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ओम स्थापक च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूप अवतार बिषय राम कृष्णा यते नम कॉस्मो माइक्रो कजम जिसका हम स्टडी कर रहे थे कल हमने देखा कि किस तरह से स्वामी जी एक के बाद एक पुनर्जन्म के बारे में हमको उसकी व्याख्या भी कर रहे हैं और उसके बारे में हमको प्रूफ भी दे रहे हैं सर्वप्रथम तो हमने देखा कि किस तरह से स्वामी जी कहते हैं कि हमने पहले तो पुनर्जन्म के विरोध में जो आर्गुमेंट थी इसको काटा किंतु बाद में स्वामी जी पूछते हैं कि क्या पुनर्जन्म के पक्ष में ऐसी कोई आर्गुमेंट है जिसको कि हम लोगों के सामने रख सके तो स्वामी जी कहते हैं हां और इसके बाद में वह एक के बाद एक वही आर्गुमेंट हमारे सामने रख रहे हैं सबसे पहले तो उनका कहना है कि किस तरह से हम यह लर्निंग प्रोसेस मनुष्य का कि किस तरह से हम कोई भी विद्या अर्जन करते हैं वहां से स्वामी जी प्रारंभ करते हैं क्या कहते हैं कि कोई भी विद्या अर्जन करने का अर्थ क्या है ज्ञान क्या है अज्ञान क्या है ज्ञान है कि मैंने किसी भी चीज को देखा जैसे कि मैंने एक यहां मैं अपने कमरे में से ऑफिस तक आ रहा था मैंने देखा रास्ते में कि यहां पर बहुत ही सुंदर गार्डन है गार्डन में एक गुलाब का फूल खिला हुआ है और जैसे ही मैंने गुलाब के फूल को देखा मैंने अपने मन में जो मेमोरी पड़ी हुई है गुलाब के फूल की गुलाब के जो इतने सारे चित्र बचपन से लेकर के मैं जो देख रहा हूं वो मेरे मन में स्टोर होक के पड़े हैं उसके साथ में मैंने कंपेयर किया कंपेयर हो गया तो इसको हम कहेंगे कि ज्ञान और ऐसा कोई फूल देखा जो कि मैंने पहले कभी नहीं देखा था तो उसको देख कर के मैं अपने मन को मैं अपने मन में जाकर के सर्च करता हूं जैसे हम आजकल यदि किसी के साथ में कंपेयर नहीं कर पाता हूं तो वह हो गया अज्ञान कि यह फूल पहली ही बार देखा है इसके रिलेटेड कोई भी मेमोरी मेरे मन में नहीं है अच्छा कल हमने एक शब्द देखा था उसका शब्द था कॉग्नेट स्वामी जी कॉग्नेट शब्द यूज करते हैं अभी उसका डेफिनेशन वैसे तो मैंने कल दिया था यूनिट ऑफ नॉलेज किंतु फिर वो ठीक नहीं है मैंने आज डिक्शनरी रेफर किया जनरली मुझे इंग्लिश शब्दों में अभी डिक्शनरी रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ती पता नहीं मुझे कितना लंबा टाइम हो गया होगा कि कोई भी एक शब्द मुझे डिक्शनरी में देखना पड़ता है स्वामी जी है ऐसे कि ही थ्रोज अस सरप्राइज एवरी नाव एंड देन तो ये एक ऐसा शब्द इसका डिक्शनरी मीनिंग है सिमिलर समानांतर या तो फिर इक्वल अर्थात कि कॉग्नेट ऑफ अभी यह जो गुलाब का फूल देखा उसके रिलेटेड कॉग्नेट मेरे ब्रेन में है कि नहीं इसका अर्थ क्या है कि गुलाब के फूल के रिलेटेड कोई मेमोरी मेरे मन में है कि नहीं तो ये यहां तक हमने कल देखा अभी यहां से स्वामी जी आगे कहते हैं बार-बार एक के बाद एक उदाहरण स्वामी जी देते रहते हैं स्वामी जी कहते हैं कि जब न्यूटन ने पहली बार सफर्जन को जमीन पर गिरता देखा होगा पेड़ के ऊपर में से तो उसके मन में यह प्रश्न हुआ होगा न्यूटन के मन में कि भाई ये सफर्जन जमीन प ही क्यों गिरता है किंतु उसने जितने भी सफर्जन गिरते हुए देखे जितनी भी चीजें देखी गिरती हुई देखा कि पृथ्वी पर ही गिरती है आकाश में नहीं उड़ कर के चली जाती तो फिर उसको नाम दिया लॉ ऑफ ग्रेविटेशन हालांकि स्वामी जी जिस चीज को इतना सिंपलीफाई करके दिखाते हैं हमको पता है कि यह कैलकुलस वगैरह कितनी कॉम्प्लिकेटेड मैथमेटिकल प्रोसेस है कि जिसके की थ्रू हम यह पूरा प्रोसेस ऑफ ग्रेविटी या तो फिर लॉज ऑफ डायनेमिक्स जिसको कहते हैं वह समझा सकते हैं और यही लॉज ऑफ डायनेमिक्स के बेस पे आज जितने भी रॉकेट है वह हम चलाते हैं इसी लॉज के आधार पर तो हमने मनुष्य को चांद पर भेज दिया है और अभी मंगल ग्रह पर भेजने की प्रिपरेशन कर रहे हैं तैयारी कर र है तो ये इतने कॉम्प्लिकेटेड लॉ इट्स लॉ ऑफ एसोसिएशन एनालिसिस क्लासिफिकेशन इसके बेस पे नॉलेज तैयार होता है यह स्वामी जी का कहना है तो देखिए कि बाकी आज आप कुछ भी कहे इस स्वामी जी की यह जो थिरी है नॉलेज किस तरह से उत्पन्न होता है मनुष्य के मन में इसके बारे में हम बहुत सारी आर्गुमेंट काउंटर आर्गुमेंट करते कर सकते हैं किंतु इंटरेस्टिंग थिंग इज दैट कि आज का जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जिस बेसिक फंडामेंटल थिरी पर बना है जिसको कहते हैं न्यूरल नेटवर्किंग या तो फिर रेन फोर्सड लर्निंग यह एगजैक्टली इसी आइडिया के ऊपर में बना हुआ है यदि कंप्यूटर को सिखाना है एक चित्र दिखा करके कि कंप्यूटर को जद पूछे यह किस चीज का चित्र है और कंप्यूटर कह दे कि यह बिल्ली का चित्र है या तो फिर कंप्यूटर कह दे कि अरे यह तो गुलाब के फूल का चित्र है तो वह कैसे कंप्यूटर सीखेगा ऐसे नहीं कि आप घंटों भर घंटों बैठ कर के प्रोग्रामिंग करके कंप्यूटर को बताते रहे कि गुलाब का फूल ऐसा होता है इसकी पंखुड़ियां ऐसी होती है जब छोटा होता है तो इस तरह से वो जो बर्ड या तो फिर छोटे स्वरूप में इस तरह से होता है बड़ा इस तरह से विकसित होता है बूढ़ा हो जाता है है उसकी उम्र हो जाती है तो उसकी पंखुड़ियां काली पड़ जाती है उसके यह ये कलर होते हैं यह यह वैरायटी है इतना लंबा डिस्क्रिप्शन देने की वजह एक के बाद एक लाखों चित्र गुलाब के फूल के कंप्यूटर को दिखा दो अभी कंप्यूटर ने चित्र देख देख करके अपने ने सीख लिया समझ लिया कि इसको गुलाब का फूल कहते हैं जब नया चित्र दिखाएंगे गुलाब के फूल का तो कंप्यूटर इमीडिएट इसको पकड़ लेगा एआई उसको इमीडिएट पकड़ लेगा कि हां मैंने यह जो फोर्सड लर्निंग या तो फिर यह जो रिपीटेडली इतने सारे चित्र देखे गुलाब के यह उसी के साथ में मैच हो जा रहा है तो यह स्वामी जी जिस आईडिया के बेस पर लर्निंग कहते हैं उसी आइडियाज के बेस पर आज का मॉडर्न एआई भी बना हुआ है सो दैट इज एन इंटरेस्टिंग सिमिलरिटी ओके अभी यहां से थोड़ा सा आगे पढ़ते हैं कि स्वामी जी अभी इस जो थ्रीडम ऑफ आइडियाज है इसको कहां तक ले जाते हैं स्वामी जी क्या कहते हैं नाउ वी सी दैट विदाउट ए फंड ऑफ ऑलरेडी एजिस्टिफाई मेमोरीज यदि ना रहती तो नई मेमोरीज हम नहीं बना पाते क्योंकि हम जो कुछ भी देखते हैं इनएविटेबली कंपलसरी हम अपने ब्रेन में पड़ी हुई पुरानी मेमोरीज के साथ में इसको कंपेयर करते हैं जब कंपेरिजन होती है तभी हम नई मेमोरी को ग्रहण करते हैं अदर वाइज देखिए कि जैसे स्वामी जी ने इससे पहले भी कहा है ना कि आंखें देखती है किंतु मन इसके पीछे में नहीं है यह स्वामी जी ने जो कहा इसका चीज के साथ में कितना परफेक्ट को रिलेशन है यदि मेरे मान लीजिए मैं यहां से मेरे बचपन की एक बहुत ही सुंदर एक मेमोरी है कि मैं जब साइकिल लेकर के मेरे क्लासेस में जाता था तो मेरे क्लास के तक जाने का रास्ता था ना एक बहुत ही सुंदर एक राजमार्ग के ऊपर में से वहां से मुझे जाना होता था वहां बगल में ही एक बहुत बड़ा पैलेस था वहां के