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Swami Vivekananda My Plan Of Campaign ·

मेरी क्रान्तिकारी योजना : स्वामी विवेकानन्द : भारतीय व्याख्यान || 11 Mar 2025

प्रार्थना

ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः स्वामी विवेकानंद का माय प्लान ऑफ कैंपेन भारत में दिए हुए भाषणों में से एक इस भाषण में स्वामी जी भारत में किस तरह का कार्य करना चाहते हैं श्री रामकृष्ण देव की आध्यात्मिक साधना और सिद्धि को भित्ति बना कर के फाउंडेशन बना कर के भारत का नवनिर्माण किस तरह से करना चाहते हैं उसका एक आउटलाइन हमको इस प्रवचन में मिलता है और इस प्रवचन का जो पॉइंट हम डिस्कस कर

नागरिकों में एकता नहीं रहने से सरकार ठीक से काम नहीं कर पाती

रहे हैं इस वीक में इस पॉइंट का टाइटल है हाउ टू बेटर इंडिया एजुकेट पीपल यह टाइटल मैंने दिया है स्वामी जी का नहीं है य मैंने इस टेक्स्ट को डिवाइड कर दिया है पॉइंट्स में जिसकी वजह से हमको इसको स्टडी करने में सुविधा हो पॉइंट बाय पॉइंट हम डिस्कस कर सके तो इस पॉइंट को हम डिस्कस करना कल शुरू किए थे मैंने ऑलरेडी एक आउटलाइन दिया कि स्वामी जी चाहते हैं कि भारत में यूनिटी हो और भारत में कंसेंसस बने क्योंकि यदि लो लोकतंत्र यहां पर लागू करना है यदि डेमोक्रेसी को इंप्लीमेंट करना है भारत में तो अभी देखिए कि डेमोक्रेसी को सक्सेसफुल होने के लिए सबसे इंपॉर्टेंट फैक्टर क्या है यदि यदि डेमोक्रेसी फेल क्यों होती है सबसे पहले तो डेमोक्रेसी फेल होती है लोकतंत्र फेल होता है जबकि जनता में डिवीजन होता है सिटीजंस विभिन्न मुद्दों पे एक दूसरे के साथ में जब वाद विवाद करते हैं तब वहां पर किसी भी तरह की एकमत या तो फिर कंसेंसस नहीं क्रिएट होता और जब कंसेंसस क्रिएट नहीं होता तब वहां का पॉलिटिक्स या तो फिर वहां के राजनेता या तो फिर वहां का गवर्निंग क्लास विभिन्न पार्टियों में बट जाता है और यह जो डिवीजन होता है नागरिकों के भीतर में सिटीजंस के भीतर में वह डिवीजन आखिर में उस देश के जो गवर्निंग क्लास है उस में रिफ्लेक्ट होता है और यह गवर्निंग क्लास है यदि यह प्राइम मिनिस्टर हो चीफ मिनिस्टर हो पार्लियामेंट हो कि लेजिस्लेटिव असेंबली हो यह भारत की बात हुई अमेरिका में जैसे कि सेनेट है हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव है या तो फिर प्रेसिडेंट है जब नागरिक आपस में बटे हुए होते हैं तो वहां पर इतना पोलराइजेशन होता है कि कोई भी गवर्नमेंट ठीक तरह से कार्य नहीं कर पाती आज हम सभी जगह पर इस तरह का पोल रा इजेशन देखते हैं कि इतने शार्प मत होते हैं नागरिकों के भीतर में इतना स्ट्रांग डिवीजन होता है कि वे लोग आंखों में आंख डाल कर के देख नहीं सकते आपस में सहृदयता पूर्वक वार्तालाप नहीं कर सकते फिर इस तरह के पोलराइजेशन में धीरे-धीरे करके नागरिकों के भीतर में सिटीजंस के भीतर में कलह का जहर बढ़ता ही जाता है डिस्कंटेंट है या तो फिर यह धीरे-धीरे करके यह क्या कहेंगे रिबेलियस यह सब बढ़ता जाता है हमने भारत में खुद देखा था कि पिछले एक समय एक ऐसा आया था जब कि कोलिशन गवर्नमेंट होती थी में छोटे-छोटे इतने सारे पार्टनर होते हैं और सभी पार्टनर अपनी-अपनी दिशा में गवर्नमेंट को ले जाना चाहते हैं अल्टीमेटली यह परिणाम आया कि भारत ने 20-30 साल गंवा दिए 1980 की बात है जबकि भारत और चाइना दोनों का जीडीपी ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट ऑलमोस्ट इक्वल था और अभी आज देखिए 1980 से लेकर के यह 2025 यह कितने साल हुए हैं 25 यहां 20 वहां ऑलमोस्ट 45 इयर्स यह ऑलमोस्ट 50 इयर्स हुए हैं इस 45 इयर्स में आप देखिए कि चाइना का जीडीपी हमसे पांच गुना बढ़ गया है और हम हमारा जीडीपी उनसे पांच 1/5 ऑफ चाइना है तो यह जो चाइना ने एक एक तरह से कहे कि इतना लॉन्ग उन्होंने जंप लगाया अपने देश की तरक्की में अपने देश की उन्नति में कोई भी क्षेत्र देख लीजिए वो मैन्युफैक्चरिंग हो या तो फिर इनोवेशन हो या तो फिर यह कटिंग एज ये इनोवेशन डिस्कवरीज हो टेक्नोलॉजी हो सभी चीजों में चाइना आज अमेरिका के साथ में मुकाबला कर रहा है अमेरिका का खुद का हाल देखिए आजकल एक समय था कि अमेरिका को अनडिस्प्यूटेड महासत्ता सुपर पावर माना जाता था और बात सिर्फ यह नहीं है कि अमेरिका के पास में एयरक्राफ्ट कैरियर है ना कि स्टिल द फाइटर जेट्स है ना कि फिर यह इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल है बात है कि अमेरिका का एक मोरल अथॉरिटी था एक सॉफ्ट पावर था कि हां चलो यहां पे रूल ऑफ लॉ है यहां की कोर्ट यदि पॉलिटिशियन गलत करें तो वहां पर कोर्ट में आप अपील कीजिए तो कोर्ट प्रेसिडेंट का कान पकड़ कर के उसको ठिकाने लगा सकती है यह सब लोगों को भरोसा था आज देखिए कि अमेरिका की खुद की हालत क्या है इतना शार्प पोलराइजेशन हो गया है इतना शार्प डिवीजन हो गया है एक पार्टी का जद आप मेंबर है तो दूसरी पार्टी के मेंबर के सामने आप बात तक नहीं करना चाहते हैं इस हद तक उन लोगों में डिफरेंस ऑफ ओपिनियन आ गया है भारत में ठाकुर की कृपा से पिछले कुछ सालों से चलो कि हम लोग एक कंसेंसस तो बना पाए हैं अब यह कंसेंसस सही हो कि गलत हो वह हमारी डिबेट का कोई इशू नहीं है बात यह है कि कंसेंसस होना चाहिए एक मत होनी चाहिए यदि प्रजा में एक मत है तो वहां का जो इलेक्टेड रिप्रेजेंटेटिव गवर्नमेंट है वह बड़ा कॉन्फिडेंटली कार्य कर पाएगा किंतु प्रजा में ही डिवीजन है तो फिर वोट लेने का क्या माध्यम है इस डिवीजन को एक्सप्लोइट करो और उनको झुठ मुठ के वादे देकर के सत्ता हथिया लो सत्ता आने के बाद में किसी भी प्रॉमिस को फुलफिल करने की जरूरत नहीं है देखिए कि हमारे एक ओर चाइना है दूसरी ओर है पाकिस्तान अभी एक समय था कि पाकिस्तान का पर एनम पर कैपिटा जीडीपी चाइना और इंडिया से ज्यादा था यह वही 1980 के दशक की बात है आज हम सुनेंगे तो हमको हंसी आएगी कि चाइना का पर कैपिटा जीडीपी चाइना से पाकिस्तान का पर कैपिटा जीडीपी क्या चाइना से ज्यादा हो सकता था तो था भारत से भी ज्यादा था चाइना से भी ज्यादा था वही उस वही देश की आज हालत देखिए कि इंटरनल डिवीजन इंटरनल डिस्कंटेंट इतना शार्प है कि व पिछले 45 साल में उनका धीरे-धीरे करके जो डिटेरिऑरेटेड नेक्स्ट 2025 इयर्स वे लोग हमारे साथ में चाइना के या भारत के साथ में कंपटीशन में आ पाए भविष्य तो किसी ने देखा नहीं है किंतु एटलीस्ट अवर लाइफ टाइम हमको नहीं लगता है मुझे यह तक नहीं लगता कि हमारे लाइफ टाइम में हम चाइना तक इंडिया चाइना तक पहुंच पाएगा क्योंकि फाइव टाइम्स इंक्रीज इन जीडीपी यह कोई मजा वाली बात नहीं है यह जो सबसे ऑप्टिमिस्टिक यह प्रोजेक्शन है आईएमएफ बोलो ना कि यह वर्ल्ड बैंक बोलो 2070 तक चाइना से हम सेकंड नंबर पर होंगे अमेरिका से हम शायद आगे बढ़ जाएंगे किंतु चाइना नंबर वन पर होगा जहां तक ग्रोस डोमेस्टिक प्रोडक्ट का प्रश्न है और इंडिया नंबर टू पर होगा यहां अभी दूसरा एक फैक्टर है वैसे कि चाइना का डेमोग्राफिक डिक्लाइन हो हो रहा है किंतु वह डेमोग्राफिक डिक्लाइन तो भारत में भी होगा इवेंचर कि हम जो डेमोग्राफिक स्वीट स्पॉट पे है उसका बेनिफिट लेना वोह कोई मुझे नहीं लगता कि इमीडिएट होने वाला है यह अपना डेमोग्राफिक डिविडेंड काम करेगा कि नहीं वो एक डाउटफुल प्रश्न है डाउटफुल बात है तो जो भी है यहां पे किंतु जो

