमको एक उसके बारे में एक कंफ्यूज उसके बारे में एक मिसगाइड एक आइडिया होगा हमारे मैन में तो ये आत्मा विज्ञान क्या है यह आत्मज्ञान क्या है की यह जो पूरा जो ब्रह्मांड है विश्व ब्रह्मांड यह जो एक ब्राह्मण जो है उसके मैन की एक परी अपना मात्रा है अभी यह शब्द जो है वो शब्द के ऊपर में मत जाइए और यह विज्ञान के आधारित मतलब वेदांत में इस तरह के शब्द प्रयोग नहीं किए जाते हैं वेदांत उपनिषद में तो कहा गया है की नेति नेति में ये भी नहीं हूं यह भी नहीं हूं कल्पना भी नहीं हूं मैन भी नहीं हूं जगत भी नहीं हूं जो कुछ भी आप जिसके ऊपर में भी आप अपनी नजर डालते हैं ये मैन बुद्धि चित अहंकार पंच महाभूत पंचगनी मात्रा यह जो माया जो है समस्त यह जो प्रकृति जिसको हम बोलते हैं जिसके ऊपर में भी आप नजर डालते वो मैं नहीं यह जो मेरी वाणी है की जो मैं जिसको मैं श्रवण कर रहा हूं यह जो दृश्य है जिसको की मैं देख रहा हूं यह जो और अन्ना है जिसको मैं ग्रहण कर रहा हूं यह सब कुछ जो है वह ब्राह्मण नहीं है अर्थात यह सब हमको दिखते हैं की वो है किंतु उसका कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं है जैसे की प्रोजेक्टर है प्रोजेक्टर में आप विभिन्न रेल डालेंगे तो क्या होगा की आपको अलग-अलग तरह के मूवी दिखाई देंगे अभी एक रेल डाला तो एक मूवी देखा उसमें एक पार्टिकुलर हीरो एक विलन है एक जोकर भी होगा शायद कुछ पार्टिकुलर टाइप्स के कैरक्टर होते हैं रेल बदल दिया तो कैरेक्टर्स भी बदल गए तो इस तरह से देखिए की आप जितने भी चाहे रेल डालते जाएंगे कितने ही चाहे कैरेक्टर्स आपके स्क्रीन के ऊपर में दिखते रहेंगे उनकी कितनी ही स्ट्रगल्स दिखेगी उनकी कितनी ही फाइट दिखेगी सब कुछ दिखेगा किंतु जिस दिन हमने रेल निकल दिया तो वह जो स्क्रीन है वो ब्लैक हो जाएगा सिर्फ प्रोजेक्टर रहेगा जिसके भीतर में ये रेल डालकर के ये सब जो है मूवी दिखती है तो यह जो विश्व ब्रह्मांड भी वैसे ही है ये जो ब्राह्मण जो है उसके भीतर में ये परिकल्पना होती है की हान एक को हम बदलती ये जो अपने अपने शास्त्र में कहा गया है की मैं एक हूं मुझे एक से ज्यादा होने की इच्छा हुई है तो अभी यह सब जो है शब्दों में समझाना यह सब जो है वो एक्चुअल वेदांत का पार्ट नहीं है ब्राह्मण की तो कोई इच्छा ही नहीं होती है तो वो ऐसे कैसे सोचेगा की एक हम बहुत बदलती आ बहुदा भगवती ने सॉरी तो मैं एक हूं मैं बहुत ज्यादा होगा एक से ज्यादा होगा ये सब कैसे ब्राह्मण के मैन में कल्पना कैसे ए सकते हैं इच्छा कैसे ए सकती है तो नहीं होती है हमारी वाणी की कुछ simittaen हैं लिमिटेशंस है इस लिमिटेशन के भीतर में रहकर के हमको ये जो वायु के परे हैं उसको डिस्क्राइब करना है तो नेचरली एक ये जो डिस्क्रिप्शन है वह कंप्लीट नहीं होगा वो डिस्क्रिप्शन है वो पोएटिक होगा एक कविता मैं एक डिस्क्रिप्शन रहता है जैसे की एक समुद्र है समुद्र में बहुत सारे यह जो है यह जो लहरों हैं पानी की लहरों हैं वह उछाल है तो नेचरली उन्हें ब्राह्मण