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आई एम शेयरिंग मी स्क्रीन कमेटी मेंटल सुसाइड इसे वेल कप डी बॉडी इस इंस्ट्रूमेंट तू हेल्प उस तू गोली ट्रू उसे नो हर स्वामी जी टीवी नो यू नो डेट वे हैव डिसकस्ड डेट हाउस स्वामीजी लैंग्वेज इस सो कलरफुल और आई वुडन कलरफुल आई बिल से डेट हज लैंग्वेज इस सो पोएटिक हज लैंग्वेज डिफिकल्ट तू अंडरस्टैंड वेरी डिफिकल्ट तू ग्रेस आइडिया और इन ऑर्डर तू अंडरस्टैंड डेट वे हैव तू डेवलप एन दीप इनसाइड इन डी टीचिंग्स ऑफ ओवरस्टैग्स इन तू डी तू चेंज और अवतारा लाइक ठाकुर मां और स्वामी जी शंकराचार्य फ्रॉम वेदांत फ्रॉम इंडियन स्पिरिचुअलिटी और कंडेंसेज आईटी इन फु पावरफुल जेम्स फू ब्यूटीफुल जेम्स डेट वंस यू रीड डेम दे बिल टेक इनसाइड अवर मन दे बिल को डायरेक्टली इनसाइड ओवर हार्ट और दें फ्रॉम डियर दे बिल स्टार्ट वर्किंग देवर मैगी सो दिस इसे अंदर स्टेटमेंट स्वामीजी मैक्स सो दिस इस वन ऑफ ठोस स्टेटमेंट डेट वे हैव तू कम मेंटल सुसाइड व्हेन वे हर डी शब्द सुसाइड आईटी इम्मीडिएटली टच इन अवर मन बिकॉज़ स्ट्रांग इमोशंस आर कनेक्ट विद दिस वर्ल्ड में ऑफ स हूं हैव गान थ्रू डिप्रेशन और हूं हैव गान थ्रू से संस ऑफ सीरियस फेलियर इन देवर लाइफ दे हैव क्वांटम प्लेटेड सुसाइड आईटी वन पॉइंट और अंदर बट दे हैव नेवर टॉक रिलेटिव्स सो दिस आइडिया सो मैच सफरिंग इन दिस वर्ल्ड सो लेट मी और दिस लाइफ दिस आइडिया इस पैरहैप्स प्रेजेंट इन डी मन ऑफ में पीपल और में पीपल अलसो सी दिस आउट ऑफ इवेंट्स ऑक्युरेंस अराउंड थे एन इन रांची सो रांची वंस आईटी वन बाय कम तू जॉइन बट हज पेरेंट्स वेरी अगेंस्ट हज जॉइनिंग सो व्हाट हैपन डेट दिस बाय वज सेंट तू एन फॉर्म हाउस डेट आईटी बिलॉन्ग तू रांची आश्रम और देवर ही कमिटेड सुसाइड नो आई हैव हार्ट अबाउट दिस इवेंट और आई न्यू डेट्स सच ए दीप इंपैक्ट आईटी मेड अपन आदर्श धूम मचाईस सो व्हाट हैपेंस था इस सुसाइड दिस आइडिया ऑफ सुसाइड इस वेरी पावरफुल वन आईटी दिस सम ऑफ डी एलिमेंट आइडिया एलिमेंट्टल से एक्शन विच टच इस ओवर हार्ट इमेज सो डेट इस वही स्वामीजी यूजेस शब्द सुसाइड बट हर वे हैव तू अंडरस्टैंड अकॉर्डिंग तू हिंदू स्क्रिप्चर्स आईएफ वे कम सुसाइड दें आईटी इस नोट दिस और ऑफ अवर सफरिंग वे बिल टेक अंदर बर्थ वे बिल टेक अंदर बॉडी वे बिल कम अगेन और अगेन इस लांगेस्ट ओवर करमास रीमें वे हैव तू वर्कआउट जो डी कर मास डेट इस डी ओनली वे तू और दिस सफरिंग डी और ऑफ बॉडी इस नोट डी एंड ऑफ सफरिंग दिस और ऑफ कर्म इस डी और ऑफ सफरिंग दिस इस व्हाट अवर स्क्रिप्चर्स टेल्स वे हैव तू देवर इसे सच एन इंटरेस्टिंग कंट्रास्ट बिटवीन हिंदुइज्म और ऑन वन हैंड हिंदुइज्म बुद्धिस्म और डी अदर और क्रिश्चियनिटी और स्टाफ स्पेशली इन क्रिश्चियनिटी यू बिल सी डेट देवर इस नो रिबन सो व्हाट बिल हैपन व्हेन ए परसों कम सुसाइड डेट इस एन बेड एक्शन सो दिस परसों हूं कम सुसाइड ही बिल को तू हिल सो दिस इस हो दे डेटर अदर पीपल फ्रॉम दिस इस हो क्रिश्चियन रिलिजन आईटी डीटर पीपल फ्रॉम कमेटी सोसाइटी इन हिंदुइज्म आइडिया इस डेट आईएफ यू आर सफरिंग इन दिस बर्थ दें लेट दिस सफरिंग क आउट डेट वे ओवर नेक्स्ट बर्थ बिल बी बटर आईएफ आई को आईएफ आई अवॉइड सफरिंग इन दिस बर्थ आईएफ आई एस्केप फ्रॉम मी कर्म डी पर रिजल्ट्स ऑफ मी कर्म दें इन डी नेक्स्ट बर्थ दे बिल कम आफ्टर मी दे आर नोट गोइंग तू लीव मी अलोन सो दिस इस वही सुसाइड आइडिया इस नोट इनकरेज इन हिंदुइज्म सो हर स्वामीजी से स्टेट आईएफ यू वांट तू ट्रॉली गेट रीड ऑफ योर सफरिंग दें आईटी इस नोट दी और ऑफ योर बॉडी डेट यू नीड नीड तू अचीव बट आईटी इस डी और ऑफ योर लोअर