भारतीय एकता और लोकतंत्र के लिए शिक्षा का प्रसार आवश्यक है

स्वामी जी का जो विजन था देखिए स्वामी जी कितना आगे देखते थे यदि राजाशाही होता है या तो फिर यदि डिक्टेटरशिप होता है तो वहां पर क्या होता है डिक्टेटरशिप को छोड़ देते हैं क्योंकि डिक्टेटर खुद खास करके मॉडर्न डिक्टेटर जो होते हैं वह अपना कंसेंसस अपना पावर लोगों से ही डिराइवर करते हैं जद जैसे चाइना में देखिए चाइना में एक समय था कि एंपरर हुआ करते थे वह डिवाइन राइट से राज्य चलाते थे अभी यानी कि एंपरर कितना ही बुरा हो आप उसको कुछ नहीं कर पाएंगे किंतु चाइना में जो अभी प्रेजेंट सिचुएशन है व की प्रेजेंट गवर्नमेंट लोगों से अपना पावर डिराइवर करती है यदि लोगों में डिस्कंटेंट चाइना के नागरिकों में डिस्कंटेंट बढ़ जाएगा असंतुष्ट बढ़ जाएगी तो चाइनीज जो अभी करंट गवर्नमेंट है उसका पावर धीरे-धीरे कम होता जाएगा यानी कि यह राजाशाही जो थी एक समय डिवाइन पावर से वे लोग रूल करते थे उस समय यदि राजा अकेला पढ़ा लिखा होता तो चल जाता अभी जब स्वामी जी यह सब चिंतन कर रहे थे उस समय भारत की हालत ऐसी थी कि कहां वह एक तरह के अंधेरे गड्ढे में पड़ा था और कहां यह यूरोपियन पावर सर्वोच्च शिखर पर खड़ा था अभी इस भारत यूरोपियन पावर को चैलेंज करके अपना खुद का इंडिपेंडेंस हासिल कर पाए उस समय कोई सपने में भी नहीं सोचता था यह इंडियन नेशनल कांग्रेस की स्थापना उस समय जो हुई थी वही उसी टाइम हो रही थी 1880 ना कि 1890 के दौरान ही हुई थी उस समय उनका था कि ब्रिटेन को रिक्वेस्ट करके भारत को थोड़ा सा ऑटोनॉमी दिया जाए लोकल गवर्न लोकल लेवल पे जिससे कि क्या हो कि ओवरऑल राज्य तो ब्रिटेन का ही रहेगा किंतु यह पंंचायत है या म्युनिसिपालिटी है वगैरह पे यह हम लोगों का लोकल लोगों का थोड़ा बहुत अथॉरिटी बढ़े जिससे कि गवर्नमेंट सुचारू रूप से चले लोकल गवर्नमेंट यहां तक ही इवन नेशनल कांग्रेस भी वहां तक ही सोचता था तो उस समय किंतु स्वामी जी ने भारत के इंडिपेंडेंस की कल्पना की थी और उन्होंने सोचा था कि यदि लोकतंत्र भारत में लाना है तो भारत के नागरिकों को इस तरह से शिक्षित करना होगा कि जिसकी वजह से वह एक कंसेंसस फॉर्म कर पाए देश के सामने महत्व इंपॉर्टेंट चैलेंज क्या है इंपॉर्टेंट चैलेंज का सॉल्यूशन क्या है इस सबके बारे में एक मत बने हमारे भीतर में यूनिटी आए यह जो भारत का जो सूत्र है यूनिटी इन डाइवर्सिटी यह कितना इंपॉर्टेंट

भारत में भाषा, संस्कृति, धर्म, जातीयता की विविधता और इस विविधता में एकता

है अभी विदेशों के सामने खड़े होने की बात तो छोड़ ही दीजिए यह ब्रिटिश गवर्नमेंट के सामने खड़े होने की बात तो उसको ब्रिटिश गवर्नमेंट को चैलेंज करने की बात छोड़ ही दीजिए भारत में ही देखिए कि कितना वैविध्य है कितना डाइवर्सिटी है हिंदुइज्म के भीतर में ही इतने सारे सेक्ट है इतने सारे पंथ है कोई वैष्णव कोई शाक्त कोई वेदांती कोई मने अभी इतने सारे मने हजारों हजारों माने विधि वेदांत विधि वैष्ण विजम विदिन शक्ति शक्ति साधना हजारों हजारों आपको यह स्कूल्स या तो ब्रांचेस मिल जाएगी भाषा का वैविध्य देखिए कहां बंगाली कहां पंजाबी कहां मराठी कहां यह तेलुगु कहां उर्दू कहां यह मलयालम यह भाषा का व विध फिर खाने पीने का वैविध्य बंगाल में मछली खाना आम बात है बंगाल में नॉनवेज खाना व एक जनरली एक्सेप्टेड है जबकि यह आप वेस्ट इंडिया में जाएंगे गुजरात है राजस्थान है वहां पर यदि आप ज नॉनवेज खाएंगे तो लोग आपको कहेंगे कि यह आदमी क्या कर रहा है यानी कि यदि आपको आध्यात्मिकता के रास्ते पर जाना है तो आपको नॉनवेज नहीं खा सकते तो यह खाने पीने का वैविध्य लैंग्वेजेस माने सब सब तरह से इंडिया है जैसे कि एक यूरोप में आज इतना वैविध्य है उससे ज्यादा वैविध्य भारत में है मल्टी एथनिक मल्टीलिंगुअल मल्टी रेसियल मल्टी रिलीजियस इस तरह का यह अपना भारत है इंटरेस्टिंग एक बार मैं जब रांची में था उस समय तो एक सेमिनार में मैं आईआईटी ल्ली दिल्ली में गया था तो अभी दिल्ली में तो क्या है आईआईटी में ल हजार सेमिनार होते रहते हैं तो उसमें कुछ यूरोपियन लोग आए थे अभी सेमिनार हमारा हो गया था समाप्त हमको एक होटल में रखा गया था यह होटल नहीं यानी गेस्ट हाउस था आईआईटी के कैंपस के अंदर में ही तो वहां पे हम हम लोग थोड़ा चाय कॉफी वगैरह पी रहे थे और सामने यह सब यूरोपियन बैठे थे तो मैं साधू के कपड़े में था तो मुझे देख कर के उनको थोड़ा सा क्यूरियोसिटी हुआ कि ये सब ये यहां पर क्या कर रहा है तो फिर उन्होंने मेरे साथ में बात करना शुरू किया उसमें से एक यूरोपियन ऐसा दावा करता है कि देखिए हमने यह यूरोपियन यूनियन बनाया हिस्ट्री मतलब वो वो लोग भी उनको भी थोड़ा हिस्ट्री में इंटरेस्ट था मुझे भी था तो हिस्टोरिकल डिस्कशन हो रहा था तो वह मुझे बता रहा था कि देखिए सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद में हम लोगों ने किस तरह से यूनिटी बनाया आप भारत के जो दुश्मन है उनके साथ में आप किसी भी तरह का भारत में इतना डिवीजन है आप उसको मैनेज नहीं कर पाते हमको देखिए कि फ्रांस और जर्मनी एक पक्के दुश्मन थे सेकंड वर्ल्ड वॉर में किंतु अभी देखिए यूरोपियन यूनियन में कितना यूनिटी है फ्रांस और जर्मनी के बीच में मैंने कहा कि देखिए कि आपके यहां पे जो डाइवर्सिटी है उससे 10 गुना डाइवर्सिटी भारत में है आप मुझे बताइए कि यूरोप की टोटल लैंग्वेजेस कितनी है उससे ज्यादा लैंग्वेजेस भारत में बोली जाती है यूरोप का एथनिक कंपोजिशन क्या है उससे ज्यादा डावर्स एथनिक कंपोजीशन भारत का है और आपने यूरोपियन यूनियन जो बनाया है उसमें आप फिर रिलीजियस डाइवर्सिटी कितनी है यूरोप का जो बेसिक रिलीजन है ज्यादा से ज्यादा तो यही कहेंगे ना कि यह कैथोलिक है ऑर्थोडॉक्स है प्रोटेस्टेंट है कैल्विनिज्म है वगैरह वगैरह क्रिश्चियनिटी तो मेजर रिलीजन है इस्लाम या तो हिंदुइज्म या तो सिख ज्म वगैरह वो तो चंद कुछ गिने चुने लोग हैं आपके वहां पे जब और फिर आपका एथनिक कंपोजीशन देखिए ज्यादातर तो वाइट लोग है ये एशियन या तो अफ्रीकन उनका परसेंटेज 10 पर से ज्यादा नहीं होगा जबकि भारत में देखिए अपना एथनिक कंपोजीशन हमारा स्किन कलर का डाइवर्सिटी देखिए फेयर से डार्क यह पूरा जो स्पेक्ट्रम है स्किन कलर का आपको भारत में एंपलॉयर से 10 गुना ज्यादा होगा रिलीजन का डाइवर्सिटी आप देखिए कि हमारे यहां पर हिंदुइज्म के अलावा दूसरे रिलीजन का यूनियन ही तो बना है वह यूनियन कभी भी टूट जाएगा यदि जर्मनी और फ्रांस कल जाकर के बोल देंगे कि हमको एक दूसरे के साथ में नहीं रहना तो क्या अभी देखिए ब्रिटेन ऑलरेडी निकल गया इंटरेस्टिंग मैं जिसके साथ में बात कर रहा था वो ब्रिटिश था अभी वह आज मिल जाए तो मैं उसको बताऊंगा कि भैया क्या हुआ तुम्हारा यूरोपियन यूनिटी का देखिए ब्रिटेन ऑलरेडी यह ब्रेक्जिट में यह यूरोपियन यूनियन छोड़ कर के निकल गया है तो भारत में यूरोपियन यूनियन से ज्यादा डाइवर्सिटी सभी क्षेत्र में है एथनिक रिलीजियस रेशियन लिंग्विस्टिक ये सभी डाइवर्सिटी उनसे ज्यादा है फिर भी एज अ सिंगल नेशन हम लोग टिके हुए हैं व्हाई बिकॉज कि वी हैव यूनिटी विद इन दिस डाइवर्सिटी जो कॉमन आइडियाज है भारत में कि भारत का फाउंडेशन है रिलीजन धर्म ही ईश्वर दर्शन ही जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य है इस बात को आप काश्मीर से कन्याकुमारी यहां पे गुजरात से आसाम किसी भी कोने में जाइए कोई भी जो अपना इंडियन है इस बात को मना नहीं करेगा वह चाहे फिर क्रिश्चियन हो चाहे मुस्लिम हो ना कि चाहे वह हिंदू हो हम सब लोग यह सब मामले में एक मत है बस भले वही कि भी डे टू डे एक्टिविटी किस तरह से करना है वोह वाटर डिस्प्यूट है यह डिस्प्यूट है वो छोटा-मोटा चलता रहता है इंडियन यूनियन का जो सबसे बड़ा स्ट्रेंथ है दैट इज यूनिटी इन डाइवर्सिटी सो हाउ वाज दिस ब्रॉट अबाउट यह था स्वामी जी का ग्रांड विजन आज हम लोग कांग्रेस है या तो सरदार पटेल को यह श्रेय देते हैं क्रेडिट देते हैं कि ब्रिटिश गवर्नमेंट के जाने के बाद में यह जितने भी यह 100 राजा थे 100 यहां पर राज्य थे उन सबको इतने सारी डाइवर्सिटी वैरायटी थी ब्रिटिश लोगों का था कि भारत को तोड़ के जाना है वो तोड़ने में सक्षम हुए भी किंतु इस हद तक नहीं हुए कि भारत के हजार टुकड़े हो जाए यह जो उनका प्लान था कि जितने भी हम लोग ब्रिटिश लोगों को ना बहुत अपने सर पर चढ़ा के बैठे हैं उस समय अपना ये पॉलिटिकल स्लेवरी था अभी आजकल कल्चरल इंटेलेक्चुअल स्लेवरी है हम लोगों को पता नहीं है कि भारत को डिवाइड करके तोड़ने का कितना बड़ा कार्य उन लोगों ने किया है भारत के प्रत्येक क्षेत्र में प्रत्येक प्रजा में प्रत्येक राज्य में जाजा करके उन्होंने जहर डाला है कि कभी भी इंडियन यूनियन में आपको शामिल नहीं होना है यह इंडियन नेशनल कांग्रेस जिस तरह से गवर्नमेंट फॉर्म कर रही है उससे आपको दूर रहना है कितने राजाओं को उन्होंने भड़काया है इसके बावजूद हमारा खास करके अपने सरदार पटेल उन्होंने सभी राजाओं को एक लाइन में लाकर के उनको इंडियन यूनियन में जॉइन करने को उन्होंने मजबूर किया फोर्स किया अभी यह क्रेडिट देखिए कि सरदार पटेल इज वन ऑफ द ग्रेटेस्ट इंडियन उसमें कोई प्रश्न ही नहीं है किंतु थोड़ा सा पीछे में जाइए थोड़ा सा डीपर देखिए दिस व स्वामी विवेकानंदा ग्रांड प्लान स्वामी विवेकानंद का एक भव्य विजन था कि भविष्य का भारत ये जिस तरह से भगवान राम ने उत्तर से दक्षिण तक यात्रा की पूरे भारत में उन्होंने भ्रमण किया भारत को कल्चरल रिलिजियसली उन्होंने यूनाइट किया इसी तरह से स्वामी विवेकानंद ने पूरे भारत का परिभ्रमण करके भारत को एक साथ में एक कल्चर में यूनाइट किया है आप यह नहीं कहेंगे कि यह हिंदू कल्चर है या नॉन हिंदू कल्चर है लेट अस डू अवे विद द टाइटल्स एंड लेबल्स यह जो अपना सनातन धर्म है भारतीय सनातन धर्म इस भारतीय सनातन धर्म के ध्वज के नीचे स्वामी विवेकानंद ने भारत को यूनाइट किया है और इसी यूनिटी की वजह से आज देखिए कि भारत एक 150 करोड़ की पॉपुलेशन ये चाइना से मोस्ट पॉपुलर नेशन इन द वर्ल्ड आज भारत है अनफॉर्चूनेटली अनफॉर्चूनेटली जो परिस्थिति है कि स्वामी जी ने हमको सिर्फ यह नहीं कहा कि आपको एजुकेट होना है साथ में यह भी कहा कि हमें आत्म श्रद्धा होनी चाहिए यह आत्म श्रद्धा जो कि नच केता में थी वह आत्म श्रद्धा शायद हम भारतीय अपने में कल्टटर पाए हैं इसलिए यह पाकिस्तान में जाएंगे ना वे लोग भारत के बारे में क्या कहते हैं पता है शरीर है हाथी का किंतु दिमाग है चूहे का तो मुझे कभी-कभी लगता है कि ये लोग बात सही कर रहा है इतने हम सहमे सहमे डर डर करके रहते हैं इतना बड़ा देश इतना सारा हमारे पास में इंटेलेक्चुअल इनहेरिटेंस है इंटेलेक्चुअल ट्रेजर है कल्चरल ट्रेजर है किंतु फिर भी अपने को वर्ल्ड स्टेज पे जो प्रोजेक्ट करना है भारतीय आध्यात्मिकता से स्वामी जी ने क्या कहा आई डोंट जस्ट वांट फ्रीडम फॉर फॉर इंडिया आई वांट इंडिया टू

