Skip to transcript
ClassesSaradakosh

Swami Vivekananda' Complete Life ·

Swami Vivekananda: Life and Teachings 10 Oct 2025

Prayer

ओम स्थापकाय च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपिणे अवतार वरिष्ठाय राम कृष्णायते नमः स्वामी विवेकानंद का जीवन जिसका हम पाठ कर रहे थे आठपुर तक हम पहुंचे हैं। अपने रामकृष्ण संघ की कुछ अति महत्वपूर्ण घटनाओं में से आठपुर का भी उल्लेख आता है। इसमें ऑलरेडी हमने डिस्कस कर लिया कि किस तरह से यह गुरु भाई नौ गुरु भाई श्री रामकृष्ण देव के नौ त्यागी संतान आठपुर आए हुए हैं। बाबूराम महाराज स्वामी प्रेमानंद जी की माता जी ने उनको आह्वान किया है। वहां पर रहेंगे। सुंदर ग्राम का वातावरण है। शांति है। सुनहरी जगह है। ग्रीनरी है। चारों ओर प्रकृति की रमणीयता है। ब्यूटी ऑफ नेचर है। वहां पर रहेंगे और वहां पर जब ध्यान करेंगे। तो यह सब चल रहा था। उसमें एक अति महत्वपूर्ण दिन आकर के उपस्थित हुआ। एक दिन संध्या के बाद में अंधेरा हो

प्राचीन धर्म और नये धर्मों का संघर्ष

चुका है। आकाश में तारे जगमगा रहे हैं। और एक एकांत वीरान जगह पर धनि जला करके यह गुरु भाई बैठे हुए हैं। पहले तो जब ध्यान हुआ उसके बाद में कुछ शास्त्र चर्चा हुई और उसके बाद में थोड़ा बहुत वार्तालाप हो रहा है। उस समय नरेंद्र अर्थात स्वामी विवेकानंद ने जीसस क्राइस्ट के जीवन के कुछ-कुछ घटनाओं का वर्णन प्रारंभ किया। किस तरह से उनके जीवन में त्याग, तपस्या और सैक्रिफाइस भरा हुआ था। और उसके वर्णन के बाद में किस तरह से यह सेंट पॉल जैसे जीसस के वो जो डिसाइपल्स थे, एपोस्टल्स थे उन्होंने पूरे विश्व में फेल करके जीसस का मैसेज दिस न्यू टेस्टामेंट एक न्यू मैसेज उसको फैलाना शुरू किया। देखिए ये हमेशा ऐसा होता है कि ओल्ड रिलीजन एंड न्यू रिलीजन। ओल्ड रिलीजन जो होता है उसको हम यूजुअली स्टेटस को रिलीजन कहते हैं। वो एक तरह का स्ट्रेटिफिकेशन परपेचुएट करता है सोसाइटी में। जो धनी है वे लोग धनी ही रहेंगे और जो गरीब है वे लोग गरीब ही रहेंगे। यह एक ओल्ड रिलीजन चाहता है। क्यों? क्योंकि यह धनी लोग चर्च को या तो टेंपल को या तो फिर यह रिलीजियस ऑर्गेनाइजेशन को डोनेशन देते रहते हैं। तो यह जो रिलीजियस लीडर होते हैं उनके माइंड में हमेशा यही रहता है कि यह धनी लोगों का वर्चस्व फैला रहे। ऐसा ही हमको करना है। आइरोनिकली देखिए कि यह जो सोशल स्ट्रेटिफिकेशन था जिसके अगेंस्ट में अर्ली क्रिश्चियनिटी खड़ी थी। वही क्रिश्चियनिटी आखिर में विदिन 2000 इयर्स 1800 इयर्स एक स्टेटस को वो पावर होकर के रह गया। इसीलिए कार्ल मार्क्स कहता है कि रिलीजन इज द ओपियम ऑफ पीपल। धर्म जो है लोगों के लिए एक नशे की तरह है। आप धर्म का नाम लेकर के लोगों को जितना ही उनके ऊपर में अत्याचार करते रहिए। लोग वो अत्याचार को सहन करते ही रहेंगे। आजकल के जगत में आप देखिए कि जो ओल्ड रिलीजन है सब तरह के रिलीजन में यही है कि सोशल स्ट्रेटिफिकेशन जो है सोशल क्लास सिस्टम जो है वह चाहे कास्ट के ऊपर में बनी हो ना कि चाहे वेल्थ के ऊपर में बनी हो ना कि चाहे आपकी यह जो लीनिएज है उसके ऊपर में बनी हो किंतु यह इस तरह की सिस्टम को परपेचुएट करना यही सब ओल्ड रिलीजन करते हैं। कोई भी एक नया रिलीजन होता है, वह बिजली की तरह एक वाइल्ड फायर की तरह लोगों में कब फैलता है? जबकि वह डाउन ट्रोडन एंड फोलन जो गरीब है, पददलित है, प्रताड़ित है, जिनके ऊपर में अत्याचार हो रहा है, उनका पक्ष लेकर के जब कोई बात करेगा धर्म तो वह धर्म जैसे कि वाइल्ड फायर की तरह फैलता है। यह क्रिश्चियनिटी के बारे में शुरू में ऐसा ही कहा जाता था। इट इज द रिलीजन ऑफ वुमेन एंड स्लेव्स। अर्थात कि देखिए कि रोमन सोसाइटी थी उस समय की और इवन यहां जो यह नियर ईस्ट वगैरह जो कहा जाता है वो म सिर्फ रोमन और या सिर्फ मिडिल ईस्ट कहां जगत में जनरली उस समय ऐसा ही होता था ज्यादातर जगहों पे कि जो स्लेव होते हैं यानी कि जो गुलाम होते हैं और जो स्त्रियां होती हैं इन दोनों का स्थान समाज में सबसे निम्न वो जगह पे होता है और उच्च से उच्च स्तर उच्चतर स्थान किसका होता है? पुरुषों का होता है। उसमें भी रूलिंग फैमिलीज होते थे कुछ उन लोगों का होता है। तो देखिए कि क्रिश्चियनिटी प्रारंभ में जो फैला वो स्लेव्स के भीतर में ही फैला। वुमस के भीतर में ही फैला। स्त्रियों में और गुलामों में। क्यों? क्योंकि उनको सबसे ज्यादा जरूरत थी भीतर में से एक सस्टेनेंस प्राप्त करने की। एक डिवाइन सस्टेनेंस उनको चाहिए था। बोलकर के यह क्रिश्चियनिटी उसमें फैला था। अभी आप देखिए कि अपना जो स्वामी जी ने जो कहा बड़ी फेमस घटना है। एक दिन की बात है स्वामी जी उस समय अमेरिका में थे और भारत में दक्षिणेश्वर में ठाकुर का जन्मदिन उत्सव मनाना मना मनाए जाने वाला था कि वह सब प्लानिंग चल रहा था कि ठाकुर की बर्थडे आ रही है तो दक्षिणेश्वर में धूमधाम से यह उत्सव उनका मनाएंगे। जन्मतिथि का ये पालन करेंगे क्योंकि ऑलरेडी स्वामी जी अमेरिका में बाय दैट टाइम फेमस हो चुके हैं। तो वैसे ही तो ठाकुर की बर्थडे सेलिब्रेशन एव्री ईयर होती ही थी और आज सब काफी संख्या में डिवोटी आते भी थे। किंतु अभी तो स्वामी जी वर्ल्ड फेमस है। अमेरिका में है तो कितने लोग वहां पे आएंगे। तो यहां पे कोलकाता में सब आयोजन हो रहा है। उसमें से एक लेटर स्वामी जी के पास में गया कोलकाता में से। किसी ने कंप्लेन किया किसी भद्र कोई एक डिवोटी था एक जेंटलमैनली डिवोटी उसने एक कंप्लेन किसी को किया होगा तो इस तरह की कंप्लेंट स्वामी जी के पास में किसी ने भेजी कि कोई कोई डिवोटी कह रहे हैं कि ठाकुर की जन्मतिथि उत्सव में पूजा में उस दिन क्या है कि जिसका चरित्र अच्छा नहीं है ऐसी स्त्रियां भी आती है तो इसके लिए हम लोग अपने फैमिली को लेकर के वहां पे नहीं जाना चाहते और इस तरह की स्त्रियों का वहां पर आना बंद करवा दीजिए तो हम लोग अपने फैमिली को ले आ पाएंगे। तो स्वामी जी ने सामने में लिखा कि यह जो इस तरह की स्त्रियां जिसका चरित्र अच्छा नहीं है। यह पद दलित है। यह दरिद्र नारायण है। यह मूर्ख नारायण है। चंडाल नारायण है। उनके लिए तो ठाकुर आए हैं। यह भद्र लोगों को यदि ऐसा लगता है कि उन लोगों के आने से उनको आने की फैमिली को लेकर के नहीं जाना चाहते तो वे लोग मत जाए। ठाकुर आए ही है इसलिए इस तरह के लोगों के लिए पापी तापी प्रताड़ित पदलित लोगों के लिए ही ठाकुर आए हैं। नहीं कि आपका यह आपकी यह जो मिडिल क्लास सेंसिटिविटी है आपका यह क्लास कॉन्शियसनेस है, आपकी कास्ट कॉन्शियसनेस है, उसको लेकर के आप वहां पे आए और यह जो हजार साल से भारत डूबा हुआ है, जिस तमस रूपी गड्ढे में उसी तमस रूपी गड्ढा आप वहां पे भी दक्षिणेश्वर में भी खोदे। इस तरह से करने की कोई जरूरत नहीं। यह भद्र लोगों को कहो कि अपने घर में ही रहे और जितने पापी तापी प्रताड़ित पद दलित है उन सबको दक्षिणेश्वर जाने दो। तो देखिए कि कोई भी एक नया रिलीजन है वो इस तरह से कास्ट बैरियर हो, क्लास बैरियर हो, रूलर एंड रूल्ड हो, धनपति और स्लेव हो। तो इस तरह की यह जो स्ट्रेटिफिकेशन होती है सोसाइटल उसको तोड़कर के ही नया धर्म प्रारंभ होता है। और इसीलिए हमेशा ओल्ड रिलीजन और न्यू रिलीजन इन दोनों में एक तरह का क्फ्लिक्ट बना ही रहेगा। अर्ली क्रिश्चियनिटी में हम इस बात को स्पष्ट रूप से देख पाते हैं। इवन बुद्धिज्म में भी आप देखिए कि बुद्धिज्म स्वामी जी ने खुद ने कहा है कि बुद्धिज्म इज ए रेबेल चाइल्ड ऑफ हिंदूइज़्म। क्यों? क्योंकि हिंदू धर्म में भी उस समय यह स्ट्रेटिफिकेशन है, क्लासिफिकेशन है, वह सब प्रवेश कर गया था। यह स्क्लेरोसिस जिसको बोलते हैं, वह सब हिंदू धर्म में प्रवेश कर गया था कि ब्राह्मण लोग बड़े-बड़े यज्ञ करेंगे और यह क्षत्रिय लोग हैं उनको पूजते रहेंगे और यह ब्राह्मण, क्षत्रिय, यज्ञ और युद्ध ऐसे में ही पूरा समाज चलता था। यह बेचारे जो निम्न वर्ण के तथाकथित निम्न वर्ण के लोग थे उन लोगों के लिए जैसे कि उनका शोषण हो रहा है। उनके पर अत्याचार हो रहा है। दिन प्रतिदिन गरीबी की चक्की में पीसे जा रहे हैं। उसके प्रति किसी का ध्यान नहीं। बोलकर के ही तथागत भगवान बुद्ध ने जब आकर के यह कहा कि यह आत्मज्ञान या तो निर्वाण की चाबी हमारे हृदय में ही छुपी हुई है। यह पंडित ब्राह्मण ये विधि विधान ये वो सब इसके पीछे दौड़ने से कोई आपको मुक्ति नहीं मिलने वाली। या तो फिर चलो मान लिया कि इसके पीछे दौड़ने से मुक्ति मिलेगी भी सही। किंतु नहीं भी आप जाएंगे तो मुक्ति का एक दूसरा भी रास्ता है जो कि अपने अंतर्मन में से प्रारंभ होता है। यह आध्यात्मिक यात्रा अपने हृदय में से ही प्रारंभ होती है। हृदय में ही उसका अंत आता है। आत्मदीपो भव अपना खुद का उजाला हम स्वयं बने। आध्यात्मिक पाथ प्रदर्शक हम खुद अपने आप के हैं। तो देखिए कि यह भगवान बुद्ध का यह मैसेज जो कि उन्होंने संस्कृत भाषा में नहीं देकर के वहां की जो वर्नाकुलर लैंग्वेज थी, पाली थी वगैरह उसमें उन्होंने देना शुरू किया। जैसे कि लोगों में ज्यादा से ज्यादा फैले। सो दिस कॉन्फ्लिक्ट विल ऑलवेज रिमेन। हिंदू धर्म के साथ में हम लोगों हम लोग इसी तरह की एक गलती में उस समय भी फंस गए थे जिसकी वजह से भगवान बुद्ध को आना पड़ा था और इस बार भी वही प्रॉब्लम में हम लोग फिर से फंसे जबकि यह बाहर से इस्लाम और क्रिश्चियनिटी आए और उन्होंने यहां पर इतना सारा पैर फैला दिए हैं। अभी आज हमको गुस्सा आता है कि यह लोग यहां पर कन्वर्जन क्यों कर रहे हैं? किंतु देखिए भाई जब तक आप अपने घर को ठीक नहीं करेंगे अपने घर में ही आपका झगड़ा होता रहेगा और फिर बाहर से एक आदमी आकर के कहेगा हम दोनों भाई आपस में झगड़ रहे हैं तो एक भाई को जाकर कहेगा कि मैं तुमको हेल्प करता हूं जाकर तुम दूसरे भाई को मारो तो फिर अभी देखिए अपना ही भाई अपने को मारने को आता है तो हम दोष किसका देख देखेंगे वो बाहर से जो आदमी आया जिसने उस भाई को भड़काया उसका दोष है ना कि हम दोनों भाई का दोष दोष है ना कि मेरा खुद का दोष है कि मैं उसके साथ झगड़ रहा हूं। सो यह सब कॉम्प्लिकेटेड सोशल डायनेमिक्स यह सब चलते हैं और इसीलिए स्वामी जी ने कहा कि अग्रेसिव हिंदूइज्म इस तरह का हिंदू धर्म जो कि सबसे पहले तो अपने घर को ठीक-ठाक करें और फिर पूरे विश्व में यह शांति और आनंद का संदेश प्रसारित करें। तो

