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Swami Vivekananda Raja Yoga ·

राजयोग : Ch.3 प्राण : स्‍वामी विवेकानन्द : 28 May 2024

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ओ स्थापक च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णा यते नम अभी मैं सोच रहा था कि इसी सीरीज में अभी नेक्स्ट क्या आरंभ किया जाए स्वामी जी के जो फंडामेंटल वर्क्स है उसमें हम किसकिस चीजों को गिने सर्वप्रथम तो स्वामी जी के चार योग है ज्ञान योग कर्म योग भक्ति योग और राज योग इसके अलावा है स्वामी जी के पत्र फिर है लेक्चर फ्रॉम कोलंबो टू अल्मोड़ा और फिर है दिव्य वाणी इंस्पायर्ड टॉ तो ये छह सात स्वामी जी के फंडामेंटल वर्क्स है पोयम्स भी है और बहुत कुछ है वैसे किंतु यदि सात को फंडामेंटल कहा जाएगा तो इस सात में से हमने ज्ञान योग का जो एेंस स्वरूप दो प्रवचन को देख लिया अभी हमारे सामने नेक्स्ट क्या है यह जो सात बेसिक वर्क्स से स्वामी जी के इसमें से नेक्स्ट किसको लिया जाए या तो पत्र को लिया जाए कुछ रिप्रेजेंटेटिव लेटर्स को ले ले ना कि कोलंबो टू अल्मोड़ा जो इंडियन प्रवचन से उसमें से एक दो रिप्रेजेंटेटिव लेक्चर लेले या तो फिर किसमें से ले तो मेरा खुद का अभी ऐसा है सोचना कि हम लोग राजयोग में से वे री इंपॉर्टेंट तीन प्रवचनों को लेते हैं सबसे पहला है प्राण दूसरा है साइकिक प्राण और तीसरा है कंट्रोल ऑफ साइकिक प्राण यह तीनों लेक्चर एक यूनिट बनाते हैं जैसे कि मैक्रो कजम माइक्रो कजम एक यूनिट बनाते हैं वैसे ही यह तीन लेक्चर एक यूनिट बनाते हैं और यह तीनों लेक्चर राज्य के रिप्रेजेंटेटिव स्वरूप है तो इसको हम ले और देखेंगे कि स्वामी जी जिस तरह से जिस आइडियाज को ज्ञान योग में ज्ञान योग की वोकेबुलेरियो की टर्मिनोलॉजी में एक्सप्रेस करते हैं उसी आइडियाज को उसी टाइप के थिंकिंग को स्वामी जी राजयोग में राजयोग की वोकेबुलेरियो मय जगत यह तो आपका जो एक है सो है ब्रह्मण और माया यही दोनों का तो सब कुछ बना हुआ है वही बात है कि इस ब्रह्मण और माया को आप किस तरह से विश्लेषण करेंगे किस तरह से एनालाइज करेंगे और किस तरह से उसका प्रैक्टिकल एप्लीकेशन खोजें तो चार योग बेसिकली कोई चार अलग-अलग रियलिटीज को नहीं डिस्क्राइब करते ऐसा नहीं है कि एक मैंने आजकल तो पैरेलल यूनिवर्स का कांसेप्ट है तो यह जो यूनिवर्स जिसमें हम रह रहे हैं वहां पर मान लीजिए कि यह नश्वर जगत है और यह चैतन्य मय जगत है हो सकता है एक पैरेलल यूनिवर्स दूसरा होता वहां पर कोई कंपलीटली डिफरेंट टाइप की रियलिटी हो सकती है हो सकता है तो ऐसा नहीं है कि चार योग जो है चार पैरेलल यूनिवर्स को डिस्क्राइब करते हो या तो एक्सप्लेन करते हो ये चारों योग एक ही यूनिवर्स को डिस्क्राइब करते हैं एक्सप्लेन करते हैं एनालाइज करते हैं तो बे आइडियाज तो हमको सेम ही दिखने वाले वही बात है कि यह जो वोकैबुलरी या तो टर्मिनोलॉजी या तो फिर डेफिनेशंस सबका अपना-अपना है एक चीज दूसरा कि प्रैक्टिकल कंक्लूजन आप क्या निकालते हैं वो एक देखना पड़ता है कि सभी का अपना-अपना रहता है साधन पद्धति सभी की अपनी-अपनी है तो इसके अनुसार हमने ज्ञान योग में देखा कि किस तरह से स्वामी जी ब्रह्मण और माया को एक्सप्लेन करते हैं और उसमें से क्या प्रैक्टिकल कंक्लूजन निकालते हैं तो सिमिलरली यहां पर राज्यों के यह जो न प्रवचनों का यूनिट है व आप स्वामी जी इस तरह से यूनिट में वो सीरीज में लेक्चर देते थे हम लोग जब कंप्लीट वर्क्स एडिट कर रहे थे अभी देखिए कि आज का जो कंप्लीट वर्क्स है जो कि ऑलरेडी पब्लिश हुआ है यह जो ऑलरेडी पब्लिश हो चुका है अपने अधत आश्रम से तो इसमें क्या है कि जैसे जैसे से स्वामी जी के प्रवचन मिलते गए वैसे-वैसे हम पब्लिश करना शुरू करते गए तो ऐसा था ना कि स्वामी जी तो कहां अमेरिका में प्रवचन देते हैं कौन सा प्रवचन किस तरह से नोट डाउन किया किसको पता वो जैसे-जैसे उन प्रवचनों की ड्राफ्ट या तो मैनु स्क्रिप्ट इंडिया में आती गई तो वैसे-वैसे हमारे यह उद्बोधन या तो फिर यह उस समय का जो प्रबुद्ध भारत यह प्रबुद्ध भारत और उद्बोधन ने उसको फिर यह था ब्रह्मवादिनी था तीन अपने ये थे उस समय प्रेस पब्लिशिंग हाउस तो यह इन तीनों ने इस हिसाब से पब्लिश करना शुरू किया मैगजीन में और बाद में यह कंप्लीट वर्ष का हिस्सा बने फिर किंतु जब इसको सिस्टमिकली एनालाइज करना शुरू किया स्वामी जी के कंप्लीट वर्स को तब हमको क्या पता चला पता है यह जो 60 ना 70 के आसपास की बात है