This is the great ideal before us, and every one must be ready for it—the conquest of the whole world by India—nothing less than that, and we must all get ready for it, strain every nerve for it. Let foreigners come and flood the land with their armies, never mind. Up, India, and conquer the world with your spirituality! (Complete Works of Swami Vivekananda, Vol. 3, Pg. 276)

कंकर द वर्ल्ड पूरे विश्व पर भारत राज करेगा किंतु किस तरह से नॉट विथ आर्मीज एंड वेपंस एंड इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल एंड एयरक्राफ्ट कैरियर्स बट विथ अवर स्पिरिचुअलिटी यही योग और वेदांत भारत की सनातन धरोहर है यही योग और वेदांत हमारा सबसे बड़ा ट्रेजर है इसी योग और वेदांत से भारत को विश्व पर जय करना है दैट इज व्हाट स्वामी विवेकानंद दास विजन वस उन्होंने स्वरूप भी कर दिया था अनफॉर्चूनेटली इंडिपेंडेंस के बाद में एक ऐसा मानसिक गुलामी का समय हमारे लिए प्रारंभ हुआ हमने स्वामी विवेकानंद को भी भूल गए यह स्वामी विवेकानंद का विजन भी हम भूल गए बिल्कुल हाथी का शरीर किंतु चूहे का दिमाग लेकर के हम लोग सहम सहम होकर के रह रहे हैं देखिए कि जब हमको इंडिपेंडेंस मिला ऑलरेडी यह एटॉमिक रिएक्टर होमी भाबा

The period between 1945 and 1965 marked a crucial phase in India's scientific development, with significant strides made in various fields. Key achievements include the foundation of India's nuclear program spearheaded by Homi J. Bhabha, leading to the establishment of the Atomic Energy Commission. Simultaneously, Vikram Sarabhai laid the groundwork for India's space program, with early initiatives that would later evolve into ISRO.

है या तो फिर यह अपना इसरो है स्पेस एक्सप्लोरेशन वो सब स्टार्ट हो चुका था कहां मैंने जो मोस्ट एडवांस कंट्री थे विश्व के वो लोग एटॉमिक रिएक्टर एस्टेब्लिश कर रहे थे वे लोग स्पेस प्रोग्राम पब्लिश कर रहे थे उनके साथ-साथ में भारत था किंतु पता नहीं यह 1970 1980 में इस तरह का एक भयानक कैंसर हमारे भीतर में घुस गया अभी छोड़िए इतना सब डिस्कशन किंतु देखिए हमारा फोकस है स्वामी विवेकानंद और स्वामी विवेकानंद का भारत का विजन यदि हम स्वामी विवेकानंद के विजन को आगे बढ़ाते रहे तो यह अपना यूनिटी इन डाइवर्सिटी बना रहेगा भारत के सिटीजन है छोटा-मोटा डिस्प्यूट तो भाई-भाई में भी होता है परिवार में भी होता है किंतु यह जो नेशनल कंसेंसस बनाना है कि सब लोग मिलकर के इकट्ठा होकर के हमारे देश को भव्य विजय बनाएंगे देश को ग्रेट बनाएंगे यह एक स्वामी जी का विजन और साथ-साथ में एजुकेशन सिस्टम में योग और वेदांत का प्रवेश यदि यहां पर जो स्वामी जी कहते हैं तो कल जैसे प्रश्न हुआ कि अमेरिका इतना ग्रेज इतना एजुकेटेड कंट्री है फिर भी इतना श पोलराइजेशन डिवीजन क्यों है क्योंकि रीजन है स्वामी जी यहां पर एजुकेशन की बात जो करते हैं वोह जो सेकुलर का जो झूठ मुठ का एक कांसेप्ट भारत में जो हमने डाल दिया यह कैंसर कहां से आया मुझे लगता है सेकुलरिज्म का यह जो एक राक्षस प्रवेश कर गया वहां से ही आया होगा व्हाट एवर लेट अस नोट गो इन टू पॉलिटिक्स किंतु देखिए कि सही सही एजुकेशन जद होना है तो किंडरगार्डन से ही बाल मंदिर से ही बच्चे को योगासन प्राणायाम ध्यान और वेदांत का उपदेश देना शुरू कर दो देखो कि वह बच्चा जब ग्रेजुएट होता है फिजिकली मेंटली इंटेलेक्चुअली स्पिरिचुअली वो इतना स्ट्रांग हो जाएगा कि एनी चैलेंज विल ही विल बी एबल टू फेस विथ ग्रेट करेज आजकल का जो ग्रेजुएट है वो अन एंप्लॉय बल है यह जो गवर्नमेंट का स्टेटिस्टिक्स आता है कितने परसेंट ग्रेजुएट अन एंप्लॉय बल है तो पता चलेगा कि इतना ज्यादा मैं भूल गया अभी वो मैंने पढ़ा था कुछ दिनों पहले तो इतने सारे ग्रेजुएट है वो कि अन एंप्लॉय बल है

Only 51% of India's graduates are employable, with significant challenges in vocational training and skilling, according to the Economic Survey 2023-24.

तो क्या मीनिंग है इस तरह के ग्रेजुएशन का क्या मीनिंग है इस तरह के एजुकेशन सिस्टम का जिसमें से निकल कर के आपको नौकरी तक ना मिल पाए आप अपने परिवार का भरण पोषण ना कर पाए खुद के खाने का जुगाड़ ना कर पाए व्हाट इज द मीनिंग ऑफ दैट दैट टाइप ऑफ एजुकेशन तो योग वेदांत एंड मॉडर्न लर्निंग यह दोनों का समन्वय हो तो मनुष्य एक बालक एक सक्सेसफुल एक नागरिक हो सकता है जो कि भारत के स्थान में वह सहाय करेगा सो दिस इज स्वामी विवेकानंद विजन तो अभी हम पढ़ना शुरू करते हैं इस पॉइंट में स्वामी जी क्या कहते हैं वह कहते हैं दैट इज वयर आई

