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Swami Vivekananda My Plan Of Campaign ·

मेरी क्रान्तिकारी योजना : स्वामी विवेकानन्द : भारतीय व्याख्यान || 10 Feb 2025

Invocation

ओम स्थापक यच धर्मस्य सर्व धर्म स्वरूपने अवतार वरिष्ठ राम कृष्णाय ते नमः ठाकुर एक बार गिरीश घोष के वहां पर स्टार थिएटर में नाटक देखने के लिए गए तो अभी वह नाटक में तो जैसे होता है भगवान शिव का था वो नाटक तो उसमें वह बोल रहा है कि कोई एक राक्षस का पात्र गिरीश प्ले कर रहा है और पात्र में वह बोल रहा है कि शिव का नाम में धरा से मिटा दूंगा तो अभी क्या है कि वह राक्षस लोग ऐसा बोलते हैं किंतु ठाकुर ने जैसे ही सुना तो थोड़े नाराज हो गए वह बोल रहे कि अरे यह क्या बोल रहा है यानी कि हमने देखा जैसे कि ठाकुर के जीवन में हंसी मजाक में या इवन इस तरह से पात्र का अभिनय करते करते भी मिथ्या कथा बोलना या झूठ बोलना असत्य वचन उनको पसंद नहीं था और असत्य वचन भी नहीं पसंद था और इस तरह से अपना जो होली सिंबॉलिज्म होता है भगवान शिव या उनके प्रति इस तरह की बातें भी उनको पसंद नहीं थी हालांकि वह नाटक ही था फिर भी ठाकुर इस तरह से बोलते हैं कि बोले की रे साला मैंने साला क्या बोल रहा है अभी देखिए कि मां के जीवन में हमने देखा कि सत्य वचन और आध्यात्मिकता के प्रति ठाकुर की इतनी निष्ठा होने के बावजूद मां झूठ बोल कर के ठाकुर को ज्यादा दूध पिलाती थी स्वामी जी का भी स्वामी विवेकानंद का भी एक ऐसा प्रसंग है वह अमेरिका थे सेकंड टाइम विजिट में वो रिजली मैनर में रह रहे थे ग्रेट समर व भव्य ग्रीष्म दिव्य ग्रीष्म वो समय में तो मोड स्टम बोलकर के उनकी एक डिवोटा थी और वे लोग तो अपने को डिवोटा नहीं कहेंगे कहेंगे फॉलोवर या फ्रेंड तो वह थी वहां पर और वह स्वामी जी से काफी प्रभावित थी अभी एक दिन ऐसा हुआ कि उसकी लाइफ में कोई टेंशन था मोड स्टम की लाइफ में कोई भी प्रकार से किसी भी कारण से वो एकदम कुछ ना कुछ उसको सताता रहता था मानसिक रूप से अभी वो कौन सा टेंशन था वोह तो लिखा नहीं है किंतु था तो अभी एक दिन वह और स्वामी जी के साथ में वह प्रतिदिन बात कर रही है स्वामी जी वहां रिजली मेनर में रह रहे हैं रिजली मेनर यानी कि यह फ्रांसिस लगेट और उसकी वाइफ बेटी इन दोनों का वह घर था और यह बेटी लगेट यानी कि जोसेफाइन मैक्लाउड की बहन तो वो जोसेफाइन मैक्लाउड बेटी लगेट और उसका हस्बैंड फ्रांसिस लगेट यह लोग स्वामी जी को लेकर के जैसे ही स्वामी जी सेकंड विजिट के लिए अमेरिका आए अमेरिका में जैसे ही उन्होंने एंटर किया न्यूयॉर्क पोर्ट पर वहीं से ही वे लोग सीधा स्वामी जी को लेकर के रिजली मेनर ले गए रिजली मेनर यानी कि यह न्यूयॉर्क स्टेट में ही न्यूयॉर्क सिटी से कुछ डिस्टेंस के ऊपर में व गांव के भीतर में उसका एक बहुत बड़ा फार्म है और फार्म के भीतर में बड़ा सुंदर घर है तो इस घर को वे लोग रिजली मेनर कहते थे गांव का नाम था रिजली और मेनर यानी कि मकान या तो घर तो ये रिजली में आया हुआ घर यानी कि रिजली मैनर तो स्वामी जी वहां रिजली मैनर में रह रहे हैं और एज इस तरह से वह जो बेटी लगेट की हैबिट थी कि जब भी स्वामी जी आते हैं वह सबको इनवाइट करेगी कि वोह इतना सुंदर एटमॉस्फियर है सुंदर फार्म है बड़ा सा ओपन ग्राउंड है वहां पर पेड़ है दूर डिस्टेंस में देखेंगे तो आपको पहाड़ वगैरह दिखाई देंगे और इतना सुंदर रमणीय वातावरण है जैसे कि और फिर वहां पर स्वामी जी स्वयं रह रहे हैं तो ऐसे लगेगा जैसे वह पुरातन काल में किसी ऋषि मुनियों के आश्रम में चले गए हो तो इस इस तरह से इतने एक इंटीमेट एटमॉस्फियर में स्वामी जी अभी स्वामी जी लेक्चर तो देंगे नहीं वहां पे किंतु उनकी प्रत्येक बात प्रत्येक वार्तालाप उनका जैसे कि एक आशीर्वाद और उपदेश सम हो जाएगा अभी डिनर टेबल पर बैठे हैं तो डिनर टेबल पर जो कन्वर्ज हो रहा है स्वामी जी है तो कन्वर्सेशन स्पिरिचुअल ही होना है उल्टी पुल्टी कोई बात चलनी ही नहीं है वहां पर वह जैसे वह ठाकुर की ही शिक्षा ठाकुर वहां पर दक्षिणेश्वर में एक बार स्वामी जी और मास्टर महाशय बैठे-बैठे खड़े-खड़े बातें कर रहे थे वहां पर वो रांडे में कि वह स्वामी जी कह रहे हैं कि आजकल के लड़कों का चरित्र बिगड़ा जा रहा है तो मास्टर महाशय कहते हैं अच्छा मैंने मुझे तो पता नहीं यह सब मेरे समय में तो यह सब होता नहीं था तो स्वामी जी उस समय का नरेण तो नरेण कहता है कि उस समय भी सब कुछ हो रहा था आप इतना लोगों के साथ में मिलते नहीं है मिक्स नहीं होते हैं इसलिए आपको पता नहीं चलता है तो जैसे ही ठाकुर वहां पर बाहर में आए देखा कि यह लोग दोनों खड़े-खड़े बात कर रहे हैं तो ठाकुर ने जाकर के पूछा क्या बात चल रही है तो नरेंद्र ने बताया कि वही स्कूल के लड़के और वो बिगड़ जा रहे हैं उनका चरित्र अच्छा नहीं वगैरह वगैरह तो ठाकुर एकदम गंभीर हो करके बोले यहां पर आने के बाद में इस तरह की बातें नहीं करनी है और फिर जैसे कि नरेंद्र तो उनका लाडला था नरेंद्र को तो कुछ बोला नहीं मास्टर महाशय को बोला कि इसको यह तो छोटा लड़का है इसको तो समझ में नहीं आता तुम्हारी तो उम्र हुई है तुमको समझना चाहिए यह सब बातें यहां पर क्यों कर रहे हो तो मास्टर महा सेय बड़े ही अप्र स्तुत हो गए लज्जित हो गए तो यही सब शिक्षा तो नरेंद्र ने प्राप्त की थी तो यहां पर भी रिजली मैनर में सेकंड विजिट में जो भी बात होगी सब स्पिरिचुअल स्पिरिचुअल के अलावा कोई प्रश्न ही नहीं तो यह सब वार्तालाप हो रहा है और बेटी लगेट ने बहुत सारे गेस्ट को इनवाइट किया है तो वह उसमें फिर यह मोड स् टूम भी एक थी अभी यह मोड स् टूम के पास में अभी पता नहीं कौन सा टेंशन उसके दिमाग में चल रहा था अभी स्वामी जी सब कुछ किंतु ऑब्जर्व कर रहे हैं एक दिन अ वहां पे अब जैसे अमेरिकन जो घरों में होता है वो जो अपर क्लास जो हाउसहोल्ड होते हैं जो फैमिली होते हैं उसमें बीच-बीच में बोलड डांस वगैरह का आयोजन करते हैं वह स्त्री पुरुष इकट्ठा होंगे एक साथ में म्यूजिक चलेगा पियानो के ऊपर में और फिर डांस करेंगे सब वो वहां का जैसा कल्चर है अब जैसे वो उस दिन हमने पढ़ा था ना कथामृत में कि ठाकुर वहां से वापस आ रहे हैं वो केशव सेन के साथ में वो जहाज पर घूमने के लिए गए थे फिर वापस आए फिर वह वापस आते-आते रास्ते में अंग्रेज टोला अर्थात कि यह अंग्रेज लोग जहां पर रह रहे हैं उस रास्ते से जा रहे हैं रास्ते के दोनों साइड में बड़ी सुंदर सुंदर अट्टालिका हैं अट्टालिका हों में दीप माला प्रज्वलित है घर के बाहर में जैसे यह गैस की बत्तियां गैस लैंप जल रहे हैं और भीतर भीतर में से वह पियानो से यह अंग्रेज महिलाएं गा रही है ऐसा आवाज आ रहा है ऐसा संगीत की आवाज आ रही है तो यह जितने भी अपर क्लास है अमेरिका ब्रिटेन वो पियानो पर वह गान होगा फिर यह डांस करेंगे यह सब चलता है तो स्वामी जी वहां पर बैठे हुए थे तो सामने बैठी हुई थी ये मोड स् टूम अभी क्या है कि यदि इस तरह का एक सौंदर्य है वेल्थ है यह सब एटमॉस्फियर देखेंगे तो आपको भी लगेगा कि मेरे पास में भी ऐसा सौंदर्य हो मेरे पास में भी ऐसी वेल्थ हो धन हो जिससे मैं भी ऐसी बड़ी-बड़ी पार्टी कर पाऊं वगैरह वगैरह अभी मोर्स टूम के पास में इतना पैसा नहीं था अमेरिका में जनरली तो वो लोग काफी कंफर्टेबल होते कंपेयर टू इंडियंस किंतु जो अपर क्लास जो जिस तरह से यह फ्रांसिस लगेट और बेटी लगेट थी इस तरह का तो इसके पास नहीं था तो वह वहां पर बैठी बैठी देख रही है सब कुछ सामने में स्वामी जी बैठे हैं और स्वामी जी व मोर्सुम खुद कहती है कि स्वामी जी के सामने आप अपने मन की बात छुपा नहीं सकते हैं स्वामी जी जैसे कहते हैं तुम्हारी आंखें ऐसी है कि सीधा तुम्हारा हृदय दिखता है उसमें से ऐसा स्वामी जी मोट तुमको कहते हैं तो उसके मन की जो बात समझ ली और फिर कहा स्वामी जी ने इमीडिएट कि डोंट लेट इट गेट टू योर हेड बेबी माने यह सब जो धन है ऐश्वर्य है यह नाच गान है गीत वगैरह है इसको अपने सर पर मत जाने दो इसको इतना सीरियसली मत ले लो यह माया का जगत है यह सब कुछ दो दिन का ऐश्वर्य है दो दिन का भोग विलास है सब कुछ यहीं का यहीं रह जाएगा अपनी जो जर्नी है आत्मा की जर्नी आत्मा की यात्रा वोह तो जन्म जन्मांतर की है सत्कर्म करके के तपस्या करके इसको आत्मन को पुष्ट करना है और फिर यह वही रुष्ट पुष्ट आत्मन आखिर में ईश्वर में मिलित हो जाएगी अपना इंडिविजुअल अस्तित्व खो बैठेगी तो यह तो हमारी आध्यात्मिक जर्नी है तो यह सब जो दिखावा है उससे बहुत ज्यादा भ्रमित मत हो जाना तो एक ही सेंटेंस ऐसा स्वामी जी ने कहा कि फट करके वह कहती है मोड स्टम कि जैसे कि आप नींद में से जगी हो ऐसा उसको ऐसा हुआ कि अरे स्वामी जी जो कहते बिल्कुल ठीक तो कहते हैं तो यह स्वामी जी उसके जो भी उनके साथ में रहेगा उनके मन की बात समझ लेंगे अभी यही मोड स्टम कहती है कि मेरे मन में एक चिंता थी जो कि मुझे काफी दिनों से सता रही थी तो एक दिन अभी स्वामी जी को तो सब कुछ समझ में आ ही जाएगा देख ही लेंगे कि उसके मन में क्या चल रहा है तो एक दिन उन्होंने इसको कहा कि चलो वॉकिंग के लिए जाते हैं इवनिंग वॉक के लिए शाम का समय था तो अभी वो तो बड़ा ही सुंदर ग्राउंड है रिजली के आसपास का पास में गांव है गांव भी ऐसा छोटा सा सुंदर रमणीय जगह है तो दोनों गए वॉकिंग के लिए अभी यहां पे स्वामी जी मोर् स्टम को कह रहे हैं अच्छा कल यहां पे एक पार्टी थी शाम को उसमें क्या तुम थी अभी देखिए स्वामी जी की साइकोलॉजी ये मोरटू को पार्टी बड़ी पसंद थी वोह तो देख ही लिया हमने वो देख रही है चारों और ऐसा धन ऐश्वर्य और मन में थोड़ा सा प्रलोभन भी जगह है यह सब चीजों से तो स्वामी जी ने वैसे तो काट दिया उसको किंतु वह अट्रैक्शन तो रहता ही है तो जैसे ही स्वामी जी ने कहा कल शाम को यहां पर बड़ी सुंदर पार्टी थी तो वह आश्चर्य चकित हो गई कि अरे मुझे तो पार्टी के बारे में किसी ने बताया नहीं ना ही मुझे पता है इसके बारे में ऐसा कैसे हो सकता है कि इतनी सुंदर पार्टी हो और मुझे इसके बारे में कुछ भी पता ना चले भले चाहे कदा शायद मुझे इनवाइट ना करें किंतु सभी जितनी भी लेडीज है वह तो पार्टी के बारे में बात करेंगी ही करेंगी तो मैंने सुना भी नहीं इसके बारे में तो वो बड़ी चकित हो गई और यहां पर स्वामी जी कहते अच्छा तुम नहीं थी क्या उस पार्टी में अच्छा उस पार्टी में ऐसा हुआ वैसा हुआ बड़ा सुंदर वस्त्र पहन के सब नाच गान वगैरह हुआ था फिर यह पियानो प गान चल रहा था ऐसा वर्णन स्वामी जी कर रहे हैं जैसे कि जीवित वर्णन मतलब यदि आप उसको सुनेंगे वर्णन को स्वामी जी के मुंह से आपको ऐसा ही लगेगा कि आप खुद स्वयं उस पार्टी में उपस्थित है तो यहां पे मोर् स्टम तो एकदम चुपचाप सुन रही है वो बोल रही है कि सोच रही है अपने मन में कि ऐसी पार्टी हुई और मुझे कुछ पता ही नहीं है यह कैसे हो सकता है किंतु देखिए कि यह चिंता में और स्वामी दो चीज पहले तो स्वामी जी के पास में पार्टी का ऐसा सजीव वर्णन सुना दूसरा उसके मन में चल रहा है अरे ऐसी पार्टी हुई मुझे किसी ने बुलाया नहीं तो ये ये चिंता में ही च मतलब इस नए टॉपिक के भीतर में उसका मन ऐसा चला गया कि वह जो चिंता उसको जो भीतर से खाई जा रही थी वो चिंता से वह बिल्कुल मुक्त हो गई मने देखिए कि यह भी एक स्वामी जी की साइकोलॉजी समझने की कैसी कैपेसिटी है स्वामी जी को पता चल गया कि वह चिंता जो है उसको खा जा रही है और वह अभी जैसे साइकोसोमेटिक डिसीज होते हैं ना आजकल हम लोग जिसको इस तरह से समझते हैं मन की जो चिंता है मन का जो स्ट्रेस है वह यदि एक पॉइंट से ज्यादा बढ़ जाएगा तो वो आखिर में हाइपर ये जो ब्लड प्रेशर है या हाइपरटेंशन जिसको कहते हैं कि हाई ब्लड प्रेशर फिर यह शुगर हाई शुगर फिर ये कोरोनरी हार्ट डिसीज एक कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाना फिर नींद नहीं आना यह जो आजकल के लाइफ स्टाइल डिसीज है उसका जन्म ही होता है स्ट्रेस में से यदि कोई चिंता हमको खाई जा रही है लंबे समय तक और हम उसका कोई सॉल्यूशन नहीं ले आ पा रहे हैं चिंता रिग्रेट स्ट्रेस जो भी है तो वो हमारी हेल्थ को खत्म कर देगा तो यह स्वामी जी को समझ में आ गया था कि यह चिंता अभी उसकी जो टेंशन है उसके सर पर स्ट्रेस वह इतना बढ़ गया है कि इसका इमीडिएट कोई सोल्यूशन नहीं लाएंगे तो अभी वह फिजिकल डिसीज में परिणत हो सकता है तो स्वामी जी ने फट करके उसको ले गए इस तरह से वॉकिंग के लिए और इस तरह से वह जो पार्टी का वर्णन कर रहे हैं वो मोट्स टूम सब भूल गई एक तो ऑलरेडी पार्टी के प्रति उसका अट्रैक्शन है और फिर स्वामी जी जैसा स्वामी जी का वर्णन है तो व सब भूल कर के सोच रही है कि अच्छा ऐसी पार्टी हुई थी ऐसा हुआ था ऐसा फिर वह जब वापस आई उसने बाकी सबको पूछा कि अच्छा कल इस तरह की पार्टी आपने की थी मुझे बुलाया क्यों नहीं तो फिर उसको पता चले ऐसी कोई पार्टी हुई ही नहीं है तो वह सोच रही कि स्वामी जी ने मुझे ऐसा क्यों कहा तब कहीं जाकर के उसके मन में लाइट हुई कि हां जैसे स्वामी जी कहते हैं ना कि तुम्हारी आंखों से तुम्हारा हृदय दिखता है और तुम कुछ छुपा नहीं पाओगी मुझसे तो स्वामी जी ने उसके मन में यह चिंता जो चल रही थी वह समझ ली और चिंता का ेंट सोल्यूशन जैसे वह ठाकुर कहते हैं ना कि जब वह बुखार होता है तो दशमूल पाचन नहीं चलेगा तभी चाहिए फीवर मिक्सचर वैद्य कविराज के पास नहीं जाकर के डायरेक्ट सर्जरी करना पड़ेगा ऐसी परिस्थिति कभी-कभी आ जाती है तो अभी क्या है कि हमारे जीवन में भी एक तो है कि एक एक स्लो एंड स्टेडी आध्यात्मिकता बहती रहती है कि दिन में आप आधा एक घंटा चर्च अटेंड करें वगैरह वगैरह जो कि वहां के हिसाब से और फिर वो स्वामी जी की बातें सुने किंतु यह क्या है एक स्लो एंड स्टेडी एक है प्रोसेस जो कि कितने समय के बाद में उनके मन पे असर करेगी और यहां पे उसकी जो परिस्थिति थी मड स्टम के मन की कि यदि इंस्टेंट कुछ सॉल्यूशन ना निकाल आ जाए तो फिर पता नहीं क्या कुछ डैमेज हो सकता था तो इंस्टेंट सोल्यूशन के लिए फीवर मिक्सचर के लिए स्वामी जी ने पूरी कहानी बना दी थी और कहानी को इस तरह से उसको बताया कि वो सही सही में वो विश्वास करने लगी अच्छा ऐसा हुआ था अच्छा ऐसा हुआ था और भीतर में से पार्टी के प्रति आकर्षण तो दोनों मिलाकर के उसके मन का जो टेंशन था वो टेंशन बिल्कुल गायब हो गया और उसका मन पूरा इसमें लग गया तो वह कहती है कि देखिए कि स्वामी जी ने इस तरह से उपाय करके कुछ क्षण के लिए एटलीस्ट मेरे टेंशन को खत्म कर दिया अभी क्या है कि इस तरह से सर्जरी जब करते हैं तो फिर धीरे-धीरे करके बाकी का आपका रिकवरी प्रोसेस स्टार्ट हो जाता है तो इस तरह से जब स्वामी जी ने बात की स्वामी जी ने रिकॉग्नाइज किया कि हां इसके मन में टेंशन है उसका कोई सोल्यूशन लाना चाहिए तो नेचुरली है कि हम अनुमान करके कह सकते हैं कि उसके बाद के जीवन में यह टेंशन कम हो गया होगा वह कहती नहीं है मतलब इतना सब कुछ किंतु हम अनुमान करके कह सकते हैं तो अभी यह जो बात थी कि स्वामी जी ने पूरी यह पार्टी की बात बना दी एक पूरी कहानी अब ठाकुर का जो यह सत्य का जो यह है नियम कि कभी भी असत्य नहीं बोलना उसमें आपको इसको किस तरह से आप अप्लाई करेंगे क्या यहां पर वोह सेल्फ नेस वाली बात आ जाती है निस्वार्थ होता कि स्वामी जी ने जो कुछ भी कहा वह तो उसके फायदे के लिए किया था मने वो फीवर मिक्सचर उसको देना था उस समय दशमूल पाचन से नहीं चलेगा यदि स्वामी जी उपनिषद की कोई कहानी बताते हैं तो उसका टेंशन इतना मतलब पावरफुल था इतना सीरियस था मोड का कि फिर वो स्वामी जी की यह जो उपनिषद की कहानियां वगैरह उस परे मन ना लगा पाए और मन के भीतर में टेंशन उसको खाता ही जाए तो इसके लिए उसकी साइकोलॉजी समझ करके उसको कौन सी चीज में सबसे ज्यादा इंटरेस्ट है उस चीज को उसको इस तरह से प्रेजेंट करना कि उसके भीतर में उसका मन चला जाए और वो टेंशन चला जाए उसका क्या दैट इज मतलब उसके भले के लिए स्वामी जी ने इस तरह से कहानी बनाई तो यहां पर कौन सा सिद्धांत अप्लाई होगा सेल्फलेसनेस वाला कि ट्रुथ वाला ठाकुर को जबी हम पढ़ते हैं तो एकदम स्पष्ट प्रतीत होता है कि कहीं पर भी आपको किसी भी क्षेत्र में झूठ नहीं बोलना है सत्य वचन हमेशा इस तरह से बोल हां ऑफकोर्स कि सत्यम वदम प्रियम वदम इस तरह से नहीं कि आपको सब समय इस तरह से लोगों के सामने अपने ओपिनियन रखना है कि जैसे लोग नाराज हो जाए या दुखित हो जाए वो तो एक बात है किंतु असत्य का सहारा कभी नहीं लेना है यह जो ठाकुर का उपदेश उसके साथ में वह मां की बात और यहां पर स्वामी जी की बात सो जो हाईएस्ट आइडियल हम ठाकुर के जीवन में देखते हैं हम देखिए कि मां और स्वामी जी दोनों के जीवन में प्रैक्टिकली किस तरह से अप्लाई होते हैं जैसे वो दो लड़के जा रहे थे वो दो साधु मां के पास में जाकर कहते हैं हम लोग पैदल चलकर काशी जाएंगे तपस्या करेंगे तो साथ-साथ में इने मा मां ने कह दिया कि मा छेर झोल और ये जो पाय शेर बाटी ये तो जो था ठाकुर के लिए वो तो वो मथुर बाबू सब करता था जुगाड़ बोलकर के ठाकुर दिन रात तपस्या करते रहते थे तुम्हारे लिए यह सब कौन जुगाड़ करने वाला है तो ठाकुर एक आइडियल एनवायरमेंट में रहते थे वहां पर काली मंदिर था मथुर बाबू जैसा उनका एक प्रोटेक्टर था रानी रास मणी जैसी एक धनवान एक थी उसकी उनकी पेट्रोन जो कि सब समस्याए सब आवश्यकताएं सब सुविधाएं उनको प्रोवाइड करते थे किंतु मां और स्वामी जी दोनों को एक्सट्रीम एनवायरमेंट में काम करना था जद हम यदि ऐसा देखें कोई भी मनुष्य है उसके सामने क्या मतलब उसका दिन किस तरह से उसका बीतता है दो विभाग में उसका दिन ये होता है एक तो फैमिली में वह अपना दिन बिताता है दूसरा कि वह उसका बिजनेस है या जॉब है उसके ऊपर में वह ध्यान देता है यही तो दो मेजर एक्टिविटी किसी भी व्यक्ति की होती है एक तो फैमिली लाइफ होती है दूसरी होती है इकोनॉमिकल लाइफ जिसमें कि उसको पैसों की चिंता करनी है और यहां वो कैरियर बनाना है पैसों की चिंता करनी है व्हाट एवर और यहां पे उसकी फैमिली लाइफ है तो अभी यह जो आइडियलिस्टिक स्पिरिचुअलिटी है उसको यह दो जगत जिसके साथ में उसका सबसे ज्यादा इंटरेक्शन होता है फैमिली लाइफ में और एक वाइडर वर्ल्ड में उस दोनों के साथ में वह कैसे डील करें तो वह जो हाईएस्ट आइडियल इन दोनों सिचुएशन में किस तरह से अप्लाई हो वह हमको मां और स्वामी जी को देख कर के वह देखने को मिलता है तो वेरी इंटरेस्टिंग मैं जब यह सब जब कंपेयर करता हूं या कंट्रास्ट करता हूं तो हमेशा आप भी जब भी कुछ भी पढ़ते हैं तो पहले जो पढ़ा है बाकी जो सब कुछ हमने पढ़ा है इसके साथ में उसका कंट्रा इक्स है कि नहीं यदि कंट्रा इक्स मिल जाता है तो उसको एनालिसिस करने का सबसे ज्यादा आनंद आता है यदि सब कुछ मैच हो जा रहा है अच्छा ठाकुर ने भी यही बात कही है स्वामी जी ने भी यही बात कही है मां ने भी यही बात कही है त्याग का जहां तक प्रश्न है वो तीनों के बीच में कहीं पर भी मतभेद नहीं है कोई भी ऐसा नहीं कहता कि हां थोड़ा सा भोग कर लो और बाद में त्याग करना हालांकि अभी जैसे गृहस्थ को उपदेश देते हैं तो उसमें भी आपको यह करना पड़ेगा अभी जैसे कि राधू है राधू को उसकी शादी करवाई उसके बाद में वह प्रेग्नेंट हुई प्रेग्नेंट होने के बाद में उसका पागलपन ऐसा बढ़ गया कि मां उसको लेकर के वह कोआलपाड़ा में रह रही है थोड़ा सा भी जो आवाज होती है वो उससे सहन नहीं होती थोड़ा सा भी आवाज होने से व चिल्ला उठेगी तो इसके लिए वो जगदंबा आश्रम में मां रह रही है पहले तो वह कलकत्ता में थे कलकत्ता में उद्बोधन में तो सब समय हल्लागुल्ला चलता रहेगा इतना बड़ा सा वो है बिल्डिंग और फिर यहां पे इतने सारे साधु वहां पे तो पब्लिकेशन भी हो रहा है शरद महाराज जनरल सेक्रेटरी है कितने साधु आएंगे जाएंगे डिवोटा का आना जाना लगा ही रहेगा तो इतना हल्लागुल्ला राधू वहां पर नहीं रह पाएगी तो उसको लेकर के मां पहले तो निवेदिता की स्कूल में गई उस समय वहां पर छुट्टी थी तो निवेदिता स्कूल में भी हल्ला हो रहा है कुछ ना कुछ तो बड़ा सा शहर है आप आवाज कैसे संपूर्ण रूप से बंद कर देंगे तो फिर मां ने ठीक किया कि इसको लेकर के कोआलपाड़ा जाएगी कोआलपाड़ा में गांव के बाहर में जो जगदंबा आश्रम है वहां पर जाकर रहेगी तब कहीं जाकर के राधु को थोड़ा सा सुकून मिलेगा एकांत मिलेगा तो वहां पर रह रहे हैं और वहां पर जाने के बाद में उसने वो अफीम खाने का अभ्यास बना दिया है ओपियम खाने का अभी उसको नहीं मिलेगा अफीम तो वो चिल्लाएगी विथड्रावल सिमटम्स जिसको कहते हैं मां को गाला गाली देगी मां के साथ में झगड़ा करेगी कैसा उसका नेचर हो गया था तब मां कहती है कि देखो इसको शादी करवा कर के मैंने कितनी बड़ी गलती की तो फिर वह प्रश्न होगा कि राधू की शादी करवाई ही क्यों यदि उनको भविष्य लगता था कि इस तरह का होगा तो फिर किसी ने पूछा भी सही तब मां ने कहा कि देखो ये तो गृहस्थ लोगों का जो धर्म है उसका पालन करना है तो अभी देखिए कि वो गृहस्थ है बोलकर के उसकी शादी करवाई है अदर वाइज यदि आध्यात्मिक जगत में आपको रहना है तो त्याग के अलावा और कोई उपाय नहीं है तो जहां तक यह तीनों एक ही बात कहते हैं एक ही बात मैच हो जाती है वहां पर ज्यादा कोई एनालिसिस करने का कोई स्कोप नहीं है किंतु जैसे ही हमको कंट्रा क्शन दिखता है जैसे ही विरोधाभास दिखता है वैसे ही अपना वह बुद्धि काम करना शुरू कर देती है कि ये विरोधाभास क्यों है और फिर हमको थोड़ा बहुत एनालिसिस करने का मौका मिलता है तो अच्छा तो आज से अभी ये स्टार्ट करते हैं स्वामी विवेकानंद का माय प्लान ऑफ कैंपेन हमने जो कुछ टॉपिक ऑलरेडी देख लिए थे उसमें जो एक मेजर थीम हमने देखी कि किस तरह से स्वामी जी अमेरिका में थे अमेरिका ब्रिटेन में और लोगों ने उनका विरोध किया थियो सोफिस्ट सोसाइटी ने थियोसोफिकल सोसाइटी फिर यह ब्राह्मण समाज फिर यह क्रिश्चियन मिशनरी वगैरह वगैरह ने इसके बाद में स्वामी जी अपनी जो मूल थीम है इस प्रवचन की माय प्लान ऑफ कैंपेन मेरी मर नीति उसके ऊपर में आते हैं कि भारत का उत्थान कैसे हो इस भारत के उत्थान में स्वामी जी ने जो टेक्स्ट है स्वामी जी का जो पूरा प्रवचन इसको मैंने टॉपिक वाइज बांट दिया है और सभी टॉपिक को मैंने टाइटल दे दिया है एक टॉपिक एक उसका ये टेक्स्ट दे दी है टॉपिक के टाइटल के रूप में तो उसमें पहला टॉपिक जो था भारत का उत्थान कैसे हो उसका मैंने टाइटल दिया है ग्रोथ नॉट रिफॉर्म ग्रोथ होना चाहिए रिफॉर्म नहीं तो इस टॉपिक में स्वामी जी ने क्या कहा वह अभी हमने लास्ट टाइम देख लिया था यह ग्रोथ और रिफॉर्म के बीच में डिफरेंस क्या है पता है हमने हमने कल तो बहुत लास्ट टाइम तो बहुत कुछ डिस्कस किया ही था अभी एक और एक इसके बारे में एग्जांपल देकर के एक बच्चा है अभी बच्चे को आप बचपन से ही मां जद उसको आध्यात्मिकता नैतिकता और बड़ों के प्रति सम्मान पढ़ाई लिखाई में एकनिष्ठ होता यह सब जद उसको सिखाती है तो यह बच्चा जब बड़ा होगा तब देखेंगे कि यह कितना सुंदर उसका व्यक्तित्व हो जाता है किंतु एक लड़के को जद य अपने बचपन से ही खुला छोड़ दिया ना ही उसके संस्कार देने के लिए आपने कोई चेष्टा की ना ही उसकी पढ़ाई लिखाई के बारे में कोई चेष्टा की वह बड़ा होकर के एडल्ट होने के बाद में उसका नेचर बिल्कुल ही श वत हो गया अभी इसको पकड़ करके आप उसको कुछ सिखा रहे हैं तो वह हो गया रिफॉर्म बच्चा बिगड़ा हुआ है उसको आपको ठीक करना है रिफॉर्म करना है जबकि ग्रोथ क्या है कि बच्चे को बचपन से ही जन्म से ही इवन अपने यहां पर तो यह गर्भ संस्कार बोलकर के पूरा विज्ञान है कि बच्चा गर्भ में होने से ही मां यह सब आध्यात्मिक साधनाएं वगैरह करना शुरू कर देती है जिससे कि कंसेप्ट के साथ-साथ में ही बच्चे के मन में शुभ संस्कार प्रविष्ट हो तो जो बच्चे को कंसेप्ट से ही लेकर के बर्थ होने के बाद में जन्म से ही लेकर के उस तरह का एक एनवायरमेंट में रखा जाए जो कि आध्यात्मिक परिपट्स बोलते हैं ग्रोथ तो यह ग्रोथ और रिफॉर्म इन दोनों के बीच में यह डिफरेंस है ग्रोथ है कि एक नेचुरल वे में आप एक बड़े ही जतन पूर्वक किसी का विकास कीजिए और रिफॉर्म यानी कि पहले तो केरलेससवीडियो भारत में जो ू नीतियां खू रिवाज सब प्रवेश कर गई है तो अभी भारतीयों को गाली देकर के या तो फिर यह लॉज पास करके रूल्स पास करके यह जो पार्लिमेंट में आप कहेंगे कि अच्छा वो मने सती प्रथा बंद कर दो नियम बना दो इस तरह से कानून बना दो तो कानून बना कर के यह सब चीजें नहीं होने वाली आप कानून बनाइए कोई मना नहीं करता है किंतु यदि रूट एंड ब्रांच आपको समाज में सुधारणा लानी है रूट एंड ब्रांच एकदम ग्राउंड लेवल पे ग्रास रूट लेवल पे आपको यह सब डेवलपमेंट करना है तो कानून बना कर के कभी भी काम नहीं होने वाला है आपको मनुष्य का मन परिवर्तित करना होगा आप सोच लीजिए कि अभी एक शहर है शहर की पॉपुलेशन है जनरली आजक के जो मीडियम साइज सिटी होते हैं इंडिया के तो पॉपुलेशन 253 लाख के आसपास की होती है अभी इस शहर में दो चीजें आपको क्राइम बंद करना है तो कि आप ऐसा कीजिए कि वहां पे बड़ा ही कड़ा पुलिस बंदोबस्त लगा दीजिए दिन रात 10000 ना कि 12000 पुलिस कर्मचारी वहां पे वोह सब जगह पे तैनात है जैसे कोई चोरी कर रहा है डके खेती कर रहा है और कोई क्राइम कर रहा है फट करके जा करर के उसको पकड़ ले चारों ओर सीसीटीवी कैमरा लगा है आजकल तो ड्रोन होते हैं फिर यह जो पुलिस वाले अपने ये जो स्पाई होते हैं वो खबरी वो चारों ओर लगा देते हैं कहीं पे भी क्राइम हो रहा है हमको बताना हम आकर के उनको पकड़ेंगे यह एक तरीका है क्राइम को रोकने का दूसरा एक तरीका है वही सिटी में जद मंदिर है या गुरुद्वारा है जितने भी आध्यात्मिक स्थान है वहां पे नियमित रूप से सत्संग हो रहा है वहां की जनता धार्मिक है वहां के सबके मन में ईश्वर के प्रति आस्था है तो लोगों का जो हृदय परिवर्तन होगा उसी से तो बहुत ज्यादा चोरी डकती कम हो जाएगी अभी मेरा पड़ोसी है उसको खाने को नहीं मिल रहा है मैं बड़ा मजे से मजे कर रहा हूं तो मेरे हृदय में जदी करुणा प्रकट होगी तो फिर मैं कहूंगा उसको कि भाई तुम भी आओ मेरे साथ में खाना खा लो बैठो मेरे साथ में तुमको क्या तकलीफ है बताओ उसका कोई सॉल्यूशन निकालते हैं तो जदिया जदी परिवर्तित होता है तो वो परिवर्तित हृदय वाला यह आध्यात्मिक हृदय वाला व्यक्ति उस समाज के ग्रास रूट रिफॉर्म में वह कार्य करेगा फिर आपको इतना 101000 पुलिस वाले ड्रोन है स्पाई कैमेरा है स्पाई है वह सब की जरूरत नहीं पड़ेगी वो ऑटोमेटिक ही वो शहर ही वहां पर ऑटोमेटिक क्राइम कम हो जाएगा तो इसलिए स्वामी जी कहते हैं कि तुम लोग यह कानून बनाने के बारे में बात कर रहे हो तुम लोग न्यूज़पेपर में आर्टिकल लिख रहे हो तुम लोग लोग हिंदू धर्म को गाली दे रहे हो ऑर्थोडॉक्स हिंदुओं की निंदा कर रहे हो यह करके कह करके कि यह जो सब प्रथाएं है वह सब अंधश्रद्धा एं हैं भारत की अवनति के कारण है तो यह सब करने से कोई भी बेसिक रिफॉर्म नहीं होने वाला है आप यदि कानून बनाएंगे तो कानून को तोड़ने वाले 1000 लोग निकल जाएंगे तो इसकी वजह मनुष्य का हृदय परिवर्तित करो इससे क्या होगा यह जो मनुष्य का जो विकास भीतर में से होता है वो विकास जैसे ठाकुर कहते हैं कि एक कमरे में 1000 साल से अंधेरा है यदि आप वहां पे लाइट का स्विच ऑन कीजिए ठाकुर के समय में तो ये लाइट का स्विच नहीं था किंतु दिया लेकर के जद आप जाएंगे भीतर में तो जैसे ही प्रकाश वहां पर कमरे में 1000 साल के अंधेरे कमरे में हुआ तो क्या उसको अंधकार को जाते-जाते क्या 1000 साल लगेंगे बिल्कुल नहीं वो एक सेकंड में जैसे ही आपने लाइट का स्विच ऑन किया वैसे ही अंधेरा गायब हो गया तो वैसे ही आप लोगों को आध्यात्मिकता दे उनके हृदय को परिवर्तित करें उनकी जीवन यात्रा में कहे उनको कि आ ये जो आत्मन की जो जर्नी है वही असली जर्नी है बाकी आप अपने फैमिली है कैरियर है उसमें आपको लगता है कि चलो बच्चे की शादी हो गई व ठिकाने लग गया है अभी उसका बच्चा भी आ गया है और अभी वह सब उसके बच्चे का भी वह एजुकेशन देखना है माने यह सब को अंत ही नहीं है आप पहले तो अपने बच्चे के एजुकेशन के बारे में चिंता कर करेंगे बड़ा हो गया तो उस शादी के बारे में चिंता करेंगे शादी हो गई तो उसका बच्चा हुआ उसके एजुकेशन की चिंता वो बड़ा हो गया तो उसके माने ये कोई अंत नहीं है फैमिली लाइफ का भी और यह जो अपनी कैरियर है उसका भी कि मुझे इतना पैसा चाहिए इतना बैंक बैलेंस होगा देन आई विल फील सेफ के बूढ़ा हो जाऊंगा तो फिर मेरी चिंता करने के लिए जो सब मेडिकल खर्च होता है उसके लिए सब पड़ा हुआ है बैंक बैलेंस यह जो है टेंशन वो कभी भी खत्म नहीं होने वाला है ऐसा कभी मत सोचिए कि मैं एक लेवल पे पहुंच जाऊ जगत का टेंशन मेरे लिए मिट जाएगा यह जो अमेरिका के बड़े-बड़े टेक बिलियोनेरा है यह इलोन मस्क वगैरह 400 बिलियन का उसका उसकी संपत्ति है 400 बिलियन यानी कि अ जगत के जो आधे देश जो है उसकी जो ग्रोस डोमेस्टिक प्रोडक्ट होती है उससे ज्यादा तो इतना पैसा उसके पास में है फिर भी वह पॉलिटिक्स में जाकर के क्या-क्या सब नाटक कर रहा है उससे भी उसको संतोष नहीं है मनुष्य के हृदय को संतोष कभी नहीं मिलता है उसके सर पर से टेंशन कभी नहीं जाता है एक ही मात्र रास्ता है कि अभी ऐसा नहीं है कि जगत को छोड़ कर के यहां पर आ जाए किंतु साथ-साथ में ही इसको डेवलप कीजिए धीरे-धीरे देखिए कि आपका जो बाह्य जीवन है वह शांत होता जाएगा आपका यह जो बाह्य जगत है वह धीरे-धीरे करके देखेंगे कि इतना सुमधुर होता जाता है कि आपका आंतरिक जगत आप जद डेवलप करेंगे तो बाह्य जगत इतना सुमधुर होता जाएगा तो आध्यात्मिकता एक ऐसा गिफ्ट है जो कि स्वामी जी अपने समाज को देना चाहते हैं जिसकी मदद से ये ग्राउंड लेवल पे ग्रास रूट से डेवलपमेंट अध्यात्मिक डेवलपमेंट प्रारंभ हो तो फर्स्ट पॉइंट यह स्वामी जी का हो गया स्वामी जी कहते हैं कि मुझे रिफॉर्म नहीं चाहिए मुझे ग्रोथ चाहिए हाउ टू बेटर इंडिया भारत की उन्नति भारत का फिर से ये जो इवोल्यूशन डेवलपमेंट कैसे हो इस थीम के ऊपर में स्वामी जी का पहला पॉइंट जो कि हमने कल लास्ट टाइम डिस्कस किया अभी ये दूसरा पॉइंट जो स्वामी जी हमको बता रहे हैं कहते हैं गुड एंड इवल आर टू साइड्स ऑफ द सेम कोइन यह अच्छा और बुरा यह दिव्यता और यह राक्षस राक्षसी बुद्धि यह दोनों जो है यह एक ही सिक्के की दो पहलु है किस तरह से स्वामी जी कहते हैं मैं स्वामी जी क्या कहते हैं पढ़ता हूं इविल्स आर प्लेंटीफुल इन अवर सोसाइटी अपने समाज में यह जो दूषण है वोह बहुत सारे हैं उसमें कोई प्रश्न ही नहीं है आज से 100 200 साल पहले का भारत देखेंगे वैसे ही तो गुलाम था वैसे ही यह चारों ओर से जो अपने ऊपर में विपदा आपदा आती जा रही थी यहां पे फेमिन हो रहा है वहां पे ज्यादातर लोग गरीब हैं यहां पे ना ही वह कोई मिलिटरी पावर है ना ही यह इकोनॉमिकल स्ट्रेंथ है यह ब्रिटिश लोग भारत को को प्रति वहां अभी आजकल वो एक ऑक्सफेम का एक रिपोर्ट पब्लिश हुआ है वो 150 सालों में ना कि इतने में वो ब्रिटिश लोगों ने भारत को भारत में से वह कितना रुपया ले गए वह ट्रिलियंस ऑफ डॉलर्स आज की करेंसी में वह होता है वो था एक रिपोर्ट तो चारों ओर से भारत डूबा हुआ था इस तरह से वो हैवानियत में कहो ना कि एक तरह से मुसीबत में तो स्वामी जी कहते हैं कि इविल्स आर प्लेंटीफुल इन अवर सोसाइटी तो कोई उसमें आश्चर्य की बात नहीं है समाज दूषण तो हमारे समाज में भरे पड़े हैं बट सो आर देयर इविल्स इन एवरी अदर सोसाइटी किंतु साथ-साथ में यह भी देखिए कि इस जगत में और जितने भी समाज है जितने भी देश है जितनी भी सभ्यता है उसमें भी इतने ही दूषण भरे पड़े हैं आप यह मत सोचिए कि भारत में ही गरीब है ब्रिटिश अमेरिका में नहीं है यूरोप में खास करके बहुत गरीब थे इसलिए तो बाद में यह कम्युनिस्ट रिवोल्यूशन है ये फिर ये जी पार्टी है हिटलर की व सब पावर में आए अमेरिका में इतना पॉवर्टी हालांकि गोरे लोगों में नहीं था किंतु निग्रो लोगों की हालत तो बड़ी ही भयानक थी उन लोगों को पहले तो इन लोगों को गुलाम बना के रखा था निग्रो को यह गोरे लोगों ने और फिर बाद में यह जो सिविल वॉर हुआ और सिविल वॉर में निग्रो लोगों का यह जो गुलामी खत्म हुआ किंतु ऐसी बात चल रही थी कि ना ही उनको जॉब मिलेगी ना ही उनको कोई केयर करने वाला होता बड़ी ही रहते थे तो इसलिए स्वामी जी कहते हैं कि हां हमारे समाज में दूषण है किंतु फिर दूषण दूसरे समाजों में भी है हियर द अर्थ इज शॉक्ड सम टाइम्स विथ विडोस टयर्स देर इन द वेस्ट द एयर इज रेंट विद द साइज ऑफ द अनमैरिड यहां पे भारत में देखेंगे कि धरा विधवाओं के आंसू से भजी हुई है क्योंकि जब विधवा होगी तो उसका दूसरा विवाह होगा नहीं और दूसरी बात कि विधवा के लिए इतने कठिन नियम वो ऑर्थोडॉक्स समाज में बनाए गए थे उनके साथ में ट्रेवल नहीं करना है उनको अशु कन्याल माना जाता था अच्छा खाना नहीं खाना है अच्छा पहनना नहीं है वगैरह वगैरह तो विधवाओं के आंसू से जैसे कि भारत की धरा जैसे किज भीग गई है तो वहां पे अमेरिका ब्रिटेन में यूरोप में देखेंगे कि ये जो अनमैरिड लड़कियां है उनकी निश्वास से उनकी निराशा से जैसे कि वहां का जो हवामान है वायु है वह भर गया है वहां की हवा उनके निश्वास से भरी हुई है क्यों क्योंकि वहां पर लड़के लोग इजली शादी करना नहीं चाहते थे तो उस एक पत्र में भी स्वामी जी ने लिखा है कि वहां पर लड़कों को देखेंगे वह अफेयर्स वगैरह करने में बड़े ही माहिर होते हैं किसी की लड़की के साथ में व बात करेंगे गप करेंगे अफेयर करेंगे वगैरह वगैरह सब कुछ ठीक है किंतु जैसे ही शादी करने की बात आई सब लोग भाग जाएंगे क्यों क्योंकि किसी को भी इस तर तरह से एक फैमिली बना कर के एक बर्डन अपने सर पर नहीं उठा लेना है तो वहां पर बहुत सारी लड़कियां अनमैरिड रहती थी तो यहां पे जैसे विधवाओं को एक तरह का कष्ट है समाज में तो वहां पे कुंवारी मने अनमैरिड लड़कियों का भी उसी तरह का कष्ट है तो स्वामी जी कहते हैं कि दूषण तो सभी समाज में है अपने यहां पे एक तरह के है तो वहां पे दूसरे तरह के हियर पॉवर्टी इज द ग्रेट बेन ऑफ लाइफ देयर द लाइफ वेरीनेस ऑफ लग्जरी इज द ग्रेट बेन दैट इज अपॉन द रेज यहां पे गरीबी देखेंगे तो भारतीय जीवन का एक बहुत बड़ा दूषण है एक बहुत बड़ा एक भयावह चेहरा है भारतीय जीवन का किंतु विदेश में जाकर देखेंगे तो लग्जरी है वह लग्जरी ने इनके हृदय को ऐसे खा दिया है कि भीतर से पूरे एमटी हो गए हैं भीतर से पूरे खाली हो गए हैं भीतर से ऐसा उनको एक तरह का एक शून्यता दिखती है ऐसा लगता है कि बस अभी जीवन में इसके अलावा कुछ है ही नहीं माइंड है वह पूरा करप्ट हो गया है तो यहां पे भयानक गरीबी है वहां पे लग्जरी की वजह से जीवन पूरा उनका करप्ट हो गया है हियर मेन वांट टू कमिट सुसाइड बिकॉज़ दे हैव नथिंग टू इट देयर दे कमिट सुसाइड बिकॉज दे हैव सो मच टू ईट यहां पे लोग मनुष्य यहां पे एक आदमी आत्महत्या करना चाहता है क्योंकि उसके पास में खाने को कुछ नहीं है वहां पे वे लोग आत्महत्या करते हैं क्योंकि खाने के लिए बहुत कुछ है अभी यह बात सुनकर के हमको थोड़ा सा आश्चर्य होगा कि मेरे पास में यदि ऐसा कोई ऑप्शन आ जाए कि तुमको सुसाइड किस तरह से करना है बिना खाए करना है कि बहुत खाने के बाद में करना है तो हम लोग तो वही कहेंगे पहले बहुत ज्यादा खा लो फिर जो जो होना है सो हो यदि जीवन खाली ही है यदि जीवन में दुख ही है तो गरीबी की दुख की वजह लग्जरी का दुख बेटर है ऐसा तो हमको लगेगा तो किंतु देखिए कि आज का जो यूरोप है आज का जो अमेरिका है स्वामी जी के समय में यह सब कुछ इतना क्लियर नहीं था जो कि हमको आज इतना क्लियर हो रहा है एक तो रेसिजम है आपस आपस में युद्ध जिनका चलता है आपस आपस में झगड़ा इतना चलता है कि फिर वे लोग करेंगे क्या कि एक देश दूसरे देश के ऊपर में आक्रमण करेगा और फिर उनकी धन संपत्ति छीनने का प्रयास करेगा यह ब्रिटेन और जर्मनी का युद्ध कैसे हुआ अभी ब्रिटेन भारत प हमला करके भारत की संपत्ति छिनता है वह तो समझ में आता है हम लोग तो वैसे ही कमजोर थे और हमारे पास में पैसा भी बहुत था तो ज जगत का नियम है कि कमजोर आदमी के पास पैसा होने से वो बलशाली व्यक्ति आकर के पैसा छीन लेता है यह जगत का नियम है तो भारत और ब्रिटेन के बीच में जो हुआ वह तो समझ में आता है किंतु जर्मनी और ब्रिटेन और फ्रांस के बीच में कैसे युद्ध लग गया व सब वो तीनों देश जो है जर्मनी और रशिया जर्मनी और इटली ये दोनों साथ में थे और रशिया फ्रांस और ब्रिटेन ये तीनों साथ में थे तो ये जो पांचों बड़े-बड़े देश है फिर बाद में अमेरिका या फिर फिर बाद में जापान आया तो ये जितने भी देश है वो बड़े ही धनवान थे बड़े ही शक्तिशाली थे बड़ी ही उनके पास में मिलिट्री पावर था नेवल पावर था टेक्नोलॉजिकल इंडस्ट्रियल पावर था तो इन लोगों के बीच में कैसे युद्ध लग गया तो वही बात है कि स्वामी जी कहते हैं कि जब जीवन में आपके पास में इतना रुपया हो जाए या तो फिर आपको ऐसा लगे कि फिर जीवन का एम ही खत्म हो गया है आध्यात्मिकता तो है नहीं दूसरा कि ना ही और कोई इकोनॉमिक स्ट्रगल इतना कुछ रह जाता है तो फिर धीरे-धीरे करके मन के भीतर में करप्शन प्रवेश करता है और यह करप्ट माइंड फिर युद्ध करने की ओर जाता है पहले तो ये भारत जैसे अफ्रीका जैसे देशों पर हमला करके हमारी धन संपत्ति लूटी और फिर आपस आप अभी देखा कि अभी हमला करने के लिए और देश नहीं बचे हैं ऑलरेडी पूरे अफ्रीका को खा जा रहे हैं ऑलरेडी एशिया के जितने भी कमजोर देश हैं सबको खा जा रहे हैं तो अभी किसके साथ में लड़े तो फिर अब ये आपस में लड़ना शुरू कर दिया सेकंड वर्ल्ड वॉर फर्स्ट वर्ल्ड वॉर क्या था कि धनी व्यक्तियों के धनी देशों के बीच में यह कॉलोनी के लिए वॉर हो रही थी इटली बोलता है कि ये नॉर्थ अफ्रीका की कॉलोनी मेरी है फ्रांस कहता है कि यह सब कॉलोनी मेरी है ये जो इंडो चाइना वगैरह ब ब्रिटेन कहता है कि ये जो साउथ एशिया है वो मेरी कॉलोनी है यहां पे अमेरिका भी पावरफुल हो रहा है उसने फिलिपींस पे जाकर के वो कुछ ना कुछ गड़बड़ कर रहा है यहां पे रशिया भी है सो रशिया को अपनी कॉलोनी चाहिए ऑलरेडी तो सब कॉलोनी तो बट गई है जो गरीब देश जितने भी कमजोर देश थे कमजोर देशों को तो ऑलरेडी इन्होंने आपस में बांट दिया है अभी दूसरी कॉलोनी आ नहीं रही है अभी नए देश कहां से खड़े करेंगे तो सोचा कि चलो आपस में ही झगड़ा करना शुरू कर देते हैं तो ये जो आपस में इसका जो विवाद स्टार्ट हुआ वहीं से तो फर्स्ट वर्ल्ड वॉर सेकंड वर्ल्ड वॉर हुआ और यह फर्स्ट और सेकंड वर्ल्ड वॉर में जो भयानक डिस्ट्रक्शन यूरोप में हुआ था उसमें से यूरोप कभी खड़ा नहीं हुआ है आज यूरोप की जो कुछ प्रोस्पेरिटी है वो मिडिल ईस्ट में से वह इंडिया में से एशिया में से माइग्रेंट्स को लेकर के वे लोग अपनी इकोनॉमी चला रहे हैं और अभी दूसरा प्रॉब्लम खड़ा हुआ है वे लोग बोल रहे हैं इतने सारे माइग्रेंट आ कहां से गए अरे कहां से आ गए माने वहां ज्यादातर पॉपुलेशन तो सेकंड वर्ल्ड वॉर में खत्म हो गई थी इसके लिए तो आपको इकोनॉमी चलाने के लिए माइग्रेंट्स को लाना पड़ा अभी वहां के जो ओरिजिनल गोरे लोग हैं वे लोग कहते हैं कि माइग्रेंट्स को हटाओ जी माइग्रेंट्स को हटाएंगे तो पूरी इकोनॉमी खत्म हो जाएगी ये मूर्ख लोग समझते नहीं है माइग्रेंट्स के ऊपर में तो इकोनॉमी चल रही है यह जो ब्रिटेन यूरोपियन यूनियन से निकल गया वो लोग बोलते हैं कि हम और ज्यादा बड़े हो जाएंगे अभी ब्रिटेन की इकोनॉमी दिन प्रतिदिन गड्ढे में गिरती जा रही है वे लोग सोचते थे कि अमेरिका पे डिपेंड करेंगे अभी अमेरिका में ट्रंप जैसा पागल आ गया है तो गोल घुमा करके आप देखिए कि उस समय जो लोग स्वामी जी को सुनते होते वे लोग सुनते वो समझ उन अपने सोचते होंगे कि ये स्वामी जी कैसी बात कर रहे हैं वो गरीबी से सुसाइड करने से बेटर है कि बहुत ज्यादा पैसा हो जाए उससे सुसाइड करेंगे गरीब धनवान नहीं खाने को मिलता है उससे सुसाइड करने से बेटर है बहुत खाके सुसाइड करें मतलब क्या किस तरह की बातें ये है किंतु आज इतने सालों के बाद में स्वामी जी जैसे कि भविष्य देखते थे देखते थे कि इतनी भयानक खूना मर की होगी कि ये उनकी धन संपत्ति सब जैसे ठाकुर कहते हैं ना कि आपको दो नंबर की पैसा आपको मिला है दो नंबर का धन है सब इल बिगोट गेन इंग्लिश में जिसको कहते हैं वो कैसे जाता है तो तीन तरह से जाता है एक तो लड़का उसका बड़ा ही करप्ट निकलता है वह सब जुआ शराब उस सब में वह पैसा उड़ा देता है दूसरा कि वह जाता है उसका पैसा मामले मुकदमे में माने कोर्ट केस इतना करेगा कि उसमें ही वह फिर वो वकील लोग है वे लोग पैसा उठा ले जाएंगे आपका फिर वह बीमार होकर के डॉक्टर उसका पैसा ले जाता है यानी कि यह जो धनी व्यक्ति होते हैं दो नंबर का पैसा जिसने इकट्ठा किया है इन तीन तरह से उसका पैसा जाएगा तो यहां पर भी यह जो कॉलोनिस्ट को लूट लूट करके अफ्रीका और एशिया को जो पैसा यूरोप और अमेरिका ने बनाया था वो खास करके यूरोप ने अमेरिका का पैसा वैसे यूरोप से आया था तो वो इनडायरेक्टली वो कॉलोनिस्ट का ही रुपया था तो वो इस तरह से वोह युद्ध में यह पैसा जाएगा और यह स्वामी जी की भविष्यवाणी जो उस समय की थी वह बिल्कुल हमने ठीक-ठीक होती हुई देखी है आज ठीक है कि यह लोग फिर से इतने बड़े पावरफुल हुए हैं किंतु देखिए कि आज की उनकी जो प्रोस्पेरिटी है उसके पीछे में यह अपने इंडि इंडियन इंजीनियर्स ये एशियन इंजीनियर्स खास करके उनका बहुत बड़ा हाथ है और अभी यह जो दूसरा स्ट्रगल इन लोगों के देश में जो चलने वाला है कि वहां की ओरिजिनल पॉपुलेशन वे लोग कहते हैं माइग्रेंट्स को हटाओ वो जो अमेरिका में आजकल देखेंगे कि इंडियंस को गाली देने वाले बहुत सारे पड़े हैं किंतु आप इंडियंस को हटा दीजिए तो यह googlegroups.com वो जो स्टार्ट हुआ तो उस समय मैंने एक चार्ट देखा था कि स्टेम ग्रेजुएट्स साइंस टेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग मैथमेटिक्स यह जो सब एकदम हार्डकोर जो साइंस होते हैं उसके ग्रेजुएट्स की संख्या चाइना की एक और पूरे इंडस्ट्रियल कंट्रीज है इंक्लूडिंग इंडिया उसमें जो स्टेम ग्रेजुएट्स होते हैं उससे वो जो है उससे दो गुना चाइना का है यानी कि एक और आप पूरे सभी इंडस्ट्रियल कंट्रीज के ग्रेजुएट्स को रख दीजिए उसको जितनी संख्या होती है उतने ग्रेजुएट तो चाइना में हर साल बनते हैं यानी कि चाइना और इंडिया दोनों का जबरदस्त अभी ये एजुकेशनल आउटपुट है और यदि यह यूरोप और अमेरिका उनको टेक्नोलॉजी की रेस में टिकना होगा तो चाइना और इंडिया में से ग्रेजुएट्स को बुलाए बिना उनका कोई उपाय नहीं है यह जो स्टीव जॉब्स था उसको उस समय का प्रेसिडेंट था उसने कहा कि आप आई अमेरिका में क्यों नहीं बनाते तो वो बोला कि आप मुझे इतने हजार इंजीनियर लाके दे दीजिए अभी मैं i को अमेरिका में बनाऊंगा अमेरिका में इतने इंजीनियर है ही नहीं वहां जितने भी लड़के हैं आजकल ह्यूमैनिटीज है आर्ट्स है उसमें जाना चाहते हैं इंजीनियरिंग साइंस मैथमेटिक्स सीखना नहीं है आप यदि यह हावर्ड है ऑक्सफोर्ड है वहां के इंजीनियरिंग मैथमेटिक्स के क्लास में आप बैठ के देखेंगे ज्यादातर आपको एशियन दिखाई देंगे तो वो अभी आपकी पॉपुलेशन कम हो रही है गोरे लोगों की उन प्रोस्पेरिटी है वो अभी भी हम लोगों को मानसिक गुलाम बनाकर रखा है इसलिए भारत में देखेंगे कि ये इंग्लिश लोगों की गुलामी इस तरह से हमारे सर पर अभी भी बनी हुई है उस समय फिजिकली गुलाम थे किंतु एटलीस्ट मेंटली हम लोग फ्री थे अभी उल्टा हो गया है फिजिकली तो फ्री हो गए हैं मेंटली गुलाम हो गए व्हिच इज मोर डेंजरस ये मेंटल गुलामी भारतीय लोगों की है बोलकर के ही तो वे लोग इतने अभी अपने सर पर बैठे हुए हैं थोड़ा चाइना की तरह ने इस तरह से थोड़ा सर उठा के देखें कि नहीं भारत का हित प्रथम करेंगे भारत के हित में जो होना है उसी को प हम लोग करेंगे तो फट करके देखेंगे इन लोगों की प्रोस्पेरिटी आधी हो जाएगी ये जो भारत का जो ट्रेड इंबैलेंस डेफिसिट जो है ट्रेड डेफिसिट कितना बड़ा है ज्यादातर कंट्रीज का देखिए ट्रेड डेफिसिट होता है और यह लोगों का ट्रेड सरप्लस होता है यूरोप और अमेरिका का हालांकि अभी चाइना की वजह से ये लोग भी ट्रेड डेफिसिट में जा रहे हैं किंतु चाइना अकेला है जो कि इन लोगों के साथ में लड़ रहा है और फिर भी उन उनको पसीना हो जा रहा है भी इंडिया जैसे कंट्रीज यदि सामने खड़े हो जाए तो पता नहीं इन लोगों की प्रोस्पेरिटी का क्या होगा इसलिए स्वामी जी यहां पर जो कहते हैं कि बहुत ज्यादा वेल्थ वगैरह आ जाएगी और पूरी भौतिक दृष्टि अपनी हो जाएगी तो क्या होगा कि आध्यात्मिकता जीवन में से चली जाएगी भीतर में से हृदय करप्ट हो जाएगा और फिर यह करप्ट हृदय से दो ही बातें कि लोगों का शोषण कैसे करें लोगों की हत्या कैसे करें यही दो चीज होगी कॉलोनी को लूटे और आपस में झगड़ा करें युद्ध करें तो इसलिए स्वामी जी यहां पर कहते हैं कि दूषण या तो इविल सभी सोसाइटी में है यहां पर भारत में एक तरह का है तो वहां पर दूसरी तरह का अच्छा अभी इसके बारे में स्वामी जी आगे क्या कहते हैं वह भी हम कल देखते हैं ओम शांति शांति शांति हरि ओम तत्सत श्री राम कृष्णर्पण मस्तु एक्चुअली देखिए कि मेरी दृष्टि से चाइना इज एन एग्जांपल ऑफ रिफॉर्म एंड इंडिया इज

प्रश्न: चीन और भारत के बीच तुलना

एग्जांपल ऑफ ग्रोथ किस तरह से कि पहले तो कम्युनिस्ट रेवोल्यूशन आया चाइना में इसके बाद में माओ जदो ने क्या किया पूरे देश को कल्चरल रेवोल्यूशन में फेंक दिया अभी कल्चरल रेवोल्यूशन यानी कि पुराने जितने भी क्योंकि उसके मन में था कि यह ब्रिटिश और अमेरिकन सिस्टम ऑफ एजुकेशन वगैरह को नहीं अपनाएंगे और यह जो चाइना की यह जो अंधश्रद्धा हैं उससे मुक्ति नहीं पाएंगे तो चाइना का फ्यूचर कभी ठीक नहीं होने वाला है तो यह कल्चरल रेवोल्यूशन में व जितने भी उनके जो ट्रेडिशनल आइकंस थे रिलीजन थे बुद्धिज्म बुद्धिस्ट मोनेस्ट्री बुद्धिस्ट कल्चर यह जो कन्फ्यूशियस कल्चर सबको जो तोड़फोड़ उसने किया है करोड़ों लोगों को मौत के घाट उतार दिया है व्हिच इज एक्सट्रीमली डेंजरस माने मनुष्य जीवन में इतना बड़ा सिविल वॉर और कहीं देश में देखने को नहीं आया अपने खुद के करोड़ों करोड़ों देश बांधव को 10 12 करोड़ को उसने मार दिया व्हिच इज द लार्जेस्ट नंबर माने सेकंड वर्ल्ड वॉर में जितना हत्या नहीं हुई है उतनी तो माओ ने अपने देश में कर दी है वन ऑफ द ब्लडिस्ट पीरियड इन ह्यूमन हिस्ट्री किंतु बाद में देखिए कि चाइना का जो आज का डेवलपमेंट है ना उसके पीछे में उसका डिक्टेटरशिप उसका ज रीजन है क्यों क्योंकि अभी यह जो 90स में और 2000 में अमेरिका में एनवायरमेंट प्रोटेक्शन लॉ वगैरह इतना यह हो रहा था यूनियन वगैरह कि यह वर्कर के पास में इतना ही काम करवाना है एनवायरमेंट को डैमेज ना हो इस तरह से फैक्ट्री चलानी है कि अमेरिका और यूरोप को एक फैक्ट्री चाहिए थी एक ऐसा देश जो कि फैक्ट्री की तरह काम करे वहां पे ह्यूमन राइट्स ना हो लेबर राइट्स ना हो एनवायरमेंटल प्रोटेक्शन ना हो कुछ ना हो बस वहां से प्रोडक्शन चीप प्रोडक्शन होता जाए और हमको देते रहे तो चाइना के रूप में इनको मिल गया चाइना और अमेरिका का कनेक्शन इसलिए हुआ कि चाइना और सोवियत यूनियन का झगड़ा हो गया था और चाइना ने देखा कि यदि अमेरिका के साथ में मिल जाते हैं तो सोवियत यूनियन के ऊपर में हम लोग और ज्यादा हावी हो जाएंगे बोलकर के यह निक्सन उसने यह चाइना के साथ में फ्रेंडशिप की चाइना को फैक्ट्री बनाया और चाइना में ना ही ह्यूमन राइट्स से कुछ नहीं था वहां पे दिन-रात काम करते रहिए फैक्ट्री में एक्सपोर्ट करते रहिए यह लोग इंपोर्ट करते रहेंगे बोलकर के आज चाइना में फैक्ट्रीज और एक्सपोर्ट इतने चल रहे हैं कोई भी देश इस तरह का अपना ने साथ में अपने देश बांधव के साथ में नहीं कर सकता जो कि चाइना ने किया है सो दैट वी हैव टू रिमेंबर हां इसके बाद में जो दें सियाओ पिंग जो चाइना का लीडर था ही वाज वन ऑफ द ग्रेटेस्ट लीडर उसने देखा कि ये जो कल्चरल रेवोल्यूशन में जो खूना मर की हुई है व उसकी वजह से देश के दो चीज हुई एक तो बेनिफिट यह हुआ है कि पूरे देश में असामाजिक तत्व खत्म हो गए हैं अभी जितने भी लोग हैं चुपचाप हमारी बात सुनेंगे हम हम जो कहेंगे कम्युनिस्ट पार्टी जो कहेगी वो वे लोग करेंगे तो वो एक बेनिफिट हुआ जो डेंजर यह था कि यदि यह लोग अ एजुकेशन को बढ़ावा नहीं देंगे तो फिर ये लोग देश की रेस में पीछे पड़ जाएंगे तो द शियाओपिंग ने एजुकेशन टेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग इंडस्ट्री एक्सपोर्ट इस परे भर दिया तो चाइना का जो हिस्ट्री है मॉडर्न हिस्ट्री ये जो आफ्टर 1945 का दो हिस्सों में बटा हुआ है एक तो दें शियाओपिंग का पीरियड और यह माओज दोंग का पीरियड माओज दोंग 1975 के आसपास तक वो रहा जीवित और तब तक उसने पूरे देश को इतने भयानक परिस्थिति में लाकर खड़ा कर दिया था करोड़ों करोड़ों लोगों की हत्या य कल्चरल रेवोल्यूशन में की है करोड़ों लोगों को मार दिया है कि जद ये दें शियाओपिंग नहीं आता ना तो चाइना की हालत आज पाकिस्तान से भी बदतर होती सो दैट इज द थिंग दैट वी हैव टू रिमेंबर हम भारत में ऐसा कभी नहीं होने देंगे कि पहले तो करोड़ों 1015 करोड़ को मार दो फिर आप इस तरह से एक्सपोर्ट करो एक्सपोर्ट इस तरह से करो कि फ वर्कर का कोई ह्यूमन राइट्स ना हो ये दोनों चीज भारत में नहीं होने वाली भारत में जो हुआ है ग्रोथ हुआ है जो एकदम ग्राउंड लेवल से डेमोक्रेसी धीरे-धीरे करके स्ट्रांग हुई है अपने देश में ठाकुर महा स्वामी जी की वदल से आध्यात्मिकता फैल रही है और अभी देखिए कि सर्विस इंडस्ट्री में सॉफ्टवेयर में हम लोगों का तो नाम है ही है तो धीरे-धीरे होगा स्लोली एंड