Invocation
ओम स्थापक यज धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः स्वामी विवेकानंद का माय प्लान ऑफ कैंपेन भारत में दिए हुए व्याख्यान में से एक अमेरिका से स्वामी जी जब भारत लौटे और भारत में जो उन्होंने व्याख्यान दिए थे भारतीय जन समाज को फिर से जागृत करने के लिए उस श्रृंखला का एक प्रवचन है माय प्लान ऑफ कैंपेन चेन्नई में दिया हुआ अभी जिस पॉइंट का आज हम डिस्कशन करेंगे ऑलरेडी एक पॉइंट इस पूरे व्याख्यान को तीन फेजस में मैंने बांट दिया है इसका लिंक भी मैंने आपके साथ में शेयर किया है पहला फेज है कि स्वामी जी जब अमेरिका गए तो उनके कार्य में किस तरह से बाधा डालने का प्रयास किया गया इसके बारे में स्वामी जी विषद रूप से वर्णन करते हैं और फेज को मैंने कुछ चार तीन चार स्टेप्स में बांट दिए हैं तीन चार पॉइंट्स में बांट दिए हैं इसके बाद में स्वामी जी बताएंगे कि भारत किस तरह से प्रगति कर सकता है और उसके बाद में स्वामी जी की भारत प्रेम राष्ट्र प्रेम की क्या डेफिनेशन है उसके बारे में देखेंगे तो पूरे तीन फेजेस में बंटा हुआ है और पहला फेज जो है कि स्वामी जी के कार्य में किस तरह से बाधा डाली गई उसका विवरण हम पढ़ रहे हैं तीसरा पॉइंट हम आए हैं पर्सीक्यूशन ऑफ स्वामी जी बाय क्रिश्चियन मिशनरीज इन मजूमदार अभी अ इस पॉइंट को स्टार्ट करने से पहले थोड़ा सा एक बैकग्राउंड देख लेते हैं कल हमने ऑलरेडी डिस्कस किया कि किस तरह से हम धर्म को तो अ व्यष्टि धर्म और समष्टि धर्म इसमें हमने पूरा अ डिस्कस किया था कल कि किस तरह से धर्म को हम दो एस्पेक्ट में बांट सकते हैं व्यष्टि धर्म क्या है कि मेरा ईश्वर के साथ में क्या रिलेशन है मैं और ईश्वर आध्यात्मिक साधना करने के लिए आध्यात्मिक साधना का सर्वोच्च लक्ष्य प्राप्त करने के लिए ईश्वर प्राप्ति के लिए मुझे जो करना पड़ेगा वह मेरा व्यष्टि धर्म है और समष्टि धर्म है कि इस समाज के एक अंग के रूप में मेरे पर कुछ कुछ रिस्पांसिबिलिटीज डाली गई है अभी देखिए कि दो तरह से हो है हम किसी भी समाज किसी भी सोसाइटी किसी भी कम्युनिटी किसी भी ऑर्गेनाइजेशन का पार्ट होते हैं तो हमारे पास में दो चीज होती है एक तो होते हैं हमारे राइट्स कि हम क्या मांग सकते हैं इस समाज से इस परिवार से या इस ऑर्गेनाइजेशन से और इन रिटर्न हमारे ऊपर कुछ-कुछ रिस्पांसिबिलिटीज होती है कि हां यह जवाबदार हों का निभाव आपको करना है तो हम लोग जो भी मनुष्य है उसकी मल्टीपल आइडेंटिटी होती है एक तो है कि मेरा व्यष्टि धर्म तो है ही है मेरा ईश्वर के साथ में संबंध या तो आत्मा साक्षात्कार के लिए मेरी साधना वह तो हो ही गया इसके बाद में मैं या तो फिर इवन यदि मैं साधु हूं तो रामकृष्ण संघ में रह रहा हूं तो मेरी कुछ रिस्पांसिबिलिटीज है मेरे कुछ राइट्स है उस राइट्स और रिस्पांसिबिलिटीज को फॉलो करना राइट्स का रिस्पांसिबिलिटीज को फॉलो करना वो मेरा समष्टि धर्म हो गया ये कम्युनिटी रिलीजन हो गया अभी इसी तरह से यदि मैं गृहस्थ हूं तो मैं शायद पिता हूं या तो मैं संतान हूं या तो फिर मां हूं या तो फिर मैं पत्नी हूं या तो फिर मैं राजा हूं या तो वैद्य हूं या तो सैनिक हूं या तो फिर शिक्षक हूं जो भी रोल मेरा है उस रोल के अनुसार मेरा धर्म होता है अभी एक प्रश्न बड़ा सीरियस हमारे सामने खड़ा होता है कि यदि हम ईश्वर प्राप्ति को ही जीवन का सर्वोच्च अ आदर्श गिने जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य गिने तो फिर मैं समाज के भीतर में जो रह रहा हूं उसके जो धर्म है उसका मैं सीरियसली पालन क्यों करूं यदि ईश्वर ही सर्वोच्च सब कुछ है ईश्वर ही सर्वस्व है तो समाज के प्रति मेरा जो ऋण है या तो समाज के प्रति मेरा रिस्पांसिबिलिटीज है इस रिस्पांसिबिलिटीज को मैं सीरियसली क्यों लूं मुझे जो समाज देता है वह मेरे राइट्स में ले लूंगा किंतु इन रिटर्न में अपनी रिस्पांसिबिलिटीज का पालन नहीं करूंगा क्यों क्योंकि समाज तो मिथ्या है य भ्रम मात्र है अज्ञान से प्रकट हुआ है जगत में जो कुछ भी देख रहे हो यदि मैं जंगल में जादा जाता हूं किसी रमणीय एक पिकनिक स्पोट पे या तो फिर म मंदिर में तो वहां पर मैं कुड़ा कचरा इधर-उधर आराम से फेंकू क्यों क्योंकि ना ही मेरी एनवायरमेंट की और कोई रिस्पांसिबिलिटीज है ना ही अन्य तीर्थ यात्रालू जो वहां पर आएंगे उसके प्रति कोई रिस्पांसिबिलिटीज है जैसे कि ठाकुर का वोह उदाहरण था कि हालदार पुकुर बोलकर के तालाब था कामर पुकुर में उसके किनारे पर जो भी लोग सुबह को आकर के रात को आकर के शौच करके विस्टा फेंक कर के चले जाते थे इसके बाद में सुबह को जो लोग स्नान करने के लिए या कपड़े धोने के लिए वहां पर जाएंगे उनको दिखेगा कि किनारे पर सब जगह पर विष्ठा पड़ी हुई है तो उनको बड़ा गुस्सा आता था तो अभी प्रश्न है कि जो लोग इस तरह से वहां पर शौच करते थे किनारे पर दूसरों के लिए बाधा समस्या उत्पन्न करते थे वे लोग अपना कार्य क्यों स्टॉप करें उनका क्या रिस्पांसिबिलिटी है दूसरों के प्रति तो यह प्रश्न एक सहज है और यह प्रश्न का उत्तर अभी हमको इसके लिए लिए अपने जो मूल सिद्धांत है रामकृष्ण विवेकानंद भावधारानी होते हैं तो मैं उनको ब्रह्मा कहता हूं जब वह कार्य करते हैं सृष्टि स्थिति पालन करते हैं सृष्टि स्थिति और संहार करते हैं तब मैं उनको शक्ति कहता हूं तो अभी देखिए कि ठाकुर ने यहां पे बड़ा ही क्लीयरली कहा है कि जगत में जो कुछ भी देख रहे हैं वह ब्रह्मण का ही चलित स्वरूप है या तो फिर कहेंगे ब्रह्मण इन इट्स डायनेमिक फेज ब्रह्मण यदि उसके जो स्टेडी फेज में देखा जाए तो वह ब्राह्मण कि जिसका साक्षात्कार करने के लिए ऋषि मुनि हजारों साल तक तपस्या करते रहे और डायनेमिक ब्राह्मण या तो फिर ब्राह्मण का चलित स्वरूप यह पूरा जीव जगत ईश्वर हमारे बंधु बांधव हमारे देशवासी यह देश यह प्रकृतिक यह प्रकृति यह सब कुछ जो देख रहे हैं ब्रह्मण का ही चलित स्वरूप है और यदि ब्राह्मण का चलित स्वरूप यह जगत है यह देश बांधव है है यह नागरिक है यह हमारे पड़ोसी है हमारे मित्र हैं हमारे परिवार जन है तो उनके प्रति हमारी जो रिस्पांसिबिलिटीज है उसका पालन करना भी उतना ही आवश्यक है जितना कि हम ब्रह्म साक्षात्कार के लिए जो प्रयास करते हैं यानी कि देखिए कि हमारी एक तरह से देखें तो दो तरह की उपासना हो गई प्रथम उपासना है कि ब्रह्मण को उसके स्थिर स्वरूप में प्राप्त कर और दूसरी उपासना है कि ब्रह्मण को उसके चलित स्वरूप में प्रसन्न करना यानी कि ब्रह्मण का स्थिर स्वरूप उसको प्राप्त करने की उपासना हमारे ऋषि मुनि हमको हजारों सालों से बता के गए हैं हमारे उपनिषद में हमारे शास्त्र में पुराणों में सब जगह पर यह कहानियां यह साधन पद्धतियां ये उपासना पद्धतियां यह सब कुछ विवत है वर्णित है बड़े ही विषद रूप में कि ब्रह्मण के स्थिर स्वरूप को कैसे प्राप्त किया जाए और साथ-साथ में ही हमारा हिंदू धर्म है वो धर्म के नाम पर बहुत सारे विवरण हमको देता है वह चाहे पितृ धर्म हो पत्नी धर्म हो राज्य धर्म हो वाणिज्य धर्म हो संतान धर्म हो शिष्य धर्म गुरु धर्म सभी का रोल इस सोसाइटी में सुनिश्चित करके सभी को उनका उनका धर्म दिया गया है और यह धर्म हमको क्या