इकोस दिस लोअर वे हैव डिसकस्ड दिस बिफोर अलसो वे कैन से डेट देवर आर थ्री आ एस्पेक्ट्स ऑफ ओवर बीइंग वन इसे दी वही करण नो व्हाट इसे दिस वही करण ये सब पांच ज्ञानेंद्रिय वाटर पंचगनी और डी सेंस ऑफ साइट सो दिस आर दी फाइव ज्ञान और रियाज और देवर आर पंचक कर्मेंद्रियां दी हाथ और लेग्स और लाइक दिस डेट फाइव ज्ञान देव फॉर्म अवर वही करण ढें डेरी थी अंतरण व्हाट इस अंतरण मां बुद्धि चित और अहंकार बट बियोंड दिस मां बुद्धि चित और अहंकार डर इस दी आत्मा नो वे हैव तू अंडरस्टैंड डेट व्हेन एन इयर्स लांगेस्ट ओवर एक मी आईडेंटिफिकेशन विथ मी बॉडी रीमेंस आईएफ आई कप थिंकिंग दें आईएम दिस बॉडी और बिकॉज़ ऑफ दिस बॉडी व्हाट हैपेंस आईटी एवरी टाइम ऑन सक्सेसफुल आईटी इसे आईटी डी सक्सेसफुल को तू मी हेड और आईटी बिल मेक मी मोर और स्क्रिप्ट शब्द इस घमंड डी मोर परसंस ही कैन नोट डाइजेस्ट ही सक्सेस मोर घमंडी ही बिल बी कम मोर एरोगेंट ही बिल बी कम दिस इसे डिफरेंस वेरी सेटल्ड डिफरेंस बिटवीन एगो और अरा गर्ल्स बिटवीन अहंकार और घमंड अहंकारी इस मी सेल्फ आईडेंटिटी लाइफ ऑफ मी आईटी इसे मी आईडेंटिटी रिकॉग्नाइज्ड दिस इस मी बॉडी दिस आर मी दिस आर डी थिंग्स विच आई विच आई ऑन विच आर ऑन बाय मी दिस इस मी बुक दिस इस मी ऑफिस दिस इस मी आश्रम दिस आर मी क्लोज दिस आर मी ग्लासीज स्पेस सो दिस इसे हो आई आईडेंटिफाई थिंग्स विच आर मीन और व्हेन आई सी डेट अदर परसों हज एन से पर एग्जांपल मी ऑफिस इस वेरी नाइस और आई हैव नो प्रॉब्लम विद दिस बट देवर इस नो एक इन मी ऑफिस इस सपोज देवर इस अंदर मोंक ही इस हज गो एक इन एक ऑफिस दें आई बिल फूल जूलूस डेट ओ यस गुड ऐसी इमेज ऑफ आई डू नोट हैव एक नो देवर इस सो टेंपरेचर गोस अप हर इन राजकोट अप तू 45 48° और हो कैन आई स्टे इन मी ऑफिस इन सच ए ग्रेट हिट व्हेन आदर्श आर हेविंग वेरी नाइस टाइम लिविंग थोड़ी डर से ऑफिस सो आईटी बिल प्रोड्यूस जेलर इनसाइड मी सपोज आई हैव गो दिस क्लॉथस विच आई लाइक ओके बट व्हेनेवर आई सी अंदर परसों वायरिंग बटर क्लोज दें आई बिल फूल ट्रॉली जूलूस डेट ओके हज गोट मोर मनी दें आई हैव गो और कंसीक्वेंटली ही इसे एबल तू परचेज मोर बटर क्लॉथ और वही आई आई कनॉट तू डू डेट वही कनॉट आई हैव सच बटर क्लोज और स्पेशली व्हेन आईटी कॉम तू डी अफेक्शन ऑफ ओवर एल्डर मनी टाइम्स आईटी हैपेंस अमोंग डी चिल्ड्रन डेट देवर इस सेटल देवर इस एन साइलेंट कंपटीशन इन गेनिंग डी अटेंशन ऑफ देवर मदर और फादर दिस इन साइकोलॉजी इस कॉल्ड सिबलिंग रिवरी एवरी टाइम एन भाई और सिस्टर इमेज डेट ही इसे सिस्टर इसे गेटिंग मोर अटेंशन फ्रॉम हज फॉर देवर फादर और देवर मदर दें दिस भाई बिल फूल जूलूस डेट वही आर डर गिविंग में इक्वल अटेंशन वही आर नो बिश्तोइंग अपन मी इक्वल से लव सो दिस सो तू फीलिंग दिस जेलर डिस्पतिनेस आर वेरी रैपअंट इन अवर मन जस्ट टुडे मॉर्निंग इत्सेल्फ यूजुअली आफ्टर कमिंग फ्रॉम मंगल आरती आई आई रीड सम बुक सो टुडे आई बाज रीडिंग डी बुक ऑफ स्वामी त्रिगुणा तीतानंद जी महाराज नव वे नो डेट त्रिगुणा तीता नंद जी लाइफ इस सो ट्रेजेडी ही बाज किल्ड इन एन बम ब्लास्ट ही इसे डी ओन्ली मार्क्स इन अवर ओल्डर आई शुड से डेट अमाउंट जो डी मॉम बट अमोंग दी डायरेक्ट डिसीप्लस ए आईटी उसे तू हैपन डेट व्हेन जीसस वज प्रीचिंग ही है पोस्टल वन ऑफ डेम वैसे जुड़ा सो ही कैन नोट बी काउंटेड जो डी अदर 12 की देवर किल्ड इन में सम जूलूस पीपल और सम लॉन्च हो रही थी शुद्ध ऑलमोस्ट जो डी 12 डिसीप्लस देवर मार्केट बट अमोंग डी 16 डिसीप्लस ऑफ ठाकुर वे हैव को तू वन मार्टीर डेट इस स्वामी त्रिगुणा तीता जी महाराज सो ही से डेट व्हेन ही वास रनिंग दिस वेदांत