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ओ स्थापक च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णा यते नमः स्वामी विवेकानंद का ज्ञान योग जिस अध्याय का पाठ कर रहे हैं कॉस्मो माइक्रो कजम कॉस्मस मैक्रो कजम हमने देख लिया माइक्रो कजम देख रहे हैं मैक्रो कजम में ईश्वर है इसका एक वैज्ञानिक तरीके से प्रूफ स्वामी जी ने दिया है या तो फिर देने का प्रयास किया है और यहां पर कॉस्मो माइक्रो कजम यहां पर आत्मन का अस्तित्व है कि नहीं इसके बारे में स्वामी जी साइंटिफिकली आर्गुमेंट देकर के प्रूव करने का प्रयास करते हैं साइंटिफिक आर्गुमेंट नहीं करके मैं कहूंगा कि साइंस की आर्गुमेंट जिस लॉजिक के आधार पर चलती है उसी तरह का लॉजिक स्वामी जी यहां पर अप्लाई करने का प्रयास करते हैं ऑफकोर्स साइंस के साथ में वेदांत का वैसे डायरेक्ट कोई रिलेशन नहीं होना चाहिए क्योंकि साइंस डील्स विद द मटेरियल वर्ल्ड यह जो भौतिक जगत है उसके साथ में विज्ञान का वास्ता है और वेदांत का वास्ता है या तो फिर वेदांत डिस्क्राइब करता है अवर इंटरनल वर्ल्ड तो यह आत्मन का जगत आध्यात्मिक जगत वह एक है और यह भौतिक जगत या तो फिर यह पदार्थ का जगत वह एक अलग है तो दोनों के बीच में हालांकि ऑफकोर्स कनेक्शन है ह्यूमन बॉडी ही तो कनेक्शन है हमारे भी भीतर में आत्मन और यह भौतिक जगत और यह आध्यात्मिक जगत इन दोनों के बीच में जो लिंक है वह है ह्यूमन बॉडी तो यह ह्यूमन बॉडी इज अ सॉर्ट ऑफ ए कॉस्मस किंतु ऑन ए माइक्रो कॉस्मिक माइक्रोस्कोपिक लेवल तो अभी स्वामी जी जो आर्गुमेंट दे रहे थे एक के बाद एक उसमें एक प्रश्न यह आया आत्मन के अस्तित्व के अगेंस्ट में स्वामी जी कहते हैं कि लेट अस एंटरटेन देयर ऑब्जेक्शंस तो फर्स्ट ऑब्जेक्शन आया कि क्या पुनर्जन्म यदि आप कहते हैं कि आत्मन जो कि समय और अवकाश से परे हैं और यह देह है जो कि बार-बार जन्म मृत्यु जरा व्याधि की यह जो चक्र से या तो फिर यह संसार चक्र से पसार होता है और यदि आप यह कहेंगे कि एक अंतःकरण है मन बुद्धि चित्त और अहंकार का बना हुआ जो कि हमारे संस्कार एक जन्म से दूसरे जन्म तक वहन करते हैं तो फिर आप यह बताइए कि हमको हमारे पूर्व जन्म की कोई भी बात याद क्यों नहीं है तो इसके अगेंस्ट में स्वामी जी क्या कहते हैं दो चीज सर्वप्रथम तो जो ब्रेन डिस्ट्रक्ट हो गया वह देह दे था हमारे पूर्व जन्म का देह वह तो भस्मी भूत हो गया चीता में जल गया तो उसके साथ में हमारा ब्रेन भी चला गया हमारी मेमोरीज भी चली गई तो वह सब एज इट इज तो हमको याद नहीं आएगा एक चीज दूसरा कहते हैं स्वामी जी कि क्या ऐसा जरूरी है कि भूतकाल का सब कुछ याद रहे क्योंकि हमारे बचपन की कई बातें ऐसी है जो कि हमको याद नहीं है तो फिर अरे बचपन की तो छोड़ ही दीजिए पिछले सप्ताह की कितनी सारी बातें हैं हम लोग भूल हम लोगों को याद क्या रहता है वही याद रहता है जो कि इन सब चीजों का एक्यूमर संस्कार है अभी आज मेरा किसी के साथ में बहुत अच्छा फ्रेंडशिप है तो यह फ्रेंडशिप या तो फिर ये अच्छे संबंध के संस्कार मेरे मन में बने हुए हैं अभी ऐसा नहीं है कि जिस व्यक्ति के साथ में मेरे अच्छे संबंध है उसके साथ-साथ में जितने भी मेरे इंटरेक्शन हुए जितने भी वार्तालाप हुए जिन वार्तालाप की सहाय से आखिर में जिस वार्तालाप के आधार पर आखिर में मेरे मन में यह संस्कार दृढ़ हुआ कि ना इसके साथ में फ्रेंडशिप है मेरा तो फ्रेंडशिप का संस्कार रह गया जितने भी वार्तालाप हुए थे पिछले 1015 साल में क्या मुझे उसमें से कोई भी याद होगा कुछ भी याद नहीं होगा तो ये हमारे माताजी पिताजी के साथ में हमारा कितना श्रद्धापूर्वक किंतु हमको याद है जितने भी बातें माताजी या पिताजी के साथ में हमारी हुई सब तो चली जाएगी वो इतिहास के गर्भ में सब कुछ विलीन हो जाएगा रहेगा सिर्फ एक इमोशनल अटैचमेंट एक संस्कार के रूप में वह बंद करके रह जाएगा यह आज साइकोलॉजी में वह कहते हैं ना कि यह प्रिजनर्स को पनिश नहीं करना चाहिए रिफॉर्म करना चाहिए माने ऐसा नहीं है कि पनिश ना करें पनिश तो करेंगे ही किंतु साथ-साथ में उनको रिफॉर्म करने के बारे में लोग जोर देते हैं क्यों क्योंकि ऐसा तो नहीं है कि कोई बचपन से क्रिमिनल होकर के जन्मता है मने हो सकता है पूर्व