दिखाता है या क्या सिखाता है वही चलित ब्रह्म का चलित स्वरूप चलित ब्रह्म को प्रसन्न करना या तो फिर जिसको कहेंगे शक्ति शक्ति की उपासना करना इसके लिए यह सामाजिक धर्म दर्शित किए गए हैं अनफॉर्चूनेटली भारत में एक ऐसा समय आया बुद्धिज्म जो फेस था बुद्ध के धर्म का जो प्रसार भारत में हुआ उसमें कुछ कुछ बड़े ही सीरियस मिसकनसेप्शन धर्म के बारे में प्र चालू हो गए और यह मिस कंसेप्ट क्या है यह मिसकनसेप्शन में सर्वप्रथम तो कहेंगे कि यह जो समाज है या तो यह सृष्टि है या तो फिर यह जीव जगत सब कुछ है वह मिथ्या है या तो फिर इनको इग्नोर करके आप ब्रह्म साक्षात्कार या तो फिर निर्वाण प्राप्ति कर सकते हैं यह निर्वाण प्राप्ति का जो विचार है जगत को इग्नोर करके जगत से सन्यास ग्रहण करके सीधे निर्वाण प्राप्ति की ओर जाना इस कांसेप्ट ने भारत में दो तरह के प्रॉब्लम खड़े किए सर्वप्रथम तो कि हम लोगों ने जो लोग बुद्धिज्म या तो बौद्ध धर्म को फॉलो करते थे उन्होंने यह सामाजिक रिस्पांसिबिलिटीज की अवगणना करना शुरू किया जैसे कि यह राजा है राजा का जो राज्य धर्म है राजा कहे कि मुझे राज्य धर्म का पालन नहीं करना है चलो मैं कहीं जाकर के साधु हो जाता हूं भिक्खू हो जाता हूं मठ में जाकर के तो यह बुद्धिज्म में यह एक प्रॉब्लम खड़ा हुआ और दूसरा कि जो हिंदू धर्म को फॉलो कर रहे थे अपने ट्रेडिशनल हिंदू धर्म को उन लोगों में एक तरह का रिएक्शन आया और यह रिएक्शन इस तरह से आया कि यह जो धर्म हमको बताए गए थे वाणिज्य धर्म शुद्र धर्म ब्राह्मण धर्म या तो फिर ये राज्य धर्म यह सब धर्म को चलित ब्रह्म को प्रसन्न करने की उपासना की वजह उन्होंने यह वंश परंपरागत एक विधि विधान मात्र बना दिया यानी कि अभी जो राजा है उसका लड़का राजा ही होगा जो ब्राह्मण है उसका लड़का ब्राह्मण ही होगा शुद्र है तो उसका संतान शुद्र ही होगा इस तरह से वंश परंपरागत होकर के यह धर्म शक्ति की उपासना शक्ति को प्रसन्न करने की वजह एक तरह से एक फैमिली ट्रेडिशनल कर के रह गए उसके पीछे का जो रियल स्पिरिट था वह स्पिरिट चला गया और सिर्फ उसका बाह्य आवरण रह गया और इसी भारतीय समाज में फिर बाह्य आक्रमण प्रारंभ हुए जब बाह्य आक्रमण प्रारंभ हुए तो भारत में दो समस्या एक तो जो बौद्ध धर्म को फॉलो करते थे उन्होंने अपनी जवाबदार हों से अपनी रिस्पांसिबिलिटी से मुंह मोड़ लिया और जो हिंदू धर्म का पालन करते थे उनके भीतर में धर्म यह सामाजिक एस्पेक्ट या तो समष्टि एस्पेक्ट सिर्फ एक मात्र बाह्य आवरण होकर के रह गया था उनमें ना ही वह स्पिरिट था ना ही वह क्षमता थी कि वह भारत की रक्षा कर पाए इसीलिए जब बाद बाद के आक्रमण इस्लामिक आक्रमण या तो फिर इष्ट इंडिया कंपनी का आगमन हुआ तब कहीं जाकर के भारत अपने को इतना कमजोर पा ता है कि अपनी रक्षा नहीं कर पाया और 1000 साल की गुलामी हमको सहन करनी पड़ी आज भी देखेंगे कि यह कंफ्यूजन व्यष्टि धर्म और समष्टि धर्म में चला आ रहा है जिस क्षण आप समष्टि धर्म का नाम लेंगे उसी क्षण कुछ-कुछ लोग बड़े ही नाराज हो जाएंगे कहेंगे कि क्या वही जा प्रथा आप फिर से भारत में इंट्रोड्यूस करना चाहते हैं यह एक तरह के लोग होते हैं दूसरे तरह के लोग होते हैं कि यदि भारत का उत्थान करना है तो वही वेदिक युग की सब कुछ सब प्रथाएं वापस ले आई जाए जो कि नात प्रथा जाति प्रथा उसको भी वापस ले आया जाए अभी यह लोग समझते नहीं है कि इसका खतरा कितना बड़ा है जब तक इस प्रथा के पीछे का स्पिरिट हम नहीं समझेंगे सिर्फ आंख बंद करके वह सब फिर से रेजनेक्स्ट करेंगे पुरानी बातें फिर से इस आधुनिक समाज में ले आएंगे तो वही गड़बड़ फिर से प्रारंभ होगा जिस प्रॉब्लम की वजह से भारत को 1000 साल गुलाम रहना पड़ा था तो अभी देखिए कि रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर में यह दो ट्विन प्रॉब्लम है एक तो बुद्धिज्म का जो प्रॉब्लम खड़ा हुआ है कि मैं अपनी सामाजिक रिस्पांसिबिलिटी से मुंह मोड़ दूंगा इसका सॉल्यूशन और जो हिंदू धर्म के भीतर में जो प्रॉब्लम हुआ था कि यह सामाजिक धर्म समष्टि धर्म को उसका एक बाह्य आवरण मात्र रह गया उसका स्पिरिट जैसे कि लो हो गया अदृश्य हो गया इस दोनों प्रॉब्लम का सॉल्यूशन राम कृष्ण भावधारानी समझेंगे कि ब्रह्मा और शक्ति दोनों अभेद है स्थिर है तो ब्रह्मण है कार्य करते हैं तो शक्ति है स्थिर ब्रह्मण और चलित ब्रह्मण या तो फिर कहेंगे कि स्थिर ब्राह्मण डायनेमिक ब्रह्मण यह कांसेप्ट यदि अपना क्लियर हो जाएगा तो इसके बाद में ठाकुर की जो साधन पद्धति है कि सर्वप्रथम जो उच्च अधिकारी है उनके लिए कि सर्वप्रथम तो नेति नेति मार्ग का अवलंबन करके अपनी जगत के प्र प्रति सभी तृष्णा एं वासना एं उसका त्याग करके ब्रह्मण साक्षात्कार कर ले फिर वहां पर जाकर के हम यह रिलाइज करें कि जो ब्रह्मण हमने आंख बंद करके पाया था वही ब्रह्मण को को हम आंख खोल कर के पा सकते हैं इती इती करके जगत में वापस आए और इस समय अपना जो अस्तित्व है वह लोक कल्याण के लिए होगा यदि मैं कॉन्शियसली लोगों का कल्याण करने का प्रयास नहीं भी करता हूं तब भी जो कुछ भी मैं करूंगा सब कुछ ऑटोमेटिक लोक कल्याण के लिए होगा तो यह ठाकुर की साधन पद्धति उच्च साधक जो है उन लोगों के लिए है अ जिनकी एलिजिबिलिटी सर्वश्रेष्ठ है सर्वोत्तम है फिर जो मध्यम पंथ साधक है या तो फिर निम्न साधक है जिनकी इतनी शक्ति नहीं है उनके लिए स्वामी जी प्रदर्शित मार्ग है कि हां आत्मनों मोक्षार्थम जगत हिताय च एक एक और आप अपने आत्मा का मोक्ष प्राप्त करने के लिए आप यदि ईश्वर की आराधना कीजिए दूसरी ओर आप वही ईश्वर की आराधना इन मनुष्यों में कीजिए और यहां पर देखिए कि स्वामी जी जब कहते हैं कि यह आत्मन मोक्षार्थम जगत हिताय च आपको नॉट नेसेसरी के आपको दो अलग-अलग चीजें करनी पड़े सेवा योग एक ऐसा योग है स्वामी जी द्वारा प्रदर्शित कि आप मनुष्य के भीतर में शिव है उनकी ही आराधना कीजिए और उसी आराधना से आपको उसी ईश्वर की प्राप्ति होगी जिस आराधना लोग शिव मंदिर में बैठ कर के शिवलिंग पर जो दू दूध है फिर यह बिल्व पत्र है धतुरा का फूल है वह अर्पण करके उनको जो प्राप्ति होती है वही प्राप्ति आपको मनुष्य रोगी नारायण दरिद्र नारायण चंडाल नारायण मूर्ख नारायण इनकी सेवा करने से प्राप्त होगी तो देखिए कि यह पूरा जो चक्र है किस तरह से राम कृष्ण विवेकानंद भावधारानी वैदिक युग का जो स्पिरिट है उसके साथ में जाकर के मिलती है कोई भी कंफ्यूजन राम कृष्ण संघ के फॉलोअर्स के मन में नहीं रहना चाहिए कि हां हमारा यह जो धर्म है समष्टि के प्रति इसका पालन हम क्यों करें यदि समष्टि मिथ्या है तो यह प्रॉब्लम भी यह कंफ्यूजन भी हमारे मन में नहीं रहना चाहिए और दूसरा कंफ्यूजन कोई कोई लोग यह ट्रेडिशनल डूब जाते हैं कि यह जो ड्यूटीज रिस्पांसिबिलिटीज धर्म यह जो सब कहा गया है उसका बाह्य आवरण मात्र रखेंगे वंश परंपरागत बना देंगे और उसके पीछे का स्पिरिट है उस स्पिरिट को भूल जाएंगे यह दोनों पिटफॉल्स जो थे हमारे इतिहास में जिसकी वजह से हमको 1000 साल की गुलामी सहन करनी पड़ी इस दोनों पिट फोल से रामकृष्ण संघ की भावधारानी आपको फर्स्ट प्रिंसिपल दे दिया जाता है फिर कहा जाता है कि डिराइवर द प्रूफ कोई भी एक प्रूफ होता है उसको फर्स्ट प्रिंसिपल के ऊपर में से डिराइवर करो तो पूरी एक मैथमेटिकल एक प्रोसीजर होती है उसको फॉलो करके आप फर्स्ट प्रिंसिपल के ऊपर में से कोई भी प्रूफ को प्रूव कर सकते हैं डिराइवर कर सकते हैं तो यहां पे भी यह जो हम डे टू डे लेवल पे जो फेस करते हैं डे टू डे लेवल पे अपनी जो साधना है उसको किस तरह से हम फर्स्ट प्रिंसिपल यानी कि ब्रह्मा और शक्ति अभेद यह फर्स्ट प्रिंसिपल रामकृष्ण संघ का उसमें से हम किस तरह से डिराइवर करते हैं कितने पॉइंट्स हमने डिराइवर किए तो यह था पूरा बैकग्राउंड यहां पे स्वामी जी क्यों उनके ऊपर में हुए आक्रमण का उत्तर देते हैं इसलिए क्योंकि उनको समष्टि धर्म पालन करना था भारत के उत्थान के लिए रामकृष्ण संघ की स्थापना करनी थी और सिर्फ इतना ही नहीं पूरे भारत में भ्रमण करके युवाओं को आह्वान करना था युवाओं को वो जिस एक तमस में डूबे हुए थे उस तमस में से उनकी चमक भांग नहीं थी वो एक अर्थात कि ये जिस तरह के हिप्नोटिज्म में वह अपने को डाल दिए थे कि मैं निर्बल हूं मैं कुछ नहीं कर सकता मेरे पास में कोई भी क्षमता नहीं है उस हिप्नोटिज्म से उनको बाहर निकालना था यह महत कार्य स्वामी जी को करना था यह कार्य में यदि कोई भी बाधा स्वरूप बने तो उनका प्रतिकार करने की बड़ी ही आवश्यकता थी यह समष्टि धर्म स्वामी जी ने यहां पर फॉलो किया है अच्छा अभी यह जो थर्ड पॉइंट है अपनी टेक्स्ट में माय प्लान ऑफ कैंपेन में इसको हम देखते हैं तीसरा पॉइंट का मैंने नाम दिया है पर्सीक्यूशन ऑफ स्वामी जी बाय क्रिश्चियन मिशनरीज एंड मजूमदार अभी स्वामी जी कहते हैं दे जॉइन द अदर पोजिशन दे अर्थात की ये थियोसोफिकल सोसाइटी जिसकी चर्चा हमने कल की थी थियोसोफिकल सोसाइटी वाले दूसरे जो स्वामी जी के विरोधी थे उनके साथ में उन्होंने हाथ मिलाया क्या थे वो लोग क्रिश्चियन मिशनरीज देयर इज नॉट वन ब्लैक लाई इमेजिनेबल दैट दिस लेटर डिड नॉट इन्वेंट अगेंस्ट मी एक भी काला झूठ ऐसा नहीं है कि ये मिशनरी लोगों ने मेरे बारे में खोज ना निकाला हो मेरे बारे में जैसे कि अप्र चार ना किया हो एक भी काला झूठ ऐसा नहीं है सब तरह के झूठ उन्होंने मेरे बारे में फैलाए हैं दे ब्लेकड माय कैरेक्टर फ्रॉम सिटी टू सिटी पुअर एंड फ्रेंडलेस दो आई वाज इन अ फॉरेन कंट्री मैं गरीब था एक विदेशी शहर में विदेशी जगत में रह रहा था फिर भी इन्होंने जिस शहर में मैं जा रहा हूं गांव-गांव शहर शहर उन्होंने मेरे चरित्र को बदनाम करने का प्रयास किया है आई वाज इन अ फॉरेन कंट्री दे ट्राई टू आउट मी फ्रॉम एवरी हाउस एंड टू मेक एवरी मैन हु बिकम माय फ्रेंड माय एनिमी जिस जिस घर में मुझे प्रवेश मिलता था जिस-जिस घर में मुझे वेलकम मिलता था उस घर में से उन्होंने मुझे भगाने का प्रयास किया है जो जो व्यक्ति मेरा मित्र हो रहा था उस व्यक्ति को मेरे अगेंस्ट में उनको भड़काने का काम किया है उस व्यक्ति को मेरा दुश्मन बनाने का प्रयास किया है दे ट्राई टू स्टार मी आउट मुझे भूखा मारने का प्रयास किया गया एंड आई एम सॉरी टू से दैट वन ऑफ माय ओन कंट्रीमैन टूक पार्ट अगेंस्ट मी इन दिस और यह क्रिश्चन मिशनरियों के द्वारा यह अप्र चार यह भयानक झूठ यह भयानक एक पूरा कैंपेन मेरे विरोध में चलाया जा रहा था मुझे यह कहते हुए खेद हो रहा है कि मेरा ही एक देश बांव इस क्रिश्चियन मिशनरियों के साथ में जा मिला ही इज द लीडर ऑफ ए रिफॉर्म पार्टी इन इंडिया वह भारत में एक रिफॉर्म पार्टी है यह रिफॉर्म सोसाइटी है उसका नेता है वह कौन रिफॉर्म पार्टी है तो ब्राह्मण समाज और वह कौन व्यक्ति है तो वह है मजूमदार दिस जेंटलमैन इज डिक्लेयर एवरी डे क्राइस्ट हैज कम टू इंडिया यह जो सद गृहस्थ है वो प्रतिदिन यह घोषणा करते घूमते हैं कि जिस जीस क्राइस्ट भारत में आ चुके हैं उनका अवतरण हो चुका है इज दिस द वे क्राइस्ट इज टू कम टू इंडिया क्या इस तरह से जीसस भारत में आएंगे कि आप लोग जितना भी झूठ बलाना है फलाइन पहुंचाना है पहुंचाए एक निर्दोष व्यक्ति को और इस तरह से क्या आप जीसस को भारत में बुलाएंगे इज दिस द वे टू रिफॉर्म इंडिया क्या यह तरीका है भारत को एक तरह से सुदृढ़ स्वस्थ सक्षम बनाने का भारत को रिफॉर्म करने का बिल्कुल नहीं ज यदि आप कहते हैं कि जीसस स्टैंड्स फॉर मर्सी मर्सी फेथ होप एंड चैरिटी जो कि क्रिश्चियनिटी के ीन प्रिसेप्ट्स है तो यदि आप कहते हैं कि फेथ होप एंड चैरिटी किस तरह से भारत में आएगी तो एक जो अपना ही भारतीय बंधु अमेरिका जाकर के योग और वेदांत का प्रचार कर रहा है हिंदू धर्म का प्रचार कर रहा है भारत का एक अच्छा भविष्य बने उसके लिए प्रयास कर रहा है उसका उसके साथ में दुश्मना आवट करके उसको हानि पहुंचा करके उसका अप्र चार करके उसके बारे में 10 तरह के झूठ फैला करके क्या यह फेथ है होप एंड चैरिटी भारत में आएगा क्या इस तरह से जीसस भारत में आएंगे यह क्या आप लोग चला रखे हैं देखिए कि यहां पर धर्म के नाम पर जो अपने पॉकेट भर लेना चाहते हैं ऐसे लोगों की बात है यदि कोई भी व्यक्ति सीरियसली किसी भी धर्म को फॉलो करता है हमने तो ठाकुर के जीवन में देखा कि चाहे वह क्रिश्चियनिटी हो न कि चाहे इस्लाम हो ना कि चाहे और कोई भी धर्म हो उस धर्म के यदि आप सही सही आराधना करते हैं तो आपका चरित्र निर्मल शुद्ध स्वच्छ होने ही वाला है स्वामी ठाकुर को खुद को जीसस का भी दर्शन हुआ था मोहम्मद का भी दर्शन हुआ था उन्होंने इस्लाम क्रिश्चियनिटी दोनों धर्म की साधनाएं की थी तो जहां तक धर्म के जो मूल कारण है मूल प्रिसेप्ट्स है उसको आप ठीक-ठीक फॉलो करेंगे तो आप उसी लेवल पर चले जाएंगे जिस लेवल पर भारतीय समाज के सर्वोच्च संत विराजमान है उसमें कोई प्रश्न नहीं है किंतु धर्म के नाम पर यदि आप अपना स्वार्थ सि करना चाहते हैं तो देखेंगे कि हमेशा जो लोग आपसे आगे निकल रहे हैं उनके प्रति आपकी ईर्षा बड़े ही भयानक रूप से पनप जाएगी इसीलिए जो लोग धर्म को फॉलो करते हैं सही सही धार्मिक है सही सही साधक है सही सही जिज्ञासु है मक्ष है उनके भीतर में यह चार लक्षण आपको हमेशा दिखाई देंगे जिसको कि योग में चित्त प्रसाद कहते हैं योग शास्त्र में चित्त प्रसाद कहा गया है मैत्री करुणा मु ता और उपेक्षा जो अपने समकक्ष है जो हमारे सम वयसील रखनी चाहिए जो हमारे से छोटे हैं जो हमारे से निम्न कक्षा के हैं उनके प्रति करुणा रखनी चाहिए जो हमारे से बड़े हैं या तो हमारे से ज्यादा पावरफुल है उनके प्रति एक तरह का रिस्पेक्ट रखना चाहिए और जो हमारे दुश्मन है जो हमारा अहित करना चाहते हैं उनकी उपेक्षा करनी चाहिए ये उपेक्षा तब तक ही कि जब तक एकदम सीधा आक्रमण अपने ऊपर ना आ जाए तब यदि सीधा आक्रमण होता है तो प्रतिरक्षा करने के लिए हमको सब कुछ करना ही पड़ेगा जैसे कि हमने कल डिस्कस किया था कि जैसे वह साप की कहानी है फिर वह वाघ की कहानी शेर की कहानी है फिर यह हाथी की कहानी है और यह बंदर की कहानी है चार कहानियों के माध्यम से और वह पत्थर फेंकने वाले की कहानी पांच कहानियां है जिसके माध्यम से ठाकुर हमको समझाते हैं कि दु दुश्मन यदि आ जाए यदि कोई हमको हानि पहुंचाने को आ जाए तो हमको क्या करना है और क्या नहीं करना है दोनों चीजें ठाकुर ने