सोसाइटी ऑफ नॉर्दर्न कैलिफोर्निया सेन फ्रांसिस्को देव से 23 देवोट्स वेयर वेरी एन देव फॉर्म डी इनर कर ऑफ डी वेदांत सोसाइटी इन डेड से यूज्ड तू विजिट सोसाइटी रेगुलरली सम ऑफ डेम वे आर लिविंग विद हिंदी वेदांत सोसाइटी डेट यू नो फर्स्ट हिंदू टेंपल इन एंटीरे वेस्ट गेट स्वामी त्रिगुणा तीर्थ नंद जी बिल्ड यू माइट है उसे सीन डी फोटोग्राफ ऑफ आते डी टेंपल वेरी ब्यूटीफुल आईटी वज एन लैंडमार्क इन सन फ्रांसिस्को सो देवर लिविंग टुगेदर विथ 3 गुना नंदा जी सम ऑफ डेम सम ऑफ आदर्श फिर वेरी क्लोज और ट्रिगोनोमेट्री और अंदर जी सी रिपीटेडली दत ही एडमंस थे ही कोल्ड स्टेम रिपीटेडली सम टाइम्स डेट वही डू यू हैव पेटाइग्लासेस अमोंग योरसेल्फ वही डू यू हैव सच से ईर्ष्या डी संस्कृत शब्द इस ईर्षा और रदर लेट मी से हिंदी शब्द वही डू वे हेल्प दिस जेलर अपन अंदर परसों जैसे की वहां पे
स्वामी विवेकानन्द
त्रिगुणा तीता नानजी यदि अपने वेदांत सोसाइटी ऑफ नॉर्दर्न कैलिफोर्निया या तो फिर ये सन फ्रांसिस्को वहां पर ऐसा था की एक शांति आश्रम था स्वामी जी के जो एक डिसीप्ल थी तो उन्होंने स्वामी जी को एक बहुत बड़ा आई थिंक 20-25 एकड़ का एक जमीन दिया था जहां पे की शांति आश्रम स्वामी जी ने बनाया बाद में वहां पे त्रिगुणानंद जी रहे बाद में त्रिगुणा तीता नानजी रहे मनी क्या है की में तो कम राहत है आपके सिटी में जहां पर यह जो हिंदू टेंपल था और किंतु बीच-बीच में आई थिंक वाली ओंस साल में एक बार ये लोग रिट्वीट के लिए जाते थे तो ये जो शांति आश्रम में जो रिट्वीट होगा तो फिर वहां पे कुछ कुछ कमरे ठीक थे कुछ कमरे ठीक नहीं थे तो किसको कौन सा कैमरा मिलेगा उसको लेकर के वो लोग किसी किसी को ईर्षा होती थी फिर जैसे सन फ्रांसिस को में ये जो हिंदू टेंपल था अपना वहां पे भी जैसे हीरानंद बोलके एक अमेरिकन लेडी डिवोधी थी और फिर मिसिस्कारा फ्रेंच ऐसे तीन-चार वो देवोटी थे ठाकुर के ही डिवोेंड ट्रिगोनोमेट्री एनर्जी हेड ऑफ डी सेंटर तो त्रिगुणा तीता नानजी के बड़े ही क्लोज थे तो अभी ऐसा होता था की ऐसा होता है ना की जो अध्यक्ष महाराज जो है वो आपको कहेंगे की ऐसा ऐसा करना है तो वह तो एक्चुअली सब कुछ अपने से सुपरवाइज नहीं करते हैं उनको तो क्या है की रिस्पांसिबिलिटी डेलीगेट करनी पड़ती है अब जैसे ही ये रिस्पांसिबिलिटी डेलीगेट करने का मामला स्टार्ट हुआ वहीं से सब ईर्षा और जेलर स्टार्ट होता है वहां पे क्या था की तुर्यानंद जी तो ऐसा कोई एडमिनिस्ट्रेटिव क स्टार्ट ही नहीं किया था अब हमको पता होगा की पहले तो स्वामी विवेकानंद कैलिफोर्निया में वो वेदांत सोसाइटी और वेदांत प्रचार का कार्य आरंभ किया फिर उन्होंने जब वो भारत वापस ए गए तो उन्होंने तुर्यनन जी को भेजो और रदर की स्वामी जी जब सेकंड टाइम अमेरिका ए रहे थे तो निवेदिता और सूर्यनंद जी को दोनों को साथ में लेकर आए थे तो वो जब सूर्यनंद जी चले गए वेस्ट पोस्ट पे कैलिफोर्निया में वहां पे वो सन फ्रांसिस्को में और शांति आश्रम में कुछ देवोटी को इकट्ठा करके वो साधना करने लगे तो तुर्यानंद जी का ऐसा था की उनको सड़क मंथन उनको साधना ही सबसे श्रेष्ठ लगती थी किंतु जब सूर्यनंद जी को यह समाचार मिला की स्वामी जी का देहांत हो गया है स्वामी जी की समाधि हो गई है तो सूर्यनंद जी का सब तरह के कर्म के ऊपर से विराग हो गया उन्होंने सोचा मुझे किसी भी तरह का कार्य नहीं करना है अभी मैं सिर्फ चूहा आध्यात्मिक जीवन लेकर रहूंगा तो इससे सबसे बड़ा फायदा तो हमको है क्योंकि तुर्यनानंद जी तब काशी में रहते थे तो उन्होंने काशी में जो साधु उनके आसपास में जो प्रतिदिन इकट्ठा होते थे और वह सूर्यनंद जी से कुछ अच्छी