तो समुद्र नहीं है और यह जो माया है या तो पशु पक्षी जीव जगत मनुष्य ये जो जो इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन मीटर एनर्जी फोर्स टाइम ये सब तो कोई समुद्र की तरंगे नहीं है किंतु हमारी वाणी की जो लिमिटेशन है उसके भीतर में रहकर के हम ब्राह्मण और माया को इस तरह से डिस्क्राइब करते हैं की ब्रह्मा ने एक समुद्र है और समुद्र की सत्ता पे बहुत सारी लहरों उठाती रहती है वैसा ही ये जो एक निष्क्रिय कर्म जिसका की आदि नहीं है जिसका अंत नहीं है जिसमें किसी भी तरह का कार्य प्रवृत्ति नहीं है जिसमें ना ही तमाशा है जिसमें ना ही मैन बुद्धि चित अहंकार है इस तरह से एक ब्राह्मण है जिसके सरफेस में या तो जिसके आसपास में यह माया का जो खेल है वह अनंत कल तक चलता रहता है अनंत कल तक मतलब समय के अनंत भी नहीं का सकते अनंत तो जो समय के भीतर में होता है उसको आप अनंत कहते हैं जो समय के परे हैं उसको आप अनंत भी नहीं का सकते उसको कुछ भी नहीं का सकते क्योंकि हमारी जो वाणी है ये जो समय कल ये जो स्पेस टाइम ये जो हमारे रिलेशन शिप है उसी के ऊपर में बेच करके तो हमारी ये वाणी की रचना हुई है तो इसीलिए ठाकुर जब विद्यासागर को कहते हैं की जगत में सब कुछ एटा मतलब झूठा हो गया है किंतु ब्राह्मण झूठा नहीं हुआ अर्थात क्या की अपने हमने अपने मुंह से दर्शन शास्त्र के जितने भी इतिहास विचार से जितने भी ईश्वर देवी देवता है हमने अपनी वाणी से उन सब की स्तुति की है अपनी वाणी से उन सब की वर्ण की है अपनी चढ़ा से लगा तो झूठा तो हो ही गया किंतु ब्राह्मण झूठा नहीं हुआ है क्यों क्योंकि वाणी से jhikva से ब्राह्मण की कल्पना ब्राह्मण की समझ अब नहीं का सकते इसलिए ब्राह्मण झूठा नहीं हुआ है तो ईश्वर चंद्र विद्यासागर सुनकर के बड़े खुश हो गए द अरे वह चलो आज तो एक मुझे बिल्कुल ही नई चीज सीखने को मिली इतने सारे वेद उपनिषद पढ़ लिए हैं वेद उपनिषद में नेति नेति लिखा भी है किंतु फिर भी हमको जस्ट इस तरह से कोई ड्रैमेटिक कोई एग्जांपल नहीं मिलता हम उसकी धरना नहीं कर पाते तो नेति नेति भी तो वाणी के भीतर है तो फिर वो जो वाणी को जब विराम मिलेगा तब ब्राह्मण की यह जो परिकल्पना है वो शुरू होगी तो किंतु यह सब हम पढ़ते हैं किंतु फिर भी हमको लगता है की मैं सही-सही सोचने को जाऊंगा तो ब्राह्मण कैसा होगा तो सब समय हमको एक जिसको कहते हैं की पैराडॉक्स इंग्लिश में शब्द है पैराडॉक्स अर्थात विरोधाभासी विचार मैं कहता हूं की ब्राह्मण वाणी के परे है किंतु इसी वाणी से मैं उसी ब्राह्मण उसकी मैं उसका एक चित्रा अंकित करता हूं जो कहता हूं की मेरी कल्पना से परे है किंतु इसी kalpanashe में उसे kalpanatit ब्राह्मण को समझने का प्रयत्न करता हूं| तो क्या होता है जब कल्पना टीथ जो सत्ता है उसको अपनी कल्पना के राज्य में उतारा जाए तो ये जो अवतरण है उसको हम अवतार या तो ईश्वर भगवान शिव भगवान विष्णु ऐसा करके बुलाता है की जिसका की कोई स्वरूप ही नहीं है उसको हम कल्पना करने के