जन्म के कुछ संस्कार होंगे किंतु बहुत सारी चीजें ऐसी होती है कि बचपन में ही उसके साथ में एक के बाद एक ऐसी ट्रेजेडी होती जाती है कि आखिर में वह उसका एक नेगेटिव जो उसका इमोशंस है वो बड़ा ही दृढ़ हो जाता है तो यह साइकोलॉजी में क्या करते हैं पता है काउंसलिंग करते हैं काउंसलिंग में कैसा होता है जैसे हम लोग यहां पे मेडिटेशन में कहते हैं ना कि जब आखिरी जन्म हो है तब एक के बाद एक पिछली सभी स्मृतियां हमारी नजर के सामने से चलती जाएगी और उन स्मृतियों ने उन इंटरेक्शंस ने या तो फिर उन घटना ने हमारे मन पे जो छाप छोड़ी है जो संस्कार छोड़े जो इंप्रेशन बनाए हैं वोह कटते जाएंगे माने स्मृति और संस्कार या तो फिर घटना चक्र और उसकी इंप्रेशन यह दो चीजें होती है तो यदि साइकोलॉजी में क्या कहता है किसी को रिफॉर्म करना है किसी की बैड हैबिट छुड़वा नहीं है तो वह सभी घटना को उसको प्रोमट करो उसको धीरे-धीरे करके पूछो अच्छा तुम जब छोटे थे तो तुम्हारे साथ में क्या हुआ था तुम जब तुमको कहां तक याद है तुम फर्स्ट स्टैंडर्ड में थे वह बात तुमको याद है सेकंड स्टैंडर्ड में थे वह क्या तुमको याद है थर्ड में क्या हुआ तुम्हारे मित्र कौन थे मित्र के साथ में तुम कहां जाते थे ऐसा धीरे-धीरे स्टेप बाय स्टेप साइक प्रिस्ट क्या करेगा उसके मन के जो पूर्वज जो स्मृति है वह सब इसको एक के बाद एक याद करवाएगा जहां पर वह नेगेटिव स्मृति खड़ी होती है कि हां बचपन में उसके साथ में अन्याय हुआ था या तो फिर बचपन में वो जो चाइल्ड एब्यूज जिसको कहते हैं ना बच्चों का शोषण करना ऐसा कुछ हुआ था तो वह स्मृति जैसे उसके मन में आएगी उसके साथ में जो स्ट्रांग नेगेटिव इमोशन जुड़ी होगी तो साइकेट्रिस्ट धीरे-धीरे करके उसको वह स्मृति उसको प्रॉपर्ली एनालाइज करके प्रॉपर्ली उसके साथ में डील करना सिखाता है वह जब उसके साथ में समझ लेगा उसके साथ में वह अपना एक समाधान की स्थिति में आ जाएगा तब वह नेगेटिव संस्कार टूटने उसके शुरू हो जाएंगे तो यहां पर भी स्वामी जी कहते हैं कि ऐसा नोट नेसेसरी कि हमको सभी बातें याद हो बस यह है कि जो जो घटनाएं हुई है उन घटनाओं के संस्कार हमारे मन पर रह गए हैं बात यही है कि साधना के थ्रू जब संस्कार को काटेंगे तो पूरा पुरानी बातें ऑटोमेटिक याद आ जाएगी इसके बारे में स्वामी जी यहां पर कहेंगे नेक्स्ट स्टेज में कि किस स्टेजेस में वह पुरानी बातें याद आती है तो वो एक ऑब्जेक्शन स्वामी जी ने उड़ा दिया कि पुरानी बातें हमको क्यों ये नहीं याद आ रही है तो इस कारण से उसके बाद में स्वामी जी कहते हैं कि देखिए कि जिस तरह से ये आज के पहले की पुरानी सुपरस्टिशन होती थी ना कि किसी धर्म गुरु ने ऐसा कह लिया तो हम मान लेते हैं या किसी जिसके ऊपर में मुझे विश्वास है वो जो कहते हैं वो मैं मान लेता हूं या किसी धर्म ग्रंथ में लिखा है तो मैं मान लेता हूं स्वामी जी कहते हैं कि अच्छा चलो आज के जमाने में तुम लोग यह पुरानी अंधश्रद्धा हों से मुक्त हो गए हो किंतु आज के नए जमाने की जो नई अंधश्रद्धा एं हैं आज के हक्सली है ना कि टिंडल है ना कि ये जो उस समय के साइंटिस्ट तो वे लोग जो कहते हैं तुम लोग आंख बंद करके स्वीकार कर लेते हो तुम्हारे पास में क्या प्रूफ है कि ये लोग जो कहते हैं सही है कि गलत है हालांकि हमको पता है प्रूफ चारों ओर दिख रहा है साइंस और टेक्नोलॉजी का जो डेवलपमेंट हो रहा है किंतु फिर भी स्वामी जी फिर भी कि बहुत सारी बातें ऐसी होती है साइंटिस्ट लोगों की जो बिल्कुल ही उटपटांग होती है तो उनकी अच्छी-अच्छी बातों को स्वीकार करने के साथ-साथ में उटपटांग भी स्वीकार कर लेते हैं हम कभी-कभी तो वह पुरानी सुपरस्टिशन थी यह नई सुपरस्टिशन है तो इतने पॉइंट देकर के स्वामी जी इस बात को काटते हैं कि क्यों मुझे पूर्व जन्म की बातें याद नहीं रहती इसके बाद में हम आगे पढ़ते हैं स्वामी जी क्या कहते हैं सो वी सी दैट दिस ऑब्जेक्शन एस टू मेमोरी इज नॉट वैलिड तो हमने देखा कि मुझे पुरानी बात याद नहीं रहती यह ऑब्जेक्शन वैलिड नहीं है पूर्व जन्म के संबंध में एंड दैट इज अबाउट द ओनली सीरियस ऑब्जेक्शन दैट इज रेज्ड अगेंस्ट दिस थिरी पूर्व जन्म की जो थिरी है उसके अगेंस्ट में यही एक सीरियस ऑब्जेक्शन है कि मुझे वह पूर्व जन्म