बातें सुनते थे तो वह सब जो वार्तालाप है वो नोंदकर के उसका जो है रखा गया है और वो पब्लिश हुआ है बहुत ही सुंदर किताबें जीवन मुक्ति सुख प्रताप बहुत ही सुंदर करता है मैं अभी गुजराती में उसको ट्रांसलेट कर रहा हूं तो सूर्यनंद जी ने ऐसा सोच लिया की बस अभी तो हो गया बहुत कर्म अभी मैं आध्यात्मिक जीवन लेकर रहूंगा फायदा हमको है क्योंकि उन्होंने जो अपना जो ठाकुर के साथ में जो उनके दिन व्यतीत हुए थे उनकी जो आध्यात्मिक अनुभूति थी उनका जो स्पिरिचुअल विजडम था वह सब हमको यह कित मेरे द्वारा पढ़ने को मिलता है तो त्रिगुणा पिता नानजी को अमेरिका भेजो गया सन फ्रांसिस्को में की आप जो है वेदांत सोसाइटी ऑफ नॉर्दर्न कैलिफोर्निया उसका संचालन कीजिए अभी जैसे त्रिगुणा तीता नंद जी गए तो उन्होंने देखा की दुनिया नानजी के कुछ शिष्य थे जिसमें थे स्वामी अटलानंद जी महाराज उनका आ संस्कृत नाम था गुरदास महाराज एक्चुअली वह थे अमेरिकन किंतु वो जैसे होता है ना की वेदांत में जब आप आते हैं तो एक संस्कृत नाम दिया जाता है तो उनको नाम दिया गया था गुरदास गुरदास क्यों क्योंकि अपने गुरु के प्रति उनकी प्रगाढ़ भक्ति थी गुरु दास महाराज ने स्वामी जी को देखा था अमेरिकन थे और स्वामी जी को देखा था किंतु फिर स्वामी जी के साथ में इतना संपर्क नहीं था किंतु बाद में जब सूर्यनंद जी गए तो सूर्यनंद जी के साथ में रहकर के उन्होंने अपना अध्यक्ष जीवन गठन करने की शुरुआत की अब जब त्रिगुणता नानजी गए सूर्यनंद जी के वापस ए जान के बाद में तब ऐसा भारत की त्रिगनिस का जो कार्य करने की जो शैली करने की जो मेथड है वह पुरी डिफरेंट थी टूरियनंद जी का था की पूरा आध्यात्मिक जीवन था उसमें एक तरह का बिल्डिंग बनाना फिर के बिल्डिंग का कंस्ट्रक्शन करना टेंपल का कंस्ट्रक्शन करना एक ऑर्गेनाइजेशन खड़ा करना ऑर्गेनाइजेशन में सबको रिस्पांसिबिलिटी देना की ये प्रेसिडेंट है ये वाइस प्रेसिडेंट है सेक्रेटरी है वगेरा वगैरा ऑफ कोर्स वो सोसाइटी है तो ये सब होता है किंतु वह सब चीजों का कोई मैन नहीं था तुर्यानंद जी के लिए की ये प्रेसिडेंट है की आप कौन है सब मिलकर के साधना करते हैं और यह जो जब अध्ययन है या तो फिर ये आध्यात्मिक जीवन है वही एक सर्वश्रेष्ठ चीज है ऐसा सूर्यनंद जी मानते थे किंतु जब त्रिगुणा तीता नानजी ने ये ऑर्गेनाइजेशन को इतना इंर्पोटेंस देना शुरू किया वेदांत सोसाइटी के ऑर्गेनाइजेशन को एक स्ट्रांग फाउंडेशन पर लाने के लिए उन्होंने पहले वो हिंदू मंदिर की हिंदू टेंपल का कंस्ट्रक्शन आरंभ किया नंद जी कुछ शिष्य थे इसमें अतुल आनंद जी महाराज थे फिर ईदतें असल ने आपको पता होगा तो उन्होंने स्वामी जी के जो वेस्ट कास्ट पर जो लेक्चर हैं वो सब नोंदकर के रखें हैं वो सब नोट डॉ करके रखें तो ये जो आइडिया एन से ये जो गुरदास महाराज ऐसा एक ग्रुप बन गया कुछ शिष्यों का और उन्होंने हैडक्वाटर में ब्रह्मानंद जी महाराज को बेलूर मठ में कंप्लेंट किया की आप जो है सूर्यनंद जी को वापस भेज दीजिए अभी ऐसा तो डायरेक्टली तो नहीं का सकते की त्रिगुणा पितानंद जी की वर्किंग स्टाइल जो है हमको पसंद नहीं है किंतु जैसे ही उन्होंने कहा की टूरियां जी को वापस भेज दीजिए सबको समझ में ए गया की इसके पीछे करण क्या है की इन लोगों को त्रिगुणा तीता नानजी का ये जो ऑर्गेनाइजेशन है फिर ये जो कंस्ट्रक्शन है फिर यह जो एक्टिविटीज है वो सब नहीं पसंद है उनको लगता है की जो आध्यात्मिक जीवन है वो तो अंतर्मुख जीवन है उसमें बाहर की गतिविधि बाहर की प्रवृत्ति को लेकर के इतना बढ़ाने की क्या जरूर है जो मिनिमम जो करना है वह कीजिए किंतु उससे ज्यादा आप एक्स्ट्रा इन लोगों का