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Swami Vivekananda Raja Yoga ·

राजयोग : Ch.3 प्राण : स्‍वामी विवेकानन्द : 11 June 2024

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ओ स्थापक य च धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नम यह राजयोग का थर्ड चैप्टर प्राण अभी हम लोग कल देख रहे थे कि किस तरह से स्वामी जी एक नया टॉपिक स्टार्ट करते हैं पहले तो बता देते हैं कि प्राणायाम से हम लोगों के पास में किस किस तरह के मैजिकल या तो फिर मिरेकल अस पावर आ जाते हैं हालाकि कहा जाता है एक फेमस एक यह था साइंस फिक्शन राइटर उसका नाम मैं भूल गया जो भी है उसने कहा था कि वन वी मीट ए टेक्नोलॉजी च इज सफिशिएंटली एडवांस इट विल लुक अस सिमिलर लाइक ए मैजिक अर्थात कि हम जद ऐसी कोई टेक्नोलॉजी मैंने साइंस फिक्शन में तो आर्थर सी क्लार्क मोस्ट प्रोबेबली उसका नाम था आर्थर सी क्लार्क ये साइंस फिक्शन ऑथर का साइंस फिक्शन तो पता है ना क्या होता है कि अब जैसे कि जादुई कहानियां होती है हम लोग बच्चों को कैसे राक्षस की कहानी सुनाते हैं और जादू की कहानी सुनाते हैं आजकल पिछले 50 100 साल से जो चल रहा है साइंस को लेकर के माने एडवांस साइंस किस तरह का होगा उसका एक स्पेक्युलेटिव फेमस साइंस फिक्शन ऑथर्स है उसमें से एक है जैसे कि आइजक एसीमोव फिर एक है जूल्स वर्न फिर एक है यह आर्थर सी क्लार्क अपना इंडियन एक है उसका नाम है जयंत नारलीकर ये जयंत नारलीकर ने भी बहुत सुंदर यह साइंस फिक्शन कहानियां लिखी है मैं जब छोटा था तब मैं पढ़ा करता था अभी तो बहुत सारी भूल गया हूं तो यह आर्थर सी क्लार्क मोस्ट प्रोबेबली इसी ने कहा है कि सफिशिएंटली एडवांस टेक्नोलॉजी लुक्स इंडिस्टिंग्विशेबल फ्रॉम मैजिक अर्थात कि मान लीजिए साइंस फिक्शन वाले यह सब स्पेक्युलेटिव पर जद जीवन होगा तो कैसा होगा मान लीजिए हमारे से बहुत ज्यादा एडवांस है या तो फिर मान लीजिए कि हमारे पास में टाइम मन आ जाए और हम भविष्य में यात्रा करें तो भविष्य में मनुष्य के पास में इतनी एडवांस टेक्नोलॉजी होगी कि जो कि हमको जादू चमत्कार जैसी दिखेगी आज हम मान लीजिए कि आज से 50 60 साल पहले का ही कंपैरिजन हम यदि आज के युग के साथ में करें हम लोगों ने ठाकुर महास्वामी जी की कहानियां पढ़ी है उन समय किस तरह से आपको कम्युनिकेशन करने के लिए टेलीग्राम भेजना पड़ता था तो अभी जैसे कि स्वामी जी की मां बीमार हो गई स्वामी जी कलकाता में है और अभी कैसे अभी वह समाचार ले कि मां के साथ में सही में क्या हो रहा है तो उस आदमी के पास में गए जो कि कुछ इसके पास में कुछ सुपर नेचुरल पावर थे और उस सुपर नेचुरल पावर से बताएगा किंतु उस समय जिस चीज के लिए सुपर नेचुरल पावर्स की आवश्यकता थी कि मद्रास उस समय का मद्रास आज का चेन्नई कि मद्रास में बैठे-बैठे कलकत्ता में स्वामी जी की मां की हेल्थ कैसी है वो कुछ सुपर नेचुरल पावर से जाने आज सबके पास में मोबाइल है तो मोबाइल से एक मैसेज करो तो मैसेज से ही आपको पता चल जाएगा कि कौन कैसे क्या कर रहा है वीडियो कॉल कर सकते हैं चैटिंग कर सकते हैं कॉल कर सकते हैं तो स्वामी जी के समय उस समय कंपेयर टू आज मुश्किल से देखिए कि 100 सवा साल हुए हैं तो यह 100 सवा साल में टेक्नोलॉजी इतनी एडवांस हो गई है कि स्वामी जी के समय में जो सुपर नेचुरल लगता था कि चेन्नई में बैठे-बैठे एक ऐसा व्यक्ति जो कि कोई प्रेतात्मा के साथ में बात करके स्वामी जी की मां की खबर करें आज सब जगह पर यह मोबाइल टावर लगे हुए हैं और यह मोबाइल टावर टू मोबाइल टावर मैसेज कम्युनिकेट होता है और उसी से स्वामी जी की मां की खबर स्वामी जी को मिल जाती यदि वह आज के युग में जीते तो तो यदि ऐसी टेक्नोलॉजी जो कि एडवांस है और और जिसके बारे में हमको पता नहीं है तो बाहर से वह जादू चमत्कार जैसी ही दिखेगी तो यह साइंस फिक्शन का एक बड़ा ही बेसिक कांसेप्ट है और इसीलिए वे लोग अभी जैसे कि जूल्स वर्न उसने एक कहानी लिखी है कि 80 डेज अराउंड द वर्ल्ड अर्थात कि 80 दिन में आप पृथ्वी की परिक्रमा कर सकते हैं तो उस समय तो आपको लगेगा कि अरे कैसे आप 80 दिन में पूरी पृथ्वी की परिक्रमा कर देंगे तो कितना मतलब आपको मैंने एडवांस आपको यह जो स्टीम बोट टेक्नोलॉजी होगी तो और मने कितना सब कुछ चाहिए नेविगेशन स्टीम बोट यह सब कितना सब कुछ चाहिए तो 80 दिन में आप पृथ्वी की परिक्रमा कर सकते हैं और आज देखिए आज आप यहां से प्लेन में बैठे तो 3 दिन में न्यूयॉर्क और न्यूयॉर्क से वह पैसिफिक होकर के जापान होकर के दूसरे तीन दिन में इंडिया वापस आज आपको यदि पृथ्वी की परिक्रमा करनी है तो चार पांच दिन से ज्यादा समय नहीं लगेगा और यदि यह तो सिविल एविएशन माने यह जो जनरल पैसेंजर प्लेन है उसकी बात कर रहा हूं मिलिट्री के पास में ऐसे-ऐसे प्लेन है जो कि एक ही दिन में शायद पृथ्वी की परिक्रमा कर दे मने आवाज की तीन गुना गति से यह उड़ सकते हैं आवाज की चार गुना गति से इसको ये उड़ सकते हैं मेक फाइव मेक फोर इस तरह से तो इसकी तो कितनी भ मतलब वो जो दिन थे कि 80 दिन में ज पृथ्वी की परिक्रमा कर दी तो लगता था अरे बाप रे और आज है कि एक दिन में आप 24 घंटे में परिक्रमा कर सकते हैं इतनी टेक्नोलॉजी एडवांस है तो वे लोग यदि आज की टेक्नोलॉजी देखेंगे तो उनको लगेगा कि अरे यह जो मैंने मेक फाइव आवाज की तीन गुना गति से यह जो विमान उड़ता है उसके भीतर में निश्चय कुछ जादू है तो यहां पर भी देखिए कि स्वामी जी जब हमको यह कहते हैं कि पूरा विश्व ब्रह्मांड तो दो तत्व का बना है एक आकाश दूसरा है प्राण आकाश क्या है अर्थात कि जो कुछ जिसको कि हम छू सकते हैं जिसको कि हम स्पर्श कर सकते हैं जिसको कि देख सकते हैं जिसको कहते हैं मैटर या तो कहेंगे पदार्थ और प्राण क्या है फोर्स यह फोर्स जो कि दो पदार्थ के बीच में कम्युनिकेशन करती है जैसे कि ग्रेविटी है जैसे कि इलेक्ट्रो मैग्नेटिज्म है जैसे कि स्ट्रांग एंड वीक न्यूक्लियर फोर्स है और अभी जैसे कि फि फोर्स यह लोग कह रहे हैं कि एंटाई ग्रेविटी यह स्पेक्युलेटिव नहीं हुआ कांसेप्ट किंतु ये स्पेक्युलेटिव पे है एक तो है कॉस्मिक प्राण दूसरा है कि इंडिविजुअल हमारे भीतर में प्राण हमारे भीतर में जो प्राण है उसको यदि हम कंट्रोल कर पाए तो हमारे भीतर का प्राण एक रिमोट कंट्रोल का काम करेगा कॉस्मिक प्राण को कंट्रोल करेगा और यह कॉस्मिक प्राण यह पदार्थ जो है मैटर और एनर्जी इसको कंट्रोल करेंगे और इसकी वजह से हम तारे सूर्य की गति को फिर हम चेंज कर सकते हैं योगी क्या से क्या नहीं कर पाएगा उसके पास में कैसी शक्तियां आ जाएगी अभी यह जो सब हम विवरण सुनते हैं तो हमको लगता है यह तो जादू चमत्कार ही तो हो गया ना यह जैसे परियों की कहानी पढ़ते हैं यह राक्षसों की कहानी पढ़ते हैं उसमें एक जादूगर होता है वह जादूकर करता है वह कहा जाता है ना कि एक राक्षस है और राक्षस का प्राण एक पंखी के भीतर में है आप राक्षस को कितना ही मार दो वो राक्षस मरेगा नहीं उसको आप जितने ही तीर मारना हो मार दो वो कभी उसको कुछ नहीं होगा किंतु जिस चिड़िया के भीतर में राक्षस का प्राण है उस चिड़िया को यदि मार दिया तो वह राक्षस मर जाएगा रावण का कैसा था रावण के 10 सिर थे और भगवान राम ने एक के बाद एक सिर काटना शुरू किया किंतु जैसा एक सिर काटेंगे दूसरा सिर आ जाएगा जैसे उसको काटा तो तीसरा सिर आ जाएगा तो अभी सभी लोग बेचारे परेशान हो ग ग कि ये किया क्या जाए इसके साथ में तब कहीं जाकर के किसी ने कहा कि रावण का प्राण है उसकी नाभी में है नाभी में तीर मारेंगे तो उसका मृत्यु होगा तो कहीं उसमें तीर मार दिया तो उसका मृत्यु हो गया तो यह जो ये राक्षसी शक्तियां यह जो हम सब पुराण में पढ़ते हैं परियों की जादुई कहानियों में पढ़ते हैं तो हमको लगता है कि स्वामी जी को यह क्या हो गया है स्वामी जी वैसे इतने रेशनल है इतने लॉजिक है इतनी साइंस की बातें करते हैं और यहां पर ऐसे सब स्पेक्युलेटिव फिक्शन है यह आजकल जैसे यह हैरी पॉटर है हैरी पॉटर के पास में एक जादुई छड़ी है अभी वह जादुई छड़ी घुमाएगा तो उसको जो चाहिए वो मिल जाएगा जो चाहे वोह ऐसा जादू कर पाएगा वो एक मूवी आया था बहुत पहले मैंने बहुत पहले देखा था उसको उसका नाम था स्टार वर्स तो स्टार वर्स में क्या था ये लोग जो है अपने ब्रेन से अपने माइंड से चीजों को ये कंट्रोल कर सकते थे तो ऐसा करेगा किसी चीज के सामने तो वो चीज पूरी अपनी जगह से हिल जाएगी तो उसको ये लोग कहते थे फोर्स माइंड फोर्स तो यह फोर्स अपने माइंड से ये फोर्स कंट्रोल कर सकते हैं तो स्वामी जी क्या हमको यह सब जादुई कहानियां सुनाने को बैठे हैं यहां पे एक्चुअली नहीं इसके पीछे एक साइंस है और जैसे आर्थर सी क्लार्क ने कहा कि एडवांस साइंस हमको जादू जैसा ही दिखता है जब हम साइंस को समझ लेंगे तब हमको लगेगा अरे यह जादू वादू कुछ नहीं है यह साइंस ही है माने जिस तरह से यह हमारा कंप्यूटर चलता है जिस तरह से यह लाइट चलती है यह जिस तरह से हमारी गाड़ी चलती है यह जिस तरह से यह ट्रेन चलती है जिस तरह से एरोप्लेन चलते हैं इसके पीछे एक पक्का सायंस से आजकल एरोप्लेन को हवा में उड़ते देख कर के ऐसा कोई नहीं कहेगा कि यह जादू हो रहा है कोई ऐसा नहीं कहेगा कि किसी देवता ने चमत्कार कर दिया है बोलकर के प्लेन हवा में उड़ रहा है हमको पता है कि एरो डायनेमिक्स क्या है एरोप्लेन का इंजन किस तरह से काम करता है भले ही चाहे मैं एरोड नेमिस इंजीनियर ना हूं किंतु मुझे यह पक्का पता है कि इसके पीछे में एक पक्का एक विज्ञान है जो कि प्लेन को उड़ाता है तो सिमिलरली यह प्राणायाम और यह प्राण का विज्ञान यह भी एक पक्का साइंस है और इसको समझ लेने से आपको यह ऐसा कभी नहीं लगेगा कि स्वामी जी यह जो बातें कर रहे हैं यह सब आइर साइंस फिक्शन है या तो फिर यह मैजिकल फिक्शन है ऐसा पक्का लगेगा कि नहीं यह प्रॉपर साइंस ही है अच्छा यदि यहां तक हम पहुंच गए तो दूसरा एक प्रश्न होता है कि अच्छा मेरे जीवन में तो यह सब मेरे से होने वाला नहीं है कि मैं प्राणायाम की प्रैक्टिस करूं और प्राणायाम की प्रैक्टिस करके मैं यह सब सिद्धि हासिल करूं क्योंकि आजकल तो हमको पता है कि ठाकुर का बड़ा क्लियर कहना है कि जैसे जैसे हम यह एक्स्ट्रा सेंसरी पावर्स के पीछे में दौड़ेंगे जब जब भी हम यह सुपर नेचुरल पावर्स के पीछे में दौड़ेंगे हम लोग अपनी आध्यात्मिकता से अपना पथ अपना रास्ता खो बैठेंगे और उसी के मोह में पड़कर के इस संसार में ज्यादा से ज्यादा जड़ित हो जाएंगे तो वो तो एक बात है किंतु देखिए जिस तरह से हमने साइंस और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके इस जगत में इतनी अच्छी-अच्छी चीजें की है आजकल देखिए कि इतने सारे लोगों को हम भारत की पॉपुलेशन है 150 करोड़ तो 150 करोड़ लोगों को अन्न हम खिला रहे हैं इसीलिए क्योंकि यह हायर क्वालिटी हाइब्रिड अन्न हमने बनाया डेवलप किया और उसको बोया जिसको कि भारत में ग्रीन रेवोल्यूशन कहते हैं ग्रीन रेवोल्यूशन अर्थात की अच्छी किस्म का धान बनाया धान बोया जो कि बहुत बड़ी मात्रा में वह प्रकट होता है बहुत बड़ी मात्रा में वह बनता है और बहुत सारे लोगों को वह खाना खिला सकता है तो जैसे कि यह वाइट रेवल है अर्थात की दूध यह जो दूध का उत्पादन जिस तरह से हमने बढ़ाया खास करके यह गुजरात में आणंद बोलकर के एक सिटी है वहां पर डॉक्टर कुरियन बोलकर के उन्होंने यह अमूल कंपनी की स्थापना की तो उसमें यह जो वाइट रेवोल्यूशन अर्थात की यह सहकारी मंडलिया बना कर के दूध का उत्पादन बढ़ाने की यह जो पूरी प्रोसेस वो उन्होंने डेवलप की तो यह जो वेजीटेरियन लोग होते हैं गुजरात में खास करके लोग वेजिटेरियन है तो उनको प्रोटीन मिलने का सबसे बड़ा माध्यम है यह दूध और दूध की प्रोडक्ट तो यह दूध सहज रूप से इस लोगों को अवेलेबल हो लोगों को सहज रूप से प्रोटीन मिले इसके पीछे में यह वाइट रेवोल्यूशन का बहुत बड़ा अवदान है तो हम लोग कह सकते हैं कि यह जो सब नई-नई विद्या हैं इसको जगत के कल्याण के लिए तो हम यूज कर सकते हैं नहीं कर सकते क्या तो क्या हमको यह सब विद्या नहीं सीखनी चाहिए जो कि स्वामी जी हमको कहते हैं कि ऐसी विद्या है भले चाहे स्वामी जी इसके बारे में बहुत ज्यादा डिटेल में वर्णन यहां पर इस राजयोग में ना करें किंतु योगशास्त्र की बहुत सारी किताबें है जिसमें इसका विषद वर्णन है तो मान लीजिए कि हम क्या एक अनुमान कर सकते हैं एक एक एक इस तरह से एक कल्पना कर सकते हैं कि हमारी स्कूलों में यह जो आजकल विदेशी पद्धति से जो सब सिखाया जाता है विदेशी पद्धति से हम लोगों को यह जो सब पढ़ाया जाता है उसकी वजह यदि हमारी भारतीय परंपरा से स्कूले चलाई जाती तो पहले से ही बचपन से ही फर्स्ट स्टैंडर्ड से ही हम उनको ये योग और प्राणायाम सिखाते और यह योग और प्राणायाम सीख कर के धीरे-धीरे करके यह बच्चे जब तक 12वीं कक्षा में आते जब तक कॉलेज में जाते तब तक यह लोग भी प्राणायाम करके अपने प्राणायाम सीख करके प्राणायाम में मास्टरी पा करके अपने प्राण पर इतना कंट्रोल कर पाते कि वे लोग भी यह जिस तरह से य मैकेनिकल इंजीनियरिंग है जिस तरह से यह सिविल इंजीनियरिंग है जिस तरह से कंप्यूटर इंजीनियरिंग है वैसे ही यह प्राणिक इंजीनियरिंग ब्रांच हम लोग हो सकता है कि डेवलप कर सकते और इस नई इंजीनियरिंग पद्धति से हम लोग जगत कल्याण के कितने कार्य कर पाएंगे व तो हम इमेजिन ही कर सकते हैं आप यह है कि जितनी भी इंजीनियरिंग विद्या आज तक खोजी गई है उन सबका युद्ध में भी उसका दुरुपयोग हुआ है उसका मिसयूज हुआ है किंतु इसका अर्थ यह नहीं कि यदि कोई विद्या का मनुष्य की हत्या करने के लिए या मनुष्य को हानि पहुंचाने के लिए उसका इस्तेमाल होता है तो उस विद्या को ही हम तज दे विद्या को ही हम छोड़ दे ऐसा तो नहीं होना चाहिए ऐसा हम नहीं करते हम लोग भले ही चाहे यह एरोड नेमिस उसका इस्तेमाल करके फाइटर बमर बनाते हैं फाइटर जेट बनाते हैं किंतु इसका अर्थ यह तो नहीं कि हम लोग ने एरोड नामिक साइंस उसको छोड़ दिया है उसको सीख करके यह पैसेंजर जेटलाइनर भी हम बनाते हैं जिससे कि आज पूरे विश्व में लोग बड़ा आसानी से भ्रमण कर पाए े और अपने माइंड की होराइजन को एक्सपें कर पाएंगे सोचिए स्वामी जी जहाज में बैठकर के कितने शायद 27 दिन ना कि 30 दिन इतना कुछ उस समय लगता था ब्रिटेन और अमेरिका जाने के लिए उसकी बजाय 27 30 घंटों में ही यहां से वहां चले जाते तो स्वामी जी ने विश्व का कितना भ्रमण कर दिया होता तो यह जो भ्रमण करने से मन की होराइजन स्वामी जी ने योकोहामा से जो लेटर लिखा किय सब मद्रासी डिसाइल्स को कि देखो हाउ द नेशंस आर ऑन मार्च यह भारत के युवा लोग सब जापान आओ देखो कि किस तरह से यह लोग प्रगति कर रहे हैं यूरोप जाओ अमेरिका जाओ स्वामी जी का छोटा भाई व वहां पर लंदन में वकालत सीखने के लिए गया था उस समय स्वामी जी वहीं पर थे महेंद्रनाथ दत्त उसका नाम तो स्वामी जी बार-बार उसको कहते थे अरे यह वकालत वगैरह छोड़ो हमारा खुद का फैमिली स्वामी जी के पिताजी तो व वकील ही थे ना वो लॉयर ही थे स्वामी जी ने कहा यह वकालत करते-करते ही भारत का सत्यानाश हो गया है और अपने फैमिली की भी अव दशा इसीलिए हुई है जाओ अमेरिका जाओ और इंजीनियरिंग सीखो और बार-बार स्वामी जी कहते थे अमेरिका इज फुल ऑफ इलेक्ट्रिसिटी अमेरिका इज फुल ऑफ इलेक्ट्रिसिटी अपने छोटे भाई को कहते थे अमेरिका जाओ इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग सीखो और भारत में इलेक्ट्रिसिटी लगाओ तभी तो भारत का कुछ कल्याण होगा ये बात स्वामी जी अपने छोटे भाई को कहते थे और उसका छोटा भाई भी ऐसा है कि पता नहीं यह वकालत का भूत अपने इंडियन ऐसा है ना कि मैंने क्या है कि यह इंजीनियरिंग यह सब ऐसी विद्या है ना हमको यह प्रैक्टिकल विद्या अच्छी नहीं लगती हमको यह सब थियोरेटिकल विद्या सब अच्छी लगती है तो उसका भी स्वामी जी जितना ही कहे तुम जाओ वहां पर इंजीनियरिंग सीखो उसकी बजाय वह लंडन में ही बैठ कर के वकालत ही करता खैर आखिर में तो उसने बहुत अच्छी-अच्छी उन्होंने बड़ी अच्छी-अच्छी किताबें भी लिखी है स्वामी विवेक आनंद की जिबोनेरो घोटना वली और बंगाली में जो किताब है तीन वॉल्यूम में है और लंडन है स्वामी विवेकानंद अर्थात कि लंडन में स्वामी विवेकानंद दो वॉल्यूम में है इन दोनों किताबों में बहुत सारी माहिती बहुत सारी इंफॉर्मेशन ऐसी मिलती है हमको जो कि एक छोटा भाई ही अपने बड़े भाई के बारे में बता सकता है और कहीं पे इस तरह की इंफॉर्मेशन नहीं मिलेगी जैसे कि एक छोटा सा है कि स्वामी जी को यह पान वगैरह खाने की बड़ी हैबिट थी और जहां कहीं भी वो थूका करते थे तो स्वामी जी के घर की वो जो रूम थी जो दीवाले थी वो थूक थूक करके पूरी लाल हो गई थी आज यह सब हम सुनेंगे तो हमको लगेगा कि अरे कितना असभ्य है किंतु उस समय का यह बात ही अलग था उस समय की ये जो सब हैबिट्स वगैरह थी एकने एक बड़ा ही सुंदर एक इसके बारे में घटना है कि यह जो स्वामी जी की हैबिट थी जहां तहां थूकने की पान खा कर के तो यह बलराम भवन में जब भी जाते थे तो बलराम बाबू उस समय तो थे तो बलराम बाबू क्या करते थे पता है जिसको थूक दनी होती है ना जिसमें कि पान खाने के बाद में आप गद्दी प बढ़िया मजे से बैठे हैं और खड़े होकर के कहां बाहर जाकर थूक तो वो थूक दनी वे लोग रखते थे या तो पान दनी ऐसा कुछ कहते थे तो वो बढ़िया सा एक कप जैसा रहता था तो कब पास में रहेगा जिसमें कि आप थू किए पान खाके तो बलराम बाबू खुद ये थूक दनी हाथ में लेकर के स्वामी जी के सामने खड़े रहते थे और ये ठाकुर के महासमाधि की बाद की बात है जबकि स्वामी जी के पास में कुछ नहीं था वह फकीर थे दर दर घूमते रहते थे वरा नगर मठ तो भूत का घर था वो खंडहर जैसा वहां पर आज सुबह को खाना मिला तो शाम को नहीं मिलेगा शाम का मिला तो दूसरे दिन सुबह का कुछ ठीक नहीं है वैसे स्वामी जी जब भी बलराम भवन में आते थे और वह सब 10 लोग इकट्ठा होकर के वो जो सब एक बार वो जो गप लगाने की परंपरा जो स्टार्ट हो जाती थी और स्वामी जी बोलते रहते थे बोलते रहते थे सब लोग सुनते थे उस समय बलराम बाबू अपने हाथ में वोह थूक दनी लेकर के खड़े रहते थे और जब भी नरेंद्र को थूकना होता था और वोह कहीं पर भी थूकेगा दीवाल पर थूकेगा इधर थूकेगा उधर तो बलराम बाबू वो थूक दनी लेकर खड़े रहेंगे और कुछ बोलेंगे अरे नरेंद्र बाबू नरेद्र बाबू इसके भीतर में थोको इसके भीतर में थोको और वो थूक दनी उनके मुंह सामने रखेंगे और नर उसम थूकेगा सोचिए है कि बलराम बाबू की ये जो दीनता है बलराम बाबू कीय शरणागति है कितनी जबरदस्ती इसी का एक दूसरा उदाहरण है महेंद्रनाथ गुप्त अपने मास्टर महाशय मास्टर महाशय को ठाकुर ने कहा पहली बार जब वह गए थे वहां पर दक्षिणेश्वर में तो ठाकुर ने कहा था कि तुम एक काम करना मैं मैं वहां पे बलराम बाबू बलराम बोस करके एक है उसके घर में जा रहा हूं तुम भी वहां पर आना मुझे मिलना वहां पर कीर्तन होगा बातें होगी बहुत कुछ होगा तो मास्टर महाशय कहते हैं कि अरे व तो कोई बड़ा आदमी होगा धनी व्यक्ति होगा वो धनी व्यक्ति लोग मैं तो सामान्य एक टीचर हूं तो धनी व्यक्ति मुझे अपने घर में प्रवेश कैसे देंगे आप तो उनके गुरु है तो आपको तो वह बड़ा ही प्रेम पूर्वक आवकारो ही प्रेम पूर्वक आपका स्वागत करेंगे किंतु मैं तो एक सामान्य आदमी हूं मुझे कैसे वोह बुलाएंगे वगैरह वगैरह तो मास्टर ठाकुर कहते हैं ना ना ना तुम आना और कहना कि उन्होंने बुलाया है उन्होंने अर्थात ठाकुर ने स्वयं तो अच्छा ठीक है मास्टर महाशय गए और गए और देखा कि बलराम बाबू वहां पर इस तरह से बिहेव कर रहे हैं ठाकुर के सामने जैसे कि उस घर के एक नौकर हो नहीं कि उस घर के मालिक हो तो बलराम बाबू की जो दीनता है बलराम बाबू की यह जो मने विनम्रता उसका कितने सुंदर-सुंदर उदाहरण मिलते हैं तो खर जो भी है हम लोग जो बात कर रहे थे कि ये इंजीनियरिंग और यह साइंस इसका हमारे आधुनिक जीवन में कितना बड़ा अवदान है और यदि यह प्राणिक इंजीनियरिंग को इतना ही सुंदर रूप से डेवलप किया जाए जिस तरह से यह मटेरियल इंजीनियरिंग हुआ है जिस तरह से ये इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग जिस तरह से ये मैकेनिकल इंजीनियरिंग जिस तरह से सिविल इंजीनियरिंग उसी की तरह यह प्राणिक इंजीनियरिंग डेवलप हो और बच्चों को इसको प्रॉपर्ली सिखाया जाए तो इससे जगत का कितना कल्याण हो सकता है यह स्वामी जी का एक माने देखिए हम जब यह सब चीजों को शास्त्र में पढ़ते हैं तो बहुत बार हमको संदेह होता है अच्छा चलो उस समय स्वामी जी भगवान राम के पास में पुष्पक विमान था बहुत सारे लोग बोलते हैं कि वह जो राम भगवान राम का जो बाण था ब्रह्मास्त्र जो थे वो ब्रह्मास्त्र सब एटम बम थे तो यह सब पढ़ कर के सुन कर के हमको को बड़ा अच्छा तो लगता है कि अच्छा हमने उसी समय क्या कहेंगे कि एरोड इनेम एविएशन एविनिक्स यह सब डेवलप कर दिया था अभी कोई कोई तो कहता है कि उसी समय में हम प्लास्टिक सर्जरी भी करते थे प्लास्टिक सर्जरी करके मनुष्य के जगह पर हाथी का सर रख दिया था वगैरह वगैरह बातें तो बहुत करते हैं व डिटेल कहां पे है उस डिटेल का इस्तेमाल करके आज के युग में क्या आप वही चीज को रीक्रिएट कर पाएंगे क्या जिस तरह से पुष्पक विमान बना उसकी जो फार्मूला है उसी फार्मूला का इस्तेमाल करके आप आज के युग में पुष्पक विमान बना पाएंगे नहीं बना पाएंगे या तो फिर मैंने तो अभी तक किसी को बनाते हुए देखा नहीं है आज भारत में जो कुछ भी है साइंस और टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग के नाम पे सब कुछ विदेश से हमने यह रेनेसा और रिफॉर्मेशन और ये इंडस्ट्रियल इजेशन के बाद में यूरोप में जो डेवलप हुआ उसको डि ो टू डिटो कॉपी टू कॉपी वर्ड बाय वर्ड उठा लिया है बिना किसी अपना कोई मेजर कंट्रीब्यूशन किए बिना भारत के कुछ-कुछ साइंटिस्ट है किंतु उन्होंने जो कंट्रीब्यूशन किया वोह विदेशी फ्रेमवर्क के भीतर में ही किया है अपनी इंडियन फ्रेमवर्क तो कोई डेवलप नहीं की आज का जो साइंस है वह यूरोपियन साइंस ही तो है यूरोपियन लोग ही तो उसमें सबसे ज्यादा कंट्रीब्यूशन करते हैं हम लोग तो उसको कॉपी ही करते हैं हम लोग तो यह आईआईटी के इंजीनियर बना कर के उनके वहां पर काम कर करने के लिए क्लार्क की तरह भेज देते हैं यह सुंदर पिचाई या तो सत्य नडेला क्या है वे लोग तो ग्लोरिफाइड क्लार्क ही है यदि सही में कहा जाए तो साइंस तो उन्होंने डेवलप किया है हम तो सब उसको प्रॉपर्ली अप्लाई ही कर रहे हैं तो भारत में भी जिस तरह से उन्होंने नेचरल साइंस डेवलप किया है यह यूरोपियन सभ्यता ने हमारे पास में भी एक स्पेशल साइंस है यह प्राण का साइंस प्राण का विज्ञान या तो फिर ये प्राणा और जिस तरह से यूरोपियन साइंस डेवलप होकर के जगत में इतना सब कुछ किया है उसने इतना कंट्रीब्यूशन किया है हम लोग भी प्राण का विज्ञान को प्रॉपर्ली डेवलप करें यदि इसके ऊपर में हम एनर्जी और समय दे तो मुझे लगता है कि जितना कंट्रीब्यूशन यह नेचुरल साइंस ने किया है उससे कहीं ज्यादा कंट्रीब्यूशन यह प्राणिक विज्ञान कर पाएगा अच्छा अभी थोड़ा सा आगे पढ़ते हैं कि स्वामी जी क्या कहते हैं इफ अ मैन वांट्स टूू नो दिस यूनिवर्स बीट बाय बीट ही मस्ट नो एवरी इंडिविजुअल ग्रेन ऑफ सैंड व्हिच मींस इन फाइना इट टाइम यदि मनुष्य को पूरे विश्व ब्रह्मांड के बारे में जानना तो विश्व ब्रह्मांड के जितने भी अणु परमाणु है उस सभी को एक के बाद एक जानना पड़ेगा यदि पूरे विश्व ब्रह्मांड को जानना है और इसके लिए आपको अनंत काल समय चाहिए ही कैन नॉट नो ऑल ऑफ देम और अनंत काल समय मिलने से भी ऐसा कोई गारंटी नहीं है कि मनुष्य पूरे विश्व ब्रह्मांड को जान ले देन हाउ कैन नॉलेज बी तब ब्रह्मांड को कैसे जानेंगे हाउ इज इट पॉसिबल फॉर ए मैन टू बी ऑल नोइंग थ्रू पार्टिकुलर्स ऐसा कैसे संभव है किसी मनुष्य के लिए जो कि सभी चीजों के बारे में सब कुछ जान ले द योगी से दैट बिहाइंड दिस पार्टिकुलर मेनिफेस्टेशन देयर इज अ जनरलाइजेशन योगी कहते हैं कि यह पार्टिकुलर मेनिफेस्टेशन या तो फिर कहो कि सिंपल लैंग्वेज में यह ब्रह्मांड है जितने भी चीजें हैं उन सबके पीछे में एक जनरलाइजेशन है जैसे कि मेरे हाथ में यह किताब भी है और यह मेरे हाथ में यह बुकमार्क भी है अभी आप पूछेंगे कि किताब और बुकमार्क में कॉमन क्या है तो कॉमन यह है कि दोनों पेपर के बने हुए हैं अच्छा अभी मान लीजिए कि यह किताब है और कहेंगे कि मेरे हाथ में यह पेन है तो इन दोनों में कॉमन क्या है तो ये दोनों पदार्थ के बने हुए हैं अणु और परमाणु के बने हुए हैं अभी हमको पता है कि जितने अणु और परमाणु या अणु जितने भी एटम है वो बेसिकली तीन परमाणु से बने हैं एक है न्यूट्रॉन प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन तीन से और फिर माने ये जनरलाइजेशन होता गया तो जो कुछ भी आपको विश्व ब्रह्मांड में दिख रहा है उसका जनरलाइजेशन पॉसिबल है ये अणु उसको जान कर के आपने सब कुछ जान लिया और यह जैसे कि पीरियोडिक टेबल जैसे देखिए 19th सेंचुरी फिजिक्स का एक बहुत बड़ा एक क्या कहेंगे डेवलपमेंट था ना वह एक पीरियोडिक टेबल पीरियोडिक टेबल अर्थात की ब्रह्मांड के जितने भी तत्व है ऑक्सीजन हो ना कि हाइड्रोजन हो ना कि लिथियम हो ना कि गोल्ड हो ना कि निकल हो आयरन हो डायमंड हो यूरेनियम हो पोटेशियम हो नकी जो कुछ भी आप कहो सब कुछ आप पीरियोडिक टेबल प दर्शा सकते हैं और कह सकते हैं कि इसके अणु के भीतर में इतने प्रोटॉन है इतने न्यूट्रॉन है इतने इलेक्ट्रॉन है बस इसी से आप इस चीज को समझ सकते हैं और फिर इससे भी ज्यादा जनरलाइजेशन करो प्रोटॉन न्यूट्रॉन इलेक्ट्रॉन किस चीज के बने हैं तो क्लार्क क्वार्क कहो ना कि स्ट्रिंग कहो उसके बने हैं यानी कि देखिए कि मटेरियल यूनिवर्स में में जिस तरह से जनरलाइजेशन पॉसिबल है वैसे ही प्राणिक विश्व में यह हो गया मटेरियल वर्ल्ड वो हो गया अपना प्राणिक वर्ल्ड तो प्राण प्राण का बना हुआ जो विश्व है उसमें भी जनरलाइजेशन पॉसिबल है और इसी जनरलाइजेशन का स्वामीजी एक दूसरा भी उदाहरण देते हैं क्या कहते हैं बाद में बिहाइंड ऑल पार्टिकुलर आइडियाज टेंड अ जनरलाइज्ड एंड एब्स्ट्रेक्ट प्रिंसिपल जितने भी विभिन्नता भिन्न विचार है सबके पीछे में एक जनरल प्रिंसिपल खड़ा है ग्रस्प इट एंड यू हैव ग्रस्प एवरीथिंग यह जनरल प्रिंसिपल को समझ ले तो जितने भी बाकी सब चीजें हैं उसको आप समझ लेंगे जस्ट एस दिस होल यूनिवर्स हैज बीन जनरलाइज्ड इन द वेदास इनटू दैट वन एब्सलूट एसिस्टेंसिया गया है वन एबसल मने सत चत आनंद या तो फिर कहेंगे ब्रह्मण या तो फिर आत्मन यह ब्रह्मनम ही है और कुछ नहीं है इस जगत में जगत में आप मनुष्य को देखते हैं पशु को देखते हैं पंखी को देखते हैं पेड़ पौधे को देखते हैं फूल को देखते हैं विमान देखते हैं किताब देखते हैं जो कुछ भी देखते हैं सूरज चंद्र ग्रह सितारे कोमेट मेटराइड जो कुछ भी देखते हैं सब कुछ ब्रह्मण ही है ब्रह्मण के ऊपर में ही माया का आवरण होकर के यह वैविध्य हमको आभास हो रहा है दिखाई दे रहा है तो वेद में जिस तरह से पूरे विश्व ब्रह्मांड की सभी चीजों को जिस तरह से ब्रह्मण के रूप में जनरलाइज किया गया है ब्रह्मण के रूप में इसको फाइनलाइज किया गया है एंड ही हु हैज ग्रेस ट एक्जिस्टेंस है ग्रेस द होल यूनिवर्स जिसने उस ब्रह्मण को जान लिया उसने पूरे विश्व ब्रह्मांड को जान लिया सो ऑल फोर्सेस हैव बीन जनरलाइज्ड इनटू दिस प्राण जितनी भी फोर्सेस है ग्रेविटी इलेक्ट्रो मैग्नेटिज्म स्ट्रांग वीक न्यूक्लियर फोर्स सब फोर्सेस को प्राण के रूप में जनरलाइज किया गया है सुपर फोर्स के रूप में एंड हु हैज ग्रेस दैट प्राण हैज ग्रेस ऑल द फोर्सेस ऑफ द यूनिवर्स मेंटल और फिजिकल जिसने प्राण को समझ लिया प्राण के ऊपर में कंट्रोल पा लिया प्राण के ऊपर में नियमन पा लिया नियंत्रण पा लिया उसने विश्व ब्रह्मांड की सभी फोर्सेस के ऊपर में कंट्रोल पा लिया है ही हु हैज कंट्रोल द प्राण हैज कंट्रोल हिज ओन माइंड एंड ऑल द माइंड्स दैट एसिस्ट जिसने प्राण के ऊपर में कंट्रोल पाया है उसने अपने मन के ऊपर में तो सही ही किंतु साथ में जितने भी मनों का अस्तित्व है जितने ब्रेन है जितने माइंड है जितने मनुष्य है उन सबके ऊपर में भी कंट्रोल पा लिया है ही हु हैज कंट्रोल द प्राण हैज कंट्रोल्ड हिज बॉडी एंड ऑल द बॉडीज ट एसिस्ट जिसने प्राण के ऊपर में कंट्रोल पाया है उसने अपने शरीर के ऊपर में तो कंट्रोल पा ही लिया है किंतु साथ-साथ में जितने भी शरीर अस्तित्व में है विश्व की 700 करोड़ की पॉपुलेशन सभी शरीर को कंट्रोल कर सकता है बिकॉज द प्राण इज द जनरलाइज्ड मेनिफेस्टेशन ऑफ फोर्स जिस तरह से विश्व ब्रह्मांड को जनरलाइज करके आप ब्रह्मण में ले जाएंगे जिस तरह से जितने पदार्थ है उसको आप इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन न्यूट्रॉन में जनरलाइज करेंगे वैसे ही सभी फोर्स का जनरलाइजेशन है प्राण या तो फिर इसको कहेंगे सुपर फोर्स जो कि बाकी सब फोर्स को कंट्रोल करती है प्राण को कंट्रोल करके हम अपने मन को तो कंट्रोल कर ही सकते हैं विश्व ब्रह्मांड में जितने मनुष्य या तो फिर जद हम साइंस फिक्शन बहुत ज्यादा पढ़ते हैं मैं जब छोटा था बहुत साइंस फिक्शन पढ़ा करता था तो दूसरे ग्रह पर यदि जीवन है तो उसको भी हम कंट्रोल कर पाएंगे यदि मनुष्य का शरीर एक मेरे खुद के शरीर को कंट्रोल कर सकता हूं तो जितने भी शरीर है सबको कंट्रोल कर पाऊंगा अच्छा इसको सुन कर के अवश्य मन में यह भय होता है कि जिसके पास में इस तरह की शक्ति है अभी मान लीजिए कि जिसके पास में बंदूक है उसी से हम लोग इतना डरते हैं कि पता नहीं 1015 लोगों को वह बंदूक मार देगा तो क्या होगा अमेरिका में जाइए आए दिन वह शूटिंग होता रहता है आए दिन फायरिंग होता रहता है तो जिस आदमी के पास में बंदूक है उसी का हमको जद इतना डर लगता है तो जिस आदमी के पास में लोगों के मन को कंट्रोल करने की लोगों के शरीर को कंट्रोल करने की शक्ति आ जाएगी तो वह आदमी उस शक्ति का क्या दुरुपयोग नहीं कर पाएगा यह कितनी भयानक शक्ति है जैसे कि यह गन है या तो गन के पीछे का जो विज्ञान है उसको हमको कितना संभाल करके हमको यह कितने कानून कायदा बनाना पड़ता है इंडियन पेनल कोड जो है यह क्रिमिनल कोड अपना भारत का कि आपको यह करेंगे तो आपको सज होगी यदि किसी को गोली मारेंगे तो सजा होगी किसी के घर में आग लगा देंगे तो सजा होगी तो यह आग लगाने का गोली मारने का शक्ति जोक बड़ी सामान्य शक्ति है उसको कंट्रोल करने के लिए पूरा अपना इंडियन पैनल कोड जो बनाना पड़ा है इतने सारे ये जो अपने पुलिस वाले दिन रात पेट्रोलिंग करते रहते हैं एक फोन करेंगे तो 10 लोग दौड़े आएंगे पुलीस वाले कि क्या हुआ कहां पर फायरिंग हुआ किस क्रिमिनल ने क्या किया है इतना बड़ा हमको सिस्टम बना ना पड़ा है ये अदालतें बनानी पड़ी है कोर्ट बनाने पड़े हैं जो कोर्ट पुलिस इंडियन पिनल कोड यह फिर ये जनरल सोशल एक कन्वेंशन है भाई कि तुम किसी को हानि मत पहुंचाओ घर में ही आपकी मां ही बोलेगी कि इस तरह के विचार मत करो कि दूसरों को जाकर के तुम बंदूक मार दोगे तो ये पूरी सोसाइटी है कि इसको अलर्ट रहना पड़ता है कि इस छोटे छोटे पावर का मिसयूज ना हो तो यदि ऐसे पावर का मिसयूज होने की जद संभावना है तो मान लीजिए कि ऐसी शक्तियां मनुष्य ने डेवलप कर दी कि जो मन से दूसरों के मन को कंट्रोल कर पाए दूसरों के शरीर को कंट्रोल कर पाए तो ऐसी शक्तियों को नियमन करने के लिए समाज में इससे हानि ना पहुंचे उसको करने के लिए किस तरह के कायदे कानून बनाने पड़ेंगे किस तरह की पुलिस फोर्स को हमको ट्रेन करना पड़ेगा किस तरह की अदालत इसके लिए तैयार होगी किस तरह की सोशल कन्वेंशंस बने इसके बारे में अभी तो हम सोच ही नहीं सकते तो ये मैंने दिस इज अ ग्रेट पावर एंड यह ग्रेट पावर के साथ में ग्रेट रिस्पांसिबिलिटी भी आती है तो स्वामी जी यह जो सब हमको बताते हैं वैलिडेट करके गए हैं कि यह सब संभव है किंतु इसको जब हम डेवलप करें भविष्य में कभी भी तो यह सभी चीजों को हमको साथ में ध्यान रखना होगा कि यह विद्या का सदुपयोग सबसे ज्यादा हो दुरुपयोग मिनिमम तो आज यही तक कल फिर से मिलते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तसत श्री राम कृष्णा पर मस्तु ये जो पहला प्र जो है ना पहली मुलाकात उसमें जो आखिर में ठाकुर ने कहा है ना अबरा बांगला में कहा है कि फिर से आना तो ये फिर से आना को लेकर के भी बहुत सारा मने आर्टिकल्स वगैरह महाराज हमारे जो सीनियर है वह कहते हैं कि देखो कि ठाकुर ने बुलाया है मने एक बार ठाकुर के पास गए फिर फिर से नहीं जाने का कोई अपने पास में उपाय ही नहीं यह फिर से आना बोल दिया तो आपको आना ही पड़ेगा अबरा गुड स्पेकल अभी जैसे नाम नहीं देकर के जनरली कहे कि कुछ कुछ लोग ऐसे कुछ कुछ गुरु को देखा है कि उनको लगता नहीं है कि देख कर के कि उनके जो बातों में कोई इतना कोई दम है किंतु फिर भी उनकी इतनी बड़ी फॉलोअर्स की संख्या होती है तो नेचुरली इसके पीछे कुछ तो है उनको कुछ तो दिखता होगा कि भाई अपने गुरु में ऐसा तो कुछ है इस व्यक्ति में ऐसा कुछ है मोहिनी शक्ति है है ना अभी और सिर्फ ये धर्म के जगत को छोड़कर के अभी जैसे ये एक्टर्स होते हैं बड़े-बड़े उन लोगों को देखने के के लिए लोग बार-बार क्यों जाते हैं अभी यह पिक्चर इतना ही बेकार क्यों ना हो बोलते हैं चलो अमिताभ बच्चन एक्टिंग कर रहा है तो उसको देखने के लिए चले जाते हैं तो भैया सब बच्चन में ऐसा क्या है जो कि 150 करोड़ लोगों में नहीं है है ना ने ऐसे बड़े-बड़े एक्टर सिर्फ अपनी एक्टिंग के प्रभाव से ही आधी फिल्म को चला लेते हैं फिल्म जितनी बेकार क्यों ना हो पॉलिटिशियन ये राजनेता मने क्यों लोग हजारों लाखों लोग इनको फॉलो करते हैं अब सभी लोग क्यों नेता नहीं हो पाते क्यों लोग सभी लोग अभी मैं बोलने को जाऊंगा मुझे वोट दो तो 10 15 वोट भी जद मिले तो बहुत है व ये लोग लाखों लाखों वोट लेकर आते हैं तो नेचरली उनके पास में किसी तरह की तो शक्ति है व ऐसा तो नहीं है कि मेरे से ज्यादा बुद्धिशाली है ऐसा तो नहीं है कि मेरे से ज्यादा उन लोगों में टैलेंट है मुझे तो लगता है कि आधे नेता से ज्यादा टैलेंट तो मेरे में है किंतु वे लोग जिस तरह से जीतते हैं अभी अपने आईआईटी ग्रेजुएट वगैरह को देखिए कितनी टैलेंट है किंतु सभी लोग तो कोई इलेक्शन जीत नहीं पाते माने गीता में भगवान ने कहा है ना यद यद विभूति मत सर्वम श्रीमत उर्जित मेववाला कि जहां जहां पर भी विभूति का प्रकाश देखो वहां वहां पर समझो कि मेरा वहां पर उपस्थिति है या तो फिर मेरी एक शक्ति वहां पर उपस्थित है तो किसी भी तरह की विभूति हो लोगों को सम्मोहन करने की ये बड़े-बड़े नेता हो बड़े एक्टर हो जो भी हो मार्केटिंग जो लोग करते हैं ये अभी ये कोल्ड ड्रिंक होते हैं कोल्ड ड्रिंक आप अपने घर में भी बना सकते हैं किंतु कोई कोई ब्रांड ऐसी मने ग्लोबली फेमस हो गई है कि जहां पर भी आप जाएंगे ना आप कहेंगे मुझे वही ब्रांड का कोल्ड ड्रिंक पीना है मुझे और कुछ नहीं पीना माने ऐसा नहीं है कि उसका टेस्ट कोई बहुत ज्यादा अच्छा है कंपेयर टू अदर ब्रांड्स किंतु वो एक ऐसी एक मोहिनी शक्ति खड़ी कर देते हैं मार्केटिंग मार्केटिंग करके तो ये मार्केटिंग भी तो सॉर्ट ऑफ लोगों को भ्रमित करना ही हुआ यह तो एक है ही दूसरा एक जैसे कि ठाकुर म स्वामी जी के बारे में कि उन्होंने शक्तियों का प्रयोग नहीं किया तो हम ऐसा क्या कोई गारंटी दे कर के कह सकते हैं कि नहीं किया जैसे कि स्वामी जी ने कहा कि ठाकुर ने आकर के ब्रह्म कुंडलिनी को जागृत कर दिया है यह जो काल की काल का चक्र चल रहा था कलयुग का तो कलयुग के चक्र को उसकी गति को तोड़ कर के उसको सतयुग की ओर ले जाना सतयुग का प्रारंभ करवाना यह भी तो एक कॉस्मिक लेवल की शक्ति है ना कॉस्मिक लेवल पर ठाकुर क्या-क्या नहीं करके गए वो हमको क्या पता यानी ये कलयुग में से सतयुग में तो लेके आ गए और अपने हाथों से भले ही चाहे उन्होंने स्कूल हॉस्पिटल ना बनाए हो किंतु आखिरी 100 साल में भारत का डेवलपमेंट देखिए कहां वो अकाल आता था मां अपने बच्चे को काट के खा जाती थी वहां से लेकर के भारत टुडे इज नेट एक्सपोर्टर ऑफ ये धन यह जो धान जो है अ ग्रेन जिसको कहते हैं गेहूं वगैरह उसका वो नेट एक्सपोर्ट करता है और अदर वाइज भी कितना डेवलपमेंट है विश्व की जो सबसे बड़ी पांच कंपनियां है बिलियन डॉलर कंपनी मने माइक्रोसॉफ्ट ये google2 के जो आज सीईओ है वो इंडियन है सबसे बड़ी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट है आजकल 2.33 ट्रिलियन डॉलर का मार्केट कैपिटल इजेशन है तो उसका सीईओ आज इंडियन है तो हमने आखिरी 100 साल में कितना डेवलपमेंट किया है कहां वो गुलाम भारत और कहां आज बड़ी सी बड़ी कंपनियों में हम और सीईओ तो एक विजिबल रोल है उसके जो सेकंड टायर प जो इंजीनियरिंग टैलेंट होती है उसमें आईआईटी ही सबसे ज्यादा आजकल एचव बी वीजा यानी इंडियन वीजा ही है एक तरह से 50 पर एलोकेशन इंडियंस को ही होता है तो हमने डेवलपमेंट तो बहुत किया है तो ठाकुर ने शक्ति का प्रयोग किया है किंतु इस तरह से बहुत ही सूक्ष्म रूप से किया है जोक ग्रॉस लेवल पर हमको पता नहीं चलता किंतु यहां पर एक बात याद रखनी है प्राण जो है वो मटेरियल इसिक पावर है यानी राइट और आध्यात्मिक शक्ति फिर वो बात ही अलग हो गई प्राण हालांकि लगता है सूक्ष्म किंतु जैसा भी ग्रेविटी भी तो सूक्ष्म है नातु ग्रेविटी तो मटेरियल पावर तो वैसे ही प्राण भी सॉर्ट ऑफ मटेरियल पावर ही है यहां पर किंतु आध्यात्मिक शक्तियां काम करती है गुरु की आध्यात्मिक शक्ति यानी ये ओजस जिसको कहते हैं ये तो य ओजस एक अलग वस्तु हो जाती है ओजस इ स्पिरिचुअल पावर हां प्राण हो गया मटेरियल पावर और ये ओजस हो गया स्पिरिचुअल पावर कुंडलिनी शक्ति जिसको कहेंगे किंतु देखिए अभी इस सब चीजों में क्या है ना कि इतना विभिन्न इंफॉर्मेशन आपको मिलेगा अभी स्वामी जी का एक इंटरप्रिटेशन है प्राणायाम का और अभी राजयोग पढ़ेंगे तो राजयोग में कुंडलिनी शक्ति प्राणायाम सबको बहुत ही क्लोजल इंटरकनेक्टेड बताया है तो अल्टीमेटली य मटेरियल वर्ल्ड कहां स्टार्ट होता है और कहां से यह आध्यात्मिक जगत न अल्टीमेट लेवल तो सब कुछ एक ही है राइट तो ही चाहे हम बाहर से इस तरह का करें अल्टीमेटली तो सब आखिर में एक ही है किंतु यहां पर जो स्वामी जी ने इंटरप्रेट किया इस पार्टिकुलर चैप्टर में वह मटेरियल इसिक इंटरप्रिटेशन है प्राण की शक्ति एक्चुअली जो आप कहते हैं वह तो स्वामी जी ने कहा ना यह जो न्यूक्लियर फोर्स दो तरह की होती है वीक न्यूक्लियर फोर्स और यह स्ट्रांग न्यूक्लियर फोर्स यह क्या करती है एटम को बाइंडर के रखती है किंतु यह जो आप कह रहे हैं ना कि न्यूक्लियर एक्सप्लोजन में कौन सी शक्ति होती है प्रकट उसको एनर्जी बोलते हैं और ये व मेटर एनर्जी दोनों का कॉमिनेशन को स्वामी जी ने नाम दिया है आकाश तो वह आकाश वह आकाश हो गया और यह प्राण हो गया माने एटम को पकड़ के रखता है यह फोर्स जो कि प्राण है किंतु एटम के भीतर की एनर्जी है वो है आकाश एनर्जी व मास के स्वरूप में होता है मास कन्वर्ट होकर के एनर्जी में कन्वर्ट होता है मास एनर्जी में कन्वर्ट होता है दो तरह से एनर्जी होती है फिशन और फ्यूजन फिशन है कि एटम के जो बाइंडिंग एनर्जी है उसको लिबरे करते हैं और फ्यूजन जो है फ्यूजन जो है कि एक्चुअल एटम को मैटर में से एनर्जी में कन्वर्ट करता है कॉस्मिक बैकग्राउंड रेडिएशन जैसे कल मैंने उदाहरण दिया था ना कि आप एक बम है दीपावली में हम यह बम वगैरह फटा के फोड़ते हैं ना तो कैसा गर्मी प्रकट होता है तो ब्रह्मांड का प्रारंभ हुआ बिग बैंग विस्फोट में राइट तो उसमें तो भयानक गर्मी प्रकट हुई होगी भयानक यह टेंपरेचर क्रिएट हुआ होगा तो साइंटिस्ट लोगों ने अनुमान लगाया कि वह टेंपरेचर पूरा अभी तक जीरो नहीं हो गया होगा उसका कुछ टेंपरेचर अभी भी होगा तो उन्होंने कैलकुलेशन करके मैथमेटिक्स से माने देखिए कि कितना एडवांस मैथ ट है कहां वो 13 बिलियन ना कि इतने साल पहले जो बिग बैंग एक्सप्लोजन हुआ उसमें कितना टेंपरेचर होगा उसका कैलकुलेशन करके ब्रह्मांड का जो एक्सपेंशन हो रहा है तो टाइम एंड एक्सपेंशन और इनिशियल सिच कंडीशन तीनों को मिलाकर के ठीक किया कि 2.3 डिग्री इतना कुछ टेंपरेचर आज ब्रह्मांड का होगा यह पूरा मैथमेटिक्स से उन्होंने खोज निकाला फिर यह जो डिश एंटेना थे डिश एंटेना उसको पोजिशनिंग करते-करते उनको बैकग्राउंड नोइज दिख रहा था सुनाई देने में आ रहा था फिर यह दोनों को इकट्ठा किया कि यहां पे डिश एंटेना में बैकग्राउंड नोइज है और यहां पे ये लोग कह रहे हैं कि 2.33 डिग्री अबोव जीरो अबोव एब्सलूट जीरो इतना कुछ टेंपरेचर होगा तो उसी टेंपरेचर का नोइज इस डिश एंटेना में आ रहा है तो प्रूव हो गया कि सही में कॉस्मिक बैकग्राउंड रेडिएशन है जिसको कि सीबीएम कहते हैं शॉर्ट फॉर्म में और वो इतना ही है एट इतना है जितना कि साइंटिस्ट लोगों ने मैथमेटिकली प्रिडिक्ट किया था माने ये मैथमेटिक्स की कितनी बड़ी सिद्धि है मैं ये जो सब डेवलपमेंट पढ़ता हूं ना आई फील सो थ्रिल्ड मैंने हम लोगों को पढ़कर के इतना थ्रिल होता है तो जो लोगों ने डेवलप किया होगा दिन प्रतिदिन दिन रात उन्होंने बैठ कर के मैथमेटिकल कैलकुलेशन किए होंगे और खोज निकाला होगा कि इतना टेंपरेचर विश्व ब्रह्मांड का होना चाहिए और एक्जेक्टली उतना टेंपरेचर जद एक्सपेरिमेंट में मिलता है सब को फिर नोबेल प्राइज मिला समथिंग ग्रेट मनुष्य की ब्रेन जो है वह क्रिएटिविटी कितनी है अपनी