समझाई है सर्वप्रथम क्या नहीं करना है तो वह एक आदमी रास्ते से जा रहा था धोबियों ने कपड़े धो कर के सुखाए थे उसके ऊपर पैर पड़ गया तो फिर अभी वह लोग उसको मारने को जा रहे हैं धोबी इस भक्त को तो भक्त को मारने को जा र है देख कर के भगवान ने उसको रक्षा करने के लिए गए किंतु जैसे ही भगवान ने देखा कि उसके भक्त ने उनको प्रति आक्रमण करने के लिए पत्थर अपने हाथ में उठा लिया है तो वैसे ही भगवान वापस आ गए यह सोच कर के कि यदि वो खुद पत्थर उठाता है अपने हाथ में तो मुझे उसकी रक्षा करने की क्या जरूरत है तो क्या नहीं करना है यह इस कहानी में और क्या करना है वो बाकी की चार कहानी में कि साप को यदि यह कहा गया कि तुम मंत्र का पाठ करो दूसरों पर आक्रमण मत करना यह देख कर के गांव वालों ने जब साप की पिटाई की उस समय साप क्षत विक्षत हो गया था फिर गुरु ने ब्रह्मचारी ने आकर के फिर से पूछा कि अरे तुम्हारी यह दुरावस्था क्यों हुई तो साब कहता है कि मैं अपनी रक्षा नहीं की इसके लिए इन लोगों ने मेरी पिटाई की बदला लेने के लिए मैं पहले उनको बड़े परेशान किया करता था तो साथ-साथ में ही ब्रह्मचारी ने कहा कि क्यों तुम फस तो कर सकते थे उनको डर तो दिखा सकते थे अपनी रक्षा करने के लिए तो वो एक क्या करना चाहिए दूसरा वो शेर की कहानी कि दो मित्र जा रहे हैं रास्ते से और शेर आ गया तो एक मित्र कहता है चलो भगवान का नाम लेते हैं तो दूसरा मित्र कहता है कि अरे भगवान को क्यों परेशान कर रहे हो चलो पेड़ पे चढ़ जाते हैं यानी कि यहां पे पुरुषार्थ की बात है बिल्कुल जहां पे साप को जैसे कि कहा गया कि तुमको फोंस करनी है यहां पर कहा गया है कि पेड़ के ऊपर चढ़ जाओ अपनी रक्षा इस तरह से करनी है बिल्कुल आपको तमस में नहीं डूब जाना है बिल्कुल निष्क्रिय नहीं हो जाना है तो साथ-साथ में ही दूसरों पर आक्रमण भी नहीं कर लेना है तो यह फिर यह वो हाथी की कहानी कि व शिष्य रास्ते से जा रहा है हाथी रास्ते से दौड़ के आ रहा है तो इमीडिएट वह सोच रहा है कि सबके भीतर में नारायण है तो हाथी के भीतर में भी नारायण है बोल कर के रास्ते पर खड़े रह के वह हाथी का स्तव करने लगा तो फिर हाथी तो व देखेगा नहीं कि मेरा स्तव कर रहा है सूंड से पकड़ कर के उसको उठा कर के फेंक दिया अभी वह जब होश में आता है तो गुरु पूछता है कि क्यों रे पग हाथी आ रहा था रास्ते से तुम छोड़ कर के रास्ता भागे क्यों नहीं तो शिष्य बड़ा बेचारा भक्ति भाव से कहता है कि गुरु जीी आप ही ने तो कहा था कि हाथी नारायण तो फिर यह गुरुजी भी उसको समझाते हैं कि महावत नारायण भी तो है बेटा महावत नारायण ने तो कहा कि रास्ता छोड़ दो तो उसकी बात क्यों नहीं सुनी तो यानी कि यहां पर देखिए कि पुरुषार्थ का एक एक है कि आपको अपना पुरुषार्थ तो करना ही है निष्क्रिय नहीं होना है और प्रतिक्रमण नहीं करना है यह तीन चीजें और आखिर में वह जो स्वामी जी की बंदर वाली कहानी कि स्वामी जी के पीछे में बंदर दौड़ रहे थे तो स्वामी जी अपनी रक्षा करने के लिए भाग खड़े हुए उसी समय एक साधु ने आ कर के कहा फेस द ब्रूट बंदरों के सामने डट कर के साहस के रूप से खड़े हो जाओ तो जैसे ही स्वामी जी ने बंदरों के सामने खड़े हो गए पूरे शौर्य वीर्य के साथ में तो बंदरों ने देखा कि उसको अभी उनको भगाने में कोई आनंद नहीं है बोलकर के बंदर भी वहां से चले गए तो अगेन सभी कहानियों में देखिए कि तीन बातें बड़ी स्पष्ट है एक तो है कि बिल्कुल निष्क्रिय होक के नहीं बैठे रहना है तमस में नहीं डूब जाना है दूसरा है कि आपको प्रति आक्रमण नहीं कर देना है कि मैं दूसरों की सामने उसके सामने उसको मैं हानि पहुंचा आंगा उसको मैं इंजर करूंगा ऐसा भी नहीं करना है निष्क्रिय नहीं रहना है प्रतिक्रमण नहीं करना है किंतु पुरुषार्थ का सहारा लेकर के आत्मरक्षा करने के लिए जो बन पड़े वो करना है तो यह हमने देखा पूरा कल तो यहां पर भी देखिए कि ये मजूमदार वगैरह जो स्वामी जी पर आक्रमण करना शुरू किए थे तो स्वामी जी किस तरह से उसका मुकाबला करते हैं किस तरह से उनको रिस्पांस देते हैं यह पांचों कहानियों में जो प्रिंसिपल निकल के आता है उसी प्रिंसिपल को फॉलो करके स्वामी जी यह सब कहते हैं आगे कहते हैं एंड दिस जेंटलमैन आई न्यू फ्रॉम माय चाइल्डहुड यह मजूमदार है उसको तो मैं बचपन से पहचानता हूं ही वाज वन ऑफ माय बेस्ट फ्रेंड्स वो मेरा बड़ा ही अच्छा मित्र था व्हेन आई सो हिम आई हैड नॉट मेट फॉर अ लॉन्ग टाइम वन ऑफ माय कंट्री मैन आई वाज सो ग्लैड एंड दिस वाज द ट्रीटमेंट आई रिसीवड फ्रॉम हिम जब मैं मजूमदार को वर्ल्ड पार्लिमेंट ऑफ रिलीजन में मिला तो तो उस समय बड़ा लंबा समय हो चुका था कि मैं अपने किसी देश बांधव को नहीं मिला था हमको पता है कि यह
Swami Vivekananda’s Journey from India to America
मई या जून में स्वामी जी अमेरिका आ गए थे और यह वर्ल्ड पार्लिमेंट ऑफ रिलीजन सितंबर में था तो आई थिंक दो ढाई महीने का बीच में गैप था तो स्वामी जी कहते हैं इन दो ढाई महीनों में मैंने किसी ने बंधु देश बांधव को नहीं देखा था तो वर्ल्ड पार्लियामेंट ऑफ रिलीजन में मजूमदार को देखा तो मुझे बड़ा खुशी हुआ चलो मेरा एक देश बांधव यहां पे आया है मैं उसके साथ में बैठ कर के गप लगाऊंगा तो अ उस समय जब मजूमदार से स्वामी जी की मुलाकात हुई तो स्वामी जी उसको बहुत दिनों से नहीं किसी देश बांधव को मिले थे और यहां पे मजूमदार को मिलकर के उनको बड़ा खुशी हुआ सोचे कि चलो भाई मेरा एक देश बांधव यहां पर आया है मैं उसके साथ में बात करता हूं किंतु स्वामी जी के साथ में अच्छे से बात करने की वजह स्वामी जी कहते हैं कि मुझे उसने इस तरह से बदला दिया मेरा विरोध करना उसने शुरू किया द डे द पार्लिमेंट चेयर्ड मी द डे आई बिम पॉपुलर इन शिकागो फ्रॉम ट डे हिज टोन चेंज जिस दिन से पार्लिमेंट ऑफ रिलीजन में मुझे सफलता मिली जिस दिन से लोगों ने मेरी सराहना करना शुरू किया मेरी प्रशंसा करनी शुरू की उसी दिन से उसका वर्तन मेरे प्रति जैसे कि बिल्कुल चेंज हो गया बिल्कुल बदल गया एंड इन एन अंडर हैंडेड वे ही ट्राइड टू डू एवरीथिंग ही कुड टू इंजर मी और एक बड़े ही विश्वासघात रूप से बड़े ही घिनौने तरीके से उसने मेरे सभी कार्यों के विरोध में कुछ ना कुछ गड़बड़ करने का प्रयास किया इस दैट द वे दैट क्राइस्ट विल कम टू इंडिया क्या यह तरीका है कि भारत में जीसस आएंगे इस तरह से क्या जीसस आएंगे भारत में इज दैट द लेसन दैट ही हैड लर्न आफ्टर सिटिंग 20 इयर्स एट द फीट ऑफ द क्राइस्ट क्या यह जीसस के पे पदम मूल्य में 20 साल बैठ कर के क्या उसने यह सीखा है जीसस के पास में द ग्रेट रिफॉर्मर्स डिक्लेयर दैट क्रिश्चियनिटी एंड क्रिश्चियन पावर आर गोइंग टू अपलिफ्ट द इंडियन पीपल यह जो बड़े-बड़े रिफॉर्मर हैं वे लोग कहते हैं कि जीसस और क्रिश्चियनिटी भारत का बहुत बड़ा उत्थान करेंगे इज दैट द वे टू डू इट क्या यह तरीका है कि यह जीसस भारत में आकर के भारत का उत्थान करेंगे शुरली इफ दैट जेंटलमैन इज एन इलस्ट्रेशन इट डज नॉट लुक वेरी होप फुल क्या यह जेंटलमैन मजूमदार यदि क्रिश्चियनिटी का उदाहरण है तो मुझे कोई आशा नहीं दिख रही कि यह क्रिश्चन लोग भारत में कुछ कर पाएंगे अच्छा अभी