मानना था तो देखिए अभी प्रश्न थे त्रिगुणा तीता नानजी ठाकुर के शिष्य थे सन्यासी थे दोनों को समाधि प्राप्त हुई थी जो की आध्यात्मिक जगत में सर्वोच्च उपलब्धि की हो शक्ति है ठाकुर के पार्श्व से उनको प्राप्त हो गई थी किंतु फिर भी इन लोगों के जो शिष्य हैं उन लोगों में आपस में जो है इस तरह से वो जो क्या बोलेंगे की डिफरेंस ऑफ ओपिनियन एक तरह का एक इस तरह का भाव की ये लोग गलत कर रहे हैं हम लोग सही कर रहे हैं ये उनको मेरे से सीखना चाहिए ऐसा सब बहुत हो रहा था अब बहुत तो मतलब एक एक लेवल पे हो रहा था यहां तक प्रकाशन जी महाराज को असिस्टेंट के रूप में भेजो गया थे यह अपने वर्जन जी महाराज वर्जन जी महाराज सत्य प्रकाश आनंद जी महाराज ये जो श्रद्धांजलि महाराज यह सब लोगों का एक ग्रुप था उसे समय कोलकाता में वो जब कॉलेज के लड़के थे सब साथ में पढ़ाई करते थे साथ में ही आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत की साथ में ही ये सब उन्होंने बड़नगर मठ में आने की शुरुआत की थी तो उसे ग्रुप के सात प्रकाशन रंजीत है तो उनको जब भेजो गया तो मतलब क्या था की वो भारत के मतलब बेलूर मठ के सभी ग्रुप भाई जितने भी ठाकुर के शिष्य हैं सबके साथ में उनका परिचय था सबका उन्होंने जो है आशीर्वाद प्राप्त किया था यही सत्य प्रकाशन जी को त्रिगुणा टिटहनन जी के असिस्टेंट के रूप में जब कैलिफोर्निया भेजो गया तो कुछ समय के बाद ऐसा हुआ की त्रिगुणा तीता नानजी के कुछ शिष्य कुछ डिसाइड पाल वो उनसे अलग हो गए वैसे ही तो तुर्यानंद जी का एक ग्रुप अलग था फिर त्रिगुण जी का भी जो डिसीप्ल थे उसमें भी दो-तीन ग्रुप हो गए उसमें से एक ग्रुप के जो थे उन्होंने सत्य प्रकाश आनंद जी को कहा की अरे आप यहां पर क्यों रहे र रहे हैं वो त्रिगुणा तीता नानजी के साथ में चलो हम एक सेपरेट आश्रम बनाते हैं एक सेपरेट सोसाइटी बनाते हैं तो सही में शत प्रकाशानंद जी उनकी बात सुनकर के त्रिगुणा जी को छोड़कर के निकाल गए और सन फ्रांसिस्को में ही वो हिंदू टेंपल जहां पे आ ट्रिगोनेट नानजी र रहे थे उसके पास में ही एक दूसरा पेसिफिक वेदांत सेंटर बोल के बना दिया तो देखिए ये मतलब मैच अब ये सब पढ़ रहा था तो मुझे ये सही ग रहा था मेरे मां में आज सुबह की ही बात की देखिए की किस तरह की ये ठाकुर की लीला है हम लोग जो है सब कुछ छोड़ करके सब कुछ त्याग करके ठाकुर के श्री चरण में यहां पे आए हैं यहां पे आंतरिक जीवन जो है अंतर्मुख जीवन वही तो हमारे सर्वश्रेष्ठ संपादक है वही तो हमारी सर्वश्रेष्ठ यह हमारा धन है इस को लेकर के इस को बढ़ाना है किंतु कुछ समय के बाद ऐसा होता है की यह जो वेदांत के जो शिष्य होते हैं यह जो देवोतीस होते हैं उन लोगों में या तो फिर कुछ-कुछ साधुओं में भी एक इस तरह का एक नेगेटिव भाव खड़ा होता है दूसरों को देखकर के खास करके त्रिगुणा तीता नानजी के लेटर्स में अब देखेंगे की बार-बार वे लोग वो कहते हैं की अरे आप लोग तो वेदांत सोसाइटी में आए हैं आपको तो जो है की यह सब एक्टिविटी जो है हां मैं बड़ा रहा हूं किंतु फिर एक्टिविटी को तो ठाकुर का कर्म है ऐसा तो नहीं है की किसी व्यक्ति का कर्म है यहां पर किसी को थोड़ा सा ज्यादा इंर्पोटेंस दे दिया और किसी को कम इंर्पोटेंस दिया वो तो कर्मों के क्षेत्र में है अध्यात्म क्षेत्र में उससे क्या लेना देना है जैसे की यह सन थी उनको की नाम दिया था धीरा या तो फिर आनंद तो फिर यह धीरज जो थी वह जो थी की त्रिगुणा तीता नानजी जो भी कार्य करते थे उसमें इतना वो एफिशिएंट ट्रिगोनेट्रितानंद जी के कार्य में वो सफाई करती थी की वह डिफेक्टिव सेक्रेटरी जैसी थी मैंने त्रिगुणा तीता नानजी को यदि प्रेसिडेंट कहा जाए तो सेक्रेटरी सेक्रेटरी थी ये धीरन अंदर तो अभी वो देख कर के बाकी सब जो लेडी देवोत्व ए रही थी उनके मां में ईर्ष्या की क्यों त्रिगुणा तीतानंद जी उन्हें को देकर के सब कम करवाते हैं और फिर क्या ह्यूमन वीकनेस इस कुछ-कुछ राहत है ना हालांकि ये धीरानंद जो थी उनका एक सबसे मतलब श्रद्धा तो ट्रिगोनेट्रितानंद जी के ऊपर में थी ठाकुर के ऊपर में भी थी सब कम करती थी खाना बनाते थे वो क्लीनिंग वगैरा रखना फिर वो जो सोसाइटी का वो जो सब क्लर्कल लीगल क है वो सब करना वो सब तो करती थी किंतु साथ-साथ में उनका ऐसा था की ट्रिगोनोमेट्री को यह ऐसा करना चाहिए तो दूसरे लोग जो कम करते थे वहां जाकर उनको ऐसा बोलती थी की नहीं स्वामी कहते हैं हम इसे स्टेट यू स्टूडेंट तू दिस और डी स्वामी विवेकानंद जी चाहते हैं की इस तरह का कार्य हो और इस तरह का कार्य ना हो तो दूसरों के मां में नेचुरल ही होगा की भाई वो जो महाराज जो है उनको यदि हमको कुछ कहना होगा या तो उनकी पसंद नापसंद जो है तो वो हमको डायरेक्ट बताएंगे ना इसके थ्रू क्यों बताएंगे तो ऐसे सब इश्यूज को लेकर के त्रिगुणा तीता नानजी ने धीरानंद को कहा था की देखो की तुम्हारे अगेंस्ट में मेरा जब देहांत होगा उसके बाद में या तो इस समय में तुम्हारे अगेंस्ट में इतना विरोध होगा तुम्हारे अगेंस्ट में इतनी सब ये लोग निंदा और यह सब पीछे-पीछे से ईर्ष्या करेंगे की वह देख करके तुमको बड़ा आघात लगेगा तुमको लगेगा की तुमने इतना कम किया है इतना मेहनत किया है वेदांत सोसाइटी के लिए और आखिर में क्या मुझे दूसरों की निंदा की सनी पड़ी तो मेरा जो मैंने जो कर्म किया उसका क्या अर्थ है तो ट्रिगोनोमेट्री है की देखो ऐसे जब परीक्षा की घड़ी आई है तभी तुम्हारा सही-सही टेस्ट होता है की तुमने वेदांत को कितना अपनाया है वेदांत जो है तुम्हारे हृदय में कितना गहराई से भीतर में गया है तो ये जो है यहां पे स्वामी जी जो कहते हैं की यू हैव तू कम मेंटल सुसाइड तो मेंटल सुसाइड किस चीज का जो हमारा ये जो अहंकार है हमारी ये जो ईर्षा है और अच्छा हम दूसरों पे ईर्षा करते हैं उसको तो त्याग करना ही करना है दूसरे लोग जो हमारी निंदा जब करते हैं पीछे-पीछे से उससे हमको जो दुख होता है उससे हमको जो कष्ट होता है हमको जो एक अभिमान होगा ठाकुर के ऊपर में की ठाकुर मैंने इतना कम किया तुम्हारे लिए और आखिर में तुमने मुझे यह दिन दिखलाया तो वो जो ठाकुर के ऊपर में जो अभिमान होगा यह सब चीजों को आपको जो है उसका वध कर देना है जैसे राम ने रावण का वध किया था जैसे योग वशिष्ठ रामायण जो आध्या एक ग्रंथ वगैरा होते हैं उसमें इस तरह से समझाया है की जैसे रावण के 10 सर थे वो एक के बाद एक हमारा ये जो कम क्रोध मैड लाभ मोहमद सर वगैरा जो हमारे क्यूट हुए जो हमारे दुर्गुण है वो सब है और राम ने और रावण का वध किया अर्थ की ये उसका अर्थ है की हमको साधना के द्वारा हमारे दुर्गुणों का वध करना है तो ये जो बात है स्वामी जी ने यहां पे कई है की वे हैव तू कम मेंटल सुसाइड व्हेन वे कल एवरीथिंग जब इस सब चीजों को हम हम आत्मा हत्या करेंगे अब कौन सा आत्मा जो हमारे शरीर की हत्या नहीं किंतु जी चीज को हम आत्मा मानते हैं ये मेरा अहंकार ये मेरा क्रोध ये मेरा गुस्सा ये मेरा ईर्षा ये मेरी जेलर ये सब चीजों को मैं मेरी मानता हूं उसकी हत्या करनी है तब कहानी जाकर के हम जो है आध्यात्मिक रास्ते पर आगे बाढ़ पाएंगे मन पूरे इन हेल्दी बट ओनली इसे इंस्ट्रूमेंट तू हेल्पर तू गॉड डेट इसे ओनली ट्रू उसे शरीर और मां जो है उसको संपूर्ण रूप से शुद्ध और पवित्र रखो क्योंकि ये शरीर जो है वो ईश्वर प्रताप का मध्य है यदि शरीर को लेकर के