Prayer
ओम स्थापकाय धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपण अवतार वरिष्ठाय राम कृष्णाायते नमः
क्या कर्म का सिद्धांत सही है?
यहां पर आश्रम में हम लोग एववरी सैटरडे एक यूथ फोरम स्टार्ट किए हैं। विवेकानंद यूथ फोरम। तो इसमें स्टूडेंट्स के साथ में क्वेश्चन आंसर होता है। एक स्टूडेंट ने मुझे क्वेश्चन किया कि कर्म का सिद्धांत वह क्या सही है कि गलत है? अभी यह प्रश्न भी बड़ा लेजिटमेट है। प्रॉब्लम एक कर्म के सिद्धांत के साथ में एक नेगेटिव बात इस तरह से जुड़ गई है कि हमारे साथ में आज जो कुछ भी हो रहा है, वह हमारे या तो पिछले जन्म का परिणाम है या तो भूतकाल में हमने जो कर्म किए हैं, उसकी वजह से हमारे साथ में यह सब होता है। इसका एक उदाहरण कि बिहार में अर्थक्वेक हुआ था। ये फ्रीडम मूवमेंट की बात है। तो बिहार में अर्थक्वेक हुआ और बहुत सारे लोगों का मृत्यु हुआ। बहुत सारी संपत्ति को नुकसान हुआ। तो गांधी जी ने ऐसा एक स्टेटमेंट दे दिया कि बिहार में जो यह जात नाती जाति प्रथा जो है बड़ी स्ट्रांग है। इसकी वजह से इनके पाप की वजह से बिहार में अर्थक्वेक हुआ है। तो नेचुरली इस तरह के स्टेटमेंट के सामने विरोध तो होने ही वाला है कि आज लोग जो सफर कर रहे हैं। अर्थक्वेक में इतने सारे लोग मर गए। इतनी जो संपत्ति को नुकसान हुआ उसके लिए हमारे पुरखों ने जो पाप किए हैं या तो फिर यह हमारे जो वर्तमान पाप है वह उसके लिए दाई हो सकते हैं। यह कहां की बात हो गई? तो यह बात जो है कर्म के सिद्धांत के साथ में बहुत बार जुड़ी हुई है। आज मेरे साथ में जो कुछ भी मिसफर्च्यून हो रहा है वह मेरे पिछले पुराने कर्मों का परिणाम है। अभी पिछला जन्म किसने देखा है वह है कि भी नहीं वह भी किसको पता तो यह सब संदेह परंपरा हमारे मन में उदित होना शुरू हो जाता है। और दूसरा क्या है पता है? हम हिंदू लोगों के साथ में एक फेटलिस्टिक टैग ऐड हो गया है। यह हिंदू क्या है? तो एक पैसिव प्रजा है। उनके ऊपर में आप जितना ही अत्याचार करना चाहे कर लीजिए। वे लोग हमारे भाग्य ही ऐसे हैं। हमारा प्रारब्ध ही खराब है। यह हमारे पिछले जन्म के कर्मों का परिणाम है। ऐसा बोलकर के बैठे रहेंगे और जितना ही अत्याचार करते जाए वह सब सहन करते जाएंगे। तो यह एक फेटेलिस्टिक एक डेथ कल्ट जैसा एक कर्म के सिद्धांत के साथ में जुड़ गया था। अभी भी बहुत सारे लोगों के माइंड में ऐसा है। तो ऐसा जब प्रश्न कोई करता है कि कर्म का सिद्धांत क्या सही है? तो उसका उत्तर हम शास्त्र की माध्यम से देने की वजह अभी मैं अपना खुद का अनुभव बताता हूं। क्योंकि यह हिस्ट्री वगैरह में पढ़ता था तो मेरे माइंड में भी यही एक क्वेश्चन बार-बार होता था कि यह कर्म या तो फिर यह पुनर्जन्म यह दोनों कांसेप्ट एक दूसरे के साथ में जुड़े हुए हैं। बड़े ही क्लोजली जुड़े हुए हैं। तो मैं इस सब चीजों में क्यों मानने को जाऊंगा? एक तो मेरा एक वेस्टर्न आउटलुक था। एक रैशनलिस्टिक थिंकिंग था। इन सब रैशनलिस्टिक थिंकिंग वेस्टर्न आउटलुक में यह पुनर्जन्म और कर्म का सिद्धांत किसी भी तरह से मैं फिट नहीं बिठा पा रहा था। फिट नहीं कर पा रहा था। क्यों मैं आज जिसके साथ में ऐसा कुछ बुरा हो रहा है तो उस व्यक्ति को सहाय करें। उस व्यक्ति को कहे कि भाई तुम आत्मनिर्भर हो। अपने पैरों पर खड़े हो। खुद का जो चैलेंज है तुम्हारे सामने उसका डट के मुकाबला करो। सेल्फ कॉन्फिडेंस देना है। आत्मश्रद्धा देनी है। नहीं कि उसको यह डांट करके बिठा देना है। उसी को कोसते रहना है कि आज तुम्हारे साथ में जो गलत हो रहा है, वह तुम्हारे पिछले जन्म के कर्म का परिणाम है। वह बेचारा वैसे ही तो चैलेंज फेस करके डिप्रेस हो गया है। ऊपर से आप यह कहेंगे कि यह तुम्हारी ही सब गलती है। तो यह बेचारा कभी खड़ा ही नहीं होगा। यह कभी आत्मश्रद्धा, सेल्फ डिफेंस, सेल्फ कॉन्फिडेंस, यह एक ब्राइट फ्यूचर यह सब के बारे में सोचेगा ही नहीं। तो फिर बहुत सारे यंग लोग हैं जो कि मेरी जनरेशन के भी यह जो फ्रीडम मूवमेंट के समय से ही यह लोग सोच रहे हैं कि यह सब चीजें जो है वैसे तो हिंदू धर्म बड़ा अच्छा है। हिंदू धर्म में यह जो मेडिटेशन है या तो फिर यह जो यह भाव साधना भक्ति डिवोशन वगैरह जो है या राजयोग जो है कर्म योग जो है इवन वह सब चीजें तो फिर भी ठीक है। कर्म योग इस अर्थ में गांधी जी ने पुस्तक लिखा था अनासक्ति योग अर्थात कि कर्म करना है किंतु कर्म के फल के प्रति आसक्ति नहीं रखनी तो और दूसरा कि लोक कल्याण के लिए कर्म करना है ना ही आत्म स्वार्थ के लिए आत्म तृप्ति के लिए कर्म करना है। आत्म तृप्ति वैसे तो एक स्पिरिचुअल वर्ड है। किंतु यहां पर मैं सिर्फ एक सेल्फिश पर्पस के लिए यूज कर रहा हूं। सेल्फ एग्रेंडाइजमेंट जिसको कहते हैं इंद्रियों का सुख प्राप्त करने के लिए कर्म नहीं करके कर्म करना है लोक कल्याण के लिए। जैसे गांधी जी यह सब धनी लोगों को कहते थे। जैसे कि यह स्वामी जी ने रॉकेफेलर को कहा था कि तुम जो है तुम्हारी संपत्ति लोक कल्याण के लिए इस्तेमाल करो। तुम अपनी संपत्ति के मालिक नहीं हो। तुम अपनी संपत्ति के ट्रस्टी हो। तुम यह अपनी संपत्ति का ट्रस्ट बनाओ। और इस ट्रस्ट के माध्यम से जितना भी हो सके जहां भी हो सके थोड़ा बहुत सहाय पहुंचाओ। चैरिटेबल डिस्पेंसरी प्रारंभ करो। पाठशाला प्रारंभ करो। या तो फिर यह गांव में कुएं खुदवाने हैं। यह जलाशय योजना जो है यह सब प्रारंभ करो। गरीब लोगों को बीच-बीच में अन्न और वस्त्र बांटो। यह सब कार्य करो। अपनी संपत्ति से नहीं कि अपने खुद के सुख के चरितार्थ के लिए इसको यूज करो। तो इस अर्थ में कर्म योग ठीक है। तो फिर हिंदू धर्म की यह जो और फिर एक के बाद एक संत महापुरुष आते गए भारत में तो भारत में आध्यात्मिकता हिंदू धर्म ने बहुत डेवलप की है। किंतु यह जो एक सिद्धांत है हिंदू धर्म का कि पुनर्जन्म और यह कर्म का सिद्धांत। इस अर्थ में कर्म का सिद्धांत कि पिछले जन्म के कर्मों का लेखाजोखा इस जन्म में कैरी फॉरवर्ड होता है और उसके अनुसार हमारा जीवन चलता है। तो इस बात को हम स्वीकार नहीं करते हैं क्योंकि इस बात को आज यदि मैं स्वीकार कर लूं तो मेरा पूरा जीवन ही जैसे कि मिट्टी में जाएगा। आज मैं जो हूं यदि पूर्व जन्म का परिणाम है पूर्व जन्म के कर्म का परिणाम है तो जैसे मेरे हाथ में कुछ रहा ही नहीं मैं चाहे कितना ही पुरुषार्थ करता फिरूं वो तो आखिर में तो मेरा जो नसीब है मेरा जो प्रारब्ध है वही मुझे ले डूबेगा तो फिर यह पुरुषार्थ और प्रारब्ध का यह जो युद्ध है वह हमेशा से चलता आ रहा है मेरा मेरा भविष्य किसके हाथ में है या तो मेरा वर्तमान किसके हाथ में है मेरा जीवन किसके हाथ में है मेरा पुरुषार्थ ना कि मेरा