पुराने राजा का और उस पैलेस के सामने बहुत ही विशाल एक गार्डन था तो यह पूरा जो रास्ता था ना यह पैलेस यह गार्डन एक खुला रास्ता फिर मेरा जाने का समय भी ऐसा था ना कि उस समय धूप वगैरह इतना नहीं होता था अर्ली मॉर्निंग कहो या तो फिर लेट इवनिंग वगैरह कहो तो ये मेमोरी जो है ना मेरे मन में बहुत मने इट्स अ वेरी गुड मेमोरी हम बचपन की कुछ कुछ याद है कि मैं साइकिल लेकर के जा रहा हूं धीरे-धीरे साइकिल चला रहा हूं साइड में फुट पार्ट की ओर जिससे कि आने जाने वाले ट्रैफिक में बीच में मैं ना आ जाऊं और वैसे उस जगह पर ज्यादा ट्रैफिक भी नहीं होता था तो मैं आराम से धीरे-धीरे साइकिल चला कर के कभी-कभी यह जो पैलेस के सामने देखता हूं कभी गार्डन के सामने देखता हूं और रास्ते के दोनों ओर बड़े-बड़े वृक्ष थे तो कभी वृक्ष की ओर देखता हूं कभी आकाश की ओर देखता हूं तो इस तरह से मैं आराम से जाता था अभी मुझे आज इतने दिनों के बाद पूछेंगे कि मैं जब जा रहा था रास्ते से तो मुझे क्या-क्या याद रहा तो अभी इवन मुझे आज तो क्या उस समय भी जदी पूछेंगे तो मैं आपको सब कुछ नहीं बता पाऊंगा मैं ये नहीं बता पाऊंगा कि अरे ये वहां पे वो जो क्रॉसिंग था तो यहां पे पुलिस वाला यहां पे खड़ा वो जो ट्रैफिक सिग्नल यहां पे होता था ये जो ट्रैफिक पुलिस वाले हैं वो यहां पे खड़े रहते थे मैंने इस तरह की रिक्षा एक दिन जाते हुए देखी ना कि उस तरह की टैक्सी जाते हुए देखी इतना सब कुछ मेरे मन में नहीं रहेगा क्यों क्योंकि मेरा अटेंशन उस सब चीजों के ऊपर में नहीं है मेरा अटेंशन किस चीज के ऊपर में था तो गार्डन में किस-किस तर के सुंदर-सुंदर पेड़ पौधे हैं उसके ऊपर था मेरा अटेंशन किस चीज के ऊपर में रहता था कि मुझे पेड़ है मुझे बहुत अच्छे लगते हैं शहर में बड़े हुए हैं तो शहर में पेड़ों पेड़ देखने को नहीं मिलते तो जब भी पेड़ देखता हूं ग्रीनरी देखता हूं तो एक सहज एक आकर्षण होता है मन के भीतर में तो यह मैं देखता था तो मेरा अटेंशन रहता था उसके ऊपर अच्छा यह सुंदर पेड़ है इतना सुंदर गार्डन है अच्छा यहां पर एक छोटा सा पंड है पंड के भीतर में यह लिलीज अर्थात कि कमल वगैरह खेल रहा है आज आप मुझे पूछेंगे तो वह सब चीजें मैं आपको बता पाऊंगा किंतु मैं यह नहीं बता पाऊंगा कि कौन से दिन मैंने किस तरह के कलर की गाड़ी वहां से जाते हुए देखी क्यों क्योंकि उस गाड़ी के ऊपर में मेरा अटेंशन नहीं था अभी देखिए कि मैं प्रतिदिन उस पंड को देखता हूं प्रतिदिन उस पेड़ को देखता हूं प्रतिदिन उस गार्डन को देखता हूं तो एक दिन की मेमोरी दूसरे दिन की मेमोरी के साथ में रेन फोर्स होती है तीसरे दिन देखा तो वही पहले दो दिनों की मेमोरी के साथ में उसको और ज्यादा स्ट्रांग करती है चौथे दिन देखा तो पहले तीन दिनों की मेमोरी को और भी ज्यादा स्ट्रांग करती है यानी मैं दो-तीन साल तक उस रा ज्यादा दो-तीन तो क्या चार पांच सालों तक उस रास्ते से गुजरा हूं तो चार पाच सालों तक प्रतिदिन जो मैं देखता रहा तो प्रत्येक नए दिन की मेमोरी पुरानी मेमोरीज को रे रिइंफोर्स करती है स्ट्रेंथ करती है जबकि बाकी सब चीज पे जोकि मेरा अटेंशन नहीं था वो उसका पहली मेमोरी भी नहीं थी दूसरे दिन की भी मेमोरी नहीं है तीसरे दिन की भी नहीं है तो मैं चौथे पांचवे दिन जो देखूंगा भीतर में जो नहीं है उसके साथ में को रिलेट नहीं हो रहा है बोलकर के वो मेमोरी फॉर्म ही नहीं हुई तो यहां पे स्वामी जी कहते हैं कि कोई भी नॉलेज है वो कैसे फॉर्म होता है आज मैंने जो कुछ देखा उसको मैं लंबे समय तक देखता आ रहा हूं या तो उसको सोचता आ रहा हूं तो उसके साथ में वो मैच होगा और वह पुराना नॉलेज ट्रें दन होगा किंतु जो ऐसी चीज है जिसके बारे में मुझे कोई जिज्ञासा वृत्ति नहीं है जिसके बारे में मेरी प्रीवियस मेमोरी या प्रीवियस मंथन नहीं है प्रीवियस थिंकिंग नहीं है तो ऐसा तो हम रास्ते से जाते हैं कितनी ही चीजें हैं आती है जाती है कहां हमारा ध्यान रहता है कहां हमारा अटेंशन रहता है तो स्वामी जी जैसे कहते हैं ना कि आंख है किंतु मन नहीं है तो आंख उसे देखते तो हैं किंतु मन के भीतर में उसकी इंप्रेशन नहीं होने से मेमोरीज और नॉलेज फॉर्म नहीं होता तो यहां पर स्वामी जी कहते हैं कि पहले से पड़ी हुई स्टोर में पड़ी हुई मेमोरी नहीं होने से नया कुछ देखेंगे सुनेंगे तो इतना इमीडिएट इसके ऊपर में इंप्रेशन नहीं पड़ने वाला अच्छा इसके बाद में स्वामी जी क्या कहते हैं सो इफ एज सम ऑफ द यूरोपियन फिलोसोफर थिंक दैट अ चाइल्ड कम्स इन टू द वर्ल्ड विथ व्हाट दे कॉल टेबुला राजा सच ए चाइल्ड वुड नेवर अटेंड टू एनी डिग्री ऑफ इंटेलेक्चुअल पावर बिकॉज ही वुड हैव नथिंग टू व्च टू रिफर हिज न्यू एक्सपीरियंस स्वामी जी कहते हैं कि मान लीजिए कि आज आज के यूरोपियन थिंकर ऐसा जो एक नया थियर डेवलप करते हैं इस थिरी का नाम दिया है टेबुला राज लैटिन वर्ड है इसका इंग्लिश अर्थ होगा ब्लैंक स्लेट अर्थात कि जब हम बचपन में पढ़ाई अभी आजकल के बच्चों की तो बात नहीं है हमारी जनरेशन के बच्चे जब पहली बार बाल मंदिर में जाते थे किंडरगार्डन में जाते थे तो क्या होता था एक स्लेट थी काले कलर की एक स्लेट देते थे और एक चौक देते थे सफेद कलर का इस सफेद कलर के चौक से उस काले कलर की स्लेट पे लिखते थे फिर जब नया कुछ लिखने का आया तो स्लेट को मिटा देते थे जो कुछ लिखा हुआ था चौक से तो स्वामी जी कहते हैं कि आजकल की यह जो फिलोसोफर यह खास करके जॉन लॉक बोलकर के एक फिलोसोफर था उसने यह ब्लैंक स्लेट का थिरी डेवलप किया था वह क्या कहता है बच्चा एक ब्लैंक स्लेट के साथ में जन्म लेता है अर्थात कि बच्चे का जब जन्म होता है पुरानी कोई भी मेमोरीज उसके मन में नहीं होती है बिल्कुल ब्लैंक स्लेट लेकर के उसका जन्म होता है और इसी जन्म के साथ में ही यह और आजकल के फिलोसोफर इस थिरी को बहुत ज्यादा एक्सेप्ट करते हैं तो स्वामी जी कहते हैं कि यदि एक बच्चे का जन्म इस तरह के ब्लैंक स्लेट में साथ में होता है यदि उसका ब्रेन उसके जन्म के साथ में उसके भीतर में किसी भी तरह की मेमोरी नहीं है किसी भी तरह का नॉलेज नहीं है तो वह नया नॉलेज नया एक्सपीरियंस नई मेमोरीज कैसे फॉर्म करेगा क्योंकि मेमोरी फॉर्म करने की नॉलेज गेन करने की एक्सपीरियंस फॉर्म करने की मेथड तो यही है जो कुछ भी देखा उसको पुरानी बातों के साथ में कंपेयर करो पुरानी बातों के साथ में कंपेयर एंड कंट्रास्ट कहां पर मिल रहा है कहां पर डिवीजन हो रहा है कहां पर अपोजिशन हो रहा है और इसको स्टोर करो तो ये कंपेयर एंड कंट्रास्ट नहीं कर पाएंगे तो नया मेमोरी फॉर्म ही नहीं होगा तो यह टेबुला राजा वाली जो थिरी है जॉन लोक स्वामी जी ने यहां पर नाम नहीं दिया फिलोसोफर का किंतु यह जॉन लॉक ने यह फिलोसोफी उस समय चलाई थी और इस फिलोसोफी का अ काफी कुछ उस समय के सोसाइटी में एक असर भी हुआ था अब अभी देखिए यहां पे जॉन लॉक की फेवर में या तो यह ब्लैंक स्लेट थिरी की फेवर में अ मैं कुछ कहूंगा स्वामी जी तो कहते हैं कि ब्लैंक