इस तरह का एक विचार हुआ कि स्वामी जी के लेटर्स तो हमने ऐसे ही पब्लिश किए हैं जैसे-जैसे मिलते गए तो उसमें 1900 1900 की साल का लेटर हो सकता है कि सिक्सथ वॉल्यूम में हो और ये 1847 18971 वॉल्यूम में हो यानी कि पिछले वाला लेटर पहले वाले वॉल्यूम में और पहले वाला लेटर पिछले वाले वॉल्यूम में क्यों क्योंकि जैसे-जैसे मिलता गया तो ये लेटर्स को सब क्रोनोलॉजिकल सजा दिया जाए जिस तारीख में लिखा है उसी तारीख के अनुसार सजाया जाए जिससे कि हम सीक्वेंस में स्वामी जी के लेटर पढ़ पाए और डेवलप कर पाए कि स्वामी जी के समझ पाए कि स्वामी जी के आइडियाज कैसे डेवलप हुए तो सिमिलरली जिस सीरीज में स्वामी जी ने प्रवचन दिए हैं उस सीरीज में स्वामी जी के प्रवचनों को पब्लिश किया जाए तो यह एनालिसिस करते-करते कुछ-कुछ आश्चर्यजनक चीजें हमको पता चली जैसे कि फॉर एग्जांपल आज का जो ज्ञान योग रूपी जो किताब है वो किताब में क्या है पता है स्वामी जी किस तरह से प्रवचन देते थे ज्ञान योग के या तो फिर राजयोग वगैरह के एक तो क्लास लेते थे बिगिनर्स क्लास यानी कि नए आए हुए विद्यार्थियों का क्लास और एक क्लास सीरीज ऑफ क्लास लेते थे एडवांस क्लास यानी कि जो लोग ऑलरेडी कुछ समय से स्वामी जी के पास आ रहे हैं नियमित आ रहे हैं और उनको कुछ एडवांस कुछ सीखना है तो दो सीरीज था स्वामी जी के क्लास लेने का बिगिनर्स क्लास एंड एडवांस क्लास आज का जो ज्ञान योग रूपी जो किताब है जो कि हम अद्वैत आश्रम से सब जगह से पब्लिश करते हैं उस किताब में बेसिकली बिगिनर्स क्लास के ही लेक्चर है और जो एडवांस लेक्चर जो एडवांस क्लास के वो सब अ उसमें नहीं है ज्यादातर उसमें नहीं है आपको कंप्लीट वर्ष के सेकंड वॉल्यूम में मिलेंगे किंतु ज्ञान योग रूपी किताब में उसमें वो नहीं है यानी कि देखिए कि सब लेक्चर मिक्स अप हो गए हैं कौन सा बिगिनर्स क्लास का सीरीज है कौन सा एडवांस क्लास का सीरीज है वो कुछ ठीक-ठाक नहीं है प्लस अभी मान लीजिए कि स्वामी जी कहीं पे जाते हैं तो तीन प्रवचन की सीरीज रखेंगे पावर्स ऑफ माइंड ना कि इंडिया इंडिया के ऊपर में ना कि इस तरह से कोई भी दो-तीन क्लास के की सीरीज रखेंगे ऐसा होगा कि सीरीज एक वॉल्यूम में है और सीरीज के साथ रिलेटेड जो नोट्स है किसी स्टूडेंट ने बनाई है या तो उसके साथ में कोई न्यूज़पेपर रिपोर्ट है या तो फिर उसी क्लास में कुछ क्वेश्चन आंसर हुए हैं वो सब और किसी वॉल्यूम में है पता ही नहीं चलेगा कि इन दोनों का रिलेशन है तो ये जो नया कंप्लीट वर्स आई वाज वेरी फॉर्चूनेटली जो कि ये जो टीम जो कि नया कंप्लीट वर्स बना रही है हम लोगों के सामने सबसे बड़ी चैलेंज थी कि सब कुछ सीक्वेंस में सजा करके रखे जिससे कि क्या है कि पता चले कि स्वामी जी का आइडियाज किस तरह से इवॉल्व हो रहा है तो स्वामी जी सब कुछ यूनिट में लेते थे ऐसा नहीं कि रैंडम यह क्लास ले लिया रेंडम वो क्लास ले लिया जो कि इंप्रेशन हमको कभी-कभी आज का कंप्लीट वर्ष पढ़ के आती है नया कंप्लीट वर्क्स जद पब्लिश होता है तो उस कंप्लीट वर्क्स में स्वामी जी ने जिस सीक्वेंस में अपने आइडियाज को डेवलप किया है उस सीक्वेंस में हमको पढ़ने को मिलेंगे तो यह एक यूनिट है कि प्राण साइकिक प्राण एंड कंट्रोल ऑफ साइकिक प्राण यह राजयोग में तीन प्रवचनों का एक यूनिट है तो इन तीन प्रवचनों को हम देखते हैं वॉल्यूम वन पेज नंबर 147 यह राजयोग का थर्ड चैप्टर है और उसका नाम है प्राण अभी थोड़ा जिस तरह से हम हमेशा करते आए हैं थोड़ा सा पढ़ेंगे थोड़ा सा डिस्कस करेंगे डिस्कशन शायद कभी-कभी थोड़ा सा थियोरेटिकल हो जाएगा थोड़ा सा डिफिकल्ट हो जाएगा और मैं भी इतना श्यर नहीं हूं कि मैं इसको कितना प्रॉपर्ली एक्सप्लेन कर पाऊंगा क्योंकि बाकी सब चीजें ऐसी होती है ना साधना के रिलेटेड होती है तो हम इंडिविजुअल को रिलेटेड होती है तो क्या होता है कि हमको एक अंदाज होता है मैंने खुद थोड़ी बहुत जो साधना की है अल्प सल्प उस साधना से हमको पता चलता है कि मैंने जो पढ़ता हूं उसके साथ में मेरा जो अनुभव है वह कहां पर मैच हो रहा है और उसके अनुसार हम कुछ बोल सकते हैं अभी यह जो राजयोग या ज्ञान योग ऐसे ऐसे टॉपिक है मने इतने एसोटेस्ट से रिलेट ही नहीं होता है वी हैव टू डिपेंड कंपलीटली अपॉन अ थियोरेटिकल नॉलेज हमने जो थिरी पढ़ी है 100% उसके ऊपर में डिपेंड करके चलना है अपना एक्सपीरियंस कहां वो कि फिर ये ये पदार्थ रूपी यह जगत है माया का जगत है इसको काट करके व ज्ञान अस से काट कर के ठाकुर के सामने व