की यादें क्यों नहीं है और एक बार हमने इस ऑब्जेक्शन को काट दिया तो सीरियस ऑब्जेक्शन था पूर्व जन्म के अगेंस्ट में वह कट गया अच्छा बाद में क्या कहते हैं लद वी हैव सीन दैट इट इज नॉट नेसेसरी फॉर द थिरी दैट देयर शल बी द मेमोरी ऑफ पास्ट लाइव्स यट एट द सेम टाइम वी आर इन अ पोजीशन टू असर्ट दैट देयर आर इंस्टेंसस व्हिच शो दैट दिस मेमरी डज कम एंड दैट ईच वन ऑफ अस विल गेट बैक दिस मेमोरी इन द लाइफ इन ट लाइफ इन चच ही विल बिकम फ्री स्वामी जी क्या कहते हैं कि हालांकि यह आवश्यक नहीं है कि हमको पूर्व जन्म की सभी बातें याद हो किंतु साथ-साथ में यह भी बात सही है कि हमारा जो आखिरी जन्म होगा जिस जन्म में हमको मुक्ति मिलने वाली है उस जन्म में हमारी पुरानी सभी याददाश्त पुराने जीवन की पुराने जन्म की सभी घटनाएं हमारे मन में फिर से प्रकट होगी अच्छा यह वही साइकोलॉजी हो गई कि आजकल जिस तरह से जैसे मैंने कहा कि हमारे मन में मैं मेरे एक मैं एक किसी को पहचानता हूं उनको क्या है पता है व्हीकल में बैठने का डर लगता है तो अभी पता नहीं कि व्हीकल में बैठने से क्यों डर लगता है हो सकता है कि बचपन में ऐसा कुछ हुआ होगा कि ऐसा कुछ शायद एक्सीडेंट हुआ होगा वो वो खुद भूल गए थे यह सज्जन खुद भूल गए थे कि मुझे क्यों ऐसा लग हुआ है अब साइकेट्रिस्ट को जभी भी बताएंगे साइकेट्रिस्ट क्या करेगा धीरे-धीरे करके पहले की सभी बातें याद करवाएगा कि अच्छा आपने पहली बार व्हीकल में कब बैठे थे आपको क्या याद है अभी यह तो हमारी पुरानी जनरेशन के थे तो ऐसा तो नहीं था कि उनके बचपन में आज की तरह व्हीकल थे वो धीरे-धीरे करके व्हीकल का यह बढ़ा ना तो पहले तो साइकिल वगैरह ही चलता था तो अभी कंपेरटिवली इजी है कि हां थोड़े से बड़े हुए होंगे बाद में ही व्हीकल में बैठे होंगे तो पहले तो यह याद करवाया जाएगा कि पहली बार व्हीकल में कब बैठे थे उसके बाद में यह याद करवाएंगे किसके साथ में बैठे थे आपने किस तरह के कपड़े पहने थे किस कलर का वोह व्हीकल था कहां पर कौन से शहर से जा रहे थे कौन सी गली से जा रहे थे ऐसा करके पहला का पुराने धीरे-धीरे करके याद करवाएंगे और सडन बात करते करते याद आ जाएगा अरे ऐसा कुछ हुआ था जिसकी वजह से मुझे ये व्हीकल में बैठने से वो एक डर का मेरे मन में बैठ गया है जैसे ही वो घटना पकड़ में आ जाएगी साइकेट्रिस्ट क्या करेगा उनके मन में वो जो ग्रंथि बन गई है एक दुर्घटना की वजह से ना कि जो भी हुआ उसके साथ में डील करने के लिए वो उनको सिखाएगा वरना क्या होता है पता है हमारे जीवन में कोई भी दुर्घटना बनती है यदि हम उसके साथ में उसको उसको मैनेज करना नहीं सीखेंगे तो यह दुर्घटना हमारे मन में ट्रामा का स्वरूप धारण करके एक ग्रंथि बना करके बैठ जाएगा यह जितने भी ट्रबल चाइल्ड जिनको बोलते हैं ना ऐसे बच्चे जिन लोगों का बिहेवियर बहुत ही खराब होता है बहुत ही इनसिपिड होता है जिनको कि आप रिफॉर्मेटरी में भेजना पड़ेगा बचपन से ही क्रिमिनल एक्टिविटी चालू कर देंगे ये सबके मन में ना कहीं ना कहीं ट्रॉमा होता है ट्रॉमा अर्थात कि एक ऐसी दुर्घटना कि जिसने उसके मन पर बहुत ही गहरा असर किया हो इसका सॉल्यूशन यह है कि उस ट्रॉमा को फिर से याद करवाया जाए और फिर उसके साथ में डील करना उसके साथ में मैनेज करना उसके साथ में जीना उसको सिखाया जाए जैसे-जैसे वह उसको एक्सेप्ट करेगा कि अच्छा भले ही चाहे मेरे जीवन में यह दुर्घटना हो चुकी हो किंतु यह नहीं है कि मेरे जीवन का अंत आ गया यह तो मेरे जीवन नए जीवन की शुरुआत हो सकती है यदि मैं इसके साथ में डील करूं तो तो यह ट्रॉमा के साथ में डील करना अच्छे साइकेट्रिस्ट जो होंगे वह आपको सिखाएंगे या तो फिर जद ये धर्म जो है यह आध्यात्मिकता जो है ज हायर लेवल ऑफ साइकोलॉजी हमारे मन में जितनी भी ग्रंथियां बनी है सिर्फ इस जन्म की नहीं पिछले पिछले कितने ही जन्मों की आंख बंद करके बैठते हैं तो मुझे क्या दिखता है कि हां मेरा यहां पर एक दूसरा एक मान लीजिए मैं जॉब करता हूं तो फिर मेरा एक कलीग है और मेरे बॉस जो है मेरे कलीग को फेवर करते हैं मुझे नहीं करते मैं उससे ज्यादा टैलेंटेड हूं किंतु फिर भी मेरे कलीग को ही उसको धीरे-धीरे करके उसका सैलरी भी बढ़ा रहे हैं उसको प्रमोट भी कर रहे हैं उसको बेटर