Transcript
ओम स्थापक य च धर्मस्य सर्व धर्मा स्वरूपने अवतार वरिष्ठ या राम कृष्णा यते तोमरा आज यह जो जिस सॉफ्टवेयर में य डटा एंट्री वगैरह की है तो मैं इसको ऑनलाइन करने का प्रयास कर रहा हूं आज सुबह कर रहा था किंतु पता नहीं अभी य सॉफ्टवेयर एक तो बहुत पुराना है और फिर बहुत दिन हो गए कि मैंने इसको यूज नहीं किया है क्योंकि राजकोट में आखिर आखिर में मैं इतना बिजी था कि इसके ऊपर में काम करने का मौका ही नहीं मिला तो फिर से मैं आज फिर से ट्राई करूंगा दोपहर को जद यह एक्टिवेट हो जाता है तो प्रत्येक आइटम के ऊपर में क्लिक करने से ज्यादा से ज्यादा डिटेल दिखाई देगी और उसमें और भी बहुत सारे फीचर है वो मैं स्क्रीन शेयर करके दिखाऊं तो खैर अभी तक तो हमारे हम सामने यह क्रोनोलॉजी है और क्रोनोलॉजी में हम पहुंचे हैं कि जिस तरह से स्वामी जी अमेरिका आए फिर अमेरिका में भी देखिए कि स्वामी जी के जीवन के कुछ कुछ पीरियड्स थे सर्वप्रथम तो शिकागो पार्लिमेंट उससे भी पहले शिकागो पार्लिमेंट ऑफ रिलीजन से भी पहले जो एक छोटा सा फेस था जहां पर वोह ईस्टर्न कोस्ट प ईस्ट कोस्ट पर गए थे क्योंकि पार्लिमेंट ऑफ रिलीजन शुरू होने में देरी थी थी और स्वामी जी के पास में इतने पैसे नहीं थे कि शिकागो जैसे महंगे शहर में वो रहे तो वहां पे जो गए ईस्ट कोस्ट पे बोस्टन एंड स्कम वगैरह तो उससे यह सबसे बड़ा फायदा हुआ कि स्वामी जी बहुत इजली अमेरिकन एक्सेंट पिकअप कर लिए और अमेरिकन फ्रेज अमेरिकन एक्सेंट जो लोग अंग्रेजी ठीक-ठीक जानते हैं उनको पता है कि कितना डिफरेंस होता है ब्रिटिश एक्सेंट और अमेरिकन एक्सेंट में तो जो लोग ये सब डिफरेंस पहचानते हैं वे लोग इमीडिएट कह लेंगे कि अरे ये ब्रिटिश स्पीकर यहां अमेरिका में क्या कर रहा है उन दोनों में थोड़ा सा अन बनाम था तो स्वामी जी इजली अमेरिकन एक्सटेंट पिक अप कर लिए वर्ल्ड पार्लियामेंट ऑफ रिलीजन में गए और उसके बाद वाला जो पीरियड था साइक्लोनिक मंक ये जो मिड वेस्टर्न और सधन स्टेट्स ये सदर्न स्टेट यानी कि यह सब कैरोलिना और ये जॉर्जिया वगैरह तो वहां की टूर तो उन्होंने की किंतु एक बात है कि वह सब बड़े ही कंजरवेटिव जगह है वहां पे इजली हालांकि वे लोग नोवेल्टी के रूप में स्वामी जी को स्वीकार तो करेंगे किंतु स्वामी जी के मैसेज के आधार पर वेदांत के जो प्रिंसिपल्स है वैल्यूज है उसके आधार पर अपना जीवन कितना मोडिफाई करेंगे अपना जीवन कितना उसके भीतर में डालेंगे साधन भोजन करेंगे इसका तो कोई ठीक नहीं है वे लोग तो वहां पर ऐसा कुछ करने नहीं वाले थे स्वामी जी को एज ए नोवेल्टी देखते थे तो फिर स्वामी जी ने ठीक किया या न्यूयॉर्क में रुकते हैं न्यूयॉर्क में रुक कर के कुछ ऐसे क्लोज डिसाइल्स को रेडी किया जाए जो कि उनकी बात सुने और उनके कहे अनुसार अपने जीवन को पूरा ट्रांसफॉर्म करें तो वो ट्रांसफॉरमेशनल प्रोसेस स्वामी जी ने यहां न्यूयॉर्क में प्रारंभ किया और जब समर सीजन आया तो स्वामी जी के ही एक डिसाइल मिस डचर उसने कहा कि चलिए आप मेरे साथ में वहां पर थाउज आइलैंड पार्क बोलकर के जो जगह है वहां पर मेरी एक कॉटेज है तो स्वामी जी भी गए वहां पर उस कॉटेज में रुके और फिर उस कॉटेज में जो स्वामी जी ने बातें की वह एक अमर किताब एक हमेशा के लिए वह जो एक जिसकी वैल्यू रामकृष्ण संघ में रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य में हमेशा के लिए उज्जवल अक्षरों से लिखी जाएगी वह किताब इंस्पायर्ड टॉक सारा एलन बोल्डो स्वामी जी की जो डिसाइल थी उसने इसको स्वामी जी की सभी बा को नोट डाउन किया और फिर वहीं से यह किताब व छपी है और वही थाउजेंड आइलैंड पार्क में और एक इंपोर्टेंट घटना थी कि ये क्रिस्टिन क्रिस्टिन ग्रीन स्टीड जिसको कि बाद में हम लोग सिस्टर क्रिस्टिन या तो भगिनी क्रिस्टिन के नाम से पुकारते हैं वो जो कि बाद में भारत में स्वामी जी के साथ में आई थी जैसे कि सिस्टर निवेदिता थी तो वैसे ही यह सिस्टर क्रिस्टीन और एक डिसाइल मेरी फंकी यह दो स्वामी जी को सर्व प्रथम दर्शन करने के लिए वहां पर आए थे थाउज आइलैंड पार्क की उस कॉटेज में वे लोग जा रहे थे रास्ता बहुत दूर था बहुत रात हो गई थी वो कोटेज पर पहुंचे दरवाजा खटखटाया कहा कि स्वामी जी को मिलने के लिए आए हैं तो ये जो उनका डिवोशन था वो स्वामी जी को इतना वो अच्छा लगा कि वैसे तो स्वामी जी बड़ा सोच समझ कर के लोगों को दीक्षा देते हैं किंतु इन दोनों को उन्होंने इमीडिएट दीक्षा दे दी थी दीक्षा देने के लिए वो तैयार हो गए थे और यही क्रिस्टिन सिस्टर क्रिस्टिन की एक सुंदर