जब भी वह निर्विकल्प समाधि में जाने का प्रयास करते हैं मां काली के वो मूर्ति सामने आ जाती है फिर ठाकुर ने क्या किया वो तोतापुरी ने उनके सर पर काच का टुकड़ा मार दिया यहां कपाल के ऊपर में भ्रू मध्य जिसको कहते हैं बोला कि इसके ऊपर मन को केंद्रित करो तो ठाकुर ने जब उसके ऊपर मन को केंद्रित करना शुरू किया फिर जब मां का स्वरूप सामने आया तो ज्ञान खड़क से मां को दो टुकड़े कर दिए और मन हूहू करके वह अद्वैत भूमि में चला गया तो हमारा तो ऐसा कुछ हुआ नहीं है इस तरह के किसी भी एक्सपीरियंस और अनुभूति से हम पसार नहीं हुए तो हमारा तो जो कुछ भी डिस्कशन है वो थियोरेटिकल डिस्कशन ही होगा यदि मान लीजिए कि अपने संघ के जो गुरु है प्रे मोस्ट रिड डेंट महाराज या तो फिर रिवर्ड वाइस प्रेसिडेंट महाराज इन लोगों की एक सर्टेन लेवल की अनुभूति होती है संघ के गुरु के जो पद के ऊपर में जब आप आसित होते हैं तो एक सर्टेन पावर स्पिरिचुअल पावर आता है वे लोग यदि इस तरह के टॉपिक को एक्सप्लेन करें तो उनके उनके एक्सप्लेनेशन में थिरी के साथ में वो प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस भी वे लोग कह सकते हैं तो खैर किंतु वो एक वो मैंने हम लोगों का वो नसीब कहा कि उनके मुंह से राजयोग या ज्ञान योग सीखने को मिलेगा वी विल हैव टू डिपेंड कंपलीटली अपऑन थरी ये थिरी के ऊपर डिपेंड करके ही हमको सब कुछ करना है तो ठीक है तो आरंभ करते हैं प्राणायाम इज नॉट एज मेनी थिंक समथिंग अबाउट ब्रेथ बहुत सारे लोग सोचते हैं कि प्राणायाम अर्थात कि यह अपने सांस को नियमन करना यह पूरक रेच और कुंभक मैं जब मैं स्कूल में पढ़ता था तो मैं इस तरह से योगासन सीखने को जाता था तो आई वाज वेरी फोर्चुनेगीएंट्स 20 साल हो गए मैंने यह सब अभ्यास बंद कर दिया है किंतु विद्यार्थी था उस समय यह सब सीखा था और बहुत बेनिफिट भी मिला था तो यदि हम यह कहेंगे सबसे पहले ही स्वामी जी वो एक कंट्रा इक्ट स्टेटमेंट से प्रारंभ करते हैं यदि आप सोचेंगे कि प्राणा आसन क्या है स्थिरम सुखम आसनम जैसे कि आसन की डेफिनेशन है अष्टांग योग के भीतर में पतंजलि का अष्टांग योग राज योग जो कि स्वामी जी इसी के बाद में डिस्कस करने वाले हैं तो आसन का डेफिनेशन है स्थिरम सुखम आसनम अर्थात कि आप स्थिर से सुख पूर्वक जद लंबे समय तक बैठ पाए तो उसका नाम है आसन ये जो बात की जो जितने भी जिम्नास्टिक है ना ये जो भुजंगासन है फिर ये ताड़ासन है ना कि ये वृक्षासन है ना कि उने हजारों आसन आजकल जो सब डेवलप हो गए हैं उसमें से किंतु यदि आप एक ही आसन सुखासन या पद्मासन सीख पाए और उस पर लंबे समय तक बैठ पाए तो उसका से आपका काम चल जाएगा तो वैसे ही प्राण जो है अभी यह प्राण का डेफिनेशन पतंजलि ऋषि क्या करते हैं एक बार जद हम देख लेते हैं अच्छा यम नियम प्राणायाम प्रत्याहार धारणा ध्यान समाधि अष्टांगा यह जो 29 नंबर का जो सूत्र है यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार धरना ध्यान और समाधि राज्य के आठ यह अंग है और इसमें से आसन और प्राणायाम ब्रह्मचर्य अपरिग्रह सत्य फिर शौच फिर ये संतोष स्वाध्याय और ईश्वर प्रणिता स्थिरम सुखम आसनम स्थिर अच्छा स्थिर होकर के सुख पूर्वक बैठने को आप आसन कहते हैं 46 नंबर का सूत्र है और 48 49 नंबर का है तस्मीन सती शवास प्रस्वावित दह प्राणायाम कंट्रोलिंग द मोशन ऑफ द एक्सलेन एंड द इनहेलेशन फॉलोज आफ्टर दिस अर्थात कि पतंजलि ऋषि जो प्राणायाम की डेफिनेशन करते हैं वह इस तरह से है श्वास प्रश् वास अयोर गति विच्छेद प्राणायाम तो यह जो प्राणायाम की डेफिनेशन पतंजलि की ऋषि की है 49 नंबर का जो सूत्र उनका तो स्वामी जी सबसे पहले इसी सूत्र को काट करके व कहते हैं कि यह प्राणायाम इज नॉट द साइंस ऑफ स्टॉपिंग द ब्रेथ यह पूरक रेचक कुंभक इसका नाम प्राणायाम नहीं है प्राण प्राणायाम का स्वामी जी क्या अर्थ करते हैं वह हम देखते हैं ब्रेथ इनडीड हैज वेरी लिटिल टू डू विथ इट इफ एनीथिंग स्वास को प्राणायाम से ज्यादा कुछ लेना देना नहीं है इनफैक्ट सांस प्रश् वास को या तो पूरक रेचक कुंबक को प्राण के साथ में कुछ भी लेना देना नहीं है किस तरह का वह बम शेल स्टेटमेंट देकर के स्वामी जी यह प्राण रूपी चैप्टर प्रारंभ करते हैं जितना भी अपना ट्रेडिशनल टीचिंग है अभी देखिए प्रश्न यह होता है कि यह क्या ट्रेडिशनल टीचिंग गलत हो गया तो एक्चुअली ऐसा नहीं है ट्रेडिशनल टीचिंग में कैसा होता है ना ओनियन की तरह लेयर आफ्टर लेयर आफ्टर लेयर रहते हैं जितना लेयर्स आप हटाते जाएंगे