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Swami Vivekananda's Macrocosm & Microcosm ·

ज्ञान योग स्वामी विवेकानन्द Cosmos Microcosm 6 Feb 2024

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ओ स्थापक यच धर्मस्य सर्व अवतार राम कृष्णाय नम कल हम अपने क्लास के बारे में थोड़ा सा डिस्कस कर रहे थे किसी ने प्रश्न किया कि एक जो प्रश्न आया था कि हम लोग जो सुनते हैं जो पढ़ते हैं उसके अनुसार हम साधना जब नहीं कर पाते तो मन में से थोड़ी सी एक थोड़ी सी एक कचवा हट एक थोड़ा सा एक गिल्ट फीलिंग प्रकट होता है तो इसके साथ क्या किया जाए तो एक्चुअली हमारा जो डिस्कशन था कि दो तरह की साधना होती है एक साधना है कि जिसमें कि आपको एफर्ट लगाना है और एक साधना है कि जो कक एफर्टलेस साधना है एफर्ट जिसमें लगाना है अथवा तो स्व प्रयत्न करना है या तो फिर जद गीता की भाषा में कहेंगे कि जिसमें पुरुषार्थ है व पुरुषार्थ वाली साधना कौन सी है कि जैसे कि आपने जो कुछ भी सुना जो कुछ भी पढ़ा उसके ऊपर में आप प्रैक्टिस स्टार्ट कर देंगे उसमें जो कहा गया है उसके अनुसार अपने जीवन को ट्रांसफॉर्म करेंगे तो यह हो गया कि आप साधना में फोर्ट लगा रहे हैं साधना में पुरुषार्थ लगा रहे हैं किंतु इस तरह से करना तो सभी लोगों से संभव नहीं इवन हम लोगों से भी हम लोग जो कुछ सुनते हैं हम लोग जब वेदांत पढ़ते हैं वेदांत में जो कुछ भी लिखा गया है उसमें से तो मुश्किल से हम लोगों से 10 20 पर शायद हो सका अपने जीवन में उसको डाल सके अपने जीवन को उसके अनुसार मॉडिफाई कर सके तो एक दूसरी साधना है कि जिसमें कि एफर्ट नहीं लगाना है किंतु जिसको कि सिर्फ अब जैसे कि श्रवण यह श्रवण एक ऐसी साधना है कि बिना पुरुषार्थ किए आप इसको कर सकते हैं और धीरे-धीरे करके देखेंगे कि बहुत दिनों के बाद में सालों सालों इस तरह से श्रवण करने के बाद में इसके संस्कार अपने ऊपर आते जाएंगे यह जैसे यह यात्रा यह नाटक यह पाठ यह सब जो अपने ये जैसे भागवत पाठ है भागवत महात्मा यह स्वामीनारायण की कथा जो कि गुजरात में बड़ी फेमस है यह सब कथाएं जो है रामायण की कथाएं महाभारत की कथाएं इसका तो प्रारंभ ही इसीलिए हुआ आप वैदिक काल में देखेंगे कि ऋषि मुनि तपस्या करते थे और इसके बाद में होम या हवन किया करते थे यह पाठ का प्रारंभ ये जब भक्ति मूवमेंट स्टार्ट हुई तब हुआ पता चला कि इस तरह से तपस्या करना ऋषि मुनियों की तरह या तो फिर जिस तरह से क्षत्रिय थे क्षत्रिय लोगों ने यह वेदांत प्रारंभ किया अभी वेदांत तो जो ब्राह्मण स्कूल है उससे भी कहीं ज्यादा टफ है उससे भी कहीं ज्यादा पुरुषार्थ करने वाला है यह भगवान बुद्ध के बारे में जद हम पढ़ेंगे कि जिस तरह से अपना घर छोड़ कर के वन में जाकर के जिस तरह से उन्होंने तिनक भर खा कर के थोड़ा सा आहार करेंगे और दिन भर वह ध्यान करते रहेंगे जप करते रहेंगे व जब तपस्या देखेंगे तो उसमें तो और भी ज्यादा पुरुषार्थ है जैसे तपस्या का जो पावर है जितना पुरुषार्थ करना पड़ता है उतना तपस्या का पावर बढ़ता जाता है किंतु फिर एक बहुत बड़ा वर्ग है समाज का जो कि इस तरह से पुरुषार्थ करके तपस्या नहीं कर सकता उनके लिए थोड़ा सा सहज रास्ता चाहिए वह है स्मरण और मनन जद आपने इस इसलिए महाभारत को देखिए आप भागवत को देखिए रामायण में भगवान राम की लीलाएं देखिए या तो फिर चैतन्य चरिता मृत है या तो फिर ठाकुर का यह कथामृत है स्वामी जी का कंप्लीट वर्क से यह सब किताबों का किताबों का महात्म्य क्या है इसको आप पढ़ेंगे इसका इसके बारे में आप श्रवण करेंगे तो धीरे-धीरे जाकर के पुरुषार्थ इसमें इतना नहीं लगाना है गुजरात में जैसे कि अभी यहां पर एक डिवटी आए थे उनके साथ में मैं बात कर रहा था अपना जो डायरो कल्चर गुजरात में पूरी रात भर तक जो कथाकार होते हैं वो एक के बाद एक भजन गा ते ही जाएंगे और कथा करते ही जाएंगे इन लोगों की जो कैपेसिटी होती है पाच छ घंटे तक कंटीन्यूअस इस तरह से कथा करने की अद्भुत है हां बीच-बीच में और कोई लोग भजन गाएंगे यह लोग थोड़ा सा विश्राम कर लेंगे यह बात है किंतु फिर भी इस तरह से सतत कथा करते ही जाना डे आफ्टर डे यह भी तो गॉड गिफ्टेड एक स्किल है एक उनके पास में एक भगवान की यह गिफ्ट है तो यसे डायरो जो होता है यह गुजरात में और हर जगह प जैसे बंगाल में यात्रा फेमस है ये अभी जैसे यह रामायण महाभारत टीवी सीरीज था तो यह सब क्या है इसको कहेंगे कि एक तरह से यदि खास करके टीवी सीरीज के बारे में कहा जाए कि एक तरह का सात्विक एंटरटेनमेंट है जब मेरे से पुरुषार्थ नहीं होता