इसके बाद का पॉइंट है पर्सीक्यूशन ऑफ स्वामी जी स्वामी जी इज कॉल्ड अ शुद्र अभी जिस तरह से थियोसोफिकल सोसाइटी वालों ने स्वामी जी की निंदा की क्रिश्चियन मिशनरीज और मजूमदार ने मिलकर के स्वामी जी की निंदा की तो और एक पूरा तबका था और एक पूरा सेक्शन था जिन्होंने स्वामी जी को शुद्र बोल कर के उनको एक तरह से उनका तुच्छ कर उनको तुच्छ ता शिल्य करने का प्रयास किया है वन वर्ड मोर स्वामी जी कहते हैं और एक शब्द ज्यादा फिर एक शब्द के नाम पर बहुत सारे शब्द बोलते हैं वैसे आई रीड इन द ऑर्गन ऑफ द सोशल फॉर्मर्स दैट आई एम कॉल्ड शूद्र यह जो सोशल रिफॉर्मर सोसाइटी होती है ब्रह्म समाज वगैरह उनके पत्र पत्रिकाओं में पढ़ रहा हूं उसमें लिखा है मैं शुद्र हूं एंड आई एम चैलेंज एज टू वोट राइट शुद्र हैज टू बिकम ए सन्यासी और यह लोग पूछते हैं कि शुद्र साधु कैसे हो सकता है टू वच आई रिप्लाई उसके विरो उसके सामने मेरा उत्तर है आई ट्रेस माय डिसेंट टू वन ऑफ दोस टू वन एट हुज फीट एवरी ब्राह्मण ले फ्लावर वेन ही अटर्स द वर्ड यमाय धर्म राजा चित्रगुप्ता वै नमः जो लोग यह कहते हैं कि मैं शुद्र हूं उनको मेरा उत्तर है कि मैं उन लोगों का फॉलोवर हूं मैं उन लोगों का वारस हूं जो लोग प्रतिदिन यह कह कर के यह मंत्र जप करके ईश्वर को पुष्प अर्पण करते हैं यमाय धर्म राजा चित्रगुप्ता वै नमः यम धर्म राजा और चित्रगुप्त को मैं नमन करता हूं हूं एंड हुज डिसेंडेंट्स आर द पोरेट ऑफ क्षत्रियस और उनके जो यह डिसेंडेंट है वह प्योर क्षत्रिय है इफ यू बिलीव इन योर माइथोलॉजी और योर पुराण स्क्रिप्चर लेट दिस सो कॉल्ड रिफॉर्मर्स नो दैट माय कास्ट अपार्ट फ्रॉम अदर सर्विसेस इन द पास्ट रूल हाफ ऑफ इंडिया फॉर सेंचुरी यदि आपको अपने पुराणों में अपने शास्त्रों में विश्वास है तो जान के रखिए कि मैं जिस जाति से हूं क्षत्रिय जाति से उसने युगों युगों तक आधे भारत पर राज्य किया है इफ माय कास्ट इज टू लेफ्ट आउट ऑफ कंसीडरेशन व्हाट विल देयर बी लेफ्ट ऑफ द प्रेजेंट डे सिविलाइजेशन ऑफ इंडिया यदि मेरी जात उसके बारे में यदि उसको आपको भारत के इतिहास में से निकाल देंगे तो आज की भारतीय आधुनिक सभ्यता है उसमें से क्या बचेगा इन बंगाल अलोन माय ब्लड हैज फर्निश देम विद द ग्रेटेस्ट फिलोसोफर द ग्रेटेस्ट पोएट द ग्रेटेस्ट हिस्टोरियन द ग्रेटेस्ट आर्कियोलॉजिस्ट द ग्रेटेस्ट रिलीजियस प्रीचर बंगाल में ही मेरी जो ब्लड लाइन है मेरा जो वारसा है मेरे जो पूर्वज है मेरी जो जात है उसने बंगोल के ग्रेटेस्ट फिलोसोफर सर्वश्रेष्ठ फिलोसोफर को जन्म दिया है ग्रेटेस्ट पोएट सर्वश्रेष्ठ पोएट अर्थात कि कवि को जन्म दिया है ग्रेटेस्ट हिस्टोरियन सर्वश्रेष्ठ हिस्टोरियन को जन्म दिया है द ग्रेटेस्ट आर्कियोलॉजिस्ट द ग्रेटेस्ट रिलीजियस प्रीचर ग्रेटे आर्कियोलॉजी अर्थात की पुरातत्त्व विज्ञान यह जो पुरा ने पुराने खंडहर रहते हैं वगैरह उसके ऊपर में छानबीन करके इतिहास को खोज निकालना तो यह ग्रेटेस्ट आर्कियोलॉजिस्ट और ग्रेटेस्ट रिलीजियस प्रीचर को मेरी जात ने जन्म दिया है और यहां पर देखेंगे कि यह फुट नोट है अभी यह तो आपको पता ही होगा कि यह जो मैंने टेक्स्ट आपके साथ में शेयर की है व इट्स अ पार्ट ऑफ द न्यू एडिटेड कंप्लीट वर्क्स तो उसमें बहुत सारी फुटनोट है और यह फुटनोट को बनाने में मेरा भी थोड़ा सा हाथ था तो यहां पे देखिए कि कौन-कौन है जिसका नाम यहां पर स्वामी जी लेते हैं तो आचार्य बृजेंद्र नाथ शील पोएट है माइकल मधुसूदन दत्त सर्वश्रेष्ठ हिस्टोरियन जिसको स्वामी जी कहते हैं वह है रमेश चंद्र दत्त सर्वश्रेष्ठ साइंटिस्ट का नाम लेते हैं जगदीश चंद्र बसु टू नेम अ फ्यू हु वेर बोर्न ऑफ द क्षत्रिय कास्ट माने जो कुछ लोगों का नाम लिया जाए यहां पे स्वामी जी कहते हैं क्षत्रिय कास्ट में से तो यह लोग कुछ है इन बंगाल अलोन अच्छा यह तो हमने पढ़ लिया दिस डिटेक्टर्स ओट टू हैव नोन अ लिटल ऑफ अवर ओन हिस्ट्री एंड टू हैव स्टडीड अवर थ्री कास्ट एंड लर्न दैट द ब्राह्मण द क्षत्रिय एंड द वैश्य हैव इक्वल राइट टू बी सन्यास द त्रिवर्ण कास हैव इक्वल राइट टू द वेदास जो लोग मुझे शुद्र कह के यह कहते हैं जो लोग मेरे पे यह लांछन लगाते हैं कि इसका इसके पास में क्या राइट है किस वजह से उसने संन्यास ग्रहण किया है है उनको समझना चाहिए कि जिसको त्रिवर्ण कहते हैं त्रिवर्ण कास एक है ब्राह्मण दूसरा क्षत्रिय तीसरा की वैश्य इन तीनों को संन्यास लेने का अधिकार अपने शास्त्र में है यह शास्त्र पढ़ कर के मुझे पूछे कि किस अधिकार से आपने संन्यास ग्रहण किया है किंतु स्वामी जी साथ में और भी एक बात कहते हैं कि इन लोगों ने मुझे शुद्र कहा तो मुझे इसके बारे में कोई आपत्ति भी नहीं है एक तो अपना अपना एक डिफेंस तो उन्होंने कर लिया कि हां मैं शुद्र नहीं मैं क्षत्रिय हूं कि साथ-साथ में ही अपने को शुद्र करी से पहचान देने में भी स्वामी जी कतराते नहीं है दिस इज ओनली बाय द वे यह तो सिर्फ एक एक बात हो गई कि मुझे अपना जो वर्ण क्या है वह सिद्ध करना पड़ा भारत पूरा वर्ण जाति प्रथा पर बना है तो स्वामी जी ने यहां पर कह दिया कि मैं शुद्र नहीं क्षत्रिय जाति का हूं वही क्षत्रिय जाति जिसने कि युग युगांतर तक भारत की रक्षा की है किंतु साथ में ही स्वामी जी कहते हैं कि यह तो सिर्फ एक एक आर्गुमेंट देना हुआ आई जस्ट रेफर टू दिस बट आई एम नॉट एट ऑल हर्ट इफ दे कॉल मी अ शुद्र ये तो सिर्फ मैंने एक मेंशन कर दिया किंतु जद ये लोग मुझे शुद्र कहते हैं तो मुझे उससे तनिक भी किसी भी तरह की चिंता नहीं है या तो गलानी नहीं है इट विल बी अ लिटिल रिपरेशन फॉर द टायरेनस ओवर द पुअर ये जो मेरे पुरखे जो थे उन्होंने ये गरीब शुद्र के ऊपर में जो अत्याचार बिताए उसका ये एक छोटा सा एक रिपरेशन होगा छोटा सा एक बदला देना होगा कि ज य यह लोग मुझे शुद्र कहते हैं इफ आई एम ए पराया आई विल बी द मोर ग्लैड फॉर आई एम द डिसाइल ऑफ अ मैन हु अ ब्राह्मण ऑफ ब्राह्मण वांटेड टू क्लींस द हाउस ऑफ ए पराया जद वे लोग मुझे पराया कहते हैं पारिया कहते हैं ये साउथ इंडिया में एक होता है कि जो चंडाल शुद्र जाति के हैं तो परिया कहते हैं उनको तो यदि मुझे ये परिया कहते हैं तो उससे भी मुझे कोई गलानी नहीं है क्योंकि मैं उन गुरु का चेला हूं जिस गुरु ने जो कि ब्राह्मणों के भी ब्राह्मण है ब्राह्मणों के भी जितने भी नियम है उस नियमों से हजार गुना नियम साधना उपासना जिन्होंने की है ऐसे गुरु ने जो गुरु ने परिया के घर में जाकर के अपने सर के बालों से उनका टॉयलेट क्लीन किया है तो क्लींस द हाउस ऑफ ए परिया यहां पर स्वामी जी कहते हैं परिया का घर साफ किया है किंतु हमको पता है कि ठाकुर ने सिर्फ उसका घर नहीं उसका टॉयलेट किया था और सिर्फ हाथों से नहीं अपने बालों से किया था अपना जाति अभिमान किस तरह से त्याग करना चाहिए यह हमको ठाकुर से सीखना है ऑफकोर्स द परिया वुड नॉट अलाउ हिम हाउ कुड ही लेट दिस ब्राह्मण सन्यासी कम एंड क्लीन हिज हाउस ऑफकोर्स यह शुद्र जो था वो शुद्र तो ब्राह्मण को परमिट नहीं करेगा उनको उनको उनकी बात स्वीकार नहीं कर लेगा जब वह कहेंगे कि मैं तुम्हारे घर में आकर के तुम्हारा क्लीन टॉयलेट क्लीन करना चाहता हूं