उतना ही आप डीपर मीनिंग में जाते जाएंगे यह तो सूत्र स्वरूप में है ना यह जो सूत्र साहित्य है सूत्र साहित्य क्या करता है बड़ी ही डेंसली डेवलप फिलोसोफी जो होती है ना उसको बिल्कुल सरल सूत्रों में वो हमारे सामने रख देते हैं जिससे कि हमको यह याद रखने में ये उसकी सुविधा रहे ये सब मेमोरी टेक्निक है जैसे कि हम स्टूडेंट थे स्कूल में पढ़ते थे तो वो जो इंद्र धनुष के वो जो सात रंग है ना उसको याद रखने के लिए हम क्या करते थे तो जानी वानी पिनारा ऐसा कुछ एक सूत्र था तो व वो याद रखने से हमको या तो जामड़ी फिर ये नीला फिर ये पीला इस तरह से कौन सा कलर सीक्वेंस में आता है उसका एक सूत्र था वो सूत्र को याद रख दिया तो हमको यह कलर याद रह गया तो यह जो सूत्र लिटरेचर है वह बड़ी ही कॉम्प्लेक्टेड रखने वाला यह लिटरेचर है इसके लिए यदि उसका जो सरफेस मीनिंग उसमें दिया गया है कि श्वास और प्रश् वास की जो गति है उसको नियमन करने का साइंस को प्राणायाम कहते हैं तो उसके डीपर डीपर मीनिंग है और उस डीपर मीनिंग को जैसे की बहुत सारी टिकाए राजयोग के पतंजलि राजयोग के ऊपर में लिखी गई है उसको यदि अभ्यास करेंगे तो हमको पता चलेगा यहां पर वी आर फॉलोइंग स्वामी विवेकानंद तो स्वामी जी कहते हैं कि प्राणायाम स्वास के साथ में कुंभक रेचक पूरक रेचक और कुंभक के साथ में प्राणायाम का ज्यादा कोई वास्ता नहीं है इनफैक्ट कुछ भी नहीं है ब्रीथिंग इज ओनली वन ऑफ द मेनी एक्सरसाइजस थ्रू च वी गेट टू द रियल प्राणायाम ब्रीदिंग या तो पूरक रेचक और कुंभक ये बहुत सारी एक्सरसाइज में से एक एक्सरसाइज है जिसके माध्यम से हम सही सही प्राणायाम कर सकते हैं या तो सही सही प्राण का नियमन कर सकते हैं प्राणायाम मींस द कंट्रोल ऑफ प्राण प्राणायाम का अर्थ है प्राण का नियमन तो अभी आप कहेंगे कि प्राण का नियमन अर्थात ही तो ये सास का नियमन डिफरेंस कहां पे है तो एक्चुअली डिफरेंस है जिस तरह से स्वामी जी प्राण को एक्सप्लेन करते हैं उसके अनुसार बहुत सारा डिफरेंस है अपने ट्रेडिशनल दृष्टि से जो पंचप्राण कहे गए हैं वह अपान उदान व्यान समान इस तरह से प्राण अपान उदान व्यान समान यह जो पंच प्राण कहे गए है और उनके जो फंक्शन कहे गए हैं स्वामी जी प्राण को बिल्कुल डिफरेंट तरीके से एक्सप्लेन करते हैं अकॉर्डिंग टू द फिलोसोफर ऑफ इंडिया द होल यूनिवर्स इज कंपोज्ड ऑफ टू मटेरियल हमारे हिंदू दार्शनिकों के मत अनुसार पूरा ब्रह्मांड दो तरह के पदार्थों से बना हुआ है वन ऑफ व्हिच दे कॉल आकाश उसमें से एक को यह लोग कहते हैं आकाश इट इज द ओमनीप्रेजेंट ऑल पेनिट्रेटिंग एक्जिस्टेंस आकाश क्या है पूरे विश्व ब्रह्मांड में छाया हुआ है सब कुछ इस आकाश से बना हुआ है एवरीथिंग दैट हैज फॉर्म एवरीथिंग दैट इज द रिजल्ट ऑफ कॉमिनेशन इज इवॉल्वड आउट ऑफ दिस आकाश जो कुछ भी अस्तित्व में है जिसका नाम रूप है सन सन का अर्थ होता है नामरूप जो चीज का नामरूप है जो चीज को आप मिश्रण से बनाते हैं वह सब कुछ आकाश में से प्रकट हुआ है अभी यदि हम मॉडर्न साइंस को फॉलो करें तो हम कहेंगे कि आकाश मॉडर्न साइंस की दृष्टि से क्या है स्वामी जी कहते हैं कि यदि सब कुछ आकाश और प्राण का बना हुआ है तो मॉडर्न साइंस क्या कहता है मॉडर्न साइंस बेसिकली कहता है कि यह विश्व ब्रह्मांड दो चीजों का बना हुआ है एक है मैटर एनर्जी दूसरा है स्पेस टाइम और यह मैटर एनर्जी स्पेस टाइम के बीच में जो इंटरेक्शन है उसको फोर्स कहते हैं तो यह मैटर एनर्जी स्पेस टाइम और उनके बीच का इंटरेक्शन अर्थात कि फोर्स इसका यह विश्व ब्रह्मांड बना हुआ है तो यदि हम मॉडर्न साइंस और यह अपने ट्रेडिशनल साइंस इन दोनों के बीच में किसी तरह का एक इक्विवेलेंस बिठाने का प्रयास करें तो आकाश को आप क्या कहेंगे तो मुझे लगता है अभी इस तरह से तो अनुमान ही करना है ना मैं तो ना ही राजयोग में सिद्धि प्राप्त की है ना ही मुझे वो मॉडर्न फिजिक्स में मेरे पास में कोई डिग्री है हम लोग तो लेमन है क्योंकि किताब पढ़ के वने मेरी एक हैबिट थी मैं जब स्टूडेंट था कि रात को देरी तक किताब पढ़ता रहता था सोते सोते वैसे हम वैसे में सोने के लिए अपने बिस्तर में लेटा हुआ हूं किंतु फिर नींद नहीं आएगी क्योंकि मुझे ऐसा हैबिट है कि किताब तो पढ़ना ही पड़ेगा तो पास में तीन चार पांच छह किताब पढ़ी रहती थी फिर एक के बाद एक मैं पढ़ता रहता था उसको ज्यादातर रात ऐसी ही पसार हो जाती थी मेरी और यह हैबिट मेरी आज तक भी है कि रात को सोने के समय सोना कम किताब ज्यादा पढ़ना तो