सुधार समितियों (reform societies) द्वारा भारत की निंदा और स्वामीजी का प्रतिवाद

डिफर एंटायस रिफॉर्म मूवमेंट्स अच्छा इससे पहले का जो बात था इसके पहले का जो पॉइंट था कि यह जो रिफॉर्म करना है तो रिफॉर्म के बारे में क्या है तो स्वामी जी ने ऑलरेडी कह दिया कि गुड एंड इविल आर टू साइड्स ऑफ द सेम कोइन जद एक मनुष्य जगत में से कितना ही बुरा बराई को हटाना चाहे बुराई जाएगी नहीं अच्छाई बढ़ेगी नहीं जो बुरा है जो अच्छा है उसका प्रोपोर्शन सिमिलर ही रहेगा किंतु जैसे कि है कि कर्मण वाही िकार अस्ते हमको कर्म करते जाना है फल की चिंता नहीं करना इस अर्थ में कि यदि मैं हाथ पर हाथ डाल के बैठा रहूंगा कि कुत्ते की पूंछ तो टेढ़ी ही रहने वाली है सीधी करने से क्या लाभ है वह बात नहीं है अपना जो कर्म है कुत्ते की पूंछ को सिद्धि करने का वो करते जाना है करते करते हमको मुक्ति मिल जाएगी उसकी पूंछ सिद्धि हो ना हो ट डज नॉट मैटर तो वो एक स्पिरिचुअल पॉइंट पॉइंट आउट करने के लिए स्वामी जी ने इसके आगे का पॉइंट कहा था और इसीलिए स्वामी जी कहते हैं कि यह रिफॉर्म सोसाइटीज है वे लोग कहते हैं कि समाज में से इविल यानी कि यह जो अनिष्ट है उसको भगा देना है स्वामी जी कहते हैं कि इविल है रहेगा उसकी चिंता मत कीजिए आप अपना कार्य करते जाइए तो यहां पे यहां पर स्वामी जी कहते हैं कि दैट इज वर आई डिफर एंटायस रिफॉर्म मूवमेंट फॉर 100 इयर्स दे हैव बीन हियर व्हाट गुड हैज बीन डन फ्रो एक्सेप्ट क्रिएशन ऑफ ए मोस्ट टूपेट अ मोस्ट कंडेमनेड लिटरेचर मैं इस रिफॉर्म मूवमेंट से यहां पे ही मेरा मतभेद शुरू होता है 100 साल से यह रिफॉर्म मूवमेंट चल रही है क्या किया है उन्होंने इसके अलावा कि भारत को गाली देते हुए जो उन्होंने लेटर जो एक न्यूज़पेपर आर्टिकल लिखे हैं किताबें लिखी है इसके अलावा उन्होंने किया क्या है मोस्ट विट उपेट अ मोस्ट कंडेम्नेटरी लिटरेचर सबसे ज्यादा जहर उगलने वाला सबसे ज्यादा क्रिटिसाइज करने वाला लिटरेचर इसके अलावा उन्होंने क्या किया है वुड टू गॉट इट वाज नॉट हियर अच्छा रहता जद यह सब लिटरेचर यहां पे ना रहता दे हैव क्रिटिसाइज कंडेम एब्यूज द ऑर्थोडॉक्स अंट्स कोट दे टोन एंड पेड देम बैक इन देयर ओन कॉइन उन्होंने यह ऑर्थोडॉक्स हिंदू है यह ऑर्थोडॉक्स नागरिक है हमारे देश के उनको गाली देते हुए उनकी निंदा करते हुए उनका श मने उनकी उनके बारे में सब झूठ मुठ का बोलते हुए इतना सारा उन्होंने प्रवचन दिए हैं इतना सारा लिटरेचर उन्होंने प्रोड्यूस किया है कि आखिर में यही ऑर्थोडॉक्स लोगों ने उनकी गेम सीख ली है उनकी चाल सीख ली है और सामने में यह जितने रिफॉर्म वाले हैं उनकी निंदा करते हुए उनका एब्यूज करते हुए इक्वली उन्होंने लिटरेचर खड़ा करना शुरू किया है यानी कि क्या है कि ये रिफॉर्म वाले यानी कि यह कहते हैं कि भारत में सती प्रथा नहीं होनी चाहिए यह विधवा विवाह करना चाहिए यह बाल्य विवाह नहीं होना चाहिए यह भारत के जो जात है नाथ है यह जो सब डिवीजन है वो नहीं होने चाहिए तो ठीक है आप वोह सब कीजिए उस सब में कोई रीज ये नहीं है किंतु फिर उन्होंने एक्चुअली सोल्यूशन तो देना चाहिए ना पॉजिटिव स्टेप्स आप तो दिखाना चाहिए कि हां इस तरह से नाथ जात का भेद है वो रुकेगा इस तरह से आपका समाज का उत्थान होगा इस तरह से ये जो गरीबी में इतना सारे लोग डूबे हुए हैं उनका कुछ भला होगा कुछ पॉजिटिव स्टेप्स दीजिए वो नहीं देकर कि ये जितने भी ऑर्थोडॉक्स हिंदू हैं उनको गाली देता ऐसा एक लिटरेचर खड़ा किया है कि आखिर में इन ऑर्थोडॉक्स हिंदू ने यही गेम सीख करके यही चाल सीख करके यह रिफॉर्म वाले जितने भी थे उनको गाली देना देता हुआ लिटरेचर उन्होंने स्टार्ट किया है व फिर स्वामी जी कहते हैं द रिजल्ट इज द क्रिएशन ऑफ ए लिटरेचर इन एवरी वर्नाकुलर व्हिच इज द से शेम ऑफ ऑ द रेस द शेम ऑफ द कंट्री इज दिस रिफॉर्म इज दिस लीडिंग द नेशन टू ग्लोरी हुज फॉल्ट इज दिस और आखिर में ऐसी परिस्थिति आई कि रिफॉर्म वाले ये ऑर्थोडॉक्स को गाली देते हैं गाली ऑर्थोडॉक्स वाले रिफॉर्मर्स को निंदा करते हैं और एज ए रिजल्ट एक इस तरह का लिटरेचर खड़ा हुआ है इस देश में जो कि इट इज अ शेम फॉर द कंट्री हमारे देश के लिए एक बड़ी शर्म की बात है तो यह किसका किसका गलती है क्या ये यह रिफॉर्म है यह किसकी गलती है क्या इस तरह से भारत उत्थान होगा इस तरह से नहीं होगा निंदा तो कोई भी कर सकता है किंतु आप पॉजिटिव स्टेप्स बताइए कि भारत का उत्थान कैसे हो आगे कहते