है तो मैं वह रास्ता इस्तेमाल करूंगा जो कि लिस्ट अमाउंट ऑफ पुरुषार्थ लीस्ट अमाउंट ऑफ एफर्ट सबसे कम पुरुषार्थ में मैं इसको कर स तो इस तरह से श्रवण और दर्शन यह दो जैसे कि मंदिर में जाएंगे आरती आप देखेंगे आरती का दर्शन करेंगे या तो फिर इस तरह से कोई किसी का भी क्लास आप अटेंड करेंगे ठाकुर महा स्वामी जी की बातें सुनेंगे यह नियमित रूप से होते रहना यह भी एक सहज साधना का मार्ग है किंतु यहां पर एक बात ख्याल रखनी है जब एक कैजुअल आप रीड करते हैं या कैजुअल किसी क्लास को अटेंड करते हैं और इसको साधना में परिणत करते हैं इन दोनों के बीच में डिफरेंस क्या है डिफरेंस यह है साधना का मेन डेफिनेशन ही है रेगुलेरिटी यदि आप पुरुषार्थ ना कर पाए ऐसा कहा गया है कि काम और कांचन का त्याग करना है अच्छा यह तो होने वाला नहीं है मेरे से भी 100% इस एक जन्म की तो यह बात नहीं है जन्म जन्मांतर की यात्रा है कि अपने मन से किसी भी तरह की भोग और वासना के प्रति थोड़ी सी भी लिप्सा थोड़ी सी भी लालच हो संपूर्ण रूप से उसको निर्म मुक्त कर दो यह तो जन्म जन्मांतर की साधना है किंतु अभी यह नहीं होगा तो मान लीजिए मैं कथामृत पढ़ता हूं किंतु यदि कथामृत पढ़ने को मुझे साधना बनाना है तो उसको मुझे रेगुलेरिटी रखना होगा इवन यदि सहज साधना भी है वह साधना तभी होगी जब इसको आप नियमित रूप से करेंगे तो यह नियमितता यह हो गई आपकी साधना तो मैंने जब इनके साथ में मेरा डिस्कस हो रहा था अपने डिवटी के साथ में तो उनका जो था कि मन में गिल्ट फीलिंग है तो मैं क्या करूं तो मैंने कहा कि यह जो आप क्लास कर रहे हैं दैट इट सेल्फ इज अ साधना क्योंकि आप बड़े नियमित रूप से कर रहा है मैं भी मैं बीच-बीच में ऐसा होता था कि कभी-कभी मैं सोचता था चलो आज क्लास नहीं करना है आज छुट्टी लगा देना है किंतु धीरे-धीरे करके यह जो कांसेप्ट है क्लास सिर्फ क्लास नहीं है सिर्फ एक इंस्ट्रक्शन मैनुअल यहां पर नहीं पढ़ा जाता कि आपको जीवन कैसे जीना है यह क्लास एक साधना भी है यह मैंने अपने खुद के भीतर में अनुभव किया हम लोग वैसे मंगलारती में जाते हैं मंगलारती में से आकर के रूम में बैठ कर के थोड़ा सा जब ध्यान हो सकता है तो करेंगे वरना पाठ करेंगे कथामृत का या ऐसी कोई किताबों का यह तो हमारे लिए साधना है ही है किंतु क्लास मेरे लिए इस तरह से सुबह-सुबह ठाकुर मा स्वामी जी की बात आरंभ करके मेरा दिन प्रारंभ करना ये साधना ये मैंने रिसेंटली धीरे-धीरे करके अनुभव किया है और इसके बाद में मैंने छुट्टी लगाना बहुत कम कर दिया है तो यह नियमितता मेंटेन करना ट इट सेल्फ इज अ ग्रेट साधना देखिए एक डिवटी मुझे उनके साथ में बात हो रही थी तो वह क्या करते हैं कि जब क्लास के समय ना वो मंत्र लिखते हैं नोटबुक में तो इससे क्या होता है कि नोटबुक में मंत्र लिखते हैं तो इससे मंत्र का जब भी हो जाता है और इस तरह से श्रवण भी हो जाता है तो वो उनका एक बड़ा ही सुंदर रूटीन बन गया है सुबह सुबह इस तरह से रूटीन बन जाना एक पार्टिकुलर साधना का वोह कितना एक अच्छी बात है तो यह तो एक है कि नियमितता जब इसको मेंटेन करेंगे तो यह साधना हो जाएगी धीरे-धीरे करके आज नहीं ना कल कल नहीं ना परसों थोड़े बहुत समय के बाद में पता चलेगा कि अपने जीवन को किस तरह से यह ट्रांसफॉर्म करता है अच्छा यहां तक तो बात आई किंतु फिर जो प्रश्न हुआ कि हम ऐसे लोगों को देखते हैं जो लोग वैसे तो बहुत ज्यादा भक्ति का दिखावा करते हैं यह जो बात है ना कि एफर्टलेस साधना इसका एक जो खतरा है एक जो डेंजर है वो क्या है कि कोईकोई लोग भक्ति का तो दिखावा बड़ा करते हैं किंतु उनका आचरण उनका जीवन ये जो बताया गया है जो सुना गया है उससे बिल्कुल विपरीत होता है तो ये इसके बारे में क्या कहेंगे तो देखिए इसके बारे में अपने हिंदी में एक बड़ी सुंदर कहावत है मुख में राम बगल में छोरी यह लोगों के भीतर में कोई विवेक वैराग्य नहीं होता ऐसी कोई इच्छा शायद नहीं होगी कि हां मैं साधना करके अपने जीवन को मॉडिफाई करूं उनको शायद ऐसा लगता होगा कि यह जो दिखावा है धर्मा इसको मैं एक टूल के रूप में इस्तेमाल करके लोगों को मैं भ्रमित कर सकता हूं आजकल क्या है कि धर्म थोड़ा सा एक अपने समाज में इसका वितरण होने लगा है सभी लोग बोलते हैं कि हां अच्छा धर्म होना बहुत अच्छी बात है जब तो मैं इस तरह से दिखावा जद थोड़ा सा करूंगा तो लोग थोड़े प्रभावित हो जाएंगे और मेरा मेरे ऊपर में जो ट्रस्ट है वो लोगों का बढ़ेगा तो वो एक है कि धर्म का दिखावा करके फिर अनाचार करना और एक दूसरा एक बात है कि एक विवेक