ये जो रीडिंग है इस तरह का रीडिंग तो ये रीडिंग क्या है पता है ना ये एक ले पर्सन का रीडिंग है हमने तो किसी एक पार्टिकुलर सब्जेक्ट में एक्सपर्टाइज्ड है जो कि स्पिरिचुअल बेसिक स्पिरिचुअल सब्जेक्ट है मैंने उसमें भी जिस तरह से सर्व प्रियानंदनसेक्स पर्टाइट नहीं है सब कुछ थोड़ा-थोड़ा पड़ा हुआ है तो यह जो मेरा एक सरफेस नॉलेज है एक ले पर्सन का जो नॉलेज है उसके ऊपर से मैं जद इक्विवेलेंस बिठाने का प्रयास करूंगा नॉन एक्सपर्ट दृष्टि से तो व क्या है पता है कि आकाश जो मुझ मुझे समझ में आता है वह है मैटर एनर्जी स्पेस टाइम मैटर एनर्जी अर्थात की पदार्थ जो है जैसे कि मान लीजिए यह पेन है राइट यह पेन बनी हुई है एक पदार्थ की ये पदार्थ किस चीज का बना हुआ है तो जिसको कि हम इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन और न्यूट्रॉन कहेंगे और ये इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन न्यूट्रॉन फिर ये कुछ क्वार्क कहो ना कि स्ट्रिंग कहो उसके बने हुए किंतु बेसिकली मॉडर्न साइंस इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन और न्यूट्रॉन और एटम यहां तक तो एग्री है बड़ा ही क्लियर एग्री है अभी मान लीजिए कि इस पेन के भीतर में जितने भी इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन न्यूट्रॉन या तो एटम या तो मॉलिक्यूल जो कुछ भी है इसका यदि आप दहन करेंगे तो यह एनर्जी में कन्वर्ट होगा यह पदार्थ का दहन करके एनर्जी प्रगट करना इस चीज को फ्यूजन प्रोसेस कहते हैं और यह एटम बम है इसका सबसे बड़ा उदाहरण एटम बम में क्या होता है पदार्थ को एनर्जी में कन्वर्जन करते हैं एनर्जी में उसका दहन करते हैं और उससे जो प्रचंड एनर्जी जो प्रकट होती है उसी एनर्जी के ऊपर में पूरा विश्व ब्रह्मांड चलता है यह सूरज जो है सूरज में से यह गर्मी या ताप कहां से प्रकट होता है तो यही फ्यूजन प्रोसेस के माध्यम से और यह आइंस्टाइन का यह इनसाइट था e इक्वल ए c स्क्वा e मींस एनर्जी और m इक्वल्स मास मास और एनर्जी एक दूसरे के इक्विवेलेंट है अर्थात कि यह जो पेन है इसका मैं पूर्ण रूप से दहन कर दूं दहन करना यानी वो अभी मैं इसको आग में डाल दूंगा तो यह जल जाएगा तो जलेगा तो कुछ राख निकलेगी और कुछ इसके ऊपर में आग लगेगी अभी यह पेन को आग लगेगी तो आप सोचेंगे कितनी आग निकलेगी ज्यादा से ज्यादा वो थ इसके यहां तक हाथ रखूं तो मुझे गर्म लगेगा यदि यह पेन जलती है तो किंतु यहां पर हाथ रखूं तो मुझे उसकी गर्मी का अनुभव भी नहीं होगा यह पेन जलने से और कुछ राख निकल आएगी तो आप बोलेंगे पेन का दहन करने से क्या होने वाला है किंतु एक्चुअली क्या है ना वो मलेकल के बॉन्ड का दहन है यदि इसके भीतर में जो एटम्स है एटम्स का दहन किया जाए तो यह पेन संपूर्ण रूप से यदि इसका दहन होगा तो पता है क्या है आधा भारतवर्ष नष्ट हो जाएगा आधी पृथ्वी नष्ट हो जाएगी इतना एनर्जी इसके भीतर में है तो यह हो गया मैटर और एनर्जी फिर यह जो चारों और जो कुछ मैं देख रहा हूं वह है स्पेस टाइम जिसके भीतर में यह पेन रहती है तो यह जो स्वामी जी कहते हैं आकाश की डेफिनेशन तो आकाश की डेफिनेशन यही है मुझे ऐसा लगता है कि यह पेन बनी है आकाश की पेन को जलाएंगे तो एनर्जी जो डेवलप प्रकट होगी वो भी आकाश की है और साथ-साथ में यह जो स्पेस टाइम है जिसके भीतर में यह पेन रह रही है व भी आकाश है यह मेरा मॉडर्न साइंस के साथ में इसका इक्विवेलेंस करने का प्रयास है इट इज द आकाश दैट बिकम द एयर दैट बिकम द लिक्विड्स दैट बिकम द सॉलिड्स इट इज द आकाश दैट बिकम द सन द अर्थ द मून द स्टार्स द कोमेट्स इट इज द आकाश दैट बिकम द ह्यूमन बॉडी द एनिमल बॉडी द प्लांट्स एवरी फॉर्म दैट वी सी एवरीथिंग दैट कैन बी सेंस्ड एवरीथिंग दैट एक्सिस्ट यह आकाश ही है जो कि हवा में परिणत होता है जो कि प्रवा अ प्रवाही में परिणत होता है जो कि सॉलिड अर्थात कि घन पदार्थ में परिणत होता है यह आकाश ही है जो कि चांद सूरज सितारे बनाता है पृथ्वी बनाता है और साथ-साथ में कोमेट यानी कि धूमकेतु बनाता है यह आकाश ही है जो कि मनुष्य शरीर बनाता है पशुओं के शरीर को बनाता है पेड़ पौधे को बनाता है प्रत्येक नाम रूप जो हम इस जगत में देखते हैं प्रत्येक चीज जो कि हम अपनी ज्ञानेंद्रियों से देख सकते हैं सुन सकते हैं प्रत्येक चीज जो कि हम अपनी कर्मेंद्रियों से जिसके साथ में हम इंटरेक्शन कर सकते हैं वो सब कुछ आकाश बनाता है दैट कैन बी सेंस्ड एवरीथिंग दैट एसिस्ट जो कुछ भी अस्तित्व में है जिसको कि