भारत के उत्थान के लिए पब्लिक ओपिनियन गढ़ने की आवश्यकता

हैं स्वामी जी देयर इज देन अनदर ग्रेट कंसीडरेशन दूसरा एक बड़ा इंपॉर्टेंट पॉइंट है यहां पे हियर इन इंडिया वी हैव ऑलवेज बीन गवर्न्ड बाय किंग्स भारत में हमेशा हम राजाओं के द्वारा गवर्न होते आ रहे हैं राजाओं के द्वारा शासित होते आ रहे हैं किंग्स हैव मेड ऑल आवर लॉज राजाओं ने ही हमारे सभी नियम कानून को बनाया है नाउ द किंग्स आर गॉन एंड देयर इज नो वन लेफ्ट टू मेक अ मूव किंतु अभी राजा चले गए हैं और राजाओं की जगह लेने वाली एक गवर्नमेंट या तो फिर एक शासक वर्ग अभी तक प्रकट नहीं हुआ है द गवर्नमेंट डेर नॉट इट हैज नो इट हैज टू फैशन इट्स वे अकॉर्डिंग टू द ग्रोथ ऑफ पब्लिक ओपिनियन अभी देखिए कि राजा तो चले गए वह जो परशुराम की कहानी है ना कि 21 बार ना कि कितनी बार वह पृथ्वी को नक्षत्र कर दिया यानी कि जितने क्षत्रिय थे उन सबका वत कर दिया और फिर बुद्धिज्म आया बुद्धिज्म ने जितने क्षत्रिय थे पकड़ पकड़ करके भिक्खू बना दिए तो इसका परिणाम यह आया कि एक जो एक अथॉरिटी फिगर होना चाहिए क्षत्रिय हो राजा हो जिसके भीतर में आत्म श्रद्धा हो आत्म सन्मान हो देश के प्रति एक पेट टिज्म हो लोगों की रक्षा करने का लोगों का भला करने का एक करुणा एंपैथी हो वह पूरा क्लास तो खत्म हो गया परिणाम यह आया कि जब विदेशी आक्रमण होना शुरू हुए भारत की रक्षा करने वाला कोई नहीं बचा था अभी देखिए ब्रिटिश गवर्नमेंट है किंतु ब्रिटिश गवर्नमेंट का मुख्य उद्देश्य है भारत का शोषण करना और ब्रिटेन में यह भारत की धन संपत्ति चुरा करके ले जाना जो थोड़ा बहुत लिप सर्विस यह लोग पे करते थे गुड गवर्नेंस के बारे में कि हां भारत में गुड गवर्नेंस हो चाहिए भारत में यह जो सब अंधश्रद्धा हैं वह दूर करनी चाहिए भारत में यह जो नाती जाति में जो देश बटा है उसको दूर करना चाहिए किंतु देखिए कि ब्रिटिश गवर्नमेंट को एक पूरा व कहते हैं ना कि वो दूध का जला छाछ भी व फूंक करके पीता है यानी कि एक बार उसने गर्म दूध खाने का प्रयास किया उसकी जीभ जल गई उसके बाद में उसको छाज भी यदि दी जाए तो भी उसको वोह ठंडी करने का प्रयास करेगा फूंक मार-मार करके यह जो एक रिफॉर्म का प्रयास ये रिफॉर्म का प्रयास तो नहीं किंतु यह सोशल इंजीनियरिंग का प्रयास ईस्ट इंडिया कंपनी ने एक बार किया था फिर किंतु उसके रिजल्ट में यह 1857 का जो फर्स्ट रिबेलियस की वजह से उनकी अकल ठिकाने आ गई उनको ऐसा लगा कि देखिए भारत की जो सिस्टम है उसको वैसा ही रहने दीजिए इसको रिफॉर्म करने का प्रयास मत कीजिए किंतु क्योंकि भारत में ऐसा है भारत की साइकोलॉजी उन्होंने समझ ली यहां पे सब कुछ धर्म पर आधारित है जब तक आप लोगों के धर्म को हाथ नहीं लगाते हैं तब तक आप उनका कितना ही आर्थिक राजनीतिक शोषण करते रहिए लोग ज्यादा कोई आवाज नहीं उठाएंगे क्योंकि लोगों का शोषण हजार साल से होता रहा है अब यह मुगल गए ब्रिटिश आए ईस्ट इंडिया कंपनी आई क्या फर्क पड़ता है शोषण लोग शोषण के साथ में रहने को जैसे कि हैबीच एटेल हो गए किंतु एक चीज वे लोग सहन नहीं कर पाएंगे वह कि उनके धर्म पर हाथ डालना वो जो 1857 के फर्स्ट रिबेलियस का बुलेट इन लोगों को सैनिकों को दिया गया आर्मी के जो इंडियन सैनिक थे कहते हैं कि उसमें गाय का बीफ था और यह सवर का पोर्क था सवर का मांस था इसमें से यह बुलेट बना था और इस बुलेट को आपको मुंह में डाल कर के उसका कैप है उसको फ उसको निकाल करके फेंक देना होता था अभी उसका अर्थ है कि हिंदू अपने मुंह में गाय का मांस डालेगा और फिर यह मुसलमान है अपने मुंह में यह जो शुक्र का मांस डालेगा ऐसा कैसे हो सकता है बोलकर के आर्मी में सर्वप्रथम रिबेलियस स्टार्ट हुआ तो यह और फिर उसके बड़े कॉम्प्लेक्शन थे जब यह 1857 का फर्स्ट वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस अपना समाप्त हुआ यह ब्रिटिश गवर्नमेंट ने ईस्ट इंडिया कंपनी के पास में से भारतीय राज इंडियन राज को छीन लिया उन्होंने कुछ-कुछ नियम बनाए सर्वप्रथम के ब्रिटिश ऑफिसर है वह लोकल स्त्रियों के साथ में विवाह नहीं करेंगे इंडियन स्त्रियों के साथ में एक हमेशा एक सेपरेशन बना के रहना है दूसरी बात है कि इंडिया में जितने भी जन है जितनी भी यह लोकल प्रथाएं हैं उसमें किसी भी तरह का आपको छेड़खानी नहीं करना है उनको अपनी प्रथाओं के साथ में अंधश्रद्धा के साथ में रहने दीजिए डूबने दीजिए अपनी अंधश्रद्धा में हमको क्या फर्क पड़ता है जब तक हम भारत की वेल्थ भारत की समृद्धि ब्रिटेन में खींच करके चुरा करके ले जा रहे हैं हमको क्या फर्क पड़ता है कि भारत अंधश्रद्धा में डूबा है किंतु फिर भी क्या है कि कोई कोई लोग इनलाइटें थे यह ब्रिटिश ऑफिसर स्वामी जी का उनके साथ में परिचय भी हुआ था क् भारत के बारे में बड़ी हमदर्दी थी सिंपति थी तो वे लोग सोचा करते थे कि चलो यह नियम बना करके और खास कर के ये जो भारत में जो रिफॉर्म मूवमेंट स्टार्ट हुई यह विद्यासागर है ब्रह्म समाज है आर्य समाज है वगैरह वगैरह उन्होंने फिर ब्रिटिश गवर्नमेंट पर प्रेशर बनाना शुरू किया कि आप इस तरह के नियम बनाइए कि सती प्रथा को कानून बना कर के दूर कर दीजिए यह विधवा विवाह है बाल्य विवाह है वगैरह वगैरह को आप कानून बना कर के दूर कर दीजिए तो क्या है कि ब्रिटिश गवर्मेंट बड़ा ही रिल टली बड़ा ही सोच समझ करके यह सब कदम उठाती थी क्योंकि यह रिफॉर्मर लोगों की रिफॉर्म सोसाइटीज की बात सुन कर के यदि कानून बना दिया और यह हिंदू और यह तो जनरल नागरिक नाराज हो गए और रेबेल दूसरा रिबेलिनराइडर ब्रिटिश क्राउन को जाना पड़ेगा तो बोलकर के गवर्नमेंट भारत को लूटने में तो बड़ी मा थी किंतु भारत में किसी भी तरह का रिफॉर्म लाने में उनकी किसी भी तरह की इच्छा नहीं थी कि यहां पर मैन्युफैक्चरिंग बेस बनाए यहां पर स्कूल कॉलेज एडवांस डिग्री का प्रचलन करें यहां की सोशल सिस्टम को थोड़ा सा इजी करें जस्टिस सिस्टम को इंप्रूव करें यह सब करने की उनकी कोई इच्छा नहीं थी क्योंकि उन्होंने अपना लेसन सीख लिया था 1857 में तो यहां पे इसलिए स्वामी जी कहते हैं द गवर्नमेंट डे सबसे पहले तो कह दिया कि एक समय था जबकि राजा राज्य करते थे राजा के पास में एक डिवा मैंडेट था और वह जिस तरह से चाहे वो नियम कानून बना सकते थे प्रजा को इसमें कुछ बोलने का हक नहीं था तो राजा यदि अच्छा होगा तो जोर जबरदस्ती करके अच्छे नियम प्रजा के ऊपर में डालेगा तो प्रजा को इच्छा नहीं होने से भी नागरिकों को उस नियम का पालन करना पड़ेगा व्हिच इज अल्टीमेटली गुड फॉर द नेशन गुड फॉर द स्टेट किंतु आज की जो गवर्नमेंट है लोगों को लूटने में तो माहिर है किंतु किसी भी तरह की सोशल इंजीनियरिंग करने से वह डरती है क्योंकि उनको लगता है कि लोग विरोध करेंगे तो जब तक लोगों में कंसेंसस खड़ा नहीं होता है लोगों में एक एक यूनिटी नहीं खड़ी होती है किसी एक इशू के बारे में तब तक गवर्नमेंट कुछ नहीं करेगी तो यहां पे इसलिए स्वामी जी ने कहा है द गवर्नमेंट डेर नॉट आज की जो गवर्नमेंट है किसी भी तरह का अच्छा कार्य नहीं कर सकती है इट हैज टू फैशन इट्स वे अकॉर्डिंग टू द ग्रोथ ऑफ पब्लिक ओपिनियन गवर्नमेंट वही कर सकती है जिसके बारे में पब्लिक ओपिनियन हो यदि पब्लिक ओपिनियन कहता है कि यह सती प्रथा हम चालू ही रखेंगे आपको जो करना है वह कर लीजिए तो फिर गवर्नमेंट ज्यादा कुछ नहीं कर पाएगी आगे कहते हैं स्वामी जी इट टेक्स टाइम क्वाइट ए लॉन्ग टाइम टू मेक अ हेल्दी स्ट्रांग पब्लिक ओपिनियन यदि एक हेल्दी और स्ट्रांग पब्लिक ओपिनियन आपको खड़ा करना है तो उसके लिए आपको एक लंबा समय लगता है व्हिच विल सॉल्व इट्स ओन प्रॉब्लम्स इस तरह का पब्लिक ओपिनियन जो कि भारत के सम ओं का समाधान करें जैसे देखिए किसी भी तरह का पब्लिक ओपिनियन खड़ा करना है किसी भी तरह का कंसेंसस खड़ा करना है बहुत सारे लोगों को ना अपने हित का कुछ ना कुछ सैक्रिफाइस करना पड़ेगा अभी जैसे देखिए मैं एक आश्रम की बात बताता हूं हमारा आश्रम रास्ते के किनारे पर ही था अभी बात ऐसी हुई कि गव गवर्नमेंट ने ठीक किया वह लोकल म्युनिसिपालिटी ने कि यहां पर रास्ता चौड़ा करना है तो आश्रम में आकर के कहा कि आपको इतना जमीन हमको दे देना पड़ेगा यहां पे रास्ता चौड़ा हो रहा है तो अभी हुआ ऐसा कि हमने तो सोचा कि चलो आश्रम की जमीन जाती है तो लोगों का भला होता है बोलकर के हमने आश्रम की जमीन दे दी इतनी रास्ता चौड़ा करने के लिए किंतु जो बाकी सब दुकान वाले थे वे लोग तो फटाक करके जमीन देने नहीं वाले थे फिर वह कोर्ट में केस हुआ यह हुआ वो हुआ कितना ही सब कुछ हुआ फिर कहीं जाकर सेटलमेंट हुआ और फिर आखिर में रास्ता चौड़ा हुआ अभी मान लीजिए कि देखिए कि रास्ता चौड़ा होना पूरे सिटी के लिए पूरे शहर के लिए फायदे की बात है क्योंकि वहां पर बहुत ज्यादा ट्रैफिक कंजेशन हो जाता था ट्रैफिक कंजेशन की वजह से ट्रैफिक जहां पर रुका रहता है वहां पे यह व्हीकल का धुआं बढ़ेगा धुआं बढ़ने से एयर पोल्यूशन होगा एयर पोल्यूशन की वजह से वही दुकान में जो लोग बैठे होंगे उन्हीं का सेहत बिगड़ेगा तो वे लोग तो यह नहीं देखेंगे कि यहां पे ट्रैफिक कंजेशन हो रहा है धुआं होता है मेरा सेहत बिगड़ता है फिर सब समय नोइज पोल्यूशन माने बहुत कुछ प्रॉब्लम है आपका ट्रैफिक कंजेशन के एक कॉमर्स और इकोनॉमिक एक्टिविटी कम हो जाती है वगैरह वगैरह वह सिटी में इन्वेस्टमेंट नहीं होता है अच्छे इन्वेस्टर होते हैं दूसरी जगह प जहां बेटर इंफ्रास्ट्रक्चर है वहां पर चले जाएंगे किंतु ये जो लॉन्ग टर्म गोल है कि रास्ता चौड़ा हो इसके लिए मुझे आधी दुकान दे देनी पड़ेगी इतना सैक्रिफाइस कौन करेगा तो बात ऐसी है कि देखिए राजाशाही यदि होती और राजा हुकुम कर देता कि आधी दुकान दे दो तो आपके पास में बोलने को कुछ नहीं है आधी दुकान दे दी भले ही चाहे आप राजा को लाख गाली दे उनकी जो नेक्स्ट जनरेशन आएगी वे लोग राजा को कहेंगे कि हां यह रास्ता चोड़ा करके अच्छा किया किंतु जदा लोकशाही है पब्लिक ओपिनियन है तो मैं जद कहूं मेरा ओपिनियन नहीं है मैं आधी दुकान दे दूं तो मुझे अपना खुद का भविष्य समझ कर के प्रेजेंट में सैक्रिफाइस करना ये कितना इंपॉर्टेंट बात है यदि डेमोक्रेसी ठीक ठीक चलानी है तो प्रेजेंट में सैक्रिफाइस करना होगा फॉर द सेक ऑफ फ्यूचर बेनिफिट यह अकल आए यह मैच्योरिटी आए यह बुद्धि आए उसके लिए लंबा समय लगता है तो इसलिए स्वामी जी ने कहा कि एक हेल्दी पब्लिक ओपिनियन खड़ा करना है तो उसके लिए लंबा समय लगता है एंड इन द इंटरम वी शल हैव टू वेट और जब तक यह पब्लिक ओपिनियन खड़ा नहीं होता तब तक हमको राह देखनी होगी ये मैंने कहा कि वो रास्ता चौड़ा होना है प्रपोजल 5 साल पड़ी रही 5 साल से हमने तो अपनी जगह दे दी आश्रम ने चलो किंतु 5 साल लगा दूसरा और पा ना कि कितना मैं एग्जैक्ट भूल गया कितने साल कि इतना टाइम लगा कि बाकी सबको मनाने में और रास्ता को एक्चुअल चौड़ा करने में तो कहते हैं स्वामी जी कि मीन वाइल जब तक पब्लिक ओपिनियन खड़ा नहीं होता है हम लोगों को राह देखनी होगी द होल प्रॉब्लम ऑफ सोशल रिफॉर्म देयर फॉर रिजॉल्व इट सेल्फ इनटू दिस और इसीलिए यह जो पूरा प्रॉब्लम है सोशल रिफॉर्म का उसका एंड यहां पर आकर के अटकता है वयर आर दोज हु वांट रिफॉर्म कौन है जो लोगों को वे लोग कहां है जिनको यह रिफॉर्म चाहिए किनको रिफॉर्म चाहिए भारत में यदि रास्ता चौड़ा होना है तो उसका बेनिफिट किसको मिलने वाला है किसको यह एक्चुअल उसका एंड यूजर है तो वही लोग जो कि उस रास्ते पे रह रहे हैं उस रास्ते प जिनकी दुकान है उस रास्ते पे जिनका घर है रास्ता चौड़ा होगा ट्रैफिक इजली आएगा जाएगा कम पोल्यूशन होगा हेल्थ इंप्रूव होगा यानी कि यदि मैं इस देश का सिटीजन हूं नागरिक हूं तो यदि इस देश में इंप्रूव ट होती है इंफ्रास्ट्रक्चर बेटर होता है लॉ यूनिटी एंड गवर्नेंस बेटर होता है कॉमन कोड्स जब होते हैं तो बेनिफिट तो नागरिकों को ही है किंतु क्या है कि दृष्टि इतनी टोंकी होती है हम समझ नहीं पाते कि आज का सैक्रिफाइस भविष्य में डिविडेंड बड़ा डिविडेंड देने वाले हैं तो इसलिए स्वामी जी कहते हैं कि जिनको रिफॉर्म चाहिए वे लोग कहां पे हैं यानी कि नागरिक नागरिक को तो समझ में आना चाहिए कि देश में यह सब रिफॉर्म लाने से देश का भला होगा देश का हित होगा तो सबसे पहले तो नागरिकों को खड़ा करो रिजर्व वयर आर दोज हु वांट रिफॉर्म वे लोग कहां है जिनको रिफॉर्म चाहिए मेक देम फर्स्ट वयर आर द पीपल पहले तो नागरिकों को तैयार करना होगा कि आप चाहिए यू वांट रिफॉर्म्स आपके हृदय में से आना चाहिए कि नहीं भारत का यह इवेंचर डेवलपमेंट हो भारत का यह नात जात वगैरह का जो प्रथा है जिसको मैं आज इतना मैंने अकड़ करके पकड़ के रहा हूं मुझको खुद को मेरे खुद के मन में होना चाहिए कि नहीं यह सब प्रथाएं जाए यह सब अंधश्रद्धा एं जाए यह सब पुराने कॉमर्स पुराना यह जो सब काम का कार्य वगैरह है पुरानी इंडस्ट्रीज है वह सब जाए मॉडर्नाइजेशन हो मेरे देश में यह मुझे तो चाहना होगा तभी तो कहीं जाकर के मैं एक गवर्नमेंट को जाकर बोलूंगा कि हां आप लोग इस तरह का रिफॉर्म कीजिए तो स्वामी जी कहते हैं मेक देम फर्स्ट सबसे पहले तो नागरिकों को तैयार कीजिए वयर आर द पीपल लोग कहां पे है द टायरानीतर सारी जगह पर ऐसा होता है कि बहुत सारे लोग रिफॉर्म चाहते हैं किंतु फिर कुछ एक दल ऐसा होता है वे लोग कहेंगे कि नहीं हम लोग आपको रिफॉर्म नहीं लाने देंगे अभी प्रॉब्लम यही है कि राजा यदि होता तो वह कह देता कि यदि आपको एक मान लीजिए एक शहर में 1 लाख की पापुलेशन है उसमें से 70000 कहते हैं कि हां हमको यह रास्ता चौड़ा करना है जो कि सब मने पूरे शहर के जो जितने भी हैं निवासी मान लीजिए कि उस रास्ते पर 100000 लोगों 1000 लोगों की दुकान वगैरह है तो 1 लाख में से 99000 चाहते हैं कि यह रास्ता चौड़ा हो किंतु उस रास्ते पर जो 1000 लोग रह रहे हैं वे लोग कहेंगे कि हम इस रास्ते को चौड़ा नहीं होने देंगे क्योंकि मुझे यह सैक्रिफाइस करना पड़ेगा तो अभी ये तो टायरे नहीं ऑफ माइनॉरिटी हो गई तो ये 1000 लोग 99000 से संख्या में बड़े कम है किंतु बिकॉज कि पब्लिक ओपिनियन पर गवर्नमेंट को कार्य करना है वह 1000 लोगों की बातों को नजरअंदाज नहीं कर पाएंगी और यह 1000 लोग बाकी के 99000 लोगों का जो डेवलपमेंट होना था उसको अटका करके बैठे हैं इसलिए स्वामी जी कहते हैं कि टायरानीतर नहीं दैट द वर्ल्ड एवर सीज ये कुछ लोग जो चिनिता लोग होते हैं वो रिफॉर्म को रोक करके बैठ जाते हैं इट्स द वर्स्ट फॉर्म ऑफ अराजकता वस्ट फॉर्म ऑफ अत्याचार जिस जगत ने देखा है अ फ्यू मेन हु थिंक दैट सर्टेन थिंग्स आर इविल विल नॉट मेक अ नेशन मूव यदि कुछ लोग ऐसा सोचते हैं कि इस तरह से होना चाहिए यह चीज अनिष्ट है तो यह लोग यदि इस चीज को पकड़ के बैठ जाएंगे तो इसकी वजह से देश आगे नहीं बढ़ेगा व्हाई डज नॉट द नेशन मूव देश का प्रगति क्यों नहीं होता है फर्स्ट एजुकेट द नेशन सबसे पहले देश को एजुकेट करो देश को शिक्षित करो क्रिएट योर लेजिस बॉडी लेजिस्लेटिव बॉडी यानी कि पार्लियामेंट लेजिस्लेटिव असेंबली उन सबको तैयार करो एंड देन द लॉ विल बी फोर्थ कमिंग बाद में ही तो यह सब नियम कानून बनना शुरू होगा फर्स्ट क्रिएट द पावर द सैंक्शन फ्रॉम व्हिच द लॉ विल स्प्रिंग पहले तो उस पावर को क्रिएट करो जिसके जो कि इ नियम कानून को सैंक्शन करेंगे इस पावर ही इस नियम कानून को आज वह बनाएंगे देखिए कि आज मॉडर्न अभी ये जैसे कि ये जीएसटी है फॉर एग्जांपल य भारत का जो यह टैक्सेशन स्ट्रक्चर था वह इतना कॉम्प्लिकेटेड था इतना यह था कि सभी लोगों को इसमें मुश्किल होती थी वो इतने मने आपको पता ही है ज्यादा इसमें जाने की जरूरत नहीं है किंतु फिर यह कंसेंसस हुआ कि चलो एक मेजॉरिटी गवर्नमेंट को एक स्ट्रांग गवर्नमेंट फॉर्म की जाए फिर ये स्ट्रांग गवर्नमेंट स्ट्रांग नियम को लागू करेगी यह जब नियम लागू हुआ था कितने लोगों ने विरोध किया था किंतु टुडे इ एन एक्सेप्टेड मैटर कि हां यह मॉडर्न टैक्सेशन सिस्टम है इट इज इन जनरल बेटर फॉर इंडिया वो हमको एक पेन एक स्ट्रगल के पीरियड में से निकलना पड़ा कि पुरानी सिस्टम को हटा कर के एक नई कंप्यूटर सिस्टम एस्टेब्लिश करना नए रूल्स रेगुलेशन सीखना वगैरह वगैरह एक दो-तीन साल का एक स्ट्रगल का पीरियड गया पीरियड ऑफ पेन गया किंतु नाउ एवरीवन हैज एक्सेप्टेड तो इतना जो रेडिकल कोई नए नियम लागू करना है व्हिच इज इवेंचर फॉर द नेशन एट देन आपको कुछ पेन पीरियड ऑफ पेन से गुजरना पड़ेगा पीरियड ऑफ सफरिंग से गुजरना पड़ेगा सो फॉर द फ्यूचर बेनिफिट प्रेजेंट में हम सैक्रिफाइस एक्सेप्ट करते हैं वो कब होगा जब कि एक स्ट्रांग गवर्नमेंट होगी स्ट्रांग गवर्नमेंट कब होगी जब कि स्ट्रांग पब्लिक ओपिनियन होगा या तो फिर स्ट्रांग कंसेंसस होगा तो यह स्ट्रांग कंसेंसस स्ट्रांग पब्लिक ओपिनियन सबसे पहले खड़ा करें और यह स्ट्रांग कंसेंसस या स्ट्रांग पब्लिक ओपिनियन कब खड़ा होगा जबकि नागरिक एजुकेटेड होंगे और एजुकेशन यानी कि सिर्फ यह सेकुलर एजुकेशन नहीं किंतु एजुकेशन वेयर साइंस इज टोट एज वेल एस योगा एंड वेदांता तो योग वेदांत एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी यह कंबाइन होगा तो इस तरह का एजुकेशन होगा जिसके जिस एजुकेशन के माध्यम से स्ट्रांग सिटीजंस तैयार होंगे स्ट्रांग सिटीजंस विल इलेक्टेड स्ट्रांग गवर्नमेंट एंड स्ट्रांग गवर्नमेंट विल टेक स्ट्रांग डिसीजंस व्हिच आर गुड फॉर द कंट्री इन द लॉन्ग रन फर्स्ट क्रिएट द पावर द सक्शन फ्रॉम व्हिच द लॉ विल स्प्रिंग ये कितना पावरफुल स्टेटमेंट है स्वामी जी का आज की यह जो मॉडर्न गवर्निंग है गवर्नेंस मॉडर्न थिरी जितनी भी उन सबके पीछे का यह फाउंडेशन है कि पहले तो स्ट्रांग पावर को खड़ा करो फिर यही स्ट्रांग पावर इस तरह का एक सैंक्शन खड़ा करेगा जिसमें से सब ल उसमें से आएंगे द किंग्स आर गोन राजा तो चले गए वयर इज द न्यू सैंक्शन द न्यू पावर ऑफ द पीपल राजा तो चले गए किंतु ये नया सक्शन कहां पे है लोगों का नया पावर कहां पे है ब्रिंग इट अप सबसे पहले उसको लाओ देयर फोर इवन फॉर सोशल रिफॉर्म द फर्स्ट ड्यूटी इज टू एजुकेट द पीपल इसीलिए यदि सोशल रिफॉर्म लाना है देश को यदि स्ट्रांग बनाना है इस तरह के रूल्स लाने हैं आर्मी को स्ट्रांग करना है मैन्यूफैक्चरिंग स्ट्रांग करना है लोकल मैन्युफैक्चरिंग करना है चाइना को देखिए पिछले 45 सालों में उन्होंने जो मिरेकल करके दिखाया है हाउ वाज दैट पॉसिबल कि गवर्नमेंट स्ट्रांग थी अभी हम कोई चाइना को एंडोर्स नहीं करते हैं डेमोक्रेसी इज अ वेरी पावरफुल अ सिस्टम इन इट सेल्फ किंतु यदि डेमोक्रेसी का जो प्रॉब्लम है कि जद लोग एजुकेटेड नहीं होंगे तो क्या होगा जैसे देखिए किय आईआईटी जी भारत की जो अल्टीमेट एग्जामिनेशन सिस्टम है और यह चाइना की गांव काओ एग्जामिनेशन सिस्टम यह दोनों नेशनल लेवल प ली जाती है और इसी के आखिर में ये चाइना की जो गांव काव है उसमें जो जिस तरह का