एक रेमसंस है कि वे लोग एक बार सुबह को मॉर्निंग वॉक के लिए निकले थे सुबह ना कि कौन सा टाइम था टहलने के लिए वॉकिंग करने के लिए निकले थे तो उस समय इनके पास में छाता भी था सब कुछ था एकाएक बारिश होने लगी अच्छा सबसे पहले तो एक पेड़ के नीचे में बैठे स्वामी जी ने कहा चलो ध्यान करते हैं बोलकर के स्वामी जी तो ध्यान में ऐसे मग्न हो गए कि जब बारिश चालू हुई तो उनको यह ख्याल ही नहीं है कि वह पूरे भीग रहे हैं वह जो स्वामी जी की जो फेमस इंसिडेंट है दक्षिणेश्वर में गिरीश घोष ने देखा कि स्वामी जी मच्छरों से इतना घिरे हुए हैं जैसे कि पूरे काले कलर का ब्लैंकेट पहना हो तो यहां पे भी बारिश हो रही है स्वामी जी को तनिक भर अंदाज नहीं है कि वह पूरे बग रहे हैं यह वोह सिस्टर क्रिस्टीन उनके सर के ऊपर में छाता रख के खड़ी हुई है बैठी हुई है किंतु बस वही कैसे भी करके स्वामी जी को बारिश से बचा रही है किंतु स्वामी जी ऐसे जैसे कि गहन वो ध्यान में चले गए कि जैसे कि समाधि में ही चले गए थे तो स्वामी जी के जीवन में जो रेयर कुछ एसिड इंसिडेंट है समाधि के इंस्टेंसस है उसमें से यह एक है कि थाउज आइलैंड पार्क में उनको समाधि हुई थी तो उसके बाद में जब अमेरिका वो न्यूयॉर्क वापस आए तो फिर उन्होंने एक बात सोची कि क्यों नहीं अभी यूरोप जाया जाए यूरोप जाने के लिए उनके पास में दो ये थे माने रीजन थे कारण थे सर्वप्रथम तो बेटी और यह फ्रांसिस लगेट इन दोनों का विवाह होने वाला था कल हमने देखा कि किस तरह से बेटी बेटि स्टर जिस और यह जोसेफाइन मेगला स्वामी जी के पास आए थे स्वामी जी के पास में आते थे प्रतिदिन और फिर इनके साथ-साथ में ही जो बेटी का फियांसे था फ्रांसिस वो भी आया और फिर फ्रांसिस लगेट पर स्वामी जी को लेकर के अपना वो जो फार्म हाउस है रिजली बेनर वहां पर लेकर गया था तो य और ये तीनों स्वामी जी के लाइफ लोंग डिसाइल होने वाले थे और इन तीनों के बारे में बहुत सारे रेमसंस इंसीडेंट्स कहानियां वगैरह अपने साहित्य में बिखरे हुए हैं तो यही ये तीन यह इसमें से बेटी और फ्रांसिस का विवाह होने वाला था ठीक किया था कि फ्रांस में मैरिज करेंगे अभी फ्रांस क्या है कि एक उसका एक इंप्रेशन है कना कि इज अ कंट्री ऑफ रोमांस तो वहां पे एक डिफरेंट टाइप का एक एटमॉस्फियर होता है तो उन्होंने ठीक किया कि स्वामी जी को भी साथ में लेके जाएंगे हालांकि यह है वैसे मेरे सेरेमनी किंतु क्या है कि फिर उसके बाद में भी बात सिर्फ ये नहीं है कि मैरिज होने वाला था इन दोनों का था कि अभी देखिए कि एक समय था कि पावर इक्वेशन जो था वो यूरोप के फेवर में था यूरोप के जो काउंट ड्यूक या लॉर्ड और ये सब नाइट्स वगैरह बहुत ही धनी थे क्योंकि पूरे विश्व को कॉलोनाइज करके रखा था तो पूरे विश्व की धन संपत्ति यूरोप में इकट्ठी कर रहे थे तो उसमें भी खास करके यह ब्रिटन जर्मनी फ्रांस यह जो वेस्टर्न यूरोप के जो कुछ कंट्रीज है बड़े ही धनवां है और अमेरिका तो एक नी मात्र था सेटलर्स का जबकि अब यूरोप में जिसका कुछ नहीं मिल रहा था जिसको जिसके पास में जमीन नहीं थी जिसके पास में धन नहीं था वे लोग सब अमेरिका जाकर के या तो फिर ऑस्ट्रेलिया जाकर के रहते थे तो यूरोप सबसे सर्वोच्च इंडस्ट्रियल इजेशन कहो साइंस कोहो सब दृष्टि से सर्वोच्च शिखर पर बैठा हुआ था किंतु धीरे-धीरे जैसे कि य 19 सेंचुरी स्टार्ट हुई ये 19th सेंचुरी का प्रारंभ हुआ पावर इक्वेशन ऑलरेडी अमेरिका की फेवर में चला गया था अमेरिका ने सिविल वॉर के बाद में इतना रैपिड इंडस्ट्रियल इजेशन प्रारंभ किया कि अमेरिका के धनी लोग जब यूरोप जाते थे तो वहां भले ही चाहे वैसे वह कॉमन मैन कहला है किंतु पैसा इन लोगों के पास इतना रहता था कि वहां के वोह जो डचेस और यह ड्यूक वगैरह जो भी कहो नोबिलिटी यूरोप की वो सब इनके चारों ओर घूमते रहते थे कि इनकी धन संपत्ति से हमको भी थो थोड़ा सा लाभ मिल जाए और यह लोग अमेरिकन लोग चाहते थे कि उनको नोबिलिटी को टाइटल मिले ड्यूक डचेस ऐसा कुछ हमको टाइटल मिल जाए और वो जो नोबल थे फ्रांस यूरोप के उन लोगों को पैसा चाहिए था तो जिसको कहते हैं कि मैरेज ऑफ कन्वीनियंस तो यह फ्रांसिस लगेट जब यूरोप में जाएगा फ्रांस में जाएगा तो उस समय के जो बहुत सारे लोग उनके इर्दगिर्द जमा हो जाएंगे तो क्या है कि स्वामी जी को एक रेडी ऑडियंस मिलता है एक रेडी एक ऐसा एक ग्रुप मिलता है जिसमें कि वह अपनी इंटेलेक्चुअल डिस्कशन को कर पाए अपने हायर आइडियाज जो है इंटेलेक्चुअल आइडियाज वो उसके साथ में शेयर कर पाए तो यह एक बड़ा प्रलोभन था स्वामी जी के पास