या तो फिर तुम्हारा घर ठीक करना चाहता हूं क्लीन करना चाहता हूं इसीलिए उनको तो छुपके छुपके आकर के यह करना था एंड दिस मैन वक अप इन द डेड ऑफ़ नाइट एंटर्ड सरपश असली द हाउस ऑफ दिस परिया क्लीन हिज लेटन एंड विथ हिज लॉन्ग हेयर वाइप्ड द प्लेस एंड दैट ही डिड डे आफ्टर डे इन ऑर्डर दैट ही माइट मेक हिमसेल्फ द सर्वंट ऑफ ऑल परिया तो परमिशन नहीं देगा इसलिए ठाकुर रात को छुपके छुपके उनके घर में आते थे अपने लंबे बालों से उनका टॉयलेट क्लीन करते थे लेटन क्लीन करते थे और यह कार्य उन्होंने दिन के बाद दिन कितने ही दिन तक किया जिसकी वजह से इसको करने से वह उन अपने को सभी के सेवक के रूप में वह बन सके ठाकुर कहते हैं ना कि दासा उ दासो हम जो दासो का भी दास है वो मैं हूं तो ये दासो का दास बनने की अर्थात अपना जाति अभिमान त्याग करने की ठाकुर की यह साधना थी उस साधना के अंग के रूप में ठाकुर ने दिन के बाद दिन अपने बालों से उसका लेटन क्लीन किया है स्वामी जी कहते हैं ऐसे गुरु का मैं शिष्य हूं तो यदि आप मुझे शुद्र चंडाल परिया कहेंगे तो उस बात से मुझे कोई भी ग्लानि नहीं होगी क्योंकि मेरे पुरखों ने इनके ऊपर में जो अत्याचार किए हैं उस अत्याचार का मैं इस तरह से कुछ तो रिपरेशन दे पाऊंगा कुछ तो मैं क्षमा मांग पाऊंगा उनसे कि हमारे कि पूर्वजों के किए हुए पापों की सजा या तो फिर पापों का ऋण मैं इस तरह से चुकते कर सकता हूं आई बेर द फीट ऑफ दैट मैन ऑन माय हेड यह व्यक्ति यह साधक यह गुरु मेरे यह अवतार स्वयं जिन्होंने अपने बालों से परिया का लेटन क्लीन किया उनके पैर में अपने सर पर धारण करता हूं ही इज माय हीरो दैट हीरोज लाइफ आई विल ट्राई टू इमिटेटर हीरो है और उनका जीवन में फॉलो करने का उपदेश फॉलो करने का मैं जीवन भर प्रयास करता रहूंगा बाय बीइंग द सर्वंट ऑफ ऑल अ हिंदू सिख टू अपलिफ्ट हिमसेल्फ दैट इज हाउ द हिंदू शुड अपलिफ्ट मासस नॉट बाय लुकिंग फॉर एनी फॉरेन इन्फ्लुएंस सभी के दास होकर के एक हिंदू अपने को उच्चतर स्थिति में ले जाता है साधना के उच्चतर सोपान सर कर सकता है और यही दूसरों का दास होकर के ही एक हिंदू पूरे हिंदू समाज को उन्नत करेगा हिंदू समाज की प्रगति का पंथ जैसे कि कि वो मुक्त करेगा नहीं कि कोई विदेश से इंपोर्ट की हुई फिलोसोफी से विदेश से इंपोर्ट किए हुए धर्म के माध्यम से 20 इयर्स ऑफ ऑक्सीडेंटल सिविलाइजेशन ब्रिंग्स टू माय माइंड इलस्ट्रेशन ऑफ द मैन हु वांट्स टू स्टार्ज ओन फ्रेंड इन अ फॉरेन लैंड सिंपली बिकॉज हिज फ्रेंड इज पॉपुलर सिंपली बिकॉज ही थिंक्स दैट दिस मैन स्टैंड्स इन द वे ऑफ हिज मेकिंग मनी ये 20 साल जिन्हो ने यह विदेशी सभ्यता का पान किया विदेशी धर्म की शिक्षा ली उस विदेशी धर्म विदेशी सभ्यता का पान करके उसका अनुसरण करके यह एक व्यक्ति खड़ा हुआ जो कि अपने मित्र के रास्ते में ही बाधा डाल रहा है मित्र के विरोध में ही सब झूठ फैला रहा है मित्र को ही हानि पहुंचाने का प्रयास कर रहा है क्यों क्योंकि उसका मित्र उससे ज्यादा पॉपुलर हो गया है स्वामी जी मजूमदार से ज्यादा पॉपुलर हो गए थे बोलकर के मजूमदार के मन में जो ईर्षा का उदय हुआ इस ईर्षा के मारे मजूमदार ने सोचा कि अभी तो स्वामी जी को किसी भी तरह से अमेरिका से भगाया जाए और वह भगाने के लिए जो कुछ भी करना पड़े वह मैं करूंगा तो यह 20 साल की विदेशी संस्कृति विदेशी धर्म का पान करके विदेशी धर्म को फॉलो करके यह यदि मजूमदार जैसा आदमी खड़ा होता है तो यह विदेशी संस्कृति विदेशी धर्म किस काम के एंड द अदर इज द इलस्ट्रेशन ऑफ व्ट जेनुइन ऑर्थोडॉक्स हिंदुइज्म इट सेल्फ विल डू एट द होम और जो दूसरा उदाहरण है ठाकुर का वह उदाहरण है कि एक जेनुइन ऑर्थोडॉक्स हिंदू धर्म क्या प्रकट कर सकता है तो श्री राम कृष्ण देव को जन्म दे सकता है लेट एनी वन ऑफ अवर रिफॉर्मर्स ब्रिंग आउट दैट लाइफ रेडी टू सर्व इवन अ पराया एंड देन आई विल सीट एट हिज फीट एंड लर्न एंड नॉट बिफोर दैट जदी ये विदेशी संस्कृति विदेशी धर्मों को फॉलो करने वाले ठाकुर जैसे एक चरित्र को प्रकट करके बता दे तो मैं उनके पैरों के सामने बैठ कर के मैं उनके आदेशों का पालन करूंगा नॉट बिफोर दैट उससे पहले नहीं वन आउंस ऑफ प्रैक्टिस इज वर्थ 20000 टंस ऑफ बिट टॉक बहुत बड़ा स्टेटमेंट एक परसेंटेज ऑफ प्रैक्टिस वो 1000% ऑफ बिग टॉक बड़ी-बड़ी बातें करने से भी ज्यादा अच्छा है 1 आंस ऑफ प्रैक्टिस वर्थ 20000 टंस ऑफ बिग टॉक यह जो दोनों के बीच में जो डिफरेंस है मात्रा का 1 आउंस यानी 1 ग्राम के आसपास होगा और उसके सामने 20000 टन दोनों के बीच में डिफरेंस देखिए 1 पर और 100% ऐसा नहीं 20000 टन का डिफरेंस दोनों के बीच में है एक ग्राम या तो एक आउंस आप प्रैक्टिस करेंगे तो 200 हज टन बड़ी-बड़ी बातें जद आप करते हैं उससे भी यह बेटर है इसके बाद में नया पॉइंट चालू होता है जिसको कि अभी हम कल देखते हैं आज यही तक ओम शांति शांति शांति हरि ओम तस्त श्री राम कृष्णर्पण मस्तु ना किंतु यहां पर एक बात है देखिए एक तो गुड इंटेंशन देम सेल्फ गो लोंगवे अब
प्रश्न: कुछ चार्टर्ड अकाउंटेंट नियमित रूप से वेदांत का अध्ययन करते हैं, लेकिन जब तक वे टेक्स में चोरी करते हैं, तब तक वे वेदांत को नहीं समझ पाएंगे ।
जब गृहस्थ है तो घर तो चलाना है तो एक बारे आप 100% यह सत्य अहिंसा का पालन करने से तो होगा नहीं जन्म जन्मांतर की यात्रा है तो यदि एक फर्स्ट स्टेप ले लिया है मंथली कमिटमेंट का तो दैट इट सेल्फ ल गो अ लंग वे फिर नेक्स्ट जन्म इससे अ बिल्ड करेंगे उसके बाद में उसके ऊपर बिल्ड अप करेंगे ट इजट ऑफकोर्स ऑफकोर्स मैं उनकी बात तो एकदम एकदम 100% क्लियर है कि जब तक चोरी करते हैं वेदांत से कोई लाभ नहीं है किंतु वही है कि एक स्टेप तो लिया चलो भाई बाकी जो लोग भयानक तमस में डूबे हैं मने बेशर्मी से चोरी करते हैं उनसे तो एक एक स्टेप ऊपर है किंतु वोह सीमलेस इंटीग्रेशन है ना वोह
प्रश्न: जब हम वेदांत का सही तरीके से पालन करते हैं तो हम दोहरा जीवन नहीं जी सकते। एक तरफ मंदिर जाना और दूसरी तरफ टैक्स चोरी करना।
अब जब ईश्वर प्राप्ति करके वापस आएंगे तब वह सीमलेस इंटीग्रेशन आपको दिखेगा जब तक हम उस सा के पाथ पर है और खास करके हम सभी लोग तो मंद और मध्यम अधिकारी है तो हम लोगों के लिए जो प्लान करके जो करना है स्वामी जी का जो रास्ता है आत्मानम शार्थ जगत हिताय आपको प्लान करके सब करना पड़ेगा सो इंटेलेक्चुअली समझ करके प्लान करके करना है वो एक सीमलेस हो जाएगा एक सहज हो जाएगा कब जबकि आप साधना के उच्च सोपान सर करेंगे नॉट बिफोर दैट उससे पहले तो आपको बुद्धि लगा कर के करना पड़ेगा लगाना पगा हां जोर लगाना पड़ेगा हां अभी जैसे वह एक अच्छा स्टूडेंट होता है उसको एक आप प्रॉब्लम सॉल्व करने को देते हैं तो फट करके सॉल्व कर देगा अभी ये जो मंद स्टूडेंट है व बेचारा कितना घंटों सोचता रहेगा इसको पूछेगा उसको पूछेगा कहां से कॉपी करने का प्रयास करेगा तो मैंने इस तरह से है कि हमारा वह मंद स्टूडेंट वाली बात है हमको बहुत कुछ प्लान करके सोच समझ करके करना पड़ता है मैक्रो कजम और माइक्रो
प्रश्न: क्या व्यष्टि धर्म - समष्टि धर्म का स्वामीजी के विचारों मिक्रोकोस्म - मेक्रोकोस्म से कोई समानता है?