स्लेट लेकर के या तो अपना ब्रेन कंपलीटली क्लीन लेकर के किसी बच्चे का जन्म होता है तो नया मेमोरी वह नहीं फॉर्म कर पाएगा अच्छी बात है किंतु यह जो जॉन लक जो है ना वो एक पार्टिकुलर सिचुएशन में काम कर रहा था उस समय यूरोप में यह रेसियल सुपीरियोर का एक नया चला था खास करके कुछ-कुछ यह जो जर्मन फिलोसोफर थे या जर्मन थिंकर थे उन्होंने एक आर्यन सुप्रीमस की थिरी डेवलप करना शुरू किया था कि ये जर्मन प्रजा जो है वो इन्हेरेंटली पावरफुल है इन्हेरेंटली सुपीरियर है बाकी सब प्रजा हों से तो इस प्रजा का अ डिवाइन राइट है लोगों के ऊपर में राज्य करने का लोगों के ऊपर में आक्रमण करने का उनके राज्यों को हड़प कर लेने का और लोगों का शोषण करने का यह इनका डिवाइन राइट है ऐसा यह लोग मानना शुरू कर दिए थे और इसी थिरी का विकसित स्वरूप है फासिज्म और यह नाजी पार्टी और एडोल्फ हिटलर और यह सेकंड वर्ल्ड वॉर जिसमें कि करोड़ों करोड़ों लोगों का मृत्यु करोड़ों लोगों का संहार हुआ पृथ्वी ऑलमोस्ट केम ऑन द ब्रिंक ऑफ अपोकेलिप्स माने महाविनाश के कतार पर हम आकर के प्रलय की कतार पर आकर के खड़े हो गए थे क्योंकि हिटलर न्यूक्लियर वेपन डेवलप कर रहा था और इन लोगों को पता चल गया था कि यदि उसके पास में न्यूक्लियर वेपन आ जाएंगे और हिटलर ने आंख बंद करके फेंकना शुरू किया तो सब पूरी मानव सभ्यता खत्म हो जाएगी तो हिटलर अगर ठाकुर की कृपा बोलो ना कि जो कुछ भी कहो हिटलर को तो पहले ही मार दिया किंतु फिर इसी एटॉमिक वेपन का पावर क्या है वह हमने देखा हिरोशिमा और नागास कीने तो यह जो हिरोशिमा नागासाकी न्यूक्लियर वेपन तक जो परिस्थिति आ गई इसके पीछे में एक थिरी थी कि सुप्रीमेसी कि रेशियन सुप्रीमेसी जैसे नीग्रो है वो नेचुरली इनफीरियर है हम लोग इंडियन लोग गुलाम थे तो इंडियन लोग भी नेचरली ये इनफीरियर है और यह यूरोपियन प्रजा खास कर के ये जर्मनिक ट्राइब्स देर आर इन्हेरेंटली सुपीरियर तो अभी क्या है कि इसका काउंटर यह जोन नॉक की फिलोसोफी है आप कैसे कह सकते हैं कि आपका जन्म हुआ तो आप सुपीरियर ही है बचपन से एक पार्टिकुलर रेस में आपका जन्म हुआ है तो आप सुपीरियर है ऐसा आप कैसे कह सकते हैं बच्चे का जब जन्म होता है तो इसके भीतर में सब कुछ ब्लैंक होता है कुछ भी प्रीवियस कोई भी मेमोरी लेकर के नहीं आता अर्थात कि जो भी बच्चा है वो चाहे निग्रो का बच्चा हो ना किय गुलाम भारत में बच्चा जन्मा हो ना कि आज की टेक्नोलॉजिकल एडवांस अमेरिका या यूरोप में बच्चा जन्मा हो वाइट हो ना कि काला हो ना कि मने ये जो ब्राउन हो ना कि लो हो जो भी स्किन कलर हो बच्चे का जो जन्म होता है सब समान होते हैं ईश्वर की नजर के सामने तो यह मतलब रिलीजन भी कहेगा कि सभी बच्चे इक्वल जन्म लेते हैं और फिलोसोफी भी कहेगा कि सभी बच्चों का इक्वल जन्म होता है किसी भी एक प्रजा को किसी भी एक देश को दूसरे देशों के ऊपर में आक्रमण करके उनको गुलाम बनाने का अधिकार नहीं है यदि आप करते हैं तो यू आर डूइंग इट आउट ऑफ योर ग्रीड टू रूल अदर्स टू पलट अदर्स मेरा जो लोभ है दूसरों की धन संपत्ति को उसका छीन लेने का मैं लोभ की वजह से करता हूं नहीं कि मुझे कोई ईश्वर ने मुझे कोई डिवाइन राइट दिया है तो यह बात क्लियर कर दो तो इस तरह की ये जो इक्वलिटी की थिरी है उसी के बेस पे ये जो मॉडर्न डेमोक्रेसी लिबरल डेमोक्रेसी जिसको कहते हैं इसका फाउंडेशन है जोन लोग आप आप डेमोक्रेसी का जो बड़े-बड़े फिलोसोफर कौन है तो जॉन लोक उसमें पहले आता है मने ही विल कम ऑन द टॉप तो यह एक अच्छी बात है कि डेमोक्रेसी है सभी को इक्वल राइट मिलना चाहिए भारत भी तो उसी डेमोक्रेटिक प्रिंसिपल के ऊपर में ही बना है और सबसे ज्यादा डेमोक्रेटिक थिरी कहेंगे तो वो तो वेदांत ही है हम सबके भीतर में एक ही आत्मन है ट आत्मन इज डिवाइन एंड दिस आत्मन इज गॉड इट सेल्फ ब्रह्मण इट सेल्फ वही ईश्वर कहो ना कि ब्रह्मण क हो ना कि आत्मन क हो मेरे भीतर में ही है तो मोस्ट डेमोक्रेटिक थिरी जद जिसको कहेंगे वह तो वेदांत ही है किंतु देखिए इस वेदांत की थिरी के भीतर में कर्मवाच्य है और जीवात्मा बार-बार जन्म धारण करके अपने पूर्व कर्मों के अनुसार शरीर धारण करता है यह भी तो अपने हिंदू धर्म में है वेदांत के भीतर में है और इस थिरी को कैसे हमने ट्विस्ट कर दिया है अपने को खुद को सेल्फ हिप्नोटाइज करने में अपने को खुद को मान लेने में कि हां भाई ब्रिटिश लोग आए हम पे राज किया तो चलो हमारे कर्म ही ऐसे हैं कि हमको गुलाम बना कर के रखा गया है एक बार बिहार में अर्थक्वेक हुआ था तो महात्मा गांधी ने कह दिया था आई हैव ए ग्रेट रिस्पेक्ट फॉर महात्मा गांधी किंतु कभी-कभी ऐसे स्टेटमेंट दे देते हैं कि गांधी जी ने कह दिया कि देखो कि बिहार में यह छुआ छुत प्रा इतनी ब ज्यादा है वहां पे निचली जातियों को उनके साथ में बड़ा ही अन्याय होता है उनके उनका बहुत ज्यादा शोषण होता है इसलिए वहां पे अर्थ क्वेक आया ये उनके कर्मों का परिणाम है मैं तो बड़ा ही डेंजरस थिंकिंग है कि भाई मेरे साथ में जो कोई भी दुर्घटना होती है मेरे कर्मों का परिणाम है अभी इंडिविजुअली तो फिर भी मान लेते हैं किंतु प्रजा के लेवल प देश के लेवल प राष्ट्र के लेवल प ऐसा मान लेना कि यह राष्ट्र जो गुलाम है उसके कर्मों का परिणाम है और यह राष्ट्र दूसरों पर राज्य करता है तो उसके कर्म ये जैसे वेरी डेंजरस टाइप ऑफ थिंकिंग वेदांत की जो थिरी है वेदांत का कर्मवाच्य लेवल पर चलता है नहीं के देश या राष्ट्र के लेवल पर भारत की पड़ती हो ना कि उसकी उन्नति हो भारत का डेवलपमेंट हो ना कि उसकी अधोगति हो उसके लिए मेरे कर्म जवाबदार नहीं है वो तो भाग्य विधाता की वो जो रचना कहो ना कि ये स्टेटिस्टिक्स कहो ना किय कालचक्र कहो ये सब थिरी काम करती है एक बार इंटरेस्टिंग स्टोरी इंटरेस्टिंग इंसिडेंट मेरा एक सेंटर में पोस्टिंग हुआ था तो वहां पे जो स्टूडेंट्स होते हैं ना अ नागपुर की बात है मैं नागपुर में पोस्टिंग हुआ था तो वहां पे हॉस्टल है हॉस्टल के कुछ स्टूडेंट तो अभी स्टूडेंट्स तो क्या है बेचार हम ब्रह्म मैं ब्रह्मचारी था मंदिर में काम करता था तो बड़ा ही रिस्पेक्ट की दृष्टि से हमको देखते हैं और मने मैं जद मंदिर में काम करते-करते थोड़ा सा टाइम मिला बाहर में आके खड़ा रहा तो कोई ना कोई स्टूडेंट आकर के मेरे साथ में बात करेगा तो ऐसा एक स्टूडेंट के साथ में मैं बात कर रहा था तो बेचारा क्या उसके भीतर में थोड़ी धार्मिक एक प्रवृत्ति थी कि हां मैं कुछ धर्म के रास्ते पर आगे चलू किंतु ब्रेन इतना कोई यह नहीं था स्ट्रांग ऐसा कहना नहीं चाहिए किंतु क्या है कि वो एक इंटेलेक्चुअल कैपेसिटी सबकी होती है ना तो इंटेलेक्चुअल वो इतना नहीं था किंतु था बड़ा ही सरल लड़का तो मैं उसके साथ में बात करते करते मैंने हंसते हंसते एक बार पूछ लिया बताओ तो मैंने यह जो कोई भी सभ्यता भारत देश इसका जो इसका जो अध पतन हुआ उसके पीछे में कारण क्या है बताओ माने जस्ट मजाक करने के लिए कि वो है बेचारा सरल लड़का