बोलकर के एक बहुत बड़ा फैक्टर अपने हृदय में है विवेक अर्थात की एक एक डिजायर फॉर मुमुक्षु तोव डिजायर फॉर ईश्वर प्राप्ति हां यह विवेक किसी में स्ट्रांग होगा किसी में वीक होगा किंतु जिसमें विवेक है वही साधना के पथ पर जाएगा एक समय ऐसा आ सकता है शायद कि साधना करते करते गलतियां होने लगे तो यह विवेक इमीडिएट जागृत होकर के हमको कहेगा कि अरे भाई यह जो तुम कर रहे हो वो गलत है हां यह विवेक गिल्ट में ना परिणत हो जाए ये देखना है वो एक फैक्टर है किंतु विवेक जद मर जाता है एक समय के बाद में विवेक संपूर्ण रूप से हमको जद गुस्सा आता है अरे ये तो बार-बार मेरे मन में गिल्ट फीलिंग प्रकट कर रहा है इसको हटा दो मेरे मन में से ऐसा करके जद आपने विवेक को ही भगा दिया तो क्या होगा कि एक भयानक प्रकार का एक क्या कहेंगे कि कंप्लेसेंसी इंग्लिश वर्ड है एक निश्चिंत आ जाएगी निश्चिंता वैसे थोड़ा सा पॉजिटिव इसके ऊपर में लगता है कंप्लेसेंसी का एग्जैक्ट क्या होगा देखना पड़ेगा किंतु मन के भीतर में से एक ऐसा आ जाएगा कि अच्छा चलता है चलने दो क्या है मैं सुबह को इस तरह से आरती भी करता हूं पूजा भी करता हूं शायद पाट भी नियमित करता हंगा किंतु इसका मैं अपना बाकी का जीवन जिसमें कि मैं भयानक रूप से करप्ट हूं डजन मैटर दोनों साथ-साथ में चलते रहे ये कब होगा जबक विवेक मर जाएगा तब जबक विवेक संपूर्ण रूप से शांत हो जाएगा तो देखिए कि धर्म जो है उसका कितना एक लंबा स्पेक्ट्रम है एक तो है कि आप धर्म का दिखावा करके दूसरे को ठग रहे हैं दूसरा है कि आपने धर्म की शुरुआत तो की किंतु एक समय ऐसा आ गया कि भीतर में से जो बार-बार होता है कि अरे भाई मैं जो कर रहा हूं वो ठीक नहीं कर रहा हूं वो ठीक नहीं तो इसका दो परिणाम होगा या तो है कि मैं अपना जीवन को सही सही परिणत करने की शुरुआत करूंगा या तो फिर यह जो अंतरात्मा की आवाज में उसको मार दूंगा य भी जाने दो इसको इससे छुटकारा पाओ बिना मतलब सब समय मुझे वो टोकता रहता है तो फिर उसको ही मैं खत्म कर दूंगा तो साधना की शुरुआत के बाद में विवेक जागृत होता है भीतर में से ऐसी कोई आवाज आती है तो उसका दो परिणाम आता है एक तो है कि लोग इसको इसी को सुला देते हैं भाई अभी तुम जाओ मुझे परेशान करना बंद करो और दूसरा है कि उसके अनुसार जीवन पर ट्रांसफॉर्म करते हैं और फिर एक हाईएस्ट स्टेज है कि जो लोग ऐसा सोचते हैं कि हां जो पुरुषार्थ है उसको धीरे-धीरे करके और ज्यादा से ज्यादा बढ़ाना चाहिए जितना मैं पुरुषार्थ बढ़ाऊ इतनी में इतने कम जन्म लगेंगे मुझे ईश्वर प्राप्ति के लिए इतने कम जन्म लगेंगे मुझे निर्वाण प्राप्ति के लिए तो यह पूरा स्पेक्ट्रम है एक और है कि आपका धर्म के नाम पर दुराचार दूसरा है कि विवेक का आप किस तरह से मैनेज करते हैं विवेक की बात सुन कर के अपने जीवन को ट्रांसफॉर्म करते हैं ना कि विवेक से परेशान होकर के विवेक को ही सुला देते हैं और एक हाईएस्ट स्टेज है विवेक की जब बात सुन ली तो फिर अपने जीवन को स्पीड अप करना साधना को पुरुषार्थ को और ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा देना जितना हो सके उतना मेहनत करना जिससे कि मैं इतना जल्दी से ईश्वर प्राप्ति कर सकूं अभी देखिए कि ज्यादातर लोग जो होते हैं इंक्लूडिंग माइसेल्फ वो यह सेकंड कैटेगरी में आते हैं कि विवेक की बात सुन कर के जीवन को ट्रांसफॉर्म करने की शुरुआत तो की है किंतु पुरुषार्थ कोई इतना प्रचंड नहीं है कि जैसे कि मैं रात रात जैसे कि हमारे ट्रेनिंग सेंटर में जप यज्ञ होता था जप यज्ञ में क्या है कि सैटरडे नाइट को वैसे तो सभी दिन मंडे से लेकर के सैटरडे तक सुबह को 4 बजे से 3:30 बजे जो हमारा दिन प्रारंभ होता था तो रात को सीधे सोते-सोते 11:00 बज जाते थे एकदम कंटीन्यूअस आपका रूटीन क्लास एंड ड्यूटी क्लास एंड ड्यूटी फिर मेडिटेशन यह सब स्वाध्याय यह सब चलता रहता था किंतु संडे को एक दिन छुट्टी रहती थी क्लास में तो संडे को वह क्लीनिंग करना होता था इतना बड़ा ट्रेनिंग सेंटर है हम ब्रह्मचारी लोग ही क्लीन करते थे किंतु क्लीनिंग के बाद में थोड़ा सा समय मिलता था तो ऐसा स्टार्ट हुआ कि सैटरडे नाइट को जप यज्ञ आरंभ करेंगे जप यज्ञ का क्या अर्थ है कि पूरी रात जग करके जप करना है तो ऐसा ओरिजिनल जब थिंकिंग हुआ होगा तो ऐसा सोचा होगा कि अरे चलो सभी ब्रह्मचारी मिलकर के पूरी रात भर जप करेंगे किंतु कुछ ही समय के बाद पता चला कि सभी लोग बैठ करके पूरी रात तो जप करने वाले नहीं है फिर ऐसा हुआ कि वो आधी रात जब होती है वैसे प्रारंभ तो जैसे वो कहते हैं ना कि