प्रोजेक्ट भी दे रहे हैं और मुझे इग्नोर कर रहे हैं मुझे साइडलाइन कर रहे है तो ये घटना धीरे-धीरे करके मेरे मन में एक ट्रॉमा का स्वरूप धारण करके बैठ जाएगी अभी इस बात को मान लीजिए 1015 साल हो गए अभी मैं ध्यान करना सीख रहा आंख बंद करके बैठता हूं तो सब दुनिया भर का डिस्टरबेंस चालू हो जाएगा अभी डिस्टरबेंस क्यों हो रहा है समझ नहीं पा रहे है किंतु धीरे-धीरे करके जो इंट्रोस्पेक्शन का जो कांसेप्ट है अपने ध्यान की पद्धति में अपने ज्ञान योग की पद्धति में ये इंट्रोस्पेक्शन चालू कीजिए अपने मन को एनालाइज कीजिए मैं ऐसा कौन सा पीरियड है मेरे जीवन में जबकि यह काम क्रोध मद लोभ मोह यह सब जो वासना है यह सब स्ट ंग इमोशन एकदम घर करके बैठे थे ऐसा कौन सा पीरियड है इमीडिएट समझ में आएगा मैं जब जॉब कर रहा था तब मेरे मन में बहुत एंबिशन थी मेरे मन में एक बहुत डिजायर स्ट्रांग था कि मुझे ये ये सब अचीव करना है तो जैसे ही उस पीरियड प लोकलाइज किया फिर धीरे-धीरे करके आप देखना शुरू कीजिए कि मैंने किसके साथ में दुश्मना वट की थी मैंने किसके साथ में कंपटीशन किया था मैंने किसके साथ में किसका अहित मैंने चाहा था कि इसके साथ में बुरा हो वो सब याद करके धीरे-धीरे करके सभी को क्षमा देना शुरू कीजिए भले ही चाहे उसने मेरा अहित किया हो भले ही चाहे उसने मेरा बुरा किया हो भले ही चाहे उसने मेरा करियर सटेज कर दिया हो मैं यदि उसको क्षमा नहीं करूंगा तब तक मेरा आध्यात्मिक जीवन आगे नहीं बढ़ेगा भले ही चाहे मैं कुछ भी कर लूं भले ही चाहे मैं 10 बार दिन में मंदिर में चला जाऊं भले ही मैं चाहे 10 बार दिन में साधु संग कर लूं भले ही चाहे मैं कथामृत दिन रात पढ़ता रहूं किंतु जब तक मेरे मन में से ऐसे लोगों को मैंने क्षमा करना शुरू नहीं किया कि जिनके प्रति मेरे मन में विद्वेष का भाव है तब तक यह ग्रंथि बना कर के बैठा रहेगा और मुझे थोड़ा सा भी ऊपर नहीं जाने देगा जैसे ही मैं थोड़ा सा ऊपर जाता हूं वैसे ही ये खींच कर के मुझे जमीन पर ला पटके गया तो हम लोग फ्रस्ट्रेट हो जाएंगे हमको समझ में ही नहीं आएगा कि अरे मैं इतना प्रयत्न कर रहा हूं गुरु महाराज के अनुसार मुझे जो मंत्र दिया गया है उसका मैं सिंसियर जप करता हूं मुझे जो पूजा पद्धति बताई गई है मैं पूजा भी मैंने एकदम बड़ ही से सीरियसली करता हूं तो भी मेरे मन में ऐसा तो क्या है ऐसा तो कौन सा ट्रॉमा है आंख बंद करने से फौरन मेरा मन भटकना शुरू हो जाता है छोटी-छोटी चीजों में कामना वासना आ कर के मुझे हाईजैक कर देती है मुझे जैसे कि मेसमराइज कर देती है ऐसा तो क्या है तो यह जैसे-जैसे सेल्फ एनालिसिस करेंगे वैसे-वैसे यह जो ट्रॉमा है अपने पूर्व जीवन के ये पकड़ में आते जाएंगे जैसे-जैसे पकड़ में आते हैं अपने मन को उदार करना है अपने मन को विशाल बनाना है अपने मन में अपने हृदय कमल में ईश्वर को लाकर के बिठाना है और अंतःकरण से सबको क्षमा करना है और सिर्फ क्षमा नहीं अंतःकरण से सबको आशीर्वाद देना है कि हां मैंने जिसका बुरा चाहा था या फिर जिसने मेरा बुरा चाहा दोनों को मैं भगवान को प्रार्थना करता हूं कि मेरा जो आध्यात्मिक उपलब्धि है पहले इनको दे दे इनका भला करें उसके बाद में जो कुछ भी दया बचती है ईश्वर की तो मेरे पे लाए पहले वो बाद में मैं ये अंतःकरण से अपने हृदय को खोल देना होगा जैसे ही अपना हृदय खुलेगा तो जैसे वो होता है ना कि वो ठाकुर कहते हैं ना कि वो फूल खिलता है तो भ्रमर आकर के बैठ जाता है ठाकुर भक्त के बारे में कह रहे थे मैं इसी बात को भगवान के बारे में कहता हूं हृदय कमल रूपी पुष्प खिलेगा तो भगवान अपने से आकर के उस पुष्प पर विराजमान होंगे अपना सिंहासन स्थापित करेंगे हमको भगवान को कोई प्रार्थना नहीं करनी पड़ेगी कि भगवान आओ भगवान सामने से आएंगे कहेंगे कि अच्छा इतना सुंदर इसका सुवासित हृदय है इतना सुंदर प्रकाशित हृदय है तो क्यों नहीं यहां पर मंदिर बनाया जाए तो व मंदिर बनाने की जितनी भी प्री कंडीशंस है अपने हृदय में व ओपन हो जाएगी वह सब एक के बाद एक आकर के स्थापित हो जाएगी यह जो मंदिर की प्राण प्रति ा महोत्सव मैं जब जॉइन किया था उसके बाद में मुझे कहा गया मुझे बुला कर के कि देखो तुम तो रूरल डेवलपमेंट यह सब बहुत करना चाहते थे अभी मैं तुम्हारा