कजम बेसिकली थे कि जीव और ब्रह्मण इन दोनों के बीच का यह डिफरेंस दिखा रहे हैं और यहां पर जो है कि व्यक्ति और समाज इन दोनों के बीच का यह एक कनेक्शन है तो वो कॉस्मो कॉस्मिक वो हो गया ब्रह्मण या तो फिर आत्मन और यह इंडिविजुअल हो गया हमारा खुद का अंतरात्मा या तो फिर जीवात्मा टेक्निकल टर्म है जीवात्मा और आत्मा और जीवात्मा या तो फिर ब्रह्म और जीवात्मा इन दोनों के बीच का कनेक्शन है मैक्रो कजम माइक्रो कजम और यहां पे समाज और व्यक्ति इंडिविजुअल एंड सोसाइटी इन दोनों का बीच का कनेक्शन है सो आप देखिए कि यदि आप फर्स्ट प्रिंसिपल से किंतु सब कुछ डिराइवर होता है इसलिए कोई प्रश्न ही नहीं है फर्स्ट प्रिंसिपल कहता है कि ब्रह्म शक्ति अभेद तो एक और आपका ब्रह्मण है जो कि आपको कॉस्मिक प्रिंसिपल कहेंगे दूसरा है शक्ति शक्ति के भीतर में सब आ जाता है मेरा इंडिविजुअल जीवात्मा भी आ जाता है जीव जगत सब कुछ आ जाता है तो फर्स्ट प्रिंसिपल से तो सब कुछ डिराइवर होता ही है बट बेसिकली द कांसेप्ट इज डिफरेंट यह जो आपने एक्सीडेंट की बात कही ना मैं एक महाराज की बात करता हूं नाम नहीं लूंगा व कहीं पे जा रहे थे बड़े सिटी में तो अभी तो आश्रम की गाड़ी तो ड्राइवर ही चलाता है तो किसी दूसरे की गाड़ी के साथ में टक्कर हो गई अभी गलती सामने वाली की थी तो अभी वोह सामने वाली थी एक लड़की जो कि गाड़ी चला रही थी अभी उसका गुस्सा एकदम उसने ड्राइवर पे निकलना शुरू किया अपने आश्रम के कि अरे ठीक से नहीं चलाते हो क्या मेरी गाड़ी के साथ में एक्सीडेंट हो गया अभी क्लियर गलती उसकी थी किंतु अभी वो अभी वो और ज्यादा चिल्ला करके वो ड्राइवर क्या होते बेचारे अपने वो थोड़े सीधे-साधे होते हैं तो कुछ उत्तर नहीं दे पा रहा था तो यह महाराज पीछे बैठे थे तो उन्होंने एकदम लड़की के साथ में झगड़ा करना शुरू कर दिया आपको समझ में नहीं आता कि आप ठीक से गाड़ी नहीं चलाती वगैरह वगैरह अभी वो इतनी नाराज हो गई बोला मैं आपके ऊपर में केस करूंगी अब यहां पे देखिए प्रॉब्लम क्या है उसकी गलती होके नहीं हो अपने समाज में आजकल के जो रूल्स ए रेगुलेशंस है स्त्रियों को सन्मान वगैरह वो जद कंप्लेन करेगी तो सामने वाला एकदम फंस जाएगा यह जो जेंडर इक्वलिटी का मामला आ जाता है और फिर यहां पे तो साधु है तो वो बेचारे महाराष्ट्र डर गए कि अभी क्या करना है तो फिर किसी ने कहा कि 20000 ना कि ऐसा कुछ देके आप समाधान कर लीजिए अब देखिए कि वो गलती है वो लड़की की फिर भी सामने से पैसा देना पड़ा अभी प्रश्न है कि उनका वो गलती करके भी हमसे जगड़ा बला करें कि नहीं और मुकाबला करने में फंस गए पैसा देना पड़ा दिस इज वेरी तो अभी क्या है कि जो कुछ भी करना है आपको देश काल पात्र देख कर के करना है अभी एक दूसरा एक उदाहरण इसी तरह का है मैंने सुना है इसका मैं कोई ये नहीं कर पाऊंगा कि सही है कि गलत है किंतु दो-तीन लोगों से मैंने इसको सुना है कि का एक दल वो कहीं पे गया
प्रश्न: जब कोई हमें धमकी देता है, तो हमारे सामने दो विकल्प होते हैं - उन्हें नजरअंदाज करें या उनसे लड़ें। क्या कोई गाइडलाइन हैं कि क्या चुनना है?
साधुओं का विदेश में मोस्ट प्रोबेबली अमेरिका में और फिर वह जो चेकिंग वगैरह जो होता है वहां पे प्लेटफॉर्म पे तो उन्होंने कहा कि ये जो लेडीज जो है वो ऐसा कोई चेकिंग नहीं करेगी फिजिकल वगैरह वो उनको हटा कर के किसी पुरुष को आप यहां पे ले आइए अभी वहां पे अमेरिका में जेंडर इक्वलिटी का मामला तो बड़ा स्ट्रिक रहता है तो उन्होंने इस तरह का कंप्लेन किया तो वो जो लेडी ऑफिसर थी वहां पे उस ने इनके ऊपर केस कर दिया उसमें भी वो उन लोगों को काफी उनको पैसा वगैरह देना पड़ा था अभी देखिए कि उनकी कहने की कुछ तो बात ठीक है कि आप फिजिकल एग्जामिनेशन एक लेडी ऑफिसर के पास में साधू क्यों करवाएगा ऑन द अदर हैंड जेंडर इक्वालिटीज खास करके पब्लिक प्लेसेस पे होता है देन यू हैव टू फॉलो दैट रूल्स एंड रेगुलेशन राइट तो यहां पे आप क्या करेंगे द थिंग इज दैट कि देश काल पात्र देख कर के यह सब करना होता है वहां पे यदि आप यह कहेंगे मैं सही हूं या फिर मैं साधू हूं या आई एम बेटर दैट विल नॉट दैट विल नॉट डू सो यह देशकाल पत्र और यह कॉमन सेंस यही एक मात्र सहाय है इसके अलावा अभी देखिए कि यह साधु नहीं होते तो उन्होंने और ज्यादा झगड़ लिया होता व लड़की के साथ में जिसने एक्सीडेंट किया और लड़की भी 10 बार सोचती कि मैं वह कोर्ट केस करूं या ना करूं क्योंकि साधु लोग को उसको पता है कि वह बहुत ज्यादा कुछ गड़बड़ नहीं करने वाले हैं समाज में बदनामी का भी डर है किंतु बाकी कोई होगा तो वह डर के मारे व अपने को रोक देगा ऐसा नहीं होने वाला है सो सामने वाला भी किस तरह से हमारे से रिएक्ट करता है व बहुत सारे फैक्टर्स होते हैं जेंडर इक्वालिटीज जिस तरह से है पहले ऐसा नहीं था तो उस समय वह लड़की भी बेचारी 10 बार सोचती कि किसी पुरुष के सामने मैं झगड़ा करूं कि नहीं आज का रूल्स रेगुलेशंस बहुत चेंज हो गए हैं स्त्रियों के भीतर में बहुत साहस भी आया है जो कि उचित भी है आना किंतु इसकी वजह से समाज के रूल्स भी चेंज हो गए हैं तो हम जिस समाज में रहते हैं उस समाज के अनुसार हमको रहना पड़ेगा य वाले भारत में जिस तरह से रहते हैं बोलेंगे वही नियम हम अमेरिका जाके पालन करेंगे इट इज नॉट गोइंग टू हेल्प सेम रूल्स दो देश में नहीं लगेंगे क्योंकि दोनों के रूल्स रेगुलेशंस सोशल कन्वेंशंस बहुत ही डिफरेंट है तो देश काल पात्र के भीतर में रह के आपको यह डिसाइड करना है थिंग इज दैट कि जो बेसिक प्रिंसिपल है जैसे कि हमने वह पांच कहानियों के माध्यम से देखा सामने किसी की हानि नहीं करनी है आत्म रक्षा करनी है गाइडिंग प्रिंसिपल है किंतु सामने किसी को हानि करने को नहीं जाना है जो आप भी कह रहे हैं वह भी ठीक है कि जो कुछ असामाजिक तत्व है वह स्त्रियों की कोई रिस्पेक्ट नहीं करते हैं और इसीलिए रूल्स इतने टाइट है आज यह जेंडर इक्वलिटी वो जो किया गया है जैसे मैंने पहले ही कहा कि इट इज गुड फॉर द सोसाइटी स्वामी जी ने खुद ने कहा है कि जहां पर स्त्रियों के सम्मान नहीं है वह सोसाइटी पशु सोसाइटी है अमेरिका जाकर के स्वामी जी ने क्या कहा कि अमेरिका इज अ हेवन फॉर मासस एंड विमेन स्त्रियों के लिए और गरीब लोगों के लिए अमेरिका जैसे कि स्वर्ग है तो वो तो होना ही चाहिए वही बात है कि हमारी जो एक्शन है पुरुषों की या स्त्रियों की उस परिप्रेक्ष्य में सोच समझ करके लेनी है आप बोलेंगे मैं उस गांव में इस तरह से रहता था इस शहर में भी इस तरह से रहूंगा भारत में इस तरह से हमारे प्रिविलेज थे अमेरिका में भी मिलेंगे सो दैट प्रॉब्लम क्या है ना कि यहां पर एब्सलूट रूल तो कुछ है नहीं परिप्रेक्ष्य के अनुसार आपको करना है स्वामी जी का खुद का उदाहरण देखिए कि स्वामी जी जब भारत में ऐसे परिव्राजक करने का प्रयास किया है और जहां पर नहीं हो सका उसको डांटा भी है जैसे वो रेल के डिब्बे में बैठने की बात है कि वो लेजिटीमेट टिकट लेकर फर्स्ट क्लास में बैठे थे क्योंकि उनको पेट का प्रॉब्लम था बार-बार शौच के लिए जाना पड़ता था तो उनके डिवटी ने उनके लिए फर्स्ट क्लास की टिकट निकाल दी अभी मास्टर आके कहता है यह काला नंगा फकीर फर्स्ट क्लास में क्यों बैठा है भागो यहां से तो अभी स्वामी जिसने टिकट निकाली