और मैं इस तरह का प्रश्न उसको कर रहा हूं कि भारत देश के अद पतन का क्या कारण है बताओ तो मैं जस्ट आउट ऑफ फन मजा करने के लिए पूछा और पता है उसने क्या आंसर दिया मैं अभी तक मुझे यह बात याद है कहा कि देखो यह तो काल की गति है काल की गति के अनुसार सब कुछ होता है अभी देखिए मैं ऐसा आश्चर्य चकित हो गया मैंने यहां पर हिस्ट्री पढ़ के रखा है स्वामी जी को पढ़ के रखा है ये सब फिलोसोफी पढ़ के रखी है इसके कितने कितने कॉम्प्लिकेटेड आंसर हम दे सकते हैं कि हां भाई हिस्टोरिकल य फैक्टर्स थे फिर मलब बहुत कुछ आप बोल सकते हैं किंतु एक लड़के ने जो फट कर के जो सिंपल एक उत्तर दे दिया कि काल की गति के अनुसार यह चढ़ाव और उतार चलता रहता है तो मैंने सोचा कि बाचा कितना ही आप एनालिसिस कर दीजिए किंतु यह जो एट द बॉटम ऑफ द पाइल जाकर के आपको इसी को स्वीकार करना होगा क्योंकि आप कितना सब कुछ आप एनालिसिस करके इतना बड़ा देश है बहुत सारे कॉम्प्लिकेटेड फैक्टर होते हैं ह्यूमन पॉसिबल नहीं है ह्यूमन पॉसिबल नहीं है कि हम सभी फैक्ट को कैलकुलेट करके उसका एक फाइनल आंसर डिस्टल करें पॉसिबल ही नहीं है कुछ ऐसी सरल एक्सप्लेनेशन को एट द एंड ऑफ द डे हमको स्वीकार कर लेना होगा मां के एक सेवक थे हरि प्रेमानंद जी महाराज तो बड़े ही सरल थे एकदम मैंने चुपचाप रहते थे और गांव के थे तो हृदय भी बड़ा सरल था पढ़ाई लिखाई की तो कोई प्रश्न ही नहीं आता और जो किंतु मां की सेवा इतनी निष्ठा के साथ करेंगे कि सभी लोग उनको देखकर के यह इंप्रेस हो जाते थे क्या सरल है किंतु सेवा का भाव इनका बड़ा स्ट्रांग है अभी अभी क्या होता है कि मां के पास में तो बहुत सारे लोग कलकाता से साधु ब्रह्मचारी भक्त वॉलंटस अधिकारी माने ब्रिटिश गवर्नमेंट में तो बहुत सारे इंडियन थे अच्छ अच्छी-अच्छी पोस्ट के ऊपर में वे लोग भी आकर के मां के चरणों में बैठ कर के मां के पास में दीक्षा लेते थे मां को सब प्रश्न करते थे कि मां ये मेरा क्या होगा फिर वो जो सब आध्यात्मिक प्रश्न है बड़े-बड़े प्रश्न तो मां भी ब बड़े अच्छे अ से उनको उत्तर देती थी तो अभी हरि प्रेमानंद जी महाराज चुपचाप देख रहे हैं तो एक बार उनको मां के साथ में रात को बैठे थे और कोई नहीं था तो उन्होंने एकाएक मां को पूछा कि मां ये कुंडलिनी क्या है ये कुंडलिनी कैसे जागृत होती है तो मां तो एकदम आश्चर्य टेकन अ बैक इंग्लिश में कहते हैं ना एकदम आश्चर्य चकित हो गई अरे ये हरि बेचारा बिल्कुल सरल लड़का उसको तो जो काम देंगे वो करेगा फिर बाद में बैठ कर के जप करेगा अभी एकाएक कुंडलिनी के बारे में क्या पूछ रहा है तो फिर माने एकदम रहस्य करते हुए कहा माने मजाक करते हुए कि क्या तुमको कुंडलिनी जागृत करनी है क्या तो हरि महाराज बेचारे एकदम शर्मिंदा हो गए नहीं नहीं नहीं मैं तो वैसे ही पूछ रहा था क्यों पूछ रहे थे बाकी सब लोगों को बातें करते हुए सुना था इसलिए तो ऐसे जो सरल लोग होते हैं वो कभी-कभी ये सब सुन कर के पता नहीं वो क्या कुछ कह देते हैं तो यह जो जोन लोक की थिरी है टेबुला राजा कि बच्चे का जन्म होता है एक ब्लैंक स्लेट के साथ में बिना किसी एक्सपीरियंस के साथ में बिना किसी मेमोरी के साथ में और धीरे-धीरे करके जब बड़ा होता है तो जिस परिस्थिति में वह रहता है उस परिस्थिति में वह सब कुछ सीखता है तो यह अच्छी बात है यह थिरी एक तरह से अच्छी इसलिए है कि भारत में भी यह जो छुआछूत की प्रथा थी और यूरोप में भी दूसरे देश पर राज करने का हमारा डिवाइन राइट है यह सब इस थिरी ने काट दिया किंतु ये थिरी नेशनल लेवल पे सोशल लेवल पे इस बात को काटती है इंडिविजुअल लेवल यह थिरी काम नहीं करेगी इंडिविजुअल लेवल पर तो हमको कर्म का सिद्धांत पिछले जन्म से हम जो इस संस्कार के जो यह हमारा बैलेंस है बैंक बैलेंस संस्कार का बैंक बैलेंस व लेकर आए हैं इसको स्वीकार करना ही हो अभी स्वामी जी समझाते हैं कि किस तरह से हम इस बात को डेवलप करेंगे इस आइडिया को डेवलप करेंगे क्या कहते हैं स्वामी जी वी सी दैट द पावर ऑफ एक्वायरिंग नॉलेज वेरीज इन ईच इंडिविजुअल एंड दिस शोज दैट ईच वन ऑफ अस हैज कम विथ हिज ओन फंड ऑफ नॉलेज हमने देखा कि प्रत्येक मनुष्य के भीतर में ज्ञान प्राप्त करने की शक्ति विभिन्न विभिन्न तरह की है और हम सभी लोग इस डिफरेंट डिफरेंट तरह की ग्रास्पिंग कैपेसिटी कहो ना कि कंसंट्रेशन पावर कहो ना कि विल पावर कहो यह डिफरेंट डिफरेंट कैपेसिटी लेकर के हमारा जन्म हुआ है ईच वन ऑफ स कम विथ हिज ओन फंड ऑफ नॉलेज हम सभी ने अपना खुद का फंड हम सभी लोग अपना खुद का नॉलेज का बैंक बैलेंस लेकर के नॉलेज का डेटाबेस लेकर के जन्म धारण किया है नॉलेज कैन ओनली बी गट इन वन वे द वे ऑफ एक्सपीरियंस देर इज नो अदर वे टू नो ज्ञान सिर्फ एक्सपीरियंस या तो अनुभूति के माध्यम से ही प्राप्त कर सकते हैं जिका प्राप्त करने का और कोई तरीका नहीं है यदि मेरे पास में एक्सपीरियंस नहीं है तो मेरे पास में नॉलेज नहीं है इफ वी हैव नॉट एक्सपीरियंस्ड इट इन दिस लाइफ देन वी मस्ट हैव एक्सपीरियंस इट इन अदर लाइव्स यदि मेरे पास में एक नॉलेज है जिसका कि एक्सपीरियंस मुझे इस जन्म में नहीं हुआ है तो उसका एक्सपीरियंस पूर्व जन्म में अवश्य हुआ होगा का कौन सा नॉलेज की बात कर रहे हैं स्वामी जी कहते हैं हाउ इज इट दैट द फियर ऑफ डेथ इज एवरी वेयर मृत्यु भय सब जगह पर है क्यों ऐसा है भाई ऐसा तो नहीं है कि बच्चे का जन्म आज हुआ और दूसरे ही दिन वह मृत्यु का भई उसके भीतर में चला गया उसने तो कोई टेलीविजन वगैरह देखा ऐसा हो सकता है आजकल तो क्या है मोबाइल वगैरह जो लोग देखते हैं ना तो मोबाइल में वो ऐसा वो मृत्यु का ऐसा कोई सीन आया होगा तो बच्चे ने तो यह सब कुछ नहीं देखा तो उसके मन के भीतर में यह मृत्यु का भय आया कहां से अ लिटिल चिकन इज जस्ट आउट ऑफ एन एग एंड एन ईगल कम्स एंड द चिकन फ्लाइज इन फियर टू इट्स मदर अभी यह अंडे में से एक मुर्गी के बच्चे ने जन्म लिया किंतु जन्म लेते के साथ में ही उसने देखा कि एक बाज पक्षी ईगल उसको खाने के लिए आ रहा है और उसको देख कर के ही बच्चा डर के मारे अपनी मां की गोद में जाकर के छुप गया उसको कैसे पता चला भाई ये ईगल जो है यह बाज पक्षी उसको खाने के लिए आ रहा है अभी तो अंडे में से निकला है यह नॉलेज यह मेमोरी यह इंस्टिंक्टिव फियर आया कहां से यह फियर यदि पिछले जन्म का नहीं है तो इस जन्म में तो हो ही नहीं सकता और यह फियर एक्सपीरियंस से ही बना होगा पिछले जन्म में उसने मृत्यु देखा होगा और फिर उसी मृत्यु का भय उसके इसी जन्म के साथ में फिर से आया है देयर इज एन ओल्ड एक्सप्लेनेशन स्वामी जी कहते हैं कि एक दूसरी एक्सप्लेनेशन है पू पूर्व जन् पुनर्जन्म को छोड़ कर के एक दूसरे एक्सप्लेनेशन पुनर्जन्म वाद बड़ा ही क्लियर है कि पिछले जन्म में मृत्यु देखा है इसलिए इस जन्म में मृत्यु बए सात में किंतु इसके अलावा दूसरी एक्सप्लेनेशन क्या है तो स्वामी जी साथ-साथ में लिखते हैं आई शुड हार्डली डिग्निफाई इट बाय सच ए नेम माने ये जो एक्सप्लेनेशन है मैं इसको एक्सप्लेनेशन कहना ही नहीं चाहता इसको एक्सप्लेनेशन कहना उचित ही नहीं है किंतु फिर भी चलिए देखते हैं इट इज कॉल्ड इंस्टिंक्ट इसको कहते हैं इंस्टिंक्ट या तो फिर इंस्टिंक्ट का हिंदी क्या करेंगे अभी थोड़ा देखना पड़ेगा जो भी है इंस्टिंक्ट हम सभी लोगों को समझ में आता है तो ये इंस्टिंक्ट इसको कहते हैं व्ट मेक्स दैट लिटल चिकन जस्ट आउट ऑफ द एग अफ्रेड टू डाई अभी अंडे में से जो मुर्गी के बच्चे का जन्म हुआ है उसको मृत्यु का भय किस तरह के उसके भीतर में आ गया हाउ इज इट दैट एज सून एज अ डकलिंग हेज बाय अ हैन कम्स नियर वाटर इट जंप्स इन टू इट एंड स्विमस जदीने एक बच्चे को जन्म दिया और यह बच्चा जैसे ही पानी के पास में आता है पानी में जंप लगा कर के वह तैरना शुरू कर देता है ये रना तो इस जन्म में सीखा नहीं है अभी तो जन्म हुआ है तो यह रना कहां से सीखा भय मृत्यु का कहां से आया इट नेवर स्वेम बिफोर नोर सो एनीथिंग स्विम यह बतक के बच्चे ने पहले कभी तेरा नहीं है ना ही उसने किसी को तैरते हुए देखा है अभी तो जन्म हुआ है पीपल कॉल इट इंस्टिंक्ट लोग इसको इंस्टिंक्ट कहते हैं इट इज अ बिग वर्ड बट लीव्स अस वेयर वी वेर बिफोर बहुत बड़ा शब्द है किंतु जहां से हमने शुरुआत की थी वहीं पर जाकर के हमको खड़ा रख देता है लेट अस स्टडी दिस फिनोमिना ऑफ इंस्टिंक्ट य इंस्टिंक्ट क्या है इसके बारे में थोड़ा सा चिंतन करते हैं क्या है अ चाइल्ड बिगिंस टू प्ले ऑन द पियानो एक बच्चा पियानो पे पियानो सीखने की शुरुआत करता है एट फर्स्ट शी मस्ट पे अटेंशन एवरी की शी इज फिंगरिंग जब सबसे पहले बच्चा पियानो सीखने की शुरुआत करता है तो बच्चा क्या करता है कि प्रत्येक की प्रत्येक जो इसकी स्विच है उसके ऊपर में उसका उसको फोकस करना पड़ता है सा तो ये सा फिर रे तो य रे यहां पे है इसको देखो सा रे ग मा प धा नि सा देख देख करके प्रत्यक की वो प्रेस करता है जैसे हम टाइपिंग सीखते हैं क्योंकि मैं पब्लिकेशन में काम करता हूं तो ये टाइपिंग का उदाहरण ये जो ए एस डी एफ ये जे जे एफ के सेमीकलन ये जो कीबोर्ड है पहली बार हम टाइपिंग सीखते हैं तो क्या करते हैं कि ए ए क्या है तो ये ए है जैसे विवेकानंद लिखना है तो वी कहां पे है तो ये है वी आई कहां पे है तो यह है आई पछे फिर से वी कहां पे है तो ये वी ऐसा करके प्रत्येक की को देखकर देखकर हम टाइप करते हैं किंतु एक बार टाइपिंग आ गया तो मैं ऐसे अपने सामने किताब रखूंगा उसके सामने देकर के फट फट ब बढ़ करके टाइप करूंगा यहां तो इतने सारे टाइपिस्ट है उनकी जबरदस्त स्पीड होती है टाइपिंग करने की बड़बड़ बड़बड़ करके टाइप करेंगे इतना 1015 पेजेस पांच 10 मिनट में खत्म कर देंगे इतनी उनकी स्पीड होती है तो यह जो लर्निंग प्रोसेस है इसके बारे में स्वामी जी बता रहे हैं यह तो एक चीज दूसरा यहां पे इंटरेस्टिंग थिंग है कि स्वामी जी बच्चे के बारे में कह रहे हैं बच्चे को आइडेंटिफिकेशन कि बच्ची एक्चुअली शी बच्चा होता है तो ही कहेंगे और बच्ची होएगी तो शी कहेंगे कि शी इज लर्निंग पियानो अभी ये इंटरेस्टिंग क्या है पता है वैसे तो आप बच्चे का उदाहरण रैंडम दे रहे हैं तो ही भी कहेंगे शी भी कहेंगे बच्चा भी कहेंगे बच्ची भी कहेंगे तो भी चलेगा किंतु यहां पे एक इंटरेस्टिंग बात है ये आजकल ये जो स्त्रियों के जो वीमेन एंपावरमेंट का युग है तो स्त्री सशक्तिकरण का युग तो जितने भी ऑथर होते हैं ना जब रेंडम किसी को रेफर करना होता है तो ही करके रेफर करेंगे क्योंकि पुरुष एक मस्कुलस है तो मेल बायाजी में जितने भी लेखक है जितने भी वक्ता है सब लोग ज्यादातर पुरुष रहते हैं तो किसी को भी रेफर करना है रैंडम तो कहेंगे वोह ऐसा कर व ही करके रेफर करेंगे किंतु बिकॉज कि यह स्त्री सशक्तिकरण का युग है आजकल के बहुत सारे लेखक ये पॉइंट बनाते हैं एक मैंने एक वो प्लान करते हैं कि जब किसी को रेफर करना है ना रैंडम तो शी करके रेफर करेंगे जिससे कि ये जेंडर इंक्लूजन होता है सभी लोगों का समावेश हो सकता है सिर्फ ये पुरुष प्रधान नहीं है स्त्रियों का भी इक्वल अधिकार है बोलकर के शी करके किसी को रेफर करो नहीं कि ही करके तो स्वामी जी उस समय ये देखिए कि ये फेमिनिज्म वगैरह जो भी है वो तो आ जाया है स्वामी जी उस समय रैंडम किसी को रेफर करना है तो शी करके कहते हैं अर्थात बच्चे का उदाहरण नहीं देते बच्ची का उदाहरण देते हैं स्वामी जी के मन में यह सब मॉडर्न आइडियाज को वेदांत के द्वारा ही हम लोग आजकल यह जो फॉरेन वाले कहते हैं ना कि यह ब्रिटिश कांस्टिट्यूशन है उसमें से इंडिया ने सीखा यह आजकल डेमोक्रेसी कहां से आया ब्रिटिश लोगों ने हमारे पर राज करके जबरदस्ती हमको डेमोक्रेसी हमारे सर पर डाला वरना तो यहां डेमोक्रेसी था ही नहीं अभी यह तो समझ में नहीं आता कि किसी को गुलाम बना कर के कैसे डेमोक्रेसी सिखा सकते हैं किंतु खर आजकल का ये जो ट्विस्टेड थिंकिंग है उसके अनुसार कि जो कुछ भी हमको मिला है सब यूरोप में से मिला है तो ये जो छोटी-छोटी चीजें स्वामी जी को पढ़ के पता चलती है कि कैसे वेदांत में पुरुष और स्त्री दोनों का समान अधिकार है दोनों का समान महात्म्य है इस सोसाइटी में तो रेंडम कभी किसी को रेफर करना है तो शी करके करेंगे बच्ची के रूप में करेंगे नहीं कि बच्चे के रूप में स्वामी जी कहते हैं कि जद एक बच्ची पियानो सीखी है तो क्या करेगी प्रत्येक की है प्रत्येक स्विच है उसके ऊपर में वह ध्यान देगी यह सार फिर रियर रे फिर गा म ऐसा करके किंतु एज शी गो ऑन एंड ऑन फॉर मंथ्स एंड यर्स द प्लेइंग बिकम ऑलमोस्ट इवोलंटियर इंस्टिंक्टिव किंतु सालों साल भर तक बच्ची जब पियानो सीख है तो यह पियानो सीखना उसके लिए इंस्टिंक्टिव हो जाता है फिर प्रत्येक स्विच के ऊपर में उसको ध्यान नहीं देना पड़ता अच्छा वैसे तो मैंने यह कह दिया कि स्वामी जी ने ऐसा रैंडम किसी को कहा है तो बच्ची के रूप में किंतु यह भी एक देखने की बात है कि फॉरेन में जो स्त्रियां बहुत ज्यादा पियानो वगैरह सीख है तो स्वामी जी के मन में शायद किसी का चित्र होगा कि उसको पियानो सीखते हुए देखा होगा तो स्वामी जी ने शायद इंस्टिंक्टिवली उसका नाम दिया होगा पता नहीं किंतु यह भी एक आईडिया हो सकता है तो जो भी है पियानो अभी हम सबने पियानो बजाते हुए देखा है टीवी पर भी देखा होगा और हारमोनियम तो हमने रामकृष्ण सेंटर के किसी भी आश्रम में जाएंगे तो कोई भी सन्यासी महाराज है एकदम जब खंडन आरती होती है कोई भी भजन गाते हैं तो कितना स्मूथली व हार नियम चलाते हैं उनको को प्रत्येक स्विच के सामने नहीं देखना कि ये कौन सा सूर इस स्विच के साथ में एसोसिएटेड है बढ़िया मजे से वो पियानो चलाते हैं तो यह क्या है पहली बार तो एक-एक की को एक एक स्विच को आपको देखना पड़ता है किंतु बाद में यह प्रोसेस इंस्टिंक्टिव हो जाती है कीबोर्ड चलाना पियानो चलाना कोई भी चीजें ड्राइंग मेरे ड्राइंग के टीचर थे तो मैंने उनको हम लोग तो ड्राइंग करते थे तो पता नहीं क्या-क्या ड्राइंग करते थे उटपटांग बचपन में क्लास में किंतु टीचर थे हमारे वो चौक लिया वो ब्लैकबर्ड है उसके ऊपर में आंख बंद करके पट पट पट करके 510 मिनट में ऐसा एक कॉम्प्लिकेटेड ड्राइंग बना देंगे गुला कोई भी एक फूल बना देंगे कोई भी एक र्मेंस बना देंगे हम लोग देख कर के आश्चर्य चकित हो जाएंगे कि कितना पावर है उनके पास ड्राइंग करने का तो ऐसा तो नहीं है कि जब बचपन से ही जन्म लिया तो ऐसा सुंदर ड्राइंग करना सीखा होगा वो कितने सालों की मेहनत के बाद में ये ड्राइंग सीखते हैं अी यह पियानो का हो ना कि ड्राइंग कहो ना कि यह कीबोर्ड कहो कोई भी ना कोई भी विद्या आप ले लीजिए कोई भी विद्या में पारंगत होना है तो आपको सालों साल का अभ्यास चाहिए किंतु उस अभ्यास के बाद में बहुत कुछ इंस्टिंक्टिव हो जाता है सीखते हैं धीरे-धीरे प्रत्येक स्टेप पे अटेंशन देख कर के किंतु एक बार उसमें मास्टरी आ जाती है तो फिर हम इसको इंस्टिंक्टिवली कर देते हैं आजकल की एक थियर है फ्लो ये जो बड़े-बड़े सुपर एथलीट होते हैं ना वो फ्लो में आ जाते हैं एक लेवल पे पे जाकर के जो जोगिंग जो रनर है मैराथन रनर है या जो स्प्रिंट रनर है वो पहले तो जैसे क्रिकेट है क्रिकेट में पहले तो आपको प्रत्येक बॉल के ऊपर में अटेंशन देक के सीखना पड़ता है किंतु ये जो सचिन तेंडुलकर वगैरह के लेवल पे चले जाएंगे आप इंस्टिंक्टिवली बेट चलाएंगे आपको वो जो डायनेमिक है कि अच्छा इस तरह से बोल आ रहा है इस तरह से बेट को पकड़ना है इस तरह से मेरा वो जो पोस्चर होना चाहिए बॉडी पोचर होना चाहिए यह सब चीजें फिर चली जाती है फिर वो जो क्रिकेटर वो फ्लो में चला जाता है सब कुछ इंस्टिंक्टिव हो जाता है सब कुछ मशीन की तरह परफेक्टली कार्य करता है तो यह जो इंस्टिंक्टिव हो जाना या तो फिर आज की थिरी के अनुसार एक फ्लो में आ जाना यह कैसे होता है बहुत लंबे अभ्यास के बाद में ही होता है तो स्वामी जी क्या कहते हैं व्हाट वाज फर्स्ट डन विथ कॉन्शियस विल डज नॉट एक्वायर लेटर ऑन एन एफर्ट ऑफ द विल जो पहले प्रत्येक स्टेप पर ध्यान दे दे करके सीखना पड़ता था बाद में प्रत्येक स्टेप पर ध्यान नहीं देना पड़ता है वह इंस्टिंक्टिव हो जाता है तो यह है इंस्टिंक्ट कि पहले के जन्म में जो हमने अभ्यास करके सीखा होगा वह इस जन्म में इंस्टिंक्ट हो गया है किंतु यह एक्सप्लेनेशन बड़ा लंबा है तो इसको हम डिटेल में कल आगे फिर से देखेंगे आज ओम शांति शांति शांति हरि सत श्री राम कृष्णा
Questions & Answers
फ इसका एक एक्सप्लेनेशन यह हो सकता है कि ठाकुर और स्वामी जी के पास में जो अधि उच्च अधिकारी आते थे कि दे नेबल टू मोल्डिंग माने उनको आप ट्रेन कर सकते थे जबकि जिनको कहेंगे कि म अधिकारी वह सब मां के पास में आए हैं तो मां को भी पता है कि इनको ज्यादा कुछ कहने से वो बात नहीं बनेगी अभी जैसे एक है कि एक लड़का मां के पास आता था अच्छे घर का था फिर एक बार उसका पतन हुआ और किसी महिला के साथ में उसका एक अफेयर चला तो अभी जब वह मां के पास आया तो बहुत सारे लोग बोले मां अब इसको क्यों आने देती है इसका तो चरित्र अच्छा नहीं है इसको जद आप यहां पर आने देगी तो बाकी लोगों को भी ये द उल्टा एक असर पड़ेगा तो माने तो ऐसा काम मां ने कहा कि मैं मां होकर के अपने बच्चे को ना आओ ऐसा कैसे कह सकती हूं जब मां ने ऐसा कहा तो अभी कोई क्या कुछ बोलेगा तो फिर सब लोग चुप रह गए यह लड़का मां के पास आता है किंतु धीरे-धीरे करके उसमें रिफॉर्मेशन भी होता है तो अभी मां को पता है दो चीज है मां का एक एक्सेप्टिंग नेचर है वो एक डेफिनेशन है दूसरा एक है कि मां को पता है बोलने से लाभ नहीं है अभी ये लड़के ने जभ ऐसा कोई कार्य किया तो जानबूझकर मैं सोच समझ कर के किया उसको नहीं पता है ऐसा तो नहीं है कि ये मैं मैं गलत कर रहा हूं य नहीं पता ऐसा तो नहीं है पता ही है कि यह गलत कर रहा हूं किंतु फिर भी यह जो मन का जो एक होता है ना जो पेजन वगैरह काम कांचन का जो प्रवाह उसको कैसे रोकेंगे तो मां को पता है कि मध्यम अधिकारी है या मंद अधिकारी है बोलने से लाभ नहीं है धीरे-धीरे करके होगा तो दैट इज वन डेफिनेशन और अमजद के बारे में जो आपने कहा अमजद एक बार वो डकती करने के लिए गया था तो जो वहां पर चौकीदार वगैरह होंगे उन्होंने किसी ने तलवा मार दी तो तलवार का घाव जो हुआ फिर उसी में से उसका मृत्यु हुआ तो यह बात मां के पास में आई तो मां क्या कहती है पता है अरे बाप रे देखो देखो मुझे तो पता ही था कि यह डकती करने के लिए जाता है इसलिए मैं तो वो जब आता था तो इसको बड़ा ही प्रेम से रखती थी बुलाती थी बैठा देती [हंसी] थी मां को भी पता था और आखिर में वह डके द करते करते ही उसकी मृत्यु हुई तो मां को पता है कि देखिए बोलने से होने वाला नहीं है परिस्थिति जो होती है अमजद वह जो पूरा जो गांव है ना यह जो अमजद जिस गांव में रहता था मुस्लिम लोगों का जो चार पांच गांव थे वहां पे इकोनॉमिकल कंडीशन इसका मैंने पूरा पढ़ा है डिटेल में कि किस तरह से वहां प इकोनॉमिक कंडीशन यह लोगों ने जमींदार लोगों ने शोषण करके करके ऐसी परिस्थिति लाकर ड़ी कर दी कि जीवन निर्वाह करना है तो डकती ही करनी पड़ेगी उसके अलावा कोई चारा ही नहीं है तो क्या करें ऐसा बोल के पूरा एक पढ़ा था मैंने तो मा मा ये सब मान लीजिए इंस्टिंक्टिव इंटेलेक्चुअली यदि नहीं जानेंगे तो इंस्टिंक्टिवली मां को पता है कि बोलने से लाभ नहीं है सो दैट इज वन एक्सप्लेनेशन ना मां के पास में अंतर दृष्टि थी अत दृष्टि की मदद से वह देख लेती थी किसका क्या संस्कार है वो एक बार वो ठाकुर ब्रह्म समाज में गए तो किसी ने उनको पहचान करवाई किय समाध याय पंडित है इन्होंने बहुत सारे वेद वेदांत पढ़े हैं तो ठाकुर ने कहा कि हां इसकी आंखों में से दिखता है इसके मन के भीतर में जैसे काच के भीतर में कोई चीज रखी तो कितना स्पष्ट दिखती है तो ठाकुर ने कहा इसकी आंखों से आंखों के भीतर में झाग करके इसका मन बड़ा क्लियर दिखता है या इनके संस्कार ठाकुर आंखों में देख कर के देख समझ सकते हैं एक अंतर दृष्टि होती है संस्कार देखने की समझने की ईश्वर ईश्वर के भीतर में रस नहीं है इसमें रस डाल के सरस कर दो ठाकुर कहते हैं रसो वै सह जिसको वेद में कहा है रस स्वरूप इसको ना कि कह दिया कि रस नहीं पोएटिक लगता है वो जो मुझे तो वो बात बहुत अच्छी लगी एक्चुअली केशव सैन ने जो कहा ना कि मां दुर्गा की प्रतिष्ठा करेंगे तो ये गणेश कार्तिक जया विजया सब तो आएगी तो दुर्गा के लक्ष्मी सरस्वती दोनों तो आएगी तो तो फिर ये ठाकुर केशव सैन कहता है कि यदि आपको यह भक्ति मने ये विक्रम चाहिए शौर्य चाहिए धन प्राप्ति चाहिए तो मां दुर्गा को हृदय में बिटा बड़ी सुंदर व्याख्या है ठाकुर ने कहा कि देखो इधर उधर मत जाना सिर्फ यहां प आना मैं थोड़ा हिंदी में दोहरा देता हूं सबके लिए कि बड़ा ही सुंदर सीमा दीने उदाहरण दिया कहती है किय पॉकेट मार राजा महाराज के पास में आया तो राजा महाराज ने उसको पूछा क्या कर रहे हो तो बोला हम लोग चोरी करते हैं पॉकेट काटते हैं तो फिर