पोस्टिंग नागपुर में करता हूं वहां पर मंदिर का उद्घाटन है जाओ मंदिर में काम करो तो तुम्हारा थोड़ा बैलेंस हो जाएगा तो मैं तो सोचता था अरे बाप रे कहां मैं वो रूरल डेवलपमेंट दिन रात गांव में जाकर काम करता था अभी यहां पर मैं दिन रात मंदिर में पड़ा रहूंगा पता नहीं ठाकुर क्या करेंगे मुझे टीका भी भा टिका भी पाएंगे कि नहीं रह भी पाऊंगा कि नहीं जो भी है मैं चला गया तो एक बात उससे सबसे अच्छा हुआ कि मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव है वो मुझे एकदम फ्रंट लाइन में बैठ कर के देखने को मिला क्योंकि मेरा तो मंदिर में ही ड्यूटी था सब जगह प मैं उपस्थित हूं तो वो जो प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव अभी तो मैं भूल गया सब विधि उस समय में बड़ा ही मैंने मेहनत करके सबको कि अच्छा इसके बाद में ये विधि होती है इसके बाद में यह विधि होती है तो वो एक के बाद एक विधि होती है बहुत सुंदर होती है देख कर के मन को बड़ा ही आनंद मिलता है है तो यह भी यह सब विधियां है अपने मन में यह मन प्राण प्रतिष्ठा ठाकुर की करनी है ठाकुर के मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा करनी है तो एक के बाद एक जो सब विधि करके एक के बाद एक जो सेरिमनी करके एक के बाद एक होम हवन याग यज्ञ पूजा पाठ चैटिंग वगैरह करके साधु ब्रह्मचार्य को बुला कर के भजन वगैरह जो भक्त लोग आएंगे प्रसाद पाएंगे जो एक के बाद एक स्टेजेस है वो स्टेजेस अपने मन में स्थापित हो जाएंगे बट यह जो स्वामी जी ने कहा कि पूर्व जन्म की स्मृतियां वह एक के बाद एक ओपन होगी कब होगी जबकि हमारा मन आखिरी जन्म तक पहुंच जाएगा हमारा यह शरीर जद आखिरी लास्ट जन्म है मुक्त होने का समय है वहां तक पहुंचाएंगे
Inspiration
तभी देन अलोन यू विल फाइंड दैट दिस वर्ल्ड इज बट अ ड्रीम जब हमारा आखिरी जन्म होगा पूर्व जन्म की सभी स्मृतियां जागृत हो जाएगी उसने हमारे मन में जो ग्रंथियां बनाई थी जो ट्रामा हमारे मन में बने थे उसको काटना शुरू कर देंगे तब क्या होगा देन अलोन यू विल फाइंड दैट दिस वर्ल्ड इज बट ए ड्रीम तभी समझ में आएगा कि यह विश्व ब्रह्मांड एक स्वप्न मात्र है देन अलोन यू विल रियलाइफ इन द सोल ऑफ योर सोल दैट यू आर बट एक्टर्स एंड द वर्ल्ड इज अ स्टेज तभी अपने अंतरात्मा में यह अनुभूति होगी यह जगत रंगमंच है और हम सिर्फ अभिनेता या अभिनेत्रियां है इस रंगमंच पर अपना नाटक अपना जो भी पात्र दिया है पात्र का अभिनय करके हमको फिर वही अपने स्वधा श्री राम कृष्ण लोक में वैकु कुंठ लोक में वापस चले जाना है देन अलोन विल द आइडिया ऑफ नोन अटैचमेंट कम टू यू विद द पावर ऑफ थंडर तभी एक वज्रपात की तरह त्याग का विचार यह त्याग का हमारी भावना हमारे मन में आकर के उसका प्रभाव स्थापित करेगा लाइक अ थंडर वज्रपात जैसे होता है तो कैसे वो कभी-कभी हम लोग वीडियो देखते हैं ना कि यह मैंने नजरों से देखा है मैं जब रांची में था वह ट्राइबल एरियाज में काम करता था एक दिन रात को वज्रपात हुआ तो हमारा ही फार्म में हम लोग दूसरे दिन देखने को गए पुराना बहुत पुराना एक वटवृक्ष था और इतना उसका चौड़ा उसका यह जो था मैंने सब ब्रांचेस वगैरह उसके ऊपर में वचर पात हुआ तो सीधे दो टुकड़े हो गए आप अनुमान करके सोच देख लीजिए कि इतना पुराना वृक्ष की जिसकी जड़े इतना इतनी गहरी गई होगी जमीन के भीतर में उसको आप तीन लोग ऐसा करके खड़े रहेंगे ना तब कहीं जाकर के उसको आप पकड़ पाएंगे इतना चौड़ा उसका यह जो था ट्रंक उसका थड जिसको बोलते हैं एक वज्रपात हुआ तो सीधे दो टुकड़े हो गए आश्चर्यजनक घटना है उस समय तो ये सोशल मीडिया का युग नहीं था वरना जो फोटो चली चला दिया होता बड़ा ही वायरल हो जाता तो ऐसा वज्रपात जिस प्रचंड आघात के साथ में जिस प्रचंड शक्ति के साथ में गिरता है और अपने ये जो वृक्ष वगैरह को तोड़फोड़ कर देता है वैसे ही यह अपने मन में जो मोह वगैरह है उसके ऊपर में वज्रपात होगा और त्याग की भावना दृढ़ हो जाएगी न ऑल दिस थर्स्ट फॉर एंजॉयमेंट दिस क्लिंग ऑन टू लाइफ एंड दिस वर्ल्ड विस दिस वर्ल्ड विल वेनिश फॉरएवर तभी यह जो थर्स फॉर एंजॉयमेंट आनंद की जो स्प्र तृष्णा यह जो तृष्णा शब्द जो है यह बुद्धिज्म में एक बड़ा ही एक पॉपुलर है जिस तरह से हम