हम आंख से देख सकते हैं कान से सुन सकते हैं हाथों से स्पर्श कर सकते हैं जिगवा से उसका स्वाद ले सकते हैं आस्वाद कर सकते हैं सब कुछ आकाश का बना हुआ है और इस डेफिनेशन के अनुसार यह मैटर एनर्जी और स्पेस टाइम ही है जो कि इस डेफिनेशन में फिट होता है अभी जैसे कि अ इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन और न्यूट्रॉन इन तीनों के कॉमिनेशन से डिफरेंट डिफरेंट तरह के एटम बनते हैं जैसे कि ऑक्सीजन का एटम बनता है हाइड्रोजन का एटम बनता है लिथियम का एटम बनता है निकल का एटम बनता है सोडियम का बनता है हीरे का बनता है गोल्ड का बनता है यूरेनियम का बनता है वो जो पीरियोडिक टेबल में 92 ना कि 93 एलिमेंट्स अभी तक खोजे गए हैं एग्जैक्ट नंबर मुझे याद नहीं आ रहा है यदि हम बचपन में फिजिक्स के क्लास में यह पीरियोडिक टेबल को याद रखने का प्रयास हमने किए एच एई एई हाइड्रोजन हीलियम लिथियम हाइड्रोजन में एक प्रोटॉन होता है और एक न्यूट्रॉन होता है फिर ये हीलियम में दो प्रोटोन होते हैं दो न्यूट्रॉन ऐसा करके वो हम इसका वो याद रखने का प्रयास करते हैं यानी कि हाइड्रो इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन और न्यूट्रॉन इन तीनों चीजों से सब कुछ बना है ये इन तीनों चीजों को मैटर के जो एलिमेंट्स है इसको फर्मिऑन कहते हैं और एनर्जी के जो ये होते हैं एटम्स उसको बोलते हैं बोजन ये अपने जो जगदीश चंद्र बोस के अनुसार उनके नाम के अनुसार यह बजोन शब्द आया है बोज आइंस्टाइन दोहों ने मिलकर के कुछ-कुछ थिरी को डेवलप किया था तो ये एनर्जी के जो पार्टिकल है इसको हम बोजन कहते हैं एनर्जी के पार्टिकल में एक आता है फोटोन जो कि लाइट को वहन करता है तो जो भी है इतना डिटेल में जाने की जरूरत नहीं है किंतु यह जो डेफिनेशन है कि मनुष्य का शरीर बनाता है प्राणी का शरीर बनाता है पृथ्वी को बनाता है सितारों को बनाता है सब कुछ बनाता है जिसको कि हम स्पर्श कर सकते हैं जिसको कि हम देख सकते हैं जिसका हम आस्वाद कर सकते हैं सब कुछ यह आकाश बनाता है तो इस डेफिनेशन में यह मैटर एनर्जी और स्पेस टाइम ही आएंगे इट कैन नॉट बी पर्सीवड इट इज सो सटल दैट इट इज बियोंड ऑल ऑर्डिनरी परसेप्शन अभी जैसे देखिए आकाश अपना स्वरूप बदल करके या तो फिर आकाश से जद इस पेन बनती है तो पेन को तो हम स्पर्श कर सकते हैं किंतु इस पेन जो आकाश बनाता है आकाश को हम स्पर्श नहीं कर पाएंगे या तो हम अपनी आंखों से नहीं देख पाएंगे और यह बात भी तो सही है कि यदि यह एटम्स कहो फर्मिऑनस कहो ना कि बोजो कहो ना कि स्पेस कहो ना कि टाइम कहो यह सब चीजें है हम किंतु आंखों से देख नहीं पाएंगे हाथों से स्पर्श नहीं कर पाएंगे मैथमेटिक्स के द्वारा ही हम इसको समझ पाएंगे तो यहां पर भी स्वामी जी कहते हैं जो आकाश का यह सब बना हुआ है उस आकाश को डायरेक्टली हम नहीं देख पाएंगे ना ही स्पर्श कर पाएंगे ना ही इसको समझ पाएंगे समझना तो खैर बुद्धि से है किंतु उसको हम पर्सी नहीं कर पाएंगे इट कैन ओनली बी सीन व्हेन इट हैज बिकम ग्रॉस हैज टेकन फॉर्म जद यही बजोन और फर्मिऑनस फोटोन और इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन या तो स्पेस एंड टाइम जब कोई आकार धारण करता है तभी उस आकार को हम या तो स्पर्श कर पाते हैं या तो फिर हम देख पाते हैं ग्रोस फॉर्म यानी कि उसका घन उसका जो स्वरूप धारण करते हैं तभी हम उसको देख पाएंगे या तो स्पर्श कर पाएंगे एट द बिगिनिंग ऑफ क्रिएशन देयर इज ओनली दिस आकाश जब विश्व ब्रह्मांड का प्रारंभ नहीं हुआ या तो प्रारंभ हो रहा है तब यही आकाश ही है एट द एंड ऑफ द साइकल द सॉलिड्स द लिक्विड्स एंड द गैसेस ऑल मेल्ट इनटू द आकाश अगेन सृष्टि के प्रारंभ में आकाश था और सृष्टि के अंत में लय के समय जो कुछ भी देख रहे हैं सब कुछ आकाश में विलीन हो जाएगा एंड द नेक्स्ट क्रिएशन सिमिलरली प्रोसीड्स आउट ऑफ दिस आकाश और जो नया ब्रह्मांड जो ब्रह्मांड की नई साइकल जो प्रारंभ होगी वह इसी आकाश से ही प्रारंभ होगी और यह मॉडर्न साइंस भी इसके साथ में बड़ा ही बेसिकली स्टेप बाय स्टेप चलता है जिसको कि हम बिग बैंग थिरी कहते बिग बैंग थिरी में यह स्पेस टाइम और मैटर एनर्जी दोनों प्रकट हुए शून्य में से जैसे कि शून्य में से नहीं कॉस्मो मैक्रो कजम में तो हमने देखा कि एक डिवाइन सत्ता थी ब्रह्मण कहो कि ईश्वर कहो उसके भीतर में से यह स्पेस टाइम मैटर एनर्जी प्रकट हुआ एक बहुत बड़े विस्फोट के साथ में और इसने एक के बाद एक बिग बैंग की थिरी इतनी सुंदर रूप से