फिर वो उसी को लेकर के बढ़िया सा डिस्कशन होने लगा पॉकेट मार को पॉकेट काटने का जितने तरीका आते थे उससे ज्यादा तरीके राजा महाराज ने उसको सिखा दिए हंसी मजाक हुआ प्रसाद वसाद लेकर के विदाय भी हो गए ये लोग तो प्रश्न यह है सुंदर बात है मुझे भी नहीं पता था इस बात का सुंदर इसका प्रश्न हो सकता है कि राजा महाराज ने उसको ऐसा क्यों नहीं कहा कि भाई यह सब गलत काम बंद कर दो प्रश्न यह बात यह है कि उसको नहीं पता है यह कोई प्रश् ही नहीं है जो पॉकेट मार है पता ही है कि वह गलत काम कर रहा है उसको कोई यह सिखाने की उपदेश देने की जरूरत नहीं है उपदेश देने से कोई बात नहीं बनने वाली क्योंकि जिस परिस्थिति ने उसको पॉकेट मार बनाया है जिस परिस्थिति ने उसको इस तरह से क्रिमिनल काम करने के लिए प्रेरा है वह परिस्थिति जब तक नहीं जाएगी उस पेट में खाने का कहां से मिलेगा तब तक यह होने वाला नहीं है तो उसके साथ में हंसी मजा करके धीरे-धीरे करके धर्म और आध्यात्मिकता के संस्कार इसके मन में बिठा दिए राजा महाराज यह भी कर राजा महाराज ने चलो उनको उपदेश नहीं दिया क्यों नहीं दिया एक प्रश्न है दूसरा है कि राजा महाराज ने उसको भगा क्यों नहीं दिया यह भी तो एक प्रश्न है अपोजिट क्वेश्चन कि राजा महाराज को पता था कि उपदेश देने से लाभ नहीं है तो उसको भगा भी सकते थे तो भगाया नहीं बिठाया बढ़िया मजे से बातें की क्यों क्योंकि राजा महाराज को यह पता है कि उपदेश देकर के नहीं किंतु धर्म की बातें करते करते धीरे-धीरे करके उसके मन में यह संस्कार बनेगा कि हां ये अच्छाई भी इस जगत में है बहुत बार होता है है ना कि हम लोगों को बुराई ही जगत में अनुभव करने को मिलती है जिसका इस तरह का नसीब होता है बेचारे का बचपन से ही उसने बुराई ही देखी है तो बुराई के ही संस्कार उसके मन में बैठ गया किंतु जब किसी अच्छे साधु के साथ में सत पुरुष के साथ में महामानव के साथ में पहचान होती है तो पहले ही दिन वो चेंज नहीं हो जाएगा सालों साल इसके साथ में यह संग करते-करते साधु संग सत्संग का महात्म हमारे शास्त्र में इसीलिए कहा गया है कि सिर्फ उपदेश देकर के मनुष्य चेंज नहीं होगा स संग से चेंज होगा क्योंकि सत्संग क्या करता है धीरे-धीरे करके भीतर का य जो मेला है उसको धोता है तो यह संस्कार को चेंज करना है सो दैट इज अ मच डीपर थिरी इसके भीतर में जो है यहां पर एक तीसरा भी क्वेश्चन हो सकता है दूसरा भी एक हो सकता है कि डायरेक्ट डिसाइल जो कि ठाकुर की दृष्टि में तो उनको सर्वोच्च अधिकारी थे उनको भी माने व से कोई डांटने का काम नहीं किया वो जो रोटी वाली बड़ी फेमस बात ठाकुर आकर के मां को कहते हैं लोग बच्चों को ज्यादा रोटी मत खिलाना रोटी रात को ज्यादा खाएंगे तो सो जाएंगे और जब ध्यान नहीं करेंगे रात तो है ध्यान करने के लिए मां ने क्या कहा मेरे बच्चों का भविष्य मैं देखूंगी तुमको उनकी चिंता करने की जरूरत नहीं है तो माने जो सर्वोच्च अधिकारी थे उनको भी मां ऐसा कोई मतलब डांट करके सुधारने का प्रयास नहीं करती थी वो भी एक इंटरेस्टिंग एक ऑब्जर्वेशन हो सकता है यहां पे वही बात है कि एक मदर्स नेचर और एक फादर नेचर ये स्टिक एंड कैरोट लर्निंग में ये बड़ा थिरी है कि स्टिक एंड कैरोट बच्चा जब अच्छा काम करता है उसको रिवर्ड दो और बुरा काम करता है तो उसको पनिशमेंट दो यह जो पावलो का थिरी है ना कि किस तरह से किसी भी पशु है या उसको एक कोई पार्टिकुलर बिहेवियर सिखाएंगे जैसे कि एक कोई अी अभी जैसे ये जो मेज होता है ना मेज यानी कि वो जो भुलभुलैया एक चूहे को सिखाएंगे कि भुलभुलैया में से बाहर कैसे निकलना तो जबी वह सही रास्ता लेता है तो उसको एक चीज का टुकड़ा खाने को देते हैं गलत रास्ता देते हैं तो तो हल्के से इलेक्ट्रिक करंट देते हैं तो चूहा कुछ ही समय में सीख जाता है कि यह रास्ते पे जाने से मुझे रिवर्ड मिलेगा इस रास्ते पे जाने से पनिशमेंट मिलेगा यह जो न्यूरल नेटवर्किंग है व भी इसी थिरी पे काम करता है कि न्यूरल नेटवर्किंग में कंप्यूटर आर् एआई एल्गोरिथम जब सही पहचानता है उसको रिवर्ड मिलता है गलत रिकॉग्निशन करता है तो पनिश अभी रिवर्ड पनिशमेंट डिजिटल लेवल पे होता है किंतु यह जो रिवर्ड एंड पनिशमेंट का थिरी स्टिक एंड कैरोट का थिरी एक बड़ा ही फंडामेंटल थिरी है एजुकेशन में तो ये मदर एंड फादर का रोल सोसाइटी में फैमिली में यही होता है फादर वैसे डिसिप्लिन री होते हैं बच्चा जब गलत कुछ करेगा तो वो डांट और मां होती है कि मां सब समय रिवर्ड देती रहती है तो क्या है ना कि यह रोल स्प्लिट हो गए हैं हालांकि दोनों का यह होना चाहिए फादर भी जद रिवर्ड भी देंगे पनिशमेंट भी देंगे मां भी रिवर्ड देगी पनिशमेंट किंतु ऐसा होता नहीं है एक ह्यूमन नेचर जो होता है फादर नेचरली डिसिप्लिन होते हैं थोड़े से कड़े मिजाज के होते हैं मां वैसे ही सॉफ्ट होती है बच्चों की गलतियों का नजरअंदाज कर देती है तो ये रिवर्ड एंड पनिशमेंट का रोल स्प्लिट हो गया है फादर और मदर में तो दोनों आवश्यक है तभी बच्चे का एक ओवरऑल डेवलपमेंट होगा आपका जो उत्तर है ना आपके प्रश्न के भीतर में ही था आपने शब्द क्या यूज किया वेदांत को प्रैक्टिकल कैसे बनाए तो प्रैक्टिकल वेदांत के ऊपर में तो स्वामी जी ने बढ़िया सा लेक्चर सीरीज दे दिया है बता है ना प्रैक्टिकल वेदांत के तीन लेक्चर है स्वामी जी क्या कहते हैं कि वेदांत का प्रैक्टिकल स्वरूप क्या है सभी के भीतर में एक ही ईश्वर को देखना और उनकी यह मने मूर्ख नारायण दरिद्र नारायण रोगी नारायण इनकी तो सेवा करने के लिए शिव रूप से ईश्वर को जीव की पूजा करना तो यह तो प्रैक्टिकल एस्पेक्ट हो गया वेदांत का वो जो आजकल ये जो आपने कहा कि ये क्लाइमेट चेंज वगैरह जो एक मेजर इश्यूज है टुवर्ड इन फेस ऑफ ह्यूमैनिटी हमारे सामने तो इसके पीछे में देखिए कि ये जो बड़े-बड़े ट्रस्ट होते हैं बड़े-बड़े फाउंडेशन है अमेरिका के ये जो बिल गेट्स फाउंडेशन है रके फेलर फाउंडेशन है इसमें बहुत अच्छा काम कर रहे हैं इसको एड्रेस करने का तो यह फाउंडेशन कहो ना कि ट्रस्ट कहो किसने उसको प्रेरणा दी बनने की तो हमको तो पता है कि वो रोके फेलर स्वामी जी के पास आया था उसके साथ में बैठ कर के बहुत सारी आर्गुमेंट की फिर आखिर में उसको पता चला कि नहीं धन सं ति जो मिली है इ इन ट्रस्ट फॉर द सोसाइटी तो इस पैसों को मैं अपने बच्चों को नहीं दे दूंगा व बिना मतलब के वह उड़ा देंगे भोग भोग वगैरह करके बेटर है कि एक फाउंडेशन बनाओ ट फाउंडेशन विल वर्क फॉर द बेटरमेंट ऑफ ह्यूमैनिटी तो यह प्रैक्टिकल एस्पेक्ट ऑफ वेदांत वह भी तो स्वामी जी ने ही हमको समझाया है कि शिव ज्ञान से जीव सेवा अभी यह हमको लगता है वैसे इंडिविजुअल लेवल पर किंतु ऑर्डर को देखिए ऑर्डर क्या है ऑर्डर है कि कलेक्टिव लेवल पर वेदा को यह कर रहा है कलेक्टिव लेवल पे यह जितना भी काम हो रहा है यह अपना ऑर्डर कर रहा है तो एक कलेक्टिव फॉर्म करने की स्वामी जी ने कहा अमेरिका में दैट आई हैव फॉलन इन लव तो वो जो उनके सामने जो एक लेडी