Vivekananda: my idea is the conquest of the whole world by the Hindu race.

कल हमने जो कुछ पढ़ा था उसी के रिलेटेड स्वामी जी का एक पैसेज मैंने खोजा है। वर्क बिफोर अस बोलकर के स्वामी जी का लेक्चर फ्रॉम कोलंबो टू अल्मोड़ा में दिया हुआ एक भाषण है। स्वामी जी अमेरिका से वापस आए विश्वविजय होकर के और उन्होंने भारत में यात्रा प्रारंभ की। कोलंबो अर्थात कि आज का श्रीलंका वहां पर वो उन्होंने वहां पर वह जहाज में से उतरे और फिर साउथ इंडिया से नॉर्थ इंडिया की जर्नी की जगह-जगह पर भाषण दिए। वह प्रत्येक भाषण अमर हो चुका है। स्वामी जी का कोई एक चेला होगा तो ऐसा हो ही नहीं सकता कि उसने यह लेक्चर फ्रॉम कोलंबो टू अल्मोड़ा ना पढ़ा हो। मुझे याद है मैंने रंगनाथानंद जी से दीक्षा ली थी। तो उस दीक्षा के फॉर्म में लिखा गया था कि आपको माने बाकी तो दो-तीन किताबें थी। ठाकुर का कथामृत है। ठाकुर मां स्वामी जी का शॉर्ट लाइफ वगैरह है। किंतु दो किताबें पढ़ने पे महाराज जी ने स्पेशली उन्होंने यह एफेसाइज किया था। क्या? लेटर्स ऑफ स्वामी विवेकानंद एंड लेक्चर फ्रॉम कोलंबो टू अल्मोड़ा। तो यह लेक्चर फ्रॉम कोलंबो टू अल्मोड़ा में से मद्रास में दिए हुए भाषण में से एक भाषण है द वर्क बिफोर अस। इसमें स्वामी जी का बड़ा ही सुंदर पैसेज है। इसी के बारे में कि किस तरह से यह अग्रेसिव हिंदूइज़्म दिस दिस रिफॉर्म्ड हिंदूइज़्म काम करेगा। ये ओल्ड रिलीजन जो कि स्ट्रेटिफिकेशन है, क्लासिफिकेशन है, एक तरह की क्लोज्ड मेंटालिटी है, उसको परिपुष्ट करता है और एक आइकोनोक्लास्टिक एक ग्राउंड ब्रेकिंग इनोवेटिव रिलीजन है। वो Facebook है ना वो Facebook का फाउंडर ये मार्क जुकरबर्ग। वो कहता है मूव फास्ट एंड ब्रेक थिंग्स। अर्थात कि एकदम झड़प से चलो और चीजों को तोड़ो। यानी यह जो मल्टीीनेशनल कंपनी होती है उन लोगों को क्या है खास करके टेक सेक्टर में कंटीन्यूअस नई प्रोडक्ट या तो अपग्रेड प्रोडक्ट डेवलप करनी पड़ती है और जो प्रोडक्ट ऑलरेडी एग्जिस्टिंग है कंटीन्यूअसली उसको अपग्रेड करना पड़ता है तो नहीं करेंगे तो सीधा आप खत्म हो जाएंगे वहां पर कट थ्रोट कंपटीशन है टेक सेक्टर में तो वो कहता है कि मूव फास्ट एंड ब्रेक थिंग्स अदरवाइज आपका काम नहीं होगा तो यह अग्रेसिव हिंदूइज़्म भी इस तरह तरह का है। मूव फास्ट एंड ब्रेक थिंग्स अर्थात कि फैलो पूरे विश्व में और यह जो सोशल स्ट्रेटिफिकेशन है जो कि एक भाई को दूसरे भाई से अलग करके रखता है इसको तोड़ दो। तो यह बड़ा सुंदर पैसेज है। मैं थोड़ा पढ़ता हूं उसमें से। क्या कहते हैं स्वामी जी? देयर इज द ट्रेमेंडस पावर ऑफ इंग्लैंड व्हिच हैज़ लिंक द डिफरेंट पार्ट्स ऑफ द वर्ल्ड टुगेदर। यह जो ब्रिटिश राज्य था उस समय का उसके भीतर में एक प्रचंड शक्ति थी। हम हिस्ट्री पढ़ के हमको पता है कि यह जो वेस्टर्न यूरोप है उसमें किस तरह से एक के बाद एक डेवलपमेंटल स्टेजेस होना शुरू हुए। एक तो था रेनेसा अर्थात कि रिब्थ ऑफ लर्निंग। उसके बाद में था यह साइंटिफिक रेवोल्यूशन अर्थात कि एक के बाद एक ग्राउंड ब्रेकिंग साइंटिफिक डिस्कवरीज। वो होने लगी। उसके बाद में प्रारंभ हुआ यह इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन अर्थात कि यह मींस ऑफ प्रोडक्शन उसको रेवोल्यूशनरी बेसिस पे उन्होंने इस तरह से मैन्युफैक्चर करना शुरू किया कि जैसे कि आउटपुट है, प्रोडक्टिविटी है वो 100 थाउजेंड टाइम्स बढ़ जाए। और उसके बाद में था यह एज ऑफ नेविगेशन अर्थात कि यह एज ऑफ एक्सप्लोरेशन कि किस तरह से वहां के यह जो सेलर्स थे यूरोप के उन्होंने सात समुंदर यात्रा करके एक्सप्लोर करके ये एशिया है अफ्रीका है ये न्यू वर्ल्ड है नॉर्थ एंड साउथ अमेरिका उसको उन्होंने सी लेन से जोड़ा और फिर इसी माने ये सब जो यूरोप में एक के बाद एक इवेंट्स हो रही थी रेनेसा फिर ये साइंटिफिक रेवोल्यूशन, यह इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन, फिर यह एज ऑफ एक्सप्लोरेशन। तो यूरोप को उसने प्रचंड शक्तिशाली बना दिया था। साइंस, टेक्नोलॉजी एक्सप्लोरेशन, ये पॉलिटिकल पावर, ये मिलिट्री पावर, ये इंडस्ट्रियल पावर सब कुछ उन लोगों के हाथ में था। यह न्यू और ये एशिया और अफ्रीका की हालत देखिए। एशिया की खास करके कि हजारों सालों पुरानी सिविलाइजेशन थी। किंतु इसके भीतर में यह टॉक्सिसिटी जिसको कहते हैं इसको जिसको कहेंगे इनब्रीडिंग। इनब्रीडिंग यानी कि एक्चुअल इनब्रीडिंग नहीं किंतु फिलॉसोफिकल इनब्रीडिंग यानी कि एक ही तरह की फिलॉसोफी को लेकर के यह शंख चक्र गदा पद्म पद्म चक्र शंख गदा स्वामी जी कहते हैं उसी को लेकर के इतना लंबा लंबा खींचेंगे कि आखिर में फिलॉसोफी में से सब तरह का सत्व सब तरह का लाइवलीस चला जाएगा और यह सिर्फ डेड फार्मूलास बन के रह जाएगी। तो यह ईस्ट में हो रहा था। यहां पे ये चाइनीस सिविलाइजेशन है। एंशिएंट सिविलाइजेशन ये जापानीज सिविलाइजेशन थी। ये कोरियन सिविलाइजेशन थी। ये इस्लामिक सिविलाइजेशन थी। ये रशियन सिविलाइजेशन सब पुरानी-पुरानी सभ्यता है। और ये उसके सामने यूरोप तो भी बच्चा है। किंतु इसके बावजूद ऑफ कोर्स अपनी इंडियन सिविलाइजेशन इतना होने के बावजूद यूरोप में वो जो ग्राउंड ब्रेकिंग डिस्कवरी हो रही थी। तब यह सभी ईस्टर्न सिविलाइजेशन तमस रूपी निद्रा में सोई हुई थी। और जब आखिर में यह यूरोपियन आए उन्होंने आक्रमण किया। उन्होंने यह जोर जबरदस्ती ट्रेड कंसेशन लिए उन्होंने जबरदस्ती ये ईस्ट के ऊपर में वेस्टर्न वैल्यू्यूज थोपना शुरू किया। तब कहीं जाकर के सब नींद से जगे। कुछ-कुछ सिविलाइजेशन थी है कि उन्होंने वेरी वेल अपने को एडप्ट कर दिया। यह न्यू रियलिटी के साथ में सबसे बड़े एग्जांपल है जापान इटसेल्फ। स्वामी जी के समय में ही हमने देखा कि एक बार जापान नींद से जगा तो फिर उसने भी यह यूरोप की तरह ही मिलिटरी इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स आजकल जिसको कहते हैं वो उसको उसने वो किक स्टार्ट कर दिया। इवन स्वामी जी बड़े इंप्रेस हो गए थे। तो देखिए कि चाइना ने अपने तरह से रिसोंड किया है। कोरिया ने अपनी तरह से रिसोंड किया है। यह इस्लामिक कंट्रीज है। खास करके गल्फ कंट्रीज, अरब कंट्रीज उन्होंने अपने हिसाब से रिसोंड किया है। रशिया ने अपने हिसाब से किया है। इंडिया ने अपने हिसाब से किया है। कौन कहां तक पहुंचा है वह तो अभी देख ही रहे हैं हम न्यूज़ पेपर पढ़ के। किंतु स्वामी जी यह चाहते थे कि जिस तरह से यूरोप ने यह ग्राउंड ब्रेकिंग डिस्कवरीज करके यह पूरे जगत को जब एक ही मायाजाल से जोड़ा है। एक ही मीन्स ऑफ कम्युनिकेशन से जोड़ा है। आज ट्रैवल आप एक देश से दूसरे देश ट्रैवल करना चाहे तो बड़ा आसान हो गया है। आप इंग्लैंड से भारत में न्यूज़ भेजना चाहे मैसेज भेजना चाहे तो टेलीग्राम है पोस्ट है वह सब आसानी से पहुंच सकता है। अमेरिका में जाकर के स्वामी जी अपने गुरु भाइयों को लिखते हैं यह मूंग की दाल है। अड़द की दाल है। अरहर की दाल है। यह सब दाल भेजो। फिर यह किताबें हैं। यह शास्त्र, वह शास्त्र, वह किताबें भेजो, शतरंजी भेजो, कारपेट भेजो। वगैरह करके स्वामी जी डिमांड करके लेटर लिखते हैं और वह सब आ भी जाता है। यह जो कितना एक यह हो गया है रिश्योरेंस हो गया है। ट्रेड कॉमर्स कम्युनिकेशन मींस ऑफ ट्रैवल यह जो यूनिटी एक ग्लोबल यूनिटी जो इस वेस्टर्न सिविलाइजेशन ने खड़ी की है। स्वामी जी कहते हैं कि जितनी बार इस वेस्टर्न कंट्रीज ने या तो कोई भी कंट्री हो उन्होंने जगत को जोड़ा है साथ-साथ में ही भारत में से भारतीय आध्यात्मिकता हिंदू स्पिरिचुअलिटी पूरे विश्व में फैली है। यहां पे तो स्वामी जी वैसे सिर्फ वेस्टर्न कंट्रीज की बात करते हैं। एलेग्जेंडर जब अटैक करने के लिए आक्रमण करने के लिए ईस्ट आया तो उसके जनरल ने जो रास्ते बनाए थे उसी रास्तों में से यह अपना हिंदूइज़्म वो वहां पर गया और उसी में से यह बाद में क्रिश्चियनिटी डेवलप हुआ और फिर यह देखिए कि मोंगोल एंपायर जब यह मोंगोल्स ने यह जगत को कनेक्ट किया था तो उसी ये जो सिल्क रूट कहा जाता है यह मोंगोल वॉर पाथ जो थे उसके माध्यम से अपना बुद्धिज्म फैला था। यहां आप साउथ एशिया में देखिए कि यह जो स्पाइस रूट है ये जो स्पाइस आइलैंड जो सब है जावा सुमात्रा