आरंभ शरा जैसे 8 बजे के 8:30 बजे प्रारंभ होता है तो सभी लोग आक के बैठ जाएंगे किंतु जैसे 12:00 बजते हैं एक बजते हैं धीरे-धीरे करके होल खाली होता जाता है तो अभी इसका सोल्यूशन क्या करेंगे यज्ञ का अर्थ है कि बिना विराम के बिना किसी इंटरप्शन से यह चलता रहे तो ऐसा तो नहीं चलेगा कि रात को 1200 बजे सब चले जाए और फिर से न बजे नींद अच्छे से लगा कर के वापस आ जाए उसको तो यज्ञ नहीं कहते यज्ञ का अर्थ है कि जब तो अविराम चलना चाहिए तो क्या सोल्यूशन है कि सभी का टाइम अलट कर दो यह 8 से 9 बजे तक बैठेगा यह ब्रह्मचारी यह 9 से 10 बजे तक बैठेगा तो इसमें जब जिसकी ड्यूटी ये एक से दो दो से तीन ऐसी आती थी ये लोग बेचारे बड़े परेशान हो जाते थे माइसेल्फ इंक्लूडेड कोई कोई था कि जिनको बताना नहीं पड़ता था कि आपको इस तरह से जप करना है पूरी रात बैठेंगे और वो कोई कोई तो सामने से वॉलंटस है 12 से लेकर के तीन का हमको यह समय दो किंतु जैसे मेरे खास करके मैं मुझे इस तरह से रात को जब करना पसंद नहीं था अर्ली मॉर्निंग करते हैं इवनिंग करते हैं ठीक है रात को जग करके फिर दूसरा दिन बिगड़ता है फिर व पढ़ाई ठीक से नहीं होती है यह ऐसा मेरे मन में था नहीं होना चाहिए किंतु था यह है कि हम लोग उत्तम अधिकारी नहीं है हम लोग खास करके मैं अपने को मध्यम अधिकारी मानता हूं तो ये जब मध्यम अधिकारी है तो हमारे लिए जो साधना है वह एफर्टलेस साधना किंतु संपूर्ण रूप से नियमित होनी चाहिए फिर उसमें जद विराम लगता है तो फिर साधना में गड़बड़ मने वो फिर वोह एक बार इंटरप्शन होता है या गैप आता है तो फिर से नए सिरे से शुरू करना और एक अपना प्रवाह जो पिकअप पकड़ रहा था उसमें फिर वह थोड़ा सा इंटरप्शन आ जाता है फिर से पिकअप पकड़ने के लिए फिर से आपको लंबे समय तक क्लास करना पड़ता है तो यह क्लास के बारे में एक डिस्कशन कि हमारा जो आखिरी दो तीन दिन में हुआ अच्छा अभी स्वामी जी का ज्ञान योग कॉस्मो मैक्रो कजम कल हमने एक बड़ा ही टिपिकल टिपिकल विवेकानंद स्वामी जी जो बीच-बीच में यह कुट लोक लगाते हैं एक एकदम कॉम्प्लिकेटेड एक थिरी जो हमारे सामने प्रेजेंट करते हैं और खास करके ये कॉस्मो लेक्चर के कांटेक्ट में स्वामी जी जिस तरह से वेदांत के आइडियाज को मॉडर्न कॉस्मोलॉजी के साथ में जोड़ते हैं उसका एक यह पैसेज कल हमने देखा और हमने इस अप्रोच के साथ में जो एक छोटा सा ड्रॉबैक है वह भी हमने डिस्कस किया था कि यह 19th सेंचुरी का साइंस है जिसके बारे में स्वामी जी बात कर रहे थे टुडे इन 20th सेंचुरी 21 सेंचुरी साइंस के आइडियाज इतने चेंज हो गए हैं खास कर के ये क्वांटम डायनेमिक्स और रिलेटिविटी के आने की बज ज से कि यह स्वामी जी के आइडियाज एज इट इज 100% नहीं चलते किंतु फिर भी आश्चर्य की बात है कि स्वामी जी वो सो एडवांस खास करके यह जो निकोला टेस्ला के साथ में स्वामी जी का जो डिस्कशन हुआ था इसके बारे में मेरी लुईस ने बड़ा अच्छा विश्लेषण किया है बड़ा ही अच्छा एनालिसिस किया है तो मेरी लुईस का जो कंक्लूजन है अभी देखिए कि स्वामी जी और टेस्ला के साथ में जो बात हुई इसके बारे में और कोई इस तरह से रिस स बहुत ज्यादा नहीं हुआ है जो कि होना चाहिए रामकृष्णा मिशन में इस तरह से हमारे डिवटी है एक बहुत ही एक कंटीन्यूअस रिसर्च होने चाहिए जो कि इवेंट स्वामी जी के जीवन में बड़ी-बड़ी घटनाएं थी उसमें से एक बहुत बड़ी इवेंट थी यह टेस्ला के साथ में स्वामी जी का वार्तालाप तो अभी मैंने और कहीं पर इतना ज्यादा डिटेल में नहीं पढ़ा किंतु मेरी लुईज इसका बड़ा ही सुंदर यह करती है एनालिसिस करती है तो उसका ना है कि जब टेस्ला पहली बार स्वामी जी से मिला तो वह इतना प्रभावित हो गया था और टेस्ला के बारे में थोड़ा सा बैकग्राउंड देती है वह क्या है कि बड़ा ही उसका मतलब विल पावर बड़ा स्ट्रांग था और जिन लोगों का विल पावर स्ट्रांग होता है थोड़ा बहुत तो ईगो आ ही जाता है तो वोह बड़े अच्छे कपड़े पहनता था बड़ी बड़ी सुंदर होटल में बड़ी महंगी होटल में अकेला खाना खाता था माने एक बहुत बड़ा टेबल जैसे किय ई ये एंबेसेडर होते हैं ना बड़े-बड़े कंट्रीज के तो कोई बहुत बड़ी होटल में जाते हैं तो उनके लिए जो डाइनिंग हॉल बहुत ही एक भव्य डाइनिंग हॉल होता है एक बड़ा टेबल उनके लिए सजाया जाता है और नौकर चाकर सब खड़े रहते हैं कि ये जो एंबेसडर है या तो फिर ये स्टेट रिप्रेजेंटेटिव है वो जो बोलेंगे वो देंगे तो टेस्ला का ऐसा हैबिट था कि ऐसी महंगी होटल में बहुत बड़ा टेबल सजाया हुआ है सब नौकर चाकर खड़े किंतु अकेला खाना खाएगा उसका मतलब