खड़ी थी तो उसने पूछा हु इज शी स्वामी जी तो स्वामी जी ने कहा इट इज एन ऑर्गेनाइजेशन इट इज नॉट अ वुमन तो ये ऑर्गेनाइजेशन फॉर्म करके फॉर द बेटरमेंट ऑफ सोसाइटी काम करे दैट आइडिया इट सेल्फ हैज कम फ्रॉम द वेदांता तो ये फाउंडेशन फॉर्म करना ट्रस्ट बनाना इन जीओ बनाना यह मिशन बनाना दिस आर ऑल द डायरेक्ट लॉजिकल कल्मिनेशन ऑफ वेदांतिका बारे में मेरा हमारे सीनियर साधों के साथ में एक दो बार बात हुआ था तो किसी मैंने ही एक प्रश्न किया मैंने कहा कि अरे देखिए हम लोग जो काम कर रहे हैं बड़ा ही स्मॉल स्केल पे है हम लोगों की स्कूले वैसे तो बहुत सारी है किंतु कितने बच्चों को सिखाते हैं 20 लाख के आसपास बच्चे शायद है ऐसा मैंने लास्ट कहीं पर पढ़ा था तो 20 लाख वैसे तो संख्या बड़ी दिखती है कि भारत की पॉपुलेशन है 150 करोड़ विश्व की पॉपुलेशन है 750 करोड़ तो 750 करोड़ में से जद स्टूडेंट भी जद लेंगे तो 50 60 करोड़ के आसपास तो शायद स्टूडेंट हो जाएंगे तो कहां हम लोग 20 लाख के आसपास बच्चों को पढ़ाते हैं और कहां यह 20 25 करोड़ स्टूडेंट सामने बैठे हैं तो हम लोग तो उनको तो टच नहीं करते तो क्या लाभ है मिशन बनाने का तो महाराज जी ने उत्तर दिया था कि देखिए कि हमारा काम ऑर्गेनाइजेशन को एक्सपें नहीं करना हमारा काम है कि एक आइडियल दिखाना हमको देख कर के बाकी सब स्कूल्स देखे कि आइडियल स्कूल कैसे चलता है तो इसका उदाहरण मैंने राची में देखा था वहां नेतर हार्ट विद्यालय है एक विवेकानंद विद्यालय है बड़े महाराज मुझे लेकर गए थे तो हमारे से ही देख देख कर के वहां के जो कर्ता लोग है वो चलाते थे वहां का एडमिनिस्ट्रेशन था मैं देख कर के इतना इंप्रेस हो गया मैंने कहा बाहर में ऐसी स्कूल चलती है कितना सुंदर मैंने जदी आप नजरों से नहीं देखेंगे तो नहीं पता इतना मैंने एक के बाद एक मॉड्यूल ये लोग ऐड करते हैं यहां राजकोट में ही ये के वगैरह विद्यालय है जिनके की डायरेक्टर हमारे जो बड़े-बड़े साधुओं के साथ में उनका बड़ा अच्छा परिचय था बड़े महाराज के साथ में और हमसे सीख करके बहुत सारी चीजें वे लोग इंट्रोड्यूस करते हैं उनके सिलेबस में तो हमको एक आइडियल दिखाना है इस आइडियल को लेकर के बाकी सब स्कूल हमसे सीखे ऑफकोर्स यह एक एक दूसरा भी एक आईडिया है कि एक नॉन मॉनेस्टिक ऑर्गेनाइजेशन हाउसहोल्डर्स का भी एक ऑर्डर ऑर्गेनाइजेशन स्टार्ट हो जो वहां पे जाए जहां पे मोनेस्ट्री जा पा र है किंतु प्रश्न वही है जैसे कि शारदा मठ के साथ में हुआ शारदा मठ बनाने की जब बात थी तो हमारे सीनियर साधुओं ने स्पष्ट कर दिया कि बिल्कुल सेपरेट ऑर्गेनाइजेशन रहेगा ट्रस्टी बॉडीज उनकी बिल्कुल सेपरेट रहेगी अकाउंट सेपरेट होगा सब कुछ सेपरेट होगा देयर विल बी नो कनेक्शन बिटवीन रामकृष्ण मिशन एंड शारदा मिशन तो तभी वो ठीक-ठीक काम करेगा तो यहां पे भी यदि और कोई ऑर्गेनाइजेशन खड़ा करना है तो वो ग्रास रूट से आना चाहिए कि अब जैसे कि ये आशा दीदी अ कि जिन्होंने यह शारदा मठ की स्थापना के भीतर में जिनका कि इतना बड़ा हाथ था म इनका बड़ा रोल था बड़ी भूमिका थी तो अपने से जाकर के बेलूर मठ में आकर के झगड़ा करवा करवा करके उन्होंने शारदा मठ की स्थापना करवाने के लिए हमको प्रेरा था तो ऐसे ही ग्रास रूट से इस तरह के वॉलंटिली इकट्ठा होते हैं हम लोग यह कार्य करेंगे देन दे कैन टेक गाइडेंस फ्रॉम अस तो यह ग्रास रूट से आना चाहिए तो किंतु यह इंडिविजुअल लेवल ही संभव है पहले तो इंडिविजुअल लेवल पर लोग तैयार हो जिनका कि हृदय निर्मल हो जिनके विचार शुद्ध हो मन के भीतर में एक प्रैक्टिकल वेदांत क्या है आईडिया क्लियर हो फिर ये लोग कलेक्ट होंगे फिर ये ऑर्डर या तो ऑर्गेनाइजेशन बनाएंगे फिर ये ऑर्डर या ऑर्गेनाइजेशन वो धीरे-धीरे करके एक्सपें होगा देन ये जो मने ग्रास रूट में से जो आता है ना उसकी बात ही अलग है हम लोग ऊपर से जाके थोप नहीं सकते यह सब चीजें इसमें एकना फ्रेंचाइजी मॉडल है मैं राची में था तो सर्व शिक्षा अभियान गवर्नमेंट ने स्टार्ट किया था तो वहां पे उन्होंने क्या किया एक डायट फॉर्म किया डिस्ट्रिक्ट इंस्टिट्यूशन ऑफ एजुकेशन ट्रेनिंग और हमको क्या रिस्पांसिबिलिटी दिया गांव लेवल पे तो गवर्नमेंट का ऑर्गेनाइजेशन नहीं एनजीओ के साथ काम करेगा तो मुझे यह प्रोजेक्ट असाइन हुआ था गांव-गांव में जाना है प्रत्येक गांव में दो लड़को लड़का या लड़की वह देखेंगे कि उसका अच्छा एक पर्सनालिटी है बच्चे को सिखा सकता है तो उनको सिलेक्ट करना है फिर यह डाइट में लेकर आकर के खड़े कर देना है तो ऐसा प्र 3040 में से 80 990 लड़के लड़कियां खड़े हुए तो डायट उनको ट्रेन करेगा फिर यह स्टडी मटेरियल देगा और गांव में जाकर के छोड़ देगा अभी ये लड़के लड़कियां टीचर रूरल लेवल पे ही वे लोग वहां पर चलाएंगे अभी ऐसा नहीं है कि इस स्कूल की मालिक एक्चुअली डायट की है या सर्व शिक्षा अभियान की है दे आर मोर और लेस इंडिपेंडेंट उनको किंतु ट्रेनिंग सिलेबस मटेरियल स्टडी मटेरियल एग्जामिनेशन कंडक्ट बच्चों की एग्जामिनेशन कंडक्ट करना बच्चों को सर्टिफिकेट देना ये सब डायट की ओर से होता था और रामकृष्ण मिशन था कि फैसिलिटेटिंग एजेंसी कि वो गांव के लेवल पे और डायट के बीच में सेतु बने हालांकि ये रामकृष्ण मिशन का वैसे कोई रोल नहीं होना चाहिए यदि सिस्टम ठीक-ठीक काम करती है तो किंतु फिर भी नहीं करती है तो बोल कर के हम लोग एक मीडियम थे किंतु ये जो फ्रेंचाइजी मॉडल जो है वो मुझे बहुत अच्छा लगा कि एक एकेडमिक इंस्टिट्यूशन जैसा हो जैसे आपने कहा ये जितने भी इंटरेस्टेड लोग हैं यहां पे आए यहां से ट्रेन हो प्रॉपर्ली ट्रेन हो फिर अपने-अपने फील्ड में जाकर के काम करें हम लोग उनको यहां से मटेरियल प्रोवाइड करेंगे स्किल अपग्रेड करवाएंगे बीच-बीच में सेमिनार करवाए जैसे कि नेटवर्किंग हो सबके भीतर में किंतु एवरी यूनिट विल बी मोर और लेस इंडिपेंडेंट जिससे कि सेंटर के ऊपर में बर्डन ना आ जाए और इंडिपेंडेंट यूनिट एक इनोवेशन उनका रहता है ना स्मॉल एंड ब्यूटीफुल जिसको कहते हैं ना स्मॉल इज ब्यूटीफुल ये छोटी साइज रहने से उसका एक ये रहता है फ्लेक्सिबल रहता है इनोवेटिव फ्लेक्सिबल तो बीच-बीच में सेमिनार करने से एक यूनिट ने क्या इनोवेशन किया दूसरे यूनिट सीख सकते हैं यानी ऑर्गेनिक अप्रोच रहेगा रदर देन एक रिजिंग ऑर्गेनाइजेशनल अप्रोच सो दिस कैन बी थिंक अबाउट ये जो मैंने सर्व शिक्षा जब से देखा था तब से एक मेरे माइंड में है किंतु यह प्रश्न है कि जैसे आपने कहा कि ये कौन करेगा किंतु देखिए कि मैंने आपका देखा है कि मतलब कैसी भी परिस्थिति हो आप क्लास में आते हैं एक्चुअली देखिए कि पहले मैं बहुत छुट्टी लगाता था मैं सप्ताह में एक दो छुट्टी तो होता ही था एक समय था किंतु तो फिर आप लोगों का जो डेडिकेशन है कितना रेगुलरली आप आते हैं तो फिर अभी मुझे भी शर्म आती है ऐसा कहने की क्या चिट्टी लगा देते हैं मुझे भी शर्म आती है व ठाकुर की वो कहानी है ना कि वो ने शिष्य की वजह से गुरु को ईश्वर दर्शन हुआ यहां बैसा