The Gaokao, China's national college entrance exam, is a highly competitive, multi-day test that dramatically impacts students' future. Its intense pressure and difficulty determine placement in Chinese universities, with limited spots amplifying the stakes and societal focus on its outcome.

आपका जो रैंकिंग आएगा उसके अनुसार देश भर में आपको यूनिवर्सिटी एलोकेट करेंगे यदि आपको किसी भी कॉलेज में एडमिशन लेना है आपका मान लीजिए कि हाई स्कूल कंप्लीट हो गया अभी आपको यूनिवर्सिटी में जाना है तो सभी स्टूडेंट है जिन्होंने हाई स्कूल कंप्लीट किया है कंपलसरी है गांव काव एग्जाम देनी है फिर उसका नेशनल लिस्टिंग आएगा रिजल्ट आएगा फिर उसमें जो टॉप होंगे उनको यह जो टॉप यूनिवर्सिटीज होगी सिंघवा यूनिवर्सिटी ना वगैरह उनको यह टॉप यूनिवर्सिटी दी जाएगी फिर यह जैसे-जैसे रैंकिंग में कम आते जाएंगे उस तरह से यह प्रोविंशियल यूनिवर्सिटीज में आपको एलोकेट किया जाएगा यानी कि पूरे देश के लिए एक एग्जाम और वन नेशन वन एग्जाम और फिर उसी के एग्जाम के आधार पर आपको यह एलोकेशन होगा अपने यहां पे देखिए कितना कॉम्प्लिकेशन है लेट अस नॉट गो इन टू दैट डिस्कशन कि एग्जामिनेशन सिस्टम के साथ में क्या कॉम्प्लिकेशन है क्या प्रॉब्लम्स है बट सी दैट के यदि ये लोगों का कंसेंसस होता है स्ट्रंग स्ट्रंग गवर्नमेंट होती है तो स्ट्रांग गवर्नमेंट इस तरह के नियमों का लागू करेगी कि व्हिच इज बेनिफिशियल फॉर द देश फॉर द कंट्री फॉर अ लॉन्ग टाइम सो दैट इज व्हाई स्वामी जी सेज दैट इवन फॉर सोशल रिफॉर्म द फर्स्ट ड्यूटी इज टू एजुकेट द पीपल यदि सोशल रिफॉर्म भी लाने हैं देश को यदि स्ट्रांग भी बनाना है तो सबसे पहले लोगों को एजुकेट करना होगा एंड यू विल हैव टू वेट टिल दैट टाइम कम्स किंतु जब तक वो समय नहीं आता तब तक हमको वेट करना होगा अच्छा अभी आखिरी पैराग्राफ है इस पॉइंट का जिसको हम कल देखते हैं आज यहीं तक ओ शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णा रप मस्तु इसके बारे में पहले तो दो स्टेटमेंट