थी वह खुद रेलवे कर्मचारी था स्वामी जी के पास में ही बैठा था वो टिकट चेकर को बार-बार रिक्वेस्ट कर रहा है कि सर मैंने इनके लिए टिकट निकाली है उनको यहां पर बैठने का अधिकार है फिर भी वह टिकट चेकर नहीं सुन रहा है क्योंकि सामने एक गोरा आदमी बैठा था वो कहता है मैं फकीर के साथ में क्यों यात्रा करूंगा तो उसके बाद में किंतु स्वामी जी का टेंपर गया और उसको झड़ना शुरू किया तो ये कंटेक्सचर्स झगड़ा करना चाहते थे किंतु फिर वो उसके साथी के सामने वो य अपशब्द बोले वो तो एक तो बोलना है ना फिर अभी अमेरिका में देखिए स्वामी जी शिकागो में ही पहले-पहले जब वो गली से रास्ते से जा रहे हैं वो कपड़े पहन के उनके ड्रेस कोर्ट और पगड़ी पहन के तो उनके ऊपर में पत्थर भी छोड़े गए थे तो फिर स्वामी जी वहां प भी कुछ नहीं बोलते हैं स्वामी जी कहते हैं कि मैं जब अमेरिका की गलियों से जाता हूं तो हमेशा एक वो जो अमेरिकन लेडी डिवटी को साथ में रख कर के निकलता हूं क्यों है क्योंकि वो लेडी डिवटी साथ में रहेगी तो उसकी प्रेजेंस से कोई उनकी अ उनको अपशब्द नहीं कहेगा उनके ऊपर में पत्थर नहीं फेंके उनका अपमान नहीं करेगा सो स्वामी जी आल्सो लर्न टू कंटेक्सचर्स आप फाइट करने को जाएंगे तो जीवन उसी में जाएगा ये देखिए रामायण महाभारत जब आप पढ़ेंगे ना यह जो धर्म का जो कंफ्लेक्स वो माने हम लोग तो छोड़ ही दीजिए अवतार पुरुष किस तरह से वाली का पीछे से वो तीर मार के भगवान राम ने वध किया फिर यहां पर वह एक्लिप्स लेकर आए भगवान कृष्ण युद्ध क्षेत्र में जादू चमत्कार करके संध्या हो गई है सबने शस्त्र रख दिए तो अभी उसका वध करो वो नरोवा कुंजवा वह हाथी मर गया है कि मनुष्य मरा है वह पता नहीं वह कर्ण का रथ फस गया है वह रथ का चक्र निकालने का प्रयास कर रहे हैं वह कृष्ण अर्जुन को कहता है कर दो इसका वद अभी तो अभी यह राम और कृष्ण को भी हम देखते आपात ऊपर से कि ये धर्म का तो भंग कर रहे हैं युद्ध के जो नियम है उसी को भंग करके वह अवतार कैसे हो गए किंतु बात है कि देखिए कि यह लोग भी कंटेक्सुलाइज करते हैं नीति और अनीति का एक कॉस्मिक बैटल चल रहा है विद इन दैट कॉस्मिक बैटल आपको कंटेक्सचर्स का पहिया निकाल रहा है और उसका वध करने की जरूरत है तो शत्रु के हाथ में शस्त्र नहीं रहने से उसका वध ना करें इस नियम को भंग करके उसका वध करवा दिया सो किस तरह से यह लोग भी कंटेक्सुलाइज करते हैं यह जो न्यायशास्त्र के जो प्रिंसिपल
प्रश्न: स्वामीजी ने अपने विरोधियों का कितनी अच्छी तरह मुकाबला किया!
होते हैं ना कि वाद विवाद कैसे करना है उत्तर पक्ष पूर्व पक्ष या तो फिर मॉडर्न उसको कहा जाएगा कि डायलेक्टिकल वो जो थिंकिंग जो होता है यह जो मार्क्सिज्म ने इसको बड़ा उने इंटेलीजेंटली अप्लाई किया है कि किस तरह से अपने विरोधियों को चारों ओर से फसा करके उसको अपना ले तो ये डायलेक्टिक जो है उसके गुरु के उसके पापा के पापा तो हम लोग हैं न्या शास्त्र डायलेक्टिक्स उत्तर पक्ष पूर्व पक्ष ये तो भारत में डेवलप हुआ है आप वो मार्क्सिज्म कम्युनिज्म का सहारा लेकर स्वामी जी के साथ में युद्ध करेंगे तो पता चल जाएगा कि क्या करना है मास्टर महाशय और स्वामी जी को कहते चलो तुम लोग आपस में अंग्रेजी में चर्चा करो तो दोनों चुपचाप बैठे रहते हैं ठाकुर दो तीन बार जीत करते हैं किंतु फिर भी ये लोग मास्टर महाशय ने तो पहले ही कह दिया कि जो तीन पहले दर्शन में ही जो तृतीय दर्शन में वो जो आर्गुमेंट किया सो किया बस अभी यहां पे ही ठाकुर का वो मास्टर महाशय का आर्गुमेंट का मुंह बंद हो गया नर आर्गुमेंट करता था किंतु आखिर आखिर में उसने भी सीख लिया वो जो हीरानंद आया था सिंध से तो वो मास्टर महाशय को तो पहले बोले इसके साथ में कुछ बात करो फिर वो नहीं माने तो बोला नरेद को लेके आओ तो नरेद्र कुछ किंतु विवाद करता है कि मैं जद ईश्वर होता तो इससे भी अच्छी सृष्टि की रचना करता जदी वो प्रश्न करता है वो हीरानंद कि भगवान की सृष्टि में भक्त को इतना कष्ट क्यों है तो नारायण कहता है कि मैं यदि ईश्वर होता तो इससे बेटर सृष्टि की रचना कर देता तो ठाकुर के सामने जो ऐसा बोल सकता है वह मजूमदार फजू दार क्या है उसके [हंसी]
प्रश्न: एक औंस अभ्यास 20 हजार टन शब्दों से बेहतर है
सामने वो जो ठाकुर कहते हैं ना अपना वध करना है तो सुई काफी है यह ढाल तलवार तो दूसरों के वध के लिए है शास्त्र शास्त्र पाठ क्यों है कि वो बिकॉज कि आपको वह कार्य करना है बोलकर के शास्त्र पाठ अदर वाइज आप कथामृत पढ़िए इस ऑल जगत में जो कुछ भी है सब कथामृत में फिर और कुछ पढ़ने की जरूरत नहीं
प्रश्न: क्रिश्चियन और थियोसोफिकल सोसायटी के बीच अंतर
है थियोसोफिकल सोसाइटी और क्रिश्चियनिटी में वैसे तो काफी फर्क है क्रिश्चियनिटी के अनुसार एक जीसस मात्र सेवियर है और उसके अलावा और किसी को आप फॉलो करेंगे तो आप क्रिश्चियनिटी के फॉलोअर नहीं हुए और यहां पर थियोसोफिकल सोसाइटी के दो महात्मा थे कुथु मी और मोर्या तिबेट में रहते थे तथाकथित और वह सुपर नेचरल माध्यम से वो इन लोगों को यह मैसेज पहुंचाते थे उनके जो रिप्रेजेंट टव थे एनी बेसेंट और मिस्टर जज तो यह कुथु मी और मोरिया के फॉलोवर्स थे थियोसोफिकल सोसाइटी वाले तो यदि आप जीसस के अलावा और किसी को भी फॉलो करते हैं एज ए सेवियर तो फिर व आप क्रिश्चियनिटी के फॉलोवर नहीं रहे यानी कि थियोसोफिकल सोसाइटी और यह क्रिश्चियनिटी इन दोनों के बीच में यही फंडामेंटल ही सबसे बड़ा फर्क था बाकी डिटेल तो होती रहेगी फंडामेंटल यह बहुत बड़ा फर्क था यह दोनों एक दूसरे के एक्सक्लूसिव थे यदि आप जीसस को फॉलो करते हैं तो कुथु मी और मोरिया को नहीं फॉलो कर पाएंगे और उनको फॉलो करते हैं महात्मा को तो आप जीसस को फॉलो नहीं कर पाएंगे ना उसका रीजन एक बताऊं क्या है कि
प्रश्न: एक साधु गुजराती में बोल रहे थे, हम बंगालियों को अच्छी तरह समझ आया
हमारा जो साधुओं का लैंग्वेज है ना खिचड़ी हो गया है अभी हम लोग कभी नॉर्थ में रहते हैं कभी साउथ में कभी ईस्ट में कभी वेस्ट में तो यह बंगाली हिंदी सब वोकेबुलेरियो बोलना बड़ा मुश्किल है वो कुछ-कुछ हिंदी अंग्रेजी शब्द आ ही जाएंगे बोलकर के हमारी जो गुजराती यूनिवर्सल ती है अ मेरा प्रॉब्लम क्या था मैं ऐसा मिक्स खिचड़ी भाषा बोलता हूं अभी वो वहां पर ज्योत एडिट करना है अभी रामकृष्ण ज्योत अपनी गुजराती पत्रिका तो प्योर गुजराती में चलना पड़ेगा मुझे इतना तकलीफ होता था मैं क्योंकि मुझे खुद को आर्टिकल लिखना है मैं बोल रहा हूं और वोह ऑपरेटर बैठ कर के लिख रहा है फिर वो ऑपरेटर बीच-बीच में बोलेगा महाराज ये तो हिंदी शब्द है मैंने कहा ये हिंदी शब्द है तो हां ये हिंदी है गुजराती नहीं है मैंने बोला इसका गुजराती खोजो अभी कभी-कभी वो बोलता है ये तो बंगोली शब्द है मैंने कहा अरे ये तो बंगोली का गुजराती खोजना पड़ेगा उस समय मुझे समझ में आया कि वो प्योर गुजराती वो बोलना हम लोग चाहे कि भूल ही गए हैं एक तरह से मैं यहां पर कुछ-कुछ लोग बोलते हैं आप तेलुगु सीख जाएंगे तो सुहितानंद जी आए थे मुझे बोला तुम तेलुगु सीख जाओ मैंने कहा महाराज क्या बात करते मैं ब्रह्मचारी होता तो सोच अभी मैं बूढ़ा हो गया हूं अभी क्या नया लैंग्वेज सीखना वो भी तेलुगु मैंने ये मराठी पंजाबी होता तो फिर भी कुछ साहस करते ये तेलू को भी छोड़ दीजिए