ये उसके भीतर में था मने मेंटल स्ट्रेंथ थी और अपना एक सेल्फ इंपोर्टेंस भी इतना था तो ये टेस्ला उसको मिलने के लिए जिसको मिलना है वो रा वेटिंग लिस्ट में खड़ा रहना पड़ता है अपॉइंटमेंट लेनी पड़ती है यह टेस्ला स्वामी जी के क्लास में जाकर के स्वामी जी के क्लासेस अटेंड करता था यहां तक कि व देरी से आता था क्योंकि वोह लैब में काम करता था तो आते-आते थोड़ा सा देरी हो जाता था तो उसके लिए बैठने की जगह नहीं रहती थी तो वो पीछे में खड़े रह कर के स्वामी जी के क्लासेस सुनता था तो यहां तक वो स्वामी जी के बारे में वो स्वामी जी से प्रभावित हो गया था उसके बाद में एक दिन एक डिवोटा ने दोनों का मीटिंग रखा जैसे यह सोशलाइज सोशलाइट सर्कल में होता है ना जो समाज के वो लोग होते हैं कि जो कि हम बड़े प्रभावशाली है हमारा समाज में बहुत बड़ा नाम है इसको सोशलाइट कहते हैं वहां अमेरिका की लैंग्वेज में तो वे लोग क्या करेंगे इस तरह से समाज में जो लब्ध प्रतिष्ठित जिनका बड़ा नाम है उन लोगों को घर में कोई पार्टी करेंगे और फिर इन लोगों को बुलाएंगे और फिर सभी लोग यह जो सोशल न्यूज़पेपर है ना आज आजकल जैसे सोशल मीडिया उस समय वो येलो जर्नलिज्म जैसा होता था तो ऐसे वो वो जर्नलिस्ट होते थे कि इस तरह की बड़ी-बड़ी पार्टी में जाकर के देखेंगे कि कौन बड़ा इस तरह का आदमी आया है यहां पे तो ऐसे वो न्यूयॉर्क की एक सोशलाइट थी एक लेडी उसने एक पार्टी की और इसमें स्वामी जी और निकोला टेस्ला को बुलाया दोनों वहां पे गए और फिर उसने फर जैसे होता है कि वो दोनों मिले और बहुत सारा डिस्कशन स्टार्ट किया टेस्ला ने कहा भी सही कि आपके साथ में जो मेरा डिस्कशन है उसको आगे बढ़ाने की मेरी बहुत इच्छा है आप एक काम कीजिए यहां पर तो इतना संभव नहीं होगा मेरी लैब पे आई है तो स्वामी जी उसकी लैब में गए भी थे अभी जाकर के किंतु कुछ दिनों के बाद में स्वामी जी और टेस्ला का संपर्क छिन्न हो गया उनका संपर्क रुक गया तो अभी मेरी लुईस यहां से आगे चलाती है वह क्या कहती है उसका जो एनालिसिस है कि टेस्ला के जो आइडियाज है ऑफकोर्स 19 सेंचुरी फिजिक्स के जो कांसेप्ट है स्पेस टाइम एंड कॉस्मोलॉजी उसके ऊपर में बने हुए थे जबकि स्वामी जी के जो आइडियाज थे वो इतने एडवांस थे कि उसके साथ में मिल नहीं रहे थे अभी अभी क्या होगा कि जो एमपिर होता है ना साइंस का क्या अर्थ है आप स्पेक्युलेटिव जो मैथमेटिक्स आपको बताता है या तो फिर जो प्रैक्टिकल जो प्रयोग करके आप खोज निकालते हैं यानी एमपिर कल एविडेंस आपकी इंद्रियों द्वारा ग्राह्य या तो आपके मन द्वारा स्वीकृत लॉजिक के अनुसार जो एविडेंस होता है वो ग्रहण करें उसको एक्सेप्ट करें उसको साइंस कहेंगे नहीं कि मैं ये स्पेक्युलेटिव हो गया साइंस एंड फिलोसोफी आर कंपलीटली डिफरेंट और फिलोसोफी में से साइंस सेपरेट किया यही तो अ वेस्टर्न सिविलाइजेशन की सबसे बड़ी सिद्धि है वही तो सबसे बड़ी विक्ट्री है हमारी ईस्टर्न सिविलाइजेशन के साथ में क्या हुआ कि सब समय स्पेक्युलेटिंग को हम लोग साथ-साथ में चलाते रहे इसका अर्थ यह आया कि हम लोग किसी भी तरह की टेक्नोलॉजी या तो फिर किसी भी तरह की इंडस्ट्रीज डेवलप ना कर पाए जब उन्होंने क्या किया कि स्पेक्युलेटिव इनको साइंस टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्रियल इजेशन के रूप में मिला तो ये वेस्टर्न मैन जब भी कोई ईस्टर्न पर्सन के साथ में ईस्टर्न मैन के साथ में बात करता है एट द बैक ऑफ हिज माइंड उसके मन में हमेशा यह सुपीरियोर की भावना रहेगी ही रहेगी कि हम जीत गए हैं इन द वॉर ऑफ सिविलाइजेशन और इन द मार्च ऑफ सिविलाइजेशन वी आर द विक्टर्स नाउ ये सिविलाइजेशन सभ्यता मानव समाज इसका ये आगे कुछ है उसमें हम लोग सबसे आगे हैं और हमारी इस रेस में जीत हुई है तो नेचुरली जब ये टेस्ला का स्वामी जी के साथ में डिस्कशन स्टार्ट हुआ और टेस्ला ने जैसे ही देखा कि वैसे स्वामी जी बहुत ब्रिलियंट है जबकि वह स्पिरिचुअलिटी एक्सप्लेन करते हैं किंतु यह स्पिरिचुअलिटी और साइंस का जो संगम स्थल है इन दोनों के बीच में जो संधि स्थल है वहां पर जब स्वामी जी जाते हैं तो स्वामी जी के आइडियाज वैसे तो बहुत ज्यादा मैच हो जाते हैं 19th सेंचुरी साइंस के साथ में किंतु थोड़ा सा ज्यादा प्रोब करेंगे थोड़ा सा ज्यादा डिटेल में जाएंगे तो इतना म डिफरेंट डायवर्जेंस होता है से डिफरेंट होने लगता है कि वह किसी भी तरह से उसको एक्सेप्ट नहीं कर पाएगा तो टेस्ला का था कि यह आज की पोजीशन है और इस पोजीशन के अनुसार यह होना चाहिए यदि आप कहते हैं वेदांत और कॉस्मोलॉजी या तो फिर वेदांत और मॉडर्न साइंस का कोई डिफरेंस नहीं है डायवर्जेंस नहीं है तो यह आज का साइंस कहता है और इसके साथ में आपको वेदांत को मिलाना होगा अभी देखिए स्वामी जी का यह जो आईडिया था कि म अभी स्पेक्युलेटिव साइ को बीच में लाने की जरूरत ही नहीं है वेदांत का जो स्पेस एंड टाइम का कांसेप्ट है ब्रह्मा का एक दिन यानी कि अपने कितने कोटि कोटी साल बरस तो अभी वहां पर तो बाइबल में कहते हैं कि 4000 साल पहले विश्व की शुरुआत हुई जब ये साथ किंतु जब ये इवोल्यूशन है और मॉडर्न कॉस्मोलॉजी है कहता है कि नहीं भाई यह 4000 साल पहले 5000 साल पहले कुछ नहीं हुआ ये तो कोटि कोटी सालों से ये चल रहा है तो इमीडिएट ये अपने वेदांत के साथ में मिलना शुरू हो जाता है किंतु वेदांत तो इससे भी कितना आगे जाता है ब्रह्मा का एक साल यानी कि यहां पे इतना करके ये जो फिर साइक्लिकल कांसेप्ट ऑफ यूनिवर्स है ये तो इतना तो वे लोग एक्सेप्ट नहीं करते ना तो स्वामी जी के भी एक कंफ्लेक्स हद तक मॉडर्न साइंस को के बेस पे वो अपने वेदांत के आइडियाज प्रेजेंट करें क्योंकि इसका एक आकर्षण यह है कि यदि स्वामी जी कहते हैं कि हां ये 19 अभी हम लोग 19 सेंचुरी कर रहे हैं उन लोगों की दृष्टि से तो कटिंग एज साइंस है तो ये कटिंग एज साइंस आज का जो लेटेस्ट डिस्कवरी और इनोवेशंस या तो तो फिर कहेंगे इन्वेंशन है इन्वेंशन तो नहीं बेसिक साइंस में इन्वेंशन नहीं होता वो डिस्कवरीज होती है तो ये जो बेसिक साइंस की जो फंडामेंटल डिस्कवरीज है आपके जो कंक्लूजन है इसके साथ में वेदांत मिल रहा है यदि स्वामी जी ऐसा कहते तो इमीडिएट बहुत सारे लोग स्वामी जी की बातों को स्वीकार करना शुरू कर देते हैं किंतु इस बात का डेंजर क्या है देखिए इसका बेनिफिट ये है कि आपको जन समाज में या तो फिर यह बौद्धिक वर्ग है इंटेलेक्चुअल क्लास जो है उसमें इमीडिएट आपको यह प्र की यह मिलना शुरू हो जाएगी रिकॉग्निशन किंतु इसका डेंजर क्या है स्वामी जी को पता है कि इवन यह साइंस जिसको कि आज बड़ा मॉडर्न माना जा रहा है वेदांत की दृष्टि से इट इज स्टिल टेकिंग बेबी स्टेप्स वेदांत की दृष्टि से अभी तो वह पनप रहा है इसका तो प्रारंभ हुआ है यह मैच्योर फॉर्म जब धारण करेगा मॉडर्न साइंस मॉडर्न कॉस्मोलॉजी तो इसका तो और कहीं विकास होना है और सही में हुआ भी सही 1900 इन द ईयर 1900 क्वांटम डायनेमिक मिक्स डिस्कवर हुआ और इन द ईयर 1905 1905 में स्पेशल थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी फर्स्ट पेपर पब्लिश हुआ तो ये कुछ ही सालों में ये एकदम हरण फाड़ जिसको कहते हैं ना कि मने लिप्स एंड बाउंड प्रोग्रेस होना शुरू हो गया था साइंस में तो स्वामी जी को तो पता है तो अभी ये स्वामी जी के मन में भी तो कंफ्लेक्स पेक्युलरली यह जो एरिस्टोटल था यह सोक्रेट था यह प्लेटो था वे लोग जैसे हवाहवा में तीर मारते थे ना वो अपने जहां पर बैठे हैं कुर्सी पर खड़े होकर के एक एक्सपेरिमेंट नहीं करेंगे ऐसा वो बोलते थे कि जद एक एक फिदर है यानी कि पंखी की एक पांक और और एक लोहे का बोल है जो दोनों को आप हवा में से डाले छोड़ेंगे तो क्या होगा आप बड़ी ऊंचाई से फेंकें तो लोहे का जो पहले जमीन पर गिरेगा और यह जो फिदर है वह धीरे-धीरे करके जमीन पर गिरेगा क्यों क्योंकि इसका मास ज्यादा है इसका मास कम है क् अभी यह बात इतने हजार 2000 साल तक स्पेक्युलेटिंग जाकर के किसी ने एक्सपेरिमेंट किया कि वैक्यूम चेंबर में दोनों को फेंको देखो क्या होता है तो दोनों साथ में गिरते हैं एक्चुअली हवा का जो ये झोंका होता है बोलकर के फिदर इधर-उधर उड़ता है किंतु हवा नहीं होती वैक्यूम चेंबर दोनों साथ में गिरते है तो अभी आप इसके बारे में रहिए काउंटर आर्गुमेंट आर्गुमेंट करते रहिए एक आदमी ऐसा नहीं निकला 2000 साल में जिसने कि अपनी कुर्सी से खड़े होकर के एक्सपेरिमेंट करके प्रूव कर दिया हो कि भाई यह सही है या गलत है यानी कि जो स्पेक्युलेटिव इतने इंप्रैक्टिकल होते हैं कि जो कि बहुत सहज रूप से जिसको कि आप इसका कंक्लूजन ला सकते हैं वो भी आप नहीं करेंगे कभी कभी तो ऐसा लगता है कि कंफ्लेक्स या तो फिर इस तरह से विरोधाभास खड़ा करना इनको और ज्यादा अच्छा लगता है जैसे कि इनकी रोजी रोटी मिलती रहे ऐसा कभी-कभी लग जाता है तो ये मॉडर्न साइंस और स्पेक्युलेटिंग स्पीकिंग कंट्रीज थे और या तो कि फिर कहेंगे कि मॉडर्न यूरोप के ये जर्मनी फ्रांस ये ब्रिटेन और अमेरिका खास करके ये चार कंट्रीज तो ये चार कंट्रीज में ऐसा एकदम पक्का था कि जैसे ही आपने यानी कि आप ये ईस्टर्न डायरेक्शन में चले गए जैसे कि उस समय का रशिया था उस समय का टर्की था ये सब ऐसे-ऐसे पुराने पुराने देश थे कि स्पेक्युलेटिव हर गए और ये जो मैंने ईस्टर्न सिविलाइजेशन का केंद्र कहा जाए या तो फिर स्पेक्युलेटिंग वो बैठे-बैठे हवा में में तत मार रहे हैं सही गलत या तो फिर फैक्ट है ना कि क्या है किसको पता तो अभी स्वामी जी के साथ में इसने जब बात करने की शुरुआत की निकोला टेस्ला ने इमीडिएट वो समझ गया कि एट वन पॉइंट स्वामी जी स्पेक्युलेटिंग ने स्पेक्युलेटिव चले जाते हैं तो स्वामी जी के सामने में ये हमेशा था यदि ऐसा कह देते कि 19th सेंचुरी का जो साइंस है उसके साथ में मेरा 100% मैच हो रहा है तो इमीडिएट रिकॉग्निशन मिल जाता किंतु कुछ ही सालों में स्वामी जी की ही थिरी वो फलसिफाई हो जाती क्योंकि नईनई इन्वेंशन होती है तो अभी लोग यह सब चीजें क्या उपमा के रूप में है ये अब ऐसा नहीं है कि हम लोग फिजिकल वर्ल्ड की जो फिनोमिना है उसको हम मेंटल वर्ल्ड की फिनोमिना के साथ में जोड़ते हैं यह सब बहुत सारा तो उसको एक् एक्सप्लेन करने के लिए उपमा के रूप में दिया जाता है और यदि सही सही में मैच होते भी होंगे तो भी तो किसको पता क्योंकि यदि यह एक गलत हो गया मान लीजिए कि साइंस के कांसेप्ट डेवलप होना शुरू हो गए तो य व कहा कि ये टेस्ला जो कह रहा था वो गलत है वो कि एक्चुअली सही में साबित हो ही गया ये 1015 साल में ही कि पुराना जो फिजिक्स है वो चला गया है अभी नया फिजिक्स नया कॉस्मोलॉजी आ गया है तो 10 ही साल में यदि उस समय का फिजिक्स गलत साबित हो जाता या तो फिर कहा जाता कि ये प्रीम स्वरूप है उस सब का और यह एडवांस स्वरूप है तो स्वामी जी का वेदांत का क्या होता मैंने जिस चीज को इमीडिएट रिकॉग्निशन मिल गई थी उसको इमीडिएट रिजेक्ट भी कर दिया जाता तो स्वामी जी हैज टू स्ट्रेडर दिस टू वर्ल्ड स्वामी जी को ये दोनों चीजों को लेकर के चलना था बैलेंस करना था कि एक और तो है कि मॉडर्न साइंस उस समय के साथ में मिलकर के चलते हैं और दूसरा है कि अपने आजकल यूनिवर्सिटीज में यह अरबिंदो है या वगैरा लोग है उनके फिलोसोफी के क्लासेस चलते हैं स्वामी जी के नहीं चलते क्योंकि स्वामी जी किसी भी एक टाइम पीरियड में किसी भी एक पार्टिकुलर फॉर्मूलेशन में अपने को बांध नहीं सकते थे आज ऐसा कोई नहीं कहेगा कि यह जो फिलोसोफी है अरविंदो की या तो फिर जय कृष्ण मूर्ति की या तो फिर है कांड ना कि ये हेजल ना कि ये फिर जितने भी बड़े-बड़े फिलोसोफर है वो फिलोसोफी हमेशा के लिए चलने वाली है ऐसा नहीं होता है यह फिलोसोफी जन्म लेती है यह जो सोशल चर्निंग होता है समाज में यह जो थिंकिंग होता है उसमें से यह फिलोसोफी जन्म लेती है अभी जैसे कि शोपन होवर का था कि कि उसने उस समय वॉर यूरोप में बहुत चल रहा था तो अी ये युद्ध जब चल रहा है तो लोगों को क्या है बड़ा ही स्ट्रांग मैन चाहिए जो कि उनको शत्रुओं का दमन करके उनका बचाव करें तो यह स्ट्रांग मैन की परिकल्पना यह सुपरमैन की परिकल्पना उसने ये ये जर्मन फिलोसोफर ने स्टार्ट कर दी अभी किंतु मान लीजिए कि एक ऐसी सोसाइटी कि जहां पे युद्ध का विनाश हो गया है वहां प यू डोंट नीड सुपरमैन क्योंकि ऑलरेडी आपकी गवर्नमेंट इतनी स्ट्रांग है कि आपको डिफेंड कर सकती है तो ये जितनी भी फिलोसोफी है दे आर इन द रियल लोकेटेड इन द प्लेस एंड टाइम एंड द इंटेलेक्चुअल एटमॉस्फेयर इन व्हिच दे आर बोर्न जिस तरह की मानसिक परिस्थिति में उनका जन्म हुआ है उसके साथ में वह कनेक्टेड है किंतु स्वामी जी का वेदांत है इट इज नॉट कनेक्टेड टू एनी टाइम प्लेस और सोशल सिचुएशन स्वामी जी का वेदांत आज के 18828 2 का 18828 2 के कॉलेज में पढ़ते हुए कलकाता में रहते हुए लड़के की की फिलोसोफी नहीं थी स्वामी जी की फिलोसोफी फॉर ऑल टाइम क्योंकि वेदांत इज फॉर ऑल टाइम तो इसीलिए जब स्वामी जी कुछ भी कहते हैं तो हमेशा एक तो उनका प्रयास रहता था कि 19th सेंचुरी के करंट थिंकिंग के साथ में मैच हो कॉस्मो लेक्चर ही इसका बड़ा उदाहरण है किंतु साथ में वह इसके ऊपर में जाकर के स्पेक्युलेटिव दृष्टि से बड़ा ही सुंदर है कि कितनी हद तक स्वामी जी टेस्ला के साथ में एग्री होते थे और कहां से स्वामी जी का टेस्ला के साथ में डायवर्जेंस शुरू हुआ और इसकी वजह से टेस्ला ने स्वामी जी के साथ में संपर्क तोड़ दिया था तो दिस इज वेरी गुड अभी ये जैसे स्पेस के बारे में स्वामी जी कहते हैं कि स्पेस इज नॉट विद इन द सोल रदर द सोल इज नॉट विद इन द स्पेस एंड टाइम बट स्पेस एंड टाइम आर विद इन द सोल यानी कि कि एक ऐसा आप सोच लीजिए कि एक समय यह सर्जन यह विनाश और यह पालन य सृष्टि स्थिति संहार यह साइकल चलती रहती है और इस साइकिल के परे एक आत्मन है या तो ब्रह्मण है ब्रह्मण का सृष्टि स्थिति विनाश की ये साइकल या तो स्पेस एंड टाइम का यह जन्म होना फिर ये स्पेस एंड टाइम का विनाश होना इससे परे है इसका आत्मन के ऊपर में कोई असर नहीं है यह जो कांसेप्ट है वो इतना रेडिकल है कि यह आज का जो साइंस है वह तो इसको एक्सेप्ट कर सकता है रिलेटिविटी किंतु उस समय का जो क्लॉकवर्क यूनिवर्स था उस समय का जो एब्सलूट स्पेस एंड एब्सलूट टाइम का कांसेप्ट था उसकी दृष्टि से यह पॉसिबल ही नहीं है कि देयर इज एनीथिंग दैट कैन सरवाइव अबाउ स्पेस एंड टाइम वे लोग कह सकते हैं कि आत्मन अमर है यह तो मान लिया यह तो थोड़ा स्वीकार करने योग्य है कि समय की शुरुआत में जिसका जन्म हुआ समय के अंत तक वो चलता रहेगा हो सकता है कि इस तरह की कोई पावर इस तरह की कोई अथॉरिटी हो किंतु ऐसी कोई अथॉरिटी व्हिच इज अबाउ स्पेस एंड टाइम स्पेस एंड टाइम आर जस्ट शैडोज प्लेइंग ऑन इट्स स्किन इसके ऊपर में जैसे कि आप मान लीजिए कि एक जैसे यहां पर बहुत सुंदर गार्डन है और सूरज उठता है मैं मैं अपनी छत प जाकर केयह पब्लिकेशन की छत प जाकर के कभी-कभी ये थोड़ा मैं वॉकिंग करता हूं और थोड़ा गार्डन देखता रहता हूं हमारे महाराज ने बहुत सुंदर गार्डन बनाया अभी क्या होता है जैसे जैसे सूरज चलता है तो परछाई जो होती है पेड़ों की पौधों की वो अपना स्थान चेंज करती है जमीन के ऊपर में सुबह होगा तो यहां पर इसका स्थान होगा जैसे-जैसे सूरज आगे बढ़ता जाएगा यह परछाई अपनी जगह चेंज करती रहेगी तो ये परछाई जब अपनी जगह चेंज करती है तो जिस ग्राउंड जिसके ऊपर में परछाई गिरती है इसका कोई फर्क पड़ता है उसको कोई फर्क नहीं पड़ता परछाई अपने से अपनी आती है जाती है ग्राउंड वैसे ही स्थिर स्थित अटल सुमेरु वत रहता है तो दिस इज एगजैक्टली व्हाट हैपेंस कि आत्मन है अचल अटल सुमेरु वत है और यह स्पेस एंड टाइम समय और अवकाश रूपी परछाइयां उसके ऊपर में खेलती जाती है तो यह कांसेप्ट आज के मॉडर्न फिजिक्स में यह पॉसिबल है क्योंकि टाइम इज रिलेटिव स्पेस इज रिलेटिव किंतु जब स्पेस एंड टाइम एब्सलूट होता था तब ये चीज उनकी समझ में किसी भी तरह से नहीं आती थी तो देखिए कि स्वामी जी ऑन वन हैंड प्रयास भी करते हैं कि लोकल उनके साइंस के साथ में मैच करवाने का साथ-साथ में ही कभी-कभी ही सोर्स इनटू सम सॉर्ट ऑफ सुपर नेचुरल स्पेक्युलेटिव प जाकर के एक उच्च स्पिरिचुअल लेवल प जाकर के इस तरह की बातें करना शुरू कर देते हैं कि वहां के लोगों को यदि वे लोग सही सही साइंस समझते उनके लिए बहुत बड़ी आश्चर्य की चीज होती कि या यह भी सही है क्या कि इस तरह से भी आप स्पेस और टाइम की कल्पना कर सकते हैं दिस वेरी स्ट्रेंज आज किसको पता हमको पता है कि निकोला टेस्ला अभी मैं एग्जैक्ट रिलेशन भूल गया कि निकोला टेस्ला की सिस्टर के साथ में आइंस्टाइन की शादी हुई थी ना कि क्या था किंतु इन दोनों के बीच में एक रिलेशन है मैं जब बेलूरमठ में था तो मैं हमारे जो महाराज थे सीनियर स्वामी जी जिनके साथ में मैं काम करता था तो उनके साथ में मेरा ये डिस्कशन बहुत सारा हुआ था अभी मैं भूल गया कि निकोला टेस्ला और आइंस्टाइन के बीच में क्या रिलेशन था किंतु रिलेशन है और रिलेशन पक्का है किसी की बहन के साथ में या किसी की कजिन के साथ में किसी की शादी हुई है तो ये इंटरलीव जी के आइडियाज निकोला टेस्ला हालाकि उसने रिजेक्ट किया हो उससे बैक ऑफ हिज माइंड उसके सबकॉन्शियस माइंड में वो रहे होंगे फिर वो डिस्कस करते करते आइंस्टाइन के पास में गए होंगे और आइंस्टाइन स्टार्ट थिंकिंग अबाउट हिज रिवोल्यूशन आइडियाज ऑफ स्पेस टाइम एंड मॉडर्न कॉस्मोलॉजी यह हमको आइंस्टाइन ने कभी ऐसा कोई साइन नहीं दिया हालांकि आइंस्टाइन वज इंडिया के प्रति भारत के प्रति आइंस्टाइन का बहुत बड़ा प्रेम था वो खास करके गांधी जी के बारे में उनका बड़ा रिस्पेक्ट था रवींद्रनाथ टैगोर उनको जाकर के मिले थे यानी इंडियन ट्रेडिशनल में आइंस्टाइन इज वेरी क्लोज फैमिलियर और उसका रिस्पेक्ट भी बहुत ज्यादा है किंतु स्वामी जी का नाम उसने आइंस्टाइन ने कहीं पर भी लिया हो ऐसा मुझे तो पता नहीं है एटलीस्ट मैंने उसके बारे में जितना भी पढ़ा है किंतु बीइंग अ स्टूडेंट ऑफ स्वामी विवेकानंद हमको यह स्पेक्युलेटिव आइंस्टाइन थ्रू स्वामी विवेकानंद ऐसा हम लोग मान लेते हैं और आज यहीं पर समाप्त करते हैं फिर से ओम शा शाति शांति हरि ओम श्री राम कृष्णा परम