प्रारब्ध तो यह जो एक क्फ्लिक्ट यह जो एक क्लेश खड़ा होता है और फिर यह भारत का यह जो रिसेंट हिस्ट्री हम देखेंगे कि यही एक प्रारब्ध प्रारब्ध करके हम लोग डूब मरे हैं तो फिर बहुत सारे लोग यह कर्म के सिद्धांत पे या तो पुनर्जन्म पे विश्वास करते ही नहीं है। आउटराइट नहीं करते। जैसे मैं था एक समय मेरे स्टूडेंट डेज में एकदम रिजेक्ट ही कर दिया था मैंने। यह सिद्धांत पूरा गलत है। लोगों को भ्रमित करने के लिए बनाया गया है। ऐसा एक मेरे माइंड में फिट हो गया था। और आजकल वैसे तो धर्म का एक जु्वहार जैसा चला है। तो बहुत सारे लोग वैसे लिप सर्विस तो देते होंगे किंतु कोई इसको सीरियसली अपने माइंड में एक्सेप्ट नहीं करता होगा। तो यह परिस्थिति है कर्म के सिद्धांत के बारे में। तो यह स्टूडेंट ने जब मुझे यह प्रश्न किया तो मैंने कहा देखो मैं अपना खुद का इवोल्यूशन बताता हूं। मैं शुरुआत ऐसे ही किया था कि इस सिद्धांत पे पुनर्जन्म पर मुझे आउटराइट विश्वास नहीं था। किंतु जैसे-जैसे मैंने रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य का अध्ययन करना शुरू किया वैसे-वैसे ना मुझे इस कर्म के सिद्धांत का एक दूसरा पहलू देखने को मिला। अब जो लोग भी इस कर्म के सिद्धांत के बारे में पुनर्जन्म के बारे में रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य के बारे में अवगत होंगे वे लोग आपको आसानी से यह उत्तर दे देंगे। सभी लोग क्या कहेंगे कि हां यदि आप यह सिद्धांत को मानते हैं, इसके ऊपर में विश्वास करते हैं, तो आप कह सकते हैं कि आज मेरे साथ में जो हो रहा है, मेरे प्रारब्ध का परिणाम है। किंतु इसका एक पॉजिटिव साइड देखिए कि आने वाले कल जो होने वाला है, वह तो आज मेरे हाथ में है। यह बहुत सारे लोग कर्म पर विश्वास नहीं करेंगे। किंतु ग्रहों पर विश्वास करेंगे कि मेरा परीक्षा में पास हो जाऊं। मेरे साथ में यह हो जाए। मेरे साथ में वह अच्छा हो जाए। इसके लिए मैं विधि करवाऊंगा। अंगूठी पहनूंगा। ग्रह शांति करवाऊंगा। इसको पैसा दूंगा, उसको पैसा दूंगा, इस मंदिर में जाकर चढ़ा हुआ धराऊंगा। वह सब करने की बजाय वह कीजिए। करने में कोई आपत्ति नहीं है। और इन सब चीजों का परिणाम भी होता है। यदि ठीक-ठीक किया गया तो। किंतु इन सबके परे जो कर्म का सिद्धांत है वह मुझे क्या कहता है कि आज तू मेरे हाथ में है। मैं मेरे साथ में जो हो रहा है आज वो मेरे हाथ में शायद नहीं किंतु मेरा जो कर्म है वह तो मेरे हाथ में है। आज यदि मैं शुभ कर्म करूंगा तो मेरा आने वाला कल तो सुधर जाएगा। आने वाला कल तो किसी ग्रह के ऊपर में किसी नाराज हुए बैठ नाराज बैठे हुए देवता के ऊपर में या तो फिर किसी ने मेरे पर जादू टोना कर दिया है। इसके ऊपर में तो मेरा आने वाला कल निर्भर नहीं है। आने वाला कल मेरे आज के शुभ कर्म के ऊपर में ही निर्भर है। आज मेरा प्रारब्ध यदि मुझे संकट में डाला हुआ है। किंतु इस प्रारब्ध ने मेरे हाथ पैर बांध करके नहीं रख दिए। यह प्रारब्ध भले ही चाहे मुझे खाने के लिए दो रोटी ना देता हो। किंतु यह प्रारब्ध ऐसा नहीं कहता कि भाई तुम्हारे पास में खाने के लिए एक ही रोटी भले है। उस रोटी में से आधी करके तुम और किसी भूखे आदमी को ना दो। ऐसा तो नहीं कहेगा। आज जो शुभ कर्म मैं कर सकता हूं विदिन माय लिमिटेड मींस वो तो मैं कर ही सकता हूं। देखिए यह कितना इंटरेस्टिंग है। आज कल का मेरा अशुभ कर्म आज मेरे पे एक चुनौती एक संकट बनकर के बैठा हुआ है। भले ही चाहे ऐसा हो मैंने स्वीकार कर लिया। किंतु कल का अशुभ कर्म और आज का मेरा प्रारब्ध मुझे अंधा मेरे मुझे यह अपंग नहीं बना देता। अपाहिज नहीं बना देता। मैं चाहूं तो आज शुभ कर्म कर ही सकता हूं। और आज का शुभ कर्म कल कैरी फॉरवर्ड होगा और कल कहीं जाकर के संकट के जो बादल है मेरे सर पर मंडरा रहे हैं वो बिखर जाएंगे तितर-बितर हो जाएंगे और ईश्वर की कृपा रूपी या तो गुड फॉर्च्यून रूपी सनलाइट जो है सूर्य प्रकाश जो है मेरे मेरे सर के ऊपर में मेरे जीवन के ऊपर में अवश्य प्रकाशित होगा। तो यह है कर्म के सिद्धांत का पॉजिटिव पहलू। बहुत बार आज के जितने भी यह लोग हैं कि कहेंगे कि मैं यह प्रारब्ध को नहीं मानता हूं। कर्म के सिद्धांत को नहीं मानता हूं। पुनर्जन्म को नहीं मानता हूं। इसमें से आधे लोगों को देखेंगे कि छुपके छुप के ग्रह शांति करेंगे। यह विधि विधान करेंगे। सब कुछ भगवान पर विश्वास नहीं है। किंतु भूत पर विश्वास है ऐसे लोगों को। तो मेरा मेरा कहना है कि आप भूत पर विश्वास छोड़ दीजिए। ग्रहों पर विश्वास करना हो तो कीजिए। कोई उससे आता जाता नहीं है। किंतु भगवान ने हमको एक लॉजिकल वे ऑफ थिंकिंग दिया है। यह ग्रह पर विश्वास करने की वजह यदि आप कहते हैं कि कर्म का सिद्धांत अंधश्रद्धा है तो ग्रहों पर विश्वास करना उससे भी बड़ी अंधश्रद्धा है। कर्म का सिद्धांत एटलीस्ट आपको एक रैशन लॉजिकल रास्ता दिखाता है कि आपके साथ में क्या हो रहा है और आपके साथ में क्या होने वाला है। ये ग्रह वगैरह जो है ये विधि विधान जो है वो तो उसमें तो कोई रैशनलिटी ही नहीं है। इसमें तो कोई लॉजिक ही नहीं है। हां ये जो सब प्रैक्टिस करते होंगे वे लोग आपको रैशनलिटी बताएंगे भी सही और ज्योतिष शास्त्र तो हमारा सनातन शास्त्र है ही है। किंतु मेरा तो सिंपल मानना है कि यदि आप एक रैशनलिस्टिक पर्सन है तो कर्म का सिद्धांत जो है वह आपकी पर्सनालिटी के साथ में 100% फिट बैठ जाएगा। एक तो है कि कर्म के सिद्धांत को नेगेटिव रूप में देखना कि ग्लास आधा भरा हुआ है। ग्लास आधा खाली है। किंतु उसको पॉजिटिव वे में देखना है कि ग्लास आधा भरा हुआ भी तो है। यह ग्लास आधा ही है। पानी से भरा हुआ। इसको आप पॉजिटिव भी देख सकते हैं, नेगेटिव भी देख सकते हैं। कह सकते हैं कि यह कर्म का सिद्धांत मेरे साथ में आज मेरे सर पर संकट रूप बनकर के मंडरा रहा है। तो इसको पॉजिटिव रूप में भी कह सकते हैं कि आज यदि मैं शुभ कर्म करूं तो मेरा आने वाला भविष्य सुधर जाएगा। तो इस तरह से इसको स्वीकार करना है। ऑफ कोर्स इसको स्वीकार करना नहीं करना। आपकी रैशनलिटी की दौड़ कहां तक है और हम लोग कौन सी चीजों को आंख बंद करके स्वीकार कर लेते हैं और कौन सी चीजों को स्वीकार तो करते हैं। लिप सर्विस तो देते हैं किंतु इसके ऊपर में अंतर से कोई भरोसा नहीं है। यह सब दूसरी बातें हैं। किंतु प्योर रैशनलिटी के बेसिस पर मैं कहता हूं। मेरी जो खुद की यह जो जर्नी है, खुद का जो इवोल्यूशन है, वह रैशनलिटी और फिलॉसोफी के बेस पर हुआ है। और इसीलिए मैं कहता हूं कि यदि हम लोग सही-सही में रैशनलिस्ट है, सही में फिलॉसोफर है, तो कर्म का सिद्धांत और पुनर्जन्म का सिद्धांत वो मच बेटर रास्ता है हमारे लिए। धर्म के और किसी सिद्धांत को एक्सेप्ट करने की वजह। इससे हम अपना भविष्य अपने हाथों से गढ़ सकते हैं। बहुत बार ऐसा होता है। हम लोग क्या सोचते हैं? अच्छा आज तो मेरी परिस्थिति अच्छी नहीं है। दान धर्म दक्षिणा सेवा कार्य करने की मुझे कोई आवश्यकता नहीं। जब मेरी परिस्थिति अच्छी होगी। जब मेरे पता नहीं यह जो मेरा प्रारब्ध है मुझसे रूठा हुआ है। वह फिर से मेरे पर हंसना शुरू करेगा। यह मेरा प्रारब्ध फिर से मेरे पर खुश होगा। तब कहीं जाकर के मेरी परिस्थिति बदलेगी। तब मैं लोगों की सेवा करूंगा। ऐसा कहना किस तरह से है पता है कि पानी में मैं पानी में तभी प्रवेश करूंगा जब कि मैं स्विमिंग करना सीख लूं। अभी इसका प्रॉब्लम यह होगा कि जब तक पानी में प्रवेश नहीं करते हैं तब तक तैरना नहीं सीखते हैं। और जब तक तैरना नहीं सीखेंगे तब तक पानी में प्रवेश नहीं करेंगे। तो हमेशा के लिए आप पानी से दूर ही हो गए। तो यह मेरा नसीब जब अच्छा होगा, प्रारब्ध जब मेरे से खुश होगा, मेरी यह जो आर्थिक परिस्थिति ठीक होगी, तब मैं कहीं जाकर सेवा कार्य करूंगा। यह कहना इस तरह से है कि ना ही आप सेवा कार्य किए बिना, शुभ कार्य किए बिना प्रारब्ध अच्छा होने वाला है और प्रारब्ध बिना अच्छे हुए यह जो संकट है वह जाने वाले नहीं। यानी हमेशा के लिए हम यह दुखित हमेशा के लिए संकटग्रस्त होते ही फिरेंगे तो बेटर है। आज ही एज ऑफ टुडे जितना भी लोगों को सहाय कर सकते हैं जितनी भी छोटी-छोटी चीजों में वह प्रारंभ कर दे और फिर भविष्य में क्या होने वाला है? यदि ये यही जो कर्म का सिद्धांत जो कि आज मेरे पर संकट बनकर के मंडरा रहा है। आज यह काले बादल बनकर के यह ईश्वर की कृपा रूपी यह आर्थिक सुख शांति रूपी सूरज को ढक दे रहा है। तो यही कर्म का सिद्धांत मेरे शुभ कर्म की वजह से कल यह काले बादलों को पूरा बिखेर देगा और यह आर्थिक एक स्वच्छता या सछलता या तो फिर यह ईश्वर की कृपा फिर से मेरे जीवन में प्रवाहित होना शुरू हो जाएगी। तो यह मैंने थोड़ा उसको समझाया। मुझे पता नहीं कि कितना यह लोग ग्रहण करेंगे। किंतु दिस इज माय कांसेप्ट ऑफ कर्मा। अच्छा यह तो एक हुआ। दूसरा एक अभी
Saradakosh - Thakur, ma, swamiji
अ जैसे आपको पता है कि मैंने एक दो बार पहले भी शेयर किया था। मैं जब यहां पर ज्वॉइ करने को आया था बेलूर मठ में तो उस समय सुहितानंद जी महाराज हमारे इंचार्ज थे। अ और वो एक बीच-बीच में कहते थे कि हमको हमेशा एक पॉजिटिव कार्य लेकर के रहना है। इस अर्थ में कि वैसे तो आप रामकृष्ण संघ में है तो आपको तो सब ड्यूटी एलोकेट की ही जाएगी। किंतु इसके अलावा भी आपके पास में फ्री टाइम कुछ बचेगा। तो इस फ्री टाइम में आप हमेशा बिजी रहिए। थोड़ा सा भी बिना काम के मत बैठे रहिए। जब ध्यान करते रहिए, स्टडी करते रहिए, कुछ ना कुछ एक रिसर्च एंड डेवलपमेंट जैसा चालू रखिए। जिससे कि क्या है कि एक सतत प्रवाह, एक शुभ चिंतन का सतत प्रवाह हमारे जीवन में बहता रहे। क्योंकि यह कहते हैं ना कि खाली दिमाग जो है शैतान का घर है। एंप्टी माइंड इज अ डेविल्स फैक्ट्री। ऐसा जो कहते हैं तो हमेशा अपने साथ में एक शुभ चिंतन का प्रवाह चलते रहने दीजिए। तो उस समय फिर जब मेरा पोस्टिंग होना शुरू हुआ एक सेंटर से दूसरे सेंटर तो मैंने सोचा था कि यह रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य है। उसमें से एक सभी इंसिडेंट को कलेक्ट करके क्रोनोलॉजिकली है या थीमेटिकली है। ऐसा कलेक्ट करके एक एनसाइक्लोपीडिया जैसा बनाएंगे। और इसका नाम मैंने दिया था शारदा कोष। तो यह शारदा कोष इसका यह जो क्रोनोलॉजी है वगैरह मैंने बीच-बीच में शेयर किया भी है आपके साथ में। और जो सॉफ्टवेयर मैंने बनाया था विजुअल बेसिक में एक्सेस एक्सेस में मैंने यह एम Microsoft एक्सेस में ये सॉफ्टवेयर बनाया था शारदा कोष का और उसमें बहुत सारा डाटा एंट्री भी किया था। किंतु एक प्रॉब्लम उसके साथ में यह है काम तो मैंने बहुत किया डाटा एंट्री भी बहुत किया मोर देन 304ाउज के ज्यादा उसमें डेटा एंट्री होगा अ रोज़ होंगी फील्ड होंगे अ रिकॉर्ड होंगे सॉरी फील्ड नहीं रिकॉर्ड तो किंतु उसमें प्रॉब्लम क्या है ना कि मैं कभी इसको डिस्ट्रीब्यूट नहीं कर सका नहीं करना चाहता था यह एक बात है दूसरा कि MS एक्सेस में से जो एक सॉफ्टवेयर रेडी होता है। उसका डिस्ट्रीब्यूशन भी इजी नहीं है। इंस्टॉलेशन फाइल वगैरह बनाना पड़ता है। व्हिच इज़ कभी-कभी यह थोड़ा प्रॉब्लम खड़ा करता है। बाद में मैंने सोचा था कि इस डेटाबेस को या तो पूरे एनसाइक्लोपीडिया को शारदा कोष को मैं ऑनलाइन कर दूं। मैंने इसके लिए काम भी प्रारंभ किया था। कुछ लोगों ने डोनेशन भी दिया था इसके लिए और काम चल भी रहा था। किंतु बाय दैट टाइम मेरा राजकोट में पोस्टिंग हुआ और मैं इतना बिजी हो गया था राजकोट पब्लिकेशन में कि वह काम पूरा अधूरा रह गया और वह काम मेरा बहुत ज्यादा टाइम खा लेता था क्योंकि एक कस्टमाइज सॉफ्टवेयर डेवलप करना उसके लिए आपको बहुत-बहुत टाइम देना पड़ता है। तो यह टाइम मेरे पास में था नहीं। तो फिर जब से मैं मेरा पोस्टिंग यहां पे हुआ है तब से मैं फिर से बीच-बीच में ट्राई करता था कि क्या इसको रिजरेक्ट कर सकते हैं कि नहीं इस प्रोजेक्ट को। तो अभी देखिए कि अभी एक गुड न्यूज़ ऐसा है कि एआई बेस सिस्टम्स जो है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस सिस्टम वो इतनी डेवलप हो गई है कि आप बहुत इजीली उसको थोड़ा बहुत कस्टमाइज करके अपना डाटा एंट्री करके इसके साथ में आप काम कर सकते हैं। तो पिछले छह-सात महीनों से जो मैं कार्य कर रहा हूं तो वह मैं आज के आपके साथ में शेयर करता हूं। यह Google का एक ऐप है उसका नाम है नोटबुक एलएम। तो नोटबुक एलएम में क्या होता है? यस यह आप देख सकते हैं कि आपके सामने है ये। अ Google का ही यह ऐप है। उसका नाम है Notebook LM। अभी इसमें क्या है कि हमारे जितने भी सोर्स है टेक्स्ट बुक अपने पास में जितनी भी है वह सब इसमें ऐड कर देनी होती है। फिर इसके ऊपर में आप क्वेरी कर सकते हैं और क्वेरी का आपको रिप्लाई भी मिलेगा और मैंने टेस्ट करके देखा है। वह काफी अच्छे से काम करता है। 100% एक्यूरेट नहीं होगा। कुछ-कुछ क्वेरी मैं करता हूं तो रिप्लाई उसका मिलता ही नहीं है। भले ही मुझे पक्का पता है कि इसके भीतर में वह है फिर भी उसका उत्तर नहीं मिलता। तो विद इन दिस फोर कॉर्नर्स ऑफ़ कुछ-कुछ लिमिटेशंस यह काफ़ी अच्छा काम करता है। तो देखिए कि यह मैंने बेसिकली दो नोटबुक्स बनाई है। एक नोटबुक में आप 50 सोर्स ही डाल सकते हैं। तो वैसे अपने रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य में वैसे तो बहुत सारे सोर्स हैं। तो आइडियल होगा कि इसका प्रोफेशनल वर्जन परचेस करके वह एक ही सोर्स एक ही नोटबुक के भीतर में 100 200 जितने भी अपने सोर्स है सब डाल दे। किंतु खैर फ्री वर्जन में आप एक साथ में 50 सोर्स डाल सकते हैं। तो मैंने दो नोटबुक बनाई है। पहली नोटबुक जो है उसमें मैंने ठाकुर मां स्वामी जी के सभी सोर्स डाल दिए हैं। ओरिजिनल जो कुछ भी अपने पास में है। तो अभी जैसे कि यह जो है अ ये ठाकुर मां स्वामी जी की ये जो किताब है नोटबुक इसका इसके भीतर में वैसे देखिए मां की जितनी भी किताब है गोस्पेल ऑफ होली मदर यानी कि मायर कथा फिर यह गंभीरानंद जी की मां की बातें फिर मातृ सानिध्य मायर चिट्ठी मायर कथा मायर पदप्रांत फिर यह ठाकुर का गोस्पेल और फिर यह लीला प्रसंग जो कि चेतनानंद जी का ट्रांसलेशन है डिवाइन प्ले इसके बाद में श्री रामकृष्ण कृष्णा एस वी सो हिम यह एक रॉय चौधरी का है सत्यम रॉय चौधरी का रामकृष्ण फॉर यू इसमें काफी कलेक्शन है ठाकुर के कोटेशन का इसके बाद में देखिए कि यह कंप्लीट वर्क्स है पूरा पूरा स्वामी जी का कंप्लीट वर्क्स स्वामी जी का कंप्लीट वक्स बेंगली में कुछ वॉल्यूम डाले हैं मैंने इसके बाद में स्वामी जी का लाइफ ईस्टर्न एंड वेस्टर्न डिसाइपल इसके बाद में न्यू डिस्कवरी के छह वॉल्यूम इसके बाद में रेमिनेशंस ऑफ स्वामी जी इसके टर्निंग पॉइंट बोलकर के एक किताब है उसमें भी काफी कुछ मटेरियल है नया नहीं है किंतु अलग से थोड़ा सा सजाया हुआ है और एक लेटर अलग से बंगाली में है तो इतना ओरिजिनल मटेरियल जितना भी अपने पास में है यह सब मैंने इसमें डाला हुआ है तो शारदा कोष ठाकुर मा स्वामी जी वाला यह पोर्शन अभी इसमें आप कोई भी क्वेश्चन करेंगे इसको तो वह फटाफट करके आपको उत्तर देना शुरू करेगा। अभी यह मैंने कुछ क्वेश्चन जो है मैंने कलेक्ट करके यहां पर रखे हैं क्योंकि अभी मैं लाइव डेमो दिखाने जाऊंगा तो थोड़ा टाइम लग जाएगा किंतु यहां पर मैंने कुछ-कुछ क्वेश्चन आप जो भी क्वेश्चन करेंगे उसका जो रिप्लाई होगा वो यहां पर आप सेव करके रख सकते हैं। तो देखिए कि क्या है? एक क्वेश्चन मैंने किया कि अपने लिटरेचर में से भूत की जितनी भी कहानियां है घोस्ट स्टोरीज वो सब मुझे कलेक्ट करके दिखाए। तो देखिए कि यह उसने उत्तर दिया है। बड़ा अच्छा है। यह आपको एआई देखिए जनरल चैट जीपीटी वगैरह में आप क्वेरी करेंगे तो प्रॉब्लम क्या होगा कि वो दुनिया भर के सोर्स में से वो आपको उत्तर देगा। अभी वह सोर्स कितने ऑथेंटिक है नहीं है हमको पता नहीं। किंतु यह नोटबुक एलएम का बेनिफिट यह है कि जो सोर्स हमने अपलोड किए हैं उसी में से यह क्वेरी करके उसका उत्तर देता है। तो और फिर साथ में हमको रेफरेंस भी देता है। तो यह उत्तर वैसे उसने दिया है कि सोर्सेस कंटेन सेवरल अकाउंट्स ऑफ घस्ट स्पिरिट एंड सुपरनेचुरल फिनोमिना वगैरह-वगैरह और इसके बाद में पहले पॉइंट देखिए पॉइंट बना करके हाईलाइट करके कितना सुंदर इसका रिप्लाई आता है। तो ठाकुर के जो एनकाउंटर है भूत के साथ में तो कहां से स्टार्ट करता है बेनीपाल के गार्डन हाउस में वह बेनीपाल के गार्डन हाउस में वह ठाकुर टहल रहे थे तो एक भूत के साथ में मुलाकात हुआ फिर यह भूत कहता है कि व्हाई डिड यू कम हियर वी आर बीइंग स्कोर्स वी कैन नॉट एंडर योर प्रेजेंस लीव दिस प्लेस एट वंस अभी जब यह ऐसा कहता है तो नेचुरली हमको डाउट होगा कि इसका सोर्स कहां पे है तो देखिए कि सोर्स सब यहीं पर दिए हैं यह जैसे ही आप यह सोर्स पे क्लिक करेंगे वैसे ही आपको ओरिजिनल सोर्स खोल करके दे देगा। यह रामकृष्ण एज वी शो हिम में है। यह सोर्स ओरिजिनल हमको यहां पे दिखाई देता है। और इसके ऊपर में क्लिक करेंगे तो एक्चुअल किताब खोल करके वह हमको वहां पर ले जाएगा। तो देखिए कि इसका ऑथेंटिसिटी एस फार एज इट रिप्लाई यह बहुत बड़ा है। यह जहां पे भी देखिए कि जितने भी यह इसके बाद में यह कामारहाटी में वो ठाकुर को यह इस तरह से वो भूत का दर्शन हुआ था। दक्षिणेश्वर में कुठी जो थी जहां पे वो ठाकुर रहते थे। वहां पे एक हुआ था कि रामकृष्ण एंड हृदय रिसाइडेड इन अ लार्ज रूम ऑफ द कुठी। यह जो यह जो मथुर बाबू जहां पर रहते थे ना वहां पर जिसकी छत पर जाकर के ठाकुर ने भक्तों को पुकारा था वही वाला तो यह इट वाज़ नोन टू बी हंटेड पता है कि वहां पे एक भूत रहता है। ऑफन एट नाइट दे हर्ड ए मैन वेयरिंग शूज गो अप एंड डाउन द स्टेयर्स ओपनिंग डोर्स एंड विंडोज़ व्हिच वाज़ आइडेंटिफाइड एज अ घोस्ट पॉसिबबली एज अ यूरोपियन। वहां पर रात को यह लोग देखते थे कि जूते पड़ा हुआ एक भूत उन सीढ़ी से ऊपर नीचे जा रहा है और यह शायद किसी यूरोपियन का भूत है और आप पूछेंगे इसका सोर्स कहां है तो यह रहा उसका सोर्स और यह सोर्स कहां से श्री रामकृष्ण एस वी सो हिम जय रूपे देखियाची उसमें से यह कलेक्ट किया है। इसी तरह से यह निरंजन निरंजन महाराज के बारे में हमको पता है कि वह सियांस में पार्टिसिपेट करते थे और एक मीडियम बनते थे। तो ठाकुर ने उनको कहा था इस बार जब ठाकुर के पास में आए तो ठाकुर ने कहा कि तुम्हारे सर पर इस तरह का भूत सवार हो गया है जो कि तुम्हारे बाकी सब भूतों को भगा देगा। तो यह यह देखिए कि नाउ माय बॉय अनदर घोस्ट द होली गोस्ट इज अपॉन यू। हाउ एवर मच यू ट्राई यू विल नॉट बी एबल टू डिसमिस हिम। यानी कि एक बार ठाकुर के चंगुल में आ गए। एक बार मां काली के वह शिकंजे में फंस गए। फिर यह भूत अभी उनके सर से उतरने वाला नहीं है। और इसका सोर्स क्या है? तो देखिए कि यह स्वामी निरंजनानंद गॉड लिव विद देम। उसमें से यह हुआ है। और यह टाइटल है उसका निरंजनानंद आलम बाजार मठ 1896। तो देखिए फिर यह स्वामी जी का यह भूतों के साथ में क्या एनकाउंटर वगैरह-वगैरह बचपन की एक कहानी बताता है वगैरह फिर यह एक रिलेटिव स्वामी जी एक रिलेटिव के बारे में कहते हैं कहते हैं कि वह मुझ मुझे बीच-बीच में दिखाई देता था। उसका एक रिलेटिव का देहांत हुआ और उसका भूत जो है स्वामी जी के पास में आता था। अभी मुझे ऐसा लग रहा है कहीं पे ऐसा लिखा नहीं है। मैं अनुमान करके कहता हूं कि शायद उनकी जो बहन ने आत्महत्या की थी उनका भूत होगा शायद। हो सकता है। कंफर्म बताना मुश्किल है। किंतु फिर यह भूत जो आकर के स्वामी जी को जो बातें बताता था। किंतु स्वामी जी कहते हैं यह सब रिलायबल कुछ नहीं था। कभी वह सही भी होगा कभी-कभी यह गलत भी होगा। तो यह जो पूरा स्वामी जी का है यह एनकाउंटर यह इसका सोर्स है। यहां पे है कंप्लीट वक्स वॉल्यूम सेवन जिसमें कि स्वामी जी यह बात हमको बताते हैं। फिर यह स्पिरिचुअलिस्ट मीटिंग्स इस तरह की ये जो मीडियम सियांस वगैरह अपने पुरखों के साथ में वार्तालाप करना उनके साथ में कांटेक्ट करना वो सब समय बहुत चलता था अमेरिका में। तो यह अह स्वामी जी एक जगह पर गए तो एक अह लेडी जो कि इस तरह से भूतों के साथ में स्पिरिट के साथ में वार्तालाप कर रही है जो कि मीडियम है उस मीडियम कहती है कि भूत मुझे ऐसा बता रहा है। स्पिरिट ऐसा बता रहा है कि यहां पर एक हिंदू जेंटलमैन है। आपके बीच में विद्यमान है। वह आपके बीच में बैठे हुए हैं। तो स्वामी जी कहते हैं कि ये इट रिक्वायरर्स नो घोस्ट टू टेल मी। अर्थात कि यह किसी भूत को आपको कहने की जरूरत नहीं। आपको अपनी नजरों से दिखाई देता है कि यह मैं एक एशियन जेंटलमैन अर्थात कि एक एशिया से आया हुआ व्यक्ति यहां पर बैठा है। तो यह कहां से लिया है? कंप्लीट वर्ष के वॉल्यूम सिक्स में से यह लिया हुआ है। तो और इसके बाद में ये पौहारी बाबा का जो गार्डन जहां पे स्वामी जी रहते थे तो वो कहते थे कि वहां पर भूत है वगैरह-वगैरह। एस यू नो आई एम अ सॉर्ट ऑफ डिमोन मायसेल्फ एंड हैव नॉट मच फियर ऑफ गोस्ट। लोग कहते हैं कि पारी बाबा का गार्डन जो है वहां पर एक भूत रहता है। स्वामी जी कहते हैं कि मैं खुद एक भैरव हूं। मैं खुद एक दैत्य हूं और मुझे भूतों का कोई डर नहीं है। तो इस तरह से जितनी भी कहानियां है भूतों की देखिए कितना बड़ा कलेक्शन इसने किया है। तो आप यदि इस तरह से देखिए जाता ही जाता है। देखिए कितना ज्यादा है। तो मोर देन 79 सोर्स इसने इकट्ठे किए हैं पूरे लिटरेचर में से। देखिए कहां-कहां पे भूतों की कहानियां है इस तरह से करके। तो आप यदि कोई भी प्रश्न इसको करेंगे तो इसको आप सेव करके रख सकते हैं। यह क्वेश्चंस मैंने सब पहले पहले किए थे तो मैंने यह सब यह सेव करके रखे हैं। मैंने एक क्वेश्चन किया कि ह्यूमरस स्टोरीज मुझे बताइए। तो इसमें से यह सब ह्यूमरस स्टोरीज या तो हास्य विनोद के रिलेटेड जो कुछ भी है यह इसने कलेक्ट किया है। यह कलेक्शन भी काफी लंबा है। देखिए कि प्रबुद्ध भारत वेदांत केसरी के लिए इस तरह के एक आर्टिकल लिखने को आता एक समय और मुझे 50 से ज्यादा सोर्स को रेफर करके इस तरह से आर्टिकल लिखता मैं तो उसको जैसे कि बहुत बड़ी सिद्धि प्राप्त कर दी है। ऐसा माना जाता क्योंकि मैं लिटरेचर के फील्ड के साथ में काफी समय से जुड़ा हुआ हूं। मुझे पता है कि एक्यूरेट रेफरेंस दे दे के आपको एक आर्टिकल बनाना है। इसके लिए आपको तीन-4 महीने की मेहनत ईजीली चली जाएगी। मैं जब वैसे मैं प्रबुद्ध भारत के लिए भी कुछ-कुछ आर्टिकल लिखे हैं और मैं रामकृष्ण ज्योत गुजराती मैगजीन वहां पे भी आर्टिकल लिखता था। मुझे पता है कि सिर्फ रामकृष्ण संघ का जो है कि सिर्फ आर्टिकल लिखना यानी कि सिर्फ अपने विचारों को व्यक्त करना वो इनफ नहीं है। आपको पक्का रेफरेंस देना पड़ेगा। बिना रेफरेंस के हम जो लोग कहते हैं कुछ भी उसका कोई मीनिंग नहीं रहेगा। तो इसलिए देखिए कि इस तरह से एक रेफरेंस देकर के परफेक्ट आर्टिकल लिखना तीन से चार महीने का काम इजीली था। आज हमारे पास में यह परिस्थिति है कि रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य पूरा एट आवर फिंगर टिप्स है। इसमें से जो कोई भी आप क्वेश्चन करेंगे इतना सुंदर यह आर्टिकल बना के देता है और विद रेफरेंस ऐसा नहीं है कि हवा-हवा में बनाया है और चैट जेबीटी को पूछा नहीं कि इवन जेमिनी को पूछा तो वो जो सोर्सेस जहाज को वो रेफर करता है। बहुत बार ऐसा होता है कि विकपीडिया को रेफर करता है। अभी विकपीडिया का प्रॉब्लम क्या है कि एक हिंदू विरोधी उन लोगों का माइंडसेट है। तो इतना सब नेगेटिव नेगेटिव हमारे बारे में वे लोग लिखते हैं। अभी ये एआई सिस्टम है चैट जीपीटी वगैरह कुछ भी वो वहां से रेफर करके सब नेगेटिव टाइप के उत्तर हमको देगा। तो इससे बेटर है कि हम अपना लिटरेचर इसमें अपलोड करें और अपने लिटरेचर में से हमको आंसर मिले विल बी मच मोर ऑथेंटिक और इस तरह से किसी का भी बायोग्राफी आपको जानना है। अब जैसे कि की डेट्स इन रामकृष्णास लाइफ एंड गोस्पेल। ऐसा करके मैंने क्वेश्चन किया। तो उसने देखिए कि गोस्पेल में से पूरा टेबल बना दिया कि कौन-कौन सी मुख्य तारीखें हैं। उस उस तारीख को क्या-क्या हुआ। तो विद रेफरेंस इसने यह टेबल बनाया है कि फरवरी 18 1836 ठाकुर का जन्म हुआ। द चाइल्ड टू बी नोन आफ्टरवर्ड्स एस रामकृष्णा वाज़ बोर्न गिवन द नेम गदाधर और इसका रेफरेंस भी दे दिया कि यह कहां से लिया हुआ है बोल के। तो ऐसा करके पूरा देखिए कि जो इंपॉर्टेंट इंपोर्टेंट डेट्स जितनी भी है उसका पूरा टेबल इसने बना दिया है और यह टेबल भी काफी लंबा है। यह टेबल मैंने काफी पहले बनाया था जबकि मैंने सोर्सेज इतने नहीं ऐड किए थे। आज बहुत सारे सोर्स है तो टेबल भी और भी लंबा बनेगा। तो इस तरह से आप देख सकते हैं कि ये स्वामी जी के चार योग तो मैंने प्रश्न किया एक दिन बैठकर के कि ये स्वामी जी ने जो चार योग सबसे पहले जो पब्लिश किए थे न्यूयॉर्क से पब्लिश हुए थे और पब्लिकेशन में कुछ-कुछ कंट्रोवर्सी रह गया था क्योंकि न्यूयॉर्क के पास में स्वामी जी ने कॉपीराइट दिए थे ऑथॉरिटी दिया था पब्लिश करने का। यह जो गुडविन को हायर किया न्यूयॉर्क वेदांत सोसाइटी ने और फिर स्वामी जी के लेटर्स का शॉर्टहड भी उसने लिया और फिर कॉपीराइट भी स्वामी जी ने वेदांत सोसाइटी ऑफ न्यूयॉर्क को दिया कि आप लोग किताबें पब्लिश कीजिए। मीनवाइल ईटी स्टडी था लंदन में बैठा हुआ था। वह कहता है कि मैं लंदन का एडिशन मैं पब्लिश करूंगा। तो अभी पता नहीं स्वामी जी का ईटी स्टडी के साथ क्या बात हुआ। ईटी स्टडी का ये जो वेदांत सोसाइटी ऑफ न्यूयॉर्क के ये जो सब ऑफिस बियरर्स है उन लोगों के साथ में मिस वाल्डो वगैरह के साथ में क्या वार्तालाप हुआ वहां पे एक इस तरह का मिसअंडरस्टैंडिंग हुआ कि सब लोगों के भीतर में एक तरह से एक ये होने लगा आर्गुमेंट होने लगा लंदन पब्लिश करेगा पहले ना कि न्यूयॉर्क करेगा कॉपीराइट लंदन के पास रहेगा कि न्यूयॉर्क के पास रहेगा लंदन का एडिशन न्यूयॉर्क के अंडर में रहेगा कि वो इंडिपेंडेंट रहेगा तो इसके रिलेटेड काफी बिखरा हुआ मटेरियल है एक जगह पे मेरे पास में नहीं था। तो मैंने प्रश्न किया कि यह जो स्वामी जी के जो चार योग है इसके पब्लिकेशन के रिलेटेड जो हिस्ट्री है मुझे दिखाइए। तो उसने इतना सुंदर करके कलेक्शन किया है पूरा विद रेफरेंस कि वो राजयोग का जो एडिटिंग हुआ उसमें स्वामी जी का कितना हिस्सा था। राज्यों का जो पब्लिकेशन हुआ उसमें किस तरह से यह जो सब कंट्रोवर्सी वगैरह जो हुआ वगैरह-वगैरह आप देखेंगे कि बुक वाइज इसने किया है कि यह पहले तो राजयोग उसके बाद में यह कर्म योग के बारे में फिर यह भक्ति योग के बारे में फिर यह ज्ञान योग के बारे में यदि यह पूरा यह आर्टिकल मैं यदि अपने से लिखने को जाता पक्के सोर्सेज को लेकर के तो मुझे नहीं लगता कि मैं 6 महीने से कम में कर पाता। इतना बिखरा हुआ है और इतना मटेरियल है। किंतु इसको मैंने क्वेश्चन किया तो विदिन 2 मिनट्स विदिन 1 मिनट उसने इतना परफेक्ट आर्टिकल मुझे बना करके दे दिया। तो और भी और फिर इसके साथ में ना और भी बहुत कुछ जुड़ा हुआ है। जैसे कि आप ऑडियो जैसे कि यह माइंड मैप बना सकते हैं। तो माइंड मैप क्या है कि अब जिस माइंड एंड इट्स कंट्रोल मैंने इसको प्रश्न किया कि मेडिटेशन कॉन्शियसनेस ये माइंड इसके रिलेटेड जो लिटरेचर है जो भी टीचिंग्स है उसका माइंड मैप बनाओ। तो देखिए कि यह माइंड मैप जो है इसने बनाया है माइंड एंड माइंड कंट्रोल कैसे किया जाए तो देखिए कि यह पूरा इसने बनाया है चार्ट पहले तो कहता है व्हाट इज द नेचर ऑफ माइंड तो व्हाट इज द नेचर ऑफ माइंड तो यह है नेचर ऑफ माइंड कि स्टेट्स सेटल एंड ग्रोस द एक्टिविटीज थिंकिंग फीलिंग डिजायरिंग कंट्रोल डिसिप्लिनिंग टेंडेंसीज अंडरस्टैंडिंग द इंटरनल इनहरेंट नेचर माइंड इज अ डियल अ कलेक्शन कैपेबिलिटीज डूइंग एंड कंसीविंग इनफ्लुएंस कितना सब कुछ है और यह हवाहवा में नहीं है। इस पे क्लिक करेंगे तो सीधा वो लिटरेचर में से कहां पे यह कांसेप्ट बनाया हुआ है वो सीधा आपके सामने ला के रख देगा। यह थोड़ा सा टाइम लेता है। 46 सोर्सेज है यहां पे। तो 46 सोर्सेस में से यह माइंड मैप कंपाइल किया है। तो उसका यह जो सॉल्यूशन है वह हमको यहां पे देगा। ये ये जिसके ऊपर में हमने क्लिक किया था उसका वो आने दीजिए उसको तब तक आगे बढ़ते हैं। अंडरस्टैंडिंग एक्सपीरियंसेस वेरियस एस्पेक्ट रियलाइजेशन एसेंशियल नेचर प्योरिटी सेंस वर्ल्ड इंटरनल नेचर अंडरस्टैंडिंग कंट्रोल ओवर थॉट सर्टलिटी कैपेबल ऑफ रिचिंग सल स्टेट एक्शंस कितना कॉम्प्लिकेटेड है और कितना डिटेल में है। स्टडिंग द माइंड, कंट्रोलिंग ऑल एस्पेक्ट ऑफ माइंड, अंडरस्टैंडिंग इनर नेचर, अंडरस्टैंडिंग ऑल मेंटल फैकल्टीज, कंट्रोलिंग ऑल मेंटल फैकल्टीज। और यह कहां से बनाया है? अपने ही लिटरेचर में से बनाया है। हवा-हवा में से नहीं। देखिए उसने उत्तर भी दे दिया। नेचर ऑफ माइंड क्या है इसके बारे में विद रेफरेंस। देखिए उत्तर कितना लंबा है और कितने सारे यह रेफरेंस 155 के आसपास रेफरेंस कलेक्ट करके इसने यह बनाया है। दैट मींस कि व्हाट इज माइंड? इसके रिलेटेड अपने लिटरेचर में जो कुछ भी है ठाकुर मां स्वामी जी ने जो कुछ भी कहा सब हमको यहां पर मिल जाता है।
Saradakosh - Direct disciples
अनफॉर्चूनेटली प्रॉब्लम यही है कि मुझे डायरेक्ट डिसाइपल के लिए यह सेपरेट नोटबुक बनानी पड़ी क्योंकि वह फ्री वर्जन में एक साथ में आप 50 ही सोर्सेज ऐड कर सकते हैं। तो यह डायरेक्ट डिसाइपल की नोटबुक है। इसमें देखिए अखंडानंद के जे रूप देखिया जी छ भक्त मालिका ब्रह्मानंद धर्म प्रसंगे स्वामी ब्रह्मानंद ब्रह्मानंद स्मृति कथा प्रेमानंद जीवन और स्मृति कथा प्रेमानंद पत्रावली पुण्य स्मृति रामकृष्ण जगदीश्वरानंद जी का रामकृष्णानंद जी का लाइव रामकृष्ण रामकृष्ण नंद स्मृति कथा और रचना संग्रह इतना बड़ा किताब है यह स्मृति कथा और रचना संग्रह श्री रामकृष्णानंद जी के बारे में शशि महाराज की जितनी भी रचनावली थी, जितने भी लेटर्स थे, जितने भी रेमिनेशनंस है, बंगाली में है, पूरा का पूरा कलेक्शन यहां पे है। शारदानंद जी की स्मृति कथा इतनी मोटी है, जितनी भी किताबें हैं, सब मोटी-मोटी किताबें हैं। फिर यह शिवनंद स्मृति संग्रह इतनी मोटी किताब है। शिव ये जितनी भी किताबें हैं बाय द वे सब बेंगली में है। किंतु यहां पे इसका बेनिफिट क्या है पता है? आप जो कोई भी लैंग्वेज में इसको क्वेश्चन करें। सोर्स बंगाली हो ना कि संस्कृत हो ना कि स्वाहिली हो ना कि मंदारिन हो ना कि फ्रेंच हो ना कि जर्मन जिस लैंग्वेज में आप क्वेश्चन करेंगे उस लैंग्वेज में यह उत्तर देगा। यह इसका जो आउटपुट लैंग्वेज है वो सेट आप कर सकते हैं। तो जिस लैंग्वेज के साथ में मैं कंफर्टेबल हूं हिंदी के साथ में मैं कंफर्टेबल हूं तो मैं हिंदी में क्वेश्चन करूंगा। हिंदी में रिप्लाई मिलेगा। डज नॉट मैटर कि सोर्स बंगाली है। यानी कि मल्टीलिंगुअल कितना इजीली एक लैंग्वेज से दूसरी लैंग्वेज में यह शिफ्ट होता है। और यह यहां का स्टूडियो ये जो मैंने पूछा कि रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन के प्रधान व्यक्तित्व कौन है? तो यह जब क्वेश्चन मैंने किया था उस समय मैंने आउटपुट लैंग्वेज बेंगली रखी थी। तो यह बेंगली में इसने यह पूरा माइंड मैप बना करके दे दिया। यह माइंड में क्या कहता है? देखिए कि रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन के प्रधान व्यक्तित्व कौन-कौन है? तो पहले तो सीधा उसने मुझे एक रिप्लाई दे दिया कि कौन-कौन से हैं? तो अभी जैसे ब्रह्मानंद। ठीक है? राजा महाराज एक है। इसके बाद में शिव आनंद है। जितने भी है राजा महाराज है, प्रेमानंद है, शारदा है, शिवनंद है, रामकृष्णानंद है, तुरियनंद है, सुबोधानंद है। अभी ये राजा महाराज के बारे में फर्दर एक्सपैंड करेंगे तो उनका परिचय, उनकी गुणावली और शिक्षा, उनके शिष्यों के साथ में उनका संपर्क और उनकी महासमाधि के बारे में। अभी परिचय यदि एक्सपंड करेंगे तो देखिए कि रामकृष्ण और मठ और मिशन के अध्यक्ष थे। ठाकुर के आध्यात्मिक मानस पुत्र थे। विवेकानंद के आदर के भाई थे। बाल गोपाल थे। शिशु सुलभ प्रकृति थी। भक्त लोगों के सामने राजा महाराज और फिर उच्च आध्यात्मिक राज्य अवस्थान। ये गुणावली और शिक्षा यदि ओपन करेंगे तो क्या-क्या है? आध्यात्मिक गंभीरता। अभी आध्यात्मिक गंभीरता में इतना सब कुछ है। अब इसको जितना एक्सप्लोर करना चाहिए कर लीजिए। कृपा और आशीर्वाद ये फिर यह शासन और भालोभाषा लोगों को डिसिप्लिन भी करते थे। उनको प्रेम भी करते थे। उनका वैराग्य कैसा था? फिर उनकी दृष्टि यानी कि एटीट्यूड पॉइंट ऑफ व्यू कैसा था? और अनन्य जनरल यह सब कैसा था? तो यह जितना भी है जहां पर भी आप क्लिक करेंगे एट द एंड ऑफ द डे वो एकदम फटाक करके उसका फिर डिटेल आपको दे देगा। गुरुत्व पूर्ण काज ठीक तो ना करते पा रहा है। आशीर्वाद अमोगता वगैरह वगैरह योग निद्रा सहज समाधि अवस्था देखिए सहज समाधि अवस्था पर क्लिक करते हैं। अभी क्या है कि मैंने आउटपुट लैंग्वेज चेंज करके इंग्लिश कर दिया है। यदि लेट मी कंफर्म कि आउटपुट लैंग्वेज डिफॉल्ट है यानी कि इंग्लिश है। तो अभी जो उत्तर देगा वो इंग्लिश में देगा। जब मैं यह माइंड में बना रहा था उस समय आउटपुट लैंग्वेज बंगाली थी तो उसने पूरा बेंगली में बनाया है। इसके अलावा यहां पे देखिए कि यह ऑडियो ओवरव्यू देता है। यानी कि पूरा एक ऑडियो बना देगा पडकास्ट की तरह कि लिटरेचर जो है पूरा डायरेक्ट डिसाइपल का उसमें से यदि आपको एक पडकास्ट बना करके सुनना है मेजर मेजर टॉपिक लेकर के तो वो आप सुन सकते हैं और
