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Rise and Fall of Civilizations | मानव सभ्यता और दरिद्रता का अध्ययन 8 nov 2024

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ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपिणी अवतार वरिष्ठ राम कृष्णा यते नमः कल हम बात कर रहे थे मेरी जो एक इंटेलेक्चुअल जर्नी है कि किस तरह से मैंने अपने आइडियाज को डेवलप किए या तो फिर मुझे जो चांस मिला मेरे आइडियाज को डेवलप करने का किस डायरेक्शन में मेरे इनिशियल विचार प्रारंभ हुए थे और वह जर्नी मुझे कहां से कहां लेकर आई मैंने यहां पर आने के बाद में जो कुछ भी पढ़ा है सोचा है या आर्टिकुलेट किया है बोला है दैट इज ऑल रिलेटेड टू श्री राम कृष्णा हमेशा ठाकुर महा स्वामी जी के बारे में ही बोला उन्हीं के बारे में लिखा और उन्हीं के बारे में सोचा किंतु यह जो मेरी फाउंडेशन बिलीफ थी या तो बिलीफ है जो कि मुझे यहां तक लेकर आई उसको मैंने कभी क्लीयरली आर्टिकुलेट नहीं किया है मैंने राइज एंड फॉल ऑफ सिविलाइजेशन क्या अर्थ है इस बात का क्या इसके पीछे का रहस्य क्या है इस इसके पीछे के डायनेमिक्स क्या है इसके पीछे का साइंस क्या है यह दैट वाज माय इनिशियल पॉइंट ऑफ इंक्वायरी जो कि मुझे अल्टीमेटली श्री रामकृष्णा और मां शारदा देवी के पास में लेकर आया किंतु जो वह जो मेरी फाउंडेशन बिलीफ थी मेरी मेरे जो इनिशियल पॉइंट ऑफ इंक्वायरी थी उसको यहां पर आने के बाद में मैंने कभी-कभी सोचा था कि शायद मैं उस आइडियाज को और ज्यादा फर्द डेवलप करूंगा इस आइडियाज को मैं और ज्यादा बेटर आर्टिकल करूंगा इस आइडियाज के बारे में मैं अच्छे से बात करूंगा कभी किंतु वह ना ही मुझे वह ऐसा मौका मिला है वन थिंग सेकंड ना ही मुझे एक ऐसा लग रहा है कि मुझे ऐसा बोलने की जरूरत है अभी तक मुझे ऐसा लग रहा था किंतु मुझे लगता है कि अभी यह अपॉर्चुनिटी माने कल जैसे कि मैंने कहा कि परसों दिन में गया था ट्राइबल विलेज में और वहां पर जाकर के जो एक विचार परंपरा प्रारंभ तो दिस इज नाउ अपॉर्चुनिटी टू फुलफिल दिस गप कि किस आइडियाज को लेकर के मैंने यहां पर आने का मेरा जो जर्नी है वह किस तरह से वह प्रारंभ हुआ किस तरह से कटा तो कल हमने देखा कि राइज एंड फॉल ऑफ द सिविलाइजेशन मेरा जो इनिशियल एंट्री पॉइंट था कि क्यों इस देश में खास करके मेरे शहर में उस समय तो वह जो मेरा थिंकिंग था कि यह जो गरीब लोग है खास खास करके गरीब लड़के देखिए आप बड़े लोगों को गरीब देखते हैं तो कोई बहुत ज्यादा सिंपैथी नहीं होती है किंतु छोटे बच्चों को जब हम गरीब बच्चों को देखते हैं तो हमको सबसे ज्यादा सिंपैथी उनके प्रति होगा तो यह जो मेरा सिंपैथी था कि क्यों यह लोग गरीब है क्यों इनकी संभाल रखने वाला केयर रखने वाला कोई नहीं है तो दैट वाज द एंट्री पॉइंट और उसके बाद में ही मेरा स्टे सेकंड स्टेज था कि ओके चलो प्रैक्टिकली तो मैं उनके लिए जो कुछ करता हूं वह कर पाऊंगा किंतु मुझे यह भी पता था न्यूज़पेपर वगैरह पढ़ कर के कि भारत में जो गरीबी का जो स्केल है जो उसकी जो उसका जो भयावह कहर है वह करोड़ों करोड़ों लोगों के भीतर में है करोड़ों करोड़ों लोग गरीबी की चक्की में पीस रहे हैं तो मैं अकेला तो इन लोगों के लिए कुछ नहीं कर पाऊंगा चाहे मैं जितना भी अपना समय दूं पूरा जीवन भी न्योछावर कर दूं मैं तो सभी को सहाय नहीं कर पाऊंगा सो व्हाट इज दिस कॉस्मिक सोल्यूशन व्हाट इज द सिविलाइजेशनल सोल्यूशन फॉर द पोव एंड सफरिंग ऑफ कॉमन मैन तो यहां से प्रारंभ हुआ मेरा सेकंड क्वेश्चन राइज एंड फॉल ऑफ द सिविलाइजेशन क्योंकि देखिए कि हमको किसी इंडिविजुअल को देखने का कोई लाभ नहीं कि यह पार्टिकुलर व्यक्ति क्यों गरीब है उसके जो संस्कार है उसकी जो हिस्ट्री है उसके अनुसार वह गरीब होगा किंतु जो सिविलाइजेशन है सिविलाइजेशन का राइज कैसे होता है सिविलाइजेशन का फॉल कैसे होता है सिविलाइजेशन प्रारंभ कैसे होती है सिविलाइजेशन का अंत कैसे होता है आज आप अमेरिका और भारत येय दो दोनों देशों को कंपेयर कीजिए मैंने पहले भी यह उदाहरण एक दो बार दिया था यदि दुनिया के जितने भी कंट्रीज है सब अपने कॉन्सुलट ओपन कर दे कि जिसको यहां पर आना है सबको वीजा देने के लिए हम तैयार हैं तो सबसे लंबा लाइन कौन से कॉन्सुलट के सामने लगेगा अमेरिकन कंसुर के सामने राइट बहुत कम लोग पाकिस्तान या तो श्रीलंका या तो भारत यहां पर आना चाहेंगे इवन चाइना और रशिया भी बहुत कम लोग जाना चाहेंगे क्योंकि वहां पर शायद आपको इकोनॉमिकल अपॉर्चुनिटी मिल जाएगी किंतु वहां की जो अथॉरिटेरियन सिस्टम है वहां पे आपका रहना मुश्किल हो जाएगा तो जहां पर फ्रीडम है डेमोक्रेसी है और इकोनॉमिक प्रोस्पेरिटी है और बहुत ही अच्छा हेल्थ एंड एजुकेशन सिस्टम है जहां पर जाने से अपना फैमिली जो है उसका फ्यूचर इंश्योर्ड होगा वहां पर हम सभी लोग जा ना चाहते हैं तो ऐसे कौन से देश हैं ब्रिटेन है अमेरिका है कनाडा है ऑस्ट्रेलिया है यह जो चार-पांच जगह है जहां पर हम इंडियन लोग सबसे ज्यादा वहां पर जाकर के रहना चाहते हैं तो व्हाट इज द डिफरेंस बिटवीन दिस वेस्टर्न कंट्रीज एंड अवर इंडिया और रदर इन जनरल एशियन एंड अफ्रीकन कंट्रीज हम दोनों में डिफरेंस क्या है हम तो सुनते थे कि भारत में एक समय था वैदिक युग था बहुत सारा प्रोस्पेरिटी था बहुत जा हो जलाली था एक्चुअली हमारी प्रोस्पेरिटी से आकर्षित होकर के ही तो यह यूरोपियन लोगों ने भारत को खोजने की समुद्र यात्रा प्रारंभ की और भारत खोजते खोजते अमेरिका चले गए और इस मतलब भ्रम में कि वे लोग भारत या तो फिर इंडिया आ गए हैं अमेरिका के जो मूल निवासी है आदिम निवासी उनको उन्होंने इंडियन बोलना शुरू किया फिर पता चला कि नहीं ओरिजिनल इंडिया तो अलग है तो फिर उनका नाम रख दिया रेड इंडियंस व्हाट एवर तो यहां पे देखिए कि एक समय था कि भारत में प्रोस्पेरिटी थी किंतु फिर भी प्रोस्पेरिटी का रास कैसे हुआ इसका संपूर्ण रूप से और खास करके यह जो गुलामी की जो यह समय हम देखते हैं यह ब्रिटिश युग