डेवलप की गई है कि हमको बहुत ही डिटेल में हमको पता है कि कैसे यह ब्रह्मांड का डेवलपमेंट हुआ बच्चे को जब जन्म लेता है बच्चा तो जो गर्भाधान जो होता है तभी से हमारे साइंटिस्ट लोगों ने यह सब मेजर ऑब्जर्वेशन करना शुरू कर दिया है कि एक कोशी फिर दो कोशी तीन कोशी धीरे-धीरे करके उसके अंग प्रत्यंग मां के गर्भ में बच्चा डेवलप हो रहा है तो सोनोग्राफी की मदद से यह सब अल्ट्रासाउंड की मदद से हम लोग देख सकते हैं कि कैसे बच्चे का विकास हो रहा है फिर जब बच्चा एक्चुअली जन्म ग्रहण करता है तो इतना सा छोटा सा होता है तो छोटे बच्चे में से जो पुक्त वय का मनुष्य वो होता है एक एडल्ट होता है तो उसका एक पूरा डेवलपमेंट साइकल है जो कि आज के बायोलॉजिस्ट और साइकेट्रिस्ट बड़ा ही अच्छे से उसको मेजर कर रहा है ट्रैक कर रहे हैं तो वैसे ही ये कॉस्मोलॉजिस्ट जो होते हैं इन्होंने ब्रह्मांड का डेवलपमेंट बड़ा ही क्लोजल उन्होंने यह वर्क आउट किया है मैथमेटिक्स और फिजिक्स की वजह से कि यह बिग बैंग हुआ उसके बाद में एक इन्फ्लेशनरी पीरियड था जिसमें कि विश्व ब्रह्मांड बड़ा ही रेपिडली एक्सपें हुआ उसके बाद में यह जो एक के बाद एक व या तो फिर स्ट्रिंग कहो ना कि क्वार्क कहो उसमें से यह सब एटॉमिक पार्टिकल बनना शुरू हुए फिर सब एटॉमिक पार्टिकल में से एटॉमिक पार्टिकल्स हुए उसमें से यह मॉलिक्यूल डेवलप हुए मॉलिक्यूल में से ये गैस क्लाउड बने फिर ये गैस क्लाउड कंडेंस होकर के गैलेक्सी बनी एक गैलेक्सी में छोटे-छोटे रीजन जो कि सोलर सिस्टम बने तो ये बड़ा ही डिटेल में यह सब कुछ हमारे मॉडर्न कॉस्मोलॉजी ने वर्कआउट किया हुआ है तो स्वामी जी की ये जो थिरी है आकाश के सृष्टि के प्रारंभ में आकाश प्रकट हुआ और यही आकाश धीरे-धीरे स्थूल स्वरूप धारण करता हुआ इस ब्रह्मांड में जो कुछ भी हम देख रहे हैं सितारे तारे सूरज चंद्र मनुष्य पशु पक्षी जो कुछ भी हम देख रहे हैं सब कुछ इसी आकाश का घन स्वरूप है ग्रोस फॉर्म है नामरूप है तो अभी सृष्टि के प्रारंभ में आकाश था आकाश में से यह स्थूल चीजें प्रकट डेवलप होना शुरू हुई तो प्रलय जब होगा प्रलय के समय में जो कुछ भी ये स्थूल चीजें आप देख रहे हैं यह मनुष्य यह तारे न कि एक गैलेक्सी नकी जो कुछ भी है सब कुछ ये आकाश में विघटित हो जाएंगे और फिर वही प्रलय में वो लीन हो जाएंगे और उसके बाद से नई साइकिल स्टार्ट होगी तो आज की मॉडर्न कॉस्मोलॉजी जिस तरह से बिग बैंग को समझाती है वैसे ही हमारे भविष्य को भी समझाती है तीन पॉसिबिलिटीज है तीन में से एक पॉसिबिलिटी है बिग क्रंच अर्थात कि एक बहुत बड़े विस्फोट के भीतर में यह ब्रह्मांड जो है उसका प्र हो जाएगा अपोकेलिप्स हो जाएगा यदि यह क्रिश्चियन वर्ड यूज करें तो तो यह बिग बैंग और बिग क्रंच बिग क्रंच इज वन ऑफ द थ्री पॉसिबिलिटीज दूसरी भी दो पॉसिबिलिटी है इसको भी हम नहीं डिस्कस करते किंतु यह बिग क्रंच जो है य जिसको की हम प्रलय कहेंगे इस प्रलय के भीतर में यह पूरा आकाश बनके समा जाएगा तो किस तरह से भी स्वामी जी समझा रहे हैं इतना जो पड़ा इसका सार क्या है कि सार यह है कि बिग बैंग हुआ या तो सृष्टि हुई सृष्टि में से आकाश प्रकट हुआ और आकाश में से यह जितने भी स्थूल चीजें देख रहे हैं वो सब प्रकट हुई और सृष्टि के अंत में सब स्थूल चीजें आकाश में समाहित हो जाएगी आकाश जो है वो आखिर में प्रलय में समाहित हो जाएगा इतना हमने आज पढ़ा बाकी का हम कल देखेंगे ओम शांति शांति शांति हरि ओम श्री राम कृष्णर्पण

Questions & Answers

मस्तु य जो पंच महाभूत ज आकाश आ स्वामी जी जे आकाश डिस्कस करछ सेटा संपूर्ण आला आकाश माने की व्यम य जटा हमरा ऊपरे देखते पा से आकाश नहीं ही आकाश माने सेही फंडा वही फंडामेंटल पदार्थ कि जिसमें से यह पूरा विश्व ब्रह्मांड प्रारंभ हुआ है तो वो आकाश पंच महाभूत का आकाश और यह आकाश य डिफरेंट है बिल्कुल डिफरेंट है स्वामी जी जो थिरि डेवलप कर रहा है ना किंतु ये जो कह रहे है कि हमारे ट्रेडिशनल साइंटिस्ट और दार्शनिक लोगों ने यह सब कहा है किंतु देखिए कि बहुत सारा कुछ इंटरप्रिटेशन मेरा जो पर्सनल मानना है मैंने तो कोई ट्रेडिशनल फिलोसोफर को इतना डिटेल में पढ़ा नहीं किंतु जो कुछ भी ऊपर ऊपर से मैंने पढ़ा है ना मेरा ऐसा अनुमान है कि बहुत सारी थिरी स्वामी जी ने अपने से डेवलप कि है ऐसा नहीं है कि नया कुछ निकाला है जो ऑलरेडी जो थिरी थी उसके ऊपर में गहन चिंतन मनन करके हमारे हमको समझ में आए उसके लिए उसको प्रॉपर डाइजेस्ट के रूप में दिया है वो जो रीडर्स डाइजेस्ट करके वो एक मैगजीन आता था ना अनफॉर्चूनेटली वो मैगजीन अभी बंद हो गया है तो ये एक डाइजेस्ट हमारे सामने उन्होंने रखा है इट अ वेरी मने डिटेल अंडरस्टैंडिंग ऑफ हाउ दिस नेचुरल फिनोमिना वर्क्स जिसको कि हम यह व्योम कहते हैं ये जो ऊपर आकाश छो दिखता है हालांकि यह पंचभूत जो है ना वो ये जो पृथ्वी आप फिर ये जो वायु ये नील ये जो व्योम ये एक्चुअली ये पानी या तो पृथ्वी या तो फिर ये पत्थर मिट्टी ये सब नहीं है ये सब एलिमेंट्स है फंडामेंटल एलिमेंट्स है इस फंडामेंटल एलिमेंट से सब कुछ बना है यानी कि इसको इस फंडामेंटल एलिमेंट्स को भी हम इसको स्पर्श करके जो दिखता है वो नहीं हम ऐसा नहीं कह सकते कि यह जो पेन बनी हुई है जिस पेन का हमने उदाहरण दिया यह पृथ्वी की या तो जल और पदार्थ की बनी हुई है ऐसा कुछ ऐसा हम नहीं कह पाएंगे सब एलिमेंट्स इकट्ठा होकर के सब पदार्थ होते हैं वो सूक्ष्म एलिमेंट्स है वो वो जो जो आकाश में जो दिखता है ऐसा ये सब सूक्ष्म एलिमेंट्स मैं जब यह प्राणायाम वगैरह सीख रहा था तो हमको यह सब प्राणाया राज्यों की जो ट्रेडिशनल टेक्स्ट थे ना वो ये लोग हमको पढ़ाते थे तो ये लोग क्या कहते थे पता है हमारे आचार्य कि कुंभक को आपको मेहनत करके सांस को नहीं रोकना है यह जो आप प्राणायाम करते हैं वो बेसिकली पूरक और रेचक है यानी सांस लेना है सांस को निकालना है और इन दोनों के बीच में एक बार कभी ऑटोमेटिक सांस रुक जाएगी वो ऑटोमेटिक जो होता है सहज रूप से जो होता है वो कुंभक है तो जो आप कह रहे हैं वो ऑलमोस्ट ठीक ही है कि सांस लेना और सांस निकालना इन दोनों के बीच में एक क्षण ऐसी आएगी जदिया तो यदि उसी के ऊपर में आपका मन एकाग्र हो गया तो वहीं की वहीं आपको समाधि हो जाएगी तो यह बेसिकली कुंभक की थिरी है हम जो ऐसा सोचेंगे कि मैं सांस लूंगा फिर सांस को बंद कर दूंगा फिर सांस निकालू इस तरह से तो फिजिकल एक्सरसाइज होती है वो कोई प्रॉपर कुंभक नहीं है प्रॉपर कुंभक है कि सांस लेने और निकालने के बीच में एक एक क्षण वो ऑटोमेटिक थम जाती है उसी क्षण के ऊपर में एकाग्र करने से मन को हमको समाधि प्राप्त होती यह प्रॉपर थिरी है इसकी देखिए हमारे शास्त्रों में कभी-कभी ऐसा होता है कि एक ही शब्द यूज किया जाता है विभिन्न तरह के कांसेप्ट को समझाने के लिए तो स्वामी जी यहां पर जिस को जिस अर्थ में आकाश शब्द का व्यवहार करते हैं और यह पंच महाभूत में जो एक महाभूत आकाश जो है वह डिफरेंट है इन दोनों को भले ही चाहे नाम सेम हो यह दोनों एक नहीं है इसके लिए इन दोनों के बीच में कंफ्यूजन होना स्वाभाविक है किंतु हमको यह मन में रखना होगा यह दोनों डिफरेंट एलिमेंट है देखिए हम जिसको आकाश कहते हैं बहुत अलग-अलग डेफिनेशन हो सकती है जैसे कि ये स्पेस है उसको हम आजकल आकाश कहते हैं विज्ञान में अब जो हम स्कूल में जो विज्ञान पढ़ते थे तो ये आकाश क्या है तो पृथ्वी के ऊपर का जो भाग है उसको हम आकाश कहेंगे यह एक डेफिनेशन है थोड़ा सा आप डिटेल में जाएंगे तो यह स्पेस जो है उसको शायद आप आकाश कह सकते हैं ये एक चीज हो गया एक डेफिनेशन है कि पंच महाभूत का एक महाभूत है आकाश ये एक डेफिनेशन है तो अभी क्या है ना एक ही शब्द विभिन्न तरीकों से विभिन्न जगह पे इस्तेमाल किया गया है स्वामी जी जो आकाश कहते हैं वो आकाश इसको हम मॉडर्न साइंस की शब्द में स्पेस टाइम मैटर एनर्जी के रूप में पहचान सकते हैं वो एलिमेंट वो फंडामेंटल एलिमेंट जिसमें से सब कुछ बना हुआ है उसको स्वामी जी आकाश कहते हैं अभी इस बात को कोई भी नाम दे दीजिए आप इसको चाहे तो ओजस कह सकते हैं कुछ भी कह सकते हैं व्हिच एवर द नेम यू गिव स्वामी जी इस बात इसको आकाश कहते हैं सो स्वामी जी की दृष्टि में आकाश अर्थात कि सब कुछ जिस चीज का बना है उसको आकाश बहुत ही एसोटेस्ट के साथ में कहीं प मैचिंग ही नहीं है इसका किस बेसिस पर आप एक्सप्लेनेशन देंगे वो एक प्रश्न हो जाता है ना या तो आप सीधा सधी पाठ कर लीजिए अभी मैं यहां पर ब्रह्मचार्य के क्लास इस राज्यों के एक दो टॉपिक पर लेना शुरू किया किंतु मैंने क्या पाया पता है मैं सीधा सधी पढ़ ही रहा हूं अब इनको मैं यह कॉस्मोलॉजी वगैरह कॉम्प्लिकेशन में नहीं डालना चाहता वो अननेसेसरी उनके लिए हो जाएगा तो उनको इंटरेस्ट भी इतना नहीं होगा शायद तो अब मैं फिर तो किस चीज को लेके एक्सप्लेन करूं वो सीधा सधी पाठ ही हो गया भाई इसलिए मैंने वो टॉपिक ही वहां पर बंद कर दिया यहां पे आप लोग है यह विलिंग जिसके ऊपर मैं एक्सपेरिमेंट कर सकता हूं