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वीडियो भी बना देगा कि लिविंग वेसल हाउ द डिसाइपल्स कैर द फ्लेम तो यह एक पूरा वीडियो उसने बनाया है हेलो एंड वेलकम यू नो वी ऑफ टॉक अबाउटिंग फ्लेम इट्स दिस पावरफुल आईडिया कीपिंग लेगसी अलाइव आफ्टर पर्सनली ग्रुप दे यंग डिसाइल्स 19 मिस्टेशन आफ्टर ही 1886 देव लेक्चर नो दे डिसाइडेड टू बिकम टीचिंग वन ऑफ़ देम टर्न ओ लाइफ टेस्टमेंट लिविंग ऑफ़ सो वाज़ देयर फर्स्ट बिग आईडिया एक्चुअली देवी देवरी दिस आईडिया वाय देर स्वामी सोलक्रेडिब आईडिया एनी एक्शन मी दिस नाइस देबच ही पर्सनल गोल टू सर्व द पीपल स्वामीफिंग सिंगल फ्रूट वन ग्रो वाय ऑफरिंग टू ह टीचर मे बी द मोस्ट स्वामी देव सेलेस सर्विस वायफुल दिस पावरफुल मेंटल रिसेट थिंग देन पर्सन जस्टिंग देव समथिंग देर प्रिंसिपल कवसिंग सोडिकल इट जस्ट ऑल द सोशल बैरियर्स देप इट वाली सर्कल दे ओपन देली वेलकम बट द स्केपिक्स दल इवन पीपल सोसाइटी हैड कंप्लीटलीस्ट इफ यू वरियस एंड जस्ट शो द डोर यू वर ट्रीटेड विथ द सेम लव दिस वासिव एक्टिव स्वामी सिंगिटर हु दे टू बी ही देन टू प्लेस दे समथिंग स्पेशल इन देम स्वामी सोेंस ही अर्न टू टेक द बॉय ऑन टू हिमसेल्फ दे स्वामी रामकृष्ण इनस वाली हॉट ही लिटरली गुरु पिक्चर लिविंग पर्सन दिस लव वाल सो यूनिवर्सल लोकल मुस्लिम विलेज स्वामी हिंदू मंक दे होली मैन दे दिस लव सेल्फलेस एक्शन टू दिसली पैराड दे पर्सनालिटी ऑन द वन हैंड स्पिरिचुअल जदुबा दे ग्लोबल मूवमेंट स्वामी प्रेसिडेंटर देबली स्वामी लविंग कॉल्ड कोका चाइल्ड बिक ही सो इनोसेंटलेस देवरसेस दिस मेंटल डिसिप्लिन ग्राउंडेड इनफ्लुएंस दिसिलिटी इट वाकल टू गेटिंग डन इट वास द इंजन दे सेल्फलेस एटीट्यूड डेस्ट्रेडिबल टायरलेस वर्क आफ्टर देदर इन 1886 स्वामी रामकृष्ण वाउ साउथ इंडिया ही एसेंशियली वन मैन मिशन ही वास द प्रीस्ट द कुक द टीचर एवरीथिंग द चाइल्डम फाउंडिंग ट्रस्टी ऑफ द एंटायर ऑर्गेनाइजेशन फ्यू पीपल रोड दर्गेद रियल लेगसी लाइफ एसेंशियल दे पास ऑन टू असेंज थ्रू ऑल दे स्टोरी इज दिस ट्रू स्पिरिचुअलिटी इज नॉट अ रिट्रीट मोर मीनिंग मोर लव मोर पावर दे नंबर एक्शन नंबर थ्री सीपीली लवलिटी यह इतना सुंदर रूप से इसने यह किया है ना कंपाइल कभी-कभी मुझे डाउट होता है कि यह जो मैं क्लास ले रहा हूं इसमें से यदि मैं इसका वीडियो ओवरव्यू बना करके हिंदी लैंग्वेज में बंगाली में यदि वो प्रेजेंट करना शुरू कर दूंगा तो इट विल टेक बेटर क्लास देन आई एम क्योंकि ये इतनी सारी किताबों में इतना सारा इंफॉर्मेशन जो है एट वन पॉइंट सब कुछ मेरे माइंड में रखना और उसमें से हाईलाइट आपको प्रेजेंट करना इट इज नॉट पॉसिबल फॉर एनी सिंगल ह्यूमन बीइंग किंतु इसने इतना एक्यूरेटली किया है व्हिच इज रियली अमेजिंग और यह जो हमने वह क्लिक किया था तो उसमें से ये उत्तर भी आ गया। उस समय का लैंग्वेज था आउटपुट लैंग्वेज बंगाली तो अभी का है इंग्लिश। तो देखिए यह रेफरेंस जो है रेफरेंस एक्चुअली है बंगाली में किंतु उत्तर देता है इंग्लिश में। इट इज सो इजीली मल्टी मल्टीलिंगुअल कि आपको पता ही नहीं चलेगा कि आप डिफरेंट-डिफरेंट टाइप के इसके साथ में आप ये कर रहे हैं, डीएल कर रहे हैं, लैंग्वेज के साथ में। तो यह समझ सहज समाधि अवस्था थी राजा महाराज की। तो यह इसके बारे में है। तो देखिए कि एक तो है यह वन नोटबुक है। इट इज कलेक्शन ऑफ ठाकुर मा स्वामी जीसस ओरिजिनल टीचिंग जितने भी मुझे मिले डिवाइन प्ले यानी कि इतना मोटा किताब है। गोस्पेल तो आपको पता ही है इतना मोटा है। कंप्लीट वर्ष के नाइन वॉल्यूम है। फिर बाकी जितनी भी न्यू डिस्कवरी के सिक्स वॉल्यूम है। ये जितना भी रेमिनेशंस है जितना भी मुझे मिला मैं इसमें डाल दिया है। और भी कुछ है डालने के लिए जैसे शंकरी प्रसाद बसुका है वह सेवन 88 वॉल्यूम में समकालीन भारतवर्ष स्वामी विवेकानंद और समकालीन भारतवर्ष तो वह भी मैं इसमें डाल दूंगा और ऑलमोस्ट जितनी भी मेजर बुक्स है अपने ऑर्डर की सब मैंने इसमें डाल दी है। तो एज यू कैन सी हियर कुछ-कुछ और बाकी है किंतु यह मैं डालता जाऊंगा। तो यह देखिए कि पिछले 6 महीने से मैं इसके ऊपर काम कर रहा था। डेली मुझे एटलीस्ट वन ऑवर टू आवर देने पड़ते थे। चैलेंज ये है कि ये सब चीजें सोर्स मटेरियल है। सब कुछ टेक्स्ट फॉर्म में करके डालना है। अभी ज्यादातर सोर्स मटेरियल मेरे पास में पीडीएफ स्कैन करके पड़ा हुआ था। तो पीडीएफ को टेक्स्ट में कन्वर्ट करना फिर यह कन्वर्ट करके फिर यदि बहुत बड़ी-बड़ी मिस्टेक है उसमें क्योंकि कन्वर्जन टेक्स्ट कन्वर्शन ईजीली होता नहीं है। बहुत सारी एरर्स आ जाती है। तो वो सब करना ये करेक्शन करना करतेकरते ये आज की यह परिस्थिति है कि हम लोग जो कुछ भी स्टडी करते हैं रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य में कोई भी डाउट होगा तो यह अच्छे से आपको उत्तर देगा। तो दैट मींस 90% डाउट्स आपका सॉल्व कर देगा। ऐसा मैंने देखा है। मैंने कभी-कभी जनरल क्वेश्चन किए थे कि स्ट्रेस से कैसे मुक्ति पाई जाए? आजकल स्ट्रेस एक बहुत बड़ा एक है टॉपिक तो वो स्ट्रेस से स्ट्रेस का क्या सॉल्यूशन है वगैरह-वगैरह आपको काफी कुछ उत्तर देगा। अभी आप इस उत्तर को माने ना माने। आपके पास में ओरिजिनल रेफरेंस तो यह इमीडिएटली दे सकता है। ठाकुर मां स्वामी जी का ओरिजिनल रेफरेंस जाकर के आप चेक कर सकते हैं कि हां यह ठीक है कि नहीं है। सो इट इज़ अ वेरी गुड स्टडी गाइड। स्टडी का ये ध्यान साधन भजन का रिप्लेसमेंट नहीं है। इट्स अ वेरी गुड स्टडी गाइड। तो यह है आज तक का ऑडियो ओवरव्यू, वीडियो ओवरव्यू, माइंड मैप, रिपोर्ट्स और यह सब क्वेश्चंस यह रेडी करके तो यह मैं आपके साथ में शेयर कर रहा हूं। मैं बाद में आज लिंक शेयर कर दूंगा। आइडियल होता कि एक ही नोटबुक के भीतर में मैं सभी सोर्स इकट्ठा कर पाता। किंतु यह अनफॉर्चूनेटली फ्री वर्जन के साथ में 50 का लिमिट है। तो हमको ठाकुर मास्वामी जी को सेपरेट क्वेश्चन करना होगा और यह डायरेक्ट डिसाइपल को सेपरेट क्वेश्चन करना होगा। तो व्हाटएवर तो ये एक स्टडी मटेरियल मैंने तैयार किया था। अच्छा तो आज यहीं तक अभी कल फिर से मिलते हैं। ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णपणमस्तु
AI vs Human creativity