में फ्रांस जाने का मिस्टर लगेट के साथ में और दूसरा एक रीजन था कि हमको पता है कि टी स्टडी वो जो ब्रिटिश नागरिक था वो हिमालय गया था वहां पर कुछ उसके मन में था कि वो हिंदू उसके अनुसार वो तपस्या करें हिंदू धर्म के अनुसार जो कुछ भी उसके मन में होंगे कुछ आइडियाज ये थियोसोफिकल सोसाइटी ने बहुत सारे हिंदुइज्म और ये बुद्धिज्म के बारे में उलट पुलट आइडियाज सब स्प्रेड करके रखे थे कि यहां पे चमत्कार होते हैं महात्मा होते हैं मिरेकल अस पावर होते हैं तो अभी क्रिश्चियनिटी में वैसे भी दम नहीं रहा था तो लोग ऐसा कुछ मिरेकल अस अल्टरनेट खोजते थे मिस्टिकल एलिमेंट जिनको कि चाहिए था तो यह लोग सब इस तरह से थियोसोफिकल सोसाइटी ना कि इन सबसे प्रभावित होकर के इंडिया जाते थे हिमालय में किसी योगी को खोजते थे कि ना कि कुछ मिरेकल अस पावर मिल जाए ना कि कुछ मिल जाए वहां पर तो यह ईटी स्टर्डी भी वहां पर गया था और नसीब ऐसा कि शिवानंद महाराज अपने महापुरुष महाराज के साथ में उसकी मुलाकात हो गई तो महापुरुष महाराज ने टी स्टडी को कहा महापुरुष महाराज अर्थात की तारक जो कि युवा अवस्था में श्री रामकृष्ण देव के पास में दक्षिणेश्वर में आते थे बाद में वराह नगर में सन्यास लेकर के स्वामी जी ने उनको शिवानंद नाम दिया और उनकी तपस्या और उनकी जो स्पिरिचुअलिटी है उससे प्रभावित होकर के उनको सभी लोग महापुरुष महाराज करके बुलाते थे अपने रामकृष्ण संघ के द्वितीय प्रेसिडेंट सर्वप्रथम प्रेसिडेंट स्वामी ब्रह्मानंद जी महाराज और द्वितीय प्रेसिडेंट महापुरुष महाराज तो यह महापुरुष महाराज के साथ में ईटी स्टडी की मुलाकात हिमालय में हो गई थी उस समय तो बेलून मट वगैरह कुछ एस्टेब्लिश नहीं हुआ था तो यह लोग सब घूमते फिरते थे प्रव्रज्या के प्रव्रज्या करते करते तो महापुरुष महाराज ने कहा कि हमारे गुरु भाई है अमेरिका में इस तरह से वर्ल्ड पार्लिमेंट ऑफ रिलीजन में गए हैं बाद में वहां पर प्रवचन दे रहे हैं जदी आपको सही सही वेदांत समझना है तो आप स्वामी जी से समझिए तो ट स्टडी ने स्वामी जी को इंग्लैंड आने के लिए टेशन भेजा था लेटर भेजा था और स्वामी जी ने उसको स्वीकार किया था तो यह दो रीजन थे कि अमेरिका से सर्वप्रथम स्वामी जी यूरोप गए और देखिए कि यूरोप में जाते हैं तो कैसे वो फ्रांसिस लगेट जैसे धनपति के साथ में जाते हैं अमेरिका आए थे तो कैसे बिल्कुल फकीर के रूप में आए थे किसी कोई उनको पहचानता नहीं है वो बॉक्स कार में रहना पड़ता है रात को इस तरह से बिल्कुल मतलब अनजाने इस तरह से आए थे किंतु जब यूरोप जा रहे हैं तो ऐसे बड़े धनपति के साथ में तो यह भी एक विधि की विचित्र होता ही है तो य फ्रांसिस लगेट के साथ में गए फ्रांस गए फ्रांस में बहुत सारे ऐसे आर्टिस्ट है लिबरल है जो कि इंटेलेक्चुअल है उन लोगों के साथ में उन्होंने बात तो की किंतु फिर आखिर में स्वामी जी ने जो आखिरी मंतव्य था स्वामी जी का इन लोगों के बारे में वह ऐसा है कि यह लोग वैसे बातें तो बहुत अच्छी-अच्छी करते हैं चमत्कारिक सब बातें करते हैं मतलब इंटेलेक्चुअल स्पार्क जिसको कहते हैं इनकी बातों में इतना सारा होता है कि सर्वप्रथम तो आदमी इनसे बड़ा ही प्रभावित हो जाएगा किंतु जैसे आप थोड़ा सा इनकी बातों में थोड़ा सा डीप जाएंगे तो पता चलेगा कि सब माने शैलो है छिछराना हायर थिंकिंग फिलोसॉफिकल थिंकिंग ये आईडिया वो आईडिया किंतु सब शैलो आइडियाज है आइडियाज में डेप्थ नहीं है ऐसा स्वामी जी का एक मंतव्य था हालांकि हमको यह बात भी स्वीकार करनी चाहिए कि यूरोप के जो सही सही पंडित थे उस समय के वह चाहे इवोल्यूशन की थिरी डेवलप कर रहे हो ना कि फिर ये साइकोलॉजी डेवलप कर रहे हो कि मेडिकल साइंस डेवलप कर रहे हो कि बायोलॉजी डेवलप कर रहे हो मने बहुत सारे ऐसे लोग थे जिन्होंने ह्यूमन सिविलाइजेशन को ह्यूमन लर्निंग को एक नया ही डायमेंशन दिया तो किंतु सभी लोग तो एक तरह के नहीं होते हैं एक इंसिडेंट है कि अखंडानंद जी तिबेट गए थे तो तिबेट जाकर के फिर वापस आकर के वहां के बारे में कुछ एक नेगेटिव ओपिनियन प्रकाशित कर रहे थे कि वहां के जो लामा है वोह सब एक तो पता है ना कि अखंडानंद जी बड़े ही भावुक थे बड़े ही इमोशनल थे और जहां पर जो कुछ नहीं बोलना चाहिए कहां पर क्या बोलना चाहिए क्या नहीं बोलना चाहिए वो प्रैक्टिलिटी उनमें नहीं था बचपना था तो किसी के भी सामने कुछ भी बोल देता है तो देखा कि वहां पर वैसे लामा के के जो मठ है वो बहुत ही जो मॉनेस्ट्रीज है वो बहुत ही धनी है बहुत पैसा है बहुत जमीन जायदाद है इनके पास में और बड़े ही