वासना कहते हैं तो वैसे य लोग तृष्णा नकी इस तरह से वो कहते हैं तो य थर्स्ट फॉर एंजॉयमेंट अर्थात की यह विषय रस पाने की इच्छा यह चली जाएगी दिस क्लिंग ऑन टू लाइफ एंड दिस वर्ल्ड विल वेनिश फॉर एवर मैं कैसे भी करके इस जगत को पकड़ करके रहूंगा यह पकड़ करके रखने की यह जो इच्छा है वासना है वह चली जाएगी योग शास्त्र में जिसको कहते हैं अभिनिवेश अविद्या अस्मिता राग द्वेष और अभिनिवेश अविद्या अर्थात कि मुझे मैं मेरा अज्ञान है कि मुझे पता नहीं है कि मैं यह आत्मन हूं मैं देह के साथ में अपने को आइडेंटिफिकेशन से होती है अस्मिता अर्थात कि मेरा एक मैं मैं एक साधु हूं मेरा नाम है कृष्ण सखानू मेरा एक जन्म यहां पे हुआ था फिर बड़ा यहां पे हुआ मेरी मेमोरीज है ये मैं मैं करके जो पूरा आइडेंटिफिकेशन है उसको कहते हैं अस्मिता फिर अस्मिता में से खड़े होते हैं राग और द्वेष मुझे यह चीज पसंद है और यह चीज पसंद नहीं है और फिर आखिर में इसमें से आता है अभिनिवेश जो कि मुझे य राग है द्वेष है मेरा आइडेंटिफिकेशन है तो इन सबको छोड़ कर के जाने की जब बात आएगी तो मृत्यु का डर प्रकट होता है तो यह जो तृष्णा है जगत के विषयों के प्रति वह भी चला जाएगा और जगत को पकड़ कर के जीने की जो चाह है वह भी चली जाएगी देन द माइंड विल सी क्लीयरली इज डेलाइट हाउ मेनी टाइम्स ऑल दिस एसिस्टेड फॉर यू हाउ मेनी मिलियंस ऑफ टाइम्स यू हैड फादर्स एंड मदर्स सनस एंड डॉटर्स हस्बैंड एंड वाइव्स रिलेटिव्स एंड फ्रेंड्स वेल्थ एंड पावर स्वामी जी पोएट्री लिखते हैं कि प्रोज लिखते हैं समझ में नहीं आता स्वामी जी क्या कहते हैं माइंड विल सी क्लीयरली एज डेलाइट दिन के उजाले में जिस तरह से हमको स्पष्ट दिखता है उतना ही स्पष्ट हमको दिखेगा कि यह जो मेरा पूरा जगत है छोटा सा यह कितनी बार पहले हुआ है मैं कितनी बार एक के बाद एक जन्म ग्रहण किया है कितनी भी बार मेरे पिताजी थे माता थे पुत्र थे पुत्रियां थी पति था पत्नी थे रिलेटिव्स थे मित्र थे वेल्थ एंड पावर धन था और शक्ति थी यह सब मेरे पास कितनी ही बार था माने एक के बाद एक कितने जन्मों में मैंने यह सब भोग करके मैं आज यहां पर आया हूं आज हमको बहुत बार लगता है मैं एक एक एक दो लड़के यहां आते हैं कभी-कभी तो उन लोगों की करियर करियर के बारे में मेरे साथ में बात करते हैं तो मैं भी एक ऐसा आ जाता हूं इस मूड में कि करियल कंसल्टेशन कि अच्छा ऐसा करना वैसा करना ऐसा मत करना यहां पर तुमको यह बेटर अपॉर्चुनिटी है तो अभी मैं वो कितना वो सीरियसली लेते पता नहीं किंतु मैं जो पढ़ता रहता हूं ना तो मैं अपना वो फ्री में यह सब ओपिनियन देता हूं तो अभी देखिए कि हालांकि मैं यह सब बताता हूं किंतु जदी सही सही आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो आपने कितना तने करोड़ों बार इससे पहले यह सब कैरियर बना कर के गए हैं और कितने करोड़ों बार यह सब कैरियर बनती रहेगी जब तक हम फ्री नहीं होंगे तब तक ये बड़े होना करियर बनाना एक लाइफ फैमिली लाइफ को डेवलप करना इसके बाद में जो जीवन के जो आजकल के मिडल क्लास के जो एस्पिरेशंस है ना जीवन में फुलफिलमेंट क्या कहता है कि हां अभी इतना मेरा बैंक बैलेंस या इतना मेरा एफडी वगैरह हो गया इतना मेरा इन्वेस्टमेंट हो गया है यह मेरा एक अपना एक घर हो गया है एक जो लड़के लड़की है उसकी करियर अभी वह लाइन पर आ गई है या उनकी ठीक से शादी हो गई है वह वेल सेटल हो गए हैं यह जो अपने मिडिल क्लास करियर गोल होते हैं लाइफ के गोल होते हैं वो सब मैंने अचीव कर लिए हैं और अभी जब ये मेरा मिडिल एज जब क्रॉस होता है मैं थोड़ा हेल्थ के ऊपर ज्यादा कॉन्शियस हो जाता हूं और फिर हम लोगों का ऐसा जो मित्रों का ग्रुप होता है हम लोग डिस्कस करते हैं अच्छा किसका ब्लड प्रेशर कितना है किसका शुगर कितना कंट्रोल में रहता है तो ये अपने मिडिल क्लास करियर गोल्स है कि हां भाई मेरा ब्लड प्रेशर शुगर वगैरह थोड़ा बहुत कंट्रोल में है मेरे बच्चे बच्चियां अपना थोड़ा एक लाइन प आ गए हैं व फैमिली फ्रेंड सर्कल मेरा मोर और लेस ठीक है एवरी वंस इन ए वाइल में अच्छा सा एक वेकेशन लेकर के आता हूं दिस इज माय गोल तो इतना तो आपने कितनी बार किया है कितनी बार करते रहेंगे स्वामी जी ने एक बार ये जो स्वामी जी स्वामी