लिए एक स्वरूप दे देते हैं तो जैसे की एक पुरुष का स्वरूप देती है भगवान विष्णु को स्त्री का स्वरूप दे दिया मैन पार्वती मैन लक्ष्मी मैन दुर्गा को तो इसी तरह से जो कल्पना टीथ है उसको कल्पना में उतारने के लिए हमको athvahit को अद्वैत करना पड़ता है क्यों क्योंकि मैं जिसकी कल्पना करता हूं वो एक सत्ता है कल्पना करने वाला अर्थात में मेरी दूसरी सत्ता है कल्पना की जो प्रक्रिया है वो तीसरा ही और कुछ है तो जो एक नहीं है वो है ध्वज तो ये तोड़ के राज्य में आकर के जो है हम ईश्वर के बारे में सोचते हैं तो जब हम ईश्वर की धरना करके स्वामी जी का ये जो आत्मविश्वास आत्मा श्रद्धा या तो फिर ये कर्मयोग का जो विचार है उनका कर्मयोग की जो उनका उपदेश है ये dhwahit के राज्य में आकर के यदि हम उसका आकलन करने को जाएंगे यदि हम उसको समझने को जाएंगे तो क्या होगा कन्फ्यूजन होने की संभावना है क्योंकि dhvahit अर्थात दो एक ईश्वर है एक मैं हूं अभी मैं ईश्वर से अलग हूं तो यह जो जितने भी पुरुष स्त्री वगैरा जगत में है वह सब हम एक दूसरे से भिन्न है एक गरीब है एक अमीर है एक जो है अनफॉर्च्युनाते है एक फॉर्चूनर है तो जिसके पास में जो थोड़ा बहुत फॉर्च्यून है जिसको की इस तुमने सफलता की रह दिखाई है वह आदमी जो निष्फल आदमी है उसके ऊपर में दया करके अनुग्रह करके उसको कुछ देगा तो ये जो डाटा और डैन और ये जो डैन स्वीकार करता है ये जो रिलेशनशिप है ये पूरा साहित्य के अंदर में है और रोहित की दृष्टि से हम ये जो मैं किसी को कुछ दे रहा हूं और वो ग्रहण कर रहा है ये यदि रिलेशन ये इस तरह से यदि हम कर्मयोग को देखेंगे तो वो स्वामी जी का कर्मयोग नहीं हुआ ये जो जैसे वैष्णव शास्त्र में है की हमको किसी दूसरे इंसान के ऊपर में दया करनी चाहिए क्योंकि ऐसा करने से भगवान विष्णु जो है भगवान कृष्ण जो है हम पर प्रसन्न होते हैं ये जो वेद होप चैरिटी ये जो क्रिश्चियन शास्त्र में जो लिखा गया है या तो फिर जो जीव दया ये जो टीचिंग है विष्णु शास्त्र में तो यह सब के पीछे का आधार यही है ध्वनि तो कॉन्सेप्ट ऑफ कोड ईश्वर को हमसे अलग देखना और अपने जितने भी मनुष्य हैं उन सबको भी अपने से अलग देखना अपने से अलग देखकर के हम उनके ऊपर दया करते हैं किंतु यदि अद्वैत से यदि देखा जाए तो भले कल्पना के परे हैं किंतु फिर भी यदि एक कल्पना की जाए तो हमको लगेगा की वो भी ब्राह्मण है मैं भी ब्राह्मण हूं मैं यदि उसको देता हूं कुछ तो मेरी ही chittushti होती है और इस शुद्ध चित्रा से मैं ईश्वर में ये जो है माया का ये जो फंदा है माया का ये जो स्क्रीन है पर्दा है उसको काट करके मैं अपने जो अपना असली ब्रह्मा स्वरूप है उसमें ठीक हो जा सकता हूं तो स्वामी जी का जो इतिहास कर्मयोग और atmavishwatah उसके पीछे का जो बेसिक कॉन्सेप्ट है वो है अद्वैत नहीं की दवाई द्वैध की दृष्टि से हम अलग देखते हैं साधन पढ़ती को और अद्भुत की दृष्टि से हम अलग हैं आज तक कल फिर से मिलेंगे समय बालोतरा ओम तत्सत श्री राम कृष्ण