फिलीपींस ये इंडोनेशिया सिंगापुर वगैरह वो वहां से ये यूरोप में जो स्पाइस जाते थे तो ये स्पाइस रूट से भी अपना हिंदूइज़्म और बुद्धिज्म फैला है। आप थोड़ा सा भी वहां का हिस्ट्री देखेंगे। वहां का आर्किटेक्चर, वहां का कल्चर, रिलीजन स्टडी करेंगे। हिंदूइज़्म और बुद्धिज्म की स्पष्ट छाप आपको दिखाई देगी। तो यहां पे स्वामी जी कहते हैं कि देयर इज द ट्रेमेंडस पावर ऑफ इंग्लैंड व्हिच हैज़ लिंग द डिफरेंट पार्ट्स ऑफ द वर्ल्ड टुगेदर। इंग्लैंड में प्रचंड शक्ति है जिसकी मदद से उन्होंने जगत के विभिन्न जो पार्ट्स है उसको जॉइ किया है, कनेक्ट किया है। इंग्लिश रोड्स नो मोर आर कंटेंट लाइक रोमन रोड्स टू रन ओवर लैंड्स बट दे हैव आल्सो प्लग द डीप इन ऑल डायरेक्शंस। रोमन रोड जो कि सिर्फ जमीन पर ही चलते थे। इससे संतुष्ट नहीं होकर के इंग्लिश रोड्स और चैनल ऑफ कम्युनिकेशन है वह समुंदर की गहराइयों को नापते हुए जगत को जोड़ता है। फ्रॉम ओशन टू ओशन रन द रोड्स ऑफ इंग्लैंड। समुंदर से समुंदर तक यह इंग्लैंड के यह रोड जो है रास्ते जो है वह फैले हुए हैं। द नेट शिपिंग नेटवर्क मेरिटाइम नेटवर्क पूरे विश्व में फैला हुआ है इंग्लैंड का। एव्री पार्ट ऑफ द वर्ल्ड हैज़ बीन लिंक टू एव्री अदर पार्ट एंड इलेक्ट्रिसिटी प्लेस द मोस्ट मार्वेलस पार्ट एस द न्यू मैसेंजर। जगत का प्रत्येक अंग प्रत्येक हिस्सा दूसरे हिस्से के साथ में जुड़ा हुआ है और इलेक्ट्रिसिटी इस पूरे नेटवर्क में एक बड़ा ही अद्भुत कार्य कर रही है। अंडर ऑल दिस सरकमस्ट्ससेस वी फाइंड अगेन इंडिया रिवाइविंग एंड रेडी टू गिव हर कोटा टू द प्रोग्रेस एंड सिविलाइजेशन ऑफ द वर्ल्ड। इस जैसे ही यह जगत जागृत हो गया है, इंटरकनेक्टेड हो गया है, एक ग्लोबलाइजेशन फैला है, साथ-साथ में ही भारत ने जागृत होकर के अपनी आध्यात्मिकता इसी रास्तों के माध्यम से जगत में फैलाने का प्रारंभ किया है। एंड दैट आई हैव बीन फोर्स्ड, एज इट वेयर बाय नेचर टू गो ओवर एंड प्रीच टू अमेरिका एंड इंग्लैंड इज द रिजल्ट। और इसका परिणाम यह है कि आई हैव बीन फोर्स। स्वामी जी कहते हैं ऐसा नहीं है कि मैं इच्छा करके गया हूं। जैसे मुझे धक्का मार के वहां पर भेजा गया है और जो भारतीय आध्यात्मिकता का ब्रिटेन और अमेरिका में मैंने प्रचार किया वो इसी बात का रिजल्ट है कि भारत जागृत हो गया है। जितनी बार यह जगत को ग्लोबलाइज यूनिटी में बांधा जाता है, उतनी बार भारत जागृत होकर के अपनी आध्यात्मिकता विश्व में फैलाता है। एवरीवन ऑफ अस ओ टू हैव सीन दैट द टाइम है अराइव्ड। हम सबको देखने की जरूरत है कि समय आ पहुंचा है। एवरीथिंग लुक्स प्रोपिशियस एंड इंडियन थॉट फिलॉसोफिकल एंड स्पिरिचुअल मस्ट वंस मोर गो ओवर एंड ककर द वर्ल्ड। सब कुछ हमको ऑस्पिशियस दिख रहा है और फिर से समय आया है कि भारतीय विचारधारा आध्यात्मिक और दर्शन शास्त्र दोनों को अगेन वंस मोर कंकर द वर्ल्ड देखिए स्वामी जी शब्द प्रयोग करते हैं विश्व पे विजय प्राप्त करना है। ऐसा नहीं है कि ही वी हैव टू स्प्रेड थ्रूउ द वर्ल्ड। स्वामी जी कहते हैं ककर द वर्ल्ड जगत पर विजय प्राप्त करना है। द प्रॉब्लम बिफोर अस देयर फॉर इज अस्यूमिंग लार्जर प्रोपोर्शनंस एवरीडे। हमारे सामने जो प्रॉब्लम्स है, समस्याएं हैं, दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इट इज नॉट ओनली दैट वी मस्ट रिवाइव आवर कंट्री। दैट इज अ स्मॉल मैटर। बात सिर्फ यह नहीं है कि यह सोए हुए भारत को जगाना है। वो तो छोटी बात है। देखिए स्वामी जी का विज़न। आई एम एन इमेजिनेटिव मैन। मैं एक स्वप्नदृष्टा आदमी हूं। एंड माय आइडिया इज द कॉन्क्वेस्ट ऑफ द होल वर्ल्ड बाय द हिंदू रेस। और मेरा विचार है मेरा आईडिया है पूरे विश्व का हिंदुओं के द्वारा विजय। देयर हैव बीन ग्रेट कॉकरिंग रेसेस इन द वर्ल्ड। इस जगत में और भी विजेता रेसेस विजेता लोग आए हुए हैं। यह रोमन ये नेपोलियन ये हिटलर ये मोंगोल्स ये कितने ये मुगल इवन ये राजा अशोक ये कितने ही लोग थे जिन्होंने विश्व पे विजय प्राप्त करने का प्रयास किया है। कुछ समय तक सक्सेसफुल भी हुए हैं। द स्टोरी ऑफ आवर कॉन्क्वेस्ट हैज़ बीन डिस्क्राइब्ड बाय दैट नोबल एपरर ऑफ इंडिया अशोक एस द कॉन्क्वेस्ट ऑफ रिलीजन एंड स्पिरिचुअलिटी। किंतु देखिए कि बाकी जितने भी कंकरर्स थे विश्व विजेता थे उन्होंने आर्मी के माध्यम से युद्ध के माध्यम से खुनामरकी के माध्यम से विश्व को विजय करने का प्रयास किया। किंतु भारत भारत ने अपनी आध्यात्मिकता के माध्यम से धर्म के माध्यम से विश्व को विजय करने का प्रयास किया है और हम बहुत अंश तक सफल भी हुए थे। वही राजा अशोक जिसने एक बार देखा कि हां युद्ध क्षेत्र में किस तरह की तबाही फैलती है। किस तरह से लोगों पर अत्याचार होता है। लोगों को कष्ट सहन करना पड़ता है। तब उसका हृदय परिवर्तन हुआ। उसने बुद्ध धर्म अंगीकार किया, स्वीकार किया और सभी विश्व विश्व के उस समय के जितने भी देश थे सब जगह पे बुद्धिस्ट एंबेसी उसने भेजी। बुद्धिस्ट एंबेसडर्स उसने भेजे थे। वंस मोर द वर्ल्ड मस्ट बी ककरर्ड बाय इंडिया। तो वो जो बुद्धिज्म जिस तरह से भारत में से प्र पूरा विश्व में फैला था वैसे ही वंस मोर फिर से एक बार विश्व पे भारत को विजय प्राप्त करना है। दिस इज द ड्रीम ऑफ माय लाइफ। यह है मेरे जीवन का स्वप्न। एंड आई विश दैट ईच वन ऑफ यू हु हियर मी टुडे विल हैव द सेम ड्रीम इन योर माइंड्स। और मैं आशा रखता हूं आज जो लोग कि मुझे सुन रहे हैं आपके मन में भी यही एक सपना जागृत हो एंड स्टॉप नॉट टिल यू हैव रियलाइज द ड्रीम और जब तक विश्व पे भारतीय धर्म का हिंदू धर्म का विजय प्राप्त ना हो तब तक आपको रुकना नहीं है। दे विल टेल यू एवरीडे दैट वी हैव बेटर लुक टू आवर ओन होम्स फर्स्ट एंड देन गो टू वर्क आउटसाइड। लोग आपको कहेंगे कि सबसे पहले अपने घर की चिंता करो। सबसे पहले यहां जो करोड़ों लोग गरीब है, भुखमरी में मर रहे हैं। जब फेमिन आता है तो यहां पर लाखों लाखों लोग मर जाते हैं। तो यह जो डेस्पिरेट परिस्थिति है, उसको पहले ठीक करो। ऐसा लोग प्रैक्टिकल लोग आपको कहेंगे। एंड देन गो टू वर्क आउटसाइड। पहले अपना घर ठीक करो फिर बाहर जाकर के काम करना। बट आई विल टेल यू इन प्लेन लैंग्वेज। दैट यू वर्क बेस्ट व्हेन यू वर्क फॉर अदर्स। किंतु मैं आपको स्पष्ट शब्दों में कहना चाहता हूं कि यू वर्क बेस्ट व्हेन यू वर्क फॉर अदर्स। आप जब जब जहां तक आप दूसरों के लिए काम करते हैं तब तक आप सर्वश्रेष्ठ कार्य करते हैं। देखिए कितना पावरफुल स्टेटमेंट है। यू वर्क बेस्ट व्हेन यू वर्क फॉर अदर्स। आज मैं अपने सेल्फिश परपज के लिए जो कुछ भी करता हूं, जो कुछ भी ना कर दूं किंतु जिस क्षण मैंने दूसरों के लिए काम करना शुरू किया और मैं अपने लिए काम करता हूं सेल्फिश पर्पस के लिए और सेल्फलेस पर्पस के लिए आसमान जमीन का अंतर हो जाएगा। द बेस्ट वर्क दैट यू एवर डीड फॉर योरसेल्फ वास व्हेन यू वर्क फॉर अदर्स। देखिए आप अपने लिए सर्वश्रेष्ठ कार्य तभी करते हैं जब कि आप दूसरों के लिए कार्य करते हैं। यानी कि अपना खुद का सेल्फिश पर्पस भी सॉल्व करना चाहते हैं तो भी वह दूसरों को हेल्प करके ही होगा। ट्राइंग टू डिसमिनेट योर आइडियाज इन फॉरेन लैंग्वेज बिय्ड द सीज़ एंड दिस वेरी मीटिंग इज प्रूफ हाउ द अटेम्प्ट टू एनलाइटन अदर कंट्रीज विथ योर थॉट्स इज हेल्पिंग योर ओन कंट्री। दूसरे देशों को विदेशी भाषा में अपने विचारों को स्प्रेड करना यह सर्वश्रेष्ठ कार्य हमने किया है और इससे देखें कि फायदा क्या हो रहा है। यह जो मीटिंग जो यहां पर बनी है यह मद्रास में जिस मीटिंग में स्वामी जी बोल रहे थे दिस मीटिंग इज द प्रूफ कि मैं विदेश में जाकर के विद सेल्फलेस पर्पस के लिए मैंने जो कार्य किया उसका इतना बड़ा इंपैक्ट भारत में हुआ है। हाउ द अटेमप्ट टू एनलाइटन अदर कंट्रीज विद योर थॉट्स इज हेल्पिंग योर ओन कंट्री। दूसरे देशों को अपने विचारों के माध्यम से हेल्प करने का परिणाम है। देख लीजिए आपकी नजर के सामने है कि किस तरह से यह अपने खुद के देश को हेल्प कर रहा है। 