में भारत में जो बार-बार अकाल पड़ता था और यह जो भयानक महामारिचयादी और जद आप यदि सिंपैथेटिक आपके हृदय में कोई सिंपैथी या कंपेज ना जागृत हो तो हम लोग पत्थर दिल ही कहलाएंगे तो भारत का इस तरह का अध पतन क्यों हुआ और फिर यहां से देखिए कि जद आप इंडिया को एक सिविलाइजेशन के रूप में देखते हैं तो कंसीडर कि चाइनीज सिविलाइजेशन का प्रारंभ कैसे हुआ विकास कैसे हुआ और बाद में उसका भी अवनति हुआ और फिर से उसका फिर से राइज हुआ यह जो प्रारंभ विकास अवनति और फिर से उन्नति यह जो अवनति उन्नति यह जो चक्र है किसी किसी सिविलाइजेशन में लंबा चलता है भारत है और चाइना है यह दो सिविलाइजेशन है जो कि अपने ओरिजिनल फॉर्म में अभी भी है किंतु कुछ-कुछ सिविलाइजेशन है जैसे कि जहां पे ये यूरोपियन और इस्लामिक आक्रमण इस तरह के हुए कि ओरिजिनल सभ्यता ही नष्ट हो गई उस उस जो नष्ट हो गई सभ्यता में वो है यह जो अमेरिका की और ऑस्ट्रेलिया की ओरिजिनल अ निवासी लोग निवासी सभ्यता जिनको हम इंका या तो माया ये जो सब सिविलाइजेशन के नाम से पुकारते हैं अफ्रीका में भी देखिए कि अफ्रीका की जो ओरिजिनल जो अ इजिप्त की सिविलाइजेशन थी नाइल रिवर वैली सिविलाइजेशन इस्लाम के आक्रमण से वह संपूर्ण रूप से इस्लाम में कन्वर्ट हो गई उसका ओरिजिनल फॉर्म संपूर्ण रूप से लुप्त हो गया सेम देखिए कि अ पुराने इतिहास में यदि देखेंगे तो चार ओरिजिनल सिविलाइजेशन थी जिसका कि रिकॉर्ड अपने पास में है एक तो हुंग हो रिवर वैली सिविलाइजेशन चाइना की सिंधू रिवर वैली सिविलाइजेशन भारत की यह यूफ्रेट्स सिविलाइजेशन यह इराक यानी कि मिडिल ईस्ट की और यह नाइल रिवर वैली सिविलाइजेशन इजिप्त की या तो फिर नॉर्थ अफ्रीका की इसमें यह नॉर्थ अफ्रीकन और मिडिल ईस्टर्न सिविलाइजेशन प्रथम तो क्रिश्चियनिटी और बाद में इस्लाम के आक्रमण से अपना ओरिजिनल स्वरूप संपूर्ण रूप में गवा चुकी है जबकि भारत और चीन और कुछ हद तक जापान जापान इतना एंस सिविलाइजेशन नहीं है किंतु काफी पुराना है तो यह जापान है नॉर्थ कोरियन है चाइनीज है भारतीय है या तो फिर साउथ ईस्ट एशियन सिविलाइजेशन है कुछ-कुछ सभी नहीं हम लोगों ने अपना ओरिजिनल स्वरूप बरकरार रखा है भले ही चाहे कितने ही आक्रमण हो गए हो हमने आक्रमण का कल्चरल उसका सामना किया है देखिए मिलिटरी हमारे पे अ विजय प्राप्त की गई हो हमको हरा दिया गया हो हमको गुलाम बना दिया गया हो वह एक चीज है किंतु ऑन दी अदर हैंड हमारे ऊपर में कल्चरल आक्रमण जो हुआ है उसका तो हमने उसका मुकाबला करने में समर्थ सामर्थ्य हमको मिला है समर्थ हमको प्राप्त हुई है जबकि यह मिडल ईस्टर्न और नॉर्थ अम अफ्रीकन सिविलाइजेशन और फिर यह अमेरिका की सिविलाइजेशन नॉर्थ अमेरिका साउथ अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया इतनी जो सिविलाइजेशन है उन लोगों का या तो संपूर्ण रूप से सफाया हो गया है संपूर्ण रूप से संहार हो गया है ये स्पेनियर्ड य स्पेन और पोर्टल से जब भी लोग साउथ अमेरिका जाना शुरू हुए उन्होंने स्थानिक निवासियों का इस तरह से कत्लेआम किया कि बहुत कम स्थानिक निवासी आज बचे हैं तो या तो फिर उनका कत्लेआम ही कर दिया या तो फिर मिडल ईस्ट या नॉर्थ अमे अफ्रीकन सिविलाइजेशन की तरह उनका कल्चरल संहार कर दिया उनका कल्चर संपूर्ण रूप से मिट्टी में मिला दिया अभी वहां पे यह या तो आप इस्लामिक या तो क्रिश्चियन कल्चर वहां पर ज्यादा पनप रहे हैं सो व्हाट इज दैट रेसिलियंस वह भी तो एक प्रश्न है राइज किस तरह से होता है उन्नति किस तरह से होती है अवनति किस तरह से होती है और साथ में ही अवनति होने के बाद में इस तरह का कौन सा फैक्टर है इस तरह का कौन सा रेजिल है चाइना और भारत में खास करके जो कि हम फिर से लाइक फीनिक्स पक्षी है फीनिक्स पक्षी की तरह राख में से फिर से प्रकट हुए हैं अंगारों में से फिर से प्रकट हुए हैं तो यह कुछ क्वेश्चंस थे मेरे माइंड में स्टडी ऑफ सिविलाइजेशन बोलक के एक पूरा ब्रांच है यह हिस्ट्री का जिसका कि मैंने स्टडी करना प्रारंभ किया 10 साल से भी ज्यादा मैं ये सब पढ़ता रहता था उसमें बहुत सारी ब्रांचेस है किस तरह से लर्निंग और विजडम और साइंस इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी उसका विकास होता है थ्रू आउट द हिस्ट्री किस तरह से रिलीजन का डेवलपमेंट होता है किस तरह से सोशल इंस्टीट्यूशंस डेवलप होते हैं किस तरह से पॉलिटिकल सिस्टम्स डेवलप होती है किस तरह से यह मिलिट्री है फिर यह जो आक्रमण है एक दूसरे के ऊपर में वॉर फेयर है वह किस तरह से डेवलप होता है कौन-कौन सी डायनेस्टीज है यदि आप इजिप्त में जाएंगे वहां पे फेरोस की डायनेस्टी एक के बाद एक आपको कंटीन्यूअस एक सीक्वेंस में आपको देखने को मिलेगा पहले यह डायनेस्टी थी पहले यह राजा था बाद में यह राजा है बा बाद में यह राजा है उसके बाद में यह डायनेस्टी आई उसका यह राजा माने एक अखंड सीक्वेंस हिस्ट्री का देखने को मिलेगा चाइना में भी जाइए एंपरर्स और डायनेस्टीज का इतना परफेक्ट रिकॉर्ड उन्होंने मैनेज किया है मेंटेन किया है ओवर ए पीरियड ऑफ ट टू 3000 यर्स भारत में भी देखिए कि जब आप भागवत वगैरह पढ़ते हैं वहां पर सूर्यवंशी राजा फिर यह रघुवंशी राजाओं की जो डायनेस्टीज है और उनके राजाओं के नाम है बड़ा ही सुंदर रूप से इतिहास रेकॉर्ड हुआ आपको मिल जाएगा और आज की मॉडर्न हिस्ट्री यानी कि यह जो वेस्टर्न हिस्ट्री को देखिए ब्रिटेन में पहले किस राजा ने राज किया बाद में किसने सो देर इज अ वेरी वेल मेंटेन हिस्ट्री लॉट ऑफ डिटेल्स आर देयर इन सब डिटेल्स में से हमको शिफ्ट करके मैटर को हमको आइडियाज को फिल्टर करना पड़ेगा क्योंकि कोई हिस्ट्री ऑफ ह्यूमन सिविलाइजेशन उसमें इतना व्यापकता है इतनी विशालता है जैसे कि आर्ट जैसे कि सोवियत यूनियन सोवियत यूनियन का जब प्रारंभ हुआ रशिया एक राज्य था एंपायर था उसमें फिर यह जो रशिया का जो झार था वह इतना पागल था और इतना क्रूर था कि रशिया के निवासियों के ऊपर में इतना अत्याचार होना शुरू हुआ कि वे लोग बेचारे कहां पर जाएंगे तो यह जो कम्युनिस्ट रेवोल्यूशन आया र को मार दिया उसका मर्डर कर दिया कम्युनिस्ट लोगों ने अपना शासन अपने हाथ में ले लिया वो जो इनिशियल डेज की बात है वो किताब है हाउ द स्टील व टेंपर्ड वो किताब पढ़ेंगे तो अपने रोंगटे खड़े हो जाएंगे कि किस तरह से देर इज अ बैंड ऑफ डिटरमाइंड मेन एंड वीमेन इतने मजबूत हृदय के सिंह हृदय के पुरुष और स्त्रियों का कुछ दल उन्होंने किस तरह से देश का नवनिर्माण किया कहां पर रशिया संपूर्ण रूप से बेर बिखेर हो गया था मॉडर्नाइजेशन की रेस में यह वेस्टर्न कंट्रीज है जैसे कि यह जर्मनी फ्रांस ब्रिटेन उनके उनसे कितना पीछे चला गया था यह जोपा के साथ में युद्ध हुआ तो जापानीज लोगों ने यह यूरोपियन को रशियन की पिटाई कर दी पहली बार ऐसा हुआ कि एक एशियन पावर ने यूरोपियन पावर को मात किया है उसको हराया है तो यह तो एक बड़ा ही ह्यूमिन हो गया जबकि ब्रिटेन आधे विश्व पर राज करता है और इतना बड़ा रशियन साम्राज्य इतने छोटे से जापानीज एक आइलैंड ही तो है टापू ही तो है उसके सामने मात खा गया तो हार गया यह तो कैसी मने ह्यूमिन की बात है सो ये जो चर्निंग चल रहा था तो रर उने एवरी कंट्री एवरी नेशन एवरी सिविलाइजेशन उसकी य जो प्रोडक्ट होती है ग्रेट साइंटिस्ट प्रकट होते हैं ग्रेट आर्टिस्ट प्रकट होते हैं व व दैट इज द रियल कंट्रीब्यूशन ऑफ दैट सिविलाइजेशन इन द डेवलपमेंट ऑफ मैनकाइंड तो यह सब आइडियाज को शिफ्ट करते करते सॉर्ट करते करते फिल्टर करते-करते मुझे जो कुछ पॉइंट समझ में आए जैसे कि मैंने कल कहा कि क्या क्या व्हाट वर्क्स एंड व्हाट डज नॉट वर्क सिविलाइजेशन का सिविलाइजेशन की उन्नति के लिए क्या कार्य करता है और अवनति किस वजह से होती है तो उन्नति और अवनति पहले देख लेते हैं अवनति वो दो फैक्टर्स से एक तो है बर्बेरिस म दूसरा है रिलीजियस फेनेटिसिजम तो देखिए कि बर्बेरिस म का क्या अर्थ है कुछ क्रूर हृदय लोगों के हाथ में सत्ता आ जाने से वे लोग क्या करते हैं पहले तो उनको क्या है कि निटी पहले तो ऐसे क्रूर हृदय लोग अपने देश में ही सबसे पहले अत्याचार प्रारंभ करते हैं इसका जो कुछ कुछ उदाहरण जैसे कि भारत में भी कुछ राजाओं ने जब भारत की अवनति होना प्रारंभ हो गया था राजा इतने क्रूर थे कि जब विदेशी आक्रमण प्रारंभ हुए तो हमारे ही जो जिन लोगों के ऊपर में अत्याचार हो रहा था वही लोग विदेशियों के साथ में मिलकर के इस राजाओं के विरुद्ध में हो गए भारत में रशिया का झार रशिया का झार भी ऐसा पागल था और स्तर के अत्याचार करता था वहां के स्थानिक लोगों के ऊपर में कि फिर वह स्थानिक लोग फिर वह उसी के विरोध में हो गए तो एक्चुअली जब क्रूरता राजवंशी लोगों में आती है जो जिसके पास में पावर है उसमें जब क्रूरता प्रकट होती है तो उसका सबसे पहला काम होता है अपने ही जो देशवासी है उनके ऊपर में अत्याचार करना उनका एक्सप्लोइटेशन करना उनका धन लूटना उनको फिर गुलाम बना कर के अपने लिए कार्य करवाना ये तो पहला उसका परिणाम है दूसरा कि वो देखता है राजा या तो शासक या तो डिक्टेटर जैसे कि हिटलर ये लोग क्या देखते हैं कि देश को यूनाइट तो रखना पड़ेगा यूनाइट रखने के लिए ऐसा कौन सा फैक्टर है देश प्रेम तो इन लोगों का चला गया अपने लोगों पर इतना कष्ट दिया लोगों को कि अभी लोगों को देश प्रेम जैसा कुछ रहा ही नहीं है तो देश को इकट्ठा करने के लिए देश को यूनाइट रखने के लिए आपको एक एक्सटर्नल एनिमी चाहिए बाहरी दुश्मन चाहिए और बाहर के दुश्मन का हवाला देकर के आप आप अपने देशवासियों को कहेंगे कि हम जैसा कहे वैसा करो वरना तो फिर हमारे से भी ज्यादा बड़े राक्षस यह जो बाहर के देश वाले हैं वो आकर के हमको खा जाएंगे तो ये जो टेक्निक है एक तो देश के भीतर में एक्सप्लोइटेशन और बाहर में मिलिटरी एडवेंचर क्योंकि सभी लोग तो आपके ऊपर में आक्रमण करने के लिए तैयार नहीं है इसलिए झूठ मुठ का बहाना करके आप ही इन लोगों के ऊपर में आक्रमण करेंगे जैसे हिटलर ने सेकंड वर्ल्ड वॉर की शुरुआत हुई तो ऐसा नहीं था कि हिटलर के ऊपर में किसी ने आक्रमण करवाया था हिटलर ने एक नाटक खड़ा किया कुछ लोगों को कहा कि आप हमारे सैनिकों पर गोला बार गोला उनके ऊपर में शूटिंग कीजिए हमारे सैनिकों के ऊपर में तो ये कुछ लोगों जो कि हिटलर के ही आदमी थे हिटलर के सोल्जर्स के ऊपर में उन्होंने अटैक किया और हिटलर को बहाना मिल गया कि चलो यह दुश्मन लोग हमारे पर हमला कर रहे हैं अभी हमको उनका सफाया करना ही होगा बोलकर के हिटलर ने वर चालू किया पाकिस्तान एक उदाहरण है पाकिस्तान के भीतर में आप देखेंगे न्यूज़पेपर में पढ़ेंगे तो क्या इकोनॉमिक परिस्थिति है अभी पाकि पाकिस्तान टिका है इसीलिए पाकिस्तान की आर्मी के पास में पावर है इसीलिए क्योंकि वह भारत का भय दिखाते हैं अपने देशवासियों को कि आप हम आर्मी के जितने भी अत्याचार है चुपचाप सहन कीजिए वरना यह भारत रूपी राक्षस आकर के आप सबका सबको खा जाएगा बोलकर के यह पाकिस्तान अभी टिका हुआ है उसके यूनिटी और उसके जो कंटिन्यूएशन जो है नेशन हुड उसके पीछे में एक ही रहस्य है भारत के साथ में दुश्मनी जिस दिन वे लोग भारत के साथ में सुलह कर लेंगे हमारी दुश्मना आवट खत्म करके मित्रता कर लेंगे उसी दिन आर्मी का शासन जाएगा वहां से यह तानाशाही खत्म हो जाएगी लोग इस तरह से रिबेलियस में पावर बजाए रखने के लिए कुछ भी हथियार नहीं रहेंगे तो यह एक फैक्टर हो गया कि जब क्रूरता शासक वर्ग में प्रवेश करती है तो सबसे पहले अपने ही देश बांधव पर अत्याचार करता है दूसरा कि देश को टिकाने के लिए यूनाइट रखने के लिए वो फॉरेन एड एडवेंचर मिलिटरी एडवेंचर में जाएगा या तो उसके ऊपर में दूसरे देश के साथ में इस तरह का व्यवहार करेगा कि दूसरे देश को उसके ऊपर में आक्रमण करना ही पड़ेगा या तो टेररिज्म फैलाए आप ईरान की जो परिस्थिति है ईरान के जो शासक वर्ग है वह इतने अन पॉपुलर है कि यदि यह ईरान सतत इजराइल के साथ में कंफ्रे खड़ा नहीं रखेगा तो वहां के जो शासक वर्ग है उनका वो लोग कहीं पर उनको भगा देंगे मार करके तो ये ये जो