और बहुत ज्यादा आज तो पता है ना पूरा मेकअप इंडस्ट्री इतना बड़ा है ये ग्रूमिंग इंडस्ट्री इतना बड़ा है ये ब्यूटी पार्लर्स और आजकल बहुत चल रहे हैं तो ठीक है वहां पे जाना है और जाना माना नहीं है शादी वगैरा में वो सब करते हैं हम लोग उसे शरीर को सजाते हैं वगैरा किंतु जो वेदांत के स्टूडेंट से जो ठाकुर के देवोटी है उनको पता है की शरीर की रक्षा जो है वो यही तक जब तक की यह शरीर जो है ईश्वर प्रताप का ठाकुर दर्शन का एक मध्य हो जब यह मध्य जो है उसका वह जो है तुझे कंप्लीट हो गया तो फिर शरीर रहे ना रहे उससे क्या कोई फर्क नहीं पड़ता
श्रीरामकृष्ण कथामृत : कोलकाता में ईश्वरचंद्र विद्यासागर के साथ
हमने देखा ठाकुर ने की कहा की भक्ति और विश्वास तक कितना दम है कितना जोर है तो जैसे वो वो विभीषण ने उसे आदमी के हाथ में वो पत्ता दिया बोला की अपने वस्त्र में बंद दो तो उससे तुम समुद्र तेरे जाओगे किंतु जैसे ही उसके मां में थोड़ी सी भी ये संक्षे प्रकट हुआ की बस यह राम नाम लिखा है तो संशय से ही वो जो है समुद्र में डब गया तो वैसे विश्वास से वहां चलें ये जो हमारी गुजराती कहावत है इसके बड़े में हमने बात की थी ठाकुर कहते हैं विश्वास और भक्ति भक्ति से वे सहज में ही मिलते हैं अब भाव के विषय है यह कहते हुए श्री राम कृष्णा ने फिर भजन आरंभ किया उसका भाव यह है मंटू अंधेरे घर में पागल जैसा उसकी खोज क्यों कर रहा है वह तो भाव का विषय है ऐसा करके पूरा दिया है जान दिया है अभी आगे लिखने हैं गेट हुए श्री रामकृष्ण समाधिष्ट हो गए हाथों की अंजलि बन गई डे उन्नत और स्थिर नेतृतसपांधीन हो गए पश्चिम की और मुंह किया इस बेंच पर पर लटकाए बैठे हैं देखिए ये पहले बार मैंने देखा यहां पे की जैसे वो ठाकुर के जितने भी समाधि के वो जो वर्णन है वो तो ठाकुर तो जमीन पे ही या काटते भी जब बैठने थे वो तो पलटते ये जो है की योगासन मुद्रा में ही बैठने थे दो पैरों को ये शो इस तरह से बेटे जैसे की उनकी वो जो मंदिर में जी चित्र है उसे मुद्रा में बैठे थे यहां पे लिखा है की वो बेंच पर बैठे थे अर्थात की उनके जो दोनों पर हैं वो नीचे में झूम रहे थे और इसी अवस्था में उनको समाधि समाधि में चले गए देखिए इस तरह का भी वर्णन ये मैंने पहले बार यहां पर देखा की वो इस मुद्रा में भी इस अच्छा वो खड़े खड़े सम दी में चले जाते थे यह बात तो हमको पता है कीर्तन करते-करते समाधि में चले जाते थे यह बात पता है कल पत्र अपन है की स्वामी ठाकुर जो है खड़े-खड़े समाधि में गए हैं किंतु इस तरह से बेंच पर बैठकर के दोनों पर झूला करके समाधि ये यहां पर पहले बार देखने को मिल रहा है सभी लोग गार्डन ऊंची करके यह अद्भुत अवस्था को देखने लगे पंडित विद्यासागर भी चुपचाप एक ट्रक देख रहे हैं कुछ रानो के बाद श्री रामकृष्ण प्रकृति स्थल हुए लंबी सांस छोड़कर फिर हंसते हुए बातें कर रहे हैं का रहे हैं की भाव और भक्ति इसके मैन उनको प्यार करना जो ब्रह्मा है उन्हें को मां का कर पुकारते हैं प्रसाद कहता है की मैं मंत्र भाव से जिसकी खोज कर रहा हूं उसके तत्व का भंडार क्या मुझे चौराहे पर फोड़ना होगा मां इशारे से ही समझ लो जो भाव और भक्ति जो है इसका अर्थ यह नहीं की हम लोग जो है जो रिचुअल्स जो है हम लोग बहुत समय उसको भक्ति मां लेते हैं की चलो ठाकुर के सामने हमने पुष्प अर्पण किया ठाकुर के सामने हमने धूप अर्पण की ठाकुर को जो है चंदन का लिप लगाते हैं और यहां पर जो वैष्णव जो देवोतीस होते हैं वो ठाकुर को वस्त्र पहनते हैं ठाकुर यानी की कृष्णा जो भी उनके इस्ट देवता है उनको वस्त्र पहना हैं उनको चमार बुलेट हैं उनको फिर जो है शीतल प्रधान करते हैं जैसे यहां पे अपने