1/4 ऑफ द इफेक्ट दैट हैज़ बीन प्रोड्यूस्ड इन दिस कंट्री बाय माई गोइंग टू इंग्लैंड एंड अमेरिका वुड नॉट हैव बीन ब्रॉट अबाउट। हेड आई कंफर्म्ड माय आइडियाज ओनली टू इंडिया। माने मैं आज भारत में मेरे माध्यम से मेरे विचारों के माध्यम से जो जागृति आ रही है, जो विकास हो रहा है, यह यंग लोगों को जो इंस्पिरेशन प्राप्त हो रही है, उसका 1/4 भी नहीं होता। यदि मैं सिर्फ भारत में ही कार्य करता विदेश में न जाता। यह बात भी जग जाहिर है। स्वामी जी जब भारत में भ्रमण कर रहे थे प्रवृजिया के समय यहां के राजाओं ने काफी इन्फ्लुएंशियल लोगों ने स्वामी जी को कहा था कि स्वामी जी आपके आइडियाज इतने एडवांस है कि भारत में उसको एप्रिशिएशन नहीं मिलने वाला है। आपको यदि एप्रिसिएशन चाहिए तो विदेश में जाइए। उस समय शायद हमको ऐसा लगे कि क्या स्वामी जी अपने सेल्फिश पर्पस के लिए विदेश में गए थे कि भारत में इतनी गरीबी है इतनी यह है माने सफरिंग है उस सबको छोड़कर के स्वामी जी क्या अपना खुद का नाम बढ़ाने के लिए विदेश में गए थे भारत में वह सेलिब्रिटी नहीं हो सकते तो विदेश में विदेशी डिसाइपल करके वो सेलिब्रिटी बनेंगे जैसे ये केशव सेन है केशवसेन के ये फॉरेन डिसाइपल्स थे वो ब्रिटेन में जाकर के लेक्चर फैक्चर दे के वहां पे फेमस हो गया था। तो इस तरह से एक सेलिब्रिटी स्टेटस प्राप्त करने के लिए क्या स्वामी जी वहां पर गए हैं? नहीं। हमको स्पष्ट रूप से पता है विदेश जाने के लिए स्वामी जी का ओरिजिनल इनिशियल मोटिव था कि वहां पर जाकर के भारत के लिए वह सहाय मांगे। वह तो इनिशियल मोटिव था। वहां पर जाकर देखा। यहां बाद में स्वामी जी कहेंगे कि किस तरह से वेस्ट को आवश्यकता है स्पिरिचुअलिटी की। तो वो नीड है वो जैसे ही स्वामी जी ने पर्स्यूव की जैसे ही स्वामी जी ने डिटेक्ट की वैसे ही स्वामी जी ने वहां पर ही स्पिरिचुअलिटी फॉर द सेक ऑफ फॉरेन कंट्रीज उन्होंने फैलाना शुरू कर दिया। यह डबल सेल्फलेसनेस सर्वप्रथम तो अमेरिका गए हैं नहीं कि एक सेलिब्रिटी स्टेटस प्राप्त करने के लिए। वह गए हैं भारत के लिए सहाय मांगने के लिए। दूसरा कि वहां जाकर के वहां की नीड देखकर के उन्होंने उनके लिए ही वेदांत प्रचार प्रारंभ किया। यह डबल स्पिरिचुअल यह सेल्फलेस नहीं होती स्वामी जी के कार्य में तो आज जो स्वामी जी भारत आए हैं और जो स्वामी जी को वेलकम मिला है। यह जो आम आदमी भारत का यह जागृत हो गया है। कॉन्शियस हो गया है। मैं बेंगली हूं, मैं मद्रासी हूं, मैं मराठी हूं, मैं पंजाबी हूं। वह भूल करके यह प्रोविंशियल मेंटालिटी भूल करके भारत के प्रति पेट्रियोटिज्म जो जागृत हुआ है यह कश्मीर से कन्याकुमारी यहां गुजरात से ब्रह्मपुत्र तक की यह पूरा भारत एक है। यह सॉलिड पेटियोटिज्म यह भावना जो आम आदमी में युवाओं में फैली है। ठाकुर के संदेश के प्रति आध्यात्मिकता के प्रति एक साधारण मनुष्य की एक मुमुक्षत्व जागृत हुआ है। इसका 1/4 नहीं होता। यदि स्वामी जी सिर्फ भारत रह के भारतीयों के लिए कार्य करते। देखिए भारतीयों को हेल्प करने के लिए स्वामी जी वहां पर गए जाकर के देखा कि विदेशी लोगों को हेल्प चाहिए तो विदेशी लोगों को हेल्प करना शुरू कर दिया। यदि ये ट्रांजिशन इवन देखिए दो स्टेप सर्वप्रथम तो स्वामी जी भारत में रहकर के भारतीयों के लिए कार्य करते तो वो ज्यादा सक्सेस नहीं होता। उसके बाद में जो सेकंड स्टेप उन्होंने लिया विदेश जाकर के भारतीयों को सहाय करना। भारतीयों के लिए सहाय मांगना वो भी ज्यादा सक्सेसफुल नहीं होता। क्योंकि क्या है कि स्वामी जी को इनिशियली लायोनाइज क्यों किया गया था? क्यों स्वामी जी फेमस हुए थे, पॉपुलर हुए थे? क्या है कि ही इज अ क्यूरियोसिटी फ्रॉम ईस्ट कि ईस्ट में इस तरह के भी विचित्र चित्र विचित्र लोग रहते हैं। तो ऐसा वो एक एग्बिशन के रूप में यह धनी लोग स्वामी जी को अपने घर में बुलाते थे और स्वामी जी आए परफॉर्म कर एक एक दिन की घटना है कि स्वामी जी को किसी ने बुलाया लेक्चर देने के लिए तो स्वामी जी अपनी ये जो लेडी डिसाइपल थी मोस्ट प्रोबेबबली एलिस हेंस ब्रो उसी के साथ बात कर रहे हैं। एलिसेंस ना निवेदिता जो भी है उसके साथ में बात कर रहे हैं। तो स्वामी जी कहते हैं तो अभी यह जो लेडी डिसाइपल थी उसने कहा स्वामी जी आप ऐसे नॉर्मल क्लॉथ पहन करके ही जाइए। आप यह जो सिल्क का वो जो कुर्ता पाजामा फिर सर के ऊपर में पगड़ी वह सब बांधने की जरूरत नहीं है। तो स्वामी जी कहते हैं कि दे वांट ए होल शो अर्थात कि उनको एक पूरा पैकेज चाहिए कि किस तरह से यह भारत से आया हुआ यह जंगली आदमी ये चित्र विचित्र कपड़े पहन के भाषण दे रहा है। इस तरह का उनको एक शो खड़ा करना है। इसलिए उन्होंने डिमांड किया है कि मैं यह पगड़ी पहन करके यह अपने इंडियन कपड़े पहन के आऊं। तो क्या है कि इस तरह का एक क्यूरियोसिटी हो के रह जाता। स्वामी जी अह कैलिफोर्निया में थे तो वहां पे एक नाटक बड़ा फेमस हुआ था। माय फ्रेंड फ्रॉम द ईस्ट अर्थात कि माय फ्रेंड फ्रॉम इंडिया अर्थात कि भारत से आया हुआ मेरा मित्र एक नाटक है। बहुत फेमस हुआ था। तो किसी ने स्वामी जी को कहा स्वामी जी चलो हम जाते हैं देखने के लिए। नाटक में क्या है? तो स्वामी जी कहते हैं चलो ठीक है जाते हैं। तो स्वामी जी नाटक देखने के लिए गए। अभी नाटक का थीम क्या है कि उस समय न्यूयॉर्क की जो हाई सोसाइटी है उसमें प्रवेश करने के लिए पैसा इनफ नहीं है। आपके पास में क्योंकि पैसे वाले बहुत है। मिलियनर्स बहुत है उस समय के। तो न्यूयॉर्क की हाई सोसाइटी यह फैशनेबल सोसाइटी वो तो कुछ ही चंद ही लोगों की बनी है। माने हाईएस्ट जो है माने कल्चर में विद्या बुद्धि में पैसों में इन्फ्लुएंस में उस सब में जो हाईएस्ट है उनकी यह फैशनेबल हाई सोसाइटी बनी है। तो उनकी मीटिंग उनकी पार्टी उनके भीतर में सोशल सर्कल में प्रवेश करना वो सिर्फ पैसों से नहीं होगा। तो क्या है कि मिड ईस्ट अर्थात कि यह मिड ईस्ट उस समय का एक थोड़ा सा जंगली तरफ का बार्बेरियन टाइप के लोग माने जाते थे कि वे लोग हैं पैसे वाले बहुत किंतु इसमें कल्चर नहीं है। तो मिड ईस्ट से एक मिलियनेियर वो न्यूयॉर्क आया। अभी वो प्रयास बहुत कर रहा है। पैसा फेंक रहा है चारों ओर कि ये फैशनेबल न्यूयॉर्क की सोसाइटी में मुझे एंट्री मिले। किंतु एंट्री मिल नहीं रही है। पैसा फेंकने वाले लोग बहुत हैं। तो फिर उसने एक प्लान किया। उसने देखा कि अभी एक तरह का फैशन चला है कि इंडिया से यह चित्र विचित्र कपड़े पहने हुए आकर के किसी योगी को किस जिसके घर में रहता है उसको देखने के लिए बहुत लोग आते हैं। तो उसने सोचा कि इस तरह से किसी को पकड़ा जाए। तो अभी इस तरह का इंडियन वो कहां पर मिलेगा वो क्लाउन। तो उसने क्या किया? वो जो हजाम था उसका उसी को उसने क्लाउन बना दिया कि कि इंडियन कपड़े पहन लो और ऐसा प्रिटेंड करो कि इंडिया से आए हुए योगी हो। तो वह भी बड़ा खुश हो गया। उसको भी तो प्रेस्टीज मिल रहा है ना। वह हजाम था। हजाम के पास में क्या होता है? कुछ नहीं। तो इस तरह से इंडियन कपड़े पहन के वह थोड़ा बहुत नाटक करेगा योगा फोगा का तो वह भी फेमस हो जाएगा। तो इस तरह से दोनों ने स्कीम बना करके इस आदमी को सबके साथ में इंट्रोड्यूस किया ये धनपति ने कि ये मेरा एक मित्र है भारत से आया हुआ है और योगी है तो ये जितने भी हाई सोसाइटी वाले जो कि उस आदमी को प्रवेश नहीं दे रहे थे अपनी पार्टी में अपने घर में सब लोग उसके घर में आकर के उपस्थित हो गए वो इंडियन जेंटलमैन को देखने के लिए कि अच्छा यह इंडिया से आया हुआ है योगी है चित्र विचित्र भाषा में बातें करता है तो ये म बड़ा अद्भुत जितने हाई सोसाइटी वाले थे सब उसके घर आकर रोज-रोज़ आते हैं। बिना बुलाए आते हैं। तो देखिए स्वामी जी यह नाटक देख रहे हैं और इतना हंस रहे हैं। इतना हंस रहे हैं। सो दिस इज व्हाट स्वामी जी वुड हैव बिकम। यदि वह ट्रांजिशन नहीं किए होते कि हां अमेरिकन लोगों की नीड है। उसके लिए मुझे कार्य करना है। उनके प्रति मेरी सहानुभूति है। उनके प्रति मेरी करुणा है। उनके प्रति मेरा आशीर्वाद है। यह टोटली सेल्फलेस वर्क यदि स्वामी जी ने नहीं किया होता तो यह एक तरह का स्वामी जी का एक फॉलोविंग हो गया था। हाईली डेडिकेटेड फॉलोइंग जो कि भारत में आए स्वामी जी के साथ में और भारतीयों को सहाय करने के लिए उन्होंने अपना जीवन लगाया यह हो ही नहीं पाता। कुछ धनपतियों की एक एक क्लाउन शो बनकर के वो रह जाते हैं। सो इसलिए स्वामी जी कहते हैं 1/4 ऑफ द इफेक्ट दैट हैज़ बीन प्रोड्यूस्ड इन दिस कंट्री बाय माय गोइंग टू इंग्लैंड एंड अमेरिका वुड नॉट हैव बीन ब्रॉट अबाउट हैड आई कनफाइंड माय आइडियाज ओनली टू इंडिया। भारत में आज जो परिवर्तन आया है, आज जो सुबह हुई है, माने डॉन ऑफ सिविलाइजेशन यह सुनहरी सुबह आज जो हुई है, उसका 1/4 भी नहीं होता। यदि मैंने अपने आइडियाज और अपने काम को भारत तक ही सीमित रखा होता। और ग्रेट पैसेज इसको मैंने हाईलाइट करके रखा है। दिस इज द ग्रेट आइडियल बिफोर अस। यह हमारे लिए सर्वश्रेष्ठ आइडियल है। एंड एवरीवन मस्ट बी रेडी फॉर इट। हम सबको इसके लिए तैयार रहना है। द कॉनक्वेस्ट ऑफ द होल वर्ल्ड बाय इंडिया। समग्र भारत समग्र विश्व पे भारत की विजय। भारत के द्वारा समग्र विश्व पे विजय। नथिंग लेस देन दैट। इससे कम कुछ नहीं। एंड वी मस्ट ऑल गेट रेडी फॉर इट। हम सबको इसके लिए तैयार रहना है। स्ट्रेन एवरी नर्व फॉर इट। अपने देह का प्रत्येक नर्व जो है उसके लिए लगा दो। लेट फॉरेनर्स कम एंड फ्लड द लैंड वि देयर आर्मीज़। नेवर माइंड। विदेशियों को आने दो और जगत को यह लहू से तर-बतर करने दो। उसकी कोई फिक्र नहीं है। अप इंडिया एंड ककर द वर्ल्ड विथ योर स्पिरिचुअलिटी। उठो भारत और आध्यात्मिकता के माध्यम से जगत पर विजय करो। अप इंडिया एंड ककर द वर्ल्ड विथ योर स्पिरिचुअलिटी। ए एस हैज़ बीन डिक्लेयर्ड ऑन दिस सोइल फर्स्ट। लव मस्ट ककर हेट्रेड। हां, यह कहा गया है इसी देश की धरती पर कि प्रेम के माध्यम से घृणा पर विजय। हेट्रेड कैन नॉट कंकर इटसेल्फ। ये घृणा द्वेष क्रोध ये अपने आप से क्रोध क्रोध क्रोध के ऊपर में विजय नहीं प्राप्त कर सकता। मटेरियलिज्म एंड ऑल इट्स मिजरीज कैन नेवर बी ककरर्ड बाय मटेरियलिज्म। यह मटेरियलिज्म और उसके द्वारा प्रकट हुई जितनी भी मिजरीज है, जितने भी प्रॉब्लम्स है, वह मटेरियलिज्म के माध्यम से कभी भी हम जीत नहीं पाएंगे। आर्मीज़ व्हेन दे अटेम्प्ट टू कंकर आर्मीज़ ओनली मल्टीप्लाई एंड मेक ब्रूट्स ऑफ ह्यूमैनिटी। जब एक आर्मी दूसरी आर्मी पर विजय प्राप्त करना चाहती है तो आर्मी ही फैलती है और जगत में निष्ठुरता ही फैलती है। आज के न्यूज़ पेपर पढ़ेंगे तो इस स्टेटमेंट का परफेक्ट प्रूफ हमको मिल जाएगा। स्पिरिचुअलिटी मस्ट कॉनकर द वेस्ट। आध्यात्मिकता को पश्चिम पे विजय प्राप्त करना ही होगा। स्लोली दे आर फाइंडिंग आउट दैट व्हाट दे वांट स्पिरिचुअलिटी टू प्रिजर्व देम एज नेशंस। धीरे-धीरे उनको पता चल रहा है कि एज ए नेशन देश के रूप में यदि उनको जिंदा रहना है तो उनको आध्यात्मिकता चाहिए। दे आर वेटिंग फॉर इट। दे आर इगर फॉर इट। वह लोग सच्ची आध्यात्मिकता को खोज रहे हैं। सच्ची आध्यात्मिकता को प्राप्त करने के लिए वे लोग राह देख रहे हैं। वंस अगेन 2000 साल पहले यह सोशल स्ट्रेटिफिकेशन था, क्लासिफिकेशन था। उसको ब्रेक करके क्रिश्चियनिटी जैसे फैला था। अभी 2000 साल के बाद में क्रिश्चियनिटी इज अ स्टेटस को ऑफ पावर। क्रिश्चियनिटी इज द वन रिलीजन जो कि यह सोशल स्ट्रेटिफिकेशन, सोशल क्लासिफिकेशन को बढ़ावा देता है, परिपुष्ट करता है। अभी फिर से एक न्यू रिलीजन चाहिए जो कि यह स्ट्रेटिफिकेशन क्लासिफिकेशन यह जो जितना भी स्क्लेरोसिस है जो कि समाज में प्रवेश कर गया है जो कि पदलित को पदलित करके ही रखता है। उसको तोड़ने के लिए नया धर्म चाहिए। नई आईडिया नए आइडियाज नई स्पिरिचुअलिटी चाहिए। वेयर इज द सप्लाई टू कम फ्रॉम? किंतु यह आएगा कहां से? वेयर आर द मैन रेडी टू गो आउट टू एव्री कंट्री इन द वर्ल्ड वि द मैसेजेस ऑफ द ग्रेट सेजेस ऑफ इंडिया? कहां पे है इस तरह के नव युवान जो कि देश विदेश में फैले और भारतीय संतों के आशीर्वाद भारतीय ऋषियों की अमृतमय वाणी का प्रचार करें। वेयर आर द मैन हु आर रेडी टू सैक्रिफाइस एवरीथिंग? कहां पर है वह लोग जो कि अपना सर्वस्व बलिदान करने को तैयार है। सो दैट दिस मैसेज शैल रीच एवरी कॉर्नर ऑफ द वर्ल्ड जिससे कि यह संदेश विश्व के प्रत्येक कोने में जाए। सच हिरइक स्पर्स आर वांटेड टू हेल्प द स्प्रेड ऑफ ट्रुथ। इस तरह के प्रचंड उद्योग की आवश्यकता है जिससे कि यह आध्यात्मिक सत्य जगत में फैले। सच हिरइक वर्कर्स आर वांटेड टू गो अब्रॉड एंड हेल्प टू डिसमिनेट द ग्रेट ट्रुथ्स ऑफ वेदांत। और इस तरह के हिरइक वर्कर की आवश्यकता है जो कि अपना सर्वस्व बलिदान करके देश विदेश में घूम करके वेदांत के सत्यों का प्रचार करें। द वर्ल्ड वांट्स इट। जगत उसको चाहता है विदाउट ईट द वर्ल्ड विल बी डिस्ट्रॉयड। वेदांत के बिना जगत का खात्मा हो जाएगा। देखिए कितना पावरफुल स्टेटमेंट है। द होल ऑफ द वेस्टर्न वर्ल्ड इज ऑन ए वोल्केनो व्हिच मे बस्ट टुमारो। ये पूरा वेस्टर्न वर्ल्ड है जो कि वोल्केनो पे बैठा है जो कि कल विस्फोट होगा और यह वेस्टर्न वर्ल्ड टूट जाएगा। हमको पता है यह फर्स्ट वर्ल्ड वॉर, सेकंड वर्ल्ड वॉर को ये कोल्ड वॉर ये न्यूक्लियर आर्मामेंट ये न्यूक्लियर रेस किस तरह का पागलपन विदेश में चला है। यदि ये इंडियन स्पिरिचुअलिटी स्वामी जी ने वहां पर ना फैलाई होती तो पता नहीं यह न्यूक्लियर वॉर हो जाता। पूरा ह्यूमन सिविलाइजेशन नष्ट हो जाता। दे हैव सर्च एव्री कॉर्नर ऑफ द वर्ल्ड एंड हैव फाउंड नो रिस्पाइट। उन्होंने जगत के प्रत्येक कोने में खोज लिया है और उनको कहां से भी थोड़ी सी भी शांति या भरोसा नहीं मिला है। दे हैव ड्रंक डीप ऑफ द कप ऑफ प्लेजर एंड फाउंड इट वेनिटी। उन्होंने यह दैहिक देख सुख भोग का यह जो प्याला जो जहर है टॉक्सिन है उसको पूरा पी गए हैं और उससे उनको कोई शांति नहीं मिली। नाउ इज द टाइम टू वर्क सो दैट इंडिया स्पिरिचुअल आइडियाज मे परपेट्रेट डीप इनू द वेस्ट। अभी आज समय आ गया है जिससे कि इस तरह से प्रचार प्रसार करना कि भारतीय आध्यात्मिक आदर्श वेस्ट अर्थात कि पश्चिम के देशों में गहराई तक प्रवेश करें। देयर फॉर यंग मैन ऑफ मद्रास आई स्पेसिफिकली आस्क यू टू रिमेंबर दिस। इसलिए मद्रास के यंग मैन मैं आपको यह रात याद रखने के लिए विनती करता हूं। वी मस्ट गो आउट। वी मस्ट कॉनकर द वर्ल्ड थ्रू आवर स्पिरिचुअलिटी एंड फिलॉसोफी। हमको बाहर जाना ही होगा। हमको विश्व पर विजय प्राप्त करना ही होगा। हमारी आध्यात्मिकता और दर्शन शास्त्र के माध्यम से। देयर इज नो अदर अल्टरनेटिव। इसके अलावा और कोई उपाय नहीं है। वी मस्ट डू इट और डाई। या तो हम इसको करें या मरे। द ओनली कंडीशन ऑफ नेशनल लाइफ ऑफ अवेकंड एंड विगरस नेशनल लाइफ इज द कॉनक्वेस्ट ऑफ द वर्ल्ड बाय इंडियन थॉट। इस देश की यदि जागृति इस देश की एक अवेकंड एंड विगरस नेशनल लाइफ एक प्राणवान एक नेशनल लाइफ हमको बनानी है तो एक ही उपाय है भारतीय विचारों के माध्यम से जगत पे विजय। दिस पावरफुल थॉट पावरफुल आइडियाज देखिए कि माने एक-एक सेंटेंस पे हम लोग एक-एक सप्ताह का क्लास ले सकते हैं। इतना उसमें डेप्थ है और हम लेंगे भी सही। ये हमारा लेक्चर फ्रॉम कोलंबो टू अल्मोड़ा में से ये माय प्लान ऑफ कैंपेन तो चल ही रहा है। एक के बाद एक बहुत सारे स्वामी जी के लेक्चर्स लेने हैं। किंतु देखिए कि हमारा जो मेन टॉपिक था कि किस तरह से आठपुर में ही ये सब ग्रेट आइडियाज आने वाले थे भविष्य के। माने इट्स अ क्विंट एसेंशियल विवेकानंद। यह जो वर्क बिफोर अस में ये पैसेज पढ़ा इट्स अ क्विंट एसेंशियल विवेकानंद। आज हम स्वामी जी का नाम लेंगे कोई भी एक यंग मैन के सामने तो वह यह नहीं सोचेगा कि हां ऋषि मुनि की तरह ध्यान लगा के बैठे हैं। वह ऐसा नहीं सोचेगा कि भारतीय वो जो योग वेदांत है दर्शन शास्त्र उस पर भाषण दे रहे हैं। वो यही देखेगा कि अराइज एंड अवेक वो वाला जो एक पेट्रियोटिज्म एक प्राणवंत मैसेज देने वाले स्वामी जी यूजुअली लोगों को वही स्वामी जी दिखते हैं। सो दिस म क्विंटसेंशियल विवेकानंद स्वामी जी का यह जो उठो जागो और धेय प्राप्ति तक रुको नहीं वो वाले स्वामी जी में का एक बेस्ट पैसेज ऑफ हिज लाइफ तो इस सब का जो सीड है वह सब आठपुर में ही हमको देखने को मिलता है और उसके बाद में किस तरह से स्वामी जी के जीवन में यह सब आइडियाज धीरे-धीरे करके डेवलप हुए वह हम जैसे-जैसे यह स्वामी जी का लाइफ स्टडी करेंगे वैसे-वैसे देखते जाएंगे। ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णपणमस्तु

प्रश्न: हम संदेह में डूबे जा रहे है. लेकिन स्वामीजी कैसे आत्म-श्रद्धा से भरपूर हैं!

ना ये बात आपकी सही है। देखिए कन्विक्शन का अभाव माने आप लोगों की बात छोड़ दीजिए। हम लोगों में ही आजकल कन्विक्शन का अभाव इतना हो गया है कि बहुत कुछ-कुछ लोगों के साथ में मैं जब बात करता हूं ना साधुओं के साथ में तो यही उत्तर मिलता है कि पहले अपना देखो बाद में जगत का देखना पहले अपना खुद का तो आध्यात्मिक कुछ है नहीं और फिर लोगों को क्या उपदेश देने को जाओगे मैंने रिसेंटली ही मैं किसी साधु के साथ बात कर रहा था तो मैंने उनको पूछा कि उनको बोला गया कि आप लेक्चर दीजिए आश्रम में तो वो कहते हैं नहीं मेरी कोई इच्छा नहीं है। मैं मुझे कुछ नहीं आता। मैं दूसरों को क्या सिखाऊंगा? तो अभी क्या है कि इवन विद इन आवरसेल्व्स एक तरह का डाउट प्रकट हो गया है कि मुझे कुछ आता नहीं। मैं बोलने को जाऊंगा तो मेरा ईगो बढ़ जाएगा। मेरा आध्यात्मिक डेवलपमेंट रुक जाएगा। किंतु स्वामी जी जो कहते हैं व्हिच इज सो पावरफुल कि मैं जब तक लोगों को हेल्प नहीं करूंगा तब तक मुझे ही हेल्प नहीं होगी। यह जो कांसेप्ट है ना इट इज सो रेवोल्यूशनरी कि हम लोग उसको पकड़ ही नहीं पाते। हम लोग वेदांत वेदांत करके बैठते हैं और वेदांत एसेंशियली इज डील्स विद इंडिविजुअल। वेदांतिक आइडियाज जो है कम्युनिटी लेवल पे और सिविलाइजेशनल लेवल पे वर्कआउट हुए ही नहीं है। जो स्वामी जी कहते हैं कि देयर इज नो अदर फिलॉसोफी व्हिच इज मोर पावरफुल, मोर लिबरल, मोर लार्ज हार्टेड देन वेदांता। एंड देयर इज नो अदर सोसाइटी कि जिसमें कि मनुष्य के अधिकारों का शोषण इतना बुरी तरह से होता है जितना कि भारत में होता है। सो ऑन वन हैंड वी हैव द हाईएस्ट ऑफ़ फिलॉसोफी ऑन दी अदर हैंड दिस फिलॉसोफी हैज़ नॉट बीन मेड प्रैक्टिकल। सो दैट इज़ व्हाई स्वामी जी इस प्रैक्टिकल वेदांत। अब जो पढ़ा है इंडिविजुअल लेवल पे आप अप्लाई कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि ये 100% थ्यरी है। बात ये है कि आपका एप्लीकेशन ओनली इंडिविजुअल लेवल पे है। आप अपना माइंड जो है थोड़ा सा ब्रॉड कीजिए। अप्लाइड ऑन कम्युनिटी एंड सिविलाइजेशनल लेवल आल्सो और जो कि होता था रामायण महाभारत देखिए सिविलाइजेशनल लेवल पे जो एप्लीकेशन है वेदांत का कितना स्पष्ट देखने को मिलता है किंतु ये बुद्धिज्म से एक ट्रेंड प्रारंभ हुआ कि स्पिरिचुअलिटी है माने बाकी सब हिस्सों से ये माने इसको ये करके रिट्री रिट्रीट करके सिर्फ इंडिविजुअल रिया तक उसको ला के रख दिया है अद्वैत वेदांत शंकराचार्य का सब जगह पे एक ही तरह का है कि उसको सिविलाइजेशनल लेवल पे नहीं वर्कआउट करना है। दिस इज़ आवर बिगेस्ट प्रॉब्लम।

प्रश्न: हमारा बुद्धि "नेति नेति" तक ही अटका हुई है. वेदान्त का हम क्या अर्थ करते है - की हिमालय में एकांत में तपस्या करना. इसी वेदान्त को जब तक बाजार में न ले आए तब तक हमारा कल्याण ही नहीं होगा.

देखिए अब अब जैसे कि मैं एक आपको बताऊं एक थोड़ा सा एनालिसिस करके ट्रेडिशनल वेदांत जो स्टडी करते हैं वे लोग नेति नेति साधन पथ को एक्सेप्ट करते हैं। व्हिच इज वेरी गुड। अब ठाकुर जब ठाकुर तक जब बात आती है तो और सिर्फ ठाकुर ही नहीं कोई भी आप अवतार का आप देखिए स्वामी जी कहते हैं ना पंडित जी और अवतार दोनों में डिफरेंस क्या है? पंडित जी जो होते हैं वह आपको साधन पथ के बारे में तो परफेक्टली बता देंगे। नेति नेति साधन पथ है। इंद्रियों के विषयों का त्याग करके ईश्वर साक्षात्कार निर्वाण व्हाटएवर आप कहे उसको प्राप्त करना है। व्हिच इज अ वेरी क्लियर एंड वेरी वेल एस्टैब्लिश्ड पाथ ऑफ साधना जो कि आपको ऑलमोस्ट सब जगह पे देखने को मिलेगा। ठाकुर तक या तो कोई भी आप अवतार का स्टडी करेंगे तो फिर उसके बाद का एक नया फेस स्टार्ट होता है। वह है इति इति कि हां जिस जगत माने जिस ब्राह्मण को मैंने निर्विकल्प समाधि में प्राप्त किया है वही ब्राह्मण आखिर में इति इति करके वापस आकर देखेंगे पूरे जगत में प्रत्येक मनुष्य प्रत्येक पेड़ पौधा प्रत्येक पुष्प प्रत्येक पत्थर उसी ब्राह्मण का बना हुआ है। आपका हृदय खुल जाएगा। सबके प्रति अनंत करुणा बहना शुरू हो जाएगी। सो ठाकुर को पढ़कर के यह एक नेक्स्ट स्टेप देखने को मिलता है। पर स्वामी जी को पढ़ते हैं तो एक थर्ड कैटेगरी देखने को मिलती है। इति इति एज अ साधन पद म आपको इति इति इज नॉट ए साधन की कलमिनेशन के बाद में किंतु इति इति एज ए साधन पद और यह जब हम सुनते हैं तब भयानक क्फ्लिक्ट खड़ा होता है। क्योंकि जब तक ठाकुर को पढ़ते हैं कि नेति नेति के बाद में निर्विकल्प समाधि और बाद में इति-हति तो फिर भी वह ट्रेडिशनल के साथ में मैच होता दिखता है। किंतु स्वामी जी को पढ़ते हैं तो ट्रेडिशन के साथ में सीधा कंफ्लिक्ट कि यहां पे कहां नेति नेति साधन पथ है और यहां पे कहां स्वामी जी इति को साधन पथ के रूप में ले आ रहा है। दिस इज़ अ कंट्राडिक्शन ऑफ़ एवरीथिंग दैट आई हैव लर्न एज अ स्पिरिचुअल एस्पिरेंट एज अ फिलॉसोफर। तो वह हमसे डाइजेस्ट नहीं होता है। अभी रिवर्स है। दूसरों में देखो तो पता चलेगा मेरे में है।

विदेशी धर्म ‘इति इति’ के मार्ग से नहीं, अर्थलाभ से प्रेरित थे

और देखिए उन लोगों का कांसेप्ट डिफरेंट टाइप का है। ऐसा नहीं है कि जो लोग अग्रेसिव उन्होंने जो कुछ किया वो कि धर्म के नाम पर किया। उसको हम अपनी इति इति एज ए साधन पथ वाली डेफिनेशन में फिट नहीं कर सकते हैं। स्वामी जी ने स्पष्ट कहा कि मटेरियलिज्म है उनके पीछे उनके एक्सपेंशन में मोटिव पावर है ना। जबकि अपने एक्सपेंशन में मोटिव पावर होना चाहिए स्पिरिचुअलिटी। दिस अ वेरी क्लियर डिफरेंस स्वामी जी ने खड़ा किया है। यानी हम लोग ये बात कभी नहीं कह सकते कि जिस तरह से क्रिश्चियनिटी और इस्लाम फैला इस तरह से हिंदूइज़्म को फैलना है। नहीं उसका बेसिस जो है फंडामेंटली ऑोजिट टू ईच अदर।

प्रश्न: श्रीमती हैंसब्रो स्वामीजी के लिए भोजन पकाती थीं और स्वामीजी उनके लिए ध्यान करते थे। हम स्वामीजी को अपने लिए ध्यान करने के लिए कैसे प्रेरित कर सकते हैं? हम ध्यान को कैसे आसान बना सकते हैं?

देखिए आज का जो थीम है ना अपना इति इति एज ए साधन पथ उसके साथ में इसको जोड़ दीजिए। मैं ध्यान करने को बैठा हूं। व्हाट इज द पर्पस ऑफ माय मेडिटेशन कि मैं अपने लिए कर रहा हूं। मैं अपने स्पिरिचुअल मटेरियल बेनिफिट के लिए नहीं स्पिरिचुअल बेनिफिट के लिए कर रहा हूं। व्हिच इज अ हायर स्टेज। राइट? मैं कहता हूं इवन क्रॉस दिस स्पिरिचुअल बेनिफिट कि एंड मेडिटेट फॉर अदर्स। कोई भी एक गरीब आदमी देखते हैं, कोई भी एक दुखी व्यक्ति को देखते हैं, निराश व्यक्ति को देखते हैं। उसके लिए मेडिटेशन कीजिए। यह आप करने को बैठेंगे ना। माने मुझे मेडिटेशन से कोई फल प्राप्त नहीं करना है। ना ही मटेरियल फल तो नहीं ही चाहिए। स्पिरिचुअल फल भी नहीं चाहिए। श्री राम कृष्णपणमस्तु वो तो करके हम जो जप का फल ठाकुर को दे देते हैं। यह फल जो है ना किसी गरीब व्यक्ति को दे दीजिए। किसी नीडी व्यक्ति को सफरिंग व्यक्ति को दे दीजिए। आई थिंक यह जो स्वामी जी कहते हैं ना कि यह जो आपका प्रश्न पहले जो है कि मैं जब ध्यान करने को बैठता हूं तो ध्यान नहीं हो पा रहा है। स्वामी जी ने क्या कहा? दूसरों के लिए जो कार्य करेंगे ना दैट विल बी फोर टाइम्स मोर इफेक्टिव होगा। कहा ना 1/4 यदि मैं भारत में रह के भारत के लिए जो काम करता तो ये 1/4 भी यह सक्सेसफुल नहीं होता। तो ये 1/4 वाला आप नियम पकड़ लीजिए। मैं अपने लिए मेडिटेशन करता हूं तो 1/4 ही सक्सेसफुल होगा। दूसरों के लिए मैं यदि मेडिटेशन करता हूं। आई विल बी फोर टाइम्स मोर सक्सेसफुल देन इफ आई एम डूइंग इट फॉर मायसेल्फ। सो दैट इज़ वन थिंग कि मेडिटेशन अपने से करके कैसे सक्सेसफुल हुआ जाए। दूसरा कि ऑब्वियसली है कि देखिए कि ठाकुर मां स्वामी जी हमारे लिए ध्यान करते हैं। ये बात ये सिर्फ नॉट नेसेसरी कि स्वामी जी के रहते-रहते यह संभव था। हमने हम लोग तो वो फॉर्च्यून नहीं है कि ठाकुर मां स्वामी जी को मिले। किंतु यह बात पता है मिसेज हेंसब्रो कब कहती है? 40 साल के बाद स्वामी जी की महासमाधि के नियरली 40 इयर्स के बाद में स्वामी अशोकानंद जी के साथ में वार्तालाप करते-करते और वो क्या कहती है? माने उस समय तो जो अनुभव हो गया हो गया। वो स्वामी जी के लिए वो ब्रोथ बना रही थी, जूस बना रही थी। उस समय तो उसको यह अनुभव पक्का हुआ कि स्वामी जी वहां पर बैठे-बैठे मेरे लिए ध्यान कर रहा है। किंतु 40 साल के बाद में मिज हसब्रोक कहती है कि आई स्टिल फील दैट स्वामी जी इस मेडिटेटिंग फॉर मी। सो दैट इज हाउ दैट वन इज पॉसिबल। तो क्या है कि देखिए कि हम लोग ध्यान करते हैं या तो जप करते हैं। जस्ट इमेजिन कि हम ठाकुर के सामने बैठे हुए हैं और कुछ करने की जरूरत नहीं। उनका जो सानिध्य है, सानिध्य इटसेल्फ इज साधना। इमेजिन करना है कि मैं दक्षिणेश्वर में बैठा हुआ हूं। मेरे सामने ठाकुर आनंद वार्तालाप कर रहे हैं या तो फिर जस्ट बैठे हुए हैं। यह कंस्ट्रक्ट हम खड़ा करेंगे ना तो ठाकुर की जो स्पिरिचुअलिटी है, उनकी हमारे प्रति करुणा, दया है, ऑटोमेटिक हमारे भीतर में आना शुरू हो जाएगी। तो यह दो है आपको करना है। सबसे पहले तो ध्यान करने को बैठते हैं, जप करने को बैठते हैं। उसका फल जो है किसी नीडी व्यक्ति को दे दीजिए। वन पार्ट ऑफ इक्वेशन हो गया। सेकंड पार्ट ऑफ इक्वेशन है। इमेजिन कीजिए। ठाकुर के सामने बैठे हैं। मां के सामने बैठे हैं। स्वामी जी के सामने बैठे हैं। दक्षिणेश्वर में बेस्ट कि तीनों लोग वहां पे हैं। बाकी गुरु भाई भी है। संध्या के बाद का समय है। जैसे ये आठपुर में देखा और वहीं हम लोग मैं जब ऐसा इमेजिन करता हूं मेरी फिक्स जगह है। मैं वहीं पर बैठूंगा। ये वो जो गोल बरांदा है ना वो गंगा के सामने वाला वही दरवाजे के पास में बैठना है। यहां पे गंगा भी दिखाई देगी। आकाश भी दिखाई देगा। वो सामने एग्जैक्ट सामने खाट पे ठाकुर बैठे हैं और इस साइड में है वो छोटी खाट पे मां बैठी है। फिर इस साइड में सब गुरु भाई बैठे हैं। सो जस्ट इमेजिन दैट एंड दिस पीस विल स्टार्ट फ्लोइंग इनसाइड। संगम में दोनों मिल जाते हैं। सेल्फलेसनेस रूपी सेल्फलेसनेस रूपी संगम माने चारों योग है वो निस्वार्थ रूपी संगम में मिल जाते हैं। वेरी गुड ओम