सुख सुविधा लग्जरी में रहते हैं किंतु सामने ही यह जो कॉमन तिबेट लोग हैं नागरिक है बड़ी ही असुविधा में रहते हैं बड़ी गरीबा आई में रहते हैं तो अखंडानंद जी ने सीधा सधी उनको उपदेश दे दिया लामा को कि देखिए कि आपके पास में इतनी धन दौलत है तो थोड़ी सी सहाय आप इन गरीब लोगों को भी कीजिए अभी क्या है कि जैसे ही अपने प्रिविलेज पर हाथ पड़ता है तो वो सब साधु होता वो मोनेट जम कहां अदृश्य हो जाता है वो लामा लोग बड़ा गुस्सा करने लगे चेतावनी दी कि ऐसी बेकार की बातें मत करो किंतु अखंडानंद जी तो चुप रहने वाले में से नहीं थे तो फिर एक लामा ने उनको धक्की दी कि गाल तलवार से तुम्हारे गाल फाड़ देंगे ये जो गाल होते हैं वो जद तलवार से काट देंगे तो आवाज आना मुंह से बात करना बंद हो जाएगा यानी कि यह सब बातें मत करो उसके बाद में अखंडानंद जी समझ गए कि यहां पर रहना बड़ा मुश्किल है यदि मैं इस तरह की बातें करता रहूंगा तो फिर यह लोग फिर मारपीट भी करें क्या पता फिर अखंडानंद जी वहां से निकल गए थे तो अखंडानंद जी का ऐसा था कि एकदम एक तो एक्सरे तीक्षण दृष्टि उनकी रहती थी और यह जो समाज की जो सब प्रॉब्लम्स है सोसाइटी के गरीब लोगों की जो अवस्था है बड़ी ही आसानी से पकड़ करके उसके बारे में एकदम ओपनली बिना द्विधा के बिना किसी के भई के वो ओपिनियन भी दे देते थे तो ऐसा ही कुछ ओपिनियन एक बार वो स्वामी जी के साथ में शेयर कर र रहे थे वराह नगर मठ की बात है तो कहा कि अखंडानंद जी ने कि वहां के लामा है करप्ट है आध्यात्मिकता के नाम पर कुछ सब दिखा हुआ है वगैरह वगैरह मठ में ऐसा कोई आध्यात्मिक एटमॉस्फियर नहीं वहां की मोनेस्ट्री में तो यह सब सुनकर के एकाएक स्वामी जी क्या बोल उठे पता है कि देखो तुम बाजार में जाकर के अभी कली कोलकाता है कोलकाता के माछ बाजार यहां पर मछली बिकरी होती है वहां जाकर के तुम लोगों से बात करोगे और फिर कलकाता का जो पूरा एक लेक्चर स्टैंडर्ड उसी से तुम बना दोगे तो यह तो ठीक नहीं है कोलकाता में कितने ही विद्वान लोग हैं जो कि तुमको यह मछली बाजार में देखने को नहीं मिलेंगे उन लोगों के रहने की जगह बात करने की जगह थोड़ी अलग होती है ऐसा नहीं है कि व लोग मछली बाजार नहीं जाते किंतु वहां प खड़े रहकर कोई फिलोसॉफिकल डिस्कशन नहीं करेगा तो वैसे ही यह बाजार हाट में क्या चल रहा है 10 लोगों की 10 बातें सुन कर के ऐसा तुम कोई अनुमान ऐसा कोई ओपिनियन मत बना लो तिबेट के बुद्धिज्म के बारे में या तो फिर वहां के लामा के चरित्र के बारे में बहुत सारे विकृत चरित्र होते हैं किंतु कुछ-कुछ ऐसे होते हैं कि जिनके आगमन से पृथ्वी पवित्र हो जाती है जैसे कि जब कोई सही सही महापुरुष तीर्थ दर्शन के लिए जाता है तो तीर्थ स्वयं धन्य हो जाता है वैसे लोग तीर्थ दर्शन करने के लिए जाते हैं कि कुछ पुण्य अर्जन करेंगे किंतु महापुरुष जब तीर्थ दर्शन के लिए जाएंगे तो तीर्थ स्वयं धन्य हो जाएगा तो ऐसे ही यह जो था कि हम इसी अ लॉजिक को यदि स्वामी जी के फ्रेंच विजिट के बारे में लगाए कि स्वामी जी का एक जो ओपिनियन था कि जो फ्रेंच आर्टिस्ट फिलोसोफर थिंकर्स के साथ में बात की और ऐसा लगा कि जैसे सब कुछ छिछ रा है शैलो है तो हम ऐसा भी कह सकते हैं कि अभी फ्रांसिस लगेट के पैसों के मोह से उनके पास में जो इकट्ठा हुए होंगे तो वैसे ही चरित्र के होंगे जिनका कि कोई डेप्थ नहीं है तो जो भी है अभी हम तो वहां प देखने के लिए नहीं गए थे ये तो एक जस्ट एक डिस्कशन का पोइट है इसके बाद में किंतु जब यह मैरेज हो गया और यह सब हो गया समाप्त तो स्वामी जी गए लंडन इंग्लैंड यह सितंबर टू नवंबर 18955 महीना स्वामी जी वहां पर रुके थे फर्स्ट विजिट के दरमियान और इसीलिए मैंने नाम दिया है इस पीरियड को एक्सप्लोरिंग द यूरोप वो एक्सप्लोर कर रहे हैं कि क्या-क्या पॉसिबिलिटीज है एक्चुअल वर्क जो है लंदन की सेकंड विजिट के दरमियान करेंगे कि तो फर्स्ट विजिट में व सिर्फ एक्सप्लोर कर रहे हैं और वोह लिखते भी है व स्वामी जी जब अमेरिका और इंग्लैंड के लोगों को कंपेयर करते हैं तो स्वामी जी यह लिखते हैं कि अमेरिका के लोगों क्या है ना फेडी होते हैं कोई फैशन या फेड या कोई नई चीज बहुत ही आसानी से बहुत जल्दी से एक्सेप्ट कर लेंगे उनका माइंड ओपन रहता है नई-नई चीजों को एक्सेप्ट करने के लिए किंतु फिर डेप्थ नहीं रहता वो हमेशा लोग कोई कौन सी नई चीज है उसके पीछे में दौड़ो अभी आज स्वामी जी नए हैं नोवेल्टी है तो स्वामी जी के पीछे दौड़ते हैं कल कुछ दूसरा नोवेल्टी आ गया तो उनके पीछे दौड़ना शुरू कर दो वो जो एक डेडिकेशन