प्रश्न: कन्याकुमारी रॉक पर स्वामीजी के अनुभव के बारे में हमें कुछ बताएं

है जैसे ठाकुर के बारे में स्वामी जी ने कहा कि हीज 10000 इयर्स ऑफ तपस्या पसो निफाइंडिया श्री राम कृष्णा इज 10थ हाउस ऑफ 10000 ईयर ऑफ स्पिरिचुअल प्रोग्रेस यानी कि श्री राम कृष्णा 10000 साल की भारतीय आध्यात्मिक जर्नी है उसका पर्स निफिट है सो ट पर्स निफिट हैज ऑलरेडी टेकन प्लेस इन श्री राम कृष्ण सो दैट इज फर्स्ट पॉइंट दूसरा कि निवेदिता ने कहा है कि यह जो कन्याकुमारी इंसिडेंट के बारे में कि दिस इज द फर्स्ट टाइम अ ऋषि ऑफ द स्टेचर ऑफ स्वामी विवेकानंद हु ड अपॉन इंडिया एज अ होल पहले पुराने युग में क्या होता था कि जो ऋषि मुनि होते थे ईश्वर चिंतन करते थे आत्म चिंतन करते थे किंतु पहली बार वह जो पुराने ऋषियों का जो स्टेचर है छोटे-मोटे लोग हमारे जैसी कोई बात नहीं है किंतु स्वामी विवेकानंद के जो ऋषि मुनि के लेवल के जो एक है महापुरुष पूरे भारत पर ध्यान किया दिस इज फर्स्ट टाइम इट हैज हैपन तो यह दो स्टेटमेंट हमको हमारे गाइड है कि कन्याकुमारी में एक्चुअली क्या हुआ स्वामी जी ने खुद ने इतना कुछ नहीं कहा है स्वामी जी का जो खुद का स्टेटमेंट यहां तक ही जाता है कि वाइल सीटेड ऑन द लास्ट ट्रक ऑफ इंडिया आई हिट अपऑन ए प्लान वो जो भारत का जो आखिरी जो रोक था उसके ऊपर में बैठ के मुझे एक प्लान मेरे माइंड में आया कि हम यह जो सन्यासी है जो गांव-गांव शहर शहर घूमते हैं वो थियोलॉजी वगैरह सिखाते हैं उसकी वजह हम यह जो ग्लोब है यह मैप है वगैरह लेकर जाए लोगों को थोड़ा सा मॉडर्न एजुकेशन दे सो दिस इज द प्लान स्वामी जी अपने से तो इतना ही कहते हैं बट जैसे कि यह पहले तो ठाकुर का जो प्रेसिडेंस है और फिर यह जो निवेद निवेदिता का जो स्टेटमेंट है दिस टू अवर गाइड कि जैसे आपने कहा बिल्कुल ठीक कि स्वामी विवेकानंद हैज सीन दी एंटायस कि भगवान राम और स्वामी विवेकानंद में यह एक सिमिलरिटी है कि ये जो नॉर्थ साउथ जो एक यूनिटी उन्होंने करी प्रकट की तो ट इज के भगवान राम यह जो वैदिक संस्कृति यह जो गंगा के किनारे की वैदिक संस्कृति को लेकर के जो साउथ में आए और साउथ में भी और फिर ऐसा नहीं है कि सिर्फ नॉर्थ की संस्कृति साउथ में आई है साउथ का यह जो रामेश्वरम वगैरह का जो कल्चर वगैरह है वो लेकर के भगवान राम अयोध्या गए हैं वापस तो यह जो साउथ नॉर्थ ये इंटरमलिल्योलर स्वामी विवेकानंद के वो कन्याकुमारी रॉक में मेडिटेशन के समय यह पूरा यह संगम यह महाकुंभ वो स्वामी जी के माइंड में वह पूरा हुआ एंड फ्रॉम दैट टाइम कि हमको दो चीज हुई सबसे पहले तो उनको यह प्लान मिला कि किस तरह से भारत का उत्थान करना है सेकंड कि वह ठाकुर ने आकर के उनको कहा वह पश्चिम की ओर दिशा निर्देश करके कि तुमको वहां पर जाना होगा सो दिस आर द फैक्ट व्हिच वी ऑलरेडी नो नाउ व्हाट इज द मेटा फिजिकल सिग्निफिकेंट मुझे ऐसा लगता है कि जिस तरह से ठाकुर ने यह 10000 साल की आध्यात्मिकता मीस ठाकुर वस पर्स निफिट ऑफ 10000 इयर्स ऑफ स्पिरिचुअलिटी तो मुझे ऐसा लगता है कि स्वामी विवेकानंद इज द पर्सिन ऑफ 10000 इयर्स ऑफ इंडियन कल्चरल प्रोग्रेस इस अर्थ में कि हमारा यह जो पूरा कल्चरल आउटपुट है यह यह आर्य भट्ट है यह भास्कर है उन लोगों का जो एस्ट्रोनॉमिकली जो उनका यह जो था कंट्रीब्यूशन था यह अपना ये जो आयुर्वेद जिस तरह से है धनुर्वेद जिस तरह से है ये अपनी यह जो इंडियन साइ और जो लर्निंग सिस्टम थी वह जो पूरा एक कल्चरल कंट्रीब्यूशन था ट कंट्रीब्यूशन ज कम पर्स निफाइंडिया

प्रश्न: ठाकुर और स्वामीजी ने सबसे पहले कहा कि यह संसार भी दिव्य है। ईश्वर हमारे हृदय में है और इस संसार में भी है। ब्रह्म और शक्ति एक ही हैं। हमारे प्राचीन ऋषिगण केवल ईश्वर या आत्मा का ही चिंतन किया करते थे।

बाटी जब आखिरी बार छोड़ मने विदाई ली क्योंकि मां का स्वास्थ्य इस हद तक बिगड़ गया था कि गाव वालो को समझ में आ गया कि अभी मां इस बार वापस नहीं आने वाली है तो जयराम बाटी से जो आखिरी विदाई ले रही है सब गांव वाले आकर के इकट्ठा हो गए रोना शुरू कर दिए कहा कि मां तुमको अवश्य वापस आना है व मां भी प्रॉमिस करते कि मैं आऊंगी बट शी डज नॉट कम तो जो आखिरी विदाय लेती है ना तो वह वहां गांव की मिट्टी वो झुक कर के अपने हाथों में लेकर अपने सर पर लेती है कहती है कि जननी जन्मभूमि स्वर्गात अपि घरी यसी जननी जन्मभूमि से भी ज्यादा महत्व है वच इज वेरी इंटरेस्टिंग क्या हम लोग यह बात सिर्फ ठाकुर और स्वामी जी केने एसोसिएट करते हैं इवन इन द लाइफ ऑफ मदर व्हिच इज कंसीडर्ड टू बी सो डोमेस्टिक सो अदर वर्डली मतलब बाकी ये सब कंसीडरेशन है न मदर सेज समथिंग लाइक दिस सो दैट इज वन थिंग दूसरा है कि देखिए यह प्रॉब्लम है ना अपने ये जो मैंने सेकुलर और स्पिरिचुअल के बीच की यह जो एक रेखा दोर देना लक्ष्मण रेखा दिस इज द प्रॉब्लम स्टार्टेड विथ बुद्धिज्म वरना जैसे आपने ही कहा था श्रेष महाराज ने जो इशोपनिषद में क्या कहा कि ईशा वास्य मदम सर्वम यत किंच जगतमता तेन त्यक्तेन भुंजीथा मा गद कस्य स्नम कुवन वेह कर्माणि जिजी विषत शतम समा यानी कि यह जो ई ईश्वर से डिवी से पूरा जगत घिरा हुआ है इसका त्याग करके इसका उपभोग करो मने कार्य करो कर्मयोग करो और 100 साल जीने की अपेक्षा करो जिजी विषत शतम समाहा तो यह कर्व्य वेह कर्माणि यानी कि क्या है कि यह अपना जो उपनिषद हो गीता हो अपना वैदिक युग जब तक था तब तक यह बात क्लियर थी कि डिविज नॉट ओनली इनसाइड इट इज आल्सो आउटसाइड इसीलिए एक बड़ा स्ट्रांग सोशल इंजीनियरिंग का प्रयास किया गया था कि यह यह कास्ट है वो कास्ट है जो अपना कार्य करेगा व्हिच इज एक्चुअली गिल्ड कास्ट को जद आज मॉडर्न लैंग्वेज में कहेंगे गिल्ड कहेंगे या तो स्कूल कहेंगे कि ब्राह्मण का लड़का ब्राह्मण ब्राह्मण के लिए जो सीखना है वो सीखेगा वो क्षत्रिय का लड़का इस गुरुकुल में जाकर क्षत्रिय को जो सीखना है वह सीखेगा वर फेयर स्ट्रेटेजी वगैरह वगैरह गवर्नेंस वगैरह वगैरह सो दैट वाज नथिंग बट स्कूल्स और गिल्ट्स जो कि बात-बात में सॉलिडिफाईज इसकी मतलब जन्म इसके तरह किंतु देखिए कि दिस प्रॉब्लम डेवलप विद बुद्धिज्म जो कि स्वामी जी अभी उल्लेख करेंगे इसके बाद के ही पॉइंट में आएगा कि भारत का जो प्रॉब्लम स्टार्ट हुआ यह मत सोचिए कि विदेशी आक्रमण से स्टार्ट हुआ ये बुद्धिज्म का जो ओरिजिनल सीन था कि हम सबको यदि निर्वाण चाहिए तो हमको साधु बनना पड़ेगा यह जगत को छोड़ना पड़ेगा यह त्याग का जो एक नेगेटिव मीनिंग है त्याग करना है हृदय से भले ही चाहे आप गृहस्थ हो ना कि सन्यासी हो कि आप कुछ भी हो एक वासनाओं का तृष्णा का त्याग करना है नहीं कि आपको जगत का त्याग करना है वच इज कंपलीटली डिफरेंट आप मन में वासना एं हैं भिक्खू बनके चले गए तो देर इज नो मीनिंग और यदि मन में वासना नहीं आप गृहस्थ है तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता व व्या ग्रह की जो कहानी है वह साधु सती पत् के पास में जाता है वह सती कहती है टा ककी बकी बसो करा नहीं यानी कि ये जो वो कबूतर है चिड़िया उसको आपने भस्म कर दिया वह मेरे को श्राप देने से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला तो यह साधु ने सती के पास में सीखा फिर सती ने इसको व्या ग्र के पास में भेजा जो कि कसाई था आज की भाषा में कहे तो कसाई के पास में से यह साधु ने सीखा दिस इज अवर हिंदू इजम जो मने प्रॉब्लम कम्स दिस विद द बुद्धिज्म ट वी हैव टू अंडरस्टैंड वह जो आपने उदाहरण कहा ना वो

प्रश्न: हिंदू धर्म में दीनता पर बहुत अधिक जोर दिया गया है। लेकिन स्वामीजी आत्म-श्राद्ध सिखाते हैं। दीनता हमें कमजोर बनाती है। शरणागति और आत्म-श्रद्धा के बीच संतुलन बनाए रखना बेहतर है। ठाकुर कहते हैं कि हम किसी चीज को तभी स्वीकार करते हैं जब यूरोपीय लोग उसकी प्रशंसा करते हैं।

तो नरेंद्र को ही लक्ष्य करके ठाकुर ने कहा नरेण आकर के एक दिन गीता की प्रशंसा कर रहा है श्रीमद् भगवत गीता की तो ठाकुर कहते हैं मुझे लगता है किसी यूरोपियन पंडित ने गीता की प्रशंसा की है इसीलिए नरेंद्र लगा इसकी प्रशंसा करने में और यही स्वामी जी है जो कि आखिर में हमको आत्म श्रद्धा देते हैं सो इवोल्यूशन होता है और दूसरा जो आपने ये झुठ मुठ की दनता की बात की ठाकुर दूसरा उदाहरण देते हैं वो कि वो एक गुरु ने कहा चेले को कि मेरे लिए हुक्का सजा करके ले आओ हुक्के में तमाकू सजा करके ले आओ तो चेला क्या कहता है मैं इतना दिन हूं कि आपका हुक्का सजाने के लिए लायक नहीं हूं क्यों ऐसा कहता है उसके भीतर में तमस पड़ा है उसको मैंने मेहनत नहीं करनी है तो इस तरह से दनता का बहाना बताता है तो देखिए अभी जैसे कि पहारी बाबा के बारे में जो हमारा डिस्कशन हुआ था कुछ दिन पहले जो रेशनल जो यार्ड स्टिक होती है उसको हम कैसे मेजर करें स्वामी जी पहारी बाबा के पास जाते हैं पहारी बाबा बार-बार कहते हैं मैं तो दीन हूं मैं तो आप दासो का दास हूं मुझे क्या पता इस दास को क्या पता अभी स्वामी जी ने तो सही दीनता देखी थी ठाकुर में ठाकुर को प्रश्न करने से ऐसा कहते हैं कि मैं दन हूं मुझे क्या पता ठाकुर की जीवा पर तो सरस्वती का निवास था ठाकुर कहते हैं जब वो आध्यात्मिक भाव में होते तो बालक वत हो जाते हैं और जब उपदेश देते हैं तो आचार्य वत हो जाते हैं यह जो फेजस होते हैं लाइफ के जब उपदेश देना है तो पीछे नहीं हटना है यह जो और इसीलिए स्वामी जी धीरे-धीरे करके पहारी बाबा से दूर हो गए मने ठाकुर ने आके दर्शन दिया दैट वाज वन थिंग किंतु स्वामी जी के उस समय के लेटर देखेंगे ऑलरेडी स्वामी जी के लेटर्स में प्रकट हो रहा है यह पहारी बाबा के साथ में इंपेशेंस कि इस तरह की बातें क्यों करते हैं दूसरा है कि देखिए कि ये जो ठाकुर के रहते रहते यह मास्टर महाशय है गिरीश घोष वगैरह दोती अब अब अब जैसे कि अ कौन आकर के मैं अब एग्जैक्ट नाम भूल गया ठाकुर के पास में आकर के कोई आर्गुमेंट कर रहा था तो ठाकुर ने मास्टर महाशय को ना कि किसी को कहा अब वो भी मैं एग्जैक्ट भूल गया कि किसको कहा कि उसको कहा कि तुम उसका उत्तर दो अभी जिसको कहा वोह भी आध्यात्मिक भाव में इतना भरपूर है कि वह कुछ बोल नहीं रहा है तो ठाकुर ने कहा कि क्यों हक कथा नहीं कहोगे क्या मने जो राइट है बोलने का आर्गुमेंट करने का वोह तुम क्यों नहीं करोगे माने ठाकुर के कुछ शिष्यों में ऐसा भाव हो गया था कि अभी आर्गुमेंट नहीं करनी है मास्टर महाशय का खुद का देखिए कि ठाकुर के साथ पहले दूसरे तीसरे दर्शन में जो आर्गुमेंट की फिर कहते हैं कि तर्क का द्वार यहीं पर बंद हो गया किंतु यही ठाकुर यह मास्टर महाशय और नरेंद्र को कहते हैं अभी तुम लोग इंग्लिश में चर्चा तर्क करो मैं सुनना चाहता हूं वव दोनों नहीं बोलते हैं उस समय दोनों चुप करके रहते हैं किंतु इसी तरह की घटना बाद में भी हुई थी ठाकुर ने एक डिवटी को कहा कि उसके सामने तुम ये जो आर्गुमेंट कर रहा है उसका उत्तर दो जब वो डिवटी नहीं बोल रहा है ठाकुर नाराज होकर बोलते हैं कि जो हक का है वो कहनी चाहिए धर्म की रक्षा करनी चाहिए धर्म की रक्षा करने के लिए जो आपको सूर्य शौर्य वीर्य प्रकट करना है वो करना है वहां पर वो दनता हीनता नहीं चलेगी सो ठाकुर हिमसेल्फ वाज वेरी क्लियर ऑन दिस पॉइंट कि कहां पर आपको ईश्वर के साथ में संबंध है दनता दिखानी है जगत के साथ में धर्म की रक्षा का बात आ जाता है तो क्षात्र वीर्य दिखाना है उस समय पीछे नहीं हटना है नहीं नचिकेता की कहानी कि नचिकेता के

प्रश्न: स्वामीजी साहस या आत्म-श्रद्धा को उपनिषदों और वेदांत से जोड़ते हैं। यह कैसे संभव है?

पास में आत्म श्रद्धा थी किसका साहस है यम के पास में जाकर प्रश्न करने का नचिकेता में वह साहस था देखिए कि पिताजी की आज्ञा आज्ञा का पालन करना है वो वैदिक नियम सब पालन करने हैं किंतु फिर भी इतना साहस था कियम के पास जाकर वह प्रश्न कर पाए स्वामी जी कहते हैं कठोपनिषद इज माय बेस्ट मने मोस्ट माने वो ये इस तरह का उपनिषद है जिसको मैं सबसे ज्यादा लाइक करता हूं मोस्ट फेवरेट उपनिषद ऑफ माइन सो दैट इज व्हाट इ स्टोरी ऑफ नच कता मने आप ट्रेडिशनल उपनिषद सीखेंगे तो

प्रश्न: परंपरागत रूप से कठोपनिषद का महत्व यम के उत्तरों के बाद शुरू होता है। लेकिन स्वामीजी सबसे पहले नचिकेता की कहानी का महत्व बताते हैं।

आपको संस्कृत ग्रामर में पहले तो घुसा देंगे कहेंगे इसका यह रूट है इसका यह वर्ब है इसका यह फॉर्म है उसी को लेकर के आपको चालू कर देंगे फिर फिलोसोफी में डाल देंगे किंतु ये नच केता माने नच केता अर्जुन का काम करता है अर्जुन प्रश्न करता है कृष्ण उत्तर देते हैं तो अर्जुन का कार्य क्या है व्हाट इज अर्जुनस रोल टू पोक श्री कृष्णा वो जो सशधर पंडित आया था ठाकुर बोलते एक एकटा खोचा दव माने पोख हिम अर्थात कि एक प्रश्न करो तो कुछ उत्तर देगा तो उत्तर देगा तो शास्त्रार्थ चलेगा मजा आएगा सबको सो जस्ट टू भगवान कृष्ण को प्रश्न करेंगे तो कृष्णा सबको मने सबको बेनिफिट हो उस तरह का उत्तर देंगे उसका वही रोल है एज इफ मैंने ऐसा लगता है तो यहां पे भी नची कहता क्या है तो यम को प्रश्न करता है वो उसका रोल है बाद में जो यम कहता है दैट इज अ मेन थिंग जैसे आपने कहा स्वामी जी कंपलीटली टर्न्स इट अपऑन इट्स हेड हम लोग मैं जब ट्रेनिंग सेंटर में था ना बेलूर मठ में तो संस्कृत सिखाते थे तो संस्कृत के वो जो रूट वर्ड्स होते हैं ना तो भगवान शिव ने एक बार ऐसा डमरू बजाया उसमें से वो कुछ रूट वर्ड आए उसमें से यह पूरा संस्कृत आज का ग्रामर चालू हुआ तो अभी संस्कृत ग्रामर का क्लास बड़ा हैवी तो एक ब्रह्मचारी कह रहा है कि मास्टर महाशय जो थे वह इस तरह से एक टीचर थे तो कहता है मास्टर महाशय वह शिव ने तीन चार बार और डमरू बजा दिया होता तो हमारा तो हो जाता सब खत्म एक बार डमरू बजाया उसी में हमारा यह [हंसी] हालत आपने जो गला खोने की उससे या यहां पर दोनों अर्जुन है किंतु कृष्णा कोई नहीं है यह याद रखना है य कृष्णा सखा है कृष्णा नहीं है कहां कहा पर तो लानी पड़ती है [हंसी] ना वही तो मैं कह रहा सखा हूं कृष्णा नहीं मैं एक्चुअली वो पता है ना कि वो जिस एरिया से जाते हैं ना उस एरिया से के जो कोई रिलेटेड नाम देते हैं जैसे रंगनाथ आनंद जी साउथ इंडिया से गए तो रंगनाथ जो टेंपल है तो मैं राजकोट से गया था तो राजकोट के पास मेंही जो वह सुदामा है तो सुदामा के हिसाब से वो कृष्ण सखा नाम दिया है तो वो भी याद रखना है कृष्ण सखा अर्जुन नहीं दनता की प्रति मूर्ति सुदामा के नाम से है जैसे देखिए कि मेरा जो एक पर्सनल थिरी है कि ठाकुर रिप्रेजेंट्स ऑल द भाव स्वामी जी का जो क्षात्र वीर्य है राजा महाराज का जो ब्रह्म तेज है राजा महाराज और ये अपना हरि महाराज का स्वामी जी ने कहा ना मैं जब हरि महाराज को लेकर गए थे स्वामी जी अमेरिका तो उन्होंने कहा तुमने क्षत्रिय को देखा है मेरे में अभी इनमें आप एक ब्राह्मण को देखेंगे तो ठाकुर इन ठाकुर में सभी भाव थे डिसाइल्स ने कुछ-कुछ भाव लेकर उसको रिप्रेजेंटेटिव किया है तो यह जो नाग महाशय की दीनता थी वह भी ठाकुर में थी स्वामी जी का ये जो लार्ज हार्टेड नेस था वह भी ठाकुर में था सो ठाकुर मने ही इज अ समग्र मने सभी शिष्य को जद समझना है तो पहले तो ठाकुर को समझना है ना देखिए इसी माय प्लान ऑफ कैंपेन में

प्रश्न: एक स्तोत्र में स्वामीजी कहते हैं कि ठाकुर है "कर्म कठोर"। ठाकुर क्या कर्मयोग करते हैं?

उसका सोल्यूशन है यह जो स्वामी जी ने कहा एजुकेट एजुकेट पीपल तो यह किस तरह का एजुकेशन वो गुरुकुल वाला एजुकेशन तो आज आज के युग में गुरुकुल का मॉडल कौन सा है तो वही दक्षिणेश्वर है दक्षिणेश्वर में ठाकुर ने परफेक्ट गुरुकुल स्टार्ट किया था ही वाज द परफेक्ट गुरु यह जो चंद लड़कों का जीवन संपूर्ण रूप से परिवर्तित कर दिया वी नीड टू इंप्लीमेंट दैट मॉडल एवरी वेयर यह जो गदाधर अभ्युदय प्रकल्प बोलकर के हमने स्वामी जी का 150 एनिवर्सरी में स्टार्ट किया था अभी वो तो था ही एक न्यूट्रिशनल फूड प्रोवाइड करने का किंतु मेरा एक विजन है कि ये गदाधर अभ्युदय प्रकल्प या तो फिर ये गदाधर पाठशाला वो इस तरह या तो फिर दक्षिणेश्वर पाठशाला इस तरह से गांव-गांव शहर शहर में चालू करनी चाहिए कि वो जो ठाकुर ने एक एटमॉस्फियर खड़ा किया था आध्यात्मिकता का तपस्या का सभी को पकड़ पकड़ करके साइकोलॉजी समझ करके उसको इंडिविजुअल कस्टमाइज इंस्ट्रक्शन देकर के उसको एक प्रगति के पंथ पर आगे ले जाने का वो दक्षिणेश्वर पाठशाला या गदाधर पाठशाला शुड बी स्टार्टेड एवरी वेयर इन इंडिया वो ठाकुर का सबसे बड़ा कर्म था टू चेंज द लाइव्स