नहीं दूसरा देखिए देखिए मैं खुद रामकृष्ण विवेकानंद साहित्य का स्टडी करता हूं किंतु मेरे पास में इतना टाइम या मेंटल कैपेसिटी मुझे नहीं लगता कि है कि मैं जो कोई भी क्वेश्चन करें आप मैं इसमें से परफेक्ट कंपाइलेशन करके आपको उत्तर दे पाऊं। इट विल नेवर बी पॉसिबल। देखिए एआई और ह्यूमन क्रिएटिविटी या तो ह्यूमन माइंड में डिफरेंस क्या है? मैंने यह एआई के साथ में जब से यह एआई स्टार्ट हुआ है आज से तीन-चार साल पहले चैट जीपीटी का जो फर्स्ट वर्जन आया था तब से लेकर के मैं काफी क्लोजली इसको टेस्ट करता रहता हूं। मैंने देखा है कि सोर्स मटेरियल के ऊपर में क्वेरी करके एक कॉम्प्रिहेंसिव रिपोर्ट बनाना इसमें एआई का कोई आप कंपटीशन नहीं कर सकते। जितना ही चाहे आप बुद्धिशाली हो, जितना ही चाहे आपने मेमोराइज किया हो, जितना ही क्लोजली आपने सोर्स के साथ में आप फमिलियर हो, आप इसका कंपटीशन नहीं कर पाएंगे। किंतु हमारे पास में एक चीज है जो कि एआई कभी नहीं दे पाएगा। इट्स अ लीप ऑफ फेथ जिसको कहते हैं इतना सारा सोर्स मटेरियल। तो इसमें से एज ऑफ नाउ मुझे यह चीज की जरूरत है तो फट करके वो चीज उठा लेना। देयर इज़ अ लिप ऑफ फेथ। ये जो साइंटिस्ट लोग ब्रेन स्टडी करते हैं ना वे लोग कहते हैं कि देयर इज ए एक ऐसा एक डार्क एरिया है। डार्क एरिया के पहले वाले पार्ट में आप देखेंगे ना तो जो कि स्टर्ड मेमोरी है इसके बेस पे ये सब इंफॉर्मेशन हमको देता है। जिसको सेंसरी इनपुट कहते हैं। मैं आंखों से जो देख रहा हूं, कान से जो सुन रहा हूं, मुंह से जो ग्रहण कर रहा हूं, वह सेंसरी इनपुट मुझे देता है। और सेंसरी इनपुट के बेस पर इंफॉर्मेशन कलेक्ट होती है। और एक है एक स्पिरिचुअल या क्रिएटिव या तो इनटिव एक अंडरस्टैंडिंग यह दोनों के बीच में ना गैप है। यह यहां से यहां कैसे जंप लगाता है समझ नहीं आता है। सो दैट लीप ऑफ फेथ एक कंप्लीटली न्यू चीज आपने पूरा लिटरेचर पढ़कर के पूरा परफेक्ट रिपोर्ट खड़ा किया। यह एक चीज है और दूसरा कि आप अपने रिवर्ड प्रेसिडेंट महाराज को एक प्रश्न करेंगे कि जब ध्यान के बारे में कि मेरा यह प्रॉब्लम है और महाराज एक ही सेंटेंस में आपको जो उत्तर दे देंगे व्हिच विल बी कंप्लीटली डिफरेंट। सो दैट लीप ऑफ फेथ ये एआई नहीं ले पाएगा। बट अदरवाइज इट इज अ वेरी गुड सोर्स जिसको स्टडी करना है उसके लिए। हां माने वो कहते हैं ना कि महाभारत में जो है वही जगत में है। जगत में जो नहीं है वह महा मतलब जो महाभारत में नहीं है वह जगत में नहीं है। जगत में जो है वो सब महाभारत में है। सो रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर इज़ लाइक दिस ओनली कि जगत में जो है सब यहां पे रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर में है। जो रामकृष्ण विवेकानंद लिटरेचर में नहीं है। जगत में ही नहीं है। सो देन अभी प्रश्न होगा कि चलिए आज इकोनॉमिक क्राइसिस चल रही है देश के सामने। सो व्हाट इज द सॉल्यूशन? आप पूछिए यहां पर। देखिए क्या उत्तर मिलता है। राइट? टेररिज्म इज अ सोल वन वन बिग क्वेश्चन। यू आस्क द क्वेश्चन क्या है? और उस पे क्लिक करके आप वहां पे इमीडिएटली जाकर के आप वो ओरिजिनल पढ़ सकते हैं इंस्टेंटली। अभी अभी और ये तो ये तो देखिए एक हायर फिलोसोफिकल हो गया। अभी अब जैसे आपने कुछ दिन पहले कहा था ना कि ललित बाबू की जितनी स्टोरीज है वो स वो मां के भैरव भक्त। तो आप इसको क्वेश्चन कीजिए। जैसे ही इट विल गिव यू आंसर कि ललित बाबू का पूरा बायोग्राफी जितने भी इंसिडेंट सब एक साथ में लाकर खड़ा कर देगा और फिर इतना ही नहीं उसके ऊपर में ऑडियो बना दीजिए उस पे वीडियो बना दीजिए फिर प्रेजेंट दैट वीडियो इतना वीडियो जो कि रामकृष्ण मठ मिशन इतना बड़ा हम लोग इस तरह के वीडियो कभी नहीं बनाने वाले ये आपको फ्री में बना करके दे देगा देखिए मेरा तो बड़ा सिंपल है मेरे माइंड में यह जो घोष स्टोरीज या ह्यूमरस स्टोरीज ऐसा बहुत कुछ घूम घूमता रहता है तो अभी मैं कहां है वो इंडिविजुअल सर करने को जाऊंगा। यहां पे मैं बैठ अभी वह जो आपने माइंड मैप देखा था। माइंड मैप इज़ सच अ पावरफुल टूल। मैंने यह टीसी में इसका मैंने स्टार्ट किया था। मेरे खुद के बहुत सारे माइंड मैप बनाए हुए हैं। नहीं तो यहां पे आप देखिए इतना इजीली माइंड मैप बनाता है और इतना इंट्यूटिव बनाता है। मेरा इतना एक्सपीरियंस है। मैं बता रहा हूं कि अच्छा बनाता है। ऐसा हवाहवा में नहीं है। वह वीडियोस जो मैंने वो बनाए एक दो आप पूरा देखेंगे तो लगेगा इट इज़ वेरी गुड। उन्हें ठाकुर की महासमाधि के बाद में उनके डिसाइपल्स ने किस तरह से यह उनकी आध्यात्मिक साधना और आध्यात्मिक उपलब्धि की मशाल को जीवंत रखा जला जला करके रखा विद इन सेवन मिनट्स आपको बहुत अच्छा वो दे देगा और क्या वो स्टार्ट ही करता है कि शिव ज्ञान जीवो सेवा वगैरह रेडिकल आइडियाज सब इंप्लीमेंट किए जो कि हम इतना अपने लिटरेचर में इतना स्टडी कर रहे हैं। उसके बाद में जो समझते हैं इसको 1 मिनट में समझ आ जाता है। अभी इसके बाद में ना स्क्रिप्चर्स का मैं बनाऊंगा। जितने भी स्क्रिप्चर है ओरिजिनल उपनिषद, गीता, ब्रह्मसूत्र, शंकर भाष्य वह सब डाल दूंगा। एक नोटबुक में वो शायद एक से तो होने वाला नहीं स्क्रिप्चर का। फिर करना पड़ेगा सेपरेट। एक में उपन इवन उपनिषद एक में डालूंगा। एक में गीता के डिफरेंट-डिफरेंट ये डाल दूंगा। भाष्य वगैरह शंकर का फिर यह रामानुज का वगैरह वगैरह श्रीधर टीिका एक में यह डाल देंगे। ऐसा करके करूंगा मैं। वह एक में यदि होगा तो आप लिंकेज कर सकते हैं। यदि एक में होता है आप क्वेश्चन कर सकते हैं कि टेल मी अबाउट मेडिटेशन। तो एंटायर आवर जो हिंदू धर्म है उसमें मेडिटेशन के बारे में क्या है? पूरा आपको सीधा दे देगा। नॉट जस्ट सॉल्वेबल लाफेबली इजी रिडिकुलसली ईजी। स्वामी जी का एक स्टेटमेंट दे दीजिए। फाइंड मी अ रेफरेंस रिलेटेड रेफरेंस। पूरा हिंदू धर्म में से जो है आप तो फिर अभी तो सोर्स ही डालने हैं ना अभी आप डालते रहिए ना वह जितने भी तंत्र है 108 उपनिषद है 108 पुराण है जितने भी तंत्र है जितना एंटायर हिस्ट्री यू कैन ऐड और फिर उसमें से आपको सीधा दे देगा और हु नोस इट विल गिव अस न्यू इनसाइट अबाउट हिंदूइज़्म जो कि आज कोई भी सिंगल इंडिविजुअल नहीं है जो कि ऐसा क्लेम करे कि मैं वेदांत का भी मास्टर हूं वैष्णव धर्म का भी मास्टर हूं शाक्त तंत्र का भी मास्टर हूं हम लोग किताब किताबें पढ़ते हैं, आर्टिकल पढ़ लेते हैं। नो वन कैन क्लेम फॉर एनी म रीज़नेबल क्लेम कोई कर ही नहीं सकता। भजनानंद जी जैसे भजनानंद जी इस तरह का क्लेम नहीं करेंगे। बट हियर नाउ एज ऑफ टुडे दिस एंटायर वर्ल्ड इज ओपन टू यू। एनीवन इवन अ दो छ साल का आठ साल का बच्चा भी है। उसको यदि टाइप करना आता है। वह क्वेश्चन करेगा और उत्तर मिलेगा। क्योंकि भजनानंद जी के पास में अल्टीमेटली वह चीज है जो कि एआई नहीं दे पाएगा। दैट इज़ अ लिप ऑफ़ फेथ। एक इंट्यूशन, एक इंटूटिव एक सेंटेंस में आपको ऐसा उत्तर दे देंगे जो आपका पूरा ओम