होना चाहिए किसी एक कोस के ऊपर में किसी एक आइडियो जीी के ऊपर में आइडियल के ऊपर में ऐसा बहुत सारे लोगों में नहीं दिखता जबकि ब्रिटेन में है कि लोग बड़ा ही धीरे-धीरे करके आपको एक्सेप्ट करेंगे अमेरिका की तरह वो सिस्टर्स एंड ब्रदर्स ऑफ लंडन या इंग्लैंड ऐसा कुछ बोलने से यह लोग मोहित नहीं हो जाने वाले किंतु जो धीरे-धीरे करके जो चंद लोग उनको एक्सेप्ट करेंगे पूरा जी जान लगा देंगे और आप देखिए भी सही कि जो ब्रिटेन से जो तीन-चार लोग स्वामी जी को मिले थे मिस्टर एंड मिसेस सेवियर निवेदिता और यह गुडविन ये चारों का नाम हमेशा के लिए अमर हो चुका है अपने साहित्य में अपनी भावधारानी पूरा जीवन अपने लिए समर्पित कर दिया था रामकृष्ण संघ के लिए और इनकी कंपेयर में अमेरिकन डिसाइल्स को देखें तो जैसे कि मिस्टर एंड मिसेस फ्रांसिस लगेट है या तो फिर जोसेफाइन मैक्लाउड है या तो फिर मिसेस ओली बुल है या तो फिर यहां पर आप कैलिफोर्निया में देखिए कि मिस मिस हेंस ब्रो है मिसेस एंस ब्रो यह वगैरह तो एरिक हेमंड है वगैरह तो उन्होंने स्वामी जी के कोष को अपनाया था किंतु जीवन सर्वस्व नहीं दे दिया था अमेरिका से क्रिस्टिन सिस्टर क्रिस्टिन ही एक है जो कि स्वामी जी के साथ में भारत आई थी और अपना लाइफ डेडिकेट किया था सारा ओली बुल और जोसेफाइन मैक्लाउड भारत आए थे किंतु वो तो फिर वापस भी चले गए थे भारत में रहने वाले थे गुडविन ये मिस्टर एंड मिसेस सेवियर निवेदिता और सिस्टर क्रिस्टिन तो देखिए कि अमेरिका बहुत बड़ा देश है सिर्फ सिस्टर क्रिस्टिन ही भारत आकर के रुकी स्वामी जी के साथ में जबकि ब्रिटेन उसकी कंपेयर में छोटा है किंतु चार डिसाइल व स्वामी जी के साथ में आ करके भारत में रुके थे तो स्वामी जी का असेसमेंट उस समय के लिए ठीक ही था कि ये धीरे-धीरे करके एक्सेप्ट करते हैं किंतु जब एक्सेप्ट करते हैं ब्रिटिश लोग तो पूरा जी जान लगा देते हैं तो यह एक्सपीरियंस उनका इंग्लैंड में हुआ था तो अभी ये और और फिर धीरे-धीरे करके उन्होंने यह भी देखा कि स्टडी का क्या है पता है ना कुछ उसका प्रॉब्लम बहुत सारे है वैसे तो स्टडी बड़ा एंथू सियास्ट था स्वामी जी के बारे में किंतु उसकी बीवी जो थी वो बड़ी ही नाराज रहती थी स्वामी जी से ना कि अभी ये फकीर को अपना पूरा रुपया दे देगा उसका हस्बैंड ऐसा वो सब समय सोचती थी तो उसी समय स्वामी जी को लगा था कि इसके साथ में कुछ ना कुछ तो गड़बड़ कहीं पर होने वाला है तो आखिर में वही हुआ भी सही तो किंतु वो तो बहुत बाद की बात है अभी यह फर्स्ट जिसको कहते हैं कि एंथू सियास्मॉलटूल भी किया दूसरी भी किताबें स्वामी जी की सहाय से पब्लिश किया था ट्रांसलेट किया था और दूसरी भी किताबों को ट्रांसलेट करने वाला था इसलिए स्वामी जी अपने गुरु भाइयों को बार-बार लेटर लिख कर के बोलते हैं कि तुम में से कोई यहां पर आओ शरद महाराज शशि महाराज या तो फिर ये काली महाराज आखिर में तुम में से कोई तो यहां पर आओ जिससे कि क्या होगा कि इसका कार्य आगे बढ़े ट्रांसलेशन का और तुम लोगों को कोई बहुत बड़ा प्रवचन देकर के इधर-उधर घूमने की जरूरत नहीं है जैसे कि मैंने किया पूरे वर्ल्ड में रेवोल्यूशन ला देना ऐसा तुमको नहीं करना है बस इसके साथ में रहना है शांति से और थोड़ा बहुत ट्रांसलेशन करना है यदि तुम लोग इतना भी नहीं कर पाओगे तो कैसे चलेगा काम ऐसा व स्वामी जी ऐसा डांटते थे तो आखिर में आई थिंक शरद महाराज वहां से निकले थे तो किंतु स्वामी जी के आने के बाद की बात स्वामी जी तब तक अमेरिका जाने के लिए निकल चुके थे तो अभी स्वामी जी वहां से इंग्लैंड से अमेरिका लौटे और यह जो पीरियड है वेदांत इन अमेरिका फेज टू ये जो फर्स्ट फेज में जो स्वामी जी वेदा अमेरिका यह सेकंड फेज में और यह समय है नवंबर 18956 उसमें उन्होंने यहीं पर न्यूयॉर्क में रह कर के फिर से वही जो सब प्रवचन ज्ञान योग के ऊपर में कर्म योग के ऊपर में भक्ति योग के ऊपर में राजयोग के ऊपर में वह सब प्रवचन दिए फिर वह मतलब य यह जो पीरियड है स्वामी जी का वेदांत इन अमेरिका पार्ट टू यह वन ऑफ द मोस्ट इंपोर्टेंट मोस्ट प्रोडक्टिव पीरियड इन स्वामी जीस लाइफ और देखिए भी कितने कम दिन है नवंबर 895 से अप्रैल 96 यानी कि ये चार पाच महीनों का मुश्किल से ये समय है नवंबर टू दिसंबर जनुअरी फेब्रुअरी मार्च और अप्रैल पांच चार पांच महीना का है यह समय इतने ही समय में उन्होंने इतना जो उनका प्रचंड एक प्रोडक्टिव आउटपुट था कि धर्म के जगत में धर्म के इतिहास में दर्शन शास्त्र के इतिहास में यह जो पीरियड है सुनहरे अक्षर से लिखा