जी जो बोलते सब एक्सट्रीम में बोलते थे तो ठाकुर के बारे में एक बार ठाकुर को ही गाली देना शुरू कर दिया पता नहीं क्या उनके मन में आ गया होगा तो स्वामी जी के गुरु भाई बेचारे बड़े दुखी हो गए अरे बाकी सबको जितना गाली देना हो नरेंद्र देता रहे ठाकुर को क्यों गाली देता है तो थोड़ी देर के बाद में स्वामी जी का जो भी क्रोध होगा जो भी ट्रिगर इवेंट होगी थोड़ा ठंडे हुए फिर उन्होंने देखा कि बा बिचारे गुरु भाई उनके बड़े ही मायूस हो गए हैं तो स्वामी जी ने क्या कहा पता है उनको सांत्वना दिलाने के लिए अच्छा ठीक है ऐसे तो कितने करोड़ों जन्म आए गए आते रहेंगे जाते रहेंगे यह जन्म ना हो चलो इस पागल बामुन को दे दिया उस पागल ब्राह्मण को एक जन्म दे दिया जाओ जो भी हो वेस्ट गया तो गया ऐसे तो कितने जन्म पड़े हुए हैं अपने पास में जो जिसके मैंने बहुत बड़ा भंडार है जिसके पास में उसने 101 इधर-उधर हो भी गए तो तो फर्क नहीं पड़ता है तो वैसे ही अपने कितने करोड़ों जन्म है वो आते हैं जाते हैं आते रहेंगे जाते रहेंगे एक जन्म यदि ईश्वर के लिए दे दिया तो उसमें हानि क्या है इसीलिए स्वामी जी कहते हैं कि यदि हमारा मन एक समय आएगा कि इट विल सी लाइक अ डेलाइट दिन के उजाले में हमको जितना जितना स्पष्ट दिखता है उतना ही स्पष्ट यह सब दिखने लगेगा कि कितने करोड़ों जन्म कितने भी बार मेरे पिताजी थे माताजी थे भाई थे भगिनी थे पुत्र थे पुत्रियां थी हस्बैंड थे वाइफ थे धन था दौलत था मेरा इज्जत था सम्मान था सब कुछ था इतना आके चला गया आके चला गया आखिर में मेरे पास में क्या रहा वही तो बोल घुमा कर के जन्म मृत्यु जरा व्याधि के चक्कर में फंसना है क्यों नहीं मैं एक बार ठीक करूं कि इस साइकिल को तोड़ना है एक बार ठीक करके उसके ऊपर में प्रयास किया जाए सक्सेस होंगे तो भी ठीक है नहीं होंगे तो भी ठीक है वह जैसे गीता में कहते हैं योग भ्रष्टों भी व जो व कहता है ना कि जो योग भ्रष्ट होता है वह श्रीमंत के घर में जन्म लेता है अर्थात कि वह इतना नेक्स्ट जन्म में इतना पुण्य वो इकट्ठा करके आता है कि उसका नेक्स्ट जन्म बहुत ही अच्छा जाए अर्थात कि आप पहले से ही आपके पास में इतना पुण्य का भंडार है कि आप अपनी साधना एक बड़े हायर लेवल से फिर से स्टार्ट कर सकते हैं तो गवाना तो कुछ नहीं है स्वल्प मस्य धर्मस्य त्रय महतो भया जैसे गीता में कहते हैं थोड़ा सा भी किया हुआ धर्म हमको महान भय से बचा लेता है तो क्यों नहीं थोड़ा सा तो धर्म इस जन्म में किया जाए दे केम एंड वेंट इतने जन्म आए और गए वो जो स्वामी जी और शरत महाराज की बड़ी ही फेमस स्टोरी है कि शरत महाराज और ठाकुर क्या करते थे जो भी सम जिनका अच्छा उनका होता था समान समान जिनके संस्कार उन सबको मिला दिया करते थे तो शरत महाराज को बोला कि वो नरेण है वहां पर जाओ उसके साथ में बात करो और इंट्रोडक्शन ठाकुर कैसा देते हैं पता है गंगाधर महाराज को अपने अखंडानंद जी को इंट्रोडक्शन दिया नर शिमला बाली माने बाड़ी उने शिमुलिया में जो नरेंद्र का घर है देखो कि सो पान खाता है जो चाहे वो खाता है किंतु नजर है हमेशा उर्ध्व दृष्टि तो जाओ उसके साथ में मित्रता करो तो वैसे ही अखंडानंद जी को शरत महाराज को बोल दिया कि जाओ नरन के साथ में जाकर गप लगाओ उसके साथ में मित्रता करो तो शरद महाराज का पता नहीं नरेण के साथ में कैसे एक जगह पर मुलाकात हो गई थी पहले तो किसी के अपने मित्र के घर शरद महाराज गए थे वहां पे नरेण ये आक के बैठ गया अभी शरद महाराज को तो पता नहीं ये नरेण है तो उन्होंने कुछ उनके साथ में बात करने का प्रयास किया होगा तो नरेंद्र तो ऐसा वो हवा में रहता है ना उत्तर नहीं दिया अच्छा ठीक है नहीं दिया तो नहीं दिया उसका इतना घमंड है वो अपने को इतना बड़ा समझता है मत दो उत्तर जाओ मैं तो अपने मित्र को मिलने के लिए आया हूं मैं अपने मित्र से बात करूंगा ऐसा करके शरत महाराज बैठे रहे अभी उनका मित्र आया वो भी उनके साथ बैठ गया अभी शरत महाराज तो ये एक्सपेक्ट करेंगे ना कि अनजान लड़का जद अपने को इतना बड़ा घमंडी है वो कि मेरे साथ बात नहीं कर एटलीस्ट मेरा मित्र बात करेगा किंतु उसके मित्र ने क्या किया शरत महाराज के मित्र ने क्या किया वो नरेंद्र के साथ में ऐसा बातों में मशगूल हो गया शरद