अनपॉज लोग है शासक क्रूर हृदय वाले यह जो है उनको यह सब समय कंफ्रे बना कर के रखना होगा सो दैट इज वन फैक्टर फॉर द सिविलाइजेशन फॉल सभ्यता की अवनति के पीछे में यह क्रूर हृदय शासक एक फैक्टर है दूसरा है कि यह रिलीजियस फेनेटिसिजम आपको एक फैक्टर तो चाहिए लोगों को बांध कर के रखने के लिए दैट इज रिलीजियस फेनेटिसिजम और इसके बारे में बहुत ज्यादा डिस्कस करने की जरूरत नहीं है आज के वर्तमान युग में धार्मिक अंधता किस तरह से पूरे समाज को खत्म कर देती है इसके बहुत सारे उदाहरण पड़े हैं हिस्ट्री में देखेंगे तो क्रिश्चियनिटी सबसे बड़ा उदाहरण है एक समय था कि ग्रीस के जो सिटी स्टेट थे एथेंस था खास करके वहां पे ऐसे एक के बाद एक पंडित जग विख्यात लोगों का जन्म होना शुरू हुआ जिन्होंने मानव सभ्यता के प्रत्येक क्षेत्र में इतना अवदान दिया है वह चाहे मेडिसिन हो न कि चाहे एस्ट्रोनॉमी हो चाहे मैथमेटिक्स हो चाहे फिजिक्स हो चाहे कि फिर वो आर्ट्स हो म्यूजिक हो ना लिटरेचर हो ना फिलोसोफी हो जितने भी क्षेत्र है मनुष्य सभ्यता के सभी में उन्होंने अपना एक मेजर कंट्रीब्यूशन दिया किंतु जब यह क्रिश्चियन चर्च के पास में पावर आ गया तो उन्होंने कहा बाइबल में जो लिखा है वही सही और यह जो एरिस्टोटल और यह सोक्रेट यह सब पगन ऐसा बोल कर के कि जंगली लोग थे उनकी बात सुनने की जरूरत नहीं है तो पूरा हजार साल के आसपास का यह डार्क एजेस यूरोप में चला और किंतु फिर आखिर में वही एरिस्टोटल और वही सोक्रेट और वही प्लेटो को पुनर्जीवित किया गया उनकी किताबों को फिर से पढ़ा गया यूरोप में खास करके इटली में तब कहीं जाकर के रेनेसा हुआ तो यह धार्मिक अंधता और शासकों की क्रूरता यह दो मेजर फैक्टर है किसी भी सिविलाइजेशन की अवनति के पीछे में किसी भी सिविलाइजेशन के डिसइंटीग्रेशन के पीछे में तो फिर देखेंगे कि उन्नति का क्या राज है ऐसा कौन से फैक्टर है जो कि एक सिविलाइजेशन को एक के बाद एक सभ्यता के सक्सेस के सफलता के आयामों को पार करवा के उनको की सफलता के चरम शिखर पर विराजित करता है आज के परिप्रेक्ष्य में देखेंगे तो जैसे कि अमेरिका है कुछ समय पहले देखेंगे तो वह ब्रिटेन था उसके पहले यदि देखेंगे तो एथेंस था उससे पहले हमारी भारत की वैदिक संस्कृति थी और सभी यहां पर चाइना का भी एक गोल्डन एज था जापान का भी एक एंसटिटाइट सबसे ज्यादा एडवांसमेंट होता है सभी क्षेत्रों में लिटरेचर हो साइंस हो मैथमेटिक्स हो एस्ट्रोनॉमी हो रोबोटिक्स हो एआई हो व्हाट एवर एनी क्षेत्र मेडिसिन हो जिसका भी आप नाम लीजिए कहां पे सबसे ज्यादा कटिंग एज लर्निंग एडवांसमेंट होता है वह है अमेरिका वहां पर कोई डाउट ही नहीं है देखिए कि अमेरिका के बारे में बार-बार लोग भविष्यवाणी करते हैं कि अभी अमेरिका का पतन हुआ ही हुआ अभी इसका पतन हुआ ही हुआ जितनी भी बार अमेरिका के बारे में यह भविष्यवाणी की गई है उतनी ही बार अमेरिका भी जैसे कि एक उस क्राइसिस के मोड़ से और ज्यादा स्ट्रांग हो कर के निकला है यह 1970 के दशक की बात है जब यह आरब लोगों ने ठीक किया कि हम लोग ऑइल अपना नेशनलाइज करेंगे और बड़े ज्यादा कीमत प बेचेंगे उस समय अमेरिका में एक इकोनॉमिक डिप्रेशन आया था उससे वे लोग निकल गए क्योंकि उन्होंने इनोवेशन करके निकला जबकि बाकी सब देश है उनके ऊपर में जब इस तरह का कोई एक चैलेंज आएगा वे लोग मिलिटरी एडवेंचर करना शुरू करेंगे क्योंकि उसके अलावा और कोई उपाय ही नहीं है कोई हमारे हमको आकर के धमकी देता है खास करके जैसे कि देखिए कि चाइना है या फिर जापान था एक समय का जैसे कि ऐसा कोई इकोनॉमिक चैलेंज आता है उनको लगता है कि उनके ऊपर में आक्रमण करके हमको उसको हरा देना चाहिए दैट इज द सॉल्यूशन नहीं एक्चुअली सोल्यूशन इज टू ट्रांस द सिचुएशन अमेरिका के सामने जब भी सॉल्यूशन आया टेक्नोलॉजिकल ऐसी ब्रेकथ्रू उन्होंने लाया कि जिससे कि उनकी इकोनॉमी हर बार बार बाहर निकल गई अभी कुछ समय पहले की जदी आखिरी 10 साल की हिस्ट्री देखें कि चाइना एक के बाद एक इतना बढ़ रहा था उसके एक्सपोर्ट और इतना पावर बढ़ रहा था कि अमेरिका में सभी लोग चिंतित थे आज अमेरिका में देखिए दो टेक्नोलॉजीज है एक तो माइक्रोप्रोसेसर एडवांसमेंट जो हो रहा है ग्राफिक्स ग्राफिक्स प्रोसेसर का एडिया कंपनी जो है और दूसरा है कि एआई टेक्नोलॉजीज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सी अमेरिका ने इस तरह से टेक्नोलॉजीज को डेवलप किया कि जिससे कि दे ट्रांसंट चाइना कहां पीछे रह गया तो देखिए कि यह जो एडवांसमेंट इन लर्निंग है कटिंग एज एडवांसमेंट आज भारत का इसरो चाहे कितना ही पावरफुल क्यों ना हो कितना ही एफिशिएंट क्यों ना हो हम तो अमेरिका की जो 1960 1970 की जो टेक्नोलॉजी है आज से 50 60 70 साल पहले की उसी को तो फॉलो अप कर रहा है ना नया तो हमने कुछ खोजा नहीं है तो दैट इज वन डिफरेंट वी हैव टू रिमेंबर जबकि हम यह कहते हैं कि कटिंग एज डेवलपमेंट और ब्रेकथ्रू या तो कंट्रीब्यूशन इट हैज टू बी समथिंग टोटली न्यू दूसरे लोगों ने जो कर लिया है उसको सीख करके मैं उसका कॉपी कर लेता हूं जैसे चाइना में होता है जैसे जापान में होता है जापान और चाइना का जो इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट है अमेरिका की टेक्नोलॉजी को कॉपी करके ही ज्यादातर हुआ है अभी कहीं जाकर के थोड़ा बहुत वो इनिशियल वो अपना ओरिजिनल डेवलपमेंट कर रहे हैं क्रिएटिव डेवलपमेंट कर रहे हैं किंतु बहुत कम है कंपेयर टू अमेरिका का सो दैट इज वन फैक्टर कि आपका सोसाइटी इतना ओपन होना चाहिए सोसाइटी में सभी लोगों को आगे बढ़ने के लिए इतना स्कोप होना चाहिए जो लोग क्रिएटिव है उनको अपनी क्रिएटिविटी एक्सप्रेस करने के लिए इतना एक पूरा एक सिस्टम इंफ्रास्ट्रक्चर होना चाहिए कि दे कैन कंट्रीब्यूट समथिंग वर्थ वाइल आज ऐसा मत सोचिए कि आइंस्टाइन या तो न्यूटन या तो फिर जेम्स क्लार्क मैक्सवेल या तो फिर ये अ नेल्स बोर इस तरह के साइंटिस्ट को भारत में जन्म नहीं होता है होता है किंतु उनको अपनी टैलेंट को डेवलप करने के लिए जो एजुकेशन सिस्टम हायर एकेडमिक सिस्टम लेबोरेटरीज वेंचर कैपिटल फंडिंग फिर यह इनकरेजमेंट यह जो सब चाहिए वह मिलता नहीं है अपनी यूनिवर्सिटीज में जाइए नेपोटिज्म बस और कुछ नहीं यह उसका लड़का है यह उसका भतीजा है यह उसका चाचा है उसको सबसे पहले प्रायोरिटी दे दो यह जो एकेडमिक पेपर्स पब्लिश होते हैं रेफरल जर्नल्स में उसमें कहीं उसका कोई स्टैंडर्ड नहीं जबकि अमेरिकन जो नेचर या तो ऐसे कुछ रेफरल जर्नल्स है वहां पे एक पेपर पब्लिश होगा तो वर्ल्ड वाइड उसका एक्लेमेशन होता है वर्ल्ड वाइड उसका रिकॉग्निशन होता है क्यों क्योंकि वहां पे पता है कि उस जर्नल में पेपर पब्लिश हुआ है दैट मींस बड़ा ही रिगर अस रेफरल उसको मिला है बड़ा ही रिगस चेकिंग हुआ है तब कहीं जाकर के वो पेपर पब्लिश हुआ है इंडिया की हजार रेफरल जर्नल्स में आप 1 लाख पेपर छाप दीजिए कोई उसको पढ़ने वाला नहीं सो आपको एक पूरा सिस्टम बनाना होगा बाय व्हिच क्रिएटिविटी इज इनकरेज एंड क्रिएटिविटी इज फैसिलिटेटेड तभी तो जाकर के हम कटिंग एज ब्रेक थ्रू कर पाएंगे सो दैट इज वन फैक्टर इन द एडवांसमेंट ऑफ सिविलाइजेशन सेकंड है कंपेज ये विशाल उदार हृदयत देखिए जब शासक वर्ग क्रूर हो जाते हैं तो वह सबका शोषण करते हैं बाहर जाकर दूसरे लोगों के ऊपर में आक्रमण करते हैं किंतु यह जो शासक वर्ग होता है या तो फिर जैसे कि आर्नोल्ड टोयन भी इनको कहता है क्रिएटिव माइनॉरिटी हमेशा कोई भी सभ्यता कोई भी देश में देखिए कि क्रिएटिव माइनॉरिटी होती है जो कि अपने बलबूते पे अपनी शक्ति अपनी प्रतिभा अपनी टैलेंट के बलबूते पे हमेशा वोह उनके वो शासक की कुर्सी पे जाकर के बैठ जाते हैं पावर कलेक्ट करते हैं तो ये जो क्रिएटिव माइनॉरिटी होती है वो यदि क्रूर हो जाए तो फिर यह जर्मनी है ना कि रशिया है ना कि वह जो कम्युनिस्ट चाइना था इस तरह की परिस्थिति होगी यह हिटलर ने स्टालिन ने और माओ ने उन्होंने अपने ही करोड़ों देशवासियों का कत्ल कर दिया बाहर की तो छोड़ी दीजिए कि बाहर पर आक्रमण करके क्या हुआ अपने ही देशवासियों का करोड़ों देशवासियों का कत्ल किया है फिर उन्होंने बाहर में जाकर के आक्रमण किया तो वो क्रिएटिव माइनॉरिटी वो चाहे हिटलर हो ना कि स्टालिन हो ना कि माओ हो वो जब क्रूर हृदय हो जाती है तब ऐसा होता है और यही क्रिएटिव माइनॉरिटी जबक उदार हृदय होती है तो वहां का वहां पे एक जो एक परिस्थिति है बिल्कुल चेंज हो जाती है जैसे कि अमेरिका का ही उदाहरण अब्राहम लिंकन है या तो जॉर्ज वाशिंगटन है जो कि अमेरिका के फाउंडर्स थे वह एक के बाद एक फाउंडर्स को ले लीजिए उनके हृदय में था कि नहीं हमको ब्रिटेन से मुक्ति तो पानी ही क्योंकि ब्रिटेन की कॉलोनी था अमेरिका किंतु साथ-साथ में ही अपने देश बांधव के लिए हमको डेमोक्रेसी चाहिए उस समय यदि जॉर्ज वाशिंगटन चाहते तो यह ब्रिटिश राजा की तरह वह खुद राजा बन जाते यूरोप में सब पूरे विश्व में उस समय राजाशाही थी ब्रिटेन में भी रशिया में भी फ्रांस में भी इटली में भी भारत में भी चाइना में भी उस जॉर्ज वाशिंगटन और वह जो अमेरिका के फाउंडिंग फादर्स है उन लोगों ने ठीक किया कि नहीं राजाशाही नहीं चलेगी क्योंकि राजा लोगों का शोषण ही करता है जब एक हथु सत्ता उसके हाथ में आ जाती है एब्सलूट पावर जब आ जाता है तो अब्सोल्यू डिस्ट्रक्शन वह आदमी करता है तो पावर्स को डिस्ट्रीब्यूटर दो तो यह अमेरिकन सिस्टम कि एक एग्जीक्यूटिव ब्रांच है एक लेजिस्लेटिव ब्रांच है और एक जुडिशियस ब्रांच है इन तीनों ब्रांच में पावर डिस्ट्रीब्यूटर दो और एग्जीक्यूटिव ब्रांच में प्रेसिडेंट का पावर बहुत ही ज्यादा है नो डाउट किंतु प्रेसिडेंट की टर्म लिमिट्स 4 साल तक लिमिट कर दो 4 साल से ज्यादा प्रेसिडेंट शासन नहीं कर पाएगा वो एडमिनिस्ट्रेशन नहीं देख पाएगा उसको री इलेक्ट होना ही पड़ेगा और उसमें भी फिर उन्होंने एक दूसरा प्रावधान ऐड कर दिया सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद में कि प्रेसिडेंट सिर्फ दो ही बार इलेक्शन लड़ सकता है दो ही बार वो प्रेसिडेंट हो सकता है उससे ज्यादा नहीं तो यह देखिए कि एक डेमोक्रेसी और जो शासक वर्ग है उसमें अपने देश बांधव के लिए एक दया थी एक कंपेज था बोलक के वहां पर यह जो एक डेवलपमेंट के लिए बहुत ज्यादा स्कोप है आज भारत हो कि भारत जैसी जो नई बनी हुई डेमोक्रेसीज हो हम सबके साथ में प्रॉब्लम क्या है कि आज कोई टैलेंटेड व्यक्ति पॉलिटिक्स में आना चाहता है तो पहली बात तो है कि उसके लिए कोई स्कोप ही नहीं है ज्यादातर पॉलिटिकल पार्टीज में देखिए कि फैमिली वाद परिवारवाद जैसे बैठा हुआ यह पहले राजाओं की तरह इस राजा का शासन है उसके बाद में उसके लड़के का शासन होगा उसके बाद में उसके लड़के का होगा ओरिजिनल राजा शायद अच्छा होगा किंतु दो-तीन जनरेशन के बाद में उसके लड़के इतने बेकार हो जाएंगे कि यदि देश में सिविल वर नहीं होगा जब तक तब तक देश का उद्धार नहीं होगा यह जो अपने कौरव पांडवों का युद्ध दैट वाज अ सिविल वॉर यदि सिविल वॉर नहीं होगा तब तक देश का उद्धार नहीं होने वाला है तो भारत में भी नाम की मात्र डेमोक्रेसी है किंतु ज्यादातर पॉलिटिकल पार्टीज आज एक परिवार का शासन होकर के बन गई है परिवार का एक सीट होकर के बन गई है तो यह जो डेमोक्रेसी रियल डेमोक्रेसी कि जिसमें टैलेंट है उसको शासन का लाभ मिलना चाहिए उसको शासन का उसको तक मिलनी चाहिए अपॉर्चुनिटी मिलनी चाहिए तभी तो देश की उन्नति होगी नया ब्लड जो है नए विचार जो है नई टैलेंट जो है नया उमंग उत्साह जो है व देश के टॉप लेवल पे आएगा तब तो कहीं जाकर के देश को सतत वे लोग एक प्रगति की पंथ की ओर आगे बढ़ाते जाएंगे सो दैट इज द सेकंड फैक्टर कि शासक वर्ग या तो फिर जो टेक्निकल टर्म है क्रिएटिव माइनॉरिटी माइनॉरिटी क्यों क्योंकि कुछ ही चंद ही लोग होते हैं और क्रिएटिव क्यों क्योंकि क्रिएटिविटी ही आप को प्रचंड टैलेंट देते हैं जिसकी मदद से आप देश के उन्नत स्थान पर पहुंचने के लिए लायक हो जाते हैं तो दैट इज सेकंड फैक्टर कि जो क्रिएटिव माइनॉरिटी है उन लोगों में यह कंपेरिजन होना चाहिए देश के लिए जान न्योछावर करने की तमन्ना होनी चाहिए तब कहीं जाकर के देश का लॉन्ग टर्म एक उद्धार होगा वरना तो फिर यह जो यह अभी खैर नाम दे कर के बात नहीं करना है किंतु हमको पता है कि ऐसी सब पार्टियां है फिफ्थ जनरेशन सिक्स्थ जनरेशन तक उन्हीं के बच्चे राज करते आए हैं तो यह पूरे य सिर्फ भारत की बात नहीं है जहां पे डेमोक्रेसी ओरिजिनल जिसका ओरिजिन नहीं है रिसेंट माने भारत में कहा जाता है कि हम आदिम डेमोक्रेसी है मने डेमोक्रेसी या तो लोकतंत्र का जन्म ही भारत में हुआ है तो वह वैदिक युग को छोड़ दे आज पिछले कुछ एकद हजार साल की बात करें तो यह डेमोक्रेसी जो आखिरी 1000 साल में जो डेवलप हुई ब्रिटेन में और अमेरिका में यह दो तीन कंट्रीज छोड़ दे वेस्टर्न कंट्रीज बाकी जहां पर भी यह वेस्टर्न डेमोक्रेसी की कॉपी की गई है वह चाहे इंडिया हो ना कि जापान हो ना कि यह साउथ कोरिया हो जस्ट नेम इट सब जगह पर यही परिस्थिति है डेमोक्रेसी यानी कि करप्शन क्यों क्योंकि जो शासक वर्क है जो क्रिएटिव माइनॉरिटी है जो कि वहां पर सत्ता लेकर के बैठे हैं उनका हृदय इतना करप्ट है इतना क्रूर है कि अपने को सत्ता मिल गई है तो इसका उपयोग इसका यूटिलाइजेशन ना कहीं अपने बा बांधव के लिए करें उनके लिए कुछ करें नहीं कि अपने खुद के वह जेब को भरते रहे अपने ही पॉकेट को भरते रहे सो दैट इज वन डेंजर सो रियल डेमोक्रेसी या तो रियल नेशन वर्क्स वेयर जब क्रिएटिव माइनॉरिटी कंपैशनेट होती है ये सेकंड फैक्टर हो गया एंड थर्ड फैक्टर इज ऑफकोर्स स्पिरिचुअलिटी अभी देखिए कि रिलीजियस फेनेटिसिजम और स्पिरिचुअलिटी में क्या डिफरेंस है रिलीजियस फेनेटिसिजम अर्थात कि धर्म का नाम करके लोगों का शोषण करना मैं जब छोटा था हमारी स्कूल में गुजराती सब्जेक्ट पढ़ाया जाता था और वहां पे कहानी हम पढ़ते थे कि किस तरह से एक पंडित एक गांव में उसको बुलाया गया अभी पंडित गांव में गया और कुछ विधि विधान करना था शायद एक महिला के पति का मृत्यु हो गया था तो उसका वह जो अंतिम संस्कार है वह करना था मोस्ट प्रोबेबली मुझे इतना डिटेल याद नहीं किंतु ऐसा ही कुछ कार्य के लिए वह पंडित वहां पर गया छोटा सा गांव है इस गरीब महिला अभी तो विधवा हो गई है छोटा बच्चा है और कुछ नहीं घर में झोपड़ी में वह बेचारी रहती है तो पंडित ने यह विधि की जो भी क्रिया करनी थी वो की और फिर कहा कि अभी आप मुझे दक्षिणा दीजिए तो इस गरीब महिला ने कहा कि देखिए यह संस्कार तो हमको करना ही पड़ेगा विधि तो करनी पड़ेगी समाज का नियम है इसलिए मैंने आपको बुलाया है किंतु मेरे पास पैसा नहीं है तो आप मुझे आप यदि इसको मेरे से कुछ ना मांगे तो अच्छा है तो वह पंडित ने कहा कि नहीं नहीं ऐसा तो नहीं चलेगा आपको कुछ तो दक्षिणा देनी पड़ेगी और अदर वाइज तो यह जो मैंने विधि की है वह निष्फल हो जाएगी तो महिला बोली बेचारी देखिए मेरी कुटीर में कुछ नहीं है आप आपको जो चाहिए वो ले लीजिए किंतु कुछ नहीं है मैं क्या करूं तो यह पंडित ने क्या किया कहा कि तुम्हारे बच्चे ने यह जो चड्डी पहनी हुई है वह मुझे दे दो अभी बच्चे के पास में इस जो एक एक वस्त्र के अलावा और कुछ नहीं था पहनने के लिए किंतु ये बेचारी महिला क्या करेगी वो बच्चे का एक वस्त्र स्त्र जो था पहना हुआ निकाल करके इस पंडित को दे दिया अब यह पंडित महाशय जा रहे हैं साथ में एक बंधु था तो उसने कहा कि अरे आपको यह गंदे वस्त्र की गंदे फटे वस्त्र की क्या आवश्यकता है उसको बच्चे के पास में से लेकर के आपको क्या लाभ हुआ तो पंडित ने उस वस्त्र को रास्ते में ही फेंक दिया और फिर क्या कहा देखो यह जो नियम है दक्षिणा लेने का वह नियम का तो पालन करना ही पड़ेगा यदि मैं नियम का भंग कर दूंगा तो फिर यह पूरी विधि ही निष्फल हो जाएगी माने पंडित सिंसियर बिलीव्स इन दैट मैं जो मैंने प ब रहा था तब मुझे लगा कि कितने क्रूर हृदय यह लोग है जो कि एक छोटे बच्चे का एक मात्र वस्त्र था ठंडी है बारिश है उसके भीतर में जो उसके पास में एक मात्र रक्षण जो था वो उससे छीन लिया ये क्या पागलपन है अभी इतने दिनों के बाद में मुझे लगता है कि मुझे नहीं लगता कि इस तरह का क्रूर कोई होगा बहुत बार ऐसा होता है कि कुछ-कुछ लोग इस तरह की कहानियां बनाते हैं खास करके ये कम्युनिस्ट लोग जो कि किसी धर्म को बदनाम करना चाहते तो खैर दैट पॉइंट अाइड देखिए हमने देखा है बार-बार देखा है हिस्ट्री पढ़ी है कोई भी धर्म हो ऐसा एक भी धर्म नहीं है जिसने कि दूसरों के ऊपर में अत्याचार ना किए हो माने कोई भी धर्म नाम लेने की जरूरत नहीं है हिस्ट्री पढ़ने से बहुत ही क्लियर हो जाएगा कि धर्म के नाम पर लोगों पर बार-बार अत्याचार हुआ है और इस तरह का अत्याचार हुआ है कि काफी लोग धर्म के ऊपर में से संपूर्ण रूप से आस्था उनकी उठ गई है भगवान के ऊपर में से आस्था संपूर्ण रूप से चली गई है ऐसा बहुत बार इतिहास में हुआ है इतिहास में यह सब रिकॉर्ड बड़े ही क्लियर है किंतु ऑन द अदर हैंड यह जिसको हम सही सही आध्यात्मिकता कहते हैं वह आध्यात्मिकता यदि इस सिविलाइजेशन के भीतर में नहीं रहेगी और सभी के भीतर में होने की जरूरत नहीं है वह जो कुछ चंद महापुरुष होते हैं उनके भीतर में यदि यह आध्यात्मिकता प्रवेश कर जाए तो फिर देखिए कि सिविलाइजेशन किस तरह से उन्नति करती है सिविलाइजेशन का पूरा चेहरा ही किसस तरह से बदल जाता है तो यह जो स्पिरिचुअलिटी है दैट इज वन ऑफ द मोस्ट फंडामेंटल फैक्टर कि जो कि सिविलाइजेशन की उन्नति के लिए वो जवाबदार है रिस्पांसिबल है यदि धर्म और आध्यात्मिकता जब तक आप आध्यात्मिकता की ओर जाते हैं और जेनुइन अध्यात्मिकता की ओर तब तक सिविलाइजेशन आगे बढ़ती रहेगी और जिस दिन यह आध्यात्मिकता धर्म जनून में परिणत हो जाएगी उसी दिन सभ्यता के गले में जैसे कि एक पत्थर बांध दिया हो बांध कर के समुंदर में फेंक दिया हो और पत्थर उसको जैसे कि समुंद्र की तले में वह टान करके खींच करके ले जा रहा हो इस तरह का काम यह धर्म करेगा सो देखिए कि यह दो फैक्टर है कि क्रिएटिव माइनॉरिटी के भीतर में क्रूरता और दूसरा है धार्मिक नून या तो धार्मिक अंधश्रद्धा जो कि सिविलाइजेशन सभ्यता की अवनति के लिए रिस्पांसिबल है और तीन फैक्टर है ने एक लर्निंग एंड विजडम ये जो डेवलपमेंट होता है यह एक सेकंड की कंपेरिजन क्रिएटिव माइनॉरिटी के भीतर में दया ममता उदार विशाल हृदय ता और तीसरा है न्यू इन स्पिरिचुअलिटी आध्यात्मिकता यदि ये तीन फैक्टर होते हैं इकट्ठा तो उसका सही सही में उन्नति प्रारंभ होगा इसी बात को आप वेस्टर्न सिविलाइजेशन के कांटेक्ट में देखिए जब जीसस का जन्म हुआ और जो इनिशियल जो एक चर्च का विस्तार हुआ उसमें रियल स्पिरिचुअलिटी थी रियल स्पिरिचुअलिटी यदि नहीं होती तो किस तरह से आपका यह यह जो सोसाइटी है या क्रिश्चियनिटी है या यूरोप है वो एक साथ में एक सूत्र में बता तो उस समय जेन्युइन स्पिरिचुअलिटी थी किंतु बाद में देखिए कि किस तरह से यही स्पिरिचुअलिटी क्रिश्चियन लोगों की बाद बाद में धार्मिक अंधश्रद्धा में परिणत होती गई और 1000 साल ना की इतने कुछ सालों की यह डार्क एजेस प्रारंभ हुए तो एक जिन मने एकदम बड़ा ही क्लियर उदाहरण हमको देखने को मिलता है वेस्टर्न सिविलाइजेशन के भीतर में अभी भारत का देखिए भारत में आज दो फैक्टर तो बड़े ही है एक तो गांधी जी ने जिस तरह से अ अपना फ्रीडम मूवमेंट प्रारंभ किया था देखिए कि हमको पता है कि किस तरह से एक क्या कहेंगे कि भारत में एक उदार हृदयत आई है गांधी जी ने इतना एकदम परफेक्ट एनालिसिस किया कि यदि हम लोग मिलिटरी डेवलपमेंट में जाएंगे तो फिर यह भारत के जो फंडामेंटल प्रॉब्लम्स है यह नात जात कास्ट जाति यह सब में जो डिवीजन है वो कभी भी फुलफिल नहीं होंगे उन सब में कभी एक सहानुभूति समानता नहीं आएगी हो सकता है कि भारत अपनी मिलिट्री को डेवलप करे ये कांग्रेस है ना कि ऐसे कुछ जो दल थे मिलिट्री को डेवलप करके हो सकता है कि शायद ब्रिटेन के सामने युद्ध में विजय प्राप्त कर ले किंतु भारत की ये जो डिवीजन है है वो बाद बाद में हम आपस में ही सिविल वॉर में डूब जाएंगे वो नॉर्थ और साउथ का इसका इसके साथ में यह यह राज्य का उस राज्य के साथ में इस राजा का उस राजा के साथ में इस तरह का सिविल वर होगा कि भारत संपूर्ण रूप से खत्म हो जाएगा सो दैट वाज वन जेनन इनसाइट ऑफ गांधीजी कि नहीं सबसे पहले तो भारत जो देश है उसके भीतर में हमारे जो डिवीजन है उसको ठीक करना है बाद में कहीं जाकर के हमको आजादी के लिए बात करनी होगी तो ट वास गांधी जी सन साइट और सेकंड है स्पिरिचुअलिटी हमको पता ही है कि किस तरह से ठाकुर महा स्वामी जी के आगमन से एक जेन्युइन स्पिरिचुअल मूवमेंट भारत में प्रारंभ हुआ है तो यह दो फैक्टर है कि शासक वर्ग में एक कंपेरिजन आजकल के में बात नहीं कर रहा किंतु एटलीस्ट जो प्रारंभ में जो था एटलीस्ट थियोरेटिकली तो हम सब लोग स्वीकार करते हैं भारत की डेमोक्रेसी चाहे कितनी भी अ फॉल्टी हो कितनी भी चाहे वर्क वर्क इन प्रोग्रेस हो हम अपना जो नेबरहुड देखते हैं या तो फिर यह इन जनरल एशियन कंट्रीज को देखते हैं तब हमको सध्या मिलता है भरोसा मिलता है कि नहीं बाकी सब देशों से तो हम बहुत आगे हैं सो दैट इज वन थिंग कि एक कंपेरिजन है क्रिएटिव माइनॉरिटी के भीतर में बहुत सारे लोग पढ़ाई लिखाई करके गांव की ओर जाते हैं गरीब लोगों के लिए कल्याण के लिए एनजीओ वगैरह की स्थापना करते हैं अपना समय देते हैं अपना कंट्रीब्यूशन देते हैं रामकृष्ण मिशन के ही भक्त वॉलंटस को देखिए कि उनका कितना सॉलिड कंट्रीब्यूशन है अपने सेवा कार्य के लिए तभी तो हम इतनी सारी स्कूल है इतनी सारी हॉस्पिटल है यह सब चला पा रहे हैं सो दैट इज वन थिंग कि कंपेज है स्पिरिचुअलिटी भी है उसमें तो कोई प्रश्न ही नहीं है कि ठाकुर महा स्वामी जी के आगमन से हमारे भक्तों के भीतर में और सिर्फ हमारे भक्त ही क्यों इन जनरल यह जो स्पिरिचुअलिटी का डेवलपमेंट हुआ है गुजरात में जैसे कि स्वामीनारायण है बंगाल में जैसे कि यह गौरांग महाप्रभु थे सभी प्रांत में सभी राज में सभी विस्तार में सभी भाषाओं में देखिए कि स्थानिक संत महात्मा अवतार उनका बड़ा ही महात्म्य है प्राधान्य है तो स्पिरिचुअलिटी भी भारत में है अभी ये जो थर्ड फैक्टर जो है कि साइंटिफिक डेवलपमेंट वो जदी कटिंग एज ऐसा नहीं कि अमेरिका से सीख करके हमने कॉपी कर लिया और अमेरिका से 50 साल 60 साल पीछे चल रहे हैं ऐसा नहीं कटिंग एज कंप्लीट न्यू साइंस को डेवलप करना कंप्लीट न्यू लर्निंग को डेवलप करना ये यदि हम कर पाए तो फिर भारत विश्व के सर्वश्रेष्ठ सिविलाइजेशन हो जाएगा दो फैक्टर भारत में आ गए हैं कंपेरिजन एंड स्पिरिचुअलिटी एक थर्ड फैक्टर की बारी अभी तक नहीं डेवलप हो पाया है दैट इज साइंस यदि साइंस भी यदि डेवलप हो जाए तो यह जो सभ्यता की जो मशाल है वह अमेरिका से भारत में आ जाएगी क्योंकि देखिए कि किसी भी युग में कोई एक ही सभ्यता होती है जो कि कटिंग एज पर कार्य करती है जो कि ब्रेकथ्रू लेवल का कार्य करती है वो 19 सेंचुरी में देखिए कि ब्रिटेन था उससे पहले 18 सेंचुरी में देखिए कि फ्रांस था उससे पहले देखिए कि यह जो रोमन एंपायर था उससे पहले देखिए कि यह ग्रीस था उससे पहले भारत था उससे पहले बस भारत से पहले का अभी हमको कोई हिस्ट्री नहीं पता है तो देखिए कि सब समय कोई एक ही सिविलाइजेशन होती है जिसके पास में यह ज्ञान विद्या और आध्यात्म की मशाल रहती है वही सिविलाइजेशन पूरे विश्व को गाइड करती है आज अमेरिका से साइंस सीख करके सभी देश में देखिए कि वो उसकी कॉपी करके अमेरिका हो ना कि ये वेस्टर्न कंट्रीज हो या तो फिर यह वेस्टर्न सिस्टम हो आजकल बहुत सारे देशों से वहां पे कंट्रीब्यूशन होता है किंतु अल्टीमेटली ये सिस्टम तो वेस्टर्न है तो यह वेस्टर्न सिस्टम से सीख लेकर के बाकी सब कंट्री उसको फॉलो कर रहे हैं तो यह सभ्यता की मशाल आज यह वेस्टर्न कंट्रीज के पास में है यह भारत के पास में आ सकती है यदि ये थर्ड फैक्टर हम उसको फुलफिल करें दैट इज द कटिंग एज लर्निंग जो एकदम जो नया-नया जो यह डेवलपमेंट है वह फंडामेंटल फिजिक्स में हो ना कि फंडामेंटल मेडिसिन में हो कि फंडामेंटल कॉस्मोलॉजी में हो वह कंट्रीब्यूशन यदि हम करना शुरू कर दें तो यह सभ्यता की मशाल यह वेस्टर्न कंट्रीज से भारत में अवश्य वापस आ जाएगी तो यह मेरे कुछ आइडियाज कि जिसको कि मैं चाहता था कि मैं उसको एक बार तो आर्टिकुलेट करूं मैं उसको एक बार तो डेवलप करूं जिससे कि मेरे खुद के माइंड में थोड़ा क्लेरिटी आज यही तक अभी कल तो आई थिंक सैटरडे है अभी मिलेंगे मंडे ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णा अर्पण मस्तु य फिलोसॉफिकल डिस्कशन कभी-कभी ऐसा थोड़ा कॉम्प्लिकेटेड हो जाता है किंतु फिर भी मैं सोचता हूं कि सब समय स्मृति कथा से अलावा भी और कुछ डिटेल में डिस्कशन होना चाहिए जिससे कि क्या है कि अपने क्लास में एक डेप्थ आए देखिए गांधी जी और स्वामी जी में सबसे बड़ी समानता कहां है पता है उन्होंने भारत का ठीक-ठीक डायग्नोसिस किया था उनको यह समझ में आया कि जद यह जो मिलिट्री विक्ट्री जो है भारत को जद आजाद होना है तो ब्रिटेन के साथ में युद्ध करके उनको देश में से भगा देने से सिर्फ काम नहीं होगा हमारे फंडामेंटल में गड़बड़ है और फंडामेंटल में सबसे बड़ा गड़बड़ क्या है स्वामी जी ने जैसे कि केरल में जाकर के देखा जन एक पागला गारत मने एक पागल खाना है क्यों ये जो ये जो निम्न जाति का आदमी रास्ते से जा रहा है घंटी बजाते जा रहा है उसका जो परछाई पी जद एक उच्च वर्ण के ऊपर में गिर गया तो उसको उस आदमी को स्नान करना पड़ेगा विधि विधान करने पड़ेंगे वह अशुद्ध हो गया है स्वामी जी कहते हैं कि इस निम्न वर्ण की स्त्री के साथ में अवैध संबंध बनाने के समय उसको कोई प्रॉब्लम नहीं होता तो अदर वाइज उसकी परछाई भी उसके ऊपर में पड़ गई तो अशुद्ध हो गया किस तरह का पागला पन है तो स्वामी जी को भी यह समझ में आया था और गांधी जी को भी यह समझ में आया जब भारत यात्रा कर रहे थे देखा कि भारतवासियों के पास में गरीबी और यह जो डिवीजन इतने भयानक है कि यदि उसका कुछ सोल्यूशन नहीं निकालेंगे तो मान लीजिए कि हमने सैन्य बना कर के ब्रिटेन पे हमला करके या तो ब्रिट भारत में जो ब्रिटिश सैन्य है उस परे हमला करके विजय यदि प्राप्त कर भी दी किंतु दूसरे ही दिन यह भारत के भीतर में ही ऐसा सिविल वॉर स्टार्ट होगा कि भारत के 10 टुकड़े हो जाएंगे उससे भी ज्यादा हो सकते हैं दैट वाज गांधी जी का सबसे बड़ा अंडरस्टैंडिंग था और इसी वजह से मुझे यह तो एक था दूसरा कि देखिए कि सत्य और ब्रह्मचर्य यह दोनों बात अपने आध्यात्मिक ट्रेडिशनल है गांधी जी ने भी अपने जीवन में उसका महात्म्य था भले ही चाहे वो गृहस्थ थे तो गृहस्थ के हिसाब से सत्य और ब्रह्मचर्य का पालन करेंगे किंतु उन्होंने जो महत् में दिया आप बाकी के जितने भी देश है यह स्टालिन है यह माओ है यह हिटलर है वो इतने भयानक राक्षस थे कि सत्य और ब्रह्मचर्य का नाम नामो निशान उनके सामने नहीं लेना है तो कंपैरेटिव टू दैट कि गांधी जी के जीवन में इन दोनों वैल्यूज मूल्यों का बहुत बड़ा प्रभाव था और तीसरा सबसे बड़ा फैक्टर देखिए कि जो जीता वही सिकंदर भारत की जनता ने जिनको कि सन्मान दिया जिनको कि अपने नेता के रूप रू में स्वीकार किया क्योंकि भारत की मिट्टी में तो आध्यात्मिकता मिली हुई है भारतवासियों ने जैसे देखिए चाइना एक एक माओ है या एक हिटलर है या एक स्टालिन है या तो फिर एक रूजवेल्ट है या तो फिर एक नेपोलियन है उसके पास में सत्ता कहां से आती है लोग उसको लीडर बनाते हैं तब तो सत्ता आती है तो कौन से देश का क्या चरित्र है जर्मनी ने हिटलर को लीडर बनाया ये आपका जर्मनी का चरित्र समझ में आता है कि हिटलर जैसे पागल को अपना नेता बनाया चाइना ने माओ को लीडर बनाया तो चाइना का चरित्र समझ में आता है कि माओ जैसा एक नंबर का क्या कहेंगे कि झूठ बोलने वाला लोगों पर अत्याचार करने वाला इस आदमी को उन्होंने लीडर बनाया और भारत ने लीडर बनाया गांधी जी को तो एक चरित्र अपनी प्रजा का यह समझ में आता है तो बात यह नहीं है कि गांधी जी सही थे या कि और कोई नेता सही थे बात है कि देश ने किसको स्वीकार किया है अपने नेता के रूप में वह भी तो हमको देखना होगा आज हम थियोरेटिकली डिस्कस हजार कर दें कि यह जो नेता था उसका आईडियाज मुझे अच्छा लगता है इस नेता का आईडिया मुझे अच्छा नहीं लगता किंतु वो हमारे बोलने से तो होने वाला नहीं भारत की जो 30 करोड़ की पॉपुलेशन थी उस समय की उसमें से मेजॉरिटी ने इनको लीडर के रूप में स्वीकार किया तो वो फैक्ट हमको एक्सेप्ट करना पड़ेगा हिस्ट्री में अभी जर्मनी में देखिए कि हिटलर के अलावा अच्छी बुद्धि वाले बहुत लोग थे आइंस्टाइन खुद जर्मन था किंतु आइंस्टाइन को वहां से भाग जाना पड़ा आइंस्टाइन को किसी ने कह दिया वो तो यहूदी था तो उसको मैसेज मिल गया कि हिटलर जो है यहूदियों का संहार करने वाला है तो पहले ही यहां से निकल जाओ किसी ने आकर के उसको वार्निंग दी वरना आपको भी जेल में डाल देगा आपको भी कंसंट्रेशन कैंप में डाल देगा ओवरनाइट आइंस्टाइन को जर्मनी से भग खड़ा होना पड़ा अमेरिका व जाकर के चला गया तो ऐसा नहीं है कि कोई भी देश में अच्छा और बुरा एक ही तरह का आदमी जन्म लेता है या तो अच्छा ही या तो बुरा ही दोनों तरह के आदमी सब तरह के आदमी सभी देश में जन्म लेते हैं बात है कि वहां की प्रजा किसको अपने नेता के रूप में चुनती है आइंस्टाइन को ज अपने नेता के रूप में चुना होता तो जर्मनी का कितना डेवलपमेंट हो गया होता उस वो नहीं होकर के सेकंड वर्ल्ड वॉर में जो बर्बादी हुई है जर्मनी की वह उस समय के इतिहासिक ऐतिहासिक विवरण को पढ़ेंगे तो पता चलेगा सो वो प्रजा के ऊपर में है प्रजा का चरित्र यहां से पता चलता है तो तीन फैक्टर है एक तो स करेक्ट एनालिसिस किया गांधी जी ने स्वामी जी की तरह ही कि पहले भारत की आर्थिक सामाजिक उन परिस्थिति को ठीक करना पड़ेगा दूसरा सत्य और ब्रह्मचर्य के आधार पर करना पड़ेगा और तीसरा कि भारत देश ने उनको नेता के रूप में स्वीकार किया है