जाएगा क्योंकि इसी समय सबसे इंपॉर्टेंट उनका अमेरिका के लिए जो मैसेज था उन्होंने वेस्ट के लिए जो मैसेज था उन्होंने डिलीवर किया था तो और उसके बाद में बीच-बीच में रिजली जाते थे फिर डेट्रॉइट भी गए बोस्टन गए शिकागो गए फिर लास्ट डेज इन अमेरिका अच्छा ये जो है कि ये जो किताबें सब छप रही थी उस समय उसको लेकर के भी ये कंट्रोवर्सी खड़ा हुआ हुआ था क्योंकि यह सब स्वामी जी प्रवचन दे रहे थे तो वह जो वेदांत सोसाइटी जो थी न्यूयॉर्क की उन्होंने गुडविन को हायर किया था और गुडविन उसकी ट्रांसक ट्रांसक्रिप्ट लिख रहा था स्वामी जी जो बोलते हैं वर्बा टी और गुडविन इतना अच्छे से लिखता है शॉर्ट हैंड नोट्स स्वामी जी के प्रवचन का वो हम दूसरे लोगों के साथ में कंपेयर करेंगे तो पता चलेगा इवन सारा एलन बोल्डो है कि बाद में आइड अनसेल है ना कि दूसरे जितने भी लोग हैं जिन्हो स्वामी जिन्होंने स्वामी जी के प्रवचन की नोंद ली उन सबको गुडविन के साथ में कंपेयर करिए पता चलेगा कि रेयरली इतना मतलब एज इट इज स्वामी जी की वाणी जो है वो गुडविन कैप्चर कर सकता था 100% तो होगा नहीं कभी भी किंतु एज नियर एज पॉसिबल तो वो गुडविन को हायर करके उसका सैलरी दे कर के ट्रांसक्रिप्ट सब रेडी करके टाइप करके बुक फॉर्म में डाल करके यह सब मेहनत जो यह लोग कर रहे थे न्यूयॉर्क वेदा सोसाइटी के उसमें भी खास करके सारा एलन बोल्डो तो उस समय यह स्टर्डी बीच एकदम बार-बार स्वामी जी को कहता था कि आप याय भी अमेरिका से तो लंडन वापस आने वाले हैं तो आप एक काम कीजिए कुछ किताब छपवा करके यहां पर मुझे दीजिए तो मैं उसको सर्कुलेट करूंगा तो सर्कुलेट करूंगा तो आपके बारे में लोगों के मन में क्यूरियोसिटी जागृत होगी कि हां यह राजयोग क्या है यह ज्ञान योग क्या है वगैरह खास करके राजयोग लोगों को ज्यादा अट्रैक्टिव अट्रैक्ट करता है व मिरेकल अस पावर की उस में बातें हैं तो तो आप ये किताबों को छापी मुझे भेजिए या तो फिर मुझे परमिशन दीजिए मैं यहां से छाप अभी ये जो न्यूयॉर्क वेदांत सोसाइटी वाले थे खास करके मिस ल्डो और ये फिर सारा ली बुल और और ये कृपानंद स्वामी कृपानंद ये ये कुछ कुछ लोग थे कि वे लोग उन लोगों को न्यूयॉर्क में भी छापने में देरी हो रहा था और वो लंडन को भी ईटी स्टडी को भी कॉपीराइट देना नहीं चाहते थे क्यों क्योंकि सबसे पहले तो हमने इसके लिए पैसा खर्च किया है तो सबसे पहले यहीं पर छपने चाहिए ऐसा उन लोगों का कहना था तो स्वामी जी ने क्या किया कि एक मैनु स्क्रिप्ट का कॉपी ईटी स्टडी को भेज दिया कि तुम अपने पास में इसको रखो तुम खुद इसको स्टडी करो बस इतना ही ऐसा बोल कर के भेजा और यहां पे स्टर्डी ने क्या किया बिना न्यूयॉर्क सोसाइटी की परमिशन लिए हुए जो मनुस्क्रिप्ट स्वामी जी ने भेजी थी प्रवचन की उसको पब्लिश कर दिया किताब के रूप में और ये पब्लिश किया तो बहुत अच्छा किया एक्चुअली वो इमीडिएट एक हाइप खड़ा हो गया कि अरे ये कौन है स्वामी विवेकानंद इतनी अच्छी बातें करते हैं इतना अच्छा प्रवचन देते हैं इतने सब बातें हैं हिंदू धर्म में हमने तो सोची ही नहीं तो स्वामी जी के आने से पहले ऑलरेडी ग्राउंड रेडी हो गया तो स्टडी ने वैसे किया तो बड़ा अच्छा किंतु न्यूयॉर्क में इससे बड़ा ही नाराजगी फैल गई कि किस हिसाब से उसने यह किताब छापी इसका कॉपीराइट तो हमारे पास में है ये वो सब चलने लगा न्यूयॉर्क और लंडन के बीच में ये सब माया के जगत में ऐसा ही होता है राजयो ज्ञान योग जैसे बिल्कुल जगत को छोड़ कर के उर्ध्व जाने वाले प्रवचनों को छापने के लिए वही कॉपीराइट और पैसों का झगड़ा तो जो भी है स्वामी जी तो उसमें ज्यादा बीच में नहीं आते थे अपने डिसाइल्स के ऊपर में ही सब कुछ छोड़ दिया था और आखिर में मिसेस बुल्ले बीच में आकर के यह कुछ समाधान जैसा कुछ करवाया था तो जो भी है यह एक छोटा सा कंट्रोवर्सी आखिरी आखिर में हो गया था तो फिर अमेरिका छोड़ कर के स्वामी जी यूरोप जाने के लिए निकले अप्रल 1996 में और यह जो स्वामी जी की फर्स्ट विजिट थी अमेरिका की व यहां पे अमेरिका की विजिट समाप्त हुई अभी यूरोप की विजिट प्रारंभ हुई यूरोप में स्वामी जी सेकंड टाइम में आए लंदन गए लंडन में फर्स्ट सीजन उसके बाद में यूरोप गए उसके बाद में विंबल्डन वहां जहां पे कि यह यह रह रही थी अपनी निवेदिता और उसके बाद में फिर से लंडन में सेकंड सीजन ऑफ लेक्चर ये फर्स्ट सीजन सेकंड सीजन यह लेक्चर का सीजन है फिर इंग्लैंड में ही फॉल और यूरोप ऑन द वे टू अमेरिका यह जितनी भी घटना वली है वेदांत इन यूरोप इस पीरियड की है इसके बारे में थोड़ा सा विशेष डिस्कशन हम कल करेंगे आज परही श देखिए स्वामी जी के जाने के बाद में ना दो बड़ी ही दुर्घटना यूरोप और अमेरिका के साथ में हो गई थी फर्स्ट वर्ल्ड वॉर और सेकंड वर्ल्ड वॉर उसमें जो परिस्थिति थी उसमें कुछ भी सोचने का कुछ संभावना ही नहीं था तो अभी स्वामी जी ने खुद ने देख लिया था कि यूरोप इ सिटिंग ऑन ए पाउडर केक माने बहुत बड़े कोले बारूद के ऊपर में बैठा है विस्फोट कभी भी होने वाला है है तो जब तक वो विस्फोट चल रहा था अनफॉर्चूनेटली यह 1914 से जो स्टार्ट हुआ 1914 तो वहां से 1945 सेकंड वर्ल्ड वॉर समाप्त हुई तो इस पीरियड में ज्यादा कुछ हुआ नहीं है हालांकि हम लोग कहते हैं इस पीरियड को डिस्मिस कर देते हैं किंतु देखिए कि अशोकानंद जी इसी समय वहां पर पहुंच चुके थे अशोकानंद जी प्रभ वानंद जी निखिलानंद जी तो उन्होंने जैसे मास मूवमेंट जद का ना हुआ हो जैसे कि अभी दे देखिए हम लोग मैं खुद कभी-कभी इकोन के साथ में कंपेयर करता हूं कि इसकन का देखिए कि इतना सारा प्रचार प्रसार इसको उन के वीडियो देखिए ईस्टर्न यूरोप में कितना वो सब हरि कीर्तन कर रहे हैं कितने नर नारी लड़के बूढ़े बच्चे सब जुड़ रहे हैं अपना तो ऐसा कुछ नहीं है तो यह कंपैरिजन हम करेंगे तो थोड़ा सा डिसपिटर अवश्य मिलेगा किंतु साथ में ही देखिए कि अशोकानंद जी या प्रभ वानंद जी खास करके इन दोनों ने जो एक इंटेले चुअल एक एक ग्रुप अपने आसपास में कलेक्ट किया था उसका एक बहुत ही डीप इंपैक्ट वहां के कल्चर में गया है जैसे कि स्वामी जी के बारे में मेरी लुईस का कहना है कि स्वामी जी जब कैलिफोर्निया में लेक्चर दे रहे थे तो उस समय ये जितने भी न्यू थॉट वाले जितने भी थे मॉडर्न थिंकिंग वाले वो सब फर्स्ट बेंच पर बैठ कर के फर्स्ट रो में बैठ कर के पूरी नोंद ले रहे थे फटफट करके अपनी नोट्स में सब नोट डाउन कर रहे थे डायरी में और वही आइडियाज को बाद में यह जो मॉडर्न साइकोलॉजी है या मॉडर्न थिरी ऑफ एजुकेशन है या तो जिसको जनरल मॉडर्निस्ट म कहा जाता है कैलिफोर्निया में वो स्टार्ट हुआ था तो मेरी दृष्टि से इसकन के साथ में कंपेयर करने से हमको कोई लाभ नहीं होने वाला है किंतु एक मास मूवमेंट उस समय भी नहीं था अभी भी नहीं है किंतु ये जो इंटेलेक्चुअल डेप्थ जो हमने अचीव की थी खास करके कैलिफोर्निया में वो एक अद्भुत है मैंने फोर्निया के बारे में काफी सोचा है ज्योत में आर्टिकल्स भी लिखे हैं तो और स्वामी जी ने तो जो किया तो किया ही किंतु खास करके प्रभुवा जी और अशोकानंद जी इन दोनों का जो इंपैक्ट है कल्चरल इंपैक्ट वो अभी प्रॉपर्ली मेजर नहीं हुआ है बाद में जैसे ये सिलिकॉन वैली है एरोस्मिथ क्स कंट्री वहां पर तो स्वामी जी को बोला था वो जो इंगर सोल ने कि स्वामी जी आप यदि 50 साल पहले यहां प आए तो आपको पत्थर मार के लोग मार देते हैं इतना वो मैंने ऑर्थोडॉक्सी था वहां पे तो ये जो लिबरल एटमॉस्फियर कैलिफोर्निया में खड़ा हुआ और पूरे वर्ल्ड से हाई मतलब हाईएस्ट टैलेंट को जो वो लोग इनवाइट कर पाए सो दैट वाज रिजल्ट ऑफ वेदांत लिबरलिज्म तो ये हमको देखना होगा कि मास मूवमेंट नहीं रह कर के कल्चरल इंपैक्ट अपना कितना है दैट वी विल हैव टू सी प्रॉपर मेजरमेंट करना बड़ा मुश्किल है तो एक बात है देखिए कि इसके बाद में ना सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद में एक अमेरिका की भी एक पॉलिसी थी ये लोग एशिया से माइग्रेशन वेलकम नहीं करते थे तो 1960 में फिर वो मा उनका इमीग्रेशन एक्ट में कुछ चेंजेज हुआ और इंडिया से वगैरह से इमीग्रेशन वे लोग वेलकम करना शुरू किए तो ये अपने चेतनानंद जी है वगैरह जो बाद की जो जनरेशन है वो उसी समय फिर वहां पर उनका जाना संभव हो पाया उससे पहले जाना भी बड़ा मुश्किल था तो ये जो इमीग्रेशन एक्ट में जो सुधार हुआ उसके बाद का आप देखेंगे कि आज के जितने भी नाम जो बड़े-बड़े हैं वो जो स्वाहा अंद जी महाराज है वगैरह वह सबका वहां पर जाना हुआ था और फिर एक दूसरा एक बड़ा इवेंट हुआ था वो जो काउंटर कल्चर मूवमेंट अमेरिका में खास करके जिनको कि हम हिप्पी मूवमेंट कहते हैं इंडिया में तो अमेरिका में कहते हैं काउंटर कल्चर तो दैट वाज अ रिबेलियस अगेंस्ट ये वियतनाम में जो वर हो रहा था वगैरह ये सिविल राइट्स मूवमेंट जो मार्टिन लूथर किंग वगैरह तो एक पूरा काउंटर कल्चर मूवमेंट इसका हमको बहुत फायदा हो गया ये दो तीन चीजें इकट्ठा हो गई थी ये जो इमीग्रेशन लॉ में थोड़ा सा लिबरलाइजेशन हुआ और ये काउंटर कल्चर मूवमेंट स्टार्ट हुई ये जो मैं जि आत्म रूपा नंद जी के साथ में जिनके साथ में मैं काम कर रहा था ही वो काउंटर कल्चर की ही प्रोडक्ट है बड़ी ही यंग एज में वो घर छोड़ कर के अपनी गंजे मोनेस्ट्री है वहां पे गंजे बोल के एक सिटी है टाउन वहां पर अपनी एक मोनेस्ट्री है तो वहां पर चले गए थे तो वो उनके साथ मेरी ये सब काफी कुछ डिस्कशन होता था वैसे मैंने भी काफी कुछ पढ़ा भी है अम वेदाज इन अमेरिका आपको यदि इसमें इंटरेस्ट है ना दो तीन बहुत अच्छी सुंदर किताबें है कि ये जो मॉडर्न ईस्टर्न थोट जो है ना ईस्टर्न थॉट अमेरिका में कैसे डेवलप हुआ मैं आपको उसकी भेजूंगा कॉपीज बड़ी मने पढ़ने लायक किताबें है और ये तो किताबें भी मैंने पढ़ी है और आत्म रूपा नंद जी के साथ में काफी डिस्कस भी हुआ तो देखिए कि हम तीन फेज में इसको बांट देंगे खास करके मैं अमेरिका की बात करता हूं एक तो स्वामी जी वाला फेज उसके बाद में ये अशोकानंद जी प्रभुवा अंद जी वाला फेस और उसके बाद में यह जो इमीग्रेशन लो में जो फिर चेंजेज हुए और यह काउंटर कल्चर स्टार्ट हुआ तब का फेस और ये आज का मॉडर्न फेस तो है ही है अभी आजकल क्या है ना खास करके यह जो डिजिटल रेवोल्यूशन स्टार्ट हुआ है तब से एक ऐसा हो गया है ना लोगों के माइंड बहुत ही ज्यादा डिस्ट्रक्ट हो गए हैं तो ये काउंटर कल्चर वाला जो पीरियड था ना उसको हम एक गोल्डन पीरियड कह पाएंगे कि बहुत सारे लोग अपनी मोनेस्ट्री में आ ते थे अपने सेंटर्स में आते थे काफी लोगों को इंटरेस्ट था किंतु ये जो डिजिटल जब से कल्चर स्टार्ट हुआ है सोशल मीडिया मोबाइल का युग तब से किसी को ऐसा कुछ इंटरेस्ट ही नहीं है मने ठीक है और अभी कौन-कौन आते हैं जो कि इंडियन है खास करके बंगोली है तो ऑलरेडी रामकृष्ण विवेकानंद के साथ में परिचित है तो अमेरिका में रहते हैं तो वो लोग सब आते है वो वाइट अमेरिकंस उन लोगों का आना काफी कम हो गया है तो दिस इज टुडेज कंडीशन और लंदन का जहां तक बात है स्वामी जी ने कहा कि लंडन में जद वेदांत फैले तो अमेरिका से भी ज्यादा डीप इंपैक्ट होगा ऐसा स्वामी जी का कहना था किंतु ऐसा कहीं हमको देखने में नहीं आया है एटलीस्ट एस ऑफ टुडे अभी तो अपने अनंत महाराज वहां पे है तो उनके साथ में बातें होती रहती है मेरी तो ऐसा कुछ नहीं है कि बहुत मतलब हमने इंटेलेक्चुअल या कल्चरल कुछ इंपैक्ट किया हो और दूसरा है कि ब्रिटेन का एक ये लिगसी है ना कोलोनियल का तो वे लोग हमको सस्पिशंस एक मामला थोड़ा सा वहां पर कुछ बन नहीं पाया है तो अमेरिका में खास करके यह जो कैलिफोर्निया के जो दो ग्रेट स्वामी इनका कंट्रीब्यूशन और ये काउंटर कल्चर के बाद का वो ये दो पीरियड काफी अच्छे रहे अभी प्रेजेंट एज में अभी इंडिया में भी देखिए कहां लड़के लोग आते हैं अभी जो बूढ़े बूढ़े सब मैं भी बूढ़ा हो गया मेरा थिंकिंग भी उसी समय का है अभी एक लड़का यहां पर किंतु देखिए कि ये लोग बड़े प्रैक्टिकल थे उस दिन हमने देखा ना ठाकुर कहते हैं कि ये खोलता अर्थात की आवरण का फोटो रखने से क्या होगा फिर बाद में ही बात घुमा लेते हैं कि भक्त का हृदय है भगवान का बैठक खाना यानी कि फोटो की पूजा तो करनी है उसको बंद मत करना तो देखिए कि स्वामी जी वैसे वेदांत की बातें तो बहुत की है किंतु फिर दुर्गा पूजा का भी प्रारंभ किया उन्होंने बेलूर मठ में और बंगाल में खास करके रामकृष्णा मिशन को स्वीकृति सबसे ज्यादा मिली है दुर्गा पूजा की वजह से ऐसा मेरा एक थिंकिंग है क्योंकि जसे रिलीफ तो हमने बहुत किया किंतु रिलीफ क्या है ना कि आपको ऐसे गुडविल देगा किंतु ऐसे रिलीजस ऑर्गेनाइजेशन के रूप में एब्लिश नहीं करेगा वो एस्टेब्लिशमेंट हुआ है एक्चुअली दुर्गा पूजा की वजह से सो प्रैक्टिकल पड़े जितने थिकल तने प्रैक्टिकल भी देखो स्वामी जी के जीवन में ऐसी बहुत सारी घटनाए बहुत सारी घटनाएं है जो कि पता चलता है कि स्वामी जी के पास में ऐसे सुपर कॉन्शियस पावर्स थे खास करके देखिए कि एक लेडी डिवटी के साथ में अमेरिका की ही कुछ बातें बताता हूं इसके साथ में स्वामी जी की बात हो रही थी तो उसने कहा कि जबी वह कोई उनको लेटर लिखता है इस टी को इस लेडी को तो जद वो लेटर के टुकड़े टुकड़े करके अपने हाथ में जब रखेगी तो उस समय ये जो पत्र लेखक है उसके मन का जो भाव है वह समझ पाएगी तो यह बात उसने स्वामी जी को कही कि क्या यह जो मेरा मैं जो ऐसा जो मुझे अनुभूति होती है वह सही है कि गलत है स्वामी जी ने इमीडिएट कहा कि मैं भी ऐसा कर सकता हूं किंतु यह सब चीजों का कभी भी दुरुपयोग नहीं करना है लोगों के कल्याण के लिए ही करना है तो स्वामी जी ने स्वीकार किया कि पत्र लेखक के का भाव पकड़ पा सकते हैं