महाराज को कंपलीटली और कर दिया तो शरत महाराज सोचते हैं शारदानंद जी महाराज अपने संघ के सर्वप्रथम जनरल सेक्रेटरी बाद में स्वामी जी के गुरु भाई संन्यास साथ में लिया तो उस समय किंतु उनकी बड़ी ही नेगेटिव उनके मन में ये इंप्रेशन हो गई कि कैसा ये घमंडी लड़का है वो तो मेरे साथ में बात नहीं करता मेरे मित्र को भी हाईजैक कर लिया जो भी है बाद में पता चला किय नरेण कौन है उसका क्या किस लेवल पर रहता है उसके बाद में एक दिन ये लोग सब गप लगा रहे थे नर ने कहा चलो मैं तुम्हारे घर में तुमको छोड़ के आता हूं तो शरद महाराज के घर पर आए तो नरेंद्र ने क्या देखा कि अरे यह घर यह कमरा यह दीवार यह खिड़की यह दरवाजे ऐसा लगता है कि मैं जैसे यहां पर कितनी ही बार पहले आ चुका हूं ऐसा पता लग रहा है कि इस घर के साथ में मेरा कहां कितना पुराना संबंध है तो शरत महाराज जी आश्चर्य चकित हो गए कि कैसे यह संभव है और हम भी थोड़ा सा आश्चर्य चकित हो जाएंगे कि किस तरह से स्वामी जी को ये सब फ्लेश होते थे अमेरिका में एक बार एक लेडी ने लेडी डिवोटा ने स्वामी जी को कहा यह सिद्धि होती है ना कभी-कभी य सिद्धि आ जाती है मने सुपर नेचुरल पावर्स हमारे पास में आ जाता है तोय लेडी ने स्वामी जी को कहा कि मेरे पास में एक ऐसी सिद्धि है कि किसी ने मुझे पत्र लिखा हो और वह पत्र को मैं फाड़ दूंगी छोटे-छोटे टुकड़े कर दूंगी और अपने हाथ में रख कर के थोड़ा सा ध्यान करूंगी तो इमीडिएट क्या होगा कि जिसने मुझे वह पत्र लिखा है उसके मन की स्थिति क्या है वो मुझे ह पता चलेगा जैसे कि मैं उसके मन में झाक रही हूं ऐसा मुझे एगजैक्टली पता चलेगा तो इसका क्या अर्थ है तो स्वामी जी ने कहा कि देखो मेरे पास में भी ऐसी सिद्धि थी किंतु मेरे गुरु ने कहा है कि यह सब सिद्धियों का प्रयोग लोग के कल्याण के लिए ही करना है कभी अपने स्वार्थ के लिए नहीं करना स्वार्थ के लिए किया तो यह सिद्धि श्राप बन कर के रह जाएगी श्राप स्वरूप बन जाएगी तो स्वामी जी ने कहा कि उसके बाद में मैं इस तरह की सिद्धि का कभी कभी भी प्रयोग नहीं करता कभी भी उसका मैं किसी के इवन मेरे खुद के लिए तो छोड़ दीजिए उसको मैं विस्मृति हो गया हूं तो देखिए कि ये सब सिद्धियां नरेंद के मन में स्वामी जी के मन में कैसे आती थी जाती थी हमको थोड़ा-थोड़ा ऊपर ऊपर से आभास मिलता है उसी को देख कर के हम लोग आश्चर्य चकित रह जाते हैं किंतु जब स्वामी जी ये सब कहते हैं ना कि ऐसे कितने ही जन्म आए तुम्हारे पिताजी होंगे माता जी होंगे ये होगा वो होगा तो यह सब स्वामी जी हवाहवा में नहीं कह रहा है वो किताब पढ़ के नहीं कर रहे एक्चुअली उनके खुद के एक्सपीरियंस से कह रहे हैं दे केम एंड वेंट वो आए और गए हाउ मेनी टाइम्स यू वेर ऑन द टॉप मोस्ट क्रेस्ट ऑफ द वेव एंड हाउ मेनी टाइम्स यू वेर डाउन एट द बॉटम ऑफ द डिस्पेरटनेस उसकी गर्त में भी आप कितनी भी बार थे अर्थात की जीवन में आप कितनी ही बार सक्सेसफुल थे कितनी ही बार आप फेलियर थे देन मेमोरी विल ब्रिंग ऑल दिस टू यू देन अलोन यू विल स्टैंड एज अ हीरो एंड स्माइल वन द वर्ल्ड फोनस अपॉन यू जब एक के बाद एक स्मृतियां आपके मन में यह वापस लाएगी तब यह जगत जब भी आपके सामने गुस्सा करेगा तब भी आप एक हीरो की तरह एक नायक की तरह युग नायक की तरह डट कर के खड़े रहेंगे और हंसते मुंह से विपत्तियों का सामना करेंगे देन अलोन विल यू स्टैंड अप एंड से आई केयर नॉट फॉर दी इवन ओ डेथ व्हाट टेरर हैस्ट थाउ फॉर मी दिस विल कम टू ऑल जब वो स्थिति आएगी तो मृत्यु भी जद सामने आकर के खड़ा हो जाएगा हम कहेंगे अरे मृत्यु मुझे तोरा भी मुझे तुम्हारा भी डर नहीं है ऐसा तो कौन सा भय है ऐसा तो कौन सा खौफ है जो तुम मुझे दिखा सकते हो तुम्हारे पास एक भी खौफ नहीं एक भी शस्त्र नहीं जिससे कि तुम मुझे डरा पाओ और आखिर में वह जो स्वामी जी का जो महामंत्र मैं कहता हूं ना अपने लिटरेचर में ऐसे ऐसे महामंत्र होते हैं तो इतने सुंदर सुंदर शब्द स्वामी जी ने कहे उससे भी जो पावरफुल महामंत्र आखिर में एक छोटा सा सेंटेंस में दिस विल कम टू ऑल यह परिस्थिति हम सबके साथ में होगी हमारे सबके जीवन में आए स्वामी जी का यह आशीर्वाद है आजही तक कल फिर से मिते ओ शांति शांति शांति हरि बो तस श्री राम कृष्ण परम स्तु