मंदिरों में और ट्राई सभी मंदिरों में ऐसी व्यवस्था है की गर्मी के दोनों में दोपहर को ठाकुर को शीतल दिया जाता है शीतल यानी की कोई ठंडा शरबत वगैरा तो यह जो है ठाकुर को सब चीज ऑफर करना ठाकुर की पूजा करना या तो ईश्वर की पूजा यह तो भक्ति ही है किंतु इसके अलावा भी है की ईश्वर के साथ में किसी तरह का एक नता जोड़ा जाए मैं बालक हूं ईश्वर माहे तो इस तरह से एक बालक भाव है फिर यह जो गोपियों का भाव था राधा का भाव था मधुर भाव है जो महावीर का भाव था 10 से भाव है ऋषियों का भाव था की शांत भाव है तो इस तरह से एक भाव से एक किसी तरह का रिलेशन शिव ईश्वर के साथ में हमको बांधना चाहिए एक सखियां भाव था सुदामा का तो ये जब एक एक तरह का रिश्ता जब ईश्वर के साथ में बनेगा रिश्ता जब ठाकुर के साथ में बनेगा तब कहानी जाकर के भक्ति जो है वो पर भक्ति में वो संपन्न होती है पर भक्ति में वो जो है प्रगति करती है जो है की प्रेम भक्ति या तो पर भक्ति यानी की पहले तो रिचुअलिस्टिक भक्ति होती है नवधा भक्ति जिसको कहते हैं और उसके बाद में होती है पर भक्ति अर्थात की प्रेम की जो है जो की हमारी आराधना है जैसे गोपियों की थी जैसे मां यशोदा की कृष्णा के प्रति थी तो इस तरह से प्रेम से ज्योति हम आराधना करेंगे ईश्वर की तब कहानी जाकर के हमने भक्ति योग के जो मतलब जो ऊपर ऊपर के जो सर्वोच्च सोपान है उसके ऊपर में हमने चढ़ना जो है आरंभ किया है राम प्रसाद मां को इशारे से ही समझना के लिए उपदेश करते हैं यह समझना को कहते हैं की वेदों ने जिन्हें ब्रह्म कहा है उन्हें को मैं मां कहकर करता हूं जो निर्गुण है वही साबुन है जो ब्रह्मा है वही शक्ति है जब यह दिशा होता है की वे निष्क्रिय है तब उन्हें ब्रह्म कहता हूं और जब यह सोचता हूं की वह सृष्टि स्थिति और प्रलय करते हैं तब उन्हें अध्याशक्ति काली किट देखिए कर्म और प्रशांति दोनों जो है एक दूसरे के अभिन्न अंग है जैसे हमने अभी डिस्कस किया की टूरियनंद जी जब थे कैलिफोर्निया में तो सन फ्रांसिस्को में उनकी जो स्टाइल थी की कर्मों को मिनिमम रखा जाए और जो है आध्यात्मिक जीवन गठन करने की जो भी साधनाएं है उसके ऊपर में ज्यादा जोर दिया जाए जबकि ट्रेन जी कथा की चलो एक मंदिर का कंस्ट्रक्शन ऑर्गेनाइज्ड रूप में सोसाइटी का जो है वह फाउंडेशन डाला लोगों को स्पेसिफिक रोल दिया गया की तुमको यह करना है तुमको वो करना है एक मॉनेस्ट्री स्टार्ट की गई एक कॉन्वेंट स्टार्ट की गई यहां तक की उन्होंने देवोतियों का एक कॉलोनी तक स्टार्ट कर दिया था कन्कर्ड बोल करके एक शहर था वहां पे तो ये जो वाक्य प्रवृत्ति वो त्रिगुणा तीता नानजी ने बहुत बड़ा दी थी किंतु यह देखा है की जब तक अंतर और बाकी है ये दोनों के बीच में एक सुमेल सदा राहत है इन दोनों के बीच में एक कॉर्डिनेशन बना राहत है तब तक क्या है की ये जो ईश्वर जो है इस का प्रकाश जो भीतर में होता है वही प्रवृत्ति के ऊपर में पड़ता है जैसे वो कहा गया है ना की यथार्थ ने दही का शक्ति ही मां क्या है जैसे की अग्नि की जो दही का शक्ति है वैसे ही ठाकुर की शक्ति मां है तो शक्ति भी तो जो है वो तो इस जगत का अभिनय अंग है व्यक्ति भी जो है ब्राह्मण का ही एक दूसरा स्वरूप है निष्क्रिय है तो ब्राह्मण है सक्रिय है तो शक्ति है तो एक्टिविटी कहो ना की फिर ये जो आध्यात्मिक जीवन को ये दोनों जो है जब ईश्वर मैं हो जाते हैं हमारा भीतर का जीवन और यह जीवन तब ये जो है हमारी निष्क्रिय ता और सक्रीयता दोनों ही संस्कृत हो जाति है दोनों ही हमको ईश्वर के रास्ते में ले जान का हमको वो है एक मध्य हो जाति है अच्छा तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति