Prayer
ओम स्थापकाायच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपण अवतार वरिष्ठाय राम कृष्णाायते नमः आज एक थोड़ा सा डिफिकल्ट कांसेप्ट समझने का प्रयास करेंगे। हमारा कंप्यूटर क्लासेस जहां पे है वह एग्जैक्ट वह अपना जो बीच है यहां पे उसके ऑपोजिट है। उसकी छत पे मैं कल शाम को टहल रहा था। तो यहां पे सूर्यास्त हो रहा है और सामने वह समुंदर है। इतना खुला विशाल समुंदर। तो ऐसे टहलते टहलते कुछ सोच रहा था। तो सम ऑफ द आइडियाज जो कि गैदर हुए हैं। यह आइडियाज का ऐसा है कि अपने माइंड में होते ही है। बहुत सारा लंबा चिंतन हम करते ही हैं। किंतु एक कभी-कभी ऐसे एक रिवोलेशन की तरह होता है कि जितना भी स्कैटर्ड हुए सब जो विचार है सब एक पैटर्न में जैसे कि वह अपने को अरेंज कर देते हैं और यह पैटर्न अपने सामने एकदम क्लियर हो जाता है। हमको कभी-कभी लगता है कि यह विचार जो है और यह आईडिया जो है वि आर कंप्लीटली ऑोजिट या तो वेरी डिफरेंट कैटेगरी। किंतु जब एक ही पैटर्न में सब कुछ अरेंज हो जाता है तब लगता है कि नहीं देयर इज अ डीपर आइडिया बिहाइंड दिस ऑल सेपरेट डिस्परेज आइडियाज। यह विभिन्न विभिन्न आइडियाज के पीछे जो कि हमको लगते हैं कि अलग-अलग हैं। किंतु इन सबके पीछे एक डीपर आइडिया है जो कि इन सभी अदर आइडियाज को कनेक्ट करता है। तो ऐसा एक रिवोलेशन जैसा कल शाम को मुझे हुआ था। वहां वो समुंदर देख रहा था। फिर सामने आकाश देख रहा था। सूर्य सूर्यास्त देख रहा था। सो लेट मी ट्राई टू फॉर्मुलेट इट। बहुत बार क्या होता है कि आईडिया अपने माइंड में तो क्लियर हो जाते हैं किंतु जब भी हम उसको एक्सप्रेस करने को जाते हैं तो थोड़ा सा डिफिकल्ट लगता है। और यह जो आईडिया है इट इज द वन ऑफ द मोस्ट डिफिकल्ट आईडिया इन आवर हिंदूइज्म और सिर्फ हिंदूइज़्म ही नहीं इन द स्टडी ऑफ कॉन्शियसनेस। इस आईडिया को जैसे शंकराचार्य कहते हैं कि ज्ञान और कर्म यह दोनों कभी साथ में नहीं रह सकते। यदि आपको ज्ञान प्राप्त करना है तो कर्म से आपको ऊपर उठना होगा। तो अभी इस बात को लेकर के फिर जब स्वामी जी ने शिव ज्ञान जीव सेवा का जो हमको उपदेश दिया तो बहुत सारे लोग अभी यह कंफ्यूजन में है तो मैं खुद उनमें से एक था कि किस तरह से हम कर्म करके मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं। यहां पे स्वामी जी शंकराचार्य और स्वामी जी इन दोनों में जो फंडामेंटल डिफरेंस हमको दिखता है। शंकराचार्य कहते हैं कि मात्र सिर्फ और सिर्फ ज्ञान के माध्यम से ही मुक्ति संभव है। जबकि स्वामी जी कहते हैं कि हम कर्म योग करके भी मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं। तो यह जो कर्म और ज्ञान है यह है क्या? एक्चुअली किस तरह से इसको डिफाइन करेंगे? किस तरह से इसको हम समझने का प्रयास करेंगे? सो दैट इज समथिंग लेट मी ट्राई टू अटेमप्ट। ऐसा कुछ करने का मैं अभी समझाने का प्रयास करता हूं। देखिए बेसिकली सबसे पहले तो है हमको समझना है कि यह जितनी भी फिलॉसोफी है इसको फिलॉसोफी के रूप में नहीं लेकर के इसको एक प्रॉपर साइंस के रूप में लेना चाहिए। जैसे कि अभी यह थ्यरी ऑफ मैटर एंड एनर्जी। आप 1000 लोग बैठकर के 1000 स्पेककुलेशन करें। अभी जैसे कि अ आइंस्टाइन आइंस्टाइन जब वो क्लार्क था पेटेंट ऑफिस में उसका करियर कोई बड़ा बहुत इतना कोई ब्रिलियंट नहीं था ये तो पढ़ाई लिख म बोलना तो देरी से सीखा फिर वो ग्रेजुएट होकर के पेटेंट ऑफिस में क्लार्क था उसका तो कीर्ति तब प्रारंभ हुआ जबकि यह 1905 में स्पेशल थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी का पेपर उसने पब्लिश किया। उससे पहले कॉमन मैन ही था वो। तो वह एक ओलंपियन क्लब में जाया करता था। अभी एक ओलंपियन क्लब के जितने मेंबर थे उस समय के उन सबके पेपर्स वगैरह आप पढ़ेंगे उन उनके द्वारा पब्लिश पेपर्स या तो उनके राइटिंग्स या तो फिर उनके आइडियाज तो पता चलेगा कि आइंस्टाइन ने जिस तरह की थ्यरी यह स्पेशल थ्यरी ऑफ रिलेटिविटी और बाद में जनरल थ्यरी ऑफ़ रिलेटिविटी इन दोनों को पब्लिश किया और वह जो आइंस्टाइन को इस दो थ्यरी की वजह से वन ऑफ द ग्रेटेस्ट इंटेलेक्चुअल प्रोडक्ट ऑफ ह्यूमैनिटी पूरी मानव सभ्यता का सर्वश्रेष्ठ जो ब्रेन होते हैं सर्वश्रेष्ठ इंटेलेक्चुअल पीपल जो होते हैं उसमें से एक माना जाता है और यह जो दो थ्यरी थी स्पेशल थ्यरी और जनरल थ्यरी ऑफ रिलेटिविटी उसके बहुत सारे आइडियाज ये ओलंपियन क्लब के जो बाकी जो मेंबर्स थे वे लोग भी बोला करते थे कि हां यह आईडिया है यह आईडिया है तो फिर किसी ने मैंने किसी को पढ़ा यह स्पेकुलेट करते हैं कि यदि यह आइंस्टाइन यदि थ्यरी ऑफ रिलेटिविटी नहीं खोज निकालता तो वह जो जिस क्लब में जाता था जिस क्लब मेंबर के पास में से उसने यह सब थरियां सीखी होगी या एटलीस्ट पढ़ी होगी या सुनी होगी वो लोग में से कोई ना कोई इसको पब्लिश कर देता। किंतु देखिए कि यह सबसे बड़ा डिफरेंस कहां पर आता है आइंस्टाइन में और वह जो बाकी सब क्लब मेंबर में कि आइंस्टाइन ने जो कहा उसको मैथमेटिकल प्रूफ उसने प्रोवाइड किया। अभी बाकी लोगों का था सिर्फ फिलॉसोफिकल स्पेककुलेशन कि हां ऐसा हो सकता है। हां ऐसा हो सकता है। वगैरह-वगैरह ऐसा हो सकता है। स्पेककुलेशन सिर्फ करने से नहीं चलेगा। इस जगत में ऐसा एक भी स्पेककुलेशन नहीं है जो कि ऑलरेडी ना किया गया हो। अभी आज बहुत सारे लोग ऐसा बोलते हैं कि दूसरे ग्रह पर भी जीवन हो सकता है। किंतु बोलने से क्या लाभ है? आपको तो वो सेटेलाइट डिश वगैरह रख के आपको तो उसको सिग्नल भेज के प्रूफ करना होगा कि हां हमने वहां पे यह एलियन स्ट्रक्चर देखे हैं या तो फिर वहां से सिग्नल पकड़े हैं। जो यह प्रूव करके दिखाएगा वही तो उसी की तो अमर कीर्ति होगी ना। वही तो कहेगा कि हां मैंने प्रूव किया है। बाकी स्पेककुलेशन करने वाले हजार हैं। सो दिस इज वन थिंग दैट साइंस टीचेस अस फंडामेंटली दैट देयर इज़ अ स्पेककुलेशन एंड देयर इज़ अ साइंस। देयर इज़ अ फिलॉसोफी एंड देयर इज़ अ कंक्रीट एविडेंस बेस्ड सिस्टम। तो यहां पर भी अभी देखिए कि हिंदू धर्म में या वेदांत में या तो जिसको कहते हैं कॉन्शियसनेस स्टडीज उसको इस तरह के साइंटिफिक फ्रेमवर्क पे रखना थोड़ा सा मुश्किल है। क्यों? क्योंकि यह सब करने के लिए आपको डायरेक्ट रियलाइजेशन चाहिए। जिस तरह से साइंस में आप लेबोरेटरी में या तो मैथमेटिक्स के द्वारा प्रूफ दे सकते हैं। यहां पे जो प्रूफ है दैट इज डायरेक्ट रियलाइजेशन। तो जब तक मनुष्य डायरेक्ट रियलाइजेशन तक नहीं पहुंचता वो ठीक-ठीक नहीं कह पाएगा कि क्या सही क्या गलत क्या स्पेककुलेशन है क्या साइंस है तो मैं मैं तो उस लेवल पर पहुंचा नहीं हूं किंतु फिर भी मैंने हमेशा से यह प्रयास किया है कि हाउ टू पुट द स्टडीज ऑफ कॉन्शियसनेस ऑन सम सॉर्ट ऑफ साइंटिफिक बेसिस सम सॉर्ट ऑफ मॉड्यूलर और सिस्टमेटिक सिस्टम एप्रोच या तो फिर एक इस तरह का ऑर्गेनाइज्ड पैटर्न बनाए जिसके भीतर में हमको लगे कि हां यह जो कहा जाता है व्हाटएवर द आइडियाज आर देयर धर्म के जगत में स्पिरिचुअलिटी के जगत में वेदांत में योग में या तो फिर जितनी भी यह अदर फिलॉसोफीस है बुद्धिज्म वगैरह वहां के जितने भी आइडियाज हैं उन सभी आइडियाज को आप सिस्टम में डालो तो आपको इसको एक प्रॉपर साइंटिफिक एक्सप्लेनेशन मिलेगा। सो टू क्रिएट दिस सॉर्ट ऑफ साइंटिफिक सिस्टम आउट ऑफ कॉन्शियसनेस स्टडीज इज डिफिकल्ट बट मैं मैं थोड़ा सा इस तरह का प्रयास करता हूं। देखिए कि अपना जो कॉन्शियसनेस है या
slide 1 work
तो फिर अपना ब्रेन है उसमें सबसे फंडामेंटल आपको क्या दिखता है? उसका सबसे फंडामेंटल एस्पेक्ट क्या है? तो वह है
slide 2 physical work
कर्म। अभी देखिए कि कर्म आप किस तरह से कर्म को डिफाइन करेंगे? एक तो कर्म है कि मैं यहां पर बातें कर रहा हूं। यह मैं क्लास ले रहा हूं। यह एक कर्म है। इसके बाद में मैं ऑफिस में जाऊंगा। तो मैं मैं यहां से चलकर के जो जाऊंगा वह भी कर्म है। वहां पर कुर्सी पर बैठूंगा वह भी कर्म है। फाइल वगैरह खोल के जो लिखना है वह भी कर्म है। फिर यह समर कैंप हमारा आ रहा है तो उसको ऑर्गेनाइज करना है वह भी कर्म है। समर कैंप स्टार्ट हुआ है तो वहां पर मुझे कुछ बोलना पड़ेगा। तो वह भी एक कर्म है। यह बाह्य जगत में हम जो कुछ भी करते हैं, सब कुछ कर्म है। किंतु साथ-साथ में और भी
slide 3 mental work
एक कर्म है कि हम अपने माइंड में क्या करते हैं। आप थोड़ा सा आंख बंद करके देखिए कि भीतर में क्या होता है। देखेंगे कि हमारा ब्रेन सतत विचारों से भरा रहता है। कंटिन्यूअस वन थॉट आफ्टर अनदर थॉट वन इमोशन आफ्टर अनदर इमोशन वन सेंटीमेंट आफ्टर अनदर सेंटीमेंट वो चलता ही रहेगा। मैं आंख बंद करके जप करने के लिए या तो ध्यान करने के लिए थोड़ी देर बैठूंगा। वह 5 मिनट में ही मुझे पता चल जाएगा कि मेरे मन के भीतर में कितना सब कुछ भरा हुआ है। जैसे ही मैंने आंख बंद की साथ-साथ में ही देखा कि कहां वह बचपन के वह जो कुछ घटनाएं हैं वह याद आ रही है या तो फिर रिसेंटली कुछ हुआ है। वह सब याद आ रहा है। कोई ना कोई विचार चल रहा है। दिस एक कंटिन्यूस एक अह स्ट्रीम ऑफ थॉट जो कि अपने माइंड में चलता है उसको भी कर्म कहते हैं। अभी देखिए
slide 4 we can direct thought stream 1. creative activity
कि यह जो कंटीन्यूअस स्ट्रीम ऑफ थॉट है अपने माइंड में उसको आप डायरेक्ट कर सकते हैं। आप डायरेक्ट दो तरह से कर सकते हैं। एक तो है कि किसी क्रिएटिव एक्टिविटी में किसी पॉजिटिव एक्टिविटी में उसको लगाइए। जिस तरह यानी कि अब जैसे कि मैं कोई साइंटिफिक थ्यरी प्रूव करने का प्रयास कर रहा हूं या तो फिर मैं एक पेंटिंग कर रहा हूं तो उसके बारे में मुझे सोचना होगा। मैं किस तरह से पेंटिंग करूंगा। मेरा एक बिजनेस है तो बिजनेस में मुझे किस तरह से उसको प्रॉफिटेबल बनाना है या तो फिर यदि मैं स्पोर्ट्समैन हूं क्रिकेटर हूं तो किस तरह से मुझे अपनी स्ट्रेटजी को मैनेज करना है कि मैं यदि पॉलिटिशियन हूं तो किस तरह से मुझे अपना कैंपेन चलाना है। किस तरह से अपने विरोधियों पे जीत हासिल करनी है। यदि मैं डिप्लोमेट हूं तो जो अपने एडवर्सरी है जो दूसरे देश उसके डिप्लोमेट्स के साथ में किस तरह से मुझे अपना एक प्रभुत्व बनाए रखना है। सोल्जर हूं तो एनिमी को किस तरह से डिफिट करना है। टीचर हूं तो किस तरह से स्टूडेंट को बेटर सिखाना है। स्टूडेंट हूं तो किस तरह से कोई भी सब्जेक्ट बेटर अंडरस्टैंड करना है। यह जो जितने भी कर्म है वि आर डायरेक्टेड कर्म। नॉट नेसेसरी कि
slide 5 destructive directed karma
अभी ऐसा भी हो सकता है मैं यदि चोर हूं तो मुझे चोरी कैसे करनी है उसके बारे में भी मैं यदि अच्छे से सोचूं यदि क्रिमिनल हूं तो किस तरह से मैं बेटर क्रिमिनल हो पाऊं उसके बारे में मैं सोचूं तो एवरीथिंग दैट
1. directed stream of thought = i must focus my mind , mental karma, focus thought stream, in order to do better physical karma
आई ट्राई टू जितना भी कार्य है बाहर के जगत में उसको करने के लिए बेटर करने के लिए मुझे उसके बारे में सोचना ही होगा जो मनुष्य जितना जितना ज्यादा सोचता है उसका उतना हीेंस इस जगत में बढ़ता है। आप देखिए कि एक लेबरर है जो कि अभी जैसे कि यहां पर हमारा सीपी क्लीनिक है उसके बगल में एक नया होटल बन रहा है। तो उसका जो होटल का जो मालिक है उसकी और भी एक होटल है। यह नई होटल बन रही है। तो वह कभी-कभी आश्रम में आता है। तो मैंने देखा कि वह बहुत ही इंटेलिजेंट पर्सन है। होटल चलाने के लिए नया कंस्ट्रक्शन करने के लिए जो कुछ करना चाहिए वह सब कुछ उसको समझ में आता है। प्रॉफिटेबल कैसे बनाना है तो वो करता क्या होगा? दिन भर अपनी ऑफिस में बैठकर के सोचता होगा। सोच के प्लान बनाता होगा। प्लान को फिर इंप्लीमेंट करता होगा। पूरा मेंटल वर्क है उसका। जबकि मैं जब सीपी क्लीनिक जाता हूं देखता हूं लेबरर लोग जितने भी हैं वो धूप धूप हो ना कि बारिश हो ना कि जो कुछ भी हो उसमें वह खड़े रह के वह काम करते हैं। तो अभी आपको लगेगा कि कर्म जो फिजिकली ज्यादा करता है उसका तोेंस ज्यादा होगा ना। किंतु ऐसा नहीं है। हम सबको पता है इस जगत में कि आप जितना इंटेलेक्चुअल वर्क ज्यादा करेंगे उतना ही आपका वैल्यू ज्यादा है। उतना ही उस वर्क का वैल्यू ज्यादा है। और जितना फिजिकल लेवल पर हम चलते आएंगे माइंड को बंद कर दिया। सिर्फ फिजिकल एक्टिविटी करते रहे तो उसका वैल्यू जो है वह इतना कम हो जाता है। अभी जैसे कि देखिए यह आप आप कहेंगे कि अच्छा चलिए यह मैनेजमेंट है, कॉर्पोरेट सेक्टर है, साइंस है वगैरह जगह पे तो ठीक है कि आप मेंटल वर्क है। उसकाेंस ज्यादा होता है। किंतु जैसे कि यह सोल्जर है या तो स्पोर्ट्समैन है जिसका कि पूरा प्रोफाइल ही है फिजिकल फिजिकल फिटनेस के ऊपर में ही उनको हायर किया जाता है। फिजिकल परफॉर्मेंस ही फिजिकल फिटनेस ही उनका परफॉर्मेंस है। तो वहां पे ब्रेन की क्या जरूरत है? तो वहां पे भी देखिए कि यह जो अभी मैं रिसेंटली यह जो इंडिया और पाकिस्तान का जो मैच हुआ था उसमें जो पाकिस्तान हार गया तो उसका एक एनालिसिस पढ़ रहा था तो वे लोग कहते हैं कि इंडिया के पास में जो फिटनेस कोच है वो बड़े बेटर कोच है और बड़े अच्छे से इनको फिटनेस ट्रेनिंग देते हैं। बड़े अच्छे से प्रैक्टिस करवाते हैं इंडिया की टीम को और बड़ी अच्छे से स्ट्रेटजी बनाते हैं। जबकि पाकिस्तान में कोच अच्छे नहीं है। फिटनेस उनका मैनेजमेंट ठीक नहीं है। खाने-पीने डाइट पे उनका कोई कंट्रोल नहीं है। स्ट्रेटजी ठीक से नहीं बनाते। इसलिए हमारी टीम हार गई। तो देखिए कि स्पॉट जिसमें जहां की फिजिकल फिटनेस इतनी इंपॉर्टेंट है, वहां पे भी आपको एक साइंस चाहिए। आपको वहां पे भी एक स्ट्रेटजी चाहिए कि हाउ हाउ टू विन ओवर योर अपोजिट टीम अपोनेंट्स। हाउ टू विन ओवर योर अपोनेंट्स। आर्मी में भी देखिए कि यदि आप सिर्फ एक हथियार लेकर के लड़ने को जाएंगे तो उससे तो बात बनेगी नहीं। पूरा स्ट्रेटजी चाहिए, लॉजिस्टिक्स चाहिए, पॉलिटिकल फॉल आउट क्या होगा वो समझना पड़ेगा। उसके भीतर में पूरा साइंस है। पूरा मिलिट्री साइंस इसके पीछे में है। तो कोई भी काम आप देखिए वो जितना फिजिकल उसका पार्ट बढ़ता जाएगा तो उस उतना ही उसका वैल्यू कम होता जाएगा। जितना उसके पीछे में इंटेलेक्चुअल पार्ट बढ़ता है उतना ही उसका वैल्यू बढ़ता जाएगा। आखिर में एक समय ऐसा आएगा ऊपर जाते-जाते कि पूरा वर्क जैसे कि मेंटल वर्क है जो हाईएस्ट लेवल के जो इकोनॉमिक एनालिस्ट होते हैं एमबीए यानी कि मैनेजमेंट के जो मास्टर्स होते हैं या तो फिर जो साइंटिस्ट होते हैं या तो फिर यह जो कंसलटेंट होते हैं या तो फिर यह जितने भी सर्विस प्रोवाइडर्स हैं सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं डॉक्टर्स है ना कि यह आर्किटेक्ट्स है ना कि यह इंजीनियर है जितनी भी हाईएस्ट लेवल की ब्रांच देखिए जो कि मनुष्य विश्व मनुष्य जगत में जिसका सबसे ज्यादा वैल्यू है पॉलिटिशियन है उनका मोस्ट ऑफ देयर वर्क इज मेंटल वर्क 90% उनका कार्य मेंटल वर्क ही होगा तो यह जो मेंटल वर्क है वह यदि आप एक फोकस करके एक पॉइंट के ऊपर में मैं यदि सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूं और मुझे कॉन्ट्रैक्ट मिला है एक नई नई ऐप डेवलप करने का। तो मैं सुबह से लेकर के रात तक उसके बारे में सोचता रहूंगा और कंटीन्यूअसली कोडिंग करता रहूंगा। कोड को मैं कंपाइल करूंगा, रन करूंगा, डीबक करूंगा, इंप्रूव करूंगा, फीडबैक लूंगा, फिर से इंप्रूव करूंगा, उसका नया वर्जन डेवलप करूंगा वगैरह-वगैरह। इट इज़ अ कंटिन्यूस मेंटल वर्क। तो, जब अपने माइंड को यह जो स्ट्रीम ऑफ थॉट है, अपने जीवन का सबसे बड़ा एक्सपीरियंस क्या है? दिस ड्रीम ऑफ थॉट मैं हूं मैं हाउ विल आई नो दैट आई आई एम अलाइव आई थिंक देयर फॉर आई एम कोजिटो एगोसम ये जो वो फॉरेन फिलॉसोफर है वो कहता है तो मैं सोचता हूं तो मैं हूं। यदि मैं सोचना ही बंद कर दूंगा तो फिर मेरा अस्तित्व कहां पे रहेगा? सो दिस स्ट्रीम ऑफ थॉट इज द मोस्ट बेसिक एक्सपीरियंस ऑफ ह्यूमन लाइफ। आप उसको डायरेक्ट कर सकते हैं। यदि आप फोकस करेंगे लेजर की तरह तो उसमें से कुछ प्रोडक्टिव एक्टिविटी होगी। उसमें से कुछ प्रोडक्टिव कोई आउटकम होगा। एंड इट विल बी वैल्यूएबल फॉर मायसेल्फ। सोसाइटी के लिए हो ना हो बट इट विल बी वैल्यूुएबल फॉर मायसेल्फ। तो यह जो डायरेक्टेड स्ट्रीम ऑफ थॉट है। दूसरा है कि अनडायरेक्टेड
2. Scattered stream of thought
स्कैटर्ड स्ट्रीम ऑफ थॉट। यह स्कैटर्ड किस तरह से है? मतलब बिखरा हुआ। यह तो हो गया एक इंजीनियर का स्ट्रीम ऑफ थॉट, एक साइंटिस्ट का स्ट्रीम ऑफ थॉट या तो फिर यह एक कॉर्पोरेट सीईओ का स्ट्रीम ऑफ थॉट इज़ अ डायरेक्टेड टुवर्ड्स वन पार्टिकुलर गोल। किंतु यही इंजीनियर, यही डायरेक्टर, यही डॉक्टर, यही सॉफ्टवेयर कंसलटेंट यह थोड़ी समय के बाद में यह अपने स्ट्रीम ऑफ थॉट को डायरेक्ट करने के बाद में एग्जॉस्ट हो जाएंगे। फिर उनको कुछ रिलैक्स होने का यह सब करने का आवश्यकता होगा। तो उस समय यदि प्रॉब्लम क्या है पता है आप अपने साथ अपने माइंड को नहीं समझेंगे तो बहुत सारा प्रॉब्लम हो सकता है कि देखिए कि जब मैं अपने स्ट्रीम ऑफ थॉट को फोकस करना बंद कर दूंगा तो होगा क्या? यह चारों ओर स्कैटर हो जाएगी। चारों ओर बिखर जाएगी। अभी बिखरने से क्या होता है? वही इस बात का अनुभव हम सबको है कि आंख बंद करके थोड़ा सा आप बैठिए। आप मेडिटेशन नहीं भी कर रहे हैं। जस्ट गेट एक्वेंटेड विद योर ओन ब्रेन। अपने खुद के ब्रेन के भीतर में क्या चल रहा है? थोड़ा सा इंट्रोस्पेक्शन करने का प्रयास करेंगे। थोड़ा सा ही सेल्फ एनालिसिस करने का प्रयास करेंगे तो इतना सब कचरा बाहर में आने लगेगा। यह स्ट्रीम ऑफ थॉट यदि डायरेक्ट नहीं होता है वो फोकस नहीं होता है तो पूरा स्कैटर हो जाता है। पूरा बेर बिखेर हो जाता है और इतना केओस खड़ा करेगा, इतना केओस खड़ा करेगा कि हमको अपने को भूल जाना पड़ता है क्योंकि आई कैन नॉट टेक दैट मच डिस्टरबेंस इन माय माइंड। तो फिर मैं क्या करूंगा? पता है आई विल गेट एडिक्टेड टू समथिंग। कि जो इस तरह का एक एडिक्शन में मैं डूब जाऊंगा जिससे कि मेरे माइंड में जो हो रहा है उससे मैं दूर चला जाऊं। आई वांट टू फॉरगेट मायसेल्फ। आई वांट टू एक तरह से मुझे बेहोश हो जाना है। जिससे कि यह मेरे ब्रेन में जो चल रहा है उससे मैं दूर चला जाऊं। तो देखिए कि आप यदि आप दो स्टेट में रहते हैं। मैं यदि ब्रेन साइंस नहीं समझते, साइंस ऑफ कॉन्शियसनेस नहीं समझते हैं, तो बेसिकली हम दो स्टेट में रहते हैं। क्या है? एक तो है कि डायरेक्टेड थॉट, दूसरा है कि स्कैटर्ड थॉट। डायरेक्टेड थॉट अर्थात कि कोई भी एक कार्य को अंजाम देने के लिए कोई भी एक एक्टिविटी को बेटर करने के लिए हम उसके बारे में सोचते हैं। उसके बारे में प्लानिंग करते हैं। उसके बारे में स्ट्रेटजी बनाते हैं। उसके बारे में उसका क्या फॉल आउट हो सकता है? उसके बारे में सोच के भविष्य के क्या-क्या स्टेप लेने हैं, वह सब जो सोचते हैं। इट इज कॉल्ड डायरेक्टेड स्ट्रीम ऑफ थॉट। और जब डायरेक्टेड स्ट्रीम ऑफ थॉट से अपना मन एग्जॉस्ट हो जाए, फिर हमको चाहिए कि चलो रिलैक्स होते हैं। किंतु जैसे ही यह डायरेक्टेड स्ट्रीम ऑफ थॉट बंद किया, वैसे ही यह स्ट्रीम ऑफ थॉट जो है, अपने विचार है, इतना बेर बिखेर हो जाएंगे। इतना भयानक केओस खड़ा करेंगे अपने माइंड में कि अभी
slide 6 distraction = bad (addiction), good (socialization, religion)
देखिए कि अभी मैं कुर्सी पर बैठा हुआ कुछ सोच रहा हूं। मैं डॉक्टर हूं। एक मेरा पेशेंट सामने बैठा है और एकदम मैं उस पेशेंट का जो भी डायग्नोस्टिकल डाटा है उसके बारे में सोच रहा हूं। पेशेंट बैठा है उसके साथ में बात कर रहा हूं। अपने कंप्यूटर पर पेशेंट का जो मेडिकल हिस्ट्री है उसको सर्च कर रहा हूं। उसके जो सिम्टम है वह सिम्टम्स और कहां किसी मेडिकल जर्नल में लिखे हुए हैं कि नहीं और उस मेडिकल जर्नल में उस सिम्टम्स के बारे में किस तरह का डायग्नोसिस प्रपोज किया गया है। किस तरह का ट्रीटमेंट प्रपोज किया गया है वो सब मैं देख रहा हूं। पूरा आधा एक एक घंटा 2 घंटा 3 घंटा 4 घंटा जितना मेरा कैपेसिटी है इतना मैंने किया। उसके बाद में जैसे ही पेशेंट चले गए क्लीनिक बंद हो गया। मैं अपनी कुर्सी पर जैसे ही बैठा तो यह जो स्कैटर्ड थॉट माने यह डायरेक्टेड थॉट अभी यह स्कैटर हो गए इतना भयानक केओस खड़ा करेंगे कि मैं अपने साथ में रह नहीं पाऊंगा इमीडिएटली आई नीड सम डिस्ट्रैक्शन। तो डिस्ट्रैक्शन क्या है? तो वो डिस्ट्रैक्शन है कि यह मोबाइल फोन है या तो फिर यह जनरल एडिक्शन है, स्मोकिंग है, ड्रिंकिंग है या तो कुछ भी है। सोशलाइजेशन। सोशलाइजेशन इज़ अ गुड डिस्ट्रैक्शन। कुछ-कुछ डिस्ट्रैक्शन होते हैं व्हिच आर बैड डिस्ट्रैक्शंस। जैसे कि स्मोकिंग, ड्रिंकिंग या तो ड्रग्स है या तो मोबाइल फोन है। सम डिस्ट्रैक्शंस आर गुड डिस्ट्रैक्शंस। कि हम अपने मित्रों के साथ में बात करते हैं तो अपने मन को भूल जाने का प्रयास करते हैं। जैसे कि मूवीज देखने को जाते हैं। किस जैसे कि वीकेंड्स में पिकनिक पे जाते हैं या तो फिर व्हाटएवर द एक्टिविटी दैट वी डू व्हाटएवर सिलिकॉन वैली में कांसेप्ट है कि वर्क हार्ड पार्टी हार्डर यह मुझे इसको आप जनरल एक सेंस से देख सकते हैं कि अच्छा चलो वे लोग तो बड़े यंग और एनर्जेटिक और एंथूजियास्टिक है। तो वे लोग हार्ड वर्क भी करेंगे और फिर जितना हार्ड वर्क किया उससे भी ज्यादा हार्ड पार्टी भी करेंगे। तो इट्स अ गुड वे ऑफ थिंकिंग। किंतु यदि आप साइकोलॉजिकली देखने का प्रयास करें जो हार्ड वर्क करते-करते उनका ब्रेन जो एग्जॉस्टेड हो गया है यानी कि स्ट्रीम ऑफ थॉट को 100% फोकस करते-करते जो माइंड एकदम एग्जॉस्ट हो गया है उसको यदि स्ट्रीम ऑफ थॉट को जिस क्षण बंद करेंगे वीकेंड में वो इतना केओस खड़ा करेगा उनके ब्रेन के भीतर में कि दे कैन नॉट लीव विद देमसेल्व्स। तो फिर उनको उससे जितना हार्ड वर्क किया है उससे भी ज्यादा हार्ड पार्टी करना पड़ेगा जिससे कि वह भूल जाए कि भीतर में यह केओस चल रहा है। सो दिस इज अनदर वे ऑफ लुकिंग एट इट। इसीलिए जो भी प्रोफेशनल होते हैं जो कि बड़े ही इंटेलेक्चुअल वर्क करते हैं उन लोगों को ना अपना जो रिलैक्स होने के लिए या तो फिर यह जो अपने मन को भूल जाने के लिए भीतर में जो भूल चल रहा है उसको भूल जाने के लिए उसकी तो उसकी ऑोजिट कुछ एक्टिविटी करनी पड़ेगी। पार्टी करनी पड़ेगी। मूवीज देखना पड़ेगा। मित्रों के साथ में गप लगाने पड़ेंगे। नाउ जितनी भी एक्टिविटीज है अपने मन को भूल जाने के लिए सब तो गलत नहीं है। फैमिली टाइम, अ क्वालिटी फैमिली टाइम, अ क्वालिटी टाइम विद फ्रेंड्स। दीज़ आर गुड थिंग। सोशल फंक्शनंस होते हैं। रिलीजन हेल्प्स अस कि मंदिर में जाएंगे, पूजा में पार्टिसिपेट करेंगे, प्रार्थना सुनेंगे या क्लासेस वगैरह अटेंड करेंगे। यह सब कुछ क्या है कि
slide 7 scattered thoughts - stress - lifestyle dieseses
हम अपने मन के ऊपर में से फोकस हटा करके बाहर की एक ऐसी एक्टिविटी पर फोकस करना चाहते हैं जो कि हमारे मन को शांति प्रदान करें। यदि मैं यह एक्स्ट्रा एक्टिविटी नहीं करूंगा, मेरे जीवन में यदि दो ही फेज रहेंगे कि एक तो है कर्म यानी कि फोकस्ड थॉट। मेरा जो कार्य करना है, उसके लिए जो मुझे सतत सोचते रहना है, उसके लिए मुझे फोकस्ड थॉट चाहिए। दैट इज वन स्टेट ऑफ माय ब्रेन। और दूसरा स्टेट ऑफ ब्रेन है कि स्कैटर्ड थॉट। जैसे ही मेरा काम खत्म हो गया या तो मैं एग्जॉस्ट हो गया। साथ में ही मेरे थॉट चारों ओर बेर बिखेर हो जाएंगे और मुझे बड़ा ही भीतर में से स्ट्रेस खड़ा करेंगे। इसका रिजल्ट क्या है? स्कैटर्ड थॉट या तो अपने जो विचार है बिखर जाते हैं। तो उसका रिजल्ट क्या होता है? स्ट्रेस। और स्ट्रेस में से क्या प्रकट होता है? लाइफस्टाइल डिसीज। ये तो शुगर का बढ़ जाना, ब्लड प्रेशर का बढ़ जाना या तो फिर यह कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाना। यह सब स्ट्रेस की वजह से होता है और इस लाइफस्टाइल डिसीज में से ही फिर आखिर में अपना हेल्थ एकदम डेंजरस अपना हेल्थ बिगड़ना शुरू होता है। तो यह स्कैटर्ड थॉट्स आर वेरी डेंजरस। किसी को भी इस तरह का स्ट्रेस नहीं चाहिए। किसी को भी इस तरह का यह लाइफस्टाइल डिसीज नहीं चाहिए। तो फिर हम सभी लोग इस तरह की कोई एक्टिविटी में जाएंगे जो कि डायरेक्ट थॉट जो स्ट्रीम ऑफ थॉट को फोकस करने में आवश्यकता नहीं रहती क्योंकि जो फोकस करेंगे तो वह कर्म बढ़ जाएगा तो फिर हम एग्जॉस्ट होना शुरू हो जाएंगे। तो फिर हम इस तरह की कोई एक्टिविटी करेंगे जो कि हमको रिलैक्स करती है। यह रिलैक्सिंग
two relaxing activities = positive , negative
एक्टिविटी या तो फिर मन को भूल जाने की एक्टिविटी को दो पार्ट में डिवाइड करेंगे। एक तो है कि आपका आपके लिए बुरी है। माने अल्टीमेटली आपकी सेहत के लिए भी और आपकी मेंटल हेल्थ के लिए भी बुरी है। जिसको कि हम जनरली एडिक्शन कहते हैं। और दूसरी एक्टिविटी है वि इज जनरली गुड फॉर आवर मेंटल एंड फिजिकल हेल्थ। इसमें यह सोशल फंक्शनंस होते हैं। क्वालिटी फैमिली टाइम होता है या तो फिर यह मंदिर में जाना होता है जिसको कि हम जनरली रिलीजन कहते हैं। रिलीजियस एक्टिविटी हम इसलिए करते हैं कि यह भीतर में जो चल रहा है उसको हम भूल जाएं। इट इज इन अ वे इट इज़ डिफरेंट टाइप ऑफ एडिक्शन बट इट इज़ अ पॉजिटिव एडिक्शन। तो देखिए कि इस तरह से हम अपने जो भीतर
3 phases of brain = focused thoughts, scattered thoughts -- 1. positive distraction, 2. negative destraction
में जो चल रहा है अपनी ब्रेन की एक्टिविटीज को तीन फेजेस में तीन एस्पेक्ट में बांटेंगे। एक तो हो गया कि फोकस थॉट। फोकस थॉट आप कुछ ही एक पीरियड के लिए ही कर सकते हैं। अपनी जितनी कैपेसिटी है उसके बाद में हम लोग एग्जॉस्ट हो जाएंगे। सो फोकस थॉट 1 घंटा, 2 घंटा, 4 घंटा, 6 घंटा डिपेंड्स कि कितना सॉलिड हम फोकस करते हैं। कितना अपना कैपेसिटी है। इसके बाद में यह फोकस थॉट को फोकस स्ट्रीम ऑफ थॉट को आपको ब्रेक करना ही पड़ेगा। इसके बाद में अपना थॉट्स, अपना माइंड स्कैटर हो जाएगा। जब स्कैटर होगा, तो वह धीरे-धीरे करके स्ट्रेस प्रकट करेगा। स्ट्रेस डेवलप करेगा। और यह स्ट्रेस की वजह से लाइफस्टाइल डिजीज आते हैं। हम सभी लोग समझते हैं इस बात को। भले ही चाहे साइंस ना समझते हो किंतु उसका जो कष्ट है वह तो फील करते ही है। तो इमीडिएटली इंस्टिंक्टिवली हम लोग किसी रिलैक्सिंग एक्टिविटी में जाना चाहते हैं। रिलैक्सिंग एक्टिविटी हमारी या तो फिर इसको मैं कहूंगा कि अपने मन को भूल जाने के लिए जो एक्टिविटी है वह दो तरह की होगी। एक तो है कि वि इज डेट्रिमेंटल टू आवर हेल्थ। हमारी हेल्थ के लिए अच्छी नहीं है। वह है एडिक्शन। जिस भी तरह का एडिक्शन हो और दूसरा है कि पॉजिटिव एक्टिविटी जिसको कि हम या तो सोशल कहेंगे क्वालिटी टाइम या तो फिर धर्म है, रिलीजन है या तो फिर बहुत सारी हॉबीज़ होती है। देखिए किसी को स्टेम कलेक्शन की हॉबी होती है। किसी को यह कारपेंट्री की हॉबी होती है। बहुत सारे ये जो साइंटिस्ट वगैरह होते हैं आइंस्टाइन स्वयं ही वाज़ अ गुड पेंटर। तो सोचते-सचते उस फोकस थॉट एकदम वो एग्जॉस्ट हो जाएगा तो वह पेंटिंग करेगा। यह पेंटिंग उसके मन को क्या है कि वो स्कैटर होने से बचाएगा। उसको रिलैक्स करेगा। बहुत सारे जो इंटेलेक्चुअल लोग होते हैं उनकी अपने को रिलैक्स करने के लिए कुछ ना कुछ हॉबी उस उन्होंने खोज निकाली है। क्योंकि यह लोग समझते हैं कि एडिक्शन में जाएंगे तो पूरे खत्म हो जाएगा अपना माइंड और अपना बॉडी दोनों। तो बेटर है कि कोई हॉबी डेवलप करें। तो यह जो बहुत सारी हॉबीज़ है पेंटिंग है वगैरह-वगैरह म्यूजिक है कोई लोग म्यूजिक सुनते हैं कोई लोग म्यूजिक प्रैक्टिस करते हैं। तो सभी का ऐसा कुछ ना कुछ हॉबी है जो कि रिलैक्स होने के लिए यह लोग करते हैं। आजकल फिर यह आप वीडियो देखिए YouTube के ऊपर में ना कि बहुत कुछ चलता रहता है। सो दीज़ आर द थ्री स्टेट्स ऑफ आवर ब्रेन। किंतु यदि आप अपना जो भारत का धार्मिक इतिहास है, भारत का यह जो स्पिरिचुअल इवोल्यूशन डेवलपमेंट है, विदेश
western civilization developed karma = focused thoughts
का देखिए कि विदेश का सर्वश्रेष्ठ कंट्रीब्यूशन क्या है? टू द ह्यूमन सिविलाइजेशन। दे आर द साइंटिस्ट एंड देयर साइंटिफिक डिस्कवरीज। वेस्टर्न कंट्रीज यानी कि यूरोप और अमेरिका बाद में ये जो वेस्टर्न सिविलाइजेशन है उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदान है मनुष्य सभ्यता को यह वैज्ञानिकों और यह वैज्ञानिक सब खोज उनके उनके द्वारा जो खोज की गई है यह एक के बाद एक यह जो कोपरनिकस है, गैलीलियो है, न्यूटन है, रुथरफोर्ड है। फिर यह प्लैंक है, मैक्स प्लैंक है, आइंस्टाइन है। यह जो बोहर है आइजन होवर है जो ये जो बोहर है उसके बाद में जितने एक के बाद एक जो साइंटिस्ट है वे लोग वहां पे आते गए और उन्होंने कुछ ना कुछ पॉजिटिव थ्यरीज डेवलप की इसकी वजह से आज मनुष्य सभ्यता नेचर साइंस और टेक्नोलॉजी में इंडस्ट्रियलाइजेशन में मैन्युफैक्चरिंग में हमने इतना एडवांसमेंट किया है। सो दैट इज देयर ग्रेटेस्ट कंट्रीब्यूशन ऑफ वेस्टर्न सिविलाइजेशन। तो अपनी ईस्टर्न
eastern civilizaiton contribution = jnana
सिविलाइजेशन का ग्रेटेस्ट कंट्रीब्यूशन क्या है? एक समय था जबकि हम लोग भी साइंस में नेचुरल लर्निंग में एडवांस थे। किंतु वह समय समाप्त हो गया। उसके बाद के समय में हमारा आज का जो पिछला जो 2000 साल के इतना है अपना ग्रेटेस्ट कंट्रीब्यूशन क्या है? तो इट इज़ इन द फील्ड ऑफ स्पिरिचुअलिटी इन द रियल्म ऑफ स्पिरिचुअलिटी। हजारों हजारों सालों से ऋषि मुनियों ने अपने ब्रेन को स्टडी किया। अपनी कॉन्शियसनेस को समझा और फिर उन्होंने कुछ बेसिक सिद्धांत पे वो आकर के खड़े हुए। जिस तरह से आइंस्टाइन का थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी है और या तो फिर यह क्वांटम डायनेमिक्स है। आज का जो मॉडर्न साइंस है उसके पीछे में दो फंडामेंटल थ्यरीज है। एक तो है थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी दूसरा है क्वांटम डायनेमिक्स। इस दोनों के ऊपर में आज का मॉडर्न साइंस बना हुआ है। तो वैसे ही हमारा जो स्पिरिचुअल थॉट है जो पिछले 2000 साल से एटलीस्ट 2000 साल से उससे भी आगे जो बढ़ रहा है डेवलप हो रहा है। हम लोगों ने भी जो फंडामेंटल थ्यरी जो खोज निकाली है व्हिच अंडरपिंस एंटायर स्पिरिचुअल फ़िनोमिना व्हिच अंडरपिंस व्हिच एक्सप्लेंस दी एंटायर साइंस ऑफ कॉन्शियसनेस तो वो है दिस थ्यरी ऑफ़ कर्म एंड ज्ञान जिसको कि शंकराचार्य ने उसको एक्सपैंड किया है उसके ऊपर में तो यह जो शंकराचार्य की थ्यरी कहती क्या है अल्टीमेटली पहले तो हमने जो ऑब्जरवेशन करना था जगत के बारे में अपने ब्रे ब्रेन के बारे में, अपनी कॉन्शियसनेस के बारे में वो कर दिया कि एक स्ट्रीम ऑफ थॉट है वो फोकस रहेगी या तो स्कैटर रहेगी। जो स्कैटर होगी तो वो स्ट्रेस उत्पन्न करेगी हमारे भीतर में टेंशन जिसको कि सामान्य लैंग्वेज में कहते हैं या स्ट्रेस या टेंशन। तो उससे बचने के लिए हम लोग कुछ रिलैक्सिंग एक्टिविटी करते हैं। सो दिस इज अ बेसिक आईडिया हमको मिल गया है कि ब्रेन की एक्टिविटी का। इसके साथ में और एक यदि
focus upon kama-kanchana also produces stress
मैं एक जोड़ दूं कि स्ट्रीम ऑफ थॉट जो है जिसको कि हम प्रोडक्टिविटी पर जैसे फोकस करते हैं वैसे कामना वासना की ओर भी फोकस होती है। तो जितना हम काम और वासना के भीतर में जाएंगे उतना ही स्ट्रेस भयानक रूप से बढ़ता जाएगा। यानी कि स्ट्रेस बढ़ने के दो फैक्टर है। एक तो है कि जब स्ट्रीम ऑफ थॉट स्कैटर होता है तब भी स्ट्रेस बढ़ता है और जब हम काम वासना के भीतर में जाएंगे या तो किसी भोग दैहिक भोग के पीछे में दौड़ेंगे तो उससे भी स्ट्रेस
summary of karma
प्रकट होगा। तो इस तरह से अपना यह कर्म का पूरा एक मायाजाल है जो कि हमारे शास्त्र ने खोज निकाला। अभी हमारे शास्त्र क्या कहते हैं? व्हाट इज द सॉल्यूशन ऑफ दैट? आप फोकस्ड थॉट, प्रोडक्टिव थॉट 100% टाइम नहीं करने वाले हैं। आपके जीवन का कुछ ही समय रहेगा कि आप पॉजिटिव कंट्रीब्यूशन कर पाए। जब हम कोई एक साइंटिस्ट होता है, जब वह इनोवेशन डिस्कवरी करता है, ही फील सो गुड फ्रॉम विद इन हिमसेल्फ। एक डॉक्टर होता है। जब वो पेशेंट को ठीक-ठीक ट्रीट कर पाता है। उसका पेशेंट ठीक हो जाता है तो उसको एक आनंद मिलता है। एक इंजीनियर है। वह एक मशीन डेवलप कर देता है। कंप्यूटर बनाना है या तो फिर यह एयरक्राफ्ट बनाना है। वह बनाता है तो वह जो क्रिएटिविटी का उसको जो आनंद होता है तो उसको लगता है कि यही जीवन का सर्वश्रेष्ठ प्राप्त्य है। किंतु जैसे ही वह खत्म होगा एक्टिविटी क्योंकि अब तो दिन भर नहीं करने वाले हैं। वैसे ही उसके बाद में क्या करें? यह भयानक प्रश्न उसके सामने आ जाता है। फिर यह या तो हॉबी डेवलप करें या एडिक्शन में जाए ना कि कामना वासना में डूब जाए। एवरीथिंग इज वेरी डेंजरस। जैसे कामना वासना है। उसको एक तरह के एडिक्शन के रूप में ही हम देख सकते हैं। जैसे कि यह ड्रिंकिंग का एडिक्शन है। जैसे कि यह स्मोकिंग का एडिक्शन है। जैसे कि मोबाइल फोन का एडिक्शन है। वैसे ही यह कामना वासनाएं भी एडिक्शन के भीतर में ही आती है। वह अल्टीमेटली हमारे मन में वो स्ट्रेस ही प्रकट करती है। हमारी हेल्थ को बिगाड़ती ही है। अभी अपने शास्त्र क्या
slide 8 what is jnana
कहते हैं? बिय्ड वर्क देयर इज अनदर स्टेट दिस स्टेट इज कॉल्ड ज्ञाना। नाउ व्हाट इज ज्ञाना? ज्ञाना इज समथिंग। अपनी आंख को बंद कीजिए और देखिए क्या होता है। जितने भी विचार आते हैं वह सब कर्म है। चाहे वह फोकस थॉट हो, चाहे हम एडिक्शन में जाए, कामना वासना में डूबे, ना कि यह ड्रिंकिंग स्मोकिंग में डूबे, ना कि यह कोई भी पॉजिटिव सोशल एक्टिविटी में हम पार्टिसिपेट करें। चाहे धर्म हो, चाहे सोशल गैदरिंग हो ना कि चाहे गुड हॉबीज़ हो, पेंटिंग हो, म्यूजिक हो, व्हाटएवर यह सब कुछ अपने ब्रेन को कर्म करना पड़ता है। इट इज ऑल विद इन द रियल ऑफ कर्म। जैसे ही हम आंख बंद करेंगे, अपने ब्रेन के भीतर में, अपनी कॉन्शियसनेस के भीतर में कर्म बढ़ता ही जाएगा। कर्म चलता ही जाएगा। दिस एवरीथिंग इज नथिंग बट कर्म। बट द इमेजिन अ स्टेट वेयर कर्म स्टॉप्स व्हाट हैपेंस देन अभी जैसे जनरली यदि कर्म कब स्टॉप होता है तो यह जो सुशुप्ति की जो अवस्था है वहां पर कर्म स्टॉप हो जाता है वरना तो फिर यह जागृत और स्वप्न यह दो अवस्था में कर्म चलता ही रहेगा। जागृत अवस्था में तो सतत कर्म करते ही रहते हैं किंतु साथ में निद्रा में भी देखिए स्वप्न चलते रहते हैं। सुशुप्त एकमात्र एक ऐसी अवस्था है कि कर्म स्टॉप हो जाएंगे। किंतु वहां तो हम बेहोश हो जाते हैं। तो दैट इज नॉट अ पॉजिटिव डेवलपमेंट। राइट? तो फिर शास्त्र कहते हैं कि देयर इज अ चतुर्थ एक अवस्था है। इस ये स्वप्न, जागृत, सुशुप्ति। ये तीन अवस्थाएं जिसमें से कि जागृत अवस्था में तो कर्म चलता ही रहेगा। स्वप्न अवस्था में तो कर्म चलता ही रहेगा। सिर्फ सुशुप्त अवस्था में कर्म नहीं होगा। तो वैसे ही चौथी जो अवस्था है तुरीय अवस्था वहां पर भी कर्म रुक जाता है। किंतु सुशुप्ति और तुरीय इन दोनों में फर्क क्या है? सुशुप्ति में मनुष्य बेहोश हो जाता है। जबकि तुरीय अवस्था में जब कर्म चला जाता है। सुशुप्ति में सिर्फ कर्म चला जाता है तो ब्लैंकनेस रह जाती है। जबकि तुरीय अवस्था में जब कर्म चला जाता है तो साथ में ही प्रकट होता है ज्ञान। दिस ज्ञान इसी को हम कहते हैं सर्वोच्च आनंद या तो फिर ईश्वर दर्शन या तो आत्म साक्षात्कार। कोई भी धर्म है, कोई भी आध्यात्मिक स्ट्रीम को आप ले लीजिए। किसी भी स्पिरिचुअल स्कूल को आप ले लीजिए। सभी का जो अंतिम जो पड़ाव है, अंतिम मुकाम है, लास्ट माइलस्टोन है, उनका जो फाइनल डेस्टिनेशन है, वो दिस इज दैट ज्ञान। व्हाट इज ज्ञान? ज्ञान इज़ एंड ऑफ कर्मा और रियल नेचर जो अपना है, वह बाहर आ जाएगा। दिस दिस सिचुएशन इज डिफाइंड इन वेरियस रिलीजंस इन वेरियस मैनर्स। कोई कहेगा कि मैंने फादर इन हेवन का दर्शन किया। कोई कहेगा कि मैंने भगवान विष्णु का दर्शन किया। कोई कहेगा कि मैंने आत्म साक्षात्कार किया। कोई कहेगा कि मैंने केवली स्थिति प्राप्त कर दी है। कोई कहेगा कि मैंने निर्वाण प्राप्त कर दिया है। कोई कहेगा मुझे मोक्ष मिल गया है। कोई कहेगा कि मुझे मां जगदंबा का दर्शन हो गया है। ऑल ऑफ दिस हाईएस्ट लेवल ऑफ स्पिरिचुअल फिनोमिना दे आर कनेक्टेड विद ज्ञाना। जैसे ही कर्म कम होता जाएगा और ज्ञान की ओर हम बढ़ते जाएंगे। वैसे ही देखेंगे कि यह भीतर के जितने भी यह दरवाजे हैं वह खुलते जाएंगे। भीतर में जो अंधकार है उसको प्रकट प्रकाश में परिणत होता जाएगा और एक के बाद एक आध्यात्मिक अनुभूतियां प्रारंभ हो जाएगी जिसके बारे में शास्त्रों में पूरे विश्व के शास्त्रों में वह चाहे क्रिश्चियनिटी हो ना कि चाहे बुद्धिज्म हो ना कि वैष्णव शास्त्र हो ना कि शक्ति साधना के शास्त्र हो ना कि वेदांत शास्त्र हो सभी के भीतर में जो आध्यात्मिक अवस्थाओं का वर्णन किया गया है वे सब इस ज्ञान के माध्यम से प्रकट होते हैं। इस ज्ञान के रास्ते पर हम जितना बढ़ते जाएंगे वैसे-वैसे ही यह अपने हृदय के भीतर में उजाला फैलता जाएगा। तो अभी देखिए कि यह
summary of karma
तीनों अवस्थाओं को यदि हम देखते हैं तो किस तरह से अपने ब्रेन की परिस्थिति होती है। एक तो है कि डायरेक्टेड थॉट जो कि हम किसी भी कार्य को बाहर के जगत के कार्य को वैल्यू एडिशन करने के लिए करते हैं। जस्ट फिजिकल वर्क करते जाएंगे। भीतर में ब्लैंक है तो कुछ किसी काम का नहीं है। वह तो पशु भी करते हैं। वह सुशुप्ति की अवस्था ही एक तरह से हो गई कि भीतर में ब्लैंक है। फिजिकली वर्क करते जाते हैं। या तो फिर वह बेहोश हो गया कोमा में चला गया। भीतर में ब्लैंक है। शरीर पड़ा हुआ है। तब दोनों को मैं कहूंगा कि यह दोनों सुशुप्ति की अवस्था है। एक पशुवत कार्य जो होता है फिजिकल वर्क भीतर में ब्लैंक है। वह भी पशुवत अवस्था है। वह भी एक तरह से यह देखेंगे कि यह तमस सुशुप्ति की अवस्था है। और साथ में ही यह भीतर में ब्लैंक रहेगा। बाहर से कार्य चलेगा। या तो फिर जो देह है वो सुशुप्त रहेगा। वह सुशुप्ति की अवस्था है। उसके बाद में हो जाएगा कि डायरेक्टेड थॉट। एक किसी ऑब्जेक्ट के ऊपर में हम अपने थॉट को डायरेक्ट करते हैं तो उससे क्या होगा कि जो बाहर का जो कार्य है उसमें वैल्यू एडिशन होगी। वो बाहर का जो हम कार्य कर रहे हैं उसका उतना हीेंस, उतना ही प्रोडक्टिविटी, उतना ही कंट्रीब्यूशन बढ़ता जाएगा। सो दैट इज द स्टेट ऑफ जागृत। और उसके बाद में देखिए कि एक तो है कि रिलैक्सेशन की अवस्था या तो फिर यह स्कैटर्ड थॉट। यह स्कैटर्ड थॉट में क्या होता है कि जो डायरेक्टेड थॉट हम करते-करते एग्जॉस्ट हो गए हैं तो ये थॉट स्कैटर होंगे। तो इस जो स्कैटर्ड थॉट की अवस्था में कर्म तो चलता रहेगा। किंतु कर्म का कोई उद्देश्य नहीं है। इस अवस्था में या तो आपको उसको भूलने के लिए बाहर में कुछ एडिक्शन खोज निकालना पड़ेगा या तो कुछ हॉबीज खोज निकालनी पड़ेगी। या तो फिर नहीं खोजेंगे और अपने मन को यदि आप भटकने देने को रहेंगे यह स्कैटर्ड थॉट के माध्यम से तो होगा क्या कि स्ट्रेस में हमारा मन डूब जाएगा। यह जितना स्ट्रेस प्रकट होगा उतना ही हमारे स्वास्थ्य के लिए बड़ा ही भयानक है। किंतु इसके बाद में यह तीनों
Summary of Jnana
जैसे कि कर्म की अवस्था है। इन तीनों के परे आप देखिए कि है ज्ञान। यह ज्ञान एक ऐसा एक स्टेट ऑफ माइंड है कि वहां पर कर्म समाप्त हो तो हो जाता है किंतु साथ में ही अपने मन के भीतर में उजाला फैलने लगता है। जितना यह उजाला फैलेगा जितना भीतर में शांति प्रकट होगी उतना ही हम आध्यात्मिकता की ओर आगे बढ़ना शुरू करेंगे। यानी कि देखिए कि चार स्टेट हुए। यह स्वप्न जागृत सुशुप्ति और तुरीय या तो फिर इसको कि सांख्य सांख्य में जिस तरह से कहते हैं तमस रजस और सत्व और फिर इन परे है इससे परे है गुणातीत अवस्था यह किस तरह से है देखिए कि जब हम डायरेक्टेड थॉट होते हैं मन अपना एक कार्य में लगा होता है तो वह रजस की अवस्था है जब हम कार्य करना बंद कर देते हैं अपने थॉट्स स्कैटर हो जाते हैं। वह तमस की अवस्था है। और यदि हम अपने मन के भीतर में अपने मन को कर्म ज्ञान की ओर जितना ले जाएंगे उतना ही सत्व की अवस्था प्रकट होगी। सो दिस इज द बेसिक साइंस ऑफ कॉन्शियसनेस। कि आप जितना कर्म करेंगे उतना ही आप एग्जॉस्ट होंगे। आपको यू विल अ टाइम विल कम व्हेन यू विल हैव टू गो बिय्ड कर्म। तो वह गोइंग बियों्ड कर्म क्या आप सुशुप्ति के माध्यम से करेंगे भीतर में ब्लैंक कर देंगे या तो फिर आप किसी एडिक्शन को डेवलप कर लेंगे वो एडिक्शन चाहे पॉजिटिव हो कि नेगेटिव हो कैसा भी हो किंतु वो एक ऐसा चीज है जो कि आपको अपने भीतर के जो चल रहा है वह भुला देगा अपने मन को भुलाने के लिए जो आप कार्य कर रहे हैं वो सब एक तरह से एडिक्शन की कैटेगरी में आएंगे तो कर्म करेंगे या फिर सुशुप्त अवस्था में चले जाएंगे भीतर में ब्लेंक कर देंगे या तो फिर आप किसी एडिक्शन में घुस जाएंगे। सो बिय्ड दिस इज द स्टेट ऑफ ज्ञाना। व्हाट इज ज्ञाना? ज्ञाना इज सिज़ेशन ऑफ कर्म किंतु साथ-साथ में ही आध्यात्मिक अनुभूतियों का प्रारंभ। तो देखिए कि यह आध्यात्मिक अनुभूति जिसको ज्ञान कहते हैं। अभी शंकराचार्य और स्वामी
slide 9 Shankara vs Vivekananda
जी का जो डिफरेंस है वह हम देखते हैं कि एक्चुअली क्या कहना चाहते हैं। शंकराचार्य कहते हैं कि जितना ही कि ज्ञान और कर्म दोनों एक साथ में कभी नहीं रह सकते। यदि हमको ज्ञान प्राप्त करना है तो कर्म के परे जाना होगा। तो शंकराचार्य ठीक ही कहते हैं। 100% ठीक कहते हैं कि जब तक हम कर्म के इलाके में है तब तक या तो डायरेक्टेड थॉट रहेगा या तो स्कैटर्ड थॉट रहेगा या तो भीतर में से ब्लैंक हो जाएगा। यह तीनों के परे जाकर के हमको ज्ञान को प्राप्त करना है। सिर्फ कर्म के माध्यम से कभी भी आध्यात्मिक उपलब्धि हमको नहीं होने वाली है। यह शंकराचार्य का स्पष्ट कहना है। जबकि स्वामी जी का यहां पर कहना है कि कर्म के माध्यम से ही हमको मुक्ति भी मिल सकती है। तो इसका अर्थ क्या है? एक्चुअली कर्म को इस तरह से करना है कि कर्म जैसे कि साधना बन जाए। अभी दिस इज अनदर कैटेगरी ऑफ़ कर्म। हमने कितनी कैटेगरीज देखी? एक तो है कि कर्म को डायरेक्टेड थॉट में लगाएं जिससे कि अपने बाहर के जगत के जितने कार्य हैं उसमें वैल्यू एडिशन हो। भीतर में से अपने को ब्लैंक कर दे। वो सुशुप्त अवस्था में चले जाए या तो फिर एक एडिक्शन डेवलप कर दे जो कि हमारे मन को भीतर में से हम भूल जाए। किंतु साधन भजन क्या है कि अपने मन को डायरेक्ट करना है। किंतु किसी सांसारिक चीज के ऊपर में नहीं। डायरेक्टेड थॉट इटसेल्फ बट टुवर्ड्स गॉड और टुवर्ड्स आत्मन और टुवर्ड्स स्पिरिचुअल ऑब्जेक्ट। यह डायरेक्टेड थॉट जैसे ही स्पिरिचुअल ऑब्जेक्ट की ओर जाएंगे, वैसे-वैसे ही यह कर्म शांत होते जाएंगे। इससे होगा क्या? शरीर तो कार्य कर रहा है किंतु भीतर में पूरी शांति है। व्हिच इज अ कंप्लीटली डिफरेंट टाइप ऑफ फिनोमिना। जैसे देखिए कि पशु जब कार्य कर रहा है तब होता क्या है? शरीर कार्य कर रहा है। भीतर में से ब्लैंक है। यानी भीतर में कुछ भी नहीं है। जबकि कर्म योग में होगा क्या? शरीर शरीर कार्य कर रहा है किंतु भीतर में ज्ञान डेवलप होता जाएगा। वि इज व्हाट स्वामी जी इज रेफरिंग टू कि कर्म के माध्यम से ज्ञान कैसे प्राप्त करें। कर्म को साधना में परिणत कर दे। कर्म को निष्काम कर दें। जिससे कि हमारे भीतर में कर्म का जो बैकलेश है, कर्म करके जो एग्जॉशन प्रकट होता है या तो कर्म रोक करके जब होता है, स्कैटर थॉट हो जाते हैं। वह सब जो उसकी जो नेगेटिव इफेक्ट है, उसके जो कंट्रा इंडिकेशंस है वह सब चले जाए और भीतर में ज्ञान प्रकट हो। बाहर में हम भले ही चाहे कर्म करते रहे। सो दिस इज स्वामी जीसस आईडिया ऑफ निष्काम कर्म या तो फिर स्वामी जीसस आईडिया ऑफ शिव्ञाने जीव सेवा। जितना ही हम शिव ज्ञान जीव सेवा की ओर आगे बढ़ते जाएंगे। वैसे ही देखेंगे कि बाहर में तो हम कर्म कर रहे हैं। भीतर में किंतु धीरे-धीरे करके ज्ञान का प्रकाश फैल रहा है। तो यह देखिए कि दिस इज अ कंप्लीट
summary
एनालिसिस ऑफ साइंस ऑफ कॉन्शियसनेस। फिर से यदि हम एक बार समराइज करेंगे तो किस तरह से होगा। एक तो है डायरेक्टेड थॉट। एक तो है फोकस थॉट जो कि हमको बाहर के जगत में कार्य करने में हेल्प करते हैं। एक डॉक्टर है वह सोचता है कि किस तरह से मैं अपने पेशेंट को बेटर करूं। एक इंजीनियर है वह सोचेगा कि किस तरह से मैं अपना कार्य बेटर करूं। वो एक फोकस थॉट होता है और फोकस थॉट जहां पे रुकता है वहां से क्या प्रारंभ होता है का तो या तो अपने थॉट स्कैटर हो जाएंगे जो कि अपने मन में स्ट्रेस प्रकट करेंगे और उसको भूलने के लिए हमको एडिक्शन में जाना होगा या तो फिर हमारा माइंड भीतर में से ब्लैंक हो जाएगा। माने इस तरह की परिस्थिति हम प्रकट करेंगे कि भीतर में पूरा ब्लैंक ही हो जाए। वो नशा करके हो ना कि चाहे कुछ भी करके हो तो भीतर में ब्लैंक होने से हम सुशुप्ति की अवस्था की ओर जाएंगे। तो यह तीन है। एक तो है कि डायरेक्टेड कर्म और फिर है नॉन डायरेक्टेड कर्म के दो पार्ट। अभी डायरेक्टेड कर्म ज्ञान ये जो साधना है साधना क्या कहता है? साधन भजन का रास्ता क्या कहता है? डायरेक्टेड कर्म ही करो। किंतु डायरेक्ट इट टुवर्ड्स स्पिरिचुअल ऑब्जेक्ट। तो इस तरह से स्पिरिचुअल ऑब्जेक्ट की ओर जाओ कि उसका जो रिजल्ट है रिजल्ट विल बी ज्ञान जो वह जो डायरेक्टेड कर्म है जो कि आप सांसारिक कर्म की ओर सांसारिक कार्य की ओर लगाते हैं उसका रिजल्ट है एग्जॉशन और यहां पे जो रिजल्ट है व्हिच रिजल्ट इज ज्ञानम। सो दिस ये डायरेक्टेड कर्म साधना कब होगी? जब साधना होगी तो वह ज्ञान के भीतर में परिणत होगा। और यह डायरेक्टेड कर्म जो कि आपको और कुछ नहीं किंतु एग्जॉशन ही देगा और एग्जॉशन के बाद में आपको एडिक्शन की ओर जाना पड़ेगा स्कैटर्ड थॉट से बचने के लिए। सो दिस आई थिंक इज ओवरऑल आइडिया ओवरऑल कांसेप्ट बिहाइंड दिस साइंस ऑफ कॉन्शियसनेस। आई डू नॉट नो कि मैंने कितना बेटर इसको एक्सप्लेन कर पाया हूं। इसके बारे में और भी थोड़ा सा सोचना होगा। तो बट दिस इज दिस आर द बेसिक आइडियाज और इसके ऊपर मैं एक मैं ग्राफिक्स जैसा कुछ बनाऊंगा समथिंग प्रेजेंटेशन जैसा व्हिच विल व्हिच विल मेक इट बेटर फॉर अस टू अंडरस्टैंड इट। सो इनफ फॉर टुडे अभी कल फिर से मिलते हैं। ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णपणमस्तु
प्रश्न: हममें से कोई भी परिणाम की आशा किए बिना काम नहीं कर सकता। हमें बस अपने काम का फल दूसरों को देना है। Q: none of us can work without hoping for a result. we just have to be give the fruits of our work to others.
या तो फिर इस तरह से कहिए कि आवर आइडियाज आर वेरी नोबल। सर फॉर एग्जांपल आइंस्टाइन ने जो थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी जो डेवलप की उसके पीछे में उसको जो मेहनत करनी पड़ी है कंपेयर टू दैट उसको इतना रिजल्ट तो इतना पर्सनली ऐसा कुछ नहीं मिला है। प्रेस्टीज मिलती है। बट इट्स नथिंग लाइक के ही हैज़ बिकम वेरी रिच एंड समथिंग लाइक दैट। सो म कंपेयर टू व्हाट ही हैज़ डन। उसका कंपैरेटिव रिजल्ट उसको नहीं मिला है। आज एक सामान्य बिजनेस भी आप चलाएंगे तो जो मेहनत करके जो रिजल्ट मिलता है वि इज मच बेटर देन एनी साइंटिस्ट। बहुत सारे अभी आइंस्टाइन वाज़ लकी कि उसको उसके लाइफटाइम में प्रेस्टीज मिली। बहुत सारे पेंटर होते हैं, साइंटिस्ट होते हैं लाइफटाइम खुद की लाइफटाइम में गाली के अलावा और कुछ नहीं मिलता है। उनकी थ्यरी कितने सालों के बाद प्रूव होती है। सो दे आर मोटिवेटेड बाय सम नोबल आइडियाज़ दैट वी वांट टू डू समथिंग पॉजिटिव। द स्पिरिचुअलिटी इज आल्सो वी आर मोटिवेटेड बाय समथिंग नोबल। अभी पर्सनल बेनिफिट है कि हमको शांति मिलती है। हमको ज्ञान मिलता है। दैट इज ऑलवेज देयर द सेटिस्फेक्शन जो मिलता है। बट दिस इज़ सेइंग दैट के देखिए यह जो एक्चुअली स्ट्रीम ऑफ थॉट जो मेरे माइंड में चालू हुआ ना वो स्वामी जी का जो एक पॉइंट है जिसको कि अभी हम पढ़ेंगे इसके बाद में। स्वामी जी कहते हैं कि फेमस आईडिया है स्वामी जी का कि वो जो वेस्टर्न ग्रीक और रोमन जो जो ब्रांच है एलेनिक जो सिविलाइजेशन हम कहते हैं उसमें से आज का मॉडर्न वेस्टर्न सिविलाइजेशन आया उनका माइंड हमेशा बाहर में डायरेक्ट हुआ है और उन्होंने यह साइंस टेक्नोलॉजी डेवलप की है। जबकि हमारा माइंड हमेशा यह इनर फोकस रहा है। हमने यह रिलीजन डेवलप किया है। सो आइदर यू डेवलप साइंस और यू डेवलप रिलीजन वी आर बोथ मोटिवेटेड ब समथिंग समथिंग नोबल माने हाईएस्ट जो ब्रेन होते हैं नॉर्मल लोगों की बात छोड़ दें एकदम जो हाईएस्ट लेवल के जो ब्रेन होते हैं उन वेस्टर्न सिविलाइजेशन का जो सर्वश्रेष्ठ कौन है मतलब उनको रिप्रेजेंट करते हैं व्हिच आर साइंटिस्ट ईस्टर्न सिविलाइजेशन को रिप्रेजेंट करने वाले कौन है दे आर सेंट्स तो सेंट्स एंड साइंटिस्ट बोथ आर मोटिवेटेड बाय समथिंग नोबल कि वी वांट टू हमको यह जो निद्रा फिर यह काम क्रोध यह भय मैथुन निद्रा भयम मैथुन ऐसा जो कहते हैं ना उससे ऊपर का आहार निद्रा भयम मैथुन हां उससे ऊपर में एक लाइफ लीड करना है। वी वांट टू गो बियड आवर डे टू डे लाइफ। वी वांट समथिंग नोबल इन आवर लाइफ। सो बोथ आर मोटिवेटेड बाय सम नोबिलिटी। सो हमने यह इनर साइंस को डेवलप किया। उन्होंने यह आउटर साइंस को डेवलप किया। एंड व्हाट शुड बी द फ्यूचर सिविलाइजेशन इट शुड कंबाइन बोथ साइंस इनर एंड आउटर। दैट विल बी द फ्यूचर फाउंडेशन ऑफ़ फ्यूचर सिविलाइजेशन। सो दैट नोबिलिटी इज़ देयर इन द हार्ट ऑफ़ मेनी पीपल। हमको इवन यदि स्पिरिचुअलिटी के मामले में भी ना हम यदि इतने वो जो कहेंगे कि पशुवत हो जाएंगे तो हम कहेंगे मुझे अपनी मुक्ति चाहिए। उसके लिए मैं यह सब कर रहा हूं। तो अगेन वह तो हम वही ट्रैप में पड़ जाएंगे कि आहार, निद्रा, भय, मैथुन उसी के भीतर में चलते रहेंगे। वो मुझे वह नहीं चाह के मुक्ति चाहिए। बट अगेन आई एम वेरी सेल्फिश, वेरी नैरो माइंडेड, वेरी कहेंगे कि टुवर्ड्स द एनिमलिस्टिक टेंडेंसी। सो दिस नोबिलिटी इज द
प्रश्न: यदि कोई व्यक्ति निष्काम कर्म करता है तो क्या उसे थकावट महसूस होती है? Q: if a person does nishkam karma, does he feel exhaustion?
की। एग्जिशन होगा किंतु साथ में भीतर से संतोष भी मिलेगा। अल्टीमेटली तो हम ब्रेन के बारे में बात कर रहे हैं। है ना? तो ब्रेन में कॉन्शियस लेवल पर ही विल बी ही विल फाइंड सेटिस्फेक्शन ही विल फाइंड आनंद कंटेंटमेंट यह सब पॉजिटिव इमोशन उसको मिलेगी फिजिकली ही विल आल्सो बी एग्जॉस्टेड जो कि डॉक्टर है या तो फिर मान लीजिए कि अभी एक ही डॉक्टर है दो तरह का कार्य करता है। वह खुद की वो डिस्पेंसरी में काम करता है और चैरिटेबल डिस्पेंसरी में जाके काम करता है। खुद की डिस्पेंसरी में काम करके उसको वह सेटिस्फेक्शन कंटेंटमेंट नहीं मिलेगा जितना कि वह चैरिटेबल डिस्पेंसरी में जाके करता है। किंतु यहां पे देखना है कि देखिए कि कौन-कौन सा एटीट्यूड लेके काम कर रहा है। जब चैरिटेबल डिस्पेंसरी में भी जाते हैं वो बहुत सारे कोई लोग जाता है वो जितने भी पेशेंट आते हैं फिर अपना वो विजिटिंग कार्ड पकड़ा देते हैं कि इसके बाद में ट्रीटमेंट चाहिए तो मेरे वहां पे आ जाना। सो आप किस स्टैंड तो आप किस पर्पस से जाते हो कितना डिवोशन से काम करते हो दो मेरा मेनी कॉम्प्लेक्स फैक्टर्स बिहाइंड दैट बट सपोजिंग दैट एवरीथिंग इज़ आइडियल यू आर वर्किंग इन आइडियल मैनर विथ कंप्लीट सेल्फलेसनेस देन यू विल फील कंटेंटमेंट एंड सेटिस्फैक्शन व्हिच इज़ यू विल नॉट गेट इफ यू आर वर्किंग फॉर योरसेल्फ व्हिच आर
प्रश्न: जब विचार बिखरे होते हैं, तो हमें सामाजिक जीवन या मोबाइल सर्फिंग की आवश्यकता होती है, है ना? Q: when thoughts are scattered, we need social life or mobile surfing, right?
ऑल एडिक्शन इन समवेयर ही विल नॉट नीड इट।
प्रश्न: तो निस्वार्थ भाव से काम करने वाले व्यक्ति को इन सबकी आवश्यकता नहीं होगी, है ना? Q: so a person working selflessly, wont need all those, right?
ही विल नॉट नीड इट। आइडियली स्पीकिंग ही शुड नॉट नीड इट। देखिए हमारा प्रॉब्लम क्या है कि मोटिव कभी प्योर नहीं होते हैं। तो आइडियली स्पीकिंग इफ योर मोटिव्स आर प्योर देन यू विल नॉट नीड इट।
प्रश्न: माँ प्रतिदिन 1 लाख जप करने में सक्षम थीं। क्या ऐसा इसलिए था क्योंकि वे खाना बनाते या सफाई करते समय भी जप करती थीं? हमारा काम मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण है, इसलिए हम काम करते हुए जप नहीं कर सकते। इसलिए हम प्रतिदिन 1 लाख जप नहीं कर पाएंगे। इसका समाधान क्या है? Q: mother was able to do 1 lakh japa daily. was that because she did japa even while she was cooking or cleaning etc? our work is mentally challenging so we cannot do japa while doing work. so we will not be able to do 1 lakh japa daily. what is the solution?
रेदर देन दैट माने वो तो एक मॉडल है। जैसे मैंने पहले भी कहा था एक बार कि हम लोग पीपीटीसी में थे। यानी कि वो नए जॉइ करने के लिए गए थे बैलून मठ में। तो हमारा एक ड्यूटी होता था वेजिटेबल कटिंग। व्हिच वी लाइक्ड वेरी मच। बिकॉज़ कि आपका हाथ वेजिटेबल कटिंग कर रहा है। मेंटली यू आर फ्री। तो कोई कुछ सोचता है, कोई कुछ सोचता है, कोई जप करने का प्रयास करता है। फिर उस समय वहां पे एक ब्रह्मचारी को बिठा दिया जाता है। वो कोई पाठ करेगा किताब में से तो कोई वो पाठ के ऊपर में फोकस करने का प्रयास करता है। तो समथिंग वो उसके बाद में गार्डनिंग होता था। अगेन सेम थिंग गार्डनिंग डजंट रिक्वायर एनी मेंटल एक्टिविटी। सो यू आर मेंटली फ्री। सो, हम अपने को मेंटली डिसोसिसिएट कर सकते हैं फ्रॉम आवर एक्टिविटी। सो, देयर इज़ वन वे ऑफ़ डूइंग दिस। बट देयर इज़ अनदर वे ऑफ़ डूइंग जैसे आपने टीचर की बात कही। टीचर जब मैथमेटिक्स के कोई डिफिकल्ट कांसेप्ट प्रूव कर रहा है तो ही विल नेवर हैव एनी मेंटल स्पेस टू डू एनीथिंग एल्स। तो बट ही कैन सी स्टूडेंट्स एस बाल गोपाल। बाल गोपाल को वो सिखा रहा है। उस भाव से वो सिखाए। अपने कर्म का वो जो मोटिवेशन है वो चेंज कर देन अगेन इट टर्न्स इनू साधना।
प्रश्न: ठाकुर की आरती में एक वाक्य है "कर्म कठोर"। ठाकुर स्वामीजी की तरह कठोर परिश्रम कैसे करते हैं? वे तो दक्षिणेश्वर में अपने कमरे में बैठकर बातें करते थे। Q: in thakur's arati there is a phrase "karma kathor". how come thakur work hard the way swamiji did. he just sat in his room in dakshineshwar and talked.
ना उन्होंने देखिए कि डायरेक्ट डिसाइपल और मां इन सब का आध्यात्मिक जीवन गठित किया एज ए गुरु एज ए टीचर वि इज समथिंग रियलीेंट क्योंकि यही तो 17 लोग हैं ना 16 डायरेक्ट डिसाइपल और एक मां कि जिन्होंने मिलकर के आखिर में अल्टीमेटली रामकृष्ण संघ का फैलावा किया। सो 17 लोगों का जीवन मने एकदम आपको हाईएस्ट लेवल पर ले जाना वो हमने गंभीरानंद जी की लाइफ पढ़ रहे हैं मां की लाइफ तो कितना स्पष्ट रूप से लिखा है कि वो शिक्षा दीक्षा और उद्दीपना इन तीनों के माध्यम से ठाकुर मां का आध्यात्मिक जीवन गठित करते थे तो वह तो कोई सामान्य चीज तो है नहीं स्वामी जी जैसे स्वामी जी भैरव जैसे स्वामी ठाकुर की सभी बातों पर वो एक तरह का स्केप्टिसिज्म प्रकट करते थे उनके माइंड को उनके ब्रेन को वाश कर देना यह सब तो भयानक कर्म है। माने ठाकुर ये जो दक्षिणेश्वर इज अ आइडियल पाठशाला। दक्षिणेश्वर इज़ अ आइडियल पाठशाला। आपको यदि पाठशाला का को यदि देखना है वो जो गुरुकुल थे वो जो ट्रेडिशनल गुरुकुल आज के युग में देखिए कि दक्षिणेश्वर में परफेक्ट रूप से वो प्रकट हुए हैं। ठाकुर जैसे गुरु और नहीं मिल सकते। स्वामी जी जैसे मां जैसा कोई शिष्य नहीं मिल सकता। स्टूडेंट नहीं मिल सकते। दे बोथ वेर परफेक्ट स्टूडेंट आइडियल स्टूडेंट तो गुरु किस तरह से स्टेप बाय स्टेप वो अपने शिष्यों का स्टूडेंट्स का लाइफ गठन करता है। इट्स अ परफेक्ट एग्जांपल इज दक्षिणेश्वर।
प्रश्न: जैसा कि स्वामीजी ने कहा कि यदि आप पांच महान विचार सोचें तो वे दुनिया को बदल देंगे। क्या वे पांच विचार भी शिव ज्ञान जीव सेवा की तरह कर्म योग हैं? Q: as swamiji said if you think five great thoughts they will change the world. are those 5 thoughts also karma yoga like shiva jnane jiva seva?
यस यस यस यस यस आप थॉट एनी थॉट इज अ पार्ट ऑफ कर्म। ज्ञान इन ज्ञान देयर इज नो थॉट। यू आर इन द स्टेट ऑफ गॉड रियलाइजेशन। आपका मन जो है पूरा ईश्वर की ओर है या तो फिर आत्मन की ओर है। व्हाटएवर द स्पिरिचुअल पावर यू बिलीव इन। तो उसकी ओर है आपका मन। वहां पे थॉट आ ही नहीं सकते। जैसे ही आपने जगत की ओर मन को घुमाया तभी तो थॉट आना शुरू होंगे। बिकॉज़ एनी थॉट इज़ रिलेटेड विद एनी ऑब्जेक्ट। व्हाट इज़ थॉट अल्टीमेटली? इज़ अ रिलेशन बिटवीन सब्जेक्ट एंड ऑब्जेक्ट। अभी जहां पे ऑब्जेक्ट ही नहीं है, हाउ कैन देयर बी एनी रिलेशन? राइट? अल्टीमेटली स्पिरिचुअलिटी क्या कहता है? देयर इज़ ओनली सब्जेक्ट। देयर इज़ नो ऑब्जेक्ट। आई एम मायसेल्फ। अहम ब्रह्मास्म। देयर इज़ ओनली वन रियलिटी। दैट इज़ सब्जेक्ट। सो देयर इज़ देयर देयर कैन बी नो थॉट। एस्टैब्लिशिंग इन माय रियल नेचर इट इज़ कॉल्ड ज्ञाना। द मोमेंट आई कनेक्ट माय आई मायसेल्फ एज अ सब्जेक्ट विद एनी ऑब्जेक्ट ओनली देन देयर कैन बी एनी
प्रश्न: पूरे दिन काम करने के बाद हमें जप, ध्यान करने की आवश्यकता होती है। इसके बजाय हम मोबाइल या टीवी के आदी हो गए हैं। इस लत से कैसे छुटकारा पाएं? Q: after working whole day we need to do japa, dhyana. instead we are addicted to mobile or tv. how to get rid of this addiction?
थॉट। दैट इज़ बेसिकली एडिक्शन। राइट? दैट इज़ बेसिकली एडिक्शन। सो सी वंस आवर वर्क इज़ ओवर व्हाटएवर द डायरेक्टेड थॉट वी आर डूइंग इट इज़ ओवर वी शुड आइडियली स्पीकिंग अह डू सम जप ध्याना बट वी हैव टू अंडरस्टैंड दैट दिस इज़ आल्सो अ डायरेक्टेड थॉट। सो हियर प्रॉब्लम कम्स आफ्टर ऐट द एंड ऑफ़ डायरेक्टेड थॉट इफ यू ट्राई टू डू अनदर डायरेक्टेड थॉट व्हिच इज़ एनी टाइप ऑफ स्पिरिचुअल प्रैक्टिस यू विल नॉट गेट मच एनर्जी। सो दिस प्रॉब्लम विल कम। दैट इज व्हाई ठाकुर है सेड दैट वी ऑलवेज नीड टू गो टू सम रिट्रीट। वी नीड टू फाइंड टाइम आउट ऑफ आवर डायरेक्टेड थॉट एंड देन सपोज़ आई हैव 100% एनर्जी। 100 यूनिट एनर्जी। आई एम गिविंग एंटायरली टू द डायरेक्टेड थॉट व्हिच इज़ फॉर माय सेल्फिश पर्पस। एट द एंड ऑफ़ दिस 100 यूनिट आर एग्जॉस्टेड। आई विल नॉट हैव मच एनर्जी लेफ्ट टू डू डायरेक्टेड थॉट इन डायरेक्शन ऑफ़ स्पिरिचुअलिटी व्हिच यू आर राइट। इन दैट केस आई नीड सम एडिक्शन टू फॉरगेट द रिजल्टिंग एग्जॉशन। व्हाट आई प्रपोज और व्हाट स्पिरिचुअलिटी प्रपोज यू कैन डू टू थिंग्स। फर्स्ट यू डिवाइड योर डायरेक्टेड थॉट इनू 50-50 यूनिट। 50 अह यूनिट यू गिव फॉर योर अहम वर्ल्डली डिजायर्स। द वर्क वि यू आर डूइंग फॉर योर वर्ल्डली पर्पज एंड 50 यूनिट यू गिव टू द स्पिरिचुअल पर्पज। दैट इज वन सॉल्यूशन एंड सेकंड सॉल्यूशन इज़ द फॉर द सेक ऑफ द वर्ल्डली डिजायर व्हाटएवर वर्क यू आर डूइंग यू चेंज इट टुवर्ड्स सम सॉर्ट ऑफ यू इंट्रोड्यूस सम स्पिरिचुअल मोटिव। जस्ट नाउ वी वर टॉकिंग अबाउट टीचर। इफ टीचर ही सिंपली टीचेस दैट आई एम टीचिंग सो दैट आई कैन गेट सम सैलरी सो दैट आई कैन रन माय हाउसहोल्ड इंस्टेड ऑफ़ दैट द टीचर स्टार्ट्स थिंकिंग दैट आई एम टीचिंग टू दिस बालगोपाल एंड इट इज़ नेसेसरी फॉर मी टू टीच सो दैट दे फ्यूचर विल बिल्ड अप इन दैट केस व्हाट विल हैपन दैट दिस अह द वर्क दैट ही इज़ डूइंग इट विल बिकम स्पिरिचुअल वर्क। सो द रिज़ल्टिंग एग्जॉशन विल बी लेस। सो देयर आर द टू सॉलशंस आर हियर। आइदर यू डिवाइड योर 100 यूनिट इनू टू पार्ट्स व्हाटएवर 70 30 90 10 50-50 इट्स डिपेंड्स अपॉन यू योर सिचुएशन बट यू डिवाइड इट एंड 50% और 70% यू गिव टू योर वर्ल्डली आइडियाज वर्ल्डली थॉट्स एंड 30% 50% यू गिव टू स्पिरिचुअल थॉट्स। दैट वन सॉल्यूशन सेकंड सॉल्यूशन कन्वर्ट दिस वर्ल्डली थॉट्स इंटू सम इंट्रोड्यूस सम स्पिरिचुअल मोटिव दैट इज वन वे ऑफ़ डीलिंग वि
प्रश्न: यदि हमारा सांसारिक कार्य और अपना ध्यान दोनों ही डिरेक्टेड कार्य हैं, तो हमें कब विश्राम करना चाहिए? क्या विश्राम आवश्यक है? Q: if our worldy work and our meditation practies, both are directed work, when should we relax? is relaxation necessary?
दिस इट इज़ नॉट रिक्वायर्ड आइडियली स्पीकिंग आइडियल स्पीकिंग रिलैक्सेशन और एडिक्शन इज़ नॉट रिक्वायर्ड व्हाट इज़ एडिक्शन और व्हाट इज़ रिलैक्सेशन दैट दैट इज़ अ टाइप ऑफ़ एक्टिविटी दैट वी डू व्हेन आवर थॉट्स आर स्कैटर्ड। आइडियली स्पीकिंग थ्योरेटिकली स्पीकिंग देयर इज नो नीड फॉर आवर थॉट्स टू बी स्कैटर्ड। वी कैन बी इन टू सिचुएशन ऑल टुगेदर दैट आवर थॉट्स आर डायरेक्टेड टुवर्ड्स द वर्क और आवर थॉट्स आर डायरेक्टेड टुवर्ड्स गॉड। एंड अल्टीमेटली आवर थॉट्स आर डायरेक्टेड टुवर्ड्स एनी स्पिरिचुअल ऑब्जेक्ट। वेदर दिस स्पिरिचुअल ऑब्जेक्ट इज़ आई एम ए डॉक्टर। आई एम ट्रीटिंग अ पेशेंट सी द गॉड इन दिस पेशेंट अह शिव ज्ञान जीव सेवा। राइट? सो इफ वी डू दैट देन एनी वर्क बिकम्स स्पिरिचुअल वर्क। इन दैट केस आइडियली स्पीकिंग यू कैन फॉर 24 आवर्स और एटलीस्ट द आवर्स यू आर अवेक यू कैन गो ऑन डूइंग डायरेक्टेड वर्क विदाउट एनी एक्सॉर्शन। व्हेन व्हेन डायरेक्टेड थॉट इफ इट इज़ डायरेक्टेड टुवर्ड्स वर्ल्डली गोल इट्स रिजल्ट विल बी स्कैटर्ड थॉट। एट द मोमेंट योर डायरेक्टेड थॉट स्टॉप्स योर थॉट्स विल बी स्कैटर्ड। बट इफ आवर डायरेक्टेड थॉट इज टुवर्ड्स डायरेक्टेड टुवर्ड्स स्पिरिचुअल गोल व्हेन इन दैट केस व्हेन आवर डायरेक्टेड थॉट स्टॉप्स व्हिच इट विल एट वन पॉइंट देन ज्ञान विल बिगिन एट द एंड ऑफ कर्म ज्ञान विल बिगिन इन दैट केस यू विल नॉट नीड एनी एडिक्शन ज्ञान इटसेल्फ इज़ सम सॉर्ट ऑफ डोपामाइन यू कैन से इंजेक्शन और डोपामाइन शॉट दिस ज्ञान इट विल बी प्रोड्यूस फ्रॉम विदिन इन दैट केस यू विल नॉट नीड एनी एडिक्शन और रिलैक्सेशन
प्रश्न: हम निष्काम कर्म कर रहे हैं या नहीं, यह मापने का एक तरीका यह है कि हम अंत में अच्छी तरह ध्यान कर पाते हैं या नहीं। निष्काम कर्म से हमारी आध्यात्मिक हुंडी बढ़नी चाहिए। Q: one way to measure if we are doing nishkam karma, is to see if we can meditate well at the end. nishkam karma should increase our spiritual quotient.
यस यस यस एक्सजेक्टली दे इट शुड बी अ पॉजिटिव फीडबैक लूप जितना मैं मेरा कर्म जितना स्पिरिचुअली मोटिवेटेड होगा उतना ही वो कर्म के अंत में ज्ञान को प्रोड्यूस करेगा और जितना मैं ज्ञान के स्टेट में रहता हूं उतना ही मैं जब कर्म करने को जाऊंगा आई विल बी फार मोर एफिशिएंट क्योंकि कर्म भी तो माइंड को फोकस करना भी तो इतना इजी नहीं है। आज आइंस्टाइन के लेवल तक के साइंटिस्ट तो मुश्किल से वह 10 लाख 1 करोड़ में 10 करोड़ में एक निकलेगा। सो द लेवल ऑफ कंसंट्रेशन दैट ही हैड अटेंड दैट वाज़ व्हाई ही वाज़ एबल टू प्रोड्यूस समथिंग सो वंडरफुल। सो वो लेवल ऑफ़ कंसंट्रेशन अपने ज्ञान से इंक्रीस होगा। तो इट विल क्रिएट ए पॉजिटिव फीडबैक लूप। वहां पे एक नेगेटिव फीडबैक लूप हो जाएगी। आपका जितना वर्ल्डली मोटिवेटेड वर्क है एट द एंड ऑफ द वर्क यू विल बी इट विल प्रोड्यूस नथिंग बट एग्जॉशन एंड स्कैटरिंग ऑफ थॉट। अभी यह मन को भुलाने के लिए हम एडिक्शन में जाएंगे। वो एडिक्शन में से निकल दूसरे दिन सुबह को हम काम पे जाएंगे। किंतु मन फिर इतना फोकस होगा ही नहीं। पूरा तो बिताया है टाइम एडिक्शन में किसी ना किसी तरह के। अभी वह एग्जॉस्ट हो के फिर से घर आएंगे। फिर से वह दूसरे एडिक्शन में घुसेंगे। देन इट विल गो ऑन मेकिंग ए नेगेटिव फीडबैक लूप। एव्री एट द एंड ऑफ़ एव्री एडिक्शन आप अपने माइंड को फोकस करने का प्रयास करेंगे। माइंड विल बी लेस फोकस्ड। यू विल बी लेस क्रिएटिव। तो दैट विल बी अ नेगेटिव फीडबैक लूप। यहां पे पॉजिटिव फीडबैक लूप स्टार्ट हो जाएगा। एट द एंड ऑफ़ एव्री स्पिरिचुअली मोटिवेटेड वर्क इट विल प्रोड्यूस मोर ज्ञाना। जैसे ही ज्यादा ज्ञान प्रकट हुआ, द नेक्स्ट सेशन ऑफ़ डायरेक्टेड वर्क, इट विल बी फार मोर फोकस, फार मोर क्रिएटिव, इट विल क्रिएट फार मोर कंटेंटमेंट एंड ग्रेटर ज्ञाना। सो इट विल देन अगेन मोर ज्ञाना मोर बेटर कर्मा मोर ज्ञाना मोर बेटर कर्मा मेडिटेशन हां माने इफ इफ इफ यू यस बिकॉज़ इफ वर्क इज़ सम स्पिरिचुअल मोटिव वहां पे ऐड किया गया है। देन देन द वर्क विल बिकम साधना। देखिए साधना अल्टीमेटली क्या है? कि साधना जब करता हूं तो वह साधना है। मैं पूजा करता हूं तो वह साधना है। मैं डॉक्टर हूं। चैरिटेबल हॉस्पिटल में जाकर के पेशेंट की फ्री में ट्रीटमेंट करता हूं। वो साधना है। टीचर हूं स्टूडेंट में बाल गोपाल देख के उनको सिखाता हूं। वो साधना है। सो ऑल ऑफ दिस आर साधना। साधना इज नथिंग अदर देन वर्क। ऐसा नहीं है कि मुझे अह जब ध्यान कुछ अलग कैटेगरी है और वह चैरिटेबल डिस्पेंसरी में काम करना, टीचर का काम करना वह अलग कैटेगरी है। नहीं कर्म की दो ही कैटेगरी है। एक तो स्पिरिचुअली मोटिवेटेड कर्म है। दूसरा है कि सेल्फिशली मोटिवेटेड कर्म है। दो ही कैटेगरी है। साधना हम स्पिरिचुअल मोटिवेटेड कैटेगरी को हम साधना कहते हैं। उस साधना में पूजा भी आ जाएगा, जप ध्यान भी आ जाएगा। एज अ टीचर, बेटर टीचर, उत्तम शिक्षक वह भी आ जाएगा। उत्तम वैद्य वो भी उसमें आ जाएगा। बट बट वंस वी अंडरस्टैंड साइंस सी वंस साइंस समझने के बाद में ना वी कैन वी कैन डिप्लॉय डिफरेंट-डिफरेंट स्ट्रेटजीज़। अभी जैसे मैं शेयर मार्केट में जाता हूं। मुझे शेयर मार्केट वाज़ अ सेल्फिश वर्क। मुझे करना ही करना है। घर तो चलाना है ना। तो अंडरस्टैंड कि मेरी 100 यूनिट एनर्जी है। तो मैं यदि 70% 80% शेयर मार्केट में डालता हूं तो कीप 20% बिहाइंड। अपने को कंप्लीटली एग्जॉस्ट मत कर दो। ऐसा मत करो कि फिर घर में आकर मैं बिल्कुल फ्लैट हो जाऊं। कीप सम एनर्जी बिहाइंड। यदि एनर्जी बिहाइंड थोड़ी रखनी होगी ना तो अपनी ग्रीड पे थोड़ा कंट्रोल लाना होगा। हम जितना ज्यादा टाइम वहां पे बिताएंगे उतना ज्यादा प्रॉफिट मिलेगा। बट देन वी हैव टू मेक वन के एक बॉर्डर लाइन खींचनी है कि मुझे इतना प्रॉफिट हो गया। चलो अभी मैं घर जल्दी जा चला जाता हूं। मेरे पास में जो 20 यूनिट एनर्जी बचा है वो मैं स्पिरिचुअली मोटिवेटेड वर्क में लगाता हूं। साधना में लगाता हूं। वो साधना कुड बी एनीथिंग कि मैं किसी वो गरीब बस्ती में जाकर बच्चों को पढ़ाता हूं या तो फिर व्हाटएवर जप ध्यान करता हूं। पूजा पाठ करता हूं। मंदिर में जाता हूं। एनीथिंग दैट आई डू पॉजिटिवली विद डायरेक्टेड थॉट व्हिच इज साधना। तो मुझे पता है यह थ्यरी कि 100% यूनिट मैंने उसमें डाल दिया तो फिर मेरे पास कुछ नहीं बचेगा। फिर एग्जॉशन बचेगा। फिर स्कैटर थॉट बचेंगे। फिर उसको भुलाने के लिए मुझे एडिक्शन में जाना होगा। व्हिच इज़ नॉट एट ऑल गुड फॉर मी। सो कीप 20% बिहाइंड एंड यूटिलाइज इट टू इंक्रीस माय ज्ञाना। और फिर जैसे-जैसे समय जाता है जो 80% मैं वर्ल्डली पर्स्यूट में लगाता हूं। वर्ल्डली डायरेक्टेड थॉट है। इंट्रोड्यूस सम सॉर्ट ऑफ़ स्पिरिचुअल मोटिव देयर। सो दैट माय वर्क लाइफ इटसेल्फ ट्रांसफॉर्म्स इन सच ए मैनर। दैट दैट आई उसके बाद में ना यह स्पिरिचुअल सेकुलर का डिफरेंस चला जाएगा। दैट व्हाटएवर आई एम डूइंग इट इज स्पिरिचुअल। सो एज अ रिजल्ट व्हेनेवर आई रिटर्न होम माय माइंड विल बी फिल विद ज्ञाना। सो वंस वी अंडरस्टैंड द साइंस वी कैन डिप्लॉय डिफरेंट-डिफरेंट-डिफरेंट स्ट्रेटजीस।
प्रश्न: जब मैं गहन ध्यान करता हूँ, तो मुझे लगता है कि मेरी रीढ़ की हड्डी सीधी हो रही है, मैं तनावमुक्त और आराम महसूस करता हूँ। इसके बाद यदि मैं खाना पकाता हूँ, तो मैं बहुत अच्छा खाना पका सकता हूँ, उसका स्वाद भी बहुत अच्छा होता है। क्या बेहतर ध्यान के कारण काम में यह बेहतर परिणाम है? Q: when i have deep meditation, i feel my spinal cord straightening, i feel relaxed and rested. afterwards if i cook, i can cook very well, it tastes very good. is this better result in work due to better meditation?
कर्म और ज्ञान यह दोनों कर्म जब अपना स्पिरिचुअली मोटिवेटेड होगा या तो फिर कर्म हम साधना के रूप में करेंगे या तो फिर साधन रूपी कर्म करेंगे तो उससे ज्ञान प्रकट होगा और जितना ज्ञान प्रकट होगा उतना ही अपना जो कर्म है वह जो भी कर्म है वह ज्यादा से ज्यादा एफिशिएंट होता जाएगा और ज्यादा और फिर जितना हम स्पिरिचुअली मोटिवेटेड कर्म और करें तो और ज्यादा ज्ञान बढ़ेगा और ज्यादा ज्ञान बढ़ने से कर्म और ज्यादा एफिशिएंट होगा। यानी कि अपने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में इसकी इफेक्ट आपको दिखाई देगी। देखिए कोई-कोई लोग बहुत अच्छी ऐसे लोग होते हैं जिनके पास में जाकर के बैठने से ही आपका मन शांत हो जाता है। क्यों शांत होता है? ऐसा नहीं है कि कोई बहुत बुद्धि वाली बातें करते हैं या ऐसा कुछ है। उनको उनकी प्रेजेंस ही वो जैसे कि एक शांति फैलाती है चारों ओर। क्यों? बिकॉज़ कि उनके भीतर में धीरे-धीरे करके ज्ञान का प्रकाश बढ़ रहा है। भले ही इस तरह के आदमी स्पिरिचुअल ना भी हो। देखेंगे कि माने आउटवर्डली स्पिरिचुअल ना हो। फॉर्मली स्पिरिचुअल ना हो। किंतु ये तो साइंस है ना। वो साइंस आप वो बिलीव करें कि ना करें। साइंटिफिक प्रिंसिपल तो अपने कार्य करने ही वाले हैं। तो जैसे ही मन में शांति फैलेगी, मन में यह ज्ञान फैलेगा। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उसकी असर आपको दिखाई देगी। वह चाहे खाना बनाना हो, बच्चों की परवरिश हो कि नौकरी पर जाना है, शेयर मार्केट में जाना है, आपको डिस्पेंसरी में जाना है, क्लासरूम में जाना है, किचन में जाना है, वेयरवर यू गो। इसीलिए स्वामी जी कहते हैं ना कि वेदांत को मुझे ये गिरी कंदराओं से निकाल करके किसान की किसान के खेत में गृहिणी के किचन में ले जाना है। सो स्वामी जी हैज़ एक्चुअली प्रेडिक्टेड दैट कि किचन में जब तक वेदांत नहीं आता है तब तक तो वह वेदांत वहीं गिरी कंदराओं में पड़ा रहेगा। किसी काम का नहीं है। जैसे वो ठाकुर कहते हैं ना कि यदि आप
प्रश्न: मैंने अपने जीवन में देखा है कि ईश्वर कई अप्रत्याशित तरीकों से मेरी मदद कर रहे हैं। मैंने कई बार उनकी कृपा देखी है। Q: i have seen in my life that ishvar is helping me in many unexpected ways. i have seen his grace many times.
ईश्वर का ठीक-ठीक नाम लेंगे तो राजा दुष्ट लोग स्त्री यह सब वश में आ जाएंगे। अभी ये मास्टर महाशय को कहते थे इसलिए स्त्री का और मास्टर महाशय की स्त्री वो परेशान कर रही थी इसलिए स्त्री के साथ बात करते तो कहते उनके पति यानी कि मनुष्य को कौन कष्ट दे सकता है? जनरली तो फैमिली मेंबर है जो बाहर के जो गड़बड़ करने वाले लोग हैं तो ईश्वर का ठीक-ठीक नाम लेने से सब वश में आ जाएंगे। तो ऐसा है म पूरा जगत भी तो अल्टीमेटली एक कंस्ट्रक्ट है ना अपने माइंड के भीतर में। दिस इज द अल्टीमेट टीचिंग ऑफ वेदांता कि विश्वम दर्पण दृश्यमान नगरी तुल्यम निज अंतर्गतम। ये जो जगत हम देख रहे हैं सामने वो सब तो हमारे भीतर में है। सो वो कंस्ट्रक्ट को चेंज करना वो तो चुटकी भर का कार्य है। यदि हम भीतर में डेवलप करना शुरू करें। प्रॉब्लम हम लोगों के साथ में सबसे बड़ा क्या होता है ना कि विश्वास नहीं होता कि मैं यह टाइम दे रहा हूं ये सब चीजों के पीछे उसका कोई पॉजिटिव रिजल्ट आएगा कि भी नहीं आएगा। तो वी ऑलवेज ट्राई टू हैेज आवर बेड। माने इस तरह से करेंगे कि वह इंग्लिश में कहावत है कि हैव फेथ इन गॉड बट कीप योर पाउडर ड्राई। इसका अर्थ क्या है? यह जो जहाज लेकर के लोग जाते थे तो गन पाउडर रखते थे। अभी गन पाउडर क्या है कि चाहिए आपको कि वो जो लुटेरे वगैरह जो पायरेट आ जाए तो उनके ऊपर में गोला बारूद फेंकने के लिए गन पाउडर चाहिए। किंतु क्या है? वो जहाज का तो समुंदर का पानी हवा तो यह ह्यूमिड होता है। तो गन पाउडर यदि वो ह्यूमिड हो गया उसमें डैंप लग गया तो वो काम नहीं करेगा। तो उसको ड्राई रखने के लिए बड़ा मेहनत करना पड़ता है। तो कहते हैं कि हैव फेथ इन गॉड कि पायरेट नहीं आएंगे बट कीप योर पाउडर ड्राई। तो हम लोग क्या करते हैं कि विश्वास नहीं करते कि नहीं सही में यदि हम ईश्वर पे विश्वास करेंगे तो यह सब नहीं होगा। किंतु खैर ठीक है सी हमको इंप्रैक्टिकल भी नहीं होना है। दिस इज अ वेरी गुड एडवाइस कि कीप आवर पाउडर ड्राई। यह जो जगत में जो करना है वह करना है। दोनों हाथ से दो पकड़ना है। एक हाथ से जगत एक हाथ से ईश्वर। फिर जैसे-जैसे ईश्वर की ओर आगे जाते जाएंगे ना फिर ईश्वर ही हमारे पास में से ये जगत छुड़वा लेगा। फिर मेहनत करके छुड़वाने की जरूरत नहीं है। जैसे ठाकुर कहते हैं वह जो नारियल होता है उसका भीतर का वह समय होने से अपने से अलग हो जाता है। फिर आपको मेहनत करके निकालने की जरूरत नहीं है। सो मोर वी प्रोग्रेस टुवर्ड्स स्पिरिचुअलिटी मोर वी विल सी दैट वर्ल्ड एक्चुअली रिसोंड्स टू आवर डिमांड्स।